Yajur Veda· Yajurveda Saṁhitā
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अध्याय 22 / 40

Adhyāya 22

अध्याय 22

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अध्याय २२

श्लोक 1

तेजो॑ऽसि शु॒क्रम॒मृत॑मायु॒ष्पा आयु॑र्मे पाहि ।दे॒वस्य॑ त्वा सवि॒तुः प्र॑स॒वेऽश्विनो॑र्बा॒हुभ्यां॑ पू॒ष्णो हस्ता॑भ्या॒मा द॑दे

tejo'si śukramamṛtamāyuṣpā āyurme pāhi | devasya tvā savituḥ prasave'śvinorbāhubhyāṃ pūṣṇo hastābhyāmā dade

हिन्दी अर्थ

हमें “ तेजस्वी, वीर्यवान् व दीर्घजीवी ' बनना है। आयु को प्रभु की धरोहर समञ्ना है। आयु के रक्षण के लिए (क) प्रभु के आदेश के अनुसार प्रत्येक वस्तु का माप-तोलकर प्रयोग करना है। (ख) प्रयत्न से अर्थो का उपार्जन करना है ओर (ग) प्रयोग में मापक 'पोषण' को रखना है न कि "स्वाद व सौन्दर्य" को।

English

com The Texts of the White Yajurveda, tr. Ralph T.H. Griffith, [1899], BOOK THE TWENTY-SECOND. SPLENDOUR art thou, bright, deathless, life-protector. Protector of my life be thou. By impulse of God Savitar I take thee with arms of Asvins, with the hands of Pûshan.

अध्याय २२

श्लोक 2

इ॒माम॑गृभ्णन् रश॒नामृ॒तस्य॒ पूर्व॒ आयु॑षि वि॒दथे॑षु क॒व्या ।सा नो॑ अ॒स्मिन्त्सु॒त आ ब॑भूव ऋ॒तस्य॒ साम॑न्त्स॒रमा॒रप॑न्ती

imāmagṛbhṇan raśanāmṛtasya pūrva āyuṣi vidatheṣu kavyā | sā no asmintsuta ā babhūva ṛtasya sāmantsaramārapantī

हिन्दी अर्थ

हम जीवन के प्रारम्भ मेही ऋत कौ रशना का धारण करें। इसे इस जीवनयन्न मे धारण किये रक्ें। यह मेखला हमें सदा कर््तव्यमार्ग का उपदेश देनेवाल हो। १. गतमन्त्र में कहा था कि यह ऋत कौ रशना हमे इस उत्पन्न जगत् मे सदा व्याप्त किये रक्खे, अर्थात् हम इस ऋत की रशना को कभी उतार न दे। यह ऋत की रशना को

English

This girdle, which in their religious meetings sages assumed in earlier time of worship, Is present with us here at this libation, in the Law's hymn, proclaiming rich abundance.

अध्याय २२

श्लोक 3

अ॒भि॒धा अ॑सि॒ भुव॑नमसि य॒न्ताऽसि॑ ध॒र्ता ।स त्वम॒ग्निं वै॑श्वान॒रᳪ सप्र॑थसं गच्छ॒ स्वाहा॑कृतः

abhidhā asi bhuvanamasi yantā'si dhartā | sa tvamagniṃ vaiśvānara saprathasaṃ gaccha svāhākṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

हम ऋत की रशना को बोँधकर अपने जीवन को नियन्त्रित करते हए सभी का धारण करनेवाले बनें ओर स्वार्थत्याग से जीवन को सुन्दर बनाते हए प्रातः-सायं उस सर्वव्यापक, सर्वहितकारी प्रभु का स्मरण करे। राध्यासम् । तं ब॑धान देवेभ्यं: प्रजापतये तेन॑ राध्नुहि॥। ४॥

English

Famous art thou, thou art the world, controller and upholder thou. Go, consecrate by Svâhâ to Agni Vaisvânara widely-famed.

अध्याय २२

श्लोक 4

स्व॒गा त्वा॑ दे॒वेभ्य॑: प्र॒जाप॑तये॒ ब्रह्म॒न्नश्वं॑ भ॒न्त्स्यामि॑ दे॒वेभ्य॑: प्र॒जाप॑तये॒ तेन॑ राध्यासम् ।तं ब॑धान दे॒वेभ्य॑: प्र॒जाप॑तये॒ तेन॑ राध्नुहि

svagā tvā devebhya: prajāpataye brahmannaśvaṃ bhantsyāmi devebhya: prajāpataye tena rādhyāsam | taṃ badhāna devebhya: prajāpataye tena rādhnuhi

हिन्दी अर्थ

प्रभु-स्मरण करनेवाला व्यक्ति दिव्य गुणों को प्राप्त करता है ओर प्रजा का प्रोक्षामि विश्वेभ्यस्त्वा देवेभ्यो जुष्टं प्रोक्षामि सर्वेभ्यस्त्वा देवेभ्यो जुष्टं प्रोक्षामि । १. प्रजापतये=प्रजा का पति (रक्षक) बनने के लिए जुष्टम्प्रीतिपूर्वक सेवन किये गये त्वाततुञ्े गतमन्त्र के अश्व, अर्थात् सर्वव्यापक परमात्मा को प्रोक्षामि अपने

English

For Gods and for Prajâpati I fit thee. For Gods and for Prajâpati, O Brahman, Will I tie up the horse. Thence may I prosper! Binding him for Prajâpati and Gods be thou successful.

अध्याय २२

श्लोक 5

प्र॒जाप॑तये त्वा॒ जुष्टं॒ प्रोक्षा॑मीन्द्रा॒ग्निभ्यां॑ त्वा॒ जुष्टं॒ प्रोक्षा॑मि वा॒यवे॑ त्वा॒ जुष्टं॒ प्रोक्षा॑मि॒विश्वे॑भ्यस्त्वा दे॒वेभ्यो॒ जुष्टं॒ प्रोक्षा॑मि॒ सर्वे॑भ्यस्त्वा दे॒वेभ्यो॒ जुष्टं॒ प्रोक्षा॑मि ।यो अर्व॑न्तं॒ जिघा॑ᳪसति॒ तम॒भ्य॒मीति॒ वरु॑णः। प॒रो मर्त॑: प॒रः श्वा

prajāpataye tvā juṣṭaṃ prokṣāmīndrāgnibhyāṃ tvā juṣṭaṃ prokṣāmi vāyave tvā juṣṭaṃ prokṣāmi viśvebhyastvā devebhyo juṣṭaṃ prokṣāmi sarvebhyastvā devebhyo juṣṭaṃ prokṣāmi | yo arvantaṃ jighāsati tamabhyamīti varuṇaḥ| paro marta: paraḥ śvā

हिन्दी अर्थ

हदयदेश में प्रभु के स्मरण से मनुष्य प्रजापति बनता हे, बल व प्रकाश को प्राप्त करता है, गतिशीलता से बुराइयों को दूर् करता हे, चक्षु आदि इन्द्रियों को स्वस्थ रख पाता है, सूर्यादि देव व विद्धान् इसके अनुकूल होते हे। प्रभु को भूलनेवाला पीडित होता है, अन्ततः निरादृत होता है ओर अधोगति को प्राप्त करता हे।

English

Thee welcome to Prajâpati I sprinkle. I sprinkle thee welcome to Indra-Agni. I sprinkle thee acceptable to Vâyu. Thee welcome to the All-Gods I besprinkle. Thee welcome to all Deities I sprinkle. With fury Varuna attacks the man who fain would slay the steed. Avaunt the man! Avaunt the dog!

