अध्याय २३
श्लोक 1
हि॒र॒ण्य॒ग॒र्भः सम॑वर्त॒ताग्रे॑ भू॒तस्य॑ जा॒तः पति॒रेक॑ आसीत् ।स दा॑धार पृथि॒वीं द्यामु॒तेमां कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम
hiraṇyagarbhaḥ samavartatāgre bhūtasya jātaḥ patireka āsīt | sa dādhāra pṛthivīṃ dyāmutemāṃ kasmai devāya haviṣā vidhema
हिन्दी अर्थ
प्रभु सदा से है, वे सवके रक्षक है। त्रिलोकी का धारणा कर रहे है। उनको उपासना त्यागपूर्वक उपभोग से, हवि के द्वारा हौ होती हे। सूर्यः महिमा संम्बभूव तस्यै ते महिम्ने प्रजाप॑तये स्वाहां देवेभ्य॑ः।।२॥ १. है प्रभो! आप उपयामगृहीतः असि=विवाह के हारा गृहीत होते ै। जैसे उत्तम
English
com The Texts of the White Yajurveda, tr. Ralph T.H. Griffith, [1899], BOOK THE TWENTY-THIRD. IN the beginning rose Hiranyagarbha, etc: