Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
7
अध्याय 7 / 20

Kanda 7

काण्ड 7

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पूर्ण अध्याय पाठ152 श्लोक

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अध्याय ७

श्लोक 1.1

आत्मा।१-२ अथर्वा (ब्रह्मवर्चसकामः) ।आत्मा।त्रिष्टुप्, २ विराड् जगती।धी॒ती वा॒ ये अन॑यन् वा॒चो अग्रं॒ मन॑सा वा॒ येऽव॑दन्नृ॒ तानि॑ ।तृ॒तीये॑न॒ ब्रह्म॑णा वावृ॒धा॒नास्तु॒रीये॑णामन्वत॒ नाम॑ धे॒नोः

ātmā| 1-2 atharvā (brahmavarcasakāmaḥ) | ātmā| triṣṭup, 2 virāḍ jagatī| dhītī vā ye anayan vāco agraṃ manasā vā ye'vadannṛ tāni | tṛtīyena brahmaṇā vāvṛdhānāsturīyeṇāmanvata nāma dhenoḥ

हिन्दी अर्थ

नमुक्त नहीं हुए उन मूमृक्षुशों को स्थिति तुतीयधाममें होती दहै । यथा संसारी होता है, वे अभी जीवन्मुक्तावस्था मे नहीं होते, अतः वे प्रनापति- ओर पालन के साथ सम्बद्ध रहतारहै, इस संसार के साथ सम्बद्ध वह पृथिवी माता को (वेद) जानता है, (सः सूनुः) वह् जगत् का प्रेरक .

English

Glorification of the power of prayer and to Agni They who by thought have guided all that Speech hath best, or they who with their heart have uttered words of truth,

अध्याय ७

श्लोक 1.2

स वे॑द पु॒त्रः पि॒तरं॒ स मा॒तरं॒ स सू॒नुर्भु॑व॒त् स भु॑व॒त् पुन॑र्मघः ।स द्यामौ॑र्णोद॒न्तरि॑क्षं॒ स्वः॑१ स इ॒दं विश्व॑मभवत् स आभ॑वत्

sa veda putraḥ pitaraṃ sa mātaraṃ sa sūnurbhuvat sa bhuvat punarmaghaḥ | sa dyāmaurṇodantarikṣaṃ svaḥ1 sa idaṃ viśvamabhavat sa ābhavat

हिन्दी अर्थ

परमेश्वर, यौः पिता ओर पृथिवी माताका पुत्रहै, इन दोनोंकी विविध घटनाओं द्वारा परमेश्वर की सत्ता का परिज्ञान होता है, भतः परमेश्वर को यौः ओर पृथिवी का पत्र कहा है । सूनुः का अर्थं. पुत्र नहीं, क्योंकि पू्र का कथन पूवं हो चुका है, अतः सूनुः का अथं है प्रेरक, षू प्रेरणे का०७। भ्रनु० १। सु०२ अथवेवेद-माष्य ३ जगत् को पेदा कर वह पुनः मघवान् हो जाता है । यह् अवस्था वार-वार के प्रलय भौर सृष्टि मे होती रहती है 1 परमेश्वर को “मघवा” भी कहते है, मघवा = मघवाला, धन वाला । ¦ अथर्वाणं पितरं देवबन्धुं मातुगभ पितुरसु युवानम् । य दषं यद्ग मन॑सा चिकेत मर णो वोचस्तमिहेह जवः ॥१॥

English

Made stronger by the strength which the third prayer bestows, have by the fourth prayer learned the nature of the Cow. Well knows this son his sire, he knows his mother well: he hath been son, and he hath been

अध्याय ७

श्लोक 2.1

आत्मा।१ अथर्वा (ब्रह्मवर्चसकामः) ।आत्मा।त्रिष्टुप्, अथ॑र्वाणं पि॒तरं॑ दे॒वब॑न्धुं मा॒तुर्गर्भं॑ पि॒तुरसुं॒ युवा॑नम्।य इ॒मं य॒ज्ञं मन॑सा चि॒केत॒ प्र णो॑ वोच॒स्तमि॒हेह ब्र॑वः

ātmā| 1 atharvā (brahmavarcasakāmaḥ) | ātmā| triṣṭup, atharvāṇaṃ pitaraṃ devabandhuṃ māturgarbhaṃ piturasuṃ yuvānam| ya imaṃ yajñaṃ manasā ciketa pra ṇo vocastamiheha bravaḥ

हिन्दी अर्थ

वन्धने वाले, (मातुगेभेम्) पृथिवी माता के गर्भरूप, (पितुः असुम्) पितु- अर्थात् हैवरूप में पूजनीय परमेश्वर को (यः) जो (मनसा) मनन पूवक (चिकेत) सम्यक्तया जानता है, वह॒ (नः) हमे (भ्रवोचः) उसं का क करे, (तम्) उसे (इट्, इहं ) इन-इन विविध स्थानों में (ब्रवः) मान होता है । मौर समय पर प्रकट होकर वह श्नातस्परूप हो जाता में रहता है, ओर समय पर किसी ऋषि, मुनि, सन्त, महात्मा मे प्रकट हो कर ज्ञातस्वरूप हो जाता है।

English

illiberal. He hath encompassed heaven, and air’s mid-realm, and sky; he hath become this All; he hath come nigh to us.

अध्याय ७

श्लोक 3.1

आत्मा।१ अथर्वा (ब्रह्मवर्चसकामः) ।आत्मा।त्रिष्टुप्, अ॒या वि॒ष्ठा ज॒नय॒न् कर्व॑राणि॒ स हि घृणि॑रु॒रुर्वरा॑य गा॒तुः ।स प्र॒त्युदै॑द् ध॒रुणं॒ मध्वो॒ अग्रं॒ स्वया॑ त॒न्वाऽत॒न्वऽमैरयत

ātmā| 1 atharvā (brahmavarcasakāmaḥ) | ātmā| triṣṭup, ayā viṣṭhā janayan karvarāṇi sa hi ghṛṇirururvarāya gātuḥ | sa pratyudaid dharuṇaṃ madhvo agraṃ svayā tanvā'tanva'mairayata

हिन्दी अर्थ

८1 पितु श्रसुम्' ५ पिता है दयौः 1 दलोक का वह् भसु है, प्राण- 1 अथ्ैवेद-भाष्य का०७ भ्रनु० १। सु ॥ (ग्रया= अनया ) रम (विष्ठा = विष्ठया ) विविघ स्थिति के कारण अरथर्वा-परमेश्वर टी (घुणिः ) दिन के समान चमकता है, (उरः ) ओर वह् सर्वाच्छादक है । (वराय) वह् वरण किये गए. उपासक के लिये (गातुः)

English

Praise of Atharvan Invoke for us, proclaim in sundry places, the kinsman of the Gods, our sire Atharvan,

अध्याय ७

श्लोक 4.1

आत्मा।१ अथर्वा (ब्रह्मवर्चसकामः) ।वायुः।त्रिष्टुप्, एक॑या च द॒शभि॑श्चा सुहुते॒ द्वाभ्या॑मि॒ष्टये॑ विंश॒त्या च॑ ।ति॒सृभि॑श्च॒ वह॑से त्रिं॒शता॑ च वि॒युग्भि॑र्वाय इ॒ह ता वि मु॑ञ्च

ātmā| 1 atharvā (brahmavarcasakāmaḥ) | vāyuḥ| triṣṭup, ekayā ca daśabhiścā suhute dvābhyāmiṣṭaye viṃśatyā ca | tisṛbhiśca vahase triṃśatā ca viyugbhirvāya iha tā vi muñca

हिन्दी अर्थ

अया तृतीयाया याजादेशः (सायण ) 1 कवराणि-=करववैरम् कमेनाम धारण करता है, मौर परमेश्वर सूयं का धारण करता है, एतद्थं॑वह् सूर्यं मे मानो सदा उदित रहताहै.। जसे कि कटा है “योऽसावादित्ये पुरुषः विस्तारे (तनादिः) परमेश्वर विविष पदार्थो मे स्थित होकर उनके कमो को नियन्त्रित करता है 1 एकया च दुका्िश्चा सुहुते दराभ्यापिष्टये विशत्या च॑ ।

English

His mother’s germ, his father’s breath, the youthful, who with his mind hath noticed this oblation. To Vāyu God of the Wind

अध्याय ७

श्लोक 5.1

आत्मा।१-५ अथर्वा (ब्रह्मवर्चसकामः) ।आत्मा।त्रिष्टुप्, ३ पङ्क्तिः ४ अनष्टुप्।य॒ज्ञेन॑ य॒ज्ञम॑यजन्त दे॒वास्तानि॒ धर्मा॑णि प्रथ॒मान्या॑सन्।ते ह॒ नाकं॑ महि॒मानः॑ सचन्त॒ यत्र॒ पूर्वे॑ सा॒ध्याः सन्ति॑ दे॒वाः

ātmā| 1-5 atharvā (brahmavarcasakāmaḥ) | ātmā| triṣṭup, 3 paṅktiḥ 4 anaṣṭup| yajñena yajñamayajanta devāstāni dharmāṇi prathamānyāsan| te ha nākaṃ mahimānaḥ sacanta yatra pūrve sādhyāḥ santi devāḥ

हिन्दी अर्थ

(वियुग्मिः) शरीर-रथ के साथ विशेषरूप मे चुती हृद (एकया च का० ७1 अनु० १। सू०४ भ्रथर्ववेद-भाष्य्ः -५ णक्तियों समेत; (च) ग्रौर (वहसे) शरीर-रथ के वहन के लिये ( तिसृभिः च त्रिशता च) तीन तथा तीस अर्थात् ३३ एवितयों समेत (वायो) । न परमेश्वर (मै तेरे प्रति आत्मृाहुति, ्रात्मसमपेण करता ताः उन समग्र शक्तियों को (इह) इस जीवन में ( १) यृहते, इष्टये, वहसे, तीनों पद चतु्यं यैकवचनान्त है । सुहृत = सुः

English

With thine eleven teams, to aid our wishes, yea, with thy two- and-twenty teams, O Vāyu, With all thy three-and-thirty teams for drawing, here loose these teams, thou who art prompt to listen!

अध्याय ७

श्लोक 5.2

य॒ज्ञो ब॑भूव॒ स आ ब॑भूव॒ स प्र ज॑ज्ञे॒ स उ॑ वावृधे॒ पुनः॑ ।स दे॒वाना॒मधि॑पतिर्बभूव॒ सो अ॒स्मासु॒ द्रवि॑ण॒मा द॑धातु

yajño babhūva sa ā babhūva sa pra jajñe sa u vāvṛdhe punaḥ | sa devānāmadhipatirbabhūva so asmāsu draviṇamā dadhātu

हिन्दी अर्थ

चतुर्थी विभक्ति का एकवचनान्त रूप है । इन तीनों पदों की चतुर्थी "पूति कं लिये” किये हैँ । यथा “फलाय गच्छति ग्रामम्” का अभिप्राय है क्रिया, जिस कं साथ शक्तियों को परमेश्वर ने जोता है, ओर जिससे उन्हें जिसे किं "विमुञ्च" पद द्वारां विमूक्ति या मुक्ति सूचितकीदहै।

English

A glorification of sacrifice The Gods adored the Sacrifice with worship: these were the statutes of primeval ages. Those mighty ones attained the cope of heaven, there where the

अध्याय ७

श्लोक 5.3

यद् दे॒वा दे॒वान् ह॒विषाय॑ज॒न्ताम॑र्त्या॒न् मन॒साम॑र्त्येन ।मदे॑म॒ तत्र॑ पर॒मे व्योऽम॒न् पश्ये॑म॒ तदुदि॑तौ॒ सूर्य॑स्य

yad devā devān haviṣāyajantāmartyān manasāmartyena | madema tatra parame vyo'man paśyema taduditau sūryasya

हिन्दी अर्थ

रथ के साथ जुती हुई ह। इन ११ शक्तियो को उपनिषद् में “हय कटा है 1 यथा “इन्द्रियाणि हयानाहुः" (कठ० १।३।४) । इसलिये शरीर है रथ, जिस कौ साथ कि इन्दिय-हय श्रथति भ्रश्व जुते हए हँ दसलिये शरीर को रथ कहा है । यथा “आत्मानं रथिनं विद्धि शरीरं रथमेव तु (कठ० १।३।३)। (४) एकादश शक्तियां हँ कारण शरीरकी। २२ शक्तियां है, ११ कारगशरीर की- ११ सूक्ष्म शरीर की1 ३३ शक्तियां ह, ११ कारण शरीर की + ११ सूक्ष्मशरीर को + ११ स्थूल शरीर की । ये शक्तियां कारण मे पू्णैरूप से अभिन्यक्तावस्या में रहती है । शक्तियां तो केवल १ १ ही है, 8, ११-११-- ११३३ । ये ३३८प्राध्यात्मिक देव ह, जिन के वेदिक साहित्य मे ३३ देवता कहा है । :

English

Sādhyas, Gods of old, are dwelling. Sacrifice was, was manifest among us: it sprang to life and then in time grew stronger. Then it became thedeities’ lord and ruler: may it bestow on us abundant riches.

अध्याय ७

श्लोक 5.4

यत् पुरु॑षेण ह॒विषा॑ य॒ज्ञं दे॒वा अत॑न्वत ।अस्ति॒ नु तस्मा॒दोजी॑यो॒ यद् विहव्ये॑नेजि॒रे

yat puruṣeṇa haviṣā yajñaṃ devā atanvata | asti nu tasmādojīyo yad vihavyenejire

हिन्दी अर्थ

६ प्रथवंवेद-भाष्य का० ७ । प्रनु° १। सू०५ एकया, द्वाभ्याम्, तिसृभिः- द्वारा मन को सुचित कियाहै। 8 ५५ णवितसम्पन्न मन कारण शरोर में, सात्विक ओर राजसिक शक्तियों सम्पन्न मन स्थूलशरीर में ेरणाएुं देता है । रहस्य को यथामति मने प्रकट किया है। ह र सम्भव है ।

English

Where the Gods worshipped Gods with their oblation, worship- ped immortals with immortal spirit, p. a272 There in the loftiest heaven may we be happy, and look upon that light when Sūrya rises.

अध्याय ७

श्लोक 5.5

मु॒ग्धा दे॒वा उ॒त शुनाय॑जन्तो॒त गोरङ्गैः॑ पुरु॒धाय॑जन्त ।य इ॒मं य॒ज्ञं मन॑सा चि॒केत॒ प्र णो॑ वोच॑स्तमि॑हेह ब्र॑वः

mugdhā devā uta śunāyajantota goraṅgaiḥ purudhāyajanta | ya imaṃ yajñaṃ manasā ciketa pra ṇo vocastamiheha bravaḥ

हिन्दी अर्थ

३३ देवों के स्वरूप रहस्यमय ही ह । तथा ३३ देवों 4 क विभाग, ४ व्यामेकादश स्थ” (श्रथवं ° १६।२७।११,१२,१३) 1 इसी प्रकार यजुवद में भी ग्यारह-ग्यारह के समूटरूप मे ३३ देवों की स्थिति दि वि एथिन्यानू ३३ अ.धिहैविक देवों के । प्राघ्यात्मिक दृष्टि से “कारणणरीर'' धौः है, रहती है, तथा पेट है पृथिवी, जो कि अन्न का स्थान ह । वायु =सर्वंगति

English

With their oblation, Purusha, the Gods performed a sacrifice. A sacrifice more potent still they paid with the invoking hymn. With dog the Gods, perplexed, have paid oblation, and with cow’s limbs in sundry sacrifices.

अध्याय ७

श्लोक 6.1

अदितिः १-४ अथर्वा (ब्रह्मवर्चसकामः) ।अदितिः।त्रिष्टुप्, २ भुरिक्, ३-४ विराड् जगती।अदि॑ति॒र्द्यौरदि॑तिर॒न्तरि॑क्ष॒मदि॑तिर्मा॒ता स पि॒ता स पु॒त्रः ।विश्वे॑ दे॒वा अदि॑तिः॒ पञ्च॒ जना॒ अदि॑तिर्जा॒तमदि॑ति॒र्जनि॑त्वम्

aditiḥ 1-4 atharvā (brahmavarcasakāmaḥ) | aditiḥ| triṣṭup, 2 bhurik, 3-4 virāḍ jagatī| aditirdyauraditirantarikṣamaditirmātā sa pitā sa putraḥ | viśve devā aditiḥ pañca janā aditirjātamaditirjanitvam

हिन्दी अर्थ

( यजु° २२।१) मे परमेष्वर को “वायु” भी कहा है । कौ (श्रयजन्त) पूजा करते द, (तानि) वे ईश्वर की पूजा आदि (धर्माणि) मानः) महत्त्व से युक्त हए (यत्र) जिस सुख मेँ ( पूवं) इस समय से पूवं होते हैँ । (यजु° ३१।१६) के दयानन्द के भाष्य के अनुसार अभे दिया है

English

Invoke for us, in many a place declare him who with his mind. hath noticed this our worship. A prayer to Aditi for help and protection Aditi is sky, and air’s mid-region, Aditi is the father, son, and mother,

अध्याय ७

श्लोक 6.2

म॒हीमू॒ षु मा॒तरं॑ सुव्र॒ताना॑मृ॒तस्य॒ पत्नी॒मव॑से हवामहे ।तु॒वि॒क्ष॒त्राम॒जर॑न्तीमुरू॒चीं सु॒शर्मा॑ण॒मदि॑तिं सु॒प्रणी॑तिम्

mahīmū ṣu mātaraṃ suvratānāmṛtasya patnīmavase havāmahe | tuvikṣatrāmajarantīmurūcīṃ suśarmāṇamaditiṃ supraṇītim

हिन्दी अर्थ

(देवाः) दिव्यगुणी उपासक (यज्ञेन) देवत्वेन पृजन, संगतिकरण, है,(यत्र) जिस स्थान में (पूवे) पू्व॑सृष्टिकाल के (साध्याः) साधनीय योग- यज्ञेन = यज देवपूजासंगतिकरंणदानेषु ( भ्वादिः ), परमेष्वर को मुख्य देव जान कर उसी देव की पूजा करनी, उस के साय ध्यानाभ्यास- “नाकम् पद दुःख रहित स्थान विशेष का सूचक है । यथा धेन दयौरुग्रा

English

Aditi all the Gods and the Five Nations, Aditi what is now and what is future. We call for help the Queen of Law and Order, great mother of all those whose ways are 102

अध्याय ७

श्लोक 6.3

सु॒त्रामा॑णं पृथि॒वीं द्याम॑ने॒हसं॑ सु॒शर्मा॑ण॒मदि॑तिं सु॒प्रणी॑तिम्।दैवीं॒ नावं॑ स्वरि॒त्रामना॑गसो॒ अस्र॑वन्ती॒मा रु॑हेमा स्व॒स्तये॑

sutrāmāṇaṃ pṛthivīṃ dyāmanehasaṃ suśarmāṇamaditiṃ supraṇītim| daivīṃ nāvaṃ svaritrāmanāgaso asravantīmā ruhemā svastaye

हिन्दी अर्थ

कस्मे देवाय हविषा विधेम'' (यजु° ३२।६) में यौः, पृथिवी, अन्तरिक्षरूप आषिदेविक लोकों के साथ “नाकः पद पठित हह, ग्रतः “नाकः” भी आधि- पूजा रादि, पूवे पूरणे (भ्वादिः) । महिमानः उपासना व्रारा महमा को स हैवानामधिपति्वेभूव सो भस्मासु द्रविणमा द॑धातु ॥२॥ (यज्ञः) यजनीय परमेश्वर (बभुव) सत्तावान् है, (सः) वह॒ (आ

English

righteous, Far-spread, unwasting strong in her dominion, Aditi wisely lead- ing, well protecting. Sinless may we ascend, for weal, the vessel, rowed with good oars, divine, that never leaketh,

अध्याय ७

श्लोक 6.4

वाज॑स्य॒ नु प्र॑स॒वे मा॒तरं॑ म॒हीमदि॑तिं॒ नाम॒ वच॑सा करामहे ।यस्या॑ उ॒पस्थ॑ उ॒र्व॑१न्तरि॑क्षं॒ सा नः॒ शर्म॑ त्रि॒वरू॑थं॒ नि य॑च्छात्

vājasya nu prasave mātaraṃ mahīmaditiṃ nāma vacasā karāmahe | yasyā upastha urva1ntarikṣaṃ sā naḥ śarma trivarūthaṃ ni yacchāt

हिन्दी अर्थ

५ अथर्वधेद-माष्य का० ७1 अनु० १।सूु० ५ वह ही (पुनः) बार-बार सृष्टि म (वावृधे ) गुण-कमो की दृष्टि चे युद्धि देवों का (ज्रचिपतिः बभूव) स्वामी हुमा है! (सः) वह (ग्रस्मासु) हममे (देवाः) दिव्यगणी उपासक, (हविषा) आत्मसमपेण रूपी हवि द्वारा दिव्य गुणों को (अयजन्त) अपने साथ सुसंगत करते है सम्बद्ध करते है,

English

Earth, our strong guard, incomparable Heaven, Aditi wisely lead- ing, well protecting. Let us bring hither, in pursuit of riches, Aditi with our word, the mighty mother, Her in whose lap the spacious air is lying: may she afford us triply-guarding shelter!

अध्याय ७

श्लोक 7.1

आदित्याः।१ अथर्वा (ब्रह्मवर्चसकामः) ।अदितिः।आर्षी जगती।दितेः॑ पु॒त्राणा॒मदि॑तेरकारिष॒मव॑ दे॒वानां॑ बृह॒ताम॑न॒र्मणा॑म्।तेषां॒ हि धाम॑ गभि॒षक् स॑मु॒द्रियं॒ नैना॒न् नम॑सा प॒रो अ॑स्ति॒ कश्च॒न

ādityāḥ| 1 atharvā (brahmavarcasakāmaḥ) | aditiḥ|ārṣī jagatī| diteḥ putrāṇāmaditerakāriṣamava devānāṃ bṛhatāmanarmaṇām| teṣāṃ hi dhāma gabhiṣak samudriyaṃ nainān namasā paro asti kaścana

हिन्दी अर्थ

हुए (मदेम) हम उपासक हषं को प्राप्त हो, रौर (सूयस्य उदितौ) सूये के उदित होने पर प्रातः कालके ध्यान मे (पश्येम) परमेश्वर को मनसा=“मन” मानो अमत्य है, जब तक मोक्ष नहीं होता आत्मा के साथ मन रहता है । श्रथवा मोक्ष हो जाने पर भी उन मुक्तात्माओं के सथ मन बना ही रहता है जो कि परोपकाराथं पुनजंन्म के अभिलाषी होते है। पुरुषमाविशन्”; (अथवं ° १४११० १२.१८ ) ; तथा “आशिषश्च प्रशिषश्च मनु प्राविशन् (म्रथवं० ११।१०।२० ) इत्यादि) येदेवरहैँ जिनकोकि उपासक श्रपने मे सुसंगत करते है ।

English

Praise of the Ādityas I have sung praise to Diti’s sons and Aditi’s, those very lofty and invulnerable Gods. For far within the depths of ocean is their home and in the wor- ship paid them none excelleth

अध्याय ७

श्लोक 8.1

शत्रुनाशनम्।१ उपरिबभ्रवः।बृहस्पतिः।त्रिष्टुप्।भ॒द्रादधि॒ श्रेयः॒ प्रेहि॒ बृह॒स्पतिः॑ पुरए॒ता ते॑ अस्तु ।अथे॒मम॒स्या वर॒ आ पृ॑थि॒व्या आ॒रेश॑त्रुं कृणुहि॒ सर्व॑वीरम्

śatrunāśanam| 1 uparibabhravaḥ| bṛhaspatiḥ| triṣṭup| bhadrādadhi śreyaḥ prehi bṛhaspatiḥ puraetā te astu | athemamasyā vara ā pṛthivyā āreśatruṃ kṛṇuhi sarvavīram

हिन्दी अर्थ

यत् पुरषेण हविषा यद्ग देवा अत॑न्वत । करते वालि या उस में निवास करने वाले परमेश्वररूपी (हविषा) हवि का० ७। अनु १। सू०५ अथर्ववेद-माष्य € 1 वतमानाथक है, यथा “छन्दसि लड लङ लिटः" (अष्टा० ३।४।६॥ दारा लुङ आदि का प्रयोग वतेमानमे भी होता है ।

English

these. Godspeed to a departing traveller Go forward on thy way from good to better: Brihaspati pre- cede thy steps and guide thee!

अध्याय ७

श्लोक 9.1

स्वस्तिदा पूषा।१-४ उपरिबभ्रवः।पूषा।त्रिष्टुप्, ३ त्रिपदा आर्षी गायत्री, ४ अनुष्टुप्।प्रप॑थे प॒थाम॑जनिष्ट पू॒षा प्रप॑थे दि॒वः प्रप॑थे पृथि॒व्याः ।उ॒भे अ॒भि प्रि॒यत॑मे स॒धस्थे॒ आ च॒ परा॑ च चरति प्रजा॒नन्

svastidā pūṣā| 1-4 uparibabhravaḥ| pūṣā| triṣṭup, 3 tripadā ārṣī gāyatrī, 4 anuṣṭup| prapathe pathāmajaniṣṭa pūṣā prapathe divaḥ prapathe pṛthivyāḥ | ubhe abhi priyatame sadhasthe ā ca parā ca carati prajānan

हिन्दी अर्थ

गधा देवा उत शुनाऽय॑जन्तोत गोरक्षः पुरुधायंजन्त ! जो कि (शुना उत) शवादरा भी 9 ) ४ करते हँ (४ हमारे प्रति ५, ) तरु कह, (तम्) उस के नाम को (इह इह) ं नाना स्थानों मे (ब्रवः) तू घोषित कर। स पा कार्याकायं विवेकरदिताः, देव(: यजमानाः (सायण व सम्यक् ज्ञान से रहित । देव: = मदान्विताः । दिवु सदा्थक ( र,

English

Place this man here, within this earth’s enclosure, afar from foes with all his men about him. A prayer to Pūshan for protection and the recovery of lost property Pūshan was born to move on distant pathways, on roads remote from earth, remote from

अध्याय ७

श्लोक 9.2

पू॒षेमा आशा॒ अनु॑ वेद॒ सर्वाः॑ सो अ॒स्माँ अभ॑यतमेन नेषत्।स्व॒स्ति॒दा आघृ॑णिः॒ सर्व॑वी॒रोऽप्र॑युच्छन् पु॒र ए॑तु प्रजा॒नन्

pūṣemā āśā anu veda sarvāḥ so asmā~ abhayatamena neṣat| svastidā āghṛṇiḥ sarvavīro'prayucchan pura etu prajānan

हिन्दी अर्थ

प्रतीयमान अरथा मे अरुचि प्रकट की गई है । “शुना का वास्तविक ) हे, “वायु हारा यथा “शुनासीरौ” मे “शुन"' का अथं वायु है (निरक्त त ६४४० ) । शशुनेन” कौ तृतीया-सुप्-विभक्ति को “डा” श्रादेश होकर "टि" का लोपहू्रा है (अष्टा० ७।१।३६) । अतः शुनेन - शुना, वायुना वायु कोपशु कहा भी है जिसके दवारा कि यज्ञ किया जाता. है, सम्पन्न होत १० ; अथवैवेद-माष्य का० ७.) अनु° १) सू°९ वायु, ओौर सूरं द्वारा यज्ञ करना । गोभिः ' पद द्वारा गौ के दुग्ध का कथन अन्तरिक्ष (ग्रदितिः) अदिति दहै, (माता अदितिः) माता अदितिहै, (सः पिता) वह पिता श्रदितिः है, (सः पुत्रः) वह् पतर अदितिः है। (विषर्वे देवाः) सबं सूर्यादि द्योतमान पदाथ (अदितिः) अदिति

English

heaven. To both most lovely places of assembly he travels and returns with perfect knowledge. Pūshan knows all these realms: may he conduct us by ways that are most free from fear and

अध्याय ७

श्लोक 9.3

पूष॒न्तव॑ व्र॒ते व॒यं न रि॑ष्येम क॒दा च॒न।स्तो॒तार॑स्त इ॒ह स्म॑सि

pūṣantava vrate vayaṃ na riṣyema kadā cana| stotārasta iha smasi

हिन्दी अर्थ

(जनित्वम्) जो उत्पन्न होगा (अदितिः) वे सव अदिति दहै "“अदितिरदीना देवमाता" (निरुवंत ४।४।२३) , ्रदिति पर (४६ ) । पुथिवी अपू, तेजः, वायु, आकाश । चेतन ओौर जड़ पदाथ जो उत्पन्न हए है, ञौर जो उत्पन्न होगे उन प्रदितिरूप कहा है। अदिति इन सब देवों की माता है, निर्मा करती है) ग्रतः ये सव आदिति माता की सन्तनेंदहं। जीव णरदः णतम् (णत० ब्राह्मण २४।६।८।२६ ) इसलिये यौः आदि को. म॒हीम् षु मतरं हू वतानामृतस्य पतनीपव॑से हवामहे ।

English

danger. Giver of blessings, glowing, all heroic, may he the wise and watchful go before us. We are thy praisers here, O Pūshan: never let us be injured under thy protection.