अध्याय २२

श्लोक 6

अ॒ग्नये॒ स्वाहा॒ सोमा॑य॒ स्वाहा॒ ऽपां मोदा॑य॒ स्वाहा॑ सवि॒त्रे स्वाहा॑ वा॒यवे॒ स्वाहा॒ विष्ण॑वे॒ स्वाहेन्द्रा॑य॒ स्वाहा॒ बृह॒स्पत॑ये॒ स्वाहा॑ मि॒त्राय॒ स्वाहा॒ वरु॑णाय॒ स्वाहा॑

agnaye svāhā somāya svāhā 'pāṃ modāya svāhā savitre svāhā vāyave svāhā viṣṇave svāhendrāya svāhā bṛhaspataye svāhā mitrāya svāhā varuṇāya svāhā

हिन्दी अर्थ

जवब मनुष्य स्वार्थं से ऊपर उठता है ओर प्रभु के प्रति अर्पण कौ वृत्तिवाला बनता है तव वह अपने अन्दर “अग्नि, सोम, अपां मोद, सविता, वायु, विष्णु, इन्द्र, वृहस्पति, मित्र ओर वरुण" इन दस तत्त्वों को धारण करनेवाला बनता हे। यही दशक उसका धर्म हो जाता है। वह इस दशलक्षण धर्म को धारण करता हे।

English

To Agni Hail! To Soma Hail! Hail to the Waters’ Joy! Hail to Savitar! Hail to Vâyu! Hail to Vishnu! Hail to Indra! Hail to Brihaspati! Hail to Mitra! Hail to Varuna!

अध्याय २२

श्लोक 7

हि॒ङ्का॒राय॒ स्वाहा॒ हिङ्कृ॑ताय॒ स्वाहा॒ क्रन्द॑ते॒ स्वाहा॑ ऽवक्र॒न्दाय॒ स्वाहा॒ प्रोथ॑ते॒ स्वाहा॑ प्रप्रो॒थाय॒ स्वाहा॑ ग॒न्धाय॒ स्वाहा॑ घ्रा॒ताय॒ स्वाहा॒ निवि॑ष्टाय॒ स्वाहोप॑विष्टाय॒ स्वाहा॒ सन्दि॑ताय॒ स्वाहा॒ वल्ग॑ते॒ स्वाहा ऽऽसी॑नाय॒ स्वाहा॑ शया॑नाय॒ स्वाहा॒ स्वप॑ते॒ स्वाहा॒ जाग्र॑ते॒ स्वाहा॒ कूज॑ते॒ स्वाहा॒ प्रबु॑द्धाय॒ स्वाहा॑ वि॒जृम्भ॑माणाय॒ स्वाहा॒ विचृ॑ताय॒ स्वाहा॒ सᳪहा॑नाय॒ स्वाहोप॑स्थिताय॒ स्वाहाऽऽय॑नाय॒ स्वाहा॒ प्राय॑णाय॒ स्वाहा॑

hiṅkārāya svāhā hiṅkṛtāya svāhā krandate svāhā 'vakrandāya svāhā prothate svāhā praprothāya svāhā gandhāya svāhā ghrātāya svāhā niviṣṭāya svāhopaviṣṭāya svāhā sanditāya svāhā valgate svāhā ''sīnāya svāhā śayānāya svāhā svapate svāhā jāgrate svāhā kūjate svāhā prabuddhāya svāhā vijṛmbhamāṇāya svāhā vicṛtāya svāhā sahānāya svāhopasthitāya svāhā''yanāya svāhā prāyaṇāya svāhā

हिन्दी अर्थ

हमारे शरीरो में प्राण के ४९ भेद भिन्नभित्र कार्य करते है। उन्दी से अङ्क -प्रत्यद्ग के सब कार्य चलते है। प्राणों कौ क्रिया से हौ स्वास्थ्य व सुबुद्धि प्राप्त हती है, अतः विविध रूपों में उल्लिखित इन सब कार्यो को करते हए प्राणों के लिए हम तत्संवितुर्वरैण्यं भर्गो" देवस्य॑ धीमहि । धियो यो न॑ः प्रचोदयात् ॥९॥

English

Hail to the sound hiṅ! Hail to the uttered hiṅ! Hail to the neigh! Hail to the down-neigh! Hail to the snort! Hail to the roar! Hail to his smell! Hail to him smelt at! Hail to him seated! Hail to him seated down! Hail to him weary! Hail to him going! Hail to him sitting! Hail to him lying! Hail to him sleeping! Hail to him waking! Hail to him whinnying! Hail to him wakened! Hail to him yawning! Hail to him outstretched! Hail to him drawn together! Hail to him risen! Hail to his going! Hail to his good going! Hail!

अध्याय २२

श्लोक 8

य॒ते स्वाहा॒ धाव॑ते॒ स्वाहो॑द्द्रा॒वाय॒ स्वाहोद्द्रु॑ताय॒ स्वाहा॑ शूका॒राय॒ स्वाहा॒ शूकृ॑ताय॒ स्वाहा॒ निष॑ण्णाय॒ स्वाहोत्थि॑ताय॒ स्वाहा॑ ज॒वाय॒ स्वाहा॒ बला॑य॒ स्वाहा॑ वि॒वर्त॑मानाय॒ स्वाहा॒ विवृ॑त्ताय॒ स्वाहा॑ विधून्वा॒नाय॒ स्वाहा॒ विधू॑ताय॒ स्वाहा॒ शुश्रू॑षमाणाय॒ स्वाहा॑ शृण्व॒ते स्वाहेक्ष॑माणाय॒ स्वाहे॑क्षि॒ताय॒ स्वाहा॒ वी॒क्षिताय॒ स्वाहा॑ निमे॒षाय॒ स्वाहा॒ यदत्ति॒ तस्मै॒ स्वाहा॒ यत् पिब॑ति॒ तस्मै॒ स्वाहा॒ यन्मूत्रं॑ क॒रोति॒ तस्मै॒ स्वाहा॑ कुर्व॒ते स्वाहा॑ कृ॒ताय॒ स्वाहा॑

yate svāhā dhāvate svāhoddrāvāya svāhoddrutāya svāhā śūkārāya svāhā śūkṛtāya svāhā niṣaṇṇāya svāhotthitāya svāhā javāya svāhā balāya svāhā vivartamānāya svāhā vivṛttāya svāhā vidhūnvānāya svāhā vidhūtāya svāhā śuśrūṣamāṇāya svāhā śṛṇvate svāhekṣamāṇāya svāhekṣitāya svāhā vīkṣitāya svāhā nimeṣāya svāhā yadatti tasmai svāhā yat pibati tasmai svāhā yanmūtraṃ karoti tasmai svāhā kurvate svāhā kṛtāya svāhā

