Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
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अध्याय 8 / 20

Kanda 8

काण्ड 8

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पूर्ण अध्याय पाठ148 श्लोक

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अध्याय ८

श्लोक 1.1

दीर्घायुःप्राप्तिः।१-२१ ब्रह्मा।आयुः।त्रिष्टुप्, १ पुरोबृहती त्रिष्टुप्, २-३, १७-२१ अनुष्टुप्, ४,९,१५-१६ प्रस्तारपङ्क्तिः, ७ त्रिपदा विराड् गायत्री, ८ विराट् पथ्याबृहती, १२ त्र्यवसाना पञ्चपदा जगती, १३ त्रिपदा भुरिङ्महाबृहती, १४ एकावसाना द्विपदा साम्नी भुरिग्बृहती।अन्त॑काय मृ॒त्यवे॒ नमः॑ प्रा॒णा अ॑पा॒ना इ॒ह ते॑ रमन्ताम्।इ॒हायम॑स्तु॒ पुरु॑षः स॒हासु॑ना॒ सूर्य॑स्य भा॒गे अ॒मृत॑स्य लो॒के

dīrghāyuḥprāptiḥ| 1-21 brahmā| āyuḥ| triṣṭup, 1 purobṛhatī triṣṭup, 2-3, 17-21 anuṣṭup, 4,9,15-16 prastārapaṅktiḥ, 7 tripadā virāḍ gāyatrī, 8 virāṭ pathyābṛhatī, 12 tryavasānā pañcapadā jagatī, 13 tripadā bhuriṅmahābṛhatī, 14 ekāvasānā dvipadā sāmnī bhurigbṛhatī| antakāya mṛtyave namaḥ prāṇā apānā iha te ramantām| ihāyamastu puruṣaḥ sahāsunā sūryasya bhāge amṛtasya loke

हिन्दी अर्थ

पूरुष का । कौशिक सूत्रों मेँ माणवक के उपनयनकर्मं मे मन्त्र का विनियोग किया है ) अथवं० १३।४ (२) मे परमेश्वर को “मृत्य” कहा है । यथा “स मेष्वर को नमस्कार किया है । साय ही पुरुष पद द्वारा माणवक को सम्बो- पित कर उसेकहाहैकितु एसे स्थानम वासकरजो क्रि सूयं के प्रकाश वाला हो, प्रकाशरहित गृहों में निवास न कर । यथा “तावां वारतून्युष्मसि ¦ अमृत कालोक है पृथिवी । योगाङ्खों के. अनुष्ठान से योगी पृथिवीम मुक्तात्मा हो सकता है । भागे भज सेवायाम् । ष्देनं म॒रुतो देवा उदिं्राग्नी स्वस्तये ॥२॥ (भगः) भजनीय परमेश्वर ने (उद्) इसकी उन्नति के लिये (एनम्) इस

English

A charm to recover a dying man Homage to Death the Ender! May thy breathings, inward and outward, still remain within

अध्याय ८

श्लोक 1.2

उदे॑नं॒ भगो॑ अग्रभी॒दुदे॑नं॒ सोमो॑ अंशु॒मान्।उदे॑नं म॒रुतो॑ दे॒वा उदि॑न्द्रा॒ग्नी स्व॒स्तये॑

udenaṃ bhago agrabhīdudenaṃ somo aṃśumān| udenaṃ maruto devā udindrāgnī svastaye

हिन्दी अर्थ

तदनुरूप (्वयामसि) हम आचार्यं आह्वान करते ह । समुदे = संमोदाय (सायण); समुदे =मोदसहित होने के लिये । दधातु = धारण करे; वायु श्रादि प्रत्येक, अथवा इन सबका समुदाय । रचः मज्ञानाम (निषं° ३।६) । उपनीत-ब्रहमचारी के लिये कहा है कितु . प्राणियों के मोद अर्थात् हषं को इन की सेवा करके बढ़ाया कर । इन्दं (जम्भः) दाढ़ (संहनुः) परस्पर मिलकर (त्वा) तेरा हनन (मा) न (सायण) । जरहमचारी के लिये कहाहैकि “दिवा मा स्वाप्सीः" । कितु णतु; श्रातो युक् चिणृकरतोः (म्रष्टा० ७।३।३३) ।

English

Rise up from darkness into light: come, both thy hands we clasp in ours. Let not the black dog and the brindled seize thee, two warders of the way sent forth by Yama.

अध्याय ८

श्लोक 1.3

इ॒ह तेऽसु॑रि॒ह प्रा॒ण इ॒हायु॑रि॒ह ते॒ मनः॑ ।उत् त्वा॒ निरृ॑त्याः॒ पाशे॑भ्यो॒ दैव्या॑ वा॒चा भ॑रामसि

iha te'suriha prāṇa ihāyuriha te manaḥ | ut tvā nirṛtyāḥ pāśebhyo daivyā vācā bharāmasi

हिन्दी अर्थ

माणवक (इह एव अस्तु) यहां ही रहे, (्रयम्) यह (इतः) इस स्थान से त्मिकं तथा लौकिक सामथ्यं हैँ । यथा (अथर्वं० ४।१३।५-७) । धसः) आयु को धारण कराने वाली घमनियां (स धमन्तु) सब घड़कने लगे रुदन् ) न रोएुं, (अघरुदः) व्यसन अर्थात् दुःख आने पर रोदन करने वाले अर्थात् घमनियों का धड़कना श्रभिप्रेत है ।

English

Thy guardian be Vaisvānara Jātavedas; let not celestial Fire with lightning burn thee. Let not the Flesh-Consumer plot against thee: depart thou far away from the Destroyer.

अध्याय ८

श्लोक 1.4

उत् क्रा॒मातः॑ पुरुष॒ माव॑ पत्था मृ॒त्योः पड्वी॑षमवमु॒ञ्चमा॑नः ।मा च्छि॑त्था अ॒स्माल्लो॒काद॒ग्नेः सूर्य॑स्य सं॒दृशः॑

ut krāmātaḥ puruṣa māva patthā mṛtyoḥ paḍvīṣamavamuñcamānaḥ | mā cchitthā asmāllokādagneḥ sūryasya saṃdṛśaḥ

हिन्दी अर्थ

तुभे प्राप्त कर लिया दहै, (पुनः) फिरतू (आ अगः) आ गया है, (पूनणवः) श्रायु (अविदम्) मैने प्राप्त करादी दहै। विगत हो गया है, नष्ट हो गया है । (३) ब्रह्मरूपी वमं कवच का धारण (मन्व १०; २५) । । ५) केश एमश्र का वपन (मन्त १७ ) 1 ६) ्ह्यचारी के लिये भोजन, ( मे

English

Be Heaven and Earth and Sun and Moon thy keepers, and from the dart of Gods may Air protect thee.

अध्याय ८

श्लोक 1.5

तुभ्यं॒ वातः॑ पवतां मात॒रिश्वा॒ तुभ्यं॑ वर्षन्त्व॒मृता॒न्यापः॑ ।सूर्य॑स्ते त॒न्वे॒३शं त॑पाति॒ त्वां मृ॒त्युर्द॑यतां॒ मा प्र मे॑ष्ठाः

tubhyaṃ vātaḥ pavatāṃ mātariśvā tubhyaṃ varṣantvamṛtānyāpaḥ | sūryaste tanve3śaṃ tapāti tvāṃ mṛtyurdayatāṃ mā pra meṣṭhāḥ

हिन्दी अर्थ

(७) ब्रह्मचारी को युगो ओर ीं युगकालो के। परिज्ञान देना (मन्त्र (८) जीवन की परिषि ब्रह्म (मन्त्र २५) 1 न ( १०) “भूतु” भेषज है, रोगनाशक (मन्त्र २८ ) । कर यह ध्वनित फियाहैकरिं व + धदवत है कि वेदिक नामपद योगिकार्थक ह का० ८ । सूु०र२ भ्रथर्ववेद-भाष्य १८९१ यह उक्ति उपनीत माणवक के आचायं की है “रलयोरभेदः'' द्वारा

English

May Vigilance and Watchfulness protect thee, Sleepless and Slumberless keep guard above thee!

अध्याय ८

श्लोक 1.6

उ॒द्यानं॑ ते पुरुष॒ नाव॒यानं॑ जी॒वातुं॑ ते॒ दक्ष॑तातिं कृणोमि ।आ हि रोहे॒मम॒मृतं॑ सु॒खं रथ॒मथ॒ जिर्वि॑र्वि॒दथ॒मा व॑दासि

udyānaṃ te puruṣa nāvayānaṃ jīvātuṃ te dakṣatātiṃ kṛṇomi | ā hi rohemamamṛtaṃ sukhaṃ rathamatha jirvirvidathamā vadāsi

हिन्दी अर्थ

आहरामि, “दु्रहोभश्च्छन्दसि" द्वारा हकार को भकार हुआ है । सदियों श्र्थात् शरदुतुभों तक जोवित होने के लिये (त्वा) तुभे (भा हरामि) कतव्य है कि वह ब्रह्मचारी का रोगोपचार करे २. यह भ्राचायं का कथन है । ब्रह्मचारी यदिरूण हो गयादौ तो प्राचायं का १८२ अथववेद-भाष्य का०८। सू० बच्चो के ग्राचायं कंसे होने चादि, इसका वणेन सूक्त १ बौर

English

Let Guardian and let Wakeful be thy warders. Let these be thy preservers, these thy keepers. All hail to these, to these be lowly worship!

अध्याय ८

श्लोक 1.7

मा ते॒ मन॒स्तत्र॑ गा॒न्मा ति॒रो भू॒न्मा जी॒वेभ्यः॒ प्र म॑दो॒ मानु॑ गाः पि॒तॄन्।विश्वे॑ दे॒वा अ॒भि र॑क्षन्तु त्वे॒ह

mā te manastatra gānmā tiro bhūnmā jīvebhyaḥ pra mado mānu gāḥ pitṝn| viśve devā abhi rakṣantu tveha

हिन्दी अर्थ

(अहम्) मने पाया है । (यत्) जो (ते) तेरा (मनः) मन है (तत्) त , माणवक कौ खुल श्रन्तरिक्षीय वायु मे रखना चाहिए, तथा न्धे श्रध्यापन होना चाहिए । उसके मन मे स्थिरता पैदा करनी चाहिए, मन की व्यथं को बातचीत से उसे रोकना चाहिए । उसे ठीक प्रकार बोलना सिखाना चहिये । अथवा मूर्छा तथा रोग के क(रण माणवक के प्राण तथा चक्षुः आदि उद्यो मेजोक्षति भ्रा गई है, ओौर मनोविकार हो गया है, तथा प्रं विष्ेत हो गया है, म्रौर बोलने मे जिह्वा का पक्षाघात हो गया है; इन सब नमस्ते मृत्यो चष नम॑ः भराणाय तेऽकरम् ॥४॥

English

May saving Savitar, Vāyu, Indra, Dhātar restore thee to com- munion with the living. Let not thy vigour or thy breath forsake thee: we recall thy life.

अध्याय ८

श्लोक 1.8

मा ग॒ताना॒मा दी॑धीथा॒ ये नय॑न्ति परा॒वत॑म्।आ रो॑ह॒ तम॑सो॒ ज्योति॒रेह्या ते॒ हस्तौ॑ रभामहे

mā gatānāmā dīdhīthā ye nayanti parāvatam| ā roha tamaso jyotirehyā te hastau rabhāmahe

हिन्दी अर्थ

(त्वा अरि) है माणवक तुक पर (संघमामिः) मँ ्राचायं प्रण फूकता हू, १. ““संघमामि द्वारा ्धौकनी नूचित होती है । श्रनः सम्भवतः बौकनी द्वारा ¶वे आदि द्वारा फका जाता है । (मृत्यो) ह । इस निमित्त श्राचायं मुत्युनामक परमेश्वर की गै करता हूं, य। मैने किया है।

English

Let not the fiend with snapping jaws, nor darkness find thee: tongue, holy grass: how shouldst thou perish?

अध्याय ८

श्लोक 1.9

श्या॒मश्च॑ त्वा॒ मा श॒बल॑श्च॒ प्रेषि॑तौ य॒मस्य॒ यौ प॑थि॒रक्षी॒ श्वानौ॑ ।अ॒र्वाङेहि॒ मा वि दी॑ध्यो॒ मात्र॑ तिष्ठः॒ परा॑ङ्मनाः

śyāmaśca tvā mā śabalaśca preṣitau yamasya yau pathirakṣī śvānau | arvāṅehi mā vi dīdhyo mātra tiṣṭhaḥ parāṅmanāḥ

हिन्दी अर्थ

माणवकं के स्वास्थ्य के लिये, उसे निज मुख प्रादि दवारा हारा मैँ प्राचा ह माणवक ! तुमे, फक करप्र (अयम्) यह (जीवतु) जीए, (म। मृत) न मरे (इमम्) इसे (समीरः लिये (भेषजम्) ओषध (कृणोमि) मै आचाय या वद्य करता हूं, (मृत्यो )हे समीरयामसि = अन्तरिक्षस्थ वायु को "समीरण कहते है, जोकि “ सम्" सम्यकृतया “ईरण गति करती रहती है । सम्+ ईर् (गतौ) । इस लिथे वायु का नाम “सदागति” भी है । सदा गति करने के कारण इसको णुद्धता को सूचित किया हे, अतः यह प्राणप्रद है । “मा मृत" द्वारा सूचित

English

May the Ādityas and the Vasus, Indra and Agni raise thee and to health restore thee. The Sky hath raised thee, and the Earth, Prajāpati hath raised thee up.

अध्याय ८

श्लोक 1.10

मैतं पन्था॒मनु॑ गा भी॒म ए॒ष येन॒ पूर्वं॒ नेयथ॒ तं ब्र॑वीमि ।तम॑ ए॒तत् पु॑रुष॒ मा प्र प॑त्था भ॒यं प॒रस्ता॒दभ॑यं ते अ॒र्वाक्

maitaṃ panthāmanu gā bhīma eṣa yena pūrvaṃ neyatha taṃ bravīmi | tama etat puruṣa mā pra patthā bhayaṃ parastādabhayaṃ te arvāk

हिन्दी अर्थ

व्यवह्।रयु तस्तुतिमोद आदि (दिवादिः) का० ८। सू° १ अथवेवेद-माष्य १७१ (इह) इस पृथिवी भें (ते) तेरी (असुः) प्रज्ञा हो, (इह) इसमे (भाणः) प्राणापान क्रिया हो, (इह) इसमे (आयुः) पूणे श्रायु हो, (इह) इसमें (ते) से मुक्त रह सकता है । असुः प्रज्ञानाम (निषं० ३।६) । (पुरुष) है पुरुष ! (मृत्योः) मृत्यु के (पडवीशम्) पादबन्धन को

English

thee. Here stay this man united with his spirit in the Sun’s realm, the world of life eternal!

अध्याय ८

श्लोक 1.11

रक्ष॑न्तु त्वा॒ग्नयो॒ ये अ॒प्स्व॑१न्ता रक्ष॑तु त्वा मनु॒ष्या॒३ यमि॒न्धते॑ ।वै॒श्वा॒न॒रो र॑क्षतु जा॒तवे॑दा दि॒व्यस्त्वा॒ मा प्र धा॑ग् वि॒द्युता॑ स॒ह

rakṣantu tvāgnayo ye apsva1ntā rakṣatu tvā manuṣyā3 yamindhate | vaiśvānaro rakṣatu jātavedā divyastvā mā pra dhāg vidyutā saha

हिन्दी अर्थ

को ओर तु पग बढा, (मा श्रवपत्थाः) नीचे की भोर अपना पतन न कर। बन्धन बेडियां । मन्त्रम निराश हुए पुरुष को निराशा से मुक्त करने के लिये प्रोत््ाहित किया है । रक्षा करेया तुक पर दया करे, (मा प्रमेष्ठाः) ताकि तु हिसितन दहो) अमृतानि जल, ननाविघ अन्न, फल, सन्नी आदि अमूत वस्तुं ह, जिनको दानगतिरक्षणहिसादानेषु (भ्वादिः) में “दय” क अर्थं

English

Bhaga hath lifted up this man, and Soma with his filaments, Indra and Agni, and the Gods the Maruts, raised him up to health.

अध्याय ८

श्लोक 1.12

मा त्वा॑ क्र॒व्याद॒भि मं॑स्ता॒रात् संक॑सुकाच्चर।रक्ष॑तु त्वा॒ द्यौ रक्ष॑तु पृथि॒वी सूर्य॑श्च त्वा॒ रक्ष॑तां च॒न्द्रमा॑श्च ।अ॒न्तरि॑क्षं रक्षतु देवहे॒त्याः

mā tvā kravyādabhi maṃstārāt saṃkasukāccara| rakṣatu tvā dyau rakṣatu pṛthivī sūryaśca tvā rakṣatāṃ candramāśca | antarikṣaṃ rakṣatu devahetyāḥ

हिन्दी अर्थ

(पुरुष) है पुरुष ! (ते) तेरा (उद्यानम्) मागं ऊपर की ओर है, (न , अवयानम्) नीचली ग्रोर मागं नहीं (ते) तेरे (जीवातुम्) जीवन को (दक्ष- , तातिम्) वृद्धि का विस्तार करने वाला (कृणोमि) मँ करत। हं । (दमम्) . शरीर-रथ पर ( हि) नि्चयपूवेक (श्रा रोह) आरोहण कर, (अथ) गनौर (जिविः ) जीण होकर, बढा हो कर (विदथम्) ज्ञानोपदेश (अ वदसि) विधवे देवा अभि रक्षन्तु देह ।॥७॥ (ते) तेरा (मनः) मन (तत्र) परलोक की भोर (मा गात्) न जाय, , प्राणियों को सेवा मेँ तू प्रमाद कर, (पितृन्) मृत पितरों का (मा अ्रनुगाः)

English

Here is thy spirit, here thy breath, here is thy life, here is thy soul: By a celestial utterance we raise thee from Destruction’s bonds.

अध्याय ८

श्लोक 1.13

बो॒धश्च॑ त्वा प्रतिबो॒धश्च॑ रक्षतामस्व॒प्नश्च॑ त्वानवद्रा॒णश्च॑ रक्षताम्।गो॒पा॒यंश्च॑ त्वा॒ जागृ॑विश्च रक्षताम्

bodhaśca tvā pratibodhaśca rakṣatāmasvapnaśca tvānavadrāṇaśca rakṣatām| gopāyaṃśca tvā jāgṛviśca rakṣatām

हिन्दी अर्थ

अनुगामी न बन । (विष्व देवाः) सव देवकोटि के आचार्यं (त्वा) उपनयन का श्रथ है 'श्रपने समीप लाना", (उप = ्षमीप + नयन = लाना) । आचार्यं माणवकं को, उपनयन विधि हारा, अपने भ्राश्रम मेले आताहै। "विश्वे देवाः” का अथं इसलिये प्राचां करिया है । आश्रम के सभी आचायं देवकोटि के होने चाहिए 1 प इस श्राश्रम मे रहकर तेरा मन निज माता-पिताकेघरकौ ओरन

English

Up from this place, O man, rise! sink not downward, casting away the bonds of Death that hold thee.

अध्याय ८

श्लोक 1.14

ते त्वा॑ रक्षन्तु॒ ते त्वा॑ गोपायन्तु॒ तेभ्यो॒ नम॒स्तेभ्यः॒ स्वाहा॑

te tvā rakṣantu te tvā gopāyantu tebhyo namastebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

। जाता रहै, न आश्रम मे रहकर तेरा मन टद चालं वाला हो, न माता-पिता आदिकीही त्रु निरन्तर चिन्ता कस्ता रहै। । (गतानाम्) गुजरे हुओं का (मा) न (आ दीधीयाः) सदा ध्यान अर्थात् चिन्तन किया कर, (ये) जो कि (परावतम्) कतंग्यपथ से परे (नयन्ति) लेजाते है, पराड मुख कर देते । (आ रोह्) तु श्रारोहण कर (तमसः) हाथों को (आ रभामहे) हम पृणंतया सहारा देते ह ।

English

Be not thou parted from this world, from sight of Agni and the Sun.

अध्याय ८

श्लोक 1.15

जी॒वेभ्य॑स्त्वा स॒मुद्रे॑ वा॒युरिन्द्रो॑ धा॒ता द॑धातु सवि॒ता त्राय॑माणः ।मा त्वा॑ प्रा॒णो बलं॑ हासी॒दसुं॒ तेऽनु॑ ह्वयामसि

jīvebhyastvā samudre vāyurindro dhātā dadhātu savitā trāyamāṇaḥ | mā tvā prāṇo balaṃ hāsīdasuṃ te'nu hvayāmasi

हिन्दी अर्थ

गुजरो का सदा ध्यान करते रहना, यह तमोगुण का परिणाम है, मारोहण कर । तु इस आश्रममें प्रा एहि, हम प्राश्रमवासी सदा तेरे (शबलः च) चितकवरा (प्रेषितौ) येयम के भेजे हुए है, (यौ) जौ दोनों करि (पथिरक्षी) यम द्वारा दर्शाए् मागे में रक्षक है, चौकीदार है । यम का अभिप्राय है “नियन्ता परमेश्वर. । इसे “महायमः' भी कहा है (मथवं० १३।४(१)।५), यह नियन्ता है ओर सवंतो महान् है 1 दो कत्ते का० ठ सू० १ अथर्ववेद-माष्य १७५

English

Purely for thee breathe Wind and Mātarisvan, and let the Waters rain on thee their nectar.

अध्याय ८

श्लोक 1.16

मा त्वा॑ ज॒म्भः संह॑नु॒र्मा तमो॑ विद॒न्मा जि॒ह्वा ब॒र्हिः प्र॑म॒युः क॒था स्याः॑ ।उत् त्वा॑दि॒त्या वस॑वो भर॒न्तूदि॑न्द्रा॒ग्नी स्व॒स्तये॑

mā tvā jambhaḥ saṃhanurmā tamo vidanmā jihvā barhiḥ pramayuḥ kathā syāḥ | ut tvādityā vasavo bharantūdindrāgnī svastaye

हिन्दी अर्थ

भ्रेयमागे के पथिक को प्रेयमागं मे बान्धे रखते हँ । इन से वचने का उपाय न श्रवीमि ॥ १।६।२) मे जलों मे सव ग्रौषधों की, श्रौर सब रोगों को शान्त करने वाली वि 0 9 व त श एवम्) मेघीय-वियुत् । अर्थात् निवासगृहं एसे होने चाहिए जिन में सूयं का ताप, संतापकारी न हो, भौर जिन्हं मेघीय-विधयुतपात नष्ट न कर सके । नर-नारियों का हितकारी (जातवेदाः) प्रज्ञानी परमेश्वर (रक्षतु) तेरी

English

The Sun shall shine with healing on thy body; Death shall have mercy on thee: do not leave us!

अध्याय ८

श्लोक 1.17

उत् त्वा॒ द्यौरुत् पृ॑थि॒व्युत् प्र॒जाप॑तिरग्रभीत्।उत् त्वा॑ मृ॒त्योरोष॑धयः॒ सोम॑राज्ञीरपीपरन्

ut tvā dyaurut pṛthivyut prajāpatiragrabhīt| ut tvā mṛtyoroṣadhayaḥ somarājñīrapīparan

हिन्दी अर्थ

(त्वा) तुमे (माप्रधाक्) दग्धन करे। आचायं कहता हूं । (पुरुष ) है पुरुष ! (एतत् तमः) इस प्रेयरूपी तमोमय (ते, श्रभयम्) तेरे लिये भयरहित है । मे कि “श्वानौ” श्रथति ए्याम ओर शबल दो कृत्ते रक्षक ह" भयानकं है। नहीं । यह मागं सत्तवगुणियो के लिये परे" का मागं है, ओर अर्वाक् मां

English

Upward must be thy way, O man, not downward: with life and mental vigour I endow thee. Ascend this car eternal, lightly rolling; then full of years shalt thou address the meeting.

अध्याय ८

श्लोक 1.18

अ॒यं दे॑वा इ॒हैवास्त्व॒यं मामुत्र॑ गादि॒तः ।इ॒मं स॒हस्र॑वीर्येण मृ॒त्योरुत् पा॑रयामसि

ayaṃ devā ihaivāstvayaṃ māmutra gāditaḥ | imaṃ sahasravīryeṇa mṛtyorut pārayāmasi

हिन्दी अर्थ

हे बरह्मचयं का मागे । यह “अर्वाक्” मागे तेरे लिये अभयकरूप है, श्रेयरूप पूराकाल में (न इयथ) तुम श्रभी नहीं गए ( तम्) उसे (ब्रवीमि) मै. अन्तरिक्षं रक्षतु देवहैत्याः ॥१२॥ न अपनाए, (संकसुकात्) दुजेन से (आरात्) दूर (चर) विचर, उसका करे (देवहेत्याः) इन्द्रियों की मार से।

English

Let not thy soul go thither, nor be lost to us: slight not the living, go not where the Fathers are.

