Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
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अध्याय 10 / 20

Kanda 10

काण्ड 10

350 श्लोकभाग 2/3 · श्लोक 5.1–7.44WhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ129 श्लोक

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अध्याय १०

श्लोक 5.1

विजयप्राप्तिः।१-२४ सिन्धुद्वीपः।आपः, चन्द्रमाः।अनुष्टुप्, १-५ त्रिपदा पुरोऽभिकृतिककुम्मतीगर्भा पङ्क्तिः, ६ चतुष्पदा जगतीगर्भा जगती, ७-१४ त्र्यवसाना पञ्चपदा विपरीतपादलक्ष्मा बृहती (११,१४ पथ्यापङ्क्तिः), १५-२१ चतुरवसाना दशपदा त्रैष्टुब्गर्भातिधृतिः, (१९-२० कृतिः, २४ त्रिपदा विराड् गायत्री) (१) इन्द्र॒स्यौज॒ स्थेन्द्र॑स्य॒ सह॒ स्थेन्द्र॑स्य॒ बलं॒ स्थेन्द्र॑स्य वी॒र्यं॑१ स्थेन्द्र॑स्य नृ॒म्णं स्थ॑ ।जि॒ष्णवे॒ योगा॑य ब्रह्मयो॒गैर्वो॑ युनज्मि

vijayaprāptiḥ| 1-24 sindhudvīpaḥ| āpaḥ, candramāḥ| anuṣṭup, 1-5 tripadā puro'bhikṛtikakummatīgarbhā paṅktiḥ, 6 catuṣpadā jagatīgarbhā jagatī, 7-14 tryavasānā pañcapadā viparītapādalakṣmā bṛhatī (11,14 pathyāpaṅktiḥ), 15-21 caturavasānā daśapadā traiṣṭubgarbhātidhṛtiḥ, (19-20 kṛtiḥ, 24 tripadā virāḍ gāyatrī) (1) indrasyauja sthendrasya saha sthendrasya balaṃ sthendrasya vīryaṃ1 sthendrasya nṛmṇaṃ stha | jiṣṇave yogāya brahmayogairvo yunajmi

हिन्दी अर्थ

दूर करना चाये .प्वाह मेँ इसलिए कि जल में. जो विष मिल गया है वह् नदी के प्रवाह मे बह. जाय. ताकि; उसका शरोर्.के साथ पूनः सम्पकं न दौ, कर्मनाम" (निष २।१).। “कवंसणि यज्ञादिकर्माणि” (सायण, भ्रथवं० पुञ्ज मेःरहने वाला । . ्रा्रमवारसियो , के समूह भें रटने वाला वानप्रस्थी । वह जैसे धेष्ठकरमो यज्ञादि का दढृतापूवैक रहण करता है, वैसे वुढतापूवंकं सपंके सिर को पकड़े रहना. चाहम 4 -व्यनिजम् = वि +-भट् -णिंजिर् . (तिरदिचराजयः) टेढ़ी धारिय वलि सपं (हताः) मार दिये है, (पृगकवः)

English

Strike out, white courser! with thy foot, strike both with fore and hinder foot, Stay the dire poison of the Snakes, and make it weak as soaking wood.

अध्याय १०

श्लोक 5.2

इन्द्र॒स्यौज॒ स्थेन्द्र॑स्य॒ सह॒ स्थेन्द्र॑स्य॒ बलं॒ स्थेन्द्र॑स्य वी॒र्यं॑१ स्थेन्द्र॑स्य नृ॒म्णं स्थ॑ ।जि॒ष्णवे॒ योगा॑य क्षत्रयो॒गैर्वो॑ युनज्मि

indrasyauja sthendrasya saha sthendrasya balaṃ sthendrasya vīryaṃ1 sthendrasya nṛmṇaṃ stha | jiṣṇave yogāya kṣatrayogairvo yunajmi

हिन्दी अर्थ

भन्र ४ मरं सोमाधिकृरी काही कथन हुभा है । वारस्परिक सहयोग.के लिये, ( विचवानि) संब (भृतानि) सृत॑-भ्रौर भौतिकं २५२ भथंववेद-माष्य कांऽ.१०१ ५५ से, भर्थात् एकमत हुए, (स्ध) होः जाभ्रो ।. :. ;. सा प्राज्य की संमी भूत-मोतिक्र शक्तियों पर निजाचिकार चाहता है, भौर भरजाभ्रों का एकमत्य चाहता है ।

English

Tiraschirājis have been slain, and vipers crushed and brayed to bits. Slay Darvi in the Darbha-grass, Karikrata, and White and

अध्याय १०

श्लोक 5.3

इन्द्र॒स्यौज॒ स्थेन्द्र॑स्य॒ सह॒ स्थेन्द्र॑स्य॒ बलं॒ स्थेन्द्र॑स्य वी॒र्यं॑१ स्थेन्द्र॑स्य नृ॒म्णं स्थ॑ ।जि॒ष्णवे॒ योगा॑येन्द्रयो॒गैर्वो॑ युनज्मि

indrasyauja sthendrasya saha sthendrasya balaṃ sthendrasya vīryaṃ1 sthendrasya nṛmṇaṃ stha | jiṣṇave yogāyendrayogairvo yunajmi

हिन्दी अर्थ

लहर समुद्र मे उठा करती है 1; इस से. हृदय को समुद्र. कहा है । इस हृदयः समुद्र मै परमेश्वर की स्तुतिरूप भे. स्तुति-लहरं उठती इन हंसो मं परमेदवर स्तवनीयसूप में प्रकटं हो रहा होता है । भतः वह् “ऊरभि" है । इस सम्बनव से,यजुवेव का म्र विशेष महत्व कै है । यथा-- .. कांर-१०। सुऽ भ्रथरवेवेद-भाष्य २५९ (एताः) यँ स्तुतिवाभिवी. (वको) सैको बे वानी हई, (वृतस्य) प्रकादा की (धाराः) घारार्भरोंको. (अभिचाकशीमि) मै संमुख हैल रहा हं, (भासाम्). इन धाराग्नो के (मघ्ये) बीच में, (हिरण्ययः) दिरण्यवर्णी, (वेतसः) संसारमंट का बुनने वाला परमेरवर प्रकट हो रहा हैः

English

Whose mighty broods are found in many places, these serpents we will reverently worship. Thou art a maid called Taudi, or Ghritāchi is thy name. Thy place;

अध्याय १०

श्लोक 5.4

इन्द्र॒स्यौज॒ स्थेन्द्र॑स्य॒ सह॒ स्थेन्द्र॑स्य॒ बलं॒ स्थेन्द्र॑स्य वी॒र्यं॑१ स्थेन्द्र॑स्य नृ॒म्णं स्थ॑ ।जि॒ष्णवे॒ योगा॑य सोमयो॒गैर्वो॑ युनज्मि

indrasyauja sthendrasya saha sthendrasya balaṃ sthendrasya vīryaṃ1 sthendrasya nṛmṇaṃ stha | jiṣṇave yogāya somayogairvo yunajmi

हिन्दी अर्थ

(५) भरापः पदनाम (निषं०. ५।३), इत्यादि । भरतः इन मन्तो की व्यास्या शुचिता, पवित्रता का, “द्र ष्टि" दवारा राजसिक . भरौर तामसिक मनरूपी सेवनीय, भजनीय , ऊभिः, वत्सः, वृषभः, दिरण्यगमेः, पृदिनिः तथा दिव्य षण न करना, दुरित अंहस्, रिभका श्रपगमन”--भ्रादि का वर्णन भी पराध्यात्मिक.भावनाग्रों का सूचक है । राजसिक-तामसिक-मन भी शारी- रिक जीवन भें राजा है, परन्तु है - शात्रुरूप राजाः। दसं का विनाश करना ,

English

Him would I fain o’erthrow and slay with this our ceremonial act, with this our prayer, our thunder-bolt.

अध्याय १०

श्लोक 5.5

इन्द्र॒स्यौज॒ स्थेन्द्र॑स्य॒ सह॒ स्थेन्द्र॑स्य॒ बलं॒ स्थेन्द्र॑स्य वी॒र्यं॑१ स्थेन्द्र॑स्य नृ॒म्णं स्थ॑ ।जि॒ष्णवे॒ योगा॑याप्सुयो॒गैर्वो युनज्मि

indrasyauja sthendrasya saha sthendrasya balaṃ sthendrasya vīryaṃ1 sthendrasya nṛmṇaṃ stha | jiṣṇave yogāyāpsuyogairvo yunajmi

हिन्दी अर्थ

काह, वह यज्ञका सिरहै। सिरके कट जाने परशरीर निःसार हो जाता है, सिररूप परमेदवर की भावना के विना यज्ञ भी निःसारहै। यज्ञदारा रोग भ्रौर रोगोत्पादक जीवाणुरभों का-विनार होता है; यह उग्रता है, भौर सूचित किया है, सावंमौमशासक मे ये दोनों गुण चाहिए 4 साय ही यज्ञपद विेष-३०,३१ भन््ं दवारा, वैदिक-सं्कृति से सपत्न के निर्जन , भर्थात् बहिष्कार का कथन हुभरा है । .

English

All food of thine, O Lord of Life, that lies, upon the face of earth, Thereof bestow thou upon us. O Lord of Life, Prajāpati!

अध्याय १०

श्लोक 5.6

इन्द्र॒स्यौज॒ स्थेन्द्र॑स्य॒ सह॒ स्थेन्द्र॑स्य॒ बलं॒ स्थेन्द्र॑स्य वी॒र्यं॑१ स्थेन्द्र॑स्य नृ॒म्णं स्थ॑ ।जि॒ष्णवे॒ योगा॑य॒ विश्वा॑नि मा भू॒तान्युप॑ तिष्ठन्तु यु॒क्ता म॑ आप स्थ

indrasyauja sthendrasya saha sthendrasya balaṃ sthendrasya vīryaṃ1 sthendrasya nṛmṇaṃ stha | jiṣṇave yogāya viśvāni mā bhūtānyupa tiṣṭhantu yuktā ma āpa stha

हिन्दी अर्थ

कां०.१ 9 1 सु०.४ भथरवंवेद-मीष्य २५३ जोकि भ्रोषधिर्यो. भे. मुख्य भ्रोषधिं है । भरतः सोम को भोषधि्यौ का ४५।२४1७) 1 वीरष् भोषधि है-। सावंमौमशासक सोमसदश तेज वाला है, भागंरहितं “ कर संकतो है । सपत्न के रोगी हो जाने पर, श्रोषधि.के न मिलने से,-वहे' प्राणविहीन हो जाता है । शेषं अभिप्राय (मन्व २५) के .. विष्णोः. करभोऽसिः सपत्नषटाऽषुसशिती वरंणतेजाः । , , (विष्णोः) .विषणु के (क्रमः) पराक्रम वाला (भसि) तु है,(सपलहा)

English

May the Gods know this prayer of mine, may Indra with the Rishis know.

अध्याय १०

श्लोक 5.7

(२) अ॒ग्नेर्भा॒ग स्थ॑ ।अ॒पां शु॒क्रमा॑पो देवी॒र्वर्चो॑ अ॒स्मासु॑ धत्त ।प्र॒जाप॑तेर्वो॒ धाम्ना॒स्मै लो॒काय॑ सादये

(2) agnerbhāga stha | apāṃ śukramāpo devīrvarco asmāsu dhatta | prajāpatervo dhāmnāsmai lokāya sādaye

हिन्दी अर्थ

करते है, वञ्चित करते हँ (यः) -जोः किं (्रस्मान् दष्ट) हमारे साथ वश्ण को जलो का भ्रधिपति .कहा.है 1 यथा . “वद्णोऽपामधिपतिः (अथव ० ५।२४।४) .1 वर्ण है मेष, ' जोकि सूरं पर. -भ्रावरण डालता है। यह् जलो का भ्रषिपति है, स्वामी है ! यह . ही पृथिवी पर जलो की वर्षा करता है । सावैभौमशासक श्रपने-भ्राप को वख्णसदुश तेज वाला कहं कर करता है,. वञ्चित करतां है, भ्रौर सपत्न जलविहीन होकर -प्राणो से विहीन हो जाता है । शेष भ्रमिप्राय. मन्त्रं (५); के सदृश । - हा) सपत्न का हनन करने वालो है, (कृषिसृंशितः ) कृषिकमं कराने भें (ष्याः) कृषिकमं से (तम्) उसे (निजामः) हम भागरदित करते है

English

What curse soever couples launch against us, whatever bitter speech the chatterers utter, With Manyu’s arrow, offspring of the spirit, transfix thou to the heart the Yātudhānas, Destroy the Yātudhānas with thy fervour, consume the demons with thy wrath, O Agni.

अध्याय १०

श्लोक 5.8

इन्द्र॑स्य भा॒ग स्थ॑ ।अ॒पां शु॒क्रमा॑पो देवी॒र्वर्चो॑ अ॒स्मासु॑ धत्त ।प्र॒जाप॑तेर्वो॒ धाम्ना॒स्मै लो॒काय॑ सादये

indrasya bhāga stha | apāṃ śukramāpo devīrvarco asmāsu dhatta | prajāpatervo dhāmnāsmai lokāya sādaye

हिन्दी अर्थ

सथ (वयम्) हम (ष्मः) देष करते ह, (सः) वह् (मा) न (जीवीत्) जीवित रहे (तम्) “उसे (प्राणः) प्राण ( जहातु) छोड जाय । 1४ ावंभौमशासकं पृथिवी में कृषिकर्म कराने मँ उप्रभावना वाला है । कारण उस का तेजः बढ़ता है, वह तेजस्वी हो नाता. है । जिस राष्ट के पास भन्न नहीं श्रौरः उसेःभरन्य राषटरौ.सेः अन्न मांगना पड़ता. है वह भिंखमंभा र्ट निस्तेज होता है । इसं लिये" सावँभौमशासक कृषिक मे श्रपने परा- कम.को दर्शाता है । वह सपत्न को कृषिकर्म करने से वञ्चित कैर देता है, भौर उस के पास श्रन्नाभाव हो जाने पर क्षुषा से तड़्पता हृभा वह मृत्यु भ्रा है। इन म से परत्येक तथाः सब से वञ्चित हो जाने के कारण-सपलन विष्णोः क्रमोऽपि ¦ सपत्नहा भाणसंधषितुः पुरुषतेनाः । 1 क (विष्णोः) विष्णु के (क्रमः) पराक्रम वाला (भसि) तु है, (सपलहा )

English

Destroy the fool’s gods with thy fiery splendour, destroy the blazing ones, the insatiable. Well-skilled, against this man I hurl the Water’s bolt with four spikes, to cleave his head

अध्याय १०

श्लोक 5.9

सोम॑स्य भा॒ग स्थ।अ॒पां शु॒क्रमा॑पो देवी॒र्वर्चो॑ अ॒स्मासु॑ धत्त ।प्र॒जाप॑तेर्वो॒ धाम्ना॒स्मै लो॒काय॑ सादये

somasya bhāga stha| apāṃ śukramāpo devīrvarco asmāsu dhatta | prajāpatervo dhāmnāsmai lokāya sādaye

हिन्दी अर्थ

कां० १० । सु०-५ भरथववेद-माष्यः २७५ मे उग्रभावना वाला है, (पुरषतेजाः+) सावभौम के पुरषो के तेज वाला तु उसे (निंमंजामंः) हम भाग रहित करते है, वञ्चित करते हैँ (यः) जो किं (वयम् द्विष्मः) हम देष करते है । (सः) वह (मा) न (जीवीत्) जीवित रहै, (तम्). उसे (प्राणः) प्राण (जहातु) छोड़ जाय + पुरुषतेजाः-सावंभौमदशासक निज प्रशस्तशासन के श्राधार परः कहता है कि.शासनः में सब पुष मेरे साथ हैः इस लिये म पुरुषतेज वाला हूः

English

asunder. May it destroy all members of his body. Let the whole host of Gods approve my purpose.

अध्याय १०

श्लोक 5.10

वरु॑णस्य भा॒ग स्थ॑।अ॒पां शु॒क्रमा॑पो देवी॒र्वर्चो॑ अ॒स्मासु॑ धत्त ।प्र॒जाप॑तेर्वो॒ धाम्ना॒स्मै लो॒काय॑ सादये

varuṇasya bhāga stha| apāṃ śukramāpo devīrvarco asmāsu dhatta | prajāpatervo dhāmnāsmai lokāya sādaye

हिन्दी अर्थ

भ्रहाकायं सप (निपिष्टासः) पीसविमर्है। „3 सिन्धु की प्रवाहित धारा म जल चिकित्सा (१९) की मावना की, “परा वहन्तु द्वारा स्पष्टं किया है । (भरहम्) ओ (साधुया) ठीक ठंग ' से (भरोषधीनाम्) भरोषधियों भें से (उवंरोः) उवरो भोषधि्यो का (वृणे) चुनाव करता हूं" भ्रौरं (अरवंतौः) भेन मँ “दव? पद पादपूरणारथेक है । यथा “इवोऽपि दुदयते, सुवि- रि, सधिजञायेते इव" (निरत .१।३।११) । ्ोषधियां दो भृकतार की हत है (१) "उत" भत् उतारा संन ला. (२) का

English

Loud neighing he hath dived below, and rising up again replied, Stayed the dire poison of the Snakes, and made it weak as soaking wood.

अध्याय १०

श्लोक 5.11

मि॒त्रावरु॑णयोर्भा॒ग स्थ॑।अ॒पां शु॒क्रमा॑पो देवी॒र्वर्चो॑ अ॒स्मासु॑ धत्त ।प्र॒जाप॑तेर्वो॒ धाम्ना॒स्मै लो॒काय॑ सादये

mitrāvaruṇayorbhāga stha| apāṃ śukramāpo devīrvarco asmāsu dhatta | prajāpatervo dhāmnāsmai lokāya sādaye

हिन्दी अर्थ

वाली, बढ़ाने वाली । तथा “रवती का अ्रभिध्राय है रोगनाशिका, जो. (पृथिव्याम् प्रोषघीषु) पृथिवी मँ रौर विषली भोषधिर्यो में है। । (ते) तेरा (विषम्) विष है, वह .. (निर् पेतुः) तेरे शरीर से बाहर भ्रग्नि में विष है “जलाना । सू मे विष है “ऽ 87016” भ्रादि । पुथिवी मे विष है संखिंया, पारद भ्रादि । इसी प्रकार - कई ्रोषधचियां भ्रौर म जो मी विष प्रविष्ट हु ह वहं बाहर निकल भ्ाएगा, -अवस्य निकल . ¶

English

Paidva kills Kasarnila, kills both the white Serpent and the black, Paidva hath struck and cleft in twain Ratharvi’s and the Viper’s head.

अध्याय १०

श्लोक 5.12

य॒मस्य॑ भा॒ग स्थ॑।अ॒पां शु॒क्रमा॑पो देवी॒र्वर्चो॑ अ॒स्मासु॑ धत्त ।प्र॒जाप॑तेर्वो॒ धाम्ना॒स्मै लो॒काय॑ सादये

yamasya bhāga stha| apāṃ śukramāpo devīrvarco asmāsu dhatta | prajāpatervo dhāmnāsmai lokāya sādaye

हिन्दी अर्थ

येषाँ जातानि बहुधा महान्ति तेर््यः सर्पेभ्यो नम॑सा विधेम ॥२३॥ (जातानि) जातियां. (बहधा ) बहुत प्रकार की (महान्ति) भौर बड़ी ह, का०-१०॥.सु० ४ पथवेवद्मा्य =. र (लौदी) दु व्यथाकारिणी (नाम.भ्रसि). भ्सिद है, , (कन्या; वू) भूमि के नीचे पहूचे हए पद भर्थात्. जड से (तै) तेरी ५ जड ५ (आ ददे) श लेता हृ, जो कि (विषदूषणम्) विष को दूषित करी, है

English

Go onward, horse of Pedu! go thou first: we follow after thee. Cast thou aside the Serpents from the pathway whereupon we tread.

अध्याय १०

श्लोक 5.13

पि॒तॄ॒णां भा॒ग स्थ॑।अ॒पां शु॒क्रमा॑पो देवी॒र्वर्चो॑ अ॒स्मासु॑ धत्त ।प्र॒जाप॑तेर्वो॒ धाम्ना॒स्मै लो॒काय॑ सादये

pitṝṇāṃ bhāga stha| apāṃ śukramāpo devīrvarco asmāsu dhatta | prajāpatervo dhāmnāsmai lokāya sādaye

हिन्दी अर्थ

तौदी=तुद व्यथने (तुदादिः), सपं को व्यथा देन वाली .षीकु वार को कर द, ४०.०८ को (परिवजंय) विष के प्रभाव से सवथा उग्रपन है (ते) है विषाक्त ! तेस (तत्) वह॒ विष (्रवाचीनम्, एतु) भ्रधात्) शरीर से निकाल दिया है, (सोमः) सोम (निर् ्रनयीत्) इसे निकाल लाया है । (विषम्) विष ने (दंष्टारम्) काटने वाले का (भ्रु भ्रगात्) अनुगमन किया है, (भ्रहिः) सापि (श्रमृत) मर गया है । (सम्पक, प्रदादिः) । “विष में विष सम्पृक्त हो गया है" सपं के विषमे उसका विनाच्चक विष मिला दिया ह । विनाशक = 71006 त्णप्ल-

English

Here was the horse of Pedu born: this is the way that takes him hence. These are the tracks the courser left, the mighty slayer of the

अध्याय १०

श्लोक 5.14

दे॒वस्य॑ सवि॒तुर्भा॒ग स्थ॑।अ॒पां शु॒क्रमा॑पो देवी॒र्वर्चो॑ अ॒स्मासु॑ धत्त ।प्र॒जाप॑तेर्वो॒ धाम्ना॒स्मै लो॒काय॑ सादये

devasya saviturbhāga stha| apāṃ śukramāpo devīrvarco asmāsu dhatta | prajāpatervo dhāmnāsmai lokāya sādaye

हिन्दी अर्थ

0018011. होम्योपेयिकं-चिक्रित्सा मे विष के विनाशक नाना विषो क वर्णन हभ है । लोकोक्ति मी है “विषस्य विषमौषवम्” 1! .. . . . . स्थे भदेहसेकादि (विषाधिकारः, रलोक. १२४ चक्रदत्त) । सोमः सोमरस । रलं स सब भेषन है, भोर जलो भि है जो कि सव रोगों को शानत करदियादहै, मानो सापःका .भनुममंमन, उसंके विंषनेकिंयाहै4 काण्ड १० । सूक्त. ४ । सम्पूणं . सक्तो को, “धर्यायसूक्त" कत ह 1. इहं ५ (१), ५ (२), ५।३, तथा

English

157 Snakes.

अध्याय १०

श्लोक 5.15

(३) यो व॑ आपो॒ऽपां भा॒गो॒३प्स्व॑न्तर्य॑जु॒ष्योऽदेव॒यज॑नः ।इ॒दं तमति॑ सृजामि॒ तं माभ्यव॑निक्षि ।तेन॒ तम॒भ्यति॑सृजामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।तं व॑धेयं॒ तं स्तृ॑षीया॒नेन॒ ब्रह्म॑णा॒नेन॒ कर्म॑णा॒नया॑ मे॒न्या

(3) yo va āpo'pāṃ bhāgo3psvantaryajuṣyo'devayajanaḥ | idaṃ tamati sṛjāmi taṃ mābhyavanikṣi | tena tamabhyatisṛjāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | taṃ vadheyaṃ taṃ stṛṣīyānena brahmaṇānena karmaṇānayā menyā

हिन्दी अर्थ

रयो (६), का जल तथा श्रोषि विभागं के भ्रधिकारीः सोमं . (५४) का तथां संब भूत-मौतिकदावितय कौ उपस्थिति (६). कर वणेन. हभ है । „ , (२); भन्तः चे.९४ परनाजरनो को समोषित्ः कर जनह कह है कि 'त्यादकं परमेैर्वरं शरोर संम पृथिवी के परस्कं सरवैमौम -शासरक के म्रागरूप हो. श्य हो! इस पकारं शासनं परजा क पू .सदोने क निवस -शासक-्धिकारी;्रमगवर केति मपित कट । अभृवा राज्याधिकारी दव दंभो का विना कर, वथा राज्पधिकारी निज द्विष्ट भासुरी भावो = विभ कतो पवा रै भना री दत है । २४७ । भरथवेवेद-माष्य कां० १० । सु ( कां ०-१९ 1-सु०9 भथरवेवेद-माष्य , २४९ कर्मो का विनारा करता हृभा शासन करता है, तो वह् भरनुमव करने लगता ९ ५ (१) है कि मैने लगातार कई वषो तक कोई भ्नृतसाषण नहीं किया 1 मन्व २ क 1 4 मँ इसे “श्रैहायण” त्रत के रूप मेँ वणित किया है । वेदानुसार संख्या तीन ( १८ ४ ६ व । ८

English

Let him not close the opened mouth, nor open that which now is closed. Two snakes are in this field, and both, female and male, are powerless.

