Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
11
अध्याय 11 / 20

Kanda 11

काण्ड 11

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पूर्ण अध्याय पाठ68 श्लोक

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अध्याय ११

श्लोक 1.1

ब्रह्मौदनम्।१-३७ ब्रह्म।ओदनः।त्रिष्टुप्, १ अनुष्टुब्गर्भा, भुरिक्पङ्क्तिः, २ बृहतीगर्भा विराट्, ३ चतुष्पदा शाक्वरगर्भा जगती, ४, १५-१६ भुरिक्, ५ बृहतीगर्भा विराट्, ६ उष्णिक्, ८ विराड् गायत्री, ९ शाक्वरातिजागतगर्भा जगती, १० विराट् पुरोतिजगती विराड् जगती, ११ जगती, १७, २१, २४-२६, २९ (भुरिक्), ३७ विराड् जगती, १८ अतिजागतगर्भा परातिजागता विराडतिजगती, २० अतिजागतगर्भा परा शाक्वरा चतुष्पदा भुरिग्जगती, २७ अतिजागतगर्भा जगती, ३१ भुरिक्, ३५ चतुष्पदा ककुम्मत्युष्णिक्, ३६ पुरोविराड् (व्याघ्रादिष्ववगन्तव्या)।अग्ने॒ जाय॒स्वादि॑तिर्नाथि॒तेयं ब्र॑ह्मौद॒नं प॑चति पु॒त्रका॑मा ।स॒प्त॒ऋ॒षयो॑ भूत॒कृत॒स्ते त्वा॑ मन्थन्तु प्र॒जया॑ स॒हे॑ह

brahmaudanam| 1-37 brahma| odanaḥ| triṣṭup, 1 anuṣṭubgarbhā, bhurikpaṅktiḥ, 2 bṛhatīgarbhā virāṭ, 3 catuṣpadā śākvaragarbhā jagatī, 4, 15-16 bhurik, 5 bṛhatīgarbhā virāṭ, 6 uṣṇik, 8 virāḍ gāyatrī, 9 śākvarātijāgatagarbhā jagatī, 10 virāṭ purotijagatī virāḍ jagatī, 11 jagatī, 17, 21, 24-26, 29 (bhurik), 37 virāḍ jagatī, 18 atijāgatagarbhā parātijāgatā virāḍatijagatī, 20 atijāgatagarbhā parā śākvarā catuṣpadā bhurigjagatī, 27 atijāgatagarbhā jagatī, 31 bhurik, 35 catuṣpadā kakummatyuṣṇik, 36 purovirāḍ (vyāghrādiṣvavagantavyā)| agne jāyasvāditirnāthiteyaṃ brahmaudanaṃ pacati putrakāmā | saptaṛṣayo bhūtakṛtaste tvā manthantu prajayā saheha

हिन्दी अर्थ

कां० ११।.सु भ्रथर्वेवेद-भाष्य ५ च ५ वृषभ का प्रदान ऋषियों भौर ऋषि सन्तानो को- यह वेदिक संस्कृति (इयम् अदित्तिः) यह पृथिवी (नाथिता) नाथवती होना चाहती है, अपना स्वामी चाहती है, (पृक्रकामा) तु. जसे पुत्र की कामना वाली हो कर सात ऋषि; (प्रजया सह) प्रजा के साथ मिलकर, (इह) इस राष्ट्र या

English

An accompaniment to the preparation and presentation of a Brahmaudana Agni, spring forth! Here Aditi, afflicted, cooks a Brahmaudana, yearning for children.

अध्याय ११

श्लोक 1.2

कृ॒णु॒त धू॒मं वृ॑षणः सखा॒योऽद्रो॑घाविता॒ वाच॒मच्छ॑ ।अ॒यम॒ग्निः पृ॑तना॒षाट् सु॒वीरो॑ येन॑ दे॒वा अस॑हन्त॒ दस्यू॑न्

kṛṇuta dhūmaṃ vṛṣaṇaḥ sakhāyo'droghāvitā vācamaccha | ayamagniḥ pṛtanāṣāṭ suvīro yena devā asahanta dasyūn

हिन्दी अर्थ

दीविहीह" (भरथवं० २।६।४) ; . “सजातानां शेष्टय भा षह्य नम् (अथव ० १।६।३); “सजातानां मध्यमेष्ठा यथा सानि" (अथवं० ३।८।२); “"वजातानामेसद् वहती" (भ्रधरव ° ६।५।२) । सजातान् = समान जाति के साजा यह संगठन. संयुक्त-राज्य का सा प्रतीत होता है, जो कि. एक ही जाति के लोगो का है, सम्भवतः जसे कि भारत में एक् केन्द्रिय सरकार है, भौर ॥' दिया करे, यह भावना यहां प्रतीत होती है । तथा जव प्रान्तीय सरकारे .॥.

English

Then may we go unto the world of virtue. Fix on the skin these two joined press-stones, duly rending the fibres for the sacrificer.

अध्याय ११

श्लोक 1.3

अग्नेऽज॑निष्ठा मह॒ते वी॒र्याऽय ब्रह्मौद॒नाय॒ पक्त॑वे जातवेदः ।स॒प्त॒ऋ॒षयो॑ भूत॒कृत॒स्ते त्वा॑जीजनन्न॒स्यै र॒यिं सर्व॑वीरं॒ नि य॑च्छ

agne'janiṣṭhā mahate vīryā'ya brahmaudanāya paktave jātavedaḥ | saptaṛṣayo bhūtakṛtaste tvājījanannasyai rayiṃ sarvavīraṃ ni yaccha

हिन्दी अर्थ

प्रजा वाली, (सुपत्नी ) तथा उत्तमपति वाली तु (पत्या) पति के साथ मिल है, (कुम्भम्) जलंकुम्भ (प्रति गृभाय) पकड़ । कै साथ राजा भी स्वागत करतां है । यह यज्ञ श्रतिथियज्ञ है जिसमेंकि यह निर्देश किया है कि जलले कर भात बनवाने की तय्यारी करो; जसे

English

May hottest flames, divine, sprung from the Rishis, gathering, with the Seasons, heat this

अध्याय ११

श्लोक 1.4

समि॑द्धो अग्ने स॒मिधा॒ समि॑ध्यस्व वि॒द्वान् दे॒वान् य॒ज्ञियाँ॒ एह व॑क्षः ।तेभ्यो॑ ह॒विः श्र॒पयं॑ जातवेद उत्त॒मं नाक॒मधि॑ रोहये॒मम्

samiddho agne samidhā samidhyasva vidvān devān yajñiyā~ eha vakṣaḥ | tebhyo haviḥ śrapayaṃ jātaveda uttamaṃ nākamadhi rohayemam

हिन्दी अर्थ

१. सुषतस्य लोके तथा पत्पूलेकि--इन शब्दों से परलोक कीं भवना, स्वंथा ध अचित्त नहीं + विवाह के पश्चात् पत्नी जब पति के घर जाती है, तब वहं पतिलोक ग विराजमान होती है. । यथा ““श्षिवा स्योना पति लोके विराल” (भथवं०. १४।१। : . ६४) तथा'' पतिलोकमाविश्च" (परथ १४।२।४०) । इन उद्धरणों में पतिलोक का शभिप्राय. परलोक नही, .भपितु विवाहित भौर जौोवित पति के गृह का है।'

English

This second hand of Aditi, this ladle which the Seven Rishis, world-creators, fashioned. May this scoop deftly pile upon the altar, therein, the members of the rice-oblation.

अध्याय ११

श्लोक 1.5

त्रे॒धा भा॒गो निहि॑तो॒ यः पु॒रा वो॑ दे॒वानां॑ पितॄ॒णां मर्त्या॑नाम्।अंशा॑न् जानीध्वं॒ वि भ॑जामि॒ तान् वो॒ यो दे॒वानां॒ स इ॒मां पा॑रयाति

tredhā bhāgo nihito yaḥ purā vo devānāṃ pitṝṇāṃ martyānām| aṃśān jānīdhvaṃ vi bhajāmi tān vo yo devānāṃ sa imāṃ pārayāti

हिन्दी अर्थ

२५ श्रथर्वेवेद-भराष्यं कां० ११। सु° १ होता है, इसी प्रकार अन्न, जीवन का श्राश्रय होता है । इस मावना को. रूपमे होती है वे बड़े सुकर्मी होते । प्रतिथि सेवा, सामाजिक महा- . सहस्वः .शुतथांरो अवितो अस्मौदनो देवयानः खगैः ।

English

Let the dressed offering and divine Ones serve thee: creep from. the fire again, own these as masters.

अध्याय ११

श्लोक 1.6

अग्ने॒ सह॑स्वानभि॒भूर॒भीद॑सि॒ नीचो॒ न्युऽब्ज द्विष॒तः स॒पत्ना॑न्।इ॒यं मात्रा॑ मी॒यमा॑ना मि॒ता च॑ सजा॒तांस्ते॑ बलि॒हृतः॑ कृणोतु

agne sahasvānabhibhūrabhīdasi nīco nyu'bja dviṣataḥ sapatnān| iyaṃ mātrā mīyamānā mitā ca sajātāṃste balihṛtaḥ kṛṇotu

हिन्दी अर्थ

होता है, (शतधारः) श्रसंख्यातो का. धारण-पोषण करता है (अरक्षितः (मन्त्र १६), (देवयानः) यह देवमागं कंहलाता है, (स्वः) श्नौर सुख विशेष ्ाप्त कराता-है । (ते) है ब्रह्मन् ! तेरे लिये (बलिहाराय) बलि भेट के है, क्यो कि इस दवाय उस के पूरो की सेवा होती है । देवयानः==अतिथियज्ञ देवकोटि कै गृहस्थो का मागे है, इसलिये इस यज्ञ को भ्रवदय करते रहना

English

Made pure with Soma rest within the Brāhmans: let not thine eaters, Rishis’ sons, be injured. Give understanding unto these, King Soma! all the good Brāh mans who attend and serve

अध्याय ११

श्लोक 1.7

सा॒कं स॑जा॒तैः पय॑सा स॒हैध्युदु॑ब्जैनां मह॒ते वी॒र्याऽय ।ऊ॒र्ध्वो नाक॒स्याधि॑ रोह वि॒ष्टपं॑ स्व॒र्गो लो॒क इति॒ यं वद॑न्ति

sākaṃ sajātaiḥ payasā sahaidhyudubjaināṃ mahate vīryā'ya | ūrdhvo nākasyādhi roha viṣṭapaṃ svargo loka iti yaṃ vadanti

हिन्दी अर्थ

(गीता ३।१३), तथा “केवलाघो भवति केवलादी" (ऋ ० १०।११७।६ ) 1 का० ११। सूु०-र -अथरववेद-भाष्य ९६. (सायण) । अ्रथवा “रेषय” विनष्ट कर, रिष हिसायाम् । बलिः मन्त उरेहि वेदिं परजया वधेयेनां मुदस्व रक्षः भतरं ष्चनाम् ।

English

thee. Oft, in Brahmaudana, and well I call on: Rishis, their sons, and those who sprang from

अध्याय ११

श्लोक 1.8

इ॒यं म॒ही प्रति॑ गृह्णातु॒ चर्म॑ पृथि॒वी दे॒वी सु॑मन॒स्यमा॑ना ।अथ॑ गच्छेम सुकृ॒तस्य॑ लो॒कम्

iyaṃ mahī prati gṛhṇātu carma pṛthivī devī sumanasyamānā | atha gacchema sukṛtasya lokam

हिन्दी अर्थ

(पादयामि) च प्रवानमन्तरी, तेरे पादतले करता हूं, तेरे श्रधीन करता हूं । दिनि के यज्ञ के लिये वेदि.पर चढ़ा कर । (२) राष्टि प्रजा.की, सन्तानो- प्राबादी से रहित स्थान में रखा कर । (४) निजप्रजा का भंतिशय पालन- पोषण किया कर । (५) एसा यत्न किया कर कि हम समकक्ञ राष्ट्रो से तुम्हे श्रावस्त करतां कि दवेषियो को मै तेरे पदसेवी कर दुगा । यदिभ्रजा

English

Fervour. Here I set singly in the hands of Brāhmans these cleansed and. purifie d and holy Women,

अध्याय ११

श्लोक 1.9

ए॒तौ ग्रावा॑णौ स॒युजा॑ युङ्ग्धि॒ चर्म॑णि॒ निर्भि॑न्ध्यं॒शून् यज॑मानाय सा॒धु।अ॒व॒घ्न॒ती नि ज॑हि॒ य इ॒मां पृ॑त॒न्यव॑ ऊ॒र्ध्वं प्र॒जामु॒द्भर॒न्त्युदू॑ह

etau grāvāṇau sayujā yuṅgdhi carmaṇi nirbhindhyaṃśūn yajamānāya sādhu| avaghnatī ni jahi ya imāṃ pṛtanyava ūrdhvaṃ prajāmudbharantyudūha

हिन्दी अर्थ

यिनी हो, तो शत्रो पर विजय पाई जा सकती है . भा त्वा माप॑च्छपथो माभिचारः स्वे सेतर अनमीवा वि राज ॥२२॥ रति भ्राता हमा तु (देवताभिः सह) हैक्ताभ्नो के साथ. (एधि). हरा कर । २२ भ्रथवेवेद-माष्य का० ११। भू° १

English

May Indra, Marut girt, grant me the blessing which as I sprinkle you, my heart desireth. Here is my gold, a light immortal: ripened grain from the field this Cow of Plenty give me!