अध्याय ७

श्लोक 9.4

परि॑ पू॒षा प॒रस्ता॒द्धस्तं॑ दधातु॒ दक्षि॑णम्।पुन॑र्नो न॒ष्टमाज॑तु॒ सं न॒ष्टेन॑ गमेमहि

pari pūṣā parastāddhastaṃ dadhātu dakṣiṇam| punarno naṣṭamājatu saṃ naṣṭena gamemahi

हिन्दी अर्थ

का० ७। ग्रनु° १. सू० ७ अथर्ववेद-नाष्य ११ ०. ) अदीना या अक्षीणा देवमाता का अवसे) निजर्नार्भं ( सुह्- वामहे) हम उत्तम प्रकार भवित पूवक ्राह्वान करते है । र एवि वहुनाम (निषं० ३।१) क्षेत्रम् धननाम (निघं० २।१०) । उषरूचीम् ४ छ मन्त्र मे अदिति द्वारा अक्षीणा देवमाता पार-

English

From out the distance, far and wide, may Pūshan stretch his right hand forth. Let him drive back our lost to us, let us return with what is lost. A prayer for the favour of Sarasvati

अध्याय ७

श्लोक 10.1

सरस्वती।१ शौनकः।सरस्वती।त्रिष्टुप्।यस्ते॒ स्तनः॑ शश॒युर्यो म॑यो॒भूर्यः सु॑म्न॒युः सु॒हवो॒ यः सु॒दत्रः॑ ।येन॒ विश्वा॒ पुष्य॑सि॒ वार्या॑णि॒ सर॑स्वति॒ तमि॒ह धात॑वे कः

sarasvatī| 1 śaunakaḥ| sarasvatī| triṣṭup| yaste stanaḥ śaśayuryo mayobhūryaḥ sumnayuḥ suhavo yaḥ sudatraḥ | yena viśvā puṣyasi vāryāṇi sarasvati tamiha dhātave kaḥ

हिन्दी अर्थ

पापरहित हम (स्वस्तये) कल्याण के तिये (अरुहेम) आरोहण करें १ का मिश्रित वर्णेन हुञा है 1 “जनेहसम्'' का अथं पापरहित ४ के साथ इस का सम्बन्ध नहं प्रतीत होता । इसी प्रकार “अनायसः” ह सम्बन्ध भी पारमेश्वरी-नौका के साथ दहै उपास्तक पापरहित खा पारमेश्वरी-नौका पर आरोहण कर सवते है, जलीय नौका परतो ष निष्पापी सभी आरोहण कर सकते है। परमेश्वर नौकारूप ए्वेता० उप०अ० २) खण्ड ८) में परपेश्वर को “ब्रह्मोडप" कहू ह ॥ १२ अयर्ववेद-भाष्य का०७॥ श्नु० १। सू०७

English

That breast of thine, exhaustless and delightful, good to invoke, beneficent, free giver. Wherewith thou feedest all things that are choicest, bring that, Sarasvati, that we may drain it.

अध्याय ७

श्लोक 11.1

सरस्वती।१ शौनकः।सरस्वती।त्रिष्टुप्।यस्ते॒ स्तनः॑ शश॒युर्यो म॑यो॒भूर्यः सु॑म्न॒युः सु॒हवो॒ यः सु॒दत्रः॑ ।येन॒ विश्वा॒ पुष्य॑सि॒ वार्या॑णि॒ सर॑स्वति॒ तमि॒ह धात॑वे कः

sarasvatī| 1 śaunakaḥ| sarasvatī| triṣṭup| yaste stanaḥ śaśayuryo mayobhūryaḥ sumnayuḥ suhavo yaḥ sudatraḥ | yena viśvā puṣyasi vāryāṇi sarasvati tamiha dhātave kaḥ

हिन्दी अर्थ

भयावः् स्रोत रै, इन्द्रिय स्रोत । उडुप का अथं है नौका 1 परमेश्वर-माता भी चायमाणा है, रक्षिका है, पुथिवी के सदृश विस्तीर्णा है, यौः की तरह् योतमाना दहै, भौर सूप्रणीति अथ।त् विशेषतया प्रणय से राण करती है । वह नौका है इसलिये इस पर आरोहण भी सम्भव है अलीय-नौका भी विस्तीणं पृथिवीम् होनी चादिये, तथा उसमे प्रकाश ङ प्रबन्ध होना चाहिए चाम् , तथा उस में उत्तम गृह भी होने चाहिए शभ गृहनाम निघं० ३।४ ताकि यात्री उनमें विश्राम कर सक तथा वह् वाजस्य तु पर॑सवे मातरं महीमदिति नाम् वच॑सा कराभहे।

English

A prayer to protect corn from lightning and drought That far-spread thunder, sent from thee, which cometh on all this world, a high celestial signal

अध्याय ७

श्लोक 12.1

राष्ट्रसभा।१-४ शौनकः।सभा, १-२ सभा, पितरः, ३ इन्द्रः, ४ मनः।अनुष्टुप्, १ भुरिक् त्रिष्टुप्।स॒भा च॑ मा॒ समि॑तिश्चावतां प्र॒जाप॑तेर्दुहि॒तरौ॑ संविदा॒ने।येना॑ सं॒गच्छा॒ उप॑ मा॒ स शि॑क्षा॒च्चारु॑ वदानि पितरः॒ संग॑तेषु

rāṣṭrasabhā| 1-4 śaunakaḥ| sabhā, 1-2 sabhā, pitaraḥ, 3 indraḥ, 4 manaḥ| anuṣṭup, 1 bhurik triṣṭup| sabhā ca mā samitiścāvatāṃ prajāpaterduhitarau saṃvidāne| yenā saṃgacchā upa mā sa śikṣāccāru vadāni pitaraḥ saṃgateṣu

हिन्दी अर्थ

परमेश्वर-माता को (वचसा) स्तुति-प्राथना-वचनों द्वारा (करामहे) हम स्वकीया करते है, अपनाते ह । (यस्याः) जिसकी (उपस्थे) गोद मे (उरू) निवास के लिये गृहरूप हैँ । शमं सुखनाम ( निघं० ३।६ ) (४)। (भ्रदितिम्, मातरम्, पृथिवी माता को (वचसा) वेदोक्त विधि दारा (करामहे) अन्नोत्पादनयोग्या हम करते हँ 1 (यस्याः ) जिस पृथिवी माता जिलों वाला (शमम) गृह (नः) हमे ( नियच्छात्) प्रदान करे ।

English

Strike not, O God, our growing corn with lightning, not kill it with the burning rays of Sūrya. A prayer for influence at deliberative and religious meetings In concord may Prajapati’s two daughters, Gathering and As- sembly, both protect me.

अध्याय ७

श्लोक 12.2

वि॒द्म ते॑ सभे॒ नाम॑ न॒रिष्टा॒ नाम॒ वा अ॑सि ।ये ते॒ के च॑ सभा॒सद॒स्ते मे॑ सन्तु॒ सवा॑चसः

vidma te sabhe nāma nariṣṭā nāma vā asi | ye te ke ca sabhāsadaste me santu savācasaḥ

हिन्दी अर्थ

का०७॥। अनु० १।सू०८ ग्रथवंवेद-माष्य १३ वृञ् आवरणे, आवृत, धिरा हुभ्रा, इष्टकाचयन द्वारा दीवारों से धिरा है । वेद मे वर-वधू या पति-पत्नीकं भाव कोश्यौः पृथिवी" द्वाराभी सूचित किया है । यथा “द्यौरहं पृथिवी त्वम्, ताविह सं भवाव, प्रजामा जनयावहे'” (श्रथवं० १४।७।७१) । (अकारिषम्) मने कर दिया है । (देवानाम्) देवोंके पुत्रौ केलिये, जो

English

May every man I meet respect and aid me. Fair be my words, O Fathers, at the meetings. We know thy name, O Conference: thy name is interchange of talk.

अध्याय ७

श्लोक 12.3

ए॒षाम॒हं स॒मासी॑नानां॒ वर्चो॑ वि॒ज्ञान॒मा द॑दे ।अ॒स्याः सर्व॑स्याः सं॒सदो॒ मामि॑न्द्र भ॒गिनं॑ कृणु

eṣāmahaṃ samāsīnānāṃ varco vijñānamā dade | asyāḥ sarvasyāḥ saṃsado māmindra bhaginaṃ kṛṇu

हिन्दी अर्थ

है अदिति-माता (रव) अतः मेरी रक्षाकर। (तेषाम्) उन दिति ओर गम्भीर या गहरा था, रतः (एनान्) इन देवों या देवपुत्रो को मैने अव" पद को, “श्रव” घातु, लोट्, मध्यमपुरुष, एकवचन मान कर प्रथं १. हदय में रक्तरूपी जल भरा रहता है, रतः इसे समुद्र कहा है । २. हदय के म्रन्तःस्थलमे था।

English

Let all the company who join the Conference agree with me. Of these men seated here I make the splendour and the lore mine own.

अध्याय ७

श्लोक 12.4

यद् वो॒ मनः॒ परा॑गतं॒ यद् ब॒द्धमि॒ह वे॒ह वा॑ ।तद् व॒ आ व॑र्तयामसि॒ मयि॑ वो रमतां॒ मनः॑

yad vo manaḥ parāgataṃ yad baddhamiha veha vā | tad va ā vartayāmasi mayi vo ramatāṃ manaḥ

हिन्दी अर्थ

१४ ग्रथववेवेद-भाष्य का० ७ ।.अनु० १; सु° € किया है । दितिके पुत्र है, प्रकृति मे रममाण संसारी मनुष्या कं, काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद आदि माव। इन का स्थान हृदय-समुद्र ", था ओर देवपुरं के लिये अपितकरदियादहै। देव वा देवपुत्र है--सत्य, घद्धाः पवित्रत।, दे्रवुजन परोपकार भादि। देव मेरे हदय-समुद्र मं वसे रह्, ऋग्वेद १०।३६।११ के “वणोमहे'" के अनुकूल है, जिसका अथं है “हम वरण करते ह" । धाम =घामानि त्रयाणि भवन्ति, नामानि, स्थानानि ण वितियों समेत (णत्रम्) इसके एत्र को (अरे) दूर (कृण, कर।

English

Indra, make me conspicuous in all this gathered company. Whether your thoughts are turned away, or bound and fastened here or there, We draw them hitherward again: let your mind firmly rest on me.

अध्याय ७

श्लोक 13.1

शत्रुनाशनम्।१-२ अथर्वा (द्विषो वर्चो हर्तुकामः)।सूर्यः।अनुष्टुप्।यथा॒ सूर्यो॒ नक्ष॑त्राणामु॒द्यंस्तेजां॑स्याद॒दे।ए॒वा स्त्री॒णां च॑ पुं॒सां च॑ द्विष॒तां वर्च॒ आ द॑दे

śatrunāśanam| 1-2 atharvā (dviṣo varco hartukāmaḥ)| sūryaḥ| anuṣṭup| yathā sūryo nakṣatrāṇāmudyaṃstejāṃsyādade| evā strīṇāṃ ca puṃsāṃ ca dviṣatāṃ varca ā dade

हिन्दी अर्थ

कीश्रोर जाने का कथन इस मन्त्रम हुञाहै। श्रेयमागं कौ ओर जानै में परमेएवर को अग्रा कर उसका पदानुगामी बनना चाहिए, ताकि श्रेयमार्मी पथश्रष्टन हौ जाय । इस श्रेय मागं पर चलते हुए कामादि शत, निज का० ७। अनु० १। सू० १० ग्रथर्ववेद-भाष्य १५ प्रवल शक्तियों सहित, इसे श्रेयमागं से विचलित करने की चेष्टा करते दह उन्टं परमेश्वर की प्राधना, उपासना पूवक दूर करते रहना चाहिए । जीवनकेदो मांह दिव् कामजं अर्थात् देवीं का माम, श्रेपमागे ग्रौर पार्थिव जीदन का मामं, प्रेयमागं ; इन दोनो मार्गौ पर साथ-साथ

English

A charm to win superiority over foes and rivals As the Sun, rising, taketh to himself the brightness of the stars,. So I assume the glory of women and men mine enemies.

अध्याय ७

श्लोक 13.2

याव॑न्तो मा स॒पत्ना॑नामा॒यन्तं॑ प्रति॒पश्य॑थ ।उ॒द्यन्त्सूर्य॑ इव सु॒प्तानां॑ द्विष॒तां वर्च॒ आ द॑दे

yāvanto mā sapatnānāmāyantaṃ pratipaśyatha | udyantsūrya iva suptānāṃ dviṣatāṃ varca ā dade

हिन्दी अर्थ

धति दोनों मार्गो के लिये निदिष्ट समन्वित निज कतव्यों का पालन सकती है 1 परमेश्वर पूषा है, वह दोनों मार्गो पर युगपत् चलने वाले को पुष्टि प्रदान करता रहता है । र पूषेमा आशा असु वेद सवाः सो अस्मान् अभ॑यतमेन ेपत् । लाए । वहु (स्वस्तिदाः) कल्याप-प्रदाता है, १६ श्रथववंवेद-भाष्य का० ७ अनु० १। सू० १९

English

All ye amang my rivals who behold me as I come to you, I seize the glory of my foes as the Sun, rising, theirs who sleep. A prayer to Savitar for prosperity

अध्याय ७

श्लोक 14.1

सविता १-४ अथर्वा।सविता।अनुष्टुप्, ३ त्रिष्टुप्, ४ जगती।अ॒भि त्यं दे॒वं स॑वि॒तार॑मो॒ण्योः क॒विक्र॑तुम्।अर्चा॑मि स॒त्यस॑वं रत्न॒धाम॒भि प्रि॒यं म॒तिम्

savitā 1-4 atharvā| savitā| anuṣṭup, 3 triṣṭup, 4 jagatī| abhi tyaṃ devaṃ savitāramoṇyoḥ kavikratum| arcāmi satyasavaṃ ratnadhāmabhi priyaṃ matim

हिन्दी अर्थ

(इह) इस जीवन मे (ते) तेरा (स्तोतारः) स्तवन करने वाले (स्मसि) निष्ट कियाहै। इस व्रतको धारण करते हृएु हम उपासक्र मो हसित पालन करते है भौर परमेश्वर का स्तवन करते है । हस्तम्) वृद्धिकारक हमारे दाहिने हाथ को (परिदधातु) परिपुष्ट करे ।

English

I praise this God, parent of heaven and earth, exceeding wiser possessed of real energy, giver of treasure, thinker dear to all,. Whose splendour is sublime, whose light shone brilliant in crea- tion, who, wise, and golden handed, in his beauty made the sky.

अध्याय ७

श्लोक 14.2

उ॒र्ध्वा यस्या॒मति॒र्भा अदि॑द्युत॒त् सवी॑मनि ।हिर॑ण्यपाणिरमिमीत सु॒क्रतुः॑ कृ॒पात् स्वः

urdhvā yasyāmatirbhā adidyutat savīmani | hiraṇyapāṇiramimīta sukratuḥ kṛpāt svaḥ

हिन्दी अर्थ

हो, ओर (नष्टेन) नष्ट हुए घन के.साथ (संगमेमहि) हम संग करं। नष्ट हुए धन की पुनः प्रप्ति के लिये दाहिने हाथमे शक्ति चाहिए, ताकि परिपृष्ट हाथदहारो परिश्रम करके हुम पुनः धन प्राप्त कर सकं । धन से ८वुरुषान्त परं किञ्चित् सा काष्ठा सा परागतिः" (कठ० उप० १।३।११) । का० ७1 अनु° १। सू० १२ अथवंवेद-भाष्य १७

English

As thou, God! quickening, for our ancient father, sentest him height above and room about him, So unto us, O Savitar, send treasures, abundant, day by day, in shape of cattle.

अध्याय ७

श्लोक 14.3

सावी॒र्हि दे॑व प्रथ॒माय॑ पि॒त्रे व॒र्ष्माण॑मस्मै वरि॒माण॑मस्मै ।अथा॒स्मभ्यं॑ सवित॒र्वार्या॑णि दि॒वोदि॑व॒ आ सु॑वा॒ भूरि॑ प॒श्वः

sāvīrhi deva prathamāya pitre varṣmāṇamasmai varimāṇamasmai | athāsmabhyaṃ savitarvāryāṇi divodiva ā suvā bhūri paśvaḥ

हिन्दी अर्थ

(गशयुः) शिशु को शयन कराने वालादहै, (यः मयोभूः) जो उसे सुख- दायक है, (यः सुम्नयुः) जो उस्तके मन को प्रसन्न करने वाला है, (चुहवः) स्तन को (इह) इस गृहस्थ जीवन मे (धातवे) शिशुपानाथे (कः) परिपुष्ट यस्तं पथ स्तनयितयुये चष्वो देवः कतुविदवभाभूषतीदम् । मानो वधीषिुतं देव॒ सस्यं मोत वैधी रुदिः सूर्यस्य ॥१॥ भूमण्डल को भूषित करता हं अन्न प्रदान द्वारा . (हैव) है पषा देवः

English

Savitar, God, our household friend, most precious, hath sent our fathers life and power and riches. Let him drink Soma and rejoice when worshipped. Under his law even the Wanderer travels.

अध्याय ७

श्लोक 14.4

दमू॑ना दे॒वः स॑वि॒ता वरे॑ण्यो॒ दध॒द् रत्नं॒ दक्षं पि॒तृभ्य॒ आयूं॑षि ।पिबा॒त् सोमं॑ म॒मद॑देनमि॒ष्टे परि॑ज्मा चित् क्रमते अस्य॒ धर्म॑णि

damūnā devaḥ savitā vareṇyo dadhad ratnaṃ dakṣaṃ pitṛbhya āyūṃṣi | pibāt somaṃ mamadadenamiṣṭe parijmā cit kramate asya dharmaṇi

हिन्दी अर्थ

१८ अथवेवेद-भाष्य का० ७1 अनु० १) सु० १३ न (वधीः) नष्ट कर, (उत) तथा (सूर्यस्य रर्मिभिः) सूरयं॑की ररिमियों दारा (मावधीः) न नष्ट कर। हे । देवः देवः = ““दानाद्वा, दीपनाद्ा, चयोतनाद्रा, दयुस्थानौ भवतीति वा (प्रजापतेः) प्रजा-के-पति सम्राट् की (दृहितरौ) दो दुहिताओं के सदुश उस कौ प्रभिलाषाओं को पूणे करने वाली, (संविदाने) ओर एकमत हूरई,

English

A charm to win divine favour and felicity I choose, O Savitar, that glorious favour, with fruitful energy and every blessing, Even this one’s teeming cow, erst milked by Kanva, thousand- streamed, milked for

अध्याय ७

श्लोक 15.1

सविता १ भृगुः।सविता।त्रिष्टुप्।तां स॑वितः स॒त्यस॑वां सुचि॒त्रामाहं वृ॑णे सुम॒तिं वि॒श्ववा॑राम्।याम॑स्य॒ कण्वो॒ अदु॑ह॒न् प्रपी॑नां स॒हस्र॑धारां महि॒षो भगा॑य

savitā 1 bhṛguḥ| savitā| triṣṭup| tāṃ savitaḥ satyasavāṃ sucitrāmāhaṃ vṛṇe sumatiṃ viśvavārām| yāmasya kaṇvo aduhan prapīnāṃ sahasradhārāṃ mahiṣo bhagāya

हिन्दी अर्थ

करे । (येन) जिस सम्य ग्रौर सामित्य का (संगच्छ) संग करं (सः) सम्मति प्रदान करे, (पितरः) है पितरो (संगतेषु) तुभ लोगो कं संगमों सम्राट् ने नियुक्त पि्था टै, जो ससा-समिति का संज्रालन करता है । सभा है लोकसभा, प्रजा द्वीरा वनी गई; ओौर समिति है राजसभा, वारुणसभा

English

happiness by the mighty. A prayer for prosperity Increase this man Brihaspati! Illume him, O Savitar, for high and happy fortune.

अध्याय ७

श्लोक 16.1

सविता १ भृगुः।सविता।त्रिष्टुप्।बृह॑स्पते॒ सवि॑तर्व॒र्धयै॑नं ज्यो॒तयै॑नं मह॒ते सौभ॑गाय ।संशि॑तं चित् संत॒रं सं शि॑शाधि॒ विश्व॑ एन॒मनु॑ मदन्तु दे॒वाः

savitā 1 bhṛguḥ| savitā| triṣṭup| bṛhaspate savitarvardhayainaṃ jyotayainaṃ mahate saubhagāya | saṃśitaṃ cit saṃtaraṃ saṃ śiśādhi viśva enamanu madantu devāḥ

हिन्दी अर्थ

१. सभा, समिति; श्रामन्त्रण--ये तीन नागरिक संस्थाए हैँ, जिनका कि संचालिक-संस्था “"समिति" कही जा सकती है। इस दृष्टिसेभी समिति नागरिक हीह । बेदकीदुष्टिमें युद्ध के लिये निश्चय करना, सेनिक-संस्था का काम नहीं । का० ७। अनु १। सुऽ १३ भ्रधर्ववेद-भाष्य १९ प्रादेशिक राजाओं की सभा ।यथा “राजानः समिताविव (यजु° १२।८०)। संगतेषु =सभा समिति के संयुक्त अधिवेशन । दुहितरौ =दुह् प्रपूरणे (अदादिः) । दुहिताएं जैसे पिता की इच्छानुसार चलकर पिता कौीअमि- लाषाश्रो को पूणे करती दहै वेमे सभा-समिति सम्राट् कौ अभिलाषाओं को सभापति केपास जाकर श्रपनी सम्मति प्रदान करे। सभा-समितिके सदस्यो को सभापति, उनके संमानार्थं “पितर” कहताहै, वे सा्राज्यके रक्षक है, रतः पितरः हँ । णाखान्तर मे वदानि" के स्थानमें “वदामि

English

Sharpen him thoroughly though already sharpened: with glad acclaim let all the Gods receive him. A prayer for wealth and children

अध्याय ७

श्लोक 17.1

द्रविणार्थ प्रार्थना।१-४ भृगुः।धाता, सविता, ४ अग्निः, त्वष्टा, विष्णुः।१ त्रिपदा आर्षी गायत्री, २ अनुष्टुप्, ३-४ त्रिष्टुप्।धा॒ता द॑धातु नो र॒यिमीशा॑नो॒ जग॑त॒स्पतिः॑ ।स नः॑ पू॒र्णेन॑ यच्छतु

draviṇārtha prārthanā| 1-4 bhṛguḥ| dhātā, savitā, 4 agniḥ, tvaṣṭā, viṣṇuḥ| 1 tripadā ārṣī gāyatrī, 2 anuṣṭup, 3-4 triṣṭup| dhātā dadhātu no rayimīśāno jagataspatiḥ | sa naḥ pūrṇena yacchatu

हिन्दी अर्थ

येतेकेच मभासदस्ते मे सन्त सवाचसः।!॥ (सभे) है लोकसभा! (ते) तेरे (नाम) नामको (विदल) हम जानते (ग्रसि)हैष्चाही हुई है । (वैगृकति (ये के च) जो कोई भी (सभासदः) सभासद् है (ते)वे (मे) सुभ सभापति के लिये (सवाचसः) एक वाणी वाले (सन्तु) हों । मन्त्र में लोकसभा का वणेन है) वहु “नरिष्टा है, नु+-इष्टा नर-नारियों को ग्रभीष्ट है, उन द्वारा चाही हई है । संवाचसः -संविदानाः (सन्त्र १) । एकवाणी = सर की एक सम्मति

English

May the Ordainer give us wealth, Lord, ruler of the world of life: with full hand may he give to us. May Dhātar grant the worshipper henceforth imperishable life.

अध्याय ७

श्लोक 17.2

धा॒ता द॑धातु दा॒शुषे॒ प्राचीं॑ जी॒वातु॒क्षि॑ताम्।व॒यं दे॒वस्य॑ धीमहि सुम॒तिं वि॒श्वरा॑धसः

dhātā dadhātu dāśuṣe prācīṃ jīvātukṣitām| vayaṃ devasya dhīmahi sumatiṃ viśvarādhasaḥ

हिन्दी अर्थ

(एषाम्) इन (समासीनानाम् ) निज स्यानों में इक .बेठे हुए सभासदों (वचः) तेज को, (विन्ञानस्) ओर निए्वय को (हन) मे सभापति सवेस्याः) इस सब (संसदः) संसद का (भगिनम्) भागी (कृणु) कर । टचः = तेज, म्रौर विज्ञान है इन ज्ञानियों का निश्चय । सभावति

English

May we obtain the favour of the God who giveth every boon. To him may Dhātar grant all kinds of blessings who, craving children, serves him in his dwelling.

