Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
12
अध्याय 12 / 20

Kanda 12

काण्ड 12

304 श्लोकभाग 3/3 · श्लोक 5.1–5.73WhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ73 श्लोक

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अध्याय १२

श्लोक 5.1

ब्रह्मगवी।१-७२ (कश्यपः?) अथर्वाचार्यः।ब्रह्मगवी।(सप्त पर्यायाः) (१-६) १ प्राजापत्याऽनुष्टुप्, २,६ भुरिक् साम्यनुष्टुप्, ३ चतुष्पदा स्वराडुष्णिक्, ४ आसुर्यनुष्टुप्, ५ साम्नी पङ्क्तिः।श्रमे॑ण॒ तप॑सा सृ॒ष्टा ब्रह्म॑णा वि॒त्तर्ते श्रि॒ता

brahmagavī| 1-72 (kaśyapaḥ?) atharvācāryaḥ| brahmagavī| (sapta paryāyāḥ) (1-6) 1 prājāpatyā'nuṣṭup, 2,6 bhurik sāmyanuṣṭup, 3 catuṣpadā svarāḍuṣṇik, 4 āsuryanuṣṭup, 5 sāmnī paṅktiḥ| śrameṇa tapasā sṛṣṭā brahmaṇā vittarte śritā

हिन्दी अर्थ

दक भ्रयर्ववेद-भाष्य . कां० १२।सूु०४ मागी गई (एनाम्) इस, वा अर्थात् वेदवाणी को (निप्रियायते) नितरां जो राजपुरुष वेद प्रचार पर प्रतिबन्धे लगाता है, उस के राज्य मे नभ्रजाकी वृद्धि होती है, न पशुम्रों की. । अग्नीषोमाभ्यां कामाय मित्राय वरंणाय च

English

He, Nārads! would know the Cow, then Brāhmans must be sought unto. Whoso calls her a worthless Cow, the stored-up treasure of the Gods,

अध्याय १२

श्लोक 5.2

स॒त्येनावृ॑ता श्रि॒या प्रावृ॑ता॒ यश॑सा॒ परी॑वृता

satyenāvṛtā śriyā prāvṛtā yaśasā parīvṛtā

हिन्दी अर्थ

से प्रजा दुःखी हो कंर पृथिवीति कौ विनान्च कर देभी । ३५४ अरथवेवेद-माप्य कां० १२।सु०४ (यः) जो पृथिवीपति (वेहतं मन्यमानः) मुभे ग्भधातिनी मानकर, (च) श्रौरः (म्रमा) भ्रपने धर मे (वदाम्) मुभ वेदवाणी को (पचते) (याचयते) भिखारो वना देता है। .

English

The Gods in anger rend away his life and his prosperity Roaming in many a place the Cow is the stored treasure of the

अध्याय १२

श्लोक 5.3

स्व॒धया॒ परि॑हिता श्र॒द्धया॒ पर्यू॑ढा दी॒क्षया॑ गु॒प्ता य॒ज्ञे प्रति॑ष्ठिता लो॒को नि॒धन॑म्

svadhayā parihitā śraddhayā paryūḍhā dīkṣayā guptā yajñe pratiṣṭhitā loko nidhanam

हिन्दी अर्थ

श्रीणिवैव्र्॑ाजातानि. विलिष्ती सूतवशा वचा । (अशा जातानि) वशा भ्र्थात् वाणिर्यो .कं भेद (व) निचय से (त्रीणि) निविष है, विलिप्ती, सूतवशा, . तथां वशा । (ताः) उन्हे राजन्य कां० १२। सु०४ -भयर्वेवेद-माष्य २५९ (चेत्) यदि (एनम्) इस राजा से (वशाम् याचेयुः) वधा की याचना करे तो (याचितः) ्राथित हमा राजा (इति मन्वीत) यह माने या

English

But happy is the Cow when she is made a sacrifice to Gods. Nārada chose the terrible Vilipti out of all the cows Which the Gods formed and framed when they had risen up from sacri- fice

अध्याय १२

श्लोक 5.4

ब्रह्म॑ पदवा॒यं ब्रा॑ह्म॒णोऽधि॑पतिः

brahma padavāyaṃ brāhmaṇo'dhipatiḥ

हिन्दी अर्थ

को० १२। सु०भर भथववेवेद-माष्यं ३६९१ वाले राजा का । सूनृता = उषोनामं (नि० -१।८) । क्षत्रिय के. यज्य का वेदवाणी परर प्रतिबन्ध लगा देता है तो ्रजाविद्रोह कै कारण उस के राज्य वेदवेत्ता के लिये जीवनीय साधन होती है । श्रतः वेदवाणी का-अपहरण वेदवेत्ता के जोवन को हानि पहुचानां है । आयुं रूपं च॒ नामं च कीतिं भाणशांपानय चक्चञ्च शरोत्रं च॥९॥ पय॑अ रसथान्नं चान्नं चुतं च॑ सत्यं चेष्टं चं परत च भजा च॑

English

If in his home one cooks the Cow, sacrificed or not sacrificed. Wronger of Gods and Brāhmans’ he departs, dishonest, from the world.

अध्याय १२

श्लोक 5.5

तामा॒ददा॑नस्य ब्रह्मग॒वीं जि॑न॒तो ब्रा॑ह्म॒णं क्ष॒त्रिय॑स्य

tāmādadānasya brahmagavīṃ jinato brāhmaṇaṃ kṣatriyasya

हिन्दी अर्थ

शीर्षवितः) हसक वच्ररूपः तथा िरोरोग रूफ है । ,. महिसकवच्रूप तथा सिर के यगो कौ पदाकरतादहै 1 भअत एेषीःकाः ॥ सेदिस्पतिष्ठन्ती मियोयोषः परागृ्टा ॥२५॥ रहती हई (सेदिः) भन्य गौरो कीः विनाशिका श्रौर उन मं अ्रवसाद पैदा

English

Running she is a thunderbolt, when driven away she is Vaisvā- nara; An arrow when she draweth up her hooves, and Mahādeva when she looketh around; Sharp as a razor when she beholdeth, she thundereth when she belloweth.

अध्याय १२

श्लोक 5.6

अप॑ क्रामति सू॒नृता॑ वी॒र्यं॑१ पुण्या॑ ल॒क्ष्मीः

apa krāmati sūnṛtā vīryaṃ1 puṇyā lakṣmīḥ

हिन्दी अर्थ

हानि पहुचाने पर गोरक्षा का प्रान्दोलन न हो खकेगा भौर गोव के विनाश्च से जनता का इह लोक दुःखप्रद हो जायगा, तथा गोचृत के अभाव मँ यर्ञोकेनदहो सकनेके कारण -परलोककी प्राप्तिभी नहो. सकेगी! (वलगः) घेरा डाल कर चलने वाला भस्त्ररूप है। कृत्याच्छरती छदने; काटने का - हास्वविशेष + .मेनिः वं्रनाम . (निषं० २२०) वलमः-==वल (संवरणे) + ग . (गच्छति) जो भस्त्र को. फूट कर, घेरा डाल कर भ्रागे-प्रागे बढ़ता जाता है । “वलग भूभ्निमे गाड़ा जाता है । यथा-“वलगं वा निचस्तुः” (अथव १४।१।१८) । भरभिप्राय यहं -किगौ की हत्या उसके काटने, प्रौर मयके कारणपेटके मल के निकल

English

a secret spell. Homelessness is she when denied her rights.

अध्याय १२

श्लोक 5.7

(2) (७-११) ७-९ आर्च्यनुष्टुप् (७ भुरिक्), १० उष्णिक्, (७-१७ एकपदा), ११ आर्ची निचृत्पङ्क्तिः।ओज॑श्च॒ तेज॑श्च॒ सह॑श्च॒ बलं॑ च॒ वाक् चे॑न्द्रि॒यं च॒ श्रीश्च॒ धर्म॑श्च

(2) (7-11) 7-9 ārcyanuṣṭup (7 bhurik), 10 uṣṇik, (7-17 ekapadā), 11 ārcī nicṛtpaṅktiḥ| ojaśca tejaśca sahaśca balaṃ ca vāk cendriyaṃ ca śrīśca dharmaśca

हिन्दी अर्थ

च्छसि) तु सोप देती है, सुपुदं कर देतो है बदला लेने के लिथे । यच्यपि मव) भ्य रक्षको की मागं दिका बन । अध्ने रं शिरं जहि अह्यज्यस्यं कृतागसो देवपीयोरंरा सैः. ॥६०॥ ३८२ -, , भथवेवेद-माष्य कां १२३ सु०५

English

of the Gods. Let Agni burn the spiteful wretch when crushed to death and slain by thee. Rend, rend to bits, rend through and through, scorch and con- sume and burn to dust,

अध्याय १२

श्लोक 5.8

ब्रह्म॑ च क्ष॒त्रं च॑ रा॒ष्ट्रं च॒ विश॑श्च॒ त्विषि॑श्च॒ यश॑श्च॒ वर्च॑श्च॒ द्रवि॑णं च

brahma ca kṣatraṃ ca rāṣṭraṃ ca viśaśca tviṣiśca yaśaśca varcaśca draviṇaṃ ca

हिन्दी अर्थ

(भस्य) इस . के (लोमानि) लोमों को (सं छिन्धि) काट दे, (भस्य) इस के (मांसानि) मांसों को . (शातय) टुकड़े-टुकड़े कर भङ्गो को, (पर्वाणि) जोड़ों को (विश्वथयः) ढीला कर दे (७१ ) ॥ वेव, पापी को, सख्त दण्ड देने. की आशा देता है नमं दण्डसे रोकता भौर प्रजा के लिये चेतावनी का काम भी करता है ।

English

Dislocate all his limbs and joints. From earth let the Carnivorous Agni drive him, let Vayu burn. him from mid-air’s broad

अध्याय १२

श्लोक 5.9

आयु॑श्च रू॒पं च॒ नाम॑ च की॒र्तिश्च॑ प्रा॒णश्चा॑पा॒नश्च॒ चक्षु॑श्च॒ श्रोत्रं॑ च

āyuśca rūpaṃ ca nāma ca kīrtiśca prāṇaścāpānaśca cakṣuśca śrotraṃ ca

हिन्दी अर्थ

कां० १२। सु०.१५ भरथरवेवेद-माष्यं । २३८१ पृथिवी से (नुदताम्) धकेले, (उद् भ्रोषतु) जलाए भ्रौर ऊपर वायु में से घकेले, (सूयः) सुं (एनम्) इसे (दिवः) चुलोक से (पभ नुदताम्) दुर घ्केले, (न्योषंतु) भ्रौर तपा कर नीचे पुंथिवी की भ्रोर घकेले (मनर मन्वरानुखारः सुकमरीर समेत जीवात्मा, पृथिवी से वागु. भर्थात्