हिन्दी अर्थ

प्रभु 'हिरण्यपाणि, सविता- चेत्ता-देवता व पद' है। उस प्रभु को ही प्राप्त करने के लिए यत्नशील होना चाहिए। देवस्य चेत॑तो महीं प्र संवितुर्ह'वामहे । सु मतिःसत्यराधसम् ।।९९॥ १. देवस्य=सवब दिव्यगुणों के पुञ्ज, देनेवाले, चमकनेवाले व चमकानेवाले चेततः सर्वज्ञ

English

Hail to him as he goes! Hail to him running! Hail to him running away! Hail to him when he has run away! Hail to the cry Shoo! Hail to him scared with Shoo! Hail to him seated! Hail to him risen! Hail to his speed! Hail to his strength! Hail to him rolling! Hail to him when he has rolled! Hail to him tossing about! Hail to him when he has tossed about! Hail to him listening! Hail to him hearing. Hail to him looking! Hail to him looked at! Hail to him closely looked at! Hail to his closing his eye! Hail to his food! Hail to his drink! Hail to his stale! Hail to him in action! Hail to what he has done!

अध्याय २२

श्लोक 9

तत्स॑वि॒तुर्वरे॑ण्यं॒ भर्गो॑ दे॒वस्य॑ धीमहि ।धियो॒ यो न॑: प्रचो॒दया॑त्

tatsaviturvareṇyaṃ bhargo devasya dhīmahi | dhiyo yo na: pracodayāt

हिन्दी अर्थ

प्रभु देव हें, चेत्ता है। उनकी कल्याणी मति को प्राप्त करके हम महिमाशाली व सत्यरूप धन को प्राप्त करनेवाले बनते है। सुष्टुतिः्सुंमतीवृधो रातिःसं॑वितुरीमहे । प्र देवाय मती विदे ॥ १२॥ १. सुमतीवृधः =शोभन बुद्धि का वर्धन करनेवाले, सवितुः=सकल जगदुत्पादक,

English

May we attain that excellent glory of Savitar the God: So may he stimulate our prayers.

अध्याय २२

श्लोक 10

हिर॑ण्यपाणिमू॒तये॑ सवि॒तार॒मुप॑ ह्वये ।स चेत्ता॑ दे॒वता॑ प॒दम्

hiraṇyapāṇimūtaye savitāramupa hvaye | sa cettā devatā padam

हिन्दी अर्थ

उस सविता का स्तवन करते हुए हम उत्कृष्ट दिव्य गुणों को प्राप्त करे ओर बुद्धि का वर्धन करनेवाले हों। रातिः्सत्प॑तिं महे स॑वितारमुप॑ ह्ये । आसवं देववीतये।। ९३॥ १. रातिम्-सव आवश्यक पदार्थो को देनेवाले दाता को सत्पतिम् सज्जनो के रक्षक

English

For our protection I invoke the golden-handed Savitar: He knoweth, as a God, the place.

अध्याय २२

श्लोक 11

दे॒वस्य॒ चेत॑तो म॒हीं प्र स॑वि॒तुर्ह॑वामहे ।सु॒म॒तिᳪ स॒त्यरा॑धसम्

devasya cetato mahīṃ pra saviturhavāmahe | sumati satyarādhasam

हिन्दी अर्थ

प्रभु ' राति-सत्पति, सविता व आसव' है। हम इस प्रभु की ही पूजा करे, प्रार्थना करें, जिससे हममे दिव्य गुणों का प्रादुर्भाव हो। इन दिव्य गुणों से हम भी समन्तात् देवस्य॑ सवितुर्मतिमासवं विश्वदेव्यम् । धिया भगै मनामहे ॥९४॥ १. सवितुः=सकल जगदुत्पादक , सर्वेश्वर्ययुक्त देवस्यत=दिव्य गुणों के पुञ्ज प्रभु को

English

We specially invoke the grace of Savitar, observant God, The great good-will that gives true boons.

अध्याय २२

श्लोक 12

सु॒ष्टु॒तिᳪ सु॑मती॒वृधो॑ रा॒तिᳪ स॑वि॒तुरी॑महे ।प्र दे॒वाय॑ मती॒विदे॑

suṣṭuti sumatīvṛdho rāti saviturīmahe | pra devāya matīvide

हिन्दी अर्थ

मनुष्य स्तवन के द्वारा अपने हदय में प्रभु कौ भावना को जागारित करे। यह प्रभु-स्मरण विषयों के पीछे मरने से बचाता है ओर हदयों को प्रकाश से दीप्त करता है। प्रभु हव्य यक्िय पवित्र पदार्थो को प्राप्त कराके दिव्य गुणों से युक्तं करते हे। प्रज्ञापूर्वक कर्मो सरे प्रभु- प्राप्ति

English

We seek the eulogy and gift of Savitar who strengthens grace, Yea, of the God who knows our thoughts.

अध्याय २२

श्लोक 13

रा॒तिᳪ सत्प॑तिं म॒हे स॑वि॒तार॒मुप॑ ह्वये ।आ॒स॒वं दे॒ववी॑तये

rāti satpatiṃ mahe savitāramupa hvaye | āsavaṃ devavītaye

हिन्दी अर्थ

हम उस प्रभु को प्रज्ञापूर्वक कर्मो द्वारा प्राप्त करने का प्रयत्नत करे जो प्रभु हमें हव्य पदार्थ प्राप्त कराते हें, अमर्त्य बनाते है, हमारे भले की ही कामना करते हें, तप कौ अग्नि में हमें तपाते हैं तथा सात्विक अन्न के सेवन से हमारे हदयों मे निहित होते हेै। ऋषि :-विषूवरूपः। देवता-अग्निः। छन्दः-निचुद्गायत्री। स्वरः-षडजः॥।

English

I invocate the heroes’ Lord, free-giving Savitar, and call The Cheerer to the feast of Gods.

अध्याय २२

श्लोक 14

दे॒वस्य॑ सवि॒तुर्म॒तिमा॑स॒वं वि॒श्वदे॑व्यम् ।धि॒या भगं॑ मनामहे

devasya saviturmatimāsavaṃ viśvadevyam | dhiyā bhagaṃ manāmahe

हिन्दी अर्थ

हम कर्मो को करते हए प्रभु को न भूलें। प्रभु से हव्य (सात्विक) पदार्थो की याचना करे। प्रभु हमारे शुद्ध हदयं में दिव्य गुणों कौ स्थापना करें। इस प्रकार प्रभु का सदा स्मरण करने से हम प्रभु के ही छोटे रूप “विश्वरूप ' बनते है। १. है पवमान=मेरे हदय को पवित्र करनेवाले प्रभो! हि=निश्चय से आप सूर्य

English

The judgment of bright Savitar, that cheers the All-Gods’ company, With prayer we estimate as bliss.

