Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
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अध्याय 4 / 20

Kanda 4

काण्ड 4

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पूर्ण अध्याय पाठ151 श्लोक

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अध्याय ४

श्लोक 1.1

१-७ वेनः।बृहस्पतिः, आदित्यः।त्रिष्टुप् २, ५ पुरोऽनुष्टुप्।ब्रह्मविद्या।ब्रह्म॑ जज्ञा॒नं प्र॑थ॒मं पु॒रस्ता॒द् वि सी॑म॒तः सु॒रुचो॑ वे॒न आवः ।स बु॒ध्न्याऽउप॒माअ॑स्य वि॒ष्ठाः स॒तश्च॒ योनि॒मस॑तश्च॒ वि व॑

1-7 venaḥ| bṛhaspatiḥ, ādityaḥ| triṣṭup 2, 5 puro'nuṣṭup| brahmavidyā| brahma jajñānaṃ prathamaṃ purastād vi sīmataḥ suruco vena āvaḥ | sa budhnyā'upamāasya viṣṭhāḥ sataśca yonimasataśca vi va

हिन्दी अर्थ

मे (सीमतः) जगत् कौ सीमा मे, (सुरुचः) उत्तम-रोचमान नक्षत्र-ताराओं उपमारूप दहै, (विष्ठाः) ओर इसके विशेष स्थिति के स्थान (सतः च) को (वि वः) ब्रह्मने विवृत कर दिया, खोल दिया । उपनिषदों मे अकामयत द्वारा कहा है (उपनिषद्!) । कामनासे पूवं

English

Cosmogonical and mystico-theological doctrine Eastward at first the prayer was generated: Vena disclosed bright flashes from the summit,

अध्याय ४

श्लोक 1.2

इ॒यं पित्र्या॒ राष्ट्र्ये॒त्वग्रे॑ प्रथ॒माय॑ ज॒नुषे॑ भुवने॒ष्ठाः ।तस्मा॑ ए॒तं सु॒रुचं॑ ह्वा॒रम॑ह्यं घ॒र्मं श्री॑णन्तु प्रथ॒माय॑ धा॒स्यवे॑

iyaṃ pitryā rāṣṭryetvagre prathamāya januṣe bhuvaneṣṭhāḥ | tasmā etaṃ surucaṃ hvāramahyaṃ gharmaṃ śrīṇantu prathamāya dhāsyave

हिन्दी अर्थ

है । उस समय वहं कान्तिमान् होता है, वेनति कान्तिक्मग (निधं २।६) । अथवंवेदभाष्य काण्ड ४। अनु° १। सूक्त १ मवा बुध्नः मूलम् (उणा० ३।५; दयानन्द) । जगत् का मूलदहै प्रकृति , जिससे कि जगत् पैदा हुआ है । प्रकृति उपादानकारण रूपमे मूलः है । उपमाः प्रकाशमान रूपमे ' सुरुचः'' प्रजापति की उपमारूप ह । यथा ३१।१८) । योनि विव: =सन्तानोत्पत्ति के समय, माता की योनि विवृत हो जाती हे, अतः योनिरूप प्रकृति के सम्बन्धे भी “विव; का प्रयोग हुजाहै ।

English

Disclosed his deepest, nearest revelations, womb of the non- existent and existent. Let this Queen come in front, her Father’s daughter, found in the worlds for earliest

अध्याय ४

श्लोक 1.3

प्र यो ज॒ज्ञे वि॒द्वान॑स्य॒ बन्धु॒र्विश्वा॑ दे॒वानां॒ जनि॑मा विवक्ति ।ब्रह्म॒ ब्रह्म॑ण॒ उज्ज॑भार॒ मध्या॑न्नी॒चैरु॒च्चै स्व॒धा अ॒भि प्र त॑स्थौ

pra yo jajñe vidvānasya bandhurviśvā devānāṃ janimā vivakti | brahma brahmaṇa ujjabhāra madhyānnīcairuccai svadhā abhi pra tasthau

हिन्दी अर्थ

है । जसे ब्रह्म का वणेन वेदों मे पिताओौरमाताके रूपमे होता है, वैसे मन्त (२) मेँ प्रजापति का वर्णनभी पिताओौरमाताके रूप मे हु है । दोहा गया ताजा दूध दीप्तिमान तो होताहीदहै, वह शुक्लरूप भी होता पराके, पचन्तु, तपन्तु (सायण) । । अथवं९ ४।३०।१-८ भे मातृरूप मेँ प्रजापति का

English

generation. For him they set this radiant vault in motion. Let them prepare warm milk for him who first

अध्याय ४

श्लोक 1.4

स हि दि॒वः स पृ॑थि॒व्या ऋ॑त॒स्था म॒ही क्षेमं॒ रोद॑सी अस्कभायत्।म॒हान् म॒ही अस्क॑भाय॒द् वि जा॒तो द्यां सद्म॒ पार्थि॑वं च॒ रज॑

sa hi divaḥ sa pṛthivyā ṛtasthā mahī kṣemaṃ rodasī askabhāyat| mahān mahī askabhāyad vi jāto dyāṃ sadma pārthivaṃ ca raja

हिन्दी अर्थ

देवों के (विश्वा = विश्वानि ) सत्र, (जनिमा = जनिमानि) जन्मो, 1 का, (विववित) विवेकपूणं कथन करता है! १ १५ व १. मे (स्वधा) इसके निजस्वरूप मे धारित हई प्रकृति (सः) वह प्रजापति परमेश्वर, (हि) निस्चय न (दिवः नोक के, (सः) वह, (पृथिव्याः) पृथिवी के, (ऋतस्था) क ५ है, ओर (मही रोदसी) महती चौ: ओर महती पृथिवी को, ( मु सु ८4 प्रजापति- परमेश्वर ने (मही) महान्, (चां सद्म) युलोकरू्प आः को, (च) ओर (पार्थिवम् रजः) ¢ पाथिव रञ्जक लोक को (वि अस्क-

English

would drink. He who was born as his all-knowing kinsman declareth all the deities’ generations.

अध्याय ४

श्लोक 1.5

स बु॒ध्न्यादा॑ष्ट्र ज॒नुषो॒ऽभ्यग्रं बृह॒स्पति॑र्दे॒वता॒ तस्य॑ स॒म्राट्।अह॒र्यच्छुक्रं ज्योति॑षो॒ जनि॒ष्टाथ॑ द्यु॒मन्तो॒ वि व॑सन्तु॒ विप्रा॑

sa budhnyādāṣṭra januṣo'bhyagraṃ bṛhaspatirdevatā tasya samrāṭ| aharyacchukraṃ jyotiṣo janiṣṭātha dyumanto vi vasantu viprā

हिन्दी अर्थ

सत्यं चाभीद्धात् तपसोऽध्यजायत'' (ऋ० १०।१६०।१, । ऋत हँ ४ भूत श पृथिवी से आरम्भ करके (अग्रम्, अभि) ऊपर के लोक न 4 ति परिचरणकर्मा (निघं० ३।५) । विप्रः मेधाविनाम (निघं० ३।१५) । मन्त्रम प्रातःकाल की उपासनाका वर्णेन हआ है । ही है, अतः उसे जगत् का सम्राट् कटाह ।

English

He from the midst of prayer his prayer hath taken. On high, below, spread forth his godlike nature.

अध्याय ४

श्लोक 1.6

नू॒नं तद॑स्य का॒व्यो॑ हि॑नोति म॒हो दे॒वस्य॑ पू॒र्व्यस्य॒ धाम॑ ।ए॒ष ज॑ज्ञे ब॒हुभि॑ सा॒कमि॒त्था पूर्वे॒ अर्धे॒ विषि॑ते स॒सन्नु

nūnaṃ tadasya kāvyo hinoti maho devasya pūrvyasya dhāma | eṣa jajñe bahubhi sākamitthā pūrve ardhe viṣite sasannu

हिन्दी अर्थ

बढ़कर निदेश करता है । (एषः) यह संसार (वहभिः साकम्) बहुत लोकों के साथ (जज्ञे) पदा हृञा है, (इत्था) यह सत्य है, जोकि (विषिते) बन्धन- रहित (पूवं अधं) आक्राण के पूरवे-के-समद्ध भागमे, या पूवधिभागमें (ससन्) सोया हुआ है । नु वितकं । वेदः (२) काव्यः संसारः । वेद काव्य संसारके स्वरूप का कथन करतारहैः ओर संसार काव्य वैदिक कथनो को परिपुष्ट करता है । हिनोति हि बाहुलकात्, दयानन्द) । इत्था सत्यनाम (निधं० ३।१०) । विषिते = वि (निघं० ३।२२) । द्यलोक की स्थिति पूववत् है जबसे यह पैदा हभ,

English

For he, true to the law of Earth and Heaven, established both the mighty worlds securely. Mighty when born, he propped apart the mighty, the sky, our earthly home, and air’s mid region.

अध्याय ४

श्लोक 1.7

योऽथ॑र्वाणं पि॒तरं॑ दे॒वब॑न्धुं॒ बृह॒स्पतिं॒ नम॒साव॑ च॒ गछा॑त्।त्वं विश्वे॑षां जनि॒ता यथास॑ क॒विर्दे॒वो न दभा॑यत् स्व॒धावा॑न्

yo'tharvāṇaṃ pitaraṃ devabandhuṃ bṛhaspatiṃ namasāva ca gachāt| tvaṃ viśveṣāṃ janitā yathāsa kavirdevo na dabhāyat svadhāvān

हिन्दी अर्थ

योऽय्॑वाणे पितरं देवबन्धुं बस्पतिं नमसाव॑च गच्छत् (यः) जो उपासक, (अथर्वाणम्), अचल कूटस्थ, (पितरम्) सबके प्राप्त होता भौर, अवगत करता, अधति् जाने, ओर कटे कि “ (त्वम् ) तू (विदवेषाम्) सबका (जनिता) उत्पादक, (कविः ) वेद ओर संसारका जेसेकितुहै, वह (न दभायत्) तू किसी की हिसा नहीं करता ।

English

He from the depth hath been reborn for ever, Brihaspati the world’s sole Lord and Ruler. From light was born the Day with all its lustre: through this let sages live endowed with

अध्याय ४

श्लोक 2.1

आत्मविद्या।१-८ वेनः।आत्मा।त्रिष्टुप्, ६ पुरोऽनुष्टुप्, ७ उपरिष्टाज्यो।तिः।य आ॑त्म॒दा ब॑ल॒दा यस्य॒ विश्व॑ उ॒पास॑ते प्र॒शिषं॒ यस्य॑ दे॒वाः ।यो॒३स्येशे॑ द्वि॒पदो॒ यश्चतु॑ष्पदः॒ कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम

ātmavidyā| 1-8 venaḥ| ātmā| triṣṭup, 6 puro'nuṣṭup, 7 upariṣṭājyo| tiḥ| ya ātmadā baladā yasya viśva upāsate praśiṣaṃ yasya devāḥ | yo3syeśe dvipado yaścatuṣpadaḥ kasmai devāya haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

न दभायत्-प्रजापति-परमेश्वर किसी की हिसा नहीं करता, अपितु वह् कौण्ड ४। अनु०° १। सूक्त २ अथवंवेदभाष्य ५ सबको उन्नतिपथानुगामी करता रहता, तथा मोक्ष-सुख प्रदान करता है। (१-८) । वेनः । आत्मा देवता । व्रिष्टुम्?

English

splendour. The sage and poet verily advanceth the statute of that mighty

अध्याय ४

श्लोक 2.2

यः प्रा॑ण॒तो नि॑मिष॒तो म॑हित्वैको॒ राजा॒ जग॑तो ब॒भूव॑ ।यस्य॑ छा॒यामृतं॒ यस्य॑ मृ॒त्युः कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम

yaḥ prāṇato nimiṣato mahitvaiko rājā jagato babhūva | yasya chāyāmṛtaṃ yasya mṛtyuḥ kasmai devāya haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

:) जो (आत्मदाः) शरीरो मे आत्मा का प्रदान करता दहै जन्म ४ । र ) तथा बल प्रदान करता है, (विश्वे) सब (यस्य) जिसके (प्रशिषम्) उत्तम शासन कौ (५ करते है, (यस्य देवाः) देव जिसके अधीन है । (यः) जो (अस्य द्विपदः) इस दो-पाये मनुष्य- पक्षी जादि का (ईशे) अधीश्वर है, (यः) जो (चतुष्पदः) चौपाये गौ जादि निघं ° ३।५), परिचरणम् = सेवा । 1 (समीप) -।-आसना, (बैठना), अर्थात् ध्यान में उसके समीप वैठना 1 (कस्मै ) उपासक, रचना को देखकर देव क सत्ता को दरसलिए वह स्वयम् से प्रद्न करता कि वह देव कौन-सादहै, ओर कसा यः प्राणतो निमिषतो म॑शित्वेको राजा जग॑तो बभूवं । यस्य॑ छायामृतं यस्य॑ मृत्युः कस्मै देवाय हविषां विधेम ॥२॥

English

God primeval. He was born here with many more beside him: they slumbered when the foremost side was

अध्याय ४

श्लोक 2.3

यं क्रन्द॑सी॒ अव॑तश्चस्कभा॒ने भि॒यसा॑ने॒ रोद॑सी॒ अह्व॑येथाम्।यस्या॒सौ पन्था॒ रज॑सो वि॒मानः॒ कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम

yaṃ krandasī avataścaskabhāne bhiyasāne rodasī ahvayethām| yasyāsau panthā rajaso vimānaḥ kasmai devāya haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

यः) जो (प्राणतः) इवासोच्छवास करते हुए, (निमिषतः) करते ॥ ( 0 :) जङ्कम जगत् का (महित्वा) निज महिमा द्वारा (एकः ) एक (राजा) राजा (वभूव) हुआ है । (यस्य) जिसका (छाया) आश्य ( करम देवाय हविषा विधेम), अथं पूरवेवत्, व (१) । यस्यासौ पन्था रज॑सो विमानः कस्मै देवाय हविषां विधेम ॥३॥ ६ अथर्ववेदमष्यं काण्ड ४1 अनु १) सूक्त २

English

opened. The man who seeks the friend of Gods, Atharvan the father, and Brihaspati, with worship,

अध्याय ४

श्लोक 2.4

यस्य॒ द्यौरु॒र्वी पृ॑थि॒वी च॑ म॒ही यस्या॒द उ॒र्व॑१न्तरि॑क्षम्।यस्या॒सौ सूरो॒ वित॑तो महि॒त्वा कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम

yasya dyaururvī pṛthivī ca mahī yasyāda urva1ntarikṣam| yasyāsau sūro vitato mahitvā kasmai devāya haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

सबका धारण करनेवाली, (भियसाने) तथा भय करती हई (रोदसी) आह्वान करती है; (यस्य) जिसका (असौ पन्थाः) वह॒ मार्गै, (रजसः विमानः) रञ्जक लोकसमूह् का निर्माण करना, (कस्म देवाय हविषा साने=भी भये-।असानच् (उणा० २।८७) । भय इसलिए कि हम निराधार आकाश मेंगिरन जाएं । रोदसी == रोधसी, द्यावापृथिवी (निघं° ३।३०) । रोधः नदी का किनारा।येदोहोते हैँ जिनके मध्यमे नदी प्रवाह होता है । यौः ओर पृथिवी संसाररूपी नदी के दो किनारे है, जिनमें कि “अदमन्वती संसाररूपी तदी प्रवाहित हौ रही है (यजुः० ३५।१०) । यस्थासो सूरो वित॑तो महित्वा कस्मै देवाय हविषां विपरेम ॥५॥

English

Crying to him, Be thou all things’ creator! the wise God, self- dependent, never injures. A Charm against tigers, wolves, thieves and other noxious creatures

अध्याय ४

श्लोक 2.5

यस्य॒ विश्वे॑ हि॒मव॑न्तो महि॒त्वा स॑मु॒द्रे यस्य॑ र॒सामिदा॒हुः ।इ॒माश्च॑ प्र॒दिशो॒ यस्य॒ बा॒हू कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम

yasya viśve himavanto mahitvā samudre yasya rasāmidāhuḥ | imāśca pradiśo yasya bāhū kasmai devāya haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

पृथिवी) महती पृथिवी, (यस्य) जिसका है (अदः) वहु (उरु अन्तरिक्षम्) (विततः) विस्तीणं हमा है, (कस्म देवाय हविषा विधेम) अथं पूर्ववत्, (यस्य महित्वा) जिसको महिमा से (विश्वे) सब (हिमवन्तः) नदियों को (समृद्रे) समुद्रे प्रविष्ट (जाहुः) कहते हैँ । (च) मौर (इमाः प्रदिशः) ये विस्तृत दिशाएं (यस्य) जिसकी (बाहु) दो बाहुं ह, (कस्म देवाय हविषा विधेम) अथं पूववत् (मन्त्र १) ।

English

Three have gone hence and passed away, the man, the tiger, and the wolf. Down, verily, the rivers flow, down-goeth the celestial Tree,. down let our foemen bend and

अध्याय ४

श्लोक 2.6

आपो॒ अग्रे॒ विश्व॑माव॒न् गर्भं॒ दधा॑ना अ॒मृता॑ ऋत॒ज्ञाः ।यासु॑ दे॒वीष्वधि॑ दे॒व आ॑सी॒त् कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम

āpo agre viśvamāvan garbhaṃ dadhānā amṛtā ṛtajñāḥ | yāsu devīṣvadhi deva āsīt kasmai devāya haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

“रसा नदी भवति रसतेः शब्दकर्मणः (निरुक्त ११।३।१५) । रसाम् = रसवतीं पृथिवीम् । किसी समय समग्र पुथिवी समृद्रमे, जलमें ; ४। अनु० १। सूर्वत २ अथर्ववेद भाष्य ७ जोकि समुद्र के भीतर, जल म प्रविष्ट थी । रसातल शब्दम रसा है रसवती प॒थिवी । बाहु प्रदिशां चार है, इसलिए बाह भी चारवचाहि्एं। दो बाहुओं के चार अवयव ह । प्रत्येक कोहनी के, ऊपर ओर नीचे के, दो-दो मवयव अथवा महित्वा महित्वम्, आहुः वेदविदः ।

English

bow. On distant pathway go the wolf, on pathway most remote the thief!

अध्याय ४

श्लोक 2.7

हि॒र॒ण्य॒ग॒र्भः सम॑वर्त॒ताग्रे॑ भू॒तस्य॑ जा॒तः पति॒रेक॑ आसीत्।स दा॑धार पृथि॒वीमु॒त द्यां कस्मै दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम

hiraṇyagarbhaḥ samavartatāgre bhūtasya jātaḥ patireka āsīt| sa dādhāra pṛthivīmuta dyāṃ kasmai devāya haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

यासं देवीष्वधि देव आसीत् कस्मै देवायं हविषां विधम ॥६॥ हए, (गर्भम् दधानाः) जोकि परमेरवर के कामनारूपी गभेको धारण किये हुए ये, (अमृताः) जोकि मृत्यु से रक्षा करनेवाले ये, मौर (ऋतज्ञाः) मानो नियमव्यवस्था को जानते ये । (यासु देवीषु) जिन दिव्य जापः जल मे (अधि) अधिष्ठातुरूप (देवः) परमेश्वर (आसीत्) था, (कस्मे देवाय आपः शब्द स्त्रीलिङ्धी है, अतः इनमें गभधारण का कथन हना स दधार पृथिवीमुत यां कस्मै देवाय हविषां विधेम ॥७॥।

English

On a far road speed forth the rope with teeth, and the malicious man! We crush and rend to pieces both thine eyes, O Tiger, and thy jaws and all the twenty claws

अध्याय ४

श्लोक 2.8

आपो॑ व॒त्सं ज॒नय॑न्ती॒र्गर्भ॒मग्रे॒ समै॑रयन्।तस्यो॒त जाय॑मान॒स्योल्ब॑ आसीद्धिर॒ण्ययः॒ कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम

āpo vatsaṃ janayantīrgarbhamagre samairayan| tasyota jāyamānasyolba āsīddhiraṇyayaḥ kasmai devāya haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

(जातः) ओर अधिक प्रकट हृजा परमेश्वर (भूतस्य) भूत भौतिकं जगत् का (एकः पतिः) वह् एकं पति (आसीत्) था । (सः) उसने (प्रथिवीम्) पृथिवी को, (उत) तथा (याम्) दयौः को (दाधार) धारित तथा पोषित किया, (कस्म देवाय हविषा विधेम) अथ पूववत्, (मन्म १ ) तथा (तस्य जायमानस्य) उसके पैदा होते हुए (उल्वः) परदीप्यमान गरभ- धिरा रहता है, जिसे जरायु या जेर कहते दँ । यही भावना सूयं के सम्बन्ध परेनेत पथा एक॑; परमेणोत तस्करः । पृथा) जन्य मार्गे (वृकः एलु) भेडिया गमन करे, (उत)

English

we break. We break and rend the tiger first of creatures that are armed. with teeth;

अध्याय ४

श्लोक 3.1

शत्रुनाशनम् १-७ अथर्वा ।रुद्रः, व्याघ्रः ।अनुष्टुप्, १ पथ्यापङ्क्तिः, ३ गायत्री, ७ ककुम्मतीगर्भोपरिष्टाद् बृहती ।उदि॒तस्त्रयो॑ अक्रमन् व्या॒घ्रः पुरु॑षो॒ वृकः॑ ।हिरु॒ग्घि यन्ति॒ सिन्ध॑वो॒ हिरु॑ग् दे॒वो वन॒स्पति॒र्हिरु॑ङ्नमन्तु॒ शत्र॑वः

śatrunāśanam 1-7 atharvā | rudraḥ, vyāghraḥ | anuṣṭup, 1 pathyāpaṅktiḥ, 3 gāyatrī, 7 kakummatīgarbhopariṣṭād bṛhatī | uditastrayo akraman vyāghraḥ puruṣo vṛkaḥ | hirugghi yanti sindhavo hirug devo vanaspatirhiruṅnamantu śatravaḥ

हिन्दी अर्थ

(परेण!) अन्य मागे से (अघायुः ) हत्यारा शत्रु (अर्षतु) गमन करे । अन्यमागे = हमारे जानेके माम से भिन्न मागं से। अघायुः पलायित हो गये है, (व्याघ्रः) बाध अर्थात् बघेला, (पुरुषः) चोर, (वृकः) + ¬ य्न ०५५। 8 ् मेदिये को नष्ट ए न । देनेवाले को, (अथो ) तदनन्तर (वृकम्) भेद्य क

English

The robber then, and then the snake, the sorcerer, and then the wolf. The thief who cometh near to-day departeth bruised and crush- ed to bits.

अध्याय ४

श्लोक 3.2

परे॑णैतु प॒था वृकः॑ पर॒मेणो॒त तस्क॑रः ।परे॑ण द॒त्वती॒ रज्जुः॒ परे॑णाघा॒युर॑र्षतु

pareṇaitu pathā vṛkaḥ parameṇota taskaraḥ | pareṇa datvatī rajjuḥ pareṇāghāyurarṣatu

हिन्दी अर्थ

नि जपकाल बे मु नं ही अन्तरित होती है, बाह्यरप मे प्रकट ¦ ग यातनाओं का निधिभूत, पर-राष्ट का राजा । का माग है नागरिक अर्थात् बस्तौ का मार्ग । ध (अद्य) आज (यः स्तेनः) जो चोर (आयति) आताहै (सः) वहू (संपिष्टः) सम्यक्--पिसा हआ (अपायति) वापस जाता है। (पथाम्) (हन्तु) मार दे, शकितिविहीन कर दे ।

English

By nearest way let him be gone. Let Indra slay him with his bolt. Let the beast’s teeth be broken off, shivered and shattered be his ribs!

अध्याय ४

श्लोक 3.3

अ॒क्ष्यौऽच ते॒ मुखं॑ च ते व्याघ्र जम्भयामसि ।आत् सर्वा॑न् विंश॒तिं न॒खान्

akṣyau'ca te mukhaṃ ca te vyāghra jambhayāmasi | āt sarvān viṃśatiṃ nakhān

हिन्दी अर्थ

यदिकिसी दिन चोर, चोरी के लिए, किसी घरमे घस आये. तो धर केलोग उसे खूब मारं, कि वह पिसासदश होकर वापस जाय । चाहिए, ओर उसे आज्ञा देनी चाहिए कि वह् राजमार्गो सेन चलकर अलग दूट-फूट मागं द्वारा जया-जाया करे, ताकि प्रजाजनों को ज्ञापित हो (मृगस्य) शिकार का अन्वेषण करनेवाले जङ्गल दन्ता दात, (शीर्ष्णा अपि) सिर के अवयव भी (पृष्टयः उ) ओर ध (मूर्णाः) तोड दी जां । है पान्थ, पथिक् ! (गोधा) गोह (ते) तेरे लिए

English

Slack be thy bowstring: downward go the wild beast that pursues the hare! Open not what thou hast compressed, close not what thou hast not compressed.