English

region. From heaven let Sūrya drive him and consume him. 199

अध्याय १२

श्लोक 5.10

पय॑श्च॒ रस॒श्चान्नं॑ चा॒न्नाद्यं॑ च॒र्तं च॑ स॒त्यं चे॒ष्टं च॑ पू॒र्तं च॑ प्र॒जा च॑ प॒शव॑श्च

payaśca rasaścānnaṃ cānnādyaṃ cartaṃ ca satyaṃ ceṣṭaṃ ca pūrtaṃ ca prajā ca paśavaśca

हिन्दी अर्थ

(कामाय) काम्यपदार्थो के लिये, (मित्राय) मित्रों के लिये, (च वरुणाय) राज्य की वृद्धि कं लिये भ्रग्नि (0६) की तथा सोभ (जल) की वृद्धि चाहिए । भ्रमन दवारा कलाकौरल की वृद्धि, तथा जल हारा कृषि भवितु राष्टरोन्नति के लिये नाहते ई चरदस्य ताव् गोष नस्य भुतव गृहे वसेत् ॥२अ। (मोपविः) पृथिवी का पति राजा (याक्त् ) जब तक (भरस्याः) इस कांऽ १२।.सु०४ भ्रथवेवेद-माष्य ३४९

English

Bhava and Sarva, both of them, move round and shoot a shaft at him. The man who hath no knowledge of her udder and the teats thereof,

अध्याय १२

श्लोक 5.11

तानि॒ सर्वा॒ण्यप॑ क्रामन्ति ब्रह्मग॒वीमा॒ददा॑नस्य जिन॒तो ब्रा॑ह्म॒णं क्ष॒त्रिय॑स्य

tāni sarvāṇyapa krāmanti brahmagavīmādadānasya jinato brāhmaṇaṃ kṣatriyasya

हिन्दी अर्थ

भ्पते भ्राप नहीं सुनता, (तावल्) तब तक (भरस्य) इस गोपति कं (गोषु) सुन कर (अस्य ) इस गोपति के (गृहे) केवल गृह मे ही (न वसेत्) न बसे, वश्चा का भ्रथं यदि गौ(षशु) हो तो वह् ऋचाए् कैसे बोलेगी । वेदवाणी तो ऋचाएं बोलती ही है । श्रतः इस वक्षा प्रकरण में वचा का अथं वेदवाणी ही जानना चाहिए । वेदवाणी मानो वेदज्ञ बराह्मण के मूख हारा ऋचां का उच्चारण करती दहै। गोपतिका भथ ध न कि ग्वाला । व्यापृत 'होने के कारण वहू वेदवाणी के सदपदेश से वञ्चत रहत इसलिये वेदवाणी राजा के स्तोतु भ्रादि याज्ञिको तक सीमित रहती है, परन्तु गोपति जब स्वयं वेदवाणी की छचार्भो का चवण करता है तब वह॒ वेदवाणी के सदुपदे्शो के प्रचार की दच्छा.करता है, भ्नौर वेदवाभी पिने

English

She yields him milk with these, if he hath purposed to bestow the Cow. If he withholds the Cow they beg, she lies rebellious in his stall. Vain are the wishes and the hopes which he, withholding her, would gain.

अध्याय १२

श्लोक 5.12

(3) (१२-२७) १२ विराड् विषमा गायत्री, १३ आसुर्यनुष्टुप्, १४, २५ साम्नी उष्णिक्, १५ गायत्री, १६-१७, १९-२० प्राजापत्याऽनुष्टुप्, १८ याजुषी जगती, २१,२५ साम्न्यनुष्टुप्, २२ साम्नी बृहती, २३ याजुषी त्रिष्टुप्, २४ आसुरी गायत्री, २७ आर्च्युष्णिक्।सैषा भी॒मा ब्र॑ह्मग॒व्य॑१घवि॑षा सा॒क्षात् कृ॒त्या कूल्ब॑ज॒मावृ॑ता

(3) (12-27) 12 virāḍ viṣamā gāyatrī, 13 āsuryanuṣṭup, 14, 25 sāmnī uṣṇik, 15 gāyatrī, 16-17, 19-20 prājāpatyā'nuṣṭup, 18 yājuṣī jagatī, 21,25 sāmnyanuṣṭup, 22 sāmnī bṛhatī, 23 yājuṣī triṣṭup, 24 āsurī gāyatrī, 27 ārcyuṣṇik| saiṣā bhīmā brahmagavya1ghaviṣā sākṣāt kṛtyā kūlbajamāvṛtā

हिन्दी अर्थ

राष्टकृत्यो के लिये मी उपयुक्त होती है । गोषु, मौः स्तोतुनाम आयुश्च तस्थ भूतिं च देवा हन्ति हीडिताः ॥२८॥ (यः) जो राजा (अस्याः) इस. वदा भर्थात् वेदवाणी को (ऋचः) के भोगों भ (भ्रचीचरत्) विचरता रहता है, (तस्य) उस की (भ्रायुः च, भूति च) भायु को भौर विभूति को- हीडिताः देवाः) भनादत हए देवजन (वृदचन्ति) काट देते है । „ - "'गोपति" के साथ नही भ्रपितु “ऋचः” के साय है जसा कि मन्व २८

English

The Deities have begged the Cow, using the Brāhman as their mouth: The man who gives her not incurs the enmity of all the Gods.

अध्याय १२

श्लोक 5.13

सर्वा॑ण्यस्यां घो॒राणि॒ सर्वे॑ च मृ॒त्यवः॑

sarvāṇyasyāṃ ghorāṇi sarve ca mṛtyavaḥ

हिन्दी अर्थ

वक्षा चर॑न्ती बहुधा देवानां .निदितो निधिः । (देवानां निहितः निधिः) देवकोरि के विद्वानों का सुरक्षित खजाना (वशा) वेदवाणी, (बहुधा) बहत प्रकार के विषयों में (चरन्ती) गति करती हई, (खूपाणि) नाना रूपों का (आविष्कृणुष्व =भ्राविष्करोति) भ्राश्नय पाती ह; तब नाना विषयो का . प्रतिपादन करती हं। ये विषय ऽहमस्मि" ( निड० २।१।३ ) । विद्या = वेदविद्या; तथा (३०, २३१) ।

English

Withholding her from Brāhmans, he incurs the anger of the beasts, When mortal man appropriates the destined portion of the Gods.

अध्याय १२

श्लोक 5.14

सर्वा॑ण्यस्यां क्रू॒राणि॒ सर्वे॑ पुरुषव॒धाः

sarvāṇyasyāṃ krūrāṇi sarve puruṣavadhāḥ

हिन्दी अर्थ

वेत्ता को (जिघांसति) जाना चाहती है । (श्रथ उ हु) तव निद्वय. से चाहे, एेसी इच्छा करती है । जिघांसति = जिगमिषति; हन् गतौ भाविः . म्र्नसा सं क॑रपयति तद् हैवं अपिं गच्छति । (मनसा) मन से (सं कल्पयति) संकल्प करती है; (तत्) वह कां० १२ सु० ४ अथंववेद-माष्य ३५१

English

If hundred other Brāhmans beg the Cow of him who owneth her, The Gods have said, She, verily, belongs to him who knows the truth.

अध्याय १२

श्लोक 5.15

सा ब्र॑ह्म॒ज्यं दे॑वपी॒युं ब्र॑ह्मग॒व्याऽदी॒यमा॑ना मृ॒त्योः पद्वी॑श॒ आ द्य॑ति

sā brahmajyaṃ devapīyuṃ brahmagavyā'dīyamānā mṛtyoḥ padvīśa ā dyati

हिन्दी अर्थ

वाणी की (याचितुम्) याचना के लिये (उप प्रयन्ति) गोपति के समीप मनसा,- संकल्प मन का गुण ह न कि प्रात्मा का 1 अमिप्राय यह चाहिए । मन्व ३० भ्रौर.३१ मे मनः रौर मनसा, तथा संकल्प का वणेन (पितृभ्यः) पित्ररों के लिये (स्वधाकारेण) उन के निज धारण

English

Whoso to others, not to him who hath this knowledge, gives the Cow, Earth, with the Deities, is hard for him to win and rest upon.

अध्याय १२

श्लोक 5.16

मे॒निः श॒तव॑धा॒ हि सा ब्र॑ह्म॒ज्यस्य॒ क्षिति॒र्हि सा

meniḥ śatavadhā hi sā brahmajyasya kṣitirhi sā

हिन्दी अर्थ

वेदवाणी के प्रचार द्वारा करके राजा, वेदवाणीरूपी माता द्वारा भरनादर नहीं पाता । वेदमाता = “स्तुता भया वरदा वेदमाता (भथवं ° १९।७१। के पालन से राजा वेदमाता इरा सत्कार पाता है, भ्रन्यथा वहु भ्रनादर (वशा) वेदवाणी (राजन्यस्य) राजा की (माता) माता है, (तथा) एेसा (श्रग्रशषः) पिले से (संभूतम्) निरिचत हुमा है । (तस्याः) उस कै ३५२ अथववंवेद-माष्य कां० १२। सु०४ समपंण का भ्रभिप्राय है, उस वस्तु का प्रदान, जिस पर किं दाता

English

The Deities begged the Cow from him with whom at first she was produced: Her, this one, Nārada would know: with Deities he drove her forth.