अध्याय २२

श्लोक 15

अ॒ग्निᳪ स्तोमे॑न बोधय समिधा॒नो अम॑र्त्यम् ।ह॒व्या दे॒वेषु॑ नो दधत्

agni stomena bodhaya samidhāno amartyam | havyā deveṣu no dadhat

हिन्दी अर्थ

पवित्रता से ज्ञान दीप्त होता है। शक्ति के लिए हमें सात्विक दुग्ध आदि से तथा बहुत के धारण के उद्देश्य से क्रियाओं को करनेवाले बने। षिः प्रजापतिः। देवता-अग्निः। छन्द:ः-भूरिग्विकृतिः। स्वरः-मध्यमः॥ देवांऽआशापालाऽ एतं देवेभ्योऽश्वं मेधाय प्रोक्षिंतःरक्षतेह रन्तिरिह र्मतामिह धृतिरिह

English

Wake Agni with thy laud and set the Immortal One aflame, let him Bestow our offerings on the Gods.

अध्याय २२

श्लोक 16

स ह॑व्य॒वाडम॑र्त्य उ॒शिग्दू॒तश्चनो॑हितः ।अ॒ग्निर्धि॒या समृ॑ण्वति

sa havyavāḍamartya uśigdūtaścanohitaḥ | agnirdhiyā samṛṇvati

हिन्दी अर्थ

हम उदार हदय व शक्तिशाली बनकर सदा क्रियाशील वनें। अपने को पवित्र कर प्रभु से अपना सम्बन्ध स्थापित करें। इस सम्बन्ध से शक्तिशाली बनकर लोकसेवा क्ते कार्य मे लग जापैँ। सर्वत्र अच्छाई को ग्रहण करके आगे बढते चलें। इसी जीवन में आनन्द प्राप्ति, कष्ट-सहनशक्ति व आत्मधारण है।

English

Oblation-bearer, well-inclined, immortal, eager Messenger, Agni comes near us with the thought.

अध्याय २२

श्लोक 17

अ॒ग्निं दू॒तं पु॒रो द॑धे हव्य॒वाह॒मुप॑ ब्रुवे ।दे॒वाँ२ आ सा॑दयादि॒ह

agniṃ dūtaṃ puro dadhe havyavāhamupa bruve | devā~2 ā sādayādiha

हिन्दी अर्थ

हम उस प्रभु के लिए अपना अर्पण करें जो आनन्दस्वरूप है। स्वरूप के स्मरण के लिए हमारा चिन्तन हो, मन प्रजापति में लगा हो, ज्ञान की रुचि हो, अदीना देवमाता, सरस्वती, पूषा, त्वष्टा व विष्णु के हम आराधक बने। विश्वो देवस्य॑ नेतुर्मर्तो" वुरीत सख्यम् ।

English

Agni, Envoy, I place in front, the oblation-bearer I address: Here let him seat the Deities.

अध्याय २२

श्लोक 18

अजी॑जनो॒ हि प॑वमान॒ सूर्यं॑ वि॒धारे॒ शक्म॑ना॒ पय॑: ।गोजी॑रया॒ रᳪह॑माण॒: पुर॑न्ध्या

ajījano hi pavamāna sūryaṃ vidhāre śakmanā paya: | gojīrayā rahamāṇa: purandhyā

हिन्दी अर्थ

इस संसार में हमारी उत्तम स्थिति व कल्याण तभी होगा जब हम प्रभु कौ मित्रता का वरण करेगे ओर धन के दास न बन जार्ठैगे। धन को हम उतना ही चाहे जितना कि शरीर-पोषण के लिए आवश्यक हो। सभेयो युवास्य यज॑मानस्य वीरो जायतां निकामेनिकामे नः पर्जन्यो वर्षतु फल॑वत्यो

English

Yea, Pavamâna, thou didst generate the Sun and spread the moisture out with power, Basting to us with plenty vivified with milk.

अध्याय २२

श्लोक 19

वि॒भूर्मा॒त्रा प्र॒भूः पि॒त्राऽश्वो॑ऽसि॒ हयो॒ऽस्यत्यो॑ऽसि॒ मयो॒ऽस्यर्वा॑ऽसि॒ सप्ति॑रसि वा॒ज्य॒सि॒ वृषा॑ऽसि नृ॒मणा॑ असि ।ययु॒र्नामा॑ऽसि॒ शिशु॒र्नामा॑स्यादि॒त्यानां॒ पत्वाऽन्वि॑हि॒ देवा॑ आशापाला ए॒तं दे॒वेभ्योऽश्वं॒ मेधा॑य॒ प्रोक्षि॑तᳪ रक्षते॒ह रन्ति॑ रि॒ह र॑मतामि॒ह धृति॑रि॒ह स्वधृ॑ति॒: स्वाहा॑

vibhūrmātrā prabhūḥ pitrā'śvo'si hayo'syatyo'si mayo'syarvā'si saptirasi vājyasi vṛṣā'si nṛmaṇā asi | yayurnāmā'si śiśurnāmāsyādityānāṃ patvā'nvihi devā āśāpālā etaṃ devebhyo'śvaṃ medhāya prokṣita rakṣateha ranti riha ramatāmiha dhṛtiriha svadhṛti: svāhā

हिन्दी अर्थ

हमारे राष्ट में ' ब्राह्यण-क्षत्रिय-वैश्य' सब अपना कार्य ठीक से करें। श्रमिक लोग अपने कृषि आदि कार्यो को ठीक से करनेवाले हों। हमारे सन्तान उत्तम हो। राष्ट में सबका योगक्षेम ठीक से चले। स्वाहा मन॑से स्वाहा ।॥ २३॥

English

Mighty through thy dam, eminent through thy sire, thou art a horse, thou art a steed, thou art a courser, thou art a comfort, thou art a racer, thou art a yoke-horse, thou art a strong steed, thou art a stallion, thou art manly-minded. Thou art called Yayu, thou art called Sisu. Follow thou the flight of the Âdityas. Gods, Warders of the Regions, protect for the Gods this horse besprinkled for sacrifice. Here is delight. Here take thy pleasure. Here is content. Here is self-content.

अध्याय २२

श्लोक 20

काय॒ स्वाहा॒ कस्मै॒ स्वाहा॑ कत॒मस्मै॒ स्वाहा॒ स्वाहा॒ऽऽधिमाधी॑ताय॒ स्वाहा॒ मन॑: प्र॒जाप॑तये॒ स्वाहा॑ चि॒त्तं विज्ञा॑ता॒यादि॑त्यै॒ स्वाहा ऽदि॑त्यै मह्यै॒ स्वाहा ऽदि॑त्यै सुमृडी॒कायै॒ स्वाहा॒ सर॑स्वत्यै॒ स्वाहा॒ सर॑स्वत्यै पाव॒कायै॒ स्वाहा॒ सर॑स्वत्यै बृहत्यै॒ स्वाहा॑ पू॒ष्णे स्वाहा॑ पू॒ष्णे प्र॑प॒थ्या॒य॒ स्वाहा॑ पू॒ष्णे न॒रन्धि॑षाय॒ स्वाहा॒ त्वष्ट्रे॒ स्वाहा॒ त्वष्ट्रे॑ तु॒रीपा॑य॒ स्वाहा॒ त्वष्ट्रे॑ पुरु॒रूपा॑य॒ स्वाहा॒ विष्ण॑वे॒ स्वाहा॒ विष्ण॑वे निभूय॒पाय॒ स्वाहा॒ विष्ण॑वे शिपिवि॒ष्टाय॒ स्वाहा॑

kāya svāhā kasmai svāhā katamasmai svāhā svāhā''dhimādhītāya svāhā mana: prajāpataye svāhā cittaṃ vijñātāyādityai svāhā 'dityai mahyai svāhā 'dityai sumṛḍīkāyai svāhā sarasvatyai svāhā sarasvatyai pāvakāyai svāhā sarasvatyai bṛhatyai svāhā pūṣṇe svāhā pūṣṇe prapathyāya svāhā pūṣṇe narandhiṣāya svāhā tvaṣṭre svāhā tvaṣṭre turīpāya svāhā tvaṣṭre pururūpāya svāhā viṣṇave svāhā viṣṇave nibhūyapāya svāhā viṣṇave śipiviṣṭāya svāhā

