Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
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अध्याय 5 / 20

Kanda 5

काण्ड 5

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पूर्ण अध्याय पाठ165 श्लोक

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अध्याय ५

श्लोक 1.1

अमृतासुः।१-९ बृहद्दिवोऽथर्वा।वरुणः।त्रिष्टुप्, ५ पराबहती त्रिष्टुप्, ७ विराट्, ९त् त्र्यवसाना षट्-पदा अत्यष्टिः।ऋध॑ङ्मन्त्रो॒ योनिं॒ य आ॑ब॒भूवामता॑सु॒र्वर्ध॑मानः सु॒जन्मा॑ ।अद॑ब्धासु॒र्भ्राज॑मा॒नोऽहे॑व त्रि॒तो ध॒र्ता दा॑धार॒ त्रीणि॑

amṛtāsuḥ| 1-9 bṛhaddivo'tharvā| varuṇaḥ| triṣṭup, 5 parābahatī triṣṭup, 7 virāṭ, 9t tryavasānā ṣaṭ-padā atyaṣṭiḥ| ṛdhaṅmantro yoniṃ ya ābabhūvāmatāsurvardhamānaḥ sujanmā | adabdhāsurbhrājamāno'heva trito dhartā dādhāra trīṇi

हिन्दी अर्थ

अद॑न्धासुर्थराजमानीऽहैव चितो पर्ता दाधार त्रीणि ॥१॥ (योनिम्) प्रकृतिरूपी योनि मे (भावभूव) प्रकट दूजा (अमृतासुः) अमृत- अहिसित अर्थात् अमर प्रज्ञावाला है, (अहा =-अहानि, इव) दिनों के सदुश ञ्रायो धर्मणि प्रथमः ससाद ततौ वर्पूषि कृष पुरूणि । धास्यर्योनि प्रथम आ विवेदा यो वाचमनुंदिधं चिकेतं ॥२॥

English

A glorification of Trita and Varuna He who with special plans and deathless spirit, waxing, well- born, hath come unto his birth place,

अध्याय ५

श्लोक 1.2

आ यो धर्मा॑णि प्रथ॒मः स॒साद॒ ततो॒ वपूं॑षि कृणुषे पु॒रूणि॑ ।धा॒स्युर्योनिं॑ प्रथ॒म आ वि॑वे॒शा यो वाच॒मनु॑दितां चि॒केत॑

ā yo dharmāṇi prathamaḥ sasāda tato vapūṃṣi kṛṇuṣe purūṇi | dhāsyuryoniṃ prathama ā viveśā yo vācamanuditāṃ ciketa

हिन्दी अर्थ

र! तू (पुरूणि) बहुत (वपूषि) प्राणशरीरो को (कृणुषे) षेदा । ध सबका धारण करनेवाला प्रथमः) प्राथमिक परमेश्वरं (योनिम) प्रकृतिरूपी योनि मे (आविवेश) प्रविष्ट है, (यः) जं ् व वाणी को (चिकेत) सम्यक्तया जानता है । १६४ अथरवेवेदमाष्य काण्ड ५। अनु° १। सक्त £ जो जानता है, अर्थात् उसके मन मं क्या विचारहै, उसेनकहेतो भी वहं

English

As he who shines upholds the days, thus Trita, of pure life, bears the Three as their supporter. He who, the first, approached the holy statutes makes, after, many beauteous forms and

अध्याय ५

श्लोक 1.3

यस्ते॒ शोका॑य त॒न्वंऽ रि॒रेच॒ क्षर॒द्धिर॑ण्यं॒ शुच॒योऽनु॒ स्वाः ।अत्रा॑ दधेते अ॒मता॑नि॒ नामा॒स्मे वस्त्रा॑णि॒ विश॒ एर॑यन्ताम्

yaste śokāya tanvaṃ' rireca kṣaraddhiraṇyaṃ śucayo'nu svāḥ | atrā dadhete amatāni nāmāsme vastrāṇi viśa erayantām

हिन्दी अर्थ

नाम=-नामानि।), अमृतः नामों को (दधेते) धारण करते ह, उन नामोंका प्रच्छदन-दहै प्राणकोवलसे, शरीर से बाहर फंकना । सके द्वारा शरीर की शुद्धि हो जाती है, ओर चित्तवृत्तियों का निरोध तथा पवित्रता होकर, काल के परमेडवर कौ ओर (प्रगुः) प्रगति करते ह, उस परमेश्वर की ओर जोक्रि (शुषरय कविः) सुख का उपदेष्टा है, तब (रिहाणे) दुग्ध देनेव संसार-रथ कौ धुरा का वहन करनेवाले (पतिम्) सर्वरक्षक पति कं (एरयेथाम्) तुम भी प्रेरित करती हो, या प्रेरित कसो ।

English

figures. Eager to drink, his birth-place first he entered who understands the word when yet unspoken.

अध्याय ५

श्लोक 1.4

प्र यदे॒ते प्र॑त॒रं पू॒र्व्यं गुः सदः॑सद आ॒तिष्ठ॑न्तो अजु॒र्यम्।क॒विः शु॒षस्य॑ मा॒तरा॑ रिहा॒णे जा॒म्यै धुर्यं॒ पति॒मेर॑येथाम्

pra yadete prataraṃ pūrvyaṃ guḥ sadaḥsada ātiṣṭhanto ajuryam| kaviḥ śuṣasya mātarā rihāṇe jāmyai dhuryaṃ patimerayethām

हिन्दी अर्थ

अमृतनाम ---अमृत परमेरवर के नाम मरम के “अ, उ, म्" द्वारा नििष्टना ३. प्र्छदन है आध्यात्मिकं विरेचन । । दो मातां हैँ यौः ओर पृथिवी । ये खाने-पीने के लिए स्वादु अन्न आओरवपेयदेरहीहँ) इनदोकी रचनाओं को देखकर रचयिता परमेरवर

English

He who—the fluid gold, with radiant kinsmen—to fervent glow delivered up thy body, On him both set names, that shall live for ever: to him the regions shall send robes to clothe

अध्याय ५

श्लोक 1.5

तदू॒ षु ते॑ म॒हत् पृ॑थुज्म॒न् नमः॑ क॒विः काव्ये॑न कृणोमि ।यत् स॒म्यञ्चा॑वभि॒यन्ता॑व॒भि क्षामत्रा॑ म॒ही रोध॑चक्रे वावृ॒धेते॑

tadū ṣu te mahat pṛthujman namaḥ kaviḥ kāvyena kṛṇomi | yat samyañcāvabhiyantāvabhi kṣāmatrā mahī rodhacakre vāvṛdhete

हिन्दी अर्थ

(पथज्मन्) है विस्तृत पथिवीवाले परमेश्वर ! (ते) तैरे लिए, कविः) मेँ कवि, (काव्येन) वेदकान्य हारा (सु) युष्ट्पूवंक (ऊउ) धचक्रे) किनारोंके दो चक्र, (अत्र) इस सृष्टि, ( ॥ सम्मुख गति करते हुए, (वावृते) निज ह सूर्य, दूसरे किनारे पर है पृथिवी का उपग्रह्, चच्छमा। ये दोकिनारेर सौरमण्डल के, न किं ब्रह्माण्ड के ।

English

him, As these have gone to their primeval station, each gaining an imperishable dwelling,

अध्याय ५

श्लोक 1.6

स॒प्त म॒र्यादाः॑ क॒वय॑स्ततक्षु॒स्तासा॒मिदेका॑म॒भ्यंऽहु॒रो गा॑त्।आ॒योर्ह॑ स्क॒म्भ उप॑मस्य नी॒डे प॒थां वि॑स॒र्गे ध॒रुणे॑षु तस्थौ

sapta maryādāḥ kavayastatakṣustāsāmidekāmabhyaṃ'huro gāt| āyorha skambha upamasya nīḍe pathāṃ visarge dharuṇeṣu tasthau

हिन्दी अर्थ

क उसका उल्लंघन करता हुभा (गात्) जो जाता है, (अंहु रः) वह पापीहोजाताहै। वह पापी उस परमेश्वर को प्राप्त नहीं होता जो उपमा रूप आदित्य के (नीडे) समीपस्थ ह, (धरूणेष् ) ओर धारक पदार्थो में परमेश्वर । आयवः मनुष्यनाम (निषं० २।३) । उपमस्य --यथा आदित्यः धारी, (कृण्वन् ) सत्कर्मो को करता हुआ (एमि) मै आता हूं संसार म.

English

May kissing mothers of the bards’ beloved bring the pole-draw- ing husband to the sister. By holy wisdom I a sage, Far-Strider! offer to thee this lofty adoration.

अध्याय ५

श्लोक 1.7

उ॒तामृता॑सु॒र्व्रत॑ एमि कृ॒न्वन्नसु॑रा॒त्मा त॒न्व॑१स्तत् सु॒मद्गुः॑ ।उ॒त वा॑ श॒क्रो रत्नं॒ दधा॑त्यू॒र्जया॑ वा॒ यत् सच॑ते हवि॒र्दाः

utāmṛtāsurvrata emi kṛnvannasurātmā tanva1stat sumadguḥ | uta vā śakro ratnaṃ dadhātyūrjayā vā yat sacate havirdāḥ

हिन्दी अर्थ

मे (सुमद गुः) उत्तमता तथा हषेपूव॑क गत्ति करता हं । (उत वा) तथा तब जो हविः है, उसके साथ, (हविर्दाः) हविः का देनेबाला परमेदवर, (सचते) । मेरे साथ सम्बद्ध होता है। सत्कर्म करता है, ओौर सत्कमं करता हआ संसारमें पुनः-पुनः अता है । ॥ वह तनु में गति प्रदान करता है। एसे व्यविति को परमेदवर सद्गुण प्रदान , (पितरम्) परमेश्व र-पिता कौ (ईडे) स्तुति ओर उसका आह्वान करता

English

This worship both the mighty eddying rivers, coming together to this station, heighten. Seven are the pathways which the wise have fashioned: to one of these may come the

अध्याय ५

श्लोक 1.8

उ॒त पु॒त्रः पि॒तरं॑ क्ष॒त्रमी॑डे ज्ये॒ष्ठं म॒र्याद॑मह्वयन्त्स्व॒स्तये॑ ।दर्श॒न् नु ता व॑रुण॒ यास्ते॑ वि॒ष्ठा आ॒वर्व्र॑ततः कृणवो॒ वपूं॑षि

uta putraḥ pitaraṃ kṣatramīḍe jyeṣṭhaṃ maryādamahvayantsvastaye | darśan nu tā varuṇa yāste viṣṭhā āvarvratataḥ kṛṇavo vapūṃṣi

हिन्दी अर्थ

के लिए (वरुण) है वरणीय ! परमेश्वर ! (याः) जो (ते) तेरी (विष्ठाः) देखता हं, (आवत्रेततः) मावृत्ति-करम से (वपुषि) प्राणियों के शरीरो को । प्राणि-सृष्टि । त्रितः (मन्त १) ही वरुण है । गरधरमप्र॑न पय॑सा पृणक््र्धेनं शुष्म वधंसे अमुर ।

English

troubled mortal. On sure ground where the ways are parted standeth Life’s Pillar in the dwelling of the

अध्याय ५

श्लोक 1.9

अ॒र्धम॒र्धेन॒ पय॑सा पृणक्ष्य॒र्धेन॑ शुष्म वर्धसे अमुर ।अविं॑ वृधाम श॒ग्मियं॒ सखा॑यं॒ वरु॑णं पु॒त्रमदि॑त्या इषि॒रम्।क॒वि॒श॒स्तान्य॑स्मै॒ वपूं॑ष्यवोचाम॒ रोद॑सी सत्य॒वाचा॑

ardhamardhena payasā pṛṇakṣyardhena śuṣma vardhase amura | aviṃ vṛdhāma śagmiyaṃ sakhāyaṃ varuṇaṃ putramadityā iṣiram| kaviśastānyasmai vapūṃṣyavocāma rodasī satyavācā

हिन्दी अर्थ

साथ सम्पुक्त है, सम्पकं करता है 1 (शुष्म) है बलरूप 1, (अमुर) है र । कवि द्वारा प्रोक्त (वपूंषि) इसके रूपों का (मवोचाम हमने कथन किया है, (रोदसी) पृथिवी मौर चुलोक भी (सत्यवाचा = सत्यवाचौ ) सत्यस्वरूप दारा परमेडवर का भान होता है, अतः वह् प्रकृति का पत्र न र क बूष 3 स प्रकृति ओर जीवात्माकेमेल से जीवात्मा के १ होते हैः वसे प्रकृति ओर परमेश्वर के मेल से परमेश्वर के वपूंषि होतेर्हैः

English

Highest. Working, I go my way with deathless spirit: life, spirit, bodies have gone gladly thither.

अध्याय ५

श्लोक 2.1

भुवनेषु ज्येष्ठः।१-९ बृहद्दिवोऽथर्वा।वरुणः।त्रिष्टुप्, ९ भुरिक् परातिजागता त्रिष्टुप्।तदिदा॑स॒ भुव॑नेषु॒ ज्येष्ठं॒ यतो॑ यज्ञ उ॒ग्र स्त्वे॒षनृ॑म्णः ।स॒द्यो ज॑ज्ञा॒नो नि रि॑णाति॒ शत्रू॒ननु॒ यदे॑नं॒ मद॑न्ति॒ विश्व॒ ऊमाः॑

bhuvaneṣu jyeṣṭhaḥ| 1-9 bṛhaddivo'tharvā| varuṇaḥ| triṣṭup, 9 bhurik parātijāgatā triṣṭup| tadidāsa bhuvaneṣu jyeṣṭhaṃ yato yajña ugra stveṣanṛmṇaḥ | sadyo jajñāno ni riṇāti śatrūnanu yadenaṃ madanti viśva ūmāḥ

हिन्दी अर्थ

इत् आस) वह ही ब्रह्म था (भुवनेषु) सब भुव ् १६८ काण्ड ५। अनु° १। सूक्त २ करताहै, (यत्) जबकि (विर्वे ऊमाः) सब रक्षकगण (एनम् अनु) इस , ॑ : कर्मनाम, ऋतुः प्रज्ञानाम (निष क. २ ष

English

Aye, Sakra also gives his gift of treasure as when the sacrificer meets with power. Yea, the son asks dominion of his father: this they declared the noblest path to welfare.

अध्याय ५

श्लोक 2.2

वा॒वृ॒धा॒नः शव॑सा॒ भूर्यो॑जाः॒ शत्रु॑र्दा॒साय॑ भि॒यसं॑ दधाति ।अव्य॑नच्च व्य॒नच्च॒ सस्नि॒ सं ते॑ नवन्त॒ प्रभृ॑ता॒ मदे॑षु

vāvṛdhānaḥ śavasā bhūryojāḥ śatrurdāsāya bhiyasaṃ dadhāti | avyanacca vyanacca sasni saṃ te navanta prabhṛtā madeṣu

हिन्दी अर्थ

पूव पैदा हो जानि पर तीन-तीन । आदश गृहस्थी के लिए एक पु आदित्य कौ निरन्तर (मदन्ति) स्तुति करते हैं । वाला अथात् महा-ओजस्वी, (शत्रुः) शातन करनेवाला आदित्य, (दासाय) उपक्षीण होनेवाले मेव के लिए (भियसम्) भय (दधाति) धारण करता है । वे (संनवन्त) मिलकर (हे जआदित्यरूप) तेरी स्तुति करते है ।

English

Varuna, let them see thy revelations: display the wondrous shapes of times to follow. Halt with the milk, its other half, thou minglest and with that half, strong! unbeguiled!

अध्याय ५

श्लोक 2.3

त्वे क्रतु॒मपि॑ पृञ्चन्ति॒ भूरि॒ द्विर्यदे॒ते त्रिर्भव॒न्त्यूमाः॑ ।स्वा॒दोः स्वा॒दीयः॑ स्वा॒दुना॑ सृजा॒ सम॒दः सु मधु॒ मधु॑ना॒भि यो॑धीः

tve kratumapi pṛñcanti bhūri dviryadete trirbhavantyūmāḥ | svādoḥ svādīyaḥ svādunā sṛjā samadaḥ su madhu madhunābhi yodhīḥ

हिन्दी अर्थ

का नकि जड़ आदित्य का। यथा “योऽसावादित्ये पुरुषः सोऽसावहम् । तीन-तीन हो जाति, (ऊमाः) जर प्राणिमात्र के रक्षक हो जाते ह । ह स्वादु के साथ, (सम् सृज) संसग कर । (अदः) उस (सुमधू) उत्तम मधु को (मधुना) मघु के साथ (अभि योधीः) साक्षात् मिश्रित कर । माना, जोकि उत्तराधिकारी हो सके । ऊमा-अ त (० लिए पञ्चमहायज्ञ का विधान है पञ्च महायज्ञो से गृ

English

increasest. Let us exalt the gracious friend, the mighty, Varuna son of-Aditi, strength-giver.

अध्याय ५

श्लोक 2.4

यदि॑ चि॒न्नु त्वा॒ धना॒ जय॑न्तं॒ रणे॑रणे अनु॒मद॑न्ति॒ विप्राः॑ ।ओजी॑यः शुष्मिन्त्स्थि॒रमा त॑नुष्व॒ मा त्वा॑ दभन् दु॒रेवा॑सः क॒शोकाः॑

yadi cinnu tvā dhanā jayantaṃ raṇeraṇe anumadanti viprāḥ | ojīyaḥ śuṣmintsthiramā tanuṣva mā tvā dabhan durevāsaḥ kaśokāḥ

हिन्दी अर्थ

कीसेवा करते है,परन्तु मोक्च का सुख इसने भौ अधिक स्वादु है । मोक्षसुख के साथ-साथ सांसारिक सुख का संसगे अर्थात् मेल कर का सि रूप मोक्षसुख के साथ अ तथा मधरूप सांसारिक सुख का मिश्रण मू न व गृहस्थी के लिएु उपदेश है । अभियोधी ; = अभि र व है । अमियोधीः --अभि यो + धीः (हेधिः ) । विसर्गान्तदीधः

English

We have told him the marvels sung by poets. The utterance of Heaven and Earth is truthful. A glorification of Indra

अध्याय ५

श्लोक 2.5

त्वया॑ व॒यं शा॑शद्महे॒ रणे॑षु प्र॒पश्य॑न्तो यु॒धेन्या॑नि॒ भूरि॑ ।चो॒दया॑मि त॒ आयु॑धा॒ वचो॑भिः॒ सं ते॑ शिशामि॒ ब्रह्म॑णा॒ वयां॑सि

tvayā vayaṃ śāśadmahe raṇeṣu prapaśyanto yudhenyāni bhūri | codayāmi ta āyudhā vacobhiḥ saṃ te śiśāmi brahmaṇā vayāṃsi

हिन्दी अर्थ

मे, (धना जयन्तम्) मासुरी सम्पत्ति को जीतते 4 (9 ) ५ ४ रावी लोग (अनुमदन्ति) अनुभोदन करते है, तो (शुष्मिन् ॥ क शनी धनुष् को (स्थिरम्) स्थिर सूप मे (५ व ताने रख, ताकि (दुरेवासः) दुभेतिवाले, (कशोकाः) दुरति के निव त्वा) तुजे (मा दभन्) हिसित न कर। ॥ = ४ ८१२ ओौर सांसारिक मार्गं इन दोनों पर चलते हुए ५ ३ (षर २।७। २५) कशोकाः =-कश (गति, दुगंति) ओकस घर । अन्यत्र पाठ है "यातुधाना दुरेवाः" । “रणे-रणे” मे द्विरुक्ति है । ध मे

English

In all the worlds That was the best and highest whence sprang the Mighty One of splendid valour.

अध्याय ५

श्लोक 2.6

नि तद् द॑धि॒षेऽव॑रे॒ परे॑ च॒ यस्मि॒न्नावि॒थाव॑सा दुरो॒णे।आ स्था॑पयत मा॒तरं॑ जिग॒त्नुमत॑ इन्वत॒ कर्व॑राणि॒ भूरि॑

ni tad dadhiṣe'vare pare ca yasminnāvithāvasā duroṇe| ā sthāpayata mātaraṃ jigatnumata invata karvarāṇi bhūri

हिन्दी अर्थ

दूनकी पराजय के लिए नाना प्रकार के युद्ध करने होतेर्हैः ओर नान १७० अथर्ववेद माध्यं काण्ड ५।अनु° १। सूक्त २ ¦ उपन्यास को न पढ़ना, कामोहीपक दुश्यों को न देखना, न कामोदीपक रागौँको सुनना आदि। इसी प्रकार अन्य आसूरी भावम भी इनपरे देवासूर-संग्रामों मे (शाशद्महे) आसुरभावोंका ध ५ ॥

English

As soon as born he overcomes his foemen, when those rejoice in him who bring him succour. Grown mighty in his strength, with ample vigour, he as a foe strikes fear into the Dāsa,

अध्याय ५

श्लोक 2.7

स्तु॒ष्व व॑र्ष्मन् पुरु॒वर्त्मा॑नं॒ समृभ्वा॑णमि॒नत॑ममा॒प्तमा॒प्त्याना॑म्।आ द॑र्शति॒ शव॑सा॒ भूर्यो॑जाः॒ प्र स॑क्षति प्रति॒मानं॑ पृथि॒व्याः

stuṣva varṣman puruvartmānaṃ samṛbhvāṇaminatamamāptamāptyānām| ā darśati śavasā bhūryojāḥ pra sakṣati pratimānaṃ pṛthivyāḥ

हिन्दी अर्थ

(ते) तेरे (वयांसि) आध्यात्मिक बाणो को (सं १०।२७।२२) “वयः विरिति शकुनिनाम वेतेमतिकर्मणः। अथा आ स्थापयत मातरं जिगस्तुमतं इन्वत कर्वराणि भूरिं ॥६॥ ॥ हे परमेश्वर ! (अवरे, परे च) अवरलोक तथा पर के (यस्मिन् दुरोणे) जिस घरमे (अवसा) उस-उसकी रक्षाकी न (आविथ) तू प्रविष्ट हुमा-हजा है, उस घरमें रहकर तू (तत्) उसे (नि दधिषे) नितरां धारण करता है । है मनुष्यो 1 (जिगलनुम्) सर्वगत या 8 उस पारमेश्वरी (मातरम्) माताको (आ स्थापयत) तुम

English

Eager to win the breathing and the breathless: All sang thy praise at banquet and oblation. All concentrate on thee their mental vigour what time these, twice or thrice, are thine

अध्याय ५

श्लोक 2.8

इ॒मा ब्रह्म॑ बृ॒हद्दि॑वः कृणव॒दिन्द्रा॑य शू॒षम॑ग्रि॒यः स्व॒र्षाः ।म॒हो गो॒त्रस्य॑ क्षयति स्व॒राजा॒ तुर॑श्चि॒द् विश्व॑मर्णव॒त् तप॑स्वान्

imā brahma bṛhaddivaḥ kṛṇavadindrāya śūṣamagriyaḥ svarṣāḥ | maho gotrasya kṣayati svarājā turaścid viśvamarṇavat tapasvān

हिन्दी अर्थ

वयांसि == वाण । यथा "ततो वयः प्रपतान् पुरुषादः'” (ऋ ¦ दशंति) सब आसुर भावोंको विदी्णं कर देताहै मौर (पथिव्याः) भासमान ओर आदित्यररमियों कौ तरह प्रकाशमान षरभेरवर । आप्तम् = जौर इनमे से प्रत्येक अपने-अपने मागं पर गति कररहारहै, ओर परस्पर टकराते

English

assistants, Blend what is sweeter than the sweet with sweetness win quickly with our meath that meath

अध्याय ५

श्लोक 2.9

ए॒वा म॒हान् बृ॒हद्दि॑वो॒ अथ॒र्वावो॑च॒त् स्वां त॒न्व॑१मिन्द्र॑मे॒व।स्वसा॑रौ मात॒रिभ्व॑री अरि॒प्रे हि॒न्वन्ति॑ चैने॒ शव॑सा व॒र्ध॑य॑न्ति च

evā mahān bṛhaddivo atharvāvocat svāṃ tanva1mindrameva| svasārau mātaribhvarī aripre hinvanti caine śavasā vardhayanti ca

हिन्दी अर्थ

नामपदोको ऋषिके रूपमे अनुक्रमणिका आदिमे कहारैः ये सब काल्पनिक, १७२ शथवंवेदभाष्य काण्ड ५।अनु० १। सूक्त र रदिमयों के पालक सूयं मे (क्षयति) निवास करताहै, ओर (तपस्वान्) विश्व मेँ (अणंवत्) ग्याप्त हो जाता है।

English

in battle. If verily in every war the sages joy and exult in thee who win- nest treasures,

अध्याय ५

श्लोक 3.1

विजयाय प्रार्थना।१-११ बृहद्दिवोऽथर्वा।१-२ अग्निः, ३-४ देवाः, ५ द्रविणोदाः, ६ देवीः, ७ सोमः, ८,११ इन्द्रः, ९ धाता, विधाता, सविता, आदित्याः. रुद्राः, अश्विनौ, १० आदित्याः, रुद्राः।त्रिष्टुप्, २ भुरिक्, १० विराड्-जगती।ममा॑ग्ने॒ वर्चो॑ विह॒वेष्व॑स्तु व॒यं त्वेन्धा॑नास्त॒न्वंऽपुषेम ।मह्यं॑ नमन्तां प्र॒दिश॒श्चत॑स्रस्त्वयाध्य॑क्षेण॒ पृत॑ना जयेम

vijayāya prārthanā| 1-11 bṛhaddivo'tharvā| 1-2 agniḥ, 3-4 devāḥ, 5 draviṇodāḥ, 6 devīḥ, 7 somaḥ, 8,11 indraḥ, 9 dhātā, vidhātā, savitā, ādityāḥ. rudrāḥ, aśvinau, 10 ādityāḥ, rudrāḥ| triṣṭup, 2 bhurik, 10 virāḍ-jagatī| mamāgne varco vihaveṣvastu vayaṃ tvendhānāstanvaṃ'puṣema | mahyaṃ namantāṃ pradiśaścatasrastvayādhyakṣeṇa pṛtanā jayema

हिन्दी अर्थ

अथववेद का नाम ब्रह्मवेद भी है। के सिन्न-भिन्न गुणों ओर कर्मो का निदेश कर, एक परमेश्वर का ही कथन ६ देवीः; ७ सोमः; ८,११ इन्द्रः; € सविता, धाता, विधाता, विस्तत 'साभ्राज्य-शरीर' को (पुषेम) परिपृष्ट कर । (चतसः विशः)

English

With mightier power, strong God, extend thy firmness: let not malevolent Kaokas harm thee. Proudly we put our trust in thee in battles, when we behold great wealth the prize of combat.