अध्याय १०

श्लोक 5.16

यो व॑ आपो॒ऽपामू॒र्मिर॒प्स्व॑१न्तर्य॑जु॒ष्योऽदेव॒यज॑नः ।इ॒दं तमति॑ सृजामि॒ तं माभ्यव॑निक्षि ।तेन॒ तम॒भ्यति॑सृजामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।तं व॑धेयं॒ तं स्तृ॑षीया॒नेन॒ ब्रह्म॑णा॒नेन॒ कर्म॑णा॒नया॑ मे॒न्या

yo va āpo'pāmūrmirapsva1ntaryajuṣyo'devayajanaḥ | idaṃ tamati sṛjāmi taṃ mābhyavanikṣi | tena tamabhyatisṛjāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | taṃ vadheyaṃ taṃ stṛṣīyānena brahmaṇānena karmaṇānayā menyā

हिन्दी अर्थ

.... (५) भनृत-त्याग.के “व्ैहायण-त्रत" क्रा परिणाम होता है परमेदवर की सहायता द्वारा शारीरिक रस-रक्त भादि जलो का पवित्र हो जाना श्रौर जीवनो से “रिप्र” भर्थात् पापका भपगत हौ जानाः (मन्व २४), तथा का; सम्भवतः दत्र ेनाधिपति का बहिष्कार. (मन्व २५-२९) . : (८). शत्रं को भोषंधिग्रहण, जल सेवन, तथा कृषिकर्म. से. वच्नचित कर - . . (£) शत्रुसेनां पर विजय पा कर भां राजा को राज्यच्युत कर रूप प्रजा का शासन करना (मन्त्रं ३७-४१) । -

English

Powerless are the serpents here, those that are near and those afar. I kill the scorpion with a club, and with a staff the new-come snake.

अध्याय १०

श्लोक 5.17

यो व॑ आ॒पोऽपां व॒त्त्सो॒ऽप्स्व॑१न्तर्य॑जु॒ष्योऽदेव॒यज॑नः ।इ॒दं तमति॑ सृजामि॒ तं माभ्यव॑निक्षि ।तेन॒ तम॒भ्यति॑सृजामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।तं व॑धेयं॒ तं स्तृ॑षीया॒नेन॒ ब्रह्म॑णा॒नेन॒ कर्म॑णा॒नया॑ मे॒न्या

yo va āpo'pāṃ vattso'psva1ntaryajuṣyo'devayajanaḥ | idaṃ tamati sṛjāmi taṃ mābhyavanikṣi | tena tamabhyatisṛjāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | taṃ vadheyaṃ taṃ stṛṣīyānena brahmaṇānena karmaṇānayā menyā

हिन्दी अर्थ

(३) ; (३). पंचज्ञानेन्द््यो, मन नौर विचा. को. ऋषिकोटि का . बनाना भरनुसार प्रजाशासन नहीं करते; उन कीं खौज कर, उरः सं वंमौमशासके के .: -॥ ..खमक्ष उपस्थित कर, उचित दण्ड दिलाने का वणेन मंतर४२-५०) (सहः) सहनरत तथा . शत्रुपराभव करने वाली शक्ति (स्थ)-हो, सहयोग के साथ (युनज्मि) भै युक्त करत। हूं, सम्बद्ध करत हूं । माण्डलिक राजा, निजं-निज राष्टरके राजी, शासक

English

This is the remedy against Aghāsva and the adder, both: Indra and Paidva have subdued and tamed the vicious snake for me.

अध्याय १०

श्लोक 5.18

यो व॑ आपो॒ऽपां वृ॑ष॒भो॒ऽ३प्स्व॑न्तर्य॑जु॒ष्योऽदेव॒यज॑नः ॥ इ॒दं तमति॑ सृजामि॒ तं माभ्यव॑निक्षि ।तेन॒ तम॒भ्यति॑सृजामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।तं व॑धेयं॒ तं स्तृ॑षीया॒नेन॒ ब्रह्म॑णा॒नेन॒ कर्म॑णा॒नया॑ मे॒न्या

yo va āpo'pāṃ vṛṣabho'3psvantaryajuṣyo'devayajanaḥ || idaṃ tamati sṛjāmi taṃ mābhyavanikṣi | tena tamabhyatisṛjāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | taṃ vadheyaṃ taṃ stṛṣīyānena brahmaṇānena karmaṇānayā menyā

हिन्दी अर्थ

(उणा० ४।१९३, म० वयानन्द) । भ्रोजःराष्ट्िय-भोज; जिस के होते सिह है । बलम् = “बलं मरं भवति,. बिभर्ते” (निख्क्त २।२।१०), जोकरि हरीर का भरण-पोषण करतां है । बल करा प्रतिनिधि है हाथी ।.तथा बलम् नृम्णम् = नृम्णं धननाम (निषंर २।१०), जिस के -लिये नरौँका मने योगैः). तो-से-ऋण करने वाले-क्षात्रनल भर्थात्. सेना के.सहयोगो.के साथ (युनज्मि) नै युक्त करता हं, सम्बद्ध करतांहुं । ( नागरिक सुखीजीवन के लिये, भ्रौर नागरिक कष्टों पर विजय के

English

We fix our thoughts on Pedu’s horse, strong, off-spring of a stedfast line. Behind our backs the vipers here crouch down and lie in wait for us.

अध्याय १०

श्लोक 5.19

यो व॑ आपो॒ऽपां हि॑रण्यग॒र्भो॒३प्स्व॑न्तर्य॑जु॒ष्योऽदेव॒यज॑नः ।इ॒दं तमति॑ सृजामि॒ तं माभ्यव॑निक्षि ।तेन॒ तम॒भ्यति॑सृजामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।तं व॑धेयं॒ तं स्तृ॑षीया॒नेन॒ ब्रह्म॑णा॒नेन॒ कर्म॑णा॒नया॑ मे॒न्या

yo va āpo'pāṃ hiraṇyagarbho3psvantaryajuṣyo'devayajanaḥ | idaṃ tamati sṛjāmi taṃ mābhyavanikṣi | tena tamabhyatisṛjāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | taṃ vadheyaṃ taṃ stṛṣīyānena brahmaṇānena karmaṇānayā menyā

हिन्दी अर्थ

करता हूं, सम्बद्ध करताह।. . .. कां०.१०। सु९१५ भरथववेदृ-मष्यं २५१ पारस्परिक सहयोग के लिये, (सोमयोगैः) ओषंषियों (मन्त्र ३२), भ्रौरं वीरुधो (“सोमो वीरुषामधिपतिः” अथवं०५।२४।७) के नियन्ता सोमा- धिकारी के सहयोगं के साथ (वः) है भरजाभों ! तुम्रं (युनज्मि) मँ युक्तं भा भ्रोषधियो केः्रषिष्ठाता -अधिकारी- को मन्त्र भे. “सोमं सम्बन्धी नियन्ता के भधिकारी के सहयोगो के साथ (वः) है प्रजाभो ! तुम्हें युनज्मि ) मैं युक्त करता हं, ' सम्बदे करत हूं 1

English

Bereft of life and poison they lie slain by bolt-armed Indra’s hand. Indra and we have slaughtered them.

अध्याय १०

श्लोक 5.20

यो व॑ आपो॒ऽपामश्मा॒ पृश्नि॑र्दि॒व्यो॒३प्स्व॑१न्तर्य॑जु॒ष्योऽदेव॒यज॑नः ।इ॒दं तमति॑ सृजामि॒ तं माभ्यव॑निक्षि ।तेन॒ तम॒भ्यति॑सृजामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।तं व॑धेयं॒ तं स्तृ॑षीया॒नेन॒ ब्रह्म॑णा॒नेन॒ कर्म॑णा॒नया॑ मे॒न्या

yo va āpo'pāmaśmā pṛśnirdivyo3psva1ntaryajuṣyo'devayajanaḥ | idaṃ tamati sṛjāmi taṃ mābhyavanikṣi | tena tamabhyatisṛjāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | taṃ vadheyaṃ taṃ stṛṣīyānena brahmaṇānena karmaṇānayā menyā

हिन्दी अर्थ

भरजाप॑तेवां धाम्नाऽस्मे छोकायं सादये . ॥७॥ . ..:. पित करो, हमें प्रदनि करो । (प्रजापतेः धाम्ना) प्रजापति के नाम तथा. ,: स्थान दवारा (वः) है प्रजाग्नो ! तुमह (भस्मैःलोकायः) इस पृथिवी. लोक के का, हितचिन्तक है, रौर वह् ज्ञानौग्निमथ है । „4 ५२ तुम्हारे सहयोग द्वारा रग्नि, शासनः में सफलं होगा, भन्यथा तहं । “भर „

English

Black. The young maid of Kirāta race, a little damsel, digs the drug,

अध्याय १०

श्लोक 5.21

यो व॑ आपो॒ऽपाम॒ग्नयो॒प्स्व॑१न्तर्य॑जु॒ष्योऽ देव॒यज॑नः ।इ॒दं तानति॑ सृजामि॒ तान् माभ्यव॑निक्षि ।तैस्तम॒भ्यति॑सृजामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।तं व॑धेयं॒ तं स्तृ॑षीया॒नेन॒ ब्रह्म॑णा॒नेन॒ कर्म॑णा॒नया॑ मे॒न्या

yo va āpo'pāmagnayopsva1ntaryajuṣyo' devayajanaḥ | idaṃ tānati sṛjāmi tān mābhyavanikṣi | taistamabhyatisṛjāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | taṃ vadheyaṃ taṃ stṛṣīyānena brahmaṇānena karmaṇānayā menyā

हिन्दी अर्थ

कहता है करि प्रजाभ्रों का पालक परमेश्वर जैसे प्रजापतिः नाम वाला है, भरौर लोक मे वहै सुद्हृरूप में स्थापितं कररता हुं । इसी . प्रकार की मावंनाए' . ( भरजपतेवो पाम्नाऽस्मे शोकाय सादये ॥८॥ . :. अजाते षाम्नाऽक्मे लोकायं सादये ॥॥ कारियों मेँ (चत्त) स्थापित कंरो, हमे पदान करो । (प्रजापतेः धाम्ना

English

Digs it with shovels wrought of gold on the high ridges of the hills. Hither the young uuconquered leech who slays the speckled snake hath come.

अध्याय १०

श्लोक 5.22

(४) यद॑र्वा॒चीनं॑ त्रैहाय॒णादनृ॑तं॒ किं चो॑दि॒म।आपो॑ मा॒ तस्मा॒त् सर्व॑स्माद् दुरि॒तात् पा॒न्त्वंह॑सः

(4) yadarvācīnaṃ traihāyaṇādanṛtaṃ kiṃ codima| āpo mā tasmāt sarvasmād duritāt pāntvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

भजापतरवो घाम्नाऽस्ये छोकाय॑. सादये ॥ १०॥ शुवित भौर सामथ्यं, (वचः) तथा दीप्ति. : (भ्रस्मासु) हम अधिकारियों मे २४४ : भर्वंवेद-भाष्य -: कां०. १०१ सु०.४ राजा” (यजु° ८।३७).† यह वरुण, निज -साण्डलिक प्रजा द्वारां “वरा . ‰। तुम वख्ण के शासनं के भी मागर्प हो; भङ्खरूप हो । -म॑न्ःमावना के लिये

English

He verily demolishes adder and scorpion; both of them. Indra, Mitra and Varuna, and Vāta and Parjanya both have given the serpent up to me.

अध्याय १०

श्लोक 5.23

स॒मु॒द्रं वः॒ प्र हि॑णोमि॒ स्वां योनि॒मपी॑तन ।अरि॑ष्टाः॒ सर्व॑हायसो॒ मा च॑ नः॒ किं च॒नाम॑मत्

samudraṃ vaḥ pra hiṇomi svāṃ yonimapītana | ariṣṭāḥ sarvahāyaso mā ca naḥ kiṃ canāmamat

हिन्दी अर्थ

ग्रनाप॑तेवों धाम्नाश्स्मे छोकायं सादये ॥११॥ ¢ ५२ भित्रावरुणयोः- मित्र है. वह भ्रधिक्रारी जो कि विदेदानीति के साथ यतन करता रह । इसी प्रकार एतदथं राजा कों भी कहा है “मित्रवर्धनः” ! (अथव ० ४।८।२) "तथा “मिंत्रवधेनः?' (अथर्वं ०.४।८६) । दस से प्रतीत होता है कि ““मित्रराष्टरौः" . को बढ़ाते रहना, . यह वेदिक. विदेशनीति है, जिसका कि भधिकारी विदेशमन्त्री “मित्र” नामक ह । वरुणः-मित्र कायं कायो से रोके रलना, निवारितं करते रहना । इस क भधिकार मेः राष्ट्रिय मे वरण द्वारा परमेश्वर का; भौर उसके नियमों का, “स्पद्चः" दारां वणेन हृभा है, - तो भी सूक्त. मेः राष्टिप्रबन्ध कीं . मीं सुचना वरणं भौर

English

Indra hath given him up to me, the female viper and the male, The adder, him with stripes athwart. Kasarnila, Dasonasi.

अध्याय १०

श्लोक 5.24

अ॒रि॒प्रा आपो॒ अप॑ रि॒प्रम॒स्मत्।प्रास्मदेनो॑ दुरि॒तं सु॒प्रती॑काः॒ प्र दु॒ष्वप्न्यं॒ प्र मलं॑ वहन्तु

ariprā āpo apa ripramasmat| prāsmadeno duritaṃ supratīkāḥ pra duṣvapnyaṃ pra malaṃ vahantu

हिन्दी अर्थ

कां: १० । चु« ५ शरथवेवेद-माष्य २६५ अ्नापतेर्गाः षाम्नाऽस्मे छोकाय॑ सादये ।॥१२॥ रनारपतेवों धाभ्नाऽस्तमै .छोकाय॑. सादये ॥१२॥ । (भाषः देवीः) है दिव्यं प्रजाभ्रो । तुम (पितृणाम्) समा भौर समितिं :.“ . + . शतेष ।।. (भरथवं ० .७। १२।१) मेँ समा श्रौर समिति के सदस्यो को “पितरः” कहा है । : :.

English

O Serpent, Indra hath destroyed the sire who first engendered thee: And when these snakes are pierced and bored what sap and vigour will be theirs?

अध्याय १०

श्लोक 5.25

(५) ५-३५ (१-११) कौशिकः।विष्णुक्रमः, मन्त्रोक्ताः।२५-३५ त्र्यवसाना षट्-पदा यथाक्षरं शक्वर्यतिशक्वरी।विष्णोः॒ क्रमो॑ऽसि सपत्न॒हा पृ॑थि॒वीसं॑शितो॒ऽग्निते॑जाः ।पृ॒थि॒वीमनु॒ वि क्र॑मे॒ऽहं पृ॑थि॒व्यास्तं निर्भ॑जामो॒ यो॒३स्मा॑न् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।स मा जी॑वी॒त् तं प्रा॒णो ज॑हातु

(5) 5-35 (1-11) kauśikaḥ| viṣṇukramaḥ, mantroktāḥ| 25-35 tryavasānā ṣaṭ-padā yathākṣaraṃ śakvaryatiśakvarī| viṣṇoḥ kramo'si sapatnahā pṛthivīsaṃśito'gnitejāḥ | pṛthivīmanu vi krame'haṃ pṛthivyāstaṃ nirbhajāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | sa mā jīvīt taṃ prāṇo jahātu

हिन्दी अर्थ

अजारप॑तेर्बो धाम्नाऽस्मै छोकायं सादये ॥१४॥ परमेदवर देव के (मागः) भागरूप, भङ्खूप (स्थ) ही । (रपां शुक्रम्) २५६ . भ्रथर्ववेद-भाष्य कां १०) .सु 4 परमेच्वर ब्रह्माण्ड.कौ ्ासक होता हां पृथिवी का मीः.दासक है। मँ पारमेद्वरीय दासन कै. भागरूप या भ्रङ्खरूप होती है ।

English

Their heads have I seized firmly as a fisher grasps the spotted prey, Waded half through the stream and washed the poison of the serpents off.

अध्याय १०

श्लोक 5.26

१॥ विष्णोः॒ क्रमो॑ऽसि सपत्न॒हान्तरि॑क्षसंशितो वा॒युते॑जाः ।अ॒न्तरि॑क्ष॒मनु॒ वि क्र॑मे॒ऽहम॒न्तरि॑क्षा॒त् तं निर्भ॑जामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।स मा जी॑वी॒त् तं प्रा॒णो ज॑हातु

1|| viṣṇoḥ kramo'si sapatnahāntarikṣasaṃśito vāyutejāḥ | antarikṣamanu vi krame'hamantarikṣāt taṃ nirbhajāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | sa mā jīvīt taṃ prāṇo jahātu

हिन्दी अर्थ

राज्याधिकारियों को. पारमेष्वरीय शासन मे भरङ्गरूप बनाती. है। राज्याः धिकारियों मे मुख्याधिकारी राजा होता है ॥- समग्र पृथिवी के शासन 1 निजगही मे साथ बैठने के लिथे तेरा प्राह्वान कियाहै, तु परमेदवंर के साथ राजगदी पर बैठ कर, परमेश्वर का प्रतिनिधि बन कर पृथिवी का शासन कर, श्नौरं विरवास कर. कि पसे -तेरे शासन. मे परमेश्वर, राज्यदासन 1 तरे सहायक दिव्य राजवगे क्रो शासन-यज्ञ के योग्य . बना देगा, भरौरतेरी परजाभ्नौं को सामथ्यं सम्पन्न कर देगा । =" = 4 रजा लोग यदि यह सममः लँ किः शासन. कौ गही पर परमख्वर भी साथ बैरे हए ह तो पृथिवी. का शासन स्वर्गीयकासन, हो . जाय। मन्व मे “वरुगैः" से बहुवचन है, रतः ये मनुष्य है, मानां गया वरुण-देवता नहीं ।

English

Let the floods hurry on and bear the poison of all snakes afar. Tiraschirājis have been slain and vipers crushed and brayed to bits.

अध्याय १०

श्लोक 5.27

२॥ विष्णोः॒ क्रमो॑ऽसि सपत्न॒हा द्यौसं॑शितः॒ सूर्य॑तेजाः ।दिव॒मनु॒ वि क्र॑मे॒ऽहं दि॒वस्तं निर्भ॑जामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः।स मा जी॑वी॒त् तं प्रा॒णो ज॑हातु

2|| viṣṇoḥ kramo'si sapatnahā dyausaṃśitaḥ sūryatejāḥ | divamanu vi krame'haṃ divastaṃ nirbhajāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ| sa mā jīvīt taṃ prāṇo jahātu

हिन्दी अर्थ

ˆ ˆ यो. व॑ आपोऽपां मागो ह्वशन्तयैजुष्यो देवयजन । . . उस कै प्रति (इदम्). इस शरीर या मन कों (भरतिसुजामिं) मै संम्नोद् मेंट - करता हं, समपित करता हु, है परमेवर् (तम्, भा) उसं भुर सभरा भर्मिं होकर, (भ्रतिसजामः) हम सैनिकं विनष्ट करते है (यः) जोकि सम्राट् निज,. शरीर मा मन को सेवनीयं या भजनीयं परमेदवर कै की भज्ञा.द्मारां सैनिक, शतुराजा का विनाश करते ह। भरथवेा स्री

English

As from the salutary plants I deftly pick the fibres out, And guide them skilfully like mares, so let thy venom, Snake! depart,

अध्याय १०

श्लोक 5.28

३॥ विष्णोः॒ क्रमो॑ऽसि सपत्न॒हा दिक्सं॑शितो॒ मन॑स्तेजाः ।दिशोऽनु॒ वि क्र॑मे॒ऽहं दि॒ग्भ्यस्तं निर्भ॑जामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।स मा जी॑वी॒त् तं प्रा॒णो ज॑हातु

3|| viṣṇoḥ kramo'si sapatnahā diksaṃśito manastejāḥ | diśo'nu vi krame'haṃ digbhyastaṃ nirbhajāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | sa mā jīvīt taṃ prāṇo jahātu

हिन्दी अर्थ

देवयजनः=देवाः साध्या ऋषयश्च गरे (यचुर ३१।९) २५ भ्रतिसूर्जमि स्तृषीय=स्तृणातिं -धकर्मां (निषं० २१९) । मेन्य = मनिः वखनाम २५२ भरथववेवेद-माष्य कां१५। सु०ः५ . , यो व॑ आपोऽ पामूमिरप्डन्तर्लुष्यो देवयजंनः । - . तं धेयं तं स्वषीयानेन बह्मणाऽनेनं कर्मणाऽनयां मेन्या॥ १६॥

English

All poison that the sun and fire, all that the earth and plants contain, Poison of most effectual power—let all thy venom pass away.

अध्याय १०

श्लोक 5.29

४॥ विष्णोः॒ क्रमो॑ऽसि सपत्न॒हाशा॑संशितो॒ वात॑तेजाः ।आशा॒ अनु॒ वि क्र॑मे॒ऽहमाशा॑भ्य॒स्तं निर्भ॑जामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।स मा जी॑वी॒त् तं प्रा॒णो ज॑हातु

4|| viṣṇoḥ kramo'si sapatnahāśāsaṃśito vātatejāḥ | āśā anu vi krame'hamāśābhyastaṃ nirbhajāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | sa mā jīvīt taṃ prāṇo jahātu

हिन्दी अर्थ

ह, ह परमेषवर (तम् मां). उस मु को, (अभि अवनिषि) भमियुलं - दारा. (तम्) उस श्तरुराजा"का, (भ्रभि) भ्रभिमुल होकर, (अतिसूना्मः) हम सैनिक विनाश करते है, वघ करते है, (यः ) जो-कि (भरस्मात् ष्टि) हमारे साथ द्वेष करता है, भरौर (यम्) जिस के साथ -परतिक्रिया , दनयुडधस्यी , कर दारा, या-(अनया मेन्या) इस वज दवारा ॥ .