अध्याय ११

श्लोक 1.10

गृ॒हा॒ण ग्रावा॑णौ स॒कृतौ॑ वीर॒ हस्त॒ आ ते॑ दे॒वा य॒ज्ञिया॑ य॒ज्ञम॑गुः ।त्रयो॒ वरा॑ यत॒मांस्त्वं वृ॑णी॒षे तास्ते॒ समृ॑द्धीरि॒ह रा॑धयामि

gṛhāṇa grāvāṇau sakṛtau vīra hasta ā te devā yajñiyā yajñamaguḥ | trayo varā yatamāṃstvaṃ vṛṇīṣe tāste samṛddhīriha rādhayāmi

हिन्दी अर्थ

करर, जसे कि वे मन्थन करे प्रग्नि को प्रकट करते ह । वर्णेन हरा है । यज्ञियाग्नि को यज्ञपि लोग दो अरणि्यो से मथ कर भरकट करते है, राजाग्नि. को सप्ठपि-तथा-प्रजा दो. भरणियां बन कर, परस्पर स्र मअजामेंबाट देतो है। पृथिवी विना स्वामी के महीं रह सकती, इस सप्ठशषयः राज्य के सुचादरूप मँ संचालन के लिये न्यून-से-न्यून

English

Let the Seven Rishis, World-creators, rub thee into existence here with gift of offspring. Raise, as I bid, the smoke, my strong companions, lovers of free- dom from deceit and

अध्याय ११

श्लोक 1.11

॥ इ॒यं ते॑ धी॒तिरि॒दमु॑ ते ज॒नित्रं॑ गृ॒ह्णातु॒ त्वामदि॑तिः॒ शूर॑पुत्रा ।परा॑ पुनीहि॒ य इ॒मां पृ॑त॒न्यवो॒ऽस्यै र॒यिं सर्व॑वीरं॒ नि य॑च्छ

|| iyaṃ te dhītiridamu te janitraṃ gṛhṇātu tvāmaditiḥ śūraputrā | parā punīhi ya imāṃ pṛtanyavo'syai rayiṃ sarvavīraṃ ni yaccha

हिन्दी अर्थ

में भी सातऋषिर जोकि शरीरका संचालन करतेै। इसी प्रकार है । भराध्यात्मिक जगत में सात ऋषि यथा “सप्त ऋषयः प्रतिहिताः शरीरे" (यजु ३४।५५) । ये सात ऋषि है ५ ज्ञानेन्दरियां, १ मन श्रौर सातवीं तथा लोभ, काम, रोध ग्रादि वृत्तियां विकृत कर देती है । परन्तु सात्विक सेवा । मन्व के अनुसार पिरयो, जो कि ब्रहाज्ञ भरं वेदज्न होति हृए, न्रमात्यरूप से प्रजा के शासने मे, राजा की सहायता करते ह उनकी, तथा

English

malice! Victor in fight heroic, here is Agni by whom the Gods subdued the hostile demons.

अध्याय ११

श्लोक 1.12

॥ उ॒प॒श्व॒से द्रु॒वये॑ सीदता यू॒यं वि वि॑च्यध्वं यज्ञियास॒स्तुषैः॑ ।श्रि॒या स॑मा॒नानति॒ सर्वा॑न्त्स्यामाधस्प॒दं द्वि॑ष॒तस्पा॑दयामि

|| upaśvase druvaye sīdatā yūyaṃ vi vicyadhvaṃ yajñiyāsastuṣaiḥ | śriyā samānānati sarvāntsyāmādhaspadaṃ dviṣataspādayāmi

हिन्दी अर्थ

का० ११। सू° १ भथववेद-भाष्य , ७. इसीलिये रेसो को संस्कृत में “भ्रदेव"” कहते है । देसे व्यक्तियों की सेवा ४५ त है, पृथिवीस्थ प्रजा दुःखों के नदसेपारहो जाती है। मे यो देवानं स इमां पारयाति" मे “इमाम्” से ञयमभि. पततनाषाट् सुवीरो येनं देवा असंहन्त दसुन ॥२॥

English

Thou, Agni, wart produced for mighty valour, to cook Brahmau- dana, O Jātavedas. Seven Rishis, makers of the world, begat thee, Grant to this woman wealth with store of

अध्याय ११

श्लोक 1.13

परे॑हि नारि॒ पुन॑रेहि॑ क्षि॒प्रम॒पां त्वा॑ गो॒ष्ठोऽध्य॑रुक्ष॒द् भरा॑य ।तासां॑ गृह्णीताद् यत॒मा य॒ज्ञिया॒ अस॑न् वि॒भाज्य॑ धी॒रीत॑रा जहीतात्

parehi nāri punarehi kṣipramapāṃ tvā goṣṭho'dhyarukṣad bharāya | tāsāṃ gṛhṇītād yatamā yajñiyā asan vibhājya dhīrītarā jahītāt

हिन्दी अर्थ

(वृषणः) है सुखो की. वर्षा करने बालो! (सखाय : है सबके ऋषियो ! (वाचम्, भ्रच्छ) वेदवाणी को स्वामिमुखंकरके, उसका वालादहै, (सुवीरः ) उत्तम वीर है, (येन) जिस की . सहायता हारा देवा) उपक्षयकारी शनुभ्रों का. श्रसहन्त) पराभव करते रहे है । इस के साथ ही असहन्त इस द्वारा यह दर्ाया गया है .कि. राजा के . निमित्त चुना गया तेजस्वी, . हमारी सेना का नायक बन कर् पिते भौ युद्धो मे निय प्राप्त करता रहा है । इसलिये यह्. राजा. होने का अधिकारी है । राजमूयं-

English

heroes. Burn up, O Agni, kindled with the fuel. Knowing the Gods who merit worship, bring them.

अध्याय ११

श्लोक 1.14

एमा अ॑गुर्यो॒षितः॒ शुम्भ॑माना॒ उत्ति॑ष्ठ नारि त॒वसं॑ रभस्व ।सु॒पत्नी॒ पत्या॑ प्र॒जया॑ प्र॒जाव॒त्या त्वा॑गन् यज्ञः प्रति॑ कु॒म्भं गृ॑भाय

emā aguryoṣitaḥ śumbhamānā uttiṣṭha nāri tavasaṃ rabhasva | supatnī patyā prajayā prajāvatyā tvāgan yajñaḥ prati kumbhaṃ gṛbhāya

हिन्दी अर्थ

अर्ेऽननिष्ठा मते वीर्याय अक्षौ दनाय पत जातवेदः; १. भरात् उस. राजा फे राजसुय यञ्च भे, मृस्यु भौ उपरत हौ कर, उते . दे "८ सूचित होता है कि स्वयं चुने राना के -रोब्बें पर्ब जी, उक प्रषीन हो कर, ठस ढे राज्य भे बिचरेनी । स्वेष्छागारिता दे नही = भ्रथवेवेद-माष्य कां० ११) सु०.१

English

Cooking, for these, oblation, Jātavedas! lift up this man to heaven’s most lofty summit. Your portion from of old is triply parted, portion of Gods, of

अध्याय ११

श्लोक 1.15

ऊ॒र्जो भा॒गो निहि॑तो॒ यः पु॒रा व॒ ऋषि॑प्रशिष्टा॒प आ भ॑रै॒ताः ।अ॒यं य॒जो गा॑तु॒विन्ना॑थ॒वित् प्र॑जा॒विदु॒ग्रः प॑शु॒विद् वी॑र॒विद् वो॑ अस्तु

ūrjo bhāgo nihito yaḥ purā va ṛṣipraśiṣṭāpa ā bharaitāḥ | ayaṃ yajo gātuvinnāthavit prajāvidugraḥ paśuvid vīravid vo astu

हिन्दी अर्थ

ष्ठानी सात ऋषिरयो ते (त्वा) तुके (अजीजनन्) राजरूप में जन्म दिया है वीरम्) सब वीर (नियच्छ) नितरां प्रदान कर . = जातवेदसे =“जातानि वेद, जातविद्यो चा. जातपरज्ञानः” (निरक् दे कर प्रजा को वीर.बनानाये मी राजा के कत्तव्य कमं है 1 ९ ह ०५.५५ मे भेंट की गई एेच्छिक “कर -खूपी समिधा. दारा

English

Fathers, and of mortals. Know, all, your shares. I deal them out among you. The portion of the Gods shall save this

अध्याय ११

श्लोक 1.16

अग्ने॑ च॒रुर्य॒ज्ञिय॒स्त्वाध्य॑रुक्ष॒च्छुचि॒स्तपि॑ष्ठ॒स्तप॑सा तपैनम्।आ॒र्षे॒या दै॒वा अ॑भिसं॒गत्य॒ भा॒गमि॒मं तपि॑ष्ठा ऋ॒तुभि॑स्तपन्तु

agne caruryajñiyastvādhyarukṣacchucistapiṣṭhastapasā tapainam| ārṣeyā daivā abhisaṃgatya bhāgamimaṃ tapiṣṭhā ṛtubhistapantu

हिन्दी अर्थ

बाले है विधन ! (तेभ्यः) उन दिच्यजनों के लिये (हविः) ब्रह्मौदनरूपी कारियों का वणेन हमरा है 1 “इमम्” द्वारा राजा का, तथा “श्रे दवारा होता है, जो कि सप्त ऋषयः” मँ से एक ऋषि है । स्वेच्छापूरवेक “कर प्रदान” समिषाख्य है । ध .

