Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
5
अध्याय 5 / 20

Kanda 5

काण्ड 5

376 श्लोकभाग 3/3 · श्लोक 29.1–31.12WhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ44 श्लोक

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अध्याय ५

श्लोक 29.1

रक्षोघ्नम्।१-१५ चातनः।जातवेदाः, मन्त्रोक्ताः।त्रिष्टुप्, ३ त्रिपदा विराण्नाम गायत्री, ५ पुरोऽतिजगती विराड्-जगती,१२-१५ अनुष्टुप् ( १२ भुरिक्, १४ चतुष्पदा पराबृहती ककुम्मती।पु॒रस्ता॑द् यु॒क्तो व॑ह जातवे॒दोऽग्ने॑ वि॒द्धि क्रि॒यमा॑णं॒ यथे॒दम्।त्वं भि॒षग् भे॑ष॒जस्या॑सि क॒र्ता त्वया॒ गामश्वं॒ पुरु॑षं सनेम

rakṣoghnam| 1-15 cātanaḥ| jātavedāḥ, mantroktāḥ| triṣṭup, 3 tripadā virāṇnāma gāyatrī, 5 puro'tijagatī virāḍ-jagatī,12-15 anuṣṭup ( 12 bhurik, 14 catuṣpadā parābṛhatī kakummatī| purastād yukto vaha jātavedo'gne viddhi kriyamāṇaṃ yathedam| tvaṃ bhiṣag bheṣajasyāsi kartā tvayā gāmaśvaṃ puruṣaṃ sanema

हिन्दी अर्थ

(ते माता) तेरी माता (यत् भेषजम्) जिस ओौषध को (ते) तेरे ओर उन की पत्नियां, तथा पुवं के पितर अर्थात् जन्मदाता माता-पति आदि। सेगो- अनु गाः = मृत पूवं पितरों का तु अनुगामी न बन, त् न मर। ३१८ थ काण्ड ५। भनु ° ६। सूक्त ३०

English

Endowed with strength, possessing these, be thou the master of thy foes, The God who first bound on in the beginning the deities’ im- mortal golden castle,—

अध्याय ५

श्लोक 29.2

तथा॒ तद॑ग्ने कृणु जातवेदो॒ विश्वे॑भिर्दे॒वैः स॒ह सं॑विदा॒नः ।यो नो॑ दि॒देव॑ यत॒मो ज॒घास॒ यथा॒ सो अ॒स्य प॑रि॒धिष्पता॑ति

tathā tadagne kṛṇu jātavedo viśvebhirdevaiḥ saha saṃvidānaḥ | yo no dideva yatamo jaghāsa yathā so asya paridhiṣpatāti

हिन्दी अर्थ

दधे) अपने सामने म रखता हूं, (अस्म) इस (अरिष्टतातये) हिसारहित- मोक्ष का विस्तार करनेवाले परमेदवर की प्राप्ति के लिए। यमाय -परमेशवर को महायम अर्थात् महा नियन्ता कहा है (अथवं० १३।४(१)।५) । परमेरवर मत्यु है, कर्मानुसार जन्ममृत्यु का कारणदहै स्य अथवा जो रोगी को रोग-नदसेपार करनेकी विधिको जानतादहै, इस रोगी की अहिसा के लिए उसे नमकार हो ।

English

Unanimous, with all the Gods together, so do this thing O Agni Jātavedas, that this defence of his may fall and fail him. Pierce both his eyes, pierce thou the heart within him, crush thou his teeth and cleave his

अध्याय ५

श्लोक 29.3

यथा॒ सो अ॒स्य प॑रि॒धिष्पता॑ति तथा॒ तद॑ग्ने कृणु जातवेदः ।विश्वे॑भिर्दे॒वैः स॒ह सं॑विदा॒नः

yathā so asya paridhiṣpatāti tathā tadagne kṛṇu jātavedaḥ | viśvebhirdevaiḥ saha saṃvidānaḥ

हिन्दी अर्थ

(बलेन) ओर शारीरिक बल के साथ (सम्) संबद्ध कर, (अमृतस्य) नमरने कौ विधिको (वेत्थ) त जानताहै, (मानु गात्) ताकि यह म॒तोंका अनुगमन न करे, (मा) ओर न (भूमिगृहः भुवत्) भूमिरूपी घरवाला हो। गृह होता है, उसकी अस्थां भूमि भे गाढ़ दौ जाती ह । मा भूमिगहो भुवत् इस निषेध द्वारा मृतशरीर कौ भूमि में गाडना अर्थापन्न नहीं होता। (१) वेद में "भस्मान्तं शरीरम्” (यजु-० ४०।१५) द्वारा म॒तशरीर को ५ कर वेने का विधान हुमा है। (२) “सविता ते शरीरेभ्यः परथिव्यां शक्तियां वची रहती है, इन शक्तियों के कारण जीवात्मा पुनजन्म के लिए 1 मे 1 द है। मृत्यु हो जाने पर, सृक्ष्मश री रसहित त्मा, सूयंकोर दारा उपरिलोकमेंज ं ता लोके भें जाता ओौर वरहा गतिमान् इयमन्तरवेदति जिह्वा बद्धा प॑निष्पदा । (अन्तः बद्धा) मूख के भीतर वेधी हृद् (इयं जि

English

tongue asunder. Rend thou, most youthful Agni, that Pisācha whoso amid them all of this hath eaten.

अध्याय ५

श्लोक 29.4

अ॒क्ष्यौ॒३नि वि॑ध्य॒ हृद॑यं॒ नि वि॑ध्य जि॒ह्वां नि तृ॑न्द्धि॒ प्र द॒तो मृ॑णीहि ।पि॒शा॒चो अ॒स्य य॑त॒मो ज॒घासाग्ने यविष्ठ॒ प्रति॒ तं शृ॑णीहि

akṣyau3ni vidhya hṛdayaṃ ni vidhya jihvāṃ ni tṛnddhi pra dato mṛṇīhi | piśāco asya yatamo jaghāsāgne yaviṣṭha prati taṃ śṛṇīhi

हिन्दी अर्थ

(पनिष्पदा) स्पन्दित हुई (वदति) बोलती है । (त्वया) है रुण ! तेरे साय प्रबल वाणी द्वारा निकालदियाहै, (च) ओौर (तक्मनः) बखारकी (शतम्) ३२२ अथवेवेदमाष्य काण्ड ५। अनु ० ६। सूक्त ६६

English

Whatever of his body hath been taken, plundered, borne off, or eaten by Pisāchas, This, Agni, knowing it, again bring hither! We give back flesh and spirit to his body. If some Pisācha in my food raw, ready, thoroughly cooked, or, spotty, hath deceived me,

अध्याय ५

श्लोक 29.5

यद॑स्य हृ॒तं विहृ॑तं॒ यत् परा॑भृतमा॒त्मनो॑ ज॒ग्धं य॑तम॒त् पि॑शा॒चैः ।तद॑ग्ने वि॒द्वान् पुन॒रा भ॑र॒ त्वं शरी॑रे मां॒समसु॒मेर॑यामः

yadasya hṛtaṃ vihṛtaṃ yat parābhṛtamātmano jagdhaṃ yatamat piśācaiḥ | tadagne vidvān punarā bhara tvaṃ śarīre māṃsamasumerayāmaḥ

हिन्दी अर्थ

सौ (रोपीः) पीड़ाओंको भी निकालदियाहै। रयं टोकः भरियतमो देवानामप॑राजितः। प्रिय है, (अपराजितः) ओर पराजित नहीं हुआ है । (पुरुष) है परुष ! इस लोक मेँ (जज्ञिषे) पेदा हुआ है, (सः) वह तू है; (त्वा) तुञ्षे (अनु) तदनुसार (हवयामसि) हम इस लोक मेँ रहने के लिए बलात हुँ ओर कहते ह कि (जरसः पुरा) जरावस्थासे पूवं (मामृथाः) नतु मृत्युको प्राप्तो;

English

Let the Pisāchas with their lives and offspring atone for this, and let this man be healthy. If one hath cheated me in milk or porridge, in food from grain or plants that need no culture.