हिन्दी अर्थ

हम स्वार्थं से ऊपर उठकर यज्लियवृत्तिवाले बनें. जिससे हमारे ' प्राणापानव्यान ' दिशे स्वहार्वच्यिं दिशे स्वाहावाच्यै दिशो स्वाहार्वच् दिशो स्वाहां ।।२४॥ १. पिछले मन्त्र की भावना को ही विस्तार से इस अध्याय की समाप्ति तक केंगे। जब मनुष्य की वृत्ति यज्ञिय व स्वार्थं से ऊपर उठी हुई होती है तब उसके लिए सारा संसार

English

Hail to Ka! Hail to Who?! Hail to Which?! Hail to him who has experienced pain! Hail to Prajâpati who knows the mind! Hail to him who discerns the thought! Hail to Aditi! Hail to good Aditi! Hail to gracious Aditi! Hail to Sarasvatî! Hail to purifying Sarasvatî! Hail to great Sarasvatî! Hail to Pûshan! Hail to Pûshan of the highways! Hail to Pûshan observer of men! Hail to Tvashtar! Hail to swift Tvashtar! Hail to Tvashtar of many forms! Hail to Vishnu! Hail to Vishnu Nibhûyapa! Hail to Vishnu Sipivishta!

अध्याय २२

श्लोक 21

विश्वो॑ दे॒वस्य॑ ने॒तुर्मर्तो॑ वुरीत स॒ख्यम् ।विश्वो॑ रा॒य इ॑षुध्यति द्यु॒म्नं वृ॑णीत पु॒ष्यसे॒ स्वाहा॑

viśvo devasya neturmarto vurīta sakhyam | viśvo rāya iṣudhyati dyumnaṃ vṛṇīta puṣyase svāhā

हिन्दी अर्थ

यत्तिय व निःस्वार्थ वृत्ति के द्वारा हमारा यह संसार आगे-पीक, दायें -बायें व ऊपर-नीचे सब ओर से सुन्दर-ही- सुन्दर हो जाता है। आसुरवृत्ति ने ही संसार को मलिन अद्रयः स्वाहा वार्भ्यः स्वाहोदकाय स्वाहा तिष्ठन्तीभ्यः स्वाहा स्त्रव॑न्तीभ्यः स्वाहा १. अद्यः स्वाहा सर्वत्र व्याप्त जलो के लिए हम स्वार्थं की वृत्ति से ऊपर उठकर

English

Let every mortal man elect, etc., repeated from IV. 8.

अध्याय २२

श्लोक 22

आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शूर॑ इष॒व्योऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्री॑ धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्ति॒: पुर॑न्धि॒र्योषा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॑यतां॒ निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यो॑ वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ ओष॑धयः पच्यन्तां योगक्षे॒मो न॑: कल्पताम्

ā brahman brāhmaṇo brahmavarcasī jāyatāmā rāṣṭre rājanyaḥ śūra iṣavyo'tivyādhī mahāratho jāyatāṃ dogdhrī dhenurvoḍhānaḍvānāśuḥ sapti: purandhiryoṣā jiṣṇū ratheṣṭhāḥ sabheyo yuvāsya yajamānasya vīro jāyatāṃ nikāme-nikāme naḥ parjanyo varṣatu phalavatyo na oṣadhayaḥ pacyantāṃ yogakṣemo na: kalpatām

हिन्दी अर्थ

मनुष्य कौ वृत्ति जब निःस्वार्थं व यज्ञशील होती है तब उसके लिए सब जल सुमित्रिय=कल्याणकर होते है। वर्षते स्वाहोदगृहणते स्वाहोदगुंहीताय स्वाहा प्ुष्णाते स्वाहां शीकायते स्वाहा प्ुष्वा॑भ्यः ९. वाताय स्वाहा-सदा बहनेवाली वायु के लिए यज्ञ हो, अर्थात् यज्ञं से शुद्ध हरई-हुरई

English

O Brahman, let there be born in the kingdom the Brahman illustrious for religious knowledge; let there be born the Râjanya, heroic, skilled archer, piercing with shafts, mighty warrior; the cow giving abundant milk; the ox good at carrying; the swift courser; the industrious woman. May Parjanya send rain according to our desire; may our fruit-bearing plants ripen; may acquisition and preservation of property be secured to us.

अध्याय २२

श्लोक 23

प्रा॒णाय॒ स्वाहा॑ ऽपा॒नाय॒ स्वाहा॑ व्या॒नाय॒ स्वाहा॒ चक्षु॑षे॒ स्वाहा॒ श्रोत्रा॑य॒ स्वाहा॑ वा॒चे स्वाहा॒ मन॑से॒ स्वाहा॑

prāṇāya svāhā 'pānāya svāhā vyānāya svāhā cakṣuṣe svāhā śrotrāya svāhā vāce svāhā manase svāhā

हिन्दी अर्थ

हम यज्ञादि उत्तम क्रियाओं को करनेवाले बनें, जिससे वायुमण्डल कौ शुद्धि हो, वृष्टि आदि यथासम्भव ठीक प्रकार से हो। अग्नीषोमात्मक जगत् का माधुर्य १. अग्निततत्व को ठीक रखने के लिए हम यज्लशील बनें। स्वार्थ से ऊपर उठकर

English

Hail to the lunar asterisms! Hail to those connected with the lunar asterisms! Hail to Day and Night! Hail to the half-months! Hail to the mouths! Hail to the Seasons! Hail to the Season-groups! Hail to the Year! Hail to Heaven and Earth! Hail to the Moon! Hail to the Sun! Hail to his rays! Hail to the Vasus! Hail to the Rudras! Hail to the Âdityas! Hail to the Maruts! Earl to the All-Gods! Hail to roots! Hail to branches! Hail to forest trees! Hail to flowers! Hail to fruits! Hail to herbs!