English

Serpents which fire or plants have generated, those which have sprung from waters or the lightning,

अध्याय १०

श्लोक 5.30

५॥ विष्णोः॒ क्रमो॑ऽसि सपत्न॒हा ऋक्सं॑शितः॒ साम॑तेजाः ।ऋचोऽनु॒ वि क्र॑मे॒ऽहमृ॒ग्भ्यस्तं निर्भ॑जामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।स मा जी॑वी॒त् तं प्रा॒णो ज॑हातु

5|| viṣṇoḥ kramo'si sapatnahā ṛksaṃśitaḥ sāmatejāḥ | ṛco'nu vi krame'hamṛgbhyastaṃ nirbhajāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | sa mā jīvīt taṃ prāṇo jahātu

हिन्दी अर्थ

धाराए मिः जो.किं स्तुति मन्त्रो के जप मे प्रकट बो वं.भापोऽ परातमोप्ल!नवनुषय देवयन॑नः । : . दं कातिल ःतं . माम्वृव॑निक्षि.। के प्रति (इदम्) इस शरीर या मनको (तिदृजामि ) मै सम्राट् भेट करता हू, समर्पित करता हुं, है प्ररभेदवर (तम्, मा) उस मुक को, (रभि) -भरमिमुख . होकर, (भ्रवनिक्षि) शुचि, पवित्र कर । (तेन) उस अभिमुख हो करं, (भरतिसृजामः) हम सेनिक विनष्ट करते ह, (यः). जोकि “ऋषीणा पु्ः"-कहा है । ! यथा “श्रग्नावग्निचरति. विष्ट ऋषीणां पवो

English

Is underneath my foot. I take the poison-killing remedy. From every member drive away the venom, and avoid the heart.

अध्याय १०

श्लोक 5.31

६॥ विष्णोः॒ क्रमो॑ऽसि सपत्न॒हा य॒ज्ञसं॑शितो॒ ब्रह्म॑तेजाः ।य॒ज्ञमनु॒ वि क्र॑मे॒ऽहं य॒ज्ञात् तं निर्भ॑जामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।स मा जी॑वी॒त् तं प्रा॒णो ज॑हातु

6|| viṣṇoḥ kramo'si sapatnahā yajñasaṃśito brahmatejāḥ | yajñamanu vi krame'haṃ yajñāt taṃ nirbhajāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | sa mā jīvīt taṃ prāṇo jahātu

हिन्दी अर्थ

विचरता है, वह ऋषियों क्रा पत्र है, श्रौर हिसा कृरयें वाले प्राप सेरा करता, है ।, प्रमेरुवर. ऋषिरयो का धुव है, ऋषि जनोग योगसमाति ढा इते पदा कर्ते है,रकट करते है तया इस से पुत्रवत् सेहं कसे हैर आती+पिता उत्यत्तःपुतर "सै स्नेह करते ह (क „क । +: ग्रो षं आपोऽ हीमो पवनतनय देवयर 1 5: › । ४५ अन्तः) .हवयान्तवंतीं जलो भें विद्यमान है,, (यजुष्यः) ,यजनीय (तम्) उखके -पति (इवम्); इस शर गरा मतन को ..(अतिषटुजामि) साद् करता हृ, सरमपित करता हं, है परमेदवर .(तम्ः त् षु सु को, (रभि) शरमिृख-होकर, (वनि). शुचि, पतिन करः (तेन्) न श्वि, भविन -सम्नादं की भाजा, द्वारा (तम्) उत शुराः को जौ कि (अस्मान् दष्ट) टमि पराय १ करता है, भौर (मू 1. जिस् के साथ ध मे, (बयम्. विषमः) ;हस रष करे है । यवाः (तम्). उस

English

Then let the poison’s burning heat pass downward and away- from thee. The bane hath fled afar. It wept, and asked the poison how it fared.

अध्याय १०

श्लोक 5.32

७॥ विष्णोः॒ क्रमो॑ऽसि सपत्न॒हौष॑धीसंशितः॒ सोम॑तेजाः ।ओष॑धी॒रनु॒ वि क्र॑मे॒ऽहमोष॑धीभ्य॒स्तं निर्भ॑जामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।स मा जी॑वी॒त् तं प्रा॒णो ज॑हातु

7|| viṣṇoḥ kramo'si sapatnahauṣadhīsaṃśitaḥ somatejāḥ | oṣadhīranu vi krame'hamoṣadhībhyastaṃ nirbhajāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | sa mā jīvīt taṃ prāṇo jahātu

हिन्दी अर्थ

ुदधरूपीं कमं द्वारा, या (अनयः न्या) इस वख द्रा „;;“ -.. - तं व॑येयं तं स्वषीयानेन भर्षणाऽनेन कर्मणाऽनयां मेन्या ।१९॥ कां०२१० १० ; -भ्रथर्ववेद-माष्य - २६१ (भमु शन्तः) हृवयान्तवती जलों मेँ विद्यमान; है (जुष्यः). यजनीयं , तथा के.भरति (इदम्). इस. शरीर य़ मन.को (म्रभि) अभिमुख होकर, (भव्-

English

Agni hath found the venom of the serpent, Soma drawn it out. Back to the biter hath returned the poison, and the snake hath died.

अध्याय १०

श्लोक 5.33

८॥ विष्णोः॒ क्रमो॑ऽसि सपत्न॒हाप्सुसं॑शितो॒ वरु॑णतेजाः ।अ॒पोऽनु॒ वि क्र॑मे॒ऽहम॒द्भ्यस्तं निर्भ॑जामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।स मा जी॑वी॒त् तं प्रा॒णो ज॑हातु

8|| viṣṇoḥ kramo'si sapatnahāpsusaṃśito varuṇatejāḥ | apo'nu vi krame'hamadbhyastaṃ nirbhajāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | sa mā jīvīt taṃ prāṇo jahātu

हिन्दी अर्थ

दवारा (तम्) उष शत्रुराजा को,.(भसि) श्रभिमुख , होकर, (भ्रतिसूजाभः) हम सैतिक विनष्ट करते हँ (यः). जो कि (अस्मान् ्रेष्टि) हमारे साथ दषं (अनया मेन्या इस वज द्वारा † - 6 है यथा “हिरण्यैः समवत्तेताग्रः” (यजु.१३।४) 7 भरत प्रतरीततःहीता है. बहम पच्त् है कमी रमेखवर के हो गणको सुजन ह 1. , केन. तमम्प्तिनामो. यो समात् द रिः 1. (वं द साने बऽ करणान्मा ९१

English

A charm to overthrow a rival and gain strength, dignity, long life, children, and general prosperity

अध्याय १०

श्लोक 5.34

९॥ विष्णोः॒ क्रमो॑ऽसि सपत्न॒हा कृ॒षिसं॑शि॒तोऽन्न॑तेजाः ।कृ॒षिमनु॒ वि क्र॑मे॒ऽहं कृ॒ष्यास्तं निर्भ॑जामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।स मा जी॑वी॒त् तं प्रा॒णो ज॑हातु

9|| viṣṇoḥ kramo'si sapatnahā kṛṣisaṃśito'nnatejāḥ | kṛṣimanu vi krame'haṃ kṛṣyāstaṃ nirbhajāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | sa mā jīvīt taṃ prāṇo jahātu

हिन्दी अर्थ

(दनुः). दिव्य परमेरवर है,जो क -तमहारे (भु न्तः). हदथान्तर्वती सार्य रोद षयो, द्वारा यजवीयं है, “(तम् ) उक, परभवर क प्रति (इदम्)-इस -शरीरःया..मन को (भरतिष्नामि) पै संराद् भेट करता हं पमरमित-करता हुः: द-प रस्हवर 18 (म्, भ॑ - उस मु. को; (अमि) अभिमुख हौ कदु (तनि). लिः पवनर.कर । (तन); शुचिः विन्र हमारे साथ द्वेषः करता है।.. भौर (यम्) जिस के.साथ, प्रतिक्रिया भें (वयम्, द्विष्मः) हम. दवष करते ह। रथव (तमं) उस श्रु-राजाः क रूपी कमं द्वारा यां .(श्रनया मेन्या) इस वंच द्गः . - ,: !

English

Ye are the power of Indra, ye the force and strength of Indra, ye his hero might and manliness.

अध्याय १०

श्लोक 5.35

१०॥ विष्णोः॒ क्रमो॑ऽसि सपत्न॒हा प्रा॒णसं॑शितः॒ पुरु॑षतेजाः ।प्रा॒णमनु॒ वि क्र॑मे॒ऽहं प्रा॒णात् तं निर्भ॑जामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।स मा जी॑वी॒त् तं प्रा॒णो ज॑हातु

10|| viṣṇoḥ kramo'si sapatnahā prāṇasaṃśitaḥ puruṣatejāḥ | prāṇamanu vi krame'haṃ prāṇāt taṃ nirbhajāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | sa mā jīvīt taṃ prāṇo jahātu

हिन्दी अर्थ

(जल) -तर्था अशा :(मेष) के . वर्णनं दोरावच्र वैदुतास््रं परतीत ये वं आपोऽ पारमेनयोऽप्ठशन्तयैलष्या देवय्॑नाः । हृदयान्तव॑ती जलो मै विद्यमान है; (यजुष्याः) जोकिं यजन भ्रति संगम योग्य है, प्रापणीय है, (- देवजनाः ) देवो के संगम. द्वारा प्रापणीयं (ताम्) उन भौर (इदम्) इस शारीर या मन करो हे.परमेदवर ! (भ्रति सुजाभि) .मै.सम्नाट् "तेरे प्रति . ट. करता ह, समपि करता हं, तान् खस के -अभिमूख होकर (भ्रति सुजामः) हम प्रजाए विनष्ट करती हँ (यः) कांऽ-१5 1 सुरभ्र रथव वेद-भाष्य २६१३

English

I join you with the bonds of Prayer to the victorious enterprise. For the victorious enterprise let all creation stand by me. For me ye, Waters, are prepared.

अध्याय १०

श्लोक 5.36

११॥ (६) ३६-४१ (१-६) ब्रह्मा।मन्त्रोक्ताः।३६ मार्त्वी पञ्चपदातिशाक्वरातिजागतगर्भाष्टिः, ३७ विराट् पुरस्ताद्बृहती, ३८ पुर उष्णिक्, ३९, ४० आर्षी गायत्री, ४० विराड् विषमा गायत्री।जि॒तम॒स्माक॒मुद्भि॑न्नम॒स्माक॑म॒भ्यऽष्ठां॒ विश्वाः॒ पृत॑ना॒ अरा॑तीः ।इ॒दम॒हमा॑मुष्याय॒णस्या॒मुष्याः॑ पु॒त्रस्य॒ वर्च॒स्तेजः॑ प्रा॒णमायु॒र्नि वे॑ष्टयामी॒दमे॑नमध॒राञ्चं॑ पादयामि

11|| (6) 36-41 (1-6) brahmā| mantroktāḥ| 36 mārtvī pañcapadātiśākvarātijāgatagarbhāṣṭiḥ, 37 virāṭ purastādbṛhatī, 38 pura uṣṇik, 39, 40 ārṣī gāyatrī, 40 virāḍ viṣamā gāyatrī| jitamasmākamudbhinnamasmākamabhya'ṣṭhāṃ viśvāḥ pṛtanā arātīḥ | idamahamāmuṣyāyaṇasyāmuṣyāḥ putrasya varcastejaḥ prāṇamāyurni veṣṭayāmīdamenamadharāñcaṃ pādayāmi

हिन्दी अर्थ

प्रकार कीः है; भररिव (चोर), -तथां शिव अथव ° १६।१।१-१३) । उन चिव अग्नियों को तथा शरीर यामन. को प्ररभरवर के प्रति समर्पित कर, ताकि हुम प्रिव धोर श्रग्तिवलेद्रषी मनंका वघ कर सकं काम, मलों को घो डाल । चोरता मल है । निक्षि = णिजिर् श्नौच पोषणयोः । कोई (भनुतम्, ऊदिम) -भनुत.भाषणः हम ने किया है, (तस्मात्, दूरितात्) उस दृष्पररिणामी, तथा (सवंस्मात्) सब. दुष्परिणामी (भरंहसः) पापो से (मा) मुभे (भ्रापः१) -ग्यापक-परमेदवर (परन्तु) सुरक्षितं करे। . : कौ प्रजाएं यह कहती ईँ कि "तीन वर्षो के समय मेँ हम मे से किसी ने अनृतः भाषण नहीं किया । यदि कोई भ्रनृतभाषषण हो गया हो,.जिस का किहममें से किसी को स्मरण नही. तो उस, दुष्मरिणामी सव प्रकार क भनुतभाषण-

English

Ye are the share of Agni. Grant, O heavenly Waters unto us the 158

अध्याय १०

श्लोक 5.37

१॥ सूर्य॑स्या॒वृत॑म॒न्वाव॑र्ते॒ दक्षि॑णा॒मन्वा॒वृत॑म्।सा मे॒ द्रवि॑णं यच्छतु॒ सा मे॑ ब्राह्मणवर्च॒सम्

1|| sūryasyāvṛtamanvāvarte dakṣiṇāmanvāvṛtam| sā me draviṇaṃ yacchatu sā me brāhmaṇavarcasam

हिन्दी अर्थ

न तो प्रजाभों का. .वाचक है, न जल .का, न दारीरिक रस-रक्त-वीयं का, वाचक.) रापः शब्दं परमेहवरराथं व्चिकं भीं है 1 यंथा-- - - १. -हा्यन (हत) == सायन (स --भ्रयन्) सकार की विकृति हकारे 5 जापः (वः) ऊनहत (समुम्). हद नतथद्र.की भोर (प्रहिणोमि) जारो, (सवंहायसः) सब.्रकार से गवय . वाले. सप्तमा प्ररिष्टाः)

English

Waters’ brilliant energy. By statute of Prajāpati I set you down for this our world.

अध्याय १०

श्लोक 5.38

२॥ दिशो॒ ज्योति॑ष्मतीर॒भ्याव॑र्ते ।ता मे॒ द्रवि॑णं यच्छन्तु॒ ता मे॑ ब्राह्मणवर्च॒सम्

2|| diśo jyotiṣmatīrabhyāvarte | tā me draviṇaṃ yacchantu tā me brāhmaṇavarcasam

हिन्दी अर्थ

हायन अनृषि यगि के मन्व (९२); प्वा् मनव (२३) गठित है 1 इन दीं म्नो के मवे कयकारथ् माव है" = ०८०११ मौर मत्व पे कथितः भावना" कायस्पं हं .1 मन्त (९३ न सौति प्रणो को “योगाभ्यास से हदथःे विलीन करना होत है ! यथा द चात प्राण "सवाध ह, शारीरिक तथा मानसिकं सव भरकर + ॥, गत्ति्यो के कारण 1 न की गतियो के निरोध से मनुष्यं हिसित, नहीं हाते,

English

Waters, your ceremonial share of Waters which the waters hold, which aids our sacrifice to Gods,

अध्याय १०

श्लोक 5.39

३॥ स॒प्त॒ऋ॒षीन॒भ्याव॑र्ते ।ते मे॒ द्रवि॑णं यच्छन्तु॒ ते मे॑ ब्राह्मणवर्च॒सम्

3|| saptaṛṣīnabhyāvarte | te me draviṇaṃ yacchantu te me brāhmaṇavarcasam

हिन्दी अर्थ

रजा होती है. इसीलियै मन्त्र २२ के भनुसार प्रजा मी संत्यपरायण है 1. कां०. १०।-यु० ५ भथर्वेवेद-भाष्यः . २६५ अरिं आपो अप॑ रिर्भमस्मव् । की भस्मदेनौं दुरितं सुपरतीकाः भ दुः्वध्यं र मर वन्दं ॥२४॥ तथा . स॒प्त. प्राण. ( मन्व २३) (भरिप्राः) पापरहित हो, गए है, भतः रिग्रकाभ्रथंहै पप । “रपो रिभरमिति पापनामनी” (निक्त ४।३। निष्पाप श्रौर पवित्र हो जाने पर मनुष्य पवित हो जाता है, भौर उसका

English

This as a remnant here I leave. Do not thou wash it clean away. With this we let the man go by who hates us and whom we abhor.

अध्याय १०

श्लोक 5.40

४॥ ब्रह्मा॒भ्याव॑र्ते ।तन्मे॒ द्रवि॑णं यच्छतु तन्मे॑ ब्राह्मणवर्च॒सम्

4|| brahmābhyāvarte | tanme draviṇaṃ yacchatu tanme brāhmaṇavarcasam

हिन्दी अर्थ

चाहिए, भौर . सात्त्विक मन का उपार्जन करना - चाहिए । तमी प्रजाप भ्ररिपराः“लो सकतीं है 1 यथा--“मन एवं मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः । मोक्ष के कारण है, भतः मित्र है। विष्णोः करमोंऽपि सपत्नहा पथिवीसैितोऽग्नतेनाः षा ¦ : (विष्णोः) विष्णु के (कमः) पराक्रम. वाला (असि) तु है, (सपत्न ह ) सपत्न का हनत करने वाला है, (पृथिवीसंदितः) , पृथवो मे तेज ष वर दष्ट) हमारे साथर कैरताः है, (म्) जिसके ¦

English

Whatever evil I have done within this last triennium, From all that woe and misery let the waters shield and guard me well.

अध्याय १०

श्लोक 5.41

५॥ ब्रा॒ह्म॒णाँ अ॒भ्याव॑र्ते ।ते मे॒ द्रवि॑णं यच्छन्तु॒ ते मे॑ ब्राह्मणवर्च॒सम्

5|| brāhmaṇā~ abhyāvarte | te me draviṇaṃ yacchantu te me brāhmaṇavarcasam

हिन्दी अर्थ

यथाक्षरं दाक्वयेतिशक्करी ; २६ पञ्चपवाति- कं १० ।सू०५. ्रथववेद-माष्य २६७ साथ (वयम् द्विष्मः) हम देष करते है! (सः) वह (मा) न (जीवत्) जीवित रहे, (तम्) उसे (प्राणः) प्राण ( जहातु) छीड जायं । 1 सुं का. वणन मन्व (३७) में हृभा है । मन्त्र मँ ,सावंभौम-शासंक स्वयं वाला है, भर्थात् जैसे परमेदवर का पराक्रम पृथिवी पर दहै, वह निज पराक्रमं दारा समप्र पृथिवी का शासन न्यायपूरव॑क करता है,वेसे तु भी सम्पुथिवीः के प्रजाजरनों पर न्यायपूवंक रासन कर श्रौर जो सावंभौम निंथमों के

English

Onward I urge your gathered floods: enter your own abiding- place, Uninjured and with all your strength. Let nothing bend or bow us down. May the pure Waters cleanse us from defilement,

अध्याय १०

श्लोक 5.42

६॥ (७) ४२-५० (१-९) विहव्यः।प्राजापत्या अनुष्टुप्, ४४ त्रिपदा गायत्रीगर्भानुष्टुप्, ५० त्रिष्टुप्।यं व॒यं मृ॒गया॑महे॒ तं व॒धै स्तृ॑णवामहै ।व्यात्ते॑ परमे॒ष्ठिनो॒ ब्रह्म॒णापी॑पदाम॒ तम्

6|| (7) 42-50 (1-9) vihavyaḥ| prājāpatyā anuṣṭup, 44 tripadā gāyatrīgarbhānuṣṭup, 50 triṣṭup| yaṃ vayaṃ mṛgayāmahe taṃ vadhai stṛṇavāmahai | vyātte parameṣṭhino brahmaṇāpīpadāma tam

हिन्दी अर्थ

जो कि पृथिवी प्रर मलिनाचरण वलेहै। गि इस “श्रात्मसंबोधन” के परचात् सावंभौमदशासक कहता है कि जँ समं शासक मिल कर, पृथिवी के भोगो से उसे भाग -रहित कर देते हँ जक्षि भजा भ्रौर हम शासको के साय द्वेष करता है, भ्रौर परिणामर्प मँ जिषकँ प्रति हम सब काभी द्वषहोजातादहै। उसे हम जीवित नहीं रहने देते, विरुद्ध चलता है, जिन नियमों का -निर्माण, प्रजा भ्रौर शासको को बहु- का निदेश मनवम हृभ्रा है । संशित तेज या उग्र । यथा “सत्यं बृहदृत- (विष्णोः) विष्णु के (कमः) पराक्रम वाला (भसि) तु है, (सपलहा)

English

Fair to behold remove our sin and trouble, and bear away ill- dream and all pollution. Thou art the step of Vishnu, rival-slayer, sharpened by earth, aglow with fire of Agni,

अध्याय १०

श्लोक 5.43

वै॒श्वा॒न॒रस्य॒ दंष्ट्रा॑भ्यां हे॒तिस्तं सम॑धाद॒भि।इ॒यं तं प्सा॒त्वाहु॑तिः स॒मिद् दे॒वी सही॑यसी

vaiśvānarasya daṃṣṭrābhyāṃ hetistaṃ samadhādabhi| iyaṃ taṃ psātvāhutiḥ samid devī sahīyasī

हिन्दी अर्थ

उग्र. (वायुतेजाः) तथा वायुस तेजस्वी तु है ।- हम् ) चै ( ्रन्तरि्नः (मा) न (जीवीत्) जीवित रहे, (तम्) -उसे (प्राणः) प्राण. (जहातु) .. भन्तरिक्ष की देवता वायु है । शतरुभों की वह हिसा करता, भौर उरे अन्तरिक्ष मेँ संचार करने सेः भाग रूप (सूयतेजाः) तथा सूं के सदुश तेजस्वी तु है । (ब्रहम्) म. (दिवम्

English

Earth have I ranged: from earth we bar him who hates us and whom we hate. Ours is superior place and ours is conquest: may I in all fights tread down spite and malice. Let him not live, let vital breath desert him.

अध्याय १०

श्लोक 5.44

राज्ञो॒ वरु॑णस्य ब॒न्धोऽसि ।सो॒३मुमा॑मुष्याय॒णम॒मुष्याः॑ पु॒त्रमन्ने॑ प्रा॒णे ब॑धान

rājño varuṇasya bandho'si | so3mumāmuṣyāyaṇamamuṣyāḥ putramanne prāṇe badhāna

हिन्दी अर्थ

हम देष करते है ।. (सः) वह -(मा) न (जीवीत्) जीवित रहे" (तम्) उसे (प्राणः) प्राण (जहातु) छोड़ जाय 1 । - सावभौम शासक अपने-भराप को सूयंसदुश तेजस्वी कहता है । सूर्यं . ; भिन्न करता है, वैसे साव॑मौम शासक भी लोकस्थ रात्रो को विनष्टं मनुष्य रादि सदृ प्राणी रहते ह --यह वैदिक मान्यता है । जेस वतंमानं वैज्ञानिक युग मे उत्कषेपक-विमान, सूयंलोक का भी अतिक्रमण कंर के, उसं से भी परे तक पहुचे ह, वसे सावंभौमशासक भी वहां पहुच कर शुभो.

English

With this I here invest the power and splendour, the life of that man and his vital breathing, the son of such a sire and such a woman, here do I overthrow and cast him downward.

अध्याय १०

श्लोक 5.45

यत् ते॒ अन्नं॑ भुवस्पत आक्षि॒यति॑ पृथि॒वीमनु॑ ।तस्य॑ न॒स्त्वं भु॑वस्पते सं॒प्रय॑च्छ प्रजापते

yat te annaṃ bhuvaspata ākṣiyati pṛthivīmanu | tasya nastvaṃ bhuvaspate saṃprayaccha prajāpate

हिन्दी अर्थ

सार्वभौम शासक, जोकि शरन्तरिध में भी उग्र होकर शासने करता है भपने-भ्रापं को वायु के सदृदा तेजस्वी कहता: है।वायुकेदो कामहै, गति भ्रौर गन्धन (हिसा). । वा गतिगन्धनयोः. कार. १०५ सू 9 . भरथवेवेद-माष्य २६६९ रूप (मनस्तेजाः) तथा मन के सवृ तेजस्वो तु है । (श्रम्) मै (दिः. दिशो से (तम्) उसे (निभंजामः) हम भाग रहित करते है (यः) .जोकिं ्रतीकार रूप मे (वयम् द्विष्मः) हम देष करते ह । (सः) वह (मा) न (जीवीत् ) भवित रहे (तम्) उसे (प्राणः) प्राण ( जहातु) छोड़ जाय ।

English

I follow Sūrya’s course in heaven, the course that takes him to the South. May that bestow upon me wealth and glory of a Brāhman’s rank. I turn me to the regions bright with splendour.