अध्याय ५

श्लोक 3.2

अग्ने॑ म॒न्युं प्र॑तिनु॒दन् परे॑षां॒ त्वं नो॑ गो॒पाः परि॑ पाहि वि॒श्वतः॑ ।अपा॑ञ्चो यन्तु नि॒वता॑ दुर॒स्यवो॒ऽमैषां॑ चि॒त्तं प्र॒बुधां॒ वि ने॑शत्

agne manyuṃ pratinudan pareṣāṃ tvaṃ no gopāḥ pari pāhi viśvataḥ | apāñco yantu nivatā durasyavo'maiṣāṃ cittaṃ prabudhāṃ vi neśat

हिन्दी अर्थ

(नः) हमें (विरवतः) सब ओर से (परि पाहि) सुरक्षित कर । (दुरस्यवः) प्रबोध को (विनेशत्) न प्राप्त हों । जैसे नदी का जल नीचे की ओर वह् जाता है, वैसे शत्रू भी अधो- मागेगामी हो जाए, एेसे वापस धकेल दिये जाएं विः उनके चित्तो मे पूनः आक्रमण केरने का प्रबोध न रहे। लिए (वातः) वागु (पवताम्) अनुकूल रूप मेँ प्रवाहित हो (अस्मै कामाय)

English

Praise in the height Him who hath many pathways, courageous, strongest, Aptya of the Aptyas

अध्याय ५

श्लोक 3.3

मम॑ दे॒वा वि॑ह॒वे स॑न्तु॒ सर्व॒ इन्द्र॑वन्तो म॒रुतो॒ विष्णु॑र॒ग्निः ।ममा॒न्तरि॑क्षमु॒रुलो॑कमस्तु॒ मह्यं॒ वातः॑ पवतां॒ कामा॑या॒स्मै

mama devā vihave santu sarva indravanto maruto viṣṇuragniḥ | mamāntarikṣamurulokamastu mahyaṃ vātaḥ pavatāṃ kāmāyāsmai

हिन्दी अर्थ

से, अन्तरिक्ष पर भी स्वामित्व चाहता है । एनो मानि गाँ कतमच्चनाहं विश्वै देवा अमि रक्षन्तु मेह ।(४५॥ १. सम्भवतः विष्णु है "'घ्रुवादिक् का अधिपति तथा पृथिवी की भोषधियों का रक्षन्तु) सब प्रकारसे सुरक्षित करं।

English

Through strength he shows himself of ample power: pattern of Prithivī, he fights and conquers.

अध्याय ५

श्लोक 3.4

मह्यं॑ यजन्तां॒ मम॒ यानी॒ष्टाकू॑तिः स॒त्या मन॑सो मे अस्तु ।एनो॒ मा नि गां॑ कत॒मच्च॒नाहं विश्वे॑ दे॒वा अ॒भि र॑क्षन्तु मे॒ह

mahyaṃ yajantāṃ mama yānīṣṭākūtiḥ satyā manaso me astu | eno mā ni gāṃ katamaccanāhaṃ viśve devā abhi rakṣantu meha

हिन्दी अर्थ

सोम-राजा की उक्ति है (मन्त्र ७) । एनः= एतेः, (निरुक्त ११।३।२४) पाप; जोकि फलभोग कराने के लिए अवश्य पापी को प्राप्त । ¦ होता है। अभिप्राय यह् कि युद्धकमं में मृञ्षसे एता कोई गाप न हो जाए मथि देवा द्रविणमा यजन्तां मय्याशीरस्तु मयि देवहूतिः। हैवा होतारः सनिषन न एतदरिष्टाः स्याम तन्वा सुवीराः ॥।५॥ (देवाः) साम्राज्य के दिव्य अधिकारी, (मयि) मुञ्च सोम-राजाके ' साम्राज्य का आशीर्वाद हो, (मयि) मृञ्चमें (देवहूतिः ५ इन देवां को आहूत । करने का अधिकार हो। (होतारः) साम्राज्य-यज्ञ में भहृतियां देनेवाले

English

Brihaddiva, the foremost of light-winners, hath made these holy prayers, this strength for Indra.

अध्याय ५

श्लोक 3.5

मयि॑ दे॒वा द्रवि॑ण॒मा य॑जन्तां॒ मय्या॒शीर॑स्तु॒ मयि॑ दे॒वहू॑तिः ।दै॒वाः होता॑रः सनिषन्न ए॒तदरि॑ष्टाः स्याम त॒न्वाऽसु॒वीराः॑

mayi devā draviṇamā yajantāṃ mayyāśīrastu mayi devahūtiḥ | daivāḥ hotāraḥ saniṣanna etadariṣṭāḥ syāma tanvā'suvīrāḥ

हिन्दी अर्थ

(देवाः) देवसमह ने (नः) हमे, (एतत्) यह धन (सनिषन्) प्रदान किया है, (सुवीराः) ताकि हम उत्तम वीर (तन्वा) शरीर से (अरिष्टाः) हिसा- युद्ध के लिए धन की आवद्यकता होती है, इसलिए धन की याचना हुई है, ओर अन्य अधिकारोकौप्राप्तिका कथनमभी सोम-राजाने किया है । सनिषन् = षणु दाने (तनादिः), लेट् लकार, सिप्, अट् काआगम। देवीः षडवीररु न॑ः कृणोत विश्वे देवास इह मादयध्वम् । हे (देवीः) दिव्य (षट् ) छह (उर्वीः) विस्तृत दिशा ! (नः) हमारे लिए (उर) विस्तृत प्रदेश (कृणोत) करो, भौर (वि्वेदेवाः) है साम्राज्य

English

Free Lord, he rules the mighty fold of cattle, winning, aglow, even all the billowy waters. Thus hath Brihaddiva, the great Atharvan, spoken to Indra as himself in person.

अध्याय ५

श्लोक 3.6

दैवीः॑ षडुर्वीरु॒रु नः॑ कृणोत॒ विश्वे॑ देवास इ॒ह मा॑दयध्वम्।मा नो॑ विददभि॒भा मो अश॑स्ति॒र्मा नो विदद् वृजि॒ना द्वेष्या॒ या

daivīḥ ṣaḍurvīruru naḥ kṛṇota viśve devāsa iha mādayadhvam| mā no vidadabhibhā mo aśastirmā no vidad vṛjinā dveṣyā yā

हिन्दी अर्थ

आनन्दित रहो । (नः) हमें (अभिभाः) पराभव (मा विदत्) न प्राप्त हो, ओर न (विदत्) प्राप्त हौ (वृजिना) वजंनीया पापिन शत्रुसेना (या) जोकि (द्रष्य ) द्वेष करनेवाले शत्रु की है । सेना आक्रमण द्वारा न हमारा पराभव कर सकती है, न हमे पराभव-जन्य मयवेबेदभाष्य काण्ड ५। अनु० १। सूतक

English

Two sisters free from stain, the Mātarivans, with power impel him onward and exalt him. A prayer to Agni, Indra, and other deities for victory and prosperity

अध्याय ५

श्लोक 3.7

ति॒स्रो दे॑वी॒र्महि॑ नः॒ शर्म॑ यछत प्र॒जायै॑ नस्त॒न्वे॒३यच्च॑ पु॒ष्टम्।मा हा॑स्महि प्र॒जया॒ मा त॒नूभि॒र्मा र॑धाम द्विष॒ते सो॑म राजन्

tisro devīrmahi naḥ śarma yachata prajāyai nastanve3yacca puṣṭam| mā hāsmahi prajayā mā tanūbhirmā radhāma dviṣate soma rājan

हिन्दी अर्थ

निन्दा प्राप्त होती ओौर न णभरगेना हमारे राष्ट में निज पदापेणके ए साहस ही कर सकती है । ॥ (तिक्तः देवीः) है तीन देवियो ! (नः) हमे (महि शमं) महासुख करो। (मा) न (हास्महि) हम वजित हो जाएं (प्रजया) प्रजा द्वारा, (मा) (तनूभिः) निज तनुजं द्वारा, (सोमराजन्) है सोम-राजन् ! (मा) ओर क्षु अन्ननाम (निषं० २।७) । रीरिषः मानसिक हिसा अर्थात् दुःख +

English

Let strength be mine while I invoke thee, Agni! enkindling thee may we support our bodies. May the four regions bend and bow before me: with thee for guardian may we win the

अध्याय ५

श्लोक 3.8

उ॒रु॒व्यचा॑ नो महि॒षः शर्म॑ यछत्व॒स्मिन् हवे॑ पुरुहू॒तः पु॑रु॒क्षु।स नः॑ प्र॒जायै॑ हर्यश्व मृ॒डेन्द्र॒ मा नो॑ रीरिषो॒ मा परा॑ दाः

uruvyacā no mahiṣaḥ śarma yachatvasmin have puruhūtaḥ purukṣu| sa naḥ prajāyai haryaśva mṛḍendra mā no rīriṣo mā parā dāḥ

हिन्दी अर्थ

(द्विषते रधाम) हम शत्र के वशमेंहों। शमं सुखनाम (निघं ० ३।९) । तीन देवी हैँ इडा, सरस्वती, भारती । प्रतीत होता है कि सोम-राजाके शासनकालमें, सम्राट राज्य करनेसे अन्तरिक्षस्था मेघीयावाक् । भारती भरतः भरण-पीषण करनेवाले आदित्य कौ प्रभा। ये तीन देवी दहै दिग्यशक्तियां हँ जोकि महासुख देती

English

combat. Baffling the range of our opponents, Agni! guard us as our protector round about us.

अध्याय ५

श्लोक 3.9

धा॒ता वि॑धा॒ता भुव॑नस्य॒ यस्पति॑र्दे॒वः स॑वि॒ताभि॑मातिषा॒हः ।आ॒दि॒त्या रु॒द्रा अ॒श्विनो॒भा दे॒वाः पा॑न्तु यज॑मानं निरृ॒थात्

dhātā vidhātā bhuvanasya yaspatirdevaḥ savitābhimātiṣāhaḥ | ādityā rudrā aśvinobhā devāḥ pāntu yajamānaṃ nirṛthāt

हिन्दी अर्थ

हो जाएं । रधाम--रध्यतिवंशगमने (निरुवत १०।४।३६) । साम्राज्य में महासुख' कौ प्राप्ति हो जाने पर सोम-राजा' का शासन समाप्त हो गया । हमारे इस आह्वान पर, (पुरुहूतः) वहुसंख्यक प्रजाजनो द्वारा आहत हुमा वह तू (नः प्रजाये) हम प्रजाओं के लिए (मृड) सुख उत्पन्न कर, (नः) ह (मा) न (रीरिषः) दुःखी कर, अर्थात् (नः) हमारा (मा) न (परादाः) शत्रुओं के प्रति प्रदान कर, अथवा हमारा परित्याग न कर।

English

Down the steep slope go they who hate us, backward, and let their thought who watch at home be ruined.

अध्याय ५

श्लोक 3.10

ये नः॑ स॒पत्ना॒ अप॒ ते भ॑वन्त्विन्द्रा॒ग्निभ्या॒मव॑ बाधामह एनान्।आ॒दि॒त्या रु॒द्रा उ॑परि॒स्पृशो॑ न उ॒ग्रं चे॒त्तार॑मधिरा॒जम॑क्रत

ye naḥ sapatnā apa te bhavantvindrāgnibhyāmava bādhāmaha enān| ādityā rudrā uparispṛśo na ugraṃ cettāramadhirājamakrata

हिन्दी अर्थ

(पृतनाः) शवर सेनाओं ५४ ५ हम सैनिक-वगे जीते । भन्त् , स त में सैन्य शासन का वर्णन है । यद्यपि 8 म शासन अर्थात नागरिक शासन के अधिकारो पूववत् स्थिर रहते है, तो भी युद्ध- । (अरोचत्) कहा । (स्वसारौ) स्वयं सरण करनेवाली, (मातरिभ्वरी) अन्तरिक्षमाता मं सत्तावाली, (अरिप्रे) पापों से रहित (एने) ये “यौः-- पृथिवी," बृहहिवः तथा बृहद् -दिव परमेश्वर ये तीनों (हिन्वन्ति) (वधयन्ति) इसे बढ़ाते रहते हँ ।

English

I with my words impel thy weapons onward, and sharpen with my prayer thy vital vigour. Thou in that house, the highest or the lowest, which thy protec- tion guards, bestowest riches.

अध्याय ५

श्लोक 3.11

अ॒र्वाञ्च॒मिन्द्र॑म॒मुतो॑ हवामहे॒ यो गो॒जिद् ध॑न॒जिद॑श्व॒जिद् यः ।इ॒मं नो॑ य॒ज्ञं वि॑ह॒वे शृ॑णोत्व॒स्माक॑मभूर्हर्यश्व मे॒दी

arvāñcamindramamuto havāmahe yo gojid dhanajidaśvajid yaḥ | imaṃ no yajñaṃ vihave śṛṇotvasmākamabhūrharyaśva medī

हिन्दी अर्थ

(निरुक्त ७।७।२६) । अरिप्रे =दुलोक ओर पुथिवीलोक पाप-रहित है । इनमें पाप कौ सत्ता मनुष्य-कृत द । शवः बलनाम (निषं० २।९) १. यद्ध के लिए विशेष आह्वानो पर । व च रारीरवत जानकर इस प्रकार उसका परिषोषण करं भथंदरष्टा हए द । ये विकल्प केवल अनुसंघाना्थं दिये ह । १७४ अथवेवेदभाष्य काण्ड ५। भनु° १। सूक्त ३

English

Establish ye the ever-wandering mother, and bring full many deeds to their completion. 54

अध्याय ५

श्लोक 4.1

कुष्ठतक्मनाशनम्।१-१० भृग्वङ्गिराः।कुष्ठो, यक्ष्मनाशनम्।अनुष्टप्, ५ भुरिक्, ६ गायत्री, १० उष्णिग्गर्भा निचृत्।यो गि॒रिष्वजा॑यथा वी॒रुधां॒ बल॑वत्तमः ।कुष्ठेहि॑ तक्मनाशन त॒क्मानं॑ ना॒शय॑न्नि॒तः

kuṣṭhatakmanāśanam| 1-10 bhṛgvaṅgirāḥ| kuṣṭho, yakṣmanāśanam| anuṣṭap, 5 bhurik, 6 gāyatrī, 10 uṣṇiggarbhā nicṛt| yo giriṣvajāyathā vīrudhāṃ balavattamaḥ | kuṣṭhehi takmanāśana takmānaṃ nāśayannitaḥ

हिन्दी अर्थ

विरक्त दहो गया दहै, भौर प्रजाजन पूनः साम्राज्य के लिए उसका आलाने (धाता) धारण-पोषण करनेवाले अन्न का अधिष्ठाता, (विधाता) विधिविधान का अधिष्ठाता, (यः) भौर जो (भुवनस्य) समग्र पृथिवीका का (देवः) दिव्यगुणी अधिष्ठाता, (अभिमातिषाहः), अभिमानी राजाओं का पराभव करनेवाला, या उनके अभिमानो का दलन करनेवाला, अरिवनौ) अश्वो के दो अधिष्ठाता, (देवाः) ये सब देव (यजमानम्)

English

May all the Gods be on my side in battle, the Maruts led by Indra, Vishnu, Agni.

अध्याय ५

श्लोक 4.2

सु॒प॒र्ण॒सुव॑ने गि॒रौ जा॒तं हि॒मव॑त॒स्परि॑ ।धनै॑र॒भि श्रु॒त्वा य॑न्ति वि॒दुर्हि त॑क्म॒नाश॑नम्

suparṇasuvane girau jātaṃ himavataspari | dhanairabhi śrutvā yanti vidurhi takmanāśanam

हिन्दी अर्थ

(एनान् अव बाधामहे) इनके प्रति हम बाधां उपस्थित करते ह । (आदित्या १७८ अथर्ववेदमाष्य काण्ड ५। मनु० १। सूत्रत ४ (भक्रत्) कर दिया है । “अधिराज (अथवं० ६।९८।१-३) शत्रओों की (गोजित्) गौभों को जीता है, (धननित्) धनो को जीता है, (यः) जिसने (अरवजित् ) अश्वो को जीता है । (विहवे) इस विविध आह्वान

English

For me let them present all mine oblations, and let my mind’s intention be accomplished. May I be guiltless of the least transgression: may all the Gods come hither and protect me.

अध्याय ५

श्लोक 4.3

अ॒श्व॒त्थो दे॑व॒सद॑नस्तृ॒तीय॑स्यामि॒तो दि॒वि।तत्रा॒मृत॑स्य चक्ष॑णं दे॒वाः कुष्ठ॑मवन्वत

aśvattho devasadanastṛtīyasyāmito divi| tatrāmṛtasya cakṣaṇaṃ devāḥ kuṣṭhamavanvata

हिन्दी अर्थ

(वीरुधाम्) विरोहन करनेवाली या रोगों का विशेष निरोध करने- पवतो मे (अजायथाः) पैदा हा है, (तक्मनाशन) है कष्टप्रदज्वरकानाश का (नाशयन्) नाश करता हुभा तू (आ इहि) आ । १. भिकषेषरूप मे रोगो को रोकनेवाला, यवा मन्त्र (७,९,१०)।

English

May the Gods grant me riches, may the blessing and invocation of the Gods assist me. This boon shall the celestial Hotars win us: may we, unwound- ed, have brave heroes round

अध्याय ५

श्लोक 4.4

हि॒र॒ण्ययी॒ नौर॑चर॒द्धिर॑ण्यबन्धना दि॒वि।तत्रा॒मृत॑स्य॒ पुष्पं॑ दे॒वाः कुष्ठ॑मवन्वत

hiraṇyayī nauracaraddhiraṇyabandhanā divi| tatrāmṛtasya puṣpaṃ devāḥ kuṣṭhamavanvata

हिन्दी अर्थ

(भ्वादिः) । कुष्ठ कूठ या कूट । अथवा गिरिषु =मेधों के काल में (हिमवतः परि) हिमवान्! का परित्यागः कर या उससे परे, (सुपणंसुवने गिरौ) उत्तमपक्षोवाले कमलो के उत्पादक पवेत मेँ (जातम्) तक्म-ञ्वर का नाश करनेवाला है, (विदुः) यह वे जानते है । की रदिमियां (आष्टे) तथा सुपर्णाः सुपतना आदित्यरश्मयः" (निरत

English

us. Ye six divine Expanses, give us freedom. Here, all ye Gods, acquit yourselves like heroes.

अध्याय ५

श्लोक 4.5

हि॒र॒ण्ययाः॒ पन्था॑न आस॒न्नरि॑त्राणि हिर॒ण्यया॑ ।नावो॑ हिर॒ण्ययी॑रास॒न् याभिः॒ कुष्ठं॑ नि॒राव॑हन्

hiraṇyayāḥ panthāna āsannaritrāṇi hiraṇyayā | nāvo hiraṇyayīrāsan yābhiḥ kuṣṭhaṃ nirāvahan

हिन्दी अर्थ

अश्वत्थो देवसदं नस्तृतीय॑स्यामितो दिवि । (इतः) यहाँ से (तृतीयस्याम्) तीसरे (दिवि) द्युलोकं में, (देवसदनः) दिव् । चक्षणम् = कुष्ठौषध को देखना मानो दीं जीवन को देखना है । १. हिमवान् काः अभिप्राय हिमालयं पवेत नही, अपितु कोई भी पवत है जोकि हिमषान्

English

Let not calamity or curse o’ertake us, nor deeds of wickedness that merit hatred. Do ye three Goddesses give ample shelter and all success to us ourselves and children.

अध्याय ५

श्लोक 4.6

इ॒मं मे॑ कुष्ठ॒ पूरु॑षं॒ तमा व॑ह॒ तं निष्कु॑रु ।तमु॑ मे अग॒दं कृ॑धि

imaṃ me kuṣṭha pūruṣaṃ tamā vaha taṃ niṣkuru | tamu me agadaṃ kṛdhi

हिन्दी अर्थ

पद संश्चावाचक् नहीं (पजुः० २५।१२) । २. पश्त्याग कर या परे = दसीलिए कहा है कि “उदडः जातो हिमवतः'' (मन्त्र ष); पदा होना सूचित हौता है । हिमवतः परि हिमवन्तं परिवज्यं । १८० भयवेवेदभाष्य काण्ड ५। अनु° १। सूक्त

English

Let us not lose our children or our bodies: let us not benefit the foe, King Soma! Foodful and much-invoked, at this our calling may the far- reaching Bull grant us wide

अध्याय ५

श्लोक 4.7

दे॒वेभ्यो॒ अधि॑ जा॒तोऽसि॒ सोम॑स्यासि॒ सखा॑ हि॒तः ।स प्रा॒णाय॑ व्या॒नाय॒ च॑क्षुषे मे अ॒स्मै मृ॑ड

devebhyo adhi jāto'si somasyāsi sakhā hitaḥ | sa prāṇāya vyānāya cakṣuṣe me asmai mṛḍa

हिन्दी अर्थ

अवन्वत वनु याचने (तनादिः) । यलोक मे भश्वत्थ के उदयकाल में कुष्टं (हिरण्ययी) हिरण्यमयी (नौः) नौका (अचरत्) चली है । (तत्र) उस काल युलोकस्थ नौका चमकते सितारोंका समूहं सूपदहै, अतः इसे हिरण्ययी कहा है । यथा “हिरण्यगभंः समवतेताग्रे” (यजुः० १३।४) में दयलोकस्थ नौका युलोक के महाकाशरूपी समुद्र मे चली है । यद्यपि युलोक मे नियत स्थान में नौका स्थितहैतो भी पृथिवी यतः निज धुरी पर परिचम से पुवंकी ओरवेगसे भ्रमण करतीहै, अतः हमें समग्र द्युलोकं पूवेसे ¦ पटिचम की ओर चलता दुष्टिगोचर होता दहै । “बन्धना दवारा रस्सी

English

shelter. Lord of bay coursers, Indra, bless our children: harm us not, give us not as prey to others.

अध्याय ५

श्लोक 4.8

उद॑ङ् जा॒तो हि॒मव॑तः॒ स प्रा॒च्यां नी॑यसे॒ जन॑म्।तत्र॑ कुष्ठ॑स्य॒ नामा॑न्युत्त॒मानि॒ वि भे॑जिरे

udaṅ jāto himavataḥ sa prācyāṃ nīyase janam| tatra kuṣṭhasya nāmānyuttamāni vi bhejire

हिन्दी अर्थ

अभिप्रेत रै। नौका को किनारे परर बधिनाभीहोतादहै, इस अभिप्राय को अपने सापेक्ष नियत स्थानोंमें बंधे रहते हैँ। जब पूवेदिशामेंनौकाका उदय हो, तब उस कालम, कुष्ठके खिले पुष्पको भी कुष्ठ कहादहै। ॥ सम्भवतः कुष्ठ ओर उसके पुष्पमे, दोनों मे, रोगों के निवारण कौ शक्ति , अधिक ओौर अल्परूप मे समान हो । अतः पुष्प" को कुष्ठ कहा है । नौका के (पन्थानः) चलने के मागे (हिरण्ययाः) हिरण्यमय मँ पुष्प का कालन नौकाकाकाल कहा, ओर कष्ठ-फल्ष का काल अषवत्य का । काल, अतः भौका का उदयकाल पुवंभावी दहै, ओर अश्वत्थ का उदयकाल

English

Lord of the world, Creator and Disposer, may the God Savitar who quells assailants, May the Ādityas, Rudras, both the Asvins, Gods, guard the sacrificer from destruction.

अध्याय ५

श्लोक 4.9

उ॒त्त॒मो नाम॑ कुष्ठस्युत्त॒मो नाम॑ ते पि॒ता।यक्ष्मं॑ च॒ सर्वं॑ ना॒शय॑ त॒क्मानं॑ चार॒सं कृ॑धि

uttamo nāma kuṣṭhasyuttamo nāma te pitā| yakṣmaṃ ca sarvaṃ nāśaya takmānaṃ cārasaṃ kṛdhi

हिन्दी अर्थ

नौका का चित्र दक्षि गोलाद्धं के ऊपर नं° ११०सेनं० श४८०केमध्यमे दर्शाया है ओर नौका कौ पीठ पर अणव यानमण्डल छपा है । । ००5 (हिरण्यया == हिरण्यानि) हिरण्य के सदुश चमकीलेये) (नावः) । नौकां (हिरण्ययीः) हिरण्य के सदृ चमकीली (आसन्) थीं, (याभिः) नावः मे बहुवचन नौकास्थ ताराभों के बहुत्व के कारण हआ है ।

English

Let those who are our foemen stay afar from us: with Indra and with Agni we will drive them off.

अध्याय ५

श्लोक 4.10

शी॒र्षा॒म॒यमु॑पह॒त्याम॒क्ष्योस्त॒न्वो॒३रपः॑ ।कुष्ठ॒स्तत् सर्वं॒ निष्क॑र॒द् दैवं॑ समह॒ वृष्ण्य॑म्

śīrṣāmayamupahatyāmakṣyostanvo3rapaḥ | kuṣṭhastat sarvaṃ niṣkarad daivaṃ samaha vṛṣṇyam

हिन्दी अर्थ

मक्षिताम्” (शां० श्रौ ° ।२८।३), अ्थत् धाता, “कर” देनेवाले भूमिपति का अधिष्ठाता, सम्भवतः द्वितीय अथं अभिप्रेतदहै, तभी उसेदेव कहादहै अभिमातिषाहः =सास्राज्य का प्रधान सेनापति, बृहती सेना का अधिपति (यज्ः० १७।४०) । अरिवना, उभा अश्वो के दो अधिष्ठाता, एक रथ- ये) जो (नः) हमारे (सपत्नाः) शत्रू हैँ (ते) वे (अप भवन्तु) दूर

English

Mine be the middle air’s extended region, and may the Wind blow favouring these my wishes.

अध्याय ५

श्लोक 5.1

लाक्षा १-९ अथर्वा।लाक्षा।अनुष्टुप्।रात्री॑ मा॒ता नभः॑ पि॒तार्य॒मा ते॑ पिताम॒हः ।सि॒ला॒ची नाम॒ वा अ॑सि॒ सा दे॒वाना॑मसि॒ स्वसा॑

lākṣā 1-9 atharvā| lākṣā| anuṣṭup| rātrī mātā nabhaḥ pitāryamā te pitāmahaḥ | silācī nāma vā asi sā devānāmasi svasā

हिन्दी अर्थ

¦ कारण में कायं का उपचार हुभा है । (कुष्ठ) है कूठ-गीषध ! (मे) मेरे (इमम्, पूरुषम्) इस पुरूष को, रोगरहित कर (तम्) उस (मे) मेरे पुरुष को (उ) निश्चय से (अगदम् कृधि) रोगरहित्त कर । आवह --अर्थात् रोगीको तू शवित प्रदान करः ताकि वह रोग-

English

The Ādityas and the Rudras, over us on high, have made me strong, a thinker, and a sovran lord.