अध्याय ५

श्लोक 29.6

आ॒मे सुप॑क्वे श॒बले॒ विप॑क्वे॒ यो मा॑ पिशा॒चो अश॑ने द॒दम्भ॑ ।तदा॒त्मना॑ प्र॒जया॑ पिशा॒चा वि या॑तयन्तामग॒दो॒३यम॑स्तु

āme supakve śabale vipakve yo mā piśāco aśane dadambha | tadātmanā prajayā piśācā vi yātayantāmagado3yamastu

हिन्दी अर्थ

ओर मरते रहते है, परन्तु पृथिवीलोक यथापूव बना रहता है, पराजित नहीं हुमा, नष्ट नहीं हुआ । इस लोक में है पुरुष ! तु जरावस्थासे पूवेन रामे मांसे कृत्यां यां चक्रः पुनः प्रतिं हरामि तापर् ॥१॥ (आमे) गृह्य (मांसे) फलों के गे म (याम्) जिस छेदन-क्रिया को (चक्रः) । 8 ) उस (५ कौ छेदन-क्रिया हिस क्रिया को (पुनः) फिर नतक्रथास्पमे (हरामि) शत्रूके प्रति गँ -जाताहि पहुचाता हं, या वापस करता हं। "1.

English

Let the Pisāchas, etc. If one, flesh eater, in a draught of water have wronged me lying in the bed of goblins, Let the Pisāchas, etc.

अध्याय ५

श्लोक 29.7

क्षि॒रे मा॑ म॒न्थे य॑त॒मो द॒दम्भा॑कृष्टप॒च्ये अश॑ने धा॒न्ये॒३यः ।तदा॒त्मना॑ प्र॒जया॑ पिशा॒चा वि या॑तयन्तामग॒दो॒३यम॑स्तु

kṣire mā manthe yatamo dadambhākṛṣṭapacye aśane dhānye3yaḥ | tadātmanā prajayā piśācā vi yātayantāmagado3yamastu

हिन्दी अर्थ

र प हए । मासि गाल ल्फ एवा ग (णाः (आष्ट), अर्थात् फल-का यां तं चक्रुः कुकव।कावने वा यां ऊुरीरिणि है राष्ट्ूपति ! (ते) तेरे (ककवाकौ) कण्ठ से ध (१५५ वकरेमे, (वा) या (याम्) जिस (कृत्याम्) छेदन क्रिया र (कुरीरिणि) शिरोभरूषण धारण करनेवाली स्त्री मे (चक्र :/ शत्रुओं ने किया मा ९ (गम् व की छेदन क्रिया को (पुनः) फिर (प्रति)

English

If one, flesh-eater, in the day or night-time have wronged me lying in the bed of goblins, Let the Pisāchas, etc.

अध्याय ५

श्लोक 29.8

अ॒पां मा॒ पाने॑ यत॒मो द॒दम्भ॑ क्र॒व्याद् या॑तू॒नां शय॑ने॒ शया॑नम्।तदा॒त्मना॑ प्र॒जया॑ पिशा॒चा वि या॑तयन्तामग॒दो॒३यम॑स्तु

apāṃ mā pāne yatamo dadambha kravyād yātūnāṃ śayane śayānam| tadātmanā prajayā piśācā vi yātayantāmagado3yamastu

हिन्दी अर्थ

र क प्रतिमे सम्राट् ले-जाता हु पहुचाता ककवाकु = मयूर कण्ठ द्वारा बोलते है, व ीं त ॥ वाणी द्वारा नहीं (उणा० १।६; दयानन्द) । करोरिणि अथवा कुररी = पक्षिभेद न (म परिनेदः (उणा० २।१३३; दयानन्द) । इसे अगे क अन्व हे राष्ट्रपति ! (पश्नाम्) पशं नेसे (एकणफे अर्थात् अनफटे त तथा (उभयादति) दोनों मोर ५ ऊपर नीचे के जवाडो में दतिंवाले (ते) तेरे पशु में (याम् कृत्याम्) जिस हिख- क्रिया को (चक्रुः) णत्रुजं ने करिया ह, (गरदभे) गदहे मे ( याम्) जिस हिस-

English

O Agni Jātavedas, slay the bloody Pisācha, flesh-devourer, mind- destroyer, Strong Indra strike him with his bolt of thunder, courageous Soma cut his head to pieces!

अध्याय ५

श्लोक 29.9

दिवा॑ मा॒ नक्तं॑ यत॒मो द॒दम्भ॑ क्रव्या॒द् या॑तू॒नां शय॑ने॒ शया॑नम्।तदा॒त्मना॑ प्र॒जया॑ पिशा॒चा वि या॑तयन्तामग॒दो॒३यम॑स्तु

divā mā naktaṃ yatamo dadambha kravyād yātūnāṃ śayane śayānam| tadātmanā prajayā piśācā vi yātayantāmagado3yamastu

हिन्दी अर्थ

हं पहुंचाता हूं, या वापस करता ह । एकशफ पश है अरव आदि । ३२४ अथर्वयेदभाष्य काण्ड ४। छनु० € ॥ सूर्वत ३१ याकार मै गति करनेवाले विस्फोटक को गाड है, निचस्नुः, र पि है, (ताम्) उस प्रकार को हि्क्रिया को (पुनः) फिर ( ) व खूप रम (हरामि) शत्रु के प्रति म सम्राट् ले-जाता हं पहुचाता 7 1 छं --वलयाकार मे गतिकरनेवाला विस्फोटक । यह ५ म घूम-घूमकर सब ओर आग लगाकर विध्वंसन देता है । अमलायाम्,

English

Thou, Agni, ever slayest Yātudhānas, the fiends have never con- quered thee in battles. Consume thou from the root the flesh-devourers, let none of them escape thy heavenly

अध्याय ५

श्लोक 29.10

क्र॒व्याद॑मग्ने रुधि॒रं पि॑शा॒चं म॑नो॒हनं॑ जहि जातवेदः ।तमिन्द्रो॑ वा॒जी वज्रे॑ण हन्तु छि॒नत्तु॒ सोमः॒ शिरो॑ अस्य धृ॒ष्णुः

kravyādamagne rudhiraṃ piśācaṃ manohanaṃ jahi jātavedaḥ | tamindro vājī vajreṇa hantu chinattu somaḥ śiro asya dhṛṣṇuḥ