अध्याय १०

श्लोक 5.46

अ॒पो दि॒व्या अ॑चायिषं॒ रसे॑न॒ सम॑पृक्ष्महि ।पय॑स्वानग्न॒ आग॑मं॒ तं मा॒ सं सृ॑ज॒ वर्च॑सा

apo divyā acāyiṣaṃ rasena samapṛkṣmahi | payasvānagna āgamaṃ taṃ mā saṃ sṛja varcasā

हिन्दी अर्थ

मँ होता है तब की पूवं, परिचम, उत्तर, दक्षिण दिन्ाभों को.दिगभ्यः. कहा है इन दो कालो में न भ्रधिक. सर्दी होती है भ्रौरन. भधिक गर्मी । भरतः कार्यो के निमित्त मन भ्रधिक स्फ़ृति वालाहो जाता है। मन के सदु स्पूलि ख वेग वाला प्रौर कोई पदायं नहीं । क्षण में यह द्युलोक तथा ऽस से परे पहुंच जाता है । मन्त्र (२७) में चुलोक तक विक्रम करने का निदेश. . (विष्णोः) विष्णु के (क्रमः) पराक्रम वाला (रसि) तु है, (सपलनहा) . न (जीवीत्) जीवित रहे, (तम्) उसे (प्राणः) प्राण (जहातु) छोड़ दिशाभों का । भूमष्यरेखा से सूर्यं, ज॑ उत्तरायण की शरोर गति करता है बनती. है. वे अवान्तर" दिशाणं हँ । इसी प्रकार भमध्यरेखा से दक्षिणायन

English

May they bestow upon me wealth and glory of a Brāhman’s rank. I turn me to the Rishis Seven. May they, etc.

अध्याय १०

श्लोक 5.47

सं मा॑ग्ने॒ वर्च॑सा सृज॒ सं प्र॒जया॒ समायु॑षा ।वि॒द्युर्मे॑ अ॒स्य दे॒वा इन्द्रो॑ विद्यात् स॒ह ऋषि॑भिः

saṃ māgne varcasā sṛja saṃ prajayā samāyuṣā | vidyurme asya devā indro vidyāt saha ṛṣibhiḥ

हिन्दी अर्थ

से भ्रगले मासो मेँ गर्मी बढती जाती है; भ्रौर वायु कमारूप' मं तीत्र गतिः ली होती जाती है । इसे. बात कहते हँ । इंसः बात के कारण कई वृक्षं भी विशेष--२०-२९ मन्तं म सानंमौमदासन के सर्पत का भथिकः हा) सपल का हनन करने वाला है, (ऋक्संदितः) 'ऋवाश्रो द्वारां उग्र / ¦ ॥ हश्ा. है. (सामतेजाः) तथा साम के तेज.वाला तु है। (रह्). यै. (ऋच

English

I turn me unto Prayer. May that, etc. I turn me unto Brāhmans. May they etc. We hunt that man, we beat him down and slay him with our murderous blows.

अध्याय १०

श्लोक 5.48

यद॑ग्ने अ॒द्य मि॑थु॒ना शपा॑तो॒ यद् वा॒चस्तृ॒ष्टं ज॒नय॑न्त रे॒भाः ।म॒न्योर्मन॑सः शर॒व्या॒३ जाय॑ते॒ या तया॑ विध्य॒ हृद॑ये यातु॒धाना॑न्

yadagne adya mithunā śapāto yad vācastṛṣṭaṃ janayanta rebhāḥ | manyormanasaḥ śaravyā3 jāyate yā tayā vidhya hṛdaye yātudhānān

हिन्दी अर्थ

(तस्). उस. (निभेजाम्ः) हम भाग. रहित करते ह (यः) जोकि (अस्मान् १. भ्रवान्तर दिशाए' सूयं कौ हैनिक गति के साथ-साथ पर्तिदित- बदलती कां० १०५ सु०;५ भ्रथववेद-पाष्य २७१ दरेष्टि) हमारेसाथः द्वेष -करता है, भौर , (यम्) -जिस. -के साथ (वयम् ष्मः) हम द्वेष करते. है । (संः) वह (मा) नं (जीवीत्) . जीवित रहे, (तम्) उसे (प्राणः) प्राणं (जहातु) छोड जाय। सावभौम शासक कहता है कि मै. ऋचां. के राजनेतिक उपदेशों वाला-भी हूं 1 शासन मे समयानुसार उग्रता तथा शन्ति कै प्रयोग-करना होता है । यथा “साम, दानं, दण्ड, भेद इन चार उपायो का भवलम्बन शासको को करना. होता है। इन उपायो में साम शौर दण्डका भो कथनं

English

We with the spell have hurried him to Parameshthin’s opened jaws. Let the shot missile catch him with Vaisvānara’s two mighty fangs.

अध्याय १०

श्लोक 5.49

परा॑ शृणीहि॒ तप॑सा यातु॒धाना॒न् परा॑ग्ने॒ रक्षो॒ हर॑सा शृणीहि ।परा॒र्चिषा॒ मूर॑देवां छृणीहि॒ परा॑सु॒तृपः॒ शोशु॑चतः शृणीहि

parā śṛṇīhi tapasā yātudhānān parāgne rakṣo harasā śṛṇīhi | parārciṣā mūradevāṃ chṛṇīhi parāsutṛpaḥ śośucataḥ śṛṇīhi

हिन्दी अर्थ

भरभिप्राय यह सपलल को वैदिक-संस्ृति से वल्चित्त कर देना चाहिए, वंदिक रोर “साम द्वारां सामवेद को मी सूचिते किया है । शेष भिप्रायः (म॒न््र सपत्न का : हनन करने वाला है, (यज्ञसंशितः) यज्ञ दारा.उग्र हरा शामिल होने से व्रञ्चित कर देना चाहिए जहां ऋचा्रो कँ भ्राषार पर सामगान हो रहा हो । यह सपत्न का सामाजिक बहिष्कार है । (सः) वह (मा) न (जीवीत्) जीवित रदे, (तम्) उसे (प्राणः). प्राण

English

This offering, and the mightiest Goddess, the Fuel, eat him up! Thou art the bound of Varuna the King. Bind, such an one, the son of such a woman, in vital breath and in the food that feeds him.

अध्याय १०

श्लोक 5.50

अ॒पाम॑स्मै॒ वज्रं॒ प्र ह॑रामि॒ चतु॑र्भृष्टिं शीर्ष॒भिद्या॑य वि॒द्वान्।सो अ॒स्याङ्गा॑नि॒ प्र शृ॑णातु॒ सर्वा॒ तन्मे॑ दे॒वा अनु॑ जानन्तु॒ विश्वे॑

apāmasmai vajraṃ pra harāmi caturbhṛṣṭiṃ śīrṣabhidyāya vidvān| so asyāṅgāni pra śṛṇātu sarvā tanme devā anu jānantu viśve

हिन्दी अर्थ

... (विष्णोः). विष्णु के (क्रमः) पराक्रम वाला (भसि) तु है, ( सपलनहा ) सपत्न का -हनन करने वाला है, (भोषधीसंदितः) उग्र स्वभव वाली . भ्नोषधियों मे उग्र, (सोमतेजाः) भौर सोमसदुश तेज.वाला तु है । (श्रहम्) करते है (यः). जो किं (भ्रस्मान् इष्टि) हमारे साथ दषकरतादहै, भौर. न. (जीवीत्) जीवितः रहे, भौर (तम्) उसे (प्राणः) प्राण (जहातु). ॥

English

Celestial Waters have I sought: with juice have I besprinkled them. With milk, O Agni, have I come; bestow upon me splendid strength. Give me the boon of splendid strength; give, Agni! progeny and life.

अध्याय १०

श्लोक 6.1

मणिबन्धनम्।१-३५ बृहस्पतिः।फालमणिः, वनस्पतिः, ३ आपः।अनुष्टुप्, १,४,२१ गायत्री, ५ षट्-पदा जगती, ६ सप्तपदा विराट् शक्वरी, ७-१० त्र्यवसाना अष्टपदाऽष्टिः (१० नवपदा धृतिः), ११, २०, २३-२७ पथ्यापङ्क्तिः १२-१७ त्र्यवसाना षट्-पदा शक्वरी, ३१ त्र्यवसाना षट्-पदा जगती, ३५ पञ्चपदा त्र्यनुष्टुब्गर्भा जगती।अ॒रा॒ती॒योर्भ्रातृ॑व्यस्य दु॒र्हार्दो॑ द्विष॒तः शिरः॑ ।अपि॑ वृश्चा॒म्योज॑सा

maṇibandhanam| 1-35 bṛhaspatiḥ| phālamaṇiḥ, vanaspatiḥ, 3 āpaḥ| anuṣṭup, 1,4,21 gāyatrī, 5 ṣaṭ-padā jagatī, 6 saptapadā virāṭ śakvarī, 7-10 tryavasānā aṣṭapadā'ṣṭiḥ (10 navapadā dhṛtiḥ), 11, 20, 23-27 pathyāpaṅktiḥ 12-17 tryavasānā ṣaṭ-padā śakvarī, 31 tryavasānā ṣaṭ-padā jagatī, 35 pañcapadā tryanuṣṭubgarbhā jagatī| arātīyorbhrātṛvyasya durhārdo dviṣataḥ śiraḥ | api vṛścāmyojasā

हिन्दी अर्थ

फो करते भ्रादि. (अस्माकम्) हमारे हो गणु है, (विवः) सब (श्रयतीः) -दातरुरूप (पृतनाः) सेनाग्रं के (रभि); पभिमुख, संमुख (श्रस्थाम्). मँ खड़ा उ माता के (पवस्य) धूल की (वर्ष). वीष्ठिको (तेजः) तेल को. १. भअ्रथवा शासन की 'पुरुष-सेनार्म्रो" के तेज वाला'है।. . ˆ . ३. पुत्र काः परिचय मासौ कै नाम द्वारा भी वेकाभिमतः है । ्गुष्यायंण इरा पूत केःगो्नोम.का कंथनःहृभ्रा है + . .:. '; + (गणम्) भाणः कौ, (भः) भयु को (नवेष्टयाभिः) वरां , जयेत प्राणम् / -पराण-को,:(प्राुः) भायुः को . (निवेष्टयामि+) षेरतां हु" लपेटता " जितम् - भरथात् “जो हम ने जीता है वह हमारा हो गा है, जो ६३ जो हम ने हमारा हो गया दहै, जो का क हमारा हो गयाः हैः । विद्वा. ना ९. नी की विरोधिनी सब सेनाएुं । वेदों के -भ्रतुसार माण्डलिकः ४.० ८५ चुनाव प्रजाएं करती है, मण्डलिक राजा.सम्ना्ो" का चुनाव्

English

The glorification of an all-powerful amulet With power I cut away the head of my malignant rival, of mine evil-hearted enemy.

अध्याय १०

श्लोक 6.2

वर्म॒ मह्य॑म॒यं म॒णिः फाला॑ज्जा॒तः क॑रिष्यति ।पू॒र्णो म॒न्थेन॒ माग॑म॒द् रसे॑न स॒ह वर्च॑सा

varma mahyamayaṃ maṇiḥ phālājjātaḥ kariṣyati | pūrṇo manthena māgamad rasena saha varcasā

हिन्दी अर्थ

को पीडित करने वालों को (बृणीहि) तु विरीणं कर, विनष्ट कर्, (परा) तेज दवारा (शृणीहि) तू विणे कर, विनष्ट कर । (परा) पराङ्मुख हृएं निज दीप्ति द्वारा (बुणीहि) तु विचीणे कर, विनष्ट कर, (परा) पराङ्मुख भ्रपने को तृप्त करने बालों को (शृणीहि) विश्चीणं कर, विनष्ट कर । वर्ण ' , अयवेवेद्र-माष्य कां० १० सुभ

English

This Charm did Chandra wear, with this conquered the forts of Asuras, the golden forts of Dānavas. This yields him glory and renown, again, etc.

अध्याय १०

श्लोक 6.3

यत् त्वा॑ शि॒क्वः प॒राव॑धी॒त् तक्षा॒ हस्ते॑न॒ वास्या॑ ।आप॑स्त्वा॒ तस्म॑ज्जीव॒लाः पु॒नन्तु॒ शुच॑यः॒ शुचि॑म्

yat tvā śikvaḥ parāvadhīt takṣā hastena vāsyā | āpastvā tasmajjīvalāḥ punantu śucayaḥ śucim

हिन्दी अर्थ

निज हरीर में धारणः किये “ रहता है । सर्वोच्च दो भ्रधिकारियों के निये काऽ-१५ सु०६ भ्रथववेद-भाष्य २९१ वीरता: के कमं के लिये । (सः) बह सम्नाट् (मस्मे ) इस बृहस्पति के लिये (भूयोभूयः) वार-वार या भ्रधिकाधिक . खूप मे, (इवः इवः) भ्राएःदिन- प्रति-दिनं (बलमिद्) सेन्यबल ही (दुहे) दोहता है, - प्रदान .करता है+ कृ्णंन-हुभा है ।-बलस् सैन्य (गीता भष्याय. १, दलोक ४) । . . यमव॑ध्नाद् बहस्पातिभेणि फार इतश्चुत॑युगरं खदिरमोजसे ।

English

foes. The Amulet Brihaspati formed for the Gods, that slew the fiends.

अध्याय १०

श्लोक 6.4

हिर॑ण्यस्रग॒यं म॒णिः श्र॒द्धां य॒ज्ञं महो॒ दध॑त्।गृ॒हे व॑सतु॒ नोऽति॑थिः

hiraṇyasragayaṃ maṇiḥ śraddhāṃ yajñaṃ maho dadhat| gṛhe vasatu no'tithiḥ

हिन्दी अर्थ

इसलिये भूवमोतिकः जगत् भे सूवाःकारण . वागु या.वात्है । इसलिये वाषु.याः ¦ व्रात मानां गया प्रतीत होत्ना है । सम्भवतः भकार पारचात्य -वशञानिरकौ का एलः है । करों०.१०.। सु०६ भरथवंवेद-माष्य २९५७ महत्त्व .(दुे) दोहा है, (सूयोभूयः) बार-बार या प्रधिकाधिकः रूप मे, ठवर ! तु (द्विषतः) रोग-रतरप्रों का (जहि). हनन कर ।

English

illustrious fame. The Amulet Brihaspati made for the Gods, that slew the fiends, That Amulet here hath come to me combined with all prosperities.

अध्याय १०

श्लोक 6.5

तस्मै॑ घृ॒तं सुरां॒ मध्वन्न॑मन्नं क्षदामहे ।स नः॑ पि॒तेव॑ पु॒त्रेभ्यः॒ श्रेयः॑श्रेयश्चिकित्सतु॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्वो॑ दे॒वेभ्यो॒ म॒णिरेत्य॑

tasmai ghṛtaṃ surāṃ madhvannamannaṃ kṣadāmahe | sa naḥ piteva putrebhyaḥ śreyaḥśreyaścikitsatu bhūyobhūyaḥ śvaḥśvo devebhyo maṇiretya

हिन्दी अर्थ

„ मन्त्र ११,१२ का विषय एक है । कृषि द्वारा, शरीरस्यी कतर भ, कर्मरूप कृषि का वर्णेन हृभा है, जिस का परिपाक है सुल भौर दुःख । है। इस कृषि की रक्षा प्राणापान करते हैँ । जिन श्र्विनौ कहा है । ये दोनो व तल्प है, वायुरूप हैँ । यह वायु ही प्राणं रौर श्रपानरूप म परि. (स्यति) -बृहैत्-बरहयाण्डः के पर्ति परमेदवंर ने, (भारवे,वाताय)) शीघ्रगति काली वायु के निर्माणः के लिये (यम्, मणिम्). जिसं मणि की (त्वे; को उसने - (्रजयत्) शीता, (सः) उसं सपिता न यात

English

That Amulet may the Deities bestow on me to win success, The conquering, strength-increasing Charm, the damager of enemies.

अध्याय १०

श्लोक 6.6

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॑र्म॒णिं फालं॑ घृत॒श्चुत॑मु॒ग्रं ख॑दि॒रमोज॑से ।तम॒ग्निः प्रत्य॑मुञ्चत॒ सो अ॑स्मै दुह॒ आज्यं॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

yamabadhnād bṛhaspatirmaṇiṃ phālaṃ ghṛtaścutamugraṃ khadiramojase | tamagniḥ pratyamuñcata so asmai duha ājyaṃ bhūyobhūyaḥ śvaḥśvastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

तथा सत्थस्तुतिं वाणीं कां ( इ दोहन.किया, बृहस्पतिं को प्रदानं किया, . (भूयोभूयः) बार-बार याँ शकाधिंकंरप (इवः इवः) .प्राए' दिनः परमेश्वर 1. तुः (द्वतः). लारीरिक-मानुसिक-भाव्यासमिक ःरोगूपी! शनुभों (मणिम्) :यहःमणि; है -पररमेद्वरीय-कामना, . वातःके निर्माणाय +-इसं निर्भाण कायंरूपी-ःमणि को भानो सविता ने भी बन्धा; धारण किया, जिस द्वारा सविता दिन क निर्माणं करतां है, । सवितु-काल के पर्दचात् ही दिनं रामः, भधस्तात् कृष्णं .: १२।२।१४) + सविता केः कालः मे मूमि -प्र

English

I bind on me my happy fate with holy prayer and energy. Foeless destroyer of the foe, it hath subdued mine enemies. May this Chaim, offspring of the Gods, make me superior to my foe.

अध्याय १०

श्लोक 6.7

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॑र्म॒णिं फालं॑ घृत॒श्चुत॑मु॒ग्रं ख॑दि॒रमोज॑से ।तमिन्द्रः॒ प्रत्य॑मुञ्च॒तौज॑से वी॒र्याऽय॒ कम्।सो अ॑स्मै॒ बल॒मिद् दु॑हे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

yamabadhnād bṛhaspatirmaṇiṃ phālaṃ ghṛtaścutamugraṃ khadiramojase | tamindraḥ pratyamuñcataujase vīryā'ya kam| so asmai balamid duhe bhūyobhūyaḥ śvaḥśvastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

प्रकाशः होता है; मानो संविताने स्वः” पर निजसत्ता से विजगर पाली है । त्मिक है, जिसे कि उपनिषदों मे “कामद प्राय कामनाः. कट ह.1..;कामन है २. “सविता” प्रातःकाल का सूयं .है, जबकि धुलोक में तो प्रकाश होता है, भौर कां९-१५। सू९ . भ्रथरववेद-माष्य .. २६६ मन्तो द्वारा परमेद्वर की स्तुतियां उपासक करते है, मानो. सविता ने एन स्तुतिवाणियों का दोहन बहस्पति-परमेदवर के लिये किया है । ये स्तुतियां बार-बार बहुमात्रा मं प्रतिदिनं होती दहै ।. परमेदरवर् सच्चे उपासक के शारीरिक रादि रोगो, मलों (इन रोगो, चात्रभ्रो) का, इन स्तुत्यो के वारा

English

So may this charm whose milk expressed these three worlds longingly await, Be fastened on me here, that it may crown me with surpassing power.

अध्याय १०

श्लोक 6.8

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॑र्म॒णिं फालं॑ घृत॒श्चुत॑मु॒ग्रं ख॑दि॒रमोज॑से ।तं सोमः॒ प्रत्य॑मुञ्चत म॒हे श्रोत्रा॑य॒ चक्ष॑से ।सो अ॑स्मै॒ वर्च॒ इद् दु॑हे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

yamabadhnād bṛhaspatirmaṇiṃ phālaṃ ghṛtaścutamugraṃ khadiramojase | taṃ somaḥ pratyamuñcata mahe śrotrāya cakṣase | so asmai varca id duhe bhūyobhūyaḥ śvaḥśvastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

शीघ्रगतिवालीः वायु के निर्माण के लिये; : (यम्, मणिम्) जिस -कामनी; को (श्रापः) जल भी (बिभ्रतीः) मानो धारण करते हुए भ्रौर (भक्षिताः; न क्षीण होते हृए (सदा) सदा (घावन्ति). .गति करते है दौड़ते रहे) (सः) उस बहस्पति ने (राभ्यः) इन जलो कै लिये या इन जलो से (श्रमु- इतः मरो. वायु के निर्मोणका ;व्रार-बार वणेन भ्राताहै कारणे यह है कि वैदिक वर्णेनों मँ.परमेक्वर द्वारा . भाकाश, भाकाश से वायु, प्रौरं ने वात के उत्मादन; मेँ कामनारूपीः त्र्त-का धारण किया । परमेदवरने (भाभ्यः) इन “जलो . कै. लिये” श्रमृतत्त्व को. दोहा । तमी. सानो जल “सदा गतिˆकर रहे है, विना क्षीण हृए । नदियों से समुद्र की भ्रोर, रौर

English

The Charm to which men, Fathers, Gods look ever for their maintenance, May this be fastened on me here, to crown me with surpassing power As, when the plough hath tilled the soil, the seed springs up in. fertile land,

अध्याय १०

श्लोक 6.9

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॑र्म॒णिं फालं॑ घृत॒श्चुत॑मु॒ग्रं ख॑दि॒रमोज॑से ।तं सूर्यः॒ प्रत्य॑मुञ्चत॒ तेने॒मा अ॑जय॒द् दिशः॑ ।सो अ॑स्मै॒ भूति॒मिद् दु॑हे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

yamabadhnād bṛhaspatirmaṇiṃ phālaṃ ghṛtaścutamugraṃ khadiramojase | taṃ sūryaḥ pratyamuñcata tenemā ajayad diśaḥ | so asmai bhūtimid duhe bhūyobhūyaḥ śvaḥśvastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

्नोर गति कर रहे द । भतः मानों जल भ्रमृत है । या “श्राम्यः-=इन जलो से” षरमेषवर ने हमारे लिये भ्रमृतत्व दोहा । जलचिकित्सा द्वारा हमारी “्रमृत भो कटहूते हैँ । यथा “भ्रमृतम् उदकनाम” (निषं० १११२) । जलो मँ भैषज्यगुण है धिन के सेवन से मनुष्य भी भ्रमत हो जाते ह, पूणं निवास है । “भ्रापः पृणोत भेषजं वर्यं तन्वे -ममं" (अथव ० १।६।३)» भर्थात् है जलो तुम मेरी ततु के लिये रोगनिवारक भ्रौषध प्रदान करोः; दीघ्रगतिवाली वायु के निर्माण के लिये (यम् मणिम्) जिस मणिकों को पदां करती. है 1 (सः) उस राजा वरुण ने (श्रस्मं) इस -बृहस्पति कै लिये (सत्यमिद्). सत्य को (दुहे) दोहा, (भूयोभूयः) बार-बार या -भधिकाधिक

English

Let cattle, progeny, and food of every kind spring up with me. Charm, forwarder of sacrifice, who hast a hundred priestly fees.

अध्याय १०

श्लोक 6.10

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॑र्म॒णिं फालं॑ घृत॒श्चुत॑मु॒ग्रं ख॑दि॒रमोज॑से ।तं बिभ्र॑च्च॒न्द्रमा॑ म॒णिमसु॑राणां॒ पुरो॑ऽजयद् दान॒वानां॑ हिर॒ण्ययीः॑ ।सो अ॑स्मै॒ श्रिय॒मिद् दु॑हे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वः॒श्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

yamabadhnād bṛhaspatirmaṇiṃ phālaṃ ghṛtaścutamugraṃ khadiramojase | taṃ bibhraccandramā maṇimasurāṇāṃ puro'jayad dānavānāṃ hiraṇyayīḥ | so asmai śriyamid duhe bhūyobhūyaḥ śvaḥśvastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

ता है, श्रौर विजेतार्प मँ परास्त सेना के ्रभिमूल विन किसी भय कै -खडा होकर भ्रपनी विजय प्रदशित करता है ।. २४.३५ मन्तो, में “सपत्न” ३ मा्डिकराा को बर्ण क है (गडु ९७, पियत इति शरणः, कां० .१८॥ ०.४. भथरवैवेद-माष्य २७७ (सूरस्य) सूय की (भ्रावृतम्, भनु) गति के भ्रनुूप :.भवतं) मै दिवो. की-भर(भावुतम् रनु, रावत) .सूरै की गति.के भ्रनुरूप गति करता हः चलता हूं ।, (सा). वह भावत् (मे) मुभे -(ब्रविणम्) ब॑ल या.घन

English

This Amulet of citron-wood shall make for me a trusty shield Filled with the mingled beverage, with sap and vigour hath it come. What though the strong-armed carpenter have cleft thee with his hand and axe.