अध्याय ५

श्लोक 5.2

यस्त्वा॒ पिब॑ति॒ जीव॑ति॒ त्राय॑से॒ पुरु॑षं॒ त्वम्।भ॒र्त्री हि शश्व॑ता॒मसि॒ जना॑नां च॒ न्यञ्च॑नी

yastvā pibati jīvati trāyase puruṣaṃ tvam| bhartrī hi śaśvatāmasi janānāṃ ca nyañcanī

हिन्दी अर्थ

देवेभ्यो श्रथ जातोसि सोम॑स्यासि सखां हित; । (देतेभ्यः अधि) दिव्यशक्तियों से (जातः असि) है कूठ-मौषध । तू पैदा हजा है, (सोमस्य) सोम-मौषध का (सखा असि) तु सखा है, (हितः) रोगीकातु दित करनेवाला है) (सः) वह तु (म) मेरे (जस्म ) इस रोगी चक्षु आदि इन्द्रियों के लिए (मृड) सुखदायक हौ । सखा = सोम-भौषधका तू सखा है, मित्र है । मित्र अपने मित्र का सहायक होता है। इस द्वारा सूचित कियादहै कि रोगनिवारण मे सोम-आीषध तेरा सहायक होगा, अर्थात् कूठ-मौषध के साथ-साथ सोम-भौषध काभीसेवन

English

Yea, we call Indra hitherward, the winner of wealth in battle and of kine and horses. May he mark this our worship when we call him, Lord of bay steeds, thou art our friend and

अध्याय ५

श्लोक 5.3

वृ॒क्षंवृ॑क्ष॒मा रो॑हसि वृष॒ण्यन्ती॑व क॒न्यला॑ ।जय॑न्ती प्रत्या॒तिष्ठ॑न्ती॒ स्पर॑णी॒ नाम॒ वा अ॑सि

vṛkṣaṃvṛkṣamā rohasi vṛṣaṇyantīva kanyalā | jayantī pratyātiṣṭhantī sparaṇī nāma vā asi

हिन्दी अर्थ

उद॑ङ् जातो हिमवतः स प्राच्यां नीयसे जन॑म् । १८२ अपर्ववेद भाष्य काण्ड ५। अनु० १। सूक्त ४ जनपद के प्रति (नीयसे) ले-जाया जाता है, या उस जनता या जनपद मेँ, धनिक (मन्व २) पसर में विभक्त कर लेते हँ अथवा विभेजिरे ,,

English

comrade. A charm against fever and other ailments

अध्याय ५

श्लोक 5.4

यद् द॒ण्डेन॒ यदिष्वा॒ यद् वारु॒र्हर॑सा कृ॒तम्।तस्य॒ त्वम॑सि॒ निष्कृ॑तिः॒ सेमं निष्कृ॑धि॒ पूरु॑षम्

yad daṇḍena yadiṣvā yad vārurharasā kṛtam| tasya tvamasi niṣkṛtiḥ semaṃ niṣkṛdhi pūruṣam

हिन्दी अर्थ

तना हुमा है, फला हुआ है । उत् तनु (विस्तारे +मा, अथवा "उत् + पृथिवी से तीसरे लोक दिव् में अरवत्य का स्वरूप विचारणीय है। को अर्व भी कहा है। यथा “एकोऽमश्वो वहति सप्तनामा” (ऋ० १।१९४।२) । तथा “एको अरवो वहति सप्तनामादित्यः'' (निरुक्त

English

Thou who wast born on mountains, thou most mighty of all plants that grow. Thou Banisher of Fever, come, Kushtha! make Fever pass away.

अध्याय ५

श्लोक 5.5

भ॒द्रात् प्ल॒क्षान्निस्ति॑ष्ठस्यश्व॒त्थात् ख॑दि॒राद्ध॒वात्।भ॒द्रान्न्य॒ग्रोधा॑त् प॒र्णात् सा न॒ एह्य॑रुन्धति

bhadrāt plakṣānnistiṣṭhasyaśvatthāt khadirāddhavāt| bhadrānnyagrodhāt parṇāt sā na ehyarundhati

हिन्दी अर्थ

है, स्थान का परिवतत॑न नहीं करता, स्थिररूप में एक स्थान मेँ स्थित रहता कहा है (तैत्ति° उपनिषद्, अनुवाक १०) । रेरिवा = रि गतौ (तुदादिः) --गततिदायक अर्थात् संचालक, मँ परमेर्वर । भावी कहा है, यतः यह पुष्प है, ओर जादित्य का उदयकाल पञ्चाद् भावी, यतः यह फलखूप है । यह उस ऋतुमे ही सम्भव दहै जबकि पूवेदिशामें परिस्थिति पृथिवी की सौर-परिक्रमा तथा निज धुरी पर परिध्रमणद्वारा होती हि। नौकाका दर्शन रात्रिकालमें होताहै, दिनके प्रकाश में वह्

English

Brought from the Snowy Mountain, born on the high hill where eagles breed, 55

अध्याय ५

श्लोक 5.6

हिर॑ण्यवर्णे॒ सुभ॑गे॒ सूर्य॑वर्णे॒ वपु॑ष्टमे ।रु॒तं ग॑छासि निष्कृते॒ निष्कृ॑ति॒र्नाम॒ वा अ॑सि

hiraṇyavarṇe subhage sūryavarṇe vapuṣṭame | rutaṃ gachāsi niṣkṛte niṣkṛtirnāma vā asi

हिन्दी अर्थ

सिलाची नाम वा असिसा देवानामसि स्वसा ॥२॥ (रात्री) राव्रीहै तेरी (माता) माता, (नभः) मेघ दहै (पिता) (अर्यमा) सूयं है (ते) तेरा (पितामहः) पिता का पिता । (वं) निदचय से १८४ अथर्वेवेदभाष्य काण्ड ५। भनु० १ सक्त ५ (नाम) प्रसिद्ध (सिलाची) सिलाची (असि) तु है, (सा) वह त् (देवानाम्) देवों की (स्वसा) बहिन है। .

English

Men seek to buy thee when they hear: for Fever’s Banisher they know. In the third heaven above us stands the Asvattha tree, the seat of Gods.

अध्याय ५

श्लोक 5.7

हिर॑ण्यवर्णे॒ सुभ॑गे॒ शुष्मे॒ लोम॑शवक्षने ।अ॒पाम॑सि॒ स्वसा॒ लाक्षे॒ वातो॑ हा॒त्मा ब॑भूव ते

hiraṇyavarṇe subhage śuṣme lomaśavakṣane | apāmasi svasā lākṣe vāto hātmā babhūva te

हिन्दी अर्थ

होते ह नभस् से, मेघ से । यतः नभस् से अपः उदक भी पैदा हुए, ओर हो जाता है, भतः इस अन्धकारमय कालको रात्री कहाहै। यह काल हारा दर्शाया है । नभस् सेदो षैदा हुए उदक ओौर लाक्षा, अतःयेदो भाई वह केवल छन्दः पूति" के लिए है, अपाम् दवारा अभिप्रेत है “देवानाम्”

English

There the Gods sought the Kushtha Plant, embodiment of end- less life. There moved through heaven a golden ship, a ship with cordage wrought of Gold.

अध्याय ५

श्लोक 5.8

सि॒ला॒ची नाम॑ कानी॒नोऽज॑बभ्रु पि॒ता तव॑ ।अश्वो॑ य॒मस्य॒ यः श्या॒वस्तस्य॑ हा॒स्नास्यु॑क्षि॒ता

silācī nāma kānīno'jababhru pitā tava | aśvo yamasya yaḥ śyāvastasya hāsnāsyukṣitā

हिन्दी अर्थ

अर्थात् नभस् (मेघ) का भी पिता । यस्त्वा पिव॑ति जीवति जाय॑से पुरषं त्वम् । (यः) नौ (त्वा पिवति) तुक्षे पीता! है (जीवति) जीवित होताहै, गती याचने च (स्वादिः), अथवा नितरां तेरीर्माग होती रहती है । शश्वत् वहूनाम (निघं० ३।१) ।

English

There the Gods won the Kushtha Plant, the blossom of eternal life. They sailed on pathways paved with gold, the oars they piled were wrought of gold:

अध्याय ५

श्लोक 5.9

अश्व॑स्या॒स्नः संप॑तिता॒ सा वृ॒क्षां अ॒भि सि॑ष्यदे ।स॒रा प॑त॒त्रिणी॑ भू॒त्वा सा न॒ एह्य॑रुन्धति

aśvasyāsnaḥ saṃpatitā sā vṛkṣāṃ abhi siṣyade | sarā patatriṇī bhūtvā sā na ehyarundhati

हिन्दी अर्थ

(क्वाय निष्पाके, म्वादिः) । फाण्टं को घावों मे पिलाने का विधान हुआ है । ¦ करती है, (इव) जैसे (वृषण्यन्ती ) पति को चाहती हृद (कन्यला) कमनीया घावों की प्रतिकूलता मे स्थित हुई, (स्परणी) सेवा करनेवाली (नाम वं असि) प्रसिद्धत् है। यत॒वा)याजो (हरसा) अग्निकी ज्वाला द्वारा (अरुः) घाव (कृतम्

English

All golden were the ships wherein they carried Kushtha down to earth. O Kushtha, bring thou hitherward this man of mine, restore his health,

अध्याय ५

श्लोक 6.1

ब्रह्मविद्या।१-१४ अथर्वा।सोमरुद्रौ।१ ब्रह्म, २ कर्माणि, ३-४ रुद्रगणाः, ५-८ सोमारुद्रौ, ९ हेतिः, १०-१४ सर्वात्मा रुद्रः।त्रिष्टुप्, २ अनुष्टुप्, ३ जगती, ४ अनुष्टुबुष्णिक्-त्रिष्टुब्गर्भा पञ्चपदा जगती, ५-७ त्रिपदा विराण्नाम गायत्री, ८ एकावसाना द्विपदार्च्यनुष्टुप्, १० प्रस्तारपङ्क्तिः, ११-१३ पङ्क्तिः, १४ स्वराट्-पङ्क्तिः।ब्रह्म॑ जज्ञा॒नं प्र॑थ॒मं पु॒रस्ता॒द् वि सी॑म॒तः सु॒रुचो॑ वे॒न आ॑वः ।स बु॒ध्न्याऽ उप॒मा अ॑स्य वि॒ष्ठाः स॒तश्च॒ योनि॒मस॑तश्च॒ वि वः॑

brahmavidyā| 1-14 atharvā| somarudrau| 1 brahma, 2 karmāṇi, 3-4 rudragaṇāḥ, 5-8 somārudrau, 9 hetiḥ, 10-14 sarvātmā rudraḥ| triṣṭup, 2 anuṣṭup, 3 jagatī, 4 anuṣṭubuṣṇik-triṣṭubgarbhā pañcapadā jagatī, 5-7 tripadā virāṇnāma gāyatrī, 8 ekāvasānā dvipadārcyanuṣṭup, 10 prastārapaṅktiḥ, 11-13 paṅktiḥ, 14 svarāṭ-paṅktiḥ| brahma jajñānaṃ prathamaṃ purastād vi sīmataḥ suruco vena āvaḥ | sa budhnyā' upamā asya viṣṭhāḥ sataśca yonimasataśca vi vaḥ

हिन्दी अर्थ

करनेवाली (असि) है, (सा) वहत् (इमम्, पूरुषम्) इस पुरुष को निष्कृधि) ठीक कर दे। व हरः ज्वलतो नाम (निषं० १।१७) । अरः = घाव । यही अभिप्राय “अरन्घति"' पद में है (मन्त्र ५) 1 त् (अरुन्धति) है घावों को ठीक करनेवाली लाक्षा ! (नः) हमे (एहि) ४ ), नकिं लता के सदुक्ष वृक्षं पर चट्ना । म है। यथा “मारोहेममबदमानमर्मेव त्वं स्थिर भव। अभि तिष्ठ

English

Yes, free him from disease for me. Thou art descended from thee Gods, Soma’s benignant friend art thou,

अध्याय ५

श्लोक 6.2

अना॑प्ता॒ ये वः॑ प्रथ॒मा यानि॒ कर्मा॑णि चक्रि॒रे।वी॒रान् नो॒ अत्र मा द॑भ॒न् तद् व॑ ए॒तत् पु॒रो द॑धे

anāptā ye vaḥ prathamā yāni karmāṇi cakrire| vīrān no atra mā dabhan tad va etat puro dadhe

हिन्दी अर्थ

सरतीति। सरा उदकषारा, वर्षा, मेषसे 1 है, उदकघारा वृक्षों मे पदहुचकर लाक्षारूप 1है। सूक्तमें अतिगृढ रन्दो मे लाक्नाकां (मन्त्र १०), ताकि यह पापवृत्रौं का दहन करे । वृत्र पापरूप ९ माष (३ ) मन्त्र मे त्रयोदश मासका कथन हभारहै, जिसका निर्माण परमेश्वर द्वारा होता है) ए (४) सोमारुद्रौ हैँ मनःसंयम ओर प्राणायाम (मनं ५)। ये पाप नष्ट करते मौर “अमृत"' प्रदान करतेदं। , " (५) (मन्व १०) मेँ पाप-वृत्र का “धुरुषविध रूपेण वर्णन हुमा है ५ परमेदवर मे प्रवेश का कथन हुजा है ।

English

Whoever drinketh thee hath life: thou savest and protectest man. As nursing mother of mankind, thou takest all upon thy lap.

अध्याय ५

श्लोक 6.3

स॒हस्र॑धार ए॒व ते सम॑स्वरन् दि॒वो नाके॒ मधु॑जिह्वा अस॒श्चतः॑ ।तस्य॒ स्पशो॒ न नि मि॑षन्ति॒ भूर्ण॑यः प॒देप॑दे पा॒शिनः॑ सन्ति॒ सेत॑वे

sahasradhāra eva te samasvaran divo nāke madhujihvā asaścataḥ | tasya spaśo na ni miṣanti bhūrṇayaḥ padepade pāśinaḥ santi setave

हिन्दी अर्थ

गायत्री; ठ एकावसाना दिपदाच्येनष्टप; 7 अर्थात् चुलोक मे (सुरुचः) उत्तमरूप मे रोचमान 4 ८ ९्शूल जगत् को, (च) ओौर (असतः) सृक्ष्मजगत् की ५५ ५ ध. प प्रकृति को (विवः ) विवृत किया, उत्पत्तिसमथं कर भण द्वारा कहाहै (एत० उप० खं ३) । ध अकिप्राय है निरीक्षण करना, आलोचित करना किरम सष्टिरचं र

English

Thou clingest close to every tree, as a fond damsel clasps her love. Thy name is called The Conqueror, She who Stands Fast, The

अध्याय ५

श्लोक 6.4

पर्यू॒ षु प्र ध॑न्वा॒ वाज॑सातये॒ परि॑ वृ॒त्राणि॑ स॒क्षणिः॑ ।द्वि॒षस्तदध्य॑र्ण॒वेने॑यसे सनिस्र॒सो नामा॑सि त्रयोद॒शो मास॒ इन्द्र॑स्य गृ॒हः

paryū ṣu pra dhanvā vājasātaye pari vṛtrāṇi sakṣaṇiḥ | dviṣastadadhyarṇaveneyase sanisraso nāmāsi trayodaśo māsa indrasya gṛhaḥ

हिन्दी अर्थ

५ प अकाशमाय हँ वैसे वेन-ब्रह्म भी प्रकाशमान है। यथा! त र (वः) तुम्हारे, (अनाप्ता; ) जिनसे बदृकर कोई आप्त नहीं, (ये प्रथमाः) जोकि प्रथमकोटि के पुरुष है, (यानि कर्माणि) वे जिन कर्मों को (चक्रिरे) करते रहे है, (तत्) उस कमंसमूह को (एतत्) इस प्रयोजन को लक्षय कर (वः) तुम्हारे (पुरः) सामने (दधे) मै रखता हूं, ताकि (भत्र) दष्क (मा) न (दभन्) हसित करं । ये अनाप्त हँ वेदाविर्भाव करनेवाले अग्नि, वायु, आदित्य,

English

Rescuer. Whatever wound the arrow, or the staff, or violence inflicts,

अध्याय ५

श्लोक 6.5

न्वे॒३तेना॑रात्सीरसौ॑ स्वाहा॑ ।ति॒ग्मायु॑धौ ति॒ग्महे॑ती सु॒शेवौ॒ सोमा॑रुद्रावि॒ह सु मृ॑डतं नः

nve3tenārātsīrasau svāhā | tigmāyudhau tigmahetī suśevau somārudrāviha su mṛḍataṃ naḥ

हिन्दी अर्थ

तस्य स्पशो न निमिषन्ति भूणैयः पदेप॑दे पाशिनं; सन्ति सेतवे ॥३॥ (सहस्रधारे) हजारों का धारण करनेवाले, (दिवः) योतमान ब्रह्म के (नाके) सांसारिक सुखदुःख रहित आनन्दस्वरूप मे (एव) ही रहनेवाले, निमिषन्ति) निमेष तक नहीं करते, ओर (पदे पदे) पग-पग पर, (पाणिनः) फन्दोवाले होकर (सेतवे, सन्ति) बाधने के लिए विद्यमान माने (निरुक्त ५।२।२) अथवा सचति गतिकर्मा(निघं० २।१४), अतः म + सचति" = विगतकर्मा, रागद्वेष से विगत, अनाप्त पुरुष । भूणेयः; “भुरण्यति, पुरुष सावधान करते हैँ कि दष्कर्मो के करनेवालों को बरधने कै लिए ब्रह्म

English

Thereof thou art the remedy: as such restore this man to health. Thou springest from blest Plaxa, or Asvattha, Dhava, Khadira,

अध्याय ५

श्लोक 6.6

अवै॒तेना॑रात्सीरसौ॒ स्वाहा॑ ।ति॒ग्मायु॑धौ ति॒ग्महे॑ती सु॒शेवौ॒ सोमा॑रुद्रावि॒ह सु मृ॑डतं नः

avaitenārātsīrasau svāhā | tigmāyudhau tigmahetī suśevau somārudrāviha su mṛḍataṃ naḥ

हिन्दी अर्थ

दिषस्तदध्य॑र्णवेनैयसे सनिखसो नामासि त् गति कर (वाजसातये) बल की प्राप्ति के लिए, अथवा वृत्रो के साथ संग्रामके लिएु। तू (परि) सब ओर विद्यमान (वृत्राणि) वृद्धिपर आवरण डालनेवाले आसुर भावों तथा आसुरं कर्मो का (सक्षणिः) विनाश १६९२ अथवंवेदभाष्य काण्ड ५। अनु० २। सूक्त द । होता है । (सनिखसः) अधःपात करनेवाला (नाम असि) प्रसिद्धत् है। ।

English

Parna, or blest Nyagrodha, so come thou to use, Arundhatī! Gold-coloured, bringing happy fate, most lovely, brilliant as the

अध्याय ५

श्लोक 6.7

अपै॒तेना॑रात्सीरसौ॒ स्वाहा॑ ।ति॒ग्मायु॑धौ ति॒ग्महे॑ती सु॒शेवौ॒ सोमा॑रुद्रावि॒ह सु मृ॑डतं नः

apaitenārātsīrasau svāhā | tigmāyudhau tigmahetī suśevau somārudrāviha su mṛḍataṃ naḥ

हिन्दी अर्थ

है, वृत्रो के नाश के लिए मन्त्र ४ । अथवा सोमन्=वीयं (अथवं० १४।१।१-५); रुद्रत=प्राण । इन दोनों का संयम । शेव इति सुखनाम । 1 । तिमयुषो तिममैती था जिसका कथन भी नहीं करना चाहिए एसे पापसे (अस्मान्) हमें १. सोम-मौर-सुद्र (इह) इस जीवन में (नः) हमे (सुमृडतम्) उत्तम प्रकारसे , यथा “कथापि खलु पापानामलमश्रेयसे यतः ।'“ १

English

Sun, Mayst thou, O Healing! come unto the fracture: Healing is thy name.

अध्याय ५

श्लोक 6.8

मु॒मु॒क्तम॒स्मान् दु॑रि॒ताद॑व॒द्याज्जु॒षेथां य॒ज्ञम॒मृत॑म॒स्मासु॑ धत्तम्

mumuktamasmān duritādavadyājjuṣethāṃ yajñamamṛtamasmāsu dhattam

हिन्दी अर्थ

(मेन्याः) पाप-वृत्रसम्बन्धी घातक वच का ( मेनिः) घातक वज (असि) है। के संयम द्वारा जीवन में सुख प्राप्त होता है, तभीहइनदो को “सुशेवौ कहा है । शेवम् सुखनाम (निषं° ३।६) । ये दोनों तिग्मायुधौ तथा तिग्महेती १६४ अधवरवेदभाष्य काण्ड ५। अनु° २। सूक्त ६ (ते) वे पाप-वृध्र (अमेनयः) घातक वजँ से रहित (सन्तु) हो जा, (ये)

English

Gold-coloured, bringing happy fate, odorous, hairy-bodied one, The sister of the Waters art thou, Lākshā! and thy soul is Wind.

अध्याय ५

श्लोक 6.9

चक्षु॑षो हेते॒ मन॑सो हेते॒ ब्रह्म॑णो हेते॒ तप॑सश्च हेते ।मे॒न्या मे॒निर॑स्यमे॒नय॒स्ते स॑न्तु॒ ये॒३स्माँ अ॑भ्यघा॒यन्ति॑

cakṣuṣo hete manaso hete brahmaṇo hete tapasaśca hete | menyā menirasyamenayaste santu ye3smā~ abhyaghāyanti

हिन्दी अर्थ

हेतिरूप कहा है, ओर घातक वरूप भी । व्रिना ब्राह्मी सहायता के पाप- मननशक्ति ओर तपोमय जीवनके विघातक है । पाप-वृत्र जीवननिष्ठ , अस्त्र ओर मेनिरूप होकर विनष्ट करती है । । मेनिः वजनाम (निघं० २।२०) । यह मेनि-व, घातक है “मीन् वृत्रो का सूचकः है, यथा 'पापवुत्र है काम, क्रोध, लोभ, मोह'' मादि ।

English

Silāchi is thy name: thy sire, O goat-brown! is a damsel’s son. Thou hast been sprinkled by the mouth of Yama’s tawny- coloured horse.

अध्याय ५

श्लोक 6.10

यो॒३ऽस्मांश्चक्षु॑षा॒ मन॑सा॒ चित्त्याकू॑त्या च॒ यो अ॑घा॒युर॑भि॒दासा॑त्।त्वं तान॑ग्ने मे॒न्यामे॒नीन् कृ॑णु॒ स्वाहा॑

yo3'smāṃścakṣuṣā manasā cittyākūtyā ca yo aghāyurabhidāsāt| tvaṃ tānagne menyāmenīn kṛṇu svāhā

हिन्दी अर्थ

अरूषि धयति पिबतीति (धेट् पाने, म्वादिः) । लाक्षाःके लिए देखौ (अथर्वं० रुतं गच्छासि निष्कृते निष्करतिर्नाम वा असि ॥६॥ (हिरण्यवर्णे) है सुवणं के वर्णवाली ! प ण्यव , (सुभगे) है सुन्दर रूपैशव्य॑- ( + है सूर्यं के सदुश वणंवाली ! (वपुष्टमे) है अत्यन्त ५ 8 (निष्कृते) है कण्ट दूर करनेवाली लाक्षा (रुतम्) रुलाने- ( ) रुलानेवाले घाव को दुर करनेवाली (असि) तुहै। । "लाक्षा लाल वण॑वाली होती है, जैसाकि सूर्यं उदय भौर अ मे द होता है । रुतम् = रु शब्दे (अदादिः), अभिप्रेत ॥-काष

English

Befriend my breath and vital air be gracious unto this mine eye. Sprung, northward, from the Snowy Hill thou art conveyed to eastern men.

अध्याय ५

श्लोक 6.11

इन्द्र॑स्य गृ॒होऽसि ।तं त्वा॒ प्र प॑द्ये॒ तं त्वा॒ प्र वि॑शामि॒ सर्व॑गुः॒ सर्व॑पूरु॒षः सर्वा॑त्मा॒ सर्व॑तनूः स॒ह यन्मेऽस्ति॒ तेन॑

indrasya gṛho'si | taṃ tvā pra padye taṃ tvā pra viśāmi sarvaguḥ sarvapūruṣaḥ sarvātmā sarvatanūḥ saha yanme'sti tena

हिन्दी अर्थ

(हिरण्यवर्णे है सुवणं के सदृश वणेवाली ! (सुभगे; सुन्दर रूपैरवयं वाली ! (शुष्मे) है बलशालिनी ! (लोमशवक्षणे / ह न वाली (लाक्षे) लाख ! त्रु (अपाम्) उदकं की (स्वसा) बहिन (असि) है (ह) निचय से (वातः) वायु (ते) तेरी (भात्मा) आत्मा (वभूव) हुई है । षः शुष्मम् बलनाम (निघं० २।६) । लाक्षा बलशालिनी है वाली । लोम होते है प्राणियौंके शरीर पर, इसलिए लोमश का अथं भेड शारीरिक रक्तनाडियों को भी नदिर्यां कहा है । इसीलिए हदय को “सिन्धू” मौर रवत को “आपः'' कहा है (मथवं ० १०।२।११), देखो अथवंतेदभाष्य । धाव शरीर ओर शारीरिक नस-नाडियोंमे होते हः जिसकी ओषधि है व, (मन्त ४) । इसलिए लाक्षा है “लोमशवक्षणा” । “अपां स्वसा वृक्षों का अङ्कुरित होना, बढना ओर फूलना-फलना वायुमण्डल पर् निभेर

English

There they deal out among themselves Kushtha’s most noble qualities. Most excellent, indeed, art thou, Kushtha! most noble is thy sire.

