अध्याय ४
श्लोक 18.1
अपामार्गः।१-८ शुक्रः।अपामार्गो वनस्पतिः।अनुष्टुप्, ६ बृहतीगर्भा।स॒मं ज्योतिः॒ सूर्ये॒णाह्ना॒ रात्री॑ स॒मावती॑ ।कृ॒णोमि॑ स॒त्यमू॒तये॑ऽर॒साः स॑न्तु॒ कृत्व॑रीः
apāmārgaḥ| 1-8 śukraḥ| apāmārgo vanaspatiḥ| anuṣṭup, 6 bṛhatīgarbhā| samaṃ jyotiḥ sūryeṇāhnā rātrī samāvatī | kṛṇomi satyamūtaye'rasāḥ santu kṛtvarīḥ
हिन्दी अर्थ
(शतेन) सौ रक्नोपायों हारा (मा) मेरी (परि) सव ओरसे (पाहि) रक्षा कर, (सहचरेण) तथा निज हजार शक्तियों दवारा (अभि) साक्षात (मा रक्ष) मेरी रक्षा कर । (वीरुधांपते) है वि रोहण करनेवाली लताओों या को स्थापित करे । परमेव र-भेषज का वर्णन मन्त्र मेँ नहीं हुजा । उस सव- निज स्वाभाविक शविति द्वारा अपामार्ग" है, बुराइयों को अप" अर्थत दिव॑मन्तरिक्षमाद् भूरिं सव तद देवि पश्यति ॥ १
English
As once when time began the Gods with thee expelled the Asuras,