English

woman. Strong art thou, Agni, conquering, all-surpassing. Crush down our foemen, ruin those who

अध्याय ११

श्लोक 1.17

शु॒द्धाः पू॒ता यो॒षितो॑ य॒ज्ञिया॑ इ॒मा आप॑श्च॒रुमव॑ सर्पन्तु शु॒भ्राः ।अदुः॑ प्र॒जां ब॑हु॒लान् प॒शून् नः॑ प॒क्तौद॒नस्य॑ सु॒कृता॑मेतु लो॒कम्

śuddhāḥ pūtā yoṣito yajñiyā imā āpaścarumava sarpantu śubhrāḥ | aduḥ prajāṃ bahulān paśūn naḥ paktaudanasya sukṛtāmetu lokam

हिन्दी अर्थ

राष्टयज्ञ मे निज सेवारमो को श्राहृतिरूप मे देने .वाले भधिकारियो का सग्रह का०.११। सू०.१ भ्रथरववेद-भाष्य . ९ जिस में सुख का भ्रमाव कभी न हो, एेसा सुख पारम्पयं । तेषा भागो निहिपी यः पुरा बँ देवानां पितृणां मत्यौनाम् अंशाञ्जानीध्वं वि भजामि तान् वो यो देवानां स मां पारयाति ॥५॥ हे प्रजाजनो (वः) तुम्हारे लिये, (पुरा) श्रनादिकाल से, - (यः). जो (केषा, भागः, निहितः) त्रिविध माग. निदिचित किया है, (देवानाम्) जानो,. (तान्) उन भागो को (वः) तुम्हें (विभजामि) बिभागानुसार मँ देता हू, (यः) जो (देवानाम्) देवों का भाग है (सः) वह भाग (इमाम्) .

English

hate us. So let this measure, measured, being measured, make all our kin thy tributary vassals.

अध्याय ११

श्लोक 1.18

ब्रह्म॑णा शु॒द्धा उ॒त पू॒ता घृ॒तेन॑ सोम॑स्यां॒शव॑स्तण्डु॒ला य॒ज्ञिया॑ इ॒मे।अ॒पः प्र वि॑शत॒ प्रति॑ गृह्णातु वश्च॒रुरि॒मं प॒क्त्वा सु॒कृता॑मेत लो॒कम्

brahmaṇā śuddhā uta pūtā ghṛtena somasyāṃśavastaṇḍulā yajñiyā ime| apaḥ pra viśata prati gṛhṇātu vaścarurimaṃ paktvā sukṛtāmeta lokam

हिन्दी अर्थ

भाग. कर के उसे प्रजा के निमित्त निरिचत कर देने चाहिए । . यह विभाग राज प्रबन्ध द्वारा होना चाहिए, जैसे कि यजुवद में कहा है किं “विभक्तारं उन का यथोचित विभाग, राष्टरनियत “विभक्ता” करे । राष्ट की सम्प. तियो भ्रौर उत्पत्तियों के पतीन विभाग होने चाहिरये, उन-उन .विमागो की मनि भ्रादि। पितर द गृहस्थी । मनुष्य है इन दोनो विभागो से भअरतिरिक्ति ,. १० भ्रथववेद-माष्य काऽ ११.। सू० १

English

Increase with kinsmen and with all abundance: to mighty strength and power lift up this woman.

अध्याय ११

श्लोक 1.19

उ॒रुः प्र॑थस्व मह॒ता म॑हि॒म्ना स॒हस्र॑पृष्ठः सुकृ॒तस्य॑ लो॒के।पि॒ता॒म॒हाः पि॒तरः॑ प्र॒जोप॒जाहं प॒क्ता प॑ञ्चद॒शस्ते॑ अस्मि

uruḥ prathasva mahatā mahimnā sahasrapṛṣṭhaḥ sukṛtasya loke| pitāmahāḥ pitaraḥ prajopajāhaṃ paktā pañcadaśaste asmi

हिन्दी अर्थ

इयं मातरा मीयमाना मिता च॑ सजातांस्तं बलिहृतः कृणोतु ॥६॥ वाले सपनो को (नीचः) भ्रधोमुख कंर के (न्यु्ज) उन नितरां ऋजु (मीयमाना) जो कि मापीजा रही है, (मिताच) प्रौरजो पूवं समयो भी मापी जाती रषी है, (ते) तेरे (सजातान्) सजातीय राजानं को तेरे प्रति (बलिहृतः) बलि प्रदाता (कृणोतु) करे । बलि ==राजकर+, 1 यथा राजानो द्वारा देय मात्रा, जिसे कि समय-समय पर परिस्थितियों के भ्रनुसार

English

Erect, rise upward to the sky’s high station, rise to the lofty world which men call Svarga. May this great Earth receive the skin, this Goddess Prithivī, showing us her love and favour.

अध्याय ११

श्लोक 1.20

स॒हस्र॑पृष्ठः श॒तधा॑रो॒ अक्षि॑तो ब्रह्मौद॒नो दे॑व॒यानः॑ स्व॒र्गः ।अ॒मूंस्त॒ आ द॑धामि प्र॒जया॑ रेषयैनान् बलिहा॒राय॑ मृडता॒न्मह्य॑मे॒व

sahasrapṛṣṭhaḥ śatadhāro akṣito brahmaudano devayānaḥ svargaḥ | amūṃsta ā dadhāmi prajayā reṣayainān balihārāya mṛḍatānmahyameva

हिन्दी अर्थ

, १, “राजकर” को बा करना; राजकर को धाभिक कायं जान कर स्वेच्छा- । ॥ पूर्वक देय दर्शाया है । जैसे कि बलिवैरवदेव-यज्ञ मँ बलि को धिक कायं सम कर का० ११।सु० १ अयवंवेद-माष्य , ११ सम्राट् इनमें मध्यस्थ होकर इनकीस॒माका संचालन करे। १ ४.५० एक जाति 9 है, इन का भी संयुक्त-राज्य ॥ , समान वालो के भी संयुक्त हो, यह विचार्. सजातैः) सजातीय राजार्भो के (साकम्) साथ. मिल कर, (पयसा बना, (महते वीर्याय ) ताकि यह प्रजा महावीरता के कारये करे । (ऊर्वः)

English

Strike down and slay those who assail this woman, and elevating raise on high her offspring. Grasp with thy hand, O man, the well-formed press-stones: the holy Gods have come unto

अध्याय ११

श्लोक 1.21

॥ उ॒देहि॒ वेदिं॑ प्र॒जया॑ वर्धयैनां नु॒दस्व॒ रक्षः॑ प्रत॒रं धे॑ह्येनाम्।श्रि॒या स॑मा॒नानति॒ सर्वा॑न्त्स्यामाधस्प॒दं द्वि॑ष॒तस्पा॑दयामि

|| udehi vediṃ prajayā vardhayaināṃ nudasva rakṣaḥ prataraṃ dhehyenām| śriyā samānānati sarvāntsyāmādhaspadaṃ dviṣataspādayāmi

हिन्दी अर्थ

शिखर पर (भ्रधिरोह) भधिरूढ हो, (यम्) जिस नाक के. रिखर को प कहते हैँ (इति) किं यह (स्वः लोकः) स्वगं लोक ह। संयुक्त-राज्य के राजा के साथ मिल कर, केन्रिय-राज्य के ऋजुमागंगामिनी हो जाती है । . ऋलजुमागे है, सत्यमय जीवन का मागे । एेसा सास्राज्य स्वगे रूप है, जिस में कि प्रजा ताप-संताप तथा दुःखो से विगतः हो जाती है । पसे सुखौ गृहस्थ ५ जीवन को, तथा दिव्य भावना से भावित. भ्रष्टचक्ता भौर नवे द्वारा देह पुरी को, तथाः दान देने से उदार मावनंभों वाले जीवन को अथववेद मेः “स्वर्ग” कहा है (४।३४।५; , (इयम्) यह (मही) महनीया, (देवी). दिव्यगुणो वाली, (सुमनस्य (चमं) मृगचमे को (प्रतिगृह्णातु) स्वीकार करे । (रथ) तदनन्तर (सुङृत-

English

thy worship. Three wishes of thy heart which thou electest, these happy gains for thee I here make ready.

अध्याय ११

श्लोक 1.22

॥ अ॒भ्याव॑र्तस्व प॒शुभिः॑ स॒हैनां॑ प्र॒त्यङे॑नां दे॒वता॑भिः स॒हैधि॑ ।मा त्वा॒ प्राप॑च्छ॒पथो॒ माभि॑चा॒रः स्वे क्षेत्रे॑ अनमी॒वा वि रा॑ज

|| abhyāvartasva paśubhiḥ sahaināṃ pratyaṅenāṃ devatābhiḥ sahaidhi | mā tvā prāpacchapatho mābhicāraḥ sve kṣetre anamīvā vi rāja

हिन्दी अर्थ

१२ ्रथेवेद-माष्य का० ११। सु० १ घान के कूटने के निमित्त, जमीन पर मृगचमं बिठा कर, उस पर ऊखल-मुसल को रस कर तण्डुल तैयार किये जते ह। इस का वर्णेन मन्तः - के कारण पृथिवी को मही, देवी, तथा सुमनस्यमाना का है 1 राजपत्नी तथा राजा मिल कर, भोजन योग्य तण्डुलो को स्वयं तयार कर्र-यह का कि जीवन त्याग-तपस्या वाला है। इनके संपकंके कारण राजपत्नी नौर राजा का जीवन भी त्याग-तपस्यामय हो जाता है । इसलिये ्रपने

English

Here thy devotion is, here is thy birthplace. Aditi, Mother of brave sons, accept thee! Wipe away those who fight against this woman with wealth and store of goodly sons endow

अध्याय ११

श्लोक 1.23

॥ ऋ॒तेन॑ त॒ष्टा मन॑सा हि॒तैषा ब्र॑ह्मौद॒नस्य॒ विहि॑ता॒ वेदि॒रग्रे॑ ।अं॒स॒द्रीं शु॒द्धामुप॑ धेहि नारि॒ तत्रौ॑द॒नं सा॑दय दै॒वाना॑म्

|| ṛtena taṣṭā manasā hitaiṣā brahmaudanasya vihitā vediragre | aṃsadrīṃ śuddhāmupa dhehi nāri tatraudanaṃ sādaya daivānām

हिन्दी अर्थ

तपस्यामय हो जाता है । यथा “तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गष” (ईदा० वट के सदृश दुढ ऊखलमुसल को, (सयुजा) जो कि.भरवहनन काये भें साथ- (यजमानाय) राष्टरयज्ञ के रचयिता राजा या सन्नाद्ः के लिये (साघु) ठीक भ्रवहननं करती हुई, भ्र्थात् मुसल को उलूखल में मारती हृद उन का (निजहि) तू हनन करः भये ) जो किं (इमाम्) इस प्रजा को (पृतन्यवः) सेना द्वारा मारना चाहते है, श्रौर (उम्दूरन्ती) मुसल को ऊपर उठाती हई

English

her. Rest in the roaring frame of wood: be parted from husk and chaff, ye Sacrificial Fibres.