अध्याय ५

श्लोक 6.12

इन्द्र॑स्य॒ शर्मा॑सि ।तं त्वा॒ प्र प॑द्ये॒ तं त्वा॒ प्र वि॑शामि॒ सर्व॑गुः॒ सर्व॑पूरु॒षः सर्वा॑त्मा॒ सर्व॑तनूः स॒ह यन्मेऽस्ति॒ तेन॑

indrasya śarmāsi |taṃ tvā pra padye taṃ tvā pra viśāmi sarvaguḥ sarvapūruṣaḥ sarvātmā sarvatanūḥ saha yanme'sti tena

हिन्दी अर्थ

सिलाची नाम॑ कानीनोऽज॑वभ्रु पिता तवं । से उत्पन्न, (अजबभ्रु) गतिमान् मौर भधरण-पोषण करनेवाला मेघ हे लाक्षा ! (तव पिता) तेरा पिता है यतः पितामह है अमा, आदित्य निश्चय से है लाक्षा ! (उक्षिता) सींची गई (असि) तूरहै। कर्द शाखाग्रन्थों मे सिलाची' के स्थान में घृताचीः पाठहै।, "एकोऽमरवो वहति सप्तनामा" (ऋ ० १।१६४।२ ), तथा “एको अश्वो वहति

English

Make all Consumption pass away and render Fever powerless. Malady that affects the head, eye-weakness, bodily defect—

अध्याय ५

श्लोक 6.13

इन्द्र॑स्य॒ वर्मा॑सि ।तं त्वा॒ प्र प॑द्ये॒ तं त्वा॒ प्रवि॑शामि॒ सर्व॑गुः॒ सर्व॑पूरु॒षः सर्वा॑त्मा॒ सर्व॑तनूः स॒ह यन्मेऽस्ति॒ तेन॑

indrasya varmāsi |taṃ tvā pra padye taṃ tvā praviśāmi sarvaguḥ sarvapūruṣaḥ sarvātmā sarvatanūḥ saha yanme'sti tena

हिन्दी अर्थ

मादित्य गतिशील है, पूर्वं से पस्विम की ओर गति करता प्रतीत होतादहै। उसका मुख है मेध । मुख से मूखरस अर्थात् मूखजल पैदा होता दहै, इसी प्रकार मेघ से वर्षाजल प्राप्त होता है, इसलिए मेघ को मुख कहा है । यह मेघ सूयं -सम्बन्धी है, सूर्यं का मानो जवयवसरूप है, मुखरूप है ! इस मुखरस धारा को प्राप्त कर उत्पन्न होती है। १८८ अथरवैवेदभाष्य काण्ड ५। अनु० १। सूक्त ५

English

All this let Kushtha heal and cure: aye, godlike is the vigorous power. A charm to mend a broken bone

अध्याय ५

श्लोक 6.14

इन्द्र॑स्य॒ वरू॑थमसि ।तं त्वा॒ प्र प॑द्ये॒ तं त्वा॒ प्रवि॑शामि॒ सर्व॑गुः॒ सर्व॑पूरु॒षः सर्वा॑त्मा॒ सर्व॑तनूः स॒ह यन्मेऽस्ति॒ तेन॑

indrasya varūthamasi | taṃ tvā pra padye taṃ tvā praviśāmi sarvaguḥ sarvapūruṣaḥ sarvātmā sarvatanūḥ saha yanme'sti tena

हिन्दी अर्थ

उड़करतु आ्ईदहै, (सा) वहत् स्यन्दित हुई है, प्रवाहित हुई है ( (पतत्रिणी भूत्वा) पक्षिणी होकर (वृक्षाम् अभि सिष्यदे) वृक्षौ की ओर (सा) वह् (अरुन्धति) है घावों कोपी प्रवाहित हई । उदकषारा को लाक्षा कहा हौ जाती है, कायं मे कारणोपचार हुमा

English

Aryaman is thy grandsire, Night thy mother, and the Cloud thy sire. Thy name is called Silāchi. Thou, thyself, art sister of the Gods.

अध्याय ५

श्लोक 7.1

अरातिनाशनम्।१-१० अथर्वा।बहुदैवत्यम्, १-३, ६-१० अरातयः, ४-५ सरस्वती।अनुष्टुप्, १ विराड्गर्भा प्रस्तारपङ्क्तिः, ४ पथ्याबृहती, ६ प्रस्तारपङ्क्तिः।आ नो॑ भर॒ मा परि॑ ष्ठा अराते॒ मा नो॑ रक्षी॒र्दक्षि॑णां नी॒यमा॑नाम्।नमो॑ वी॒र्त्साया॒ अस॑मृद्धये॒ नमो॑ अ॒स्त्वरा॑तये

arātināśanam| 1-10 atharvā| bahudaivatyam, 1-3, 6-10 arātayaḥ, 4-5 sarasvatī| anuṣṭup, 1 virāḍgarbhā prastārapaṅktiḥ, 4 pathyābṛhatī, 6 prastārapaṅktiḥ| ā no bhara mā pari ṣṭhā arāte mā no rakṣīrdakṣiṇāṃ nīyamānām| namo vīrtsāyā asamṛddhaye namo astvarātaye

हिन्दी अर्थ

वंक (यः तथा ज) अघायु हमें (अभिदास्ात्) उपक्षीण करता है, (तान्) द्वार (अमेनीन्) मेनिरहिति (कृणु) कर, एतदर्थं (स्वाहा) हम अपने-आापको पुरुषविध” कल्पित कर किया गया है । अपुरुषों को “पुरुषविधः कल्पित ॑ कर उनका वर्णन वेदों रँ प्रायः होता है । देषो, निरुक्त (७।२। कविता में यह शैली स्वीक्रत है । (७।२।९, ७) ।

English

Issuing from the horse’s blood away she glided to the trees. Become a winged water-brook, and come to us, Arundhatī!

अध्याय ५

श्लोक 7.2

यम॑राते पुरोध॒त्से पुरु॑षं परिरा॒पिण॑म्।नम॑स्ते॒ तस्मै॑ कृण्मो॒ मा व॒निं व्य॑थयी॒र्मम॑

yamarāte purodhatse puruṣaṃ parirāpiṇam| namaste tasmai kṛṇmo mā vaniṃ vyathayīrmama

हिन्दी अर्थ

(१-१०) अथर्वा । बहूदेवता (१-३, ६-१०) अरातयः; (राते) है अदानभावना ! (नः) हमे (जा भर) तू आहर, त्याग (नीयमानम्) ली जाती हई (दक्षिणाम्) दक्षिणा को (नः) हमारे लिए (मा) न (रक्षीः) सुरक्षित कर । (वीत्सय) दानवीरता का उपक्षय करने- देनेवाली अदानभावना के लिए (नमः) वज्रप्रहार हो, (अरातये) अदान भावना के लिए (नमः) वज्रप्रहार (अस्तु) हो । अराति अर्थात् अरा दाने; अदानभावना। आभर=-आहर,

English

Disclosed his deepest nearest revelations, womb of the non- existent and existent. None have attained to those of old, those who wrought holy acts for you,

अध्याय ५

श्लोक 7.3

प्र णो॑ व॒निर्दे॒वकृ॑ता॒ दिवा॒ नक्तं॑ च कल्पताम्।अरा॑तिमनु॒प्रेमो॑ व॒यं नमो॑ अ॒स्त्वरा॑तये

pra ṇo vanirdevakṛtā divā naktaṃ ca kalpatām| arātimanupremo vayaṃ namo astvarātaye

हिन्दी अर्थ

को, अपने लिएहीन रख ले, अपितु उसका दान भी करते रहँ । वीत्स्यिं = दानवीरता का (तसु उपक्षये, दिवादिः) उपक्षय करनेवाली, तथा सामाजिक समृद्धिन होने देनेवाली के लिए वज्रपात हयो । नमः वज्रनाम (निघं० २।२०) । प्रजा मे यदि दानभावनान हौ तो सामाजिक वृद्धि नहीं प्रेरणाओं कौ विनाशिका के लिए । यमर॑राते पुरोधत्से पुरुषं परिरापिण॑म् या प्रलाप करनेवाले (यम्, पुरुषम्) जिस पुरुष को (पुरोधत्से) निज अगुजा- रूपमेत्रु धारित करती है, (ते) तरे (तस्मे) उस पुरूष के लिए (नमः)

English

Let them not harm our heroes here. Therefore I set before you this. Sweet-tongued, exhaustless, they have sent their voices down together in heaven’s vault that

अध्याय ५

श्लोक 7.4

सर॑स्वती॒मनु॑मतिं॒ भगं॒ यन्तो॑ हवामहे ।वाचं॑ जु॒ष्टां मधु॑मतीमवादिषं दे॒वानां॑ दे॒वहू॑तिषु

sarasvatīmanumatiṃ bhagaṃ yanto havāmahe | vācaṃ juṣṭāṃ madhumatīmavādiṣaṃ devānāṃ devahūtiṣu

हिन्दी अर्थ

व्यथयीः) न तु व्यथित कर, न व्यथा पहुंचा । जौ व्यक्ति अदानभावना का प्रचार करता है उसकेलिए सामाजिक दण्ड है, वच्प्रहार, यतः अदानभावना सामाजिक उन्नति की विरोधी- मावनाहै । सामाजिकं उन्नति के लिए प्रत्येक सामाजिक मनुष्य को “वनिः” होना चाहिए, संविभक्ता होना चाहिए, निज आमदनी का सम्यक्-विभाग कर, निदिचत भाग दानरूप मेँ देना चाहिए । वनिः “वन षण” संभक्तौ, मरणो व॒निर्हैवकृता दिवा नक्तं च क्पताम् ।

English

pours a thousand streams. 56

अध्याय ५

श्लोक 7.5

यं याचा॑म्य॒हं वा॒चा सर॑स्वत्या मनो॒युजा॑ ।श्र॒द्धा तम॒द्य वि॑न्दतु द॒त्ता सोमे॑न ब॒भ्रुणा॑

yaṃ yācāmyahaṃ vācā sarasvatyā manoyujā | śraddhā tamadya vindatu dattā somena babhruṇā

हिन्दी अर्थ

(नः वनिः) हमारा संविभाग (देवकृता) राष्ट के दानी राजद्वारा किया गया है, वहु संविभाग (दिवा नक्तं च) दिन भौर रात में (प्रकल्प- ताम्) सामध्येवाला हो । (वयम्) हम (अरातिम्) अदान भावना का (अनु प्र इमः) निरन्तर पीछा करते ्है। (अरातये) अदानभावना के लिए अनुप्रेमः-हम पीछा करते ह, उसका पीछा कर उसे भगादेतेरहै, देवो दानाद्वा (निरुक्त ७।४।१५) । वाचं जुष्टां मधुमती मवादिपं देवानाँ देवदूतिषु ॥४।॥

English

His wildly-restless warders never close an eye: in every place the snarers stand to bind men fast.

अध्याय ५

श्लोक 7.6

मा व॒निं मा वाचं॑ नो॒ वीर्त्सी॑रु॒भावि॑न्द्रा॒ग्नी आ भ॑रतां नो॒ वसू॑नि ।सर्वे॑ नो अ॒द्य दित्स॒न्तोऽरा॑तिं॒ प्रति॑ हर्यत

mā vaniṃ mā vācaṃ no vīrtsīrubhāvindrāgnī ā bharatāṃ no vasūni | sarve no adya ditsanto'rātiṃ prati haryata

हिन्दी अर्थ

(यन्तः) रणष्टरमें निरीक्षणाथं जाते हुए हम राष्टाधिकारी, परस्पर अनुकूल मति का, (भगम्) षडविध भग का (हवामहे) आह्वान करते रहै, प्रसार करते हैँ । देवानाम्, देवहूतिषु) दिव्य अधिकारियोंके अनुकूल भावना तथा भगों की सत्ता आवश्यक है । सरस्वती सरो विज्ञानं अ्थत्ति मानुष-वाकः दवारा (अहम्) मै याचक (यम्, याचामि) जिससे

English

Speed forward, conquering all foes, to win the spoil, Thou comest on thy haters with a surging sea. Thy name is

अध्याय ५

श्लोक 7.7

प॒रोऽपे॑ह्यसमृद्धे॒ वि ते॑ हे॒तिं न॑यामसि ।वेद॑ त्वा॒हं नि॒मीव॑न्तीं नितु॒दन्ती॑मराते

paro'pehyasamṛddhe vi te hetiṃ nayāmasi | veda tvāhaṃ nimīvantīṃ nitudantīmarāte

हिन्दी अर्थ

मनोय॒जा"” द्रारा यह सूचित कियाहै कि मेरी याचना विचारपूवंक वाक् द्वारा हृई रै, क्योंकि मै भावर्यकता स वाधित होता हुजा याचना करता हं, क्रिसी लोभ-लालन्र के कारण नहीं। सौमेन पु प्रसवे; षू प्रेरणे (मा) न (नः) हमारी (वनिम्) याचनाको, (मा) न (वाचम्) कराएं । (अद्य) जाज (नः) हमारे (सवं) सव (दित्सन्तः) दान देनेकी इच्छावाले तुम (अरातिम्) अदानभावनाको प्रति हयत) प्रगत करो, अभिप्राय यह कि दाता हमारी याचना तथा तत्सम्बन्धी वाणी

English

Fragile. The thirteenth month is Indra’s home. Through this now hast thou sent thy gifts. All hail!

अध्याय ५

श्लोक 7.8

उ॒त न॒ग्ना बोभु॑वती स्वप्न॒या स॑चसे॒ जन॑म्।अरा॑ते चि॒त्तं वीर्त्स॒न्त्याकू॑तिं॒ पुरु॑षस्य च

uta nagnā bobhuvatī svapnayā sacase janam| arāte cittaṃ vīrtsantyākūtiṃ puruṣasya ca

हिन्दी अर्थ

धन प्रदान करे । प्रति हयेत प्रति +-हयं गतौ (भ्वादिः), विरोधमें दूर वेदं त्वाहं निमीवंन्तीं नितदन्तींपराते ॥७ (अराते) है अदानभावना ! (परः, अप, इहि) तु परेहो जा, हमसे है, विनय-सम्पन्तन करते हँ । (निमीवन्तीम्) नितरां हिसा करनेवाली कौ,

English

With sharpened arms and missiles, kind and friendly, be gracious unto us, Soma and Rudra! Through this hast thou been left in want. All hail!

अध्याय ५

श्लोक 7.9

या म॑ह॒ती म॒होन्मा॑ना॒ विश्वा॒ आशा॑ व्यान॒शे।तस्यै॑ हिरण्यके॒श्यै निरृ॑त्या अकरं॒ नमः॑

yā mahatī mahonmānā viśvā āśā vyānaśe| tasyai hiraṇyakeśyai nirṛtyā akaraṃ namaḥ

हिन्दी अर्थ

अदान-भावना अदानी को तो समृद्ध करती है, परन्तु समाज ओर उत नग्ना बोभुवती स्वप्नया संचसे जन॑म् । हे अदानभावना ! तू (पुरुषस्य) पुरुप कै (वित्तम्) चित्त को (च) ओर अदानभावना के होते निधन, वस्त्रों से रहित होकर नग्न हौ जाते है, मानो अदानभावना नग्न होकर इनमें प्रकट हृदं है । एेसे व्यक्तियों को स्वप्न भी निज निधनता के होते रहते दँ । निर्धनता के कारण इनके चित तथा संकल्प भी क्षीण हो जाते रहै, (तसु उपक्षये, दिवादिः) 1 भदानभावना करी वीरता हट में प्रकट होती है, वीरता, दृदता, हठ ।

English

With sharpened arms and missiles, kind and friendly, be gracious unto us, Soma and Rudra! Through this hast thou committed faults. All hail!

अध्याय ५

श्लोक 7.10

हिर॑ण्यवर्णा सु॒भगा॒ हिर॑ण्यकशिपुर्म॒ही।तस्यै॒ हिर॑ण्यद्राप॒येऽरा॑त्या अकरं॒ नमः॑

hiraṇyavarṇā subhagā hiraṇyakaśipurmahī| tasyai hiraṇyadrāpaye'rātyā akaraṃ namaḥ

हिन्दी अर्थ

दन्दरिपोवाला होता हआ, तथा (सवेपूरुषः) सब पुरुषोवाला होता हृभा (सर्वतनूः) सब अवयरवोँवाली तनूवाला, (सहं तैन) उस सवके साथ होता हआ (यत् मे अस्ति) जो कुर किमेरादहै। “सर्वे'' कहा है, यथा “'सर्वं समाप्नोषि ततोऽसि सर्वः'' (गीता ११।४०) । करनेवाले पापवृत्रो के प्रहारोंसे जीवात्माकौो आवृत करनेकां निदण हुमा है । व्मं ओर वरूथम वृर् आवरणे (चुरादिः) काप्रयोगहुजादहै।

English

A prayer for protection and prosperity Eastward at first the prayer was generated: Vena disclosed bright flashes from the summit,

अध्याय ५

श्लोक 8.1

शत्रुनाशनम्।१-९ अथर्वा।नानादैवत्यं, १,२ अग्निः, ३ विश्वे देवाः, ४-९ इन्द्रः।अनुष्टुप्, २ त्र्यवसाना षट्-पदा जगती, ३-४ भुरिक्पथ्यापङ्क्तिः, ६ आस्तारपङ्क्तिः, ७ द्व्युष्णिग्गर्भा पथ्यापङ्क्तिः, ९ त्र्यवसाना षट्-पदा युष्णिग्गर्भा जगती।वै॒क॒ङ्क॒तेने॒ध्मेन॑ दे॒वेभ्य॒ आज्यं॑ वह ।अग्ने॒ ताँ इ॒ह मा॑दय॒ सर्व॑ आ य॑न्तु मे॒ हव॑म्

śatrunāśanam| 1-9 atharvā| nānādaivatyaṃ, 1,2 agniḥ, 3 viśve devāḥ, 4-9 indraḥ| anuṣṭup, 2 tryavasānā ṣaṭ-padā jagatī, 3-4 bhurikpathyāpaṅktiḥ, 6 āstārapaṅktiḥ, 7 dvyuṣṇiggarbhā pathyāpaṅktiḥ, 9 tryavasānā ṣaṭ-padā yuṣṇiggarbhā jagatī| vaikaṅkatenedhmena devebhya ājyaṃ vaha | agne tā~ iha mādaya sarva ā yantu me havam

हिन्दी अर्थ

तस्थै हिरण्यकरेश्ये निरतया अकरं नम॑ः ॥९॥ हे, (तस्ये) उस (हिरण्यकेश्यै) सृवणभरूषण हारा विश्ुषित केशोंवाली, स्वयं धनी हो जाता है, जौर उसकी पत्नी सिर के सुवर्णाभूषणों द्वारा भी विभूषित हौ जाती है, परन्तु अदानभावना समाज के लिए कष्टापत्तिरूप हो जाती है ) निति कृच्छापत्तिः (निरुक्त २।२।८) । तस्मै दिर्यद्रापयेऽरात्या अकरं नम॑ः ॥१०॥

English

With sharpened arms and missiles, kind and friendly, be gracious unto us, Soma and Rudra! Free us from trouble, free us from dishonour, accept our wor- ship, give us life immortal.

अध्याय ५

श्लोक 8.2

इन्द्रा या॑हि मे॒ हव॑मि॒दं क॑रिष्यामि॒ तच्छृ॑णु ।इ॒म ऐ॒न्द्रा अ॑तिस॒रा आकू॑तिं॒ सं न॑मन्तु मे ।तेभिः॑ शकेम वी॒र्यं१ जात॑वेद॒स्तनू॑वशिन्

indrā yāhi me havamidaṃ kariṣyāmi tacchṛṇu | ima aindrā atisarā ākūtiṃ saṃ namantu me | tebhiḥ śakema vīryaṃ1 jātavedastanūvaśin

हिन्दी अर्थ

१५) से ष बड़ तक्रिये- मसनद -वाली अदानभावना है । (हिरण्य- जदानभावना के लिए (नमः) व्प्रहार (अकरम्) मने करिया है। र 8४ मन्त्र ६ के सदुश है। अदानभावनावाले धनिक का मुख ध ५ "ठ तथा प्रसन्नता के कारण हिरण्यसदुश चमकने लगत। ह ५ कं । नक्काशीवाले हो जते है, परन्तु अदानभावना जब व्यापिनी हो जाती है तव सामाजिक उन्नति नहीं होनी, एेसी अराति अथात् अदान- भावना का विनाश प्रत्येक साम।जिकत्पक्ितिको करना चाहिए ।

English

O missile of the eye, missile of spirit, thou missile of devotion and of fervour! Thou art the weapon shot against the weapon. Let those be weaponless who sin against us.

अध्याय ५

श्लोक 8.3

यद॒साव॒मुतो॑ देवा अदे॒वः संश्चिकी॑र्षति ।मा तस्या॒ग्निर्ह॒व्यं वा॑क्षी॒द्धवं॑ दे॒वा अ॑स्य॒ मोप॑ गु॒र्ममै॒व हव॒मेत॑न

yadasāvamuto devā adevaḥ saṃścikīrṣati | mā tasyāgnirhavyaṃ vākṣīddhavaṃ devā asya mopa gurmamaiva havametana

हिन्दी अर्थ

(१-६) अथर्वा । नानादेवताः, १, २ अग्निः; ३ विश्वेदेवाः; ४-€ शद्रः । वेकङ्कतैनेध्मेन॑ देवेम्य आञयं वह । मे (मादय) हित कर, प्रसन्न कर, ताकि (सर्वे) वे सव (मे) मेरे (हवम्) आह्धान पर (आ यन्तु) मेरी सहायता के लिए आ जाएं अर्थात् बृहती सेना का पति कहते हँ (यजुः० १७।४०) । सूक्त युद्धपरक है ।

English

Make with thy weapon weaponless, O Agni, all wicked men who deal with us as foemen with eye, with thought, with spirit, or intention.

अध्याय ५

श्लोक 8.4

अति॑ धावतातिसरा॒ इन्द्र॑स्य॒ वच॑सा हत ।अविं॒ वृक॑ इव मथ्नीत॒ स वो॒ जीव॒न्मा मो॑चि प्रा॒णम॒स्यापि॑ नह्यत

ati dhāvatātisarā indrasya vacasā hata | aviṃ vṛka iva mathnīta sa vo jīvanmā moci prāṇamasyāpi nahyata

हिन्दी अर्थ

प्रसन्न होकर मुख्य सेनापति की सहायता करे । १. “यो । मृवनानि वस्ते (भथर्वं ° १३।३।१), जिस परमेश्वर ने वस्तरषूप म मुवनीं कौ बोदनी को ओढा हुमा ह । दरापि त= वस्त, उत्तरीयवस्त्र । २. अरातिः--अ--रा (दाने) तिः । जो सामाजिक उन्नति के लिए दाम नही देता वहू समाज का विघातक है, अतः अराति का अथं शत्रू भी है। इन्द्रा याहि मे हव॑मिदं करिष्यामि तच्छंण ।

English

Thou art the house of Indra. I betake me to thee, I enter thee with all my cattle, With all my people and with all my body, with all my soul, with mine entire possessions.

अध्याय ५

श्लोक 8.5

यम॒मी पु॑रोदधि॒रे ब्र॒ह्माण॒मप॑भूतये ।इन्द्र॒ स ते॑ अधस्प॒दं तं प्रत्य॑स्यामि मृ॒त्यवे॑

yamamī purodadhire brahmāṇamapabhūtaye | indra sa te adhaspadaṃ taṃ pratyasyāmi mṛtyave

हिन्दी अर्थ

तेभिः शक्रेम वीय जातवेदस्तनैधरिन् ॥२॥ सहायताके लिए तू आ, (इदम्) इस पृदधको (करिष्यामि) मै करूगा, (तत्) उस सम्बन्ध मे (शृणु) मेरी माँग को सुन, कि (इमे) वेजो उपे सफल करें (तेभिः) उन सैनिकों द्वारा (वीर्यम्) वीरता (शकेम) हम कर सकं, (जातवेदः) है जानी ! तथा (तनूवशिन्) साम्राज्य-तन् को यद सावमृतों देवा अदेवः सैश्चिकीषति । मा तस्याननिरव्यं ताक्ीदवं देवा अस्य मोप॑ गुममेव हवमेतन ॥३॥

English

Thou art the guard of Indra. I betake me to thee, etc. Thou art the shield of Indra. I betake me to thee, etc.

अध्याय ५

श्लोक 8.6

यदि॑ प्रे॒युर्देव॑पु॒रा ब्रह्म॒ वर्मा॑णि चक्रि॒रे।त॒नू॒पानं॑ परि॒पाणं॑ कृण्वा॒ना यदु॑पोचि॒रे सर्वं॒ तद॑र॒सं कृ॑धि

yadi preyurdevapurā brahma varmāṇi cakrire| tanūpānaṃ paripāṇaṃ kṛṇvānā yadupocire sarvaṃ tadarasaṃ kṛdhi

हिन्दी अर्थ

(देवाः) है साम्राज्य के दिव्य मधिकारियो ! (अदेवः) यदि कोर्ट अदिव्य अधिकारी, (अमुतः) उस अपने अधिकार-पद से (संचिकीषति) इसके साह्वान पर (मा) न (उपगः) इसकं पास जाओ, (मम, एव) मुञ्ज मुख्य सेनापति के ही (हवम्) जाह्वान पर (एतन) आओ । (अत्िसराः) है शीघ्रगामी सैनिको ! (मति धावत) खूब दोड़ो, (दन्दस्य) सम्राट् के (वचसा) कथन या अदेश के अनुसारं (हत)

English

Indra’s protection art thou. I betake me to thee, I enter thee with all my cattle. With all my people and with all my body, with all my soul, with mine entire possessions.

अध्याय ५

श्लोक 8.7

यान॒साव॑तिस॒रांश्च॒कार॑ कृ॒णव॑च्च॒ यान्।त्वं तानि॑न्द्र वृत्रहन् प्र॒तीचः॒ पुन॒रा कृ॑धि॒ यथा॒मुं तृ॒णहां॒ जन॑म्

yānasāvatisarāṃścakāra kṛṇavacca yān| tvaṃ tānindra vṛtrahan pratīcaḥ punarā kṛdhi yathāmuṃ tṛṇahāṃ janam

हिन्दी अर्थ

२०२ अबनंयेटर्भाष्म काण्ड ५। अनु° २। सक्त ८) । नाभी को मार हानो । (वृकः) भैडिया (इव) जैसे (अविम्) भर फो, वस तुम (मध्नीत) अदेवाधिकारी को मथ डालो, (मा मोचि) (नह्यत) बाधदो नासिका तथा मुख पर पटरी बधिदो, ताकि (सः) वह (वः) 4. अदेवाधिकारी (माजौवन्) न जीवित रहे । । न का वचन मादेशसूप ही होता है । (नह्यत = णह्

English

A charm to deprecate Arāti or Malignity Bring thou to us, bar not the way, Arāti! Stay not the guerdon that is being brought us.

अध्याय ५

श्लोक 8.8

यथेन्द्र॑ उ॒द्वाच॑नं ल॒ब्ध्वा च॒क्रे अ॑धस्प॒दम्।कृ॒ण्वे॒३ऽहमध॑रां॒स्तथा॒मूञ्छ॑श्व॒तीभ्यः॒ समा॑भ्यः

yathendra udvācanaṃ labdhvā cakre adhaspadam| kṛṇve3'hamadharāṃstathāmūñchaśvatībhyaḥ samābhyaḥ

हिन्दी अर्थ

(अमी) उन्हों अदेव ओर अदेव के साथियों ने (अपभूतये,) (प्रति) तेरी ओर (अस्यासि) मँ मख्य सेनापति फक देता ह । यदि भयु्देवपुरा व्रह्म षमींणि चक्रि (यदि) यदि वे अर्थात् अदेव ओर उसके साथी (देवपुरा)

English

Homage be paid to Failure, to Misfortune, and Malignity. The man whom thou preferrest, O Arāti, he who prates to us—

अध्याय ५

श्लोक 8.9

अत्रै॑नानिन्द्र वृत्रहन्नु॒ग्रो मर्म॑णि विध्य ।अत्रै॒वैना॑न॒भि ति॒ष्ठेन्द्र मे॒द्य॑१हं तव॑ ।अनु॑ त्वे॒न्द्रा र॑भामहे॒ स्याम॑ सुम॒तौ तव॑

atrainānindra vṛtrahannugro marmaṇi vidhya | atraivainānabhi tiṣṭhendra medya1haṃ tava | anu tvendrā rabhāmahe syāma sumatau tava

हिन्दी अर्थ

था है, दस प्रकार (तनूपानम्, परिपाणम्) निज शरीररक्षा ओर मन्व ५ तु सूखा दे, नीरस करदे, निर्वीयं करदे। यानसानंतिसराण्चकरारं कृणवच्च यान् । दुगंति । लवा हमारी भूति अर्थात् सम्पत्ति या वैभव का विनाश । २. फेंकने से विरोधी ब्रह्या के प्रति घृणा सूचित कौ गई हे। ॑

English

This man of thine, we reverence. Baffle not thou my heart’s desire, May our desire which Gods have roused fulfil itself by day and night.