अध्याय ७

श्लोक 17.3

धा॒ता विश्वा॒ वार्या॑ दधातु प्र॒जाका॑माय दा॒शुषे॑ दुरो॒णे।तस्मै॑ दे॒वाअ॒मृतं॒ सं व्य॑यन्तु॒ विश्वे॑ दे॒वा अदि॑तिः स॒जोषाः॑

dhātā viśvā vāryā dadhātu prajākāmāya dāśuṣe duroṇe| tasmai devāamṛtaṃ saṃ vyayantu viśve devā aditiḥ sajoṣāḥ

हिन्दी अर्थ

सम्मत-परामशे कोर स्वीकार करूगा। प्रतः इस संसदका मुभे भागी २० प्रथवेवेद-माष्य का० ७ । प्रनु° १। सू १४ प्रस्तुत विषय से परे गया हआ है, पराडमूख हश्रा-हुजा हैः या (यद् इह वाइहवा) जो इधर-उधर कै विषय के साथ (बद्धम्) तंयामसि) मै सभापति तथा मन्त्रीगण लौटाते है, ताकि (वः) तुम्हारा समूदित (मनः) मन (मयि) मु सभापति द्वारा प्रस्तावित विषय में

English

Him may the Gods invest with life eternal, yea, all the Gods and Aditi accordant. May this our gift please Savitar, Rāti, Dhātar, Prajāpati, and

अध्याय ७

श्लोक 17.4

धा॒ता रा॒तिः स॑वि॒तेदं जु॑षन्तां प्र॒जाप॑तिर्नि॒धिप॑तिर्नो अ॒ग्निः ।त्वष्टा॒ विष्णुः॑ प्र॒जया॑ संररा॒णो यज॑मानाय॒ द्रवि॑णं दधातु

dhātā rātiḥ savitedaṃ juṣantāṃ prajāpatirnidhipatirno agniḥ | tvaṣṭā viṣṇuḥ prajayā saṃrarāṇo yajamānāya draviṇaṃ dadhātu

हिन्दी अर्थ

ताराग्नों के (तेजांसि) तेजो दीप्तियो का (म्राददे) अपहरण करतार, पसाम्, च) द्वेष करते हुए पुरुषों के (वच॑ः) प्रभावविशेष का (्राददे) मै सभापति भमिप्रेत हो, ग्रौर सभा-समिति के संसदं मे के शासकदल के का० ७। अनु० २) सू० १५ अथवेवेद-भाष्य २१

English

Agni Lord of Treasures. May Tvashtar, Vishnu, blessing him with children, give store ot riches to the sacrificer.

अध्याय ७

श्लोक 18.1

दवृष्टिः।१-२ अथर्वा।पृथिवि, पर्जन्यः।१ चतुष्पदा भुरिगुष्णिक्, २ त्रिष्टुप्।प्र न॑भस्व पृथिवि भि॒न्द्धी॒३दं दि॒व्यं नभः॑ ।उ॒द्नो दि॒व्यस्य॑ नो धात॒रीशा॑नो॒ वि ष्या॒ दृति॑म्

davṛṣṭiḥ| 1-2 atharvā| pṛthivi, parjanyaḥ| 1 catuṣpadā bhuriguṣṇik, 2 triṣṭup| pra nabhasva pṛthivi bhinddhī3daṃ divyaṃ nabhaḥ | udno divyasya no dhātarīśāno vi ṣyā dṛtim

हिन्दी अर्थ

दष करने वालों के (वर्चः) प्रभावविशेष का (भ दद्म म्रपहूरण करता हूः सोए हृं के वर्च॑स् का ग्रपहरण करता है) के अधिवेशन मे जति हृए सभापति का निर्देश हृभा है । श्रथवा इन दोनों (सूक्त १३।३) । मन्त्र मे यह भी दर्शाया है कि सूय के उदय-काल मे सोए

English

A prayer for rain Burst open, Prithvi, and cleave asunder this celestial cloud. Untie, O Dhātar—for thou canst—the bottle of the breast of heaven.

अध्याय ७

श्लोक 18.2

न घ्रंस्त॑ताप॒ न हि॒मो ज॑घान॒ प्र न॑भतां पृथि॒वी जी॒रदा॑नुः ।आप॑श्चिदस्मै घृ॒तमित् क्ष॑रन्ति॒ यत्र॒ सोमः॒ सद॒मित् तत्र॑ भ॒द्रम्

na ghraṃstatāpa na himo jaghāna pra nabhatāṃ pṛthivī jīradānuḥ | āpaścidasmai ghṛtamit kṣaranti yatra somaḥ sadamit tatra bhadram

हिन्दी अर्थ

सप्तम काण्ड का प्रथम अनुवाक समाप्त अभि त्यं देवं संठितारमोण्यो: कविक्रतुम् । (ओण्योः) लोक ग्रौर पृथिवीलोकं के (सवितारम्) उत्पादक, (कवि- २२ अयर्ववेद-भाष्य का० ७1 अनु० २) सू० १५

English

Let not the Sun’s heat burn, nor cold destroy her. Let Earth with all her quickening drops burst open. Even for her the waters flow, and fatness: where Soma is even there is bliss for ever.

अध्याय ७

श्लोक 19.1

प्रजाः।१ ब्रह्मा।प्रजापतिः।जगती।प्र॒जाप॑तिर्जनयति प्र॒जा इ॒मा धा॒ता द॑धातु सुमन॒स्यमा॑नः ।सं॒जा॒ना॒नाः संम॑नसः॒ सयो॑नयो॒ मयि॑ पु॒ष्टं पु॑ष्ट॒पति॑र्दधातु

prajāḥ| 1 brahmā| prajāpatiḥ| jagatī| prajāpatirjanayati prajā imā dhātā dadhātu sumanasyamānaḥ | saṃjānānāḥ saṃmanasaḥ sayonayo mayi puṣṭaṃ puṣṭapatirdadhātu

हिन्दी अर्थ

परमेश्वर कवि है । यथा “कविर्मनीषी (यजु० ४०।८); तथा परमेश्वरं (यस्य) जिस कौ (सवीमनि) प्रेरणा में (अमतिः) व्यापन शीला पाणिः ) सूवणमय हाथों वाले सूयं के सदृश जो मानो निज हाथोंद्रारा है, वह ही सुवण प्रादि धनं प्रदान कर हमे सुषवी कररहादहै। “करपात्'५;

English

A prayer for prosperity Prajapati engenders earthly creatures: may the benevolent Ordainer form them,

अध्याय ७

श्लोक 20.1

अनुमतिः।१-६ अथर्वा।अनुमतिः।१-२ अनुष्टुप्, ३ त्रिष्टुप्, ४ भुरिक्, ५ जगती ६ अतिशाक्वरीगर्भा जगती।अन्व॒द्य नोऽनु॑मतिर्य॒ज्ञं दे॒वेषु॑ मन्यताम्।अ॒ग्निश्च॑ हव्य॒वाह॑नो॒ भव॑तां दा॒शुषे॒ मम॑

anumatiḥ| 1-6 atharvā| anumatiḥ| 1-2 anuṣṭup, 3 triṣṭup, 4 bhurik, 5 jagatī 6 atiśākvarīgarbhā jagatī| anvadya no'numatiryajñaṃ deveṣu manyatām| agniśca havyavāhano bhavatāṃ dāśuṣe mama

हिन्दी अर्थ

का० ७। अनु० र् । सु० १६ अ्रथवेवेद-भाष्य २३ को श्रेष्ठ म्रतिफल मिल सकते हँ । उन पत्रों के पालन-पोषण कं लिये गा आदि प्रभूत पशुओं की प्राप्ति भी प्राति की गई दहै। वरिमा ६८ तां सवितः सत्यसंवां ख चित्रामाहं शरणे मति विददवांराम् । स्वीकरणीया (तां सुमतिम्) उस उत्तम-मति की (अहम्) से (अववृणे)

English

Having one common womb, and mind, and spirit. He who is. Lord of Plenty give me plenty! A prayer for prosperity and happiness

अध्याय ७

श्लोक 20.2

अन्विद॑नुमते॒ त्वं मंस॑से॒ शं च॑ नस्कृधि ।जुष॒स्व॑ ह॒व्यमाहु॑तं प्र॒जां दे॑वि ररास्व नः

anvidanumate tvaṃ maṃsase śaṃ ca naskṛdhi | juṣasva havyamāhutaṃ prajāṃ devi rarāsva naḥ

हिन्दी अर्थ

(सहखधाराभ्) हजारों को धारण करमे वाली या हजारों धाराभो ने (भगाय) निज सौभाग्य कं लिये (अदहत्) दोहा है । अदहत् = वतमाने २४ मथर्ववेद-माष्यं का० ७ । भ्रनु० २ । सू० १७ के स्थान में पयसा महीं गाम्" पाठहै। इससे भीन्ञात होताहं कि

English

Anumati approve to-day our sacrifice among the Gods! May Agni bear mine offerings away for me the worshipper. Do thou, Anumati! approve, and grant us health and happiness.

अध्याय ७

श्लोक 20.3

अनु॑ मन्यतामनु॒मन्य॑मानः प्र॒जाव॑न्तं र॒यिमक्षी॑यमाणम्।तस्य॑ व॒यं हेड॑सि॒ मापि॑ भूम सुमृडी॒के अ॑स्य सुम॒तौ स्या॑म

anu manyatāmanumanyamānaḥ prajāvantaṃ rayimakṣīyamāṇam| tasya vayaṃ heḍasi māpi bhūma sumṛḍīke asya sumatau syāma

हिन्दी अर्थ

वह्गौह वेदवाक्, वेदवाणी । गौः वाडनाम (निषं० १११) । वेदवाक् है, सुमति दुग प्रदान द्वारा हजारों का धारण-पोषण करती हं । “दृह धातु सितं चित् सतरं त रिंशापि विशं एनमनु पदन्तु देवाः ॥१॥ उत्पादक परमेश्वर ! (एनम) इ कण्व कौ (वधय) वृद्धि कर, (एनम्) इसे (महते सौमगाय) महा-सौभाग्य के लिये (ज्योतय) ज्ञान-

English

Accept the offered sacrifice, and, Goddess, give us progeny. May he approving in return accord us wealth inexhaustible with store of children. Never may we be subject to his anger, but rest in his benevo- lence and mercy.

अध्याय ७

श्लोक 20.4

यत् ते॒ नाम॑ सु॒हवं॑ सुप्रणी॒तेऽनु॑मते॒ अनु॑मतं सु॒दानु॑ ।तेना॑ नो य॒ज्ञं पि॑पृहि विश्ववारे र॒यिं नो॑ धेहि सुभगे सु॒वीर॑म्

yat te nāma suhavaṃ supraṇīte'numate anumataṃ sudānu | tenā no yajñaṃ pipṛhi viśvavāre rayiṃ no dhehi subhage suvīram

हिन्दी अर्थ

अनुक्लरूप में प्राप्त कर, मर्दतु) इषित हों । से कण्व (१६१) वेदस्वाध्यायी लवि होता है । “संशिशाधि"' पदशो तन्- करणे” (दिवादिः) का लोट्लैकार मेसरूपहं। तनूकरण का अभिप्राय बरह्मचारी को देने के लिये देव लोग उसकी गोर मिलकर जाते है । का० ७.1 श्रनुर २1 सु०..१८ अथवर द-भाष्य १५

English

Thy name is easy to invoke, good leader! approved, Anumati and rich in bounty. Source of all bonds! fill up therewith our worship, and, Blest One! grant us wealth with goodly heroes.

अध्याय ७

श्लोक 20.5

एमं य॒ज्ञमनु॑मतिर्जगाम सुक्षे॒त्रता॑यै सुवी॒रता॑यै सुजा॑तम्।भ॒द्रा ह्यऽस्याः॒ प्रम॑तिर्ब॒भूव॒ सेमं य॒ज्ञम॑वतु दे॒वगो॑पा

emaṃ yajñamanumatirjagāma sukṣetratāyai suvīratāyai sujātam| bhadrā hya'syāḥ pramatirbabhūva semaṃ yajñamavatu devagopā

हिन्दी अर्थ

(१-४) भृगुः । सविता, भरादि बहुदेवता । भ्रवृष्टुभ्; ९ त्रिपवा भाषो (धाता) धारण पोषण करने वाला (ईशानः) ईश्वर (नः) हमारे स्वामी है (सः) वह् (पूर्णेन) भरपूर धन के प्रदान के साथ-साथ (नः) हमे (यच्छतु) उपरामवृत्ति भी प्रदान करे। . उपराम वृत्ति भी दे, ताकि उस धन के होते हम उसमें लिप्तन हौ जाय

English

Anumati hath come to this our worship well-formed to give good lands and valiant heroes: For her kind care hath blessed us. God-protected, may she assist the sacrifice we offer. Anumati became this All, whatever standeth or walketh, every- thing that moveth.

अध्याय ७

श्लोक 20.6

अनु॑मतिः॒ सर्व॑मि॒दं ब॑भूव॒ यत् तिष्ठ॑ति॒ चर॑ति॒ यदु॑ च॒ विश्व॒मेज॑ति ।तस्या॑स्ते देवि सुम॒तौ स्या॒मानु॑मते॒ अनु॒ हि मंस॑से नः

anumatiḥ sarvamidaṃ babhūva yat tiṣṭhati carati yadu ca viśvamejati | tasyāste devi sumatau syāmānumate anu hi maṃsase naḥ

हिन्दी अर्थ

वय देवस्थ धीमहि सुमति विषश्वराधसः ॥२॥ (घाता) धारण-पोषण करने वला परमेश्वर, (दाशुषे) दन करने (जीवातुम्) जीवनकारिणी. सम्पत्ति (दधातु) दे, या उसे परिपुष्ट करता रहे । (वयम्) हम (विश्वराधसः) सब को धन देने वाले (देवस्य) प्रर मेश्वर की (सुमतिम्) इस सुमति का (धीमहि) ध्यान करं ।

English

May we enjoy thy gracious love, O Goddess. Regard us, O Anu- mati, with favour. A funeral stanza With prayer come all together to the Lord of Heaven: he is the peerless one, far-reaching,

अध्याय ७

श्लोक 21.1

एको विभुः।१ ब्रह्म।आत्मा।शक्वरी विराड्-गर्भा जगती।स॒मेत॒ विश्वे॒ वच॑सा॒ पतिं॑ दि॒व एको॑ वि॒भूरति॑थि॒र्जना॑नाम्।स पू॒र्व्यो नूत॑नमा॒विवा॑सत् तं व॑र्त॒निरनु॑ वावृत॒ एक॒मित् पु॒रु

eko vibhuḥ| 1 brahma| ātmā| śakvarī virāḍ-garbhā jagatī| sameta viśve vacasā patiṃ diva eko vibhūratithirjanānām| sa pūrvyo nūtanamāvivāsat taṃ vartaniranu vāvṛta ekamit puru

हिन्दी अर्थ

-है। दाशुषे" द्वारा भी'घन प्राप्त करने वाले कौ दोन भवना द्वारा उपराम- वृत्ति को सूचित किया है यह उपराम वृत्ति सुमति है, जिसे किं “विश्व राधस्” ने प्रदानः किया है,--इसे हमे सदा ध्यान म रखना चाहिए । राघः . धाता विश्वा वायीं दधातु प्रजाकामाय दाशुष दुरोणे व तस्मै देवा अमृतं सं, व्य॑यन्तु विद्व देवा अदितिः स॒नोषाः ॥३॥ २६ रथववेद-भाष्य का० ७। श्रनु० २। सू० १८ (भ्रजाकामाय) प्रजा की कामना वाले, ( दाशुषे) दानवृत्तिवाले के लिये (दुरोणे) उस के गृह मे (धाता) धारण-पोषण करने वाला परमेश्वर

English

guest of men. He, God of ancient time, hath gained a recent thrall; to him alone is turned the path which all must tread.

अध्याय ७

श्लोक 22.1

ज्योतिः।१-२ ब्रह्मा।ब्रध्नः।१ द्विपदा एकावसाना विराड्-गायत्री. २ त्रिपदा अनुष्टुप्।अ॒यं स॒हस्र॒मा नो॑ दृ॒शे क॑वी॒नां म॒तिर्ज्योति॒र्विध॑र्मणि

jyotiḥ| 1-2 brahmā| bradhnaḥ| 1 dvipadā ekāvasānā virāḍ-gāyatrī. 2 tripadā anuṣṭup| ayaṃ sahasramā no dṛśe kavīnāṃ matirjyotirvidharmaṇi

हिन्दी अर्थ

देव, तथा (सजोषाः) प्रेममयी (श्रदितिः ) अदीना पारमेदवरी देवमाता ४ प्रजा की कामना वाते गृहुस्थी को भी दान देना चाहिए । इस दान , मोक्षसुख की प्राप्ति मे सब देव भौर परमेष्वर उसके सहायक हो जाते है । पना । अयत् एसे गृहस्थी को मोक्षसुख के आवरण द्वारा सब देव ओर अदिति मिलकर दढापदेते है, ढांप कर सुरक्षित कर देते हँ जिससे लोभादि वृत्तियों की मार से वह बचा रहता है ।

English

To Savitar, or Yama invested with Savitar’s attributes Unto a thousand sages he hath given sight: thought, light is he in ranging all. The Bright One hath sent forth the Dawns, a closely gathered band,

अध्याय ७

श्लोक 22.2

ब्र॒ध्नः स॒मीची॑रु॒षसः॒ समै॑रयन्।अ॒रे॒पसः॒ सचे॑तसः॒ स्वस॑रे मन्यु॒मत्त॑माश्चि॒ते गोः

bradhnaḥ samīcīruṣasaḥ samairayan| arepasaḥ sacetasaḥ svasare manyumattamāścite goḥ

हिन्दी अर्थ

सेवन करं, निदेय पूवक इस धन का उपयोग न करे; (श्रग्निः ) मौर स्वामी राजा (नः) हम प्रनाजनों का (निधिपतिः) निधि रक्षक हो; धामिक कर्मो का अधिकारी (प्रजया संरराणः) प्रजा के साय रममाण हुआ, घाता-जीवनकारिणी अन्न सम्पत्ति प्रदाता (मथवं० ७। १८१) ।

English

Immaculate, unanimous, brightly refulgent in their homes. A charm to banish fiends and troubles 105

अध्याय ७

श्लोक 23.1

दुःस्वप्ननाशनम्।१ यमः।दुःस्वप्ननाशनम्।अनुष्टुप्।दौष्व॑प्न्यं दौर्जी॑वित्यं॒ रक्षो॑ अ॒भ्वऽमरा॒य्यः ।दु॒र्णाम्नीः॒ सर्वा॑ दु॒र्वाच॒स्ता अ॒स्मन्ना॑शयामसि

duḥsvapnanāśanam| 1 yamaḥ| duḥsvapnanāśanam| anuṣṭup| dauṣvapnyaṃ daurjīvityaṃ rakṣo abhva'marāyyaḥ | durṇāmnīḥ sarvā durvācastā asmannāśayāmasi

हिन्दी अर्थ

का०७। भ्रनु० २1 सू० १९ अथवेवेद-माष्य (घातः) है धारण-पोषभ करने वाले (ईशानः) अधीश्वर ! तू (दिव्थंस्य उन्दः) दिव्य उदक की (दृतिम्) चमद़ेकी थैली के पदृण मेघरूपी थैली को (नः) हमारे लिये (ग्रा विष्य) खोल द् । भेदन करता है । इस से दिन्य उदक प्रवाहित होने लगता है जैसे कि च्मंकी ली के फटने पर उस से उदक प्रवाहित होने लगता है । दृतिः =1.व्वलः पृथिवी को (घ्नन्) ग्रीष्म काल ने (न तताप) नहीं तपाय। (हिमः) हेमन्त ऋतु मेँ (न जघान) न इस का हनन क्रिया है, (जीरदानुः) जीवन॑-

English

The fearful dream, and indigence, the monster, the malignant hags. All female fiends of evil name and wicked tongue we drive afar. A prayer for riches

अध्याय ७

श्लोक 24.1

सविता।१ ब्रह्मा।इन्द्रः, अग्निः, विश्वे देवाः, मरुतः, सविता, प्रजापतिः अनुमतिः।त्रिष्टुप्।यन्न॒ इन्द्रो॒ अख॑न॒द् यद॒ग्निर्विश्वे॑ दे॒वा म॒रुतो॒ यत् स्व॒र्काः ।तद॒स्मभ्यं॑ सवि॒ता स॒त्यध॑र्मा प्र॒जाप॑ति॒रनु॑मति॒र्नि य॑च्छात्

savitā| 1 brahmā| indraḥ, agniḥ, viśve devāḥ, marutaḥ, savitā, prajāpatiḥ anumatiḥ| triṣṭup| yanna indro akhanad yadagnirviśve devā maruto yat svarkāḥ | tadasmabhyaṃ savitā satyadharmā prajāpatiranumatirni yacchāt

हिन्दी अर्थ

जल भी (अस्मे) इस पृथिवी कं स्वामी कं लिये (घृतम् इत् धृत ही २८ ्र्थववेद-भाष्य का०-७। श्रनु० २। सू० २०" अर्थात् वर्फीली-कऋतु डस का हनन करती है तव पृथिवी जीवनीय अन्तादि का प्रदान करती है 1 परन्तु वर्षा ऋतु. जब जल प्रदान करती है तब मानो वह जल नहीं प्रदान करती श्रपितु जलरूप मे घृतादि पदार्थं प्रदान कर रही होती है । जहां जल होता है वहां ओषधियां, वनस्पत्तियां प्रभूत मात्रा मे

English

What treasure hath been dug for us by Indra, by Agni, Visve- devas, tuneful Maruts, On us may Savitar whose laws are faithful, Prajāpati, and Heavenly Grace bestow it.

अध्याय ७

श्लोक 25.1

विष्णुः।१-२ मेधातिथिः।विष्णुः, वरुणः।त्रिष्टुप्।ययो॒रोज॑सा स्कभि॒ता रजां॑सि॒ यौ वीर्यौऽर्वी॒रत॑मा॒ शवि॑ष्ठा ।यौ पत्ये॑ते॒ अप्र॑तीतौ॒ सहो॑भि॒र्विष्णु॑मग॒न् वरु॑णं पू॒र्वहू॑तिः

viṣṇuḥ| 1-2 medhātithiḥ| viṣṇuḥ, varuṇaḥ| triṣṭup| yayorojasā skabhitā rajāṃsi yau vīryau'rvīratamā śaviṣṭhā | yau patyete apratītau sahobhirviṣṇumagan varuṇaṃ pūrvahūtiḥ

हिन्दी अर्थ

का अभिप्राय है कि हेमन्त ऋतु मे बफं के कारण श्रतिशीत होने से ओष-' विया, वनस्पतियां मर्म जाती हँ यह पृथिवी का हनन है 1 को (जनयति) उत्पन्न करता है, (घाता) घारण् करने वाला (सुमनस्य- मानः) सुप्रसन्न मन वाला होकर (दधातु) प्रजाजो का धारण-पोषण करे 1 क्षा अधिकारी जो कि प्रजाजनो. के -धारण-प्रोषणः का निरीक्षक है । “सयो- नयः'' द्वारा एक-राष्टृ-गृह.के प्रजाजन अभिप्रेत हँ, ' “योनिग हनाम" (निषं° ३1४ 1 "पुष्टम्" दवारा पृष्ट अन्न के “करांश'' का वणेन हुमा है । “कंश

English

Praise of Vishnu and Varuna The early morning prayer hath come to Vishnu and Varuna, Lords through might, whom none hath equalled,

अध्याय ७

श्लोक 25.2

यस्ये॒दं प्र॒दिशि॒ यद् वि॒रोच॑ते॒ प्र चान॑ति॒ वि च॒ चष्टे॒ शची॑भिः ।पु॒रा दे॒वस्य॒ धर्म॑णा॒ सहो॑भि॒र्विष्णु॑मग॒न् वरु॑णं पू॒र्वहू॑तिः

yasyedaṃ pradiśi yad virocate pra cānati vi ca caṣṭe śacībhiḥ | purā devasya dharmaṇā sahobhirviṣṇumagan varuṇaṃ pūrvahūtiḥ

हिन्दी अर्थ

१७।१९।२॥ मे “जीरदानुः” द्वारा, जीवनीय ग्रन्नादिका वणेन हृश्रादहैः का० ७1 अनुं० २। सुर २१. श्रथवेवेद-माष्यः स (अय) ्राज अर्थात् प्रतिदिन (अनुमतिः ) श्रनुकल मति 0 पटली अग्नि (दाशुषे) भूफ दाता के लिये (हव्यवाहनः ) हव्यो का वहन करनेवाली हो, (भवताम्) इस प्रकार से दोनो मेरे यज्ञ को सफ़ल करने वाले

English

Gods by whose power the realms of air were stablished, strongest and most heroic in their vigour. The early prayer hath ever come to Vishnu and Varuna by that

अध्याय ७

श्लोक 26.1

विष्णुः।१-८ मेधातिथिः।विष्णुः।१,८ त्रिष्टुप्, २ त्रिपदा विराड्-गायत्री, ३ त्र्यवसाना षट्-पदा विराट् शक्वरी, ४-७ गायत्री।विष्णो॒र्नु कं॒ प्रा वो॑चं वी॒र्याऽणि॒ यः पार्थि॑वानि विम॒मे रजां॑सि ।यो अस्क॑भाय॒दुत्त॑रं स॒धस्थं॑ विचक्रमा॒णस्त्रे॒धोरु॑गा॒यः

viṣṇuḥ| 1-8 medhātithiḥ| viṣṇuḥ| 1,8 triṣṭup, 2 tripadā virāḍ-gāyatrī, 3 tryavasānā ṣaṭ-padā virāṭ śakvarī, 4-7 gāyatrī| viṣṇornu kaṃ prā vocaṃ vīryā'ṇi yaḥ pārthivāni vimame rajāṃsi | yo askabhāyaduttaraṃ sadhasthaṃ vicakramāṇastredhorugāyaḥ

हिन्दी अर्थ

नः गृहस्थ के सदस्य । अनुमति है पति-पत्नी ' के नेमे अनुः अन्विद॑तुमते त्वं मंससे शं च॑ नस्कृधि । (श्रनुमते) है अनुकूल मति वाली पली ! (त्वम्) वर (अनुमंसेसे त् अनुक्ल रूपता को ही अनुकूलरूप मानती है (च) ग्रोर् इस प्रकार (नः) हमे तू (शम्) सुख-शान्ति (कृधि) प्रदान कर । (देवि) है देवि ! . पत्नी ।. (आहृतम्) आहुतिरूप मं ्राहुत हई (हव्यम्) वीर्यरूपी हवि की (जुष-

English

God’s high power and statute. In whose control is all this world that shineth, all that hath powers to see and all that breatheth.

अध्याय ७

श्लोक 26.2

प्र तद् विष्णु॑ स्तवते वी॒र्याऽणि मृ॒गो न भी॒मः कु॑च॒रो गि॑रि॒ष्ठाः ।प॒रा॒वत॒ आ ज॑गम्या॒त् पर॑स्याः

pra tad viṣṇu stavate vīryā'ṇi mṛgo na bhīmaḥ kucaro giriṣṭhāḥ | parāvata ā jagamyāt parasyāḥ

हिन्दी अर्थ

२०५ अथवकेद-माष्य का० ७.1 श्रनु० २। सु० २१ (५ । निरुक्त मे भी “अनुमति प्रादि को देवपत्नीरूप में माना है, न किं चमा कौ कलाविशेषं । यथा “अनुमतिः राकेति देवपल्यौ" इति नरुक्तः । “पौणंमास्यौ” इति याज्ञिकाः (११।३। ३०) । तस्य व॒यं हैड॑सि माऽपिं भूम घुण्दीके अस घमो स्याम ॥२॥ उस पति कं (हेडसि) कोधमे (अपि) भी (वयम्) हम गृहवासी (मा

English

Praise of Vishnu I will declare the mighty deeds of Vishnu, of him who measured out the earthly regions, Who propped the highest place of congregation, thrice setting down his footstep, widely

अध्याय ७

श्लोक 26.3

यस्यो॒रुषु॑ त्रि॒षु वि॒क्रम॑नेष्वधिक्षि॒यन्ति॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॑ ।उ॒रु वि॑ष्णो॒ वि क्र॑मस्वो॒रु क्षया॑य नस्कृधि ।घृ॒तं घृ॑तयोने पिब॒ प्रप्र॑ य॒ज्ञप॑तिं तिर

yasyoruṣu triṣu vikramaneṣvadhikṣiyanti bhuvanāni viśvā | uru viṣṇo vi kramasvoru kṣayāya naskṛdhi | ghṛtaṃ ghṛtayone piba prapra yajñapatiṃ tira

हिन्दी अर्थ

म, तया इस कौ (सुमतौ) सुमति मे ( स्याम) हम हों । ॥ म बहुत भेद पाया जता है । इस लिये श्रथ अनिर्चित है । अभिमत है, (सुदानु) भौर सुखदाय है, (तेन) उस नाम द्वारा (न यज्ञम्) रयिम्) उत्तम वीर सन्तानरूपी घन (धेहि) प्रदान कर । ˆ ° 4

English

striding. Loud boast doth Vishnu make of this achievement, like some wild beast, dread, prowling, mountain-roaming.