हिन्दी अर्थ

लिए (ते पिता, तेरा पिता (यत्) जिस ओषध को, (जामिः) तथा बहिन जरावस्था तक पहुंचनेवाला, उसे प्राप्त करनेवाला (कृणोमि र्म करता हूं । उसे आश्वासन दियादहैकि तेरे माता-पिता ओौर बहिनि-भाईतेरे रोगके निवारण के लिए जिस ओषध का सजन करते हँ उसका तु सेवन कर। रोगमूक्त हो जाने पर मँ तुनलं जरावस्था तक पहुंचा दूंगा, (यह् विश्वास

English

Him I salute with ten extended fingers. Blest be the three- stringed charm I bind upon thee. Aryaman be thy binder-on, and Pūshan and Brihaspati: Whatever name the brood of day possess, therewith we fasten thee.

अध्याय ५

श्लोक 29.11

स॒नाद॑ग्ने मृणसि यातु॒धाना॒न् न त्वा॒ रक्षां॑सि॒ पृत॑नासु जिग्युः ।स॒हमू॑रा॒ननु॑ दह क्र॒व्यादो॒ मा ते॑ हे॒त्या मु॑क्षतः॒ दैव्या॑याः

sanādagne mṛṇasi yātudhānān na tvā rakṣāṃsi pṛtanāsu jigyuḥ | sahamūrānanu daha kravyādo mā te hetyā mukṣataḥ daivyāyāḥ

हिन्दी अर्थ

(पुरुष) ह पुरुष ! (सर्वेण मनसा सह) सव इच्छाओं ओर विचासों के साथ (इह एधि) यहाँ तू रह्, (यमस्य) यम के (दूतौ) उपतापी (रजस्, तमस्) का (मा अनुगाः) अनुगामीनहो, (अधि) भौर अधिकार से (जीव- पुराः) जीवितो के परोंको (दहि) त् जा, प्राप्त हो। दूतौ टुदु उपतापे (स्वादिः) । येदूतदोहैँ रजस् शौर तमस्। तमस् केसमीपतुननजा,ओरन हिसितहो, न मृत्यु को प्राप्त हो । (पथः) जीवन का माग है (उदयनम्) उन्नति की ओर जाना,

English

With Seasons and with Lengths of Time, for vigour and exten- ded life, With all the splendour of the Sun we fasten thee about the neck.

अध्याय ५

श्लोक 29.12

स॒माह॑र जातवेदो॒ यद्धृ॒तं यत् परा॑भृतम्।गात्रा॑ण्यस्य वर्धन्तामं॒शुरि॒वा प्या॑यताम॒यम्

samāhara jātavedo yaddhṛtaṃ yat parābhṛtam| gātrāṇyasya vardhantāmaṃśurivā pyāyatāmayam

हिन्दी अर्थ

बढाना (जीवतः जीवतः) प्रत्येक जीवित का (अयनम्) जीवनमागं है। उन्नति का मागं पवंतके मागं के सदश ऊचार्ईवाला है, अतः "आ रोहण" कहा है । आक्रमणम् आ क्रमु पादविक्षेपे" (्वादिः) । पवेत पर चढना ओर पवेत के शिखिर की ओर पग बढ़ाते जाना जीवनका मागं (मा विभः) न भयभीत हो, (न मरिष्यसि) नहीं तू मरेगा, (त्वा)

English

Drawn forth from butter and with meath besprinkled, firm as the earth, unshakable, triumphant. Breaking down foes and casting them beneath me, be fastened on me for exalted fortune!

अध्याय ५

श्लोक 29.13

सोम॑स्येव जातवेदो अं॒शुरा प्या॑यताम॒यम्।अग्ने॑ विर॒प्शिनं॒ मेध्य॑मय॒क्ष्मं कृ॑णु॒ जीव॑तु

somasyeva jātavedo aṃśurā pyāyatāmayam| agne virapśinaṃ medhyamayakṣmaṃ kṛṇu jīvatu

हिन्दी अर्थ

मनोवलपूरवंक वाणीके प्रयोग द्वारा, रोग के निकल जानेका आदेश मन्त्रमें भा है । देसे अदेशों का वर्णेन वेदों मे बहुशः हआ है । ज्वर, (च) ओर (यः) जो (ते) तेरा (हदयामयः) हृदय का रोगहै, पराभूत हञा, (परस्तराम्) बहत दर, (दयेन इव) बाज पक्षी की तरह यजुवद मे ७ ऋषि कटे ह जोकि शरीर मे निवात करते है, यथा

English

A charm for the destruction of malignant goblins Made ready in the east drive forth, take notice of what is hap- pening here, omniscient Agni!

अध्याय ५

श्लोक 29.14

ए॒तास्ते॑ अग्ने स॒मिधः॑ पिशाच॒जम्भ॑नीः ।तास्त्वं जु॑षस्व॒ प्रति॑ चैना गृहाण जातवेदः

etāste agne samidhaḥ piśācajambhanīḥ | tāstvaṃ juṣasva prati cainā gṛhāṇa jātavedaḥ

हिन्दी अर्थ

(निरुक्त १२।४।३७) मन्त्र में बोध ओर प्रतिबोध को भी ऋषि कहा है । ग्रयमग्निर्पसयं इह सूयं उहैत ते। अर्थात् सेवनीय है, (इह ते) तेरे इस धर में (सूरयः उदेतु) सूयं उदित हो,

English

Thou bringest medicine and healest sickness: through thee may we win horses, kine, and people. Accordant with all Gods, O Jātavedas Agni, perform this work as we beseech thee,

अध्याय ५

श्लोक 29.15

ता॒र्ष्टा॒घीर॑ग्ने स॒मिधः॒ प्रति॑ गृह्णाह्य॒र्चिषा॑ ।जहा॑तु क्र॒व्याद् रू॒पं यो अ॑स्य मां॒सं जिही॑र्षति

tārṣṭāghīragne samidhaḥ prati gṛhṇāhyarciṣā | jahātu kravyād rūpaṃ yo asya māṃsaṃ jihīrṣati

हिन्दी अर्थ

३२० अथर्वेवेदभाष्य काण्ड ५। मनु° ६। सूक्त ३० मृत्यु से (उदेति) तु उदित हो, (कृष्णात् चित्) जैसेकि काले (तमसः परि) अन्धकार अर्थात् रात्री से सूयं उदित होता है। जैसे सूयं काली-रात्रिके तमस् से उदितहोतादहै, वसेत् मृल्यु- रूपी काले तमस् से उदितहो। इसके लिए दो उपायै, यज्ञियाग्निका सेवन ओर उदीयमान सूर्यं की रदिमयों का घर में प्रवेश तथा सेवन। (यमाय) नियन्ता परमेहवर के लिए (नमः) नमस्कार (अस्तु) हो, (मृत्यवे) मृत्यु नामवाले परमेदवर के लिए (नमः) नमस्कार हो, (उत पितृभ्यः) तथा माता-पिता मादि के लिए (नमः) नमस्कार हो, (ये) जोकि (उन्नयन्ति) उन्नति की ओर हमे ले-जातेरहै, हमारा नयन करतेर्है। (यः) जो (उत्पारणस्य) कष्टों से उठाकर कष्ट-नद पार करने कीविधि. को

English

That this defence of his may fall, whoever hath caused us pain, whoever hath consumed us.