अध्याय १२

श्लोक 5.17

तस्मा॒द् वै ब्रा॑ह्म॒णानां॒ गौर्दु॑रा॒धर्षा॑ विजान॒ता

tasmād vai brāhmaṇānāṃ gaurdurādharṣā vijānatā

हिन्दी अर्थ

केरना । राजन्य की माता कासम्पेण तो राजन्यं कापिता ही निज जामाता को करसकतादहै । वेदमाता का समर्पण करने वाला केवल -परमेश्वर है, जोकि वेदमाता का पिता है । इस मन्व दारा यह दर्शाया है. - ॥ निज कर्तव्य का ही पालन करता है । । (पुरोडाशवत्सा) पुरोडाशवत्रवालो, (सुदुषा) सुगमता से दुहौ जाने वाली (वशा) वेदवाणो (लोके) लोक मेँ (अप्प) इस राजा के लिये (उप तिष्ठति) उपस्थित होती है । वहं (्रस्मे ) इस राजा के लिये,(ददुषे)

English

The Cow deprives of progeny and makes him poor in cattle who Retains in his possession her whom Brāhmans have solicited. For Agni and for Soma, for Kāma, Mitra and Varuna,

अध्याय १२

श्लोक 5.18

वज्रो॒ धाव॑न्ती वैश्वान॒र उद्वी॑ता

vajro dhāvantī vaiśvānara udvītā

हिन्दी अर्थ

मँ बनाए गए भद्रे को वतप कहा है । पुरोडाश = 92170618 6६16 । इस से प्रतीत होता है कि मन्त्रम “वशा” पद गोपशु वाचक नहीं । गोपशु कावततरचाररटागो वाला प्राणो होता ह, पुरोडाश-नहं । इसलिये मस्र में कां० -१२।सु०४ -प्रथवेवेद-माष्य ३५३ “वशा"पद वेदवाणी का वाचक हैन कि गोपशु का। “लोके” का मी भरभि- भराय है--इस लोक मे, राजा के राज्य में । जो राजा निजराज्य मे वेदप्रचार की स्वीकृति देता है उस कै राज्य. मे सब कामना सफल हो जाती है। वेदवाणोरूपी व्चा सब कामनभ्रों का दोहन करती है, केवल दूषका ही . सर्वान् कामाय यमराज्यं वशा भहै दहे (यमराज्ये) यम नियमों का पालन कराने वाले नियन्ता राजा के

English

For these the Brāhmans ask: from these is he who giveth not estranged. 195

अध्याय १२

श्लोक 5.19

हे॒तिः श॒फानु॑त्खि॒दन्ती॑ महादे॒वो॒३ऽपेक्ष॑माणा

hetiḥ śaphānutkhidantī mahādevo3'pekṣamāṇā

हिन्दी अर्थ

प्रदान करने वाले के लिये (सर्वान् कामान्) सब कामना का (दृह) दोहन ॑ देने वालि के लिये (नारकम्, लोकम् ) नरक समान लोक (ब्राहुः) कहते ई । (प्रवीयमाना) गर्भवती (वशा) वशा (गोपतये) गोपति के लिये (कर्ढा) ऋद्ध सी (चरति) विचरतीं है । गोपति जोकि (मा) मु व्याख्या प्रतीत होती हैः--. कविता शेली मे वेदवाणी कहती हैएकि पृथिवीपति मुम गर्भवती को गरभषातिनी न समं । गर्भघातिनी गृहस्थ-जीवनः के लिये भ्रनुपयोशी है । इसी प्रकार यदि पृथिबीपति मु वेदवाणी को राष्ट्रिय जीवनके लियै भ्ननुपयोगी समता है तो वह जान ले कि मेरे पेट मेँ जो सत्यनियर्मो के

English

Long as her owner hath not heard, himself, the verses, let her move Among his kine: when he hath heard, let her not make her home with him; He who hath heard her verses and still makes her roam among his kine.

अध्याय १२

श्लोक 5.20

क्षु॒रप॑वि॒रीक्ष॑माणा॒ वाश्य॑माना॒भि स्फू॑र्जति

kṣurapavirīkṣamāṇā vāśyamānābhi sphūrjati

हिन्दी अर्थ

जाता भ्रौर सम्पत्ति से रहित कर दिया जाताहै। परिणाममें राजाभी भिखारी सा बन जाता है, ्रौर उस का परिवार भी । वेहत् = वी (प्रजननम्) का सन्तप्तहूदया होना कवितामय है 1 (गोषु). स्तोतू-या्ञिकों मे (चरन्ती) केवल विचरती हुई (एषा) यह वेदवाणी (महत्) बहुत (श्रव तपति) सन्तप्तहूदया सी रहती है । (गौः .

English

Gods, Make manifest thy shape and form when she would seek her dwelling-place. Her shape and form she manifests when she would seek her dwelling-place;

अध्याय १२

श्लोक 5.21

मृ॒त्युर्हि॑ङ्कृण्व॒त्यु॑१ग्रो दे॒वः पुच्छं॑ प॒र्यस्य॑न्ती

mṛtyurhiṅkṛṇvatyu1gro devaḥ pucchaṃ paryasyantī

हिन्दी अर्थ

जिस ने नहीं दी उस (गोपतये) पृथिवीपति केः लिये (विषम् दहै) मानो विषरूपी दृष. देती हैँ । . - १. मानसिकं सन्ताप केता है । यमः (३०, ३१) 1 कां० १२। सु०४ भ्रथरवेवेद-माष्य ३५५ (भवति) पेदा होता है । (भरथो) तथा (वशायाः) वेदवाणी का भी (तत्) दारा वर्षाके कारण वनते, भ्रौर वर्षाद्वारा कृषि की तथा घा चारेककी

English

Then verily the Cow attends to Brāhman priests and their request. This thought he settles in his mind. This safely goeth to the

अध्याय १२

श्लोक 5.22

स॒र्व॒ज्या॒निः कर्णौ॑ वरीव॒र्जय॑न्ती राजय॒क्ष्मो मेह॑न्ती

sarvajyāniḥ karṇau varīvarjayantī rājayakṣmo mehantī

हिन्दी अर्थ

ूर्वेक हवि भी देवों को प्राप्त होती रहती है । देव पृथिवी, जल, वायु, तासो वििष्त्यं मोमामुदाङकरत नारदः ॥४१॥ जिंन वाभो. को (उदकल्पयन्) विषय विमाग की दुष्टि. से विभक्त को (नारदः) नरनारो समाज कं. शोघक ने (उदाक्रुखत+) उत्कृष्ट जाना या माना । या वक्षाः == बहुवचने; भरभी तक वल्ा का वर्णन एकवचने

English

Gods. Then verily the Brāhman priests approach that they may beg the Cow

अध्याय १२

श्लोक 5.23

मे॒निर्दु॒ह्यमा॑ना शीर्ष॒क्तिर्दु॒ग्धा

menirduhyamānā śīrṣaktirdugdhā

हिन्दी अर्थ

२. व्ला-का बहुवचन “वेदवाणी” रूप मेँ उपपन्न होता है, गोपशु के रूप ३. एेसी ञान. .गोष्टयो! को परिषद् कहा है । यथा “पदग्रहृतीनि सर्वं मिलते है, तथा कुमार्वम् = कुमारीम् -(भ्रथवं० १४।१।६३) । नारद है भ्रथं है वहु वेदवाणी, जो कि राग-देष प्रादि के लेपो से रहित होने का व्णंन करती है । यहु विलिप्तीभावना समाज का संशोधन करती है । मन्त्रम कोई एतिहासिक घटना कथित नहीं हुई 1 श्रपितु रोचक ठंग से एक तथ्य का वणन हुभ्रा हं । विलिप्तौ प्रदरित जीवन-मागे भ्रतिकठिन हं इसलिये इस विलिप्ती को “मीमा""कहाहै। .. तां देवा अंमीमांसत वुशोया र मवशेतिं ।

English

By Svadhā to the Fathers, by sacrifice to the Deities, By giving them the Cow, the Prince doth not incur the mother’s. wrath.

अध्याय १२

श्लोक 5.24

से॒दिरु॑प॒तिष्ठ॑न्ती मिथोयो॒धः परा॑मृष्टा

sedirupatiṣṭhantī mithoyodhaḥ parāmṛṣṭā

हिन्दी अर्थ

सत) विचार किया, (इयम्) कि यह (वश्चा) वद्या है या (्रवशा इति) वशा-नहीं है । (ताम्) उस के सम्बरन्ल मेः (नारदः) समाज-संगोधक ने विम कान्तिकर्मां (निघं० २।६) । नारद कहता है कि “विलिप्ती"” वेद- क्योंकि यह् नर नारी समाज का संशोधन करने वाली है ॥ (नारद) -हे.नर नार्यो का शोषन करते वाले ! (वशाः) “वद्या”.

English

The Prince’s mother is the Cow: so was it ordered from of old. She, when bestowed upon the priests, cannot be given back, they say. As molten butter, held at length, drops down to Agni from the scoop,

अध्याय १२

श्लोक 5.25

श॒र॒व्या॒३ मुखे॑ऽपिन॒ह्यमा॑न॒ ऋति॑र्ह॒न्यमा॑ना

śaravyā3 mukhe'pinahyamāna ṛtirhanyamānā

हिन्दी अर्थ

तु जानता दहै, जोकि (मनुष्यजाः) मनुष्यो के लिये भाविभ्रुत हुई है ?, पुता हं, भौर यह भी. पूछता हं कि (कस्याः) किंस वेदवाणी का (न १. विलिप्ती-भागं को इसलिये ““दुगंपयः" भी का है । यथा “गं पथस्तत् कमो ववन्ति (कठ७ ६।३।१४) ।. यह मागं योगि तथा संन्यासिर्यो का है, कां० १२ । सुण ४ भ्रथवेवेद-माष्य ३१५७

English

So falls away from Agni he who gives no Cow to Brāhman priests. Good milker, with rice-cake as calf, she in the world comes nigh to him,

अध्याय १२

श्लोक 5.26

अ॒घवि॑षा नि॒पत॑न्ती॒ तमो॒ निप॑तिता

aghaviṣā nipatantī tamo nipatitā

हिन्दी अर्थ

यात् अश भोजने । भुज घातु का प्रयोग मुख द्वारा खानि भें ही नहीं होता मे “भोजनीयाः श्रौर मुनक्त” मे मुख द्वारा खाना भ्रथं नहीं । वेदवाणी के साथ (या च) भ्रौर जो (सुतवश्ला, वंशा) सूतवशा भौर वशा वेदवाणी है (तस्याः) उस का (न श्रहनीयात्) सेवेन न करे, (यः) जोकि

English

To him who gave her as a gift the Cow grants every hope and. wish. In Yama’s realm the Cow fulfils each wish for him who gave her up; But hell, they say, is for the man who, when they beg, bestow her not.