अध्याय ८

श्लोक 1.19

उत् त्वा॑ मृ॒त्योर॑पीपरं॒ सं ध॑मन्तु वयो॒धसः॑ ।मा त्वा॑ व्यस्तके॒श्यो॒३मा त्वा॑घ॒रुदो॑ रुदन्

ut tvā mṛtyorapīparaṃ saṃ dhamantu vayodhasaḥ | mā tvā vyastakeśyo3mā tvāgharudo rudan

हिन्दी अर्थ

मे मृतदेह के कच्चे मांस का भक्षण करतो है। जीवनचर्यां इस प्रकार की कै प्रासपसि देह जीणं हो जाता है, मानो पक जाता है, कच्चा नहीं रहता । संकसुकं का अथं है, दजन (उणा० २।३० पर दयानन्द तथा भदटरोजी दीक्षित) ॥ दजन का संग त्याज्य है । चूलोक “स्वः ओर नाक" आदि लोकों १७६ प्रथवेवेद-भाष्य का०८। सू० । । ॥ मेपीय-विद्युत् (धाता) धारण भौर पोषण करने वाला मेष, (त्रायमाणः सथिता) पराणकरता हुजा प्रातःकालीन सूयं (त्वा) तेरी (दधातु) रक्षा

English

Let all the Gods retain thee here in safety. Yearn not for the departed ones, for those who lead men far away.

अध्याय ८

श्लोक 1.20

आहा॑र्ष॒मवि॑दं त्वा॒ पुन॒रागाः॒ पुन॑र्णवः ।सर्वा॑ङ्ग॒ सर्वं॑ ते॒ चक्षुः॒ सर्व॒मायु॑श्च ते ऽविदम्

āhārṣamavidaṃ tvā punarāgāḥ punarṇavaḥ | sarvāṅga sarvaṃ te cakṣuḥ sarvamāyuśca te 'vidam

हिन्दी अर्थ

किसी कौ हिसा (मा) न करे, ( प्रमयुः) हिसा करने वाला (कथा) किस ¦ करं, (ते) वे (त्वा) तेरी (गोपायन्तु) रक्षा करं, (तेभ्यः) उन कै लिये की आहूुतियां, यज्ञिय प्रकारसे, निज जंठराम्नि में दिया करे। इस द्वारा होता है जबकि हिखरप्राणी के मुख के उपर श्रौर नीचेकेदो जबड़् मिल जायि । इसके द्वारा यह कहा गया है कि सांप आदि हिखप्राणी तुभे नकारे ओौर तेरा हनन न करं । हनुः = हृन्यतेऽनेनेति हनुः कपोलावयवः (उणा० हि १।१०, दयानन्द ) । विषेले प्राणो दवाय काटने पर मृत्यु भी सम्भव है ओौर उपनीत माणवक को नि्दंश दिये गए हैँ 1 भअनवद्राणः =निद्रारदहितः,

English

Come hither; do not hesitate: with mind averted stay not there. Forbear to tread this path, for it is awful: that path I speak of which thou hast not travelled.

अध्याय ८

श्लोक 1.21

व्यऽवात् ते॒ ज्योति॑रभू॒दप॒ त्वत्तमो॑ अक्रमीत्।अप॒ त्वन्मृ॒त्युं निरृ॑ति॒मप॒ यक्ष्मं॒ नि द॑ध्मसि

vya'vāt te jyotirabhūdapa tvattamo akramīt| apa tvanmṛtyuṃ nirṛtimapa yakṣmaṃ ni dadhmasi

हिन्दी अर्थ

दवारा सूचित किया है । जिह्वा का अथं है वाणी, वाक् “जिह्वा वाड नाम" । (नि्ष० १।११) ओौर बः का श्रथ है काटने वाली । बहु हिसायाम् (चुरादिः, जब उपनीत ब्रहाचारी वाणी द्वारा भी किसी की हिसा न करेगा, तो उसने किया है, अपनाया है, (उत् पृथिवी) पृथिवी ने उन्नति के लिये अपनाया है, सोम -प्रोषधिप्रधान (ओषधयः) ्रोषधियों ने (अपीपरन्) पालित कियादहै। । आसन्नमृत्यु से, या मूर्च्छा से । अयं देवा इदेवास्वयं मामत्र गादितः।

English

Enter it not, O man; this way is darkness: forward is danger, hitherward is safety. Thy guardians be the Fires within the Waters, thy guardian be the Fire which men enkindle.

अध्याय ८

श्लोक 2.1

दीर्घायुःप्राप्तिः।१-२८ ब्रह्मा।आयुः।त्रिष्टुप्, १-२,७ भुरिक्, ३,२६ आस्तारपङ्क्तिः, ४ प्रस्तारपङ्क्तिः, ६,१५ पथ्यापङ्क्तिः, ८ पुरस्ताज्ज्योतिष्मती जगती, ९ पञ्चपदा जगती, ११ विष्टारपङ्क्तिः, १२,२२,२८ पुरस्ताद्बृहती, १४ त्र्यवसाना षट्-पदा जगती, १९ उपरिष्टाद्बृहती, २१ सतः पङ्कतिः ५,१०,१६-१८,२०,२३-२५,२७ अनुष्टुप् (१७ त्रिपाद्)।आ र॑भस्वे॒माम॒मृत॑स्य॒ श्नुष्टि॒मच्छि॑द्यमाना ज॒रद॑ष्टिरस्तु ते ।असुं॑ त॒ आयुः॒ पुन॒रा भ॑रामि॒ रज॒स्तमो॒ मोप॑ गा॒ मा प्र मे॑ष्ठाः

dīrghāyuḥprāptiḥ| 1-28 brahmā| āyuḥ| triṣṭup, 1-2,7 bhurik, 3,26 āstārapaṅktiḥ, 4 prastārapaṅktiḥ, 6,15 pathyāpaṅktiḥ, 8 purastājjyotiṣmatī jagatī, 9 pañcapadā jagatī, 11 viṣṭārapaṅktiḥ, 12,22,28 purastādbṛhatī, 14 tryavasānā ṣaṭ-padā jagatī, 19 upariṣṭādbṛhatī, 21 sataḥ paṅkatiḥ 5,10,16-18,20,23-25,27 anuṣṭup (17 tripād)| ā rabhasvemāmamṛtasya śnuṣṭimacchidyamānā jaradaṣṭirastu te | asuṃ ta āyuḥ punarā bharāmi rajastamo mopa gā mā pra meṣṭhāḥ

हिन्दी अर्थ

१८४ प्रथवेवेद-माष्य का०८। सू9 रिषाम्) अहत्या ओरं भहिसा करने वाली, (जौवन्तीम्) जीवित, हरी-भरर १०५ 0 (सहस्वतीम्) बलवती ( ओषधीम्) ओषधि का ( अहम् । यहां (हवे) श्राह्वान करता हुं । (अस्मे 1 हं । (अस्मे) इस माणवक की (अरिष्द करने वाली, न हिसा करने वाली । सहमानाम् = रोगस्याभिम वितरीम् भोषधि के ह, अथवा ये नाना ्रोषधियां ह “अौषघीम्” पद का! तथा ॥ अनि ब्रूहि मा रभयाः सूेमे ततैव सन्तसवहाया इहास्तु ।

English

The Plants and Herbs with Soma as their King have rescued thee from Death. Here let this man, O Gods, remain: let him not go to yonder world.

अध्याय ८

श्लोक 2.2

जीव॑तां॒ ज्योति॑र॒भ्येह्य॒र्वाङा त्वा॑ हरामि श॒तशा॑रदाय ।अ॒व॒मु॒ञ्चन् मृ॑त्युपा॒शानश॑स्तिं॒ द्राघी॑य॒ आयुः॑ प्रत॒रं ते॑ दधामि

jīvatāṃ jyotirabhyehyarvāṅā tvā harāmi śataśāradāya | avamuñcan mṛtyupāśānaśastiṃ drāghīya āyuḥ prataraṃ te dadhāmi

हिन्दी अर्थ

भरवलासौ = श्र + बल +-अस् (क्षेपणे), बल का न क्षेपण करने वाले। मदो तुप्तिकरो (मद तृप्तियोगे; चुरादिः, वणेविकारः) । अंहसः त्रीहि भौर यव सात्विक भोजन है, तामसिक ओर राजसिक भोजन नहीं, अतः ब्रह्मचारी का वणेन हुमा है, उसे सात्विक भोजन करने का निदंश दिया छेदने च (स्वादिः) । मन्त्र में वप्ता पद छेदना्थेक है, नापित है । (अश्नासि) तु साता है, (यत्) जो (पयः) दूघ (पिबसि) तू पीता है, अर्थात्

English

I make for him a healing balm. O Death, forbear to slay this man. Here for sound health I invocate a living animating plant,

अध्याय ८

श्लोक 2.3

वाता॑त् ते प्रा॒णम॑विदं॒ सूर्या॒च्चक्षु॑र॒हं तव॑ ।यत् ते॒ मन॒स्त्वयि॒ तद् धा॑रयामि॒ सं वि॒त्स्वाङ्गै॒र्वद॑ जि॒ह्वयाल॑पन्

vātāt te prāṇamavidaṃ sūryāccakṣurahaṃ tava | yat te manastvayi tad dhārayāmi saṃ vitsvāṅgairvada jihvayālapan

हिन्दी अर्थ

यह दुगैन्ध है, रोगजन्य । पूतुदू वृक्षविशेष है जो कि रग्नि का शरीर है। ज्वलनशील है, इसलिये इसे अग्नि का शरीर कहा हो । भ्रमीव अम रोगे. (१) सूक्त मे २६ मन्त्र रह। आयिभौतिका्थं दर्शया है । आधि- (३) यातना देने वालों के हूदयवेधन भौर उनकी बाहूभ्रों को तोड़ (४) यातुधान है जो अनृत द्वारा ऋत अर्थात् सत्य का हनन करता है

English

This I procure for thee, that thou, undying, mayst not suffer harm, that thou mayst be content, that all be well with thee.

अध्याय ८

श्लोक 2.4

प्रा॒णेन॑ त्वा द्वि॒पदां॒ चतु॑ष्पदाम॒ग्निमि॑व जा॒तम॒भि सं ध॑मामि ।नम॑स्ते मृत्यो॒ चक्षु॑षे॒ नमः॑ प्रा॒णाय॑ तेऽकरम्

prāṇena tvā dvipadāṃ catuṣpadāmagnimiva jātamabhi saṃ dhamāmi | namaste mṛtyo cakṣuṣe namaḥ prāṇāya te'karam

हिन्दी अर्थ

(५) परस्पर शाप देने वाले पति-पत्नी को, तथा कटु-वक्ता को मान- (६) पापी भौर कुटिल को, तथा “वाचा स्तेन""को बन्धनागार का. दण्ड (७) अश्वादि पश्चु की हत्या करके उनके मांस के भक्षक पुरुष को, तथा हैँ । अतः सूक्त ३ेका आधिभौतिक अथं सूक्त मे अभिप्रेत है (मन्व १ ८) । (रक्षोहणम्) राक्षसो का हनन करने वाले, (वाजिनम्) बलशालो तथा

English

Gracious to thee be Heaven and Earth, bringing no grief, and drawing nigh! Pleasantly shine the Sun for thee, the Wind blow sweetly to thy heart!

अध्याय ८

श्लोक 2.5

अ॒यं जी॑वतु॒ मा मृ॑ते॒मं समी॑रयामसि ।कृ॒णोम्य॑स्मै भेष॒जं मृत्यो॒ मा पुरु॑षं वधीः

ayaṃ jīvatu mā mṛtemaṃ samīrayāmasi | kṛṇomyasmai bheṣajaṃ mṛtyo mā puruṣaṃ vadhīḥ

हिन्दी अर्थ

नक्तम्) दिन-रात (नः) हमें (रिषः) हिसाग्रों तथा हिसकों से (पातु) वेदो मेँ करई मन्ते द्येक तथा व्यथेक होते हँ । इसलिये उनमें रेस पदहोतेर्हैजोकिदो या तीन अर्थो को सूचित करे। वर्तमान सूक्त भी एेसा है । मने केवल आधिभौतिक अथं की व्याख्या की है। एतदनुसार मन्त णक्तिको बढाता हं । ओर तेरी सहायता के लिये, विस्तत राष्ट्र वाले तथा मिलनेके लिये मेँ जाताहूं। तु अपने राष्ट में अस्त-णस््ो भादिद्रारा दीदिहि प्रदीप्त हो तथा इह इस अपने राट म इत्यादि शब्द राजनीतिक

English

Let the celestial Waters full of milk flow happily for thee. Auspicious be the Plants to thee! I have upraised thee, borne thee from the lower to the upper

अध्याय ८

श्लोक 2.6

जी॒व॒लां न॑घारि॒षां जी॑व॒न्तीमोष॑धीम॒हम्।त्रा॒य॒मा॒णां सह॑मानां॒ सह॑स्वतीमि॒ह हु॑वे॒ऽस्मा अ॑रि॒ष्टता॑तये

jīvalāṃ naghāriṣāṃ jīvantīmoṣadhīmaham| trāyamāṇāṃ sahamānāṃ sahasvatīmiha huve'smā ariṣṭatātaye

हिन्दी अर्थ

प्रतीत होता है। “शमं गृहनाम" (निघं० ३।४ । गृह् प्राश्रय होता है। अतः मन्त्र मे शमं का अथं आश्रय किया है अयोदंष्ट्रो अचिषां यातुधानालुपं स्पृश जातवेदः समिंदढः । परकीय सेनिकों को (उपस्पृश) समीपता से स्प कर । (जिह्वया) आग्नेय मूर (मूढ ) +-देवान्, दिवु विजिगोषा० (दिवादिः)। कन्यादः निज संनिको दारा, णस्तरास्त्रों से परकौय जीवित संनिकों कौ मारना, उनके कच्ने मांसीं कोखा जाना है। क्रव्य (कच्चा मांस) +अदः (भक्षणे) खा जाने वाले । (उमयाविन्) है दोनो कौ रक्षा करने वाले ! (दिख) शत्रु कौ हिसा

English

earth: Let the two Sons of Aditi, the Sun and Moon, protect thee there.

अध्याय ८

श्लोक 2.7

अधि॑ ब्रूहि॒ मा र॑भथाः सृ॒जेमं तवै॒व सन्त्सर्व॑हाया इ॒हास्तु॑ ।भवा॑शर्वौ मृ॒डतं॒ शर्म॑ यच्छतमप॒सिध्य॑ दुरि॒तं ध॑त्त॒मायुः॑

adhi brūhi mā rabhathāḥ sṛjemaṃ tavaiva santsarvahāyā ihāstu | bhavāśarvau mṛḍataṃ śarma yacchatamapasidhya duritaṃ dhattamāyuḥ

हिन्दी अर्थ

च) अवरश्रौर पर के (उभौ) दोनों (दष्टरौ) दाढ़ों को (उपधेहि) शत्रु के रूपी दादर या दातो द्वारा (यातुधानान्) यातना देने वालों कौ (अभि) वणेन हुम। है, जो कि सीसे की गोली प्रतीत हौती है । दय ओौर निश्चेयः इन को रक्षा करने. विध्य = ध 1 (हि (रम्) रानृओंके वाणो को (संनममानः) नमाता हमरा उनके वाणो को (उत वा) या (चरन्तम्) इधर-उधर घूमते हुए (उत) या (अन्तरिक्षे) '

English

Whatever robe to cover thee or zone thou makest for thyself, 125

अध्याय ८

श्लोक 2.8

अ॒स्मै मृ॑त्यो॒ अधि॑ ब्रूही॒मं द॑य॒स्वोदि॒तो॒३यमे॑तु ।अरि॑ष्टः॒ सर्वा॑ङ्गः सु॒श्रुज्ज॒रसा॑ श॒तहा॑यन आ॒त्मना॒ भुज॑मश्नुताम्

asmai mṛtyo adhi brūhīmaṃ dayasvodito3yametu | ariṣṭaḥ sarvāṅgaḥ suśrujjarasā śatahāyana ātmanā bhujamaśnutām

हिन्दी अर्थ

(शिशानः) उग्र हुआ-हुभा (शर्वा) घातकायुध द्वारा (विध्य) वींध। द्वारा (यातुधानान्) यातना देने वालों को (हृदये) हृदय मेँ (विध्य ) बीघ राष्ट पर विजय की भावना से किये युद्ध, यज्ञरूप नहीं । भङ गधि = बाहुं को तोडना ताकि बाहों द्वारा ये अस्त्र न चला सकं । उतार॑ग्धान्तसपृणुहि जातवेद उतारेभाणँ ऋर्िभयांतुधानान । आरम्भ कर दिया है उन पर (स्पृणहि) तू वाणौंकी बौषछार कर, (उत)

English

We make it pleasant to thy frame: may it be soft and smooth to touch. When, with a very keen and cleasing razor, our hair and beards thou shavest as a barber,

अध्याय ८

श्लोक 2.9

दे॒वानां॑ हे॒तिः परि॑ त्वा वृणक्तु पा॒रया॑मि त्वा॒ रज॑स॒ उ॑त् त्वा॑ मृ॒त्योर॑पीपरम्।आ॒राद॒ग्निं क्र॒व्यादं॑ नि॒रूहं॑ जी॒वात॑वे ते परि॒धिं द॑धामि

devānāṃ hetiḥ pari tvā vṛṇaktu pārayāmi tvā rajasa ut tvā mṛtyorapīparam| ārādagniṃ kravyādaṃ nirūhaṃ jīvātave te paridhiṃ dadhāmi

हिन्दी अर्थ

२०२ अथवंवेद-भाष्य का०८। सूक्त ३ ञआङ्खल भाषा का “9 शब्द “स्पृ का विकृतरूप हो, जिसका श्रथ है बौछार करना । इससे मन्त्रां संगत हो जाता है। सायणाचा्यं॑ने अथं णहि" भथवा उनकी तु वाणो द्वारा सेवा कर । यह वक्रोक्ति है । ्रमिप्राय पववत् है कि वाणों कौ बौदछछार कर (स्प सेवने) । (प्रब्रूहि) कटहिये कि (यतमः) जो कि (सः) वह (यातुधानः) यातना देने वाला है (यः) जोकि इदम् ) यह् यातना-कमं (कृणोति) करता है । (तम्) वाले राजां की (चक्षुषे) दष्टिके लिये (रन्धय) वशंगत कर, उपस्थित

English

Smoothing our face steal not our vital forces. Auspicious unto thee be rice and barley, causing no painful sick- ness or consumption, these

अध्याय ८

श्लोक 2.10

यत् ते॑ नि॒यानं॑ रज॒सं मृत्यो॑ अनवध॒र्ष्यऽम्।प॒थ इ॒मं तस्मा॒द् रक्ष॑न्तो॒ ब्रह्मा॑स्मै॒ वर्म॑ कृण्मसि

yat te niyānaṃ rajasaṃ mṛtyo anavadharṣya'm| patha imaṃ tasmād rakṣanto brahmāsmai varma kṛṇmasi

हिन्दी अर्थ

(अधिनव्रूहि) है परमेश्वर ! अधिकार पूवेक इसे तू “श्रपना आरभयःः लभस्व) इसे रोग में पकड न रख, या सजन कर, नवजीवन सजन कर, (तव एव सन्) तेरा ही हभ (सवेहायाः) सव प्रकार कौ गतियों वाला होकर (इह) इस पृथिवी या आश्रमं (श्रस्तु) रहे । (भवाशवौँ) है नवोत्पत्ति करने वाले! तथा रोगों का करता है । गुणभेद से परमेष्वरके दो नाम है मव भौर शवं । सर्व॑हायाः= जरावस्था के साथ (शतहायनः) सौ वर्षो वाला हो, (इतः उद् एतु) इस दयस्व = दया कर, या रक्षाकर ¡1 दय दानगतिरक्षणहिसादानेषु देवानो हेतिः परं खा णन्तु पारयामि स्वा रजस उत् तवां मृत्यो-

English

We rescue him from Mrityu with a charm that hath a thousand powers.

अध्याय ८

श्लोक 2.11

कृ॒णोमि॑ ते प्राणापा॒नौ ज॒रां मृ॒त्युं दी॒र्घमायुः॑ स्व॒स्ति।वै॒व॒स्व॒तेन॒ प्रहि॑तान् यमदू॒तांश्चर॒तोऽप॑ सेधामि॒ सर्वा॑न्

kṛṇomi te prāṇāpānau jarāṃ mṛtyuṃ dīrghamāyuḥ svasti| vaivasvatena prahitān yamadūtāṃścarato'pa sedhāmi sarvān

हिन्दी अर्थ

छोड दे, (त्वा) तुभ (रजसः) रजोगुण से (पारयामि) मँ पार करता हू, दुर (निरूहम्) मैने निकाल दिया है, (ते) तेरे (जीवातवे) जीवन के लिये (परिधिम्) परिषि को (दधामि) म स्थापितकरताहूं। , 0 इन्द्रियों का आयुध है, विषयों म विचरना । रजोगुण, इन्द्रियों को विषयों की ओर प्रेरित करता है । रजोगुण मृत्यु का कारण है। करव्यद् = कच्चे" मांस का भञअजण करने वालो एवाग्नि । निरूहम् निर् + रह. । शरीर शवाग्नि के मेंट न होने पाए 1 वृद्धावस्या रे शरीर परिपक्व हौ जाता है। इस पकाया मास, जिसे दत्त प्राणी खाते है। ह । का०८।सू०र अथववेद-माष्य -र८७ , १८६ जथववेद-भाष्य का०-८ सूक्त र

English

I have delivered thee from Death. Strength-givers smelt and fashion thee! Let not she-fiends with wild loose locks, or fearful howlers yell at thee.

अध्याय ८

श्लोक 2.12

आ॒रादरा॑तिं॒ निरृ॑तिं प॒रो ग्राहिं॑ क्र॒व्यादः॑ पिशा॒चान्।रक्षो॒ यत् सर्वं॑ दुर्भू॒तं तत् तम॑ इ॒वाप॑ हन्मसि

ārādarātiṃ nirṛtiṃ paro grāhiṃ kravyādaḥ piśācān| rakṣo yat sarvaṃ durbhūtaṃ tat tama ivāpa hanmasi

हिन्दी अर्थ

हि (हि ओरादरांति निकरति परो ग्राहिं कव्याद॑ः पिशाचान् । परिधि का अयं है षेरा । जीवन को जिस घेरे के भीतर रहना चाहिए वह॒ वि रः) यत् स दुभूतं तत् तमश्वापं हन्मसि ॥ १२॥ जीवन की परिषि "श्रहम ( ८।२।२५) । न . श , न तत् सवम् परः) उस सब को दूर् करके, न हम उसका हनन ¦ उरावा टननकरदियाजाताटै। को (वमं कृण्मसि) कवच हम करते है । ।

English

I have attained and captured thee: thou hast returned restored to youth. Perfect in body: so have I found all thy sight and all thy life.

अध्याय ८

श्लोक 2.13

अ॒ग्नेष्टे॑ प्रा॒णम॒मृता॒दायु॑ष्मतो वन्वे जा॒तवे॑दसः ।यथा॒ न रिष्या॑ अ॒मृतः॑ स॒जूरस॒स्तत् ते॑ कृणोमि॒ तदु॑ ते॒ समृ॑ध्यताम्

agneṣṭe prāṇamamṛtādāyuṣmato vanve jātavedasaḥ | yathā na riṣyā amṛtaḥ sajūrasastat te kṛṇomi tadu te samṛdhyatām

हिन्दी अर्थ

रजोमागे मृत्युकारक है। माणवकं की रजोगुण से रक्षा करनी ॥ , 4 ६ ४ अथं है मासभक्षक रोग-कीटाणु“ । ये रोगकीटाणु रोग द्वारा मांस को सुख चाहिए । रजोगुण नीचे कौ भोर ले जाता, अर्थात् पतून करता है । नियान तथा रजोगुण के प्रहारो से बचने के लिये ब्रह्मरूपी कवच को धारण करना देते है, गव्ठाणऽ पेदा कर देतेह। मांसको सुखा ष्देना ही मांसं कव्यम् =कृवि हसाकरणयोएच (भ्वादिः) । पिशितम्=पिश भवयवे प्रौर परमेश्वर के साय प्रीति करने वाला (असः) हो.जाय । (ते ) तेरे लिये (तत्) उस कमं को (कृणोमि) मँ आचायं करता हु" (ते) तेरे लिये (तत्

English

Life hath breathed on thee; light hath come: darkness hath past away from thee. Far from thee we have buried Death, buried Destruction and:

अध्याय ८

श्लोक 2.14

शि॒वे ते॑ स्तां॒ द्यावा॑पृथि॒वी अ॑संता॒पे अ॑भि॒श्रियौ॑ ।शं ते॒ सूर्य॒ आ त॑पतु॒ शं वातो॑ वातु ते हृ॒दे।शि॒वा अ॒भि क्ष॑रन्तु॒ त्वापो॑ दि॒व्याः पय॑स्वतीः

śive te stāṃ dyāvāpṛthivī asaṃtāpe abhiśriyau | śaṃ te sūrya ā tapatu śaṃ vāto vātu te hṛde| śivā abhi kṣarantu tvāpo divyāḥ payasvatīḥ

हिन्दी अर्थ

उ) वह् कमं (समृध्यताम्) समृद्धिदायक हो । ५ वन्वे = वनु याचने(तनादिः)। सजूः = स +-जुषी प्री तिसेवनयोः(तनादिः) है माणवक ! (ते) तेरे लिथे (प्राणापानौ) प्राण ओर भ्रपान को (जराम्, तथा (स्वस्ति) भ्रविनाश या कल्याण को (कृणोमि). मँ आचायं करता हं । स्वत है सूय, सयं की जायाहै रात्रि । रात्रि माताहैयम की। यमद्रारा ,, भेजे गये दूत हँ मच्छर, साप श्रादि दिलप्राणी, जो कि मृत्युकारक है, मौर रात्रि मे संचरण करते है, विचरते हैँ । इनके निराकरण का वर्णन मन्वरमे

English

Decline. The same

अध्याय ८

श्लोक 2.15

शि॒वास्ते॑ स॒न्त्वोष॑धय॒ उत् त्वा॑हार्ष॒मध॑रस्या॒ उत्त॑रां पृथि॒वीम॒भि।तत्र॑ त्वादि॒त्यौ र॑क्षतां सूर्याचन्द्र॒मसा॑वु॒भा

śivāste santvoṣadhaya ut tvāhārṣamadharasyā uttarāṃ pṛthivīmabhi| tatra tvādityau rakṣatāṃ sūryācandramasāvubhā

हिन्दी अर्थ

परमेश्वर से तेरे लिये प्राण की याचना करता हू । द्युलोक ओर पृथिवी (ते) तेरे लिये (शिवे) कल्याणकारी (स्ताम्) होः; चिन्ता को हटाने वाले हों । (ते) तेरे लिये (सूयः) सूयं (शम्) सुख-शान्ति , पूवेक (ग्रातपतु) सदा तपे, (ते) तेरे (हृदे) हदय के लिये (वातः) वायु भूत तथा शोभायुक्त । असंतापे--सम्पत्ति के अभाव मे मानसिक संताप

English

Seize to thyself this trust of life for ever: thine be longevity which nothing shortens. Thy spirit and thy life again I bring thee: die not, nor vanish into mist and darkness.