अध्याय ४

श्लोक 3.4

व्या॒घ्रं द॒त्वतां॑ व॒यं प्र॑थ॒मं ज॑म्भयामसि ।आदु॑ ष्टे॒नमथो॒ अहिं॑ यातु॒धान॒मथो॒ वृक॑म्

vyāghraṃ datvatāṃ vayaṃ prathamaṃ jambhayāmasi | ādu ṣṭenamatho ahiṃ yātudhānamatho vṛkam

हिन्दी अर्थ

(शशयुः) सोया हेजा (मृगः) शिकारी जङ्गती-पश् (नीचा) हमारे नीचे (यत्) यदि (संयमः) गिरप्तार किया है, (न वियमः) तो उसे गिरपतारी से विमुक्त न करना चाहिए, (यत्) यदि (वियमः) गिरप्तार नहीं किया (न संयमः) तो उसे गिरफ्तार न करना चाहिए । (इन्द्रजाः जिस तुक्चको (मृतध्रजे मृत तेजवाले (वरुणाय) वरूण के लिए (गन्धर्वः) वेदवाणी-घारण करनेवाले क ने 1 (ओषधिम्) ओषधि को (वयम् खनामसि) हम खोदते ध । न

English

Indra’s and Soma’s child, thou art Atharvan’s tiger-crushing charm. A charm to restore virile power

अध्याय ४

श्लोक 3.5

यो अ॒द्य स्ते॒न आय॑ति॒ स संपि॑ष्टो॒ अपा॑यति ।प॒थाम॑पध्वं॒सेनै॒त्विन्द्रो॒ वज्रे॑ण हन्तु॒ तम्

yo adya stena āyati sa saṃpiṣṭo apāyati | pathāmapadhvaṃsenaitvindro vajreṇa hantu tam

हिन्दी अर्थ

करतादहै, ओर वधू द्वारा वरण किया जाता, वह् है व 4 ५ ५ उदुषा उदु सूय उदिदं मामके वच॑; । (उषाः) षा (उद् उ एजतु) उत्तम-प्रदीप्त हुई है सूयः) सूये उत्तमःप्रदीप्त हुआ है, (मामकम् वचः) मेरा कथन व है । (वाजिना शुष्मेण) वाजीकरण विधि द्वारा प्राप्त बल ॥ ५ 4 १ अथरव॑वेदभाष्य काण्ड ४। अनु० १ शुक्त ४

English

We dig thee from the earth, the Plant which strengthens and exalts the nerves,

अध्याय ४

श्लोक 3.6

मू॒र्णा मृ॒गस्य॒ दन्ता॒ अपि॑शीर्णा उ पृ॒ष्टयः॑ ।नि॒म्रुक्ते॑ गो॒धा भ॑वतु नी॒चाय॑च्छश॒युर्मृ॒गः

mūrṇā mṛgasya dantā apiśīrṇā u pṛṣṭayaḥ | nimrukte godhā bhavatu nīcāyacchaśayurmṛgaḥ

हिन्दी अर्थ

1 रा र होकर चमक उठा है । प्रजापति भी प्राप्त रा उत्तम वालाहो गयादहै। श ४ (व पति “श्रजापत्ति” बना है । तदनन्तर त न्त्र १/ हो गया है । अतः उसे ओषधि : उहीप्त है, दीप्तिमान् मुखवाला किया है । 1. (यथा स्म) जिस प्रकार कि (ते) तेरा वि रोहूत स भङ्गं (जानति) प्राणवान् होताहै (व = त

English

The Plant which the Gandharva dug for Varuna whose power was lost. Let Ushas and let Sūrya rise, let this the speech I utter rise.

अध्याय ४

श्लोक 3.7

यत् सं॒यमो॒ न वि य॑मो॒ वि य॑मो॒ यन्न सं॒यमः॑ ।इ॒न्द्र॒जाः सो॑म॒जा आ॑थर्व॒णम॑सि व्याघ्र॒जम्भ॑नम्

yat saṃyamo na vi yamo vi yamo yanna saṃyamaḥ | indrajāḥ somajā ātharvaṇamasi vyāghrajambhanam

हिन्दी अर्थ

(ततः) तदनन्तर (इयम् ओषधिः) यह ओषधि (ते ) तेरी इन्द्रिय ४: ( ५ अधिक बल-सम्पन्न (कृणोतु) करे । च (तनूवशिन्) तनू को वश में करनेवाले (इन्द्र (8 ५ करः जो वृष्ण्यं कि (भोषधीनाम्) ओषधियों के (उत् न (क है, (पुंसाम्) जौर अभिवधंक ओषधयो का

English

Let the strong male Prajāpati arise with manly energy. Sicut tui surgentis (membrum virile) tanquam inflammatum palpitat, hoc illud tui ardentius

अध्याय ४

श्लोक 4.1

वाजीकरण १-८ अथर्वा ।वनस्पतिः, १-२ सूर्यः, प्रजापतिः, ४ इन्द्रः, ५ आपः, सोमः, ६ अग्निः, सरस्वती, ब्रह्मणस्पतिः।अनुष्टप्, ४ पुरउष्णिक्, ६-७ भुरिक्।यां त्वा॑ गन्ध॒र्वो अख॑न॒द् वरु॑णाय मृ॒तभ्र॑जे ।तां त्वा॑ व॒यं ख॑नाम॒स्योष॑धिं शेप॒हर्ष॑णीम्

vājīkaraṇa 1-8 atharvā | vanaspatiḥ, 1-2 sūryaḥ, prajāpatiḥ, 4 indraḥ, 5 āpaḥ, somaḥ, 6 agniḥ, sarasvatī, brahmaṇaspatiḥ| anuṣṭap, 4 purauṣṇik, 6-7 bhurik| yāṃ tvā gandharvo akhanad varuṇāya mṛtabhraje | tāṃ tvā vayaṃ khanāmasyoṣadhiṃ śepaharṣaṇīm

हिन्दी अर्थ

मनुष्य या पुरूष में जब जीवात्मा की निजशकित प्रादृ्भं है, तव तन् आत्मा के वशमेंहो जातीहै, 7 ८ रहती, ओर न वृष्ण्यवीयं से वंचित होती है । ऋषभ मोषधिर्या विशेषरूप १६ मे ऋषभ-ओषधियां पदा करती है, उन बीजों द्वाराहे स्त्री । र प्राप्त कर, सुखपूवक पृत्र-प्रसव करनेवाली (भव) हो तथा ब ह दुग्ध का प्रदान करनेवाली हो। पुंसाम् पुस अभिवर्धने (चुरादिः)। वनस्पतियों का (रसः) रस है। (उत) तथा (सोमस्य) सोम-ओषधि का रस है, (भ्राता असि) है वृष्ण्यं ! तू शरीर का भरण-पोषण करता है ओर (आशम्) "“आ' अर्थात् गुदा के सब ओर फंले हृएु खनी मस्सो की तरह

English

haec herba faciat. Sursum (estote) herbarum vires, taurorum vigor. Tu, Indra, corporis potens, virorum

अध्याय ४

श्लोक 4.2

उदु॒षा उदु॒ सूर्य॒ उदि॒दं मा॑म॒कं वचः॑ ।उदे॑जतु प्र॒जाप॑ति॒र्वृषा॒ शुष्मे॑ण वा॒जिना॑

uduṣā udu sūrya udidaṃ māmakaṃ vacaḥ | udejatu prajāpatirvṛṣā śuṣmeṇa vājinā

हिन्दी अर्थ

अयमन अध संवितरय् हैवि सरस्वति। इसके (पसः) लिङं को (धनुः इव ) धनुष की तरह् (आ तानय) पूणेतया करभस्वशं हव रोहितमनवग्लायता सद् ॥७॥ (धन्वनि अधि) धनुष, अधिरोपित (ज्याम् इव) डोरी के सदृश (ते पसः) तेरी प्रजनन -इन्द्रिय को (अहम्) भँ (भा तनोमि) पूणंतया तान देती हुं । (अशंः) मृग (इव) जैसे (रोहितम् = रोहित् +-अम् द्वितीया विभक्ति का एकवचन प्रजाविरोहण करनेवाली मुगी कौ ओर प्रग बढाता

English

masculum robur in hoc homine depone. Ros aquarum primigenitus atque arborum, Somae etiam frater es, vatum sacrorum masculus

अध्याय ४

श्लोक 4.3

यथा॑ स्म ते वि॒रोह॑तो॒ऽभित॑प्तमि॒वान॑ति ।तत॑स्ते॒ शुष्म॑वत्तरमि॒यं कृ॑णो॒त्वोष॑धिः

yathā sma te virohato'bhitaptamivānati | tataste śuṣmavattaramiyaṃ kṛṇotvoṣadhiḥ

हिन्दी अर्थ

साथ (क्रमस्व) पत्नीकीओर पग वढ्ा। अभिप्राय यह् कि अरव आदिमे जसे निज जाति कौ अरिवनी आदि मे गर्भाधान करसकने का बल विद्यमान है, उसी प्रकार है तनूवशिन् ! शरीर प्रदान द्वारा, निज तन् को निजवश मे रखकर गभधन करने का बलदे। समग्र सूक्तमें गृहस्थ को सफल बना सकने की विधियो का कथन हुआ है । वर्णन में अश्लीलता का लेशमाच्र भी प्रतीत नहीं होता ।

English

vigor es. Hodie, Agnis! hodie Savitar! hodie dea Sarasvatis! hodie

अध्याय ४

श्लोक 4.4

उच्छुष्मौष॑धीनां॒ सार॑ ऋष॒भाणा॑म्।सं पुं॒सामि॑न्द्र॒ वृष्ण्य॑म॒स्मिन्धे॑हि तनूवशिन्

ucchuṣmauṣadhīnāṃ sāra ṛṣabhāṇām| saṃ puṃsāmindra vṛṣṇyamasmindhehi tanūvaśin

हिन्दी अर्थ

(सहस्रणुद्धः) हजार रर्मियोवाला, (वृषभः ) वर्षा करनेवाला है, (तेन) उस (सहस्येनः) 'पौषमास-सम्बन्धी' सूयं दारा (वयम्) हम १. सहस्य: = पौषमासः (उणा ० ४।१६०; दयानन्द ) । सहस्यमास अतिशीतमास होता (जनान्) गृहजनों को (नि) नितरां (आ स्वापयामसि) गृह मे सवत्र सुला देते हैँ । सहस्येन = सहस्यमासोपलक्षितेन सूर्येण ।

English

Brahmanaspatis! hujus fascinum velut arcum extende. Velut nervum in arcu ego tuum fascinum extendo. Aggredere

अध्याय ४

श्लोक 4.5

अ॒पां रसः॑ प्रथम॒जोऽथो॒ वन॒स्पती॑नाम्।उ॒त सोम॑स्य॒ भ्राता॑स्यु॒तार्शम॑सि॒ वृष्ण्य॑म्

apāṃ rasaḥ prathamajo'tho vanaspatīnām| uta somasya bhrātāsyutārśamasi vṛṣṇyam

हिन्दी अर्थ

उदित होता हुआ दृष्टिगोचर होताहै। तथा “समुद्र अन्तरिक्षनामः' (निघं० १।३), भूमिवासियों को सूयं अन्तरिक्ष से उदित होता हुआ दृष्टि गोचर होता है । सूर्यं के अस्तहो जाने पर स्वापन का कथन हमार । (वातः) वायु (भूमिम्) भूमि पर (न) नहीं (अति) उग्रता से (वाति) बह रहीरहै, (न) न (कङ्चन) कोई भी (अति पश्यति) दूर तकं (चरन्) ताकि परमेश्वर मे विचरता रहे । मन्त्र में प्रभात-काल का वणेन हुआ है, जबकि भूमि पर वायु मन्द-मन्द वहती है । भूमि पर अभी अन्धकार है, इसलिए कोईभी प्राणी अभी दूर तक देख नहीं सकता । यह् सविता का कालहै जवकिद्यौःमेतो प्रकाश होतादहै, ओर भूमि पर अभी अन्धकार होताहै। यथा “तस्य सोयी हई, (वह्यशीवरीः) पंगूडे मे सोयी हर्द (याः नारीः) जौ नारियां

English

(mulierem) semper indefessus velut cervus damam. Quae sunt equi vires, muli, capri, arietis, atque tauri, illas, cor- poris potens! in hoc homine

अध्याय ४

श्लोक 4.6

अ॒द्याग्ने॑ अ॒द्य स॑वितर॒द्य दे॑वि सरस्वति ।अ॑द्यास्य ब्र॑ह्मणस्पते॒ धनु॑रि॒वा ता॑नया॒ पसः॑

adyāgne adya savitaradya devi sarasvati | adyāsya brahmaṇaspate dhanurivā tānayā pasaḥ

हिन्दी अर्थ

गन्धवाली है, (ताः सर्वाः) उन सबको (स्वापयामसि) प्रभातवेला तकं हम सुलाये रखते हँ । पण्यगन्धयः कै लिए अपवाद है (मन्त्र ६) । , अतिशवंरे = अतिक्रान्ते शवर, अतिक्रान्ते तमसि, काले तक । शवरः = तमः "'दशपाद्युणादिवृत्तिः (८।४७) । इस काल को ““आब्युषम् ध्यानाभ्यासी रात्रिक १२ बजे से उदीयमान सूयं ओर उषाकाल तक ध्यानाभ्यास करताहै। इस कालको निरुक्त मे “अश्विनोः कालः" कहा है । यह अहोरात्र काल है जिसमे रात्री ओौर दिन कासंगम होता है । रात्रि के १२ बजेसे अहोरात्र का काल प्रारम्भ हो जातादहै। अहोरात्रदो अरिवनौ ह (निरुक्त १२।१।१) । नये दिन का प्रारम्भ रात्रीके १२ बजे से (यः) जो (आस्ते) बैठा है, (यः) जो (चरति) चलता है, (यः च) मौर जो (तिष्ठन्) खडा हभ (विपश्यति) विविध पदार्थो को देखता है (तेषाम् ) उनकी (अक्षीणि) आंखों कौ (सं दध्मः ) हम अभ्यासी निमीलित करते है, (यथा) जैसेकि (इदम् हर्म्यम् ) यह घर निमीलित होता है (तथा)

English

depone. A lover’s sleep-charm

अध्याय ४

श्लोक 4.7

आहं त॑नोमि ते॒ पसो॒ अधि॒ ज्यामि॑व॒ धन्व॑नि ।क्रम॒स्वर्श॑ इव रो॒हित॒मन॑वग्लायता॒ सदा॑

āhaṃ tanomi te paso adhi jyāmiva dhanvani | kramasvarśa iva rohitamanavaglāyatā sadā

हिन्दी अर्थ

सहवासी इन सब जनों की खों को, अभ्यास के लिए रात्रिकाल में निमी- लित कर देते है, जोकिं उनके सम्पकंमे होते । यह् अभ्यासियों के (स्वप्तु) सोई रहै (माता) माता, (स्वप्तु पिता) सोया रहे पिता, सोये रहं, (अयम्) यह् (अभितः) सब ओर (जनः) जौ जनवग है, वह् भी जो अभ्यासमार्गी नदीं हैँ उन सोये रहने देना चाहिए, परन्तु जो

English

The Bull who hath a thousand horns, who rises up from out the sea, By him the strong and mighty one we lull the folk to rest and. sleep.

अध्याय ४

श्लोक 4.8

अश्व॑स्याश्वत॒रस्या॒जस्य॒ पेत्व॑स्य च ।अथ॑ ऋष॒भस्य॒ ये वाजा॒स्तान॒स्मिन्धे॑हि तनूवशिन्

aśvasyāśvatarasyājasya petvasya ca | atha ṛṣabhasya ye vājāstānasmindhehi tanūvaśin

हिन्दी अर्थ

द्वारा कथित स्त्री इनमे से अपवादरूपाहै, जोकि अभ्यास चाहनैवाली धम- परायणा है! सायणाचार्य ने “अस्यै ' पद को अस्याः मे परि्वत्तित कर "अस्याः स्त्रियः ये ज्ञातयः” अथै किया है । सूर्यं के उदय होने तक, (आाव्युषम् ) ओर उषा कं विगत हो जाने तकं (अहम्) मै जागता रहं (अक्षितः ) णक्तिसेनक्षीण हु, (इव ) जेसेकि (अरिष्टः) साधन द्वारा सुलाकर, राति के मध्यकालसे लेकर प्रातःकाल तक घ्याना- भ्यास मे रत रहने का अभिलाषी ह । स्वापन का साधन है "हिप्नोटिज्मः, तथा 'दस्तस्पशं विधि" (अथव ० ४।१३।५-७) 1 मन्व म ' इवा" है गृहरक्षक काण्ड चतुथं का प्रथमानुवाक समाप्त ॥

English

Over the surface of the earth there breathes no wind, there looks. no eye. Lull all the women, lull the dogs to sleep, with Indra as thy friend!

अध्याय ४

श्लोक 5.1

स्वापनम्।१-७ ब्रह्म।स्वापनं, वृषभः।अनुष्टुप्,२ भुरिक्, ७ पुरस्ताज्ज्योतिस्त्रिष्टुप्।स॒हस्र॑शृङ्गो वृष॒भो यः स॑मु॒द्रादु॒दाच॑रत्।तेना॑ सह॒स्येऽना व॒यं नि जना॑न्त्स्वापयामसि

svāpanam| 1-7 brahma| svāpanaṃ, vṛṣabhaḥ| anuṣṭup,2 bhurik, 7 purastājjyotistriṣṭup| sahasraśṛṅgo vṛṣabho yaḥ samudrādudācarat| tenā sahasye'nā vayaṃ ni janāntsvāpayāmasi

हिन्दी अर्थ

स सोयं प्रथमः पपौ स च॑कारारसं विषम् ॥१॥ प्रख्यात ने (सोमम् पपौ) सोमरस पिया, (सः) उसने (विषम्) विष को (अरसम्) रस-रहित अर्थात् नीरस (चकार) कर दिया ।' प्रतीत होता है कि सोमौषधके पानद्वारा विष का विषपन दूर हो चार वेदों मे वणित ६ प्रकार के विज्ञान, ये दस शिरोभूत विज्ञान हैँ । इनमें

English

The woman sleeping in the court, lying without, or stretched on beds, The matrons with their odorous sweets—these, one and all, we lull to sleep.

अध्याय ४

श्लोक 5.2

न भूमिं॒ वातो॒ अति॑ वाति॒ नाति॑ पश्यति॒ कश्च॒न।स्त्रिय॑श्च॒ सर्वाः॑ स्वा॒पय॒ शुन॒श्चेन्द्र॑सखा॒ चर॑न्

na bhūmiṃ vāto ati vāti nāti paśyati kaścana| striyaśca sarvāḥ svāpaya śunaścendrasakhā caran

हिन्दी अर्थ

का विज्ञान । कल्प है, यथा,--' तोता कल्पेषु संमिता" (अथवं ० २०।१२८। वेदोंकेही अङ्घभूतदहैँ। श्रौतकल्पमें याज्ञिक कमं कथित होतेह, जिनकी कथन हुआ है । निघण्टु ओर निरूक्तका विषय एकहीहै। निचण्टुहै प्रथम पान किया यथा ““यस्तं न वेद किमृचा करिष्यति" (ऋ ० १।१६४।३६) । सोमपान के कारण उसने सांसारिक विषयविष को अरस कर दिया, नीरस कर दिया, सांसारिकं जीवनोपायभरूत अभ्नादि का तथा गृहस्थ सम्बन्धौ भोगकाभोग करते हए भी इसके विषेलेपन से वह वचा रहा । इसका भोग त्याग तथा निरीहपन

English

Each moving thing have I secured, have held and held the eye and breath. Each limb and member have I seized in the deep darkness of the night.

अध्याय ४

श्लोक 5.3

प्रो॒ष्ठे॒श॒यास्त॑ल्पेश॒या नारी॒र्या व॑ह्य॒शीव॑रीः ।स्त्रियो॒ याः पुण्य॑गन्धय॒स्ताः सर्वाः॑ स्वापयामसि

proṣṭheśayāstalpeśayā nārīryā vahyaśīvarīḥ | striyo yāḥ puṇyagandhayastāḥ sarvāḥ svāpayāmasi

हिन्दी अर्थ

कि “निगमा दमे भवन्ति", अर्थात् ये हैँ केवल “वेदिक पद", इनका संग्रह ४।७।१) मेँ 'वाः' है निषण्टुपद, ओौर "“वारयाते” है उसका निवंचन अर्थात् निरुकिति, नै रुक्त । “वाः” की निरुक्ति है, “वारयाते'”, निवारण करना । हितम्'' (अथवं० ३।१३।३) मे वा" पहै निघण्टु ओर, अवीवरत' है (द्यावापृथिवी) चुलोक ओर पृथिवीलोक (वरिम्णा ) विस्तारमें (यावती) जितने परिमाणवाले हैः (सप्तसिन्धवः) सात स्यन्दनशौल नदियां,

English

The man who sits, the man who walks, whoever stands and clearly sees Of these we closely shut the eyes, even as we closely shut this house.

अध्याय ४

श्लोक 5.4

एज॑देजदजग्रभं॒ चक्षुः॑ प्रा॒णम॑जग्रभम्।अङ्गा॑न्यजग्रभं॒ सर्वा॑ रात्री॑णामतिशर्व॒रे

ejadejadajagrabhaṃ cakṣuḥ prāṇamajagrabham| aṅgānyajagrabhaṃ sarvā rātrīṇāmatiśarvare

हिन्दी अर्थ

(इतः) इन स्थानों से (विषस्य दुषणीम् ) विष को दूषित कर देनेवाली (ताम्) उस (वाचम्) वेदवाणी को ( निरवादिषम्) निर्चित रूपमे मैने कहं दिया है। कहता है कि पृथिवी के जलभूयिष्ठ प्रदेश के किसी भी निवासीको,या य॒लोकस्थ किसी लोकलोकान्तर के निवासी को यदि सप ने काट लिया है, तौ विषके प्रतीकार के लिए, वेदों मे वणित प्रयोगौ ओौर विधियो का प्रवचन मैने तुमे कह दिया है । सुक्तका देवता यतः तक्षक सपं टे, अतः सूक्त मे मुख्यरूप मेँ सपेविषों का कथन टोक ही प्रतीत होता है । सातसमुद्रोका २० अथरववेवेदभाष्य काण्ड ४। अनु°० २। सूक्त ६ इसके लिए विष (पितुः) अन्नरूप (अभवः) हो गया ।

English

Sleep mother, let the father sleep, sleep dog, and master of the home. Let all her kinsmen sleep, sleep all the people who are round about.

अध्याय ४

श्लोक 5.5

य आस्ते॒ यश्चर॑ति॒ यश्च॒ तिष्ठ॑न्वि॒पश्य॑ति ।तेषां॒ सं द॑ध्मो॒ अक्षी॑णि॒ यथे॒दं ह॒र्म्यं तथा॑

ya āste yaścarati yaśca tiṣṭhanvipaśyati | teṣāṃ saṃ dadhmo akṣīṇi yathedaṃ harmyaṃ tathā

हिन्दी अर्थ

गरुड पक्षी पर विष का परीक्षण किया गया है । उसे विष खिलाया गया, परन्तु विषके कारणन तो वह् मदोन्मत्त हुभा, न विमूढ हुमा, अपितु विष उसके लिए, अन्नसद्श बल का प्रदाता हौ गया । वर्तमान मे भी भौषधों होता है । होम्योपेथी में कई प्रकार के सपविषों तथा अन्य विषों का प्रयोग, उचित शवित मेँ किया जाता है । पितुः, अन्ननाम (निषं० २।७) । अरूरुपः = धनुष-डोरी हारा वक्र हुए (धन्वनः अधि) धनूुषसे (ते) वैरे शरीर मे कै प्रलेप से, (उत) तथा (पणेधेः) पुंखधारी बाण-दण्ड से (विषम् ) विषको

English

With soporific charm, O Sleep, lull thou to slumber all the folk. Let the rest sleep till break of day, I will remain awake till dawn, like Indra free from scath

अध्याय ४

श्लोक 5.6

स्वप्तु॑ मा॒ता स्वप्तु॑ पि॒ता स्वप्तु॒ श्वा स्वप्तु॑ वि॒श्पतिः॑ ।स्वप॑न्त्वस्यै ज्ञा॒तयः॒ स्वप्त्व॒यम॒भितो॒ जनः॑

svaptu mātā svaptu pitā svaptu śvā svaptu viśpatiḥ | svapantvasyai jñātayaḥ svaptvayamabhito janaḥ

हिन्दी अर्थ

पाप चे भसन (विषम् ) विष को (निर् अवोचम्, अहम्) निकाल देना मैने की॑ण्ड ॐ । अनू० २। सूक्त ६ अथर्वेवेदभाष्यं २१ (इषौ) है बाण ! (ते) तेरा (शल्यः) वाण मे लगा लोहमय मूखाग्र (अरसारसम्) नीरस से भी अधिक नीरस हौ जाय सायण।

English

and harm. A charm to make a poisoned arrow harmless

अध्याय ४

श्लोक 5.7

स्वप्न॑ स्वप्नाभि॒कर॑णेन॒ सर्वं॒ नि स्वापया॒ जन॑म्।ओ॒त्सू॒र्यम॒न्यान्त्स्वा॒पया॑व्यु॒षं जा॑गृताद॒हमिन्द्र॑ इ॒वारि॑ष्टो॒ अक्षि॑तः

svapna svapnābhikaraṇena sarvaṃ ni svāpayā janam| otsūryamanyāntsvāpayāvyuṣaṃ jāgṛtādahamindra ivāriṣṭo akṣitaḥ

हिन्दी अर्थ

अथवा “जरस है नीरस शल्य !, “अरसम्” तेरा विष नीरस हौ (ये) जिन्होने (जपीषन्) इसे पीसा है, (ये) जिन्होने (अदिहन्) सम्पूक्त बाण को फका है, चलायाहै, (ये) जिन्होने (अवासृजन्) विष का सर्जन किया है, (ते सर्वे) वे सव (वध्रयः कृताः) शक्तिरहित कर दिये रहै, (विषभिरिः) विषप्वैत (वधिः) विषौत्पादन में निःशक्त (कृतः) कर दिया विषगिरिः =विष का समूह; अथवा गिरि को विषेले सर्पौ से रहित कर दिया है, उन सबको मार दियाहै।

English

The Brāhman first was brought to life ten-headed and with faces ten. First drinker of the Soma, he made poison ineffectual.