अध्याय ७

श्लोक 26.4

इ॒दं विष्णु॒र्वि च॑क्रमे त्रे॒धा नि द॑धे प॒दा।समू॑ढमस्य पांसु॒रे

idaṃ viṣṇurvi cakrame tredhā ni dadhe padā| samūḍhamasya pāṃsure

हिन्दी अर्थ

पतनी का नाम है अनुमति । वह् पति के श्रनुकूला वेमनस्था नही होती । यह् नाम सुगमता पूवक गाह्वान 0 ) प्रणय वाली है प्रेममयी है यह् नाम सवनुमत है, श्रौर सुखदायक ५ सब गृहस्थियो द्वारा वरणीय है, ग्रहण योग्य है सभौ चाहतेहैंकि धनको । का० ७1 अनु० २। सु २१ अथरवेवेदमाष्य २१ पलियां अनुमतिवाली हों, पतियों के अनुकूल मतिययो बाली हों । एसी

English

May he approach us from the farthest distance. Thou within whose three wide-extended paces all worlds and creatures have their habitation, Drink oil, thou homed in oil! promote the sacrificer more and more.

अध्याय ७

श्लोक 26.5

त्रीणि॑ प॒दा वि च॑क्रमे॒ विष्णु॑र्गो॒पा अदा॑भ्यः ।इ॒तो धर्मा॑णि धा॒रय॑न्

trīṇi padā vi cakrame viṣṇurgopā adābhyaḥ | ito dharmāṇi dhārayan

हिन्दी अर्थ

मद्रा स्याः पथतिरबेभूव सेम यष्ठम॑वतु देवगोपा ॥५॥ पन के लिये ओौर उत्तम वीरता के लिये (सुजातम्) उत्तम विवाह्-विधि गे पेदाहु्रा है। (अस्याः) इस श्रनुमति की (भद्रा) सुखप्रदा तथा कल्याणकारी (प्रमतिः) शोभना मति (हि) निश्चय (बभूव) प्रकट हुई है । (सा) वह् श्रनुमति पत्नी (देवगोपा) पति के माता, पिता आदि देवों व्रारा तथा उन शरीरो में वीरता प्रदान करने कं लिये । अनुमति-पत्नी केयेदो तीयते'" (गीता १३।१) । शरीरो को सृक्षेत्र बना कर उनमें सद्गुणरूपी बीज नोने चाहिए, भौर वीरत) की भावनाएं भरनी चाहिए । देव है विवाहित भ्रनुमति के ए्वशुर आदि ।

English

Through all this world strode Vishnu: thrice his foot he planted, and the whole Was gathered in his footstep’s dust. Vishnu the guardian, he whom none deceiveth, made three steps, thenceforth.

अध्याय ७

श्लोक 26.6

विष्णोः॒ कर्मा॑णि पश्यत॒ यतो॑ व्र॒तानि॑ पस्प॒शे।इन्द्र॑स्य॒ युज्यः॒ सखा॑

viṣṇoḥ karmāṇi paśyata yato vratāni paspaśe| indrasya yujyaḥ sakhā

हिन्दी अर्थ

तस्यास्ते देवि समतौ स्यामानुंमते अनु हि मंससे नः ॥६॥ (यत् तिष्ठति) जो स्थित है, (चरति) चलता है, (यद्, उ, च) ओर (बभूवह । (देवि) है परमेश्वर-मातुदेव ! › (तैः सेरी (तस्याः) उस (सुमतौ) सुमति में (स्याम) हम हों, या रहें । (श्रनुमते) है अनुमति मातः ! (नः) हमे (अनु मंससे) श्रपनी अनुकूतामेमान। माता । वह किसी के प्रतिकल नहीं है, ग्रपितु स्के प्रति अनुकूलरूप मे

English

Establishing these high decrees. Look ye on Vishnu’s works, whereby the friend of Indra, close- allied, Hath let his holy ways be seen.

अध्याय ७

श्लोक 26.7

तद् विष्णोः॑ पर॒मं प॒दं सदा॑ पश्यन्ति सू॒रयः॑ ।दि॒वीऽव॒ चक्षु॒रात॑तम्

tad viṣṇoḥ paramaṃ padaṃ sadā paśyanti sūrayaḥ | divī'va cakṣurātatam

हिन्दी अर्थ

“देर .श्भरदवेद-भाष्य का०.७ 1 अनु०. २1 सु० २२ म प्रकट होती है, यथा “अत्मा वे पुक्रामासि" (निरुक्त ३।१।४ ), वसे “सुमति में रहने की प्राथेना हुई हे, या इच्छा प्रकट हुई है । साथ ही यह -कहयहैफि हम तेरी अनुकूलतामें वतमान र्ह-यह् तु मान, ॥ हमारी सदा उन्नति कर । एजति = एज दीप्तौ, तया एज् ' कम्पने, दोनों धातुए वादः) । कम्पित दोना = गतिशील होना । मंससे लेट् लकार समेत विश्वे वच॑सा पतिं दिव एको विभूरतिंथिमेनानाम् ।

English

The princes evermore behold that loftiest place where Vishnu is, Like an extended eye in heaven, From heaven, O Vishnu, or from earth, O Vishnu, or from the great far-spreading air’s mid region,

अध्याय ७

श्लोक 26.8

दि॒वो वि॑ष्ण उ॒त वा॑ पृथि॒व्या म॒हो वि॑ष्ण उ॒रोर॒न्तरि॑क्षात्।हस्तौ॑ पृणस्व ब॒हुभि॑र्व॒सव्यै॑रा॒प्रय॑च्छ॒ दक्षि॑णा॒दोत स॒व्यात्

divo viṣṇa uta vā pṛthivyā maho viṣṇa urorantarikṣāt| hastau pṛṇasva bahubhirvasavyairāprayaccha dakṣiṇādota savyāt

हिन्दी अर्थ

९४ ४ ( विश्वे ) है सव लोगो 4. (समेत) परस्पर इकट्रं हो, (वचसा) करो, जो परमेश्वर किः ( एकः ) एक है, (विभूः) सर्वव्यापक है, श्रौर (जनानाम्) उपासक जनों का । आ कर निवास करता रहता है । (तम्, एकम्, इत्, अनु) उस एक परमेश्वरं । के ही अनुकूल हुई (वतेनिः) पृथिवी (पुर) बार-बार (वावृते) वृत्ताकार

English

Fill both thy hands full of abundant treasures, and from the right and left bestow them freely. A prayer to Ida, Goddess of devotion May Idā with her statute dwell beside us, she in whose place the pious purge and cleanse

अध्याय ७

श्लोक 27.1

इडा।१ मेधातिथिः।इडा।त्रिष्टुप्।इडै॒वास्मां अनु॑ वस्तां व्र॒तेन॒ यस्याः॑ प॒दे पु॒नते॑ देव॒यन्तः॑ ।घृ॒तप॑दी॒ शक्व॑री॒ सोम॑पृ॒ष्ठोप॑ य॑ज्ञम॑स्थित वैश्वदे॒वी

iḍā| 1 medhātithiḥ| iḍā| triṣṭup| iḍaivāsmāṃ anu vastāṃ vratena yasyāḥ pade punate devayantaḥ | ghṛtapadī śakvarī somapṛṣṭhopa yajñamasthita vaiśvadevī

हिन्दी अर्थ

अत्िथिः; जैसे गृहस्थो मे अतिथि कभी-कभी आतादहै, व॑से उपासक ,: जनों से भी परमेश्वर कभी-कभी प्रकट होता है । १. माता-के गृण जते सन्तति मेँप्रकृट होते है, वैसे परदमेवर-माता के गुण का० ७। अनुं° २। स्० २३ अथवंवेद-भाष्य ३३

English

them. She, mighty, Soma-decked, whose foot drops fatness, meet for All-Gods, hath come to aid our worship.

अध्याय ७

श्लोक 28.1

स्वस्ति।मेधातिथिः।वेदः।त्रिष्टुप्।वे॒दः स्व॒स्तिर्द्रु॑घ॒णः स्व॒स्तिः प॑र॒शुर्वेदिः॑ पर॒शुर्नः॑ स्व॒स्ति।ह॒वि॒ष्कृतो॑ य॒ज्ञिया॑ य॒ज्ञका॑मा॒स्ते दे॒वासो॑ य॒ज्ञमि॒मं जु॑षन्ताम्

svasti| medhātithiḥ| vedaḥ| triṣṭup| vedaḥ svastirdrughaṇaḥ svastiḥ paraśurvediḥ paraśurnaḥ svasti| haviṣkṛto yajñiyā yajñakāmāste devāso yajñamimaṃ juṣantām

हिन्दी अर्थ

(अयम्) यह परमेश्वर (कवीनाम्, मतिः) कवियों कौ मतिरूप है, ओर परमेश्वर कवि है, वेद उसकेकाव्यरहै, वह् श्रादि कवि है, उससे पूवं कोई कवि नदीं हभ, कविता करने की मति उसी ने दी, अतः वहु कविके चमक्रता है । परन्तु वह है एकज्योतिरूप ही । “तस्य भासा सवंमिदं कहा है, हम कवियों में वह् पूर्णतया दृष्टिगोचर ही गया है ।

English

Praise of the sacrificial utensils Blest be the Broom, may the Mace bring a blessing, and may the

अध्याय ७

श्लोक 29.1

अग्नाविष्णू।१-२ मेधातिथिः।अग्नाविष्णू।त्रिष्टुप्।अग्ना॑विष्णू॒ महि॒ तद् वां॑ महि॒त्व पा॒थो घृ॒तस्य॒ गुह्य॑स्य॒ नाम॑ ।दमे॑दमे स॒प्त रत्ना॒ दधा॑नौ॒ प्रति॑ वां जि॒ह्वा घृ॒तमा च॑रण्यात्

agnāviṣṇū| 1-2 medhātithiḥ| agnāviṣṇū| triṣṭup| agnāviṣṇū mahi tad vāṃ mahitva pātho ghṛtasya guhyasya nāma | damedame sapta ratnā dadhānau prati vāṃ jihvā ghṛtamā caraṇyāt

हिन्दी अर्थ

(सचेतसः) सचेतं करने वाली (मन्युमत्तमाः) अत्यन्त चमकोली (उषसः) करता भवति हो जाता है, (गोः चिते) जबकि स्तुति वाणियों का चयन कान्तिकर्मा (निघं० २।६) । गोः चिते = गौः वाड् नाम (निषं० १।११) । १, चयन की भावना को ““भपिष्ठो ते नम॒ उक्ति विषेम" द्वारा भी मुचित किथाहै (यजु ४०।१६) ।

English

Altar and the Hatchet bless us. Worshipful Gods, may they accept this worship, lovers of sacri- fice, and sacrificers. To Agni and Vishnu

अध्याय ७

श्लोक 29.2

अग्ना॑विष्णू॒ महि॒ धाम॑ प्रि॒यं॑ वां॑ वी॒थो घृ॒तस्य॒ गुह्या॑ जुषा॒णौ।दमे॑दमे सुष्टु॒त्या वा॑वृधा॒नौ प्रति॑ वां जि॒ह्वा घृ॒तमुच्च॑रण्यात्

agnāviṣṇū mahi dhāma priyaṃ vāṃ vītho ghṛtasya guhyā juṣāṇau| damedame suṣṭutyā vāvṛdhānau prati vāṃ jihvā ghṛtamuccaraṇyāt

हिन्दी अर्थ

२४ अथवेवेद-माष्य का० ७ घ्रनु० २1 सू० २४ स्तुति वाणियों का जब चयन हो जाता है, चित्त में संचय हो जाता है, तब परमेश्वर उषाओं को भेजता है । ये उषाएं परमेश्वर प्राप्ति के पूवेरूप है । श्वेता० उप० (२।११)मं पूर्वरूप निम्नलिखित कंहे हैँ । यथा “नीहारधूमारकर पुरस्सर अथात् पूवरूप दशय। है । योगज विभूति का अभाव (श्रराय्यः) अ्रदान अथति् कजूसी की भावनाणएं सब को (अस्मत्) अपने से (नाशयामसि) हम नष्ट करते है, दूर करते है

English

This is your glorious might, Agni and Vishnu! Ye drink the essence of the mystic butter. Placing in every home seven costly treasures. Let your tongue stretch to take the offered fatness.

अध्याय ७

श्लोक 30.1

अञ्जनम्।१ भृग्वङ्गिराः।द्यावापृथिवी, मित्रः, ब्रह्मणस्पतिः, सविता च ।बृहती।स्वाक्तं॑ मे॒ द्यावा॑पृथि॒वी स्वाक्तं॑ मि॒त्रो अ॑कर॒यम्।स्वाक्तं॑ मे॒ ब्रह्म॑ण॒स्पतिः॒ स्वाक्तं॑ सवि॒ता क॑रत्

añjanam| 1 bhṛgvaṅgirāḥ| dyāvāpṛthivī, mitraḥ, brahmaṇaspatiḥ, savitā ca | bṛhatī| svāktaṃ me dyāvāpṛthivī svāktaṃ mitro akarayam| svāktaṃ me brahmaṇaspatiḥ svāktaṃ savitā karat

हिन्दी अर्थ

वचन । “इको यणचि" द्वारा उकार को वकार । अराय्य,=अ-रा (दाने) + युक् डी + प्रथमा बहुवचन । दुर्वचः असत्य भाषण, कटवचनं परकोय निन्दा वचन आदि । सप्तम काण्ड का द्वितीय अनुवाक समाप्त प्राकृतिक उषाए' तौ केवल सूर्योदय से पूर्वं कुछ काल के लिये ही चमकती हैं 1 का० ७ । श्रनु०.३ । सू० २६९ अथर्वविद-माष्य ३५

English

Ye love the great law, Agni Vishnu! joying, ye feast on mystic essences of butter, Exalted in each house with fair laudation. Let your tongue stretch to take the offered fatness. A charm to be used when the eyes are anointed

अध्याय ७

श्लोक 31.1

शत्रुनाशनम्।१ भृग्वङ्गिराः।इन्द्रः।भुरिक् त्रिष्टुप्।इन्द्रो॒तिभि॑र्बहु॒लाभि॑र्नो अ॒द्य या॑वच्छ्रे॒ष्ठाभि॑र्मघवन्छूर जिन्व ।यो नो॒ द्वेष्ट्यध॑र॒ सस्प॑दीष्ट॒ यमु॑ द्वि॒ष्मस्तमु॑ प्रा॒णो ज॑हातु

śatrunāśanam| 1 bhṛgvaṅgirāḥ| indraḥ| bhurik triṣṭup| indrotibhirbahulābhirno adya yāvacchreṣṭhābhirmaghavanchūra jinva | yo no dveṣṭyadhara saspadīṣṭa yamu dviṣmastamu prāṇo jahātu

हिन्दी अर्थ

(मरुतः) सेनिकों ने खोदा, (तत्) उस सब को--( सविता ) प्रेरक, को (नियच्छात्) नियम पूवेक प्रदान कर दे। वेश्य , विष्वेदेवाः (श ० त्रा° १०।४।१।९) । मरूतः = “देवसेनानामभि यो पत्य॑ते अतीतौ सहो भि विष्णुमगान् वरुणं पुवहंतिः ॥१॥

English

Heaven, Earth, and Mitra here have caused mine eyes to be- anointed well, Savitar, Brāhmanaspati take care that they be duly balmed! A prayer for the overthrow of enemies

अध्याय ७

श्लोक 32.1

दीर्घायुः।१ ब्रह्मा।आयुः।अनुष्टुप्।उप॑ प्रि॒यं पनि॑प्नतं युवा॑नमाहुती॒वृध॑म्।अग॑न्म॒ बिभ्र॑तो॒ नमो॑ दी॒र्घमायुः॑ कृणोतु मे

dīrghāyuḥ| 1 brahmā| āyuḥ| anuṣṭup| upa priyaṃ panipnataṃ yuvānamāhutīvṛdham| aganma bibhrato namo dīrghamāyuḥ kṛṇotu me

हिन्दी अर्थ

(ययोः) जिन दो के (ग्रोजसा) ओज द्वारा (रजांसि) लोक-लोका- शविष्टौ) शक्तिशाली है, ओौर (वीर्यः) शक्तियों दारा (वीरतमा = वीर- ३६ अथववेद-भाष्य का० ७। अनु° ३1 सू० २६ को थाम रहे हैँ यह यथाथं में अप्रतीत हे, अज्ञात" है । ्रगन् = गमेः छान्दसे लुडि च्लेः लुकि “मो नो घातोः” (अष्टा० ८।२। ६४) इति मकारस्य नत्वे

English

Rouse us to-day O Indra, Maghavan, hero, with thy best pos- sible and varied succours, May he who hateth us fall low beneath us, and him whom we detest let life abandon. A prayer to Agni for long life

अध्याय ७

श्लोक 33.1

दीर्घायुः।१ ब्रह्मा।मरुतः, पूषा, बृहसपतिः, अग्निः।पथ्यापङ्क्तिः।सं मा॑ सिञ्चन्तु म॒रुतः॒ सं पू॒षा सं बृह॒स्पतिः॑ ।सं मा॒यम॒ग्निः सि॑ञ्चतु प्र॒जया॑ च॒ धने॑न च दी॒र्घमायुः॑ कृणोतु मे

dīrghāyuḥ| 1 brahmā| marutaḥ, pūṣā, bṛhasapatiḥ, agniḥ| pathyāpaṅktiḥ| saṃ mā siñcantu marutaḥ saṃ pūṣā saṃ bṛhaspatiḥ | saṃ māyamagniḥ siñcatu prajayā ca dhanena ca dīrghamāyuḥ kṛṇotu me

हिन्दी अर्थ

(यस्य) जिस विष्णु ओर वरूण के (प्रदिशि) मे (यत् इदम्) जो यह सब (विरोचते ) विशेषतया प्रदीप्त हो रहा है, (च) ओरं (प्र अनति) प्राणने रहा है, (च) ओर (शचीभिः) कर्म ग्रौर वरुण के (धर्मणा) धारण द्वारा तथा (सहोभिः) बलों द्वारा (पुरा) (निघं° २।१; ३।६) । “विरोचते” द्वारा जड-जगत् का; तथा “प्रानति १. जसे दो दलो के सांमृस्य भें रस्ते के माध्यम द्वारा समतुलन होता है वै

English

We bringing homage have approached the friend who seeks our wondering praise, Young, strengthener of the sacrifice. May he bestow long life on me. A prayer for long life, children, and riches

अध्याय ७

श्लोक 34.1

शत्रुनाशनम्।१ अथर्वा।जाचवेदाः।जगती।अग्ने॑ जा॒तान् प्र णु॑दा मे स॒पत्ना॒न् प्रत्यजा॑तान् जातवेदो नुदस्व ।अ॒ध॒स्प॒दं कृ॑णुष्व॒ ये पृ॑त॒न्यवोऽना॑गस॒स्ते व॒यमदि॑तये स्याम

śatrunāśanam| 1 atharvā| jācavedāḥ| jagatī| agne jātān pra ṇudā me sapatnān pratyajātān jātavedo nudasva | adhaspadaṃ kṛṇuṣva ye pṛtanyavo'nāgasaste vayamaditaye syāma

हिन्दी अर्थ

भ्रज्ञात. है 1 वैनानिक कहते हँ किं इन में समतुलन ईथर द्वायाहो रहा है, जोकि खिचाव में टटता नहीं । वैदिक सिद्धान्त मे इन लोक-लोकान्तरों की विधृति" का० ७1 अनु० ३। सू० २७ ग्रथर्षवेद-भाष्य २३७. अवोचम्) मैने प्रवचन किया है, (यः) जिसने कि (पापिवानि) पृथिवी ओर अन्तरिक्ष के (रजांसि) लोकों का (विममे) निर्माण कियाहैतथा (यः) जिस (उरुगायः) महा स्तुति वाले ने (त्रेधा तरिचक्रमाणः) तीन प्रकार

English

Let Pūshan, let the Maruts, let Brihaspati pour forth on me; This present Agni pour on me children and riches in a stream! May he bestow long life on me.

अध्याय ७

श्लोक 35.1

सपत्नीनाशनम्।१-३ अथर्वा।जातवेदाः।१ जगती, २ अनुष्टुप्, ३ त्रिष्टुप्।प्रान्यान्त्स॒पत्ना॒न्त्सह॑सा॒ सह॑स्व॒ प्रत्यजा॑तान् जातवेदो नुदस्व ।इ॒दं रा॒ष्ट्रं पि॑पृ॒हि सौभ॑गाय॒ विश्व॑ एन॒मनु॑ मदन्तु दे॒वाः

sapatnīnāśanam| 1-3 atharvā| jātavedāḥ| 1 jagatī, 2 anuṣṭup, 3 triṣṭup| prānyāntsapatnāntsahasā sahasva pratyajātān jātavedo nudasva | idaṃ rāṣṭraṃ pipṛhi saubhagāya viśva enamanu madantu devāḥ

हिन्दी अर्थ

वह् (भीमः) न्याय कौ दृढता या कर्मफल के प्रदान मेँ भयानक है, (कुचरः) वह् पृथिवी में विचर रहा है. (गिरिष्ठाः) पर्वत में स्थित है, तथा मेष मे स्थित है। (परावतः परस्याः) दर देश कौीद्यौ सेभी दूर देशसे (आ जगम्यात्) वह आ जाता है। २८ ग्रथवेवेद-भाष्य का० ७ । अनु० ३1 सू० २७ पवंते"तथा मेषे तिष्ठति (निघं० १।१०) । आजगम्यात् = वह दर से दूर तक ओर समीप से समीप में व्याप्त है, अतः सबको दज्ञेन दे सकता. । यस्योरुषु निषु विकरमंणेष्वधि क्षियन्ति. युव॑नानि विचा । (विश्वा भुवनानि) सब भुवन (अधिक्षियन्ति) वसते है, (विष्णो) टे क्षयाय) हमारे निवास के लिये (ऊर) विस्तृत (कृधि) कर (घृतयोने) हे धूतोत्पत्ति के कारणरूप विष्णु ! (घृतं पिव) हमारी घृताहुतियों का

English

A prayer for freedom from sin and the overthrow of enemies Agni, drive off my rivals born and living, repel those yet unborn, O Jātavedas.

अध्याय ७

श्लोक 35.2

इ॒मा यास्ते॑ श॒तं हि॒राः स॒हस्रं॑ ध॒मनी॑रु॒त।तासां॑ ते॒ सर्वा॑साम॒हमश्म॑ना॒ बिल॒मप्य॑धाम्

imā yāste śataṃ hirāḥ sahasraṃ dhamanīruta| tāsāṃ te sarvāsāmahamaśmanā bilamapyadhām

हिन्दी अर्थ

तीन विक्रमणैः पृथिवी, ग्रन्तरिक्न मौर बुलोक, ओरयेरहैभी विहरण चाहता है, जहां-जहां किं विष्णु विद्यमान है, अतः विष्णु की सत्ता उसका उपभोग करना विहितः है । धूत का नाम यह् दशनि के लिये परित है कि “श्रायुवं घृतम्'' घृत आयुवधक है । का० ७। अनु० ३। सु २७ अथवेवेद-भाष्य २€

English

Cast down beneath my feet mine adversaries. In Aditi’s regard may we be sinless. A prayer for the prosperity of a King and his kingdom Subdue with conquering might his other rivals, those yet unborn repel, O Jātavedas.