अध्याय १२

श्लोक 5.27

अ॒नु॒गच्छ॑न्ती प्रा॒णानुप॑ दासयति ब्रह्मग॒वी ब्र॑ह्म॒ज्यस्य॑

anugacchantī prāṇānupa dāsayati brahmagavī brahmajyasya

हिन्दी अर्थ

देशव मे जीवन विताना (भ्रारंसेत) चाहता' है । मौर वेदज्ञान की इच्छा नहीं, उस कं लिये उक्त तीन प्रकार की वाणिरयां , ब्रह्य को नहीं जानता उस को चाभ द्वारा क्या लाम होना है । विलिप्ती = राग-्ष भ्रादि कैःलेपसे रहित होने का उपदेश देने वाली वेदवाणी (योगियो रौर सन्या्तियोँ के लिय) 1

English

Enraged against her owner roams the Cow when she hath been impregned. He deemed me fruitless is her thought; let him be bound in, snares of Death!

अध्याय १२

श्लोक 5.28

(4) (२८-३८) आसुरी गायत्री, २९, ३७ आसुर्यनुष्टुप्, ३० साम्न्यनुष्टुप्, ३१ याजषी त्रिष्टुप्, ३२ साम्नी गायत्री, ३३-३४ साम्नी बृहती, ३५ भुरिक्साम्न्यनुष्टुप्, ३६ साम्न्युष्णिक्, ३८ प्रतिष्ठा गायत्री।वैरं॑ विकृ॒त्यमा॑ना॒ पौत्रा॑द्यं विभा॒ज्यमा॑ना

(4) (28-38) āsurī gāyatrī, 29, 37 āsuryanuṣṭup, 30 sāmnyanuṣṭup, 31 yājaṣī triṣṭup, 32 sāmnī gāyatrī, 33-34 sāmnī bṛhatī, 35 bhuriksāmnyanuṣṭup, 36 sāmnyuṣṇik, 38 pratiṣṭhā gāyatrī| vairaṃ vikṛtyamānā pautrādyaṃ vibhājyamānā

हिन्दी अर्थ

देने वाली वेदवाणी (गृहस्थियो के लिये) । बहला इन्द्रियों को वरीभूत कर के - भ्राश्रम-जीवन का उपदेश देने काली वेदवाणी (ब्रह्मवारियों भौर वानंप्रस्थियो के लिये) । तथा सांसारिक भोगों को चाहने वालों के लिये वह॒ वेदवाणी -जिसं मे कि हृषि, वरफणज्य, गोपालन श्रौर कला-कौकल आदि का वणन हो ॥ जा सकती है 1 भरतः वदां का अथं मौ नहीं ।

English

Whoever looking on the Cow as fruitless, cooks her flesh at home, Brihaspati compels his sons and children of his sons to beg. Downward she sends a mighty heat, though amid kine a Cow she roams.

अध्याय १२

श्लोक 5.29

दे॒व॒हे॒तिर्ह्रि॒यमा॑णा॒ व्यृद्धिर्हृ॒ता

devahetirhriyamāṇā vyṛddhirhṛtā

हिन्दी अर्थ

३५८ भथरवेवेद-भाष्य कां० १२। ०४ . (नांस्द) है नरनारियों को शुद्ध करने वाजे ! (नमस्ते भस्तु) के लिये है । (भ्रासाम्) इन वेदवाणियों मेँ (कतमा) कौन सी (भीमतमा) दवषभरादिकेलेपसे रष्टित होने का उपदेह देती है, जिस हारा जीवनः उत्कृष्ट बनता है । विलेपमागं भतिदगेम होने से भीमतमं है ।

English

Poison she yields for him who owns and hath not given her away. The animal is happy when it is bestowed upon the priests:

अध्याय १२

श्लोक 5.30

पा॒प्माधि॑धी॒यमा॑ना॒ पारु॑ष्यमवधी॒यमाना

pāpmādhidhīyamānā pāruṣyamavadhīyamānā

हिन्दी अर्थ

तुम्हारे लिये (हविः) हवि है, (या) जो वला कि (अददुषः गृहे) न देने वाले के घर र्यात् ्रधिकार मे रही हुई (भीमा) भयप्रदा होती है । वा= काम्या बेदवाणी, वदा कान्तौ । देवा बुश परयैवदन् न नोऽदादितिं हीडिताः । राजन्य ने (नः) हमें (न भ्रदात्) भीमा वेदवाणी नहीं दी, (इति) इस से (हीडिताः) भनादत या करुद्ध हृए (देवाः) देवो ने (वशाम्) वेदवाणी को (पर्यवदन्) मानो शिकायत की । भौर (एताभिः ऋष्मिः

English

The Gods considered her in doubt whether she were a Cow or not. Mirada spake of her and said, The veriest Cow of cows is she.

अध्याय १२

श्लोक 5.31

वि॒षं प्र॒यस्य॑न्ती त॒क्मा प्रय॑स्ता

viṣaṃ prayasyantī takmā prayastā

हिन्दी अर्थ

उस भेद से (सः) बह राजय (पराभवत्) पराभूत हृभ्रा 1 भेदनीति श्रपनाई,-- इस से भी भूचित होता है किं वशा भौर ऋचा मर्मन है, एकात्मस्ूप है । नीति चार प्रकारकी होती है, साम, दान, दण्ड भौर मेद । देवों ने भेदनीति को भ्रपना कर राजा भ्रौर प्रजा मे भेद ्र्थातु फट पैदा कर राजन्य का पराभव किया । भेद के लिये देवो ने उन ऋचाभों का प्राश्य लिया जिन मँ कि भेदनीति का वणेन है । एनसः) उस श्रपराघ के कारण (देवाः) देवों ने (तम्) उस रोजन्य को भेदनीति से यदि सफलता न मिले तो दण्डनीति को भ्रपना कर सफल होना चाहिए । इन्द्रे ण--“इ््ररच सन्नाट्, वरणदच राजा (यजु

English

How many cows, O Nārada, knowest thou, born among man- kind I ask thee who dost know, of which must none who is no Brāhman eat?

अध्याय १२

श्लोक 5.32

अ॒घं प॒च्यमा॑ना दु॒ष्वप्न्यं॑ प॒क्वा

aghaṃ pacyamānā duṣvapnyaṃ pakvā

हिन्दी अर्थ

३६० ; अवेवेद-माष्य कार १२1 चुर भे; जिस म परस्पर लडके वाले दोनों पक्षो केः नेता यह भाव रलते हँ कि राजन्य को कहते है, वे (जाल्माः). जाल फंलाने वाले या जालिम (भ्रचि- , लिये (भ्ावृश्चन्ते) सब काटे जाते है । ये) जो लोग (गोपतिम्) पृथिवीपति को (पराणीय) परे ले जौ कृर (प्रथ ) तदनन्तर (इति भ्राहुः) यह कहते है कि (मा) न (ददाः) दे,

English

Vilipti, cow, and she who drops no second calf, Brihaspati! Of these none not a Brāhmana should eat if he hope for emi- nence.

अध्याय १२

श्लोक 5.33

मू॒ल॒बर्ह॑णी पर्याक्रि॒यमा॑णा॒ क्षितिः॑ प॒र्याकृ॑ता

mūlabarhaṇī paryākriyamāṇā kṣitiḥ paryākṛtā

हिन्दी अर्थ

यदि हृतां यदयहुताममा च पर्च॑ते वश्चाम् । ऋच्छः. (मतौ); नित हो जाताहै। . मेदवर का गोपु, गोजाति । गौ सवंश्ेष्ठ पशु है, इसलिये. इसे विशेषतया भौर वेदवाणो के वणंनों भौर सांसारिक नियमों मे समन्वय है, विरो

English

Homage, O Nārada, to thee who hast quick knowledge of the cows. Which of these is the direst, whose withholding bringeth death to man? Vilipti, O Brihaspati, cow, mother of no second calf—Of these none not a Brāhman should

अध्याय १२

श्लोक 5.34

असं॑ज्ञा ग॒न्धेन॒ शुगु॑द्ध्रि॒यमा॑णाशीवि॒ष उद्धृ॑ता

asaṃjñā gandhena śuguddhriyamāṇāśīviṣa uddhṛtā

हिन्दी अर्थ

भर्थात् राजा (५, ११) प्रचार कां विरोधी है। परिणाम यह होता है.कि राजा, जिस का किं घमं है “क्षत से परित्राण करना वह गोघात तथा जाता है, सम्मवतः नदर युद्ध । क्षत्रिय मारा जाता है, उस से शव को कुछ काल तक गीष भ्रादि पक्षयो कां भोज्य करके शेष बचे को जला दिया जाता है (४७, ४०) । क्षत्रिय राजा के परचात् राजपक्ष के लोग पुनः का नेता परास्त होता भ्रौर उसका सिर काटं कर श्रौर धड़ कुचल कर जला दिया.जात्रा (६०१ ६१). ¡ फिर राजपक्ष का एक भौर नेतां युद्ध क लिये होता है । प्रन्त मे येह भी परास्तः होता भौर जला दिया भाता (६३ ) ।

English

eat if he hope for eminence. Threefold are kine, Vilipti, cow, the mother of no seeond calf:

अध्याय १२

श्लोक 5.35

अभू॑तिरुपह्रि॒यमा॑णा॒ परा॑भूति॒रुप॑हृता

abhūtirupahriyamāṇā parābhūtirupahṛtā

हिन्दी अर्थ

ददर. भ्रथर्ववेद-माष्य कां० १२।सु० ५ मात्रे हैकिगो जाति की रक्षा के लिये युद्ध भी करने पड़ तो इस = नौ मी तभ्यार हो जाना चाहिए, भौर गोषातियो को उग्र दण्ड देने चाहियं । विषय) । इस का कारण यह प्रतीत होता है कि पदपाठ में “प्रतिष्ठिता

English

These one should give to priests, and he will not offend Prajā- pati. This Brāhmans! is your sacrifice: thus should one think when he is asked, What time they beg from him the Cow fearful in the with- holder’s house.

अध्याय १२

श्लोक 5.36

श॒र्व क्रु॒द्धः पि॒श्यमा॑ना॒ शिमि॑दा पिशि॒ता

śarva kruddhaḥ piśyamānā śimidā piśitā

हिन्दी अर्थ

पदों म विसगौ का लोप सम्भव है । । अर्थं है वाणी, यथा गौः वाङ्नाम (नि्घं° १।११ ) । भतः. ब्रह्मगवी का देलो (ऋ० १०।७१।१,३) । वेदवाणी ब्रहम के अम तथा तप द्वारा सृष्ट हई है । ब्रह्म का भम है मानसिक अम भर्थात् कामना, यथा “सोऽकामयत वस्था मे उस सृष्टि के सजेन की कामना होती है । ब्रह्म के लिये यह कामना .