अध्याय ५

श्लोक 30.1

दीघायुष्यम्।१-१७ उन्मोचनः (आयुष्कामः)।आयुष्यम्।अनुष्टुप्, १ पथ्यापङ्क्तिः, ९ भुरिक्, १२ चतुष्पदा विराड्-जगती, १४ विराट-प्रस्तारपङ्क्तिः।१७ त्र्यवसाना षट्-पदा जगती।आ॒वत॑स्त आ॒वतः॑ परा॒वत॑स्त आ॒वतः॑ ।इ॒हैव भ॑व॒ मा नु गा॒ मा पूर्वा॒ननु॑ गाः पि॒तॄनसुं॑ बध्नामि ते दृ॒ढम्

dīghāyuṣyam| 1-17 unmocanaḥ (āyuṣkāmaḥ)| āyuṣyam| anuṣṭup, 1 pathyāpaṅktiḥ, 9 bhurik, 12 catuṣpadā virāḍ-jagatī, 14 virāṭa-prastārapaṅktiḥ| 17 tryavasānā ṣaṭ-padā jagatī| āvatasta āvataḥ parāvatasta āvataḥ | ihaiva bhava mā nu gā mā pūrvānanu gāḥ pitṝnasuṃ badhnāmi te dṛḍham

हिन्दी अर्थ

हे राष्टृपति (दुिचितः) दुर्चिन्ता करनेवाले शुभो 1 (चक्रः) किया है, (ताम्) उस प्रकार की हिक्रिया को (पुनः) ६८. यां तें चक्रुः सभायां यां चक्रुरधिदेव॑ने ।

English

weapon Collect, O Jātavedas, what hath been removed and borne away. Let this man’s members grow, let him swell like the tendril of a plant.

अध्याय ५

श्लोक 30.2

यत् त्वा॑भिचे॒रुः पुरु॑षः॒ स्वो यदर॑णो॒ जनः॑ ।उ॒न्मो॒च॒न॒प्र॒मो॒च॒ने उ॒भे वा॒चा व॑दामि ते

yat tvābhiceruḥ puruṣaḥ svo yadaraṇo janaḥ | unmocanapramocane ubhe vācā vadāmi te

हिन्दी अर्थ

६२६ अधर्ववेदमाध्य काण्ड ५) अनु० ६ । सूक्त ६१ शत्रु पर फकी गई इषु द्वारा बीरे । हिक्लक्रिया करनेवाले, शक्तिशाली तथा शपथ लेनेवाले शत्रु राजा भूमिका सहित)- प्रति भाग सहस्राधिक टिप्पणियां, १०-११ प्रकारके

English

And the Approach and its ascent, the way of every living man. Be not alarmed: thou wilt not die. I give thee lengthened years of life.

अध्याय ५

श्लोक 30.3

यद् दु॒द्रोहि॑थ शेपि॒षे स्त्रि॒यै पुं॒से अचि॑त्त्या ।उ॒न्मो॒च॒न॒प्र॒मो॒च॒ने उ॒भे वा॒चा व॑दामि ते

yad dudrohitha śepiṣe striyai puṃse acittyā | unmocanapramocane ubhe vācā vadāmi te

हिन्दी अर्थ

४. तत्तिरोय-संहिता-पवपाठः--५० वषं से दुलभ ग्रन्थ का पुनः प्रकाशन, बटिया सुन्दर जिल्द । १००.०० ४०.००; ७-त काण्ड ४०.००; -१० काण्ड ४०.०० ; ११-१३ काण्ड ३५.००; १४.१७ काण्ड ३०.००; १८-१९ काण्ड २५.००; बीस्वां काण्ड दित एवं शतशः टिप्पणियां से युक्त । साधारण जिल्द ३०.००; पूरे कपडे

English

Forth from thy members have I charmed Decline that caused the fever there. Gone is the pain that racked thee, gone thy fever, gone thy heart’s disease. 70

अध्याय ५

श्लोक 30.4

यदेन॑सो मा॒तृकृ॑ता॒च्छेषे॑ पि॒तृकृ॑ताच्च॒ यत्।उ॒न्मो॒च॒न॒प्र॒मो॒च॒ने उ॒भे वा॒चा व॑दामि ते

yadenaso mātṛkṛtāccheṣe pitṛkṛtācca yat| unmocanapramocane ubhe vācā vadāmi te

हिन्दी अर्थ

७. ऋग्वेदाविभाष्यभूमिका-षरिशिष्ट-भूमिका पर किये गये आक्षेपो कै ग्रन्थकार द्वारा दिये उत्तर । ४.०० ८. भूमिका-मास्कर-स्वा० विचयानन्द, दो भागों मे, प्रतिभाग । विद्यावारिधि । मब तक प्रकाशित सभी संस्करणों से अधिक शुद्ध ओर सुन्दर सस्करण । ५०.०० ११. वेदिक-सिद्धान्त-मीमांसा-पं० युधिष्ठिर मीमांसक लिखित

English

Consumption, conquered by my voice, hath, like a hawk, fled far away. Two sages, Sense and Vigilance, the sleepless and the watchful one,

अध्याय ५

श्लोक 30.5

यत् ते मा॒ता यत् ते पि॒ता जा॒मिर्भ्राता॑ च॒ सर्ज॑तः ।प्र॒त्यक् से॑वस्व भेष॒जं ज॒रद॑ष्टिं कृणोमि त्वा

yat te mātā yat te pitā jāmirbhrātā ca sarjataḥ | pratyak sevasva bheṣajaṃ jaradaṣṭiṃ kṛṇomi tvā

हिन्दी अर्थ

गया है । विस्तुत भूमिका मौर अनेक परिशिष्टो से युक्त । १००.०० आदि ञाठ वैदिक विषयों पर गम्भीर विचार किया गया है । प्रत्येक वेदार्थं विजयपालजी विद्यावारिधि । उत्तम संस्करण ३५.००; साधारण ।

English

These, the protectors of thy life, shall be awake both day and night. This Agni must be waited on. Here let the Sun mount up for thee. Rise from deep death and come away, yea, from black darkness rise thou up!

अध्याय ५

श्लोक 30.6

इ॒हैधि॑ पुरुष॒ सर्वे॑ण॒ मन॑सा स॒ह।दू॒तौ य॒मस्य॒ मानु॑ गा॒ अधि॑ जीवपु॒रा इ॑हि

ihaidhi puruṣa sarveṇa manasā saha| dūtau yamasya mānu gā adhi jīvapurā ihi

हिन्दी अर्थ

१४. वदिक-साहित्य-सौदामिनी-स्व ° श्री पं० वागीश्वर वेदालंकार । १६. वेद-भुति-आम्नाय-सं्ञा-मीमांसा-- (संस्कृत-हिन्दी) इसमें द्यि दहै यु° मी०। नया संस्करण। २५.०० भूल का निदशेन एवं स्वर-भेद से होनेवाले अ्थ-भेदको दर्शाया है।

English

Homage be paid to Yama, to Mrityu, and to the Fathers, and to those who guide us! I honour first, for this man’s preservation, that Agni who well knoweth how to save him.