अध्याय ८

श्लोक 2.16

यत् ते॒ वासः॑ परि॒धानं॒ यां नी॒विं कृ॑णु॒षे त्वम्।शि॒वं ते॑ त॒न्वे॒३तत् कृ॑ण्मः संस्प॒र्शेऽद्रू॑क्ष्णमस्तु ते

yat te vāsaḥ paridhānaṃ yāṃ nīviṃ kṛṇuṣe tvam| śivaṃ te tanve3tat kṛṇmaḥ saṃsparśe'drūkṣṇamastu te

हिन्दी अर्थ

-(ते) तेरे लिये (भोषधयः) :ओषधियां (शिवाः सन्तु) कल्याणकारिणी ¦ का० ८ सूु०२ प्रथवेवेद-भाष्य १८६ षहां वायु र्क्रच्छ होती है, ओर सूयं को गर्मी कम होती है, चन क भी पथिवी की अशुद्ध वायु से ्रमिधित हा प्रकाश देता है । तथा ताजी भर विविघ प्रकार की ओषधियां भी सुगमता से प्राप्त हौ सकती ह 1 आदित्यौ 1 (तत्) उसे (ते तन्वे) तेरी तनू के लिये (शिवम्) कल्याणकारी ४ सुखः कारी (कृण्मः) हम करते ह, वह (संस्पर्शे ) शरीर के साध स्पशे मेँ (ते) तेरे यत् पुरेण म॒चय॑ता सुतेजसा वप्ता वपसि केदाश्मभर

English

Come to the light of living men, come hither: I draw thee to a life of hundred autumns. Loosing the bonds of Death, the curse that holds thee, I give thee age of very long duration.

अध्याय ८

श्लोक 2.17

यत् क्षु॒रेण॑ म॒र्चय॑ता सुते॒जसा॒ वप्ता॒ वप॑सि केशश्म॒श्रु।शुभं॒ मुखं॒ मा न॒ आयुः॒ प्र मो॑षीः

yat kṣureṇa marcayatā sutejasā vaptā vapasi keśaśmaśru| śubhaṃ mukhaṃ mā na āyuḥ pra moṣīḥ

हिन्दी अर्थ

तथा मू छ-दादी को (वपसि) काटता है, तो (नः) हमारे (शुभम्, मखम्) ऊपर कौ पृथिवी की ओर (उत् श्रहाषेम्) ्मेउठालाया हूं। (तव) वहां मचैयता = ““मचं'" घातु शन्दार्थेक है । यथा “गज माजं शब्दाथौ, मचं च (चुरादिः) परन्तु उणा० ३।४३ मे “मचे'' को सौत्रधातु कहा है (दया- स्वती) 1 अ्रतः इनके मत मँ मचं धातु चुरादिगणी नहीं । मच = 10

English

Thy breath have I recovered from the Wind, thy vision from the Sun.

अध्याय ८

श्लोक 2.18

शि॒वौ ते॑ स्तां व्रीहिय॒वाव॑बला॒साव॑दोम॒धौ।ए॒तौ यक्ष्मं॒ वि बा॑धेते ए॒तौ मु॑ञ्चतो॒ अंहसः

śivau te stāṃ vrīhiyavāvabalāsāvadomadhau| etau yakṣmaṃ vi bādhete etau muñcato aṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

श्रधर की पृथिवी है, समतलभूमिः; श्रौर उत्तरा पथिवी है पवतभुमि क भवना है, यह् इन मन्न द्वारा प्रकट हो रहा है। ॥ १९० श्रयवेवेद-माष्य का० ८1 सु०र जाता है । हमारे मख की शोभा भौर आयु को वपन दारा तु अपहूतन कर मे जाता है । वैदिक विधि मे उस समय उसका क्षौरकमं होना चाहिए । विद्या के ग्रहण मे आयु का विचार नहीं है । अल्पायु तथा युवा मी उपनधरन

English

Thy mind I stablish and secure within thee: feel in thy members,. use thy tongue, conversing. I blow upon thee with the breath of bipeds and quadrupeds, as on a fire new-kindled.

अध्याय ८

श्लोक 2.19

यद॒श्नासि॒ यत् पिब॑सि धा॒न्यंऽ कृ॒ष्याः पयः॑ ।यदा॒द्यं॒१ यद॑ना॒द्यं सर्वं॑ ते॒ अन्न॑मवि॒षं कृ॑णोमि

yadaśnāsi yat pibasi dhānyaṃ' kṛṣyāḥ payaḥ | yadādyaṃ1 yadanādyaṃ sarvaṃ te annamaviṣaṃ kṛṇomi

हिन्दी अर्थ

पूवेक विद्या ग्रहृण कर सकता है। युवा की दष्टि से “शमश्रु पद (ते) तेरे लिये (्रीहियवौ) घान ओौर जौ (शिवौ) कल्याणकारी, (श्रबलासौ) बलास रोग से रहित, (मदोमधौ =ग्रदोमधू) खाने में मधुर तया बाधित करते है, उसके आनेमें बाधा उपस्थित करते है, (एतौ) ये दोनो (अंहसः) पाप से (मुञ्चतः) मुक्त करते है ।

English

To thee, O Death, and to thy sight and breath have I paid reverence. Let this man live, let him not die: we raise him, we recover him.

अध्याय ८

श्लोक 2.20

अह्ने॑ च त्वा॒ रात्र॑ये चो॒भाभ्यां॒ परि॑ दद्मसि ।अ॒राये॑भ्यो जिघ॒त्सुभ्य॑ इ॒मं मे॒ परि॑ रक्षत

ahne ca tvā rātraye cobhābhyāṃ pari dadmasi | arāyebhyo jighatsubhya imaṃ me pari rakṣata

हिन्दी अर्थ

भक्षणीय नही, अपितु पेय दुग्ध है, (ते) तेरे लिये, (अविषम्) विष रहित अर्थात् मांसभक्षण तथा मदिरापान विषरूप अन्न है । लेने वाले रोगों से, (मे) मेरे (इमम्) इस ब्रह्मचारी को (परिरक्षत) सब ह प्रतारसेसूरक्षित करो। दिन में सूर्यं के प्रकाश में रोगी को रखना भौर रातति मे पूरणं विश्राम, रोग सभी शत्र होते ह, कोई तो जीवन कान भक्षण-करने वाले मौर करट

English

Preserving, queller of disease, victorious, full of power and might. Seize him not, but encourage and release him: here let him stay, though thine, in all his

अध्याय ८

श्लोक 2.21

श॒तं ते॒ऽयुतं॑ हाय॒नान् द्वे यु॒गे त्रीणि॑ च॒त्वारि॑ कृण्मः ।इ॒न्द्रा॒ग्नी विश्वे॑ दे॒वास्तेऽनु॑ मन्यन्ता॒महृ॑णीयमानाः

śataṃ te'yutaṃ hāyanān dve yuge trīṇi catvāri kṛṇmaḥ | indrāgnī viśve devāste'nu manyantāmahṛṇīyamānāḥ

हिन्दी अर्थ

जीवन का भक्षण करने वाले ! इन दोनों प्रकारके रोगों की निवृत्ति के लिये वे्ोसे प्राथनाकी गई है) (मे) भेरे' दारा रोगी के प्रति को घस्लृ अदेश हृग्रा है (म्रष्टा० २।४३७) 1 हुम निश्चित करते हँ । श्रौर (अयुतम्) १ हजार १०,००० । वषो की संख्या (१) के स्थानम पूर्वपूवे के करम म ४३२ रखकर ४३- २००० कलियुग की संख्य 1 का निर्माण करते है । (दरे युगे) कलियुग की संख्या । 1 । का०८। सू १ । : १६२ प्रथवेवेद-भाष्य का०८।सूु०६। १ ४ १) ,

English

vigour. Bhava and Sarva, pity and protect him: give him full life and drive away misfortunes.

अध्याय ८

श्लोक 2.22

श॒रदे॑ त्वा हेम॒न्ताय॑ वस॒न्ताय॑ ग्री॒ष्माय॒ परि॑ दद्मसि ।व॒र्षाणि॒ तुभ्यं॑ स्यो॒नानि॒ येषु॒ वर्ध॑न्त॒ ओष॑धीः

śarade tvā hemantāya vasantāya grīṣmāya pari dadmasi | varṣāṇi tubhyaṃ syonāni yeṣu vardhanta oṣadhīḥ

हिन्दी अर्थ

को द्विगुणित करे द्वापर कौ संख्या ८६४००० करते रह, । (वणि युगानि) कलियुग की संख्या को त्रिगुणित करके त्रेता की संख्या १९६६००० करते संख्या १७२८००० करते हैँ । इस प्रकार चतुय गी कौ संख्या ४३२,०००० ऋ (त्वा) तुभ (शरदे) शरदृतु के लिये, (हेमन्ताय) हेमन्त ऋतु के लिये के लिये (ग्रहणीयमानाः) कध किये विना (अनुमन्यताम्) युगशिक्षा को अनुकल मान लें अर्थात् इसे स्वीकृत करलं । ॑ अहृणीयमानाः, "हणीयते क्रध्यतिकर्मा" (निधं २।१२), तथा

English

Comfort him, Death, and pity him: let him arise and pass away, Unharmed, with all his members, hearing well, with old, may he through hundred years win

अध्याय ८

श्लोक 2.23

मृ॒त्युरी॑शे द्वि॒पदां॑ मृ॒त्युरी॑शे॒ चतु॑ष्पदाम्।तस्मा॒त् त्वां मृ॒त्योर्गोप॑ते॒रुद् भ॑रामि॒ स मा बि॑भेः

mṛtyurīśe dvipadāṃ mṛtyurīśe catuṣpadām| tasmāt tvāṃ mṛtyorgopaterud bharāmi sa mā bibheḥ

हिन्दी अर्थ

मन्म एक चतुर्ग के काल का कथन किया है, जिसका कि परिजन मास तथा संवत् या सन् का प्रिज्ञान वतमान मे कराया जता हैवैष वेदिक . विद्यार्थी को, एक चतुमगी के काल के परिज्ञान का कथन मन्त मेहुभाहै। को युगो की संख्यानिर्माण कौ शिक्षा दी गई है (याः) जो (ओषधीः) परोषधि्ां (पूर्वाः जाताः) प्रथम पेदा नञि इस मन्त्र मे, देवों से तीन युग पुराकाल भं उत्यत् योषधियों काकथन

English

profit with his soul. May the Gods’ missile pass thee by. I bring thee safe from the mist: from death have I

अध्याय ८

श्लोक 2.24

सोऽरिष्ट॒ न म॑रिष्यसि॒ न म॑रिष्यसि॒ मा बि॑भेः ।न वै तत्र॑ म्रियन्ते॒ नो य॑न्त्यध॒मं तमः॑

so'riṣṭa na mariṣyasi na mariṣyasi mā bibheḥ | na vai tatra mriyante no yantyadhamaṃ tamaḥ

हिन्दी अर्थ

धियों के पुराकाल, तदनन्तर जलीय जन्तु के तदनन्तर पृथिवी. भ्रूणाम्) भरण-पोषण करने वाली प्रोषधियों के (शत चामानि, सप्त च) सौ ओर सात धामोको (अहम्) भै (नु) निश्वयसे पदों में "देव" पद काएक ही अभिप्राय है । उद्धारर्मै करता हूं, (सः) वहतू (मा) न (बिभेः) मेय कर। गोपतेः; गौः पृथिवीनाम (निघं० १।१) । दो-पायो ग्रौर चौ-पायों का पृथिवी के साथ सम्बन्ध है, इसलिये “गोपतेः का प्रथं “पृथिवोपति'' सु-

English

preserved thee. Far have I banished flesh-consuming Agni: I place a rampart for thy life’s protection.

अध्याय ८

श्लोक 2.25

सर्वो॒ वै तत्र॑ जीवति॒ गौरश्वः॒ पुरु॑षः प॒शुः ।यत्रे॒दं ब्रह्म॑ क्रि॒यते॑ परि॒धिर्जीव॑नाय॒ कम्

sarvo vai tatra jīvati gauraśvaḥ puruṣaḥ paśuḥ | yatredaṃ brahma kriyate paridhirjīvanāya kam

हिन्दी अर्थ

(सः) वह (अरिष्ट) है हिसारदित (न मरिष्यसि) तून मरेगा, (न मरिष्यसि) न मरेगा, (मा बिभेः) तून मयकर। (वै) निश्चय से(तत्र) उस अवस्थां (न भ्रियन्ते) नहीं मरते, (नो) न (अधमम् तमः) मरण- कालीन अघम मूर्छाको (यन्ति) प्राप्त होते हैँ ॥२४।। सर्वो वे तत्रं जीवति गौरश्वः पुरुषः पुः । (तत्र) उस अवस्था मँ (वे) निश्चय से (जीवति ) जीवित रहता है, , (सवं) सभौ (गौः, अर्वः, पुरुषः, पशुः) गौ अश्व तथा पुरुष ओर पशु, (यतर) जीवन के लिये (परिधिः) परिधि (क्रियते)करः लिया जाता है ।२५।। “गौः, अश्वः, पुरुषः, पशुः" के दो अभिप्राय सम्भव हैँ (१) गौ, अश्व, पुरुष, इनमे से प्रत्येक पशु है । यथा “तवेमे पञ्च पणवो विभक्ता गावो

English

Saving him from that misty path of thine which cannot be defined. From that descent of thine, O Death, we make for him a shield of prayer.

अध्याय ८

श्लोक 2.26

परि॑ त्वा पातु समा॒नेभ्यो॑ऽभिचा॒रात् सब॑न्धुभ्यः ।अम॑म्रिर्भवा॒मृतो॑ऽतिजी॒वो मा ते॑ हासिषु॒रस॑वः॒ शरी॑रम्

pari tvā pātu samānebhyo'bhicārāt sabandhubhyaḥ | amamrirbhavāmṛto'tijīvo mā te hāsiṣurasavaḥ śarīram

हिन्दी अर्थ

जीवः) जीवन काल को अतिक्रान्त कर जा, (असवः) प्राण (ते शरीरम्) तेरे शरीर को (मा हासिषुः) न त्यागे जीवन की प्रवधिसेप्वं 1 ग्रतिजीवः--जीवन की सास।न्य प्रवि है १०० वषं । इस अवधि को परश्वः परुषा अजावयः" (ब्रथरव० ११।२।६) मगौ प्रादि पांचोंको पशु कहा है । (२) गौ, अश्व, पुरुष तथा तद्धित पशु । पशु जात्येकवचन हे। ब्रहाके भी दो श्रथ ह । (१) परमेश्वर (२) वेद।ये दोनों परि 1. पमे निज की परिधि मानना। अपने-अपि । ॥ (देवाः) देव आचायं (अधि मुञ्चन्न्) छृडा दं ।

English

I give thee both the acts of breath, health, lengthened life, and death by age. All Yama’s messengers who roam around, sent by Vaivasvata,

अध्याय ८

श्लोक 2.27

ये मृ॒त्यव॒ एक॑शतं॒ या ना॒ष्ट्रा अ॑तिता॒र्याः ।मु॒ञ्चन्तु॒ तस्मा॒त् त्वां दे॒वा अ॒ग्नेर्वै॑श्वान॒रा दधि॑

ye mṛtyava ekaśataṃ yā nāṣṭrā atitāryāḥ | muñcantu tasmāt tvāṃ devā agnervaiśvānarā dadhi

हिन्दी अर्थ

इससे जीवन पवित्र ्रौर सात्विक बन कर जौवनावविसे पूवं नहीं मरता । । रूप् । इनसे सूगमता एूतरैक त॑र जानासम्भव है, जेसे कि नौका द्वारा नदो परिधि के भीतर अपने-आप को रख कर वेदोपदिष्ट मागे पर चलने से जीवित रह सकता दहै । वेदभी "कम् हं, यतः वेद सुखी जीवन का मागे , ¢ । - से पार करने वाला (रक्षोहा) रोगकीटाणुं का हनन करने वाला, (सपत्नहा) रोगणशत्रु का हनन करने वाला (असि) तुद (अथो) तथा (अमीवचातनः) अमीवा नामक रोगकीटाणु का विन शक तू है'(वूतुदरुः नाम) पूतुद्र नामक (भेषजम्) म्रौषधतु है ।

English

I chase away. Far off we drive Malignity, Destruction, Pisāchas banqueters on flesh, and Grāhi.

अध्याय ८

श्लोक 2.28

अ॒ग्नेः शरी॑रमसि पारयि॒ष्णु र॑क्षो॒हासि॑ सपत्न॒हा।अथो॑ अमीव॒चात॑नः पू॒तुद्रु॒र्नाम॑ भेष॒जम्

agneḥ śarīramasi pārayiṣṇu rakṣohāsi sapatnahā| atho amīvacātanaḥ pūtudrurnāma bheṣajam

हिन्दी अर्थ

(ये) जो (एकणतम्) एक सौ या एकाधिक सौ (मृत्यवः) मृद्युएुर्हः आचारय , (समानेभ्यः) समन भ्राचायं वाले सतीर्थ्यो से होने वाली, तथां . व्यवितत जीवनावधि से पहले नहीं मरता, अपितु “शतात्''सेभी “भूयः. १६६ भ्रथवेवेद-साष्य का०८। सूु०र२। हुमा है । “धुतुदर” नामक भेषज द्वारा इनका हनन या विनाश क्रियाजा

English

And all the demon kind, the brood of sin, like darkness, we dispel. I win thy life from Agni, from the living everlasting Jātavedas.

अध्याय ८

श्लोक 3.1

शत्रुनाशनम्।१-२६ चातनः।अग्निः।त्रिष्टुप्, ७,१२,१४-१५,१७,२१ भुरिक्, २५ पञ्चपदा बृहतीगर्भा जगती २२-२३ अनुष्टुप्, २६ गायत्री।र॒क्षो॒हणं॑ वा॒जिन॒मा जि॑घर्मि मि॒त्रं प्रथि॑ष्ठ॒मुप॑ यामि॒ शर्म॑ ।शिशा॑नो अ॒ग्निः क्रतु॑भिः॒ समि॑द्धः॒ स नो॒ दिवा॒ स रि॒षः पा॑तु॒ नक्त॑म्

śatrunāśanam| 1-26 cātanaḥ| agniḥ| triṣṭup, 7,12,14-15,17,21 bhurik, 25 pañcapadā bṛhatīgarbhā jagatī 22-23 anuṣṭup, 26 gāyatrī| rakṣohaṇaṃ vājinamā jigharmi mitraṃ prathiṣṭhamupa yāmi śarma | śiśāno agniḥ kratubhiḥ samiddhaḥ sa no divā sa riṣaḥ pātu naktam

हिन्दी अर्थ

यातुधान को पकड़ कर उसे राजा के सामने उपस्थित करे । मन्त्र में शिष्ट के लिये उपस्थित की जाने योग्य समिधा वस्तु । समिधा है यज्ञिय समिधा, के यातुघान को पकडता है 1 पकड़ा गया यातुधान राजा के लिये नजराना' है । राजा ही इसे यथोचित दण्ड देता है । (प्रचेतः) पणेतया सचेत अर्थात् सावधान रहने वाले, (नृचक्षः) तथा वसुरूप भ्रधिकारियों के प्रति (प्रणय) सौप । (यातुघाना) यातना देने वाले (रक्नांसि) राक्षस (हिखम्) परसेना कौ हिसा करने वाले ओर (भ्रमि

English

deliver from calamity. Thy food, thy drink, whate’er they be corn grown by cultivation, milk,

अध्याय ८

श्लोक 3.2

अयो॑दंष्ट्रो अ॒र्चिषा॑ यातु॒धाना॒नुप॑ स्पृश जातवेदः॒ समि॑द्धः ।आ जि॒ह्वया॒ मूर॑देवान् रभस्व क्र॒व्यादो॑ वृ॒ष्ट्वापि॑ धत्स्वा॒सन्

ayodaṃṣṭro arciṣā yātudhānānupa spṛśa jātavedaḥ samiddhaḥ | ā jihvayā mūradevān rabhasva kravyādo vṛṣṭvāpi dhatsvāsan

हिन्दी अर्थ

। “रका 0 ' 1५ वः न ०: ता है (दुरेवाः) ॥ वाला है, व (ईड्य.) स्तु अ 1 (न ) 4 लिए, य्य है, बह (रंसि) राकषसस्वभाव वालो का (षति) । ॥ र जले हए भस््ौ सौर शतो को (शिशीते) तीक क्ता है, ॥ करन्ना) ॥ि शक्ति, तथा धनसम्पत् परादिऽि आविष करता दे ल : ॥ न रक्षाथं दो सींग रती है, र्त् निज दीषटू कये र्ना कैं विथ रस रौर अस्तरूपीः द्विष : शृङ्गो को रखता ओर “अनहं तसाः करता टे।

English

I balm with oil the mighty demon-slayer, to the most famous friend I come for shelter. Enkindled, sharpened by our rites, may Agni protect us in the day and night from evil.

अध्याय ८

श्लोक 3.3

उ॒भोभ॑यावि॒न्नुप॑ धेहि॒ दंष्ट्रौ॑ हिं॒स्रः शिशा॒नोऽव॑रं॒ परं॑ च ।उ॒तान्तरि॑क्षे॒ परि॑ याह्यग्ने॒ जम्भैः॒ सं धे॑ह्य॒भि या॑तु॒धाना॑न्

ubhobhayāvinnupa dhehi daṃṣṭrau hiṃsraḥ śiśāno'varaṃ paraṃ ca | utāntarikṣe pari yāhyagne jambhaiḥ saṃ dhehyabhi yātudhānān

हिन्दी अर्थ

कहता है कि “शासन के लिये मैने जो मेधापूरवेक राजणासन विषयक वेद (तजय द्धिः) हिसाकारक (एवैः) गतियो मर्थात् व्यवहारो दवारा हिसा- करो, भौर (दुहः) प्रोहका री. (मड गुरावतः) भङ गुर हो जाने वाने(रक्षसः) का०८। सू०४ शरथवेवेद-भाष्य । २१६ परः (= परदेश निकाला, स्वदेश से निकाल देना । इस प्रकार वह् स्व- शरीर कौ दुष्टिसेस्वदेशसे परेहो जाता है, श्रौर सन्तानोंसे भोपरेहो जाता है । सन्तानं तो स्वदेशमें ही रहती हैँ । तिखः पृथिवी = (१) परव॑तीय अधित्यका, उच्चभूमि। (२) पवेतीय उपत्यका, पादभुमि । (३) तथा समतल भूमि । इन से श्रधोभूमि =कबर,

English

With keen glance guard the sacrifice, O Agni: thou Sage, con- duct it onward to the Vasus. Let not the fiends, O Man-Beholder, harm thee burning against the Rākshasas to slay them.

अध्याय ८

श्लोक 3.4

अग्ने॒ त्वचं॑ यातु॒धान॑स्य भिन्धि हिं॒स्राशनि॒र्हर॑सा हन्त्वेनम्।प्र पर्वा॑णि जातवेदः शृणीहि क्र॒व्यात् क्र॑वि॒ष्णुर्वि चि॑नोत्वेनम्

agne tvacaṃ yātudhānasya bhindhi hiṃsrāśanirharasā hantvenam| pra parvāṇi jātavedaḥ śṛṇīhi kravyāt kraviṣṇurvi cinotvenam

हिन्दी अर्थ

¦ ॥ । (चिकितुषे, जनाय) ज्ञानी जन के लिये (सविज्ञानम्) सुगमता से ज्ञेय ॥ (अहये) साप के लिये (प्रददातु) प्रदान करे, (वा) अथवा (निक्छतेः) कृच्छापत्ति की (उपस्थे) गोद में (आदधातु) स्थापित करे) २१८ “ अथववेद-भाष्य का०८। सू०४ सन्तानो से (निहीयताम्) विहीन हो जाय । होने का श्रभिप्रायहै कि वह सन्तानोंसेमिलन सके! तथा वहरसग्रौर

English

Look on the fiend, ‘mid men, as Man-Beholder: rend thou his three extremities in pieces. Demolish with thy flame his ribs, O Agni: the Yātudhāna’s root destroy thou triply.