अध्याय २२

श्लोक 24

प्राच्यै॑ दि॒शे स्वाहा॒ ऽर्वाच्यै॑ दि॒शे स्वाहा॒ दक्षि॑णायै दि॒शे स्वाहा॒ ऽर्वाच्यै॑ दि॒शे स्वाहा॑ प्र॒तीच्यै॑ दि॒शे स्वाहा॒ ऽर्वाच्यै॑ दि॒शे स्वाहोदी॑च्यै दि॒शे स्वाहा॒ ऽर्वाच्यै॑ दि॒शे स्वाहो॒र्ध्वायै॑ दि॒शे स्वाहा॒ ऽर्वाच्यै॑ दि॒शे स्वाहा ऽवा॑च्यै दि॒शे स्वाहा॒ ऽर्वाच्यै॑ दि॒शे स्वाहा॑

prācyai diśe svāhā 'rvācyai diśe svāhā dakṣiṇāyai diśe svāhā 'rvācyai diśe svāhā pratīcyai diśe svāhā 'rvācyai diśe svāhodīcyai diśe svāhā 'rvācyai diśe svāhordhvāyai diśe svāhā 'rvācyai diśe svāhā 'vācyai diśe svāhā 'rvācyai diśe svāhā

हिन्दी अर्थ

हममे यज्लिय वृत्ति होने पर जहो हमारा जीवन अग्नि व सोम दोनों तत्त्वौ के ठीक मेल से बड़ा मधुर बनेगा वहाँ दूर से-दूर व समीप-से-समीप वर्त्तमान सव दिशां ऋषि :- प्रजापतिः देवता-नक्षत्रादयः। छन्दः- भुरिगष्टिः। स्वरः-मध्यमः। यज्ञ से ईति निवारण व सुकाल्

English

Hail to the Eastern Region! Hail to the hitherward Region! Hail to the Southern Region! Hail to the hitherward Region! Hail to the Western Region! Hail to the hitherward Region! Hail to the Northern Region! Hail to the hitherward Region! Hail to the Upward Region! Hail to the hitherward Region! Hail to the Downward Region! Hail to the hitherward Region!

अध्याय २२

श्लोक 25

अ॒द्भ्यः स्वाहा॑ वा॒र्भ्यः स्वाहो॑द॒काय॒ स्वाहा॒ तिष्ठ॑न्तीभ्य॒: स्वाहा॒ स्रव॑न्तीभ्य॒: स्वाहा॒ स्यन्द॑मानाभ्य॒: स्वाहा॒ कूप्या॑भ्य॒: स्वाहा॒ सूद्या॑भ्य॒: स्वाहा॒ धार्या॑भ्य॒: स्वाहा॑ ऽर्ण॒वाय॒ स्वाहा॑ समु॒द्राय॒ स्वाहा॑ सरि॒राय॒ स्वाहा॑

adbhyaḥ svāhā vārbhyaḥ svāhodakāya svāhā tiṣṭhantībhya: svāhā sravantībhya: svāhā syandamānābhya: svāhā kūpyābhya: svāhā sūdyābhya: svāhā dhāryābhya: svāhā 'rṇavāya svāhā samudrāya svāhā sarirāya svāhā

हिन्दी अर्थ

यज्ञो के द्वारा सब लोकों कौ हमारे साथ अनुकूलता होकर हमें सब ऋतुओं का सौन्दर्य प्राप्त होता हे। सूर्य - चन्द्रादि देव तथा वसु, रुद्र, आदित्य व मरुत् आदि देवगण हमारे अनुकूल होते हैँ। सब देवताओं कौ अनुकूलता के साथ सब ओषधि-वनस्पतिर्योँ हमारे लिए हितकर होती है ओर हम कभी आधिहैविक आपत्तियों के शिकार नहीं होते।

English

Hail to waters! Hail to floods! Hail to water! Hail to standing waters! flail to flowing waters! Hail to trickling waters! Hail to well waters! Hail to spring waters! Hail to the foaming sea! Hail to the ocean! Hail to the deep!

अध्याय २२

श्लोक 26

वाता॑य॒ स्वाहा॑ धू॒माय॒ स्वाहा॒ ऽभ्राय॒ स्वाहा॑ मे॒घाय॒ स्वाहा॑ वि॒द्योत॑मानाय॒ स्वाहा॑ स्त॒नय॑ते॒ स्वाहा॑ ऽव॒स्फूर्ज॑ते॒ स्वाहा॒ वर्ष॑ते॒ स्वाहा॑ ऽव॒वर्ष॑ते॒ स्वाहो॒ग्रं वर्ष॑ते॒ स्वाहा॑ शी॒घ्रं वर्ष॑ते॒ स्वाहो॑द्गृह्ण॒ते स्वाहोद्गृ॑हीताय॒ स्वाहा॑ प्रुष्ण॒ते स्वाहा॑ शीकाय॒ते स्वाहा॒ प्रुष्वा॑भ्य॒: स्वाहा॑ ह्रा॒दुनी॑भ्य॒: स्वाहा॑ नीहा॒राय॒ स्वाहा॑

vātāya svāhā dhūmāya svāhā 'bhrāya svāhā meghāya svāhā vidyotamānāya svāhā stanayate svāhā 'vasphūrjate svāhā varṣate svāhā 'vavarṣate svāhograṃ varṣate svāhā śīghraṃ varṣate svāhodgṛhṇate svāhodgṛhītāya svāhā pruṣṇate svāhā śīkāyate svāhā pruṣvābhya: svāhā hrādunībhya: svāhā nīhārāya svāhā

हिन्दी अर्थ

यज्लो से सब लोक, सब देव, सब वनस्पति, ओषधि व सब प्राणी हमारे नोट - प्रस्तुत मन्त्र मेये त्रिक द्रष्टव्य है १. असवे स्वाहाप्राणों के लिए यज्ञक्रिया हो। २, वसवे स्वाहा-शरीर मेँ वास करनेवाले वासकतत््वों के लिए यज्ञ हो। ३. विभुवे स्वाहा=व्यापक वायुतत्त्व करे लिए यज्ञ

English

Hail to wind! Hail to mist! Hail to vapour! Hail to cloud! Hail to cloud lightening! Hail to cloud thundering! Hail to it bursting! Hail to it raining! Hail to it pouring! Hail to it violently raining! Hail to it swiftly raining! Hail to it holding up! Hail to it when it has held up! Hail to it sprinkling! Hail to it drizzling! Hail to its drops! Hail to thunderbolts! Hail to hoar frosts!

अध्याय २२

श्लोक 27

अ॒ग्नये॒ स्वाहा॒ सोमा॑य॒ स्वाहेन्द्रा॑य॒ स्वाहा॑ पृथिव्यै॒ स्वाहा॒ ऽन्तरि॑क्षाय॒ स्वाहा॑ दि॒वे स्वाहा॑ दि॒ग्भ्यः स्वाहा ऽऽशा॑भ्य॒: स्वाहो॒र्व्यै॒ दि॒शे स्वाहा॒ ऽर्वाच्यै॑ दि॒शे स्वाहा॑

agnaye svāhā somāya svāhendrāya svāhā pṛthivyai svāhā 'ntarikṣāya svāhā dive svāhā digbhyaḥ svāhā ''śābhya: svāhorvyai diśe svāhā 'rvācyai diśe svāhā

हिन्दी अर्थ

यज्ञो से हम अपने जीवन को अत्युत्तम बना पा। मध॑वे स्वाहा माध॑वाय स्वाहां शुक्राय स्वाहा शुच॑ये स्वाहा नभसे स्वाहां नभस्याय स्वाहेषाय स्वादोर्जाय स्वाहा सर्॑से स्वाहां सहस्याय स्वाहा तप॑से स्वाहा तपस्याय १. मधवे=पुष्परसों के कारण अत्यन्त मधुर चैत्रमास के लिए, इस मास मे वायुमण्डल

English

Hail to Agni! Hail to Soma! Hail to Indra! Hail to Earth! Hail to Firmament! Hail to Sky! Hail to Regions? Hail to Quarters! Hail to the Upward Region! Hail to the Downward Region!