अध्याय ११

श्लोक 1.24

अदि॑ते॒र्हस्तां॒ स्रुच॑मे॒तां द्वि॒तीयां॑ सप्तऋ॒षयो॑ भूत॒कृतो॒ यामकृ॑ण्वन्।सा गात्रा॑णि वि॒दुष्यो॑द॒नस्य॒ दर्वि॒र्वेद्या॒मध्ये॑नं चिनोतु

aditerhastāṃ srucametāṃ dvitīyāṃ saptaṛṣayo bhūtakṛto yāmakṛṇvan| sā gātrāṇi viduṣyodanasya darvirvedyāmadhyenaṃ cinotu

हिन्दी अर्थ

कां० ११1 सू० १ भ्रथरवेवेद-माष्य १३ धान्य के अवहनना फ़कती हुई को. कहा है किं इस द्वारा मानो कितु शत्रुसेना का हनन कर रही है,. भरौर.मुसल को ऊपर उटठाती हई को कहा है.कि कूटते समय धान्यां इधर-उघर न निखरे । गृहाण आवांणौ सढ़ृतौः वीर हस्त आ तं देवा य्नियां य्ञम॑युः ।

English

May we surpass in glory all our rivals. I cast beneath my feet the men who hate us. Go, Dame, and quickly come again: the waters, enclosed, have mounted thee that thou mayst

अध्याय ११

श्लोक 1.25

शृ॒तं त्वा॑ ह॒व्यमुप॑ सीदन्तु दै॒वा निः॒सृप्या॒ग्नेः पुन॑रेना॒न् प्र सी॑द ।सोमे॑न पू॒तो ज॒ठरे॑ सीद ब्र॒ह्म॑णामार्षे॒यास्ते॒ मा रि॑षन् प्राशि॒तारः॑

śṛtaṃ tvā havyamupa sīdantu daivā niḥsṛpyāgneḥ punarenān pra sīda | somena pūto jaṭhare sīda brahmaṇāmārṣeyāste mā riṣan prāśitāraḥ

हिन्दी अर्थ

(वीर) है वीर ! (हस्ते) हाथ मे, (म्रावाणौ) सिल-वट्रा के समान सुद्ढ़ ऊलल-मुसल को, (सृतौ) जिन्होने कि परस्पर मिल कर भ्रवहुनन कायं करना है, (गृहाण) पकड़, (यज्ञियाः) पूज्य तथा सत्संग के योग्य तथा तीन वर (यतमान्) जिन्हे कि (त्वं-वृणीष) तु वरना चाहता है (ताः समृद्धीः) उन तीनों (ते) तेरे समृद्धिरूप वरो को (इह ) इसं यज्ञ मे (साधयामि) चै सिद्ध करता हूं । ऋ “राघयामि"' द्वारा सप्तऋषयो मसे कोई ऋषिं, या कोई भ्रन्य हृ्रा है । राजा केवल ग्रावाणौ को हाथ लगाता है; श्रवहनन क्रिया नहीं

English

bear them. Take thou of these such as are fit for service: skilfully separating. leave the others.

अध्याय ११

श्लोक 1.26

सोम॑ राजन्त्सं॒ज्ञान॒मा व॑पैभ्यः॒ सुब्रा॑ह्मणा यत॒मे त्वो॑प॒सीदा॑न्।ऋषी॑नार्षे॒यांस्तप॒सोऽधि॑ जा॒तान् ब्र॑ह्मौद॒ने सु॒हवा॑ जोहवीमि

soma rājantsaṃjñānamā vapaibhyaḥ subrāhmaṇā yatame tvopasīdān| ṛṣīnārṣeyāṃstapaso'dhi jātān brahmaudane suhavā johavīmi

हिन्दी अर्थ

राजा से कहता है कि तीनवर, जो कि तेरे लिये समृद्धिकारकरहै, .उन का कथन् कर, ताकि मँ उन के सम्पादन का यत्न करू । सकृतौ = सह+-कृतौ, (श्यम्) यह (दितिः) रा्ट्रभूमिं (ते) तेरी (धीतिः) खाने-पीने तु (गृह्यत) स्वीकार करे । (ये) जो (दमाम्) इस राष्टृभूमि या इस (परा पुनीहि) दर कर जसे कि छाज द्वारा तण्डुलो से तुषो को पृथक् किया

English

Hither these Dames have come in radiant beauty. Arise and seize= upon thy strength, O woman.

अध्याय ११

श्लोक 1.27

शु॒द्धाः पू॒ता यो॒षितो॑ य॒ज्ञिया॑ इ॒मा ब्र॒ह्मणां॒ हस्ते॑षु प्रपृ॒थक् सा॑दयामि ।यत् का॑म इ॒दम॑भिषि॒ञ्चामि॑ वो॒ऽहमिन्द्रो॑ म॒रुत्वा॒न्त्स द॑दादि॒दं मे॑

śuddhāḥ pūtā yoṣito yajñiyā imā brahmaṇāṃ hasteṣu prapṛthak sādayāmi | yat kāma idamabhiṣiñcāmi vo'hamindro marutvāntsa dadādidaṃ me

हिन्दी अर्थ

: मन्त्र भावना राजा के प्रति है। भ्रदितिः पृथिवोनाम (निष १. खाने-पीने के लिये साधन भूत राष्टरभूमि का 'होना, २. समग्र राष्ट्रका उत्पत्तियों का साघन होना, ३. तथा राष्टरभूमि का रुरःप्रजा वाली होना की.पुततिः का निर्देश मन्त्र ११ मे हृप्राहै । उपश्वसे हवये सरता युधं पिविच्यव्वं यज्ञि पासरतुषैः ।

English

To thee hath sacrifice come: take the pitcher, blest with a good lord, children, children’s children.

अध्याय ११

श्लोक 1.28

इ॒दं मे॒ ज्योति॑र॒मृतं॒ हिर॑ण्यं प॒क्वं क्षेत्रा॑त् काम॒दुघा॑ म ए॒षा।इ॒दं ध॒नं नि द॑धे ब्राह्म॒णेषु॑ कृ॒ण्वे पन्थां॑ पि॒तृषु॒ यः स्व॒र्गः

idaṃ me jyotiramṛtaṃ hiraṇyaṃ pakvaṃ kṣetrāt kāmadughā ma eṣā| idaṃ dhanaṃ ni dadhe brāhmaṇeṣu kṛṇve panthāṃ pitṛṣu yaḥ svargaḥ

हिन्दी अर्थ

, (उपदवसे=उप+-श्वसितुम्) कुछ समय श्वास के लिये, विश्राम कं , लिये, (द्रुवये) काष्ठ के बने, ग्रौर बुने हुए पीठ पर, (गयम्) है स (यज्ञियासः) पूज्यो ! तुम (सीदत) बेठो, श्रौर (तुषः) तण्डलों के छिलव नीचे (पादयामि) ध गिरा-देता ह, - तुम्हारे ग्रीन कर देता हूं । ऋत्विक् का वचन है “पादयामि । . .

English

Instructed by the Rishis, bring those waters, the share of strength which was of old assigned you.

अध्याय ११

श्लोक 1.29

अ॒ग्नौ तुषा॒ना व॑प जा॒तवे॑दसि प॒रः क॒म्बूकाँ॒ अप॑ मृड्ढि दू॒रम्।ए॒तं शु॑श्रुम गृहरा॒जस्य॑ भा॒गमथो॑ विद्म॒ निरृ॑तेर्भाग॒धेय॑म्

agnau tuṣānā vapa jātavedasi paraḥ kambūkā~ apa mṛḍḍhi dūram| etaṃ śuśruma gṛharājasya bhāgamatho vidma nirṛterbhāgadheyam

हिन्दी अर्थ

कार ११। सू० १ अथवेवेद-माघ्म १५ (नारि) है जलाहरण करने बाली नारि ! (परेद). दूर जा भौर हमा है । (तासाम्) उन जलो में (यतंमाः) जो जल (यज्ञियाः) शुद्ध पवित्र ताजा भौर शुद्धपवित्र जल लाने के लिये नारी को प्रेरित कियादहै, चाहे एेसा जल दूर से भी लाना पड़ । गोऽ: गो-=जल (उणा० २।६८;

English

Let this effectual sacrifice afford you protection, fortune, off- spring, men, and cattle. Agni, on thee the sacrificial caldron hath mounted: shining,. fiercely flaming, heat it.

अध्याय ११

श्लोक 1.30

श्राम्य॑तः॒ पच॑तो विद्धि सुन्व॒तः पन्थां॑ स्व॒र्गमधि॑ रोहयैनम्।येन॒ रोहा॒त् पर॑मा॒पद्य॒ यद् वय॑ उत्त॒मं नाकं॑ पर॒मं व्योऽम

śrāmyataḥ pacato viddhi sunvataḥ panthāṃ svargamadhi rohayainam| yena rohāt paramāpadya yad vaya uttamaṃ nākaṃ paramaṃ vyo'ma

हिन्दी अर्थ

कै उपादान का निर्देश हमरा है,जो कि भतिथि यज्ञ के भातके निर्माण मे. १६ -अ्रथवेवेद-भाष्य कां९ ११ । सु° ९ (पुरा) पूवैकाल सेः (यः) जो, (बः) तुम्हारे लिये, (ऊः) भन्न का (भागः) भाग (निहितः) नितरां दितकरः जाना गया है उक्त केलिये (ऋषि . ।

English

portion. Purified, bright, and holy, let these Women, these lucid waters glide into the caldron.

अध्याय ११

श्लोक 1.31

॥ ब॒भ्रेर॑ध्वर्यो॒ मुख॑मे॒तद् वि मृ॒ड्ढ्याज्या॑य लो॒कं कृ॑णुहि प्रवि॒द्वान्।घृ॒तेन॒ गात्रानु॒ सर्वा॒ वि मृ॑ड्ढि कृ॒ण्वे पन्थां॑ पि॒तृषु॒ यः स्व॒र्गः

|| babhreradhvaryo mukhametad vi mṛḍḍhyājyāya lokaṃ kṛṇuhi pravidvān| ghṛtena gātrānu sarvā vi mṛḍḍhi kṛṇve panthāṃ pitṛṣu yaḥ svargaḥ

हिन्दी अर्थ

राजयुरुषो ! तुम्हारे लिये यह भ्रतिथि यज्ञ (अस्तु) सुफल हो । रोकते है, भ्रदन करने. में ० है, यक्ष्म रोगके प्रति बाषा डालते रह सात्विक होने से, राजस-तामसर पापकमा से मुक्त करते हं । तथा भ्राणा- ह, षध ह । इस लिये ब्रीहि “निहित” है, नितरां हितकर है । है, वे राष्ट के प्रदासकं जने रहते है, राष्ट परमावशाली बना रहता है राज- , (§ .

English

Cattle and many children may they give us. May he who cooks. the Odana go to heaven. Ye, Sacrificial Rice and Soma Fibres, cleansed and made pure by prayer and molten butter.

अध्याय ११

श्लोक 1.32

॥ बभ्रे॒ रक्षः॑ स॒मद॒मा व॑पै॒भ्योऽब्रा॑ह्मणा यत॒मे त्वो॑प॒सीदा॑न्।पु॒री॒षिणः॒ प्रथ॑मानाः पु॒रस्ता॑दार्षे॒यास्ते॒ मा रि॑षन् प्राशि॒तारः॑

|| babhre rakṣaḥ samadamā vapaibhyo'brāhmaṇā yatame tvopasīdān| purīṣiṇaḥ prathamānāḥ purastādārṣeyāste mā riṣan prāśitāraḥ

हिन्दी अर्थ

कृषि कमे के लिये होती रहती है, भ्रौर वीर योद्धारो कौ परिपुष्ट होती कृा० .१ १। सुऽ भ्रथववेद-माष्य . १७ दवारा (एनम्) इसे. (तप) तपा, - तपिष्ठः) ताकि .यह . खूब तप कर (शुचिः). शुद्ध पवित्र हो जाय । (भ्राषयाः) ऋषि कोटि के, तथा (हैवाः) देव कोटि के, म्नौर (तपिष्ठाः) तपस्वी, (ऋतुभिः) ऋतु-ऋतु मे (भ्रभि- में भरंचेतनो का भी वणनं चेतनो के सदु होता हे, यह सवंसाधारण कवियों की वणेन दौली हं । जिस माण्ड मे ऋषियों, ऋषि सन्तानो विद्वानों तथा. '

English

Enter the water: let the caldron take you. May he who dresses this ascend to heaven. Expand thyself abroad in all thy greatness, with thousand Prish- thas, in the world of virtue.