अध्याय ७

श्लोक 35.3

परं॒ योने॒रव॑रं ते कृणोमि॒ मा त्वा॑ प्र॒जाभि भू॒न्मोत सूनुः॑ ।अ॒स्वं॑१ त्वाप्र॑जसं कृणो॒म्यश्मा॑नं ते अपि॒धानं कृणोमि

paraṃ yoneravaraṃ te kṛṇomi mā tvā prajābhi bhūnmota sūnuḥ | asvaṃ1 tvāprajasaṃ kṛṇomyaśmānaṃ te apidhānaṃ kṛṇomi

हिन्दी अर्थ

भान होता है जसे धूलिधूसरित पाद का । “षि दयानन्दकृत यजुवद भाष्य इसरा प्रकाशरहित पृथिवी आदि, ओौर जो तीसरा परमाणु ्रादि अदृश्य परमेण्वर ने (त्रीणि पदा) तीन पादो का (विचक्रमे) विक्षेप किया । (इतः) प्राकृतिक-शसनविधि को देखा करो, ओर् उसे निज व्रतो मे ढाल

English

For great felicity protect this kingdom, and in this man let all the Gods be joyful. Hae quot tibi sunt venae atque arteriae harum omnium os tibi lapide occlusi. 107

अध्याय ७

श्लोक 36.1

अञ्जनम्।१ अथर्वा।अक्षि, मनः।अनुष्टुप्।अ॒क्ष्यौऽनौ॒ मधु॑संकाशे॒ अनी॑कं नौ स॒मञ्ज॑नम्।अ॒न्तः कृ॑ष्णुष्व॒ मां हृ॒दि मन॒ इन्नौ॑ स॒हास॑ति

añjanam| 1 atharvā| akṣi, manaḥ| anuṣṭup| akṣyau'nau madhusaṃkāśe anīkaṃ nau samañjanam| antaḥ kṛṣṇuṣva māṃ hṛdi mana innau sahāsati

हिन्दी अर्थ

दोनों प्रापस में सखारहै। यथा शद्रा सुपर्णा सयजा सखाया" (ऋ० १। १६४५. ५० श्रथवैवेद-भाष्य का० ७ प्रनु० ३ । सू० २७ प्रापणीय स्वरूप को, (सूरयः) मेधावी उपासक (सदा पश्यन्ति) सदा दवारा फली हई (चक्षुः इव) सूरयरूपी आंख के सदृश ।

English

Uteri tui summam partem inferam facio: ne tibi soboles neque filius eveniat. Sterilem et infecundam te facio: lapidem tuum, operimentum facio. A charm to be pronounced by bride and bridegroom

अध्याय ७

श्लोक 37.1

वासः।१ अथर्वा।वासः।अनुष्टुप्।अ॒भि त्वा॒ मनु॑जातेन॒ दधा॑मि॒ मम॒ वास॑सा ।यथासो॒ मम॒ केव॑लो॒ नान्यासां॑ की॒र्तया॑श्च॒न

vāsaḥ| 1 atharvā| vāsaḥ| anuṣṭup| abhi tvā manujātena dadhāmi mama vāsasā | yathāso mama kevalo nānyāsāṃ kīrtayāścana

हिन्दी अर्थ

अभिप्राय यह् कि मेधावी उपासक जव भी चहँ तो वे ध्यानावस्थित होकर विष्णु का दशेन पा सवते है, जसे कि साधारण व्यक्ति दिन के समय जब भी चाहं तो सूये का दर्शन कर सकते हैँ । सूरय॑कोचक्षु कहादहै, जौ चक्षु कि दुलोक मेह! जैसे चक्षु गोलहै वैसे सूयं भी गोल दहै, जसे चक्षु प्रकाणमय ओर पदार्थौ का दशन कराती है, वसे सूयं भी प्रकाशमय तथा प्रमेषए्वर की स्थिति कही है । यथा -- योऽसावादिस्ये पुरुषः सोऽसावदहम् । (विष्णो) है सवव्यापक परमेश्वर ! (दिवः) घुलोक से, (उत वां). १. अ्रथवा ““हमारे दोनों हाथ भर दे, म्मौर इस निमित्त हमारे दाहिने तथा. बाए पावा से हमें प्रदान कर“ 1

English

Sweet are the glances of our eyes, our faces are as smooth as balm, Within thy bosom harbour me; one spirit dwell in both of us! A nuptial charm to be spoken by the bride

अध्याय ७

श्लोक 38.1

केवलः पतिः।१-५ अथर्वा।वनस्पतिः।अनुष्टुप्, ३ चतुष्पदा उष्णिक्।इ॒दं ख॑नामि भेष॒जं मां॑प॒श्यम॑भिरोरु॒दम्।प॒रा॒य॒तो नि॒वर्त॑नमाय॒तः प्र॑ति॒नन्द॑नम्

kevalaḥ patiḥ| 1-5 atharvā| vanaspatiḥ| anuṣṭup, 3 catuṣpadā uṣṇik| idaṃ khanāmi bheṣajaṃ māṃpaśyamabhirorudam| parāyato nivartanamāyataḥ pratinandanam

हिन्दी अर्थ

का० ७। अनु० ३। सु० २८ श्रथवेवेद-भाष्य १ क ) (उत) तथा सव्यात्) बाएं से (आ 1 ४ के ५ कवितामंरहँ, क्योंकि हाथों से दिया जाता उतना धन जितना कि कोई दाए-बाएं हाथों अञ्ज वासम अनुं वस्तां व्रतेन यस्याः पदे पुनते देवयन्त॑! ।

English

With this my robe, inherited from Manu, I envelop thee, So that thou mayst be all mine own and give no thought to other dames. A maiden’s love-charm

अध्याय ७

श्लोक 38.2

येना॑ निच॒क्र आ॑सु॒रीन्द्रं॑ दे॒वेभ्य॒स्परि॑ ।तेना॒ नि कु॑र्वे॒ त्वाम॒हं यथा॒ तेऽसा॑नि॒ सुप्रि॑या

yenā nicakra āsurīndraṃ devebhyaspari | tenā ni kurve tvāmahaṃ yathā te'sāni supriyā

हिन्दी अर्थ

(इडा एव) वेदवाणो ही (व्रतेन) ब्रतकमोँ द्वारा मं कौ कामना वाले (पुनते) म्रपने-अप को पविश्र करते है 1 (वृतपदी) वेदवाणी के “पद” प्रकाशमय ह, (शक्वरी) वह शविति प्रदान करती, (सोमः ण) 9 1 उसको पीठ पर है, वहु ( वेश्वदेवी) ग दवाः का वणन करती है, (यज्ञम्). हमारे यज्ञकर्म में उप उपासक पवित्रे होकर षृरमेश्वर की प्राप्ति के ५८ न 1 १।१६४।३६), अर्थात् चाएं पढ़कर भी जो पश्मेष्वर को नहीं नानत

English

I dig this Healing Herb that makes my lover look on me and weep; That bids the parting friend return and kindly greets him as he comes. This Herb wherewith the Asuri drew Indra downward from the

अध्याय ७

श्लोक 38.3

प्र॒तीची॒ सोम॑मसि प्र॒तीच्यु॒त सूर्य॑म्।प्र॒तीची॒ विश्वा॑न् दे॒वान् तां त्वा॒च्छाव॑दामसि

pratīcī somamasi pratīcyuta sūryam| pratīcī viśvān devān tāṃ tvācchāvadāmasi

हिन्दी अर्थ

भ्रासुरी कमं हम पर प्रहारन कर सके । ४२ अथर्वेवेद-भाष्य का० ७ । अनु० ३ । सू० ३० मेधातिथिः वेददेवताक त्रिष्टुभ् । (परशुः) तथा कुशा को काटने वाला फरसा (नः) हमे (स्वस्ति) कल्याण-

English

Gods, With this same Herb I draw thee close that I may be most dear to thee. Thou art the peer of Soma, yea, thou art the equal of the Sun, p. a285

अध्याय ७

श्लोक 38.4

अ॒हं व॑दामि॒ नेत् त्वं स॒भाया॒मह॒ त्वं वद॑ ।ममेदस॒स्त्वं केव॑लो॒ नान्यासां॑ की॒र्तया॑श्च॒न

ahaṃ vadāmi net tvaṃ sabhāyāmaha tvaṃ vada | mamedasastvaṃ kevalo nānyāsāṃ kīrtayāścana

हिन्दी अर्थ

न्ताम् ) प्रीतिपूवेक सेवन करे 1 , उपस्थित विद्वानों का वणेन हभ है । ' ए दुर्ध का (पाथः) पान करते हो । (दमे दमे) घर-घर मे (सप्त) सात तुम दोनों की (जिह्वा) जिह्वा (घृतम्) चपि घत की (प्रति) ओर

English

The peer of all the Gods art thou: therefore we call thee hither— ward. I am the speaker here, not thou: speak thou where the assembly meets. Thou shalt be mine and only mine, and never mention other dames.

अध्याय ७

श्लोक 38.5

यदि॒ वासि॑ तिरोज॒नं यदि॑ वा न॒द्यऽस्ति॒रः ।इ॒यं ह॒ मह्यं॒ त्वामोष॑धिर्ब॒द्ध्वेव॒ न्यान॑यत्

yadi vāsi tirojanaṃ yadi vā nadya'stiraḥ | iyaṃ ha mahyaṃ tvāmoṣadhirbaddhveva nyānayat

हिन्दी अर्थ

(ख्राचरण्यात्) गति करती है । है । धृत दूध में छिपा होता है । उस समय उसका नाम दूध होता है धृत का० ७ ।-अनु० ३। ०३० अथर्ववेद-भाष्य ४३ नहीं । "पाथः" द्वारा भी दूध काही वणेन प्रतीत होता है, यह् पियाभी करती है, ओर सूयं रदिमिरूपी जिह्वाओं दवारा पान कररता है । जब घर-घर

English

If thou art far away beyond the rivers, far away from men, This Herb shall seem to bind thee fast and bring thee back my prisoner. A sacrificial charm for rain and prosperity

अध्याय ७

श्लोक 39.1

आपः।१ प्रस्कण्वः।आपः, सुपर्णः वृषभः त्रिष्टुप्।दि॒व्यं सु॑प॒र्णं प॑य॒सं बृ॒हन्त॑म॒पां गर्भं॑ वृष॒भमोष॑धीनाम्।अ॒भी॒प॒तो वृ॒ष्ट्या त॒र्पय॑न्त॒मा नो॑ गो॒ष्ठे र॑यि॒ष्ठां स्था॑पयाति

āpaḥ| 1 praskaṇvaḥ| āpaḥ, suparṇaḥ vṛṣabhaḥ triṣṭup| divyaṃ suparṇaṃ payasaṃ bṛhantamapāṃ garbhaṃ vṛṣabhamoṣadhīnām| abhīpato vṛṣṭyā tarpayantamā no goṣṭhe rayiṣṭhāṃ sthāpayāti

हिन्दी अर्थ

रत्न कहा है । यथा--१) सुगन्ध; (२) वायुशुद्धि; (६) रोग कीर्टाणुओं 0605 का हनन = रक्षोहा (ब्रथवं० ४।२३।३) † (४) अमीवचरातनं "गृह्य"! का श्रथंहै गृहामें निहित। धृत को गुहाहै दग्ध, इस मेघुत गृह्यरूप मे छिपा रहता है । अतः दुग्ाहृतियों दवाय “गुह्य” घृत की आहु- तियां सम्पन्न हो जाती हैँ । मन्व में "पाथः" का कर्म है "नामन कि सेवन करते हुए (वीयः) भक्षण करते हो । (दमे दमे) घर-घर म (सुष्ट्त्या आ कर इसे (उच्चरण्यात्) उ्वंगति प्रदान करे। '

English

May he establish in our home the master of riches, gladdening with rain in season, Mighty, strong-winged, celestial, dropping moisture, Bull of the plants and embryo of waters. A prayer for prosperity

अध्याय ७

श्लोक 40.1

सरस्वान्।१-२ प्रस्कण्वः।सरस्वान्।१ भुरिक्, २ त्रिष्टुप्।यस्य॑ व्र॒तं प॒शवो॒ यन्ति॒ सर्वे॒ यस्य॑ व्र॒त उ॑प॒तिष्ठ॑न्त॒ आपः॑ ।यस्य॑ व्र॒ते पु॑ष्ट॒पति॒र्निवि॑ष्ट॒स्तं सर॑स्वन्त॒मव॑से हवामहे

sarasvān| 1-2 praskaṇvaḥ| sarasvān| 1 bhurik, 2 triṣṭup| yasya vrataṃ paśavo yanti sarve yasya vrata upatiṣṭhanta āpaḥ | yasya vrate puṣṭapatirniviṣṭastaṃ sarasvantamavase havāmahe

हिन्दी अर्थ

घत द्वारा तैयार किये गये हव्यो कौ आहुतियां अग्नि के तेज मे, तथा सूये के उदित होने पर देनी चाहिए । ये दोनों तेजावस्थाएं आुतिथों के आहव्य देवों के गुणघर्मो का कथन करते हुए आहंतियां देना। आहृतिं अथवेवेद-भाष्य का० ७ । अनु० ३1 सू० ३२ मकः करोतेः छन्दसे लुडि, च्लेलुकि, गुणे, तिपो लोपे रूपभ; करत् = करोतेः लुडि च्लेः श्रड (सायण) ।

English

We call Sarasvān, under whose protection all cattle wander, to preserve and aid us, Him in whose ordinance abide the waters, to whose command the Lord of Plenty listens. Abiding here let us invoke Sarasvān, the seat of riches, glorious, wealth-increaser,

अध्याय ७

श्लोक 40.2

आ प्र॒त्यञ्चं॑ दा॒शुषे॑ दा॒श्वंसं॒ सर॑स्वन्तं पुष्ट॒पतिं॑ रयि॒ष्ठाम्।रा॒यस्पोषं॑ श्रव॒स्युं वसा॑ना इ॒ह हुवेम॒ सद॑नं रयी॒णाम्

ā pratyañcaṃ dāśuṣe dāśvaṃsaṃ sarasvantaṃ puṣṭapatiṃ rayiṣṭhām| rāyaspoṣaṃ śravasyuṃ vasānā iha huvema sadanaṃ rayīṇām

हिन्दी अर्थ

दारा, दिन के समय ने आजीविका-प्रदान द्वारा, मेघ ने वर्षा हारा जल ओर का० ७। श्रनु० ३।सू० २३ अथववेद-भाष्य ४५ कर । (यः) जो (नः) हमारे साथ (देष्टि) देष करता द (सः) वह् (श्रधरः) नौचे (पदीष्ट) पतित हो, (यमु) अर जिसके साथ (द्विष्मः) हम द्वेष करते हैँ (तमू) उसे (प्राणः जहातु) प्राणं छोड़ जाय । सम्मिलित होते हँ । जो शतरुराष्टर साम्राज्य के साथ देष करताहै, या जिस

English

Him who inclines and gives to him who worships, the rich pos- sessor and the Lord of Fulness. A prayer for prosperity

अध्याय ७

श्लोक 41.1

सुपर्णः।१-२ प्रस्कण्वः।श्येनः ।१ जगती, २ त्रिष्टुप्।अति॒ धन्वा॒न्यत्य॒पस्त॑तर्द श्ये॒नो नृ॒चक्षा॑ अवसानद॒र्शः ।तर॒न् विश्वा॒न्यव॑रा॒ रजां॒सीन्द्रे॑ण॒ सख्या॑ शि॒व आ ज॑गम्यात्

suparṇaḥ| 1-2 praskaṇvaḥ| śyenaḥ | 1 jagatī, 2 triṣṭup| ati dhanvānyatyapastatarda śyeno nṛcakṣā avasānadarśaḥ | taran viśvānyavarā rajāṃsīndreṇa sakhyā śiva ā jagamyāt

हिन्दी अर्थ

राजा को प्राणदण्ड देना चाहिए, यह् वेदाज्ञा है । को बढाए, युवा तथा व्यवहारकुशल हो । नमः अन्ननाम (निधं २।७) सम्यक् सीचं, (पूषा) रषयो, से पृष्ट सूयं (सं संसिञ्चतु) रषिमयों ग्रोर (मे) मेरी (दीषेम् प्रायुः) दीघं आयु (कृणोतु) करे ।

English

Observing men, and viewing home, the Falcon hath cleft his swift way over wastes and waters. May he, with Indra for a friend, auspicious, traversing all air’s lower realms, come hither.

अध्याय ७

श्लोक 41.2

श्ये॒नो नृ॒चक्षा॑ दि॒व्यः सु॑प॒र्णः स॒हस्र॑पाच्छ॒तयो॑निर्वयो॒धाः ।स नो॒ नि य॑च्छाद् वसु॒ यत् परा॑भृतम॒स्माक॑मस्तु पि॒तृषु॑ स्व॒धाव॑त्

śyeno nṛcakṣā divyaḥ suparṇaḥ sahasrapācchatayonirvayodhāḥ | sa no ni yacchād vasu yat parābhṛtamasmākamastu pitṛṣu svadhāvat

हिन्दी अर्थ

हुए शतरुभों को (भ्र नुद) परे धकेल, (जातवेदः) है जातप्रजञ प्रधानमन्तिन! : (ते वयम्) वे हम (अनागसः) निष्पाप हुए (अदितये ) अविनाश के लिये निष्पाप हो कर अविनाश के लिये हों । अदितये =ग्र-दोड क्षये + क्तिन , जातवेदाः = जातप्रज्ञानः (निसक्त ७।५।१६) । भ क्तत प्रथतेवेद-भाष्य का० ७1 अनु० ३) सू० ३५

English

The heavenly Falcon, viewing men, well-pinioned, strength-giver, hundred-footed, hundred nested, Shall give us treasure which was taken from us. May it be rich in food among our Fathers. 108

अध्याय ७

श्लोक 42.1

पापमोचनम्।१-२ प्रस्कण्वः।सोमारुद्रौ।त्रिष्टुप्।सोमा॑रुद्रा॒ वि वृ॑हतं॒ विषू॑ची॒ममी॑ वा॒ या नो॒ गय॑मावि॒वेश॑ ।बाधे॑थां दू॒रं निरृ॑तिं परा॒चैः कृ॒तं चि॒देनः॒ प्र मु॑मुक्तम॒स्मत्

pāpamocanam| 1-2 praskaṇvaḥ| somārudrau| triṣṭup| somārudrā vi vṛhataṃ viṣūcīmamī vā yā no gayamāviveśa | bādhethāṃ dūraṃ nirṛtiṃ parācaiḥ kṛtaṃ cidenaḥ pra mumuktamasmat

हिन्दी अर्थ

करा० ७ । श्ननु० ३। सू०३६९ अथवेवेद-भराष्य 9, सपत्नो कां (सहसा) साहसपूवेक (प्रसहस्व) पराभव कः (जातवेदः) ह (पिपहि) पालित तथा सुख सामग्री से पूरित कर 1 ताकि (विष्वे देवाः) राष्ट के सब देव (एनम्, अनु) इस राजा को अनुकूलरूप पाकर (मदन्तु) दासन के विरोधी दल । एक पति राजा की द्विविध प्रजाएु है--शासना- । नकल प्रजा, तथा शासनविरोधी प्रजा, णासनविरोधी प्रजा का पराभवं साहसपूर्क करना चाहिए, इसमे ढील न दहयेनी चाहिए 1 पिपृहि =प॒ पालन- पूरणयोः (जुहोत्यादिः) हस्वान्तोऽयमिल्येके 1

English

A prayer for delivery from sin and sickness Scatter and drive away, Soma and Rudra, the sickness that hath come within our dwelling, Afar into the distance chase Destruction, and even from commit- ted sin release us.

अध्याय ७

श्लोक 42.2

सोमा॑रुद्रा यु॒वमे॒तान्य॒स्मद् विश्वा॑ त॒नूषु॑ भेष॒जानि॑ धत्तम्।अव॑ स्यतं मु॒ञ्चतं॒ यन्नो॒ अस॑त् त॒नूषु॑ ब॒द्धं कृ॒तमेनो॑ अ॒स्मत्

somārudrā yuvametānyasmad viśvā tanūṣu bheṣajāni dhattam| ava syataṃ muñcataṃ yanno asat tanūṣu baddhaṃ kṛtameno asmat

हिन्दी अर्थ

है, (उतत) ओर (सहम् धमनः ) हजार धृमनियां हु" (ते) तेरी (तासाम् सर्वासाम) उन सव सिराश्रों ओर धमनियो के (विलम्) मूख को (अहम् दारा ( बिलम्) बिल को बन्द कर दिया जाताहै। हिरः का प्रथं गर्माशय कौ सिराएु, नीले रक्तकौी नाड्यां । ८ भयवेवेद-भाष्य का० ७। भ्नु० ३ ! सू० ३७ फ अभाव मे गभेस्थिति नहीं होती ।

English

Lay on our bodies, O ye twain, O Soma and Rudra, all those balms that heal diseases. Set free and draw away the sin committed, which we have still inherent in our persons. A charm against lightning

अध्याय ७

श्लोक 43.1

वाक् १ प्रस्कण्वः।वाक्।त्रिष्टुप्।शि॒वास्त॒ एका॒ अशि॑वास्त॒ एकाः॒ सर्वा॑ बिभर्षि सुमन॒स्यमा॑नः ।ति॒स्रो वाचो॒ निहि॑ता अ॒न्तर॒स्मिन् तासा॒मेका॒ वि प॑पा॒तानु॒ घोष॑म्

vāk 1 praskaṇvaḥ| vāk| triṣṭup| śivāsta ekā aśivāsta ekāḥ sarvā bibharṣi sumanasyamānaḥ | tisro vāco nihitā antarasmin tāsāmekā vi papātānu ghoṣam

हिन्दी अर्थ

(ते) तेरी (योनेः) योनि के (परम्) पहले भाग को (श्रवरम्) नीचे की भोर (कृणोमि) मँ करता ह, इस प्रकार (त्वा अभि ) तुभे लक्ष्य करके करता हूः (म्रष्मानं ते म्र पिधानं कृणोमि) तेरे मागं कोर बन्दकर देता स पद एकवचन मे है । इसलिये जो कोई नारी सन्तान-प्रतिबन्ध चाहे उसकं लिये इन प्रयोगो का विधान हग्ना है, जनिच्छुक पर नहीं । योनि क पैन्द अक्ष्यो नो मधुसंकाशे भनीकं नौ समञ्जनम् ।

English

Some of thy words bode weal and some misfortune: thou scat- terest them all with friendly feeling. Deep within this three words are laid: among them one hath flown off even as the sound was

अध्याय ७

श्लोक 44.1

इन्द्राविष्णुः।१ प्रस्कण्वः।इन्द्रः, विष्णुः।भुरिक् त्रिष्टुप्।उ॒भा जि॑ग्यथु॒र्न परा॑ जयेथे॒ न परा॑ जिग्ये कत॒रश्च॒नैन॑योः ।इन्द्र॑श्च विष्णो॒ यदप॑स्पृधेथां त्रे॒धा स॒हस्रं॒ वि तदै॑रयेथाम्

indrāviṣṇuḥ| 1 praskaṇvaḥ| indraḥ, viṣṇuḥ| bhurik triṣṭup| ubhā jigyathurna parā jayethe na parā jigye kataraścanainayoḥ | indraśca viṣṇo yadapaspṛdhethāṃ tredhā sahasraṃ vi tadairayethām

हिन्दी अर्थ

(नौ) हम दोनों की (मक्ष) दोनो-दोनों आसे मधुसंकाशे मधुके. कर, (नौ) हम दोनों का (मनः इत्) मन भी (सह्) परस्पर सहकारी का० ७1 अनु० ३। सु० ३८ अथव॑वेद-भाष्य ४९ यह सूक्त विवाह संस्कार मे विनियुक्त हुआ है । पति-पत्नी के जीवनं

English

uttered. In praise of Indra and Vishnu Ye twain have conquered, and have not been vanquished: not either of the pair hath been

अध्याय ७

श्लोक 45.1

ईर्ष्यानिवारणम्।१-२ प्रस्कण्वः, २ अथर्वा।ईर्ष्यापनयनं, भेषजम्।अनुष्टुप्।जना॑द् विश्वज॒नीना॑त् सिन्धु॒तस्पर्याभृ॑तम्।दू॒रात् त्वा॑ मन्य॒ उद्भृ॑तमी॒र्ष्याया॒ नाम॑ भेष॒जम्

īrṣyānivāraṇam| 1-2 praskaṇvaḥ, 2 atharvā| īrṣyāpanayanaṃ, bheṣajam| anuṣṭup| janād viśvajanīnāt sindhutasparyābhṛtam| dūrāt tvā manya udbhṛtamīrṣyāyā nāma bheṣajam

हिन्दी अर्थ

दुसरे को सदा श्रपने-अपने हृदय के भीतर रखने का संकल्प करते है । इस यथाऽसो मम् केव॑ला नान्यासां कीतैयाञच॒न ॥१॥ (मनुजातेन') मनोऽनुराग द्वारा उत्पादित (मम) मेरे अर्थात् अपने दधामि) बान्धती हूं । (यथा) जिस प्रकार करि तु (मम केवलः) केवल मेरा

English

defeated. Ye, Indra Vishnu, when ye fought your battle; produced this infinite with three divisions. A charm against jealousy

अध्याय ७

श्लोक 45.2

अ॒ग्नेरि॑वास्य॒ दह॑तो दा॒वस्य॒ दह॑तः॒ पृथ॑क्।ए॒तामे॒तस्ये॒र्ष्यामु॒द्राग्निमि॑व शमय

agnerivāsya dahato dāvasya dahataḥ pṛthak| etāmetasyerṣyāmudrāgnimiva śamaya

हिन्दी अर्थ

यह मन्व भी विवाह संस्कार सम्बन्धी है। वधू निज मनोऽनुराग जोड़ करती है । भौर इस विधि द्वारा पति को केवल अपना पति घोषित करती है । असः अस् (भुवि), लेट् लकार+सिप् (इकारलोप, “इतश्च लोपः परस्मेपदेषु"' + अट् का आगम

English

Brought hitherward from Sindhu, from a folk of every mingled race, Fetched from afar, thou art I deem, a balm that cureth. jealousy. As one with water quencheth fire, so calm this lover’s jealousy,

अध्याय ७

श्लोक 46.1

सिनीवाली।१-३ अथर्वा।सिनीवाली।अनुष्टुप्।३ त्रिष्टुप्।सिनी॑वालि॒ पृथु॑ष्टुके॒ या दे॒वाना॒मसि॒ स्वसा॑ ।जु॒षस्व॑ ह॒व्यमाहु॑तं प्र॒जां दे॑वि दिदिड्ढि नः

sinīvālī| 1-3 atharvā| sinīvālī| anuṣṭup| 3 triṣṭup| sinīvāli pṛthuṣṭuke yā devānāmasi svasā | juṣasva havyamāhutaṃ prajāṃ devi didiḍḍhi naḥ

हिन्दी अर्थ

निरोध. के लिये ब्रह्मचयं षं ष्ठ उपाय है । ++; अथवेवेद-माष्य का० ७) श्रनु० २) सु० ३६ ओौर मेरे वियोग में पतिको रुला देती है, जो (परायतः) दूर गए पति नम्) के प्रति आनन्दकररी होती है।

English

Like heat of fire that burneth here, or flame that rageth through the wood. A charm for offspring and prosperity O broad-tressed Sinivāli, thou who art the sister of the Gods,

अध्याय ७

श्लोक 46.2

या सु॑बा॒हुः स्व॑ङ्गु॒रिः सु॒षूमा॑ बहु॒सूव॑री ।तस्यै॑ वि॒श्पत्न्यै॑ ह॒विः सि॑नीवा॒ल्यै जु॑होतन

yā subāhuḥ svaṅguriḥ suṣūmā bahusūvarī | tasyai viśpatnyai haviḥ sinīvālyai juhotana

हिन्दी अर्थ

यह भेषज कोई वानस्पतिक वस्तु नहीं, अपितु पत्नीका पति के प्रति गाढ़ म्रनुराग है । किसी भी वनस्पति की मखे नहीं हौतीं जिन द्वारा कि मे विद्यमान गाढृ-अनुराग का प्रकटीकरण ही अभिप्रेत है, यही महाभेषज हैः जो कि पत्नी के वियोग में पति को .रुला देती है, विह्वल कर देती है, गए को लौटा लाती ओौर लौट श्राए को प्रसन्न कर देती है । येनानिचक्र अ सुरीन््र देवेभ्यस्पारे । मँ पत्नी (त्वाम्, निकरे) तुभे वश में करती हूं, (यथा) ताकि (ते) तेरी

English

Accept the offered sacrifice, and, Goddess, grant us progeny. Present the sacrifice to her, to Sinivāli, Queen of men, Beauti- ful-fingered, lovely-armed, prolific, bearing many a child.

अध्याय ७

श्लोक 46.3

या वि॒श्पत्नीन्द्र॒मसि॑ प्र॒तीची॑ स॒हस्र॑स्तुकाभि॒यन्ती॑ दे॒वी।विष्णोः॑ पत्नि॒ तुभ्यं॑ रा॒ता ह॒वींषि॒ पतिं॑ देवि॒ राध॑से चोदयस्व

yā viśpatnīndramasi pratīcī sahasrastukābhiyantī devī| viṣṇoḥ patni tubhyaṃ rātā havīṃṣi patiṃ devi rādhase codayasva

हिन्दी अर्थ

(सायणं) 1 अभिप्राय यह कि जहां पति ओौर पत्नौ दोनों बुद्धिमान् हो वहां का०७॥ अनु०३। सू० ३९ भ्रथवेवेद-भाष्य ५१ निकारः = ऽप्रणंपषटश्रा०) (अष्ट) =-स्वाधोनं कुवे, वशोकरोमि । भतीची विश्वान् देवान् तां तवाऽच्छावंदामसि ॥२॥

English

Thou who as Queen of men art Indra’s equal, a Goddess coming with a thousand tresses, To thee our sacrifices are performed, O Consort of Vishnu Goddess, urge thy Lord to bounty!

अध्याय ७

श्लोक 47.1

कुहूः।१-२ अथर्वा।कुहूः।जगती, २ त्रिष्टुप्।कु॒हूं दे॒वीं सु॒कृतं॑ विद्म॒नाप॑सम॒स्मिन् य॒ज्ञे सु॒हवा॑ जोहवीमि ।सा नो॑ र॒यिं वि॒श्ववा॑रं॒ नि यच्छाद् ददा॑तु वी॒रं श॒तदा॑यमु॒क्थ्यऽम्

kuhūḥ| 1-2 atharvā| kuhūḥ| jagatī, 2 triṣṭup| kuhūṃ devīṃ sukṛtaṃ vidmanāpasamasmin yajñe suhavā johavīmi | sā no rayiṃ viśvavāraṃ ni yacchād dadātu vīraṃ śatadāyamukthya'm

हिन्दी अर्थ

हई (असि) तु है, (उत) तथा (सूयम्) सूयं की प्रतीची ) प्रतिरूपता को सौन्दयं मे चांद श्रौर सूयं के प्रतिरूप है, भौर दिव्यगणो में देवपुरुषो के ममेरसस्त्वं केवली नान्यासौं कीतेयांरचन ॥॥ मे (वद) बोला कर । (त्वम्) तु (मम इत्) मेख ही (केवलः) केवल (असः) हौ, (अन्यासाम्) अन्यनारियों का (न, कीकैयाः चन) कीतंन भी

English

A prayer for wealth and birth of a son Oft in this sacrifice with favoured cry I call Kuhū, beneficent Goddess, skilled in all her works.