अध्याय १०

श्लोक 6.11

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॒र्वाता॑य म॒णिमा॒शवे॑ ।सो अ॑स्मै वा॒जिन॑ दुहे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

yamabadhnād bṛhaspatirvātāya maṇimāśave | so asmai vājina duhe bhūyobhūyaḥ śvaḥśvastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

की दीप्ति देवे। । । व 3 ५ ध “ सै दक्षिणायन की श्नोर -जांता हषा दक्षिण दिशा कीं भ्रोर गति शान्तप्रकृतिकहो जाता-है † सा्वैमौमशासक भी चासन. शान्ति चाहता हीः मत्लरमें द्रविणं कहा है,- वास्तविक बल या धन कहा-है । शासन -का हो: उन्नतिं कर सेकंती. है! दक्षिण, दिशा कीः श्रोर जाता हृ. सूर्यं मकरः +) (तवोती) ज्यति वाली. (दिः परमि). दिभको; भोर भरावर्ते) मै सावभौम सक भावतं्-करता हं, भति हुं = (ताः) वे (मे) के (इतम्) बल. या प्न (यच्छन्त). वेव, (ताः). वे. (१), भूमे

English

Pure animating waters shall cleanse thee and make thee bright again. This Amulet, decked with chain of gold, shall give faith, sacrifice, and might, and dwell as

अध्याय १०

श्लोक 6.12

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॒र्वाता॑य म॒णिमा॒शवे॑ ।तेने॒मां म॒णिना॑ कृ॒षिम॒श्विना॑व॒भि र॑क्षतः ।स भि॒षग्भ्यां॒ महो॑ दुहे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

yamabadhnād bṛhaspatirvātāya maṇimāśave | tenemāṃ maṇinā kṛṣimaśvināvabhi rakṣataḥ | sa bhiṣagbhyāṃ maho duhe bhūyobhūyaḥ śvaḥśvastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

२७८ अथवेवेद-माष्य कां०.१० ! प्रु ५ भौर जाति हृए उस की.ज्योति, उत्तर की रोर, दिन भरततिदिन ष्रटती जाती है । सावंभौमः शासक भी . शासन कायं मेँ ज्योतिः क्रा श्रभिलाषी है । यह (सप्त ऋषीन् ्रभि). सात ऋषियों की श्रोर . (भावत) मै सवंमौम- शासक भ्ावतन करता ह, भ्राता हं । (ते) वे (मे). मु (द्रविणम्) बल यां है । यथा “सप्त ऋषयः प्रतिहिताः शरीरे” (यजु ३४५५५) । चाहता है, जोकि क्षि रूप हौः कर उसे सन्मार्गे का दर्शन कसु । सवंसाघारण'भानुष शरीर मे येः सात् ऋषिरूप. नहो कर, ग्रषुररूपः.मेःरहते है, जिसं से मनुष्य श्रायः सन्माद्ीं नहीं होते । इन सात ऋषियों से सा्ै- भौमलासक सात्तविकद्रविण चाहता है, भौर श्राह्मणवचंस चाहताहै ।.

English

guest within our house. To this we give apportioned food, clarified butter, wine, and meath. May it provide each boon for us as doth a father for his sons.

अध्याय १०

श्लोक 6.13

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॒र्वाता॑य म॒णिमा॒शवे॑ ।तं बिभ्र॑त् सवि॒ता म॒णिं तेने॒दम॑जय॒त् स्वः ।सो अ॑स्मै सू॒नृतां॑ दुहे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

yamabadhnād bṛhaspatirvātāya maṇimāśave | taṃ bibhrat savitā maṇiṃ tenedamajayat svaḥ | so asmai sūnṛtāṃ duhe bhūyobhūyaḥ śvaḥśvastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

रे (बहणनर्वसम्) बरह्िण की दौप्तिदे।, „ सावंमौम्चासक, निजं साते को ऋषिकोटि . का बनाने कै तिये, ब्रह्म की ्रोर भ्राव्तेन करता है, उस की भोरभ्राताहै। “ कां०-१०)1 सुर ४ भरथर्वेवेद-भाष्य २७९ (अरथवं वेद), तथा जगत् का स्वामी परमेद्वर । ३७-४१ के मन्तो मे शास- को के लिये भवंश उपस्थित ःकिया है । ६. अ, यं व॒यं मृगयामहे तं वधे स्दंणवामहै। . - दारां (तम्) उसे -(अरंपीपदाभि हैमने भेज दिया है, सकपित्रःकरः दतरा है ।

English

Again, again, from morn to morn, having approached the deities. The Charm Brihaspati hath bound, the fatness-dropping citron- wood, the potent Khadira for

अध्याय १०

श्लोक 6.14

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॒र्वाता॑य म॒णिमा॒शवे॑ ।तमापो॒ बिभ्र॑तीर्म॒णिं सदा॑ धाव॒न्त्यक्षि॑ताः ।स आ॑भ्यो॒ऽमृत॒मिद् दु॑हे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

yamabadhnād bṛhaspatirvātāya maṇimāśave | tamāpo bibhratīrmaṇiṃ sadā dhāvantyakṣitāḥ | sa ābhyo'mṛtamid duhe bhūyobhūyaḥ śvaḥśvastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

जौ शासक ब्राह्यंणवक्र॑स" को ्रप्तेः नही, उस कीं खीज' कर के, उसे विनष्ट करने की मावनत मस्त में प्रतीतं होती -है । उसे. सौवंभौमशासक क ९८? भ्रथववेद-भाष्य कां०-१७.।-स्०५ करना चाहिए । “वधः वच्ननाम (निधं. २।२०).। स्तृणवामहै “‰तूणाति" वधकर्मा (निषं° २।१९);। .. वैश्ानरस्य हैषरौभ्यां हेतिसतं सम॑धादुभि । नि, ्य॑ तं प्सात्वाहुतिः समिद् . देवी सदीवपी..॥४३॥; . :. : . दिविध नियमों के साथ; (तम्) उस -शासक को. (म्रभि) साक्षात् (सम- " धात्) सम्बद्ध कर दिया है । -(इयम्) यह (सदहीयसी). बलशालिनी (देवी)

English

strength, This Agni hath put on: it yields clarified butter for this man. Again, again, from morn to morn. With this subdue thine enemies.

अध्याय १०

श्लोक 6.15

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॒र्वाता॑य म॒णिमा॒शवे॑ ।तं राजा॒ वरु॑णो म॒णिं प्रत्य॑मुञ्चत शं॒भुव॑म्।सो अ॑स्मै स॒त्यमिद् दु॑हे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

yamabadhnād bṛhaspatirvātāya maṇimāśave |taṃ rājā varuṇo maṇiṃ pratyamuñcata śaṃbhuvam| so asmai satyamid duhe bhūyobhūyaḥ śvaḥśvastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

हेतिः वज्नाम (निधं ° २।२०) । यह् हेति दण्डसंविधान.है। दष्टरा- = ॥ भी कहा है, जिस के प्रति समिदाधान लूपी भराहूति देनी है । यह भाहूति देवी है,दिव्यरूपा है । सामान्य काष्ठसूपी नहीं । यह शासंकलूपी भ्राहति है । शासको को भी सचेत करने वाली है । संहः बलनाम (निकषं २।९) । मत्त्र (सः). बहःतु.: (आसूष्यायणम्) .उस् : .गो्र के, (अमुष्याः). उस मातरा के

English

The Charm Brihaspati hath bound, the fatness-dropping citron- wood, the potent Khadira, for strength,

अध्याय १०

श्लोक 6.16

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॒र्वाता॑य म॒णिमा॒शवे॑ ।तं दे॒वा बिभ्र॑तो म॒णिं सर्वां॑ल्लो॒कान् यु॒धाज॑यन्।स ए॑भ्यो॒ जिति॒मिद् दु॑हे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

yamabadhnād bṛhaspatirvātāya maṇimāśave | taṃ devā bibhrato maṇiṃ sarvāṃllokān yudhājayan| sa ebhyo jitimid duhe bhūyobhūyaḥ śvaḥśvastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

बरान्धै,. बन्दीकृतः कर ८.१. प "2 राजा” (यजु ८।३७) :। जो शासक संवंभौमशासन यां सम्राट् शासनः के करा अभिप्रायं है “दण्डसंविषान" । परमेइवररूपी वरुण-रसजा शरीर उंस के (भूवस्पते) है भूपति ! भूमि के पति ! (ते) तेस (यत् भ्रन्नमू्) जो है, (तस्य) उस कां (यथोचित विभागं (नः). - हमे श्रजांभरों को

English

This Charm hath Indra put on him for power and manly puissance. It yieldeth strength to strengthen him, again, again, from morn to morn, having approached the deities.

अध्याय १०

श्लोक 6.17

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॒र्वाता॑य म॒णिमा॒शवे॑ ।तमि॒मं दे॒वता॑ म॒णिं प्रत्य॑मुञ्चन्त शं॒भुव॑म्।स आ॑भ्यो॒ विश्व॒मिद् दु॑हे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

yamabadhnād bṛhaspatirvātāya maṇimāśave | tamimaṃ devatā maṇiṃ pratyamuñcanta śaṃbhuvam| sa ābhyo viśvamid duhe bhūyobhūyaḥ śvaḥśvastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

या समग्र पंथिवी का क्षासकं है। संमंग्र पृथिवी में जोभ्रनं पैदा होती है उसं का स्वामी साबेभौमदोांसक है, यह् वेदि भावना प्रतीत. होतीं ई यथोचितः विमागःक्ररता है । . . . , करता है । देस से प्नोषधियां रसवती: . होती है । गौएं इन्दं खा कर. प्रभूत वेद मे हुई है । यथा “पयः पशूनां रसमोषधीनां बृहस्पतिः सविता, मे निय- £ विमं अस्यं देवा इन्र विधात खष् ऋषिमिः ॥४७॥ ˆ

English

The Charin Brihaspati, etc. This Charm hath Soma put on him for might, for hearing, and for sight.

अध्याय १०

श्लोक 6.18

ऋ॒तव॒स्तम॑बध्नतार्त॒वास्तम॑बध्नत ।सं॒व॒त्स॒रस्तं ब॒द्ध्वा सर्वं॑ भू॒तं वि र॑क्षति

ṛtavastamabadhnatārtavāstamabadhnata | saṃvatsarastaṃ baddhvā sarvaṃ bhūtaṃ vi rakṣati

हिन्दी अर्थ

साथ (सं सृज) संसग करं, (प्रजया ) सन्तान के साथ (सम्) संसगं कर, (भायुषा).स्वस्थ श्रौर दीष . रायु के साथ (सम्) संसगे कर । (मे) मेरे चषिकोटि के भमात्यो सहित, मेरे इस काम.को (विद्यात्) जाने । समृद्धि । दुष भौर कृषिकमं की समदि शोने पर सन्तार्नो कौ पालन-पोषण होता है, तथा इन के सेवन से' भ्ायु मीबदतीहै1 -' १, के देवापि भरौर शन्तनु के पआस्यानसम्बन््ी. ऋषा. (ऋ १०।९०।५) रं कृषिकमं के लिये होला है, इस का जल पृथिवी सँ ही विलीन हो जाता है, समुद्रः

English

This yields him energy indeed, again, again, etc. The Charm Brihaspati, etc. This Sūrya put on him, with this conquered the regions of the sky.

अध्याय १०

श्लोक 6.19

अ॒न्त॒र्दे॒शा अ॑बध्नत प्र॒दिश॒स्तम॑बध्नत ।प्र॒जाप॑तिसृष्टो म॒णिर्द्वि॑ष॒तो मेऽध॑राँ अकः

antardeśā abadhnata pradiśastamabadhnata | prajāpatisṛṣṭo maṇirdviṣato me'dharā~ akaḥ

हिन्दी अर्थ

तक नहीं पहंबता । (“कौ पूथिव्यां लीयते इति कुल्या" । कां० १० । सुऽ ४ - भ्रथर्वेवेव-भाष्य २५३ पति-पत्नी" (यद्) जो (चपातः). .एकदुसरे. को चाप देते है, तथा (सभाः) होती (तया) उस दरार . (यावुधानान्) यातनाश्रौः र्यात् पीड़ारभों के निषा, प्रनापीड़कों को; (हदगरे). उनके हृदयं म (विष्य) -बीषं 4. . -; भादि. करने पर नः परमेश्वर के स्तावकः होते हए भी-कटु वाणी बोलने

English

This yieldeth him ability, again, etc. The Charm Brihaspati, etc.

अध्याय १०

श्लोक 6.20

अथ॑र्वाणो अबध्नताथर्व॒णा अ॑बध्नत ।तौर्मे॒दिनो॒ अङ्गि॑रसो॒ दस्यू॑नां बिभिदुः॒ पुर॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

atharvāṇo abadhnatātharvaṇā abadhnata | taurmedino aṅgiraso dasyūnāṃ bibhiduḥ purastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

(प्रहरामि) प्रहार करता हुं । (सः) वह वच (भस्य) इस रक्षः के (पिष देवाः) -पुथिवी के. सब दिव्य-सज्जन. - (मे) मेरे (तत्) उस संदीकृकिः चाहिए । “स्मै” सर्वनामं पद एकः वंचन महै जो कि पूरवे कथितं ५५ भ शिरोभेदन को व्यवस्थां संमफ-कर, हिन्दुभरो ने सम्भवतः जलते.दव के शिरोभेदन की प्रथा चलगई हो ह ॥ + = ५

English

The Amulet Brihaspati bound on the swiftly-moving Wind. This yieldeth him a vigorous steed, again, etc.

अध्याय १०

श्लोक 6.21

तं धा॒ता प्रत्य॑मुञ्चत॒ स भू॒तं व्यऽकल्पयत्।तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

taṃ dhātā pratyamuñcata sa bhūtaṃ vya'kalpayat| tena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

(१) राषट् केः शानु माई के पुत्र को भी. शिरः छं का. दण्ड. (६). । (३). फाल “खदिर' काष्ठ! काः होता है जिसे.क्रि तर्वान घडा हैँ “सोम” सेना का मागं दशक (८) भी धारणः करता है. २ (७), मन्व १२ मः कृषि है, शरीरकषेतर, मे . कम-वीजो क) नोना ।. यहं दवर (१५), देवताः. (१६), ऋतुएं, मास माससमह, संबरत्सर (१८); . श्रापः.( १४). भी. धारण करते है इससे ज्ञात होताः है किः यह मणि खदिर या खदिर फाल से उत्पत स्थूल मणि नहीं, जिसे रिं सूयं प्रादि भी प्रारण

English

The Asvins with this Amulet protect this culture of our fields. This yields the two Physicians might, again, etc. Savitar wore this Amulet: herewith he won this lucid heaven.

अध्याय १०

श्लोक 6.22

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॑र्दे॒वेभ्यो॒ असु॑रक्षितिम्।स मा॒यं म॒णिराग॑म॒द् रसे॑न स॒ह वर्च॑सा

yamabadhnād bṛhaspatirdevebhyo asurakṣitim| sa māyaṃ maṇirāgamad rasena saha varcasā

हिन्दी अर्थ

यह-यणि सृष्ट त्यादरचँ परमेदवरीय कामतरारूप है, न कि को प्राकृतिक । १० -अणिः. ॐ पाताः. रथात् : सन् कः.ारण-पोष्रथ, करने -त्ाला, २८६ + भयववेद-भाष्य कां० १०॥। सू०६ परमेदवर भी भूत-मौतिकं विविध पदार्थो की रचना के लिये बान्धता है (२१) । क्या परमेश्वर का कोई शरीर है जिस के भरवयव पर स्थूल मणि (११) यह मणि भ्रसुरों का क्षय करती है (२२-२०८) ।

English

This yields him glory and delight, again, etc. Wearing this Charm the Waters flow eternally inviolate. This yieldeth them ambrosia, again

अध्याय १०

श्लोक 6.23

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॑र्दे॒वेभ्यो॒ असु॑रक्षितिम्।स मा॒यं म॒णिराग॑मत् स॒ह गोभि॑रजा॒विभि॒रन्ने॑न प्र॒जया॑ स॒ह

yamabadhnād bṛhaspatirdevebhyo asurakṣitim| sa māyaṃ maṇirāgamat saha gobhirajāvibhirannena prajayā saha

हिन्दी अर्थ

(१२) परभेदवर रूपी मणि, जब सिर पर भ्राखूढृ हो जातीटहै, तब भनुष्यः सिर से पैरो तक श्वेष्ठ बर्न जाता है (३.१.३२) । . (भरातीयतः) भराति अर्थात् शतुसवृश व्यवहार करते हए, (दृव) बुरी हादिक भावना वले; (द्विषतः) हष करते हुए, (जातृव्यस्य ) सपलनंरूपं भतीजे भाई के पुत्र -के (शिरः)-सिंर को(भपि) भी (भोजसा) बल के साथः (वश्चामिं) मै राज्याधिकारी काटता हूं । शतु । जोकि मनुष्य समाज कीः उन्नति भ्रादि के लिये दान नहीं देता, तथा पत्र जो.कि वहम वही" (भ्रुव ४।९।९४४).। (२) नाई का. पुत्र

English

etc. King Varuna assumed and wore this salutary Amulet. This yieldeth him his truthfulness, again, etc.

अध्याय १०

श्लोक 6.24

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॑र्दे॒वेभ्यो॒ असु॑रक्षितिम्।स मा॒यं म॒णिराग॑मत् स॒ह व्री॑हिय॒वाभ्यां॒ मह॑सा॒ भूत्या॑ स॒ह

yamabadhnād bṛhaspatirdevebhyo asurakṣitim| sa māyaṃ maṇirāgamat saha vrīhiyavābhyāṃ mahasā bhūtyā saha

हिन्दी अर्थ

का परिचायक है 1 मन्त मे कंहा है कि राजा निज भाई के पुत्रकौ नजो किः भर्यात् उग्र-नियम .कौ पुंथिवी के धारण-पोषंण मे. सहायक कहा है। : :वम् महम॒यं मणि, फालांज्जातः करिष्यति । . षणो मन्थेन मार्गपद् रसेन सह वच॑सो ॥२॥ करेगा † (मन्येन) ड दारां भौर (रसेन) रस दाराः पू्ंः) पथिपरणं हंभां

English

Wearing this Amulet the Gods conquered in battle all the worlds. This yieldeth victory for them, again, etc.

अध्याय १०

श्लोक 6.25

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॑र्दे॒वेभ्यो॒ असु॑रक्षितिम्।स मा॒यं म॒णिराग॑म॒न्मधो॑र्घृ॒तस्य॒ धार॑या की॒लाले॑न म॒णिः स॒ह

yamabadhnād bṛhaspatirdevebhyo asurakṣitim| sa māyaṃ maṇirāgamanmadhorghṛtasya dhārayā kīlālena maṇiḥ saha

हिन्दी अर्थ

मुक (भ्रगमत्) प्राप्त हृभा है । . जब.कि.मठे 1 सं तथाः भोषधिरसो.का इस के-साथः. सहयोग् हो, गौरो से दष प्रौर दृष से द॑धि भ्रौर मठा (मन्थ) भिलता-है.। यथा “पयः हे फाल ! (दिक्वः) रिकषितं भरशत बद की बिद्या के. जानने. बाले जो (त्वा). तु (परा भरवष्ीत्) छेदा हैः छील करः तयार, किया हैः (तस्मात्) उससे (जीवलाः) जीवन्रदः (शुचयः) ° शुतचिः -(श्रापः) जल

English

The Amulet Brihaspati formed for the swiftly-moving Wind, This salutary Amulet the Deities assumed and wore. This yieldeth them the universe, again, again, from morn to morn. With this subdue thine

अध्याय १०

श्लोक 6.26

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॑र्दे॒वेभ्यो॑ असु॑रक्षितिम्।स मा॒यं म॒णिराग॑मदू॒र्जया॒ पय॑सा स॒ह द्रवि॑णेन श्रि॒या स॒ह

yamabadhnād bṛhaspatirdevebhyo asurakṣitim| sa māyaṃ maṇirāgamadūrjayā payasā saha draviṇena śriyā saha

हिन्दी अर्थ

(त्वा) -तुमे (पुनुन्तु) पवित्र कर रौर (शुचिम्) णुचि.करे ॥ . . हले के फाल का.स्रोषन कविता म है। यथा “थापि वौरषविषि- कैः कर्मभिः स्तूयन्ते” ।. यथाः “ोतुरिचत्यवे हविरदयमादत'' (ऋ ४ ॥९४। स्तुतियां पुषषविषकमों स हती है; जेसेःकि.पत्यरौ को कद्रा हैः कि तम॒. शमर तरार किया. जाता है 1. शिक्वः; . धि = सिरकषं 1-वः = चिक्वः । घकारस्य विलौपः भव यथां पवः =पच्ः+-वः, । वास्याः. वासी = 025 (भाप), वसूनां कल्दाडी; "10861 (भरष्ट) » छेनी काष्ठनिमितं "फाल तय्यारं हो जाने पर इसे जल -ढास धोकरं साफं । करल का विधाने मन्तं

English

enemies. The seasons formed that Amulet, the Groups of Seasons fashion- ed it.

अध्याय १०

श्लोक 6.27

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॑र्दे॒वेभ्यो॑ असु॑रक्षितिम्।स मा॒यं म॒णिराग॑म॒त् तेज॑सा॒ त्विष्या॑ स॒ह यश॑सा की॒र्त्याऽ स॒ह

yamabadhnād bṛhaspatirdevebhyo asurakṣitim| sa māyaṃ maṇirāgamat tejasā tviṣyā saha yaśasā kīrtyā' saha

हिन्दी अर्थ

स्थापित करती है वहं (नः गृहे) हमारे . धर मे. वसतु) सदाः.वास करे. तधा महव कमे (दधत्) स्थापित करता हुभाः (नः. गृहे वसतुहमारेः घुर ६ तथा उत्सवो का होना सम्भव हौ सकता है 1 (कम्य) दौ. से' (मधिः) चूर्नं (एत्य); भाक पर्य: , २८८ , श्रयंववेद-माष्य कां०.१०१सु४६ :

English

The Year having constructed it preserveth everything that is. The regions of the heaven, the points that lie between them fashioned it. Created by Prajāpati, may the Charm cast my foemen down.

अध्याय १०

श्लोक 6.28

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॑र्दे॒वेभ्यो॒ असु॑रक्षितिम्।स मा॒यं म॒णिराग॑मत् सर्वा॑भि॒र्भूति॑भिः स॒ह

yamabadhnād bṛhaspatirdevebhyo asurakṣitim| sa māyaṃ maṇirāgamat sarvābhirbhūtibhiḥ saha

हिन्दी अर्थ

कं०१०। सुरद भथरवेवेद-माष्य - २५६ (क्षदामहे) हम ध्रदनिः करते है । (सः) वहु घरमे बसना अरतिथि, (दवः देतान्हैः न ५ ५. ध 9 त । “. चिक्रित्सतु--किंत् निवासे रोगापनयने च (्वादिः) । क्षदामहे, कदं वैदिक. धातु है 1. देवेभ्यः देवयज्ञो के करने से वायु, सूरय, जल श्रादि देवो 786 फर्भंनः वाष्पीकूत जल द, जोकि आरो नदीं होता ॥ =. यमवौलाद् हासतिपरेणि फालं परतश्च संदिरमोजसे।

English

Atharvan made the Amulet, Atharvan’s children fashioned it.