अध्याय ५

श्लोक 9.1

आत्मा १-८ ब्रह्म।वास्तोष्पतिः, आत्मा।१,५ दैवी बृहती, २, ६ दैवी त्रिष्टुप्, ३, ४ दैवी जगती, ७ विराडुष्णिग्बृहतीगर्भा पञ्चपदा जगती, ८ पुरस्कृतित्रिष्टुब्बृहतीगर्भा चतुष्पदा त्र्यवसाना जगती।दि॒वे स्वाहा॑

ātmā 1-8 brahma| vāstoṣpatiḥ, ātmā| 1,5 daivī bṛhatī, 2, 6 daivī triṣṭup, 3, 4 daivī jagatī, 7 virāḍuṣṇigbṛhatīgarbhā pañcapadā jagatī, 8 puraskṛtitriṣṭubbṛhatīgarbhā catuṣpadā tryavasānā jagatī| dive svāhā

हिन्दी अर्थ

सैनिकों को (चकार) एकवित कर चृका है, (च, कृणवत्) जौर एकत्रित पूर्णतया कर है. वापस लौटादे, (यथा ) जिस प्रकार कि (अमुम्) उस (जनम्) अदेव जन को (तुणहाम्) मै मुख्य सेनापति हसित करू, साम्राज्य पर घेरा डाला हृभा है, अतः उन सैनिकों को पराडमूखी करने को कहा है मौर सदेव को पकड़ लिया है, मृत्युदण्ड के लिए । तले अर्थात् निज पादसेवक (चकर) किया है, (तथा) उसी समय (अहम्) मै मुख्य सेनापति (अमून्) उन शत्रुसेनिकों कौ ( अधरान्) सधोगतिवाले,

English

We seek to win Arāti: to Arāti be our homage paid. We, suppliant, call on Bhaga, on Sarasvati, Anumati,

अध्याय ५

श्लोक 9.2

पृ॒थि॒व्यै स्वाहा॑

pṛthivyai svāhā

हिन्दी अर्थ

अनं सेन्द्रा र॑भामहे स्याम सुमतो तवं ॥९॥ (वृत्रहन् इनदर) घेरा डालनेवालो का हनन कर नेवाले है सज्राट् । तेरी आज्ञानुसार ही (आरभामहे ) हम सन युद्धारम्भ करते है, (तव) तेरी (सुमतौ) सुमति में ही (स्याम ) हम सैनिक आदि हौ, रह । (वित्रे स्वाहा) चुलोक के लिए जाहुति हौ । ( पृथिन्ये स्वाहा) परथिवी

English

Pleasant words have I spoken, sweet as honey is, at invocations of the Gods. The portion that I crave with speech intelligent and full of power,

अध्याय ५

श्लोक 9.3

अ॒न्तरि॑क्षाय॒ स्वाहा॑

antarikṣāya svāhā

हिन्दी अर्थ

को “विदवकायिक" स्वरूप में लीन करना चाहता है मन्त ७ । वह् पहले पृथिवी मेँ निज पाथिव स्वरूप को लीन करता हे, वह पुथिवी को दिव् मे निज कारण-देहको लीन करताहै, दिव् को निज कारण-देह् वह् समक्ता है । यह् है आरोह-करम, नीचे से ऊपर की ओर आरोहण करना । त्रिविध-देह को त्रिविध-लोको म लीन करना अभिप्रेत है । है, अर्थात् "्टीक कहा है", इतना हीरहै। निसक्त मे भी कहाहै कि

English

May faith, presented with the gift of tawny Soma, find to-day. Do not thou make our words or wishes fruitless. Let the twain

अध्याय ५

श्लोक 9.4

अ॒न्तरि॑क्षाय॒ स्वाहा॑

antarikṣāya svāhā

हिन्दी अर्थ

प्रकरण मे दशयि है, (निरुक्त ७।६।२३) । आरोह प्रत्यवरोह, यथा “रोहात् प्रत्यवरो चिकीर्षितः" (७।६।२३) 1, । । । प्राणः) प्राणदहै, सूर्यः, मे, चक्षुः) सूये, मेरी चक्षु है, (वातः ) वायु , शरीरम्) पृथिवी शरीर है । (अहम् अस्तृतः नाम म व । को (दावापृथिवीभ्याम् ) यलोक ओर पृथिवीलौक के लिए, (गोपीथाय) मं (निदधे) निधिरूप करता हूं । ४

English

Indra Agni, bring us treasures. All, fain to-day to give us gifts, welcome Arāti with your love.

अध्याय ५

श्लोक 9.5

दि॒वेस्वाहा॑

divesvāhā

हिन्दी अर्थ

हआ है । मन्म वक्ताने निज विर्वकाथिकस्वरूप का कथन कियाहै। भारोहक्रम से निज को पृथिवी, अन्तरिक्ष ओर दिव्में विलीन । विश्वरूप होकर विशृद्ध हौ गया है तदनन्तर वह पूनः निन अल्पकं यि शरीर मे अवतीणं कर, निज को आत्मा" के रूप मे अवध्य" जानकर, देता है । अस्ततः=अ +-“'स्तृणाति वधकर्मा” (निषं ° २।१६ ) । उत्कृष्ट कर लिया है, (उत् बलम्) बल उत् आयुः) आयु को मैने उक्कृष्ट कर 1 को , कर लिया है, (उत् कृतम्) किये व 1 यलोक ! तथा (आयुष्पतनी) पत्नी की तरह भायु == जीवन त

English

Misfortune! go thou far away: we turn thy harmful dart aside. I know thee well, Arāti! as oppressor, one who penetrates.

अध्याय ५

श्लोक 9.6

पृ॒थि॒व्यै स्वाहा॑

pṛthivyai svāhā

हिन्दी अर्थ

२०६ भयवेवेदभाष्य काण्ड ५। अनु० २। सूक्त १० कायरूप समन्न लियादहै ओौर निज जायु ओर वल आदि को उत्कृष्ट कर लिथाहै, वह् निजरक्षा के लिए अपने-आापको द्युलोक ओौर पृथिवी के प्रति सुपुदं कर देता है, ओर निजरक्षा की चिन्तासे उपरतहो जाता, वह् पथिवीमे होरहीहै वसेमेरी भी रक्षा होती रहेगी । स्वधा अन्ननाम अर्थात् जीवन को बढ़ती है अन्नादि हारा, वैसे पृथिवी अन्न ओौरपेय

English

Oft, coming as a naked girl thou hauntest people in their sleep, Baffling the thought, Arāti! and the firm intention of a man.

अध्याय ५

श्लोक 9.7

सूर्यो॑ मे॒ चक्षु॒र्वातः॑ प्रा॒णो॒३न्तरि॑क्षमा॒त्मा पृ॑थि॒वी शरी॑रम्।अ॒स्तृ॒तो नामा॒हम॒य म॑स्मि॒ स आ॒त्मानं॒ नि द॑धे॒ द्यावा॑पृथि॒वीभ्यां॑ गोपी॒थाय॑

sūryo me cakṣurvātaḥ prāṇo3ntarikṣamātmā pṛthivī śarīram| astṛto nāmāhamaya masmi sa ātmānaṃ ni dadhe dyāvāpṛthivībhyāṃ gopīthāya

हिन्दी अर्थ

आदि प्रदान द्वारा हम सबकी आयु को, जीवन को, बढ़ती है । है ब्रह्म ! (अदमवर्म) पत्थर के सदृश सुदृढ कवच, (मे) मेरे लिए, (असि) तु है, (यः) जो (अघायुः) हत्यारूपी-पापकमे चाहता हभ, (प्राच्याः दिशः) पूवं की दिशासे, (माअभिदासात्) मेरा उपक्षय'करे,

English

To her the mighty vast in size, who penetrates all points of space, To her mine homage have I paid, Nirriti with her golden hair.

अध्याय ५

श्लोक 9.8

उदायु॒रुद् बल॒मुत् कृ॒तमुत् कृ॒त्यामुन्म॑नी॒षामुदि॑न्द्रि॒यम्।आयु॑ष्कृ॒दायु॑ष्पत्नी॒ स्वधा॑वन्तौ गो॒पा मे॑ स्तं गोपा॒यतं॑ मा ।आ॒त्म॒सदौ॑ मे स्तं॒ मा॑ हिंसिष्टम्

udāyurud balamut kṛtamut kṛtyāmunmanīṣāmudindriyam| āyuṣkṛdāyuṣpatnī svadhāvantau gopā me staṃ gopāyataṃ mā | ātmasadau me staṃ mā hiṃsiṣṭam

हिन्दी अर्थ

आभ्यन्तर कवच दहै, मनकी कवचहै (मन्व ८) । अवायु हैँ देन्धिपिक विषय, जोकि बाहर की दिशाओं पे मन पर प्रहारकरते है, परन्तु मनप्र् ,, चद्ी ब्रह्मकवच के कारण ये विषय मन पर प्रहार नहीं कर सकते, वे कवच । १. अभिप्राय यह है कि असंयमित विषयभोग, पापकम हँ जोकि शारीरिक, मानसिक सतत उसको ध्यानमें रखने से, एेद्द्रियिक विषय बाह्य दिशाओं से मनपर प्रहार नहीं कर सकते । अवायुः=अघमिति पापनाम “आहन्तीति लिए (असि) तू है । (यः) जो मघायु (मा) मेरा (दक्षिणायाः दिशः) दक्षिण दिशा से उपक्षय करे-णेष पूववत् ।

English

Auspicious, with her golden hue, pillowed on gold, the mighty one To this Arāti clad in robes of gold mine homage have I paid.

अध्याय ५

श्लोक 10.1

आत्मरक्षा १-८ ब्रह्म।वास्तोष्पतिः।१-६ यवमध्या त्रिपदा गायत्री, ७ यवमध्या ककुप्, ८ पुरोधृतिद्व्यनुष्टुब्गर्भा पराष्टिस्त्र्यवसाना चतुष्पदातिजगती।अ॒श्म॒व॒र्म मे॑ऽसि॒ यो मा॒ प्राच्या॑ दि॒शोऽघा॒युर॑भि॒दासा॑त्।ए॒तत् स ऋ॑च्छात्

ātmarakṣā 1-8 brahma| vāstoṣpatiḥ| 1-6 yavamadhyā tripadā gāyatrī, 7 yavamadhyā kakup, 8 purodhṛtidvyanuṣṭubgarbhā parāṣṭistryavasānā catuṣpadātijagatī| aśmavarma me'si yo mā prācyā diśo'ghāyurabhidāsāt| etat sa ṛcchāt

हिन्दी अर्थ

ह् बरह्म ! (अर्मवमं) पत्थर के सदृश सुदृढ कवचे, (भ) मेरे लिए (असि)त्है। (यः) जो अघायु (मा) मेरा (प्रतीच्याः दिशः) परिचिम की दिशा से उपक्षय करे'णेष पूववत् । लिए, (असि) तु है । (यः) जो अघायु (मा) भेरा (उदीच्या दिशः) उत्तर की दिशा से उपक्षय करे शेष पूर्ववत् । हे ब्रह्म ! (अङमवर्म) पत्थर के सदुण सुदृढ कवच, (मे) मेरे दिशः) नीचे कौ दिशा से उपक्षय करे "शेष पूववत् ।

English

A charm for the discomfiture and destruction of hostile priests 57

अध्याय ५

श्लोक 10.2

अ॒श्म॒व॒र्म मे॑ऽसि॒ यो मा॒ दक्षि॑णाया दि॒शोऽघा॒युर॑भि॒दासा॑त्।ए॒तत् स ऋ॑च्छात्

aśmavarma me'si yo mā dakṣiṇāyā diśo'ghāyurabhidāsāt| etat sa ṛcchāt

हिन्दी अर्थ

हे ब्रह्म ! (अशमवमे) पत्थर के सदृश सुदृढ कवच, (मे) मेरे दिशः) ऊध्व की दिशा से उपक्षय करे. -णेष पूववत् । । हे ब्रह्म ! (अशष्मवभे) पत्थर के सदृश सुदृढ कवच, (भे, मेरे २०८ अधवेवेदभाष्य काण्ड ५। अनु° २। सूक्त १५

English

With fuel of Vikankata bring molten butter to the Gods. O Agni, make them joyful here: let them all come unto my call.

अध्याय ५

श्लोक 10.3

अ॒श्म॒व॒र्म मे॑ऽसि॒ यो मा॑ प्र॒तीच्या॑ दि॒शोऽघा॒युर॑भि॒दासा॑त्।ए॒तत् स ऋ॑च्छात्

aśmavarma me'si yo mā pratīcyā diśo'ghāyurabhidāsāt| etat sa ṛcchāt

हिन्दी अर्थ

लिए, (असि) तु है, (यः) जो (अघायुः) अघायु (दिशाम्) दिशाओं के वहता मन उप ह्ये मातरिश्वना प्राणापानौ । वेदवाणी द्वारा (वाचम्) वाणी का (उप ह्वयामहे) हम निज समीप आह्वान बृहद् -ब्रह्मरूपी-कवच के कारणे विषयों का प्रहार मन परनहीं हुमा, अतः मन पवित्र हौ गया द्वै । मनोयुजा = विज्ञानमयी वेदवाणी मनन- युक्ता है, मननयोग्या है, मननमयी है, उस वाणी के उच्चारणसे हमारी वाणीभौ मननमयीहो जातो है, यही सरस्वती से निज वाणी का अह्वान

English

O Indra, come unto my call, This will I do. So hear it thou. Let these exertions for the sake of Indra guide my wish aright.

अध्याय ५

श्लोक 10.4

अ॒श्म॒व॒र्म मे॑ऽसि॒ यो मोदी॑च्या दि॒शोऽघा॒युर॑भि॒दासा॑त्।ए॒तत् स ऋ॑च्छात्

aśmavarma me'si yo modīcyā diśo'ghāyurabhidāsāt| etat sa ṛcchāt

हिन्दी अर्थ

शरीर ओर शरीरायवव स्वतः पवित्र हो जाते है । व्यक्ति तब अपनेको “सवंत: पवित्र" समञ्लने लगता है । वालातू (इह) दस जीवन मे, (महे) महान् (असुराय) प्रज्ञावान् वरुण के से सम्पन्न होनैवाले (वरुण) वरुण ! (पुरिनम्) नाना वर्णोवाली पृथिवी को मननः-पर्वके (अचिकित्सीः) जगत् मे निवास किया है ।

English

Therewith, O Jātavedas, Lord of Bodies! may we win us strength. Whatever plot from yonder, O ye Gods, that godless man would frame,

अध्याय ५

श्लोक 10.5

अ॒श्म॒व॒र्म मे॑ऽसि॒ यो मा॑ ध्रु॒वाया॑ दि॒शोऽघा॒युर॑भि॒दासा॑त्।ए॒तत् स ऋ॑च्छात्

aśmavarma me'si yo mā dhruvāyā diśo'ghāyurabhidāsāt| etat sa ṛcchāt

हिन्दी अर्थ

बोला । वरुण है श्रेष्ठ परमेदवर जो कि पापों से निवारित करता है (अथरवं० ४। १६। १-६) । परमेरुवर के प्रति वोलना मानुषी वाणी दवारा सम्भव नहीं । ने कृपापूवेक निज स्वरूप तेरे प्रति प्रकट कर दियादहे। तव निज मात्माम प्रकट हए वरुण के साथ तूने आत्मिक संवाद किया है, वाचि क संवाद नहीं । की उपासना को है, इस ध्यानयनजञ पर दक्षिणारूप में उसे पृदिन प्राप्त हुई है। ५ ते कर आमा, यदि जगत् में निवास न कष ती जगत् की स्थिति कंसेहोसवं,

English

Let not the Gods come to his call, nor Agni bear his offering up. Come, ye, come hither to my call.

अध्याय ५

श्लोक 10.6

अ॒श्म॒व॒र्म मे॑ऽसि॒ यो मो॒र्ध्वाया॒ दि॒शोऽघा॒युर॑भि॒दासा॑त्।ए॒तत् स ऋ॑च्छात्

aśmavarma me'si yo mordhvāyā diśo'ghāyurabhidāsāt| etat sa ṛcchāt

हिन्दी अर्थ

काण्ड ५। अनु° ३। सूक्त ११ अथरवंवेदमाष्य २११ ; 1 (धरिष्ये) जिसे कि मै भविष्य मेँ धारण करूंगा । , 1 । अनागत घटनाओं के वणेन आदि से अतिगम्भीर, दुर्ञेयहै। म अथर्वा एसे २१० अपवैषेवभाष्य काण्ड ५। जनु० ३। सूक्त ११ न कामेन पुनमघो भवामि द च॑ कं पृश्चिमेतामपाने।

English

Run, ye Fxertions, farther on By Indra’s order smite and slay. As a wolf worrieth a sheep, so let not him escape from you while life remains. Stop fast his

अध्याय ५

श्लोक 10.7

अ॒श्म॒व॒र्म मे॑ऽसि॒ यो मा॑ दि॒शाम॑न्तर्दे॒शेभ्यो॑ऽघा॒युर॑भि॒दासा॑त्।ए॒तत् स ऋ॑च्छात्

aśmavarma me'si yo mā diśāmantardeśebhyo'ghāyurabhidāsāt| etat sa ṛcchāt

हिन्दी अर्थ

असि) जातवेदा नामवाला हुभाहै। तर जातवेदाः == जातप्रज्ञानः, तथा जातधनः (निरुक्त ७।५।१६) । जात + मंमीरः कार्येन सत्यं जातेन =, कवि नहीं, ओर (न) न (मेधया) मेधा से (धीरतरः) अधिक बुद्धिमान भधर्वाद्राराही अधवेवेद काआविमवि हता हो, ओर अधर्वा्रिषि तथा अथववेद ॥

English

breath. The Brāhman whom those yonder have appointed priest, for injury,

अध्याय ५

श्लोक 10.8

बृ॒ह॒ता मन॒ उप॑ ह्वये मात॒रिश्व॑ना प्राणापा॒नौ।सूर्या॒च्चक्षु॑र॒न्तरि॑क्षा॒च्छ्रोत्रं॑ पृथि॒व्याः शरी॑रम्।सर॑स्वत्या॒ वाच॒मुप॑ ह्वयामहे मनो॒युजा॑

bṛhatā mana upa hvaye mātariśvanā prāṇāpānau| sūryāccakṣurantarikṣācchrotraṃ pṛthivyāḥ śarīram| sarasvatyā vācamupa hvayāmahe manoyujā

हिन्दी अर्थ

जनिमा) सव उत्पन्न भुवनो को (वेत्थ) जानतादहै कि (अमुर) है अमर! ¦ (यजुः ३।३) । अग्नि सवं दाहकं है । महायोगी अध्वा मी सवंपापदाहक होने से ¦ अगनिरूप है । महायोगी का निष्पाप होना स्वतः सिद्ध है । (हि (एना रजसः) इस रञ्जक-दयुलोक से (परः) परे (अन्यत्) ओर (कि । मस्ति) क्या है ? तथा (एना परेण) इस परलोक से (अवरम्) इधर (किम्) क्याहै? इसेभीतु जानताहै। . ११. अयर्वेवेदभाष्य काण्ड ५। अनु० ३। सूक्त १

English

He, Indra! is beneath thy feet. I cast him to the God of Death. If they have issued forth, strongholds of Gods, and made their shield of prayer,

अध्याय ५

श्लोक 11.1

संपत्कर्म।१-११ अथर्वा।वरुणः (प्रश्नोत्तरम्)।त्रिष्टुप्, १ भुरिक्, ३ पङ्क्तिः, ६ पञ्चपदा अतिशक्वरी, ११ त्र्यवसाना षट्-पदा अत्यष्टिः।क॒थं म॒हे असु॑रायाब्रवीरि॒ह क॒थं पि॒त्रे हर॑ये त्वे॒षनृ॑म्णः ।पृश्निं॑ वरुण॒ दक्षि॑णां ददा॒वान् पुन॑र्मघ॒ त्वं मन॑साचिकित्सीः

saṃpatkarma| 1-11 atharvā| varuṇaḥ (praśnottaram)| triṣṭup, 1 bhurik, 3 paṅktiḥ, 6 pañcapadā atiśakvarī, 11 tryavasānā ṣaṭ-padā atyaṣṭiḥ| kathaṃ mahe asurāyābravīriha kathaṃ pitre haraye tveṣanṛmṇaḥ | pṛśniṃ varuṇa dakṣiṇāṃ dadāvān punarmagha tvaṃ manasācikitsīḥ

हिन्दी अर्थ

(एना रजसः) इस रञ्जकं द्युलोक से (परः) परे (एकम्) एक भौर की बोर भौ (दु्णशम्) दुषाप्य (परः) परात् पर (अस्ति) बह ही एक- तत्त्व है । (वरुण) है वरण करनेवाले या वरणयोग्य परमेश्वर ! (ते) तेरे तिरस्कृत व चनोंवाले (भवन्तु) ह, (दासाः) उपक्षयकारी ये (नीचैः) नीचे की भूमि पर (उप सपन्तु) सपण करते रहँ । अधोवचसः == अधस्कृतवचसः, ॥ प्रतीत होता है । इस प्रकार इस पाठ में द्विः पठित ' एना" पद सार्थक हो

English

Gaining protection for their lives, protection round about, make all their instigation powerless.

अध्याय ५

श्लोक 11.2

न कामे॑न॒ पुन॑र्मघो भवामि॒ सं च॑क्षे॒ कं पृश्नि॑मे॒तामुपा॑जे ।केन॒ नु त्वम॑थर्व॑न् काव्ये॑न॒ केन॑ जा॒तेना॑सि जा॒तवे॑दाः

na kāmena punarmagho bhavāmi saṃ cakṣe kaṃ pṛśnimetāmupāje | kena nu tvamatharvan kāvyena kena jātenāsi jātavedāḥ

हिन्दी अर्थ

कामना की पूति के लिए नहीं (मन्त्र २), भपितु प्रजा के सृख के लिए है, का होते रहना--यह तो वरुण नियमसेहीहोताहै। मा दूत्=माभूः। कर, इसलिए (जरितः) है स्तोता ! (ते) तुके (पूनः) बार-बार (पृरिनम्) भूमि (ददामि) ्मैदेता हं । (विश्वासु मानुषीषु दिक्षु, अन्तः मनुष्यों से बसी हू सव दिशाभों के भीतर (शचीभिः) वेदवाणियों द्वारा (मे) मेरे प्रजाजन मूङ्ञे निधन न कट इसलिएहै मेरे स्तोतुवगं या अथर्वा तुच मै वरुण प्रत्येकं सृष्टिकाल मे धनधान्यं से भरी भरमिको बार-बार देता हं, परन्तु देता हूं उनके सूख के लिए जोकि मेरे स्तोतार, ताकि मेरे सदुश वे, घन को पराथ देकर, उनके सुख को बहा । इस निमित्त है मेरे

English

Even so for all the coming years I cast those men beneath my feet. Here, Indra Vritra-slayer, in thy strength pierce thou their vital. parts.

अध्याय ५

श्लोक 11.3

स॒त्यम॒हं ग॑भी॒रः काव्ये॑न स॒त्यं जा॒तेना॑स्मि जा॒तवे॑दाः ।न मे॑ दा॒सो नार्यो॑ महि॒त्वा व्र॒तं मी॑माय॒ यद॒हं ध॑रि॒ष्ये

satyamahaṃ gabhīraḥ kāvyena satyaṃ jātenāsmi jātavedāḥ | na me dāso nāryo mahitvā vrataṃ mīmāya yadahaṃ dhariṣye

हिन्दी अर्थ

वसी मानुषी प्रजाभौं मे आया कर, उनमें स्तोत्रं का प्रसार करने के लिए। समूह । मन्त्रद्वारा वहणने निज निधनता का अपहार किया दहै । हए (आ यन्तु) भए । (नू) निश्चय से (मे) मुञ्चे (देहि) दे, (यत्) जिसे कि (मे) मृक्ने (दत्तः असि) तूने अभी तक नहीं दिया, (युज्यः) योग्य (सप्तपदः) सात पदोंवाला (मे) मेरा (सखा असि) सखातुहै। २१४ अथर्ववेवमाष्य रकीण्ड ५। अनु० २। सूवतत १ ॥

English

Here, even here, attack them, O Indra. Thine own dear friend am I. Indra, we closely cling to thee. May we be in thy favouring grace.

अध्याय ५

श्लोक 11.4

न त्वद॒न्यः क॒वित॑रो॒ न मे॒धया॒ धीर॑तरो वरुण स्वधावन्।त्वं ता विश्वा॒ भुव॑नानि वेत्थ॒ स चि॒न्नु त्वज्जनो॑ मा॒यी बि॑भाय

na tvadanyaḥ kavitaro na medhayā dhīrataro varuṇa svadhāvan| tvaṃ tā viśvā bhuvanāni vettha sa cinnu tvajjano māyī bibhāya

हिन्दी अर्थ

करता है । अथर्वा वरुणसे कहता रै क्रित तो मेरा योग्य सखाटहै, सखा भी क्या अपने सखा से निज स्वरूप को चछिपाये रखता है । सप्तपदः सखा जिसके साथ भौ मिलकर सात पग चला जाए वह भी सखा वन जाता है, अथवा जिसके साथ सात पद अर्थात् शब्द भी बोल लिये जाए वह॒ भी सखा मे बाते हुई है, अतः तु मेरा सखा रै, अतः तु मृज्ञे निजस्वरूप का दर्शन दे । समानौ वरन्धबरुण समा जा वेदाहं तद्यन्नविषा समा जा (नौ) हम दोनों की (बन्धुः) बन्धुता (समा) एक-सद्श है (वरुण) हे वरुण ! ओर हम दोनों कौ (जा) उत्पत्ति भी (समा) एक सदश हैः; (अहम्) मँ (वेद) जानता हं (तत्) उसे (यत्) जोकि (नौ) हम दनो की (एषा जा) यह् उत्पत्ति (समा) एक-सदृश है । (ददामि) अतः मै देता ह

English

A prayer to Heaven and Earth for protection and assistance All hail to Heaven!