अध्याय ४

श्लोक 6.1

विषघ्नम्।१-८ गरत्मान्।तक्षकः, १ ब्राह्मणः, २ द्यावापृथिवी, सप्तसिन्धवः, ३ सुपर्णः, ४-८ विषम्।अनुष्टुप्।ब्रा॒ह्म॒णो ज॑ज्ञे प्रथ॒मो दश॑शीर्षो॒ दशा॑स्यः ।स सोमं॑ प्रथ॒मः प॑पौ॒ स चकारार॒सं वि॒षम्

viṣaghnam| 1-8 garatmān| takṣakaḥ, 1 brāhmaṇaḥ, 2 dyāvāpṛthivī, saptasindhavaḥ, 3 suparṇaḥ, 4-8 viṣam| anuṣṭup| brāhmaṇo jajñe prathamo daśaśīrṣo daśāsyaḥ | sa somaṃ prathamaḥ papau sa cakārārasaṃ viṣam

हिन्दी अर्थ

शक्त कर दिये है, (ओषधे) है विषेली ओषधि ! (त्वाम्) तू (वध्रिः असि) निःशक्त हो गई है । (सः) वह (परवेतः) वड़ा पवेत तथा (गिरिः) छोटा पर्वत (वधिः) विषोत्पादन में (वधिः ) निःशक्त कर दिया है, (यतः) जिससे अभिप्राय यह कि राजनियम द्वारा खनिज विषो का खोदना, तथा विषली जषधियों का विनाश कर दिया है, तथा पर्वत ओर गिरि के विषले सर्पौकाभी विनाश करदियादहै। इसप्रकार खोदनेवाले तथा पवंत ओर (वरणावत्याम् अधि) जलवाली नदी मे (इदम् वाः) यह् जल (वारयातं) निवारित करे (विषम्) विष को । (तत्र) उस जल मेँ ( अमृतस्य) न मरने का तत्वे (आसिक्तम्) सीचा हृजा है, (तेन) उस हारा (ते विषम्) तेरे विष को (वारये) मँ निवारित करता हँ जोकि सव रोगों को शान्त करती है । इस प्रकार जलो मे विष-निवारण की

English

Far as the heavens and earth are spread in compass, far as the Seven Rivers are extended,

अध्याय ४

श्लोक 6.2

याव॑ती॒ द्यावा॑पृथि॒वी व॑रि॒म्णा यावत् स॒प्त सिन्ध॑वो वितष्ठि॒रे।वाचं॑ वि॒षस्य॒ दूष॑णीं॒ तामि॒तो निर॑वादिषम्

yāvatī dyāvāpṛthivī varimṇā yāvat sapta sindhavo vitaṣṭhire| vācaṃ viṣasya dūṣaṇīṃ tāmito niravādiṣam

हिन्दी अर्थ

अथेदम॑धराच्यं करम्भेण षि कल्पते ॥२॥ करम्भः द्वारा (वि कल्पते?) सामथ्यं से विहीन हुआ है । हमा है । करम्भ = प०० पाहत फो0 णप (आष्ट) । मन्यं संयुतं करम्भ (जक्षिवान्) जिसने खाया है (क्षुधा) भूख से; (सः ) वह (न रूरुपः) नहीं विमोहित हुभा, मूच्छित हृजा विष के प्रभावसे ( दुष्टनो) है तन् को दूषित

English

So far my spell, the antidote of poison, have I spoken hence, The strong-winged Bird Garutmān first of all, O Poison fed on thee: Thou didst not gripe or make him drunk: aye, thou becamest food for him.

अध्याय ४

श्लोक 6.3

सु॒प॒र्णस्त्वा॑ ग॒रुत्मा॒न्विष॑ प्रथ॒ममा॑वयत्।नामी॑मदो॒ नारू॑रुप उ॒तास्मा॑ अभवः पि॒तुः

suparṇastvā garutmānviṣa prathamamāvayat| nāmīmado nārūrupa utāsmā abhavaḥ pituḥ

हिन्दी अर्थ

विष है तो तन् को दूषित करनेवाला, परन्तु क्षुधा के कारण यदि विष, प्रभूतमात्रा मे भी, खा लिया है, तौ उक्त विधि दारा तय्यार किया (अष्टा० १।४।७६), तिरोहित--निवारित करनेवाला करम्भ । पीवा == तेरे मद को, मस्ती को (शरम्, इव) हिसाकारी बाण के सदृश (विपातया- मसि) हुम विगत कर देते है, दूर फक देते है, मौर (येषन्तम् ) हिसाकारी स्थापित कर देते हैँ शीतावस्था का होने के लिए ।

English

Whoever with five fingers hath discharged thee from the crooked bow, I from the shaft have charmed away the poison of the fastening band.

अध्याय ४

श्लोक 6.4

यस्त॒ आस्य॒त् पञ्चा॑ङ्गुरिर्व॒क्राच्चि॒दधि॒ धन्व॑नः ।अ॒प॒स्क॒म्भस्य॑ श॒ल्यान्निर॑वोचम॒हं वि॒षम्

yasta āsyat pañcāṅgurirvakrāccidadhi dhanvanaḥ | apaskambhasya śalyānniravocamahaṃ viṣam

हिन्दी अर्थ

हाथ को सुलसा देता है । चरुः =परिपक्व तण्डुल (श्रौतपदा्थं-निवंचन) । (परि ग्रामम्") प्रति ग्रामके सबभर पणेतया (4 गये गृहसमूह को (इव) जैसे (वचसा) राजाज्ञा द्वारा (स्थापयामसि हुम = करते है, स्थिर करते ह, (इव) इसी प्रकार (अभ्रिखाते) नियत स्थान में (तिष्ठ) स्थित हो जा, (न रूरपः) अनजाने खानेवाले

English

The poison have I charmed away from shaft, cement, and feather- ed end; Yea, from the barb, the neck, the horn, the poison have I charmed away. Feeble, O Arrow, is thy shaft, thy poison, too, hath lost its strength.

अध्याय ४

श्लोक 6.5

श॒ल्याद्वि॒षं निर॑वोचं प्राञ्ज॑नादु॒त प॒र्ण॒धेः ।अ॒पा॒ष्ठाच्छृङ्गा॒त्कुल्म॑ला॒न्निर॑वोचमहं वि॒ष॑म्

śalyādviṣaṃ niravocaṃ prāñjanāduta parṇadheḥ | apāṣṭhācchṛṅgātkulmalānniravocamahaṃ viṣam

हिन्दी अर्थ

शरीरमें न फैल । परिपक्व करम्भ के सेवनसेतु खानेवाले के उदर मेही विलीन हो जा । जल तथा करम्भये दोनों, इस ओषध के विघातक है, इसके प्रभाव को नष्टकरदेते ह ।) खरीदी दासी मालिक को नुकसान नहीं पटूंचाती, अपितु उसकी सेविका होती है, अतः तूने मूच्छित नहीं किया । पवस्व. पा (रक्षणे) वस्त॑ः (अनाप्ताः) जिनसे वढकर कोई आप्त नहीं, एसे (ये) जिन (प्रथमाः ) प्रथमकोटि के पुरुषों ने (यानि) जिन (कर्माणि) कर्मो को (चक्रिरे) किया है, (तत् एतत् ) उस क्मकलाप को (वः) तुम्हारे (पुरः) सामने (दधे) ओँ रखता ह, ताकि बुरे कर्मं (अत्र) इस जीवन मे (नः वीरान्) हमारे पुत्रों यावीरोंकी (मा दभन्) हिसानकरं। अभिप्राय यह कि तुम एसे कमं

English

Made of a worthless tree, thy bow, O feeble one, is impotent.

अध्याय ४

श्लोक 6.6

अ॒र॒सस्त॑ इषो श॒ल्योऽथो॑ ते अ॒र॒सं वि॒षम्।उ॒तार॒सस्य॑ वृ॒क्षस्य॒ धनु॑ष्टे अरसार॒सम्

arasasta iṣo śalyo'tho te arasaṃ viṣam| utārasasya vṛkṣasya dhanuṣṭe arasārasam

हिन्दी अर्थ

पेय-जल को (आ दधाति) सर्वत्र स्थापित करताहै। (सः) वहु राजा (मृत्युः) मृत्यु भौ अधीनस्थ हुई (चरति) विचरती है, (सः राजा) वह राजा १. दशभिः = सम्भवतः दुशालो द्वारा । पवस्त भौर अजिन के सहयोग के कारण "दश" भी बहुमूल्य वस्तु प्रतीत होती है । दकं दुशले। . (उत) तथा (अजिनैः) मृगछालों द्वारा (पयेक्रीणन्) उन्होने खरीदा है,

English

The men who brayed it, smeared it on, they who discharged it, sent it forth, All these are made emasculate, emasculate the poison-hill. Thy diggers are emasculate, emasculate, O, Plant art thou.

अध्याय ४

श्लोक 6.7

ये अपी॑ष॒न् ये अदि॑ह॒न् य आस्य॒न् ये अ॒वासृ॑जन्।सर्वे॒ ते वध्र॑यः कृ॒ता वध्रि॑र्विषगि॒रिः कृतः

ye apīṣan ye adihan ya āsyan ye avāsṛjan| sarve te vadhrayaḥ kṛtā vadhrirviṣagiriḥ kṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

म स्थापित करना अभिप्रेत है) मृत्युः राजाके राज्यम मानो राजा की अभिप्रेत है राज्याधिपति बनने के लिए । है राजन् ! (अभि) राजसिहासन कीओर (प्रेहि) गमन कर, (मा) न (अप वेनः) राजकान्ति अर्थात् शोभा से अपगत हो, विहीन हो, करी संख्या का वर्धन करनेवाले ! तथा मित्रराष्टरके राजां का वधेन करनेवाले है राजन् ! (आ तिष्ठ) राजसिहासन पर् आ वठ। (देवाः)

English

The rugged mountain that produced this poison is emasculate. A charm to make a poisonous plant innocuous

अध्याय ४

श्लोक 6.8

वध्र॑यस्ते खनि॒तारो॒ वध्रि॒स्त्वम॑स्योषधे ।वध्रिः॒ स पर्व॑तो गि॒रिर्यतो॑ जा॒तमि॒दं वि॒षम्

vadhrayaste khanitāro vadhristvamasyoṣadhe | vadhriḥ sa parvato giriryato jātamidaṃ viṣam

हिन्दी अर्थ

जासन-व्यवस्था-सम्बन्धी कथन करते रहं । सपत्न = एकपति के अधीन रहनेवाले, राज्यान्तगंत शत्रु; तथा पर- को पहनता हुआ राजा , (स्वरोचिः) निज स्वाभाविक दीप्तिवाला हुआ (चरति) राज्यम विचरताहै। (वृष्णः ) सुखवर्षा करनेवाले, (असुरस्य) रूपः) अर्थात् वह “जोकि विर्व को रूप देता है, ओर (अमृतानि) अमृत- राजाको सूचितकियादहैकि तु परमेव रीय सहासन पर स्थित हु ५ अतः प्रजा पर सदा सुख की वषा करते रहना, जीर रजञावान् हुजा, राज्य को समग्र रूपोंवाला करना, तथा अमृत होने के साधनां पर संदा जस्या करना राजा परमेद्वरीय सिंहासन पर स्थित हुआ हं । यथा-- ,

English

So may this water guard us on the bank of Varanāvati. Therein hath Amrit been infused: with that I ward thy poison off. Weak is the poison of the East, weak is the poison of the North,

अध्याय ४

श्लोक 7.1

विषनाषनम् १-७ गरुत्मान्।वनस्पतिः।अनुष्टुप्, ४ स्वरीट्।वारि॒दं वा॑रयातै वर॒णाव॑त्या॒मधि॑ ।तत्रा॒मृत॒स्यासि॑क्त॒ तेना॑ ते वारये वि॒षम्

viṣanāṣanam 1-7 garutmān| vanaspatiḥ| anuṣṭup, 4 svarīṭ| vāridaṃ vārayātai varaṇāvatyāmadhi | tatrāmṛtasyāsikta tenā te vāraye viṣam

हिन्दी अर्थ

२९६ अथववेदमाध्यं काण्ड ४। अनुं° २। सूरवैतंय (अथवं० २।४।६) । अर्थात् उस परमेश्वर ने तेरा आह्वान किया है, साथ परमेर्वर तेरा सहायकहै, तू परमेश्वर के सदृश राज्य को सामथ्येवाला कर । कल्पयात् = कल्पयतेलंटि आडागमः। (दिव्याः आपः) दिग्यजल अभिषेक के लिए तुञ्चे चाहं ।

English

So too this poison of the South counts as a cake of curds and meal. When he hath made of thee a cake, broad, steaming, swelling up with fat,

अध्याय ४

श्लोक 7.2

अ॒र॒सं प्रा॒च्यंऽवि॒षम॑र॒सं यदु॑दी॒च्यऽम्।अथे॒दम॑धरा॒च्यं॑ कर॒म्भेण॒ वि क॑ल्पते

arasaṃ prācyaṃ'viṣamarasaṃ yadudīcya'm| athedamadharācyaṃ karambheṇa vi kalpate

हिन्दी अर्थ

पयस्वतीः पयः है सार । यथा “'पयस्वत् मामकं वचः” (अथर्व षिञ्चामि) म अभिषिक्त करता ह, तेरा राज्याभिषेक करता हं । यथासो मित्रवधनस्तथां ला सविता करत् ॥६॥ १. अथवा यह अभिप्रायदहै किराज्यका राजा तो परमेश्वरहै, जोकि राजसिहासनें पर बटा रै, उसने तुभ ेजेण्ट बनाकर राजासन पर अपने साय विठाया है, अतः परमेरवरीय इच्छानुसार राज्य का शासन करना ।

English

And even in hunger eaten thee, then gripe him not, thou hideous one! Intoxicater! like a shaft we make thy spirit fly away, Like a pot boiling on the fire, we with our word remove thee hence.

अध्याय ४

श्लोक 7.3

क॒र॒म्भं कृ॒त्वा ति॒र्यंऽपीबस्पा॒कमु॑दार॒थिम्।क्षु॒धा किल॑ त्वा दुष्टनो जक्षि॒वान्त्स न रू॑रुपः

karambhaṃ kṛtvā tiryaṃ'pībaspākamudārathim| kṣudhā kila tvā duṣṭano jakṣivāntsa na rūrupaḥ

हिन्दी अर्थ

सविता) सर्वो्पादक परमेश्वर (त्वा) तु्ने (करत् नहीं रहता । अन्ताराष्टरियि.अ तर । ध तब ओर आलिङ्गन करते हुए (इमाः) ये आपः न (सहम्) सिह्-तुच्य पराक्रमी राजा को (महते सौभगाय) महान् ९. तथा महाशोभा के लिए (हिन्वन्ति) प्रीणित या प्रेरित न । व प्रजाज अन्तः) जलों के भीतर (तस्थिवास वाते प्रजाजन, (अप्सु अन्तः) जलं के ्

English

We set around thee with the spell as ‘twere a gathered arma- ment. Stay quiet like a rooted tree. Dug up with mattocks, gripe not thou.

अध्याय ४

श्लोक 7.4

वि ते॒ मदं॑ मदावति श॒रमि॑व पातयामसि ।प्र त्वा॑ च॒रुमि॑व॒ येष॑न्तं॒ वच॑सा स्थापयामसि

vi te madaṃ madāvati śaramiva pātayāmasi | pra tvā carumiva yeṣantaṃ vacasā sthāpayāmasi

हिन्दी अर्थ

आञ्जन 1 (जीवम्) जीवित मनुष्यकं २८ अंथर्वेवेदमाष्यं कौण्डे ४। अनु ० २। सूक्तं € जीवनके लिएतु (कम्) सुखदायक (परिधिः) परिधि दहै, चारों मर स्थित घेरारूपरहै, प्राकारदहै। विषयों को भोर जाने से रोक्ता है । अञ्जन रहै, सुरमा । आंख मे लगाया

English

For coverings men have bartered thee, for skins of deer and woven cloths. Thou art a thing of sale, O Plant. Dug up with mattocks, gripe not thou! None have attained to those of old, those who wrought holy acts for you.

अध्याय ४

श्लोक 7.5

परि॒ ग्राम॑मि॒वाचि॑तं॒ वच॑सा स्थापयामसि ।तिष्ठा॑ वृ॒क्ष इ॑व॒ स्थाम्न्यभ्रि॑खाते॒ न रू॑रुपः

pari grāmamivācitaṃ vacasā sthāpayāmasi | tiṣṭhā vṛkṣa iva sthāmnyabhrikhāte na rūrupaḥ

हिन्दी अर्थ

परिपाणं पुरुषाणां परिपाणं गवामसि । (पुरुषाणाम्) पुरुषों का (परिपाणम्) परिरक्ष, परिपालकः, (गवाम्) गौओं का (परिपाणम्) परिरक्षक, परिपालक (असि)त्ूहै। पालन के लिए (तस्थिषे) तू स्थित हुआ है। जौर ब्रह्म दोनों का वणेन है । दोनों ही परिरक्षकर् परिपालक हैँ । सुरमा

English

Let them not harm our heroes here. Therefore I set before you this. A benediction at the consecration of a King

अध्याय ४

श्लोक 7.6

प॒वस्तै॑स्त्वा॒ पर्य॑क्रीणन् दू॒र्शेभि॑र॒जिनै॑रु॒त।प्र॒क्रीर॑सि॒ त्वमो॑ष॒धेऽभ्रि॑खाते॒ न रू॑रुपः

pavastaistvā paryakrīṇan dūrśebhirajinairuta| prakrīrasi tvamoṣadhe'bhrikhāte na rūrupaḥ

हिन्दी अर्थ

विधान हुमा है। मन्त्र ३ में आञ्जन को “जीवभोजनम्' कहा है । जीव- तो पुरुषो, गौओं, अश्वो आदि प्राणियों के परिरक्षण के लिषए ही जगत् में रहा टै जोकि प्राणधारीहै गौर नजौ प्राणधारी नहीं--जडहै। (उतत) तथा (परिपाणम्) परिरक्षक, परिपालक (असि) तू है, (यातु- जम्भनम्) यातनाओं का विनाशक (आञ्जन) हि आञ्जन ! (उत) तथा

English

The Being lays the sap of life in beings: he hath become the sovran Lord of creatures. Death comes to this man’s royal consecration: let him as King own and allow this kingdom. Come forward, turn not back in scorn, strong guardian, slayer of the foes.

अध्याय ४

श्लोक 7.7

अना॑प्ता॒ ये वः॑ प्रथ॒मा यानि॒ कर्मा॑णि चक्रि॒रे॑।वी॒रान्नो॒ अत्र॒ मा द॑भ॒न् तद् व॑ ए॒तत्पु॒रो द॑धे

anāptā ye vaḥ prathamā yāni karmāṇi cakrire| vīrānno atra mā dabhan tad va etatpuro dadhe

हिन्दी अर्थ

जानता है, (अथो) तथा (जीवभोजनम्) जीवित प्राणियों का तू भोजनैः (अथो) तथा (हरितभेषजम्) शरीर के हरेपन रोग की, तथा विषयों हारा हरे गये, विषयोन्मूख हुए आत्मा कौ ओषध ह । अर्थात अभिन्यविति करनेवाला ब्रह्म। यातवः=यातनाः (सायण) । भसम का प्रयोग अभिप्रेत है। शरीर का हुरापन पित्तके विकरेतहोजानेसे होताहै। इसके निवारण के लिए भो अञ्जनभस्मका प्रयोग करना का प्रयोग हुभा है, ओर अमृतस्य द्वारा मोक्ष का कथन किया ह । अमुत

English

Approach, O gladdener of thy friends. The Gods have blessed and strengthened thee. All waited on him as he came to meet them. He self-resplendent moves endued with glory.

अध्याय ४

श्लोक 8.1

राज्याभिषेकः।१-७ अथर्वाङ्गिराः।चन्द्रमाः, आपः, राज्याभिषेकः; १ राजा, २ देवाः, ३ विश्वरूपः, ४-५ आपः।अनुष्टुप्; १, ७ भुरिक् त्रिष्टुप्, ३ त्रिष्टुप्, ५ विराट् प्रस्तारपङ्क्तिः।भू॒तो भू॒तेषु॒ पय॒ आ द॑धाति॒ स भू॒ताना॒मधि॑पतिर्बभूव ।तस्य॑ मृ॒त्युश्च॑रति राज॒सूयं॒ स राजा॑ रा॒ज्यमनु॑ मन्यतामि॒दम्

rājyābhiṣekaḥ| 1-7 atharvāṅgirāḥ| candramāḥ, āpaḥ, rājyābhiṣekaḥ; 1 rājā, 2 devāḥ, 3 viśvarūpaḥ, 4-5 āpaḥ| anuṣṭup; 1, 7 bhurik triṣṭup, 3 triṣṭup, 5 virāṭ prastārapaṅktiḥ| bhūto bhūteṣu paya ā dadhāti sa bhūtānāmadhipatirbabhūva | tasya mṛtyuścarati rājasūyaṃ sa rājā rājyamanu manyatāmidam

हिन्दी अर्थ

जोड मे (प्र सपंसि) तू फलजातादहै, तो (ततः) उस पुरुषके शरीरसे कि (मध्यमशीः) मध्यलोक म शयन करनेवाली वायु (उग्रः) रोगौन्मूलन मे उग्ररूप हई यक्ष्म को उन्मूलित कर देती ह । मे तथा रोम-रोम मे अभिव्यक्तहो जातादहै, तब वह निज कृपा से उपासक वह् शुद्ध होती है, अतः यक्ष्म को निवारित कर देती है।

English

That is the royal hero’s lofty nature: he, manifold, hath gained immortal powers. Stride forth to heaven’s broad regions, thou, a tiger on a tiger’s skin. Let all the people long for thee. Let heavenly floods be rich in milk.

अध्याय ४

श्लोक 8.2

अ॒भि प्रेहि॒ माप॑ वेन उ॒ग्रश्चे॒त्ता स॑पत्न॒हा।आ ति॑ष्ठ मित्रवर्धन॒ तुभ्यं॑ दे॒वा अधि॑ ब्रुवन्

abhi prehi māpa vena ugraścettā sapatnahā| ā tiṣṭha mitravardhana tubhyaṃ devā adhi bruvan

हिन्दी अर्थ

३० अथवैवेदभाष्य काण्ड ४। अनु ° २) सूक्त € फे यक्ष्म आदि रोगोंको भी शान्त कर देता है । "व्याधि" जादि उपासनामें कृपा से हट जाते है, (योग० समाधिपाद, सूत्र २७.३०) 1, (यः) जो उपासक (त्वा) तुञ्ने (विभक्ति) निज जीवन में धारित तथा सम्पोषित करता है, (एनम्) इसको (न शपथः) न शपथ, (न कृत्या) न हिसा

English

Heaven’s waters joyous in their milk, the waters of middle air, and those that earth containeth I with the gathered power and might of all these waters sprinkle thee,

अध्याय ४

श्लोक 8.3

आ॒तिष्ठ॑न्तं॒ परि॒ विश्वे॑ अभूषं॒छ्रियं॒ वसा॑नश्चरति॒ स्वरो॑चिः ।म॒हत् तद् वृष्णो॒ असु॑रस्य॒ नामा वि॒श्वरू॑पो अ॒मृता॑नि तस्थौ

ātiṣṭhantaṃ pari viśve abhūṣaṃchriyaṃ vasānaścarati svarociḥ | mahat tad vṛṣṇo asurasya nāmā viśvarūpo amṛtāni tasthau

हिन्दी अर्थ

अश्नुते) नहीं व्याप्त करते । । को “पुरुषविशेष ईव रः”' कहा है, (योग° समाधिपादः, सूत्र २४) । यजुवद शपथः =-यह परकृत शाप नहीं है । णपथ स्वयं ली जातीहै, भौर शाप अन्य =॥ है, (निरुक्त ७।१।३), यथा “अथापि णपयाभिशापौ'' । कृत्या कृती छेदने (तुदादिः), दूसरे की हिसा कौ भावना) ब्रह्मोपास्तक यह समन्ता हैकिजो दुःख-कष्ट मिलते वे जपने कर्मके अनुसार न्यायपूर्वक ओर व्यवित के सुधार के लिए, उसे सचेत कराने के लिए ही मिलते है, अतः वह दुःख-कष्ट मिलने पर भी शोक नहीं करता । यथा "तत्र को मोहः कः शोकः

English

The heavenly waters rich in milk have sprinkled thee with power and might. To be the gladdener of thy friends. May Savitar so fashion thee. These, compassing the tiger, rouse the lion to great joy and bliss.

अध्याय ४

श्लोक 8.4

व्या॒घ्रो अधि॒ वैया॑घ्रे॒ वि क्र॑मस्व॒ दिशो॑ म॒हीः ।विश॑स्त्वा॒ सर्वा॑ वाञ्छ॒न्त्वापो॑ दिव्याः पय॑स्वतीः

vyāghro adhi vaiyāghre vi kramasva diśo mahīḥ | viśastvā sarvā vāñchantvāpo divyāḥ payasvatīḥ

हिन्दी अर्थ

मे, जो अञ्जनभस्म का सेवन करता है उसका मानसिक परिवतेन हौ जाने से, वह मानसिक रोगों से मुक्त हो जाता है। मानसिक रोग रहै, शपथ लेना, हिस भावना, तथा अतिशौक आदि तथा मानसिक गति में विघ्नं ह, उसे वरुण-राजा जानता है, तीसरा हुभा । इससे प्रतीत होता है कि यह् पुरुषः (इदम्) इसे कि तू, हमारी रक्षा करता है “नः पाहि ' (मन्त्र) इदम् = यह पद सवेनामपद है। सर्वनामपदं पूरव परामर्श होते

English

As strong floods purify the standing ocean, so men adorn the leopard in the waters A charm addressed to a precious ointment for safety and wealth

अध्याय ४

श्लोक 8.5

या आपो॑ दि॒व्याः पय॑सा॒ मद॑न्त्य॒न्तरि॑क्ष उ॒त वा॑ पृथि॒व्याम्।तासां॑ त्वा॒ सर्वा॑साम॒पाम॒भि॑ षि॑ञ्चामि॒ वर्च॑सा

yā āpo divyāḥ payasā madantyantarikṣa uta vā pṛthivyām| tāsāṃ tvā sarvāsāmapāmabhi ṣiñcāmi varcasā

हिन्दी अर्थ

भर दूध के लिए गौ प्रदान करता है, जिसका दुग्ध उपासक के लिए अन्न- रूप होता है। साथ ही उपासक बरह्मपूरष से उसके 'आत्मस्वरूप' की प्राप्ति की याचना भी करता है। तीन (दासाः) दासवत् वशवर्ती ह सायण, या उपक्षयनीय है, (तक्मा) २३२ अथवेवेदभाष्य काण्ड ४। अनु° २। सूक्त € (त्रिककुद् नाम) तीन ककदोवाला पर्वन (तै) है ब्रहा-पूरुष ! तेरा (पिता)

English

Approach! thou art the mountain’s eye, the living thing that saveth us; A gift bestowed by all the Gods, yea, the defence that guardeth life. Thou art the safeguard of the men, thou art the safeguard of the kine,

अध्याय ४

श्लोक 8.6

अ॒भि त्वा॒ वर्च॑सासिच॒न्नापो॑ दि॒व्याः पय॑स्वतीः ।यथासो॑ मित्र॒वर्ध॑न॒स्तथा॑ त्वा सवि॒ता क॑रत्

abhi tvā varcasāsicannāpo divyāḥ payasvatīḥ | yathāso mitravardhanastathā tvā savitā karat

हिन्दी अर्थ

त्रिककुद्" -येदो पद विचारणीय दह । पवेत पद अनेकाथेक है । निघण्टु १।१० में पवेत, मेववाची है, परन्तु इस आजञ्जन-प्रकरण में पवेत का अथं ततीयः पादः द्वारा । इन तीन पादोंको “अकारः, उकारः, मकारः'' कहा है (माण्डूक्य उप० खण्ड ८) । सुदेवो असि वरुण यस्थ ते सप्तसिन्धवः । अनु क्षरन्ति काक्दं सुरम्यं सुषिरामिव ।। हे वरुण ! (सुदेवः) उत्तमदेव (असि) तुह, (यस्यतै) जिसतेरे

English

Thou standest ready to protect the horses that are fleet of foot. Thou, also, Salve! art a defence that rends and crushes sorcerers.