अध्याय १०

श्लोक 6.29

तमि॒मं दे॒वता॑ म॒णिं मह्यं॑ ददतु॒ पुष्ट॑ये ।अ॒भि॒भुं क्ष॑त्र॒वर्ध॑नं सपत्न॒दम्भ॑नं म॒णिम्

tamimaṃ devatā maṇiṃ mahyaṃ dadatu puṣṭaye | abhibhuṃ kṣatravardhanaṃ sapatnadambhanaṃ maṇim

हिन्दी अर्थ

रक , भ्रथर्वेवेद-भाष्य कां १०३ सु-£ इधी प्रकार फाल को खदिर कहा है । मणि है; रत्न है । कृष्यन्न से गौरो -का चारा. मिलता है, रौर गौरम से दूर्ध के सेवन द्वारा दरीर भ्रौर मन में बल भौर उग्रता पैदा होतेह । बृहस्पति जब ङष्यन्न के परिणाम "वीर्य" को -निज शंरीर में बान्धे रखता है,.भौरं विषयलस्पट होकर उसका विनाश नहीं .कृरताः तो - वह भ्रोज को. -भाप्त् मे नान्नं का वणेन हृभा .है। ध्येय के साथ चित्त को सूत्र दारा रहीं बांधा

English

With them the sage Angirases broke through the Dasyus’ fortresses. With this subdue thine enemies. Dhātar bound on this Amulet: he ranged and ordered all that is. With this do thou subdue thy

अध्याय १०

श्लोक 6.30

ब्रह्म॑णा॒ तेज॑सा स॒ह प्रति॑ मुञ्चामि मे शि॒वम्।अ॒स॒प॒त्नः स॑पत्न॒हा स॒पत्ना॒न् मेऽध॑रां अकः

brahmaṇā tejasā saha prati muñcāmi me śivam| asapatnaḥ sapatnahā sapatnān me'dharāṃ akaḥ

हिन्दी अर्थ

या कन्ति .(इद् ) ही (दुहे) दोहता है, अद्रा करता है, (मूयोभूय-) ब्रार- वार या प्रधिकाचिक खूप मे, श्वः इवः) प्राएं -दिन-परति-दिन (तेन) उस सोमः सेना का प्रेरक; ' सेनानायक; जों- कि सेना के प्रश्रभागमेहो कौर, सेतां को,.मागं दशति है सोमः षृ प्रेरणे (तुढादिः) । यह महती १ ; श्रेवेद- सू: ए ० १०। सुग भ्रथवैवेद-भाष्य २९३ संगम करान वाला, भिडानै ११५४. दनक व १ तं (हि. रब ९ ने (अस्मै) .इसः-पदमेकवर् के लिये मृतिम् इत् ) तिच के भ्रागे मारने मे कुशल सेनिक हों 1 द्य) हमार रो

English

That Amulet here hath come to me combined with sap and energy. The Amulet, etc. That Amulet here hath come to me, hath come with cows, and goats, and sheep, hath come

अध्याय १०

श्लोक 6.31

उत्त॑रं द्विष॒तो माम॒यं म॒णिः कृ॑णोतु देव॒जाः ।यस्य॑ लो॒का इ॒मे त्रयः॒ पयो॑ दु॒ग्धमु॒पास॑ते ।स मा॒यमधि॑ रोहतु म॒णिः श्रैष्ठ्या॑य मूर्ध॒तः

uttaraṃ dviṣato māmayaṃ maṇiḥ kṛṇotu devajāḥ | yasya lokā ime trayaḥ payo dugdhamupāsate | sa māyamadhi rohatu maṇiḥ śraiṣṭhyāya mūrdhataḥ

हिन्दी अर्थ

.“' यज्ञः यज देवपूजा, संगतिंकरणः, - ॥ षतः) हमारे -रोग-नुभक हनन क र १.८; बृहस्पति युद्ध के लियेः भरंयाण' करे, (३, सैनिकं विजिगीषु होने नोर्िे ॥ जनः सूयं के .-उदयः तथा भस्तगृत हने इरा. होता हैः मानो सूयं नै ,:(४0; न॒ „: दासा-सू्यःलननं हमः! भतः कार्मल सूर्य, निज.कर्ता की विभूति का सेना की स्थिति को ठीक तरह दें सक । सोमं सहायकं है बृहस्पति. का (नुक । स्रं रोग॑निवारकःहै ! यथाः “सं ते शीषणैः;.कपालानि हृदयस्य; च रो

English

with food and progeny. The Amulet, etc.

अध्याय १०

श्लोक 6.32

यं दे॒वाः पि॒तरो॑ मनु॒ष्याऽ उप॒जीव॑न्ति सर्व॒दा।स मा॒यमधि॑ रोहतु म॒णिः श्रैष्ठ्या॑य मूर्ध॒तः

yaṃ devāḥ pitaro manuṣyā' upajīvanti sarvadā| sa māyamadhi rohatu maṇiḥ śraiṣṭhyāya mūrdhataḥ

हिन्दी अर्थ

उदिता रस्तं क्ते हुए रादित्य की रषिम , लल हौती रै, दन"लाल दिम मेसोगर्विनाश'.करने वेधे भरधिक दक्तिं सम्भवःश्रतीतःहीतीः है । जियः विवि प्रकारः के शध ा8 (रीग कीटाणु ).-ˆ गैविं पृथिवी तथा वं हिशतोतहि॥ ९ विरे भणितो बार्धने कां वणेन है।, यथा "खंदिरकष्ठपफीर्विकारं २९४ करा भथववेद-माष्य मणि .शत्रुनादाय सवेकामावा"तथे च बघ्नाति” (भरयर्व० १० ।६के विनि- गोग मे सायण) । पारचात्मःभरादि वैदिक विद्वान् इस मणि को 10161 दस बृहस्पति के लिये (धियम्, इत्) शोभा को ही : (दुहे) दोहा है, रोगरूपी शावुभ्रो का (जहि) हनन कर ५ + चन्द्रमा द्वाराः . ओोषधिरवौ मे रसो का संवार होता है, भतः चन्या

English

That Amulet here hath come to me with store of barley and of rice, with greatness and prosperity. The Amulet, etc.

अध्याय १०

श्लोक 6.33

यथा॒ बीज॑मु॒र्वरा॑यां कृ॒ष्टे फाले॑न॒ रोह॑ति ।ए॒वा मयि॑ प्र॒जा प॒शवोऽन्न॑मन्नं॒ वि रो॑हतु

yathā bījamurvarāyāṃ kṛṣṭe phālena rohati | evā mayi prajā paśavo'nnamannaṃ vi rohatu

हिन्दी अर्थ

को० १९ । सू०६, भथवेवेद-माष्यं २६५ विहीन से.हो जाते है । मानो चन्रमा ने सुरो शरीर दानवं की हिरण्ययी शोभा कां अनि होता है । बृहस्पति "ने शोभराधमान चन्द्रमा की रचना कौ है; निवासंहै वह हीं शोभायमान .चित्र चित्रित कर सकत क है। भु द्वारा “तन” पुलिङ्ग पद है । “जहि = बृहस्पति परमेदवर, चन्रमा दारा रोग- दाचओ का हननं करता है । यथां-- र अपचितः का श्रथ ह गण्डमालाएं । गण्डमाला की गिल्टियां एक-दूसरे सेः" अर्थात् भ्लगं-भंलग हुई", -गले मे. माला. के एूलो को तरह चुनी हई होती है । सूर्यं तथा चन्द्रमा इनकी मेषज है, ्रौषध हि । 'भपोच्छतु = भप उष्टी विकसे प्र॑पवासयतु, भ्रपवर्जयतु.। : ! .: ˆ

English

That Amulet here hath come to me with streams of butter and of mead, with sweet delicious beverage.

अध्याय १०

श्लोक 6.34

यस्मै॑ त्वा यज्ञवर्धन॒ मणे॑ प्र॒त्यमु॑चं शि॒वम्।तं त्वं श॑तदक्षिण॒ मणे॒ श्रैष्ठ्या॑य जिन्वतात्

yasmai tvā yajñavardhana maṇe pratyamucaṃ śivam| taṃ tvaṃ śatadakṣiṇa maṇe śraiṣṭhyāya jinvatāt

हिन्दी अर्थ

चन्द्रमा भी रोग-शधुर्भो का हनन् करता है: : - शौध्रगतिः वाली वायु के निर्माण के लिये,. (यम्, सणिम्) जिस.मणि को (वाजिनम्) बल को (दहे) - दोहा, : (भूयोभूयः) बार-बार या अधिकाधिक हं परमेश्वरे त (द्विषतः) रोग-शवुभो काः (जहि) हनन कर+ । ,. ... . , मनत ६ मे शफातेत कष्टे" शवो का प्रयोग इभा ह । धसे तीत होता है कि इन रवर. एरी घ्रकायंकर्ु त्व , को सूचित.कियाः1.. इसं शीध्रता को यजुवद मे "मनसो.जवीयः? (-३१।४) -ढारा प्रदक्षितं किया है वाजिनम् = बलम् ।

English

The Amulet, etc. That Amulet here hath come to me with power and abundant strength, hath come with glory and with wealth.

अध्याय १०

श्लोक 6.35

ए॒तमि॒ध्मं स॒माहि॑तं जुषा॒णो अग्ने॒ प्रति॑ हर्य॒ होमैः॑ ।तस्मि॑न् विदेम सुम॒तिं स्व॒स्ति प्र॒जां चक्षुः॑ प॒शून्त्समि॑द्धे जा॒तवे॑दसि॒ ब्रह्म॑णा

etamidhmaṃ samāhitaṃ juṣāṇo agne prati harya homaiḥ | tasmin videma sumatiṃ svasti prajāṃ cakṣuḥ paśūntsamiddhe jātavedasi brahmaṇā

हिन्दी अर्थ

(सायण) । परमेश्वर, वात द्वारा, रोगरूपी श्वरो, कां हनन करता 1; :, - . त्वं हि-विदवभेषज. देवानां दूत ईय॑से ॥। ˆ वातं को भेषज श्रौरःविदवभेषज कहा है ।.यह “रपः” पाप्पी रोगो को दूर करत; भौर. हनदरिय-देवों के रोग-शवुभरों काः दूत हैः उपतापी है 1: = टुदु उपतापे (स्वादः) 1 भ्रथवा इूद.परि्तपि' (दिवादिः); . प्राणापान. की; मननं भं “मणि” दारा इष्यन्न अरभित्ेत नहीं, भरणिनतु-मुमपि-दा रा.त कारण यह किं “तस्माद एतस्मांदादेमनः भौकादाः सूतः, : भ्राकीशाद् वायुः, वायो- .

English

The Amulet, etc.. That Amulet here hath come to me with splendour and a blaze of light, with honour and

अध्याय १०

श्लोक 7.1

सर्वाधारवर्णनम्।१-४४ अथर्वा।स्कम्भः आत्मा वा।त्रिष्टुप्, १ विराड् जगती, २, ८ भुरिक्, ७, १३ परोष्णिक्,१०, १४, १६, १८-१९ उपरिष्टाद् बृहती, ११-१२, १५, २०, २२, ३९ उपरिष्टाज्ज्योतिर्जगती, १७ त्र्यवसाना षट्-पदा जगती, २१ बृहतीगर्भानुष्टुप्, २३-३०, ३७, ४० अनुष्टुप् , ३१ मध्येज्योतिर्जगती, ३२, ३४, ३६ उपरिष्टाद्विराड्बृहती, ३३ पराविराडनुष्टुप्, ३५ चतुष्पदा जगती, ३८, ४२-४३ त्रिष्टुप्, ४१ आर्षी त्रिपदा गायत्री, ४४ एका॰ आर्च्यनुष्टुप्।कस्मि॒न्नङ्गे॒ तपो॑ अ॒स्याधि॑ तिष्ठति॒ कस्मि॒न्नङ्ग॑ ऋ॒तम॒स्याध्याहि॑तम्।क्वऽ व्र॒तं क्वऽ श्र॒द्धास्य॑ तिष्ठति॒ कस्मि॒न्नङ्गे॑ स॒त्यम॑स्य॒ प्रति॑ष्ठितम्

sarvādhāravarṇanam| 1-44 atharvā| skambhaḥ ātmā vā| triṣṭup, 1 virāḍ jagatī, 2, 8 bhurik, 7, 13 paroṣṇik,10, 14, 16, 18-19 upariṣṭād bṛhatī, 11-12, 15, 20, 22, 39 upariṣṭājjyotirjagatī, 17 tryavasānā ṣaṭ-padā jagatī, 21 bṛhatīgarbhānuṣṭup, 23-30, 37, 40 anuṣṭup , 31 madhyejyotirjagatī, 32, 34, 36 upariṣṭādvirāḍbṛhatī, 33 parāvirāḍanuṣṭup, 35 catuṣpadā jagatī, 38, 42-43 triṣṭup, 41 ārṣī tripadā gāyatrī, 44 ekā॰ ārcyanuṣṭup| kasminnaṅge tapo asyādhi tiṣṭhati kasminnaṅga ṛtamasyādhyāhitam| kva' vrataṃ kva' śraddhāsya tiṣṭhati kasminnaṅge satyamasya pratiṣṭhitam

हिन्दी अर्थ

बृहस्पति ! तु (द्विषतः) हमारे ढेषी शत्रुभ्रों का (जहि) देनन कर भ्रधिपति, शासक । राजा-वरणं है प्रजाभ्रों का राजा; शसक । परमेश्वर के दौनों स्वरूप शासकं है! गुण-कमं के भेद से एक ही परभेदवरके दो नाम । कां० १० सुऽ.६ अ्रथववेदभाष्य २०१ दासक भी बना । राजा वेशुण का काम है प्राणियों पर राज्य करना, उनका शासन करना, तथा उन्दँ भनुतमागे से सत्यमा्ं की भ्रौर प्रेरित करना । वादी को उन पाशं से विमुक्त करते हँ । इस उदर्य के निमित्त वरुण राजा

English

Speed to preeminence him to whom I have attached thy happy fate. Love thou, O Agni, pleased with burnt oblations, this sacred fuel that is ranged in order. In him may we find grace and loving-kindness, happiness, progeny, and sight and cattle, in

अध्याय १०

श्लोक 7.2

कस्मा॒दङ्गाद् दीप्यते अ॒ग्निर॑स्य॒ कस्मा॒दङ्गा॑त् पवते मात॒रिश्वा॑ ।कस्मा॒दङ्गा॒द् वि मि॑मी॒तेऽधि॑ च॒न्द्रमा॑ म॒ह स्क॒म्भस्य॒ मिमा॑नो॒ अङ्ग॑म्

kasmādaṅgād dīpyate agnirasya kasmādaṅgāt pavate mātariśvā | kasmādaṅgād vi mimīte'dhi candramā maha skambhasya mimāno aṅgam

हिन्दी अर्थ

यह .मभिपराय द्ोतित किया है.कि बलः भौर प्राणशक्तिः के लिये . दृष् उंतेम वस्तु है 1. दसी अकार धन साधन है शमा का ! (व्याख्यां मन्व दप्ति के ह) साय, तथा (यसा कीत). भोर की क (द) संशब्दधते सा (उणा०.४।१२०) । महापु के सत्कार्य का.कथनः+प्रा न करा कीत है । (याया मनतं २२,२३ कुरार) । . समपर्तियो या विभूतियोःके (सह) साथ । =. :

English

future? That one part which he set in thousand places,—how far did

अध्याय १०

श्लोक 7.3

कस्मि॒न्नङ्गे॑ तिष्ठति॒ भूमि॑रस्य॒ कस्मि॒न्नङ्गे॑ तिष्ठत्य॒न्तरि॑क्षम्।कस्मि॒न्नङ्गे॑ तिष्ठ॒त्याहि॑ता॒ द्यौः कस्मि॒न्नङ्गे॑ तिष्ठ॒त्युत्त॑रं दि॒वः

kasminnaṅge tiṣṭhati bhūmirasya kasminnaṅge tiṣṭhatyantarikṣam| kasminnaṅge tiṣṭhatyāhitā dyauḥ kasminnaṅge tiṣṭhatyuttaraṃ divaḥ

हिन्दी अर्थ

मात्र है, त्रिपाद् रूप भे. वहं निज चयोतंमानरूप भे विद्यमान रहता है, जिस क्ति, शयन किये रहती है, वहं श्रभावशूप नहीं होतीः+ इसी प्रकार भवो दूसरी (भनुः), सदा चलती रहती है.। -यह सूचितं करिया है । के भ्रनुसार होती , रहती है । . तथा जितनेःकोल तरक एक-सष्टि -रहती है, उतनेः ही काल तक उस की. प्रलय. मी: रहती है । स॒ष्टिकाल को “श्राह्यदिन” कां०..१०१ सूु० ७ . भ्रथवंवेद-माष्य ३१९ यत्र लोकांश्च कोशरिचापों ब्रह्म जनां बिदुः.1. ; ˆ

English

These know the loftiest Power Divine, and thence know Skam- bha thoroughly. Who out of many, tell me, is that Skambha Of whom Vaisvānara became the head, the Angirases his eye, and Yātus his corporeal parts?

अध्याय १०

श्लोक 7.4

क्व॑१ प्रेप्स॑न् दीप्यत ऊ॒र्ध्वो अ॒ग्निः क्व॑१प्रेप्स॑न् पवते मात॒रिश्वा॑ ।यत्र॒ प्रेप्स॑न्तीरभि॒यन्त्या॒वृतः॑ स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

kva1 prepsan dīpyata ūrdhvo agniḥ kva1prepsan pavate mātariśvā | yatra prepsantīrabhiyantyāvṛtaḥ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

मुख्यवेद कहा है । रङ्किरा--भङ्गानां रसः (बृहद् उप० १।३।१९) 1. को (जनाः) करई लोग (परमम्, इव) पंरम-तत्त्व कै सदृश (विदुः) जानते ह 1 (उतो) रौर (ये) जो (भ्रवरे) भवरकोटि कै जन है (ते) वे (सत्). प्रकृति की शाखाभो की (उपासते) उपासना करते ह । बीज न भ्रकरुरित होता, मौर न शाखा्भो वाला होता है । वैज्ञानिक इस प्रकृति को ही “स्वतः परिणामशीला'” मानते है, भरौर कहते ह कि प्रकृति, विषमावस्था में परिणत हई है । वे प्रकृति को ही परमतत्त्व के सदृश

English

In the beginning, in the midst of the world, Skambha poured that gold. On Skambha Fervour rests, the worlds and Holy Law repose on him.

अध्याय १०

श्लोक 7.5

क्वाऽर्धमा॒साः क्वऽ यन्ति॒ मासाः॑ संवत्स॒रेण॑ स॒ह सं॑विदा॒नाः ।यत्र॒ यन्त्यृ॒तवो॒ यत्रा॑र्त॒वाः स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

kvā'rdhamāsāḥ kva' yanti māsāḥ saṃvatsareṇa saha saṃvidānāḥ | yatra yantyṛtavo yatrārtavāḥ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

ये नाडियां शरीर मेँ सर्वत्र फली हई ईहै,जेसे कि दिराएं सवत्र फली हई है । सन भवन प्रविष्टं हृश्रा-हभरा है । १.२ क, (यः) जो (श्रमात्) परिश्रम से, (तपसः) भ्रौर तपोमय जीवन से. (जातः) प्रकटं होता है" जी . (सर्वान् लोकान्) सनं लोको मे (समानः ब्रह्म के लिये (नमः) नमस्कार हो; . 4 र केवलम् केव् सेवने. (स्वादिः) ।

English

Skambha set fast these two, the earth and heaven, Skambha maintained the ample air between them.

अध्याय १०

श्लोक 7.6

क्व॑१प्रेप्स॑न्ती युव॒ती विरू॑पे अहोरा॒त्रे द्र॑वतः संविदा॒ने।यत्र॒ प्रेप्स॑न्तीरभि॒यन्त्यापः॑ स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

kva1prepsantī yuvatī virūpe ahorātre dravataḥ saṃvidāne| yatra prepsantīrabhiyantyāpaḥ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

(कथम्) क्यो (वातः) वायु (न.इलयति) नहीं निद्वितं होती, (कथम्) क्यो (मनः) मन (न रमते) भराराम नहीं करता, संदा चञ्चल रहता है । (कंदाचन). कभी भी (न.इलयन्वि) नहीं निद्रित होते। . बात के.उन्निद्रित होने भ्रौर मन के श्रारामनकरनेकाभी है की शावाएं (स्कन्धः परितः) वृक्ष' की धड़. के चारों भोर आश्रय पाई, ूर्याद्वि देव उसं मे धाश्चय.पाए हए है. ।

English

Skambha established the six spacious regions: this whole world Skambha entered and pervaded. Homage to highest Brahma, him who, sprung from Fervour and from toil,

अध्याय १०

श्लोक 7.7

यस्मि॑न्त्स्त॒ब्ध्वा प्र॒जाप॑तिर्लो॒कान्त्सर्वाँ॒ अधा॑रयत्।स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

yasmintstabdhvā prajāpatirlokāntsarvā~ adhārayat| skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

कां० १० ।सु० ७ भ्रथववेद-माध्य ३३३ देते है, (विमिते श्रमितम्) परिमित जगत् भँ भरपरिमित (तम्) उस करो सममरपित कर, उस के फल कीं भ्राकाङ्श्षां नहीं करते । ग ° या विनष्ट हरा है (सः) इसलिये. वह (पाप्मना). पपं. से (व्यावृत्तः) यो वैत हिरण्यय तिष्यन्तं सरिलि वेद 1..: -

English

Filled all the worlds completely, who made Soma for himself alone. Why doth the Wind move ceaselessly? Why doth the spirit take no rest?

अध्याय १०

श्लोक 7.8

यत् प॑र॒ममव॒मं यच्च॑ मध्य॒मं प्र॒जाप॑तिः ससृ॒जे वि॒श्वरू॑पम्।किय॑ता स्क॒म्भः प्र वि॑वेश॒ तत्र॒ यन्न प्रावि॑श॒त् किय॒त् तद् ब॑भूव

yat paramamavamaṃ yacca madhyamaṃ prajāpatiḥ sasṛje viśvarūpam| kiyatā skambhaḥ pra viveśa tatra yanna prāviśat kiyat tad babhūva

हिन्दी अर्थ

मँ (प्रजापततिः) प्रजापति है । ३३४ ' भथवेवेद-माष्य कां० १०। सुऽ ७ भी विमुक्त -है 1 इसलिये -यजु्वेद मेँ उसे भ्रपापविद्धम् कटा है (४०।८) । से रहित हो जाता है वह पापकम के करने से भी निवृत्त हो जाता है 1. : (एके) दो कोई (विल्पे) विरुढरूपों वाली. (युवती) युवदियां ;

English

Why do the Waters, seeking truth, never at any time repose? Absorbed in Fervour, is the mighty Being, in the world’s centre, on the waters’ surface. To him the Deities, one and all betake them. So stand the tree- trunk with the branches round

अध्याय १०

श्लोक 7.9

किय॑ता स्क॒म्भः प्र वि॑वेश भू॒तं कियद् भवि॒ष्यद॒न्वाश॑येऽस्य ।एकं॒ यदङ्ग॒मकृ॑णोत् सहस्र॒धा किय॑ता स्क॒म्भः प्र वि॑वेश॒ तत्र॑

kiyatā skambhaḥ pra viveśa bhūtaṃ kiyad bhaviṣyadanvāśaye'sya | ekaṃ yadaṅgamakṛṇot sahasradhā kiyatā skambhaḥ pra viveśa tatra

हिन्दी अर्थ

निज में उसे धारणः कर लतो है, (न प्रपवृञ्जाते) न तो इस कम॑ से वे श्रलग , . है4.षण्मगुखम् = ६ खूटे खू टो पर. ताना तान करं पेट बना जाता है । : -..संीदपट के. बनने भे ६ दिशाए, ६ सू टेः है । ६ दिशाएं =पूवं, दक्षिण, दुरे के अभिमुख हो कर श्राक्रमण करते हैँ । पट है संतार-पट । तंत्तिरीयं ' होता है । संघार पैदा भी होतो रहती है,-प्नौर इसका प्रलय भी हतां रहता : है--यह सनातन निम है । उत्पत्ति श्रौर प्रलय, --ये दोनों विषूम हये ::

English

it. Who out of many, tell me, is that Skambha.