अध्याय ८

श्लोक 3.5

यत्रे॒दानीं॒ पश्य॑सि जातवेद॒स्तिष्ठ॑न्तमग्न उ॒त वा॒ चर॑न्तम्।उ॒तान्तरि॑क्षे॒ पत॑न्तं यातु॒धानं॒ तमस्ता॑ विध्य॒ शर्वा॒ शिशा॑नः

yatredānīṃ paśyasi jātavedastiṣṭhantamagna uta vā carantam| utāntarikṣe patantaṃ yātudhānaṃ tamastā vidhya śarvā śiśānaḥ

हिन्दी अर्थ

(सः) वह (तन्वा) निज शरीर से (च) भौर (तना) सन्तानो से पुथिवियों से (अधः) नीचे (भस्तु) हो जाय तथा (शरस्य) इसका (यशः) द्मधिकारियो ! (यः) जो (मा) मे (दिवा) दिनमे (यःच) भौरजो (नकतम्) रात में (दिप्सति) धोखा देना चाहता है, या मार देना चाहता अधिक ऋजु है, (तत् इत्) उस अधिक ऋजु की (सोमः) सोम (अवति)

English

Thrice, Agni, let thy noose surround the demon who with his falsehood injures holy Order.

अध्याय ८

श्लोक 3.6

य॒ज्ञरिषूः॑ सं॒नम॑मानो अग्ने वा॒चा श॒ल्याँ अ॒शनि॑भिर्दिहा॒नः ।ताभि॑र्विध्य॒ हृद॑ये यातु॒धाना॑न् प्रती॒चो बा॒हून् प्रति॑ भङ्ग्ध्येषाम्

yajñariṣūḥ saṃnamamāno agne vācā śalyā~ aśanibhirdihānaḥ | tābhirvidhya hṛdaye yātudhānān pratīco bāhūn prati bhaṅgdhyeṣām

हिन्दी अर्थ

मन्त्र (८) मे अनृत वचनो का कथन हुभा है 1 श्रनृत वचनो कौ पहचान के लिये मन्व (१२) मे अनृत ग्रौर सत्य कौ पहचान का वणेन हुभ्रा है। ज्ञानी जन सुगमता से जान लेता है । “सत् वह वस्तु प्रधिक "ऋजु" होतारहै, सीधे मागं वाला होता है, ग्रौर “अनृत कुटिल अर्थात् टे मागेकाहोताहै। सत्यके कथन के लिये कल्पित बातें नहीं बनानी होती, परन्तु प्रसव्य के कथन के लिये कई कतित बातों का मिश्रण करना पडता है । इसलिये सत्य कामागं ऋजु है, ग्रौरभसत्यका मागे जन जब भात्मनिरीक्षण करताहैतो वहु अनुभव करलेता हैकिर्मैजो साधारण अनुभूतियों का विषय है । करना । नवाडउ सोमं जिनं हिनोति न त्रियं मिथुया धारय॑न्तम् । ल १५8 चतुथं सूक्त 1 त वणेन है । ५ है ध तथा (सोमः) सेनाध्यक्ष (वै उ) निश्चय से (वृजिनम्) पाप ओौर पापी को यदि मैने कोई अनृतव्यवहार किया हैया सैनिकों तथा भन्य शासकरूपी

English

Loud roaring with thy flame, Jātavedas, fetter him in the pre- sense of the singer. Agni, what curse the pair this day may utter, what rude rough word the worshippers have

अध्याय ८

श्लोक 3.7

उ॒तार॑ब्धान्त्स्पृनुहि जातवेद उ॒तारे॑भा॒णाँ ऋ॒ष्टिभि॑र्यातु॒धाना॑न्।अग्ने॒ पूर्वो॒ नि ज॑हि॒ शोशु॑चान आ॒मादः॒ क्ष्विङ्का॒स्तम॑द॒न्त्वेनीः॑

utārabdhāntspṛnuhi jātaveda utārebhāṇā~ ṛṣṭibhiryātudhānān| agne pūrvo ni jahi śośucāna āmādaḥ kṣviṅkāstamadantvenīḥ

हिन्दी अर्थ

(न) नहीं (हिनाति) बढ़ता या बढने देता, तथा (मियुया) मिथ्या अर्थात् देवों के साथ कोह अनुचित व्यवहार कियादहैतोतु मुभे लज्जित खा अपः मानित कर, ओर सुभः पर क्रोध प्रकट कर, परन्तु जिस किसी अधिकारीने मुम पर "यातुधान" होने का आरोप किया है, यदि वह् भ्रारोप न्यायालय = यातना का निधान, यतना देने वाला 1 "न्यायालय" इसलिये कि वेदा- नुसार दण्डविधान न्यायालय द्वारा होता है । इसलिये कहा है कि “धर्माय समाचरम्” श्रालभते (यजु° ३०।६) ; धमय == राजधूमं की व्यवस्था यदि वाहमच॑तदेवो अस्मि मोधं वा देवाँ अप्युहे अग्ने । प्रनृत को देव मानने वाला मँ हं, (वा) अथवा (मोघम्) व्यथं मे (देवान्)

English

spoken, Each arrowy taunt sped from the angry spirit,—pierce to the heart therewith the Yātudhānas.

अध्याय ८

श्लोक 3.8

इ॒ह प्र ब्रू॑हि यत॒मः सो अ॑ग्ने यातु॒धानो॒ य इ॒दं कृ॒णोति॑ ।तमा र॑भस्व स॒मिधा॑ यविष्ठ नृ॒चक्ष॑स॒श्चक्षु॑षे रन्धयैनम्

iha pra brūhi yatamaḥ so agne yātudhāno ya idaṃ kṛṇoti | tamā rabhasva samidhā yaviṣṭha nṛcakṣasaścakṣuṣe randhayainam

हिन्दी अर्थ

ने श्रदित कियाद, हिसित किया है तो (हृणीषे) मभ लज्जित या जप- देने वाला (श्रस्मि) हूं, (यदिवा) अथवा यदि (पुरुषस्य) भिसी पुरुष के (ब्रायुः) जीवन को (ततप) मैने संतप्त किया है) (अधा) तथा (सः) मानित कर, या मुभ पर क्रोध कर, परन्तु इन के न होते (किम्) क्यो वह् (दशभिः वरेः) १० प्रों से (वियूयाः) वियुक्त हो जाय (यः) जौक्रि (मा) मभ (मोघम्) व्यथं मे (ग्राह) कहताहै (यातुधान इति) किह “यातुघान'' । प्र्थात् जो मु पर यातुधान हने का दोषारोपण करता द) यातुधान यातनाओं का निधान । हृणीडः रोषणे लज्जायाज्च (कण्ड्वादिः) ; तथा हृणिः करधनाम (निषं० । २।१३) ; हृणीयते करध्यतिक्ममं (निषं ० २।१२) । देवान् = दिवु क्रोडा,

English

With fervent heat exterminate the demons: destroy the fiends with glow and flame, O Agni. Destroy with fire the foolish gods’ adorers: destroy the insatiate fiercely-burning creatures.

अध्याय ८

श्लोक 3.9

ती॒क्ष्णेना॑ग्ने॒ चक्षु॑षा रक्ष य॒ज्ञं प्राञ्चं॒ वसु॑भ्यः॒ प्र ण॑य प्रचेतः ।हिं॒स्रं रक्षां॑स्य॒भि शोशु॑चानं॒ मा त्वा॑ दभन् यातु॒धाना॑ नृचक्षः

tīkṣṇenāgne cakṣuṣā rakṣa yajñaṃ prāñcaṃ vasubhyaḥ pra ṇaya pracetaḥ | hiṃsraṃ rakṣāṃsyabhi śośucānaṃ mā tvā dabhan yātudhānā nṛcakṣaḥ

हिन्दी अर्थ

जोकरिसाघ्राज्य के न्यायाधीश के सामने मपर यातुधान होने का मृत्युदण्ड दिया जाय या पूत्रो से अलग कर दिया जाय । १० पत्र इसलिये कठा है, इससे श्रधिक की नहीं । यथा “दशास्यां पुत्रानाधेहि पतिमेकादशं कृधि” (यः) जो (अयातुम्, मा) यातना न देने वाले मुभ को (यातुधान इति . + जह्) है यातुधान ! इस प्रकार कहता है, सम्बोधित करता है, (वा) तया (यः रक्षाः) जो राक्षस स्वभाव वाला अपने आप को (आह) कहता है कि

English

May Gods destroy to-day the evil-doer: may uttered curses turn again and strike him. Let arrows pierce the liar in his vitals, and Visva’s net enclose the Yātudhāna.

अध्याय ८

श्लोक 3.10

नृ॒चक्षा॒ रक्षः॒ परि॑ पश्य वि॒क्षु तस्य॒ त्रीणि॒ प्रति॑ शृणी॒ह्यग्रा॑ ।तस्या॑ग्ने पृ॒ष्टीर्हर॑सा शृणीहि त्रे॒धा मूलं॑ यातु॒धान॑स्य वृश्च

nṛcakṣā rakṣaḥ pari paśya vikṣu tasya trīṇi prati śṛṇīhyagrā | tasyāgne pṛṣṭīrharasā śṛṇīhi tredhā mūlaṃ yātudhānasya vṛśca

हिन्दी अर्थ

छल कपट न करे, या तेरी हिसान करदं। काट डाल ! (तस्य)उसकी (पृष्टीः) छाती ओर पीठ के अङ्गं को (हरसा) संहारी शस्त्र हारा (शुणीहि) काट डाल, (यातुधानस्य ) यातना देने वाले भागकेतीन अग्रह, सिर तथादो बाहुं । मूल काथं ठीता है जड । वृक्ष का मूल अर्थात् जड़ नीच को ओर होती है । ्रतः यातुधान कं मूलका ग्रभिप्राय है शरीर के निचले अद्ध ।येततीनरहँ। घुटनों से उपरके अखं ये नीचे के विविध अंग हैं । सिर, पृष्टीः भौर बाहुओं से नीचे है) कृा० ८० का० ठ सू०३ अयववंद-माघ्य २०५

English

Food eatable, uneatable, I make all poisonless for thee. We give thee over as a charge to Day and Night, in trust to both.

अध्याय ८

श्लोक 3.11

त्रिर्या॑तु॒धानः॒ प्रसि॑तिं त एत्वृ॒तं यो अ॑ग्ने॒ अनृ॑तेन॒ हन्ति॑ ।तम॒र्चिषा॑ स्फू॒र्जय॑न् जातवेदः सम॒क्षमे॑नं गृण॒ते नि यु॑ङ्ग्धि

triryātudhānaḥ prasitiṃ ta etvṛtaṃ yo agne anṛtena hanti | tamarciṣā sphūrjayan jātavedaḥ samakṣamenaṃ gṛṇate ni yuṅgdhi

हिन्दी अर्थ

यातुधान को प्रधानमन्त्री तीन बार कारागार मे बन्द करे । यातुधान को लेकर तृप्त होने वालों को, जो किं (शौशुचतः) प्रत्यन्त हनन कम म प्रदीप्त होते हैँ, उन्हँ (परा) पराडः मुख करके (शृणीहि) नष्ट कर । के अस्त्र-शस्तरं का वर्णन हुभा है । पराच देवा जिनं शणन्त॒ परत्यगेनं शुपथां यःतु सृष्टाः । सेनाधिपति (वृजिनम्) पापी तथा कुटिल को (पराशुणन्तु) नष्ट करे, : पापी तथा कुटिल, शपथदाता, तथा वाणी द्वारा धोखा देकर चोरी करने वाला, ये सब यातुधान दहै । कोईभी प्रजाजन इन्हे रस्सियों स्रादि । ¢ द्वारा बान्घ सकता है। शरवः शर ओौर शरुमे भेद प्रतीतहोताहै। ।

English

Keep him for me from stingy fiends, from those who fain would feed on him. A hundred, yea, ten thousand years we give thee, ages two, three, four.

अध्याय ८

श्लोक 3.12

यद॑ग्ने अ॒द्य मि॑थु॒ना शपा॑तो॒ यद् वा॒चस्तृ॒ष्टं ज॒नय॑न्त रे॒भाः ।म॒न्योर्मन॑सः शर॒व्या॒३जाय॑ते॒ या तया॑ विध्य॒ हृद॑ये यातु॒धाना॑न्

yadagne adya mithunā śapāto yad vācastṛṣṭaṃ janayanta rebhāḥ | manyormanasaḥ śaravyā3jāyate yā tayā vidhya hṛdaye yātudhānān

हिन्दी अर्थ

उन्हे तथा (रेभाः) परमेश्वर के स्तोता ( यत्) जो (वाचः) वाणी की (तृष्ट) कटुता (जनयन्त) पेदा करते हँ उन्हे तथा (यातुधानान्) जो यातनादेने वाले है, उन्हें (या) जो कि (मनसः मन्योः) मानसिक मन्यु से (णरब्या) दषु (जायते) पैदा होती है (तया) उस दरा (हृदये) उनके हृदयो को । प्रयोग, इनके करने वाले भी यातुधान है, यातना देने वाले है, इन्हे मानसिक करोधरूपी वाण द्वारा हृदयो मे बीधना चाहिए, ताक्रि ये हाद्िक कष्ट

English

May Indra, Agni, all the Gods, with willing favour look on thee. To Autumn we deliver thee, to Winter, Spring and Summer’s care.

अध्याय ८

श्लोक 3.13

परा॑ शृणीहि॒ तप॑सा यातु॒धाना॒न् परा॑ग्ने॒ रक्षो॒ हर॑सा शृणीहि ।परा॒र्चिषा॒ मूर॑देवान्छृणीहि॒ परा॑सु॒तृपः॒ शोशु॑चतः शृणीहि

parā śṛṇīhi tapasā yātudhānān parāgne rakṣo harasā śṛṇīhi | parārciṣā mūradevānchṛṇīhi parāsutṛpaḥ śośucataḥ śṛṇīhi

हिन्दी अर्थ

अनुभव करं । रेभ स्तोतृनाम (निघं० ३।१६) । मन्युः मननपूवेक क्रोध, पराचिषा मूरदेवान् छणीदि परासुठपः शोशुचतः दणीदहि ॥१३॥ ( ताला (पौरपेयेण) पुरुष करे (यः) जो (अष्व्येन) अण्व के (विषा) मांस दारा (पुना) या अन्य किसी पशु के मांस द्वारा( समङकते) अपने- को (तपसा) तापक-शस्तर-मस्तर दवारा (परा शृणीहि) पराडः मुखे कर, नष्ट कर, (रक्षः) राक्षस स्वभाव वाले को (परा) पराः मूख करके (हरसा) अहृन्तव्या गौ का हुनन कर उसके (क्षीरम्) दूध को (भरति-=हूरति)

English

We trust thee with auspicious years wherein the plants and herbs grow up. Death is the lord of bipeds, Death is sovran lord of quadrupeds.

अध्याय ८

श्लोक 3.14

परा॒द्य दे॒वा वृ॑जि॒नं शृ॑णन्तु प्र॒त्यगे॑नं श॒पथा॑ यन्तु सृ॒ष्टाः ।वा॒चास्ते॑नं॒ शर॑व ऋच्छन्तु॒ मर्म॒न् विश्व॑स्यैतु॒ प्रसि॑तिं यातु॒धानः॑

parādya devā vṛjinaṃ śṛṇantu pratyagenaṃ śapathā yantu sṛṣṭāḥ | vācāstenaṃ śarava ṛcchantu marman viśvasyaitu prasitiṃ yātudhānaḥ

हिन्दी अर्थ

फटकारे। प्रजा के भले के लिए यहु कार्यं वह् अपने सामने कराए याकरे। । मांसभक्षकों, तथा गौओों को मार कर उनके दूध का क्षय करने £ ¦ नहीं काटना, अपितु उसके निर्णीत नियमों क द्वारा जल्लाद प्रादि ने सिर परेणान् देवः सविता ददातु परां भागमोषधीनां जयन्ताम् ॥१ (यातुधानाः) यातना देने वाले (गवाम्) मौभों के (विषम्) विष ब्रथात्

English

Away I bear thee from that: Death the ruler: be not thou afraid. Thou, still uninjured, shalt not die: be not afraid; thou shalt not die.

अध्याय ८

श्लोक 3.15

यः पौरु॑षेयेण क्र॒विषा॑ सम॒ङ्क्ते यो अश्व्ये॑न प॒शुना॑ यातु॒धानः॑ ।यो अ॒घ्न्याया॒ भर॑ति क्षी॒रम॑ग्ने॒ तेषां॑ शी॒र्षाणि॒ हर॒सापि॑ वृश्च

yaḥ pauruṣeyeṇa kraviṣā samaṅkte yo aśvyena paśunā yātudhānaḥ | yo aghnyāyā bharati kṣīramagne teṣāṃ śīrṣāṇi harasāpi vṛśca

हिन्दी अर्थ

निरस्त कर दे, देशनिकाला दे दे, (ओषघीनाम्) व्रीहि-यव शादि ओषधिर्यौ विषम् उदकनाम (निधं १।१२) । यातुधानो को गोके दूध के स्थानं ; मे गोमूत्ररूपी जल पिलाना चाहिए । तथा पृथिवीवासियों के भने के लिये इन दृष्टो को मृत्युदण्ड देना चाहिए, तथा देशनिकाले का दण्ड देना का दूध है, (तस्य ) उसका (मा आशीत्) न भक्षण करे (यातुधानः) गौ १. तथा सग्णावस्था में भरौषधोपचार से वञ्चित कर दिये जांय । । को यातना देने वाला । (यतमः) जो यातुधान (पीयूषम्) पेय दुग्ामृत को

English

Here where I am men do not die or go to lowest depths of gloom. Here verily all creatures live, the cow, the horse, the man, the beast,

अध्याय ८

श्लोक 3.16

वि॒षं गवां॑ यातु॒धाना॑ भरन्ता॒मा वृ॑श्चन्ता॒मदि॑तये दु॒रेवाः॑ ।परै॑णान् दे॒वः स॑वि॒ता द॑दातु॒ परा॑ भा॒गमोष॑धीनां जयन्ताम्

viṣaṃ gavāṃ yātudhānā bharantāmā vṛścantāmaditaye durevāḥ | paraiṇān devaḥ savitā dadātu parā bhāgamoṣadhīnāṃ jayantām

हिन्दी अर्थ

। को यातना देता है उसे गोषुगध से वञ्चित कर देना चाहिए (मन्त्र १६) । सहमूराननुं दह करव्यादो मा ते हेत्या सं्षत देव्यांयाः ॥१८॥ यातना दने वालों को (मृणसि) तु मारता रहा है, (रक्षांसि) राक्षस-स्वभाव वाले यातुधान (त्वा) तुमं (पृतनासु) युद्धो मे न जिग्युः) नहीं जीत पाए। (ऋन्यादः) इन मांसभक्षियों को (सहमूरान्) जो कि मूढता के साथ विद्यमान पाहि) सब ओरसे हमारी रक्ना कर । (सखा) जंसे सखा (सखायम्) सखा की पाति रक्षा करताहै, तथा (ग्रजरः) जरारहित यूवा पुत्र ५); “शफारुजः आरुजासि'' (अथव ° २०।६४।६) ; शफन इव ओहसे"' ¦

English

Here where this holy prayer is used, a rampart that protecteth life. Let it preserve thee from thy peers, from incantation, from thy friends.

अध्याय ८

श्लोक 3.17

सं॒व॒त्स॒रीणं॒ पय॑ उ॒स्रिया॑या॒स्तस्य॒ माशी॑द् यातु॒धानो॑ नृचक्षः ।पी॒यूष॑मग्ने यत॒मस्तितृ॑प्सा॒त् तं प्र॒त्यञ्च॑म॒र्चिषा॑ विध्य॒ मर्म॑णि

saṃvatsarīṇaṃ paya usriyāyāstasya māśīd yātudhāno nṛcakṣaḥ | pīyūṣamagne yatamastitṛpsāt taṃ pratyañcamarciṣā vidhya marmaṇi

हिन्दी अर्थ

गौ के खुर के स्पशं द्वारा मग्न कर दिये जाते हँ । रेभे=रेभ है परमेश्वर का नाम (निषं० ३।१६) । अथवंवत्; अथर्वा = “यवेतिः चरतिकर्मा, अकारः जाती है । उस द्वारा योगी के राजस-तामस कमं विनष्ट हो जतिहैँ । केहन्ताकोजलादेने का दण्ड देताहै। न्योष=नि (नितराम्) +उष धृषदर्णं दिवेदिंषे हन्तारं भङ्गुराव॑तः ॥२२॥

English

Live very long, be healthy, be immortal: let not the vital breath forsake thy body. One and a hundred modes of death, dangers that may be over- come,

अध्याय ८

श्लोक 3.18

स॒नाद॑ग्ने मृणसि यातु॒धाना॒न् न त्वा॒ रक्षां॑सि॒ पृत॑नासु जिग्युः ।स॒हमू॑रा॒ननु॑ दह क्र॒व्यादो॒ मा ते॑ हे॒त्या मु॑क्षत॒ दैव्या॑याः

sanādagne mṛṇasi yātudhānān na tvā rakṣāṃsi pṛtanāsu jigyuḥ | sahamūrānanu daha kravyādo mā te hetyā mukṣata daivyāyāḥ

हिन्दी अर्थ

सदश (परिधीमहि) परिधिरूपमें स्थापित करते हँ।जोतु कि (घुष- हणम्) धषेकरूप वाला है, ओर (दिवेदिवे) श्राए-दिन (भङगुरावतः) भग्न हो जाने वाले यातुधानो का (हन्तारम्) हनन करने वाला है । पुरम् = जसे किले यानगर की परिधि प्रजाकौ रक्नाकरतीहै वसे तू बलवान् हमारी रक्षा करता है । तेरा स्वरूप यातुधानौ का धषेक है। तेरे स्वल्प को देखते ही यातुधानो के धेयं भग्न हो जाते ह । २. श्रयवा म्मासानी से भग्न हौ जाने वाले । का०्य सू०.३ ये ते श्रद्ध जरं जातवेदसितममरैती ब्र्मसंशरि म कि मः शोचिषा) ताभ्यां दरहहैमथिदास॑न्तं किमीदिन पत्यश्मचिषां जातवेद वि निंव

English

May Gods deliver thee from this when Agni, dear to all men, bids. Body of Agni prompt to save, slayer of fiends and foes art thou,

अध्याय ८

श्लोक 3.19

त्वं नो॑ अग्ने अध॒रादु॑द॒क्तस्त्वं प॒श्चादु॒त र॑क्षा पु॒रस्ता॑त्।प्रति॒ त्ये ते॑ अ॒जरा॑स॒स्तपि॑ष्ठा अ॒घशं॑सं॒ शोशु॑चतो दहन्तु

tvaṃ no agne adharādudaktastvaṃ paścāduta rakṣā purastāt| prati tye te ajarāsastapiṣṭhā aghaśaṃsaṃ śośucato dahantu

हिन्दी अर्थ

मागो वाले (अरतिभिः) सनि.दामक् अस्तौ दा जह, न १ संधिते) जो कि वेदोवत विधि दवारा सम्यक्-तीण किये गष ह, ) है ( १) विषप्रयोग दवरो । (र) श्रांखो प॑र तीक्ष्ण परकश 'ाल कर ॥ । लेने-वाले “पर गुप्तचर” को (अविषा) अवि नामक ॥ अस्त्रो के द न चौँधिथा कर ।' (३) "अस्त्रौ कै अग्रभागे तपाने वाले ह क लगाकर † ऋवेदं ( ०।८७२३) "मे '.श्रजिभिः' के स्थान. य ॥ "क प्रयोग हंथा है! ऋष्टिः आयुध . अ्थवण र त ।७.) . न कलिय । । = ध युमिरार्िंवि ः । 21 द करं श्नु त्य ॥

English

Yea, banisher of malady, the healing balm called Pūtudru. A prayer for the destruction of demons

अध्याय ८

श्लोक 3.20

प॒श्चात् पु॒रस्ता॑दध॒रादु॒तोत्त॒रात् क॒विः काव्ये॑न॒ परि॑ पाह्यग्ने ।सखा॒ सखा॑यम॒जरो॑ जरि॒म्णे अग्ने॒ मर्ताँ॒ अम॑र्त्य॒स्त्वं नः॑

paścāt purastādadharādutottarāt kaviḥ kāvyena pari pāhyagne | sakhā sakhāyamajaro jarimṇe agne martā~ amartyastvaṃ naḥ

हिन्दी अर्थ

परिणाम था किं निज जनपदन्यापी सदाचार तथा सात्विक वृत्ति के सूक्त ४ अघार पर केकय जनपद का महा राज यह् उद्धोषित करसकाथाक्रि = ¦ ( ध दष्कमियौं को गह्रे अन्धेरे गढ़ या कूप मे डाल कर बीन्धना न । (५) मांसभक्षकों की पसलियो, छाती को बीन्धना (मन्व ५) (७) मूठ दोषारोपणं द्वारा पवित्रमन वाले शासक के निन्दक को प) ९०६३ शु! ५ क भद

English

O Jātavedas, armed with teeth of iron, enkindled with thy flame, attack the demons. Seize with thy tongue the foolish gods’ adorers: rend, put with- in thy mouth the raw-flesh eaters.