अध्याय ५

श्लोक 30.7

अनु॑हूतः॒ पुन॒रेहि॑ वि॒द्वानु॒दय॑नं प॒थः ।आ॒रोह॑णमा॒क्रम॑णं॒ जीव॑तोजीव॒तोऽय॑नम्

anuhūtaḥ punarehi vidvānudayanaṃ pathaḥ | ārohaṇamākramaṇaṃ jīvatojīvato'yanam

हिन्दी अर्थ

२०. वेदों का महत्व तथा उनके प्रचार के उपायः; वेदा्थं को विविध प्रक्रियाओं को एतिहासिक मीमांसा- (रस्कृत-हिन्दी) यु० मी०। १५.०० २१. देवापि ओर शन्तनु के आख्यान का वास्तविक स्वरूप-लेखक- पण श्री धममदेव जी निरुक्ताचायं २.५० के आधार पर वैदिक-जीवन के सम्बन्ध में लिखा गया अत्यन्त उपयोगी

English

Let breath and mind return to him, let sight and vigour come again Let all his body be restored and firmly stand upon its feet. Provide this man with breath and sight, O Agni, and with his body and his strength unite him.

अध्याय ५

श्लोक 30.8

0 मा बि॑भे॒र्न म॑रिष्यसि ज॒रद॑ष्टिं कृणोमि त्वा ।निर॑वोचम॒हं यक्ष्म॒मङ्गे॑भ्यो अङ्गज्व॒रं तव॑

0 mā bibherna mariṣyasi jaradaṣṭiṃ kṛṇomi tvā | niravocamahaṃ yakṣmamaṅgebhyo aṅgajvaraṃ tava

हिन्दी अर्थ

२७. शिवशंकरीय-लघुग्रन्थ पञ्चक--दसमे पं० श्री शिवशंकरजी काग्यती्थं लिखित वेदविषयक चतुदश-भुवन, वसिष्ठ-नन्दिनी, वेदिक-विज्ञान, विश्वनाथजी वेदोपाध्याय । बद्धिया जिल्द २५.०० › साधारण २०.०० ३१. वेदिकथीयूष-धारा--लेखक--श्री देवेन्रकमारजी कपूर । चुने गीतों से युक्त । उत्तम जिल्द १५.००, साधारण १०.०० ३२. क्या वेद में आर्यो ओर आदिवासियों के युद्धो का वर्णन है ?7- लेखक---श्री वेद्य रामगोपालजी शास्त्री । १२.००

English

Thou knowest Amrit: let him not go hence, nor dwell in house of clay. Let not thine inward breathing fail, let not thine outward breath be lost.

अध्याय ५

श्लोक 30.9

अ॒ङ्ग॒भे॒दो अ॑ङ्गज्व॒रो यश्च॑ ते हृदयाम॒यः ।यक्ष्मः॑ श्ये॒न इ॑व॒ प्राप॑प्तद् वा॒चा सा॒ढः प॑रस्त॒राम्

aṅgabhedo aṅgajvaro yaśca te hṛdayāmayaḥ | yakṣmaḥ śyena iva prāpaptad vācā sāḍhaḥ parastarām

हिन्दी अर्थ

३३. उस्-ज्योति- -डां ० वासुदेवशरण अग्रवाल लिखित वेदविषयक २४. वेदों कौ प्रामाणिकता- ड° श्रीनिवास शास्त्री । १.५० कमेकाण्ड-विषयक ग्रन्थ ३६. बौधायन-धोत-सुत्रम्--(दशंपुणंमास प्रकरण) भवस्वामी

English

Let Sūrya who is Lord Supreme raise thee from death with beams of light. Tied, tremulously moving, here the tongue is speaking in the mouth. With thee I charmed Decline away and Fever’s hundred ago- nies.

अध्याय ५

श्लोक 30.10

ऋषी॑ बोधप्रतीबो॒धाव॑स्व॒प्नो यश्च॒ जागृ॑विः ।तौ ते॑ प्रा॒णस्य॑ गो॒प्तारौ॒ दिवा॒ नक्तं॑ च जागृताम्

ṛṣī bodhapratībodhāvasvapno yaśca jāgṛviḥ | tau te prāṇasya goptārau divā naktaṃ ca jāgṛtām

हिन्दी अर्थ

(कृत्याम्) हिस्रकिया को (चक्रूः) शतरुजों ने किया चै, त भूमिमें (याम्) जिस हिखक्रिया को (चकरुः) किया है । (अक्षेषु) 1 की हिखक्रिया को (पुनः) फिर ( प्रति प्रतिक्रियारूपमें (हरा , प्रतिभ सम्राट् ले जाता हूं पहुंचाता या, वापस करता ह र सभा अर्थात् नियम निमत्री लोक सभा तथा न्यायालय आदि, किसी भ्यक्ति-विशेष के नहीं होते, । ये राजा के राज्य के अद्घरूप होते हैँ । राजा “"इन्द्ररच सम्राड वरुणश्च राजा” (यजुः० ८।३७) । राजा को वरुण कहा है, क्योंकि राजा "वरण" किया जाता है। चूनाजाताहै, प्रजाद्रारा ओौर्

English

Like as the Soma’s tendril, thus, O Jātavedas let him swell, Let him live, Agni I Make him fat, free from consumption, full of sap.

अध्याय ५

श्लोक 30.11

अ॒यम॒ग्निरु॑प॒सद्य॑ इ॒ह सूर्य॒ उदे॑तु ते ।उ॒देहि॑ मृ॒त्योर्ग॑म्भी॒रात् कृ॒ष्णाच्चि॒त् तम॑स॒स्परि॑

ayamagnirupasadya iha sūrya udetu te | udehi mṛtyorgambhīrāt kṛṣṇāccit tamasaspari

हिन्दी अर्थ

याते चक्रुः सेनायां यां चकरुरिंष्वायुपे किया है (इष्वायुधे) इषुओों जौर आयुधो के आगार अथ स्टोरमे; सेनिकों में युद्ध सम्बन्धी जोश पेदा होता है, ओौर विजय-घोषणा की जाती है । उसकी हिस्क्रिया है उसे तोड़-फोड़ देना ।

English

Here, Agni, is the fuel, here are logs that crush Pisāchas down. O Jātavedas, willingly accept them and be pleased therewith. Accept, O Agni, with thy flame the billets of Tārshtāgha wood.