अध्याय ५

श्लोक 11.5

त्वं ह्य॑१ङ्ग व॑रुण स्वधाव॒न् विश्वा॒ वेत्थ॒ जनि॑म सुप्रणीते ।किं रज॑स ए॒ना प॒रो अ॒न्यद॑स्त्ये॒ना किं परे॒णाव॑रममुर

tvaṃ hya1ṅga varuṇa svadhāvan viśvā vettha janima supraṇīte | kiṃ rajasa enā paro anyadastyenā kiṃ pareṇāvaramamura

हिन्दी अर्थ

ओर वरुण में बन्धृता एक-सदुश है । अथर्वा वरुण का सखाहै ओर वरुण अथर्बाकासखादहै। सखित्वभावमें दोनों समान, एक-सदुश हैँ (मन्व €, १०) । इन दोनों की उत्पत्ति भी समा है, समान है, एक-सदश है । दोनों ,, हृदयवासी है, दोनों कौ स्वरूपाभिव्यक्ति हृदय में होती है । अथर्वा, वरुण को ¦ अभी तक वरूण ने नहीं दिया था अदत्त, जिसे कि वरुण ने अब अथर्वा , कोदेदियाहै ददामि इसप्रकार वरुणने निज सखित्व को सार्थक युज्यः=-अथवा इसका अभिप्राय है “नुता हुमा” । संसार-शकट के

English

All hail to Earth! All hail to Air!

अध्याय ५

श्लोक 11.6

एकं॒ रज॑स ए॒ना प॒रो अ॒न्यद॑स्त्ये॒ना प॒र एके॑न दु॒र्णशं॑ चिद॒र्वाक्।तत् ते॑ वि॒द्वान् वरु॑ण॒ प्र ब्र॑वीम्य॒धोव॑चसः प॒णयो॑ भवन्तु नी॒चैर्दा॒सा उप॑ सर्पन्तु॒ भूमि॑म्

ekaṃ rajasa enā paro anyadastyenā para ekena durṇaśaṃ cidarvāk| tat te vidvān varuṇa pra bravīmyadhovacasaḥ paṇayo bhavantu nīcairdāsā upa sarpantu bhūmim

हिन्दी अर्थ

वहन में वरूण ओर अथर्वा जीवात्मा साथ-साथ जते हृए है, वरुण कतु- रूपमे संसार का वहनकररहाहै, अथर्वा भोक्तुरूप मेँ । जीवात्माएेन । हों तो वरुण किसके लिए संसार को रचे भौर उसका वहन करे ? । देवो देवायं गृणते वयोधा विप्रो विप्राय स्तुवते समधा: । (देवः) वरुण-देव (गृणते) स्तुति करनेवाले (देवाय) अथर्वादेव के लिए (वयोधाः) तू अन्न धारण करता है, उसे बन्न प्रदान करताहै, (विप्रः) मेधावी वरुण (स्तुवते) स्तुति करनेवाले (विप्राय) मेधावी अथर्वा के लिए (सुमेधाः) उत्तम मेधावाला उत्तम विचार वाला हो जाताहै। , वरुण) है

English

All hail to Air! All hail to Heaven!

अध्याय ५

श्लोक 11.7

त्वं ह्य१ङ्ग व॑रुण॒ ब्रवी॑षि॒ पुन॑र्मघेष्वव॒द्यानि॒ भूरि॑ ।मो षु प॒णींर॒भ्ये॒३ताव॑तो भू॒न्मा त्वा॑ वोचन्नरा॒धसं॒ जना॑सः

tvaṃ hya1ṅga varuṇa bravīṣi punarmagheṣvavadyāni bhūri | mo ṣu paṇīṃrabhye3tāvato bhūnmā tvā vocannarādhasaṃ janāsaḥ

हिन्दी अर्थ

धन (कृणुहि) प्रदान कर, (सखा) मित्र (नः) हमारा (असि) तु है, (च) मौर (परमम् परमः, बन्धुः) परमबन्धू भो है । अथर्वा सम्भवतः वेदाविर्भाव कालम, अथववेद का ऋषि अथर्वा (अथवं १०।७।२०) मेँ भी अथर्ववेद के आविभवि का कर्ता मथर्वा अभिप्रेत प्रतीत होता है । अथर्वा है "निरुढवित्तवृ्तिक महायोगी”, अतः इसे उपयुक्त जानकर परमेश्वर ने इस द्वारा अथववेद प्रकट किया है । विप्रः मेधाविनाम होने से पितारहै। राधः कृणुहि अथर्ववेद के सुप्रशस्त ज्ञान रूपी धन का

English

All hail to Eartht! Mine eye is Sīirya and my breath is Vāta, Air is my soul and

अध्याय ५

श्लोक 11.8

मा मा॑ वोचन्नरा॒धसं॒ जना॑सः॒ पुन॑स्ते॒ पृश्निं॑ जरितर्ददामि ।स्तो॒त्रं मे॒ विश्व॒मा या॑हि॒ शची॑भिर॒न्तर्विश्वा॑सु॒ मानु॑षीषु दि॒क्षु

mā mā vocannarādhasaṃ janāsaḥ punaste pṛśniṃ jaritardadāmi | stotraṃ me viśvamā yāhi śacībhirantarviśvāsu mānuṣīṣu dikṣu

हिन्दी अर्थ

३. राधः घननाम (निघं० २।१०) । चार वेदों का आविर्भाव चार ऋषियों द्वारा हुआ समिद्धो अश्र मनुषो रोणे देवो देवान प॑जसि जातवेदः । (मनुषः) मनुष्य के (दुरोणे) हदय-गृह मँ (अद्य) आज (समिद्धः) उपासक-देवों को (यजसि) स्वरूप दशेन देता दहै । (आच वहु) उपासक

English

Prithivī my body. I verily who never have been conquered give up my life toe

अध्याय ५

श्लोक 11.9

आ ते॑ स्तोत्राण्युद्य॑तानि यन्त्व॒न्तर्विश्वा॑सु॒ मानु॑षीषु दि॒क्षु।दे॒हि नु मे॒ यन्मे॒ अद॑त्तो॒ असि॒ युज्यो॑ मे स॒प्तप॑दः॒ सखा॑सि

ā te stotrāṇyudyatāni yantvantarviśvāsu mānuṣīṣu dikṣu| dehi nu me yanme adatto asi yujyo me saptapadaḥ sakhāsi

हिन्दी अर्थ

देव, चेतन प्रतीत हो रहा है । इसलिए दुरोणे" का अथं "हृदय-गृह" किया है । परमेश्वर हदयवासी है ओर वहाँ ही वह प्रदीप्त होता है, “ज्योतिरूपः मे चमकता दहै । दूतः टुदु उपतापे (स्वादिः) काम आदिका उपतापी । घर को यज्ञणालामेदहीहोतारहै मौर दशन हूदय-गृहमे। कोन गिरने देनेवाले ! इस में शवित देनेवाले ! , (ऋतस्य पथः) सत्य सामवेद प्रकट हुमा । छन्दःपूतिके लिप ‹रवि' पद पठ्तिहै। यज्ञो के साथ तीन वेदों का सम्बन्ध मनु ने माना रहै, अतः अथर्ववेद का कथन नहीं किया । अथववेद में प्रायः सांसारिक व्यवहारो का वर्णन हुजा है । इसमे अथववेद मे कहा भी है । यथा,--

English

Heaven and Earth for keeping. Exalt my life, my strength, my deed and action; increase my understanding and my vigour.

अध्याय ५

श्लोक 11.10

स॒मा नौ॒ बन्धु॑र्वरुण स॒मा जा वेदा॒हं तद् यन्ना॑वे॒षा स॒मा जा।ददा॑मि॒ तद् यत् ते अद॑त्तो॒ अस्मि॒ युज्य॑स्ते स॒प्तप॑दः॒ सखा॑स्मि

samā nau bandhurvaruṇa samā jā vedāhaṃ tad yannāveṣā samā jā| dadāmi tad yat te adatto asmi yujyaste saptapadaḥ sakhāsmi

हिन्दी अर्थ

योगी वरुण से प्रार्थना करता है कि व्यवहारी बणिये भी तुमसे उच्चगति देना । धन को ही सर्वस्व जाननेवाले उच्चगति के अधिकारी नहीं। (ह्यङ्ग वरुण) है वरुण ! (त्वम् हि) तूही (पुनमेषेषु) पुनः-पूनः स्थिति (ब्रवीषि) कहता है, परन्तु (एतावतः पणीन्) इन पणियों के (मभि) प्रति (मो षु भर्) तु पूर्णरूप से कठोर नहीं हुमा है, ताकि (जनासः)

English

Exertions which that man hath made, Exertions which he yet will make Turn them, O Indra, back again, O Vritra-slayer, back again on him that they may kill that

अध्याय ५

श्लोक 11.11

दे॒वो दे॒वाय॑ गृण॒ते व॑यो॒धा विप्रो॒ विप्रा॑य स्तुव॒ते सु॑मे॒धाः ।अजी॑जनो॒ हि व॑रुण स्वधाव॒न्नथ॑र्वाणं पि॒तरं॑ दे॒वब॑न्धुम्।तस्मा॑ उ॒ राधः॑ कृणुहि सुप्रश॒स्तं सखा॑ नो असि पर॒मं च॒ बन्धुः॑

devo devāya gṛṇate vayodhā vipro viprāya stuvate sumedhāḥ | ajījano hi varuṇa svadhāvannatharvāṇaṃ pitaraṃ devabandhum| tasmā u rādhaḥ kṛṇuhi supraśastaṃ sakhā no asi paramaṃ ca bandhuḥ

हिन्दी अर्थ

'परात्-परः' कहा ह । वह परमदवर नीचे कौ भोर मी दर-सै-दूर तक व्याप्त है, है, बुद्धि द्वारा यह जाना नहीं जा सकता । वह दर-से-दूर टै, वह् समीप-से-समीप है । वह इस ब्रह्माण्ड के भीतर है जौर इसके बाहर मी है (यजुः० ४०।५) । । धन के लोलुप बार-बार निन्दनीय कर्मो कौ कर, निज स्वार्थके लिए धनसंग्रह करते रहते हैँ, अतः ये निन्दनीय कर्मोवले होतेह, तोभी तु इन्हे व्यापार में धन प्रदान करता रहता है, ताकिये तुद निधन न कहं

English

man. As Indra, having seized him, set his foot upon Udvāchana,

अध्याय ५

श्लोक 12.1

ऋतस्य यज्ञः।१-११ अङ्गिराः।जातवेदाः।त्रिष्टुप्, ३ पङ्क्तिः।समि॑द्धो अ॒द्य मनु॑षो दुरो॒णे दे॒वो दे॒वान् य॑जसि जातवेदः ।आ च॒ वह॑ मित्रमहश्चिकि॒त्वान्त्वं दू॒तः क॒विर॑सि॒ प्रचे॑ताः

ṛtasya yajñaḥ| 1-11 aṅgirāḥ| jātavedāḥ| triṣṭup, 3 paṅktiḥ| samiddho adya manuṣo duroṇe devo devān yajasi jātavedaḥ | ā ca vaha mitramahaścikitvāntvaṃ dūtaḥ kavirasi pracetāḥ

हिन्दी अर्थ

जिन्वसि ।॥ (अथवं० ११।५।१६) ! इस मन्त्र में अथवेवेदोपदिष्ट ओषधयो का. व्यावहारिक विषयों का निर्देश नहीं हुमा । दस वर्णन द्वारा यहं भी सूचित होता रहित यज्ञ का (कृणुहि) सम्पादन कर । (निघं० १।११) । मध्वा=माधर्यं के साथ । मधुर वाणी स्वादु होती है

English

Be ye my powerful keepers, watch and guard me, ye mistresses of life and life’s creators! Dwell ye within me, and forbear to harm me.

अध्याय ५

श्लोक 12.2

तनू॑नपात् प॒थ ऋ॒तस्य॒ याना॒न् मध्वा॑ सम॒ञ्जन्त्स्व॑दया सुजिह्व ।मन्मा॑नि धी॒भिरु॒त य॒ज्ञमृ॒न्धन् दे॑व॒त्रा च॑ कृणुह्यध्व॒रं नः

tanūnapāt patha ṛtasya yānān madhvā samañjantsvadayā sujihva | manmāni dhībhiruta yajñamṛndhan devatrā ca kṛṇuhyadhvaraṃ naḥ

हिन्दी अर्थ

(प्रदिशा) निर्देशानुसार (अस्याः) इस (पृथिव्याः) वेदि = भूमि के ओर उसका अग्रमाग करक (वितरं वरीयः) बहुत विस्तार में (व्यु प्रथते) विशेषतया फलाद जाती है, (देवेभ्यः) जो यजमान ऋत्विक् भादि देवों के भ ¦ मिध्ितवर्णं है जोकि नक्ताने धारण किया हु है। योनिः गृहनाम व्य । साथ-साथ दिन" का भी उपलक्षक है। उषा है दिन का प्रारम्भिक काल । ('

English

May he encounter it! Thou art my wall of stone against the sinner who fights against me from the western quarter.

अध्याय ५

श्लोक 12.3

आ॒जुह्वा॑न॒ ईड्यो॒ बन्द्य॒श्चा या॑ह्यग्ने॒ वसु॑भिः स॒जोषाः॑ ।त्वं दे॒वाना॑मसि यह्व॒ होता॒ स ए॑नान् यक्षीषि॒तो यजी॑यान्

ājuhvāna īḍyo bandyaścā yāhyagne vasubhiḥ sajoṣāḥ | tvaṃ devānāmasi yahva hotā sa enān yakṣīṣito yajīyān

हिन्दी अर्थ

(अदादिः) । ऋ तमी 'उपाके' पदसाथेक हो सकता है । उपाके = उपगते, परस्पर कौ समीपत (व्यचस्वतीः) विस्तारयुवत (पतिभ्यः) पतियों के लिए (जनयः इव ) लगाए जां । (बृहतीः) परिमाण मँ बड़े, (विशवमिन्वाः) विश्व अर्थात् सबके लिए आ-जा सकने योग्य (देवीः द्वारः) है दिव्य दरवाजो ! (देवेभ्यः) यजमान, ऋत्विक् आदि दिव्य पुरुषों के लिए (सुप्रायणाः) सुगमतासे प्रयाण तथा भायान के लिए (भवत) तुम होमो । ८।२।१०); यज्ञशाला या गृह् के दरवाजों का वर्णन हुजा दहै ।

English

May he encounter it! 58

अध्याय ५

श्लोक 12.4

प्रा॒चीनं॑ ब॒र्हिः प्र॒दिशा॑ पृथि॒व्या वस्तो॑र॒स्या वृ॑ज्यते॒ अग्रे॒ अह्ना॑म्।व्युऽप्रथते वित॒रं वरी॑यो दे॒वेभ्यो॒ अदि॑तये स्यो॒नम्

prācīnaṃ barhiḥ pradiśā pṛthivyā vastorasyā vṛjyate agre ahnām| vyu'prathate vitaraṃ varīyo devebhyo aditaye syonam

हिन्दी अर्थ

हेसती हुई, (यजते) अग्निहोत्ररूपी यज्ञसम्पादन करती हृरई, (उपाके) एक , दूसरे के साथ भिलकर गति करतौ हु्द (उषासानक्ते) उषा ओर रात्रि । (योनौ) आकाशरूपी गृह् में (नि सदताम्) स्थित हौं । (बृहती) महाकाय, . समाप्ति के होते ही उसके साथ दिन की उपगति हौ जाती है । देव्या होतारा पथमा सुवाचा मिमाना यत्नं मनुंपौ मजध्ये (विदथेषु) यज्ञो मे (कारू) यन्न करनेवाले दौ स्तोताओं (यजमान मौर करते हुए, (प्रचोदयन्तौ), प्रेरित कर रहे हैँ । 19

English

Thou art my wall of stone against the sinner who fights against me from northern quarter. May he encounter it!

अध्याय ५

श्लोक 12.5

व्यच॑स्वतीरुर्वि॒या वि श्र॑यन्तां॒ पति॑भ्यो॒ न जन॑यः॒ शुम्भ॑मानाः ।देवी॑र्द्वारो बृहतीर्विश्वमिन्वा दे॒वेभ्यो॑ भवत सुप्राय॒णाः

vyacasvatīrurviyā vi śrayantāṃ patibhyo na janayaḥ śumbhamānāḥ | devīrdvāro bṛhatīrviśvaminvā devebhyo bhavata suprāyaṇāḥ

हिन्दी अर्थ

ओौर रात्रि कालके देवताओं सूयं ओर चन्द्रमाका कथन हुआदह। यज्ञँ विषेष परिस्थितियों मे होता है, मानोये दो अग्निहोत्र ओौर दशं-पौण- २२० भथर्ववेदमाष्य काण्ड ५। अनु०° ३। सूक्त १२ मास के कालोंका निदेश करते हुए स्तोताओं को प्रेरित कर रहै हँ । विदथेषु न= विदथः यज्ञः(निघरं० ३।१७) । कारः स्तोत॒नाम (निघं० ३।१६) । ज्योतिः

English

Thou art my wall of stone against the sinner who fights against me from the stedfast region. May he encounter it!

अध्याय ५

श्लोक 12.6

आ सुष्वय॑न्ती यज॒ते उ॒पाके॑ उ॒षासा॒नक्ता॑ सदतां॒ नि योनौ॑ ।दि॒व्ये योष॑णे बृह॒ती सु॑रु॒क्मे अधि॒ श्रियं॑ शुक्र॒पिशं॒ दधा॑ने

ā suṣvayantī yajate upāke uṣāsānaktā sadatāṃ ni yonau | divye yoṣaṇe bṛhatī surukme adhi śriyaṃ śukrapiśaṃ dadhāne

हिन्दी अर्थ

(भारती) भरण-पोषण करनेवाले सूयं की प्रभा (नः यज्ञम्) हमारे देवीः) तीनों देविर्यां (इदम्, स्योनम्) इस सुखदायक (बहिः) कुशा पर सम्पादन होता है । आ सदन्ताम्--आङः षद पद्यथं (चुरादिः) । (यः) जिसने (जनित्री) प्राणियों कौ उत्पादिका (इमे द्यावापृथिवी) इन दयौः तथा पृथिवी को, (भुवनानि विश्वा विश्वानि) तथा सब भुवनो को, (रूपः) विविध रूपों द्वारा (अपिशत्) रूपित किया है, (तम्) उस

English

Thou art my wall of stone against the sinner who fights against Lme from the lofty region!

अध्याय ५

श्लोक 12.7

दैव्या॒ होता॑रा प्रथ॒मा सुवाचा॒ मिमा॑ना य॒ज्ञं मनु॑षो॒ यज॑ध्यै ।प्र॒चो॒दय॑न्ता वि॒दथे॑षु का॒रू प्रा॒चीनं॒ ज्योतिः॑ प्र॒दिशा॑ दि॒शन्ता॑

daivyā hotārā prathamā suvācā mimānā yajñaṃ manuṣo yajadhyai | pracodayantā vidatheṣu kārū prācīnaṃ jyotiḥ pradiśā diśantā

हिन्दी अर्थ

सु'कालोपन होकर उसकी विसर्गे हं छन्दसरूप । (होतः) है यज्ञ करनेवाले यजमान ! तू (इह) इस यज्ञ मेँ (यक्षि) पूज, उसका संग कर, तथा उसके प्रति आत्मसमपेण कर । कारीगर देव है परमेर्वर । निज रचे चिन्न मे यथोचित रूप भरना, कारीगर चिच्रकारदही कर सकता करता हभा उसे तथा (ऋतुथा) ऋत्वनुसार (हवीषि) यज्ञिय हवियों को (उपावसृज) तैयार कर । (वनस्पतिः) वनस्पति, (शमिता) पाचक तथा (देवः अग्निः) योतमान अग्नि (मधुना घतेन) मधुर घृत दारा (हव्यम्) वनस्पति से ईधन मिलता है, शमिता अर्थात् पाचकं शाक-भाजी कोकाटताहै ओर द्योतमान अग्नि हव्य को पकातीदहू। दस सूक्त के विनियोग में “कौशिकसूत्र ४५।१६' के अनुसारवशा गोकौ वपाकोचार

English

May he encounter it! Thou art my wall of stone against the sinner who from points intermediate fights against me.

अध्याय ५

श्लोक 12.8

आ नो॑ यज्ञं भार॑ती॒ तूय॑मे॒त्विडा॑ मनु॒ष्वदि॒ह चे॒तय॑न्ती ।ति॒स्रो दे॒वीर्ब॒र्हिरेदं स्यो॒नं सर॑स्वतीः॒ स्वप॑सः सदन्ताम्

ā no yajñaṃ bhāratī tūyametviḍā manuṣvadiha cetayantī | tisro devīrbarhiredaṃ syonaṃ sarasvatīḥ svapasaḥ sadantām

हिन्दी अर्थ

(निघं० २।१६) को दष्टिमे रखकर यहु श्रष्ट अधं कल्पित कया । शाक-भाजी काकाटनाभीतोउसकादामनकरतादहीदहै। २. हविः पद "पाथः तथा हवींषि दोनों का सूचक ह (मन्त्र १० । पाथः “अन्नमपि पाथः उच्यते, पानादेव"' (निरुक्त ६।२।९) , तथा (निरुक्त ८।३।१७ । हवि; पद ० आदि मानुष-देव, तथा वायु आदि दिन्य-तत््व (अदन्तु) भक्षण होतुः ह दाने (जुहोत्यादिः) । अभिनि “होता' है, दाता है अग्नि मँ "पायः" की आहूतियां देकर, यज्ञशेष का भक्षण ऋत्विक्, यजमान तथा पत्नी आदि करते, मानोअग्निने खानेके लिए उन यज्ञशेष दिया है ।

English

May he encounter it! With Brihat I invoke the mind, with Mātarisvan both the breaths,

अध्याय ५

श्लोक 12.9

य इ॒मे द्यावा॑पृथि॒वी जनि॑त्री रू॒पैरपिं॑श॒द् भुव॑नानि॒ विश्वा॑ ।तम॒द्य हो॑तरिषि॒तो यजी॑यान् दे॒वं त्वष्टा॑रमि॒हय॑क्षि वि॒द्वान्

ya ime dyāvāpṛthivī janitrī rūpairapiṃśad bhuvanāni viśvā | tamadya hotariṣito yajīyān devaṃ tvaṣṭāramihayakṣi vidvān

हिन्दी अर्थ

वायु आदि दिव्य-तत््वों कौ दियेहैं। वाचि. वेदमें वाक् ओर जिह्धा पद है, जिन्हें कि वाक् कहा, इन सात जिह्वाओं में आहृतियां दीजातीर्हँ (१-११) गरुत्मा । तक्षकः देवता । जगती; २ आस्तारपं कतिः; (दिवः कविः) दिव्यया द्युलोक के कवि (वरुणः) वरुण परमेइवर

English

The eye from Sūrya, and the ear from Air, the body from the Earth.

अध्याय ५

श्लोक 12.10

उ॒पाव॑सृज॒ त्मन्या॑ सम॒ञ्जन् दे॒वानां॒ पाथ॑ ऋतु॒था ह॒वींषि॑ ।वन॒स्पतिः॑ शमि॒ता दे॒वो अ॒ग्निः स्वद॑न्तु ह॒व्यं मधु॑ना घृ॒तेन॑

upāvasṛja tmanyā samañjan devānāṃ pātha ṛtuthā havīṃṣi | vanaspatiḥ śamitā devo agniḥ svadantu havyaṃ madhunā ghṛtena

हिन्दी अर्थ

तवं देवानामसि यह होता स एनान यक्षीषितो यजीयान ॥३॥ आहूति देता हुआ तू है, (ईडचः) स्तुति कै योग्य (च) ओर (वन्द्यः) मभि- साथ (जा याहि) आ, हममे प्रकटहौजा। (सजोषाः) तू उपासको के साथ देवों का (होता) आह्वान-कर्ता है । (सः) वहतु (एनान्) इन उपासको को (यक्षि) अपने-साथ संगत कर । (इषितः ) उपासकीं द्वारा प्रेरित हमा

English

A prayer to the presiding deities of the four quarters for protection Thou art my wall of stone against the sinner who fights against me from the eastern quarter.

अध्याय ५

श्लोक 12.11

स॒द्यो जा॒तो व्यऽमिमीत य॒ज्ञम॒ग्निर्दे॒वाना॑मभवत् पुरो॒गाः ।अ॒स्य होतुः॑ प्र॒शिष्यृ॒तस्य॑ वा॒चि स्वाहा॑कृतं ह॒विर॑दन्तु दे॒वाः

sadyo jāto vya'mimīta yajñamagnirdevānāmabhavat purogāḥ | asya hotuḥ praśiṣyṛtasya vāci svāhākṛtaṃ haviradantu devāḥ

हिन्दी अर्थ

परमेश्वर उपासक-देवों क पापों का दहन कर उन्हें पवित्र करता मौर पवित्र हुओं की आत्माओं मे निज की आहुति देता है । पवित्रं कौ जाता है । प्रकट हुभा परमेश्वर उपासको को 1 प्रदान करता, ओर उनके साथ प्रेम करताहै। एेसी अवस्थामें परमेश्वर स्वयं उपासको को निज समीप आहृत करता है भौर निज संगतिमेंले-लेता हैः मौर उनके उवासना-यज्ञों को सफल करता है । आजुह्वानः: जा ह+ रलः शानच् । सजोषाः. स । जुषी प्रीतिसेवनयोः (तुदादिः) । यक्षि यज हुई, प्रसन्नता से हसती हँ । उषा निज प्रकाणरूपी हास कर रही है, नक्ता . मानो रात्रि मे चमक्तेतारागणों के रूपमेहास कररहीदहै। उषाने मानो निज सिर पर सूर्यरूपी चमकता आभूषण धारण किया हुमा है, ओर नक्ता । ते चाँदरूपी आभूषण । उपा ने णक अर्थात् शुक्ल वणं धारण किया हुमा अन्धकार तथा ताराओं छौ शुध्र चमक भौर धन्बोंवाले चाँद कौ चमक

English

May he encounter it! Thou art my wall of stone against the sinner who fights against me from the southern quarter.