English

He gave her not to us, so spake the Gods, in anger, of the Cow. With these same verses they addressed Bheda: this brought him to his death.

अध्याय १२

श्लोक 5.37

अव॑र्तिर॒श्यमा॑ना॒ निरृ॑तिरशि॒ता

avartiraśyamānā nirṛtiraśitā

हिन्दी अर्थ

कां० १२। सू” ५ भथ्ववेद-माष्य. ३६३ भर्थात् वेदवाणी की सृष्टि हई ऋषियों के माघ्यम से (ऋ० १०।७१।३) । वेदवाणी को ब्रह्मगवी कहू कर यह सूचितं किया है कि वेदवाणी ब्रह्यकी वाणी-है, म्ुव्य की नहीं परमेहवरीय नियमों तथा व्यवस्था पूर्वकं रची गई भौर चल रही है। वेदवाणी में इन नियमों तथा व्यवस्थाः का वर्णन है ॥. इन्हीं नियमों तथा व्यवस्था के प्रतिपादन के लिये वेदवाणी की रचना की गई है । भरतः बे दिक वर्णेन भौर सृष्टिके नियमो मे परस्पर विरोषं नही भ्रपितुये दोनों परस्पर के यर्थाथं स्वरूपो के जानने में सहायक है ।

English

Solicited by Indra, still Bheda refused to give this Cow. In strife for victory the Gods destroyed him for that sin of his.

अध्याय १२

श्लोक 5.38

अ॒शि॒ता लो॒काच्छि॑नत्ति ब्रह्मग॒वी ब्र॑ह्म॒ज्यम॒स्माच्चा॒मुष्मा॑च्च

aśitā lokācchinatti brahmagavī brahmajyamasmāccāmuṣmācca

हिन्दी अर्थ

सत्येना्ंता भरिया प्राता यश्च॑खा- परीता ॥२॥ की समृद्धि होगी, भ्रौर उस का यच्च होशा। (स्वधया) निज धारण तथा पोषण शक्ति से (परिहिता) सब के लिये हितकारिणी, (धद्धया) शरद्धावृत्ति द्वारा (पया) पुणेतया धारण की प्रोक्त वेदवाणी का पर्येवसान है । . ३६४ भथववेद-माष्य कां १२1 सु०५

English

The men of evil counsel who advise refusal of the Cow, Miscreants, through their foolishness, are subjected to Indra’s wrath.

अध्याय १२

श्लोक 5.39

(5) (३९-४६) ३९ साम्नी पङ्क्तिः, ४० याजुष्यनुष्टुप्, ४१, ४६ भुरिक् साम्न्यनुष्टुप्, ४२ आसुरी बृहती, ४३ साम्नी बृहती, ४४ पिपीलिकमध्याऽनुष्टुप्, ४५ आर्ची बृहती।तस्या॑ आ॒हन॑नं कृ॒त्या मे॒निरा॒शस॑नं वल॒ग ऊब॑ध्यम्

(5) (39-46) 39 sāmnī paṅktiḥ, 40 yājuṣyanuṣṭup, 41, 46 bhurik sāmnyanuṣṭup, 42 āsurī bṛhatī, 43 sāmnī bṛhatī, 44 pipīlikamadhyā'nuṣṭup, 45 ārcī bṛhatī| tasyā āhananaṃ kṛtyā menirāśasanaṃ valaga ūbadhyam

हिन्दी अर्थ

भौर पोषण करनेकी निज स्वाभाविक शक्ति है, उस द्वारा ब्रह सबके हकार प्रस्ताव; उद्गीथ, प्रतिहार, तथा निधन, ये ४ रूप माने है । निन का भरथं है सामगान का पर्यवसानं भर्थात् समाप्ति । वेदवाणी का भ्रधिष्ठाता तथा रक्षक होता है। २।१।१), प्रयति वेदविचा ब्राह्मन के शरणमे आई कितु मेरी रलाकट्ः्ग वेय

English

They who seduce the owner of the Cow and say, Bestow her not. Encounter through their want of sense the missile shot by Rudra’s hand.

अध्याय १२

श्लोक 5.40

अ॒स्व॒गता॒ परि॑ह्णुता

asvagatā parihṇutā

हिन्दी अर्थ

३६६ श्रवेवेद-माष्य कां० १२। सु०१ होती है, वैदिक ज्ञान भ्रौर प्राकृतिक नियमों मे परस्पर विरोध नहीं । वेदविद्या समृद्धिकारिणी है, इस में इहलोक, परलोक तथाः ब्रह्मलोक का वचित हुभ्रा, नानाविध कष्ट भोगता है । किनारो मे प्रतिबद्ध वेगवान् जलप्रवाह के सदु है ।

English

On the duty of giving cows to Brāhmans, and the sin and danger of withholding the gift Created by toil and holy fervour, found by devotion, resting in right; Invested with truth, surrounded with honour, compassed about with glory;

अध्याय १२

श्लोक 5.41

अ॒ग्निः क्र॒व्याद् भू॒त्वा ब्र॑ह्मग॒वी ब्र॑ह्म॒ज्यं प्र॒विश्या॑त्ति

agniḥ kravyād bhūtvā brahmagavī brahmajyaṃ praviśyātti

हिन्दी अर्थ

- है, दूष, चुत, नवनीत, दधि, छाछ, पनीर श्रादि प्रदान करती, बैर्लो को जत्म दे कर कृषिक, भारोद्रहन, कायं तथा बेल गाडी द्वारा यातायात भौर १.. भावृता, टूल, बन (बज गतौ), इन के साहचयं दवारा निरिष्ट भरं सुचित क १२। सु०५ प्रथववेदं-माष्य .. ३६७ है, उस के लिये गौ विषसूया, घातक तथा नदी के कुर्लो को काट देने वाले के जिन-जिन त्यों काः वणेन हृभरा है, वे गोरक्ान्दोल्को यारा किये जाने

English

Girt round with inherent power, fortified with faith, protected, by consecration, installed at sacrifice, the world her resting- place;

अध्याय १२

श्लोक 5.42

सर्वा॒स्याङ्गा॒ पर्वा॒ मूला॑नि वृश्चति

sarvāsyāṅgā parvā mūlāni vṛścati

हिन्दी अर्थ

यर्वाण्यस्यां ऋूराणि सव पुरुषव॒धाः ॥१४॥ के क्र रकमं भ्रौर (सरवे पुरुषवधाः) सब प्रकार के. राज पुरषो के वध के क्र राणि कृन्तति लिनत्ति, इति क्र रः (उणा० २।२१), काटने . क्षत्रिय राजा .का (मृत्योः पदवी) मृत्युकी बेड़ी में (भाति) पुणंतया विनाच्च करदेती ह+

English

Brahma her guide, the Brāhman her lord and ruler; Of the Kshatriya who taketh to himself this Brāhman’s cow and oppresseth the Brāhman. The glory, the heroism, and the favouring fortune depart.

अध्याय १२

श्लोक 5.43

छि॒नत्त्य॑स्य पितृब॒न्धु परा॑ भावयति मातृब॒न्धु

chinattyasya pitṛbandhu parā bhāvayati mātṛbandhu

हिन्दी अर्थ

2६८ भ्रयववेद-बाष्य कां० १२) पु० ५ हिताकर्मा- (नि० ४।४।२५) । ब्रह्मगवो = परमेश्वर की गोजाति । भादीय- भ्रौर वेद का सूचकं है भरा यति दो भवखण्डन (दिवादि) । (सा) वह गौ प्र्थात् गो जाति (शतवधा मेनिः) सौ का वध करने बराह्मण को हानि पहु चाने वाले का (क्षितिः) विनाश स्पहै।

English

The energy and vigour, the power and might the speech and mental strength, the glory and duty;

अध्याय १२

श्लोक 5.44

वि॒वा॒हां ज्ञा॒तीन्त्सर्वा॒नपि॑ क्षापयति ब्रह्मग॒वी ब्र॑ह्म॒ज्यस्य॑ क्ष॒त्रिये॒णापु॑नर्दीयमाना

vivāhāṃ jñātīntsarvānapi kṣāpayati brahmagavī brahmajyasya kṣatriyeṇāpunardīyamānā

हिन्दी अर्थ

(तस्माद् वै) इस कारण निर्चय ते (विजानता) विज्ञानी दारा (दुराषर्षा) घर्षण करनी कठिन दवै । ब्राह्मणानाम् में बहुवचन, शरीर मौ मे एक. वचनः गो जाति कौ सूचित करते ह । बहुववन द्वारा यह दर्शाया है कि एक के परचात् दूसरा

English

Devotion and princely sway, kingship and people, brilliance and honour, and splendour and wealth; Long life and goodly form, and name and fame, inbreathing and expiration, and sight, and

अध्याय १२

श्लोक 5.45

अ॒वा॒स्तुमे॑न॒मस्व॑ग॒मप्र॑जसं करोत्यपरापर॒णो भ॑वति क्षी॒यते॑

avāstumenamasvagamaprajasaṃ karotyaparāparaṇo bhavati kṣīyate

हिन्दी अर्थ

(धावन्ती) भय के कारण दौड़ती हुई (वसः) वच्ररूपं -है । (उद्रीता) उठ्ती हुई (वदवानरः) वैर्वानर भरग्निरूप है । गत्यथ समान होने से मंय हारा-धावन्ती गौ -भर्थात् गो जाति कँ वंच कहा नार्यो का हित करने वाली है, परन्तु भय के कारणः उटी हृद गौ भरग्नि इय -है । -वैदवानरः = वैर्वानदन्=प्रग्निः ।

English

hearing; Milk and flavour, and food and nourishment, and right and truth, and action and fulfilment,

अध्याय १२

श्लोक 5.46

य ए॒वं वि॒दुषो॑ ब्राह्म॒णस्य॑ क्ष॒त्रियो॒ गामा॑द॒त्ते

ya evaṃ viduṣo brāhmaṇasya kṣatriyo gāmādatte

हिन्दी अर्थ

का १२। सु० १ भरथववेद-माष्य ५ ३६९ ' हविः श्षफ़ानुंत्खिदन्तीं पडदेवो र पेक्षंमाणा ॥१६॥ , (श्फान् उत्विदन्ती) खेद मे खुरो को उठा-उडा कर पटकती हुई (हेतिः). भरस्व या वच है । (भ्रयेक्षमाणा) भपेश्चा करती हई (महादेवः) नाम (निधं० २।२०) । उत्विदन्ती उत् +खिद् (खेदे) । महादेवः

English

and children and cattle; All these blessings of a Kshatriya depart from him when he oppresseth the Brāhman and taketh to himself the hhman’s cow.