अध्याय ७

श्लोक 47.2

कु॒हूर्दे॒वाना॑म॒मृत॑स्य॒ पत्नी॒ हव्या॑ नो अस्य ह॒विषो॑ जुषेत ।शृ॒णोतु॑ य॒ज्ञमु॑श॒ती नो॑ अ॒द्य रा॒यस्पोषं॑ चिकि॒तुषी॑ दधातु

kuhūrdevānāmamṛtasya patnī havyā no asya haviṣo juṣeta | śṛṇotu yajñamuśatī no adya rāyaspoṣaṃ cikituṣī dadhātu

हिन्दी अर्थ

तथा राजनंतिक कार्यो मं ग्रधिकार पतिका। इस प्रकार दोनों प्रकार की व्यवस्थाएं बनी रहती है" ओर पारस्परिक प्रेम दृढ होता जाता है। पति को यह् भी परामशं देती है कि तूने पत्नीत्रत का ध्यान रखना है । ५२ श्रथवेवेद-भाष्य का० ७1 श्रनु० ३) सू०३६ दारा तु तिरोहित अन्तहित (असि) हृञ है, (यदि वा) अथवा (नद्यः) नदियां (तिरः) तेरी तिरोघायक हुई ह, तो (इयम्, ग्रोषधिः) यह ओषधि निश्चय से (न्यानयत्) वापिस लाएगी, या लाए ।

English

May she vouchsafe us wealth with every boon, and give a, hero meet for praise who gives a hundred gifts. Kuhl), the Queen of Gods and immortality, called to assist, enjoy this sacrifice of’ ours!

अध्याय ७

श्लोक 48.1

राका।१-२अथर्वा।राका।जगती।रा॒काम॒हं सु॒हवा॑ सुष्टु॒ती हु॑वे शृ॒णोतु॑ नः सु॒भगा॑ बोध॑तु॒ त्मना॑ ।सीव्य॒त्वपः॑ सू॒च्याच्छिद्यमानया॒ ददा॑तु वी॒रं श॒तदा॑यमु॒क्थ्यऽम्

rākā| 1-2atharvā| rākā| jagatī| rākāmahaṃ suhavā suṣṭutī huve śṛṇotu naḥ subhagā bodhatu tmanā | sīvyatvapaḥ sūcyācchidyamānayā dadātu vīraṃ śatadāyamukthya'm

हिन्दी अर्थ

कं कारण पति कहीं चला गया प्रतीत होता है पत्नी को विश्वास रहै कि उसका अनुरागा विष्ट सततानुचिन्तन पति को वापिस ले आएगा । सूक्त में पुरुषाय भेषजम् 1 सुखं मेषाय मेष्ये" (३।५६९) । इस पर उवट” लिखते सप्तम काण्ड का तृतीय अलुवाक समाप्त का० ७ अनु० ४। सू० ४१ अथववेद-माष्य ५३

English

Let her, desirous of our worship, hear to-day: may she, intelligent, give increase of our wealth. A prayer for prosperity and the birth of a son

अध्याय ७

श्लोक 48.2

यास्ते॑ राके सुम॒तयः॑ सु॑पेश॑सो॒ याभि॒र्ददा॑सि दा॒शुषे॒ वसू॑नि ।ताभि॑र्नो अ॒द्य सु॒मना॑ उ॒पाग॑हि सहस्रापो॒षं सु॑भगे॒ ररा॑णा

yāste rāke sumatayaḥ supeśaso yābhirdadāsi dāśuṣe vasūni | tābhirno adya sumanā upāgahi sahasrāpoṣaṃ subhage rarāṇā

हिन्दी अर्थ

जलो के गर्भरूप, (ओषधीनाम्, वृषभम्) ्रोषधियों पर वर्षा करने वाले, (अभीपतः) सूयं को ग्रभिमुख करके उसके चारों भ्रोर उङ्ने वाले ग्रहो को आदि स्थान में परमेश्वर (स्थापयति) स्थापित करे, या कगतादहै) र भीमजल की अपेक्षा मेघस्थ जल दिव्यगुणों वाला होता है, उ जल वायु द्वारा इधर-उधर उडता रहता है । मेघ के कारण अन्नादि सम्पत्ति मेधो क स्वामी सूर्यं को, (अवसे) रक्षां (हवामहे) हम बुलाते है ।

English

I call on Rākā with hair laud and reverent cry: may she, auspicious, hear us and herself observe. With never-breaking needle may she sew her work, and send a glorious man who gives a

अध्याय ७

श्लोक 49.1

देवपत्न्यः।१-२ अथर्वा।देवपत्नीः।१ आर्षी जगती, २ चतुष्पदा पङ्क्तिः।दे॒वानां॒ पत्नी॑रुश॒तीर॑वन्तु नः॒ प्राव॑न्तु नस्तु॒जये॒ वाज॑सातये ।याः पार्थि॑वासो॒ या अ॒पामपि॑ व्र॒ते ता नो॑ देवीः सु॒हवाः॒ शर्म॑ यच्छन्तु

devapatnyaḥ| 1-2 atharvā| devapatnīḥ| 1 ārṣī jagatī, 2 catuṣpadā paṅktiḥ| devānāṃ patnīruśatīravantu naḥ prāvantu nastujaye vājasātaye | yāḥ pārthivāso yā apāmapi vrate tā no devīḥ suhavāḥ śarma yacchantu

हिन्दी अर्थ

५४ अथवेवेद-माष्य का० ७ अनु० ४। सू० ४१ सूयं व्रती है । नियमानुसार उदितास्त होता ओर ऋषतुभं का सजेन तथा जल प्रादि सूये के व्रतानुसार चलते हैँ । पृष्टपति है मेव । वह भौ सूये दारा यह सूचित कियाद करि अनावृष्टि की श्रवस्थामे यज्ञिय साधन आदि दारा सूयं की शक्ति का आह्वान करना चाहिए । पैप्पलाद शाखा मे “हवा महे'' कं स्थान में ““जुहुवेम"” पाठ है

English

hundred gifts. All thy kind favours, Rākā! lovely in their form, wherewith thou grantest treasures to the man who gives,

अध्याय ७

श्लोक 49.2

उ॒त ग्ना व्य॑न्तु दे॒वप॑त्नीरिन्द्रा॒ण्य॑१ग्नाय्य॒श्विनी॒ राट्।आ रोद॑सी वरुणा॒नी शृ॑णोतु॒ व्यन्तु॑ दे॒वीर्य ऋ॒तुर्जनी॑नाम्

uta gnā vyantu devapatnīrindrāṇya1gnāyyaśvinī rāṭ| ā rodasī varuṇānī śṛṇotu vyantu devīrya ṛturjanīnām

हिन्दी अर्थ

जिस के नियम में सब शाणी चलते है, जिसके नियम पे जल उपस्थित होते है । जिक्तके नियम भं पुष्ट अन्नादि का पति पूषा सूयं युलोकमें आपः. वर्षा के जल का बरसना, नदियों श्रादिके जलों का प्रवहण रहा है । प्राणी भी नियम में बन्धे शयन-जागरण तथा अन्य कमं करते है सूय भी चुलोक में निविष्ट हूश्रा नियम पूवक अन्नो तथा फलों का विपाक फा० ७। अनु० ४। सूु० ४२ श्रथववेद-भाष्य ५५ की (सदनम्) श्रागार परमेश्वर को (वसानाः) निज जीवनोँ मे बसति ट्र, (इह) यहां निज जीवनो या इस पृथिवी पर (आहुवेम) हम उसका

English

With these come thou to us this day benevolent, O blessed one, bestowing wealth of thousand sorts. A prayer for children and booty

अध्याय ७

श्लोक 50.1

विजयः।१-९ अङ्गिराः ( कितववधकामः)।इन्द्रः।अनुष्टुप्, ३, ७ त्रिष्टुप्, ४ जगती, ६ भुरिक् त्रिष्टुप्।यथा॑ वृ॒क्षम॒शनि॑र्वि॒श्वाहा॒ हन्त्य॑प्र॒ति।ए॒वाहम॒द्य कि॑त॒वान॒क्षैर्ब॑ध्यासमप्र॒ति

vijayaḥ| 1-9 aṅgirāḥ ( kitavavadhakāmaḥ)| indraḥ| anuṣṭup, 3, 7 triṣṭup, 4 jagatī, 6 bhurik triṣṭup| yathā vṛkṣamaśanirviśvāhā hantyaprati| evāhamadya kitavānakṣairbadhyāsamaprati

हिन्दी अर्थ

(नृचक्षाः) नर-नारियों का निरीक्षक, (श्येनः) प्रशंसनीय गति वाला वरता रहा है,या कर देता है। वह (विश्वानि अवरा रजांसि तरन्) समग्र अवर कोटि कं लोकोंको पार करता हुश्रा, (सस्या इन्द्रेण) निज सखा जीवात्मा कं साथ वतमान हमा (शिवः) कल्याण करता है, (आ जगम्यात्) शवित मे अवर कोटिक, तभी परमेश्वर उन का तर्दन कर सकता है। हजारों का रक्षक (णतयोनिः) सड का योनिरूप, (वयोधाः) अन्तां का

English

May the Gods’ Consorts aid us of their own free will, help us to offspring and the winning of the spoil. May Goddesses who quickly listen shelter us, both those on earth and they within the waters’

अध्याय ७

श्लोक 50.2

तु॒राणा॒मतु॑राणां वि॒शामव॑र्जुषीणाम्।स॒मैतु॑ वि॒श्वतो॒ भगो॑ अन्तर्ह॒स्तं कृ॒तं मम॑

turāṇāmaturāṇāṃ viśāmavarjuṣīṇām| samaitu viśvato bhago antarhastaṃ kṛtaṃ mama

हिन्दी अर्थ

धारण करने वाला, उन का स्वामी (सः) वह् परमेश्वर (नः) हमे (निय- च्छात्) नितरां देवे (वसु) धन; (यत्) जो धन कि (पराभृतम्) दुरसे ५६ श्रथवेवेद-भाष्य का० ७ श्रनु० ४। सू० ४३ भी लाया गया हो, वह् धन (अस्माकम् पितुषु) हमारे माता-पिता भादि वाले रोग को (विवृहतम्) विनष्ट करो, (या भमीवा) जो अमीवा कि(नः गयम्) हमारे घरमे या शरीरो (आ विवेश) प्रविष्ट हो गयाहै (पराचैः) दुर करने के निज साधनों द्वारा (निकतिम्) कष्टापत्तिरूप विषूचौको (दूरम्) दर कर (बाधेथाम्) इस का नाशकरो, (छतं चित्

English

realm. May the Dames, wives of Gods, enjoy our presents, Rāt, Asvini Indrāni and Agnāyi;

अध्याय ७

श्लोक 50.3

ईडे॑ अग्निं स्वाव॑सुं॒ नमो॑भिरि॒ह प्र॑स॒क्तो वि च॑यत् कृ॒तं नः ।रथै॑रिव॒ प्र भ॑रे वा॒जय॑द्भिः प्रदक्षि॒णं म॒रुतां॒ स्तोम॑मृध्याम्

īḍe agniṃ svāvasuṃ namobhiriha prasakto vi cayat kṛtaṃ naḥ | rathairiva pra bhare vājayadbhiḥ pradakṣiṇaṃ marutāṃ stomamṛdhyām

हिन्दी अर्थ

विषूची विषूचिका = (10€ा9 (अष्ट) । वृहतम् = विनाणयतम् (सायण) । अमीवा =ग्रम रोगे (चुरादिः) । “अमीवा रोगकीटाणु भी है। “गयः गृहनाम (निघं० ३।४) । सोम =जल, भौर रुद्र - विचुत्। वम्" (अथवं० १।६।२), सोम का सम्बन्ध अपः के साथ है, ओर आपः में सव भेषज ओर अग्िहैजोकि सव रोगों को शान्त करती है। यह् (निरक्त ५।२।६) । जब रोग समाप्त हो गया, तो यह रोग, जिस पापका परिणाम था वह॒ भी दुर गया, क्योंकि उस पाप कन फल भुक्त हो चूका का० ७। अनु ४1 स० ४४ अथर्ववेद-माष्य ५७

English

May Rodasi and Varunāni hear us, and Goddesses come at the matrons’ season. A gambler’s prayer for success in gaming As evermore the lightning flash strikes, irresistible, the tree,

अध्याय ७

श्लोक 50.4

व॒यं ज॑येम॒ त्वया॑ यु॒जा वृत॑म॒स्माक॒मंश॒मुद॑वा॒ भरे॑भरे ।अ॒स्मभ्य॑मिन्द्र॒ वरी॑यः सु॒गं कृ॑धि॒ प्र शत्रू॑णां मघव॒न् वृष्ण्या॑ रुज

vayaṃ jayema tvayā yujā vṛtamasmākamaṃśamudavā bharebhare | asmabhyamindra varīyaḥ sugaṃ kṛdhi pra śatrūṇāṃ maghavan vṛṣṇyā ruja

हिन्दी अर्थ

देहो मे (एतानि विश्वा भेषजानि) इन सव भेषजो को (धत्तम्) स्थापित करो। (यत्) जो (कृतम्, एनः) किया पाप (नः तनूषु) हमारे देहं मे शिवास्त एका आशषिवास्त एकाः सर्षा तरिभरषिं सुमनस्यमानः हे पुरुष ! (ते) तेरी (एकाः) एक प्रकार की वाचः वाणियां (शिवाः) कल्याणमयी है (ते) तेरी (एकाः) अन्य प्रकारकी वाणियां उन सब वाणियों कौ (विभि) तु अपने मेधारण करताहै। (ग्रस्मिन् गरन्तः) इस पुरूष के भीतर (तिलः वाचः निहिताः) तीन वाणियां निहित रहती ह" (तासाम्) उनमें से (एका) एक वाणी (घोषम् अनु) ध्वनि के साथ (विपपात) बाहिर गिरतीहै। सायण ने चार वाणियों का निदेश मन्त्र-व्याख्यामें करिया है--परा,

English

So, irresistible, may I conquer the gamblers with the dice. From every side, from hale and sick, impotent to defend them- selves, May all the fortune of the folk as winnings pass into my hands.

अध्याय ७

श्लोक 50.5

अजै॑षं त्वा॒ संलि॑खित॒मजै॑षमु॒त सं॒रुध॑म्।अविं॒ वृको॒ यथा॒ मथ॑दे॒वा म॑थ्नामि ते कृ॒तम्

ajaiṣaṃ tvā saṃlikhitamajaiṣamuta saṃrudham| aviṃ vṛko yathā mathadevā mathnāmi te kṛtam

हिन्दी अर्थ

प्रात् स्थिति केटी है, ओौर उनमें से एक ध्वनि" रूप वाणी का मूख से पतन कहा है वाणी “संस्कार रूप"' मेँ चित्त मेँ निहित रहती है । यह् “संस्कारमयी'' वाणी है । यह् संस्कारमयी वाणी पदवाक्यरूप में, बोलते यान करे, वक्ता की इच्छा पर निभरहौताहै। परन्तु जब वह् बोलताहै तो चित्तस्थ वाणी ध्वनि कं सथ मुखसे गिरती है । इस तृतीयावस्था कौ वाणी को "वैखरी" कहते हँ । वेखरी वाणी तालु, ओष्ठ आदि स्थानों में „र अथवेवेद-भाष्य का० ७ । भ्रनु० ४। सू० ४१५ है, इसकी स्थिति को पुरुष विना मुख द्वारा उच्चारण कयि भी जान रहा होता है। संस्कारमयी वाणी "परावाणी है, जो कि वक्ता की दच्छा कं

English

I pray to Agni, him who guards his treasure: here, won by homage, may he pile our winnings. As ‘twere with racing cars I bring my presents: duly with reverence, let me laud the Maruts. With thee to aid us may we win the treasure: do thou assist our side in every battle.

अध्याय ७

श्लोक 50.6

उ॒त प्र॒हामति॑दीवा जयति कृ॒तमि॑व श्व॒घ्नी वि चि॑नोति का॒ले।यो दे॒वका॑मो॒ न धनं रु॒णद्धि॒ समित् तं रा॒यः सृ॑जति स्व॒धाभिः॑

uta prahāmatidīvā jayati kṛtamiva śvaghnī vi cinoti kāle| yo devakāmo na dhanaṃ ruṇaddhi samit taṃ rāyaḥ sṛjati svadhābhiḥ

हिन्दी अर्थ

२७) चतुविध वाक्-पदों का कथन हुञा है । विजयी होते हो, (न पराजयेथे) पराजित नहीं होते, (एनयोः) इन दोनौ मं से (कतरः चन) कोई एक ्रकेला भी (न पराजिग्ये) कभी पराजित नहीं हमा या होता । (यत्) जब (अपस्पृधेयाम्) दोनों किसी कं साथ १ “सपर्था" यतः चेतनधमं है, साथ ही मन्त्र मे जय-पराजय का कथन दभ्रा सकता है । “सहस्रम्” पद द्वारा हजारों रोगकौटाणु समभने चाहिए जिनक्रा कि

English

Give us wide room and easy way, O Indra; break down, O Maghavan, the foemen’s valour. I have completely cleaned thee out, won from thee what thou keptest back.

अध्याय ७

श्लोक 50.7

गोभि॑ष्टरे॒माम॑तिं दु॒रेवां॒ यवे॑न वा॒ क्षुधं॑ पुरुहूत॒ विश्वे॑ ।व॒यं राज॑सु प्रथ॒मा धना॒न्यरि॑ष्टासो वृज॒नीभि॑र्जयेम

gobhiṣṭaremāmatiṃ durevāṃ yavena vā kṣudhaṃ puruhūta viśve | vayaṃ rājasu prathamā dhanānyariṣṭāso vṛjanībhirjayema

हिन्दी अर्थ

(्रथवै० २।३२।१)॥ उदित तथा भ्रस्त होते सूर्यं की लाल रदिमयौं मे रोगकीटाणुश्रो हजारो रोगकीटाणुश्न का हनन हौ सके । का० ७। श्रनु० ४। सु० ४६ अथर्वेवेद-भाष्य ५६ सेनिकों को (व्यैरयेथाम्) ये तितर-वितर कर देते हु ।

English

As a wolf tears and rends a sheep, so do I tear thy stake away. Yea, by superior play one gains advantage: in time he piles his spoil as doth a gambler. He overwhelms with wealth’s inherent powers the devotee who keeps not back his riches.

अध्याय ७

श्लोक 50.8

कृ॒तं मे॒ दक्षि॑णे॒ हस्ते॑ ज॒यो मे॑ स॒व्य आहि॑तः ।गो॒जिद् भू॑यासमश्व॒जिद् ध॑नंज॒यो हि॑रण्य॒जित्

kṛtaṃ me dakṣiṇe haste jayo me savya āhitaḥ | gojid bhūyāsamaśvajid dhanaṃjayo hiraṇyajit

हिन्दी अर्थ

निदधे पदम्” (ऋ० १।२२।१७) मं विष्णु अर्थात् सूये के अआराधिदेविकाथं मे “त्रेधा विक्रमो" ओर श््रेधा पदनिधानो' का वणेन हुआ है। राज- (विश्वजनीनात् जनात्) सब जनो का हित करने वाले जन से, तथा से भी (उदमृतम्) पृथिवी से उद्धृत कौ गई (त्वा) वु को (ई््यायाः) सर्वहितकारी वैच से लाई गई ओषधि, या सवंहितकारी योगी महात्मा आदि; तथा पृथिवी को खोदकर प्राप्त खनिज पदाधे, तथा वानस्पतिक जड, ईरष्यावित्ति की ओौषध है ।

English

May we all, much-invoked! repel with cattle want that brings sin, hunger with store of barley. May we uninjured, first among the princes, obtain possessions by our own exertions. My right hand holds my winnings fast, and in my left is victory.

अध्याय ७

श्लोक 50.9

अक्षाः॒ फल॑वतीं॒ द्युवं॑ द॒त्त गां क्षी॒रिणी॑मिव ।सं मा॑ कृ॒तस्य॒ धार॑या॒ धनुः॒ स्नाव्ने॑व नह्यत

akṣāḥ phalavatīṃ dyuvaṃ datta gāṃ kṣīriṇīmiva | saṃ mā kṛtasya dhārayā dhanuḥ snāvneva nahyata

हिन्दी अर्थ

जो कि अत्य मानपिकर वृत्तियों के निरोधे सदण, यौगोपायों द्वारा निरुद्ध ६० ग्रथववेद-माष्य का० ७ । अनु० ४। सू० ४८ निरोधके लिये सिन्धु से, तथा पृथिवी से भी उद्धृत ग्रौषधों का प्रयोग करना चाहिए । मन्त्रम किसी विशिष्ट ओषध का नाम नहीं लिया) केवल स्वभाव तथा मानसिक लक्षणों के अनुसार एक ही रोगके लिये ग्रोषधि

English

I would that I were winner of cattle and horses, wealth and gold. Dice, give me play that bringeth fruit as ‘twere a cow with flowing milk! And, as the bowstring binds, the bow, unite me with a stream of gains.

अध्याय ७

श्लोक 51.1

परिपाणम्।१ अङ्गिराः।इन्द्राबृहस्पती।त्रिष्टुप्।बृह॒स्पति॑र्नः॒ परि॑ पातु प॒श्चादु॒तोत्त॑रस्मा॒दध॑रादघा॒योः ।इन्द्रः॑ पु॒रस्ता॑दु॒त म॑ध्य॒तो नः॒ सखा॒ सखि॑भ्यो॒ वरी॑यः॒ कृणोतु

paripāṇam| 1 aṅgirāḥ| indrābṛhaspatī| triṣṭup| bṛhaspatirnaḥ pari pātu paścādutottarasmādadharādaghāyoḥ | indraḥ purastāduta madhyato naḥ sakhā sakhibhyo varīyaḥ kṛṇotu

हिन्दी अर्थ

जाता है किसी विशिष्ट ओषध का नहीं । ईष्याभाव को (णमय) है विश्वजन हितकारी ! तु शान्त कर दे, (इव) सिनीवालि परथुष्टके या देवानामसि स्वसा । जुषस्वं हत्यमाहुते परजां देवि दिदिडटि नः ॥१॥ (सिनीवालि) हि अन्नवाली अथवा प्रेम से बन्धने वाली, तथा सुन्दर मे आहुतिरूप मे दिये वीयं हव्य की (जुषस्व) प्री तिभवंक सेवा कर, सुरक्षा कर (देवि) है दिव्यगुणों वाली ! (नः) हम पारिवारिक जनों को (प्रजाम् दिदिडिढ) उत्तम अ्रपत्य प्रदान कर। िनीयाली जीर ततसम्बन्धी बुहु दँ “देवपल््यौ" (११।३।३१; पद

English

A prayer for Brihaspati’s and Indra’s protection Brihaspati protect us from the sinner, from rearward, from above, and from below us! May Indra from the front and from the centre, as friend to friends, vouchsafe us room and

अध्याय ७

श्लोक 52.1

सांमनस्यम्।१-२ अथर्वा।सांमनस्यं, अश्विनौ।१ ककुम्मत्यनुष्टुप्, २ जगती।सं॒ज्ञानं॑ नः॒ स्वेभिः॑ सं॒ज्ञान॒मर॑णेभिः ।सं॒ज्ञान॑मश्विना यु॒वमि॒हास्मासु॒ नि य॑च्छतम्

sāṃmanasyam| 1-2 atharvā| sāṃmanasyaṃ, aśvinau| 1 kakummatyanuṣṭup, 2 jagatī| saṃjñānaṃ naḥ svebhiḥ saṃjñānamaraṇebhiḥ | saṃjñānamaśvinā yuvamihāsmāsu ni yacchatam

हिन्दी अर्थ

षो देवों की स्वसा कहा भी है । अतः सिनीवाली मानुषी हं। साथ ही या सुंवाहुः स्वड्गुरिः सुषूमा वहुसूवरी । गन्तानोत्पादन करने वाली, (बहुसूवरी) नाना सन्तानो का उत्पादन करने करे लिये (हविः जुह्योतन) हवि की आहृतियां दो गर्भाधान संस्कार मे

English

freedom. A prayer for peace and concord Give us agreement with our own, with strangers give us unity:

अध्याय ७

श्लोक 52.2

सं जा॑नामहै॒ मन॑सा॒ सं चि॑कि॒त्वा मा यु॑ष्महि॒ मन॑सा॒ दैव्ये॑न ।मा घोषा॒ उत् स्थु॑र्बहु॒ले वि॒निर्ह॑ते॒ मेषुः॑ पप्त॒दिन्द्र॒स्याह॒न्याग॑ते

saṃ jānāmahai manasā saṃ cikitvā mā yuṣmahi manasā daivyena | mā ghoṣā ut sthurbahule vinirhate meṣuḥ paptadindrasyāhanyāgate

हिन्दी अर्थ

दिप्णीः पनि तुभ्य राता हवीषि पतिं देवि राधसे चोदय ॥३॥' (सहस्रस्तका) हजारों बालों के केशगुच्छे वाली, (अभियन्ती) विवाह ६२ अथवंवेद-भाष्य का० ७ । अनु० ४। सुऽ ४६ । का० ७। श्रनु० ४। सु ५० अथवंवेद-भाष्य ६३ (पतिम्) पति को (राधसे) धनोपार्जन के लिये (चोदयस्व) प्रेरित (1 न करती रह् । शृणोतु यज्ञमुंशती नो अद्म रायस्पोषं चिकितुषी दधातु ॥२॥

English

Do ye, O Asvins, in this place join us in sympathy and love. May we agree in mind, agree in purpose: let us not fight against the heavenly spirit. Around us rise no din of frequent slaughter, nor Indra’s arrow fly, for day is present!