अध्याय ८

श्लोक 3.21

तद॑ग्ने॒ चक्षुः॒ प्रति॑ धेहि रे॒भे श॑फा॒रुजो॒ येन॒ पश्य॑सि यातु॒धाना॑न्।अ॒थ॒र्व॒वज्ज्योति॑षा॒ दैव्ये॑न स॒त्यं धूर्व॑न्तम॒चितं॒ न्योऽष

tadagne cakṣuḥ prati dhehi rebhe śaphārujo yena paśyasi yātudhānān| atharvavajjyotiṣā daivyena satyaṃ dhūrvantamacitaṃ nyo'ṣa

हिन्दी अर्थ

(१०) भूठा दोषारोप करने वाले को निज परिवार से पृथक् कर देना कर्मो वाला करो । (वृषणा) है वाणो की वर्षा करने वालो ! (तमोवृधः) विरोष मे सोम है सेनाध्यक्त या सेनानायक, जो कि सेना के अग्रभाग में स्थित हआ । वैदिक दण्ड-विधान उग्र है। इसके होते राजकर्मचारी तथा प्रजाये त (५३, प्रथरवंवेर-भष्यि का०प८। सू. काप सू० ४ अथवेवेद-भाष्य करने वाले प्रति (हणम्) उसके हिंसक (वधम्) आयुरध कै (दिवः)

English

Apply thy teeth, the upper and the lower, thou who hast both, enkindled and destroying. Roam also in the air, O King, around us, and with thy jaws assail the wicked spirits.

अध्याय ८

श्लोक 3.22

परि॑ त्वाग्ने॒ पुरं॑ व॒यं विप्रं॑ सहस्य धीमहि ।धृ॒षद्व॑र्णं दि॒वेदि॑वे ह॒न्तारं॑ भङ्गु॒राव॑तः

pari tvāgne puraṃ vayaṃ vipraṃ sahasya dhīmahi | dhṛṣadvarṇaṃ divedive hantāraṃ bhaṅgurāvataḥ

हिन्दी अर्थ

। मायु को (तक्षतम्) घडो, निमित करो, (येन) जिस द्वारा (वावृधानम्) वे हृषु (रक्षः) राक्षस-वरग को (निजूर्वथः) तुर हिंसित करते ह । ८ । एतु सोमः” (यजु° १७।४०) मेँ सोम को “पुरः एतु कहा है । मन्त्र म , ह्यव कत्यादे घारवक्षसे देषो धत्तसनवायं कमादिनै ॥२॥ , सदा (द्वेषः धत्तम्) देष धारण करो। के प्रति सदा द्वेष रसने-का विधान हृग्रा'हे

English

Pierce through the Yātudhāna’s skin, O Agni; let the destroying dart with fire consume him. Rend his joints, Jātavedas! let the eater of raw flesh, seeking flesh, tear and destroy him.

अध्याय ८

श्लोक 3.23

वि॒षेण॑ भङ्गु॒राव॑तः॒ प्रति॑ स्म र॒क्षसो॑ जहि ।अग्ने॑ ति॒ग्मेन॑ शो॒चिषा॒ तपु॑रग्राभिर॒र्चिभिः॑

viṣeṇa bhaṅgurāvataḥ prati sma rakṣaso jahi | agne tigmena śociṣā tapuragrābhirarcibhiḥ

हिन्दी अर्थ

मास-मक्षकों को (परणनि) उन की पसलियो-प्रर (दिष्परतम्) उह बंधो ओौर (प्र विध्यतम्) बींधो । (यतः) जहां से (एषाम), इन में से (एकः चन) एक (पुनः) फिर (न उदयत्) न ऊपर आए, तथा (वाम्) तुमः दोनो का (तद्) वह (मन्युमत् शवः) क्रोधसंवलित बल: (सहसे) उन के. पराभव के लिये (्रस्तु) हो । प्रयःसारः । अयः सारमयेहैननसाधनेरायुधेः (सायण) ॥ 1 + “वत्र कृप॑नाम” (निघं० ३।२३) । कूप अन्यकारमय हौ 1 कूप मे इन्दं ।

English

Where now thou seest, Agni Jātavedas! a Yātudhāna, standing still or roaming. Or one that flieth through the air’s mid-region, kindled to fury as an archer pierce him.

अध्याय ८

श्लोक 3.24

वि ज्योति॑षा बृह॒ता भा॑त्य॒ग्निरा॒विर्विश्वा॑नि कृणुते महि॒त्वा।प्रादे॑वीर्मा॒याः स॑हते दु॒रेवाः॒ शिशी॑ते॒ शृङ्गे॒ रक्षो॑भ्यो वि॒निक्ष्वे॑

vi jyotiṣā bṛhatā bhātyagnirāvirviśvāni kṛṇute mahitvā| prādevīrmāyāḥ sahate durevāḥ śiśīte śṛṅge rakṣobhyo vinikṣve

हिन्दी अर्थ

ृद्रंसोभा पर वां भूतु विश्वतं ईयं मति; ककष्यादेवव 'वजिनां फक कर, या डाल कर, वाण आदि द्वारा इन्हें -बींध डालने का विधान हुं ॑ । है । यह राजनैतिक दण्ड है,जो कि राजपुरुषो द्वारा दिया ऊषा है । प्रत्येक । के० ८ सू० ४ अथवेवेद-भाष्य ् २१७ (न °" " राक्षस स्वभाव वाले शत्रु राजा का (हतम्) तुम दोनों हनन करो। राजा को (सुगम्) सुगम जीवन का सुख (मा भूत्) न हो, धः ) ज

English

Bending thy shafts through sacrifices, Agni! dipping thine arrows in the hymn to point them, Pierce to the heart therewith the Yātudhānas, and break their arms uplifted to attack thee.

अध्याय ८

श्लोक 3.25

ये ते॒ शृङ्गे॑ अ॒जरे॑ जातवेदस्ति॒ग्महे॑ती॒ ब्रह्म॑संशिते ।ताभ्यां॑ दु॒र्हार्द॑मभि॒दास॑न्तं किमी॒दिनं॑ प्र॒त्यञ्च॑म॒र्चिषा॑ जातवेदो॒ वि नि॑क्ष्व

ye te śṛṅge ajare jātavedastigmahetī brahmasaṃśite | tābhyāṃ durhārdamabhidāsantaṃ kimīdinaṃ pratyañcamarciṣā jātavedo vi nikṣva

हिन्दी अर्थ

उपक्षय करता है ¦! एवैः अयनैः व्यवहारः (निरुक्त २।७।२५; क सव प्रोर निपटी होती है । (वाम्) तुम दोनों के लिये (याम्) जिस ¦ (होत्राम्) वेदवाणी को, (मेधया) विचार पुवेक, (परिहिनोमि) तुम्हारी ¦ करते ह । ॥ राष्ट्र के दुष्करम को न भले, अपितु उसका स्मरण कर हिसिक के , विनाश । ग्रोरसोमको दियाहै। होत्रा=वेदवाणी “होत्रा वाड नाम" (निघं० पाकेन मनसा) परिपक्व या पवित्र मन से (चरन्तम्) शासन कायं मे क हए (मा) मुभे प्रधानमन्त्री को (यः) जो (ग्रनुतेभिः वचोभिः)

English

Rescue the captives also, Jātavedas! yea, those whom Yātudhā- nas’ spears have captured. Strike down that fiend, blazing before him, Agni! Let spotted carrion-eating kites devour him.

अध्याय ८

श्लोक 3.26

अ॒ग्नी रक्षां॑सि सेधति शु॒क्रशो॑चि॒रम॑र्त्यः ।शुचिः॑ पाव॒क ईड्यः॑

agnī rakṣāṃsi sedhati śukraśociramartyaḥ | śuciḥ pāvaka īḍyaḥ

हिन्दी अर्थ

विद्यमान न रहे नष्टदहो जाय, (इव) जंसे कि ४ ) मूद्री द्वारा । अरैये वा तान् परददातु सोम् आ वां दधातु निकरतेरूपस्थं ॥९॥ ॑ इसलिये कहते हँ कि ये राष्ट्रपति मिलकर सम्राट् का वरण करते हैः चुनाव है । राजा श्रौर उसके मन्व को “नृपती कहा है सेनाध्यक्ष । परन्तु वेदिक राजनीति के अनुसार शासन के लिये “अग्नि

English

Here tell this forth, O Agni: whosoever is, he himself, or acteth as, a demon, Grasp him, O thou most youthful, with thy fuel: to the Man Seer’s eye give him as booty.

अध्याय ८

श्लोक 4.1

शत्रुदमनम्।१-२५ चातनः।इन्द्रसोमौ।जगती, ८-१४, १६-१७, १९, २२, २४ त्रिष्टुप्, २०,२३ भुरिक्, २५ अनुष्टुप्।इन्द्रा॑सोमा॒ तप॑तं॒ रक्ष॑ उ॒ब्जतं॒ न्यऽर्पयतं वृषणा तमो॒वृधः॑ ।परा॑ शृणीतम॒चितो॒ न्योऽषतं ह॒तं नु॒देथां॒ नि शि॑शीतम॒त्त्रिणः॑

śatrudamanam| 1-25 cātanaḥ| indrasomau| jagatī, 8-14, 16-17, 19, 22, 24 triṣṭup, 20,23 bhurik, 25 anuṣṭup| indrāsomā tapataṃ rakṣa ubjataṃ nya'rpayataṃ vṛṣaṇā tamovṛdhaḥ | parā śṛṇītamacito nyo'ṣataṃ hataṃ nudethāṃ ni śiśītamattriṇaḥ

हिन्दी अर्थ

(महता वधेन वधकारो महास्त्र द्वारा (हन्तु) मार डले, जन्तोः) स जन्मधारियों से (अधमः) निकृष्ट वहु (पदीष्ट) पतन करे, वतमान मन्त्र मे भी मन्त्र (१५) की भावना है (अप गूहमाना) छिपाती हई (नक्तम्) रात में (खगेला इव) उलृकिनौ की तरह (प्र जिगाति) गति करती है हमारे नगर में (सा) वह् (अनन्तम्)

English

The fiend who smears himself with flesh of cattle, with flesh of horses and of human bodies, Who steals the milch-cow’s milk away, O Agni,—tear off the heads of such with fiery fury.

अध्याय ८

श्लोक 4.2

इन्द्रा॑सोमा॒ सम॒घशं॑सम॒भ्य॑१घं तपु॑र्ययस्तु च॒रुर॑ग्नि॒माँ इ॑व ।ब्र॒ह्म॒द्विषे॑ क्र॒व्यादे॑ घो॒रच॑क्षसे॒ द्वेषो॑ धत्तमनवा॒यं कि॑मी॒दिने॑

indrāsomā samaghaśaṃsamabhya1ghaṃ tapuryayastu caruragnimā~ iva | brahmadviṣe kravyāde ghoracakṣase dveṣo dhattamanavāyaṃ kimīdine

हिन्दी अर्थ

निमित मणि मे, सूक्त. में कृथित वणेन उपपन्न हो सकते है, यह् असम्भव सायणाचाये' ने अथवं० २।११।२ मे भी इसे तिलक वृक्ष द्वारा निमित कहौ “छछ्क्त्य'” को सूरि कहा ' है 1 सूरिः का अथं सायणाचायं ने “अभिज्ञः किया ते म देवाः पुरोष्िता प्रतीचीः कृत्याः परंतिसरर॑नम्तु ॥५॥ : £; नै (मे) मुभ (आह) कहा है (तद) उसे ही (सोमः) सेनाध्यक्षं ने (ग्राह) कहा है, (बृहस्पतिः). वहती सेनां के प्रधिषति ने, (सविता) सविर्तान (इनदरः) सञ्राट् ने (तत्) उसे कहा है । (ते) वे (देवाः) -दिव्यगुणों बाले अधिकारी (मे) भेरे तिये (पुरोहिताः) पुरोहितरूपःमेहः या मेरे परो गामं ह्पं मे हितकारी हु, वे (प्रतीचीः) मेरे प्रति आने वाली (कृत्याः)

English

Rākshasas, O Agni, with thy sharpened glow, with rays that flash with points of flame.

अध्याय ८

श्लोक 4.3

इन्द्रा॑सोमा दु॒ष्कृतो॑ व॒व्रे अ॒न्तर॑नारम्भ॒णे तम॑सि॒ प्र वि॑ध्यतम्।यतो॒ नैषां॒ पुन॒रेक॑श्च॒नोदय॒त् तद् वा॑मस्तु॒ सह॑से मन्यु॒मच्छवः॑

indrāsomā duṣkṛto vavre antaranārambhaṇe tamasi pra vidhyatam| yato naiṣāṃ punarekaścanodayat tad vāmastu sahase manyumacchavaḥ

हिन्दी अर्थ

६० स्वरूप । ये स्लोतांसि तथा नदियां है २३६ मथवेवेद-भाष्य का०८। सुभ. का०८। सु० ५ अथववेद-भाष्य २३७ ओषधियों के दो प्रयोजन होते है, रोगी के दोषों प्र्थाति रोगो को दुर करना ओर उसके शरीर कासंवधेन करना रषष्टरपतिराजा के भीदो प्रयोजन है, राष्टू-शरीरके रोगों कोदूर करना, ओर राष्टर-शरीर का संवधन ों धियौ करना । राष्टू-शरीरके रोगर्हु, चोरी, उकती, लूटमार, व्यभिचार विप्लव + हि प) सटायतासे व्यापार उ्योग, कृषि आदिद्रवारा राष्ट्र कासंवधन करत।

English

voracious fiends. Let sin, Indra and Soma! round the wicked boil, like as a cald- ron set amid the flames of fire.

अध्याय ८

श्लोक 4.4

इन्द्रा॑सोमा व॒र्तय॑तं दि॒वो व॒धं सं पृ॑थि॒व्या अ॒घशं॑साय॒ तर्ह॑णम्।उत् त॑क्षतं स्व॒र्यं१ पर्व॑तेभ्यो॒ येन॒ रक्षो॑ वावृधा॒नं नि॒जूर्व॑थः

indrāsomā vartayataṃ divo vadhaṃ saṃ pṛthivyā aghaśaṃsāya tarhaṇam| ut takṣataṃ svaryaṃ1 parvatebhyo yena rakṣo vāvṛdhānaṃ nijūrvathaḥ

हिन्दी अर्थ

अथो सपरनकरीनो यो निभर्तीमं परिम् ॥१२॥ व्याघ्र के सदुश (भवति) दोता है, (अथो) ओर (सिह) सिह के सदुश होता है, (अथो) ओर (वृषा) अनड्वान् के सदृश सुखवर्षी होता है । (अथो) श्रौर पतिः पशूनाम्" (ग्रथवं० २।३४।१)। इसकी व्याख्या मे सायणाचायं निवत हँ कि “यः पशुपतिः पशूनां पालयिता, शः । साम्राज्य के पशुं का । संवधेन, उत्तम बेलों तथा गौओं का उत्पादन आदिकमं रद्रकेहैं। अग्नि रत्न का (विभति) धारण भौर पोषण करताहै, (एनम्) इसका (न ; विजय भौर पराजय राजा की ही कटी जाती है । दरो साम्रज्याभिपति भी धारण करसंग्राममे विजय पाता) विजि-

English

Against the foe of prayer, eater of gory flesh, the fearful-eyed 127

अध्याय ८

श्लोक 4.5

इन्द्रा॑सोमा व॒र्तय॑तं दि॒वस्पर्य॑ग्नित॒प्तेभि॑र्यु॒वमश्म॑हन्मभिः ।तपु॑र्वधेभिर॒जरे॑भिर॒त्त्रिणो॒ नि पर्शा॑ने विध्यतं॒ यन्तु॑ निस्व॒रम्

indrāsomā vartayataṃ divasparyagnitaptebhiryuvamaśmahanmabhiḥ | tapurvadhebhirajarebhirattriṇo ni parśāne vidhyataṃ yantu nisvaram

हिन्दी अर्थ

(यः) जो (त्वा) तुभे (कृत्याभिः) घातक सेनाओं द्वारा, (यः त्वा) जो परजाजन (घ्नत) हनन करते ह । वह (सर्वाः दिशः) सब दिशाओंपर(वि राजति) राज्य करता है, पृथिवी नाम (निघं० १।१), उसका धारण करने वाले राजा ॥ मणि सदस्तवी्य बमं देवा अद्रण्वत ॥१५॥ (संजयः) सम्यक् जेता है । (परिपाणः) सव जोरसे रक्षा करने वाला,

English

Kimidin, keep perpetual hate. Indra and Soma, plunge the wicked in the depth, yea, cast them into darkness that hath no

अध्याय ८

श्लोक 4.6

इन्द्रा॑सोमा॒ परि॑ वां भूतु वि॒श्वत॑ इ॒यं म॒तिः क॒क्ष्याश्वे॑व वा॒जिना॑ ।यां वां॒ होत्रां॑ परिहि॒नोमि॑ मे॒धये॒मा ब्रह्मा॑णि नृ॒पती॑ इव जिन्वतम्

indrāsomā pari vāṃ bhūtu viśvata iyaṃ matiḥ kakṣyāśveva vājinā | yāṃ vāṃ hotrāṃ parihinomi medhayemā brahmāṇi nṛpatī iva jinvatam

हिन्दी अर्थ

१. जहां सेनाश्रों का परस्पर श्लेष होता है, मेल तथा दहन होता है; ट्लिष १. व्याघ्र-=बाघ, चीता चीता के समान च्िकर शत्रुं को पकड़ (स्याधंप्रकाश, समुल्लास ६) । २४० परथवेवेद-भाष्य का०८। मू०५ प्रजाजनों को (असपत्नम्) शवरुरहित (कृधि) कर । (नः) हम प्रजाजनों को सेनाध्यक्षतो शूरहोताहीदहै। सम्राट्को भौ शूर होना चाहिए, ताकि साश्राज्य के चहुंदिशि सपत्नो का अभाव हो ओर प्रजाजनों के संमुख आशा श्रौर उत्साह की ज्योति जगमगती रहै

English

support, So that not one of them may ever thence return: so may your wrathful might prevail and

अध्याय ८

श्लोक 4.7

प्रति॑ स्मरेथां तु॒जय॑द्भि॒रेवै॑र्ह॒तं द्रु॒हो र॒क्षसो॑ भङ्गु॒राव॑तः ।इन्द्रा॑सोमा दु॒ष्कृते॒ मा सु॒गं भू॒द् यो मा॑ क॒दा चि॑दभि॒दास॑ति द्रु॒हुः

prati smarethāṃ tujayadbhirevairhataṃ druho rakṣaso bhaṅgurāvataḥ | indrāsomā duṣkṛte mā sugaṃ bhūd yo mā kadā cidabhidāsati druhuḥ

हिन्दी अर्थ

(द्यावापृथिवी ) दयलोक ओर पुथिवीलोक (मे) मेरे के लिये (वर्म) कवच परमेष्वर (मे) मेरे लिये (वर्म ) अपने-आप को कवचलूप मेँ स्थापित करे । ' शक्तियों जओौर विधत ्रपने कवचलरू्प में स्थापितकरने की भ्राथेना खूप (वम) कवच दहै, उसका (विश्वे देवाः) समप्र विजिगीष परकीय संनिक तथा (सवं) परकीय सव श्रधिकारी भी (अति विध्यन्ति न) प्रतिवेधन नहीं वस्था को (असानि) मे प्राप्त हौ जाऊ

English

conquer them. Indra and Soma, hurl your deadly crushing bolt down on the wicked fiend from heaven and

अध्याय ८

श्लोक 4.8

यो मा॒ पाके॑न॒ मन॑सा॒ चर॑न्तमभि॒चष्टे॒ अनृ॑तेभि॒र्वचो॑भिः ।आप॑ इव का॒शिना॒ संगृ॑भीता॒ अस॑न्न॒स्त्वस॑तः इन्द्र व॒क्ता

yo mā pākena manasā carantamabhicaṣṭe anṛtebhirvacobhiḥ | āpa iva kāśinā saṃgṛbhītā asannastvasataḥ indra vaktā

हिन्दी अर्थ

का०ष८।सु०५ भ्रयवेवेद-माष्य २४१ का परस्पर सहयोग ओर सहकारिता कौ भावना अन्तगेभित अथा भन्त- भावित है । इन्द्र ओर अग्नि में से एक-एक कवचरूप नहीं, ग्रपितु इनमें परस्पर मेल ही कवचरूप है । इसी प्रकार की भावना वेदोक्त अन्य “देवता- सहकारिता जाननी चाहिए । बहुलम् = बहु भुखम् लाति आदत्ते इति आ मारक्षद् देवम णिषद्या अरिष्टतातये । इमं मेथिम॑मिसंविशध्वं तनूपानं जिवरूथमोन॑से ।॥२०॥ पालक है, ओर (च्विवरूथम्) तीन साधनों द्वारा शत्रु का निवारक है।

English

from the earth. Yea, fashion from the big clouds your celestial dart wherewith ye burn to death the waxing

अध्याय ८

श्लोक 4.9

ये पा॑कशं॒सं वि॒हर॑न्त॒ एवै॒र्ये वा॑ भ॒द्रं दू॒षय॑न्ति स्व॒धाभिः॑ ।अह॑ये वा॒ तान् प्र॒ददा॑तु॒ सोम॒ आ वा॑ दधातु॒ निरृ॑तेरु॒पस्थे॑

ye pākaśaṃsaṃ viharanta evairye vā bhadraṃ dūṣayanti svadhābhiḥ | ahaye vā tān pradadātu soma ā vā dadhātu nirṛterupasthe

हिन्दी अर्थ

चाहिए कि वह सेनाध्यक्षके निदशानुसार युद्धकायं में सहयोग दे । यह थम् =पदाती सेनिक, अश्वारोही सेनिक, रथारोही सेनिक, ये तीन साधन प्रोर धन (निदधातु) निधिरूप में स्थापित करे, (देवासः) है विजिगीषु (विश्वतः) तथा सब ओर से (दिवा नक्तम्, च) दिन ओर रात (त्वा रक्षतु) तुभे सुरक्षित करे । श्रौर राजकोष के व्यय करने का अधिकार भी इसे दे दे शक्तिप्रदान भौर '

English

demon race. Indra and Soma, cast ye downward from the sky your deadly bolts of stone burning with fiery

अध्याय ८

श्लोक 4.10

यो नो॒ रसं॒ दिप्स॑ति पि॒त्वो अ॑ग्ने॒ अश्वा॑नां॒ गवां॒ यस्त॒नूना॑म्।रि॒पु स्ते॒न स्ते॑य॒कृद् द॒भ्रमे॑तु॒ नि ष ही॑यतां त॒न्वा॒३ तना॑ च

yo no rasaṃ dipsati pitvo agne aśvānāṃ gavāṃ yastanūnām| ripu stena steyakṛd dabhrametu ni ṣa hīyatāṃ tanvā3 tanā ca

हिन्दी अर्थ

१. ग्रथवा "वा = श्त्रसेना २. जिगाति -- गाड गतौ सेनिकों को कपोंमे गिरा कर मारने के लिये । का०प८।सू० ४ अथर्ववेद-भाष्य २२३ जो कि शत्रराष्ट् हारा प्रेषित होता है, गहरे कूप मे अधोमुख करके भिरा कर, पत्थरों पर पत्थर, ध्वनि करते हूए, गिरा कर, मार देने का विधान हुमा है 1 “वव्र: कपनाम" (निघं ० २।२३) । खर्गला = जिसके “गले” कौ आवाज “खर” है, कठोर रूक्ष है । खगेल = उलूक । (इच्छत) मार देने का संकल्प करो, (गृभायत) इन्हें पकड़ो, (सं पिष्टन)

English

Let the fiends steal the poison of the cattle: may Aditi cast off the evil-doers. May the God Savitar give them up to ruin, and be their share of herbs and plants denied them.

अध्याय ८

श्लोक 4.11

प॒रः सो अ॑स्तु त॒न्वा॒३ तना॑ च ति॒स्रः पृ॑थि॒वीर॒धो अ॑स्तु॒ विश्वाः॑ ।प्रति॑ शुष्यतु॒ यशो॑ अस्य देवा॒ यो मा॒ दिवा॒ दिप्स॑ति॒ यश्च॒ नक्त॑म्

paraḥ so astu tanvā3 tanā ca tisraḥ pṛthivīradho astu viśvāḥ | prati śuṣyatu yaśo asya devā yo mā divā dipsati yaśca naktam

हिन्दी अर्थ

(पतयन्ति) उडतेर्है, या उड कर आनजातेर्हँ; (येवा) भ्रथवा जो (देवे सम्बन्ध मे, (रिपः) हिसाभावनाओं को (दधिरे) चित्तम धारण करते है उन्हे पकडो ओर पीस डालो पतयन्ति = अथवा हम पर आक्रमण करते हँ। मरुतः=मरने-मारने मे कुशल तथा निर्भीकि सेनिक । यथा “देवसेनानामभिभजञ्जतीनां जयन्तीनां १७ आर त८्मे एक ही तरिषय है । रिपः =हिसाः रिपुताम्. शत्रृताम् । "या" का भ्रथं ““शन्नुसेता” किया है ।

English

The cow gives milk each year, O Man-Beholder: let not the Yātudhāna ever taste it.