अध्याय १२

श्लोक 5.47

(6) (४७-६१) ४७, ४९, ५१-५३, ५७-५९, ६१ प्राजापत्याऽनुष्टुप्, ४८ आर्च्यनुष्टुप्, ५० साम्नी बृहती, ५४-५५ प्राजापत्योष्णिक्, ५६ आसुरी गायत्री, ६० गायत्री।क्षि॒प्रं वै तस्या॒हन॑ने॒ गृध्राः॑ कुर्वत ऐल॒बम्

(6) (47-61) 47, 49, 51-53, 57-59, 61 prājāpatyā'nuṣṭup, 48 ārcyanuṣṭup, 50 sāmnī bṛhatī, 54-55 prājāpatyoṣṇik, 56 āsurī gāyatrī, 60 gāyatrī| kṣipraṃ vai tasyāhanane gṛdhrāḥ kurvata ailabam

हिन्दी अर्थ

हो जातेर्है,वेसेही खेद मे सहायता की भरपेक्षा करने वाली गो जाति को (ईक्षमाणा) घातक की भ्रोर दृष्टि करती हुई (क्षुरपविः) मानो छुरावज है, (वाश्यमाना) लड़ाई का सा चन्द करती हुई (भ्रमि स्फजंति) मानो प्रत्यक्षरूप मे बिजुली कड्कती है । . धातक को देखती हु, श्रौ र उससे भ्रपने प्राप को छृडाती हुई गौ को देख कर, गो रक्षक घातक के लिये क्षुरपवि भरौर विद्युत्पात सरूप हो जते है, यहु भ्रभिप्राय प्रतीत होता है! हिडकार=हि" एेसा धीमा-चन्द करना । प्रतिं नि्बंलता के कारण शब्दोच्चास्णः धीमा पड़ जाता है । धातक द्वारा चोट साई हुई गौ की नि्बलावस्थाः को उस के “हि शब्द द्वारा सूचित कियाहै, जोकि. ३७० :अथववेवेद-माष्य कां० १२। सु०-४

English

Terrible is she this Brāhman’s cow, and fearfully venomous, visibly witchcraft. In her are all horrors and all death.

अध्याय १२

श्लोक 5.48

क्षि॒प्रं वै तस्या॒दह॑नं॒ परि॑ नृत्यन्ति के॒शनी॑राघ्ना॒नाः पा॒णिनोर॑सि कुर्वा॒णाः पा॒पमै॑ल॒बम्

kṣipraṃ vai tasyādahanaṃ pari nṛtyanti keśanīrāghnānāḥ pāṇinorasi kurvāṇāḥ pāpamailabam

हिन्दी अर्थ

मरणासन्न गौ का है । एेसी भ्रवस्था' देख कर गोरक्षक भी : घातक के लिये मृत्युरूप हो जाते है । मंच्छरो भौर मक्िर्यो.से तंग हुई गौ पू छ को इषर- उधर पटकती रहती है ६. यह दोष राजवगे काहै जो क्रि गौभो के स्वच्छ अनुभव कर गोरक्षक राजवर के प्रति उग्ररूप हो कर रोष प्रकट करते है । (कणौ) .कानौ को (वरीवर्जयन्ती) बार-बार वजित सी करती "हुई (सवेज्यानिः) सवंवयोहानिरप है, भौर (मेहनती) भौर बारबार मूत्र ¦

English

In her are all dreadful, deeds, all slaughters of mankind. This, the Brāhman’s cow, being appropriated, holdeth bound in the fetter of Death the oppressor of the Brāhman, the blas- phemer of the Gods.

अध्याय १२

श्लोक 5.49

क्षि॒प्रं वै तस्य॒ वास्तु॑षु॒ वृकाः॑ कुर्वत ऐल॒बम्

kṣipraṃ vai tasya vāstuṣu vṛkāḥ kurvata ailabam

हिन्दी अर्थ

करती हुई (राजयक्ष्मः) तपेदिकसूप है । - बार-बार वजत करना भ्र्थाद् बारबार फरफराना, इस द्वारा गौ , कृण पीडा भादि को -संम्भवतः सूचित करती है । भौर हन्ती पदं द्वारा भ्नौर मूत्राय (107४ 21006) की विकृति हो जातौ है । सम्भवतः दख गौ के रोगो की चिकित्सा कर सके. गौए" यक्ष्मरोगं हारा भाकान्त. हो जाती है इसे पुं चिकित्सु जानते 1 । ।

English

A hundred-killing bolt is she: she slays the Brāhman’s injurer. Therefore the Brāhmans’ cow is held inviolable by the wise.

अध्याय १२

श्लोक 5.50

क्षि॒प्रं वै तस्य॑ पृच्छन्ति॒ यत् तदासी॑३दि॒दं नु ता३दिति॑

kṣipraṃ vai tasya pṛcchanti yat tadāsī3didaṃ nu tā3diti

हिन्दी अर्थ

करती है, (परामृष्टा) ओर छू गई (मिग्रोयोषः) साथिन गौभ्रों पर रोग. : से पृथक् रखना चाहिएः। मिथः मिथ् = ० 28860०5 जापी, 10 पा शरव्या य॒सऽपिन॒हममांन ्ररतिहैन्यमांना ॥२५॥ (सुखे, भपिनह्यमाने) मुख के बान्वे जाते हए (शरव्या) गौ शरो के समान होती है, (हन्यमाना) वध की जाती हुई (ऋतिः) कष्टरूपा है । गौ चाहे रुग्ण भी हो तक भी इसे कष्ट न पहुंचाना चादिये, न ईस का वध करना चाहिए-- यह मन्त मे प्रतिपादित किया है। वधके लिये गौ

English

Death is she when she loweth, and a fierce God when she whis- keth her tail; Utter destruction when she moveth her ears this way and that,

अध्याय १२

श्लोक 5.51

छि॒न्ध्या च्छि॑न्धि॒ प्र छि॒न्ध्यपि॑ क्षापय क्षा॒पय॑

chindhyā cchindhi pra chindhyapi kṣāpaya kṣāpaya

हिन्दी अर्थ

के पश्चात् हनन करना, इनं का निषेव किया है. । इनदो क्त्य के केरमे , (निषतन्ती) वध के परात् गिरती हई गौ (भधविषा ) हत्यारा विष रूप है, भौर (निपतिता) गिर गई (समः) अन्धकार रूप है! ३७२ 'अथवेवेद-माष्य कां० १२। सु०५ करती हुई, पीछा करती हु ई, (प्राणान्) प्राणों को (उप दासयति) विनष्ट

English

Consumption when she droppeth water; A missile when milking, pain in the head when milked; The taking away of strength when she approacheth, a hand-to- hand fighter when roughly

अध्याय १२

श्लोक 5.52

आ॒ददा॑नमाङ्गिरसि ब्रह्म॒ज्यमुप॑ दासय

ādadānamāṅgirasi brahmajyamupa dāsaya

हिन्दी अर्थ

कर देती है । कमं गति के अनुसार यह सम्भव है कि मृत गौ, से मनुष्य (विकृत्यमाना) विविषाङ्खो मे काटी जाती हई (वैरम) परस्पर मे घातक के पौत्रो तक को खाने वाली होती है। गौ यागौ्नोको काटने श्नौर उसके मासि को वाण्टने पर, घातक के कुल श्रौर रक्षकों में वैरपेदा हो जाता, श्रौर इस वैर का दुष्परिणाम धातक के पौव्रों तक को भोगना पडता है । यह् वेर कहां तक चलता है, यह् देवंेतिियमांणा च्यु द्षेता ॥२६॥ बाण्टने के पश्चात् (ह्ियमाना) ली जाती हुई (देव हेतिः) देवों

English

touched; Wounding like an arrow when she is fastened by her mouth, contention when she is beaten;

अध्याय १२

श्लोक 5.53

वै॒श्व॒दे॒वी ह्यु॑१च्यसे॑ कृ॒त्या कूल्ब॑ज॒मावृ॑ता

vaiśvadevī hyu1cyase kṛtyā kūlbajamāvṛtā

हिन्दी अर्थ

दिव्य कोटि के लोगो को इस बात का पतालगलजायतोवे भी ब्रहार् करने पर उद्यत हो जाते है, भौर गोरो के कम हो जाने पर दूध भ्रादि के अमाव तथा कृषिकमं मेँ कठिनाई के कारण राष्ट की ऋद्धि क्षीण होती जाती है (श्रधिधीयमाना) ऊवाई पर रदी जाती हुई पापख्प है, रौर तदन- न्तर उतार कर (्वधीयमाना). नीचे रखी जाती हुई (पार्ष्यम्) सुरक्षा के नियेः गोमांस. डे स्थान -पर रखना . पापवृत्ति को प्रकट करता, तथा पकाने के लिये पुनः उसे उतारना हृदय. की कठोरता को

English

Fearfully venomous when falling, darkness when she hath fallen down. Following him, the Brāhman’s cow extinguisheth the vital breath of the injurer of the Brāhman.