अध्याय ४

श्लोक 8.7

ए॒ना व्या॒घ्रं प॑रिषस्वजा॒नाः सिं॒हं हि॑न्वन्ति मह॒ते सौभ॑गाय ।स॒मु॒द्रं न सु॒भुव॑स्तस्थि॒वांसं॑ मर्मृ॒ज्यन्ते॑ द्वी॒पिन॑म॒प्स्व॑१न्तः

enā vyāghraṃ pariṣasvajānāḥ siṃhaṃ hinvanti mahate saubhagāya | samudraṃ na subhuvastasthivāṃsaṃ marmṛjyante dvīpinamapsva1ntaḥ

हिन्दी अर्थ

कोकुवा है जिह्वा जोकि इस तालु मे धारित होती है । काकुदम् ==“ कोकुवा + धा" । इस निष्पत्ति मे वणंविकार, व्ण॑नाश आदि नाना परिवत्तंन करने होते है, जोकि विलष्ट कल्पना है । काकुदम् में उच्च प्रदेश उभरा हृ होता दहै जिसेकिं ककुद् कहते हैँ । तालु भी अभिप्रेत है, कण्ठ ओर दो ओष्ठ, एक नीचे का ओष्ठ ओर दूसरा ऊपरका ्अ,उ,म्"द्राराहोताहै।ये दही “त्रिककृत्'' ह

English

Thou knowest, too, of Amrit, thou art the delight of all who live, a jaundice-curing balm art 38 thou.

अध्याय ४

श्लोक 9.1

आञ्जनम्।१-१० भृगुः।त्रैकाकुदञ्जनम्।अनुष्टुप्, २ ककुम्मती, ३ पथ्यापङ्क्तिः।एहि॑ जी॒वं त्राय॑माणं॒ पर्व॑तस्या॒स्यक्ष्य॑म्।विश्वे॑भिर्दे॒वैर्द॒त्तं प॑रि॒धिर्जीव॑नाय॒ कम्

āñjanam| 1-10 bhṛguḥ| traikākudañjanam| anuṣṭup, 2 kakummatī, 3 pathyāpaṅktiḥ| ehi jīvaṃ trāyamāṇaṃ parvatasyāsyakṣyam| viśvebhirdevairdattaṃ paridhirjīvanāya kam

हिन्दी अर्थ

ते पिता =ये “त्रिककुत्” है ब्रह्म-पूरुष ! तेरे पिता हैँ । इन तीनों के कहा है ¦ अथवं (४।३६।६) मेँ अग्नि मे विचरनेवाले अग्नि नामक परमेश्वर को ऋषीणां पूत्रः" कहा है, ओर इस द्वारा ऋषियों को पिता कहा है, ब्रह्म, (तरैककुंदम्) तीन ककुदो से आविर्भूत होता है, ओर (हिमवतः परि धानान्) सव यातनाओं के निधिभूतों को तथा (स्वाः च) सव (यातु-

English

Whomso thou creepest over, Salve! member by member, joint by joint, From him, like some strong arbiter of strife, thou banishest decline.

अध्याय ४

श्लोक 9.2

प॒रि॒पाणं॒ पुरु॑षाणां परि॒पाणं॒ गवा॑मसि ।अश्वा॑ना॒मर्व॑तां परि॒पाणा॑य तस्थिषे

paripāṇaṃ puruṣāṇāṃ paripāṇaṃ gavāmasi | aśvānāmarvatāṃ paripāṇāya tasthiṣe

हिन्दी अर्थ

यम उपरमे (भ्वादिः), सांसारिक भोगों से उपरतिः, विश्चाम, उनभोगौका (पातु) रक्षा करे (अंहसः, हनन से । ओर इनमे जल की सत्ता मानसून वायुसे होती है, जिसका निदेश वातात् हिरण्यजाः =- जैसे जलीय प्रदेशों से कपदिकाषं श्वेत तथा पीतवणं

English

From hostile and malignant eye,—from these, O Salve, protect us well. I, knowing this, O Salve, will speak the very truth and not a lie:

अध्याय ४

श्लोक 9.3

उ॒तासि॑ परि॒पाणं॑ यातु॒जम्भ॑नमाञ्जन ।उ॒तामृत॑स्य॒ त्वं वे॒त्थाथो॑ असि जीव॒भोज॑न॒मथो॑ हरितभेष॒जम्

utāsi paripāṇaṃ yātujambhanamāñjana | utāmṛtasya tvaṃ vetthātho asi jīvabhojanamatho haritabheṣajam

हिन्दी अर्थ

शंख को हिरण्यजाः" कहा है । कृशनः करण तनूकरणे (दिवादिः), पीतवर्ण (उणादि १।१०२, दयानन्द); श्भुं रोगों को शान्त करता है, अतः शद्खु- पद श्खुभस्म का निर्देश करता है। कायंमें कारण का उपचार हुआ दहै। अजीर्णं आदिमे विशेष उपयोगी है। यह पित्ताधिक्यको कम करती है (यः) जो (रोचनानाम्) चमकते पदार्थो मे (अग्रतः) मुखिया है,

English

May I obtain both horse and ox, may I obtain thy life, O man. Three are the slaves that serve the Salve, Fever, Consumption, and the Snake. Thy father is the loftiest of mountains, named the Triple- peaked.

अध्याय ४

श्लोक 9.4

यस्या॑ञ्जन प्र॒सर्प॒स्यङ्ग॑मङ्गं॒ परु॑ष्परुः ।ततो॒ यक्ष्मं॒ वि बा॑धस उ॒ग्रो मध्यम॒शीरि॑व

yasyāñjana prasarpasyaṅgamaṅgaṃ paruṣparuḥ | tato yakṣmaṃ vi bādhasa ugro madhyamaśīriva

हिन्दी अर्थ

हनन करके (अत्रिणः) रक्त, मांसादि को खा जानैवाले रोग कोटाणुञों का (वि षहा महे) हम विशेष पराभव करते हें। णु के नाद द्वारा राक्षसो ओौर अत्रियों का हनन तथा पराभव हट पैदा करनेवाली पीडाओं को विषहामहे, मन्त्र २ हम पराभूत करते है, (शद्धः) श्व (नः) हमारे लिए (विषश्व-भेषजः) सब रोगों का भौषध है । (कृशनः२) हिरण्य सदृश पीतवर्ण शङ्ख (अंहसः) हनन से (नः) हमारी यह “विरवभेषज” नहीं हो सकता । श ह्भभस्म को विदव-भेषज कहा जा सकता है । शह्भ-भस्म नाना रोगोँका शासक है, (देखो मन्त्र १ की

English

Sprung from the Snowy Mountain’s side, this Ointment of the Three-peaked hill.

अध्याय ४

श्लोक 9.5

नैनं॒ प्राप्नो॑ति श॒पथो॒ न कृ॒त्या नाभि॒शोच॑नम्।नैनं॒ विष्क॑न्धमश्नुते॒ यस्त्वा॒ बिभ॑र्त्याञ्जन

nainaṃ prāpnoti śapatho na kṛtyā nābhiśocanam| nainaṃ viṣkandhamaśnute yastvā bibhartyāñjana

हिन्दी अर्थ

(दिवि) द्युलोक के जलो मेँ (जातः) प्रकट हुजा, (समृद्रनः) समुद्र से पैदा हआ, (सिन्धृतः परि आभृतः) स्यन्दनशील नदियों से आहृत होता है! (श्वः) शह्भः (हिरण्यजाः) हिरण्य से पैदा हज (सः) वहं (आयुष ३६ अधरववंवेदमाष्य काण्ड ४। अनु° २। सूक्त १० प्रतरणः) आयु का बद़ानेवाला (मणिः) बहुमूल्य पाषाण के सदृश बहुमूल्य है । हिरण्यजाः =सुवणंभस्म-मिधित श्कभस्म । समुदराज्जाता मणिवृत्राज्जातो दिवाकरः

English

Crushes and rends all sorcerers and every witch and sorceress. If thou art from the Three-peaked hill or hast thy name from Yamunā,

अध्याय ४

श्लोक 9.6

अ॒स॒न्म॒न्त्रा॑द् दु॒ष्वप्न्याद् दुष्कृ॒ताच्छम॑लादु॒त।दु॒र्हार्द॒श्चक्षु॑षो घो॒रात् तस्मा॑न्नः पाह्याञ्जन

asanmantrād duṣvapnyād duṣkṛtācchamalāduta| durhārdaścakṣuṣo ghorāt tasmānnaḥ pāhyāñjana

हिन्दी अर्थ

(समुद्रात्) समुद्र से (जातः) पेदा हुमा, (मणिः) बहुमूल्य पाषाण के मेघ से (जातः) पैदा हुआ, (दिवाकरः) दिन के करनेवाले सथं के सदश वृत्र है मेघ, जोकि अन्तरिक्ष काञावरण करताहै। मेधघके जल से शद्ध पदा होता है) यद्यपि श्भुः समूद्र सेपेदा होताहैतोभी इसे जेसे शङ्खं मेघीय जल से पैदा होता है, इसी प्रकार मेघ द्वारा आवृत सूर्य भी मेघावरण कै हट जाने पर मानौ पैदा होता है । उस समय पीतवर्णी सूर्य

English

These names are both auspicious: by these two protect thou us, O Salve!

अध्याय ४

श्लोक 9.7

इ॒दं वि॒द्वाना॑ञ्जन स॒त्यं व॑क्ष्यामि॒ नानृ॑तम्।स॒नेय॒मश्वं॒ गाम॒हमा॒त्मानं॒ तव॒ पूरुष

idaṃ vidvānāñjana satyaṃ vakṣyāmi nānṛtam| saneyamaśvaṃ gāmahamātmānaṃ tava pūruṣa

हिन्दी अर्थ

विकारो मणिः" का ग्रहणकियादहै। यहाँ विकार से सम्भवतः शङद्कुविकत कोई ओषधविशेष अभिप्रेत हो । दिरंण्यानामेकों ऽसि सोमात् त्वमथि जङ्गिषे असिज तु भी एक चमकीला पदार्थहै, (त्वम्) तु (सोमात् अधि) जलसे तु (दशतः) दशंनीय (असि) होता है, (इषुधौ) इषुओं को धारण करनेवाले निषङ्खमे, तुणीरमें (त्वम्) तु (रोचनः) चमकता है। (नः) हमारी (आयूंषि) आयुञं को (प्र तारिषत्) वह् बढ़ाये ।

English

A charm accompanying investiture with an amulet of shell Child of the wind firmament, sprung from the lightning and the light, May this the gold-born Shell that bears the pearl preserve us from distress.

अध्याय ४

श्लोक 9.8

त्रयो॑ दा॒सा आञ्ज॑नस्य त॒क्मा ब॒लास॒ आदहिः॑ ।वर्षि॑ष्ठः॒ पर्व॑तानां त्रिक॒कुन्नाम॑ ते पि॒ता

trayo dāsā āñjanasya takmā balāsa ādahiḥ | varṣiṣṭhaḥ parvatānāṃ trikakunnāma te pitā

हिन्दी अर्थ

का उपग्रह है, पृथिवी को परिक्रमा करता ओौर प्रथिवी से कटकर अलग हआ है । परृथिवीसे शङ्कु पदा होता । सम्भवतः चन्द्रमा भी किसी समय त्र की स्थिति तथा उसकी चाल-ढाल को सूचित कर सकनेके लिएहे। तो रथ-योद्धा के लिए है, जौर निषद्घ में स्थिति पदाति-योद्धा के लिए कही विचरती है । (तत्) उसे (तै) तेरी (आयुषे) स्वस्थ आयु के लिए, (वच॑से) तेज के लिए, (वलाय) शारीरिक बल के लिए, (दी्चुत्वाय) दीर्घायु के लिए, (शतशारदाय) सौ शरद् ऋतुभां सम्बन्धी सौ वर्षो तक के जीवनके

English

Shell that wast born from out the sea, set at the head of things that shine! With thee we slay the Rākshasas and overcome voracious fiends.

अध्याय ४

श्लोक 9.9

यदाञ्ज॑नं त्रैककु॒दं जा॒तं हि॒मव॑त॒स्परि॑ ।या॒तूंश्च॒ सर्वा॑ञ्ज॒म्भय॒त् सर्वा॑श्च यातुधा॒न्यः

yadāñjanaṃ traikakudaṃ jātaṃ himavataspari | yātūṃśca sarvāñjambhayat sarvāśca yātudhānyaḥ

हिन्दी अर्थ

मे विचरता है । अस्थिमय-शङ्भ आगु-वृद्धि मादिका कारण नहीं हो सकता, अभिप्रायके अनुकल भीदहै। वध्नामि= इस पद मे "हस्ते बध्नामि का कथन नहीं हुभा । इसका यहं भी अभिप्राय सम्भवरहै कि “सेवित जख अस्म" को तेरे शरीर में, अनुपान कौ सहायता से, मँ दुद्बद्ध कर देता हूं जिससे कि वह् तैरी सव प्रकारसे रोगों से रक्षा करे । (अनड्वान्) संसार-रूप शकट का वहन करनेवाले परमेश्वरः ने (दाधार) धारित तथा पोषित किया है (प्रथिवीम्, उत, याम्) पृथिवी को तथा दुलोक को, (अनड्वान् ) अनड्वान् ने (दाधार) धारित तथा पोषित अनड्वान् ने धारित तथा पोषित किया है (प्रदिशः) विस्तृत दिशाओं को,

English

We stay disease and indigence, and chase Sadānvās with the Shell. May the all-healing Shell that bears the pearl preserve us from distress.

अध्याय ४

श्लोक 9.10

यदि॒ वासि॑ त्रैककु॒दं यदि॑ यामु॒नमु॒च्यसे॑ ।उ॒भे ते॑ भ॒द्रे॑ नाम्नी॒ ताभ्यां॒ नः पाह्याञ्जन

yadi vāsi traikakudaṃ yadi yāmunamucyase | ubhe te bhadre nāmnī tābhyāṃ naḥ pāhyāñjana

हिन्दी अर्थ

प्रदेश अधिक सहायक होता है, अथवा हिमवान् ह प्रसिद्ध हिमालय पव॑त । यातुधान हैँ यातनाओं की निधिभूत राजसिक तथा तामसिक इन्र्या, तथा यातुधानीः है यातनाओंकी निधिभ्रूत राजसिक तथा तामसिक चित्त- यदि वासि त्रैककुदं यदि यामुनमुच्यसे । (यदि वा) चाहेतू (त्रैकुदम् असि) तीन ककुद-स्थलों से आविर्भत हुआ है, (यदि वा) अथवा (यापनम्) उपरामं विधिसे प्रकट हुमा (उच्यसे) कहा जाता है, (ते) तेरे (उभे नाम्नी) दोनों ४ (भद्रे) सुखदायक ओौरं कल्याण करनेवाले ह, (ताभ्याम्) उन दोनों नामों हारा (नः) हमारी (पाहि) ३४ अथवेवेदभाष्य काण्ड ४1 अनु० २। सूक्त १०

English

No imprecation reaches him, no magic, no tormenting fiend, O Salve, Vishkandha seizes not the man who carries thee about. From lying speech, from evil dream, from wicked act and sinfulness,

अध्याय ४

श्लोक 10.1

शङ्खमणिः।१-७ अथर्वा।शङ्खमणिः, कृशनः।अनुष्टुप्, ६ पथ्यापङ्क्तिः, ७ पञ्चपदा परानुष्टुप्शक्वरी।वाता॑ज्जा॒तो अ॒न्तरि॑क्षाद् वि॒द्युतो॒ ज्योति॑ष॒स्परि ।स नो॑ हिरण्य॒जाः श॒ङ्खः कृश॑नः पा॒त्वंह॑सः

śaṅkhamaṇiḥ| 1-7 atharvā| śaṅkhamaṇiḥ, kṛśanaḥ| anuṣṭup, 6 pathyāpaṅktiḥ, 7 pañcapadā parānuṣṭupśakvarī| vātājjāto antarikṣād vidyuto jyotiṣaspari | sa no hiraṇyajāḥ śaṅkhaḥ kṛśanaḥ pātvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

अनडवान् = अनो वहतीति (दशपाद्युणादिवृत्ति, ९।१०७), इस अनुसंवहन्ति । अयातमस्य ददृशे न यातं परं नेदीयौऽवरं दवीयः'' देखे, अथवेवेदभाष्य (१०।८।८); मन्त्र मे परमेश्वर को संसार-शकट का वहन -चौषधयदच'' (सायण) । वस्तुतः षडुर्वीः' पद प्रदिशः का विशेषण है । उर्वीः भौर उध्वं दिशां । विडवम्, भुवनम् = जात्येकवचन, भुवन १४ होते हँ ।

English

Born in the heaven, sprung from the sea, brought to us hither from the flood. This gold-born Shell shall be to us an amulet to lengthen life.

अध्याय ४

श्लोक 10.2

यो अ॑ग्र॒तो रो॑च॒नानां॑ समु॒द्रादधि॑ जज्ञि॒षे।श॒ङ्खेन॑ ह॒त्वा रक्षां॑स्य॒त्त्रिणो॒ वि ष॑हामहे

yo agrato rocanānāṃ samudrādadhi jajñiṣe| śaṅkhena hatvā rakṣāṃsyattriṇo vi ṣahāmahe

हिन्दी अर्थ

वह् (पशुभ्यः) पशुओं कौ रक्षा के लिए (वि चष्टे) विशेषतया देख रहा का (विमिमीते) निर्माण करता है । (भूतम्, भविष्यद्, भृवना = भुवनानि) भूत, भविष्यद् तथा वर्तमान तीनों भवनों को दोहता हुमा परमेश्वर आधिहैविक तथा आध्यात्मिक मागं, जीवन के । भूतम् आदि दुहानः परमेरवर तीनों कालों के जगत् से, प्रजा के लिए, दुग्ध आदि पदार्थोका दोहन कर रहा है तथा वह सूर्यादि देवों के कर्मो को भी स्वयमेव सम्पादित

English

From ocean sprang the Amulet, from Vritra sprang the Lord of Day: May this protect us round about from shaft of God and Asura.

अध्याय ४

श्लोक 10.3

श॒ङ्खेनामी॑वा॒मम॑तिं श॒ङ्खेनो॒त सदान्वाः॑ ।श॒ङ्खो नो॑ वि॒श्वभे॑षजः॒ कृश॑नः पा॒त्वंह॑सः

śaṅkhenāmīvāmamatiṃ śaṅkhenota sadānvāḥ | śaṅkho no viśvabheṣajaḥ kṛśanaḥ pātvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

विभक्ता गावो अश्वाः पुरुषा अजावयः” (अथवें० ११।२।९) । चमकता हुआ वह (शोशुचानः) अत्यन्त प्रदीप्त हुआ (चरति) हूदयों में विचरता है । (यः) जो (अनड्हः विजानन्) संसार-शकट के वहन करने- भोगों का भोग न करे, (सः) वह (सप्रजाः) उत्तम-प्रजनवाला (न सेत्) संसार में पुन: सरण नहीं करता, जन्म नहीं नेता । (सुकृतस्य लोके) सुकमं के लोक मे (अनड्वान् ) संसार-शकट का वहन करनेवाला परमेश्वर (दहै) भोग्यो का दोहन करता है, प्रदान करता ह,

English

Peerless ‘mid golden ornaments art thou: from Soma wast thou born. Thou gleamest on the quiver, thou art beautiful upon the car: may it prolong our days of life!

अध्याय ४

श्लोक 10.4

दि॒वि जा॒तः स॑मुद्र॒जः सि॑न्धु॒तस्पर्याभृ॑तः ।स नो॑ हिरण्य॒जाः श॒ङ्ख आ॑युष्प्र॒तर॑णो म॒णिः

divi jātaḥ samudrajaḥ sindhutasparyābhṛtaḥ | sa no hiraṇyajāḥ śaṅkha āyuṣprataraṇo maṇiḥ

हिन्दी अर्थ

इस अनड्वान् को (आप्याययति) बढाता है, इसके गुण-कर्मो का कथन ४० अथर्वंवेदभाष्य काण्ड ४ । अनु° ३ । सूक्त ११ इस अनड्वान् का (दोहः) दोहरूप' है । न इसके ज्ञान करा दानी अधीदवर है, (न प्रतिग्रहीता) ओरन दान ग्रहण करनेवाला अधीश्वर है । (यः) जो परमेइवर (विश्व जित्) विश्व का जेता

English

Bone of the Good became the pearl’s shell-mother endowed with soul it moveth in the waters. I bind this on thee for life, strength, and vigour, for long life lasting through a hundred

अध्याय ४

श्लोक 10.5

स॒मु॒द्राज्जा॒तो म॒णिर्वृ॒त्राज्जा॒तो दि॑वाक॒रः ।सो अ॒स्मान्त्स॒र्वतः॑ पातु हे॒त्या दे॑वासु॒रेभ्यः॑

samudrājjāto maṇirvṛtrājjāto divākaraḥ | so asmāntsarvataḥ pātu hetyā devāsurebhyaḥ

हिन्दी अर्थ

उस दीप्यमान का (नः) हमारे प्रति (ब्रूत) कथन करो, (यतमः) जीव, येन॑ देवाः स्व रारुरुदुषित्वा शरीरममृतस्य नाभिम् । (येन ) जिस अनडवान्, अर्थात् संसार-णशकट का वहन करनेवाले की के स्थान पर् (जाररुहुः) आरूढ हए, (तेन) उस अनड्वान् की कृपासे

English

autumns. May the pearl’s mother keep and guard thee safely!

अध्याय ४

श्लोक 10.6

हिर॑ण्याना॒मेको॑ऽसि॒ सोमा॒त् त्वमधि॑ जज्ञिषे ।रथे॒ त्वम॑सि दर्श॒त॑ इ॑षु॒धौ रो॑च॒नस्त्वं प्र ण॒ आयूं॑षि तारिषत्

hiraṇyānāmeko'si somāt tvamadhi jajñiṣe | rathe tvamasi darśata iṣudhau rocanastvaṃ pra ṇa āyūṃṣi tāriṣat

हिन्दी अर्थ

शरीर अमृतकी नाभिहै। परीरके रहते ही तरतं, तपश्चर्या आदि प्रविष्ट है । (सः) उसने (अदु हयत) जगत् को दृढ किया ह, (सः) उसने जगत् का (अधारयत) धारण कियाहै। अनडहि अक्रमत = अनड्वान् है संसार-शकटं का वहन करनेवाला ओर धारक होता है) इस प्रकार गुण-कमंके भेदरूपी उपाधयो द्वारा एक

English

A glorification of the sacrificial gharma or milk caldron The Bull supports the wide-spread earth and heaven, the Bull supports the spacious air between them.

अध्याय ४

श्लोक 10.7

दे॒वाना॒मस्थि॒ कृश॑नं बभूव॒ तदा॑त्म॒न्वच्च॑रत्य॒प्स्व॑१न्तः ।तत् ते॑ बध्ना॒म्यायु॑षे॒ वर्च॑से॒ बला॑य दीर्घायु॒त्वाय॑ श॒तशा॑रदाय कार्श॒नस्त्वा॒भि र॑क्षतु

devānāmasthi kṛśanaṃ babhūva tadātmanvaccaratyapsva1ntaḥ | tat te badhnāmyāyuṣe varcase balāya dīrghāyutvāya śataśāradāya kārśanastvābhi rakṣatu

हिन्दी अर्थ

मान है । इसलिए इसे 'आदित्यव्णैम्' कहा है (यजुः० ३१।१८) । वहन दारा बह अग्निहै। अग्निद्रारा अभ्निरथों, रेलगाडियों तथा मिलो मे वहन १. ““अयमेवागनर्वेदकानर इति शाकपूणिः । विश्वानरायेते उत्तरे ज्योतिषी सूयं तथा २ प्य काण्डं ४। अनु० ३ सुक्त ११ मध्यमेतदं नइहर यत्रैष वह आहितः ।

English

The Bull supports the sky’s six spacious regions: the universal world hath he pervaded. The Bull is Indra o’er the beasts he watches. He, Sakra measures out three several pathways.