अध्याय ८

श्लोक 4.12

सु॒वि॒ज्ञा॒नं चि॑कि॒तुषे॒ जना॑य॒ सच्चास॑च्च॒ वच॑सी पस्पृधाते ।तयो॒र्यत् स॒त्यं य॑त॒रदृजी॑य॒स्तदित् सोमो॑ऽवति॒ हन्त्यस॑त्

suvijñānaṃ cikituṣe janāya saccāsacca vacasī paspṛdhāte | tayoryat satyaṃ yataradṛjīyastadit somo'vati hantyasat

हिन्दी अर्थ

कुत्तो के साथ वतंमान या कुततो द्वारा यातना देने वाले (पतयन्ति) विचरं ( पिशुनेभ्यः) खल-ष्वयातुमो के लिये (नूनं वधम्) निश्चित मरू (शिशीते) तीक्ष्ण करता दहै, ओर (यतुमदूभ्यः) यातना वालों के नि ग्रभिप्राय समान है यातु = यातना (मन्त्र २०) । (यातूनाम्) यातना देने वालों, (हुविमंयीनाम्) हविष्यान्न को मथने वालों तथा (अभि) हमारी ओर (आ =आगत्य) आ कर (विवासतम्) विविध स्थानों मे निवास करने वालों को, (इन्द्रः) सम्रा् (परा) परा्ख-

English

Agni, if one should glut him with the biestings, pierce with thy flame his vitals as he meets thee.

अध्याय ८

श्लोक 4.13

न वा उ॒ सोमो॑ वृजि॒नं हि॑नोति॒ न क्ष॒त्रियं मिथु॒या धा॒रय॑न्तम्।हन्ति॒ रक्षो॒ हन्त्यास॒द् वद॑न्तमु॒भाविन्द्र॑स्य॒ प्रसि॑तौ शयाते

na vā u somo vṛjinaṃ hinoti na kṣatriyaṃ mithuyā dhārayantam| hanti rakṣo hantyāsad vadantamubhāvindrasya prasitau śayāte

हिन्दी अर्थ

मुख करके (शरः) विनाशकर्ता (अभवत्) हुआ है । (शक्रः) शक्तिशाली तोडता हमा (पात्रा इव ) जसे कि पात्रं को तोडता हमा पत्थर या दण्डा वानानाम् । यथा देवदत्तो, दत्तः । उलंकयतुं शु्हकयात ज॒हि इवयातुमुत कोकयातुम् । सुपर्णय।तमुत एृधर॑यातु दृषदेव प मृण रक्ष इन्द्र ॥२२॥ की चाल वाले, (उत) श्रौर (कोकयातुम्) चक्रवाक की तरह व्यवहार वाले, (सुपणेयातुम्) गरुड की चाल वाले, (उत) भौर (गृध्रयातुम्) गीध

English

Agni, from days of old thou slayest demons: never have Rākshasas in fight o’ercome thee.

अध्याय ८

श्लोक 4.14

यदि॑ वा॒हमनृ॑तदेवो॒ अस्मि॒ मोघं॑ वा दे॒वाँ अ॑प्यू॒हे अ॑ग्ने ।किम॒स्मभ्यं॑ जातवेदो हृणीषे द्रोघ॒वाच॑स्ते निरृ॒थं स॑चन्ताम्

yadi vāhamanṛtadevo asmi moghaṃ vā devā~ apyūhe agne | kimasmabhyaṃ jātavedo hṛṇīṣe droghavācaste nirṛthaṃ sacantām

हिन्दी अर्थ

डाल, (दृषदा इव) जसे कि चक्की केपाटद्वारा चनों कोपीसा जाता के साथ विचरने वाला यथा (मन्त्र २०) । कोकय।तुम् = चक्रवाक को तरह ॑ २९२६ अथवेचेद-भाष्य का०८। सू० ४ का० त । सु०४ अथर्ववेद-माष्य २२७ मे 4 ताकिः-(पृथिवी) "पुथिवी (नः) हमे, (पाथिवात्) पाथिव पदाथ के अभाव से होने वाले (अंहसः) कष्ट से (पातु) रक्षित करे, ओर (अत्तः हनि वाल कष्टसे (पातु) रकषितिकरे।'

English

Burn up the foolish ones, the flesh-devourers: let none of them escape thy heavenly arrow. Guard us, O Agni, from above and under, protect us from be- hind and from before us;

अध्याय ८

श्लोक 4.15

अ॒द्या मु॑रीय॒ यदि॑ यातु॒धानो॒ अस्मि॒ यदि॒ वायु॑स्त॒तप॒ पुरु॑षस्य ।अ॒धा स वी॒रैर्द॒शभि॒र्वि यू॑या॒ यो मा॒ मोघं॒ यातु॑धा॒नेत्याह॑

adyā murīya yadi yātudhāno asmi yadi vāyustatapa puruṣasya | adhā sa vīrairdaśabhirvi yūyā yo mā moghaṃ yātudhānetyāha

हिन्दी अर्थ

भ्रप-उचछछी विवासे (भ्वादिः) । किमीदिनः" (मिख्कैत -६। २११२) 1: अंहसः । उनकी सत्ती कष्टदायकं ओर मृत्यु कारक मौ हो जाती ' है । राक्षसो केन देकरं हमारी रक्ता करते है । यातुमावत् = यातु (यातना) + मां (ज्ञानम्) रन्तम् ) उदित होते हृए (सूर्यम्) सूयं को (मा) तू हनन कर (मुरदेवाः) मूढ-व्यवहारी या -मारण-क्रीडा करने वालेयें

English

And may thy flames, most fierce and never wasting, glowing with fervent heat, consume the sinner.

अध्याय ८

श्लोक 4.16

यो माया॑तुं॒ यातु॑धा॒नेत्याह॒ यो वा॑ र॒क्षाः शुचि॑र॒स्मीत्याह॑ ।इन्द्र॒स्तं ह॑न्तु मह॒ता व॒धेन॒ विश्व॑स्य ज॒न्तोर॑ध॒मस्प॑दीष्ट

yo māyātuṃ yātudhānetyāha yo vā rakṣāḥ śucirasmītyāha | indrastaṃ hantu mahatā vadhena viśvasya jantoradhamaspadīṣṭa

हिन्दी अर्थ

दोनों को समान दण्ड देने का विधान हुआ, है । जिस दिनि ये.उग्र अपराधी घोषित किये जांय उसी दिन इनकी प्रीवाएं काट देनी . चाहिए ताकि अगले दिन के सूयंकाये दशन न कर पाएं । दण्डप्रदान ओर अपराधमे विशेष व्यवधान न होना चाहिए । अपराघका दण्डउसी दिनदहीहो जौना चाहिए जिस दिन कि श्रपराघध किया गया हौ । कारी वेद्यत वज (अस्यतम्) फँको । (इन्दर). हे,सम्राद् . (यातुघानम्) यातनाभों को धारण. करने वाला,

English

From rear, from front, from under, from above us, Agni, pro- tect us as a sage with wisdom. Guard to old age thy friend as friend eternal: O Agni, as im- mortal, guard us mortals.

अध्याय ८

श्लोक 4.17

प्र या जिगा॑ति ख॒र्गले॑व॒ नक्त॒मप॑ द्रु॒हुस्त॒न्वं॑१गूह॑माना ।व॒व्रम॑न॒न्तमव॒ सा प॑दीष्ट॒ ग्रावा॑णो घ्नन्तु र॒क्षस॑ उप॒ब्दैः

pra yā jigāti khargaleva naktamapa druhustanvaṃ1gūhamānā | vavramanantamava sā padīṣṭa grāvāṇo ghnantu rakṣasa upabdaiḥ

हिन्दी अर्थ

। यात्रा के निधिभूत (पुमांसम्) पुरुष का, . (उतः) तथा (मायया) छ्ल- ५ ?९.गरुह सिं पर कपट मास्ताहै। - । + 1 ,, धिपरीवासौ भूरंदेवो ऋदन्तु मां ते दशन्यमुचरन्त¶्॥२४॥ ,. ,, ५६ ५ का० ८ सूु० ५ श्रथवेवेद-भाष्य २९६ त् वजयी होता है ( मन्तः अय प्रति सरां मणिवु वीरायं वध्यते । । करने वाला (मणिः) सेनाध्यक्षरूप पुरुषरत्न (वोराय) वोर राजा के

English

Lend thou the worshipper that eye, O Agni, where with thou lookest on the hoof-armed demons.

अध्याय ८

श्लोक 4.18

वि ति॑ष्ठध्वं मरुतो वि॒क्ष्वि॒३छत॑ गृभा॒यत॑ र॒क्षसः॒ सं पि॑नष्टन।वयो॒ ये भू॒त्वा प॒तय॑न्ति न॒क्तभि॒र्ये वा॒ रिपो॑ दधि॒रे दे॒वे अ॑ध्व॒रे

vi tiṣṭhadhvaṃ maruto vikṣvi3chata gṛbhāyata rakṣasaḥ saṃ pinaṣṭana| vayo ye bhūtvā patayanti naktabhirye vā ripo dadhire deve adhvare

हिन्दी अर्थ

मणिके विशेषण जो मन्त्र मे कथित, वे वीर आदि विशेषणो से हि युवत सेनाध्यक्ष पुरुषरत के लिये साथक होते है । राष्ट का पति राजाभी २३८ रथर्ववेद-भाष्यः का०.८.। सू०५ का०८। सू० ५ प्रथवेवेद-भाष्य २३१ वापिस मोड देता है, (प्रतिसरः) ओर . धत्रुसेना के प्रति सरण करता है। (वशी) उन्हं वश में करने वाला है (सः) वह् (अस्मान्). हमे (सवतः) पराभवकर्ता, (उग्रः) तथा उग्र स्वभाव वालादहै। (वीरः) यहु वीर

English

With light celestial in Atharvan’s manner burn up the fool who ruins truth with falsehood. We set thee round us as a fort, victorious Agni! thee, a sage,

अध्याय ८

श्लोक 4.19

प्र व॑र्तय दि॒वोऽश्मा॑नमिन्द्र॒ सोम॑शितं मघव॒न्त्सं शि॑शाधि ।प्रा॒क्तो अ॑पा॒क्तो॑अधरा॑दुदक्तो॑ऽभि॑जहि रक्ष॑सः प॑र्वतेन

pra vartaya divo'śmānamindra somaśitaṃ maghavantsaṃ śiśādhi | prākto apāktoadharādudakto'bhijahi rakṣasaḥ parvatena

हिन्दी अर्थ

शच्रु-सेनिको को (पराभावयन्) पराभूत क्रिया 1 (अनेन) इस द्वारा ( इमे उभे) इन दोनों (दावापृथिवी) दयुलोक-पृथिवीलोक को (भजयत्) उसने जीता, (मनेन) इस द्वारा (चतखः प्रदिशः) चार व्याप्त दिशाभों को सम्राट् वरुणणचं राजा (यजु ८।२३७) 1' राष्ट के राजा कोःवरुण कहा करते हैँ, निर्वाचन करते हँ । द्युलोक :कै विजय का अभिप्राय यह है कि सब जोर से, य! सब प्रकार के भयो से (पातु) सुरक्षित करे। सराक्त्यः = विनियोगकारोँं के अनुसार सयणाचायेः लिखते हँ कि

English

In conquering colour day by day, destroyer of the treacherous foe. With deadly poison strike thou back the treacherous brood of

अध्याय ८

श्लोक 4.20

ए॒त उ॒ त्ये प॑तयन्ति॒ श्वया॑तव॒ इन्द्रं॑ दिप्सन्ति दि॒प्सवोऽदा॑भ्यम्।शिशी॑ते श॒क्रः पिशु॑नेभ्यो व॒धं नु॒नं सृ॑जद॒शनिं॑ यातु॒मद्भ्यः॑

eta u tye patayanti śvayātava indraṃ dipsanti dipsavo'dābhyam| śiśīte śakraḥ piśunebhyo vadhaṃ nunaṃ sṛjadaśaniṃ yātumadbhyaḥ

हिन्दी अर्थ

वाले सैनिकों द्वारा '(अजन्तु) षकरेलदें। ˆ /' २३२ प्रथववेद-भाष्य का०८। सू ५ मुभे सहायता देकर आक्रान्ताओं को मेरे राष्टरसे धकेल देग । अजन्तु = कौ शात्रवी (कृत्याः) सेनाओं को यह् मणि (वि बाधते) विशेषतया नष्ट कर देता है, रौर (वशी) उन्हँं अपन वश में कर लेता है, ( जेसे कि (स्यः) सूयं (दिवम् आरुह्य) द॒लोक मे आरोहण कर अन्धकारक

English

Agni shines far and wide with lofty splendour, and by his great- ness makes all things apparent.

अध्याय ८

श्लोक 4.21

इन्द्रो॑ यातू॒नाम॑भवत् पराश॒रो ह॑वि॒र्मथी॑नाम॒भ्या॒३विवा॑सताम्।अ॒भीदु॑ श॒क्रः प॑र॒शुर्यथा॒ वनं॒ पात्रे॑व भि॒न्दन्त्स॒त एतु र॒क्षसः॑

indro yātūnāmabhavat parāśaro havirmathīnāmabhyā3vivāsatām| abhīdu śakraḥ paraśuryathā vanaṃ pātreva bhindantsata etu rakṣasaḥ

हिन्दी अर्थ

(रजं गतिक्षेपणयोः” (भ्वादिः) । यदहं क्षेपणा्थं मे “अज” घातु है। “अजन्तु'' मे णिजथं अन्तर्भावित है (द्ःवापृथिवी) द्यौ भौर पृथिवी को, (उत) तथा (अहः) दिनि को, (इव ) जसे (मनीषिणा ऋषिणा) मनस्वी ऋषि द्वारा मैने निज प्रासुरी रजा नै सब सेनाओं पर (अजेषम्) विजयपा लियाहै। इस प्रकार्य (मृधः) प्रमाथी (रक्षसः) राक्षसो को (वि हन्मि) विशेषतया मार देता हूं । देता हं । (ते) वे (देवाः) दिव्यगुणों वाले अधिकारी मन्त्र ५ (मे) मेरे॥ लिये (पुरोहिताः) पुरोहितरूपमें है, या मेरे पुरोगामीरूप मे हितकारी

English

He conquers godless and malign enchantments, and sharpens both his horns to gore the ogres. Thy two unwasting horns, O Jātavedas, keen-pointed weapons, sharpened by devotion

अध्याय ८

श्लोक 4.22

उलू॑कयातुं शुशु॒लूक॑यातुं ज॒हि श्वया॑तुमु॒त कोक॑यातुम्।सु॒प॒र्णया॑तुमु॒त गृध्र॑यातुं दृ॒षदे॑व॒ प्र मृ॑ण॒ रक्ष॑ इन्द्र

ulūkayātuṃ śuśulūkayātuṃ jahi śvayātumuta kokayātum| suparṇayātumuta gṛdhrayātuṃ dṛṣadeva pra mṛṇa rakṣa indra

हिन्दी अर्थ

पृतनाः, (प्रतिसर.) उनके प्रति सरण करने वाले सेनिकों हारा (ग्रजन्तु) दो प्रकार से, णतूुसेनाभों द्वारा किये आक्रमण को, विफल कियाजा जाता है, श्रौर शतृसेना को श्रपने पराये का भेद ज्ञान न रहने पर वह निन ¦ संनिकोंसे ही लडती हई परस्पर में विनष्ट हो जांय । यथा -- ॥ (याः उ च) ओर जो(प्रन्येभिः) अन्यो की कुसंगति या पेतुकरूप मे (आमृताः २३४. ्रथववेद-भाष्य श्रयर्ववेद ष्य का०८।सू०५ का० र सू० ५ -माष्य १३५

English

With these transfix the wicked-souled Kimidin, with fierce flame, Jātavedas! when he meets thee.

अध्याय ८

श्लोक 4.23

मा नो॒ रक्षो॑ अ॒भि न॑ड् यातु॒माव॒दपो॑च्छन्तु मिथु॒ना ये कि॑मी॒दिनः॑ ।पृ॒थि॒वी नः॒ पार्थि॑वात् पा॒त्वंह॑सो॒ऽन्तरि॑क्षं दि॒व्यात् पा॑त्व॒स्मान्

mā no rakṣo abhi naḍ yātumāvadapocchantu mithunā ye kimīdinaḥ | pṛthivī naḥ pārthivāt pātvaṃhaso'ntarikṣaṃ divyāt pātvasmān

हिन्दी अर्थ

== आहृताः) प्राप्त हुई है, (ताः) वे (उभयीः) दोनों प्रकार की पतनाएं (परावतः) दुर से दूर (परायन्तु) हमसे पृथक् होकर चली जांय, (नाव्याः ) व हारा पार.करने यौग्य (नवतिम्) €० नदियों का (श्रति) अतिक्रमण का वणन किया गयादहै। एकतो शारीरिक अद्धो के रस सम्बन्धी हई है । प्रकृति के इन तीन गुणों के परस्पर मुख्य, गौण, तथा गौणतररूप

English

Bright, radiant, meet to be adored, immortal with refulgent glow, Agni drives Rākshasas away.

अध्याय ८

श्लोक 4.24

इन्द्र॑ ज॒हि पुमां॑सं यातु॒धान॑मु॒त स्त्रियं॑ मा॒यया॒ शाश॑दानाम्।विग्री॑वासो॒ मूर॑देवा ऋदन्तु॒ मा ते दृ॑श॒न्त्सूर्य॑मु॒च्चर॑न्तम्

indra jahi pumāṃsaṃ yātudhānamuta striyaṃ māyayā śāśadānām| vigrīvāso mūradevā ṛdantu mā te dṛśantsūryamuccarantam

हिन्दी अर्थ

जो रङ्ग है उनके रस । इन रसो मे विकार पैदाकरनै वाली पृतनाणएं है च। श्व रखने वाली कृत्याः अर्थात् पृतनाः, ये उभयीः्है, दो प्रकार की दह । शरीर या गौणतर त्मक “पृतनाः” का वणेन हमा है । ९० नदियां भी आध्यात्मिक हँ अौर गिरत नौकाद्वारापारकी जा सकती है, रतः ये महावेगाः ओर महाविस्ताराः कुल -- स्वरूप! ॥ जिन पर किं राज्न॑तिक विजय का कथन मन्त्रमे हो । भ्राधिभौतिक या अ्राधिदेविक

English

Imprecations on demons Indra and Soma, burn, destroy the demon foe! Send downward,

अध्याय ८

श्लोक 4.25

प्रति॑ चक्ष्व॒ वि च॒क्ष्वेन्द्र॑श्च सोम जागृतम्।रक्षो॑भ्यो व॒धम॑स्यतम॒शनिं॑ यातु॒मद्भ्यः॑

prati cakṣva vi cakṣvendraśca soma jāgṛtam| rakṣobhyo vadhamasyatamaśaniṃ yātumadbhyaḥ

हिन्दी अर्थ

ओर प्रवाहित होता है, भौर कर्मंन्दरियों दवारा कर्मरूपी जल भीतरसे बाहर कीञोर प्रवाहित होताहै।!इन दो प्रकार की नदियों कावेग भौर । कहा है अतः ये नदीरूप हँ । तथा इन “छोतांसि'” को “भयावहानि” भी करने के लिये नौका है ब्रहमोड्प । उडप है पार करने वाली नौका । ब्रह्मो- ौ पासनारूपी नौका द्वारा दशेन्ियों की €० नदियों" कोपार क्रिया जा ददानि के लिये “दन्दरियविजयः' को “इन्द्रियजयः'' कहा है (विभूतिपाद, सूत्र ४७) । यथा “धचित्तनदी नाम उभयतो वाहिनी, वहति कल्याणाय वहति पापाय च"

English

O ye Bulls, those who add gloom to gloom. Annihilate the fools, slay them and burn them up: chase them away from us, pierce the

अध्याय ८

श्लोक 5.1

प्रतिसरो मणिः।१-२२ शुक्रः।कृत्यादूषणं, मन्त्रोक्तदेवताः।अनुष्टुप्, १,६ उपरिष्टाद्बृहती, २ त्रिपदा विराड् गायत्री, ३ चतुष्पदा भुरिग्जगती, ५ भुरिक्संस्तारपङ्क्तिः, ७-८ ककुम्मती, ९ पुरस्कृतिर्जगती, १० त्रिष्टुप्, ११ पथ्यापङ्क्तिः, १४ त्र्यवसाना षट्-पदा जगती, १५ पुरस्ताद्बृहती, १९ जगतीगर्भा त्रिष्टुप्, २० विराड्गर्भा प्रस्तारपङ्क्तिः, २१ विराड् त्रिष्टुप्, २२ त्र्यवसाना सप्तपदा विराड्गर्भा भुरिक्शक्वरी।अ॒यं प्र॑तिस॒रो म॒णिर्वी॒रो वी॒राय॑ बध्यते ।वी॒र्यऽवान्त्सपत्न॒हा शूर॑वीरः परि॒पाणः॑ सुम॒ङ्गलः॑

pratisaro maṇiḥ| 1-22 śukraḥ| kṛtyādūṣaṇaṃ, mantroktadevatāḥ| anuṣṭup, 1,6 upariṣṭādbṛhatī, 2 tripadā virāḍ gāyatrī, 3 catuṣpadā bhurigjagatī, 5 bhuriksaṃstārapaṅktiḥ, 7-8 kakummatī, 9 puraskṛtirjagatī, 10 triṣṭup, 11 pathyāpaṅktiḥ, 14 tryavasānā ṣaṭ-padā jagatī, 15 purastādbṛhatī, 19 jagatīgarbhā triṣṭup, 20 virāḍgarbhā prastārapaṅktiḥ, 21 virāḍ triṣṭup, 22 tryavasānā saptapadā virāḍgarbhā bhurikśakvarī| ayaṃ pratisaro maṇirvīro vīrāya badhyate | vīrya'vāntsapatnahā śūravīraḥ paripāṇaḥ sumaṅgalaḥ

हिन्दी अर्थ

सके । सेनिकों को यथोचित संख्या के अभाव में प्रजाजन भी मारे जतेर्है, स त्वां रक्षतु सेतो दिवा नक्त च विश्वत॑ः ॥२२॥ । वाला कोई शं नहीं रहा, (वशी) सब को वश में किये हुमा, (जिगीवान्) / जयशील, (अपराजितः) जो कभी पराजित नहीं हुमा, (सोमपाः) वी्य- शक्ति की रक्षा करने वाला, (ग्रमयडःकरः) प्रजा को भयरहित करने . ौ ४ (१५) व्यभिचारियों को दण्ड निज पत्नी के संमोग से वल्चित करना (१६) कुकभियों को दण्ड “हूदयवेधन” (मन्त्र १ ८) ।

English

flame, Eternal, scorching darts. Plunge the voracious fiends within the depth, and let them pass

अध्याय ८

श्लोक 5.2

अ॒यं म॒णिः स॑पत्न॒हा सु॒वीरः॒ सह॑स्वान् वा॒जी सह॑मान उ॒ग्रः ।प्र॒त्यक् कृ॒त्या दू॒षय॑न्नेति वी॒रः

ayaṃ maṇiḥ sapatnahā suvīraḥ sahasvān vājī sahamāna ugraḥ | pratyak kṛtyā dūṣayanneti vīraḥ

हिन्दी अर्थ

कुसा ये च॑ कु्चिाः ककमा: करुमाः सिमाः । (ये) जो कीट (गदेभनादिनः) गदहों कौ तरह नादं करते हए (सायम्) सायंकाल (शालाः) शालाभों के (परि) सब ओर (नृत्यन्ति) नाच करते १, रात मे मच्छरनाद करते हुए इधर-उधर उड्तेरहै। मानोवे गते हृए का०८। सु० ६ अथवेवेद-भाष्य २५१ है । तथा (ये च) ओर जो (कुसूल आदि) कुसूल, कुक्षिल, ककुभ, कंप, सिम नामक कीट हँ (तान्) उन (विषूचीनान्) सब भ्रोर गति करने वालों को (ओषधे) है ओषधि ? (त्वम्) तू (गन्धेन) निज गन्ध दास (विना- सायंकाल शालाभों में नाद करने वाले विशेषतया मच्छर होते रह। इनके नाद कानोंको कटु श्रनुभूत होतेह, ग्रतः घृणा कौ दृष्टस इन्द “वदभनादिनः'' कहा है । गर्दभ कानाद कर्णकटु होता है। कुसूल प्रादि

English

Of these two that which is the true and honest Soma protects, and brings the false to nothing. Never doth Soma aid and guide the wicked or him who falsely claims the Warrior’s title.