अध्याय ११

श्लोक 1.33

॥ आ॒र्षे॒येषु॒ नि द॑ध ओदन त्वा॒ नाना॑र्षेयाणा॒मप्य॒स्त्यत्र॑ ।अ॒ग्निर्मे॑ गो॒प्ता म॒रुत॑श्च॒ सर्वे॒ विश्वे॑ दे॒वा अ॒भि र॑क्षन्तु प॒क्वम्

|| ārṣeyeṣu ni dadha odana tvā nānārṣeyāṇāmapyastyatra | agnirme goptā marutaśca sarve viśve devā abhi rakṣantu pakvam

हिन्दी अर्थ

चाहिए, ताकि उस की मलिनता तथा सम्भाव्य कीटाणु समाप्त हो जाये, मौर ऋषि भ्रादि को, कीटाणु भ्रादि जन्य दुष्टपरिणाम भुगतने न पड़ । इन चषि भ्रादि को छतु-ऋतु.या मास-मास मे भ्रामन्त्ित कर इम की सेवा चाहिए । इसलिये इन के निर्दल्ानुसार इन के भोजन को तैयार करवाना चाहिए । वेद मे ऋतुशब्दे का प्रयोग मासो के युगल के लिये होता है । परन्तु मास के लिये भी वेद में ऋतुराब्द का प्रयोग हु्रा है । यथा. “मधुर माधव- : उच वासन्तिकावृत्“ (यजुः १३।२५) ।.“त्ः" मे द्विवचन है" इसलिये मघु १० में सवंसाघारणः दिव्यपुरूषो, यथा भातुदेवोभव, पित्देवोभव प्रादि को चाहिए किं वह प्रजावगे को भामन्त्रित करती रहे, ताकिं पारस्परिक विचार परामशचं होता रहे, ब्रौर सद् मावनाएं बनो रहँ

English

Grandfathers, fathers, children, and descendants, fifteenth am I to thee when I have dressed it. With thousand streams and Prishthas, undecaying, Brahmaudana is celestial, God-reaching.

अध्याय ११

श्लोक 1.34

॥ य॒ज्ञं दुहा॑नं॒ सद॒मित् प्रपी॑नं॒ पुमां॑सं धे॒नुं सद॑नं रयी॒णाम्।प्र॒जा॒मृ॒त॒त्वमु॒त दी॒र्घमायू॑ रा॒यश्च॒ पोषै॒रुप॑ त्वा सदेम

|| yajñaṃ duhānaṃ sadamit prapīnaṃ pumāṃsaṃ dhenuṃ sadanaṃ rayīṇām| prajāmṛtatvamuta dīrghamāyū rāyaśca poṣairupa tvā sadema

हिन्दी अर्थ

जल, (चरम्) भाण्ड में (श्रव सप॑नतु) शनैः शनैः डले, या डाले जार । वाला सुकृताम् लोकम्) सुकमियों के लोक को (एतु) जाए 1. शनैः डालने का वर्णन मन्व १७ मेँ हुमा है, ताकि माण्ड. शनैः शनैः एण्डा होता रहे, श्रौर तदनन्तर समूचित जलमात्रा का संचय भाण्ड भे हौ जाय । भ्रामन्भित ऋषि मुनि श्रादि भोजन से पूवं राजपरिवार तथा राजवगे को रौर नाना पशुप फी सम्पत्ति, ऋंषि भ्रादिनेदे दी है । ऋषि लोग कहते. .

English

Those I give up to thee with all their children. Force them to tribute, but to me be gracious. Rise to the altar: bless this dame with offspring. Promote this woman; drive away the

अध्याय ११

श्लोक 1.35

वृ॒ष॒भोऽसि स्व॒र्ग ऋषी॑नार्षे॒यान् ग॑च्छ ।सु॒कृतां॑ लो॒के सी॑द॒ तत्र॑ नौ संस्कृ॒तम्

vṛṣabho'si svarga ṛṣīnārṣeyān gaccha | sukṛtāṃ loke sīda tatra nau saṃskṛtam

हिन्दी अर्थ

है किं श्न्नादि द्वारा हमे सकृत करने वाला राजपरिवार श्रां, उन लोगो की समाज के ्रधिकारी हो जाय जो किं प्रजा के पाललरूपी सत्कर्मो के. पका कर (सुकृता, लोकम् एत) है .राजपरिवार के लोगों तुम् सुकमिर्योः की समाजं के प्रधिकारीः बनो 1 तीनि केमपिकारो धवी 4. „ नति ¶. श्रथवा सुकर्म लोग मूस के पर्चात् जिस लोक भे जाति हं, उस लोक मे तुम भी मृस्यु के पवात् जाभ्रो । इस सीम

English

demons. May we surpass in glory all our rivals. I cast beneath my feet the men who hate us.

अध्याय ११

श्लोक 1.36

स॒माचि॑नुष्वानुस॒म्प्रया॑ह्यग्ने प॒थः क॑ल्पय देव॒याना॑न्।ए॒तैः सु॑कृ॒तैरनु॑ गच्छेम य॒ज्ञं नाके॒ तिष्ठ॑न्त॒मधि॑ स॒प्तर॑श्मौ

samācinuṣvānusamprayāhyagne pathaḥ kalpaya devayānān| etaiḥ sukṛtairanu gacchema yajñaṃ nāke tiṣṭhantamadhi saptaraśmau

हिन्दी अर्थ

संसार मे लोक ॒लोकान्तरों की कोर 4 कां० ११। सु १ अथरववेद-माष्य १९ होतादहैकि १५८ को जल् द्वारा धोकर, श्रौर उनमें धृत डाल करः; भाण्डस्य. जलें उन्हँ डालना चाहिए । । उरः भयस महता भहिम्ना सुहसंपृष्यः सुकृतस्य छोके।

English

Approach this woman here with store of cattle: together with the deities come to meet her. Let not a curse or imprecation reach thee: in thine own seat shine forth exempt from sickness.

अध्याय ११

श्लोक 1.37

येन॑ दे॒वा ज्योति॑षा॒ द्यामु॒दाय॑न् ब्रह्मौद॒नं प॒क्त्वा सु॑कृ॒तस्य॑ लो॒कम्।तेन॑ गेष्म सुकृ॒तस्य॑ लो॒कं स्वऽरा॒रोह॑न्तो अ॒भि नाक॑मुत्त॒मम्

yena devā jyotiṣā dyāmudāyan brahmaudanaṃ paktvā sukṛtasya lokam| tena geṣma sukṛtasya lokaṃ sva'rārohanto abhi nākamuttamam

हिन्दी अर्थ

लोके) मु सुकर्मीं के गृह मे (महतो महिम्ना) निज महामहिमा ८० वेद की भाषा कविंतामयं है । इसलिये श्रोदन काः वणन मी . कवित्पम कौ भाषा मेँ हमा है । भ्रतिथियज्ञ मे बेहत सै .श्ुतिथि्यो की सम्भावना चे. गरीदन की मात्रा .भी बड़ी होगी, इसे “उद” शब्दद्वारा निदिष्ट किया है. । पके गमे-परोदन को ठण्डा करने-के लिये तथा भ्रोदंन के दान को पृथक्-पृथक् करने के लिथै उन्हें फैलाया जाता है ।. इस विधि की सूचना “प्रथस्व” - ०१ (व वृर चरूरिमं ठ मेत ३ । यह निज महिमा हि कि 7: लो व्यक्ति . ¦ पर के पर्वात् पूनः भूलोक हो । ..

English

Fashioned at first by Right, set by the spirit, this altar of Brahmau- dana was appointed. Place the pure boiler on it, woman! set thou therein the rice mess of Celestial Beings.

अध्याय ११

श्लोक 2.1

रुद्रः।१-३१ अथर्वा।भव-शर्व रुद्राः।त्रिष्टुप्, १ परातिजागता विराड्जगती, २ अनुष्टुब्गर्भा पञ्चपदा पथ्याजगती, ३ चतुष्पदा स्वराडुष्णिक्, ४-५, ७, १३, १५-१६, २१ अनुष्टुप्, ६ आर्षी गायत्री, ८ महाबृहती, ९ आर्षी, १० पुरोकृती त्रिपदा विराट्, ११ पञ्पदा विराड् जगतीगर्भा शक्वरी, १२ भुरिक्, १४, १७-१९, २३, २६-२७ विराड्गायत्री, २० भुरिग्गायत्री, २२ विषमपादलक्ष्मा त्रिपदा महाबृहती, २४, २९ जगती, २५ पञ्पदातिशक्वरी, ३० चतुष्पदा उष्णिक्,३१ त्र्यवसाना विपरीतपाद लक्ष्मा षट् पदा (जगती)।भवा॑शर्वौ मृ॒डतं॒ माभि या॑तं॒ भूत॑पती॒ पशु॑पती॒ नमो॑ वाम्।प्रति॑हिता॒माय॑तां॒ मा वि स्रा॑ष्टं॒ मा नो॑ हिंसिष्टं द्वि॒पदो॒ मा चतु॑ष्पदः

rudraḥ| 1-31 atharvā| bhava-śarva rudrāḥ| triṣṭup, 1 parātijāgatā virāḍjagatī, 2 anuṣṭubgarbhā pañcapadā pathyājagatī, 3 catuṣpadā svarāḍuṣṇik, 4-5, 7, 13, 15-16, 21 anuṣṭup, 6 ārṣī gāyatrī, 8 mahābṛhatī, 9 ārṣī, 10 purokṛtī tripadā virāṭ, 11 pañpadā virāḍ jagatīgarbhā śakvarī, 12 bhurik, 14, 17-19, 23, 26-27 virāḍgāyatrī, 20 bhuriggāyatrī, 22 viṣamapādalakṣmā tripadā mahābṛhatī, 24, 29 jagatī, 25 pañpadātiśakvarī, 30 catuṣpadā uṣṇik,31 tryavasānā viparītapāda lakṣmā ṣaṭ padā (jagatī)| bhavāśarvau mṛḍataṃ mābhi yātaṃ bhūtapatī paśupatī namo vām| pratihitāmāyatāṃ mā vi srāṣṭaṃ mā no hiṃsiṣṭaṃ dvipado mā catuṣpadaḥ

हिन्दी अर्थ

को क्षेत्र कहा है पशुभों के सहचार के कारण । राजा के प्रति कहा हैकि लाया कर, जिससेदेवों कासङ्खंपा कर प्रजा मी दिव्य विचारो तथा अस्री शुद्धासुप॑ येहि नारि तत्रौदनं सदय देवानाम् ॥२१॥ (ऋतेन) विचि से, (मनसा) श्रौर विचार भूवक (तष्टा) निभिततं , -!

English

This wealth I place among the Brāhmans, making a path that leads to heaven among the Fathers.

अध्याय ११

श्लोक 2.2

शुने॑ क्रो॒ष्ट्रे मा शरी॑राणि॒ कर्त॑म॒लिक्ल॑वेभ्यो॒ गृध्रे॑भ्यो॒ ये च॑ कृ॒ष्णा अ॑वि॒ष्यवः॑ ।मक्षि॑कास्ते पशुपते॒ वयां॑सि ते विघ॒से मा वि॑दन्त

śune kroṣṭre mā śarīrāṇi kartamaliklavebhyo gṛdhrebhyo ye ca kṛṣṇā aviṣyavaḥ | makṣikāste paśupate vayāṃsi te vighase mā vidanta

हिन्दी अर्थ

- से परे (दुर) दुर (भ्रपमृदिढ,) फक । (एतम्). इन तिनको भौर उण्डियों का० ११। सु° १ श्रथवेवेद-माष्य न अमो ठषाना व॑प जातवेदसि प्र कम्बक अपं गृद्ध दूरम् । (तुषान्) भ्रवहनन भर्थात् धान को उखल-मुसल मे कटने, भौर गिरते ह उन्हं तुष कहते है तुषो को (जातवेदसि) यज्ञ की अग्निम (भ्रा

English

Level the ways: go thitherward, O Agni. Make ready thou the Godward-leading pathways.