अध्याय ४

श्लोक 11.1

अनड्वान् १-१२ भृग्वङ्गिराः।अनड्वान्, इन्द्रः।त्रिष्टुप्; १, ४ जगति, २ भुरिक्, ७ त्र्यवसाना षट् पदानुष्टुब्गर्भोपरिष्टज्जागतानिचृच्छक्वरी, ८-१२ अनुष्टुप्।अ॒न॒ड्वान् दा॑धार पृथि॒वीमु॒त द्याम॑न॒ड्वान् दा॑धारो॒र्व१न्तरि॑क्षम्।अ॒न॒ड्वान् दा॑धार प्र॒दिशः॒ षडु॒र्वीर॑न॒ड्वान् विश्वं॒ भुव॑न॒मा वि॑वेश

anaḍvān 1-12 bhṛgvaṅgirāḥ| anaḍvān, indraḥ| triṣṭup; 1, 4 jagati, 2 bhurik, 7 tryavasānā ṣaṭ padānuṣṭubgarbhopariṣṭajjāgatānicṛcchakvarī, 8-12 anuṣṭup| anaḍvān dādhāra pṛthivīmuta dyāmanaḍvān dādhārorva1ntarikṣam| anaḍvān dādhāra pradiśaḥ ṣaḍurvīranaḍvān viśvaṃ bhuvanamā viveśa

हिन्दी अर्थ

(अनड्हः) संसार-शकट का वहन करनेवाले परमेश्वर ए वाला परमेश्वर (आहितः) स्थित है । (एतावत्) इतना ही (अस्य) इस ककं ओर मकर राशिको परस्पर मिलानेवाली रेखा कोदोभागोंमें विभक्त करतीहै, पूव॑भागमे ओर 1 दोनो भागपरिमाणमे समह, बरावर-वराबर हँ । वहनकर्ता अनडवान्- परमेरवर, इन दो विभागों के मध्य में स्थित हुआ, दोनों भागों का यथावत् वहन करता है, शासन करता है । । सौर जगत् मे सूयं ककं-मकररेखा को दो बरावर-वर में

English

He, milking out the worlds, the past, the future, discharges all the Gods’ eternal duties. Being produced among mankind as Indra, the Caldron works heated and brightly glowing. 39

अध्याय ४

श्लोक 11.2

अ॒न॒ड्वानिन्द्रः॒ स प॒शुभ्यो॒ वि च॑ष्टे त्र॒यां छ॒क्रो वि मि॑मीते॒ अध्व॑नः ।भू॒तं भ॑वि॒ष्यद् भुव॑ना॒ दुहा॑नः॒ सर्वा॑ दे॒वानां॑ चरति व्र॒तानि॑

anaḍvānindraḥ sa paśubhyo vi caṣṭe trayāṃ chakro vi mimīte adhvanaḥ | bhūtaṃ bhaviṣyad bhuvanā duhānaḥ sarvā devānāṃ carati vratāni

हिन्दी अर्थ

केवल भत्ल्काकृति-सम्बन्धी तारागणो के लिए नहीं दहै। “शिशुपालवध (६।३४।) तथा "रघृवंश' (१६।५३) मे भी अभिप्राय पूवेवत् है । दारा कृषि से अन्न पैदा होता है, ओर कृषक अर्थात् किसानों को अन्नलाभं होता दहै। कृषक वेत को तैयार कर, अन्न वोते है, अतः करृषकों ओर सूयं के सहयोग से कीलाल पैदा होता है, "कौलालम् अन्ननाम” (निषं० २।७) । (एताः) इन द्वादश रात्रीः) १२ रात्रयो को (वे) निर्चयसे

English

fervour, Whereby the Gods went up to heaven, the centre of life eternal, having left the body. Prajāpati, supreme and sovran ruler, Indra by form and by his shoulder Agni,

अध्याय ४

श्लोक 11.3

इन्द्रो॑ जा॒तो म॑नु॒ष्येऽष्व॒न्तर्घ॒र्मस्त॒प्तश्च॑रति॒ शोशु॑चानः ।सु॒प्र॒जाः सन्त्स उ॑दा॒रे न स॑र्ष॒द्यो नाश्नी॒यादन॒डुहो॑ विजा॒नन्

indro jāto manuṣye'ṣvantargharmastaptaścarati śośucānaḥ | suprajāḥ santsa udāre na sarṣadyo nāśnīyādanaḍuho vijānan

हिन्दी अर्थ

बरहा को (यः) जो (वेद) जानलेताहै, (वै) निर्चय से (तत्) वहु है परमेरवर का कथन हया है, इसे ही ब्रह्म भी कहा है (मन्बर ११) । प्रजापति बजेसे आरम्भ करके आगामी रातिके १२ बजे का काल। रात्रिका कालं णान्त-काल होताहै, जो कि ध्यान के लिए अधिक उपयोगी है । १२ मासों

English

Came to Visvānara, came to all men’s Bullock: he firmly forti- fied and held securely. The middle of the Bullock’s neck, there where the shoulder-bar is placed,

अध्याय ४

श्लोक 11.4

अ॒न॒ड्वान् दु॑हे सुकृ॒तस्य॑ लो॒क ऐनं॑ प्याययति॒ पव॑मानः पु॒रस्ता॑त्।प॒र्जन्यो॒ धारा॑ म॒रुत॒ ऊधो॑ अस्य य॒ज्ञः पयो॒ दक्षि॑णा॒ दोहो॑ अस्य

anaḍvān duhe sukṛtasya loka ainaṃ pyāyayati pavamānaḥ purastāt| parjanyo dhārā maruta ūdho asya yajñaḥ payo dakṣiṇā doho asya

हिन्दी अर्थ

भी कहा जा सकता है । इसे मन्त्र में (अनडुहो व्रतम्" कहा है । रातिकाल शान्त होते हैँ अतः ब्रह्यध्यान के लिए उपयोगी हैं । (सायम्) सायंकाल में (दुहे) मै, अनडवान्-परमेदवर को दोहता ह, नं -परमेदवर के (ये दोहाः) जो दोह दोहता हं । (अस्य) इस अनडवान्-पर ४ र

English

Extends as far to east of him as that is settled to the west. He whosoever knows the seven exhaustless pourings of the Ox, Wins himself offspring and the world: the great Seven Rishis know this well.

अध्याय ४

श्लोक 11.5

यस्य॒ नेशे॑ य॒ज्ञप॑ति॒र्न य॒ज्ञो नास्य॑ दा॒तेशे॒ न प्र॑तिग्रही॒ता।यो वि॑श्व॒जिद् वि॑श्व॒भृद् वि॒श्क॑र्मा घ॒र्मं नो॑ ब्रूत यत॒मश्चतु॑ष्पात्

yasya neśe yajñapatirna yajño nāsya dāteśe na pratigrahītā| yo viśvajid viśvabhṛd viśkarmā gharmaṃ no brūta yatamaścatuṣpāt

हिन्दी अर्थ

५ (4. मे (अरिवनोः कालम) तोब्रह्मका ध्यान र चाहिए, परन्तु दिन के तीन कालोंमेभी अनड्वान्-परभेरवर 0५४ सम्भव शक्तिरूपी दोहो की प्रार्थना करनी चाहिए । ये व इ अन्य कर्तव्यो मे बाधक न होकर सहायक हो जाती ै। ये 1) न हणि लोहित बणैवाली है लाक्षा ' अ । असि) ध द ¢ प्रयहित करती है, भर देती न क प) द्व । त जोड देती है । (अर्न्ध हई गहणी) तू प्ररोहित करती है, जोड देता ह । 0) । (इदम्) इस कटे अङ्ग को ( रोहय) तू ५ तेरे (आत्मनि) शरीरमें (पेष्टृम्) जो अद्ध पिस गया है, कुचला ५. (तत्) उसे (धाता) विधाता (भद्रया) कल्याणकारिणी ओर जोड की सन्धिकरदे। ४ ४ श ाता=बेवानूार रोगनिवारण मे ओषधि के साथ-साथ परमेदवर की भी कृपा चाहिए, अतः ओषधि-सेवन के साथ-साथ परमेश्वरसेभी

English

With feet subduing weariness, with legs extracting freshening draughts, Through toil the plougher and the Ox approach the honeyed beverage.

अध्याय ४

श्लोक 11.6

येन॑ दे॒वाः स्वरारुरु॒हुर्हि॒त्वा शरी॑रम॒मृत॑स्य॒ नाभि॑म्।तेन॑ गेष्म सुकृ॒तस्य॑ लो॒कं घ॒र्मस्य॑ व्र॒तेन॒ तप॑सा यश॒स्यवः॑

yena devāḥ svarāruruhurhitvā śarīramamṛtasya nābhim| tena geṣma sukṛtasya lokaṃ gharmasya vratena tapasā yaśasyavaḥ

हिन्दी अर्थ

४६ अथवैवेदभाप्य काण्ड ४। अनु०३। सूक्त १२ (मज्ज्ञा) अस्थिसार के (सं भवतु) साथ मिल जाय, (तै) तेरी (परः) हड़ी का जोड (परुषा) हट़्ी के जोड़ के (सम्, उ) संभवत, साथ मिल जाय । असृक् ते अस्थि राहतु मासं मांसेन रोहतु ॥५॥ (रोहतु) प्ररोहित हो जाए, (मांसम्) मांस (मांसेन) मांस के साथ ( रोहतु

English

Assigned are these twelve nights, they say, as holy to Prajāpati: Whoever knows their proper prayer performs the service of the Ox.

अध्याय ४

श्लोक 11.7

इन्द्रो॑ रू॒पेणा॒ग्निर्वहे॑न प्र॒जाप॑तिः परमे॒ष्ठी वि॒राट्।वि॒श्वान॑रे अक्रमत वैश्वान॒रे अ॑क्रमतान॒दुह्य॑क्रमत ।सोऽदृंहयत॒ सोऽधारयत

indro rūpeṇāgnirvahena prajāpatiḥ parameṣṭhī virāṭ| viśvānare akramata vaiśvānare akramatānaduhyakramata | so'dṛṃhayata so'dhārayata

हिन्दी अर्थ

(लोम) लोम को (लोम्ना) लोम के साथ (संकल्पय) समथित कर तथा तेरी (अस्थि) हही (रोहतु) प्ररोदित हो जाय, (ओषधे) है भोषधि ! वाला, (सुनाभिः) उत्तमनाभिवाला (रथः) रथ जेसेवेगसे द्रूतहोतारदहै, रथनेमि है लोहचक्र जिसे कि पिये की परिधि पर चढ़ाया जाता है, पहिये

English

At evening he is milked, is milked at early morn, is milked at noon. We know that streams of milk that flow from him are in- exhaustible.

अध्याय ४

श्लोक 11.8

मध्य॑मे॒तद॑न॒डुहो॒ यत्रै॒ष वह॒ आहि॑तः ।ए॒ताव॑दस्य प्रा॒चीनं॒ यावा॑न् प्र॒त्यङ् स॒माहि॑तः

madhyametadanaḍuho yatraiṣa vaha āhitaḥ | etāvadasya prācīnaṃ yāvān pratyaṅ samāhitaḥ

हिन्दी अर्थ

पहिये के अरे लगे रहते है, बंधे रहते हैँ । नाभिः = णह् बन्धने (दिवादिः) । (यदि) यदि (कर्तम्) छेदक आयुध ने (पतित्वा) शरीर पर गिरकर (संश) शरीर को हिसित किया है, चोट पटंचाई है, (यदि वा) अथवा किसी अद्खका हनन कियादहै, तो (ऋभुः) तखनि (इव) जैसे (रथस्य अङ्घानि) रथकेअद्धों को (संदधत्) जोड़देतादहै इसी प्रकार रोहुणी अर्थात् लाक्षा (परुषा परः) तेरे जोड कै साथ जोड़ की सन्धि कर दे। कर्तम् = कृती छेदने (तुदादिः), छेदकम् आयुधम् (सायण), अथवा

English

A charm to mend a broken bone Thou art the healer, making whole, the healer of the broken bone: Make thou this whole, Arundhatī!

अध्याय ४

श्लोक 11.9

यो वेदा॑न॒डुहो॒ दोहा॑न्त्स॒प्तानु॑पदस्वतः ।प्र॒जां च॑ लो॒कं चा॑प्नोति॒ तथा॑ सप्तऋ॒षयो॑ विदुः

yo vedānaḍuho dohāntsaptānupadasvataḥ | prajāṃ ca lokaṃ cāpnoti tathā saptaṛṣayo viduḥ

हिन्दी अर्थ

उत दवा श्रवितं देवा उन्नयथा पुनः उताग॑श्चक्रुषं हैवा देवां जीवयथा पुन॑ः ॥१॥ (उत) तथा (अवदहितम्) अधोगति-प्राप्त हुए को (देवाः) है दिव्य (पुनः) बार-बार समुन्नत करो । (उत) तथा (आगः) पापकमं (चक्रुषम्) किये हृए को (देवाः) है दिव्य महात्मामो (जीवयथ) नया जीवन प्रदान करो, (देवाः) है दिव्य महात्माओ ! (पुनः) बार-बार नया जीवन प्रदान अवहितम् = भ्रव (अधः) + हितम् (हि गतौ) + क्तः 1

English

Whatever bone of thine within thy body hath been wrenched or cracked, May Dhātar set it properly and join together limb by limb.

अध्याय ४

श्लोक 11.10

प॒द्भिः से॒दिम॑व॒क्राम॒न्निरां॒ जङ्घा॑भिरुत्खि॒दन्।श्रमे॑णान॒ड्वान् की॒लालं॑ की॒नाश॑श्चाभि ग॑च्छतः

padbhiḥ sedimavakrāmannirāṃ jaṅghābhirutkhidan| śrameṇānaḍvān kīlālaṃ kīnāśaścābhi gacchataḥ

हिन्दी अर्थ

बाटता है । जनवरी से जून तक ६ महीनो में सूयं इस रेखा के पूर्वं में रहता है, ओर जुलाई से दिसम्बर तक ६ मासोंमे परिचममें रहतादहै। इसेही सोर परिवारका वहन करनेवाला सूर्यं । आहितः = सूर्यं स्थापि यो वेदानदुदौ दोहन सपनानुंपदस्वतः । (यः) जो (अनड्हः) अनङ्वान्-परमेदवर के (अ पदस्व

English

Let him not, with good sons, pass off in vapour who hath not eaten of the Ox with knowledge.

अध्याय ४

श्लोक 11.11

द्वाद॑श॒ वा ए॒ता रात्री॒र्व्रत्या॑ आहुः प्र॒जाप॑तेः ।तत्रोप॒ ब्रह्म॒ यो वेद॒ तद् वा अ॑न॒डुहो॑ व्र॒तम्

dvādaśa vā etā rātrīrvratyā āhuḥ prajāpateḥ | tatropa brahma yo veda tad vā anaḍuho vratam

हिन्दी अर्थ

क्षीण होनेवाले (सप्त दोहान्) सात दोहो को (वेद) न वि, ( र प्राप्त होता दहै, (तथा) उस प्रकार (सप्त ऋषयः) सा णास्तर से इसे“ ०५-8०'' कहते है, अर्थात् वड़ा री । ऋष पद क अप- चेतन ऋषि .1.कर किया गया दहै । विदुः मे बहुवचनं ऋक्ष के ताराओं के बाहूल्यके कारण है ।

English

The Ox pours milk out in the world of virtue: in earliest time, he, Pavamna, swells it. Parjanya is the stream, Maruts his udder, sacrifice is the milk, the meed his milking. That which not sacrifice nor sacrificer, not giver nor receiver rules and governs,

अध्याय ४

श्लोक 11.12

दु॒हे सा॒यं दु॒हे प्रा॒तर्दु॒हे म॒ध्यंदि॑नं॒ परि॑ ।दोहा॒ ये अ॑स्य सं॒यन्ति॒ ता॑न् वि॒द्मानु॑पदस्वतः

duhe sāyaṃ duhe prātarduhe madhyaṃdinaṃ pari | dohā ye asya saṃyanti tān vidmānupadasvataḥ

हिन्दी अर्थ

श्रमेगानदवान कीलालं कीनाशंश्चामि गंच्छतः ॥१०॥ "पद्ध" द्वारा ६ दिशाओोंमे सूयके पादोंका वर्णन हूञा है ओर 'जद्ाभिः दवारा गति ओर वेग सूचित किया गया है । यथा “जद्भयोजेवः'' है, हन हिंसागत्योः (अदादिः ) 1 जङ्घा पद में गत्यर्थं सुचित हजा है । पाद तो शरीर की स्थिति के साधन दहै ““पादयोः प्रतिष्ठा" स्थितिः (अथवर १६।६०।२) । सूयं कौ रदिमयों के अग्र भागो को भी “पादाः'' कहते हँ, यथा ये पादाग्र जव पृथिवी के जलप्रधान प्रदेशों पर पडते है, तव जल वाष्पी- भूत होकर अन्तरिक्ष की ओर उड़कर मेघ निर्माण करता है, ओौर वर्षा

English

All-winning, all-supporting, all-effecting,—which of all quadru- peds, tell us! is the Caldron? May we, fame-seekers, reach the world of virtue by service of the Gharma and through

अध्याय ४

श्लोक 12.1

रोहिणी- वनस्पतिः।१-७ ऋभुः।रोहिणी- वनस्पतिः।अनुष्टुप्, १ त्रिपदा गायत्री, ६ त्रिपदा यवमध्या भुरिग्गायत्री, ७ बृहती।रोह॑ण्यसि॒ रोह॑ण्य॒स्थ्नश्छि॒न्नस्य॒ रोह॑णी ।रो॒हये॒दम॑रुन्धति

rohiṇī- vanaspatiḥ| 1-7 ṛbhuḥ| rohiṇī- vanaspatiḥ| anuṣṭup, 1 tripadā gāyatrī, 6 tripadā yavamadhyā bhuriggāyatrī, 7 bṛhatī| rohaṇyasi rohaṇyasthnaśchinnasya rohaṇī | rohayedamarundhati

हिन्दी अर्थ

7 अथवेवेदभाष्य काण्ड ४। अनू० ३। सूक्त १३ (द्री) दो (इमौ) ये (वातौ) वायुँ (वातः) गत्ति करती है, (आ सिन्धोः) एक हदय-समुद्र से, दूसरी (आ परावतः) परे के प्रदेश से । (अन्यः) एक (ते) तेरे लिए (दक्षम्) बल (आ वातु) बहा लाये, (अन्यः) ओौर उससे ५ (वि वातु) प्रथक् बहा ले-जाय, (यद् रपः) जोकि पापरूप है, अशुद्ध दारा विवात होती रहती है, प्रथक् होकर प्रवाहित होती रहती है; सिन्धोः यथा “सिन्धुसृत्याय == हदयाय' जाताः" (अथव ० १०।२।११), देवे परेकेप्रदेण से उवासरूपमे हूदय-समुद्र मे आती है, इसमे 'आवसीजन' वायु का निवेश होता ह जोकि स्वासरूप में फफड़ों में प्रविष्ट होकर अशद्ध

English

Let blood and bone grow strong in thee, flesh grow together with the flesh. Join thou together hair with hair, join thou together skin with skin.

अध्याय ४

श्लोक 12.1-2

रोहिणी- वनस्पतिः।१-७ ऋभुः।रोहिणी- वनस्पतिः।अनुष्टुप्, १ त्रिपदा गायत्री, ६ त्रिपदा यवमध्या भुरिग्गायत्री, ७ बृहती।रोह॑ण्यसि॒ रोह॑ण्य॒स्थ्नश्छि॒न्नस्य॒ रोह॑णी ।रो॒हये॒दम॑रुन्धति

rohiṇī- vanaspatiḥ| 1-7 ṛbhuḥ| rohiṇī- vanaspatiḥ| anuṣṭup, 1 tripadā gāyatrī, 6 tripadā yavamadhyā bhuriggāyatrī, 7 bṛhatī| rohaṇyasi rohaṇyasthnaśchinnasya rohaṇī | rohayedamarundhati

हिन्दी अर्थ

त्वं हि विश्वभेषज देवानाँ दतं दय॑से ॥३॥ (वात) है वायु (भेषजम्) ओौषध को (आ वादि) हमारी ओर प्रवाहित कर, (यत्) जो (रपः) पापरूप अशुद्धि है उसे (वि वाहि) हमसे को ओषध ¦ (देवानाम्) इन्द्रियों का (दूतः) उपतापी हृजा (ईयसे) गति तापद्वारा जैसे धातुओं कामलक्षीण हो जाता है वैसे उपतापी प्रवासं दवारा शरीरगत मल शुद्ध होता रहता है ।

English

Let blood and bone grow strong in thee, flesh grow together with the flesh. Join thou together hair with hair, join thou together skin with skin.

अध्याय ४

श्लोक 12.2

यत् ते॑ रि॒ष्टं य॑त् ते द्यु॒त्तमस्ति॒ पेष्ट्रं॑ त आ॒त्मनि ।धा॒ता तद् भ॒द्रया॒ पुनः॒ सं द॑ध॒त् परु॑षा॒ परुः॑

yat te riṣṭaṃ yat te dyuttamasti peṣṭraṃ ta ātmani | dhātā tad bhadrayā punaḥ saṃ dadhat paruṣā paruḥ

हिन्दी अर्थ

(मरुताम्) प्राणापान-व्यान-समानादि शरीरगत वायुं के (गणाः) समूह् (चायन्ताम्) रक्षा करं । (विश्वा -विरवानि, भुतानि) सब भूत भौतिक (अरपाः) पापरूपी अशुद्धियों से रहित (असत्) हो जाय । होकर, इसकी रक्षा तथा पालना करे । अरपाः =अ + रप् + असून् । (शंतातिभिः) रोगशामक साधनों के विस्तार के साथ, (अथो) तथा (अरिष्टतातिभिः) अ्हिसा-विस्तारक साधनों के विस्तार के साथ । (ते)

English

Stand up erect upon thy feet. If he be torn and shattered, having fallen into a pit, or a cast stone have struck him,

अध्याय ४

श्लोक 12.2-2

यत् ते॑ रि॒ष्टं य॑त् ते द्यु॒त्तमस्ति॒ पेष्ट्रं॑ त आ॒त्मनि ।धा॒ता तद् भ॒द्रया॒ पुनः॒ सं द॑ध॒त् परु॑षा॒ परुः॑

yat te riṣṭaṃ yat te dyuttamasti peṣṭraṃ ta ātmani | dhātā tad bhadrayā punaḥ saṃ dadhat paruṣā paruḥ

हिन्दी अर्थ

(मयम्, मे, हस्तः) यह मेरा हाथ (भगवान् ) भाग्यशाली है; (अयं मे भगवत्तरः) यह मेर दूसरा हाथ अधिक भाग्यशाली है । (अयम् मे) यह् मेरा हाथ (विरवभेषजः) सब रोगो का ओौषधरूप है, (अयम्) यह दूसरा हाथ (शिवाभिमशंनः) द्ूनेमात्र से कल्याणकारी तथा सुखदायक है । मन्त्र में उपचारक ने रोगी को विश्वास दिलाया है कि तेरे रोग का शमन हो जाएगा तथा उपचारक, निज मनोबल के साथ रोगी को स्पशे कर उसके स्नायुमण्डल मे शक्ति का संचार करता है । विना रोगविकित्सा की जाती है। इन संस्थागों को 0०8 कहते ह । का ५० अथवंवेदभाष्य काण्ड ४। अनु० ३। सूक्त १४

English

Stand up erect upon thy feet. If he be torn and shattered, having fallen into a pit, or a cast stone have struck him,

अध्याय ४

श्लोक 12.3

सं ते॑ म॒ज्जा म॒ज्ज्ञा भ॑वतु॒ समु॑ ते॒ परु॑षा॒ परुः॑ ।सं ते॑ मां॒सस्य॒ विस्र॑स्तं॒ समस्थ्यपि॑ रोहतु

saṃ te majjā majjñā bhavatu samu te paruṣā paruḥ | saṃ te māṃsasya visrastaṃ samasthyapi rohatu

हिन्दी अर्थ

, दसशाखाएंरहैः दोनोंहा्थों की खुली हुई १० अंगुलियां अंगुलियों के अग्रभागो द्वारा शक्ति का संचार 1 (6 संचार करने से पूवं जिह्वा हारा उच्वारणपूरवंक रोगी को विश्वास दिला- कर उसे शक्तिग्रहण के लिए स्वाभिमूख किया गया है । चिकित्सक नाना हुः तभौ (मृशामसि' मे बहुवचन का प्रयोग हुमा है । सभी मनोबलपूर्वक (अजः) जन्म से रहित (हि) निद्चय से, जीवात्मा , (अग्नेः) धारण कर परमेश्वर के प्रकाश को देखता है ओौर पवित्र होकर ऊचाइयो कर, पवित्र होकर, ऊंचादयों पर आरोहण करते हैँ । शोकात-- शौक

English

Ye Gods, restore to life again, him, Gods! who hath committed sin. Here these two winds are blowing far as Sindhu from a distant land.

अध्याय ४

श्लोक 12.3-2

सं ते॑ म॒ज्जा म॒ज्ज्ञा भ॑वतु॒ समु॑ ते॒ परु॑षा॒ परुः॑ ।सं ते॑ मां॒सस्य॒ विस्र॑स्तं॒ समस्थ्यपि॑ रोहतु

saṃ te majjā majjñā bhavatu samu te paruṣā paruḥ | saṃ te māṃsasya visrastaṃ samasthyapi rohatu

हिन्दी अर्थ

अथं है राक्ति, ०५८7. । इन संस्थाओं में हाय की अगूलियों के अग्रभागो मं शक्ति का संचार कियाजाताहै, ओर इस द्वारा नानारोमोंकी 9 स्थिर करना, तथा दी॑श्वास लेना,-- इन तीन सिद्धान्तं पर रोगी में प लिया गया है । लेख आंग्ल भाषा मेँ है, जिसका हिन्दी अनुवाद किया है। ॥

English

Ye Gods, restore to life again, him, Gods! who hath committed sin. Here these two winds are blowing far as Sindhu from a distant land.

अध्याय ४

श्लोक 12.4

म॒ज्जा म॒ज्ज्ञा सं धी॑यतां॒ चर्म॑णा॒ चर्म॑ रोहतु ।असृ॑क् ते॒ अस्थि॑ रोहतु मां॒सं मां॒सेन॑ रोहतु

majjā majjñā saṃ dhīyatāṃ carmaṇā carma rohatu | asṛk te asthi rohatu māṃsaṃ māṃsena rohatu

हिन्दी अर्थ

करम॑ध्वमग्निना नाकमु्यान् हस्तैषु वितः । (देवेभिः) देवों के साथ (मिश्राः) मिश्रित होकर, (आध्वम्) बेठो । फल । आध्वम् मास उपवेशने (सायण) । देवेभिः मिश्रा =देखो (यजुः० उत्पन्न होती ह । उनके पीछे कहीं भी न रुकनेवाली गति से अभीष्ट स्थानों को जा सकता है, अन्यथा नहीं" (यज्ः° १७।६७' दयानन्द) ।

English

For thou who hast all medicine comest as envoy of the Gods.