अध्याय ५

श्लोक 30.12

नमो॑ य॒माय॒ नमो॑ अस्तु मृ॒त्यवे॒ नमः॑ पि॒तृभ्य॑ उ॒त ये नय॑न्ति ।उ॒त्पार॑णस्य॒ यो वेद॒ तम॒ग्निं पु॒रो द॑धे॒ऽस्मा अ॑रिष्टता॑तये

namo yamāya namo astu mṛtyave namaḥ pitṛbhya uta ye nayanti | utpāraṇasya yo veda tamagniṃ puro dadhe'smā ariṣṭatātaye

हिन्दी अर्थ

है राष्ट्रपति ! (ते) तेरे (कूपे) निजकेया राष्ट् के कूपमें किया है, (वा) अथवा (उमशाने) इमशान मे (निचस्नुः) भूमि खोदकर विस्फोटक गाडा है, (सद्मनि) तेरे बैठने के स्थानमेंयानिवासगृहमें (याम् पम्राट् ले-जाता हूं पहुचाता या वापस करता हूं । यां तें चक्रुः पुरुषास्थे अग्नौ संक॑सुके च याम् ।

English

Let the flesh-eater who would take the flesh of this man lose his form. A charm to restore life and health

अध्याय ५

श्लोक 30.13

ऐतु॑ प्रा॒ण ऐतु॑ मन॒ ऐतु॒ चक्षु॒रथो॒ बल॑म्।शरी॑रमस्य॒ सं वि॑दां॒ तत् प॒द्भ्यां प्रति॑ तिष्ठतु

aitu prāṇa aitu mana aitu cakṣuratho balam| śarīramasya saṃ vidāṃ tat padbhyāṃ prati tiṣṭhatu

हिन्दी अर्थ

हे राष्ट्रपति ! (ते) तेरे (पुरुषास्थ) किसी मृतपुरुष की हदयं को गाड़ाजायगातो विस्फोटक कटकर गाडनेवालों को यह हसित कर सामग्री मे विस्फोटकं को मिशध्ित कर देना

English

From thy vicinity I call, from near, from far, from night at hand. Stay here: depart not: follow not the Fathers of the olden time. I bind thy vital spirit fast. If any man, a stranger or akin, hath cast a spell on thee,

अध्याय ५

श्लोक 30.14

प्रा॒णेना॑ग्ने चक्षु॑षा॒ सं सृ॑जे॒मं समी॑रय त॒न्वा॒३सं बले॑न ।वेत्था॒मृत॑स्य॒ मा नु गा॒न्मा नु भूमि॑गृहो भुवत्

prāṇenāgne cakṣuṣā saṃ sṛjemaṃ samīraya tanvā3saṃ balena | vetthāmṛtasya mā nu gānmā nu bhūmigṛho bhuvat

हिन्दी अर्थ

है राष्टरपति ! (अपथेन) विना माग द्वारा (एनाम्) इस हिस- मागं द्वारा (इतः) यहा से (प्रहिण्मसि) हम भेजते ह, वापस करते ह । लिए, मानो (सं जभार) हिखक्रिया का संग्रह कियादहै। शत्रु विना निरिचत-मागं हार हिखक्रिया लायाहै, इस भयसे कि

English

I with my voice to thee declare thy freedom and release there- from. If in thy folly thou hast lied or cursed a woman or a man,

अध्याय ५

श्लोक 30.15

मा ते॑ प्रा॒ण उप॑ दस॒न्मो अ॑पा॒नोऽपि॑ धायि ते ।सूर्य॒स्त्वाधि॑पतिर्मृ॒त्योरु॒दाय॑च्छतु र॒श्मिभिः॑

mā te prāṇa upa dasanmo apāno'pi dhāyi te | sūryastvādhipatirmṛtyorudāyacchatu raśmibhiḥ

हिन्दी अर्थ

ही वापस करते ह, हम शक्तिशाली है, हमे पकडे जाने का भय नहीं । यह् जानती दहै कि युद्धहो जाने पर हमारा विनाश अवर्यंभावी ह । मया. चकार मेद्रमस्मभ्य॑मभगो मग॑वद्धयः।९॥ है राष्टूपति ! (यः) जिस शत्रु राजा ने (चकार) हिसक्रिया

English

I with my voice declare to thee thy freedom and release there- from. If thou art lying there because of mother’s or of father’s sin, I with my voice declare to thee thy freedom and release there- from.

अध्याय ५

श्लोक 30.16

इ॒यम॒न्तर्व॒दति जि॒ह्वा ब॒द्धा प॑निष्प॒दा।त्वया॒ यक्ष्मं॒ निर॑वोचं श॒तं रोपी॑श्च त॒क्मनः॑

iyamantarvadati jihvā baddhā paniṣpadā| tvayā yakṣmaṃ niravocaṃ śataṃ ropīśca takmanaḥ

हिन्दी अर्थ

नहीं हृभा, भौर जिसने युद्ध मे (पादम् अंगुरिम्) निज पैरों भौर भङ्गुलियों आदि अवयवो को (शश्रे) हिसित कर लिया है, वह (अभगः) वाले विजेताओं के लिए (भद्रम् चकार) उसने भद्रका्यं किया है । शरीरावयवों को क्षति पहुंची है, परन्तु उसे मारा नहीं गया। हार जाने पर तथा राज्य सम्पत्ति विजेता के अधीनटहो गहै, ओर विजेता भगवाला

English

Accept the healing medicine, the balm thy mother and thy sire, Thy sister and thy brother bring. I make thee live through lengthened years.

अध्याय ५

श्लोक 30.17

अ॒यं लो॒कः प्रि॒यत॑मो दे॒वाना॒मप॑राजितः ।यस्मै॒ त्वमि॒ह मृ॒त्यवे॑ दि॒ष्टः पु॑रुष जज्ञि॒षे।स च॒ त्वानु॑ ह्वयामसि॒ मा पु॒रा ज॒रसो॑ मृथाः

ayaṃ lokaḥ priyatamo devānāmaparājitaḥ | yasmai tvamiha mṛtyave diṣṭaḥ puruṣa jajñiṣe| sa ca tvānu hvayāmasi mā purā jaraso mṛthāḥ

हिन्दी अर्थ

हो गयाहै। मानोकि अभग राजाने भगवालों के लिए भद्रकायं किया है । भग =पेरवये, श्री यश । मिलें आदि । तथा 'जमृला सम्पत्ति" (मन्त ४) है भूमि तथामिलोंसे उत्पादित २. “यदि पुनः युद्ध करूं तो अमुक दुर्मन को प्राप्त होऊ --युदध शपथ है, अभिशाप इससे पुथक् है । अभिपाय यह हैक अाराधी राजा यदि शपथत्ते लेतो इसे क्षमा कर दिया जाए परन्तु वह् यदि अभिमाने आकर पथं नदी लेता तो उसे वध

English

O man, stay here among us; stay with all thy spirit: follow not Yama’s two messengers. Approach the castles where the living dwell. Come back as thou art called to come, knowing the outlet of the path,

अध्याय ५

श्लोक 31.1

कृत्यापरिहरणम्।१-१२ शक्रः।कृत्यादूषणम्।अनुष्टुप्, ११ बृहतीगर्भा अनुष्टुप्, १२ पथ्याबृहती।यां ते॑ च॒क्रुरा॒मे पात्रे॒ यां च॒क्रुर्मि॒श्रधा॑न्ये ।आ॒मे मां॒से कृ॒त्यां यां च॒क्रुः पुनः॒ प्रति॑ हरामि॒ ताम्

kṛtyāpariharaṇam| 1-12 śakraḥ| kṛtyādūṣaṇam| anuṣṭup, 11 bṛhatīgarbhā anuṣṭup, 12 pathyābṛhatī| yāṃ te cakrurāme pātre yāṃ cakrurmiśradhānye | āme māṃse kṛtyāṃ yāṃ cakruḥ punaḥ prati harāmi tām

हिन्दी अर्थ

३७. बौधायन-धौत-सुत्रम्-(आधान-प्रकरण)- सुबोधिनी वृत्ति है । पं० भीमसेनकृत, भाषां सहित । २५.०० पर हमने इसे प्रथम बार छापादहै। २५.०० पशयज्ञों पर विस्तार से विवेचना कोदहै। ३०.००

English

This living world, unconquered of the Gods, is most beloved of all. To whatsoever death thou wast destined when thou wast born,.