अध्याय २२

श्लोक 28

नक्ष॑त्रेभ्य॒: स्वाहा॑ नक्ष॒त्रिये॑भ्य॒: स्वाहा॑ ऽहोरा॒त्रेभ्य॒: स्वाहा॑ ऽर्धमा॒सेभ्य॒: स्वाहा॒ मासे॑भ्य॒: स्वाहा॑ ऋ॒तुभ्य॒: स्वाहा॑ ऽऽर्त॒वेभ्य॒: स्वाहा॑ संवत्स॒राय॒ स्वाहा॒ द्यावा॑पृथि॒वीभ्या॒ᳪ स्वाहा॑ च॒न्द्राय॒ स्वाहा॒ सूर्या॑य॒ स्वाहा॑ र॒श्मिभ्य॒: स्वाहा॒ वसु॑भ्य॒: स्वाहा॑ रु॒द्रेभ्य॒: स्वाहा॑ ऽऽदि॒त्येभ्य॒: स्वाहा॑ म॒रुद्भ्य॒: स्वाहा॒ विश्वे॑भ्यो दे॒वेभ्य॒: स्वाहा॒ मूले॑भ्य॒: स्वाहा॒ शाखा॑भ्य॒: स्वाहा॒ वन॒स्पति॑भ्य॒: स्वाहा॒ पुष्पे॑भ्य॒: स्वाहा॒ फले॑भ्य॒: स्वाहौष॑धीभ्य॒: स्वाहा॑

nakṣatrebhya: svāhā nakṣatriyebhya: svāhā 'horātrebhya: svāhā 'rdhamāsebhya: svāhā māsebhya: svāhā ṛtubhya: svāhā ''rtavebhya: svāhā saṃvatsarāya svāhā dyāvāpṛthivībhyā svāhā candrāya svāhā sūryāya svāhā raśmibhya: svāhā vasubhya: svāhā rudrebhya: svāhā ''dityebhya: svāhā marudbhya: svāhā viśvebhyo devebhya: svāhā mūlebhya: svāhā śākhābhya: svāhā vanaspatibhya: svāhā puṣpebhya: svāhā phalebhya: svāhauṣadhībhya: svāhā

हिन्दी अर्थ

यज्ञ से ही हमें वह सात्विक अन्न प्राप्त होता है जो हमारी शक्ति के वर्धन करे साथ हमारी बुद्धि का भी वर्धक होता है। यह अन्न हमें सौम्य वीर्य को प्राप्त कराकर जितेन्द्रिय व लोकदित के कर्मो मै लगनेवाला बनाता है। क आयुं्यज्ञन॑ कल्पताश्श्स्वाहां प्राणो य॒ज्ञेन॑ कल्पताश्शस्वाहांपानो यज्ञेन॑ कल्पताश्स्वाहा

English

Hail to Earth!

अध्याय २२

श्लोक 29

पृ॒थि॒व्यै स्वाहा॒ ऽन्तरि॑क्षाय॒ स्वाहा॑ दि॒वे स्वाहा॒ सूर्या॑य॒ स्वाहा॑ च॒न्द्राय॒ स्वाहा॒ नक्ष॑त्रेभ्य॒: स्वाहा॒ ऽद्भ्यः स्वाहौ॑षधीभ्य॒: स्वाहा॒ वन॒स्पति॑भ्य॒: स्वाहा॑ परिप्ल॒वेभ्य॒: स्वाहा॑ चराच॒रेभ्य॒: स्वाहा॑ सरीसृ॒पेभ्य॒: स्वाहा॑

pṛthivyai svāhā 'ntarikṣāya svāhā dive svāhā sūryāya svāhā candrāya svāhā nakṣatrebhya: svāhā 'dbhyaḥ svāhauṣadhībhya: svāhā vanaspatibhya: svāhā pariplavebhya: svāhā carācarebhya: svāhā sarīsṛpebhya: svāhā

हिन्दी अर्थ

हम प्रभु के तेज का वरण करें। यह लक्ष्य हमारी बुद्धियों को शुद्ध बनाए हिरण्यपाणिमूतये सवितारमुप हये । स चेत्ता देवतां पदम् ॥९०॥ १. गतमन्त्र का “ विश्वामित्र" बडी समञ्लदारी से ठीक मार्गं पर चलने के कारण प्रस्तुत कहता है कि मै ऊतये-अपनी रक्षा के लिए उस प्रभु को उपदह्वये=पुकारता ह जो

English

Hail to Firmament t Hail to Sky! Hail to Sun! Hail to Moon! Hail to lunar asterisms! Hail to waters! Hail to herbs! Hail to forest trees! Hail to creatures that swim! Hail to things moving and stationary! Hail to things that creep and crawl!

अध्याय २२

श्लोक 30

अस॑वे॒ स्वाहा॒ वस॑वे॒ स्वाहा॑ वि॒भुवे॒ स्वाहा॒ विव॑स्वते॒ स्वाहा॑ गण॒श्रिये॒ स्वाहा॑ ग॒णप॑तये॒ स्वाहा॑ ऽभि॒भुवे॒ स्वाहा ऽधि॑पतये॒ स्वाहा॑ शू॒षाय॒ स्वाहा॑ सᳪस॒र्पाय॒ स्वाहा॑ च॒न्द्राय॒ स्वाहा॒ ज्योति॑षे॒ स्वाहा॑ मलिम्लु॒चाय॒ स्वाहा॒ दिवा॑ प॒तय॑ते॒ स्वाहा॑

asave svāhā vasave svāhā vibhuve svāhā vivasvate svāhā gaṇaśriye svāhā gaṇapataye svāhā 'bhibhuve svāhā 'dhipataye svāhā śūṣāya svāhā sasarpāya svāhā candrāya svāhā jyotiṣe svāhā malimlucāya svāhā divā patayate svāhā

हिन्दी अर्थ

हम सवितादेव की ‹ सुमति-प्रेरणा व एेश्वर्य' को प्राप्त करनेवाले हो। अग्निश्स्तोमेन बोधय समिधानोऽअमंर्त्यम् । हव्या देवेषु नो दधत् ॥ १५॥ १. अग्निम्-उस अग्रेणी परमात्मा कौ स्तोमेन-स्तुतिसमूह से बोधय जागरित कर। जब हम स्तवन के द्वारा उस प्रभु की भावना को हदय में उद्बुद्ध करते है तव वह प्रभु

English

Hail to breath! Hail to the Vasu! Hail to the Mighty! Hail to Vivasvân! Hail to the trooping one! Hail to the Troop's Lord! Hail to the Superior! Hail to the Overlord! Hail to Strength! Hail to Samsarpa! Hail to the Moon! Hail to light! Hail to Malimlucha! Hail to him who flies by day!

