अध्याय ७
श्लोक 66.1
ब्रह्म।१ ब्रह्म।ब्रह्म।त्रिष्टुप्।यद्य॒न्तरि॑क्षे॒ यदि॒ वात॒ आस॒ यदि॑ वृ॒क्षेषु॒ यदि॒ वोल॑पेषु ।यदश्र॑वन् प॒शव॑ उ॒द्यमा॑नं॒ तद् ब्राह्म॑णं॒ पुन॑र॒स्मानु॒पैतु॑
brahma| 1 brahma| brahma| triṣṭup| yadyantarikṣe yadi vāta āsa yadi vṛkṣeṣu yadi volapeṣu | yadaśravan paśava udyamānaṃ tad brāhmaṇaṃ punarasmānupaitu
हिन्दी अर्थ
सौमनसः--मन की प्रसन्नता, प्रीत्यतिशय । (भूरिधनाः) बहुधनी, (स्वादुसंमुदः) स्वादु भोजनों में हषं का भ्रनुभव करने वाले (सखायः) सखा (उपहूताः) सत्कारपूवेक निमन्वित किये रहः (गृहाः) है गृहवासियों ! (मा अस्मत् विभौतन ) हमारे इस काम गृहपति प्रवास से बहुत घनोपाजन कर (मन्त्र १) घर श्राया है। ६ थरवंवेद-भाष्य को० ७. भनु ६ । मू० ६२ है । इस निमन्त्रण में वहत घनं का व्यय होगा, यह् जानकर गृहवासी पय- भीत हौ गये । गहपति उन्दः विश्वास दिलाता है कि तुम किसी प्रकार भी क्षुधा तृष्णा से पीडित न होभोगे, मँ पर्याप्त धनोपाजैन कर लाया हूं 1
English
These most auspicious offerings have ascended to thee: through, these may we be full of sweetness. Be kind and most auspicious, be gracious to us, Sarasvati, May we be ever in thy sight.