अध्याय ५

श्लोक 31.2

यां ते॑ च॒क्रुः कृ॑क॒वाका॑व॒जे वा॒ यां कु॑री॒रिणि॑ ।अव्यां॑ ते कृ॒त्यां यां च॒क्रुः पुनः॒ प्रति॑ हरामि॒ ताम्

yāṃ te cakruḥ kṛkavākāvaje vā yāṃ kurīriṇi | avyāṃ te kṛtyāṃ yāṃ cakruḥ punaḥ prati harāmi tām

हिन्दी अर्थ

समास भौर ऊपरसे आनेवाली अनुवृत्तिका निर्देश करके सरल संस्कृत ७०. धातुपाठ--धात्वादिसूची सहित, शुद्ध संस्करण । ५.०० ७१. क्षीरतरङ्किणी--क्षी रस्वामीङृत । पाणिनीय धातुपाठ की ७२. धातुप्रदीप-मंत्रेयरक्षित विरचित पाणिनीय धातुपाठ की

English

The ass with teeth in both his jaws, this I strike back again on them. The secret spell upon thy plants Amūlā or Narāchi, spell

अध्याय ५

श्लोक 31.3

यां ते॑ च॒क्रुरेक॑शफे पशू॒नामु॑भ॒याद॑ति ।ग॒र्द॒भे कृ॒त्यां यां च॒क्रुः पुनः॒ प्रति॑ हरामि॒ ताम्

yāṃ te cakrurekaśaphe paśūnāmubhayādati | gardabhe kṛtyāṃ yāṃ cakruḥ punaḥ prati harāmi tām

हिन्दी अर्थ

पाणिनीय व्याकरणानुसार है । १०.०० ७४; संस्कृत पठन-पाठन की अनुभूत सरलतम विधि- लेखक पं० आयोजन किया जाता है । पहला भाग १५.००; दूसरा भाग २५.०० ।

English

That they have cast upon thy field, this I strike back again on them. The spell that wicked men have cast on thine original household- fire, And on thy sacrificial hall, this I strike back again on them.

अध्याय ५

श्लोक 31.4

यां ते॑ च॒क्रुर॑मू॒लायां॑ वल॒गं वा॑ नरा॒च्याम्।क्षेत्रे॑ ते कृ॒त्यां यां च॒क्रुः पुनः॒ प्रति॑ हरामि॒ ताम्

yāṃ te cakruramūlāyāṃ valagaṃ vā narācyām| kṣetre te kṛtyāṃ yāṃ cakruḥ punaḥ prati harāmi tām

हिन्दी अर्थ

“बिना रटे संस्कृत पठन-पाठन की अनुभूत सरलतम विधि" भागश का अंग्रेजी अनुवादहै। अंग्रेजी भाषाके माध्यमसे पाणिनीय व्याकरणमें प्रवेश करनेवालों के लिए यह् आधिकारिक पुस्तक है । कागज ओर छपा ७७. उणादिकोष-- पञ्चपादी उणादि सूरो की ऋ०द० स॒ कृत व्याख्या तथा पंऽ युधिष्ठिर मीमांसककरत टिप्पणियों एवं ११ सूचियों ७८. दशपादुणादिवृत्ति-संग्रहु- (प्रथम भाग) में अति प्राचीन दवितीयमाग में दो अज्ञातनामा वृत्तिकारो की वृत्तियां तथा

English

The spell that they have cast upon thy public room thy gambl- ing-board, Spell they have cast upon thy dice, this I strike back again on them.

अध्याय ५

श्लोक 31.5

यां ते॑ च॒क्रुर्गार्ह॑पत्ये पूर्वा॒ग्नावु॒त दु॒श्चितः॑ ।शाला॑यां कृ॒त्यां यां च॒क्रुः पुनः॒ प्रति॑ हरामि॒ ताम्

yāṃ te cakrurgārhapatye pūrvāgnāvuta duścitaḥ | śālāyāṃ kṛtyāṃ yāṃ cakruḥ punaḥ prati harāmi tām

हिन्दी अर्थ

७६. हैवम् पुरषकारवात्तिकोपेतम्- लीलाणुकमूनिृत । इसमें पाणिनीय धातुपाठे जो धातु अनेक गणो मं पदी गई है, उनपर विचार ८०. लिद् मौर लुङ् लकार की रूप-बोधक सरलविधि-- अप्राप्य काशिका के अनन्तर यही वृत्ति प्रामाणिक मानी गई है । ८.००

English

The spell that they have cast upon thine army or thy shafts and arms, Spell they have cast upon the drum, this I throw back again on them. Charm they have laid within thy well or buried in the burning- ground,

अध्याय ५

श्लोक 31.6

यां ते॑ च॒क्रुः स॒भायां॒ यां च॒क्रुर॑धि॒देव॑ने ।अ॒क्षेषु॑ कृ॒त्यां यां च॒क्रुः पुनः॒ प्रति॑ हरामि॒ ताम्

yāṃ te cakruḥ sabhāyāṃ yāṃ cakruradhidevane | akṣeṣu kṛtyāṃ yāṃ cakruḥ punaḥ prati harāmi tām

हिन्दी अर्थ

८५. शबम्बरूपावलो-- विना रटे शब्दरूपो का ज्ञान करानेवाली । ८७. संस्कृत-घातुकोश- पाणिनीय धातुओं का हिन्दी में अर्थनिर्देश । छपाई, उत्तम कागज, बदिया जिल्द सहित । १०.०० विविध विषय परिपूर्णं महस्वपूणे भूमिका छपी है । ५०.०० + 8 ६१. पिङ्धलनागछन्वोविधिति - भाष्यमू्--यादवप्रकाश विरचित 4 भाष्य । इसकी प्रमुख विशेषता है फि इसमें छन्दो के जो उदाहरण व्यि वे अषलीलता के दोष से रहित हैँ । अतः गुसुकुलो के ब्रह्मचारिर्यो कै लिए यह् परम उपयोगी है । ॑ ४०.०० ¢, ,