अध्याय ४

श्लोक 12.4-2

म॒ज्जा म॒ज्ज्ञा सं धी॑यतां॒ चर्म॑णा॒ चर्म॑ रोहतु ।असृ॑क् ते॒ अस्थि॑ रोहतु मां॒सं मां॒सेन॑ रोहतु

majjā majjñā saṃ dhīyatāṃ carmaṇā carma rohatu | asṛk te asthi rohatu māṃsaṃ māṃsena rohatu

हिन्दी अर्थ

धारण करते हुए; अथवा निज हाथो में घारण करते हुए, समीपवर्ती मर्थात् अव्य भावी मानते हए, पथा "८८५1 18114" (गल्या), समीप । देवेभिः आध्वम् == साध्य देवों के साथ, मिलकर उपविष्ट होओ (यजुः० ३१।१६) 1 आध्वम् जास उप- गमन (योग० ३।४२) करता है, या शारीरिक अद्खखूपी पृथिवी अर्थात् पाद यहं ये विश्वतोधारं सु विरसो वितेनिरे ॥६। हए (न अपेक्षन्ते) पाथिव भोगों की अपेक्षा नहीं करते, उन्हें नहीं चाहते, अपितु वे (चाम्) चुलोक की ओर (आ रोहन्ति) आरोहण करते है, तथा (रोदसी ) तत्यश्चात् दो अन्य लोकों की ओर आरोहण करते हँ । (ये) जो

English

For thou who hast all medicine comest as envoy of the Gods.

अध्याय ४

श्लोक 12.5

लोम॒ लोम्ना॒ सं क॑ल्पया त्व॒चा सं क॑ल्पया॒ त्वच॑म्।असृ॑क् ते॒ अस्थि॑ रोहतु छि॒न्नं सं धे॑ह्योषधे

loma lomnā saṃ kalpayā tvacā saṃ kalpayā tvacam| asṛk te asthi rohatu chinnaṃ saṃ dhehyoṣadhe

हिन्दी अर्थ

वाले (यज्ञम्) यजनीय-परमेरुवररूपी यज्ञ' का (वितेनिरे) विशेष विस्तार रोदसी का अथं मन्त्र मे 'चावापृथिवी' प्रतीत नहीं होता, यद्यपि निघंटु मे चावापृथिवी अथे दिया है (निषं० ३।३०) । क्योंकि "नापेक्षन्ते" पर आरोहण कर पृथिवी पर पुनः लौटना निष्प्रयोजन है । "आ अरुहम्" वणन भी है, अतः "रोदसी" का दयावापूथिवी अर्थं व्यथं हो जाता ह । तब रोदसी पद का अथं दावापृथिवी से भिन्न होना चाहिए । द्यावापृथिवी से

English

I bring thee mighty strength, I drive thy wasting malady away. Felicitous is this my hand, yet more felicitous is this.

अध्याय ४

श्लोक 12.5-2

लोम॒ लोम्ना॒ सं क॑ल्पया त्व॒चा सं क॑ल्पया॒ त्वच॑म्।असृ॑क् ते॒ अस्थि॑ रोहतु छि॒न्नं सं धे॑ह्योषधे

loma lomnā saṃ kalpayā tvacā saṃ kalpayā tvacam| asṛk te asthi rohatu chinnaṃ saṃ dhehyoṣadhe

हिन्दी अर्थ

भिन्न अन्य दो लोक रोदसी द्वारा जानने चाहिए । निरुक्त के अनुसार इमे चिदिन्द्र रोदसी" (ऋ० ३।३०।५) मे रोदसी का अथं "रोधसी" है, ओर (रोधः' का अथं दहै कूल", जोकि बहते स्रोत का इधर-उधर फलने से निरोध करता है (निरुक्त ६।१।१; पद कशिः' ३) । "रोधसी विरोधनात्! (निरुक्त) । अतः "रोधसी" वे दो लोक है, जोकि सबको वहां तक जाने में स्वे" तक तो पहूंच सकते ह, परन्तु सस्वः' से ऊपर के दो लोकों तक नहीं १. यजुर्वेद ३१।९ मे परमेइवर को "यज्ञं पुरुषम्! हारा यज्ञ कहा है । कण्डं ४। अनु० ३। सूक्तं १४ अथरववेदमाष्य ५३

English

I bring thee mighty strength, I drive thy wasting malady away. Felicitous is this my hand, yet more felicitous is this.

अध्याय ४

श्लोक 12.6

स उत् ति॑ष्ठ॒ प्रेहि॒ प्र द्र॑व॒ रथः॑ सुच॒क्रः सु॑प॒विः सु॒नाभिः॑।प्रति॑ तिष्ठो॒र्ध्वः

sa ut tiṣṭha prehi pra drava rathaḥ sucakraḥ supaviḥ sunābhiḥ| prati tiṣṭhordhvaḥ

हिन्दी अर्थ

अग्ने परि परथमो देवतानां चष्देवानामुत मायुंषाणाम् । देवों की (उत) तथा (मानुषाणाम्) मनुष्यों की (चक्षुः) आंख है, उन्हँ मागे दर्शाता है । (दइयक्षमाणाः) यज्ञ करने कौ इच्छावाले (यजमानाः) यजमान, सूयं आदि देवों के चक्षु हैँ, उनका मागेदर्शी है परमेश्वर । अग्नि के अभाव में अन्धकार होताहै, ओर मागं नहीं दीखता, अतः मार्ग दशनिं भ्रस्ज पाके (तुदादिः) । सजोषाः जृषी भ्ीतिसेवनयौः (तुदादिः) ।

English

Accompanying the sacrifice of a he-goat The Goat was verily produced from Agni. Through sorrow he beheld, at first, his father.

अध्याय ४

श्लोक 12.6-2

स उत् ति॑ष्ठ॒ प्रेहि॒ प्र द्र॑व॒ रथः॑ सुच॒क्रः सु॑प॒विः सु॒नाभिः॑।प्रति॑ तिष्ठो॒र्ध्वः

sa ut tiṣṭha prehi pra drava rathaḥ sucakraḥ supaviḥ sunābhiḥ| prati tiṣṭhordhvaḥ

हिन्दी अर्थ

अकाय, नित्य, परमेश्वर को (पयसा) दुग्धाहुति द्वारा, तथा (घृतेन) घृता- (नाकम् अभि) दुःख-संस्पशं से रहित नाकलोक' को लक्ष्य करके, अभिमुख (सुखाभाव ) + नाकम् (अकम् का निषेध) (निरुक्त २।४। १४) । ५४ अथर्व॑वेदभाष्य काण्ड ४। अनु° ३ । सूक्तं १४

English

Accompanying the sacrifice of a he-goat The Goat was verily produced from Agni. Through sorrow he beheld, at first, his father.

अध्याय ४

श्लोक 12.7

यदि॑ क॒र्तं प॑ति॒त्वा सं॑श॒श्रे यदि॒ वाश्मा॒ प्रहृ॑तो ज॒घान॑ ।ऋ॒भू रथ॑स्ये॒वाङ्गा॑नि॒ सं द॑ध॒त् परु॑षा॒ परुः॑

yadi kartaṃ patitvā saṃśaśre yadi vāśmā prahṛto jaghāna | ṛbhū rathasyevāṅgāni saṃ dadhat paruṣā paruḥ

हिन्दी अर्थ

साधनोवाले (एतम्) अज-सम्बन्धी इस मृतशरीर को (उद्धर कर, उटा, ओर (प्राच्यां दिशि) पूवदिणा में 1 क क सिरो ८ चिता पर स्थापिते कर तथा (दक्षिणायाम् दिशि) दक्षिण दिशा वाला जीवात्मा मोक्षधाम में जाय । तथा-- ॥ (अस्य) इस अज के (भसदम्°) गुदा भाग को (प्रतीच्य परिचम दिशा में (धेहि) स्थापित कर, (उत्तरम्, ४ ) ८ मेँ (मध्यम्) शरीर के मध्य भाग को (धेहि) स्थापित कर । अज क निर्जीव शरीर की चिता पर स्थापन-विधि से यह स्पष्ट है

English

Gods. From earth’s high ridge to middle air I mounted, and from mid- air ascended up to heaven.

अध्याय ४

श्लोक 12.7-2

यदि॑ क॒र्तं प॑ति॒त्वा सं॑श॒श्रे यदि॒ वाश्मा॒ प्रहृ॑तो ज॒घान॑ ।ऋ॒भू रथ॑स्ये॒वाङ्गा॑नि॒ सं द॑ध॒त् परु॑षा॒ परुः॑

yadi kartaṃ patitvā saṃśaśre yadi vāśmā prahṛto jaghāna | ṛbhū rathasyevāṅgāni saṃ dadhat paruṣā paruḥ

हिन्दी अर्थ

१।१२३०; दयानन्द) । भस् धातु का अथं मक्षणमभी है । यथा ""भसथः =-= अरनीथः कण्ड ४। जनु० ३ । सूक्त १४ अथर्व॑वेदभाष्यं ५५ साधारण शवस्थापन विधि के विपरीतहै। कारण यहहैकि यह “अज नवद्वारा देवानां पूरयोध्या” (अथर्व ° १०।२।३१) । आठ चक्रै : मूला-

English

Gods. From earth’s high ridge to middle air I mounted, and from mid- air ascended up to heaven.

अध्याय ४

श्लोक 13.1

रोगनिवारणम् १-७ शंतातिः।चन्द्रमाः, विश्वे देवाः, १ देवाः, २-३ वातः, ४ मरुतः, ६-७ हस्तः।अनुष्टुप्।उ॒त दे॑वा॒ अव॑हितं॒ देवा॒ उन्न॑यथा॒ पुनः॑ ।उ॒ताग॑श्च॒क्रुषं॑ देवा॒ देवा॑ जी॒वय॑था॒ पुनः॑

roganivāraṇam 1-7 śaṃtātiḥ| candramāḥ, viśve devāḥ, 1 devāḥ, 2-3 vātaḥ, 4 marutaḥ, 6-7 hastaḥ| anuṣṭup| uta devā avahitaṃ devā unnayathā punaḥ | utāgaścakruṣaṃ devā devā jīvayathā punaḥ

हिन्दी अर्थ

अनाहत चक्र का स्थान हृदय कै समीप है । एक “निम्न मानस चक्र' (10 वण०ऽ चक्र 1०५5) भी है । इनमें से अनाहतचक्र हृदय को नियन्त्रित करता है जोकि जीवात्मा ौर परमात्मा का निवास-स्थान है) इस निवास-स्थान ऊरध्वेमुखरूप मे खिल जाता है, ओौर मुक्तात्मा इस खिले कमल हारा ऊध्वे- की ओर स्थापित किया जाता है (देखो, पातञ्जल योगप्रदीप द्वारा, अनाहतचक्र कमल के सदृश हे, खिलकर वहं १२ पंखडियों वाला हो जाता है । हृदय दहै जीवात्मा ओौर परमात्मा का निवास-स्थान । यथा--- अष्टाचक्षा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या ।

English

From the high pitch of heaven’s cope I came into the world of light. Mounting the sky they look not round; they rise to heaven through both the worlds, Sages who paid the sacrifice that pours its streams on every side.

अध्याय ४

श्लोक 13.2

द्वावि॒मौ वातौ॒ वात॒ आ सिन्धो॒रा प॑रावतः॑ ।दक्षं॑ ते अ॒न्य आ॒वातु॒ व्य॑१न्यो वा॑तु॒ यद् रपः॑

dvāvimau vātau vāta ā sindhorā parāvataḥ | dakṣaṃ te anya āvātu vya1nyo vātu yad rapaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रवेश ब्रहमात्मामेंहो जाताहै। ५६ अथर्ववेदमाष्य काण्ड ४। धनु० ३ । सूक्तं १४ मे मन्त्र € मे कहा है । यथा-- लोक के (अभि) संमुख (चतुभिः पद्भिः) धमं, अर्थ, काम, मोक्षरूपी चार पादो सहित (दिक्षु) नाना दिशाओं में (प्रतितिष्ठ) दढ स्थित हो जा।

English

First among all the deities, come forward, thou who art eye of Gods and men, O Agni.

अध्याय ४

श्लोक 13.3

आ वा॑त वाहि भेष॒जं वि वा॑त वाहि॒ यद्रपः॑ ।त्वं हि वि॑श्वभेषज दे॒वानां॑ दू॒त ईय॑से

ā vāta vāhi bheṣajaṃ vi vāta vāhi yadrapaḥ | tvaṃ hi viśvabheṣaja devānāṃ dūta īyase

हिन्दी अर्थ

पृथिवी में गाड देना है, (यजु:° ३५।२१) में निर्दिष्ट विधि द्वारा 1 (१) सायणाचायं ने समग्र सूक्त मेँ चार पैरोंवाले बकरे का वर्णेन मानाहै। समग्र सूक्त के वणेन मौर अभिप्राय सायणाचायं कैमतके चार पादोंका कथन देखकर चार पैरोंवाले बकरे को कल्पना सम्भव है । परन्तु पाद या चार पाद निश्चयरूप में बकरे के चार पैरोंके निदेशक नहीं (२) सूक्त मे 'अज' पदभी पठितहै। अज का अर्थं बकराभी

English

Imploring, and accordant with the Bhrigus, to heaven in safety go the sacrificers! With milk and butter I anoint the mighty, celestial Goat, strong- winged, and full of juices. Through him will we attain the world of virtue, ascending to the loftiest cope, to heaven.

अध्याय ४

श्लोक 13.4

त्राय॑न्तामि॒मं दे॒वास्त्राय॑न्तां म॒रुतां॑ ग॒णाः ।त्राय॑न्तां॒ विश्वा॑ भू॒तानि॒ यथा॒यम॑र॒पा अस॑त्

trāyantāmimaṃ devāstrāyantāṃ marutāṃ gaṇāḥ | trāyantāṃ viśvā bhūtāni yathāyamarapā asat

हिन्दी अर्थ

जीवात्मा ओरब्रह्मभी होता है । यथा-- अजामेकां लोहितशुक्लकृष्णां बहली: प्रजाः सृजमानां सरूपाः । अजो ह्येको जुषमाणोऽनुशेते जहात्येनां भुकष्तमोगामजोऽन्यः ॥ उपनिषद् अध्याय ४ (खण्ड ५) । अज है प्रकृति; लोहित है रजो- से परे ब्रहमज्योति, जोकि सुखस्वरूप है ।

English

Set the Goat’s head toward the eastern region, and turn his right side to the southern quarter. His hinder part turn to the western quarter, and set his left side to the northern region.

अध्याय ४

श्लोक 13.5

आ त्वा॑गमं॒ शंता॑तिभि॒रथो॑ अरि॒ष्टता॑तिभिः ।दक्षं॑ त उ॒ग्रमाभा॑रिषं॒ परा॒ यक्ष्मं॑ सुवामि ते

ā tvāgamaṃ śaṃtātibhiratho ariṣṭatātibhiḥ | dakṣaṃ ta ugramābhāriṣaṃ parā yakṣmaṃ suvāmi te

हिन्दी अर्थ

मिलकर उत्पात करे मेघध्वनियों दारा शोर करं (वातज्तानि) वायु (नदतः) गते (महः ऋषभस्य) महाकाय वृषभ के सदृश उपमावाचक वायुं मिलकर ऊध्वं अन्तरिक्ष को ओर उड़, ताकि विस्तृत दिशा, नभ- स्वतीः अर्थात् मेघवाली हौ, मेघाच्छादित हों । की (सर्गाः) धारां (भूमिम्, महयन्तु) भूमि को महिमायुक्त कर, तथा

English

Set the Goat’s backbone upmost in the zenith, and lay his belly downward in the nadir; set his midportion in mid-air between them. O’er the dressed Goat lay a dressed skin to robe him prepared, in perfect form, with all his

अध्याय ४

श्लोक 13.6

अ॒यं मे॒ हस्तो॒ भग॑वान॒यं मे॒ भग॑वत्तरः ।अ॒यं मे॑ वि॒श्वभे॑षजो॒ऽयं शि॒वाभि॑मर्शनः

ayaṃ me hasto bhagavānayaṃ me bhagavattaraḥ | ayaṃ me viśvabheṣajo'yaṃ śivābhimarśanaḥ

हिन्दी अर्थ

(अदादिः) । मन्त्रमे मरुतः का वणन 1/1 हआ है; मरुतः हँ मानसून वायुं है मरुद्गण 1 (गायतः) प्रसन्नतामें ग हमें 4 गं नदी-नालों मे (उद् विजन्ताम् ) उछल-उछलकर चले, प्रवाहित

English

members. Rise upward to the loftiest vault of heaven: with thy four feet stand firmly in the regions.

अध्याय ४

श्लोक 13.7

हस्ता॑भ्यां॒ दश॑शाखाभ्यां जि॒ह्वा वा॒चः पु॑रोग॒वी।अ॒ना॒म॒यि॒त्नुभ्यां॒ हस्ता॑भ्यां॒ ताभ्यां॑ त्वा॒भि मृ॑शामसि

hastābhyāṃ daśaśākhābhyāṃ jihvā vācaḥ purogavī| anāmayitnubhyāṃ hastābhyāṃ tābhyāṃ tvābhi mṛśāmasi

हिन्दी अर्थ

क 1 ओषधिर्या । (गायतः वर्षाऋतु मे प्रसन्नता से गाते हुए) (पजेन्यघोषिणः) मेघ को गजनिवाले, (मारुताः गण :/ वषा करते हृएु (वषैस्य) मेघ कौ (सर्गाः) उत्प धारां (1 नुकूल रूप में (वषन्तु) बरसे; पृथक् = पृथक्-

English

A charm to hasten the coming of the rains Let all the misty regions fly together, let all the rain-clouds sped by wind, assemble. Let waters satisfy the earth, the voices of the great mist-enve- loped Bull who roareth.

अध्याय ४

श्लोक 14.1

स्वर्ज्योतिः प्राप्तिः।१-९ भृगुः।आज्यं, अग्निः।त्रिष्टुप्, २, ४ अनुष्टुप्, ३ प्रस्तारपङ्क्तिः, ७, ९ जगति, ८ पञ्चपदातिशक्वरी।अ॒जो ह्य॑१ग्नेरज॑निष्ट॒ शोका॒त् सो अ॑पश्यज्जनि॒तार॒मग्रे॑ ।तेन॑ दे॒वा दे॒वता॒मग्रा॑ आय॒न् तेन॒ रोहा॑न् रुरुहु॒र्मेध्या॑सः

svarjyotiḥ prāptiḥ| 1-9 bhṛguḥ| ājyaṃ, agniḥ| triṣṭup, 2, 4 anuṣṭup, 3 prastārapaṅktiḥ, 7, 9 jagati, 8 pañcapadātiśakvarī| ajo hya1gnerajaniṣṭa śokāt so apaśyajjanitāramagre | tena devā devatāmagrā āyan tena rohān ruruhurmedhyāsaḥ

हिन्दी अर्थ

८ अ से ये दोनों 'समस्तपद' प्रतीत होते ह । मारुतगण पन दक होते ही दह। मन्व ३से श्रूमि' पद का अन्वय अभिप्रेत है । मानो मारूतगण भूमि के समीप होकर भूमि की महिमा का गान करते है, निज ध ( व ) है मानसून वायुओ ! (समुद्रतः) समूद्र से (उदीरयत) उपर र प्रेरित करो, ( नभः ) मेष को उसे (उत् पातयाथ) ऊर्वं कीओर १. मानसूुन-मरुतं समद्र के जलषूपी वीयं से, तथा म से उत्पः ह न , तथा भूमि माताके गमं से उत्पन्न होते

English

Let them show forth, the strong, the bounteous Maruts: let plants and shrubs be hung with drops of moisture.

अध्याय ४

श्लोक 14.2

क्रम॑ध्वम॒ग्निना॒ नाक॒मुख्या॒न् हस्ते॑षु॒ बिभ्र॑तः ।दि॒वस्पृ॒ष्ठं स्वऽर्ग॒त्वा मि॒श्रा दे॒वेभि॑राध्वम्

kramadhvamagninā nākamukhyān hasteṣu bibhrataḥ | divaspṛṣṭhaṃ sva'rgatvā miśrā devebhirādhvam

हिन्दी अर्थ

: वे निजं माता को महिमा का मानो निज गजंनाभो द्वारा गान करते ह + करता है । (नदतः) गर्जते हुए । (महः ऋषभस्य ) महाकाय वृषभ कं सदृश मान (आपः) जल (पृथिवीम्) पृथिवी को ( तपयन्तु) तृप्त कर । त्वेषः अकं: = उपमावाचक पद लुप्त है । पातयाथ्=पत गतौ

English

Let floods of rain refresh the ground with gladness and herbs spring various with each form and colour. Cause us who sing to see the gathering vapours: out burst in many a place the rush of waters!

अध्याय ४

श्लोक 14.3

पृ॒ष्ठात् पृ॑थि॒व्या अ॒हम॒न्तरि॑क्ष॒मारु॑हम॒न्तरि॑क्षा॒द् दिव॒मारु॑हम्।दि॒वो नाक॑स्य पृ॒ष्ठात् स्व॑१र्ज्योति॑रगाम॒हम्

pṛṣṭhāt pṛthivyā ahamantarikṣamāruhamantarikṣād divamāruham| divo nākasya pṛṣṭhāt sva1rjyotiragāmaham

हिन्दी अर्थ

गजं, (उदधिम्) समुद्र कौ (अर्दय) पीड़तिकरः, (भूमिम्) भूमि को (पयसा) आशाओं अर्थात् दिशाओं के भेदो को पूर्णतया नष्ट करता हुमा, वरसते ह पृथिवी पर, नकि समुद्र पर, अतः वर्षाभिाव से समुद्र मानो पीडति" होता है । आशारेषी सूय मानो बहुल वर्षा के कारण, पर्जन्यो द्वारा, दिशाओं को पूर्णतया आच्छादित कर, दिर्भेद कौ नष्ट कर देता है ओर रक्षा करे, (उत) तथा (अजगराः) अजगर-सपि के सदृश (उत्साः) प्रवाहित

English

Let floods of rain refresh the ground with gladness; and herbs spring various with each form and colour.

अध्याय ४

श्लोक 14.4

स्व॑१र्यन्तो॒ नापे॑क्षन्त॒ आ द्यां रो॑हन्ति॒ रोद॑सी ।य॒ज्ञं ये वि॒श्वतो॑धारं॒ सुवि॑द्वांसो वितेनि॒रे

sva1ryanto nāpekṣanta ā dyāṃ rohanti rodasī | yajñaṃ ye viśvatodhāraṃ suvidvāṃso vitenire

हिन्दी अर्थ

(प्रच्युताः) गिरे (मेषाः) मेघ (पृथिवीमनु ) पृथिवी के अनुकल (वषेनतु) अजगराः नदियों मे जल, रे मार्गो मेँ प्रवाहित होते हए, अजगर के सदुश गति करते हुए प्रतीत होते ह । अनु = अनुकल, न कम, न अत्यधिक, जपि तु आवश्यकतानुसार बरसे । १. अथवा वर्षा ऋतु मं सूये को प्रखर रमियों द्वारा पीडित होकर समुद्र उछलता है । ६० मयवंवेदभाष्य काण्ड ४। अनु° ३ । सूक्त १५

English

Apart, Parjanya! let the troops of Maruts, roaring, swell the song. Let pouring torrents of the rain that raineth rain upon the earth. Up from the sea lift your dread might, ye Maruts: as light and splendour, send the vapour

अध्याय ४

श्लोक 14.5

अग्ने॒ प्रेहि॑ प्रथ॒मो दे॒वता॑नां॒ चक्षु॑र्दे॒वाना॑मु॒त मानु॑षानाम्।इय॑क्षमाणा॒ भृगु॑भिः स॒जोषाः॒ स्वऽर्यन्तु॒ यज॑मानाः स्व॒स्ति

agne prehi prathamo devatānāṃ cakṣurdevānāmuta mānuṣānām| iyakṣamāṇā bhṛgubhiḥ sajoṣāḥ sva'ryantu yajamānāḥ svasti

हिन्दी अर्थ

चमके, (दिशोदिशः) प्रत्येक दिशा मे (वाताः) मेघसंपृक्त वायुं (वान्तु) संचार करं । (मरुद्भिः) मानसून वायुओों द्वारा प्रच्युताः) मिरे (मेघाः) मेघ (पृथिवीमनु) प्रथिवी के अनुकूल होकर (संयन्तु) मिलकर गति करे, ६।१।१); आशाभ्यः, पद (२) । आशाः = स्व॑त्र स्थिति होने से । आशारेषी' (मन्त्र ६१ मेँ आशा पद भी व्यापकं दिशावाचक है । (सुदानवः) उत्तम जल प्रदान करने वाली मानसून वायु, (आपः) उत्साः) अजगर समान आकारवालेचङमेया नदी-नाले (सम्) मिलकर (वः)

English

upward! 41

अध्याय ४

श्लोक 14.6

अ॒जम॑नज्मि॒ पय॑सा घृ॒तेन॑ दि॒व्यं सु॑प॒र्नं प॑य॒सं बृ॒हन्त॑म्।तेन॑ गेष्म सुकृ॒तस्य॑ लो॒कं स्वऽरा॒रोह॑न्तो अ॒भि नाक॑मुत्त॒मम्

ajamanajmi payasā ghṛtena divyaṃ suparnaṃ payasaṃ bṛhantam| tena geṣma sukṛtasya lokaṃ sva'rārohanto abhi nākamuttamam

हिन्दी अर्थ

गिरे (मेघाः) मेघ (पृथिवीम्, अनु) पृथिवी की अनुकूलता में (प्रावन्तु) तुम्हा री प्रकष॑रूप मेँ रक्षा करं, अथवा पृथिवी को संतप्त करे । प्रच्युताः द्वारा यह् सूचित किया हैकि मेघ जलसेभरेहोनेसे भारी होते है, अतः वे गिर पडते ह, अन्तरिक्षस्थ वायुएं उनके थामने मे असमर्थ है । (तनूभिः) मेषरूपी तनुभों के साथ (संविदानः) एेकमत्य को प्राप्त हुई, (ओषधीनाम्) भओोषधियों कौ (अधिपाः) अधिष्ठातुरूप में रक्षक हुहै, मेचीय जल प्रदान कर, ओषधियों की 'जधिपाः' हुई है । विदयुत्-अग्नि सब

English

Let waters satisfy the earth, the voices of the great mist-enve- loped Bull who roareth. Roar, thunder, set the sea in agitation, bedew the ground with thy sweet rain, Parjanya! Send plenteous showers on him who seeketh shelter, and let the owner of lean kine go

अध्याय ४

श्लोक 14.7

पञ्चौ॑दनं प॒ञ्चभि॑र॒ङ्गुलि॑भि॒र्द॑र्व्योद्ध॑र पञ्च॒धैतमो॑द॒नम्।प्राच्यां॑ दि॒शि शिरो॑ अ॒जस्य॑ धेहि॒ दक्षि॑णायां दि॒शि दक्षि॑णं धेहि पा॒र्श्वम्

pañcaudanaṃ pañcabhiraṅgulibhirdarvyoddhara pañcadhaitamodanam| prācyāṃ diśi śiro ajasya dhehi dakṣiṇāyāṃ diśi dakṣiṇaṃ dhehi pārśvam

हिन्दी अर्थ

तथा द्युलोक से जल प्रदान करती है जोकि अमृतरूप है, 1 ( ५ शीघ्र म॒ल्युका कारण नहीं बनता । चुलोक से अमृतः स ध है सूये । अमृतम् उदकनाम (निघंटु १।१२ ) पाथिव जल भारीहं जलमय (७ र आ, ईरयन्) जल को प्रेरित कशता १ ( स जलाधार समुद्र को (अहैयाति) पीडित कर । (वृष्णः) वर्षा क (अदइवस्य) आदित्य का (रेतः) जलरूपी वीयं (प्र न व अ +अप: । अर्दयाति =-लेटि आट् । सलिल तो समुद्र की सम्प द। अदवो वहति सप्तनामा आदित्यः । सप्तास्म रङमयो रसानभि त 1

English

homeward. Let the boon Maruts, let the springs and coiling serpents tend! you well.