अध्याय ११

श्लोक 2.3

क्रन्दा॑य ते प्रा॒णाय॒ याश्च॑ ते भव॒ रोप॑यः ।नम॑स्ते रुद्र कृण्मः सहस्रा॒क्षाया॑मर्त्य

krandāya te prāṇāya yāśca te bhava ropayaḥ | namaste rudra kṛṇmaḥ sahasrākṣāyāmartya

हिन्दी अर्थ

की शरोर फैल कर ठे हृशरों की आष पडिक्त में मन्त्र २२ (भनाषेया- - है 1 मनर ३३ मे यह कहा है कि न्दं ्वेयों की पक्त बेठ कर साधन भूत, (दीषेम् भ्रायुः) भ्रायुको वीं करमे वाने, रायः च पौषैः) पुमान् दुवार-गौ को उप सदेम) हम प्राव हो. ॥ : : ।

English

Ardhaka. May he, may Bhava from all sides avoid us, avoid us even as fire avoids the waters. Let him

अध्याय ११

श्लोक 2.4

पु॒रस्ता॑त् ते नमः॑ कृण्म उत्त॒राद॑ध॒रादु॒त।अ॒भी॒व॒र्गाद् दि॒वस्पर्य॒न्तरि॑क्षाय ते॒ नमः॑

purastāt te namaḥ kṛṇma uttarādadharāduta| abhīvargād divasparyantarikṣāya te namaḥ

हिन्दी अर्थ

¦: ब्रह्यापंण करके यह मावना र ब्रहाजञो ध १ धानानि क्रियायोगः (योग २।१) । इस की व्याख्या मे व्यासमुनि लिखते द भ्रथवेवेद-माष्य कां० ११। सु० १ के फल की भ्रभिलाषा न करते हृए उन्दे करना" । इस से समाधि कौ प्राप्ति

English

Thine the four regions, thine are earth and heaven, thine, Mighty One, this firmament between them;

अध्याय ११

श्लोक 2.5

मुखा॑य ते पशुपते॒ यानि॒ चक्षूं॑षि ते भव ।त्व॒चे रू॒पाय॑ सं॒दृशे॑ प्रती॒चीना॑य ते॒ नमः॑

mukhāya te paśupate yāni cakṣūṃṣi te bhava | tvace rūpāya saṃdṛśe pratīcīnāya te namaḥ

हिन्दी अर्थ

होती तथा पञ्चक्लेश (योग० २।३) सूक्ष्म पड़ जाते है । तथा “समाधि अपने.सब भार्वोको अर्पित कर दिवा है, उसे समाधि सिद्ध हो जाती है । की सिद्धिभी हो जाती है (३७) । या मन्त ३६.३७ मे; “ब्ह्यदनसू्ः का १--११।२ में ३१ मन्त्र है । इन मेँ “मव, शवे, रख” दवारा परमेदवर का

English

Thine everything with soul and breath here on the surface of the land. Thine is this ample wealth-containing storehouse that holds with- in it all these living

अध्याय ११

श्लोक 2.6

अङ्गे॑भ्यस्त उ॒दरा॑य जि॒ह्वाया॑ आ॒स्याऽय ते ।द॒द्भ्यो ग॒न्धाय॑ ते॒ नमः॑

aṅgebhyasta udarāya jihvāyā āsyā'ya te | dadbhyo gandhāya te namaḥ

हिन्दी अर्थ

है संहारक परमेदवर, . श्रौर खरग का भ्र्थंहषापियोंको श्ला कर उन के पापों का संहार करने वाला परमेदवर 1 . सम्बन्धी पद है, -भतः इन भे भाथिक सम्बन्ध भी.है ।'जंसे कि भरहो- किसी मीं वस्तु”के निर्माण में प्रथम उसके पुरवंरूप कासंहार करना होता है, तदनन्तर उस वस्तु मे नए रूप का उत्पादन होता है । प्रथम , - बीज के बीजत्वरूप का सहार होगा, तदनन्तर उस के अङ कुरत्वरूप

English

creatures. Favour us, Lord of Beasts, to thee be homage! Far from us go ill-omens, dogs, and jackals,

अध्याय ११

श्लोक 2.7

अस्त्रा॒ नील॑शिखण्डेन सहस्रा॒क्षेण॑ वा॒जिना॑ ।रु॒द्रेणा॑र्धकघा॒तिना॒ तेन॒ मा सम॑रामहि

astrā nīlaśikhaṇḍena sahasrākṣeṇa vājinā | rudreṇārdhakaghātinā tena mā samarāmahi

हिन्दी अर्थ

का संहार होगा, तदनन्तर उस की वंषम्यावस्था के “महत्” भादि काजब संहार होगा, तदनन्तर प्रकृति मे पुनः साम्यावस्था का रवौ के. मथपंद सदुश भर्थवान् है 4. खर पद का सम्बन्ध सदाचार के साथ है) रद्र, पापियों के पापका संहार करता है । उत्पादन भ्रौर संहार की भावनाए, भवभ्रौरख्मे भी, भवश्रौर शवं के सदृश ३. यौ रोदयति भन्यायकांरिणो जनान् स खः, जो दुष्टकमे करणे ..हारो को

English

and wild-haired women with their horrid shrieking! A yellow bow of gold thou wieldest, slaying its hundred, tufted

अध्याय ११

श्लोक 2.8

स नो॑ भ॒वः परि॑ वृणक्तु वि॒श्वत॒ आप॑ इवा॒ग्निः परि॑ वृणक्तु नो भ॒वः ।मा नो॒ऽभि मां॑स्त॒ नमो॑ अस्त्वस्मै

sa no bhavaḥ pari vṛṇaktu viśvata āpa ivāgniḥ pari vṛṇaktu no bhavaḥ | mā no'bhi māṃsta namo astvasmai

हिन्दी अर्थ

३६ भ्रथवेवेद-माष्य कां० ११।सु०२ २-- “भव परमेदवर है, देखो (मन्त्र १०), इसमे कहा है कि भव चारों . दिच्याभो, तथा तीनो लोकों का स्वामी है, भ्मौर इसी के कांरण समग्र जगत् सात्मक हो रहा है । मन्त्र २७ मँ भी यही भावना है । ३-- मन्त्रे ५, ६ मे पशुपति पद द्वारा परमेदवर को सूचित कर उसके मुख भौर गन्ध का वणेन हुभ्रा है । इन पर विशेष प्रकार डाला है । भू-मन्तर € मेँ पशुपति परमेश्वर कै ४ वार, = वार श्रीर् १० वार प्रतिदिन नमस्कार करने का निदेश. है 1. ६- मन्त्र १७ में कहा है कि परमेदवर के गुणस्तवनों मे जिह्वा को उपरत

English

God! smiting its thousand. Weapon of Gods, far flies the shaft of Rudra: wherever it may be, we pay it homage.

अध्याय ११

श्लोक 2.9

च॒तुर्नमो॑ अष्ट॒कृत्वो॑ भ॒वाय॒ दश॒ कृत्वः॑ पशुपते॒ नम॑स्ते ।तवे॒मे पञ्च॑ प॒शवो॒ विभ॑क्ता॒ गावो॒ अश्वाः॒ पुरु॑षा अजा॒वयः

caturnamo aṣṭakṛtvo bhavāya daśa kṛtvaḥ paśupate namaste | taveme pañca paśavo vibhaktā gāvo aśvāḥ puruṣā ajāvayaḥ

हिन्दी अर्थ

को नमस्कार करने का विधान दिये हैँ । भम्नि, विद्युत्, सूयं (१२।३। २५.२६) । तथा सैनिकों को वेद मे “भ्रग्नरूपाः” कहा भीहै । (ऋ ० १०।८४।१), इस मन्त्रार्थं मे “नरः” इारा नेतुरूप संनिक भ्रभि- तथा जिह तीक्ष्ण बाणो वाले तथा भ्रायुधों वाले कहा है भाष्यकारो सूर्ये की किरणों को केश जान कर सम्भवतः एेसा प्रथं भाष्यकाये-

English

Thou, Rudra, followest close the foe who lies in wait to conquer thee. Even as a hunter who pursues the footsteps of the wounded game.

अध्याय ११

श्लोक 2.10

तव॒ चत॑स्रः प्र॒दिश॒स्तव॒ द्यौस्तव॑ पृथि॒वी तवे॒दमु॑ग्रो॒र्व॑१न्तरि॑क्षम्।तवे॒दं सर्व॑मात्म॒न्वद् यत् प्रा॒णत् पृ॑थि॒वीमनु॑

tava catasraḥ pradiśastava dyaustava pṛthivī tavedamugrorva1ntarikṣam| tavedaṃ sarvamātmanvad yat prāṇat pṛthivīmanu

हिन्दी अर्थ

काल से (विहिता) विदित है, वैदिक विषि द्वारा निर्दिष्ट है। (नारि) वालीं. रदधाम्) साफ' रौर पवित्र वेदि को उपघेहि) भ्रपने . समीप वेदि को योषा भ्र्थात्ः योषाङ़ृतिक के है । वेदि के पूवैदिशोवर्ती आग में १. अभिप्रायं यह् कि योषा के'घड़ के सदृ य॑ह॒ वेदि अनोर्दजातींहै। वेदि पूवं की सीमा रेखाः के.उकतर ओर किणः कै दौ कोनो को उत्तरास भ्रौर हैधिर्णाख

English

Lay thou the chaff in Agni Jātavedas: remove the husks and drive them to a distance. That, we have heard, that is the House-Lord’s portion: we know the share allotted to

अध्याय ११

श्लोक 2.11

उ॒रुः कोशो॑ वसु॒धान॒स्तवा॒यं यस्मि॑न्नि॒मा विश्वा॒ भुव॑नान्य॒न्तः ।स नो॑ मृड पशुपते॒ नम॑स्ते प॒रः क्रो॒ष्टारो॑ अभि॒भाः श्वानः॑ प॒रो य॑न्त्वघ॒रुदो॑ विके॒श्यःऽ

uruḥ kośo vasudhānastavāyaṃ yasminnimā viśvā bhuvanānyantaḥ | sa no mṛḍa paśupate namaste paraḥ kroṣṭāro abhibhāḥ śvānaḥ paro yantvagharudo vikeśyaḥ'

हिन्दी अर्थ

के सौं ्रौरःश्रोणियौं को भिलाने वालं पावो की दो रेलाएुः मध्य भाग मे एक- . खरे की शरोर कुकु की रहती है जिससे वेदि तनुमध्या हो नाती हं । कां० ११। सू० १ भथवेवेद-माष्य २३ दो अंस भर्थात् दो कन्धे (8001098) किये जति ह जसे कि योषा के दो

English

Destruction. Mark him who toils and cooks and pours oblation: make this man climb the path that leads to

अध्याय ११

श्लोक 2.12

धनु॑र्बिभर्षि॒ हरि॑तं हिर॒ण्ययं॑ सहस्र॒घ्नि श॒तव॑धं शिखण्डिनम्।रु॒द्रस्येषु॑श्चरति देवहे॒तिस्तस्यै॒ नमो॑ यत॒मस्यां॑ दि॒शी॒३तः

dhanurbibharṣi haritaṃ hiraṇyayaṃ sahasraghni śatavadhaṃ śikhaṇḍinam| rudrasyeṣuścarati devahetistasyai namo yatamasyāṃ diśī3taḥ

हिन्दी अर्थ

हस्त की भ्राकृति वाली “जुहू” - जि द्वा रा.कि श्राहुतियां दी जाती. है ! कि पके भ्रोदन के भ्रवयवों को विदारित किया-जाता है; अ्रलगःग्रलग-किया जाता है। भदितेः=श्रदितिः पृथििवीनाम ..(निषं० ११) मन्त्र १) 1 भ्रोदन को पृथक्-पृथक् करने मँ कोई साधन चाहिए । राजपत्नी का हाथ हुतियां मानो राजत्नी के हाथ द्वारा दी गई दँ । गृहपत्नी हाथ द्वारा हीः

English

heaven, That he may mount and reach life that is highest, ascending to the loftiest vault above us.