अध्याय १२

श्लोक 5.54

ओष॑न्ती स॒मोष॑न्ती॒ ब्रह्म॑णो॒ वज्रः॑

oṣantī samoṣantī brahmaṇo vajraḥ

हिन्दी अर्थ

भ्रद ज्वर का उत्पादक" है । . ५५ षं पच्यमाना दुःष्वप्न्य॑ पका ॥३२॥ भरनुवाद निम्न लिखित है-/" 708० अ. पाकपचिला; 2 विकल, फिणकरलः भते - भाल पथढण्ठ, ४6 त्क काठ ०णा छनः तिक्तः वणर भंदाठे शिला सम्बन्धि्यो की तरह मौए भी हमारे शेष्ठ सजा है । पूवं काल भे तीन ही रोग वे- इच्छा, भूख प्रीर मिक हास) परन्तु. पञुषात के कारण .९८ रोग पैदा हो यए। ३७४ । , भ्रथववेद-माष्य कां १२।सु० ५

English

Hostility when being cut to pieces, woe to children when the portions are distributed, 197

अध्याय १२

श्लोक 5.55

क्षु॒रप॑विर्मृ॒त्युर्भू॒त्वा वि धा॑व॒ त्वम्

kṣurapavirmṛtyurbhūtvā vi dhāva tvam

हिन्दी अर्थ

(पच्यमाना). मांसरूपं मं पकाई जाती हुई गौ (भवम्) पाप सूचक गौ के मांस को पकाना पापै, भ्रौर परिणाम मेँ दुःखदायी दहै, भ्रौर निद्रा के विक्रातक हो जाते ह (पर्या क्रियमाणं) विलोड़ी जाती हई (मूलबर्हणी) जडकाट देतो,

English

A destructive missile of Gods when she is being seized, misfortune when carried away; Misery while being additionally acquired, contumely and abuse while being put in the stall; Poison when in agitation, fever when seasoned with condi- ments;

अध्याय १२

श्लोक 5.56

आ द॑त्से जिन॒तां वर्च॑ इ॒ष्टं पू॒र्तं चा॒शिषः॑

ā datse jinatāṃ varca iṣṭaṃ pūrtaṃ cāśiṣaḥ

हिन्दी अर्थ

रौर (पर्याङ्कता) विलोड़ी गई (क्षितिः) क्षयरोग पदां करती है। , कड्ठी द्वारा विलोडना । पकते समय दाल भ्रादिं को विलोड्ा जाता है। इसी क्रिया को मांस पकाते समय निदिष्ट कियाहै। गौकेमांससे क्षय रोग हो जाने को सम्मावनाहै। खाने प्रर खाने वालको क्षयरोग हो पक्ते गोमांस की (गन्वेनं) गन्ध से गन्ध लेने वाले की (असं ) भ्रज्ञता सूचित होती है । (उदधियमाणा) पके मांसलू्प में भ्राग से उठाई जाती गौ (शुक्) परिणाम में शोक जनिका होती है । (उड़ता) श्रौर रोग द्वारा शोकोत्पादक है । गोयांस विष के समान है, अआआलीविष है, भ्रादी भर्थात् फण मे है विष जिस के = विषेला साप ।

English

Sin while she is cooking, evil dream when she is cooked; Uprooting when she is being turned round, destruction when she hath been turned round;

अध्याय १२

श्लोक 5.57

आ॒दाय॑ जी॒तं जी॒ताय॑ लो॒के॒३ऽमुष्मि॒न् प्र य॑च्छसि

ādāya jītaṃ jītāya loke3'muṣmin pra yacchasi

हिन्दी अर्थ

(उप्ठियभाणा) गोमांस ङ्प में समीप लाई जा रही गौ (श्रभूतिः) , शारीरिक विधूति का नाश केरती, भौर (उपहृता) समीप लाई गई (परा- भूतिः) पराभव करती है । गौममांस दारा शारीरिक विभूति चष्ट हौ जाती है, रौर व्यक्ति । रोगो द्वारा पराभूत हो जाता है 1

English

Discord by her smell, grief when she is being eviscerated: ser- pent with poison in its fang when drawn; Loss of power while sacrificially presented, humiliation when she hath been offered;

अध्याय १२

श्लोक 5.58

अघ्न्ये॑ पद॒वीर्भ॑व ब्राह्म॒णस्या॒भिश॑स्त्या

aghnye padavīrbhava brāhmaṇasyābhiśastyā

हिन्दी अर्थ

भ्रौर विनाश्चकारी रूप हैः (पिशिता) भ्रौर पीसी गई (चिमिदा) सत्कमों मोमांस के देवन से व्यक्ति में कोषवृत्ति तथा दिल्ल मावना पदा करते हैँ । शिमिदा=लिमि कम॑नाम (निं २१) +दाप् लवणे । निषण्टु गो्मांसरूपं में (भ्रष्यमाना) खाई जाती हुई गौ (भवतिः) दरिद्रता वंदा करती, भौर (भरिता) खाई गई (निरतिः) कष्टोत्पादन करती ह ।

English

Wrathful Sarva while being carved. Simidā when cut up: Poverty while she is being eaten. Destruction when eaten.

अध्याय १२

श्लोक 5.59

मे॒निः श॑र॒व्याऽ भवा॒घाद॒घवि॑षा भव

meniḥ śaravyā' bhavāghādaghaviṣā bhava

हिन्दी अर्थ

से जीवन म दरिद्रता होती तथा जीवन कष्टप्रद होता है । उस लोक से विच्छिन्न करदेतीहै। है कि गोजातिःका स्वामी परमेदवर है 4 परभेदवर की सम्पत्ति के विना सूचित किया है जो कि गोरकान्दोलन कां नेता है एसे नेता के जीवनं को.

English

The Brāhman’s cow when eaten cuts off the injurer of Brāhmans both from this world and from the world yonder. Her slaughter is the sin of witchcraft, her cutting-up is a thunder- bolt, her undigested grass is

अध्याय १२

श्लोक 5.60

अघ्न्ये॒ प्र शिरो॑ जहि ब्रह्म॒ज्यस्य॑ कृ॒ताग॑सो देवपी॒योर॑रा॒धसः॑

aghnye pra śiro jahi brahmajyasya kṛtāgaso devapīyorarādhasaḥ

हिन्दी अर्थ

(परिह णूता). बुराई गई गौ (भ्रस्वगता). चुराने वाले की “स्व” . उस गोजातिं का रक्षक ह । जो क्षत्रिय . (राजा) गीरक्षक के जीवनः को (भाशसनम्) काटना (मेनिः).. वरूप ब्मौर (ऊबध्यम्) पेट का मल कां० १२। पु० ५ . भवेवेद-माष्य ३७७

English

Having become Flesh-eating Agni the Brāhman’s cow entereth into and devoureth the oppressor of Brāhmans. She sunders all his members, joints, and roots.

अध्याय १२

श्लोक 5.61

त्वया॒ प्रमू॑र्णं मृदि॒तम॒ग्निर्द॑हतु दु॒श्चित॑म्

tvayā pramūrṇaṃ mṛditamagnirdahatu duścitam

हिन्दी अर्थ

भङ्गो को, (पर्वा पर्वाणि) जोड़ों को, (मूलानि) भूरलो को (वृद्वति) ब्रह्मगवी काट देती है । जीवित, भ्रौर मूत गौ, बदला नहीं ले सकती । भरतः गौ के मारने है यह भरभिभराय है । मूल का भथ है जड़ । जिन से कि क्षत्रिय-राजा पैदा बन्घुभरो का (परा भावयति) पराभव कर देती है । काटती भ्रौर परामव करती है निज रक्षकों के भान्दोलनों

English

She cuts off relationship on the father’s side and destroys mater- nal kinship. The Brāhman’s cow, not restored by a Kshatriya, ruins the marriages and all the kinsmen of

अध्याय १२

श्लोक 5.62

(7) (६२-७३) ६२-६४, ६६,६८-७० प्राजापत्याऽनुष्टुप्, ६५ गायत्री, ६७ प्राजापत्या गायत्री, ७१ आसुरी पङ्क्तिः, ७२ प्राजापत्या त्रिष्टुप् ७३ आसुर्युष्णिक्।वृ॒श्च प्र वृ॑श्च॒ सं वृ॑श्च॒ दह॒ प्र द॑ह॒ सं द॑ह

(7) (62-73) 62-64, 66,68-70 prājāpatyā'nuṣṭup, 65 gāyatrī, 67 prājāpatyā gāyatrī, 71 āsurī paṅktiḥ, 72 prājāpatyā triṣṭup 73 āsuryuṣṇik| vṛśca pra vṛśca saṃ vṛśca daha pra daha saṃ daha

हिन्दी अर्थ

निजः रक्षक दवारा नष्ट करा देती है। श्वास्तुरमेनमस्व॑गमप॑नसं करोतयपरापरणो मवति पीयते ॥४५॥ ३७८ भथववेद-भाष्य कां० १२। सू०५ दारा भी. पालन-पोषण से षित (मवति) हो जाता ह (क्षीयते) भ्रौर क्षीण

English

the Brāhman’s oppressor. She makes him houseless, homeless, childless: he is extinguished without posterity to succeed him.

अध्याय १२

श्लोक 5.63

ब्र॒ह्म॒ज्यं दे॑व्यघ्न्य॒ आ मूला॑दनु॒संद॑ह

brahmajyaṃ devyaghnya ā mūlādanusaṃdaha

हिन्दी अर्थ

जाति को सुरश्चित करने के भधिकार को (भ्राद्ते) छीन लेता है। गोरक्षा को वेदानुकूल जानः कर, गोरक्षान्दोलन करता हँ । परिणामत क्षच्रिय राजा कां हनन होता है । हत हो जाने पर उस की जो दश्चा होती है उसकी रक्ना करना भ्रौर उस के मांस को न खाने देना--यह् वेदिक धमं है । इसके लिये देखो यजु ° १३।४३ ; २३०।१७; चक् ८1१० १।१५; १०।८७।१६ (तस्य) उस क्षत्रिय राजा के (्राहनने) हनन हो जाने पर (कषिप्रं वै) निदचय से शीघ्र (गृध्या) गीष (एेलवम्) विलास (कुर्वते) करते है । पे क्षत्रिय राजाःको भार देने पर उसके शरीरकोखानेके लिये ..

English

So shall it be with the Kshatriya who takes to himself the cow of the Braman who hath this knowledge.

अध्याय १२

श्लोक 5.64

यथाया॑द् यमसाद॒नात् पा॑पलो॒कान् प॑रा॒वतः॑

yathāyād yamasādanāt pāpalokān parāvataḥ

हिन्दी अर्थ

हनम् परि) जलती चिता के चारो भ्रोर, (पाणिना) हार्थो द्वारा (उरसि भआाघ्नानाः) छातियां पीटती हुई, (केशिनीः) बिखरे केशों वाली स्तर्या धिम वै तस्यं वास्तुं काः वेत पेषम् ।॥४९॥ घरों मँ (वृकाः) भेद्ये (एेलवम्, कूवंते) विलास करने लगते है । गोरक्षा के विरोधी राजा के मारे जाने का वणेन राष्ट्र मे मुखिया होने के

English

Quickly, when he is smitten down by death, the clamorous vul- tures cry: Quickly around his funeral fire dance women with dishevelled locks, Striking the hand upon the breast and uttering their evil shriek.