अध्याय ४

श्लोक 14.8

प्र॒तीच्यां॑ दि॒शि भ॒सद॒मस्य धेह्युत्त॑रस्यां दि॒श्युत्त॑रं धेहि पा॒र्श्वम्।ऊ॒र्ध्वायां॑ दि॒श्य॑१जस्यानू॑कं धेहि दि॒शि ध्रु॒वायां॑ धेहि पाज॒स्यऽम॒न्तरि॑क्षे मध्य॒तो मध्य॑मस्य

pratīcyāṃ diśi bhasadamasya dhehyuttarasyāṃ diśyuttaraṃ dhehi pārśvam| ūrdhvāyāṃ diśya1jasyānūkaṃ dhehi diśi dhruvāyāṃ dhehi pājasya'mantarikṣe madhyato madhyamasya

हिन्दी अर्थ

स्तन, गदी देवशब्दे (चुरादिः) । । १. वेदों में जड पदार्थो काभ व मी वर्णन प्रायः एसा होता है मानो कि वे चेतन ह । इसलिए वेदों के व्णंन चेतन की भावनाभों द्वारा मिधित होते है। इस भावना को सायणा- उछछल-कूद वेदा करता तथा उसे तरङ्कित करता रहता है । यह समृद्रका अदनहै, नी चीरपः सुज । वदन्तु पृरनिवाहवो मण्डूका इ्रिणानुं ॥१२॥

English

Urged by the Maruts let the clouds pour down their rain upon. the earth. Let lightning flash on every side: from all the regions blow the winds! Urged by the Maruts let the clouds pour down their rain upon the earth.

अध्याय ४

श्लोक 14.9

शृ॒तम॒जं शृ॒तया॒ प्रोर्णु॑हि त्व॒चा सर्वै॒रङ्गैः॒ संभृ॑तं वि॒श्वरू॑पम्।स उत् ति॑ष्ठे॒तो अ॒भि नाक॑मुत्त॒मं प॒द्भिश्च॒तुर्भिः॒ प्रति॑ तिष्ठ दि॒क्षु

śṛtamajaṃ śṛtayā prorṇuhi tvacā sarvairaṅgaiḥ saṃbhṛtaṃ viśvarūpam| sa ut tiṣṭheto abhi nākamuttamaṃ padbhiścaturbhiḥ prati tiṣṭha dikṣu

हिन्दी अर्थ

(अपः) जलो को (निषिजञ्चन् भवतु ) नितरां सीचता रह, अथवा निचली भूमि को सींचता रहे, (अपाम्) मेघस्य जलों के (ग्भंराः) गड़गडाते शब्द (रवसन्तु) प्राणवान् हो, प्रबल हों; (वरुण) है उदकाधिपति ! (अपः ) जलों को (नीचीः) नीचै को ओर (अवसुज) प्रेरित कर । (पृदिन बाहवः) शुध बाहुओंवाले अथवा नानावर्णोवाली बाहुभोवाले (मण्डकाः) मण्डक (इरिणा वाच॑ पजन्य जिन्वितां म मण्टुकां त्रवादिषुः ।१३॥ चाहिए एेसी विधि मन्त्र द्वारा सूचित होती है, तथा तदितर काल में वेदाङ्खों का अध्ययन करना चाहिए । मे बोल, उच्चैः शब्दोच्च(रण कर, (तादुरि) ह तानपूवेक उच्चारण करने-

English

May waters, lightning, cloud, and rain, boon springs and serpents tend you well. Urged by the Maruts let the clouds pour down their rain upon the earth.

अध्याय ४

श्लोक 15.1

वृष्टिः।१-१६ अथर्वा।१ दिशः, २-३ वीरुधः, ४ मरुत्पर्जन्यौ, ५-१० मरुतः आपः, ११ प्रजापतिः, स्तनयित्नुः, १२ वरुणः, १३-१५ मण्डूकाः पितरश्च, १६ वातः।त्रिष्टुप्, १-२, ५ विराड् जगति, ४ विराट् पुरस्ताद्बृहती, ७, १३ अनुष्टुप्, ९ पथ्यापङ्क्तिः, १० भुरिक्, १२ पञ्चपदानुष्टुब्गर्भा भुरिक्, १५ शंकुमत्यनुष्टुप्।स॒मुत्प॑तन्तु प्र॒दिशो॑ नभ॑स्वतीः॒ सम॒भ्राणि॒ वात॑जूतानि यन्तु ।म॒ह॒ऋ॒ष॒भस्य॒ नद॑तो॒ नभ॑स्वतो वा॒श्रा आपः॑ पृथि॒वीं त॑र्पयन्तु

vṛṣṭiḥ| 1-16 atharvā| 1 diśaḥ, 2-3 vīrudhaḥ, 4 marutparjanyau, 5-10 marutaḥ āpaḥ, 11 prajāpatiḥ, stanayitnuḥ, 12 varuṇaḥ, 13-15 maṇḍūkāḥ pitaraśca, 16 vātaḥ| triṣṭup, 1-2, 5 virāḍ jagati, 4 virāṭ purastādbṛhatī, 7, 13 anuṣṭup, 9 pathyāpaṅktiḥ, 10 bhurik, 12 pañcapadānuṣṭubgarbhā bhurik, 15 śaṃkumatyanuṣṭup| samutpatantu pradiśo nabhasvatīḥ samabhrāṇi vātajūtāni yantu | mahaṛṣabhasya nadato nabhasvato vāśrā āpaḥ pṛthivīṃ tarpayantu

हिन्दी अर्थ

पैरो को (विगृह्य) अलग-अलग करके, (दस्य मध्ये) कच्चे तालाब में (प्लवस्व) तैर, या गति कर। (मध्ये) हद के मध्य में (खण्वचे, खैमघे, तदुरि) है खण्वखा, खैमखा तथा तदुरी ! (वषेम्) वर्षा की (वनुध्वम्) तुम याचनाकरो। (पितरः) हे पितरो ! (मरुताम्) मानसून वायुओं के (मनः) मन को स्वानुकूल करना (इच्छत) चाहो । खण्वखा = 'खनियो' अर्थात् खुदे हदो मे 'वखा" गति करनेवाली भ्वादिः) हद में स्थिरता से गति करनेवाली मण्डूको । तदुरी तादुरी

English

May he who hath become the plants’ high regent, suiting our bodies, Agni of the Waters, May Jātavedas send us rain from heaven, Amrit and vital breath to earthly creatures. Sending up waters from the flood and ocean Prajapati move the sea to agitation!

अध्याय ४

श्लोक 15.2

समी॑क्षयन्तु तवि॒षाः सु॒दान॑वो॒ ऽपां रसा॒ ओष॑धीभिः सचन्ताम्।व॒र्षस्य॒ सर्गा॑ महयन्तु॒ भूमिं॒ पृथ॑ग् जायन्ता॒मोष॑धयो वि॒श्वरू॑पाः

samīkṣayantu taviṣāḥ sudānavo 'pāṃ rasā oṣadhībhiḥ sacantām| varṣasya sargā mahayantu bhūmiṃ pṛthag jāyantāmoṣadhayo viśvarūpāḥ

हिन्दी अर्थ

सप्त सप्त = “मूल प्रकृतिरविकृतिः, महदादयः प्रकृतिविकृतयः जोकि ज्ञान ओर कर्मके हेतुभूतं । तथाजौ मुत्युहो जाने पर भी जीवात्मा के साथ वर्तमान रहते है, ओर पूनजेन्मोंके बीजरूप होते है । सत्यमय- जीवन मँ ये, सत्यवादी को पूनजंन्मों से मक्त कर देते ह, उसका संग-त्याग (वरुण) है वरुण ! (एनम्) इसे (शतेन पाशैः) सौ फंदों दारा (अभि धेहि) तु बाध, (नृचक्षः) है नरः-नारियों पर दृष्टि रखनेवाले ! (अनृतवाक्) असत्यवक्ता (ते) तेरे फदो से (मा मोचि) न छटा रहे । (जाल्मः) असत्य ६८ मथरवेवेदभाष्य काण्ड ४ । अनु० ४। सूक्त १६

English

If a man stands or walks or moves in secret, goes to his lying- down or his uprising, What two men whisper as they sit together, King Varuna knows: he as the third is present. This earth, too, is King Varuna’s possession, and the high heaven whose ends are far asunder.

अध्याय ४

श्लोक 15.3

समी॑क्षयस्व॒ गाय॑तो॒ नभां॑स्य॒पां वेगा॑सः॒ पृथ॒गुद् वि॑जन्ताम्।व॒र्षस्य॒ सर्गा॑ महयन्तु॒ भूमिं॑ पृथ॑ग् जायन्तां वी॒रुधो॑ वि॒श्वरू॑पाः

samīkṣayasva gāyato nabhāṃsyapāṃ vegāsaḥ pṛthagud vijantām| varṣasya sargā mahayantu bhūmiṃ pṛthag jāyantāṃ vīrudho viśvarūpāḥ

हिन्दी अर्थ

पुष्पकोश (परिकृत्यमानः) सब गोर से कटा हुभा होकर रहता है । वरुण है “अपामधिपतिः” (अथवं० ५।२४४), अतः मन््रमे उदरका रोग अभिप्रेत हि, जलोदर 7708४ । इससे पेट फूल जाता किया है । जलोदर रोग मुख्य है, इसके अवान्तर दष्परिणामों को “शतेन एक गोलाकृतिकं बन्ध, होता है, जिसे किं वृन्त कहते ह । पुष्प के आभ्यन्तर की ओर निचले हिस्से मे गोलाकृतिक एक अल्पगतं होता है,

English

The loins of Varuna are both the oceans, and this small drop of water, too, contains him. If one should flee afar beyond the heaven, King Varuna would still be round about him.

अध्याय ४

श्लोक 15.4

ग॒णास्त्वोप॑ गायन्तु॒ मारु॑ताः पर्जन्य घो॒षिणः॒ पृथ॑क्।सर्गा॑ व॒र्षस्य॒ वर्ष॑तो॒ वर्ष॑न्तु पृथि॒वीमनु॑

gaṇāstvopa gāyantu mārutāḥ parjanya ghoṣiṇaḥ pṛthak| sargā varṣasya varṣato varṣantu pṛthivīmanu

हिन्दी अर्थ

विदश्य ; । यो देवो वरुणो यश्च मानुषः ॥८॥ (वरुणः) वारुण्य परिणाम है, (यः) जो (विदेश्यः) विविध देशो कँ जलोदर वारुण्य परिणाम है उन शतेन पाशे: अभि धेहि एनम्, मन्त्र ७; अथवा (असौ अमूष्यायण) वह् है अमुक गोत्रवालेः (अमूष्याः) तथा उस

English

Proceeding hither from the sky his envoys look, thousand-eyed, over the earth beneath them. All this the royal Varuna beholdeth, all between heaven and earth and all beyond them. The twinklings of men’s eyelids hath he counted. As one who plays throws dice he settles all

अध्याय ४

श्लोक 15.5

उदी॑रयत मरुतः समुद्र॒तस्त्वे॒षो अ॒र्को नभ॒ उत् पा॑तयाथ ।म॒ह॒ऋ॒ष॒भस्य॒ नद॑तो॒ नभ॑स्वतो वा॒श्रा आपः॑ पृथि॒वीं त॑र्पयन्तु

udīrayata marutaḥ samudratastveṣo arko nabha ut pātayātha | mahaṛṣabhasya nadato nabhasvato vāśrā āpaḥ pṛthivīṃ tarpayantu

हिन्दी अर्थ

१. बन्ध के कट जाने से पृष्य की पंखदिययां कटकर बिखर जाती है, अलग-अलग होकर पुत्र कापरिचयमाताकेनामद्राराभी होना चाहिए--यह सूचित (१-८) । शुक्रः । अपामागं ओषधिः देवता । अनुष्टुम् । (उज्जेष) रोगों पर विजय पाने के लिए (त्वा) तुक्च (ईशानम्,

English

things. Those fatal snares of thine which stand extended, threefold,

अध्याय ४

श्लोक 15.6

अ॒भि क्र॑न्द स्त॒नया॒र्दयो॑द॒धिं भूमिं॑ पर्जन्य॒ पय॑सा॒ सम॑ङ्धि ।त्वया॑ सृ॒ष्टं ब॑हु॒लमैतु॑ व॒र्षमा॑शारै॒षी कृ॒शगु॑रे॒त्वस्त॑म्

abhi kranda stanayārdayodadhiṃ bhūmiṃ parjanya payasā samaṅdhi | tvayā sṛṣṭaṃ bahulamaitu varṣamāśāraiṣī kṛśaguretvastam

हिन्दी अर्थ

प्राप्त करते टै । (ओषधे) है ओषधि ! दोषों का दहन करनेवाली ! (सवंस्मं) वाले भेषजरूप मे (चक्रे) मै करता हूं, यार्मैने कियाहै मानाहै। भेषज है अपामा" (मन्त्र ६,७,८) । सहदेवी (सायण, मन्त्र १) । सत्यजितं शपथयावं नीं सहमानां पुनःसराम् ।

English

O Varuna, seven by seven, May they all catch the man who tells a falsehood, and pass un- harmed the man whose words are truthful.

अध्याय ४

श्लोक 15.7

सं वो॑ऽवन्तु सु॒दान॑व॒ उत्सा॑ अजग॒रा उ॒त।म॒रुद्भिः॒ प्रच्यु॑ता मे॒घा वर्ष॑न्तु पृथि॒वीमनु॑

saṃ vo'vantu sudānava utsā ajagarā uta| marudbhiḥ pracyutā meghā varṣantu pṛthivīmanu

हिन्दी अर्थ

(सत्यजितम्) यथार्थरूप में विजय पानेवाली, (शपथयावनीम्) शपथ लेने की आदत को पथक् करनेवाली, हटानेवाली, (पूनःसराम्) वाली, (सहमानम्) व्धाधि को पराभरत करनेवाली 'सहदेवी' ओषधि का (समदि) ने आह्वान किया है, इस भोषधि के साथ (सर्वाः ओषधीः) सव जओषधियों को भी ताकि (नः) हमे, (इतः) इस व्याधि से, (पारयात्) प्रयोक्ता पार करे, (इति) इसलिए । शपथ स्वयं ली जाती है, ओर शाप दरसरे को दिया जाताहै। दूटी होती है । इस क्ूठ--आदत को सहदेवी, अन्य गोषधियों के साथ मिल- कर पृथक् करती है, हृटाती है ।

English

Varuna, snare him with a hundred nooses! Man’s watcher! let not him who lies escape thee. There let the villain sit with hanging belly and bandaged like a cask whose hoops are broken.

अध्याय ४

श्लोक 15.8

आशा॑माशां॒ वि द्यो॑ततां॒ वाता॑ वान्तु दि॒शोदि॑शः ।म॒रुद्भिः॒ प्रच्यु॑ता मे॒घाः सं य॑न्तु पृथि॒वीमनु॑

āśāmāśāṃ vi dyotatāṃ vātā vāntu diśodiśaḥ | marudbhiḥ pracyutā meghāḥ saṃ yantu pṛthivīmanu

हिन्दी अर्थ

(शशाप) शाप दिया है, (या) तथा जिसने (मूरम्) मूर्छलादक कर्मरूपी ७० अथवेवेदभाष्य काण्ड ४। अनु० ४1 सक्त १७ (अघम्) पापको (आदधे) धारण किया है, या अवलम्बित किया है, (या) जिसने कि (रसस्य हरणाय )रक्तादिरस के हरण करनेवाले के लिए ( जातम्) उत्पन्न हमारे पत्र को (आरेभे) बलात्कार से हथिया लिया है, (सा) वह (तोकम्) निज पृत्र को (अत्तु) खाये । शापो का वणेन हृ है शशाप' पद द्वारा तथा तोकम्, अत्तु सा! द्वारा। आरेभे आलेभे, रलयो रभेदः ये दोनों शाप गाली के रूपमे ह ।

English

Varuna sends, and drives away, diseases: Varuna is both native and a stranger, Varuna is celestial and is human. 42

अध्याय ४

श्लोक 15.9

आपो॑ वि॒द्युद॒भ्रं व॒र्षं सं वो॑ऽवन्तु सु॒दान॑व॒ उत्सा॑ अजग॒रा उ॒त।म॒रुद्भिः॒ प्रच्यु॑ता मे॒घाः प्राव॑न्तु पृथि॒वीमनु॑

āpo vidyudabhraṃ varṣaṃ saṃ vo'vantu sudānava utsā ajagarā uta| marudbhiḥ pracyutā meghāḥ prāvantu pṛthivīmanu

हिन्दी अर्थ

आमे मांसे कृत्यां यां चक्रुस्तयां कृत्याकृतो जहि ॥५॥ को, (नीललोहिते) धूमोत्थान द्वारा नील ओर ज्वाला द्वारा लोहित, अग्निम (चक्रुः) देषियों नेकियाहै; (आमे मसि) तथा घरके किसी मन्त्र मँ विष-प्रयोग तथा उसके करनेवालों का वर्णन हुभा है । आमे जमा गृहनाम (निघं० ३।४); अमे गृह्ये । मांसे == घर के किसी तादृश कृत्या के प्रयोग करने का निदंश किया है ।

English

I bind and hold thee fast with all these nooses, thou son of such a man and such a mother. All these do I assign thee as thy portion.

अध्याय ४

श्लोक 15.10

अ॒पाम॒ग्निस्त॒नूभिः॑ संविदा॒नो य ओष॑धीनामधि॒पा ब॒भूव॑ ।स नो॑ व॒र्षं व॑नुतां जा॒तवे॑दाः प्रा॒णं प्र॒जाभ्यो॑ अ॒मृतं॑ दि॒वस्परि॑

apāmagnistanūbhiḥ saṃvidāno ya oṣadhīnāmadhipā babhūva | sa no varṣaṃ vanutāṃ jātavedāḥ prāṇaṃ prajābhyo amṛtaṃ divaspari

हिन्दी अर्थ

स््रीजाति की होने से इन तीनों को मातरः' कहना उचित रहै, नकिं 'पितरः' । अथवा जैसे जड आदित्य को "पिता' कहा है (मन्त्र १२), वैसे निज तान-स्वरों द्वारा, मेधागमन ओौर वर्षाकी सूचनाएं देती रह, जिससे मण्डूकियों को पितरः कहा है । “मनः, इच्छत" ये पद कविता में प्रयुक्तं महान्तं कोशमुद॑ चाभि पिञ्च सविद्युतं भवत् वातु वात॑ः

English

Forth flow the moisture of the vigorous stallion! With this thy roar of thunder come thou hither,

अध्याय ४

श्लोक 15.11

प्र॒जाप॑तिः सलि॒लादा स॑मुद्रादाप॑ ई॒रय॑न्नुद॒धिम॑र्दयाति ।प्र प्या॑यतां॒ वृष्णो॒ अश्व॑स्य॒ रेतो॒ऽर्वाङे॒तेन॑ स्तनयि॒त्नुनेहि॑

prajāpatiḥ salilādā samudrādāpa īrayannudadhimardayāti | pra pyāyatāṃ vṛṣṇo aśvasya reto'rvāṅetena stanayitnunehi

हिन्दी अर्थ

समूद्रसे तू उद्-गत कर, उद्धृत कर, (अभिषिञ्च) ओर भूमि के अभिमुख ६४ मथर्वबेदभाष्य काण्ड ४1 अनु० २। सूक्त १५ विचुत्-सदहित हो, (वातः वातु) वायु वृष्टि के अनुकल बहे । बहुधा बहुत प्रकार से (विसृष्टाः) मेष सेपेदा हए जल (यज्ञम्) र (तन्वताम्) विस्तार करे, यजो के विस्तार के हेतु बने, (ओषधयः) ओर

English

Our father, Lord divine pouring the torrents. Let the streams breathe, O Varuna, of the waters. Pour the floods down: along the brooks and channels let frogs with speckled arms send out their voices.

अध्याय ४

श्लोक 15.12

अ॒पो नि॑षि॒ञ्चन्नसु॑रः पि॒ता नः॒ श्वस॑न्तु॒ गर्ग॑रा अ॒पां व॑रु॒णाव॒ नीची॑र॒पः सृ॑ज ।वद॑न्तु॒ पृश्नि॑बाहवो म॒ण्डूका॒ इरि॒णानु॑

apo niṣiñcannasuraḥ pitā naḥ śvasantu gargarā apāṃ varuṇāva nīcīrapaḥ sṛja | vadantu pṛśnibāhavo maṇḍūkā iriṇānu

हिन्दी अर्थ

वहत्रैपामधिष्टाता अन्तिकादिंव पश्यति । चलता-फिरता (तायन्) अपने को परिपालित (मन्यते) मानता है, (इदं सर्व॑म्) इस स्वको (देवाः) वरुण के पाशहस्त देव (विदुः) जानते है। पालित; चरन् = चलता-फिरता हआ कोर्ई जो दुष्कमं करता है ओर फिर भी अपने-आपको वह परिपालित अर्थात् सुरक्षित मानताहै, इस सबको वरुण के देव (मन्त्र ४, ६) जानते है) तायत् तायु सन्तानपालनयोः

English

They who lay quiet for a year, the Brāhmans who fulfil their vows. The frogs, have lifted up their voice, the voice Parjanya hath. inspired.

अध्याय ४

श्लोक 15.13

सं॒व॒त्स॒रं श॑शया॒ना ब्रा॑ह्म॒णा व्र॑तचा॒रिणः॑ ।वाचं॑ प॒र्जन्य॑जिन्वितां॒ प्र म॒ण्डूका॑ अवादिषुः

saṃvatsaraṃ śaśayānā brāhmaṇā vratacāriṇaḥ | vācaṃ parjanyajinvitāṃ pra maṇḍūkā avādiṣuḥ

हिन्दी अर्थ

(यः) जो कोई (तिष्ठति) खड़ा है, (चरति) या चल रहा है, (यः च) ओर जो (वञ्चति) धोखा देता है, (यः) जो (निलायम्, चरति) छ्पि- (मन्त्रयेते) गुप्त परिभाषण करते है, (वरुणः राजा ) जगत् का राजा वरूण, (तृतीयः) उनम तीसरा हआ, (तत् वेद्) उसे जानता है । उतो संमुद्रौ वरणस्य कुक्षी उताभिनसपं उदके निरीनः ॥३॥ ६६ भथववेदभाष्य काण्ड ४। अनु० ४। सूक्त १६

English

Speak forth a welcome, female frog! Do thou O frog, accost the rain. Stretch thy four feet apart, and swim in the middle of the lake. Khanvakhā, ho! Khaimakhā, ho! thou in the middle, Taduri!