अध्याय २२

श्लोक 31

मध॑वे॒ स्वाहा॒ माध॑वाय॒ स्वाहा॑ शु॒क्राय॒ स्वाहा॒ शुच॑ये॒ स्वाहा॒ नभ॑से॒ स्वाहा॑ नभ॒स्या॒य॒ स्वाहे॒षाय॒ स्वाहो॒र्जाय॒ स्वाहा॒ सह॑से॒ स्वाहा॑ सह॒स्या॒य॒ स्वाहा॒ तप॑से॒ स्वाहा॑ तप॒स्या॒य॒ स्वाहा॑ ऽᳪहसस्प॒तये॒ स्वाहा॑

madhave svāhā mādhavāya svāhā śukrāya svāhā śucaye svāhā nabhase svāhā nabhasyāya svāheṣāya svāhorjāya svāhā sahase svāhā sahasyāya svāhā tapase svāhā tapasyāya svāhā 'hasaspataye svāhā

हिन्दी अर्थ

- यज्ञो के द्वारा सब लोकों कौ हमारे साथ अनुकूलता होकर हमें सब ऋतुओं का सौन्दर्य प्राप्त होता हे। सूर्य - चन्द्रादि देव तथा वसु, रुद्र, आदित्य व मरुत् आदि देवगण हमारे अनुकूल होते हैँ। सब देवताओं कौ अनुकूलता के साथ सब ओषधि-वनस्पतिर्योँ हमारे लिए हितकर होती है ओर हम कभी आधिहैविक आपत्तियों के शिकार नहीं होते।

English

Hail to Madhu! Hail to Mâdhava! Hail to Sukra! Hail to Suchi! Hail to Nabhas! Hail to Nabhasya! Hail to Isha! Hail to ûrja! Hail to Sahas! Hail to Sahasya! Hail to Tapas! Hail to Tapasya! Hail to Amhasaspati!

अध्याय २२

श्लोक 32

वाजा॑य॒ स्वाहा॑ प्रस॒वाय॒ स्वाहा॑ ऽपि॒जाय॒ स्वाहा॒ क्रत॑वे॒ स्वाहा॒ स्व: स्वाहा॑ मू॒र्ध्ने स्वाहा॑ व्यश्नु॒विने॒ स्वाहा ऽन्त्या॑य॒ स्वाहा ऽन्त्या॑य भौव॒नाय॒ स्वाहा॒ भुव॑नस्य॒ पत॑ये॒ स्वाहा ऽधि॑पतये॒ स्वाहा॑ प्र॒जाप॑तये॒ स्वाहा॑

vājāya svāhā prasavāya svāhā 'pijāya svāhā kratave svāhā sva: svāhā mūrdhne svāhā vyaśnuvine svāhā 'ntyāya svāhā 'ntyāya bhauvanāya svāhā bhuvanasya pataye svāhā 'dhipataye svāhā prajāpataye svāhā

हिन्दी अर्थ

या्िक वृत्ति करे द्वारा हमारे वर्ष के सारे ही मास बडे सुन्दर वबीते। हमारा ९. वाजाय स्वाहा=( अन्न=वाजः-श० ५।१।१।१६) अन्न करे लिए यज्ञक्रिया हो। (यज्ञाद् भवति पर्जन्यः, पर्जन्यादन्नसम्भवः' गीता) यज्ञ से बादल होकर अन्न होता है, अतः इस अन्न कौ प्राप्ति के लिए हमारी यज्ञक्रिया ठीक से होती रहे। २. प्रसवाय

English

Hail to Strength! Hail to impulse! Hail to After-born! Hail to will! Heaven, Hail? Hail to the head! Hail to Vyasnuvin! To the final, Hail! Hail to the mundane final! Hail to the Lord of the world! Hail to the Overlord! Hail to the Lord of Creatures!

अध्याय २२

श्लोक 33

आयु॑र्य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॑ प्रा॒णो य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॑ ऽपा॒नो य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॑ व्या॒नो य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहो॑दा॒नो य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॑ समा॒नो य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॒ चक्षु॑र्य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॒ श्रोत्रं॑ य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॒ वाग्य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॒ मनो॑ य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॒ ऽऽत्मा य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॑ ब्र॒ह्मा य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॒ ज्योति॑र्य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॒ स्व॒र्य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॑ पृ॒ष्ठं य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॑ य॒ज्ञो य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॑

āyuryajñena kalpatā svāhā prāṇo yajñena kalpatā svāhā 'pāno yajñena kalpatā svāhā vyāno yajñena kalpatā svāhodāno yajñena kalpatā svāhā samāno yajñena kalpatā svāhā cakṣuryajñena kalpatā svāhā śrotraṃ yajñena kalpatā svāhā vāgyajñena kalpatā svāhā mano yajñena kalpatā svāhā ''tmā yajñena kalpatā svāhā brahmā yajñena kalpatā svāhā jyotiryajñena kalpatā svāhā svaryajñena kalpatā svāhā pṛṣṭhaṃ yajñena kalpatā svāhā yajño yajñena kalpatā svāhā

हिन्दी अर्थ

यन्न के द्वारा हमारा सारा जीवन, सब इन्द्रियशक्तियाँ , मन व बुद्धि सशक्त होते है। इसी से हम प्रभु की पूजा भी कर पाते हे। एकस्यै स्वाहा द्वाभ्याश्छस्वाहां शताय॒ स्वाहैकंशताय स्वाहा व्युष्ट्यै स्वाहां १. एकस्मै स्वाहा=जीवन के प्रथम वर्ष कौ उत्तमता करे लिए हम स्वार्थत्याग करते

English

May life succeed by sacrifice, Hail! May breath succeed by sacrifice, Hail! May downward breath, diffusive. breath, upward breath, digestive breath, vision, hearing, speech, mind, self, devotion, light, heaven, hymn-arrangement, sacrifice succeed by sacrifice. All-hail!

अध्याय २२

श्लोक 34

एक॑स्मै॒ स्वाहा॒ द्वाभ्या॒ᳪ स्वाहा॑ श॒ताय॒ स्वाहैक॑शताय॒ स्वाहा॒ व्यु॒ष्ट्यै॒ स्वाहा॑ स्व॒र्गाय॒ स्वाहा॑

ekasmai svāhā dvābhyā svāhā śatāya svāhaikaśatāya svāhā vyuṣṭyai svāhā svargāya svāhā

हिन्दी अर्थ

हम यक्ञियवृत्तिवाले बने, जिससे हमारा एक-एक वर्षं उत्तम बीते। हमारा सूचना- १. इस अन्तिम मन्त्र में 'एकशताय ' शब्द स्पष्ट संकेत कर रहा है कि जीवन सो वर्ष से ऊपर भी चलना ही चाहिए। ' भूयश्च शरदः शतात्" की भी यही भावना है। २. यर्होँ २३ से ३४ तक सब मन्त्रो की मूल भावना इतनी ही है कि यज्ञमय जीवन

English

Hail to One! Hail to Two! Hail to Hundred! Hail to Hundred-and-One! Hail to Daybreak! Hail to Heaven!

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Yajur Veda — Chapter 22
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.