अध्याय ८

श्लोक 5.3

अ॒नेनेन्द्रो॑ म॒णिना॑ वृ॒त्रम॑हन्न॒नेनासु॑रा॒न् परा॑भावयन्मनी॒षी।अ॒नेना॑जय॒द् द्यावा॑पृथि॒वी उ॒भे इ॒मे अ॒नेना॑जयत् प्र॒दिश॒श्चत॑स्रः

anenendro maṇinā vṛtramahannanenāsurān parābhāvayanmanīṣī| anenājayad dyāvāpṛthivī ubhe ime anenājayat pradiśaścatasraḥ

हिन्दी अर्थ

अथवं ० (२।३१।२,३) ! “अल्गण्ड"” में “अल्” का अर्थं है “भुषण” ओौरं शङ्गाणि ज्वलतो नाम (निषं० १।१७ ) । वधू के विवाह मे माता- ॥ करते है । वधू, पितुगृह से जब पतिगृहं जाने बालौ होती हतो लुटेरे-प्रात- 4 । पटास द्वारा उसे प्रकूपितकरप ग्राभरुषणा को लूटने का यत्न करते ह, एेसों के नाश करने का विधान मन््रमें हृमादहै। मनुनेमो

English

The fiend who says that he is pure, who calls me a demon though devoid of demon nature. She too who wanders like an owl at night-time, hiding her body in her guile and malice,

अध्याय ८

श्लोक 5.4

अ॒यं स्रा॒क्त्यो म॒णिः प्र॑तीव॒र्तः प्र॑तिस॒रः ।ओज॑स्वान् विमृ॒धो व॒शी सो अ॒स्मान् पा॑तु स॒र्वतः॑

ayaṃ srāktyo maṇiḥ pratīvartaḥ pratisaraḥ | ojasvān vimṛdho vaśī so asmān pātu sarvataḥ

हिन्दी अर्थ

२, यह फफोला ही इस का भूषण टै, शिरोभूषण है । गण्ड एए ध कोभ्राते देख कर सोच-विचारके विना दही उस का हनन कर दे। आत तायिग्रों ममनु ने “अन्निदः गरदः काभी परिगणन क्रियादहै। मन्वरमेँ जिक-मानुष कीटो'' के हनन की विधि मन्वमें कही है । गृहो मे पदा हए हैँ" (उरुण्डाः) ओर उरु अण्डो वाले ह, (ये च) प्रौर जो (मट्मटाः)मटक-मटक कर चलते याशृद्धारसे विभूषित मडि भूषायाम् ॑ हुए चलते हैँ (कुम्भमुष्काः) जो कुम्भ सदृश अण्डकोशों वाले हँ (अय.

English

May she fall downward into endless caverns. May press-stones with loud ring destroy the demons.

अध्याय ८

श्लोक 5.5

तद॒ग्निरा॑ह॒ तदु॒ सोम॑ आह॒ बृह॒स्पतिः॑ सवि॒ता तदिन्द्रः॑ ।ते मे॑ दे॒वाः पु॒रोहि॑ताः प्र॒तीचीः॑ कृ॒त्याः प्र॑तिस॒रैर॑जन्तु

tadagnirāha tadu soma āha bṛhaspatiḥ savitā tadindraḥ | te me devāḥ purohitāḥ pratīcīḥ kṛtyāḥ pratisarairajantu

हिन्दी अर्थ

इस मन््रमे भी लुटेरों भ्रादिका वर्णन हँजो कि “सामाजिक मानुष. कीट" हैँ । “प्रपद पीछे की ओर, ओर एडियां भागे की गोर दवारा" इनकी . उल्टी चालो का कथन हृभा है । तथा “धुरोमूखाः” हारा यह दर्शाया है कि। प्रोर कर्के चलते हैँ । खलजाः; खलः" = 4 (०६६ 7ऽलील ऽअ) सूचित की है । कुम्भमृष्काः द्वारा शारीरिक बल सूचित किया है। "“अया

English

Spread out, ye Maruts, search among the people: seize ye and grind the Rākshasas to pieces, Who fly abroad, transformed to birds, at night-time, and sully and pollute our holy worship.

अध्याय ८

श्लोक 5.6

अ॒न्तर्द॑धे॒ द्यावा॑पृथि॒वी उ॒ताह॑रु॒त सूर्य॑म्।ते मे॑ दे॒वाः पु॒रोहि॑ताः प्र॒तीचीः॑ कृ॒त्याः प्र॑तिस॒रैर॑जन्तु

antardadhe dyāvāpṛthivī utāharuta sūryam| te me devāḥ purohitāḥ pratīcīḥ kṛtyāḥ pratisarairajantu

हिन्दी अर्थ

“"ृह्च्छेपः” कहा है (म्रयवं० ११।७।११) । ग्रौर (पार्ष्णी) एडियां (पुरः) श्रगे की भोर ह, (पुरः मुखाः) ओर मुख का० ८। सू० ६ प्रथववेद-भ(५्य २५५ (पर्यस्ताक्षाः) इधर-उधर क विषयों में आंखे भटकाने वाले, (अप्र च ङ्कशाः) अप्रशस्त गति वाले दूराचारी,या शसनविरोधौ विप्लवकारी, विरहित कर दिये जाय । (यः) जो (ब्रपतिः) पतिन होता हुश्रा (स्वपति

English

Hurl down from heaven thy bolt of stone, O Indra: sharpen it, Maghavan, made keen by Soma.

अध्याय ८

श्लोक 5.7

ये स्रा॒क्त्यं म॒णिं जना॒ वर्मा॑णि कृ॒ण्वते॑ ।सूर्य॑ इव॒ दिव॑मा॒रुह्य॒ वि कृ॒त्या बा॑धते व॒शी

ye srāktyaṃ maṇiṃ janā varmāṇi kṛṇvate | sūrya iva divamāruhya vi kṛtyā bādhate vaśī

हिन्दी अर्थ

(अवपादय) अवा मुख करके पटक दे । रोगपक्ष मे स््ौकोटों को नरकीटों से पृथक् कर देना चाहिए । ताकि नए कीट उत्पतच्नन हों। प्रकषरूप मे शासन विरोधी, विप्लवकारी । षण्डगाः = क्लीब सदृश गति- केणघारी (जम्भयन्तम्) हिसाशील, (मरीमृशम्) पुनः पुनः संभोगा्थं स्त्रियों से परामशं करने वाले (उपेषन्तम्) उन की समीपता चाहने वाले, करके निज संवरण करने वाले, च्पिजाने वाले को (पदा) पैरों द्वारा (प्रविध्य) ठुकरा कर फंक दे (इव ) जसे कि (स्पन्दना) उछलने-कूदने वाली (गौः) गौ (पाष्या) अपने पिछले पैर द्वारा (स्थालीम्) दूध दोहने के पातर कोठकरा कर फक देती है। २५६ अथवेवेद-माष्य का०८। सू० ६।

English

Forward, behind, and from above and under, smite down the demons with thy rocky weapon. They fly, the demon dogs, and, bent on mischief, fain would they harm indomitable Indra.

अध्याय ८

श्लोक 5.8

स्रा॒क्त्येन॑ म॒णिन॒ ऋषि॑णेव मनी॒षिणा॑ ।अजै॑षं॒ सर्वाः॒ पृत॑ना॒ वि मृ॒धो॑ हन्मि र॒क्षसः॑

srāktyena maṇina ṛṣiṇeva manīṣiṇā | ajaiṣaṃ sarvāḥ pṛtanā vi mṛdho hanmi rakṣasaḥ

हिन्दी अर्थ

प्राता ८००78 (बाष्टे) । अथवा शलम् संवरणं वहतीति । शल् + । (यः) जो (ते) तेरे (गभम्) गभेस्थ शिशु को (प्रतिमृशात्) पीडितं करे, (जातम्, वा) अथवा पैदा हुए (ते) तेरे बच्चे को (मारयाति)मारदे, (हूदयाव्रिधम्, कृणोतु) हृदय मे विद्ध कर दे। कामूक-पुरुष का वर्णेन है, जो कि गभिणी कै साथ बलात्कार कर कै गर्भस्थ बच्चे को पीडित करता दहै, भौर संभोग के कारण कोई बच्चा पेदां होता है तो उसे मारदेताहै, ताकि भोगी का अपयशन हो। एसे पुरुषं को बाण द्वारा हृदयाविध करा देना चाहिए । सायणाचाययं ने ““पिङ्ख'' का प्रथं किया है ““पीतसषेप" । इस प्रथं मे मन्व के पूर्धि मं रोगकीटाणु ये म्नो जातान मारथन्ति सूतिका अनुशेश्ते ।

English

Sakra makes sharp his weapon for the wicked: now let him cast his bolt at fiendish wizards.

अध्याय ८

श्लोक 5.9

याः कृ॒त्या आ॑ङ्गिर॒सीर्याः कृ॒त्या आ॑सु॒रीर्याः ।कृ॒त्याः स्व॒यंकृ॑ता॒ या उ॑ चा॒न्येभि॒राभृ॑ताः ।उ॒भयी॒स्ताः परा॑ यन्तु परा॒वतो॑ नव॒तिं ना॒व्या॒३अति॑

yāḥ kṛtyā āṅgirasīryāḥ kṛtyā āsurīryāḥ | kṛtyāḥ svayaṃkṛtā yā u cānyebhirābhṛtāḥ | ubhayīstāḥ parā yantu parāvato navatiṃ nāvyā3ati

हिन्दी अर्थ

मार देते है, तथा (सूतिका) अभिनव प्रसवा स्त्रियों के (अनु शेरते) संग मेघ को अन्तरिक्ष से पृथक् कर देती है । का०तः। सू०६ अथववेवेद-माष्य २५७ धारण-पोषण करे, (यत्) जो (दितम्) गभ मे निहित हुआ है (तत्) वहं (मा) न (अवपादि) नीचे गिरे, अर्थात् उस का गर्भपातन हो। (उग्रौ भेषजी) दो उग्र भेषज, (नीविभार्यौँ) जो करि अधोवस्त्रमे धारण करने माता को शिशु की सुरक्नाथं परामश दिया है । नीविःत=स्त्री के कटि

English

Indra hath ever been the fiends’ destroyer who spoil oblations of the Gods’ invokers. Yea, Sakra, like an axe that splits the timber, assails and sma- shes them like earthen vessels.

अध्याय ८

श्लोक 5.10

अ॒स्मै म॒णिं वर्म॑ बध्नन्तु दे॒वा इन्द्रो॒ विष्णुः॑ सवि॒ता रु॒द्रो अ॒ग्निः ।प्र॒जाप॑तिः परमे॒ष्ठी वि॒राड् वै॑श्वान॒र ऋष॑यश्च॒ सर्वे॑

asmai maṇiṃ varma badhnantu devā indro viṣṇuḥ savitā rudro agniḥ | prajāpatiḥ parameṣṭhī virāḍ vaiśvānara ṛṣayaśca sarve

हिन्दी अर्थ

(१) सूक्त ६ में रोग कीटाणुग्रोंका रयः वर्णन हूप्रा है रोग कोटाणु ( 4 ) स्त्रियों केभी दो अण्ड ओर अण्डकोष हेते (६) रोग कीट।णुजों के विनाशक “वज” भौर “पिङ्ग” = दो प्रकार के सषप (सायणः; मन्त्र ६) । (६) केशवः जल, वायु भौर शरीर मे शयन करने वाले कीटाणु (१०) रोग कीटाणु सूयं के ताप द्वारा नष्ट हो जाते हँ (मन्त्र २४) ।

English

without a sound. Indra and Soma, let this hymn control you both, even as the girth encompasses two vigorous

अध्याय ८

श्लोक 5.11

उ॒त्त॒मो अ॒स्योष॑धीनामन॒ड्वान् जग॑तामिव व्या॒घ्रः श्वप॑दामिव ।यमैच्छामावि॑दाम॒ तं प्र॑ति॒स्पाश॑न॒मन्ति॑तम्

uttamo asyoṣadhīnāmanaḍvān jagatāmiva vyāghraḥ śvapadāmiva | yamaicchāmāvidāma taṃ pratispāśanamantitam

हिन्दी अर्थ

करने वाले कीटाणु (मन्त्र २५ ) । । प्रवतन यौ तं मातोन्ममा जातायाः पतिवेदनो । (जातायाः) उत्पन्न हई के (यो) जो दो स्तन, (ते) तेरी (माता) माता ने (उन्ममाजं!). परिमाजित क्रिये ये, (पतिवेदनौ) जो दो (१३) सामाजिक कीटाणुरूप लुटेरों, आततायिओं, गौर कुकभिथों के १, “जाता” के स्तनो का परिमाजंन जातकमं संस्कार का एक भर है ।

English

steeds The song of praise which I with wisdom offer you. Do ye, as

अध्याय ८

श्लोक 5.12

स इद् व्या॒घ्रो भ॑व॒त्यथो॑ सिं॒हो अथो॒ वृषा॑ ।अथो॑ सपत्न॒कर्श॑नो॒ यो बिभ॑र्ती॒मं म॒णिम्

sa id vyāghro bhavatyatho siṃho atho vṛṣā | atho sapatnakarśano yo bibhartīmaṃ maṇim

हिन्दी अर्थ

२४६ ध्रयववेद-भाष्य का० ८।सू० ९ + क ९५७ के लिये ह । स्तन्यपान के लिये, शिशु कौ सत्ता चाहिए, भौर शिबु को, “पलाल”? श्रादि रोगकीटाणुजों के नाम हैँ । पदों के धात्वथं निम्न लिखित क्ये है । पलाल का श्रं है तिनके, ग्रौर अनुपलाल है भूसा। इनकी आकृति वाले या इन की तरह अतितुच्छ रोगकीटाणु । भ्रथवा इनके सडने (सायण) कोक चक्रवाक की श्राति वाला या बलादि का संहार करने केकड़े-जन्तु के सद्ण होती है, जिसे सायणाचायं ने भ्रमरकृतिक कहाहै। मासं तो मोष खप ऊरू माव॑ खपोऽन्तरा । ॥

English

Lords of men, animate these my prayers. In your impetuous manner think ye both thereon: destroy those evil spirits, kill the

अध्याय ८

श्लोक 5.13

नैनं॑ घ्नन्त्यप्स॒रसो॒ न ग॑न्ध॒र्वा न मर्त्याः॑ ।सर्वा॒ दिशो॒ वि रा॑जति॒ यो बिभ॑र्ती॒मं म॒णिम्

nainaṃ ghnantyapsaraso na gandharvā na martyāḥ | sarvā diśo vi rājati yo bibhartīmaṃ maṇim

हिन्दी अर्थ

मे “श शयन करने वाला । श्रलिश-कीटाणु रक्त में कुच काल तक शयन + त कठ हि उरप्रो के मध्य (मासंवृतः) संकोचनन कर, (म उपसृप.) अर्थात् न योनि के समीप आस-पास सर्पण कर, (मा अव सूपः)न उर्ग्रोसे नीचे । दोह । एककानामटहै “अलिश"' ओर दूसरे कानाम है “वत्सप"। ये दोनों दुनमि है, दुष्परिणाम के उत्पादक हैँ “्रलिश का श्रमिप्राय ।

English

treacherous fiends. Indra and Soma, let the wicked have no bliss whoso at any time- attacks and injures us.

अध्याय ८

श्लोक 5.14

क॒श्यप॒स्त्वाम॑सृजत क॒श्यप॑स्त्वा॒ समै॑रयत्।अबि॑भ॒स्त्वेन्द्रो॒ मानु॑षे॒ बिभ्र॑त् संश्रेषि॒णेऽजयत्।म॒णिं स॒हस्र॑वीर्यं॒ वर्म॑ दे॒वा अ॑कृण्वत

kaśyapastvāmasṛjata kaśyapastvā samairayat| abibhastvendro mānuṣe bibhrat saṃśreṣiṇe'jayat| maṇiṃ sahasravīryaṃ varma devā akṛṇvata

हिन्दी अर्थ

सायणाचाये के ब्रनुसार ह “श्रलयो भ्रमरकारेण वतमाना केचन रोगाः, तदभिमानिदेवः वा”! अर्थात् अलि रहँ चरमराकृति वलि रोग,या रोगोंके , वत्स द्वारा पेय दुर कोपी जाने वाला । “वत्सप” कीटाण्, माता के नानाविघ कीटाणुओं का वणन दहै, जिन कै स्वल्पो ओर रोगोत्पादन की शक्तियों का अनुसन्धान श्रपेक्षित है! अथववेद मे रोगकीटाणुभों को “क्रिमि” कहा है (२।३११-५; २।३२।१-६) । अलिशअलिश रोगनाशक (वजम्, भेषजम् ) वजनाम वाली ओपधध (कृणोमि) मेँ करता हं । ॥ स्त्रीकीयोनिके समीपओौरटागों में सपण करने वाले रोग तया

English

Whoso accuses me with words of falsehood when I pursue my way with guileless spirit, May he, the speaker of untruth, be, Indra! like water which the hollowed hand compresses.

अध्याय ८

श्लोक 5.15

यस्त्वा॑ कृ॒त्याभि॒र्यस्त्वा॑ दी॒क्षाभि॑र्य॒ज्ञैर्यस्त्वा॒ जिघां॑सति ।प्र॒त्यक् त्वमि॑न्द्र॒ तं ज॑हि॒ वज्रे॑ण श॒तप॑र्वणा

yastvā kṛtyābhiryastvā dīkṣābhiryajñairyastvā jighāṃsati | pratyak tvamindra taṃ jahi vajreṇa śataparvaṇā

हिन्दी अर्थ

पछाखानुपलालो शक कोकं मलिम्लुच पलीजंकम् । (पलालानुपलालौ ) पलाल ओर भ्रनुपलाल को, (शकुं म्, कोकम् ) शकु ऋष्षश्रीव, प्रमीली को हम नष्ट करते ह (अ (संवतम्) अद्ध का संकोचन करना (इच्छतः) चाहते ह । (अरायान्) शत्ररूप, अरातिरूप रोगकीटाणुप्रो का (श्रप हन्मः) हम हनन करते

English

Those who destroy, as is their wont, the simple, and with their evil natures harm the righteous,

अध्याय ८

श्लोक 5.16

अ॒यमिद् वै प्र॑तीव॒र्त ओज॑स्वान् संज॒यो म॒णिः ।प्र॒जां धनं॑ च रक्षतु परि॒पाणः॑ सुम॒ङ्गलः

ayamid vai pratīvarta ojasvān saṃjayo maṇiḥ | prajāṃ dhanaṃ ca rakṣatu paripāṇaḥ sumaṅgalaḥ

हिन्दी अर्थ

यः कृष्णः केसर स्तम्बन उत तुण्डिकः । श॒रायनस्या मुष्काभ्यां मंससोपं हन्मसि ॥५॥ (यः) जो (कृष्णः) काला (केशौ) रमो वाला, (असुरः) प्राणवान् तथा (तुण्डिकः) अल्पमुख वाला रोगकोटाणु है; (अरायान्) उन अण्डकोशों से, (भंससः) तथा कटिग्रदेश योनि से (भप हन्मसि) हम कभी-कभी प्रकट हो जते है । अनुजिध भमृकषन्तं करव्यादमुत ररिहम् । हिसक को, (क्रव्यादम्) शरीरके मांसकोख। जाने वाले को, (उत) तथौ

English

May Soma give them over to the serpent, or to the lap of Nirriti consign them.

अध्याय ८

श्लोक 5.17

अ॒स॒प॒त्नं नो॑ अध॒राद॑सप॒त्नं न॑ उत्त॒रात्।इन्द्रा॑सप॒त्नं नः॑ प॒श्चाज्ज्योतिः॑ शूर पु॒रस्कृ॑धि

asapatnaṃ no adharādasapatnaṃ na uttarāt| indrāsapatnaṃ naḥ paścājjyotiḥ śūra puraskṛdhi

हिन्दी अर्थ

(अरायान्) इन सब शत्रुओं को, या दुभेग रोगकीटाणुभों को (पिङ्गः) पीला १. इच्छा होने से दुर्णामा श्रौर सुनामा रोगकोटाणु है, चेतन सदृश दँ । २. दुर्णामा स्वस्थ शरीर को सुखा कर मासिको संकुचित करतादहै, ्रीर सुनामा, प्रसूतिकाल कै हए योनिविस्ार को संकुचित करतार, यह प्रभिप्राय का ८। सू० ६ प्रथवंवेद-माष्य २४६ मांसकोखा जाताहै, शरीर को सुखा देता है । रूपान्) नपुंसकलूपी, (तिरीटिनः) टे ध्र्थात् कपट चालनी वालों को, (इतः) इस तेरे मस्तिष्क से, (बजः) वज सषंप (सहताम्) पराभूत

English

O Agni, whosoever seeks to injure the essence of our food, kine, steeds, or bodies, May he, the adversary, thief, and robber, sink to destruction,. both himself and offspring.

अध्याय ८

श्लोक 5.18

वर्म॑ मे॒ द्यावा॑पृथि॒वी वर्माह॒र्वर्म॒ सूर्यः॑ ।वर्म॑ म॒ इन्द्र॑श्चा॒ग्निश्च॒ वर्म॑ धा॒ता द॑धातु मे

varma me dyāvāpṛthivī varmāharvarma sūryaḥ | varma ma indraścāgniśca varma dhātā dadhātu me

हिन्दी अर्थ

मे जैसे पुरुषों मे कामवासना उदृबुद्ध हो जाती है वैसे स्तयो मे भी उद्बुद्ध आए हैँ परन्तु स्वप्नावस्था मे वे कामी-कपटी पुरुषो के रूप मे बदल गए । कलीब कटा है, जोकि वस्तुतः भोग करने म श्रशक्त होते ह, शक्तिविहीन होते है । इस प्रकार कौ अवस्था को आपन्न हुए अर्जुनको भी गौतामें २५० अयवेवेद-भाष्य का० ए । सूक्त ६ हई तुभ को (दिप्सति) दम्भपूर्वेक दबाना चाहता है (तान्) एेसे उन सब को

English

May he be swept away, himself and children; may all the three earths press him down beneath them.

अध्याय ८

श्लोक 5.19

ऐ॒न्द्रा॒ग्नं वर्म॑ बहु॒लं यदु॒ग्रं विश्वे॑ दे॒वा नाति॒ विध्य॑न्ति॒ सर्वे॑ ।तन्मे॑ त॒न्वं त्रायतां स॒र्वतो॑ बृ॒हदायु॑ष्मां ज॒रद॑ष्टि॒र्यथासा॑नि

aindrāgnaṃ varma bahulaṃ yadugraṃ viśve devā nāti vidhyanti sarve | tanme tanvaṃ trāyatāṃ sarvato bṛhadāyuṣmāṃ jaradaṣṭiryathāsāni

हिन्दी अर्थ

(श्रनीनशत्) वज-ग्रौषध ने विनष्टकर दिया है, (इव) जैतेकि (परि- ¦ हो कर व्यक्ति को दूषित करती रहती हवे भी छाया क सदुश श्रवास्त- विक होती हैँ । उन का भी विनाश वज-ओौषध कर देता है । यः कृणोतिं मृतवत्सामवतोकामिमां स्त्रिय॑म् । मरे बच्चे वाली श्रथवा (अवतोकाम्) गभंपात वाली (कृणोति) कर देता (ओषधे) है ओषधि ! (त्वम्) तु (नाशय)नष्ट कर जैसे कि (अच्जि- ¦ ओषधि का नाम नहीं दिया । सम्भवतः “वज'' भमिप्रेत हो । अज्जिवम् = ,

English

May his fair glory, O ye Gods, be blighted, who in the day or night would fain destroy us. The prudent finds it easy to distinguish the true and false: their words oppose each other.

अध्याय ८

श्लोक 5.20

आ मा॑रुक्षद् देवम॒णिर्म॒ह्या अ॑रि॒ष्टता॑तये ।इ॒मं मे॒थिम॑भि॒संवि॑शध्वं तनू॒पानं॑ त्रि॒वरू॑थ॒मोज॑से

ā mārukṣad devamaṇirmahyā ariṣṭatātaye | imaṃ methimabhisaṃviśadhvaṃ tanūpānaṃ trivarūthamojase

हिन्दी अर्थ

कीटो या क्रिमियों के लिये देखो अथव ° (२।३१।१-५; २।३२।१-६) । प्रग्नि मे जला कर उस के धूम' द्वारा इन मच्छरों के विनाश का विधान किया है। इस से प्रतीत होता है किये सब कौट रोगकोटाणु थ7705 ही ओौर-पिङ्क पीत वज ही है। वजसरसों के दाने । अथव ° (४।३७।२) मे “अजशृद्धी"" ओषधि का नाम पठित है जिसके गन्ध द्वारा रल्ञः आदि ये कुङु्धाः कुकूरंमाः कृत्तीदूकानि विश्र॑ति । (ये) जो (कुकुन्धाः, कुकूरभा) कुत्सित गतियो को धारण करने वाले

English

He slays the fiend and him who speaks untruly: both lie entan- gled in the noose of Indra. As if I worshipped deities of falsehood, or thought vain thoughts about the Gods, O Agni!