English

Charm they have laid within thy home, this I throw back again on them. The spell that they have wrought for thee in flickering fire of human bones,—

अध्याय ५

श्लोक 31.7

यां ते॑ च॒क्रुः सेना॑यां॒ यां च॒क्रुरि॑ष्वायु॒धे।दु॒न्दु॒भौ कृ॒त्यां यां च॒क्रुः पुनः॒ प्रति॑ हरामि॒ ताम्

yāṃ te cakruḥ senāyāṃ yāṃ cakruriṣvāyudhe| dundubhau kṛtyāṃ yāṃ cakruḥ punaḥ prati harāmi tām

हिन्दी अर्थ

, ९२. शंश-केन-कठ-उपनिषव्- भी वे रामगोपाल शास्त्रीकृत हिन्दी-अंग्रेजी ष्योख्या सहित । ईशो० २१००; केनो० २.००; कठो ० ४.०० । जी सरस्वती । ईव, जीव महति रूप तीनों मूल तत्त्वों का प्रतिपादन करनेवाला दु्षुनिक ग्रन्थ । ४०.०० ४. ९७. नफवणणरौष्छु-- छाग (थीशिश्नीकी प. 7०5 + (स्वामी

English

Mroka, consuming, cannibal, this I throw back again on them. He brought this by no proper path, by the right path we drive it back. The fool in folly brought it to those who observe established bounds.

अध्याय ५

श्लोक 31.8

यां ते॑ कृ॒त्यां कूपे॑ऽवद॒धुः श्म॑शा॒ने वा॑ निच॒ख्नुः ।सद्म॑नि कृ॒त्यां यां च॒क्रुः पुनः॒ प्रति॑ हरामि॒ ताम्

yāṃ te kṛtyāṃ kūpe'vadadhuḥ śmaśāne vā nicakhnuḥ | sadmani kṛtyāṃ yāṃ cakruḥ punaḥ prati harāmi tām

हिन्दी अर्थ

. ९८. वैदिक ईश्वरोषासना--ऋवेवादि पोषम से.« संक्रलित गुजरांवाला (पाकिस्तान) में। शिक्षा- प्रारम्भिक शिक्षा वेदिक पाठाशाला पद पर नियुक्त तथा सन् १९४२ मे वहां से सेवामुक्त हुए। अनुसन्धान- सन् १९२३-२४ मेँ परोपकारिणी सभा अजमेर मे। सन् १९५६-५७ आर्यं सार्वदेशिक वाटिका मे साथ ही ' वेदिक अनुसन्धान त्रैमासिक पत्रिका का सम्पादन भी। अन्य लेखन- ९. सामवेद का आध्यात्मिक भाष्य।

English

No power had he who wrought the spell: he hurt his foot, he broke his toe. Unlucky for his wealthy lords, he hath wrought happiness for us.

अध्याय ५

श्लोक 31.9

यां ते॑ च॒क्रुः पु॑रुषा॒स्थे अ॒ग्नौ संक॑सुके च॒ याम्।म्रो॒कं नि॑र्दा॒हं क्र॒व्यादं॒ पुनः॒ प्रति॑ हरामि॒ ताम्

yāṃ te cakruḥ puruṣāsthe agnau saṃkasuke ca yām| mrokaṃ nirdāhaṃ kravyādaṃ punaḥ prati harāmi tām

हिन्दी अर्थ

६. बाल सत्यार्थ-प्रकाश। ७. बाल ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका। उपाधियां एवं पुरस्कार- विद्यालंकार, विदयामार्तण्ड मानोपाधि, वेदवेदांग रहने के कारण आपको ४ स्वर्णपदक ओर एक रजतपदक प्राप्त हआ।

English

May Indra slay with mighty bolt, may Agni with his missible pierce. The sorcerer who brings the curse, who deals with roots and secret spells. 71

अध्याय ५

श्लोक 31.10

अप॑थे॒ना ज॑भारैणां॒ तां प॒थेतः प्र हि॑ण्मसि ।अधी॑रो मर्या॒धीरे॑भ्यः॒ सं ज॑भा॒राचि॑त्त्या

apathenā jabhāraiṇāṃ tāṃ pathetaḥ pra hiṇmasi | adhīro maryādhīrebhyaḥ saṃ jabhārācittyā

हिन्दी अर्थ

मूल मराठी में लिखे गये ग्रन्थ का हिन्दी अनुवाद । इसी का गुजराती भनु- वाद संशोधित संस्कार-विधिका आधार बना। २०.०० सोमयाग, चातुर्मास्य ओर वाजपेय आदि यागो का वर्णेन है । (दोनों भाग नादि बृहद् हवन के मन्त्रौ सहित । १.५०

English

O man, This death and we call after thee. Die not before decrepit age! A counter-charm against the incantations of an enemy

अध्याय ५

श्लोक 31.11

यश्च॒कार॒ न श॒शाक॒ कर्तुं॑ श॒श्रे पाद॑म॒ङ्गुरि॑म्।च॒कार॑ भ॒द्रम॒स्मभ्य॑मभ॒गो भग॑वद्भ्यः

yaścakāra na śaśāka kartuṃ śaśre pādamaṅgurim| cakāra bhadramasmabhyamabhago bhagavadbhyaḥ

हिन्दी अर्थ

सहित । शुद्ध संस्करण । ३.०० ४६. वेदिक यज्ञं का स्वरूप- ने०--डा० कृष्णलाल पाच महायज्ञो को व्याख्या । ५.०० विधान है । अगले शिक्षा ग्रन्थों में भी यही विषय ०.७ ६१. माहेश्वर-ग्याकरणम्--जगदीणाचायं (छात्रो के लिए) २० त ६२. अष्टाध्यायी-महापरिष्कारः-(मूलपाठ) विस्तत विव ध सहित (विद्वानों व पुस्तकालय हेतु) । च ६ ६३. काशिका-महापरिष्कारः- जगदीशाचार्य । प्रतिखण्ड र

English

The spell that they have cast for thee on unbaked dish or ming- led meal, The witchcraft wrought on undressed meat, this I strike back again on them.

अध्याय ५

श्लोक 31.12

कृ॒त्या॒कृतं॑ वल॒गिनं॑ मू॒लिनं॑ शपथे॒य्यऽम्।इन्द्र॒स्तं ह॑न्तु मह॒ता व॒धेना॒ग्निर्वि॑ध्यत्व॒स्तया॑

kṛtyākṛtaṃ valaginaṃ mūlinaṃ śapatheyya'm| indrastaṃ hantu mahatā vadhenāgnirvidhyatvastayā

हिन्दी अर्थ

वारिधि । उत्तम कागज, शुद्ध छपाई तथा सुन्दर जिल्व सहित । १२५.०० ६६. निरत समुच्चय- आचाय वररुचि विरचित (संस्कृत) । इसमें ६७. अष्टाध्यायो-- (मूल) शुद्ध संस्करण । ६.००

English

The spell that they have cast for thee on jungle-cock, goat, horned ram, The witchcraft wrought upon thy ewe, this I strike back again on them. The spell that they have cast upon thy beast that hath uncloven hooves,

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Atharva Veda — Chapter 5
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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