अध्याय १०

श्लोक 7.10

यत्र॑ लो॒कांश्च॒ कोशां॒श्चापो॒ ब्रह्म॒ जना॑ वि॒दुः ।अस॑च्च॒ यत्र॒ सच्चा॒न्त स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

yatra lokāṃśca kośāṃścāpo brahma janā viduḥ | asacca yatra saccānta skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

कोश इवाबन्धः परिकृत्यमानः' (४।१६।७) द्वारा - अनृतवादी के उदर को के नैतिक जीवनो का भ्रधिपति हो कर ब्रहस्पति के शासन में सहायक होता (निषं० १।१२) । उदक द्वारा बृहस्पति शतुभ्ों का हनन करता है । शत है पिपासा, क्षुधा, सूखापन भादि । बृहस्पति ने मणि को बान्धा । इसका परिणाम हा. “वात का निर्माण" । रसजा वरुण ने मणि को बान्धा । इस

English

Jātavedas kindled with devotion. Skambha, the Pillar or Fulcrum of all existence

अध्याय १०

श्लोक 7.11

यत्र॒ तपः॑ परा॒क्रम्य॑ व्र॒तं धा॒रय॒त्युत्त॑रम्।ऋ॒तं च॒ यत्र॑ श्र॒द्धा चापो॒ ब्रह्म॑ स॒माहि॑ताः स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑देव सः

yatra tapaḥ parākramya vrataṃ dhārayatyuttaram| ṛtaṃ ca yatra śraddhā cāpo brahma samāhitāḥ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

सीश्रगति वाली.वायु के नि्मणि के लिये (यम् मणिम्) जिस कामनारूपी (देवाः). विजिगीषुभ्रों न (बिभ्रतः) धारण करते हए (युघा) युद्ध द्वारां स्पति ने (एभ्यः) ईन विजिगीषोः के लिये या "हनं विजिगीषुभ्रों से, ३०२ भरथवेवेदे-माष्य कां० १०१०६ (जितिम् इत्) विजय को (दुहे) दोहा, (मूयोभूयः) बार-बार याः भ्रधि- कांधिक-रूप म (श्वः.दवः), ्राए दिनं प्रतिदिन (तेन) उस युद्ध.ह्यारा हे बृहस्थति ! (त्वम्) तू (द्विषतः) हमारे. दषी तुभो का (जहि) -हनन देवाः = विजिगीषु सेनाधिकारी वर्गं । . “दिवु क्रीडाविजिगीषा" भादि (दिवादिः) ।.“देव” द्वारां विजिगीषु भी भभिप्रेत 'होते है; यथा “दिवसेना- नाममिमञ्जतीनाम्” म देव कां प्रथं विजिगीषु है! उनकी सेनाभों को देवं-

English

Which of his members is the seat of Fervour: Which is the base of Ceremonial Order? Where in him standeth Faith? Where Holy Duty? Where, in what part of him is truth implanted?

अध्याय १०

श्लोक 7.12

यस्मि॒न् भूमि॑र॒न्तरि॑क्षं॒ द्यौर्यस्मि॒न्नध्याहि॑ता ।यत्रा॒ग्निश्च॒न्द्रमाः॒ सूर्यो॒ वात॒स्तिष्ठ॒न्त्यार्पि॑ताः स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

yasmin bhūmirantarikṣaṃ dyauryasminnadhyāhitā | yatrāgniścandramāḥ sūryo vātastiṣṭhantyārpitāḥ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

“सवं पाथिवर देश” 1 द्विषतः कां श्रभिघ्राय यह है किंपरमेदवरं हमारे टेहिकं तेथां पुराकृत-कभो के अनुसार हमे जय या पराजयः प्रदान करता है, प्ररमेदवर ही करभंफलप्रदाता है । जय या पराजंय मी कर्मफल हीं है 1 भ्रतः तमि देवता मणि भरत्य॑सुष्वन्त शं सुषम् । . . हीश्रगतिवाली वायुःके निर्माण के लिये (यम्, मणिम्) जिस कामनारूपीः (छंभुवम्) जो कि शान्ति पैदा करन. काली है, (हैवताः) : विजि गीषु

English

Out of which member glows the light of Agni? Form which proceeds the breath of Mātarisvan?

अध्याय १०

श्लोक 7.13

यस्य॒ त्रय॑स्त्रिंशद् दे॒वा अङ्गे॒ सर्वे॑ स॒माहि॑ताः ।स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

yasya trayastriṃśad devā aṅge sarve samāhitāḥ | skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

को (दुहे) दोहा, (भूयोभूयः) बार्बार यां भधिकाधिक रूप में (तेत्त) उस रथात्. देवों की सेना ।. सेनाधिकारी तथा.-सेनाप्,. इन दोनो मेँ जनं दिषु). की .उग्रभावंना होती है, तमी-युद्ध मे विजय पाद जां सकती है 1 ५: शरजपिपिष्ष्टो मणितो मेऽषरं अके 0१६॥ ऋतवः) ऋतु न (तम्) उस कामनाह्पी मणि को मानो न्धा, (भातंवाः) ऋतु के.मवथों मसिं या ऋतुग्रोःके समूहो. भरयनकालीं ने

English

From which doth Chandra measure out his journey, travelling over Skambha’s mighty body? Which of his members is the earth’s upholder? Which gives the middle air a base to rest on? 161

अध्याय १०

श्लोक 7.14

यत्र॒ ऋष॑यः प्रथम॒जा ऋचः॒ साम॒ यजु॑र्म॒ही।ए॒क॒र्षिर्यस्मि॒न्नार्पि॑तः स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

yatra ṛṣayaḥ prathamajā ṛcaḥ sāma yajurmahī| ekarṣiryasminnārpitaḥ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

ने-शर्.चेवनका्योःकां वर्णेन वैदिक .राहित्यं मै. होतो हैः६ यथा - “तत्ः तेज ५; ९; भरन्तः: तथा अदिः का अभिप्रोयः-है परत्वे चेथो के निवे, तया दि्लाभ्रों बा प्रदेशो में निवात करने वाली. प्रजा । ग, बान्ा, (भदिषः भवान्वर दिशार्भो था भिनमत्त देशो मे निवास करते प्रजापतिसृष्ट मणि है. कामना, संकल्प, वृद़नि्चय १. प्रजापति ने. मानुषी परजाम मेँ इय - मणि की रचना की हुई है । . इस मणि दारा मनुष्य निजः

English

Where, in which member is the sky established? Where hath the space above the sky its dwelling?

अध्याय १०

श्लोक 7.15

यत्रा॒मृतं॑ च मृ॒त्युश्च॒ पुरु॒षेऽधि॑ स॒माहि॑ते ।स॒मु॒द्रो यस्य॑ ना॒ड्यः॑१ पुरु॒षेऽधि॑ स॒माहि॑ताः स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

yatrāmṛtaṃ ca mṛtyuśca puruṣe'dhi samāhite | samudro yasya nāḍyaḥ1 puruṣe'dhi samāhitāḥ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

के (पुरः) गढ़ को (बिभिदुः) तोड़्-फोड़ दिया ॥ (तेन) उस स्थिरन्नित्त- प्रतीत होते. । वे निज गुरुभं “थर्वा योगिर्यो के साथ स्नेहपूवंक उन से को५.१९ ६ सुग भथवतरेद-माष्यः इ०४ योगि श्रौरः -योगास्यासि्ो ने. जिस मभि.को बान््रा वहःदुदकामना, दृढ. ८ 0 .. ही सम्भव, है. । .मेदिनः-=निभिद्य-.. स्नेहने

English

Whitherward yearning blazeth Agni upward? Whitherward yearning bloweth Mātarisvan? Who out of many, tell me, is that Skambha to whom with long- ing go the turning pathways? Whitheward go the half-months, and, accordant with the full year, the months in their

अध्याय १०

श्लोक 7.16

यस्य॒ चत॑स्रः प्र॒दिशो॑ ना॒ड्य॑१स्तिष्ठ॑न्ति प्रथ॒माः ।य॒ज्ञो यत्र॒ परा॑क्रान्तः स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

yasya catasraḥ pradiśo nāḍya1stiṣṭhanti prathamāḥ | yajño yatra parākrāntaḥ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

हैः सत्रा ारण-पोषणः-.करता है। हसःमणि-को- धारणः करके धाता ने सृष्टि को ररा । यह सरणि. है सृष्टिरचताः मेँ तराता की कामन. इच्छा ॥ यथा ..“सौऽकामयत! - बृहदा ° उप ० ब्राह्यम र, खण्डः४-७). । धाता कौर कामना मात्र सरे ह. भत-मौतिक भृष्टि परदः होती है यह कामना ही संकल्पं: भौर दृढ़. निरचमे सूपः है । घाता खदिर काष्ठके फाल के विकारल्प मणिं “खदिरकाष्ठफालविकारं मणि शवुनालाय सवंकामाप्तये च बध्नाति" मुगिस) रिस मपिः करो वान्त, : खः); तरह (रयन्) यह (मिः) मर्ण निजस्वरूप में कामना को जागरित किया ॥ कामना यह्-कि,म-देवो को भरयेजनःहै,भोग भौर पवग 1 ““मोधापवेरगाथं दृष्यम्” (योगं ९१८ 1. कमनुसारी भोग, साघन है अपवंगं का,. मोक्ष का । भोगं दारा दुरे कमो का, फल; दुःखं प्रौर कष्टः भोग लेने पर शनैः-शरनः बुरे कमो का विनारो

English

procession? Who out of many, tell me, is that Skambha to whom go seasons and the groups of seasons?

अध्याय १०

श्लोक 7.17

ये पुरु॑षे॒ ब्रह्म॑ वि॒दुस्ते वि॑दुः परमे॒ष्ठिन॑म्।यो वेद॑ परमे॒ष्ठिनं॒ यश्च॒ वेद॑ प्र॒जाप॑तिम्।ज्ये॒ष्ठं ये ब्राह्म॑णं वि॒दुस्ते स्क॒म्भम॑नु॒संवि॑दुः

ye puruṣe brahma viduste viduḥ parameṣṭhinam| yo veda parameṣṭhinaṃ yaśca veda prajāpatim| jyeṣṭhaṃ ye brāhmaṇaṃ viduste skambhamanusaṃviduḥ

हिन्दी अर्थ

अधिकारी; बनता -जाता!है । सृष्ट प्ररमेषवरः का अनुग्ह॑ह्पं -टे नि भनुग्रह. है कि. वह सृष्टि मे शनेः. शनेः देवों को उत्त करता! हभ, मनुष्यौः दासा भोग्य पदां काः वणेन: हुभा है.।-. स्स: -रोषधिरसः है + यथा ष्यं मभि हि (गा धान्त मै प्रा है (नोः मलातिभिः नतेन, परजया सह) गौरो, बक्रिर्यो, मेड, भन्न भौर प्रजा 7 के. साथः ।,:

English

Whitherward yearning speed the two young Damsels, accordant, Day and Night, of different colour? Who out of many, tell me, is that Skambha to whom the Waters take their way with longing?

अध्याय १०

श्लोक 7.18

यस्य॒ शिरो॑ वैश्वान॒रश्चक्षु॒रङ्गि॑र॒सोऽभ॑वन्।अङ्गा॑नि॒ यस्य॑ या॒तवः॑ स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

yasya śiro vaiśvānaraścakṣuraṅgiraso'bhavan| aṅgāni yasya yātavaḥ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

भरपवरगोन्मुखी पथिक धनुमव करता है कि उन्नति के लिये, बृहस्पतिं न कं ९. १०१ सुर-६ भरथववेद्-माष्य ;:;: ३०७ मणिम्) जिस कामनामयी मभि को -(भकध्नाते) बान्वां, (सः) चंह (भयम् मणिर) यहु मणिः: (मा श्रागमत्) ,युमे आप्तः हुई है; (बरोहियवाभ्यां सह) धान रौर जौ के साय, (महां भूतया सह) महत्त भौर सम्प्ि ा विभति मणिम्) जिस कामनाभयो मणिं को (रव्यात्). बान्वा (सः) - बह (यम् मणिः) यह कामनामयी भणि (भा) मुम (भगमत्) प्राप्त ५६ है,

English

Who out of many, tell me, is that Skambha, On whom Prajāpati set up and firmly stablished all the worlds?

अध्याय १०

श्लोक 7.19

यस्य॒ ब्रह्म॒ मुख॑मा॒हुर्जि॒ह्वां म॑धुक॒शामु॒त।वि॒राज॒मूधो॒ यस्या॒हुः स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

yasya brahma mukhamāhurjihvāṃ madhukaśāmuta| virājamūdho yasyāhuḥ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

. (मषोः घृतस्य धारया) यहद रौर धृतं कीं धारा के साध, (मणिः) वंह. मणि (कीलंसेन, सह) भनौ तथा भन्न के सोरभूत भ्रंश कै साथ । कीलालेन =भन्ेन (अथव ° ६।६६1१, सायण । कीलालम् = ्रन्नस्थ भ्रार प्राण दार्विति, (पयसा दष-के. (सह) साथ, तथा (द्रविणेन) ! मन काह मपय नह कि शृत ते वो ो ममि प तेच रौर त्विषि काः परस्पर सम्बन्धं है, तशषा.यदा भौर कीति काभ,

English

That universe which Prajāpati created, wearing all forms,, the highest, midmost, lowest, How far did Skambha penetrate within it? What portion did he leave unpenetrated? How far within the past hath Skambha entered? How much of him hath reached into the

अध्याय १०

श्लोक 7.20

यस्मा॒दृचो॑ अ॒पात॑क्ष॒न् यजु॒र्यस्मा॑द॒पाक॑षन्।सामा॑नि॒ यस्य॒ लोमा॑न्यथर्वाङ्गि॒रसो॒ मुखं॑ स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

yasmādṛco apātakṣan yajuryasmādapākaṣan| sāmāni yasya lomānyatharvāṅgiraso mukhaṃ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

म्यौ मंन््र २२-२३ के अनुसार । -देवताः) देव (तं इमम्) ूवेवाधिदः इस (मणिम्) मणि को (ष्ये) , । ष्ट के लिय (मह्यम्) भुम (ददतु) देवे, जो कि (मणिम्) मणि (भरभि- कां०.१७१.सु० ६ भरथववेद-माष्य ३०९ उन काविनाश करनेवाली है 1... १, क ऊ ५ च

English

Skambha penetrate within it? Who out of many, tell me, is that Skambha in whom men recognize the Waters, Brahma, In whom they know the worlds and their enclosures, in whom are non-existence and

अध्याय १०

श्लोक 7.21

अ॒स॒च्छा॒खां प्र॒तिष्ठ॑न्तीं पर॒ममि॑व॒ जना॑ विदुः ।उ॒तो सन्म॑न्य॒न्तेऽव॑रे॒ ये ते॒ शाखा॑मु॒पास॑ते

asacchākhāṃ pratiṣṭhantīṃ paramamiva janā viduḥ | uto sanmanyante'vare ye te śākhāmupāsate

हिन्दी अर्थ

देवला दाख हा है, या इसका श्रभिप्राय है दिव्यगुणी महातपा आदि । म्र मे “मणि” क श्रभिप्रायं.है, शुभकामना, तथा शुभ संकल्प । इस दारा सुद दित्ार -भौर कमख्पी शुभो का पराभव तथा दप्न होता, तथा (्रहय्णा तेजसा" ब्रह्मः श्नौरं उस केः तेजं-के (सह) सायः्साथ. (मे). रूपी मणि को (्रति.मुञ्चोमि). व .षारण करता हं। गृह ; मणि (भरसपतनः) सपत्नो से रहित करती है, (सपत्नहा ) -संपनों का ह्न करती (१) श्रासुर' विचारयोःधरौर भासुरः करो के कषयके कारण के ब्रह्म भ्रोर उसः का बेज्॑राष्त भ्रा ह ।.“ (२) सके साथ ही मेरे जीवन -मे मेर को सपत्न काम, कोष भादि नहीं रहा 1 (३)-यदि कोई सपलन प्रविष्ट हैः तो यह मणि उस का हनन कर देगी. (४); वस्तुतः इस.मण्नि ने; मेरे सब. ौ १; ३१२ : भ्रथववेद-माष्य कां०:१० .सः ६

English

existence? Declare that. Skambha, who is he of many,

अध्याय १०

श्लोक 7.22

यत्रा॑दि॒त्याश्च॑ रु॒द्राश्च॒ वस॑वश्च स॒माहि॑ताः ।भू॒तं च॒ यत्र॒ भव्यं॑ च॒ सर्वे॑ लो॒काः प्रति॑ष्ठिताः स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

yatrādityāśca rudrāśca vasavaśca samāhitāḥ | bhūtaṃ ca yatra bhavyaṃ ca sarve lokāḥ pratiṣṭhitāḥ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

करं०-१८ ५ सु० भ्रयत्रवेद-भोष्यः ५५. भरौरः दषं का;या दोहः दुष आदि.का इमे क्षयः लोकाः) ये (व शेष्टता के लिये, ताकि गै धेष्ठः बनः जाऊ । -. .. ध (यजञवर्धन मणे) है मणि (यसै - जिसे कैने,. (शिवम् मणे) .यज्ञ वर्धकः है ; यस्मै). जि वम्, . ¦ : :.:+ कोहीःमणिकहा हैः सदृगुष, जिस भ्रभ्प्रासी.को थह शिवमणि.. पहनात्रा ह. पा.सक.। परमेदवर के. हस-उह् र्य.मे जो महानुभाव सहायता .प्रदान.करते करते या जीवित होते ह, (सः मभिः). बह परमेदबरमणि (रा) मेरे ,' ह व दिणा केत होते है इभिये परमस को "पदिण कदी है ।

English

In whom, exerting every power, Fervour maintains her loftiest vow; In whom are comprehended Law, Waters, Devotion and Belief Who out of many, tell me, is that Skambha

अध्याय १०

श्लोक 7.23

यस्य॒ त्रय॑स्त्रिंशद् दे॒वा नि॒धिं रक्ष॑न्ति सर्व॒दा।नि॒धिं तम॒द्य को वे॑द॒ यं दे॑वा अभि॒रक्ष॑थ

yasya trayastriṃśad devā nidhiṃ rakṣanti sarvadā| nidhiṃ tamadya ko veda yaṃ devā abhirakṣatha

हिन्दी अर्थ

उपजाऊ भमि मे, (बीजम्) बीजः (युथा) जसे (रोति) प्ररोह करतादहै, ।॥ ब्रह्म॑णा ॥३५॥ र प्रादभ त होता है .(एवा) इषो अकार् (मयि) मेरे निमित्त. (प्रजाः, पशवः) ( - ४४ श्तदरकषिण तदथं हमारी. सैको, स्तुतिरूप -द्षिणाभरो के. श्रधिकारीं पूवं के मन्त्र मेँ कथित कामनार्थं कै सफन हो जनि प॑र परमेरवर के ॥ जंल, मेषरूपं होकर, . जवं बंरसते दहै, तब.श्रनन की उत्पत्ति कः वणितः भ्रमिलषारएं पूं होती ह । जतिवेदाः भग्न है जो करि “जातः" . भर्थातूरः

English

On whom as their foundation earth and firmament and sky are set; In whom as their appointed place rest Fire and Moon and Sun and Wind?

अध्याय १०

श्लोक 7.24

यत्र॑ दे॒वा ब्र॑ह्म॒विदो॒ ब्रह्म॑ ज्ये॒ष्ठमु॒पास॑ते ।यो वै तान् वि॒द्यात् प्र॒त्यक्षं॒ स ब्र॒ह्मा वेदि॑ता स्यात्

yatra devā brahmavido brahma jyeṣṭhamupāsate | yo vai tān vidyāt pratyakṣaṃ sa brahmā veditā syāt

हिन्दी अर्थ

उत्व परत्यक पदां में विद्यमान है + “जातवेदाः-=जातानि व्द । जातानि जातप्रजञः” (निखक्त ७।५।१९ ) । लथां “जातवेदस दति जातमिदं सर्व सच रा प्रज्वलित होती है, चमकती है । जातवेदाः की निखुकितयां प्रमेवराण्नि मे भरधिक सुसंगत होती है, उस के समिद्ध हो जानि प्र, प्रकट ह नाने पर दारां पा्षो.की निवृत्तिं (४०) हिरण्यय वेतस (४१) । संसारपट.का

English

Who out of many, tell me, is that Skambha He in whose body are contained all three-and-thirty Deities? Who out of many, tell me, is that Skambha.

अध्याय १०

श्लोक 7.25

बृ॒हन्तो॒ नाम॒ ते दे॒वा येऽस॑तः॒ परि॑ जज्ञि॒रे।एकं॒ तदङ्गं॑ स्क॒म्भस्यास॑दाहुः प॒रो जनाः॑

bṛhanto nāma te devā ye'sataḥ pari jajñire| ekaṃ tadaṅgaṃ skambhasyāsadāhuḥ paro janāḥ

हिन्दी अर्थ

३१४ ' पमथरवेवेद-भाष्य कां० १०॥। सू० ७ -. परसेदवर् “रकाय है (यजु० ४०।८), काया 4 रदित है 4.4 भरतः इस के.मद्गं नदीं द । परन्तु - वेदो ओर. वैदिक साहित्य म परभरवर. को पुरुष यस्याः पुरुप.उच्थते.(श्रयंवं ° १९१२।१८) । “पुरुषविशेष ईश्वरः '.(पोग दोनों पुरषपद वाच्य है । इस साधम्यं के कारण़ मानुषे-पुरुष कर भज्ञोका नारोप परमेदवर-पुरष मे हमा है. सातूष-पुरष के भिन्न-भिन्न भङ्गा का भूषय से मूतः लिङ्क से बीर प्रवाहित होता है । इसी भकार मस्तिष्कं भं :

English

In whom the Sages earliest born, the Richas, Sāman, Yajus, Earth, and the one highest Sage abide?

अध्याय १०

श्लोक 7.26

यत्र॑ स्क॒म्भः प्र॑ज॒नयन् पुरा॒णं व्यव॑र्तयत्।एकं॒ तदङ्गं॑ स्क॒म्भस्य॑ पुरा॒णम॑नु॒संवि॑दुः

yatra skambhaḥ prajanayan purāṇaṃ vyavartayat| ekaṃ tadaṅgaṃ skambhasya purāṇamanusaṃviduḥ

हिन्दी अर्थ

कं केथन शन मन्त म नहीं हमा जिनसे कि ये कायं हो. रहे ह । परमेरवंर् के ्रङ्ख है नदी, भरतः उन का कथने. मी नहीं हृभरा। भयवा भन्ञेका . भिन्न-भिन्न सामथ्ये । यजुकेद (४५१ १०-१३ ) में परमदवर पुष कां१, १०:।्९.७ -अथवववेव-माष्य ३१५ सामथ्यं को मोपतादहृभा! , र करी भ्रोर करमशः बुढृता जाता है, : मानोः वह क्रमशः श्रागे-भ्रागे बढ़ता हृ 7

English

Who out of many, tell me, is the Skambha. Who comprehendeth, for mankind, both immortality and death, He who containeth for mankind the gathered waters as his veins?