अध्याय ११

श्लोक 2.13

यो॒३भिया॑तो नि॒लय॑ते॒ त्वां रु॑द्र नि॒चिकी॑र्षति ।प॒श्चाद॑नु॒प्रयु॑ङ्क्षे॒ तं वि॒द्धस्य॑ पद॒नीरि॑व

yo3bhiyāto nilayate tvāṃ rudra nicikīrṣati | paścādanuprayuṅkṣe taṃ viddhasya padanīriva

हिन्दी अर्थ

पक्वान्न का विभागे करतीह । ब्रह्मौदन को वेदि मे संचित इसंलिये किया २४ भ्रथर्वेवेद-माष्य कां° ११ ॥सु० ६२ नि पके + ५ भ्ाहुतियोग्य भ्रदनीय (त्वा ४. ) तेरे समीप (देवाः) भ्रतिथिदेवं (सीदन्तु) बैठे, (्रगनेः) 9 से (निः बुष्य) हट कर :(पुनः) तदनन्तर (एनान्) इन .भरतिथि देवों

English

Adhvaryu, cleanse that face of the Supporter. Make room, well knowing, for the molten butter.

अध्याय ११

श्लोक 2.14

भ॒वा॒रु॒द्रौ स॒युजा॑ संविदा॒नावु॒भावु॒ग्रौ च॑रतो वी॒र्याऽय ।तभ्यां॒ नमो॑ यत॒मस्यां॑ दिशी३तः

bhavārudrau sayujā saṃvidānāvubhāvugrau carato vīryā'ya | tabhyāṃ namo yatamasyāṃ diśī3taḥ

हिन्दी अर्थ

वाण ८ करने वाली (ते षयाः) वे ऋषि सन्तार्ने (मा रिषन्) ताकि दुःख-कष्ट भ्रनुभव न करे. .. कर सदं । सोमेन = सोम का श्रथं दूष भी होता है। यथा "सोमो दृग्ा- र + 9 दही गई गौरो से सोम॑ः अर्थात् दुब क्षरित होती है तथा नोदनं देना चादि । श्नोदन के. भारन से भ्रतिथियों की भूल दान्त हो

English

Purify duly all the limbs with fatness. I make a path to heaven amid the Fathers. Supporter, send to those men fiends and battle, to all non-Brah- mans who attend and serve

अध्याय ११

श्लोक 2.15

नम॑स्ते ऽस्त्वाय॒ते नमो॑ अस्तु पराय॒ते।नम॑स्ते रुद्र॒ तिष्ठ॑त॒ आसी॑नायो॒त ते॒ नमः॑

namaste 'stvāyate namo astu parāyate| namaste rudra tiṣṭhata āsīnāyota te namaḥ

हिन्दी अर्थ

हो नाती है, भरतः भूख के कारण हए कुःखकष्ट का अनुमव "वेः नहीं ऋषीनर्थियास्तप॑सोऽधिं जातान् बह्मीदमे सुहवा जोहवीमि । रका. (सोम साजन्) हेःसजमान सोम 1 या प्रेरक राजन् . (यतसे) वाली च, (तपंसोधि जातान्) . तपः प्रभाव सेः नबजन्म ,नारण क्रि ए

English

thee. Famous and foremost, with their great possessions, let not these here, the Rishis sons, be

अध्याय ११

श्लोक 2.16

नमः॑ सा॒यं नमः॑ प्रा॒तर्नमो॒ रात्र्या॒ नमो॒ दिवा॑ ।भ॒वाय॑ च श॒र्वाय॑ चो॒भाभ्या॑मकरं॒ नमः॑

namaḥ sāyaṃ namaḥ prātarnamo rātryā namo divā | bhavāya ca śarvāya cobhābhyāmakaraṃ namaḥ

हिन्दी अर्थ

का०-११। सू० १ धथवेवेद-माष्य २५ जान कर, .धद्धापुरवंक, भ्रन्न द्वारा इन की सेवा बार-बार किया करें। मे (पर पृथक्) पृथक्-पृथक् कर क (सादयामि) म. स्थापित करता हूं । == नियते मारयति वा स . मरत्, मनुष्यजातिः' (उणा० १।९४) महर्षि

English

injured. I set thee, Odana, with Rishis’ children: naught here belongs to men not sprung from Rishis.

अध्याय ११

श्लोक 2.17

स॒ह॒स्रा॒क्षम॑तिप॒श्यं पु॒रस्ता॑द् रु॒द्रमस्य॑न्तं बहु॒धा वि॑प॒श्चित॑म्।मोपा॑राम जि॒ह्वयेय॑मानम्

sahasrākṣamatipaśyaṃ purastād rudramasyantaṃ bahudhā vipaścitam| mopārāma jihvayeyamānam

हिन्दी अर्थ

भत्नी का एक पति होना चाहिए । “हस्तेषु” प्रद “पाणिग्रहण” विधि का सुचक है । दं मे "जयोतिर हिर॑ण्यं पर्वं पेत् कामदां म एषा । ्नोदनान्न (मे) मेरी (ज्योतिः) ज्योति रूप है, (अमृतम्) मरने -से बचाने वाला है, (हिरण्यम्) सुवणेरूप है, (मे) मेरी (एषा) यह (कामदुघा). कामना का दोहन करने वाजी गौ है । (इदम् घनम् इस पक्वौदन रूपी हं, इसे (पितृषु) पितरों भ जाने का (पन्थाम्) मार्गे (कृण्वे) म बनाता हुः

English

Let Agni my protector, all the Maruts, the Visve Devas guard the cooked oblation. May we adore thee, Sacrifice that yieldeth an everlasting son, cow, home of treasures,

अध्याय ११

श्लोक 2.18

श्या॒वाश्वं॑ कृ॒ष्णमसि॑तं मृ॒णन्तं॑ भी॒मं रथं॑ के॒शिनः॑ पा॒दय॑न्तम्।पूर्वे॒ प्रती॑मो॒ नमो॑ अस्त्वस्मै

śyāvāśvaṃ kṛṣṇamasitaṃ mṛṇantaṃ bhīmaṃ rathaṃ keśinaḥ pādayantam| pūrve pratīmo namo astvasmai

हिन्दी अर्थ

.से बचाने वाला, तथा बहुमूल्य हिरेण्य भौर कामदुधा गौ मानता है । भ्रत्न वस्तुतः एतद्र प है । कागजी तंथा धातवीय सिक्के अन्न केलिये हीह) सृत करना मानो इन मे निधि स्थापित करना है, जो कि वस्तुतः राष्ट के गृहस्थ माता-पिता जो कि पञ्चमहायज्ञ के करने वाले है, इन महायज्ञो

English

Together with increasing store of riches, long life and immor- tality of children. Thou art a Bull that mounts to heaven: to Rishis and their off- spring go.

अध्याय ११

श्लोक 2.19

मा नो॒ऽभि स्रा॑ म॒त्यं देवहे॒तिं मा नः॑ क्रुधः पशुपते॒ नम॑स्ते ।अ॒न्यत्रा॒स्मद् दि॒व्यां शाखां॒ वि धू॑नु

mā no'bhi srā matyaṃ devahetiṃ mā naḥ krudhaḥ paśupate namaste | anyatrāsmad divyāṃ śākhāṃ vi dhūnu

हिन्दी अर्थ

म जाने-भ्राने का निज माग बनाता है । (२) “पितरः पद वारा राष्ट्िय सभा-समिति अर संसद के . सभासद्, -सामित्य तथा.सांसश्च भी पितरः है ।. । ध "पितरः संगतेषु" द्वाराः राष्ट के नतृरूप भ्रषिकारियों को पितरः कहा है राजा श्रतिथियज्ञ करके इन पितरो मे जाने का निजमां बनाता है, क्योंकि वैदिकाज्ञानूसार ये पितर भी पञ्चमहायज्ञ के करने वाले है । यह सगं .

English

Rest in the world of pious men: there is the place prepared for us. 171

अध्याय ११

श्लोक 2.20

मा नो॑ हिंसी॒रधि॑ नो ब्रूहि॒ परि॑ णो वृङ्ग्धि॒ मा क्रु॑धः ।मा त्वया॒ सम॑रामहि

mā no hiṃsīradhi no brūhi pari ṇo vṛṅgdhi mā krudhaḥ | mā tvayā samarāmahi

हिन्दी अर्थ

के समूह को (गृहराजस्य) गृह के स्वामी का (भागम्) भाग । सुनते रहे हैँ अर्थात् यह भाग गृहराज की पाचकाग्ि के लिये है ५५ . भ्रथवा इसे (नि्छेतेः भागम्) पृथिवी का भाग (विद्म). हम जानते है श्र्थात् पृथिवी पर गल-सड् कर यह पृथिवी के लिये .खाद बन कर उसे

English

By these our pious actions may we follow sacrifice dwelling in the seven-rayed heaven. May we invested with that light go upward, ascending to the sky’s most lofty summit.

अध्याय ११

श्लोक 2.21

मा नो॒ गोषु॒ पुरु॑षेषु॒ मा गृ॑धो नो अजा॒विषु॑ ।अ॒न्यत्रो॑ग्र॒ वि व॑र्तय॒ पिया॑रूणां प्र॒जां ज॑हि

mā no goṣu puruṣeṣu mā gṛdho no ajāviṣu | anyatrogra vi vartaya piyārūṇāṃ prajāṃ jahi

हिन्दी अर्थ

(श्राम्यतः) परिश्रम करने वाले, (पचतः) भ्रतिथि सेवाके लिये भ्रोदन पकाने वाले, (सुन्वतः) दूष का स्ञावण करने वाले को-हे परमेकवर (पन्थाभ्) मागे पर (रोहय) भ्रधिखूढु कर, (येन) जिस मागं से कि ( जतम्) न= परसम्पत्ति रूप (नाकम्) तथा दुःख के स्पे से रहित (व्योम षतया रक्षक परमेदवर रोहात्

English

Wherewith the Gods, what time they had made ready Brahmaudana, mounted to the world of virtue.

अध्याय ११

श्लोक 2.22

यस्य॑ त॒क्मा कासि॑का हे॒तिरेक॒मश्व॑स्येव॒ वृष॑णः॒ क्रन्द॒ एति॑ ।अ॒भि॒पू॒र्वं नि॒र्णय॑ते॒ नमो॑ अस्त्वस्मै

yasya takmā kāsikā hetirekamaśvasyeva vṛṣaṇaḥ kranda eti | abhipūrvaṃ nirṇayate namo astvasmai

हिन्दी अर्थ

सुन्वतः यद्यपि यह पद सोम-प्रोषधि के रस को निकाल क उस की ्राहुति भ्रौर उस के पीने के निमित्त किये गए यज्ञ का सूचक है, परन्तु प्करणानुसार यहां “सुन्वतः का अभिप्राय है भतिथियोंके लिये गौसे „ १. भय मृदि भ्म) -भूयष शूर, भर्ात् उन यगत कर के स्न करी. बुद्धि कर । .. प श्र २८ भथवेवेद-भाष्य का० ११1 सु०.१ (एतत् मखम्) इस मुखं को (विमृदिढ) तू विशेषरूप से समुज्ज्वल करः

English

Prayer and praise to Bhava, Sarva and Rudra Bhava and Sarva, spare us, be not hostile. Homage to you, twin

अध्याय ११

श्लोक 2.23

यो॒३न्तरि॑क्षे॒ तिष्ठ॑ति॒ विष्ट॑भि॒तोऽय॑ज्वनः प्रमृ॒णन् दे॑वपी॒यून्।तस्मै॒ नमो॑ द॒शभिः॒ शक्व॑रीभिः

yo3ntarikṣe tiṣṭhati viṣṭabhito'yajvanaḥ pramṛṇan devapīyūn| tasmai namo daśabhiḥ śakvarībhiḥ

हिन्दी अर्थ

कर ।- (चृतेन) धुव द्वारा (सर्वा गात्रा) सब गत्रो. भौर शरीरों को (वि मुदिढ ) विशेषतया समुज्ज्वल कर इस प्रकार (पितृषु). पितरोमे १. मे (पन्थाम्) निज मोग (कृण्वे) तैयार करता हु, (यः) जो कि (स्वः) कौ कीतिं कर के उस के मुख को कीति सम्पन्न कर । (२) उसे यह भी

English

Lords of beasts and spirits! Shoot not the arrow aimed and drawn against us: forbear to harm our quadrupeds and bipeds.