अध्याय ५

श्लोक 13.1

सर्पविषनाशनम्।१-११ गरुत्मान्।तक्षकः।जगती, २ आस्तारपङ्क्तिः, ४,७,८ अनुष्टप्, ५ त्रिष्टुप्, ६ पथ्यापङ्क्तिः. ९ भुरिक्, १०,११ निचृद्गायत्री।द॒दिर्हि मह्यं॒ वरु॑णो दि॒वः क॒विर्वचो॑भिरु॒ग्रैर्नि रि॑णामि ते वि॒षम्।खा॒तमखा॑तमु॒त स॒क्तम॑ग्रभ॒मिरे॑व॒ धन्व॒न् नि ज॑जास ते वि॒षम्

sarpaviṣanāśanam| 1-11 garutmān| takṣakaḥ| jagatī, 2 āstārapaṅktiḥ, 4,7,8 anuṣṭap, 5 triṣṭup, 6 pathyāpaṅktiḥ. 9 bhurik, 10,11 nicṛdgāyatrī| dadirhi mahyaṃ varuṇo divaḥ kavirvacobhirugrairni riṇāmi te viṣam| khātamakhātamuta saktamagrabhamireva dhanvan ni jajāsa te viṣam

हिन्दी अर्थ

मै नष्ट करता हूं । (खातम्) सपंके दिं द्वारा तेरामांस विदीणे होकर जो विष तेरी रक्तनाडियों मे गड गयादहै, चला गया, (अखातम्) जो गडा नहीं अपितु मांस में रह गया, (उत सक्तम्) तथाजो त्वचाको ही आ है, उस सबको (अग्रभम्) मेने पकड लियादहै, आगे नहीं बदुे दिया, (ते) तैरा (विषम्) विष (निजजास) नितरां मुक्तो गयाहै, चट दययलोक का रचयिता परमेश्वर कवि (यजु० ४०।८) । वरुणः (अथवं° को अपगत कर देनेवाला, सुखा देवाला (चिषम्) विषदहै, (ते तत्) तेरे उस विष को (एतासु) इन नादियों मेँ (अग्रभम्) मैने पकड लियारहै, के मध्यभाग तक, (उत) तथा (अवमम्) नीचैके भाग--टांगों तक फल जानेवाले (रसम्) विषरस को (गृह्णामि) मै पकड लेता हूं, (ते) तेरा विषरस (आत् उ) तदनन्तर (नेशत्) नष्ट हो जाए, (भियसा) जेसेकि व्यवितत भय के कारण नष्ट हो जातादहै।

English

We, with Sarasvati who suits the mind, call Speech to come to us. A dialogue between Atharvan and Varuna

अध्याय ५

श्लोक 13.2

यत् ते॒ अपो॑दकं वि॒षं तत् त॑ ए॒तास्व॑ग्रभम्।गृ॒ह्णामि॑ ते मध्य॒ममु॑त्त॒मं रस॑मु॒ताव॒मं भि॒यसा॑ नेश॒दादु॑ ते

yat te apodakaṃ viṣaṃ tat ta etāsvagrabham| gṛhṇāmi te madhyamamuttamaṃ rasamutāvamaṃ bhiyasā neśadādu te

हिन्दी अर्थ

(पर्ने) है नानावणेवाले, चिततकबरे , (कौरात) है कंरात!, । । 0 (उपतृण्य) है ज्ञाडिया मँ रहुनेवालि । (बभ्रो) है भूरे वर्णवाले ! (असिताः) तथा है काले सापो ! (मे) मेरे कथन को (जा शृणुत) सनौ, (अलीकाः) इस स्थानसे तुम सव निवारित ही जाओ । (मे) मेरे (सख्युः) सखा के अथवा विषप्रसार से निवृत्त हौ जाओ,

English

Now by what lore, by what inherent nature, knowest thou all things that exist, Atharvan? Truly I am profound in wisdom, truly I know by nature all existing creatures.

अध्याय ५

श्लोक 13.3

वृषा॑ मे॒ रवो॒ नभ॑सा॒ न त॑न्य॒तुरु॒ग्रेण॑ ते॒ वच॑सा बाध॒ आदु॑ ते ।अ॒हं तम॑स्य॒ नृभि॑रग्रभं॒ रसं॒ तम॑स इव॒ ज्योति॒रुदे॑तु॒ सूर्यः॑

vṛṣā me ravo nabhasā na tanyaturugreṇa te vacasā bādha ādu te | ahaṃ tamasya nṛbhiragrabhaṃ rasaṃ tamasa iva jyotirudetu sūryaḥ

हिन्दी अर्थ

आ्रस्यान निवासी के (असितस्य, काने सापके (च). ओर (अपोदकस्य) उदक के स्थानम रह्नेवाल क (वश्नोः) भूरे रंगवाले साप के, (सात्रासाहस्य) तथाः वस्तुतः काटने भ साहसवले सांपके, अवमुज्वामि) मै छृडा देता हं, (इव) जंसेकि को अदवों से विमुक्त कर दमा जाता ह । ३।१०), जोकि वास्तव में साहसपूवेक आक्रमण कर देता हे।

English

No Dāsa by his greatness, not an Arya, may violate the law that I will stablish.

अध्याय ५

श्लोक 13.4

चक्षु॑षा ते॒ चक्षु॑र्हन्मि वि॒षेण॑ हन्मि ते वि॒षम्।अहे॑ म्रि॒यस्व॒ मा जी॑वीः प्र॒त्यग॒भ्येऽतु त्वा वि॒षम्

cakṣuṣā te cakṣurhanmi viṣeṇa hanmi te viṣam| ahe mriyasva mā jīvīḥ pratyagabhye'tu tvā viṣam

हिन्दी अर्थ

विद व॑; सेतो बः्वस्साः कि करिष्यथ ॥७।। (आलिगी च) सर्वत्र गति करनेवाला चुस्त (पिता ) पितादहै, (च) हा (वः) तुम्हारा (बन्धू) जौ बन्धुसमूह है, (अरसा ) तुम वे सब विष- रससे रहित हो गयेहो, यह (विद्म) हम जानते है तुम अब (किम्) क्या (करिष्यथ) करोगे ? इनिठनौ, अष्टा०५।२।११५) । पिता पद पुंलिङ्गौ है, अतः आलिगी पदभी पुंलिद्धी ही होना चाहिए । विलिगी' पद स्त्रीलिद्धीदहै माता का विशेषण है । आलिगी, विलिगी आदि विषरहित सप ह, जिनका विष विषेला नहीं

English

None, self-dependent Varuna! existeth wiser than thou or sager by his wisdom. Thou knowest well all these created beings: even the man of wondrous powers fears thee.

अध्याय ५

श्लोक 13.5

कैरा॑त पृश्न॒ उप॑तृण्य॒ बभ्र॒ आ मे॑ शृणु॒तासि॑ता॒ अली॑काः ।मा मे॒ सख्युः॑ स्ता॒मान॒मपि॑ ष्ठाताश्रा॒वय॑न्तो॒ नि वि॒षे र॑मध्वम्

kairāta pṛśna upatṛṇya babhra ā me śṛṇutāsitā alīkāḥ | mā me sakhyuḥ stāmānamapi ṣṭhātāśrāvayanto ni viṣe ramadhvam

हिन्दी अर्थ

उरुगूलाया दुहिता जाता दास्यिकेन्या । की (दुहिता जाता) दुहिता उत्पन्न हुई है, जोकि (असिक्न्या) काली सपिणी की (दासी) दासीवत् परिचरिका या उपक्षयकारिणी हुई है। रस-रहित हृभा है, नीरस हो गया है, या सव गय है । विषके सूखजानेसे उसका प्रवेश सापि द्वारा शरीर मे नहीं होता । भथवा अरस-विषरहित । याः काए्चेमाः खैनित्िमास्तासामर सतं विषम् ॥९॥

English

O self-dependent Varuna, wise director, thou knowest verily all generations. What is, unerring one! beyond this region? What more remote than that which is most

अध्याय ५

श्लोक 13.6

अ॒सि॒तस्य॑ तैमा॒तस्य॑ ब॒भ्रोरपो॑दकस्य च ।सा॒त्रा॒सा॒हस्या॒हं म॒न्योरव॒ ज्यामि॑व॒ धन्व॑नो॒ वि मु॑ञ्चामि॒ रथाँ॑ इव

asitasya taimātasya babhrorapodakasya ca | sātrāsāhasyāhaṃ manyorava jyāmiva dhanvano vi muñcāmi rathā~ iva

हिन्दी अर्थ

२२६ अथववेदमाष्य काण्ड ५। अनु° २ । सूक्त १। (कर्णा) कानोवाली (रवावित्) सेही (गिरः) पवेत से ( चरन्तिका) नीचे विचरती हुई (तद् अत्रवीत्) वह बोलौ कि (याः काः च जो कोई (इना ) ये (खनित्रिमाः) खनियों मे रहनेवाली सपिणिर्यां है इवा वित् =इवाविध् ? कुत्तं को बीरंधनेवाली । सेही के शरीर परः काटि होते है । कुत्ता यदि सेही पर आक्रमण करताहै तो सेही काटिंद्वार उसे बंध देती है । मन्त्र का अभिप्राय अनुसंधेय है । (इवावरित्ः) जोकि आशु चलनेवाले मेघ को प्राप्तहै, (गिरेः) मेवसे (अवचरन्तिका।) नीचे भूमि कौ ओर गति करनेवाली वषरधिारा (तत् अश्रवीत् ) यह बोली कि (याः काः च दमाः) जौ कोई ये(खनित्रिमाः) खनियों मे रहनेवाली धपिणियां हैँ, (तासाम् ) उन सबका (विषम्) विष (अरसतमम्) अत्यन्त नीरस होता है! गिरेः -- गिरिः मेवनाम (निक्त १।१०) । भव =

English

distant? One thing there is beyond this air, and something beyond that one, most hard to reach,

अध्याय ५

श्लोक 13.7

आलि॑गी च॒ विलि॑गी च पि॒ता च॑ माता॒ च॑ ।वि॒द्म वः॑ स॒र्वतो॒ ब॑न्ध्वर॑साः॒ किं क॑रिष्यथ

āligī ca viligī ca pitā ca mātā ca | vidma vaḥ sarvato bandhvarasāḥ kiṃ kariṣyatha

हिन्दी अर्थ

भूमि की खनियों मे जल भर जाताहै ओर जलीय प्रदेशो मं रहनेवाली सपिणियों के विष नीरसप्रायहो जाते हैँ । यह अथं सृक्षावमात्रदहै। हे विषः (ताबृवम्) तु कर्म॑शवितप्रद तथा वृद्धिकारक है १. 'ष्दासपत्नीरहिगोपाः' (ऋ १।३२।११) मन्त्र में “अपां बिलमपिहितं यदासीषु अर्थात् दरार कै बन्द करने आर "तद्ववार" दारा उसके विवृत करने काकथनं

English

remotest. I, Varuna, who know, to thee declare it. Let churls be mighty in the lower regions. Let Dāsas

अध्याय ५

श्लोक 13.8

उ॒रु॒गूला॑या दुहि॒ता जा॒ता दा॒स्यसि॑क्न्या ।प्र॒तङ्कं॑ द॒द्रुषी॑णां॒ सर्वा॑सामर॒सं वि॒षम्

urugūlāyā duhitā jātā dāsyasiknyā | prataṅkaṃ dadruṣīṇāṃ sarvāsāmarasaṃ viṣam

हिन्दी अर्थ

वटनेवाले मेध मे ( वित्-विद्) विद्यमान वर्षाधारा का कथन हु है । मँ वर्णन हुआ है । ताबुवम् = तु" गतिव्द्धिहिसासु (अदादिः) + उ (ओणा- दिक, णित्) + वद्धि भौ" को आव्; व (मतुबथं)। वकार की बकार (सायण) । अलाबु है कड़वा तुम्बा । उसमे जल डालकर जव जल कडवा हो जाए, या कड्वे तूम्बेके रसको, पिलानेसे सम्भवतः विष अरसहो जाता हो । यह् परीक्षणीय रहै । अभिप्राय यह कि स्प॑का विष प्रशंसनीय नहीं है। यह घातक है । परन्तु स्पे-विष के, प्रशंसनीयरूप द्वारा, रोगजनित विष को नीरस

English

sink into the earth beneath them. Many reproaches, Varuna, dost thou utter against the misers. who revoke their presents.

अध्याय ५

श्लोक 13.9

क॒र्णा श्वा॒वित् तद॑ब्रवीद् गि॒रेर॑वचरन्ति॒का।याः काश्चे॒माः ख॑नि॒त्रिमा॒स्तासा॑मर॒सत॑मं वि॒ष॑म्

karṇā śvāvit tadabravīd gireravacarantikā| yāḥ kāścemāḥ khanitrimāstāsāmarasatamaṃ viṣam

हिन्दी अर्थ

रूप मे .सशक्त' करके, नाना रोगों दारा जन्य विषों का विनाशो सकता है । एतदर्थं देखो लेकेसिस 1.68 तथा क्रोटलस होराइडस (नवाण प्रणा१४ आदि सर्पविषों के प्रयोग । (मेटिरया मेंडिका, द्वारा २२८ अयर्वेवेदमाष्य काण्ड ५। अनु° ३। सक्त (सूकरः) सरअर ने (नसा) यूथनी हारा (त्वा) तुक्षे (अखनत्) खों । चाना चाहनेवाले को (दिप्स) नुकसान पहचान चाह भौर (कृत्याकृतम्). हिल-सेना संग्रह करनेवाले का (जदि) हनन कर । ॥ कती छेदने (तुदादिः; रुधादिः) । क्या कौ "पृतनाः' कहा है (मन्त्र ८), पृतनाः = नाना सेनां । मन्त्र मे ओषधि का नाम नहीं दिया, केवल यह दर्णाया है कि ओषधि करां भौर कंसे प्राप्त हो सकती है । गरुड ओर सूअबं के व्यवहारो के जाननेवाले ओषधि के विज्ञ हो सकते हैँ । ओषधि के उपचार द्वारा, सेनासंग्रह करनेवाले राचाका, हनन कहा है, ताकि उसके मर जानै

English

Be not thou added to that crowd of niggards: let not men call thee an illiberal giver. Let not men call me an illiberal giver. I give thee back the brindled cow, O singer.

अध्याय ५

श्लोक 13.10

ता॒बुवं॒ न ता॒बुवं॒ न घेत् त्वम॑सि ता॒बुव॑म्।ता॒बुवे॑नार॒सं वि॒षम्

tābuvaṃ na tābuvaṃ na ghet tvamasi tābuvam| tābuvenārasaṃ viṣam

हिन्दी अर्थ

(मे) मेरी (रवः) आवाज (वृषा) प्रबल है, मतः सुखवर्षौ है; (नभसा नभसः) मेघ से (तन्यतुः न) मेषगजेन के सदृश (उग्रेण वचसा) निज उग्रवचन द्वारा (ते) तेरे विषरस को (बाध) मेँ उसके फलने मे बाधा विषरस को (नृभिः) अन्य विषचिकित्सक मनुष्यों के सहयोग द्वारा (अग्रभम्) भने पकड़ लिया है, फलने नहीं दिया । (सूरयः) सूर्यं ज॑से (तमसः) रात्रि के अन्धकारसे उदितं होतादहै, वैसे विपजन्य मृछान्धकार से (हन्मि) मै हनन करता हूं, (विषेण) विष द्वारा (ते विषम्) तेरे विषका (हन्मि) मै हनन करता हूँ (अहे) है सपे ! (च्रियस्व) तूमरना, (मा १, अथवा तेरा विष उदक-रदित हो जाए, द्रवरूप न रहै ताकि काटते समयतू सूखे

English

How, terrible in might, hast thou here spoken to the great God, how to the gold-hued Father! Thy mind watched, greedy Varuna! to recover the brindled cow thou hadst bestowed as

अध्याय ५

श्लोक 13.11

त॒स्तुवं॒ न त॒स्तुवं॒ न घेत् त्वम॑सि त॒स्तुव॑म्।त॒स्तुवे॑नार॒सं वि॒षम्

tastuvaṃ na tastuvaṃ na ghet tvamasi tastuvam| tastuvenārasaṃ viṣam

हिन्दी अर्थ

विष कासंचारन कर सके । अपोदकम् = ५2161168. (-ह्िटनी) । २२४ अथर्वेवेदभाष्य काण्ड ५ अनु० ३। सूक्त ११ मे डाली गई दृष्टि सांपको कू काल तक अन्धा कर देती है, तब सप देख नहीं सकता ओर मार दिया जाता है । मन्त्र में ८4010 18८" क्रिया अभिघ्राय है । ण्णभातका अभिप्राय है अपने विष द्वारा अपने विष ॥

English

guerdon. Not through desire do I revoke my present: I bring this brind- led cow to contemplate her.

अध्याय ५

श्लोक 14.1

कृत्यापरिहरणम्।१-१३ शुक्रः।वनस्पतिः, कृत्यापरिहरणम्।अनुष्टुप्, ३,५,१२ भुरिक्, ८ त्रिपदा विराट्, १० निचृद्बृहती, ११ त्रिपदा साम्नी त्रिष्टुप्, १३ स्वराट्।¬ सु॒प॒र्णस्त्वान्व॑विन्दत् सूक॒रस्त्वा॑खन्न॒सा।दिप्सौ॑षधे॒ त्वं दिप्स॑न्त॒मव॑ कृत्या॒कृतं॑ जहि

kṛtyāpariharaṇam| 1-13 śukraḥ| vanaspatiḥ, kṛtyāpariharaṇam| anuṣṭup, 3,5,12 bhurik, 8 tripadā virāṭ, 10 nicṛdbṛhatī, 11 tripadā sāmnī triṣṭup, 13 svarāṭ|¬ suparṇastvānvavindat sūkarastvākhannasā| dipsauṣadhe tvaṃ dipsantamava kṛtyākṛtaṃ jahi

हिन्दी अर्थ

(यातुधानान् ) यातना के निधिरूप पुरुषों का (अव जहि) हनन कर, (कृत्याकृतम्) सेन्यसंग्रह करनेवाले राजा का (अव जहि) हनन कर । (अधो) , पहुचाना चाहता है (जोषधे) हि ओषधि ! (तम्, उ) उसेही (त्म्)त्ू. (जहि) मार, उसकाहीतु हनन कर। मन्त्र मे ओषधिप्रयोग द्वारा दुःख- । दायक व्यक्तियोंके ही हनन का निदंश किया दहै, सेन्ययुद्ध में सेनिकोंके ॥ छाल से (परीशासम्) गोल छाल-खण्ड को (परिकृत्य) काटकर ओर उसे (देवाः) है विजय चाहनेवाले सेन्यनायको ! तुम (कृत्याकृते) मेनासंप्रह करनेवाले के लिए उसकी ग्रीवा में (प्रति मुञ्चत) पहनाओ ।

English

Attend in every place where men inhabit, with all thy powers, the hymn that tells my praises. Let hymns of praise ascend to thee, uplifted in every place of human habitation.

अध्याय ५

श्लोक 14.2

अव॑ जहि यातु॒धाना॒नव॑ कृत्या॒कृतं॑ जहि ।अथो॒ योअ॒स्मान् दिप्स॑ति॒ तमु॒ त्वं ज॑ह्योषधे

ava jahi yātudhānānava kṛtyākṛtaṃ jahi | atho yoasmān dipsati tamu tvaṃ jahyoṣadhe

हिन्दी अर्थ

(पृतनाषाट् ) सेनाञओं का पराभव करनेवाले (अग्ने) है अग्रणी प्रधान- कर्ता शत्रु राजाके लिए, (प्रतिहरणेन) वापस हटाने की विधि द्वारा, (पुनः) फिर (हरामसि) हम सेनाध्यक्ष वापस कर हैतेरहै। पराभव करे । तदनन्तर अवशिष्ट सेनाका वधन कर, उसे मानपूवेक, णतननू- .

English

An Apri or propitiatory hymn 59

अध्याय ५

श्लोक 14.3

रिश्य॑स्येव परीशा॒सं प॑रि॒कृत्य॒ परि॑ त्व॒चः ।कृ॒त्यां कृ॑त्या॒कृते॑ देवा नि॒ष्कमि॑व॒ प्रति॑ मुञ्चत

riśyasyeva parīśāsaṃ parikṛtya pari tvacaḥ | kṛtyāṃ kṛtyākṛte devā niṣkamiva prati muñcata

हिन्दी अर्थ

अथरव॑वेदमाष्य काण्ड ५) अनु० ३1 सूक्तं १४ कृत॑स्यधनि विध्य तं यश्चकार तमिज्नहि । हमारी सेना ! (तम्, विध्य) उसेतू बीध (यः) जिसने किं सेना को (चकार) निमित या संगृहीत किया है, (तम्, इत्) उसका ही (जहि) तू हनन कर। (अचक्रुषे वधाय) जिसने विरोधौ सेना का निर्माण नहीं किया उसके वध मप्तर में दो सेनाओं का वणेन हमा है । एक है कृतव्यधनी । यह् तो

English

Thou in the house of man this day enkindled worshippest Gods as God, O Jātavedas. Observant, bright as Mitra, bring them hither. Thou art a sapient and foreknowing envoy.

अध्याय ५

श्लोक 14.4

पुनः॑ कृ॒त्यां कृ॑त्या॒कृते॑ हस्त॒गृह्य॒ परा॑ णय ।स॒म॒क्षम॑स्मा॒ आ धे॑हि॒ यथा॑ कृत्या॒कृतं॒ हन॑त्

punaḥ kṛtyāṃ kṛtyākṛte hastagṛhya parā ṇaya | samakṣamasmā ā dhehi yathā kṛtyākṛtaṃ hanat

हिन्दी अर्थ

ने शत्रूसेना का निर्माण कियादहै उस अकेले के हनन क लिषएही आज्ञा हई है, शत्रसैनिकों के हनन के लिए नहीं । यह् वेदिक युद्ध-नोति को उदारता मौर सहानुम्ति का प्रदर्शन हुआ है । पुत्र हैव पितरं गच्छ स्वज ईवाभिष्ठितो दश । तोड़ दिया जाताहै वैसे शत्रु केषेरेको ( अवक्रामी) आक्रमणद्वारा तोडती ओर (पुनः) फिर अर्थात् वापस तू जा ।

English

Tanùnapāt, fair-tongued! with sweet meath balming the baths and ways of Order, make them pleasant.

अध्याय ५

श्लोक 14.5

कृ॒त्याः स॑न्तु कृत्या॒कृते॑ श॒पथः॑ शपथीय॒ते।सु॒खो रथ॑ इव वर्ततां कृ॒त्या कृ॑त्या॒कृतं॒ पुनः॑

kṛtyāḥ santu kṛtyākṛte śapathaḥ śapathīyate| sukho ratha iva vartatāṃ kṛtyā kṛtyākṛtaṃ punaḥ

हिन्दी अर्थ

उसके साथ सुलह-सफाई के लिए, उसका मान करते हुए उसके प्रति निः संकोच होकर तू जा जँसेकि पत्र निःसंकोच होकर पिता कीञोर जाता है । यह निज सेनाके प्रति अदेश हं । (२) यदि उसने तुङ्ञे पादाक्रान्त किया है तो विषेले स्पिके सदृश उसेतू काट। (३) यदि उसने साम्राज्य के किसी प्रान्त पर सैनिक बन्ध लगादियाहै, घेराडाल दिवाहै, तो उस सेना पर आक्रमण करके घेरे.को तौड डाल व्णेवाली मृगी के सदृश, अथवा (वारणी) हथिनी के सदृश. (कव्या) सम्राद् मृगी चाह किसी भी वर्णवाली हो, वह शान्त स्वभाववाली होती है, बदला नहीं ले सकती; हथिनी बदला ने सक्रती है । शत्रु राजा यदि

English

Bear to the Gods our sacrifice, exalting with holy thoughts our hymns of praise and worship. Invoked, deserving prayer and adoration, O Agni, come accor dant with the Vasus.

अध्याय ५

श्लोक 14.6

यदि॒ स्त्री यदि॑ वा॒ पुमा॑न् कृ॒त्यां च॒कार॑ पा॒प्मने॑ ।तामु॒ तस्मै॑ नयाम॒स्यश्व॑मिवाश्वाभि॒धान्या॑

yadi strī yadi vā pumān kṛtyāṃ cakāra pāpmane | tāmu tasmai nayāmasyaśvamivāśvābhidhānyā

हिन्दी अर्थ

यातो प्रेमभावनापूवंक् सन्धिवार्ता करनेके लिए अथवा बदला लेने के लिए प्रत्याक्रमण भावना से निज छावनी से उत्यान कर शमु कीञर जाए-यह भावना मन्व मे है । युद्धनीतिके ६ गुण है, सन्धि, विग्रह, यान, उत्थानम् छ, ०३।१९ (आष्ट) रत्या करती छेदे (तुदादिः, रुधादिः), छेदनपटु सेना, यथा कृतन्यधनि" (मन्त्र ६) । (इष्वाः) बाण के सदुष (क्जीयः) अधिक सीधी, (द्यावापृथिवी) उस राजा की बोर पक्षीवत् उड़कर (पततु) पतन करे । (सा) वह सेना

English

Thou art, O youthful Lord, the Gods’ Invoker, so, best of sacri- ficers, bring them quickly. By rule the Sacred Grass is scattered eastward, a robe to clothe this earth when dawns are

अध्याय ५

श्लोक 14.7

यदि॒ वासि॑ दे॒वकृ॑ता॒ यदि॑ वा॒ पुरु॑षैः कृ॒ता।तां त्वा॒ पुन॑र्णयाम॒सीन्द्रे॑ण स॒युजा॑ व॒यम्

yadi vāsi devakṛtā yadi vā puruṣaiḥ kṛtā| tāṃ tvā punarṇayāmasīndreṇa sayujā vayam

हिन्दी अर्थ

पकड़ ले (मृगम्, इव) जैसेकि मृग को पकड लिया जरति है । सेना के उडने का अभिप्राय सम्भवतः विमानो द्वारा उड़कर जाना हो । वैदिक नौविमान विद्या के सम्बन्ध में देखिए "कऋषेदादिभाष्यभूमिका' सवो रथं इवं वतेतां कर्मा कुत्याकुतं पुनं; ॥१२॥ अग्निकी तरह (प्रतिकूलम्) प्रतिकूल होकर जलती हई (एतु) शु कीओर माए, या (उदकम् इव) जल की तरह ( अनु्ूलम्) अनुकूल होकर शान्ति प्रदान करती हुई आए । सेना (युखः रथः दव) सुखदायक रथ ,

English

breaking. Widely it spreads around and far extended, fair for the Gods and bringing peace and freedom,

अध्याय ५

श्लोक 14.8

अग्ने॑ पृतनाषा॒ट् पृत॑नाः सहस्व ।पुनः॑ कृ॒त्यां कृ॑त्या॒कृते॑ प्रति॒हर॑णेन हरामसि

agne pṛtanāṣāṭ pṛtanāḥ sahasva | punaḥ kṛtyāṃ kṛtyākṛte pratiharaṇena harāmasi

हिन्दी अर्थ

करे, (पुनः) शत्रुराजा जब अनुकूल हो जाए तत्पश्चात् । करेतो सम्राट् की सेना जलाती हुई उसके पास पचे । यदि शनुराजा हृदं उसके पास पहुंचे, जेसेकरि सुखदायक रथ सुख प्रदान करता है उसी प्रकार उसकी प्रजा को सुख प्रदान करती हुई पहुंचे । एका च मे दशं च मेऽपवक्तार ओप ऋतजात ऋतायरि मधुं मे मधुला करः ॥१॥

English

Let the expansive Doors be widely opened, like wives who deck their beauty for their husbands.