अध्याय ७

श्लोक 53.1

दीर्घायुः।१-७ ब्रह्मा।आयुः, बृहस्पतिः अश्विनौ च।१-२ त्रिष्टुप्, ३ भुरिक्, ४ उष्णिग्गर्भार्षी पङ्क्तिः, ५-७ अनुष्टुप्।अ॒मु॒त्र॒भूया॒दधि॒ यद् य॒मस्य॒ बृह॑स्पतेर॒भिश॑स्तेर॑मुञ्चः ।प्रत्यौ॑हताम॒श्विना॑ मृ॒त्युम॒स्मद् दे॒वाना॑मग्ने भि॒षजा॒ शची॑भिः

dīrghāyuḥ| 1-7 brahmā| āyuḥ, bṛhaspatiḥ aśvinau ca| 1-2 triṣṭup, 3 bhurik, 4 uṣṇiggarbhārṣī paṅktiḥ, 5-7 anuṣṭup| amutrabhūyādadhi yad yamasya bṛhaspaterabhiśasteramuñcaḥ | pratyauhatāmaśvinā mṛtyumasmad devānāmagne bhiṣajā śacībhiḥ

हिन्दी अर्थ

वेश्यवणं की है । पति को व्यापारार्थं देश विदेश जाना पड़ता है ग्रतः इसे का अधिकार पत्ीको सौपागयाहै। ्रथवं० ३।१५ में वणिक् को हवाई जहाजों द्वारा व्यापाराथं देश विदेश जानेका मी निदेश दिया है, जीर कहा है कि “यथा क्रीत्वा धनमाहराणि"” (३।१५।२), क्रि "खरीद कर मै घन लाॐं“ । अथवं० ३।१५ का समग्र सूक्त पठनीय है कुं देवी सुकृतं विदम् नापसमस्मिन् यतते स॒हवां जोहवीमि । (कुहम्) परथिवी में शब्दनीया, कथनीया (सुकृतम्) सुकर्म वाली

English

A charm to recover a sick man at the point of death As thou, Brihaspati, from the curse hast saved us, from dwel- ling yonder in the realm of Yama,

अध्याय ७

श्लोक 53.2

सं क्रा॑मतं॒ मा ज॑हीतं॒ शरी॑रं प्राणापा॒नौ ते॑ स॒युजा॑वि॒ह स्ता॑म्।श॒तं जी॑व श॒रदो॒ वर्ध॑मानो॒ऽग्निष्टे॑ गो॒पा अ॑धि॒पा वसि॑ष्ठः

saṃ krāmataṃ mā jahītaṃ śarīraṃ prāṇāpānau te sayujāviha stām| śataṃ jīva śarado vardhamāno'gniṣṭe gopā adhipā vasiṣṭhaḥ

हिन्दी अर्थ

जा सकने वाली (देवीम्) कुहु-देवौ को (अस्मिन्) इस(यजने) यन्न मे (जोहयौमि) मै पति बार-बार बरुलाता हूं । (सा) वह् त्रु (नः) हेम पारिवारिक जनों दारा वरणौय हो, चाहने योग्य हो, ओर (शतदायम्) सैकड़ों को दान देने वाला पत्नी सुहवा है, हठीली नहीं । शेषगण मन्ता्थं में स्पष्ट हैँ । जोहवीमि = ह्वपतेखिदिं रूप जुहोतेवां (सायग) । निस्त के अनुपार जूहू देवपत्नी ड, (नः अस्य हूविषः) हमारे इस हविष्यान्न का (जुषेत) सेवन करे, भोजन

English

The Asvins, leeches of the Gods, O Agni, have chased Death far from us with mighty powers. Move both together; do not leave the body. Let both the breathings stay for thee united. Waxing in strength live thou a hundred autumns. Thy noblest guardian and thy lord is Agni.

अध्याय ७

श्लोक 53.3

आयु॒र्यत् ते॒ अति॑हितं परा॒चैर॑पा॒नः प्रा॒णः पुन॒रा तावि॑ताम्।अ॒ग्निष्टदाहा॒र्निरृ॑तेरु॒पस्था॒त् तदा॒त्मनि॒ पुन॒रा वे॑शयामि ते

āyuryat te atihitaṃ parācairapānaḥ prāṇaḥ punarā tāvitām| agniṣṭadāhārnirṛterupasthāt tadātmani punarā veśayāmi te

हिन्दी अर्थ

कामना वाली, (चिकितुषी) तथ। सम्यक्-ज्ञानवाली विदुषी, (नः) हमें ; नोत्पत्ति से विरत रहना । दोनों प्रकार कौ कुहू" पत्नियां पुथकू्-पृयक पतियो के साथ विवाहयोग्या ह राकामहं सुहवां सुष्डुतीं वे श्रोतुं नः सुभगा बोधतु त्मना । (सुहवाम्) शोभन शब्दो द्वारा बुलाई जाने वाली (राकाम्) दानशीला

English

Return, thy life now vanished into distance! Return, the breath thou drawest and exhalest! Agni hath snatched it from Destruction’s bosom: into thyself again I introduce it. Let not the vital breath he draws forsake him, let not his expiration part and leave him.

अध्याय ७

श्लोक 53.4

मेमं प्रा॒णो हा॑सी॒न्मो अ॑पा॒नोऽव॒हाय॒ परा॑ गात्।स॒प्त॒र्षिभ्य॑ एनं॒ परि॑ ददामि॒ त ए॑नं स्व॒स्ति ज॒रसे॑ वहन्तु

memaṃ prāṇo hāsīnmo apāno'vahāya parā gāt| saptarṣibhya enaṃ pari dadāmi ta enaṃ svasti jarase vahantu

हिन्दी अर्थ

उत्तम रे्वर्यो वाली वह (नः शुणोतु) हमारी बात सुने, प्रौर (त्मना) प्रणस्त वीर प्र दे। राकान=रादाने (अदादिः) +करृ+टप् ) भ्र० ४) त्रा० ५। कण्डिका १-१५) । ६४ ग्रथवेवेदं-भाष्य का० ७। प्रनु०४।सू० ५१. राका =रां (दानम्) करोतीति (कृ+-डः) स्त्रीलिङ्घ। राका दान- शीला देवपत्नी है। ओर सुभगा है, एेश्वर्यो की स्वामिनी है । पतिके ..

English

I give him over to the Seven Rishis: let them conduct him to old age in safety. Enter him, both ye breaths, like two draught-oxen entering their stall. Let him, the treasure of old age, still wax in strength, uninjured,. here.

अध्याय ७

श्लोक 53.5

प्र वि॑शतं प्राणापानावन॒ड्वाहा॑विव व्र॒जम्।अ॒यं ज॑रि॒म्णः शे॑व॒धिररि॑ष्ट इ॒ह व॑र्धताम्

pra viśataṃ prāṇāpānāvanaḍvāhāviva vrajam| ayaṃ jarimṇaḥ śevadhirariṣṭa iha vardhatām

हिन्दी अर्थ

कथन कोध्यान से सुनती ओर कथन के अभिप्रायकोजाय चेती है। गृह्य (राके) है दानणीले देवपत्नी । (याःते) जो तेरी (सुमतयः) उत्तम मतियां ह, जोकि (सुषेणः) घर को सुन्दररूप में रख, ग्रौर (याभिः) जिन सुमतियोँ दरा प्रेरित हुत (दाशुषे) दानी मनुष्यों को (वसूनि) नानाविध धन (ददासि) दती है, (ताभिः) उन सुमतिथीं के संग, (सुमनाः) राका सम्पत्तिशालिनी है, ओर दानशीला है । सुमतिद्वाराप्ररित हुई यह् दान श्रौर महादान भी करती है। सदा प्रसन्न रहती । इसे सामाजिक दित के लिये निमन्त्रित किया है । इन मन्त्रो मे "अनुमति" का वणेन नहीं याः पार्थिवासो या चुपामपिं व्रते ता नौ देवौ; सुहवाः शमे यच्छन्तु

English

I send thee back thy vital breath; I drive Consumption far from thee, May Agni here, most excellent, sustain our life on every side. From out the depth of darkness, we, ascending to the highest heaven,

अध्याय ७

श्लोक 53.6

आ ते॑ प्रा॒णं सु॑वामसि॒ परा॒ यक्ष्मं॑ सुवामि ते ।आयु॑र्नो वि॒श्वतो॑ दधद॒यम॒ग्निर्वरे॑ण्यः

ā te prāṇaṃ suvāmasi parā yakṣmaṃ suvāmi te | āyurno viśvato dadhadayamagnirvareṇyaḥ

हिन्दी अर्थ

(उषतीः) रक्षा करने कौ कामना्रो वाली (देवानाम् पत्नीः) देवों की पतिनियां, (नः अवन्तु) हमारी रक्षा कर, (तुजये) बलप्रदान के लिये, अर का०७। ्रनु० ४। सु० ५१ अथवेवेद-माष्य ६५ करं । (याः) जो पत्तियां (पाथिवासः) पाथिव जीक्न वाली हु, (याः) तथा (सुहवाः) सुगमतः! से बुलाई जा सकने वाली (देवीः) देवियां (नः) हमें (शमर ) सुख (यच्छन्तु) प्रदान करं ।

English

Have come to the sublimest light, to Sūrya, God among the. Gods. A charm to obtain knowledge of the Veda

अध्याय ७

श्लोक 53.7

उद् व॒यं तम॑स॒स्परि॒ रोह॑न्तो॒ नाक॑मुत्त॒मम्।दे॒वं दे॑व॒त्रा सूर्य॒मग॑न्म॒ ज्योति॑रुत्त॒मम्

ud vayaṃ tamasaspari rohanto nākamuttamam| devaṃ devatrā sūryamaganma jyotiruttamam

हिन्दी अर्थ

देवियां दो प्रकारकी कही हँ पाथिव भोगों वाली, ओर इन्द्रियो, कात्यायनी ओर गार्गी । पहली सांसारिक भावनाओं वाली थो, ओर केतनेष॒ (चूरादिः) । वाजः अन्ननाम (निषं० २।७) 1 शमं सुखनाम (उत) तथा (ग्नाः) विदुषी (देवपत्नीः) देवपलियां, देवों अर्थात्

English

We worship holy Verse and Song, by which they carry out their acts, Shining in order’s seat these twain present the sacrifice to Gods. As I have asked about Verse, Song, Sacrifice, strength, force,.

अध्याय ७

श्लोक 54.1

अध्यापकविघ्नशमनम्।(१-२) १ ब्रह्मा, २ भृगुः।१ ऋक्सामनी, २ इन्द्र।अनुष्टुप्।ऋचं॒ साम॑ यजामहे॒ याभ्यां॒ कर्मा॑णि कु॒र्वते॑ ।ए॒ते सद॑सि राजतो य॒ज्ञं दे॒वेषु॑ यच्छतः

adhyāpakavighnaśamanam| (1-2) 1 brahmā, 2 bhṛguḥ| 1 ṛksāmanī, 2 indra| anuṣṭup| ṛcaṃ sāma yajāmahe yābhyāṃ karmāṇi kurvate | ete sadasi rājato yajñaṃ deveṣu yacchataḥ

हिन्दी अर्थ

हमारी प्राथनाओों को ध्यानपूरवेक सूने, ग्रौर यथाकमल (देवीः) ये देवियां ६६ श्रथववेद-भाष्य क्रा० ७। अनु०४। सू० ५२ सम्भवतः राष्ट का नागरिक प्रजाविभाग, तथा युद्धविभांग के दो (यथा) जंसे (अशनिः) बिजुली, (प्रति) विना प्रतिरोध के, (वि- (अहम्) मै ( कितवान् ) जुजारियों का, (ब्रक्षेः) अभियोगों दारा, (बध्यासम्) बध करूगा।

English

Yajus-text, So never let this lore that I have sought forsake me, Lord of Might!

अध्याय ७

श्लोक 54.2

ऋचं॒ साम॒ यदप्रा॑क्षं ह॒विरोजो॑ यजु॒र्बल॑म्।ए॒ष मा॒ तस्मा॒न्मा हिं॑सी॒द् वेदः॑ पृ॒ष्टः श॑चीपते

ṛcaṃ sāma yadaprākṣaṃ havirojo yajurbalam| eṣa mā tasmānmā hiṃsīd vedaḥ pṛṣṭaḥ śacīpate

हिन्दी अर्थ

“अहम्” हारा कोई राज्याधिकारी प्रतीत होता है, जोकि जुभारियों पर कंडी दुष्टि रखता दहै, ओर उन्हं पकड कर न्यायालय में उपस्थित कर १८) । इसी प्रकार दण्डित के वध करने वाले को “उपमन्थित्ता तथा वकौल को सम्भवतः “प्रनविवाक'' प्राड्तिवाक कहा है, यथा “वधा- करूगा, या कारागार मे बन्द करूगा का० ७। अनु० ४। सु० ५२ प्रथर्ववेदभाष्य ६७

English

A charm to ensure a prosperous journey Thy downward paths from heaven, whereby thou hast raised all the world to life, Give us in gracious love, good Lord!

अध्याय ७

श्लोक 55.1

मार्गस्वस्त्ययनम्।१ भृगुः।इन्द्रः।विराट् परोष्णिक्।ये ते॒ पन्था॒नोऽव॑ दि॒वो येभि॒र्विश्व॒मैर॑यः ।तेभिः॑ सुम्न॒या धे॑हि नो वसो

mārgasvastyayanam| 1 bhṛguḥ| indraḥ| virāṭ paroṣṇik| ye te panthāno'va divo yebhirviśvamairayaḥ | tebhiḥ sumnayā dhehi no vaso

हिन्दी अर्थ

के अंग्रेजी में अनुवादकर्ता “विलियम दह्धिट ह्विटनी ने भी कटा है । यथा वाली, (अवर्जुषीणाम्' ) परन्तु यूतकमं से वजित न होने वाली सायण (अ्थंस्वामित्व के लिये) +-जुषीणान् (चूत को सेषित करने वाली) देताहैकितुम लोग जो धन द्यूतक्रिया के लिये लाए हौ वह से मुभे सौप दो । इस प्रकार का अधिकार मेरे हाथोंमेंहै। पैप्पलाद शाखा मे “अन्त- स्तयं कृतं मनः" पाठ है, “कृतं मनः'' = “मनः कृतम्" मने निश्चय किया है, जो निश्चय करना मेरे हाथमे रहँ? राज्याधिकारी “अक्षराज' ने मानो यूत स्थान पर छापा मार कर कितवो को श्रादेश दिया ह । (१०।३४।१३) द्वारा चयूतकीष्ा कौ निषेध्रदिषि है । वेदों मे परस्पर विरोधी विधि-

English

A charm against poisonous bites and stings Whether it came from viper, from black snake or snake with transverse stripes, Or Kankaparvan’s bite, this herb hath made the poison power- less.

अध्याय ७

श्लोक 56.1

विषभैषज्यम्।१-८ अथर्वा।वृश्चिकादयः, २ वनस्पतिः, ४ ब्रह्मणस्पतिः।अनुष्टुप्, ४ विराट्-प्रस्तारपङ्क्तिः।तिर॑श्चिराजेरसि॒तात् पृदा॑कोः॒ परि॒ संभृ॑तम्।तत् क॒ङ्कप॑र्वणो वि॒षमि॒यं वी॒रुद॑नीनशत्

viṣabhaiṣajyam| 1-8 atharvā|vṛścikādayaḥ, 2 vanaspatiḥ, 4 brahmaṇaspatiḥ| anuṣṭup, 4 virāṭ-prastārapaṅktiḥ| tiraścirājerasitāt pṛdākoḥ pari saṃbhṛtam| tat kaṅkaparvaṇo viṣamiyaṃ vīrudanīnaśat

हिन्दी अर्थ

६८ अथर्ववेद-माष्य करां०७। अनु० ४।सू० ५२. का० ७1 गलु० ४० ५२ अयरववेद-भाष्य 4 करे । ( वाजयद्भिः ) अन्न संग्रह करने वाते ( रथैः ) रथो दवारा (इव) थ कि मादि स (म न ५२ (कृतम्) किय णवत मारयति वा स मरत् (उणा० १।६०), तथा “देवसेनानामभिभजञ्जतीनां ौ त प्रबल सैन्यश सेनापति, (प्रहाम्) रण कोत्याग कर भागे हुए को, (जयति) सुगमता से जीतलेता है, (एवघ्नी इव) निज भविष्यकरे हन्ता के सदुश शत्र (कृतम्) किये शतरुत्व को (काले) समय पर ( विचिनोति) विचारता दहै (यः) जो (देवकामः) अग्निदेव की कामना वाला मन्त्र ३ (धनम्) धन

English

Honey-born, honey-dropping, rich in honey, honeysweet, this herb, Is medicine that heals the wound and kills the gnat that bites and stings. Whatever bit, or sucked thy blood, we summon thence away from thee

अध्याय ७

श्लोक 56.2

इ॒यं वी॒रुन्मधु॑जाता मधु॒श्चुन्म॑धु॒ला म॒धूः ।सा विह्रु॑तस्य भेष॒ज्यथो॑ मशक॒जम्भ॑नी

iyaṃ vīrunmadhujātā madhuścunmadhulā madhūḥ | sā vihrutasya bheṣajyatho maśakajambhanī

हिन्दी अर्थ

कर जो युद्धभूमि को त्याग कर भाग जाता है, उसे “जयति"' । (श्वघ्नी = राया (ऋरवेद १०।४२।६) । विचिनोति; विचयः -ऽध्गला1; 100 (वयम्, जयेम) हम सैनिक विजयी हो, (भरेभरे) संम्राम-संग्राम में (वृतम्) यदिद्ररहोतो रथों द्वारा उसे सुगम्य कर देना चाहिए, ताकरि सेनिक युद्ध से पूवं थकावट अनुभव न करें । सैनिक, शत्रु की जिस धन राशि को घेर लें उस का कतिपय अंण सैनिकोंकाभी होना चाहिए ताकि उन की धन- वृद्धि होती जाय । भरेभरे संग्रामनाम (निषं० २।१७) 1 “कृतम् का (गोभिः) गौं के दूध हास (दुरेवाम्) दुष्परिणामी ( अमतिम्) मननशवित के अभाव का, मति की जडता का (तरेम) हम परिहार करे, (वा) तथा (पुरुहूत) है बहतो दवारा पुकारे गगे परमेषवर (विश्वे ट्म सव (यवेन) जौ द्वारा (क्षुधम्) क्षुधा को (तरेम) निवारित करं ।

English

The ineffectual poison of the little sharply-stinging gnat. Thou here who crookest wicked jaws, thou tortuous, jointless, limbless thing, 111

अध्याय ७

श्लोक 56.3

यतो॑ द॒ष्टं यतो॑ धी॒तं तत॑स्ते॒ निर्ह्व॑यामसि ।अ॒र्भस्य॑ तृप्रदं॒शिनो॑ म॒शक॑स्यार॒सं वि॒षम्

yato daṣṭaṃ yato dhītaṃ tataste nirhvayāmasi | arbhasya tṛpradaṃśino maśakasyārasaṃ viṣam

हिन्दी अर्थ

अवि वृको यथा मथदेवा म॑थ्नामि ते कृतम् ॥१॥ ७० प्रथवेवेद-भाष्य का०७। श्रनु० ४। सू० ५२ को, (भ्ररिष्टासः वयम्) हसित न हुए हम प्रजाजन के नेता (वृजनीभिः) इस प्रकार गोभिः" का अथं है गौओोंके दधु द्वारा।गौका दूध, गोघुत, तथा गोदधि मति की जडता कौ दुर करते हँ । “यव” शब्द ब्रीहिकामभी उपलक्षक है । ये दोनो क्षुधानिवृत्ति के लिये कहे गएुरहै। राजा लोगं ध्वा्थ-

English

These jaws thou, Brāhmanaspati! shalt bend together like a reed. This scorpion here that creeps along, low on the ground and powerless— I have removed his poison and then utterly demolished him.

अध्याय ७

श्लोक 56.4

अ॒यं यो व॒क्रो विप॑रु॒र्व्यऽङ्गो॒ मुखा॑नि व॒क्रा वृ॑जि॒ना कृ॒णोषि॑ ।तानि॒ त्वं ब्र॑ह्मणस्पत इ॒षीका॑मिव॒ सं न॑मः

ayaṃ yo vakro viparurvya'ṅgo mukhāni vakrā vṛjinā kṛṇoṣi | tāni tvaṃ brahmaṇaspata iṣīkāmiva saṃ namaḥ

हिन्दी अर्थ

तो भी सायणाचायं ने “राजसु'" का अथं नुपेषु, राजमानेषु दीव्यत्सु वा (जयः) विजय (मे) मेरे (सव्ये) बाएं हाय मे (आदितः) निहित है । (गोजित्) गौओं को जीतने वाला, (अश्वजित्) अण्वं को जीतने वाला, आदि की प्राप्ति होती है, विना काम किये नहीं (कृतस्य ) कृत" की (धारया) धारा द्वारा (मा) मुभे (स नह्यत) संनद्ध का० ७1 अनु° ४। सू० ५३ अथवंवेद-भाष्य ७१

English

No strength in thy two arms hast thou, nor in thy head, nor in thy waist: Then what is that small thing thou so viciously bearest in thy tail? The emmets make a meal of thee and peahens tear and mangle thee:

अध्याय ७

श्लोक 56.5

अ॒र॒सस्य॑ श॒र्कोट॑स्य नी॒चीन॑स्योप॒सर्प॑तः ।वि॒षं ह्य॑१स्यादि॒ष्यथो॑ एनमजीजभम्

arasasya śarkoṭasya nīcīnasyopasarpataḥ | viṣaṃ hya1syādiṣyatho enamajījabham

हिन्दी अर्थ

दोनो पक्षों मे समान है, “रक्षाः” का सम्बोधन मी उभयपक्ष मे समान है । लम्बी होती है, अतः उसे भी धारारूप समा जा सकता ह । अत्तः मन्त्र भी जहाँ “श्यृतक्रीडा” का वाचक है, वह साथी “विजयेच्छा'“ काभी वाचक हो सकता है । यथा “दिवु करीडाविजिगीषा"' आदि (दिवादिः ) 1 (बृहस्पतिः) बृहती-सेना-का-पति, (अघायोः) हत्यारे शत्रू से (नः) हमारी (परिपातु) सब ओरसे रक्षा करे, (पश्चात्) पश्चिम से, (उत)

English

All ye are crying out, In sooth the scorpion’s poison hath no strength. Thou creature who inflictest wounds both with thy mouth and with thy tail, No poison in thy mouth hast thou: what at thy tail’s root will there be?

अध्याय ७

श्लोक 56.6

न ते॑ बा॒ह्वोर्बल॑मस्ति॒ न शी॒र्षे नोत म॑ध्य॒तः ।अथ॒ किं पा॒पया॑मु॒या पुच्छे॑ बिभर्ष्यर्भ॒कम्

na te bāhvorbalamasti na śīrṣe nota madhyataḥ | atha kiṃ pāpayāmuyā pucche bibharṣyarbhakam

हिन्दी अर्थ

हमारे लिये (वरीयः) वरणीय श्रं ष्ठ सुख (कृणोतु) प्रदान करे । सप्तम काण्ड का चतु तुवा समाप्त १. एक काम को लगातार करते रहूनां यही उस कामकी धारा है, प्रवाह है। ७२ श्रयवेवेद-भाष्य का० ७ । श्रनु० ५ । सू० भर अ्थति समभौता हो, (अरणेभिः) जिन के साथ हमारी बोल-चाल नहीं उन

English

A charm for some physical disorder Whatever trouble hath disturbed and shaken me—I speak with hope, I move, imploring, ‘mid the folk

अध्याय ७

श्लोक 56.7

अ॒दन्ति॑ त्वा पि॒पीलि॑का॒ वि वृ॑श्चन्ति मयू॒र्यः ।सर्वे॑ भल ब्रवाथ॒ शार्को॑टमर॒सं वि॒षम्

adanti tvā pipīlikā vi vṛścanti mayūryaḥ | sarve bhala bravātha śārkoṭamarasaṃ viṣam

हिन्दी अर्थ

पुरुषे: । भथवा अर।(तिभिः (सायण) । अश्विनौ ="'ुण्यकृतौ राजानौ" (निस्त १२।१।१) । स्वकीय श्रौर॒परकौय राज्यों केदो राजा,जो कि घं जानामहै मभसा सं चिकित्व मा युंप्रहि मनसा देव्येन (मः युष्महि) हम वियुक्त न ही बहुले विनिहते) महाघाती युद्धमें (घोषाः) आवाजं (मा उत् स्थुः) न उठ । (अहनि आगते) युद्ध का दिन का० ७॥ अनु० ५। सु ५५ श्रथवेवेद-भाष्व ७१३

English

What harm my body in myself hath suffered, now let Sarasvati relieve with fatness. Seven flow for him, the youth on whom the Maruts wait: the sons have taught the Father everlasting laws.

अध्याय ७

श्लोक 56.8

य उ॒भाभ्यां॑ प्र॒हर॑सि॒ पुच्छे॑न चा॒स्येऽन च ।आ॒स्ये॒३ न ते॑ वि॒षं किमु॑ ते पुच्छ॒धाव॑सत्

ya ubhābhyāṃ praharasi pucchena cāsye'na ca | āsye3 na te viṣaṃ kimu te pucchadhāvasat

हिन्दी अर्थ

कर दियादहैःतो (ग्रमे) है सर्वेग्रिणी! ्रापकोप्रेरणा हारा (देवा- . अश्विनौ =ग्रश्विनौ को नासत्यौ भी कहते ह (ऋ० ७।३६।४) । नासत्यौ = नासिकाप्रभवौ बभूवतुरिति वा (निरुक्त ६।३।१३) । नासिका रक्त शरीर में प्रवाहित होकर शरीरके रोगों काउपचार करत।( ओर शविति ७४ प्रथववेद-माष्य का० ७ अनु० ५। सू० ५५ (ते) तेरे प्राण-अपान (इह) इस तेरे शरीर मे (सयुजौ) परस्पर मिले

English

Both worlds are his: both shine belonging unto him. Both move together: both, as his possession thrive. An invitation to Indra and Varuna

अध्याय ७

श्लोक 57.1

सरस्वती।१-२ वामदेवः।सरस्वती।जगती।यदा॒शसा॒ वद॑तो मे विचुक्षु॒भे यद् याच॑मानस्य॒ चर॑तो॒ जनाँ॒ अनु॑ ।यदा॒त्मनि॑ त॒न्वोऽमे॒ विरि॑ष्टं॒ सर॑स्वती॒ तदा पृ॑णद् घृ॒तेन॑

sarasvatī| 1-2 vāmadevaḥ| sarasvatī| jagatī| yadāśasā vadato me vicukṣubhe yad yācamānasya carato janā~ anu | yadātmani tanvo'me viriṣṭaṃ sarasvatī tadā pṛṇad ghṛtena

हिन्दी अर्थ

तुभे शरीर में निवास कराने वाली हो । है। “आयुयंजेन कल्पताम्” (यजु० €।२१; १८।२९; १२।३३) । तथा (पराचैः) पराडः मूख हो कर चली गई शारीरिक शक्तियों के कारण गई है, (तौ अपानः प्राणः) वे अपान-प्राण (पुनः) फिर (आ इताम्)

English

True to laws, Indra Varuna, drinkers of the juice, quaff this pressed Soma which shall give you rapturous joy! Let sacrifice, your car, to entertain the Gods, approach its rest- ing-place that they may drink

अध्याय ७

श्लोक 57.2

स॒प्त क्ष॑रन्ति॒ शिश॑वे म॒रुत्व॑ते पि॒त्रे पु॒त्रासो॒ अप्य॑वीवृतन्नृ॒तानि॑ ।उ॒भे इद॑स्यो॒भे अ॑स्य राजत उ॒भे य॑तेते उ॒भे अस्य पुष्यतः

sapta kṣaranti śiśave marutvate pitre putrāso apyavīvṛtannṛtāni | ubhe idasyobhe asya rājata ubhe yatete ubhe asya puṣyataḥ

हिन्दी अर्थ

आयु को (ते आत्मनि) तेरे शरीरम (पुनः) फिर (अवेशयामि) मै मेमं भाणो हांसीन्मो अपानो वहाय परा गात् । (अवहाय) इसे त्याग कर (माउ) न (परा गात्) परे चला जाय । (समप्त- षिभ्यः) सप्तषियों के लिये (एनम्) इसे (परि ददामि) म सौपता हूं (ते) का० ७॥ मनु० ५1 सू० ५५ अथर्ववेद-माष्य ७५ जाते रह जबतक येशरीरमें रहते तब वक इनकी सत्ताके कारण

English

thereof. O Indra Varuna, drink your fill, ye heroes, of this effectual and sweetest Soma. This juice was shed by us that ye might quaff it. On this trimmed grass be seated and rejoice

अध्याय ७

श्लोक 58.1

अन्नम्।१-२ कौरुपथिः।इन्द्रावरुणौ।जगती, २ त्रिष्टुप्।इन्द्रा॑वरुणा सुतपावि॒मं सु॒तं सोमं॑ पिबतं॒ मद्यं॑ धृतव्रतौ ।यु॒वो रथो॑ अध्व॒रो दे॒ववी॑तये॒ प्रति॒ स्वस॑र॒मुप॑ यातु पी॒तये॑

annam| 1-2 kaurupathiḥ| indrāvaruṇau| jagatī, 2 triṣṭup| indrāvaruṇā sutapāvimaṃ sutaṃ somaṃ pibataṃ madyaṃ dhṛtavratau | yuvo ratho adhvaro devavītaye prati svasaramupa yātu pītaye

हिन्दी अर्थ

यं जंरिम्गः हैवधिररिष्ट इह व॑भेतामर ॥५॥ करो, (इवे) जैसे कि (अनड्वाहौ ) शकटवहन-समथं दो बेल (व्रजम्) बेल- शालामे करते हँ । (श्रयम्) यह (जरिम्गः) जराका (शेवधिः) निषि अर्थात् खजाना (अरिष्टः) अह्िसित हभ (इह) इस शरीर यालोकमें (ते) तेरे (प्राणम्) प्राणको (आ सुवामसि) हम तेरी ओर प्रेरित यज्ञाग्नि (नः) हमारे रोगी कौ (आयुः) भायु को (विश्वतः) सब प्रकार से (दधत्) पूनः स्थापित कर दे)

English

you. An imprecation Like a tree struck by lightning may the man be withered from the root.