अध्याय ११

श्लोक 2.24

तुभ्य॑मार॒ण्याः प॒शवो॑ मृ॒गा वने॑ हि॒ता हं॒साः सु॑प॒र्णाः श॑कु॒ना वयां॑सि ।तव॑ य॒क्षं प॑शुपते अ॒प्स्व॑१न्तस्तुभ्यं॑ क्षरन्ति दि॒व्या आपो॑ वृ॒धे

tubhyamāraṇyāḥ paśavo mṛgā vane hitā haṃsāḥ suparṇāḥ śakunā vayāṃsi | tava yakṣaṃ paśupate apsva1ntastubhyaṃ kṣaranti divyā āpo vṛdhe

हिन्दी अर्थ

उपदेश दे कि वह गृहरथ व्यवहार के लिये षर मे भाज्य मरो कुम्भ मी रखा करे । (३) ताकि गृहनिवासि्यो के शरीर वृतसेवन वारा समुञ्ज्वल हों। (४) भ्रौर इस विधि से गृहस्थ जीवन को स्वर्गीय बनाया जा सके । (अथरवं ° ४।३४।२,५,७,८) मन्त्र भ गृहस्थ जीवन को स्वगं कहा है। र्वं ४।३४।३,८) मन्न मे ब्राह्मणों की सेवा के लिये भरोदन का भी कथनं हृ है । तथा घृत. मरे -कुम्भों कों “ृतहृदाः” (मन्व ६); तथा ..

English

Cast not our bodies to the dog or jackal, nor, Lord of Beasts! to carrion-kites or vultures. Let not thy black voracious flies attack them; let not thy birds obtain them for their banquet.

अध्याय ११

श्लोक 2.25

शि॒शु॒मारा॑ अजग॒राः पु॑री॒कया॑ ज॒षा मत्स्या॑ रज॒सा येभ्यो॒ अस्य॑सि ।न ते॑ दू॒रं न प॑रि॒ष्ठास्ति॑ ते भव स॒द्यः सर्वा॒न् परि॑ पश्यसि॒ भूमिं॒ पूर्व॑स्माद्धं॒स्युत्त॑रस्मिन्समु॒द्रे

śiśumārā ajagarāḥ purīkayā jaṣā matsyā rajasā yebhyo asyasi | na te dūraṃ na pariṣṭhāsti te bhava sadyaḥ sarvān pari paśyasi bhūmiṃ pūrvasmāddhaṃsyuttarasminsamudre

हिन्दी अर्थ

(म ७) मवारकु्भो का वर्णेन हप्र है, जिनमे से दुग्ध, उदकं भौर दवं कतमो का तो नोत बन हो ह, भोर चौषा कम् शृत - (बभ्रे) है भरण-पोषण करने वले ! (रक्षः) है ख की रक्षा करने लोगों के साथ आ जायं, तो उन भी सम्यक्-अदनीयं अन्नं देना चाहिए ॥

English

We offer homage to thy shout, Bhava! thy breath, thy racking pains: Homage, Immortal One! to thee, to Rudra of the thousand eyes.

अध्याय ११

श्लोक 2.26

मा नो॑ रुद्र त॒क्मना॒ मा वि॒षेण॒ मा नः॒ सं स्रा॑ दि॒व्येना॒ग्निना॑ ।अ॒न्यत्रा॒स्मद् वि॒द्युतं॑ पातयै॒ताम्

mā no rudra takmanā mā viṣeṇa mā naḥ saṃ srā divyenāgninā | anyatrāsmad vidyutaṃ pātayaitām

हिन्दी अर्थ

ममां देवतां वासय इमाभिमां देवतां परि वेवेष्मीत्येनं परि वेविष्यात्! १३॥। तस्यामेवास्य तद् देवतायां हृतं मवति य एवं वेव ।, १४ (श्रथवं० १५।१३। कराए । गृहस्थ. के लिये वेदिक पञ्चमहायज्ञा में नानाविध प्राणियों को ३० भ्रथ्वेवेद-माष्य का० ११।सू० ६१. १“ ! ५ इसे “पुमान्-धेनु कहा है । यह पुमान् होता हृभ्रा धेनुरुप है प्रपीन वृषभं ग्रनेक गौप्रौ के पेदाकरनेकाहेतुहोताहै। कारणः वृषभ भे, कायं घेनु

English

We offer reverence to thee from eastward, and from north and south, From all the compass of the sky, to thee and to the firmament.

अध्याय ११

श्लोक 2.27

भ॒वो दि॒वो भ॒व ई॑शे पृथि॒व्या भ॒व आ प॑प्र उ॒र्व॑न्तरि॑क्षम्।तस्मै॒ नमो॑ यत॒मस्यां॑ दि॒शी॒३तः

bhavo divo bhava īśe pṛthivyā bhava ā papra urvantarikṣam| tasmai namo yatamasyāṃ diśī3taḥ

हिन्दी अर्थ

रायु कहा है । चृत कारण है ञ्रायु का, भ्रायु काये है । मन्त्रे ३३ मँ खेती-पके भर्थात् बेल सहायक है । इसलिये बेलःका वणेन हप्र है! यह दुग्ध का साधन है। विना.बेल के धेनु की उत्पत्ति नहीं हो सकती भौर घेनु दुग्ब ्रदात्री है । वृषभ जो कि भपीन हो, वह नाना षेनुप्ो भौर बलों को पदा कृषि सम्पत्तियं का यह श्रागार है । दष तथा धृतः भयु के वकरैक है, भ्रतः परिपुष्टि होती रहती है । एसे “पुमान् घेनु"" को हम प्राप्त हँ ।

English

Homage, O Bhava, Lord of Beasts, unto thy face and all thine eyes, To skin, and hue, and aspect, and to thee when looked at from behind!

अध्याय ११

श्लोक 2.28

भव॑ राज॒न् यज॑मानाय मृड पशू॒नां हि प॑शु॒पति॑र्ब॒भूथ॑ ।यः श्र॒द्दधा॑ति॒ सन्ति॑ दे॒वा इति॒ चतु॑ष्पदे द्वि॒पदे॑ऽस्य मृड

bhava rājan yajamānāya mṛḍa paśūnāṃ hi paśupatirbabhūtha | yaḥ śraddadhāti santi devā iti catuṣpade dvipade'sya mṛḍa

हिन्दी अर्थ

सुकृता लोके सीद् तरं नो संस्कृतम् ॥२१॥ . षभः वेनो, बेलो तथा छष्यन्लो को वर्षा करने वाला, परभूत मात्रा देने वाला है बेल ! (रसि) तु है, (स्वगेः) तू सुख विशेष पहुंचाता संस्कृति का काये हो, या हम दोनो का भिल कर यह् सेवा क्ये हो । र ध म्नोर से ऋषियों को तेरा सम्षंण, तथा ऋषियों मे ःरह कर उन की वेनु श्रादि. को बढ़ाना , यह दो कायं हमः दोनों के सम्मिलित कं प्रतीत है । ऋषियों की सेवाथं उन्हे “पुमान् धेनु" सी देनी चाहिए, यह मन्करा्भिप्राय है । ॥ समाचित््वालसंभयाहये पयः करसय देवयानान् ।. ‰ - शतै चूते गच्छेम यं नाके तिषठनतमा शप्तरसमौ ॥२६॥

English

We offer homage to thy limbs, thy belly, and thy tongue, and mouth we offer homage to thy smell.

अध्याय ११

श्लोक 2.29

मा नो॑ म॒हान्त॑मु॒त मा नो॑ अर्भ॒कं मा नो॒ वह॑न्तमु॒त मा नो॑ वक्ष्य॒तः ।मा नो॑ हिंसीः पि॒तरं॑ मा॒तरं॑ च॒ स्वां त॒न्वंऽ रुद्र॒ मा री॑रिषो नः

mā no mahāntamuta mā no arbhakaṃ mā no vahantamuta mā no vakṣyataḥ | mā no hiṃsīḥ pitaraṃ mātaraṃ ca svāṃ tanvaṃ' rudra mā rīriṣo naḥ

हिन्दी अर्थ

च दानकेनिर्वपेव् सू्वि" (मनु० ३।६२) । तरथा देवतायाम् =ग्रतियि मे. हो, उस “हैवत्य के लिये ्रन्नोत्रिय की भी सेवा करनी चाहिए. यथा “मातदेवो भव, पितुदेवो भव, भ्रतिथि देवो सव के भ्रनुसार माता-पिता अरवियेषु' नि द॑ष ओदन तवा नानार्ेयाणामप्ासत्यन . । , (जपि =श्रपि च) तथा (मोदन) है रोदन (त्वा) तुमे (आर्षयेषु)

English

Never may we contend with him, the mighty archer, thousand- eyed. Rudra who wears black tufts of hair, the slaughterer of

अध्याय ११

श्लोक 2.30

रु॒द्रस्यै॑लबका॒रेभ्यो॑ऽसंसूक्तगि॒लेभ्यः॑ ।इ॒दं म॒हास्ये॑भ्यः॒ श्वभ्यो॑ अकरं॒ नमः॑

rudrasyailabakārebhyo'saṃsūktagilebhyaḥ | idaṃ mahāsyebhyaḥ śvabhyo akaraṃ namaḥ

हिन्दी अर्थ

कर, (हैवयानान्) देवकोटि के लोग जिन मार्गो पर चलते ह (पथः) उन . मार्को प्रजा के लिये (कल्यय) विधिपूवंक. निरिचत कर । (एत्र कर देवयान-पथो का ,भवसम्ब करेगा, तो प्रजाजन भी तदनुरूप सत्कर्मी हो जायंगे, “वथा राजा तथा प्रजा” । इन सत्कर्मो कै द्वारा परमेदवर कोपा सकंगे ! यज्ञम् = यजं देवपूजा संगतिकरण दानेषु । नाके; कम सुखम्; .

English

not threaten us. To him be homage! Four times, eight times be homage paid to Bhava, yea, Lord of

अध्याय ११

श्लोक 2.31

नम॑स्ते घो॒षिणी॑भ्यो॒ नम॑स्ते के॒शिनी॑भ्यः ।नमो॒ नम॑स्कृताभ्यो॒ नमः॑ संभुञ्ज॒तीभ्यः॑ ।नम॑स्ते देव॒ सेना॑भ्यः स्व॒स्ति नो॒ अभ॑यं च नः

namaste ghoṣiṇībhyo namaste keśinībhyaḥ | namo namaskṛtābhyo namaḥ saṃbhuñjatībhyaḥ | namaste deva senābhyaḥ svasti no abhayaṃ ca naḥ

हिन्दी अर्थ

(देवाः) विव्यगुणी लोग॒(येन ज्योतिषा). जिस ज्योति के दाराः (याम्) चलोकया शिरः स्थ सहलारचक्र पर (उदायन्) चदे है, भौर परिपाक कर कं, तथा जीवन मेँ परिपक्व कृर के (सुकृतस्य लोकम्) सुक- १, यजु्ेद (३१।९) मे "यज्ञं पुरुष” दवारा परम-पुरुष को “यज्ञम्” कहा । कोश करा मी वाचक है ! यथाः-“्ष्टचक्षा नब दवारा देवानां पूरयोध्या ।

English

Beasts, ten times be reverence paid thee! Thine are these animals, five several classes, oxen, and goats and sheep, and men, and horses

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Atharva Veda — Chapter 11
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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