अध्याय ४

श्लोक 15.14

उ॒प॒प्रव॑द मण्डूकि व॒र्षमा व॑द तादुरि ।मध्ये॑ ह्र॒दस्य॑ प्लवस्व वि॒गृह्य॑ च॒तुरः॑ प॒दः

upapravada maṇḍūki varṣamā vada tāduri | madhye hradasya plavasva vigṛhya caturaḥ padaḥ

हिन्दी अर्थ

(उत) तथा (इयम्, भुमिः) यह भूमि (वरुणस्य, राज्ञः) वरूण राजा की है, (उत) तथा (असौ) वह् बृहती (यौः) बडा द्युलोक वरुण राजा काहे, (दूरे अन्ता) दुर ओर समीप में विद्यमान द्यौः ओर पृथिवी वरुण राजाकेर्ह। (उतो) तथा (समूद्रौ) दो समृद्र (वरुणस्य) वरुण की मे (निलीनः) वह नितरां लीन हुआ-हुआ है । दूरे दूर में यौः, अन्ते, अन्तिके, समीप मे पुथिवी । “"दुरे-अन्ते द्यावा-पृथिवीनाम'' (निषं० ३।३०) । समुद्रौ पूवं ओर परिचम के समुद्र । अल्पे उदके उदक विन्दु मे। लीनः ली इलेषणे (क्रयादिः) लीङ् इलेषणे अतिक्रमण करके उससे भी परे चला जाय, (सः) वह् (वरुणस्य राज्ञः) वरुण

English

Fathers, enjoy the rain from one who strives to win the Marutes heart. Lift up the mighty cask and pour down water; let the wind blow, and lightnings flash around

अध्याय ४

श्लोक 15.15

खण्व॒खा३इ॒ खैम॒खा३इ॒ मध्ये॑ तदुरि ।व॒र्षं व॑नुध्वं पितरो म॒रुतां॒ मन॑ इछत

khaṇvakhā3i khaimakhā3i madhye taduri | varṣaṃ vanudhvaṃ pitaro marutāṃ mana ichata

हिन्दी अर्थ

राजा के फे से (न मुच्यातै) नहीं मुक्त हो सकता । (अस्य) इस वरूण के (सहस्राक्षाः) हजारो अखोंवाले (स्पशः) गुप्तचर (दिवः) चुलोक से अति) भूमि का भी अतिक्रमण करके (परयन्ति) देखते है । (वरुणः राजा) वरूण राजा (तद् सर्वम्) उस सवको (वि चष्टे) विवेकपूवंक देवता है, (यत्) जोकि (रोदसी) चुलोक ओौर पृथिवी के (जनानाम्) जनों के (निमिषः) निमेष-उन्मेष (अस्य) इस वरुण के

English

us. Let sacrifice be paid, and, widely scattered, let herbs and plants be full of joy and gladness. On the omnipresence and omniscience of Varuna

अध्याय ४

श्लोक 15.16

म॒हान्तं॒ कोश॒मुद॑चा॒भि षि॑ञ्च सविद्यु॒तं भ॑वतु॒ वातु॒ वातः॑ ।त॒न्वतां॑ य॒ज्ञं ब॑हु॒धा विसृ॑ष्टा आन॒न्दिनी॒रोष॑धयो भवन्तु

mahāntaṃ kośamudacābhi ṣiñca savidyutaṃ bhavatu vātu vātaḥ | tanvatāṃ yajñaṃ bahudhā visṛṣṭā ānandinīroṣadhayo bhavantu

हिन्दी अर्थ

जैसेकि (दवघ्नी) अपने भविष्य का हनन करनेवाला जूञा-खिलाडी, (अक्षान्) पासोंको आस्फार मे (नि मिनोति) फेकता है स्वविजय आरस्फार = क्रीडाफलक । इवः उपाशंसनीयः कालः (निरुक्त (वरुण) है वरुण ! (ते ये पाशाः) तेरे जो फंदे, (सप्त सप्त) सात- विशेषतया जो बंधे हुए हैँ, ओर जोकि (रुशन्तः) शरीर को हसित कर

English

The mighty Ruler of these worlds beholds as though from close at hand, The man who thinks he acts by stealth: all this the Gods perceive and know.

अध्याय ४

श्लोक 16.1

सत्यानृतसमीक्षकः।१-९ ब्रह्म।वरुणः, सत्यानृतान्वीक्षणम्।त्रिष्टुप्, १ अनुष्टुप्, ५ भुरिक्, ७ जगति, ८ त्रिपान्महाबृहती, विराण्नाम त्रिपाद्गायत्री।बृ॒हन्ने॑षामधिष्ठा॒ता अ॑न्ति॒कादि॑व पश्यति ।य स्ता॑यन्मन्य॑ते॒ चर॒न्त्सर्वं॑ दे॒वा इ॒दं वि॑दुः

satyānṛtasamīkṣakaḥ| 1-9 brahma| varuṇaḥ, satyānṛtānvīkṣaṇam| triṣṭup, 1 anuṣṭup, 5 bhurik, 7 jagati, 8 tripānmahābṛhatī, virāṇnāma tripādgāyatrī| bṛhanneṣāmadhiṣṭhātā antikādiva paśyati | ya stāyanmanyate carantsarvaṃ devā idaṃ viduḥ

हिन्दी अर्थ

म॒त्युदण्ड देकर इनके विनाश को सूचित किया है । (अनपत्यताम्) अपत्यकेन होने को, अभाव को, (अपामागं) है अपामागे मृज्महे) हटाकर शोधन करते हँ, अपने भापका शोधन करते है अगोताम् गौः वाङ्नाम (निषं० १।११), अगोप्ता है वाणी का पक्षाघात । अपामागे ओषधि है । इसके या इसके किसी योग का वणन

English

A charm to secure freedom from various evils We seize and hold thee, Conquering One! the queen of medi- cines that heal. O Plant, I have endowed thee with a hundred powers for every man,

अध्याय ४

श्लोक 16.2

यस्तिष्ठ॑ति॒ चर॑ति॒ यश्च॒ वञ्च॑ति॒ यो नि॒लायं॒ चर॑ति॒ यः प्र॒तङ्क॑म्।द्वौ सं॑नि॒षद्य॒ यन्म॒न्त्रये॑ते॒ राजा॒ तद् वे॑द॒ वरु॑णस्तृ॒तीयः॑

yastiṣṭhati carati yaśca vañcati yo nilāyaṃ carati yaḥ prataṅkam| dvau saṃniṣadya yanmantrayete rājā tad veda varuṇastṛtīyaḥ

हिन्दी अर्थ

सबको (अप मृज्महे) हटाकर, प्रथक् कर, आत्म-शोधन करते द । होना, इन्द्रियों को स्ववश न कर, उनके वशीभ्रूत हो जाना। अपामागया उसके योग सम्भवतः इस निमित्त सहायक हों । अपामा ओषध ! तु (सर्वासाम् ओषधीनाम्) सब ओषधियौं में से (एकः इत्) एक ही (वशी) व्याधि्यों का वशीकर्ताहै। (तेन) उसद्भवारा, है ७२ अथवंवेदभाष्य काण्ड ४। अनु० ४) भुक्त १८

English

Still conquering, banishing the curse, mighty, with thy reverted. bloom. Thee and all Plants have I invoked: Hence let it save us! was my prayer.

अध्याय ४

श्लोक 16.3

उ॒तेयं भूमि॒र्वरु॑णस्य॒ राज्ञ॑ उ॒तासौ द्यौर्बृ॑ह॒ती दू॒रेअ॑न्ता ।उ॒तो स॑मु॒द्रौ वरु॑णस्य कु॒क्षी उ॒तास्मिन्नल्प॑ उद॒के निली॑नः

uteyaṃ bhūmirvaruṇasya rājña utāsau dyaurbṛhatī dūreantā | uto samudrau varuṇasya kukṣī utāsminnalpa udake nilīnaḥ

हिन्दी अर्थ

करते हँ, (अथ) तदनन्तर (त्वम्) तू (अगदः) रोगरदहित हआ ( चर) विचर। योगिकाथं मे अपामागं द्वारा, सर्व॑रोगापहारी, शोधक परमेश्वर भी अभिप्रेतहो सकता है । परमेश्वर भेषज है, यथा “भेषजमसि भेषजं गवे कृणोमि सत्यमृतर्येऽरसाः स॑न्तु कृत्व॑रीः ॥१॥ (सूर्येण) सूये के (समम्) समान (ज्योतिः) ज्योति तेरे लिए हो,

English

She who hath cursed us with a curse, or hath conceived a murderous sin, Or seized our son to take his blood, may she devour the child she bare. What magic they have wrought for thee in dish unbaked or burnt dark-red,

अध्याय ४

श्लोक 16.4

उत यो द्याम॑ति॒सर्पा॑त् प॒रस्ता॒न्न स मु॑च्यातै॒ वरु॑णस्य॒ राज्ञः॑ ।दि॒व स्पशः॒ प्र च॑रन्ती॒दम॑स्य सहस्रा॒क्षा अति॑ पश्यन्ति॒ भूमि॑म्

uta yo dyāmatisarpāt parastānna sa mucyātai varuṇasya rājñaḥ | diva spaśaḥ pra carantīdamasya sahasrākṣā ati paśyanti bhūmim

हिन्दी अर्थ

मै तेरे लिए निदिष्ट करता हूं, (कृत्वरीः) इससे नाशकारिणी प्रवृत्तियां (अरसा सन्तु) रसरहित हो जायें, अर्थात् सूख जाये, असमर्थं हो जायें । यो देवाः कृत्यां कृत्वा हृराद विदुषो गृहम् । (देवाः) दिव्यगरणोवाले है राज्याधिकारियो ! (यः) जो (कृत्याम्) हिखक्रिया को (कृत्वा) करके (अविदुषः) अज्ञानी पुरूष के (गृहम्) धर को घर को छीन लिया जाय (दव) जैसेकि (धारः) दुग्धपायी (वत्सः) बछ्डा

English

What they have wrought in flesh undressed,—conquer the sorcerers therewith. Ill dream and wretchedness of life, Rākshasa, monster, stingy hags,

अध्याय ४

श्लोक 16.5

सर्वं॒ तद् राजा॒ वरु॑णो॒ वि च॑ष्टे॒ यद॑न्त॒रा रोद॑सी॒ यत् प॒रस्ता॑त्।संख्या॑ता अस्य नि॒मिषो॒ जना॑नाम॒क्षानि॑व श्व॒घ्नी नि मि॑नोति॒ तानि॑

sarvaṃ tad rājā varuṇo vi caṣṭe yadantarā rodasī yat parastāt| saṃkhyātā asya nimiṣo janānāmakṣāniva śvaghnī ni minoti tāni

हिन्दी अर्थ

हमा उसके पीच-पीछ (पद्यताम्) जाय या जातादहै। कीण्ड ४ । अनु० ४) सूक्त १८ अथवंवेदभाष्य ७६ (अमा) घर में घूसकर, (पाप्मानम्) पापकमं अर्थात् हिसरकमं चिता मे, (बहुलाः, अदमानः) बहुत पत्थर अर्थात् उनकी बौकछाड (फट्) फट्-फट् (करिक्रति) बार-बार अवाजं कर ।

English

All the she-fiends of evil name and voice, we drive away from us. Death caused by famine, caused by thirst, failure of children,. loss of kine, With thee, O Apāmārga, all this ill we cleanse and wipe away.

अध्याय ४

श्लोक 16.6

ये ते॒ पाशा॑ वरुण स॒प्तस॑प्त त्रे॒धा तिष्ठ॑न्ति॒ विषि॑ता॒ रुश॑न्तः ।छि॒नन्तु॒ सर्वे॒ अनृ॑तं॒ वद॑न्तं॒ यः स॑त्यवा॒द्यति॒ तं सृ॑जन्तु

ye te pāśā varuṇa saptasapta tredhā tiṣṭhanti viṣitā ruśantaḥ | chinantu sarve anṛtaṃ vadantaṃ yaḥ satyavādyati taṃ sṛjantu

हिन्दी अर्थ

एेये पापीको मारकर, उसे चितापर रखकर दग्ध करने का विधान मन्रमे हुआ है । साथ ही जलती चिता पर वृणाप्रदशंनार्थ, पत्थरों की बौछाडका भी कथन किया है, जिससे कि पत्थरों के परस्पर टकराने ते बार-बार फट्-फट् नाना आवाज उठे । उग्र पापकमं के लिए यह प्रिया-पत्नी कै स्वामी के लिए वापस प्रेषित कर दिया जातादहे। छायय--छो छेदने (दिवादिः) । चक्रुषे -करोतेलिटः क्वसुः, सब हिस्रक्रियाओं को (अदूदुषम्) दूषित कर दियाहै उन्हैँ विकृत कर दिया है, कार्यासिमथं कर दिया ह । (याम्) जिसेकि (चक्रुः) उन्होने किया है (क्षेत्रे) खेत में, (याम्) जिसे कि (गोषु) गौओं कौ गौशाला मे, (वा) या (याम्) जिसे (ते) तेरे (पुरुषेषु) पुरुषो मे, पुरुषसमाज में किया है ।

English

Death caused by thirst, death caused by stress of hunger, loss at play with dice, All this, O Apāmārga with thine aid we cleanse and wipe away.

अध्याय ४

श्लोक 16.7

श॒तेन॒ पाशै॑र॒भि धे॑हि वरुणैनं॒ मा ते॑ मोच्यनृत॒वाङ् नृ॑चक्षः ।आस्तां जा॒ल्म उ॒दरं॑ श्रंसयि॒त्वा कोश॑ इवाब॒न्धः प॑रिकृ॒त्यमा॑नः

śatena pāśairabhi dhehi varuṇainaṃ mā te mocyanṛtavāṅ nṛcakṣaḥ | āstāṃ jālma udaraṃ śraṃsayitvā kośa ivābandhaḥ parikṛtyamānaḥ

हिन्दी अर्थ

इस मन्त्र मेँ राजाके प्रति चिकित्सक का कथन है । चकारं भद्रमस्मभ्यमात्मने तपनं तु सः॥६॥ ५ काण्ड ४। अनुं० ४ । सूक्तं १६ (यः) जिसने (चकार) हिख्कमं किया है परन्तु (कर्त क ४६ , परन्तु (कर्तुम्) हिखकमं करने में पूर्णतया (न शशाक) नहीं समर्थं हृभा, सफल हु, त तु उसने

English

The Apāmārga is alone the sovran of all Plants that grow. With this we wipe away whate’er hath fallen on thee: go in health! A counter-charm against the incantations of enemies

अध्याय ४

श्लोक 16.8

यः स॑मा॒म्यो॒३वरु॑णो॒ यो व्या॒म्यो॒३यः सं॑दे॒श्यो॒३वरु॑णो॒ यो वि॑दे॒श्यः ।यो दै॒वो वरु॑णो॒ यश्च॒ मानु॑षः

yaḥ samāmyo3varuṇo yo vyāmyo3yaḥ saṃdeśyo3varuṇo yo videśyaḥ | yo daivo varuṇo yaśca mānuṣaḥ

हिन्दी अर्थ

(आत्मने) अपने लिए (सः तु) उसने तो (तपनम्) सन्ताप पैदा कर लिया है । हिल्रकमं करने वाला हमारी हिसा तो करने मे समर्थं नहीं हमा हुमा है, ओर उसके प्रति . सन्तापरूप हुमा है । वह भविष्य मेँ हमारे प्रति (अपामागेः) अपामागे ओषधि (अप मष्ट) रोग को जो (शपथः) शपथग्रहण की आदत है उसे (अप) पृथक् करे । (यातुधानीः ) दूसरों को यातना कष्ट पहुंचाने की प्रवृत्तियों को, (अह्) तथा (अप)

English

The moonlight equalleth the sun, night is the rival of the day. I make effectual power my help: let magic arts be impotent.

अध्याय ४

श्लोक 16.9

तैस्त्वा॒ सर्वै॑र॒भि ष्या॑मि॒ पाशै॑रसावामुष्यायणामुष्याः पुत्र ।तानु॑ ते॒ सर्वा॑ननु॒संदि॑शामि

taistvā sarvairabhi ṣyāmi pāśairasāvāmuṣyāyaṇāmuṣyāḥ putra | tānu te sarvānanusaṃdiśāmi

हिन्दी अर्थ

अपामा: अपमृज्यते रोगादिनिराकरणेन पुरुषः शो (यातुधानान्) यातना देने के विचारों को (अपमुञ को (अप) पृथक् कर ओौर पुरुष को विशृद्ध करके, (अपामा) है अपामार्गं समह् को (अप + पृथक् करके (मृज्महे) अपने को शुद्ध करते है। सुवत में राजा ओर अपामा मोषधि का मिधित वणेन हृभा है ।

English

Gods! if one make and bring a spell on some man’s house who knows it not, Close as the calf that sucks the cow may it revert and cling to him. When one puts poison in a dish of unbaked clay to kill a man,

अध्याय ४

श्लोक 17.1

अपामार्गः।१-८ शुक्रः।अपामार्गो वनस्पतिः।अनुषटुप्।ईशा॑णां त्वा भेष॒जाना॒मुज्जे॑ष॒ आ र॑भामहे ।च॒क्रे स॒हस्र॑वीर्यं॒ सर्व॑स्मा ओषधे त्वा

apāmārgaḥ| 1-8 śukraḥ| apāmārgo vanaspatiḥ| anuṣaṭup| īśāṇāṃ tvā bheṣajānāmujjeṣa ā rabhāmahe | cakre sahasravīryaṃ sarvasmā oṣadhe tvā

हिन्दी अर्थ

(वापिकम्) वर्षाकालोद्धव (नडम्) नड को आसानीसे काट दिया जाता है। वर्षाकालोद्भूत नड यतः गोला होता है अतः आसानीसे काटा जा सकता है । जामि पद जन्मसे सम्बन्धी का वाचके । यथा (जामये क्रिया करने का अनुमोदन किया है। (ना्षदेन) नृषद् है परमेश्वर, नर-नारियौ मे स्थित; नाषद हे, नृषद् का पुत्र, सम्भवतः अथर्वा ऋषि, जिसद्वारा कि अथववेवेद का आविभवि

English

It cracks when set upon the fire with the sharp sound of many stones. Endowed with thousand powers! adjure the bald and those with necks awry.

अध्याय ४

श्लोक 17.2

स॒त्य॒जितं॑ शपथ॒याव॑नीं॒ सह॑मानां पुनःस॒राम्।सर्वाः॒ सम॒ह्व्योष॑धीरि॒तो नः॑ पारया॒दिति॑

satyajitaṃ śapathayāvanīṃ sahamānāṃ punaḥsarām| sarvāḥ samahvyoṣadhīrito naḥ pārayāditi

हिन्दी अर्थ

ओषधि ! तू प्रोक्तः हुई है । (त्विषीमती) दीप्तिमती (सेना इव ) सेना के सदुश तू (एषि) गति करती है रक्ना्थं ; (तत्र) उस मनुष्य मे (भयम्) भय (न अस्ति) नहीं होता (यप्र) जिसमें ( ओषधे) है ओषधि ! (प्राप्नोषि) तु प्राप्त होती है । वेदादिशास्त्रो मेँ चारों ऋषियों के नाम पठित दं जिनके द्वारा चारों वेदों का आविर्भाव हृ है! ये चारों ऋषि परमेश्वर के मानस-पुत्र है, अ्मथूनी-सृष्टि के है । प्रतिसगे मे इन नामवाले चार ऋषियों द्वारा चारोंवेदोंका आविर्भाव होतादहै। चारों ऋषियों भौरचारोंवेदोंका नित्य सम्बन्ध है, अतः वर्णन एतिहासिक नहीं । नाषदेन परमेश्वर को ““ध्रुवसदं, "नृषदं, मनःसदम्; अप्सुसदं १. करीं साक्षात्, कहीं परम्परया ।

English

Back to its author turn the spell like a dear damsel to her friend! I with this Plant have ruined all malignant powers of witchery. The spell which they have laid upon thy field, thy cattle, or thy men.

अध्याय ४

श्लोक 17.3

या श॒शाप॒ शप॑नेन॒ याघं मूर॑माद॒धे।या रस॑स्य॒ हर॑णाय जा॒तमा॑रे॒भे तो॒कम॑त्तु॒ सा

yā śaśāpa śapanena yāghaṃ mūramādadhe| yā rasasya haraṇāya jātamārebhe tokamattu sā

हिन्दी अर्थ

२. यह् ओषधि ह परमेश्वर । इसलिए परमेद्वर को “भेषजम् ' कहा है । यथा “'भेष- ७६ अथवेवेदभाष्य काण्ड ४। मनु ४। सूक्त १६९ घुतसदं, व्योमसदम् ; पुथिवी सदं, अन्तरिक्षसद, दि विषदं; देव सदं, नाकसदम! कहा है (यजुः° €।२), अतः नाषद है अथर्वा ऋषि । नषद का पुत्र । क्रियाको दग्ध करती हुई तु है। (उत) तथा (पाकस्य) दुग्धपायी शिश

English

No power had he who wrought the spell: he hurt his foot, he broke his toe. His act hath brought us happiness and pain and sorrow to him- self.

अध्याय ४

श्लोक 17.4

यां ते॑ च॒क्रुरा॒मे पात्रे॒ यां च॒क्रुर्नी॑ललोहि॒ते।आ॒मे मां॒से कृ॒त्यां यां च॒क्रुस्तया॑ कृत्या॒कृतो॑ जहि

yāṃ te cakrurāme pātre yāṃ cakrurnīlalohite| āme māṃse kṛtyāṃ yāṃ cakrustayā kṛtyākṛto jahi

हिन्दी अर्थ

रोगजीवाणु का (हन्ता असि) हनन करनेवाला त् है। । मन्त्र मे अपामागं-भोषधि, तथा परमेदव र-भेषज, दोनों का, गौण- मुख्य भाव में वणेन हुआ है । पाकः = पिबतीति, दुगधपायी बालकः शिशुः । यददो देवा अरसुरास्त्वयाग्रं निरकरर्वत । (यत्) जो (अदः) उस पूवंकालमें (देवाः) देवों ने (त्वया) तेरे द्वारा (अग्र) प्रथम (असुरान्) असुरो का (निः अकवत) निराकरण किया, (ततः) तब से ( भोषधे) है ओषधि । (त्वम्) तु (अधि) अन्य ओषधियों की अधिष्ठात्री रूपमे (अपामागेः) अपामागे नाम से (अजायथाः) प्रकट हुई है ।

English

Let Apāmārga sweep away chronic disease and every curse, Sweep sorceresses clean away, and all malignant stingy hags. Sweep thou away the sorcerers, all stingy fiendish hags away.

अध्याय ४

श्लोक 17.5

दौष्व॑प्न्यं॒ दौर्जी॑वित्यं॒ रक्षो॑ अ॒भ्वऽमरा॒य्यः ।दु॒र्णाम्नीः॒ सर्वा॑ दु॒र्वाच॒स्ता अ॒स्मन्ना॑शयामसि

dauṣvapnyaṃ daurjīvityaṃ rakṣo abhva'marāyyaḥ | durṇāmnīḥ sarvā durvācastā asmannāśayāmasi

हिन्दी अर्थ

(अदादिः) । अपामागं पद, धात्वथं से, भोषधि तथा परमेदवरभेषज का रक्षसः द्वारा अचुर अभिप्रेत हैँ। (शतशाखा) है ओषधि ! तू सौ शाखाओंवाली है । (विभिन्द विविध असुरो तथा राक्षसो मन्व ४, ३ का भेदन करती है, (ते पिता)

English

All this, O Apāmārga, with thine aid we wipe away from us. Thou breakest ties of kith and kin, thou causest, too, relation- ship:

अध्याय ४

श्लोक 17.6

क्षु॒धा॒मा॒रं तृ॑ष्णामा॒रम॒गोता॑मनप॒त्यता॑म्।अपा॑मार्ग॒ त्वया॑ व॒यं सर्वं॒ तदप॑ मृज्महे

kṣudhāmāraṃ tṛṣṇāmāramagotāmanapatyatām| apāmārga tvayā vayaṃ sarvaṃ tadapa mṛjmahe

हिन्दी अर्थ

विविध असुरो तथा राक्षसो का भेदन करता है, हनन करता है । (यः) जो छिन्न-थिन्न कर । ( ) विविध रूप् मे ओषधि का वर्णेन हुमा है (सायण) । परमेरव र-भेषज' पक्ष मँ सात्विक करोधादि असुरो की विभेदिका हैँ । पिता है “तज्जपस्तद्थेभावनम् (योग

English

So bruise the sorcerer’s offspring, like a reed that groweth in the Rains. Thou hast been blessed with blessing by the Brāhman, Kanva

अध्याय ४

श्लोक 17.7

तृ॒ष्णा॒मा॒रं क्षु॑धामा॒रमथो॑ अक्षपराज॒यम्।अपा॑मार्ग॒ त्वया॑ व॒यं सर्वं॒ तदप॒ मृज्महे

tṛṣṇāmāraṃ kṣudhāmāramatho akṣaparājayam| apāmārga tvayā vayaṃ sarvaṃ tadapa mṛjmahe

हिन्दी अर्थ

पुनः उसका प्रवेश । इस द्वारा परमेडव र-भेषज प्रकट होता है। प्रकट होकर वह असुरो गौर राक्षसो का छेदन-मेदन कर देता है, जोकि हमारा उपक्षय पृथिव्याः" (यजुः० ३७।६) । धूपन ==धुर्थां देना या सन्तप्त करना ''धरप मू्तिभावेषु (तुदादिः) 1 आसुर-राक्षस भावना पेदा होकर भावनोत्पादकं को पीडित करती रहे तो उत्पादक किसी भी समय उस भावना से विरक्त तथा (वधम्) वध को (वरीयः) बहुत दूर (यावय) अलग कर

English

Nārshada. Thou fliest like a flashing dart: there is no fear or danger, Plant! within the limit of thy range.

अध्याय ४

श्लोक 17.8

अ॒पा॒मा॒र्ग ओष॑धीनां॒ सर्वा॑सा॒मेक॒ इद् व॒शी।तेन॑ ते मृज्म॒ आस्थि॑त॒मथ॒ त्वम॑ग॒दश्च॑र

apāmārga oṣadhīnāṃ sarvāsāmeka id vaśī| tena te mṛjma āsthitamatha tvamagadaścara

हिन्दी अर्थ

१. यजुः० ३।५६ । मन्मरोक्त असुर-राक्षस मानसिक विकाररूप ई विकृतिर्याँ ह । का निर्दे हमा है । जसे अपामागं के फलों के मुख प्रतीपमुखी होते है, वैसे शपथो भौर तज्जन्य दुःखरूपी फल को भी प्रतीपमुखी करने कौ भरथना हई है, न शपथे हों मौर न उनका दुःखरूपी फल ही मुक्ष प्राप्त हो । शपथ भौर अभिशाप भिन्न-भिन्न है । शपथे स्वयं ली जाती है, ओर अभिशाप परमेदवर-भेषज पक्ष म फलदायक परमेदवर है । वहु शपथ आदि करनेसे प्रतीपमूखीहो जाताहै, ओर दुःख तथा कष्टरूपी वध को प्राप्त

English

Illumining, as ‘twere, with light, thou movest at the head of plants. The saviour of the simple man art thou, and slayer of the fiends.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Atharva Veda — Chapter 4
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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