अध्याय १२

श्लोक 5.65

ए॒वा त्वं दे॑व्यघ्न्ये ब्रह्म॒ज्यस्य॑ कृ॒ताग॑सो देवपी॒योर॑रा॒धसः॑

evā tvaṃ devyaghnye brahmajyasya kṛtāgaso devapīyorarādhasaḥ

हिन्दी अर्थ

राजा के मारे जने पर प्रजा स्वयमेव गोरक्षा केपक्ष मेहो दही जायगी । राजा था, क्था इंवम्, नु) यह ही (तत्) वहः है। . पूणेतया काट, (श्रि क्षापय क्षापय) तथा मार, मार डाल । साजा के मारे जनि भ्रौर जला देने "कं पदचात् यदि गोर्मांस भक्षक युद्ध के लिए फिर खड़ हो. जाय, . तो योरक्षा का .पक्षपाती-नेता निजानुया- ३८० भ्रथरववेद-भाष्य का० १२। सु०५

English

Quickly the wolves are howling in the habitation where he lived: Quickly they ask about him, What is this? What thing hath happened here?

अध्याय १२

श्लोक 5.66

वज्रे॑ण श॒तप॑र्वणा ती॒क्ष्णेन॑ क्षु॒रभृ॑ष्टिना

vajreṇa śataparvaṇā tīkṣṇena kṣurabhṛṣṭinā

हिन्दी अर्थ

भरोषधिरूप है गोजाति ! (भराददानम्) गोरक्ना का भ्रषिकार छीनने वाले, रसीः, दवीः, तथा मनुष्यजाः । यथा “भआङ्गिरसीरायर्वणीरववीमेनुष्यज भरोषधीः सन्तु नो हवे" (भयव ° ८।७।१७) । गोजाति का रसोला -दुष भ्रोधधिरूप है । गोजाति स्वरक्नकों दारा निज-षातकों का क्षय करती वैश्वदेवी शंश्यसे कृत्या कूरषैजमाता ॥५३।॥

English

Rend, rend to pieces, rend away, destroy, destroy him utterly. Destroy Angirasi! the wretch who robs and wrongs the Brah- mans, born. Of evil womb, thou witchcraft hid, for Vaisvadevi is thy name,

अध्याय १२

श्लोक 5.67

प्र स्क॒न्धान् प्र शिरो॑ जहि

pra skandhān pra śiro jahi

हिन्दी अर्थ

है गोजाति (वैदवदेवी हि) सब देवों की तु प्रतिनिधिरूप (उच्यसे) कही जाती है । (्रावृता) रोकी गर्ई तु (कूल्वजम्) नदी के कृलों से भावृत, वेग वाले जल प्रवाह के सदुश है । चार प्रकार की भ्रोषधियों मे “हैवी” भोषधियां भी है (मन्व . ४५२)» यथा जल, वायु, मृद्, सौर रदिमयां भादि । इस द्वारा गोजति को भरोषधि रूपा कह कर मनुष्योपकारिणी दर्शाया है । तथा “कूल्बजम्”” कह कर दसं को गति पर ख्कावट डालने वालों के लिये वेगवती नदी क जल प्रवाह के सदुश विना करने वाली भी कहा है । वैरवदेवी=“वीरधो रोगनाद् में उग्ररूप तथा. पुरषो को. जीवन देने वाली. है 4 गोजाति (भषन्ती) दग्ध करने वाली, तथा (समोषन्ती ).

English

Consuming, burning all things up, the thunderbolt of spell and charm. Go thou, becoming Mrityu sharp as razor’s edge pursue thy course:

अध्याय १२

श्लोक 5.68

लोमा॑न्यस्य॒ सं छि॑न्धि॒ त्वच॑मस्य॒ वि वे॑ष्टय

lomānyasya saṃ chindhi tvacamasya vi veṣṭaya

हिन्दी अर्थ

भाङ्खिरसि=भोषधि्यां ४ प्रकार की होती है । भराथवंणी; भाङ्कि- कां° १२। सु° १ श्रथववेवेद-भाष्य भूत्वा मूत्युरूप होकर (त्वम्) है गोजाति ! तु (वि घाव) विविध रौर गोजाति के विनाशक शत्रु जो कि गोरक्षके स्ना युद्धके लिये एकत्रित हए हँ (मनर ५१) उन के लिये है गोजाति ! तु क्षुरपवि तथा मृत्युरूप हो कर, विविध पावो में स्थित जौ शत्र ह उन के प्रति दौड़ । यहं निदेश गोरक्षकों के लिये है करि वे दौड-दौड़ कर शत्रो का सब भ्रोर से विनाश्च करे । -

English

Thou bearest off the tyrants’ strength, their store of merit, and their prayers. Bearing off wrong, thou givest in that world to him who hath been wronged. O Cow, become a tracker through the curse the Brāhman hath pronounced,

अध्याय १२

श्लोक 5.69

मां॒सान्य॑स्य शातय॒ स्नावा॑न्यस्य॒ सं वृ॑ह

māṃsānyasya śātaya snāvānyasya saṃ vṛha

हिन्दी अर्थ

आ दत्से जिनतां वच॑ ष्टं पूत चारिषंः ॥५६। । हि गो-जाति ! (भा दरस) तू छीन लेती है (जिनताम्) तेर जीवन को हानि पहुंचाने वालों के (वचः) तेज को, (इष्टम्) उन के यज्ञ के फलो को, (पूर्तम्) सामाजिक प्ररोपकारो के यद को, (भ्राशिषः) तथा “जिनताम्”.पद भं बहुवचन है इस से प्रतीत हेता है कि गोधातक दायं जीवं जीतायं छोके्ऽमुध्मिन् भ ुच्छसि ॥५७॥ हे गोजाति ! (जीतम्) मृ गोषातक को (आदाय) पकड़ कर

English

Become a bolt, an arrow through his sin, be terribly venomous. O Cow, break thou the head of him who wrongs the Brāhmans, criminal, niggard, blasphemer

अध्याय १२

श्लोक 5.70

अस्थी॑न्यस्य पीडय म॒ज्जान॑मस्य॒ निर्ज॑हि

asthīnyasya pīḍaya majjānamasya nirjahi

हिन्दी अर्थ

पदवीः = पदों मे गति देने वाली युद्ध.के लिए; पद (पैर) +-वी यह दानिं के लिये किं परमेदवर की वृष्टि में गोजाति हनन के योग्य न्ह" परन्तु फिर भी गोघातकगोजाति का नन करते ह । इसलिये परमेइवर की रज्ञा हैकिदहे वशे ! तु “पदवी मव अन्य रक्षको के लिये मागं र्दीशिका हे भन्ये तू (मेनिः) हिषक वचर, (शरव्या) विशीर्णं करते वाला शर समूद, तथा (भ्रघात्) घातक पाप से ( अधविषा) घातक विष (भव)

English

Consume thou, even from the root, the Brāhmans’ tyrant, god- like Cow! That he may go from Yama’s home afar into the worlds of sin. its

अध्याय १२

श्लोक 5.71

सर्वा॒स्याङ्गा॒ पर्वा॑णि॒ वि श्र॑थय

sarvāsyāṅgā parvāṇi vi śrathaya

हिन्दी अर्थ

ब्राह्मणे के जीवन को. हानि पहु चाने वाले; - (कृतागसः) पपी; (देवपीयौः) हैवे्टिसिक; (अराधंसः) भ्राराघता हीन के' (शिरः) सिर को (प्रजहि) काट. देया उसके सिर पर प्रहारकर । . -कचलेः गए. (दुष्चितम्); बुरे विचार वाले. को (भग्नः) भग्न (दहतु) जिस की चिता बुरी तरह से चिनी गर्ई्है।

English

So, Goddess Cow, do thou from him, the Brāhmans’ tyrant, criminal, niggard, blasphemer of the Gods, With hundred-knotted thunderbolt, sharpened and edged with razor-blades,

अध्याय १२

श्लोक 5.72

अ॒ग्निरे॑नं क्र॒व्यात् पृ॑थि॒व्या नु॑दता॒मुदो॑षतु वा॒युर॒न्तरि॑क्षान्मह॒तो व॑रि॒म्णः

agnirenaṃ kravyāt pṛthivyā nudatāmudoṣatu vāyurantarikṣānmahato varimṇaḥ

हिन्दी अर्थ

कां० १२।स्०५ भ्रथर्ववेद-माष्य ३८३ श्न्यो कर पुनरवेचनों, भावपूणं पुनवंचनो . तथा न्दौ के ९५८ को दष्टिगत करे से प्रतीत होता है कि मन्त्र भें गोषातको भौर गोरकको मे जनोग मे यह युद्ध है । इष वर्णन कों पते हए इस युद्ध को एतिहासिक युद्ध न समना चाहिए, श्रपितु ईस द्वारा यह भाव सूचित किया है कि. गोरक्षा के लिये युद्ध भी लड़ना एक धामिक भ्रौर सामाजिक कर्तव्यहै-। ्रद्यज्यं हैन्यच्य॒ आ मूलादनु सं द॑ह ॥६२॥ के जीवन को हानिं पहुचाने वाले को (भ्रा मूलात्) मूल से लेकर (भनु

English

Strike off the shoulders and the head. Snatch thou the hair from off his head, and from his body strip the skin:

अध्याय १२

श्लोक 5.73

सूर्य॑ एनं दि॒वः प्र णु॑दतां॒ न्योऽषतु

sūrya enaṃ divaḥ pra ṇudatāṃ nyo'ṣatu

हिन्दी अर्थ

मनौ म बार-बार अघ्न्या पद के कथन द्वारा गोरकषक्रो को. सचेत कियाजारहादहै कि गौ किंसीकैलिये भी वध्या नहीं 1 इस की रक्षा होनी ही चाहिए । गौ को देवी क्. कर दस की दिव्यता को. सूचित्र किया है क्योंकि गौ प्रजा के लिये महोपकारी प्राणी है। 1 यथा यत् थमसादनात् पापलोकान् परावत॑-६५।॥ इ ८४ । अय्वेद-भाष्य कां० १२। सु० ५ , (कृतागसः) पापी, (देवपीयोः) देवहिसक, ( भरराधंसः भाराधनाहीन व्यक्ति के-(६५); । । भतप्त छुरे की तरहं भूनने वाले (वच्रेण) वचन द्वारा । (६६), मृष्टिना =

English

Tear out his sinews, cause his flesh to fall in pieces from his frame. Crush thou his bones together, strike and beat the marrow out of him.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Atharva Veda — Chapter 12
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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