अध्याय ५

श्लोक 14.9

कृत॑व्यधनि॒ विध्य॒ तं यश्च॒कार॒ तमिज्ज॑हि ।न त्वामच॑क्रुषे व॒यं व॒धाय॒ सं शि॑शीमहि

kṛtavyadhani vidhya taṃ yaścakāra tamijjahi | na tvāmacakruṣe vayaṃ vadhāya saṃ śiśīmahi

हिन्दी अर्थ

(मे) मेरी (एका च) एक इन्द्रिय-वृत्ति, (मे) भेरी (दश च) दस (ऋतजाते) है सत्यमय जीवन से प्रकट हर्द, (ऋतावरि) सत्यमयी (ओषधे) ओषधि ! (मधुला) मधुरस्वरूपा तू (मे) मेरे जीवन को (मधु) मधुमय अर्थात् मीठा (करः) करदे, यातूने कर दियाहै। ऋतावरी यथा ऋतम्भरा प्रज्ञा में ऋत-सत्य। को दशविध कहा है । दस आयतन हैँ : स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर, कारण का वणन निस्त प्रकार से किया है, “चित्तनदी नाम उभयतो वाहिनी, वहति कल्याणाय, वहति पापाग्र च'' । “अपवक्तारः वबरृत्तियां " पापमयी ह, ओर '"ऋत-

English

Lofty, celestial, all-impelling Portals, admit the Gods and give them easy entrance! Pouring sweet dews let holy Night and Morning, each close to each, be seated at their

अध्याय ५

श्लोक 14.10

पु॒त्र इ॑व पि॒तरं॑ गच्छ स्व॒ज इ॑वा॒भिष्ठि॑तो दश ।ब॒न्धमि॑वावक्रा॒मी ग॑च्छ॒ कृत्ये॑ कृत्या॒कृतं॒ पुनः॑

putra iva pitaraṃ gaccha svaja ivābhiṣṭhito daśa | bandhamivāvakrāmī gaccha kṛtye kṛtyākṛtaṃ punaḥ

हिन्दी अर्थ

रूपमे, युद्धच्छक राजा की ग्रीवां प्रहनानेका कथन हभ है, उसे यह सु्लानेके लिए कि अभी तक तो तुम सुवणमुद्रा के वैण्डल को ग्रीव में पहनते रहे हो, युद्ध करने पर ओर हार जानने पर, तुम्हारी ग्रीवा पर चमड़ेका । पैण्डल होगा । यह क्रिया भी यृद्धकी तैयारीन करनेमेंप्रेरिकारूपही है) गृह्य) तू निज हाथ में लेकर (पराणय) परकीय राजा की भोर ले-जा। मौर (अस्मै) इस राजा के लिए, इसके (समक्षम्) खों के सामने (आ सेना के संग्रह करनेवाले राजा को, उसके (हनत्) हनन कौ सूचना दे दे ।

English

But give me now the gift thou hast not given. Thou art my friend for ever firm and faithful. One origin, Varuna! one bond unites us I know the nature of that common kinship.

अध्याय ५

श्लोक 14.11

उदे॒णीव॑ वार॒ण्यऽभि॒स्कन्दं॑ मृ॒गीव॑ ।कृ॒त्या क॒र्तार॑मृच्छतु

udeṇīva vāraṇya'bhiskandaṃ mṛgīva | kṛtyā kartāramṛcchatu

हिन्दी अर्थ

का कथन हुआ है, परन्तु इस छालखण्ड को शत्रु राजा तक पहुंचाया कंसे जाए ? छालखण्ड दूत द्वारा ही पहुंचाया जा सकता है । वैदिक राजनीति के अनुसार दूत अवध्य है, अतः निरापद् है। छालखण्ड राजा का हनन नहीं करेगा, अपितु यह् उसके भावी हनन का सूचकमात्र ही है (कृत्याः) हिखसेनाएँ (कृत्याकृते ) हिखसेनाओं के संग्रहुकर्ताके लिए (सन्तु) हों उसेही विनष्ट करे जेसेकि (शपथः) शपथ (शपथीयते) पथ लेनेवाले के लिए ही हानिकारक होताहै। (कृत्या) शत्रु कौ हिखसेना (सुखः रथः इव) सुखपू्वकं चलनेवाले स्थ के सदुश, सुखपूर्वेक, (कृत्याकृतम्) हिखसेनाओं के संग्रह करनेवाले राजा के प्रति (पूनः) यदि स्त्री यदिवा पुमान कृत्यां चकारं पाप्मने (पुमान्) पुरुष राजा ने, (पाप्मने पापकर्मके लिए परराज्यके राजा

English

I give thee now the gift that I retracted. I am thy friend for ever firm and faithful. God, giving life unto the god who lauds me, Sage strengthener of the sage who sings my

अध्याय ५

श्लोक 14.12

इष्वा॒ ऋजी॑यः पततु॒ द्यावा॑पृथिवी॒ तं प्रति॑ ।सा तं मृ॒गमि॑व गृह्णतु कृ॒त्या कृ॑त्या॒कृतं॒ पुनः॑

iṣvā ṛjīyaḥ patatu dyāvāpṛthivī taṃ prati | sā taṃ mṛgamiva gṛhṇatu kṛtyā kṛtyākṛtaṃ punaḥ

हिन्दी अर्थ

की हत्या के लिए, (कृत्याम् चकार) हिधसेना का संग्रह कियादहै, तो (ताम् उ) उस सेना को (तस्मै) उसी राणी या राजाकेनिएही (नयामसि) हम ले-जाते है, पहंचा देते है, (इव ) जेसेकि (अद्वम्) अव को राजाने यद्यपि निज सेनाको परराज्यके राजा की हूत्याके लिए भेजादहै, , तो भी शक्तिशाली वैदिक राजा, उस सेना का विनाश नहीं करता, अपितु उसे बांधकर उसके राजा के प्रति सूपुदं करदेतादहै। यष्टि वासि देवकृता यदि वा पुरुषैः कृता । (यदि वा असि) यदिहैत् (देवकृता) राज्यके देव अर्थात् विजिगीषु सेनापति द्वारा संगृहीता, (यदि वा) अथवा (पृरुषेः) राज्य की प्रजाओं

English

praises. Thou, self-dependent Varuna! hast begotten the kinsman of the

अध्याय ५

श्लोक 14.13

अ॒ग्निरि॑वैतु प्रति॒कूल॑मनु॒कूल॑मिवोद॒कम्।सु॒खो रथ॑ इव वर्ततां कृ॒त्या कृ॑त्या॒कृतं॒ पुनः॑

agnirivaitu pratikūlamanukūlamivodakam| sukho ratha iva vartatāṃ kṛtyā kṛtyākṛtaṃ punaḥ

हिन्दी अर्थ

हम सेनाधिकारी फिर वापस कर देते है, (सयुजा इन्द्रेण) सहयोगी सम्राट् भेजी, परन्तु उदार सम्राट् ने उस सेनाका विनाशन कर, उसेनिजञज्ञा या परामश द्वारा वापस कर बिया। संगृहीता' है शत्रु हारा संग्रह् की हुई पूनैः कृत्यां करंत्याकृतै भतिहर॑णेन हरामसि ॥८॥

English

Gods, our sire Atharvan. On him bestow most highly-lauded riches. Thou art our friend, high over all, our kinsman.

अध्याय ५

श्लोक 15.1

रोगोपशमनम्।१-११ विश्वामित्रः।मधुला वनस्पतिः।अनुष्टुप्, ४ पुरस्ताद्बृबती, ५,७,९ भुरिक्।एका॑ च मे॒ दश॑ च मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे ।ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः

rogopaśamanam| 1-11 viśvāmitraḥ| madhulā vanaspatiḥ| anuṣṭup, 4 purastādbṛbatī, 5,7,9 bhurik| ekā ca me daśa ca me 'pavaktāra oṣadhe | ṛtajāta ṛtāvari madhu me madhulā karaḥ

हिन्दी अर्थ

२३४ अषर्व॑वेदभाष्य काण्ड ५। मनु° ३ सूक्त १५ ऋतजात ऋतावरि मधुं मे मधुला करः ॥५॥ इत्यादि ।' मधुला करः --देखं अथवं ० (१।३४। १-५/ । ओषधि के दो अभिप्रायह। (१) सत्यमयी वुत्ति, यह अपकथनों का विनाश करती है । अपक्तथन असत्य होते ह, सदा-सत्ताक नही होते ।

English

station,— Lofty, celestial Dames with gold to deck them, assuming all their fair and radiant beauty.

अध्याय ५

श्लोक 15.2

द्वे च॑ मे विंश॒तिश्च॑ मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे ।ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः

dve ca me viṃśatiśca me 'pavaktāra oṣadhe | ṛtajāta ṛtāvari madhu me madhulā karaḥ

हिन्दी अर्थ

सब मिलकर वृत्तियां हँ । शेष पूववत् । ॥ २३९ अथर्वैवेदभांष्य काण्ड ५। मनु० ३1 सूक्तं १५ ऋतजात ऋतावरि मधुं मे मधुला करः ॥९॥ अनुवाकः ५ (नव च) € इन्धियों को नवविध € प्रकार की व॒त्तिर्या, तथा १० वृत्तियां हैँ । शेष पूर्ववत् ।

English

Hotar more skilled in sacrifice, bring hither with speed to-day God Tvashar, thou who knowest,

अध्याय ५

श्लोक 15.3

ति॒स्रश्च॑ मे त्रिं॒शच्च॑ मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे ।ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः

tisraśca me triṃśacca me 'pavaktāra oṣadhe | ṛtajāta ṛtāvari madhu me madhulā karaḥ

हिन्दी अर्थ

(१-११) विश्वामित्रः एकवृषदेवता । द्विपदा; (दश च) १० इ्दियों की दशविध १० प्रकार की वृत्तियाँ ऋतजात कतावरि मधरु मे मधुला करः ॥१९१॥ (योग १।५) भेदसे ये पाच वृत्तिर्या १० हो जाती हँ । मन्त्र करमानुसार

English

Even him who formed these two, the Earth and Heaven, the Parents, with their forms, and every creature.

अध्याय ५

श्लोक 15.4

चत॑स्रश्च मे चत्वारिं॒शच्च॑ मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे ।ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः

catasraśca me catvāriṃśacca me 'pavaktāra oṣadhe | ṛtajāta ṛtāvari madhu me madhulā karaḥ

हिन्दी अर्थ

१० । परन्तु १०० ओर १० काजोडन कर, मन्त्र ्१्ेमें १०० को १० कि “न च सहेणापि पुरूपायुषैरलमि याः वृत्तीः करिचत् परिगणयितुम्, वत्तियों को कोई गिन नहीं सकता, वृत्तियां असंख्यात हैँ, (योगदशेन सूत्र ५ (यदि एकवृषः असि) यदि तेरी एक इन्द्रिय प निजविषय को गि है, तो (सृज) “ऋतप्रजात ्रतावरी वृत्ति का सर्जन कर

English

Bring thou to our oblations which thou balmest the companies of Gods in ordered season. Agni, Vanaspati, the Immolator sweeten our offered gifts with meath and butter!

अध्याय ५

श्लोक 15.5

प॒ञ्च च॑ मे पञ्चा॒शच्च॑ मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे ।ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः

pañca ca me pañcāśacca me 'pavaktāra oṣadhe | ṛtajāta ṛtāvari madhu me madhulā karaḥ

हिन्दी अर्थ

(श २६।११५ मे पूर्वसूक्त १५का, सूक्त १६ के साथ विति- योग किया हे, अतः इन दोनों में एकवाक्यता होनी चाहिए । तदनुसार दही कहा है जोकि इन्द्रिय के विषय को उदक-वर्पाके रूपमेँ सुचित करताटं। (यदि द्विवुषः असि) यदि तेरी २ इन्द्रियां तुञक्चपर निजविषयीं की वर्ष करती ह, तो (सृज) पुव॑बत् वर्षा करती रहै, तो (घज) पूववत् । ि

English

Agni as soon as he was born made ready the sacrifice and was the Gods’ preceder. May the Gods eat our offering consecrated according to this true

अध्याय ५

श्लोक 15.6

षट् च॑ मे ष॒ष्टिश्च॑ मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे ।ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः

ṣaṭ ca me ṣaṣṭiśca me 'pavaktāra oṣadhe | ṛtajāta ṛtāvari madhu me madhulā karaḥ

हिन्दी अर्थ

(यदि चतुवृषः असि) यदितेरी ४ इन्द्रियां तुज्ञ पर निज विषयों को वर्षा करती है, तो (सृज) षतु । . (यदि पञ्चवृषः असि) यदि तेरी ५ इन्धि तुज्ञपर निजविषयों को वर्षा करती है, तो (सृज) पूवेवत् । (यदि षड् वृषः असि) यदितेरी ६ इन्र्या तुज्ञपर निजविषयों की वर्षा करती ह, तो (सृज) पूववत् ।

English

Priest’s voice and guidance. A charm against snakes

अध्याय ५

श्लोक 15.7

स॒प्त च॑ मे सप्त॒तिश्च॑ मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे ।ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः

sapta ca me saptatiśca me 'pavaktāra oṣadhe | ṛtajāta ṛtāvari madhu me madhulā karaḥ

हिन्दी अर्थ

बीदहरास्तपं उग्र॑ म॑योभूरपों देवीः प्र॑थम॒जा ऋतस्य ॥१॥ ने (सलिलः) समुद्र ने, (मातरिदवा) वायु ने, (वीड्हराः) बलवानों का ं हरण अर्थात् विनाश करनेवाले (मयोभूः) आध्यात्मिक सुख पैदा करनेवाले । यति (निरुक्त ५।३।१८) । वीडवबलनाम (निघं० २।६) । परमेश्वर की संवाद कथानक के रूपम है, जिसे कि परमेश्वर ओौर परमेश्वर द्वारा ।

English

Varuna, Sage of heaven, hath given me the gift: with spells of mighty power I draw thy poison out.

अध्याय ५

श्लोक 15.8

अ॒ष्ट च॑ मेऽशी॒तिश्च॑ मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे ।ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः

aṣṭa ca me'śītiśca me 'pavaktāra oṣadhe | ṛtajāta ṛtāvari madhu me madhulā karaḥ

हिन्दी अर्थ

यचैकादु शसि सोऽपोदकासि ॥६६॥ न 5 1 त को पष्ट किया । वीड्हराः = (यदि) यदि (एकादशः) शष्वे मनवाला तू है, (सः) वहतू वीड+टरस् जाया को (पुनः) फिर (प्रायच्छत्) वापस कर दिया । इसके (अन्विता) „ (हस्तगृह्य) पाणिग्रहणपूवेक, (आनिनाय) अपने गृह मेंइसे ले आया। १

English

Dug up, not dug, adherent, I have seized it fast: low hath thy venom sunk like water in the sands.

अध्याय ५

श्लोक 15.9

नव॑ च मे नव॒तिश्च॑ मे ऽपव॒क्तार॑ ओषधे ।ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः

nava ca me navatiśca me 'pavaktāra oṣadhe | ṛtajāta ṛtāvari madhu me madhulā karaḥ

हिन्दी अर्थ

(यदि सप्तवृषः असि) यदि तेरी ७ इन्द्रियां तुक्षपर निजविषयों की वर्षा करती ह, तो (सृज) पूवंवत् । (यदि अष्टवृषः असि) यदितेरी र इन्द्रियां तुक्षपर निजविषयोंकी वर्षा करती है, तो (सुज) पूववत् । वर्षाकरतीर्है, तो (सुज) पूववत् ।

English

All the non-fluid portion of thy venom, I receive in these. I take thy middlemost, thy highest, lowest juice: may it be spent and lest by reason of thy

अध्याय ५

श्लोक 15.10

दश॑ च मे श॒तं च मे॑ ऽपव॒क्तार॑ ओषधे ।ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः

daśa ca me śataṃ ca me 'pavaktāra oṣadhe | ṛtajāta ṛtāvari madhu me madhulā karaḥ

हिन्दी अर्थ

रतजात ृतावरि मधुपे मधुला करः ॥५॥ ऋतंजात ऋतावरि मधुं पर मधुला करः ॥६॥ यजुकेदमें हआ टै, यथा 'भेषजमसि भेषजम्' (३।५६) । "परमेव र-भेषज' निज कृपा से सव॑रोगों की महौपध दहै । इसी प्रकार की वाद्या आगेके १० ¦ या ११ मन्व्ोंमेंभी जाननी चाहिए ।

English

Come the first two celestial sweet-voiced Hotars, arranging sacrifice for man to worship, As singers who inspire us in assemblies, showing the eastern light with their direction!

अध्याय ५

श्लोक 15.11

श॒तं च॑ मे स॒हस्रं॑ चापव॒क्तार॑ ओषधे ।ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः

śataṃ ca me sahasraṃ cāpavaktāra oṣadhe | ṛtajāta ṛtāvari madhu me madhulā karaḥ

हिन्दी अर्थ

चदृतजात ऋतावरि मधुं मे मधुला करः ॥३॥ अत॑जात ऋतावरि मधरुंमे मुखा करः ।७॥ ऋतजात ऋतावरि मधं मे मधुला करः ॥८॥ है, अतः मे जायतन भी द्ाधिध हो जाते ह, ज॑सेनि एक ही स्वच्छ शीशा, भिन्न

English

Let Bhārati come quickly to our worship and Ilā showing like a human being. So let Sarasvati and both her fellows, deft Goddesses, on this fair grass be seated.

अध्याय ५

श्लोक 16.1

वृषरोगशमनम्।१-११ विश्वामित्रः।एकवृषः।एकावसानं द्वैपदम्, १, ४, ५, ७-१० साम्नी उष्णिक्, २, ३ ,६, आसुरी अनुष्टुप्, ११ आसुरी गायत्री।यद्ये॑कवृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि

vṛṣarogaśamanam| 1-11 viśvāmitraḥ| ekavṛṣaḥ| ekāvasānaṃ dvaipadam, 1, 4, 5, 7-10 sāmnī uṣṇik, 2, 3 ,6, āsurī anuṣṭup, 11 āsurī gāyatrī| yadyekavṛṣo'si sṛjāraso'si

हिन्दी अर्थ

(यदि दशवृषः असि) यदि तैर १० इन्द्रियां वुञ्चपर निजविषयों की वर्षा करती रहँ, तो (सृज) पूर्ववत् । परेत है, सेवन का सर्वथा निषेध नहीं किया । सर्वथा निषेधसेतो जीवन की एकत्रित रहते ह । यदि मनसंयमितनदहो तो मनोनिष्ठ सभी संस्कार जीवन को अति क्तेशमय कर देते हैँ, फिर इनसे छने का कोई उपाय नहीं रहता । इस अभिप्राय को दशनिके लिए १९१वेंमन्वमे सृज'का कथन नहीं हुभा । ं “एकादशं मनो ज्ञेयमिन्दरियमुभयात्मकम्"' (मनु) ।

English

fear. Strong is my cry like thunder with the rainy cloud: with power- ful incantation let thy

अध्याय ५

श्लोक 16.2

यदि॑ द्विवृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि

yadi dvivṛṣo'si sṛjāraso'si

हिन्दी अर्थ

नहीं हज । इससे ज्ञात होता है कि पूर्वकाल क पति सोमः" आदि काल्पनिकं है २. सूक्त श७े कापि है “मयोभु, ओर देवता है “ब्रह्मजाया । अनुक्रमणी-कार वेदों के समकालिक सम्भव नरीह सकते । वस्तुतः सूक्त १७बे का न

English

Live not, O Snake, but die the death: back go thy venom on thyself. Listen to me, Black Snakes and hateful creatures, Lurker-in Grass, Karait, and Brown, and Spotty,

अध्याय ५

श्लोक 16.3

यदि॑ त्रिवृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि

yadi trivṛṣo'si sṛjāraso'si

हिन्दी अर्थ

व्यवस्था होनी चाहिए । इससे वर्णसंकर दोष मिट सकता दहै ओर राष्ट ओरवेदको जाननेवाली । दूत-प्रेषण हारा विवाहं भे अन्यथा प्रक्रियान होनी चाहिए, -यह् खयाल रखना क्षधिय राजा का कतंव्यहै। यामादृस्तारेकैपा विकेशीति दुच्छुना ्रामंमवप्य॑मानाय् । (याम्) जिस ब्रह्मजाया को (आहुः) कहते हँ कि (एषा) यह (तारका) राष्टरको तरानैवाली नौका है, वह जव (विकेशी इति) दुःखी होकर बिखर केशोवाली दहो जाती दहै, तब द्से (ग्रामम्) ग्राम पर (अव-

English

Approach not near the house my friend inhabits: give warning, and rest quiet with your poison.

अध्याय ५

श्लोक 16.4

यदि॑ चतुर्वृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि

yadi caturvṛṣo'si sṛjāraso'si

हिन्दी अर्थ

गतिवाले, शीश्रगतिवाने (उतकरुषौ मान्) उल्का के सदृश जलते हुए पत्थर के रूप मे ब्रह्मजाया (प्रापादि) प्रपतन करती है। धर्मात्मा ओर विदुषी को गरणकर्मानुसार योग्य पतिकेन मिलन पर वहं दुःखी होकर विकेशी हो जाती है, केशों को संवारतो नहीं । कंशसंवारण तो पति के रञ्जनार्थं होता है। उस कारण (बृहस्पतिः) बृहती वेदवाणी का पति यह् ब्रह्मचारी (अनु) वंदिक हु वेः प्रकरणमें ब्रह्मचारी ओर जायाकै व्णंनके

English

Even as the cord that strings the bow, I slacken, as it were, the cars. 60

अध्याय ५

श्लोक 16.5

यदि॑ पञ्चवृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि

yadi pañcavṛṣo'si sṛjāraso'si

हिन्दी अर्थ

ह ब्राह्मण ओर ब्रह्मजाया के विव दो अभिप्राय सम्भवर्है--(१) जाया” समानार्थक है । (२) ओर जाया" का विवाह् आदशरूग मं उपास्थत किया हे। नीताम्) जिसे सोमने प्राप्त किया था। (न) जैसेकि (देवाः) दिव्यगुणी होता, तब तक वह गुरुरूप होकर, गुरुओ का एक अंगरूप होकर, सहायक जो (वीराः) वोर (भिथः) परस्पर कै युद्धो मे (तृद्यन्ते) दिसित होतेह,

English

Of the All-conquering serpent’s wrath, of the fierce rage of Black, and Brown, Taimāta, and Apodaka.

अध्याय ५

श्लोक 16.6

यदि॑ षड्-वृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि

yadi ṣaḍ-vṛṣo'si sṛjāraso'si

हिन्दी अर्थ

(हिनस्ति) हिसित करती दहै । , ( ऋषयः) सात ऋयियों ने (ये) जोकि (तपसा) तपस्वरथा के साथ (निषेदुः) अन्रहाल ओर अवेद (यत्) जो (दश बतः ) दस धम अथात् ॥ ४ ; की (जाया) होनेवाली जाया (भीमा) भयावहदहै, वह (परमे व्योमन्) (पतिः) विवाहित पति हतां) ५ र ५

English

And Āligi and Viligi, their father and the mother too,— What will ye do? Your venomed sap, we know, is utterly powerless.

अध्याय ५

श्लोक 16.7

यदि॑ सप्तवृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि

yadi saptavṛṣo'si sṛjāraso'si

हिन्दी अर्थ

सप्तषिमण्डल, जिसमे कि तापओौर प्रकाश के सहित मानो किसातक्रषि वसिष्ठ । इस मण्डल को “कक्नाः' तथा "(752 7401" भी कहते हैँ । कविता मे इन्दं चेतन माना है, तभी अवदन्त" का प्रयोग हुआ । जां, जब तक कि उप्तका विवाह नहीं होता । ऋषि कोटि की नहीं होतीं, परन्तु जव व्यक्ति ५. ५ ७ ता 1 ॐ ख्ख ही ह (नि ४ १. सूयं का वणेन इसलिए हुजा रै कि विवाह मसू्यप्रक्षण की भी विधिदहै, जोकि ॥।

English

Daughter of Urugūlā, she-fiend whom the black, skinned mother bare— All female serpents poison who crept swiftly near is impotent.

अध्याय ५

श्लोक 16.8

यद्य॑ष्टवृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि

yadyaṣṭavṛṣo'si sṛjāraso'si

हिन्दी अर्थ

सर्य क रहते ही सम्पन्नो सकती द 1 विवाह के टसकाल में गुणकर्मानुसार विवाह के सिद्धान्त कीपुष्टिभी करादी गईहै ्रबरवन् एति हासा। समाधिमें स्थितहोजातेर्है, तवं इनको ये सात शक्तियाँ ऋषियोंकीकोटि कीहोजातीदहैँ। तवयेसातजो ज्ञान देते हैँ वह सत्यहोता है, यथाथ होता

English

Dwelling beside the mountain’s slope, the quick-eared porcupine exclaimed: Of all these she-snakes homed in earth the poison is most powerless.

अध्याय ५

श्लोक 16.9

यदि॑ नववृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि

yadi navavṛṣo'si sṛjāraso'si

हिन्दी अर्थ

है, ओौर ये वस्तुतः सत्य का “अवदन्त” कथन करने लगते हैँ । , र अथर्वेवेदभाष्य काण्ड ५। अनु० ४ । सूक्त १७ परनूवन् = सूयं जड है, वह बोल नहीं सकता, यह कथन कथानक् मनुष्यजाति । पञ्च -पचि विस्तारवचने (चृरादिः)। मथवा पञ्चमानवाः

English

Tābuva or not Tābuva, thou verily art not Tābuva: poison is killed by Tābuva. Tastuva or not Tastuva, thou verily art not Tastuva: poison is killed by Tastuva.

अध्याय ५

श्लोक 16.10

यदि॑ दशवृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि

yadi daśavṛṣo'si sṛjāraso'si

हिन्दी अर्थ

शेशवावस्था में कन्या सौम्यस्वभाववाली होती है, अतः उसका पति या अधिपति सोम कहाहै पति--पा रक्षणे तदनन्तर उसमें सदाचार ओर अनाचार की विवेक-भावना जागरित होती है जिसेकि भ संगी की कामना प्रकट होती है । अन्त में वैवाहिक अग्नि, मानो होता बनकर, पाणिग्रहण कौ विधिपू्वेक उसे विवाहित कर पतिगृह मे त-आती है! मन्तरमें इस भक्रम को अवस्थाओं को पुरुषरूप में वणित किया है । इन अवस्थाओं के अधिके वणेनके लिए देखं (अथवे० १४।२। १-४), । है । संवादमे जो निर्णय हआ उसका कथन मन्त्र से सूक्तकी की 2 ॥ । होता = ह दाने, हस्तप्रदान करना, विवाहाथं अवलम्ब प्रदान

English

strength be stayed. I, with the men to aid, have seized that juice of his; as light from out the gloom, let Sūrya rise

अध्याय ५

श्लोक 16.11

यद्ये॑काद॒शोऽसि॒ सोऽपो॑दको ऽसि

yadyekādaśo'si so'podako 'si

हिन्दी अर्थ

की (आधिः) मन-की-चिन्ता (ग्राह्या) निगृहीत केरनी चाहिए, व करनी चाहिए, यह ब्राह्मण कौ जाया है" (इति) यह (इत् च) ही (अवोचत्) मयोभूः ने कहा, निर्णय दिया । (एषा) यह ब्रह्मजाया (दुताय राष्ट (गुपितम्) सूरक्षित होता है। ८ म भू 12 ५ में । ६ वाने ष नि है, यह ही “मयोभू" ने निर्णय मे कहा कि इसी प्रकार गुण-कमनुसार ता

English

on high I with this eye destroy thine eye, and with this poison conquer thine.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Atharva Veda — Chapter 5
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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