अध्याय १०

श्लोक 7.27

यस्य॒ त्रय॑स्त्रिंशद् दे॒वा अङ्गे॒ गात्रा॑ विभेजि॒रे।तान् वै त्रय॑स्त्रिंशद् दे॒वानेके॑ ब्रह्म॒विदो॑ विदुः

yasya trayastriṃśad devā aṅge gātrā vibhejire| tān vai trayastriṃśad devāneke brahmavido viduḥ

हिन्दी अर्थ

मातरि भ्रार्वनितीति वा, वायुः” (निरत ७।७।२६), मातरिद्वा वायु है, १. भूमि भरादि भका मे तिराधार कैसे स्थिव है - भतः भारय" मे .भदन कर्ता, निज मन मँ प्रदनं करता, है ॥. „ , ३ १ ६ । भथ्ववेद-भाष्य कां० १०।.स्५ ७ यो भ्न्तरिक्षे रजसो विमानः, कस्मै देवाय हविषा विषम” (यजु° ३२।६ ) भ चौ, पृथिवी, स्वः, नाकः, भन्तरिक्षम्--ये ५ लोक कटे है ।. “दिवः (ेष्न्) जाना चाहती हुई (मातरिष्वा) वाग (पवते) बहती है । (यत्र)

English

Who out of many, tell me, is that Skambha, He whose chief arteries stand there, the sky’s four regions, he irk whom Sacrifice putteth

अध्याय १०

श्लोक 7.28

हि॒र॒ण्य॒ग॒र्भं प॑र॒मम॑नत्यु॒द्यं जना॑ विदुः ।स्क॒म्भस्तदग्रे॒ प्रासि॑ञ्च॒द्धिर॑ण्यं लो॒के अ॑न्त॒रा

hiraṇyagarbhaṃ paramamanatyudyaṃ janā viduḥ | skambhastadagre prāsiñcaddhiraṇyaṃ loke antarā

हिन्दी अर्थ

उसमें दुःख का लेशं मी नहीं वह भ्रानन्दख्प है । ह मातरिदवा, देखो मन्त्र (२) । कतमः स्विद् अथवा “वह कौन सा हीह! उसे स्कम्भ कटर" 4 4 षट्क" । मार्सो का वणेन मन्त के र्वा मे हो चुका है 1 (्प्सन्ती;) जाने की. इच्छा. वाले (द्रवतः) गति कर रटे ह, ८ दौड़ रहे ै। -. . दिन-रात सदा युवा है, सृष्टिः के.श्रारम्भ से गति कर रहै है. थकावट ्तुभव नहीं करते, श्रतः सदा युवा है । इन भेदिन् तो शुक्ल है मरौर रावि

English

forth its might? They who in Purusha understand Brahma know Him who is. Supreme.

अध्याय १०

श्लोक 7.29

स्क॒म्भे लो॒काः स्क॒म्भे तपः॑ स्क॒म्भेऽध्यृ॒तमाहि॑तम्।स्कम्भ॑ त्वा वेद प्र॒त्यक्ष॒मिन्द्रे॒ सर्वं॑ स॒माहि॑तम्

skambhe lokāḥ skambhe tapaḥ skambhe'dhyṛtamāhitam| skambha tvā veda pratyakṣamindre sarvaṃ samāhitam

हिन्दी अर्थ

लहसें के जल, वाष्पीभरुत. बौर मेधीय तथा वर्षा के जल । स्कम्मं ते इहि कतमः सविदेव सः॥७॥ =. . एति, (सर्वान् लोकान् ) . सब. लोकों को (अषांरयत्) धारण कर रहा हँ समृजे) प्रजा के पंति ने.सृष्टं किया है रचा है, ( तत्र) उसमे (कियता) -यञुवेद मेः कहा .है किधादोऽस्य विद्वा भूतानि, त्रिपादस्यामृतं दिवि"

English

He who knows Him who is Supreme, and he who knows the Lord of Life,

अध्याय १०

श्लोक 7.30

इन्द्रे॑ लो॒का इन्द्रे॒ तप॒ इन्द्रेऽध्यृ॒तमाहि॑तम्।इन्द्रं॑ त्वा वेद प्र॒त्यक्षं॑ स्क॒म्भे सर्वं॒ प्रति॑ष्ठितम्

indre lokā indre tapa indre'dhyṛtamāhitam| indraṃ tvā veda pratyakṣaṃ skambhe sarvaṃ pratiṣṭhitam

हिन्दी अर्थ

“श्रापः' प्रथमा विभवति मे है, भरतः “जनाः का विशेषण है। “ वेत्ता जानते हैः (श्रथुवं ० ७।२७ ३२० । श्रथववेद-भाष्य कां० १० सू० 9 जिस में (द्यौः) च लोक (भ्ाहिता) स्थित है (यत्र) ध हरा है, इस लिये उस के निर्दशे ये सब चल् रहे है ।

English

Who out of many, tell me, is that Skambha Whose mouth they say is Holy Lore, his tongue the Honey- sweetened Whip, his udder is

अध्याय १०

श्लोक 7.31

नाम॒ नाम्ना॑ जोहवीति पु॒रा सूर्या॑त् पु॒रोषसः॑ ।यद॒जः प्र॑थ॒मं सं॑ब॒भूव॒ स ह॒ तत् स्व॒राज्य॑मियाय॒ यस्मा॒न्नान्यत् पर॒मस्ति॑ भू॒तम्

nāma nāmnā johavīti purā sūryāt puroṣasaḥ | yadajaḥ prathamaṃ saṃbabhūva sa ha tat svarājyamiyāya yasmānnānyat paramasti bhūtam

हिन्दी अर्थ

शम्भं ते शरदि. कतमः स्विदेव सः ॥१२॥ = रव जिस के भ्म (सवे) सब (त्रमस्तरि्त् देवाः ) ३३ १११ ) यजुरवंद ७।१९ में कहा है कि “देवा. दिवि क्ष मे स्थितहै। “भ्रापः त (निधं० १1३) । बृहदारण्यकोपनिषद् में कटरा है कि “कतमे ते त्रयस््रिरादिति, ॑ एकाद स्थ, पुंधिव्याम् एकाद स्थ, होता है कि ३३ देवतान मे ११ तो द्युलोकस्य है, प्रकृतिजन्य कहा है (ङ्ख गात्रा - (अथव ० ७।२७ 88, क

English

Virāj, they say? Who out of many, tell me, is that Skambha From whom they hewed the lichas off, from whom they chipped the Yajus, he

अध्याय १०

श्लोक 7.32

यस्य॒ भूमिः॑ प्र॒मान्तरि॑क्षमु॒तोदर॑म्।दिवं॒ यश्च॒क्रे मू॒र्धानं॒ तस्मै॑ ज्ये॒ष्ठाय॒ ब्रह्म॑णे॒ नमः॑

yasya bhūmiḥ pramāntarikṣamutodaram| divaṃ yaścakre mūrdhānaṃ tasmai jyeṣṭhāya brahmaṇe namaḥ

हिन्दी अर्थ

एकषियैस्मिभारषितः स्कम्भं तं वहि कतमः सदेव घः ॥१४॥ ... : ऋषयः-- सम्भवतः चार ऋषि, जिन कै दारा चार वेद प्रकट हुए । ये द्वारा प्रकट हुभा हो, भ्रतः धरंथर्वाः को एकषि कहा है । सिंदेव सः ॥१५॥ =," त (यत्न पुरषे, भरधि) जिस परमेदवर-पुंरषं में (श्रमृतम्, च) मोक्ष नदियों मेत समुद्रं (यस्म). जिस का (नाडघः) नाडीसंस्थान है, जो

English

Whose hairs are Sāma-verses and his mouth the Atharvāngi- rases?

अध्याय १०

श्लोक 7.33

यस्य॒ सूर्य॒श्चक्षु॑श्च॒न्द्रमा॑श्च॒ पुन॑र्णवः ।अ॒ग्निं यश्च॒क्र आ॒स्यं॑ तस्मै॑ ज्ये॒ष्ठाय॒ ब्रह्म॑णे॒ नमः॑

yasya sūryaścakṣuścandramāśca punarṇavaḥ | agniṃ yaścakra āsyaṃ tasmai jyeṣṭhāya brahmaṇe namaḥ

हिन्दी अर्थ

पशुषे परमेरवर'पुखुष, जो कि ब्रह्मपुर रम निवास करता है, (श्रथ ०. मानुष-शरीरस्थ रक्त-वाहिनी नाडियां । वेद मे हृदय को “समुद्र” मी कहते . २. मरन््ो मेँ भ्रथर्वा-ऋषि के कथन से वेद मे एेतिहासिक वणेन नहीं जाननां ऋषि है । ये माुष-पुत्र नही, जिन का कि सम्बन्ध इतिहास के साथ होता है.। है । भरतः “समुद्रः” मे एक वचन, भौर “नाडधः” में बहुवचन के प्रयोगो दवारा

English

Men count as ‘twere a thing supreme nonentity’s conspicuous branch; And lower man who serve thy branch regard it as an entity. Who out of many, tell me, is that Skambha

अध्याय १०

श्लोक 7.34

यस्य॒ वातः॑ प्राणापा॒नौ चक्षु॒रङ्गि॑र॒सोऽभ॑वन्।दिशो॒ यश्च॒क्रे प्र॒ज्ञानी॒स्तस्मै॑ ज्ये॒ष्ठाय॒ ब्रह्म॑णे॒ नमः॑

yasya vātaḥ prāṇāpānau cakṣuraṅgiraso'bhavan| diśo yaścakre prajñānīstasmai jyeṣṭhāya brahmaṇe namaḥ

हिन्दी अर्थ

मानुष-शरीरस्थ हंदय-भ्ौर-नाडियां रूप कही है । स्कम्भ को पुरुष कहा (यस्य ) जिस की. (चतस्रः प्रदिशः) . चार दिशाएं (प्रथमाः) चार . के चार कोष्ठक होतेह, (१) 1 ॥1 श्णा०ल (र) , 2 रला. है, जिन कि. पएए़लां०ः ०02 08४8 तथा र्णिति07 रला 0त्रणव कहते हैं । शरीर के श्रधोभाग से गन्दा रक्त, रिण ४6०8 04४8४ मेँ

English

In whom Ādityas dwell, in whom Rudras and Vasus are contained, In whom the future and the past and all the worlds are firmly set;

अध्याय १०

श्लोक 7.35

स्क॒म्भो दा॑धार॒ द्यावा॑पृथि॒वी उ॒भे इ॒मे स्क॒म्भो दा॑धारो॒र्व॑१न्तरि॑क्षम्।स्क॒म्भो दा॑धार प्र॒दिशः॒ षडु॒र्वीः स्क॒म्भ इ॒दं विश्वं॒ भुव॑न॒मा वि॑वेश

skambho dādhāra dyāvāpṛthivī ubhe ime skambho dādhārorva1ntarikṣam| skambho dādhāra pradiśaḥ ṣaḍurvīḥ skambha idaṃ viśvaṃ bhuvanamā viveśa

हिन्दी अर्थ

कटु होकर 1२1800८ वण०रमे ध्रा गिरताहै। शरीरके ऊपरके भागसे भी गन्दा रक्त, ऽपफएव्यणः शाद ०३१४ में इकटुा हो करः रिशा व्ण. ०९ न्ना गिरता है। पिशा 2ण71८16 जब -गन्दे रक्त सेभरजाताहै. तब यहां से गन्दा रक्त 21801 9०70016 मे जाता है । इसके भर जाने पर समग्र शरीर मँ जाता है। इस प्रकार हदयं मे चार मुख्य नाब्ियां होती हैः रक्त को फेफडों मे भेजने वाली नाड़ी एणाण०णका लाए, (४) शुद्ध रक्त को हृदय में लाने वाली नाड़ी वणाणणा०ा ला । ये चार नाडियां मुख्य नाडियां ह ्ोकि “चतन्नः प्रदिशाः” की प्रतिरूपिणी ह ।

English

Whose secret treasure evermore the three-and thirty Gods protect? Who knoweth now the treasure which, O Deities ye watch and guard? Where the Gods, versed in Sacred Lore, worship the loftiest

अध्याय १०

श्लोक 7.36

यः श्रमा॒त् तप॑सो जा॒तो लो॒कान्त्सर्वा॑न्त्समान॒शे।सोमं॒ यश्च॒क्रे केव॑लं॒ तस्मै॑ ज्ये॒ष्ठाय॒ ब्रह्म॑णे॒ नमः॑

yaḥ śramāt tapaso jāto lokāntsarvāntsamānaśe| somaṃ yaścakre kevalaṃ tasmai jyeṣṭhāya brahmaṇe namaḥ

हिन्दी अर्थ

कां० १० सू०७ भरथरवंवेद-माष्य ३२३ हदय के चार कोष्ठटकोंका कृतिम चिच्र- ये पुरुषे ब्रह्म॑ षिदुस्ते विदुः परमेष्ठि । यो वेद परमेष्ठिने यश्च वेहै प्रजापति । (ये) जो (पुर्षे) पुरी मेँ शयन करने वाले जीवात्मा मँ (ब्रह्म विदुः) को जानता है (यःच) श्रौर जो (प्रजापतिम् वेद) उस के प्रजापति

English

Power Divine The priest who knows them face to face may be a sage who knows the truth.

अध्याय १०

श्लोक 7.37

क॒थं वातो॒ नेल॑यति क॒थं न र॑मते॒ मनः॑ ।किमापः॑ स॒त्यं प्रेप्स॑न्ती॒र्नेल॑यन्ति क॒दा च॒न

kathaṃ vāto nelayati kathaṃ na ramate manaḥ | kimāpaḥ satyaṃ prepsantīrnelayanti kadā cana

हिन्दी अर्थ

प्रकृति-श्नौरःपुरुष- जीवात्मा मे, परम है पुरुष जीवात्मा , इस परम-पुश्ष मँ स्थित परमेरवर. परमेष्टी नाम वाला है। तथा प्रकृति मेँ ३२४ भ्रथ्वेवेद-माष्य कां १० ५ सू० ७ (वेश्वानरः) सूयं (यस्य) - जिसका शिरः सिरं है, (अ्रदङ्किरसः) तथा सूयं की रदिमयां (चक्षुः) भ्रंख की रदिमयां (अभवन्) हुई है। जताने के लिये कि जैसे मानुष-पुखष के भङ्गो मे प्रेरणा जवात्मा द्वारा होती विराजमूधो यस्याह स्कम्भं तं ब्रहि कतमः सिवंदेव सः॥१९॥ कहते है, (उत), भ्रौर (मधुकम्) रेदयीरूप मधुर वेदवाणौ (जिह्वाम्)

English

Great, verily, are those Gods who sprang from non-existence into life. Further, men say that that one part of Skambha is nonentity. Where Skambha generating gave the Ancient World its shape and form,

अध्याय १०

श्लोक 7.38

म॒हद् य॒क्षं भुव॑नस्य॒ मध्ये॒ तप॑सि क्रा॒न्तं स॑लि॒लस्य॑ पृ॒ष्ठे।तस्मि॑न्छ्रयन्ते॒ य उ॒ के च॑ दे॒वा वृ॒क्षस्य॒ स्कन्धः॑ प॒रित॑ इव॒ शाखाः॑

mahad yakṣaṃ bhuvanasya madhye tapasi krāntaṃ salilasya pṛṣṭhe| tasminchrayante ya u ke ca devā vṛkṣasya skandhaḥ parita iva śākhāḥ

हिन्दी अर्थ

जिह्वा है, ठा कहते ह । (विराजम्) प्रकृति को (यस्य) जिस का (ऊधः) . त । "वहति यत् इति ऊघः, गवादेदुंगस्थानं वा” (उणा ° ४११९४, महषि दयानन्द ), यह. ऊधः दुर्ध का वहन करता है । शन्दोच्चा- (१४) मे. “यत्र ऋषयः प्मथजाः' इस बहुवचन हारा तीन ऋषियों का,. ऋषियों के साथ ही इन द्वारा भ्राविभरुत चार वेदोका भी कथन हृप्ना है). प्रकृति है विराञ्-रूपी-गौः ! इस से परमेइवर ने जगत् रूपी दध्र दोहा है ।

English

They recognized that single part of Skambha as the Ancient World,

अध्याय १०

श्लोक 7.39

यस्मै॒ हस्ता॑भ्यां॒ पादा॑भ्यां वा॒चा श्रोत्रे॑ण॒ चक्षु॑षा ।यस्मै॑ दे॒वाः सदा॑ ब॒लिं प्र॒यच्छ॑न्ति॒ विमि॒तेऽमि॑तं स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

yasmai hastābhyāṃ pādābhyāṃ vācā śrotreṇa cakṣuṣā | yasmai devāḥ sadā baliṃ prayacchanti vimite'mitaṃ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

कां०.१० । सू० ७ भ्रथ्वेवेद-माष्य ३२५ (यस्मात्) जिस परमेश्वर से ऋषियों ने (ऋचः) ऋवाश्रों ऋर- (यस्य) .जिस परमेरवर के (लोमानि). लोम सदृश है । (्रथर्वाङ्कखिरसः) भरङ्खों के तथा भरोषधि्यो के रसो का वर्णेन करने वाला भ्रथवंवेद (मुखम्) भ्रषाकषन् = इस क्रियापद मे “कष” धातु है जिस का श्रथं है “हिसा (स्वादि) । ऋषि या तपस्व, निज एषणा का क्षय करके, यजुर्वेद को करते है! सामवेद भविततगानों का वर्णेन करता है, जिन गानो द्वारा प्रायः नोमहृषेण हो जाता है । भ्रतः सामों को लोमानि कहां है । प्रथववेद मे नाना

English

The three-and-thirty Gods within his body were disposed as limbs: Some, deeply versed in Holy Lore, some know those three-and- thirty Gods. Men know Hiranyagarbha as supreme and inexpressible:

अध्याय १०

श्लोक 7.40

अप॒ तस्य॑ ह॒तं तमो॒ व्यावृ॑त्तः॒ स पा॒प्मना॑ ।सर्वा॑णि॒ तस्मि॒न् ज्योतीं॑षि॒ यानि॒ त्रीणि॑ प्र॒जाप॑तौ

apa tasya hataṃ tamo vyāvṛttaḥ sa pāpmanā | sarvāṇi tasmin jyotīṃṣi yāni trīṇi prajāpatau

हिन्दी अर्थ

उपासना करते रहते है। चान्द, सू्य,मूति भादि भभिव्यक्त पदाथं शाखारूप है, वे इन शाखाभ्रों की उपासना मँ मस्त रहते है । व्याख्या के लिये देखो (मन्त्र १३) । निषि तम॒थकोवेद यं द्वा मभिरक्षय ॥२३॥ (भ्र्य) भाज तक, -(कः वेद). कोन जानता है (यम्) जिस. निधिकी देवाः) है देवो ! (श्रभिरक्षथ) तुम रक्षा करते हो । , 8

English

Skambha, I clearly know that all of thee on Indra is imposed. On Indra Fervour rests, on him the worlds and Holy Law recline. Indra, I clearly know that all of thee on Skambha findeth rest.

अध्याय १०

श्लोक 7.41

यो वे॑त॒सं हि॑र॒ण्ययं॒ तिष्ठ॑न्तं सलि॒ले वेद॑ ।स वै गुह्यः॑ प्र॒जाप॑तिः

yo vetasaṃ hiraṇyayaṃ tiṣṭhantaṃ salile veda | sa vai guhyaḥ prajāpatiḥ

हिन्दी अर्थ

निधि जगत् 4 इस के रहस्य को कोई नहीं जानता । भ्रथवा निधि वेद । इस के भी रदस्य को भ्राज ठक किसी ने नहीं जाना । यथा “निधि- कां० १० सु० ७ म्रथरवेवेद-भाष्य । ३२७ हो जाता है, भरौर (वेदिता) ब्रह्मवेत्ता हो जाता है । बनता है। वेदोँमें ब्रह्मकी ही उपासना विहित है, यथा न न वेदं - ज्येष्ठन्रह्य के उपासक कटे है । ।

English

Ere sun and dawn man calls and calls one Deity by the other’s name. When the Unborn first sprang into existence he reached that independent sovran lordship;

अध्याय १०

श्लोक 7.42

त॒न्त्रमेके॑ युव॒ती विरू॑पे अभ्या॒क्रामं॑ वयतः॒ षण्म॑यूखम्।प्रान्या तन्तूं॑स्ति॒रते॑ ध॒त्ते अ॒न्या नाप॑ वृञ्जाते॒ न ग॑मातो॒ अन्त॑म्

tantrameke yuvatī virūpe abhyākrāmaṃ vayataḥ ṣaṇmayūkham| prānyā tantūṃstirate dhatte anyā nāpa vṛñjāte na gamāto antam

हिन्दी अर्थ

, बृहन्तो नाम् ते देवा येऽस॑तः परिं जह्रे । (ते देवाः) वे देव (बृहन्तः) परिमाण में बड़ होतेह (ये) जोकि प्रकृति से जो दिव्यपदाथं पैदा होते ह वे परिमाणो में बड़ होतेह कूल्येन परस्पर सहमत हो कर जानते है । पराण =पुराकाल से वतमान प्रकृति । मन्त्र २५ म प्रकृति को

English

than which aught higher never hath arisen. Be reverence paid to him, that highest Brahma, whose base is Earth, his belly Air, who made the sky to be his head.

अध्याय १०

श्लोक 7.43

तयो॑र॒हं प॑रि॒नृत्य॑न्त्योरिव॒ न वि जा॑नामि यत॒रा प॒रस्ता॑त्।पुमा॑नेनद् वय॒त्युद्गृ॑णन्ति॒ पुमा॑नेन॒द् वि ज॑भा॒राधि॒ नाके॑

tayorahaṃ parinṛtyantyoriva na vi jānāmi yatarā parastāt| pumānenad vayatyudgṛṇanti pumānenad vi jabhārādhi nāke

हिन्दी अर्थ

३३ देवों के लिये देलो मन्त्र (१३) । ॑ यदय है; भ्रनतिवंदनीय है, इसंके सम्बन्ध में भ्रधिक कहा नहीं जा सकता । कां१.१० । सू० ७ भरथरवेवेद-माष्य ३२९ लोकाः तीनों लोक । तपः=-देशव्यं (तप एेदवये, दिवादिः)! ऋतम् = सांसारिक नियम । मन्व मे स्कम्भ को इन्र कहाहै1 इं कोकां हृदे तप इनरेष्येतमाहतम् । २३३० भ्रथवववेद-माष्य -कांर १०॥सु० 3

English

Homage to highest Brahma, him whose eye is Sūrya and the Moon who groweth young and new again, him who made

अध्याय १०

श्लोक 7.44

इ॒मे म॒यूखा॒ उप॑ तस्तभु॒र्दिवं॒ सामा॑नि चक्रु॒स्तस॑राणि॒ वात॑वे

ime mayūkhā upa tastabhurdivaṃ sāmāni cakrustasarāṇi vātave

हिन्दी अर्थ

दय से पहिले, (पुरा एषसः) तथा उषा के काल से पहिले, (जोहवीति) - दय भ्रौर उषा से पूवं (सम्बभूव ) उपासना में उपस्थित होता है (सः). वह, भोज्य पदाथं को चवित्त कर के उसे सूषक्षमलूप कर देता है । कार-१०।-सु०७ भ्रथवंवेद"माष्य . ˆ ३३१ (वातः) वायु (यतस्य) जिसके (प्राणपानौ) प्राण भौर भ्रपानरहै

English

Agni for his mouth. Homage to highest Brahma, him whose two life-breathings were the Wind, The Angirases his sight: who made the regions be his means of sense.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Atharva Veda — Chapter 10
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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