अध्याय ७

श्लोक 58.2

इन्द्रा॑वरुणा॒ मधु॑मत्तमस्य॒ वृष्णः॒ सोम॑स्य वृष॒णा वृ॑षेथाम्।इ॒दं वा॒मन्धः॒ परि॑षिक्तमा॒सद्या॒स्मिन् ब॒र्हिषि॑ मादयेथाम्

indrāvaruṇā madhumattamasya vṛṣṇaḥ somasya vṛṣaṇā vṛṣethām| idaṃ vāmandhaḥ pariṣiktamāsadyāsmin barhiṣi mādayethām

हिन्दी अर्थ

९६ प्रथवेवेद-भाष्य का०.७। भ्रनु° ५। सू० ५६ सूयं को (ग्रगन्म) हम पहुचे है । के कारण उस के सम्बन्धी शोक-तमस् से धिरे हुए थे । नाक भौर सूयको फते सद॑सि राजतो य्न देवेष यच्छतः ॥१॥ मनुष्य करते हँ । (एते) ये दोनों (सदसि) संसद् मे (राजतः) प्रदीप्त होते है, चमकते है, ओर (यज्ञम्) यज्ञ॒ को (देवेषु) वायु, जल, ्रोषधि

English

Who curseth us who curse not him, or, when we curse him. curseth us. A parting traveller’s address to the houses of his village I, prudent, bringing power, a treasure-winner, with amicable eye that strikes no terror,

अध्याय ७

श्लोक 59.1

शाप-मोचनम्।१ बादरायणिः।अरिनाशनम्।अनुष्टुप्।यो नः॒ शपा॒दश॑पतः॒ शप॑तो॒ यश्च॑ नः॒ शपा॑त्।वृ॒क्ष इ॑व वि॒द्युता॑ ह॒त आ मूला॒दनु॑ शुष्यतु

śāpa-mocanam| 1 bādarāyaṇiḥ| arināśanam| anuṣṭup| yo naḥ śapādaśapataḥ śapato yaśca naḥ śapāt| vṛkṣa iva vidyutā hata ā mūlādanu śuṣyatu

हिन्दी अर्थ

आदिमे (यच्छतः) (यच्छतः) प्रदान करते है, स्थापित करते ह का० ७॥ अनु० ५। सु० ५७ मथवेवेर्द-मा्् ५७७ मौर सामगान की णोभा संसदों में होती है, संसद् के सदस्य सामगान की प्रशंसा करते है, यह् सामगान कौ शोमा है । “(साम'' स्वरूप है, जिसे ऋचां पर गाया जाता है । यथा “ऋछच्यधिरुढं साम गीयते" इस लिये ऋक् ओर साम दोनों का कथन हुश्राहै क एष मा तस्मान्मा हिंसीद् वेदः पृष्टः स॑चीपते ॥१॥

English

Come, praising and kind-thoughted, to these houses: be not afraid of me, be glad and joyful. Let these delightful Houses that are rich in power and store of milk, Replete with wealth and standing firm, become aware of our approach.

अध्याय ७

श्लोक 60.1

रम्यं गृहम्।१-७ ब्रह्मा।गृहाः, वास्तोष्पतिः।अनुष्टुप्, १ परानुष्टुप् त्रिष्टुप्।ऊर्जं॒ बिभ्र॑द् वसु॒वनिः॑ सुमे॒धा अघो॑रेण॒ चक्षु॑षा मि॒त्रिये॑ण ।गृ॒हानैमि॑ सु॒मना॒ वन्द॑मानो॒ रम॑ध्वं॒ मा बि॑भीत॒ मत्

ramyaṃ gṛham| 1-7 brahmā| gṛhāḥ, vāstoṣpatiḥ| anuṣṭup, 1 parānuṣṭup triṣṭup| ūrjaṃ bibhrad vasuvaniḥ sumedhā aghoreṇa cakṣuṣā mitriyeṇa | gṛhānaimi sumanā vandamāno ramadhvaṃ mā bibhīta mat

हिन्दी अर्थ

(ऋचम्, साम) ऋग्वेद ओर सामवेदसे (यत्) जो (हविः, श्रोजः) हवि ओर ओज के सम्बन्ध में, ओर (यजुः) यजुवंद से (बलम्) बल के (पृष्टः) पूछा गय। (एषः वेदः) यह् वेद (मा) मुभे (मा) न (हिसीत्) हसित करे (शचीपते) है वेदवाक् के स्वामी परमेश्वर । शची वाडनाम दारा अयथार्थ ज्ञान होने पर स्वाध्यायी की मानो हिसा होती है। यथा १. ऋगवेद के याज्यामन्यों हारा हविः की श्राहुति दी जाती ह, सामगान कै परिमाणानुसार वेदि की रचना, श्राज्य के लिये गोदोहन तथा पुरोडार भ्रौर हवि के

English

These Houses we invoke, whereon the distant exile sets his thought, Wherein dwells many a friendly heart: let them beware of our approach. Thus greeted, ye of ample wealth, friends who enjoy delightful sweets.

अध्याय ७

श्लोक 60.2

इ॒मे गृ॒हा म॑यो॒भुव॒ ऊर्ज॑स्वन्तः॒ पय॑स्वन्तः ।पू॒र्णा वा॒मेन॒ तिष्ठ॑न्त॒स्ते नो॑ जानन्त्वाय॒तः

ime gṛhā mayobhuva ūrjasvantaḥ payasvantaḥ | pūrṇā vāmena tiṣṭhantaste no jānantvāyataḥ

हिन्दी अर्थ

७८ -मथवेवेद-भाष्य का० ७1 श्रनु० ५। सु० ५८ वेदतोकव्यहै, प्रतःकव्यकी रीतिसे वेद में वस्तुवणेन होता दहै। (वसो) है वस्ने वाले (ये ते पन्थानः) जो तेरे मां (दिवः) चुलोक सब सौर परिवारको (एेरयः) तुभ्रेरणा देरहा हे, (तेभिः) उन मार्गौ दारा (नः) हमें (सुम्नया) सुख में (धेहि) स्थापित कर 1

English

Be ever free from hunger, free from thirst! Ye Houses, fear us not. Kind greeting to the cattle here, kind greeting to the goats and sheep! Then, of the food within our homes, kind greeting to the plea- sant drink!

अध्याय ७

श्लोक 60.3

येषा॑म॒ध्येति॑ प्र॒वस॒न् येषु॑ सौमन॒सो ब॒हुः ।गृ॒हानुप॑ ह्वयामहे॒ ते नो॑ जानन्त्वाय॒तः

yeṣāmadhyeti pravasan yeṣu saumanaso bahuḥ | gṛhānupa hvayāmahe te no jānantvāyataḥ

हिन्दी अर्थ

ऽभऽला) की प्रेरणा वसुनामक परमेश्वर करता है, जिसे कि मन्त्र (१) में ‹ शचीपति” भी कहा है । शवो का अथं क्म” भी है, यथा “शची क्म- नाम” (निषं० २।१) । मन्व मे देरयः“ द्वारा प्रेरणा का कथन हुभा है, अतः प्रेरक को कर्माधिपति होना चाहिए । पांच चितियों का वणन मकत्करृत चितिः प° ६२४; पञ्चमी चितिः पृ० १५०। चतुर्थी चित्ति को जव- तिर॑रिविराजेरसितात् पृदांकोः परि सत् । (तिरश्चचिराजेः) टेढी रेखाओं वाले सपं से, (असितात्) काले सपं से, का० ७। अनु° ५। सु० ५८ भ्रथवेवेद-माष्य ७६

English

Full of refreshment, full of charms, of laughter and felicity, Be ever free from hunger, free from thirst! Ye Houses, fear us not. 112

अध्याय ७

श्लोक 60.4

उप॑हूता॒ भूरि॑धनाः॒ सखा॑यः स्वा॒दुसं॑मुदः ।अ॒क्षु॒ध्या अ॑तृ॒ष्या स्त॒ गृहा॒ मास्मद् बि॑भीतन

upahūtā bhūridhanāḥ sakhāyaḥ svādusaṃmudaḥ | akṣudhyā atṛṣyā sta gṛhā māsmad bibhītana

हिन्दी अर्थ

ग्रोषधि ने श्रनीनशत्) नष्ट करदियाहै।! -; तिरषश्चिराजि भादि ४ सपविशेष है1 इनके विष कौ नाशिका “विरद्” कही है । सायण के ब्रनुसार ओषधि “मधुक या मधुका” हे) के लिये “परवल” कौ जड़ के चूर्णं की नस्म देने का विधान “चक्रदत्त'" मं ह्यं वीरुन्मघुजाता मधुश्चुन्मधुला मधूः ।

English

Stay here, and come not after me: prosper in every form and shape. With happy fortune will I come! Grow more abundant still through me! A prayer for sacred knowledge and its fruits

अध्याय ७

श्लोक 60.5

उप॑हूता इ॒ह गाव॒ उप॑हूता अजा॒वयः॑ ।अथो॒ अन्न॑स्य की॒लाल॒ उप॑हूतो गृ॒हेषु॑ नः

upahūtā iha gāva upahūtā ajāvayaḥ | atho annasya kīlāla upahūto gṛheṣu naḥ

हिन्दी अर्थ

(इयम्) यह् (वीरुत्) श्रोषधि (मधजाता) मध को जड़ से या मधु- रूप पैदा हुई है, (मधृणष्चत्) मधृलाविणी है, (मघृला) मधुमती है, (मधूः) मधू नामवाली है । (सा) वह् (विहतस्य) अंगको कुटिल कर देने वाले विष की (भेषजी ) चिकित्सिका है, (ग्रथो) तथा (मशकजम्भनी) मच्छर अन्य कई ओषधियों कं योग के साथ “महागर” नामक प्रयोग मेँ हुभा है । से (धीतम्) उसने रक्त पिया है, (ते) तेरे (ततः) उस स्थान से (निः 1, अथवेवेद-भाष्य .का० ७। अनु० ५।स्० ५८ (यः अयम्) जो यह त्रु है सपेदष्ट पुरुष (वक्रः) कुटिलावयव,

English

Since, Agni, with our fervent zeal we undergo austerity, May we be dear to Sacred Lore, may we be wise and live long lives. Agni, we practise acts austere, we undergo austerity.

अध्याय ७

श्लोक 60.6

सू॒नृता॑वन्तः सु॒भगा॒ इरा॑वन्तो हसामु॒दाः ।अ॒तृ॒ष्या अ॑क्षु॒ध्या स्त॒ गृहा॒ मास्मद् बि॑भीतन

sūnṛtāvantaḥ subhagā irāvanto hasāmudāḥ | atṛṣyā akṣudhyā sta gṛhā māsmad bibhītana

हिन्दी अर्थ

वयवों को (वक्रा) विकृत तथा (वृजिना) वर्जनीयरूपी (कृणोषि) कर टेढ सरकण्डे को नम्र अर्थात् ऋजु किया जाता है। अरसस्यं शर्कारस्य नीचीन॑स्योपसपैतः विष को (आ अदिषि) मैने खण्डित कर दियाहै (ग्रथो) तथा ( एनम्) हसे (ग्रजीजभम्) मारदियादहै।

English

So listening to Holy Lore may we grow wise and full of days. A prayer for the overthrow of enemies Like a car-warrior, Agni here, grown mighty, Lord of the brave,

अध्याय ७

श्लोक 60.7

इ॒हैव स्त॒ मानु॑ गात॒ विश्वा॑ रू॒पाणि॑ पुष्यत ।ऐष्या॑मि भ॒द्रेणा॑ स॒ह भूयां॑सो भवता॒ मया॑

ihaiva sta mānu gāta viśvā rūpāṇi puṣyata | aiṣyāmi bhadreṇā saha bhūyāṃso bhavatā mayā

हिन्दी अर्थ

वाला है) प्रदिषि= लु, लकार, दौ अवखण्डने (दिवादिः) प्रजीजभम्. (न ते बाह्लोः बलम्) न तेरी बहुशो मे बल (ग्रस्त) है, (न शीषं) न सिर मे, (उत न) ओर न (मध्यतः) मध्यावयव में है। (अय किम्) १. “शकटः” शर् शु (हितायाम् ) -+-कः (करोति) अद् (श्रटति), हा करता . का० ७1 श्रनु० द भरु ५९ अथर्ववेदमाष्य ८१

English

Chief Priest, hath conquered footmen. Laid on earth’s centre he hath flashed and glittered. Low may he lay our enemies beneath us. A prayer for deliverance from affliction

अध्याय ७

श्लोक 61.1

तपः।१-२ अथर्वा।अग्निः।अनुष्टुप्।यद॑ग्ने॒ तप॑सा॒ तप॑ उपत॒प्याम॑हे॒ तपः॑ ।प्रि॒याः श्रु॒तस्य॑ भूया॒स्मायु॑ष्मन्तः सुमे॒धसः॑

tapaḥ| 1-2 atharvā| agniḥ| anuṣṭup| yadagne tapasā tapa upatapyāmahe tapaḥ | priyāḥ śrutasya bhūyāsmāyuṣmantaḥ sumedhasaḥ

हिन्दी अर्थ

अदन्ति तवा प्ििपीशिका वि दस्चन्ति पयु । (त्वा) तुभे (पिपीलिकाः) चूियां (ग्रदन्ति) खाती है, (मयूर्यः) मूख मे (न विषम्) विष नहीं है (किमु) क्याही (ते) तेरे (पृच्छघौ) पुच्छनिष्ठ काटि मे (असत्) हो । भोज्य पर, ओर पुच्छधि द्वारा प्राणी पर! सपंके मुखमें विष होतादहै, बिच्छुके मुख में विष नहीं होता । इसकी पृ मे विष होता है, वहमभी

English

We call with lauds from his most lofty dwelling victorious Agni, conqueror in battles. May he conveyus over all distresses, may the God Agni bear us past our troubles. A charm to avert an evil omen

अध्याय ७

श्लोक 61.2

अग्ने॒ तप॑स्तप्यामह॒ उप॑ तप्यामहे॒ तपः॑ ।श्रु॒तानि॑ शृ॒ण्वन्तो॑ व॒यमायु॑ष्मन्तः सुमे॒धसः॑

agne tapastapyāmaha upa tapyāmahe tapaḥ | śrutāni śṛṇvanto vayamāyuṣmantaḥ sumedhasaḥ

हिन्दी अर्थ

तस्मिन्, पुच्छ मे निहित काष्टे मे । (१-२) वामदेवः । सरस्वती । जगती । (ग्राशसा) आशापू्वंक (वदतः) भिक्षा के लियै बोलते हुए (यत्) जो (मे) मेरा मन (विचुक्षुभे) विकषुन्ध हृभा है, सं चलित हभ है, (यद् याचमानस्य) तथा याचना करते हुए (जनान् अनु) जन-जन के पीषछठ-पीछे (चरतः) चलते हुए मेरा मन (यत्) जो विक्षुन्ध हुमा है । (मे) मेरी "८२ ;्रथेवेवेद-भाष्य का०छ॥ श्नु० ५। सू० ६० लगी है, (सरस्वती) ५.4. पारमेश्वरीश.म्तै (तद्) उस सब को (ग्रा पणत्) आपूरित कड्.दे, (घृतेन) जंसे कि चाटमकको घृत द्वारा आपूरित कियाजाता.है,भरा जातारहै

English

From all that woe and trouble may the Waters save and rescue me, Whate’er the Raven, black of hue, flying out hither ward, hath dropped. May Agni Gārhapatya save and set me free from all this guilt.

अध्याय ७

श्लोक 62.1

शत्रुनाशनम्।१ मरीचिःकाश्यपः।अग्निः।जगती।अ॒यम॒ग्निः सत्प॑तिर्वृ॒द्धवृ॑ष्णो र॒थीव॑ प॒त्तीन॑जयत् पु॒रोहि॑तः ।नाभा॑ पृथि॒व्यां निहि॑तो॒ दवि॑द्युतदधस्प॒दं कृ॑णुतां॒ ये पृ॑त॒न्यवः॑

śatrunāśanam| 1 marīciḥkāśyapaḥ| agniḥ| jagatī| ayamagniḥ satpatirvṛddhavṛṣṇo rathīva pattīnajayat purohitaḥ | nābhā pṛthivyāṃ nihito davidyutadadhaspadaṃ kṛṇutāṃ ye pṛtanyavaḥ

हिन्दी अर्थ

किसी ने कुछ दिया नही, अतः उस की आत्मामें चोट लगीदहै, भौर वह् पारमेश्वरी माता से तदथं शान्ति चाहतादहै। (शिशवे) शरीरम शयन किये हुए, (मरुत्वते) प्राणों के स्वामी, तब (उभे इत्) दोनों ही, परथिवी ग्रौर यौः (अस्य) इसके हौ जाते है, (उभे) दोनों (यतेते) यत्न करते दहै, (उभे) दोनों (अस्य) इस के लिये (पुष्यत्तः) पोषण करने लगते हैँ । ि

English

Which the black Raven with thy mouth, O Nirriti, hath wiped away. A charm against imprecation and threatened evils With retroverted fruit hast thou, O Apāmārga, sprung and grown.

अध्याय ७

श्लोक 63.1

दुरितनाशनम्।१ मरीचिः काश्यपः।जातवेदाः।जगती।पृ॒त॒ना॒जितं॒ सह॑मानम॒ग्निमु॒क्थ्यैर्ह॑वामहे पर॒मात् स॒धस्था॑त्।स नः॑ पर्ष॒दति॑ दु॒र्गाणि॒ विश्वा॒ क्षाम॑द् दे॒वोऽति॑ दुरि॒तान्य॒ग्निः

duritanāśanam| 1 marīciḥ kāśyapaḥ| jātavedāḥ| jagatī| pṛtanājitaṃ sahamānamagnimukthyairhavāmahe paramāt sadhasthāt| sa naḥ parṣadati durgāṇi viśvā kṣāmad devo'ti duritānyagniḥ

हिन्दी अर्थ

म्बन करलेतेरहै, तव समग्र जगत् इस देही का अपना हौ जातादहै, ओर रस के सुख तथा परिपोषण में तत्पर हो जाता हैः। इस द्वारा भिक्षार्थी को यह् सुफाया है कि तेरे “सात'' असन्मार्गी है जिस से तुभ भिक्षामेभी चोट हो जायेगा, ओर तेरा पोषण करने लग जायेगा । राजति: रेश्वयकर्मा (निषं० २।२१) । .शिशवे -=अनृतमागियों के जीत्रात्मा मनो सोए हृए होते युवो रथो अध्वरो देववीतये भ्रति स्वस॑रमुपं यातु पीतये ॥१॥ का० ७ 1 श्रनु° ५।.स्० ६१ अथवेवेद-भाष्य १.

English

Hence into distance most remote drive every curse away from, me. Whatever evil we have done, whatever vile or sinful act, With thee, O Apāmārga, who lookest all ways, we wipe it off.

अध्याय ७

श्लोक 64.1

पापमोचनम्।१-२ यमः।आपः, अग्निः, निर्ऋतिः।१ भुरिगनुष्टुप्, २ न्यङ्कुसारिणी बृहती।इ॒दं यत् कृ॒ष्णः श॒कुनि॑रभिनि॒ष्पत॒न्नपी॑पतत्।आपो॑ मा॒ तस्मा॒त् सर्व॑स्माद् दुरि॒तात् पा॒न्त्वंह॑सः

pāpamocanam| 1-2 yamaḥ| āpaḥ, agniḥ, nirṛtiḥ| 1 bhuriganuṣṭup, 2 nyaṅkusāriṇī bṛhatī| idaṃ yat kṛṣṇaḥ śakunirabhiniṣpatannapīpatat| āpo mā tasmāt sarvasmād duritāt pāntvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

अभिषृत सोम के पीने वाले (दमम्, सुतम्, सोमम्) .इस अभिषुत सोम को जिन्टोने प्रजापालन का. व्रत धारण कियारहै। (युवोः) तुम दोनोंका गृहो के प्रति (उपयातु) आए, (देववीतये) तुम्हरे दिभ्य भोज कं लिये, दवारा करना चाहिए । मद्यम् = मदी हषं ।

English

If with the cripple we have lived, whose teeth are black and nails deformed, With thee, O Apāmārga, we wipe all that ill away from us. A prayer to Vāk

अध्याय ७

श्लोक 64.2

इ॒दं यत् कृ॒ष्णः श॒कुनि॑र॒वामृ॑क्षन्निरृते ते॒ मुखे॑न ।अ॒ग्निर्मा॒ तस्मा॒देन॑सो॒ गार्ह॑पत्यः॒ प्र मु॑ञ्चतु

idaṃ yat kṛṣṇaḥ śakuniravāmṛkṣannirṛte te mukhena | agnirmā tasmādenaso gārhapatyaḥ pra muñcatu

हिन्दी अर्थ

दिया है, (स्मिन्) इस (व्िषि) महाशाला मे (ग्रासय) बेठकर (मादः णाला चाहिए । अथवे० ९।३।२९१ मे महाशालाका वणन भी दे ।म्नन्धः (अणपतः नः) शप न देते हुए हमे (यः) जो (षात्) शाप देवे, (च). 1. अथवेवेद-माष्य का० ७ । भ्रनु° ६1 सू° ६२ जीर प्रतयत्तर में (यः) जो (शपतः नः) शाप देते हृए हम (शपात्) पुनः शाप देवे, वह (विदयता हतः) विचत् द्वारा मारे गये (वृक्षःइव) वृक्ष कं सदृश (ग्रा मूलात्) मूल से (अनु) अनुक्रमपूवेक (शुष्य तु) सूख जाय ।

English

If it was in the wind or air’s mid-region, if it was in the trees or in the bushes, To meet whose utterance forth streamed the cattle, may that. Celestial Power again approach us.

अध्याय ७

श्लोक 65.1

दुरितनाशनम्।१-३ शुक्रः।अपामार्गवीरुत।अनुष्टुप्।प्र॒ती॒चीन॑फलो॒ हि त्वमपा॑मार्ग रु॒रोहि॑थ ।सर्वा॒न् मच्छ॒पथाँ अधि॒ वरी॑यो यावया इ॒तः

duritanāśanam| 1-3 śukraḥ| apāmārgavīruta| anuṣṭup| pratīcīnaphalo hi tvamapāmārga rurohitha | sarvān macchapathā~ adhi varīyo yāvayā itaḥ

हिन्दी अर्थ

(सायण) । वृक्ष पर जब विदयुत्पात होता है तो वह् जड़ समेत सूख जाता है, इसी प्रकार शाप देने वाला भी सूख जाय, एेसी भावना प्रकट कौ गर्द है। शाप देने वालेकामूलयातो सिर ्रभिप्रेतहै, यापाद। तात्पयंेसे व्यक्तियों के विनाश से है । सामाजिक जीवन प्रेममयदहो जाताहै। तथा “यः भौर "नः” मे व्यक्ति ओर समाज का भी ध्यान रखना होता है । सप्तम काण्ड का पञ्चम अवाक समाप्त का विभाग करने वाला, (सुमेधाः) उत्तम मेधा वाला, तथा (ग्रघोरेण) वासियों के पास (एेमि') मे भ्राता हूं। (समनाः) सुप्रसन्न मन वाला,

English

A priest’s prayer to the Agnayo Dhishnyāh May sense return to me again, and spirit, return my Sacred Power and my possessions!

अध्याय ७

श्लोक 65.2

यद् दु॑ष्कृ॒तं यच्छम॑लं॒ यद् वा चेरि॒म पा॒पया॑ ।त्वया॒ तद् वि॑श्वतोमु॒खापा॑मा॒र्गाप॑ मृज्महे

yad duṣkṛtaṃ yacchamalaṃ yad vā cerima pāpayā | tvayā tad viśvatomukhāpāmārgāpa mṛjmahe

हिन्दी अर्थ

(मत्) मुक से (मा बिभीत) भयन करो। वणेन से प्रतीत होता है कि ृहपति, घनाजेन ऊ लिये, बहुकाल तक घर् से बाहर रहा है, गौर उसकी मुखाकृति आदि में पर्यप्त श्रन्तर आ गया है । इसलिये वह् निज परिवार को गृहपति होने का विश्वास दिला रहा है । १. एेमि, रायतः नः == एक वचन तथा बहुवचन एक हौ भ्यक्ति के निदेशक है, फा० ७ । अनु० ६। सु° ६२ अथवंवेद-भाष्य प भुवः) सुखदायी होते है, (ते) वे गृह भर्थात् गृहवासौ (आयतः नः ) आते हर हमें (जानन्तु) जान ले, पहचान लं 1

English

Again let fires, aflame on lesser altars, each duly stationed, here succeed and prosper. 113 A prayer for children and prosperity

अध्याय ७

श्लोक 65.3

श्या॒वद॑ता कुन॒खिना॑ ब॒ण्डेन॒ यत् स॒हासि॒म।अपा॑मार्ग॒ त्वया॑ व॒यं सर्वं॒ तदप॑ मृज्महे

śyāvadatā kunakhinā baṇḍena yat sahāsima| apāmārga tvayā vayaṃ sarvaṃ tadapa mṛjmahe

हिन्दी अर्थ

गहाः पद द्चर्थक है,णालारूप, तथा गृहवासी" 1 गृहवासियो के सम्बन्ध सुख है एेन्दरियिक, ओर मयः है मानसिक सन्तोष रूपी । सुखम् =सु सेभ्यः, इन्द्रियेभ्यः । गृहाुपं ह्यामहै ते नो जानन्त्वायतः ॥२॥ है, (येषु) जिन में (बहुः) बहुत (सौमनसः) सौमनस्य है, (गृहान्) उन गृहो भ्र्थात् गृहवासियों को (उप ह्वयामहे) हम आदरपू्वक बुलाते ह (ते) वे (ग्रयतः नः+) हम श्राते हुओं को (जानन्तु) जान लं, परिचान लं ।

English

Sarasvati, in thy decrees, Goddess, in thy celestial laws, Accept the offered sacrifice, and, Goddess, grant us progeny. Here is, Sarasvati, thy fat libation, this sacrifice passing to the mouth of Fathers.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Atharva Veda — Chapter 7
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.