अध्याय ८

श्लोक 5.21

अ॒स्मिन्निन्द्रो॒ नि द॑धातु नृ॒म्णमि॒मं दे॑वासो अभि॒संवि॑शध्वम्।दी॒र्घा॒यु॒त्वाय॑ श॒तशा॑रदा॒यायु॑ष्मान् ज॒रद॑ष्टि॒र्यथास॑त्

asminnindro ni dadhātu nṛmṇamimaṃ devāso abhisaṃviśadhvam| dīrghāyutvāya śataśāradāyāyuṣmān jaradaṣṭiryathāsat

हिन्दी अर्थ

(दूर्णानि = दूषणीयानि, सायण) दूषणीय (कृत्तीः) चमड़ं को (बिभ्रति) धारण करते ह, रौर (ये) जो (क्लीबाः इव) मानो उन्मत्तो के सदुश करते ह, (तान्) उन्दँ (इतः) इस वन से (नाशयामसि) हम नष्ट २५२ प्रथरवेवेद-माष्य का० ८ सू० ६ का०८।सू०६ अयववेद-भाष्य २५३ । ों दरगन्पीरलोरि हि होती रै, “अंस तक फली होती है) यह् कौट देखने मे अति धु1गः ॥ सूयं के प्रक्राण को नदीं सह॒ सकते, अतः ये दिन के समय छिपे रहते रहै। , १७) ।

English

Why art thou angry with us, Jātavedas? Destruction fall on those who lie against thee! So may I die this day if I have harassed any man’s life, or if I be a demon.

अध्याय ८

श्लोक 5.22

स्व॒स्ति॒दा वि॒शां पति॑र्वृत्र॒हा वि॑मृ॒धो व॒शी।इन्द्रो॑ बध्नातु ते म॒णिं जि॑गी॒वाँ अप॑राजितः सोम॒पा अ॑भयङ्क॒रो वृषा॑ ।स त्वा॑ रक्षतु स॒र्वतो॒ दिवा॒ नक्तं॑ च वि॒श्वतः॑

svastidā viśāṃ patirvṛtrahā vimṛdho vaśī| indro badhnātu te maṇiṃ jigīvā~ aparājitaḥ somapā abhayaṅkaro vṛṣā | sa tvā rakṣatu sarvato divā naktaṃ ca viśvataḥ

हिन्दी अर्थ

श्वापदो के शरीरो से दुगेन्ध आती है । शिकार कोखानेसे इनके मुख ' रक्त से लिपे रहते हैँ । इन श्वापदो को मन्व मँ मकक कहा है । रङ्गं को, (असे) निज कन्ध पर (श्राधाय) रख कर (विश्नति) निज को (बिश्रतः) धारण करते हए वध् के मागे पर (वध्वः पूवं) वधू से पहले (यन्ति) पहुंच जाते है, तथा (प्रहासिनः) उपहास रथात् वधू पर ठठा- मखौल करते हृए (श्रपकेष्ठाः) पाकशाला में श्रा खड़ होते द, भौर (ये ) जो दस प्रथिवी से (नाशयामसि) हम नष्ट कर देते हैं । स्वभाव वाले कीटो तथा कीटाणुओंकातु (नाशय) नाश कर ।

English

Yea, may he lose all his ten sons together who with false tongue hath called me Yātudhāna. May Indra slay him with a mighty weapon, and let the vilest of all creatures perish,

अध्याय ८

श्लोक 6.1

गर्भदोषनिवारणम्।१-२६ मातृनामा।मन्त्रोक्ताः, मातृनामा, १५ ब्रह्मणस्पतिः।अनुष्टुप्, २ पुरस्ताद्बृहती, १० त्र्यवसाना षट्-पदा जगती, ११,१२,१४,१६ पथ्यापङ्क्तिः, १५ त्र्यवसाना सप्तपदा शक्वरी, १७ त्र्यवसाना सप्तपदा जगती।यौ ते॑ मा॒तोन्म॒मार्ज॑ जा॒तायाः॑ पति॒वेद॑नौ ।दु॒र्णामा॒ तत्र॒ मा गृ॑धद॒लिंश॑ उ॒त व॒त्सपः॑

garbhadoṣanivāraṇam| 1-26 mātṛnāmā| mantroktāḥ, mātṛnāmā, 15 brahmaṇaspatiḥ| anuṣṭup, 2 purastādbṛhatī, 10 tryavasānā ṣaṭ-padā jagatī, 11,12,14,16 pathyāpaṅktiḥ, 15 tryavasānā saptapadā śakvarī, 17 tryavasānā saptapadā jagatī| yau te mātonmamārja jātāyāḥ pativedanau | durṇāmā tatra mā gṛdhadaliṃśa uta vatsapaḥ

हिन्दी अर्थ

गति से छेदन करने वाले वाण से, (उत) तथा (नग्नकात्) भूषे-नङ्घे से, कियाहै। सूक्तमें सर्षप द्वारा शारोरिक रोगों कामो उपचार विहित है का अथं “बलादनि" भी दहै (च्रादिः) । अतः “पिङ्कः का अभिप्राय है २५८ ्रथवेवेद-भाष्य का०८। सू० ६ का० ८ स० ६ अयर्ववेद-माष्य २५९ (तान्) उन कौटाणुओं को (इतः) इस उत्यत्ति स्थान से (नाशयामसि)

English

Destroy the fiend shaped like an owl or owlet, destroy him in. the form of dog or cuckoo. Destroy him shaped as eagle or as vulture: as with a stone, O

अध्याय ८

श्लोक 6.2

प॒ला॒ला॒नु॒प॒ला॒लौ शर्कुं॒ कोकं॑ मलिम्लु॒चं प॒लीज॑कम्।आ॒श्रेषं॑ व॒व्रिवा॑सस॒मृक्ष॑ग्रीवं प्रमी॒लिन॑म्

palālānupalālau śarkuṃ kokaṃ malimlucaṃ palījakam| āśreṣaṃ vavrivāsasamṛkṣagrīvaṃ pramīlinam

हिन्दी अर्थ

ओषधियों भौर श्रोषधियों के गुणों के जानने वाला वेच, इन दोनों के सहचार से, ओौषधधोपचार होना चाहिए । (जीवलाम्) प्राणप्रदा, (नघारिषाम्) न हनन ओरन हसन करने भभिमतफल का अवरोध न करने वाली, या घावों को भरने वानी (उच्य. मतीम्) मधुर ओषधि को (इह) इस चिकित्सा कमं में (महम्) मँ . (हृकेः) भाहूत करता हूं, (अस्म अरिष्टतातये) इस र्ण के लिये, श्रहिसा्थं । करने वाली, सफलता प्रदान करने वाली या अरुस् -धावं+-घेट् (वीमि) धाव को पीजाने वाली । पष्पाम् पुष्प विकासे (दिवादिः ) । श्रथवा

English

I have obscured the heaven and earth, yea, and the daylight and the sun. So may these Gods whom I have set before me oppose with saving charms and banish witchcraft.

अध्याय ८

श्लोक 6.3

मा सं वृ॑तो॒ मोप॑ सृप ऊ॒रू माव॑ सृपोऽन्त॒रा।कृ॒णोम्य॑स्यै भेष॒जं ब॒जं दु॑र्णाम॒चात॑नम्

mā saṃ vṛto mopa sṛpa ūrū māva sṛpo'ntarā| kṛṇomyasyai bheṣajaṃ bajaṃ durṇāmacātanam

हिन्दी अर्थ

(याः च) जिन (वीरुषः) भ्रोषधियों को (अहम् वेद) मँ वैय ! मै देखता हूं, (अज्ञाताः) जो अभी नहीं जानी, (याः जानीमः, च) ओर जिन्हँ हम जानते है, (यासु च) गौर जिन म (संभृतम्) रस.मृत भरा मेरे (वचसः) कथन को । बोधन्तु) जानं (यथा) जिस प्रकार कि (इमम्) जल (हविः) यज्ञिय हवियां (दिवः पुत्रौ) तथा चुलोककेदो पुत्र (ब्रीहिः यवः च) ब्रीहि अर्थात् धान म्रौर जौ (भेषजौ) जो कि भौषधरूपरहै विशिष्ट रोगकेन होते हुए भीक्षुधारोग मे इन का सेवन सदा करना होता

English

Kasyapa formed and fashioned thee, Kasyapa raised and sent thee forth. Indra wore thee, and, wearing thee, won in the wrestling-match with man.

अध्याय ८

श्लोक 6.4

दु॒र्णामा॑ च सु॒नामा॑ चो॒भा सं॒वृत॑मिच्छतः ।अ॒राया॒नप॑ हन्मः सु॒नामा॒ स्त्रैण॑मिच्छताम्

durṇāmā ca sunāmā cobhā saṃvṛtamicchataḥ | arāyānapa hanmaḥ sunāmā straiṇamicchatām

हिन्दी अर्थ

१।१२) । ब्रीहि भौर यव, यौःके पुत्र कहे ह । युलोक या दयुतिमान् सूयं दारा बरसे जल से पैदा होते है । यद्यपि सभी ओषधियां द्यौः के जल से पैदा होती है, परन्तु ब्रीहि ्रौर यव हैनिक मोजनरूप हँ भतः इनका विशेष कथन हु है । ये दोनों विशिष्ट भौषध हैँ मौर मत्युं से बचाते है, ्रत्ना- भाव से मृत्यु हो जाती है, श्रतः ये दोनों प्राणापानखूम दँ यथा “व्रीहियवौ २७२ स्रथवंवेद-भाष्य का० ६ । सू०.७ (भोषधीः) है ग्रोषयियो ! (स्तनयति) मेघ के गरजने प्रौर (अभि. (वः) तुमह (पजेन्यः) मेष (रेतसा) जल द्वारा (अवति) तृप्त करता भोपधियों क। सम्बोधन कविता में क्रिया है ।

English

The Amulet of boundless might the Gods have made a coat of mail. Whoever would destroy thee with Dikshā-rites, sacrifices, spells,

अध्याय ८

श्लोक 6.5

यः कृ॒ष्णः के॒श्यसु॑र स्तम्ब॒ज उ॒त तुण्डि॑कः ।अ॒राया॑नस्या मु॒ष्काभ्यां॒ भंस॒सोप॑ हन्मसि

yaḥ kṛṣṇaḥ keśyasura stambaja uta tuṇḍikaḥ | arāyānasyā muṣkābhyāṃ bhaṃsasopa hanmasi

हिन्दी अर्थ

तस्यामृतस्य बं पुरुषं पाययामसि । इस पुरुष को (पाययामसि) हम पिलाते ह । (सरथो) अब (भेषजम् कृणोमि) इस की चिक्रित्सार्ग करता हं, (यया) जिससे कि (शतहायनः) सौ वर्षो कानिर्देश हआ है । रसामृतकोबल का कारण न कहकर बललूप कहा मोषधियोमेजाकरजोप्रमृतरूपहो गया है । वराहो वेद वीरुधं नकुखो वेद भेषजीम् ।

English

Meet him and smite him, Indra! with thy hundred-knotted thunderbolt. Verily let this Amulet, circular, potent, conquering, Happy and fortunate defence, preserve thy children and thy wealth.

अध्याय ८

श्लोक 6.6

अ॒नु॒जि॒घ्रं प्र॑मृ॒शन्तं॑ क्र॒व्याद॑मु॒त रे॑रि॒हम्।अ॒रायां॑छ्वकि॒ष्किणो॑ ब॒जः पि॒ङ्गो अ॑नीनशत्

anujighraṃ pramṛśantaṃ kravyādamuta reriham| arāyāṃchvakiṣkiṇo bajaḥ piṅgo anīnaśat

हिन्दी अर्थ

(वराहः) सूप्रर (वीरुषम्) ओषधि को (वद) जानता है, (नकुलः) हिसा कर देते हैँ; गन्ध-+अर्वाः (अवं हिसायाम् भ्वादिः) । वराह आदि प्राणी निज रोग कौ भषधि स्वयं जानते हैँ । ये जिन ओषधियों को जानते है, उन्हे जान कर चिकित्सक रोगी के रोगानुसार उन का संग्रह् करे । ये विषली श्रोषधियों को जानते है । विषप्रयोग द्वारा भी नानाविध रोगं मृगा या वि दुरोषंधीस्ता भस्मा अव॑से हुवे ॥२४॥ ओषधियों को (सुपणः) गरुड तथा (याः) जिन (दिव्याः) दिव्य ओषधियों को (रधटः) लधुकायरूप अन्तरिक्ष में उडने वाली चिडियां-तोते आदि ( विदुः) जानते हँ, (वयांसि) महाकायरूप पक्षी या कौए, (हंसाः) ओर हंस (याः) जिन ओषधियों को (च) तथा (सवं पतत्रिणः) श्रन्य सब पक्षी (याः) जिन्दे (विदुः) जानतेर्हैँ (मृगाः) मृग (याः) जिन (ओषधीः)

English

Brave Indra, set before us light, peace and security from below, Peace and security from above, peace and security from behind.

अध्याय ८

श्लोक 6.7

यस्त्वा॒ स्वप्ने॑ नि॒पद्य॑ते॒ भ्राता॑ भू॒त्वा पि॒तेव॑ च ।ब॒जस्तान्त्स॑हतामि॒तः क्ली॒बरू॑पांस्तिरी॒टिनः॑

yastvā svapne nipadyate bhrātā bhūtvā piteva ca | bajastāntsahatāmitaḥ klībarūpāṃstirīṭinaḥ

हिन्दी अर्थ

अहन्तव्या गौए, (यावतीनाम्) जितनियों को (अजावयः) बकरियां ओौर (श्रामृताः) लाई हई, (तुभ्यम्) है रोगिन् ! तेरे लिये (शमं) सुख (यच्छन्तु) देवे । वि २७४ अयरवेवेद-भाष्य का० ८ । सूक्त ७, यावतीषु मनुष्या मेषजं भिषनों विदुः । ॥ (यावतीषु) जितनी वीरुधो मे (मनुष्याः भिषजः) चिकित्सकं मनुष्य (भेषजम्) ओौषध (विदुः) जानते है; (विश्वभेषजीः) सब रोगों हवे (मन्त्र २३, २४) ओर श्राभरामि का समान अभिप्रायः है ।

English

My coat of mail is Heaven and Earth, my coat of mail is Day and Sun: A coat of mail may Indra and Agni and Dhātar grant to me. Not all the Gods may pierce, all leagued together, the vast strong shield which Indra gives,

अध्याय ८

श्लोक 6.8

यस्त्वा॑ स्व॒पन्तीं॒ त्सर॑ति॒ यस्त्वा॒ दिप्स॑ति॒ जाग्र॑तीम्।छा॒यामि॑व॒ प्र तान्त्सूर्यः॑ परि॒क्राम॑न्ननीनशत्

yastvā svapantīṃ tsarati yastvā dipsati jāgratīm| chāyāmiva pra tāntsūryaḥ parikrāmannanīnaśat

हिन्दी अर्थ

(पुष्पवतीः) फूलों वाली, (प्रसूमतीः) नवीन कोपलों वाली, (फलिनी) फलो वाली, (उत) तथा (अफलाः) फलों से रहित ओषधियां , (संमातरः) मिल कर, माताश्रों के (इव) सदृश, (अस्मे) इस कं लिये दुग के सदश रसो का दोहन करे, प्रदान करं । अरिष्टतातये --अथवा “श्रिष्टकरणायः' उद्धत कियादहै, तेरा उद्धार क्रियाहै। १. पञ्चविध ज्ञानवाण, पञ्चविध कमवाणों मं परिणत होकर, १० वाण हौ जति) (१) पुतिरज्जुः= धड़ाके का शब्द करती हई, एत्रुदल में दुगन्ध फलाने

English

and Agni. May that great shield on all sides guard my body, that to full old my life may be extended.

अध्याय ८

श्लोक 6.9

यः कृ॒णोति॑ मृ॒तव॑त्सा॒मव॑तोकामि॒मां स्त्रिय॑म्।तमो॑षधे॒ त्वं ना॑शया॒स्याः क॒मल॑मञ्जि॒वम्

yaḥ kṛṇoti mṛtavatsāmavatokāmimāṃ striyam| tamoṣadhe tvaṃ nāśayāsyāḥ kamalamañjivam

हिन्दी अर्थ

(२) बृहत्-जाल द्वारा शत्रुदल को बांधना (४-७) । (४) नागरिकशासक “भव” ओौर सेनाशासक “शवे” (११, १७) । (७) युद्ध मे पकड़ गये शतूसैनिकों का सुगमता से हनन (१४, १५) । (८) मृत्यु के फंदे, तथा कूट-प्रयोग (१६) ) (६) बृहस्पतिः = राष्ट की बृहती सेना का-अधिपति (१६)

English

Let the Gods’ Charm be bound on me to keep me safe from every ill. Come ye and enter all within this pillar, the safe-guard of the body, thrice-defended. In this let Indra lay a store of valour: approach ye Gods, and enter it together,

अध्याय ८

श्लोक 6.10

ये शालाः॑ परि॒नृत्य॑न्ति सा॒यं ग॑र्दभना॒दिनः॑ ।कु॒सूला॒ ये च॑ कुक्षि॒लाः क॑कु॒भाः क॒रुमाः॒ स्रिमाः॑ ।तानो॑षधे॒ त्वं ग॒न्धेन॑ विषू॒चीना॒न् वि ना॑शय

ye śālāḥ parinṛtyanti sāyaṃ gardabhanādinaḥ | kusūlā ye ca kukṣilāḥ kakubhāḥ karumāḥ srimāḥ | tānoṣadhe tvaṃ gandhena viṣūcīnān vi nāśaya

हिन्दी अर्थ

“बली'" । नागरिक रक्षको को बलवान् होना ही चाहिए) ये शारीरिक “किमीदिने” काः अथं निसक्त मे “पिशुनाय” किया है। पिणुन मनुष्य होते हँ रोगकीयाण नहीं । इस से भी यह प्रतीत होता है कि मन््र(२९१) में प्रजादुःखदायक “मनुष्यो” का ही वर्णन है जिन से गभिणी की रक्षा करनी है (निरुक्त ६।३।१२; पद ४४) 1 'पवीनसात् = पवीनशात् । शकार को सकार “वणं विकार" द्वारा । इसे “वणेव्यापत्ति” भी कहते हैँ । पविः वच पादात्) पांच पैरों वाले से, (अनड गरेः) श्रङगुलिरहित से, (वृन्तात्) लता से (अभिप्रसपंतः) ऊपर-नीचे सपंण करने वाले से (वरीवृतात् ) वृत्ता कार वाले अर्थात् गोलावृत्ति वाले से (परि पाहि) रक्षाकर।'

English

Indra, crush the demon. Let not the fiend of witchcraft-workers reach us: may Dawn. drive off the couples of

अध्याय ८

श्लोक 6.11

ये कु॒कुन्धाः॑ कु॒कूर॑भाः॒ कृत्ती॑र्दू॒र्शानि॒ बिभ्र॑ति ।क्ली॒बा इ॑व प्र॒नृत्य॑न्तो॒ वने॒ ये कु॒र्वते॒ घोषं॒ तानि॒तो ना॑शयामसि

ye kukundhāḥ kukūrabhāḥ kṛttīrdūrśāni bibhrati | klībā iva pranṛtyanto vane ye kurvate ghoṣaṃ tānito nāśayāmasi

हिन्दी अर्थ

गर्भान खादन्ति केशवास्तानितो नाशयामसि ॥२३॥ मांस को खाते रै, तथा (केणवाः) जल, वायु तथा शरीर मेँ गति करने उसे सुखा देना । ये काम रोगजनक कीटाणुग्रों शल 5 केर्है।ये रोग जनक कीटाणु जल आदि मेँ पैदा होते तथा गति करते रहते रहँ । केशव।: = करते है, (इव ) जसे कि (स्नुषा) पुत्रवधू (श्वशुरात्) षएषशुरसे(भधि) परे-परे विचरती है, (ब्रजः च पिङ्धः च वज भौर पिङ्क (तेषाम्) उनके (हूदये ऽधि) हृदय मे (नि विध्यताम्) नितरां वेघन करे । सूयं कौ रश्मियों मे रोगकीटाणु मर जाते हैँ अतःवे निज जीवनाथं सूरं रदिमयों को वजित कर सपण करते हँ। (श्रथवं० २।३२।१) । वजः, पिङ्कः = भूरे तथा श्वेत सषप सरसों के बीज । मन्त्र मे गोगकीटाणुओं कावर्णनहै। तथाचोरं भ्रादिकाभी जोकि सूर्यं को परिवजित करके रात्रीकालं में चौयं भादि कमं करते हैँ । इस अभिप्राय मे“ वजः वाजः =

English

Kimidins. Earth keep us safe from earthly woe and trouble! From grief that comes from heaven Mid-air

अध्याय ८

श्लोक 6.12

ये सूर्यं॒ न तिति॑क्षन्त आ॒तप॑न्तम॒मुं दि॒वः ।अ॒राया॑न् बस्तवा॒सिनो॑ दु॒र्गन्धीं॒ल्लोहि॑तास्या॒न् मक॑कान् नाशयामसि

ye sūryaṃ na titikṣanta ātapantamamuṃ divaḥ | arāyān bastavāsino durgandhīṃllohitāsyān makakān nāśayāmasi

हिन्दी अर्थ

“पिज्क'' के साहचयं से “वज” का अरभिप्रायहै रश्षकवगे के साथ गति करने वाले अन्य बलशाली सहायक । वज ब्रज गतौ (स्वादिः) । (पिङ्ग) है पिङ्खं सषेप 1 (जायमानम्) पेदा होते हुए शिशु को (रक्ष) २६० श्रथवेवेद-भाष्य का०.८। सू०६ करे, (किमीदिनः) पिशुन मन्त्र २१ शक्तियों को (इतः) इस गर्भिणी से (बाधस्व) है पिद्क। तू पीडति कर। मनुष्य समाज मे कभी-कभी यह घटना हो जाती है कि जौ पहले वह पुमान् घोषित की जाती है। इनमें लिग परिवतेन हौ जाता है । सायण ने निम्नलिखित अर्थंभी दिया है, “जायमानं पूमासं, जायमानां

English

preserve us! Indra destroy the demon, male and female, joying and triumph- ing in arts of magic!

अध्याय ८

श्लोक 6.13

य आ॒त्मान॑मतिमा॒त्रमंस॑ आ॒धाय॒ बिभ्र॑ति ।स्त्री॒णां श्रो॑णिप्रतो॒दिन॒ इन्द्र॒ रक्षां॑सि नाशय

ya ātmānamatimātramaṃsa ādhāya bibhrati | strīṇāṃ śroṇipratodina indra rakṣāṃsi nāśaya

हिन्दी अर्थ

“पिशुन” होने पर मन्त्र का भाव निम्नलिखित होगा। हैपिङ्ग! तू जायमान शिशु की रक्ता कर ताकि कोई माता उत्पत्च होते हृए शिशु कौ उसे निःशक्त अबलारूप न कर दे, श्र्थात् बली निबेल को दबा न सके। होना, (आत्) तदनन्तर (रोदम्) रोना, (अघम्) पाप जिस कारण कृक्ष के पृष्पों से (खजं कृत्वा इव ) रचौ मालारूप' कर के, (तत्) उसे तथा इन की सत्ता का कारण पाप ओर इस पाप-पट का आवयन अर्थात्

English

Let the fools’ gods with bent necks fall and perish, and see no. more the Sun when he arises. Look, each one, hither, look around. Indra and Soma, watch ye well.

अध्याय ८

श्लोक 6.14

ये पूर्वे॑ ब॒ध्वो॒३यन्ति॒ हस्ते॒ शृङ्गा॑णि॒ बिभ्र॑तः ।आ॒पा॒के॒स्थाः प्र॑हा॒सिन॑ स्त॒म्बे ये कु॒र्वते॒ ज्योति॒स्तानि॒तो ना॑शयामसि

ye pūrve badhvo3yanti haste śṛṅgāṇi bibhrataḥ | āpākesthāḥ prahāsina stambe ye kurvate jyotistānito nāśayāmasi

हिन्दी अर्थ

१1० ८ ।सू०६ अथवेवेद-भाष्य २६१ भृनते रहना, मानो यह् मालारूप है । इन सब को परस्पर सम्बन्धी जान कर सब का उच्छेद साथ-साथ करना चाहिए, एक-एक का पृथक् पथर्क (१) दुराचारियों के पापमय कमं 1 (२) तथा गृहजोवन मे अतिभोग ओर भमर्यादित भोग, पति प्रर पनीत । यह् भी पापमयदहै। सायणाचाय ने श्वेत-ग्रौर-पीत, तथा श्वेत-ओर-गौर सषपों को वज-ओर पिङ्घ कहा है । “वज'' नामक सषेप को “दुर्णामा, कीटों तथा कीटाणुओं का हुननकारी कहा है,ओौर पत्ति-या-गौर सर्षप को "सुनामा" कह है । दोनों सषेप दो जाति के सरसों-बीज है । यथा “सरसोंके पौधे का बौज कुछ

English

Cast forth your weapon at the fiends: against the sorcerers hurl your bolt. A charm accompanying investiture with an amulet Upon the strong is bound the strong, this magic cord, this Amu- let,

अध्याय ८

श्लोक 6.15

येषां॑ प॒श्चात् प्रप॑दानि पु॒रः पार्ष्णीः॑ पु॒रो मुखा॑ ।ख॒ल॒जाः श॑कधूम॒जा उरु॑ण्डा॒ ये च॑ मट्म॒टाः कु॒म्भमु॑ष्का अया॒शवः॑ ।तान॒स्या ब्र॑ह्मणस्पते प्रतीबो॒धेन॑ नाशय

yeṣāṃ paścāt prapadāni puraḥ pārṣṇīḥ puro mukhā | khalajāḥ śakadhūmajā uruṇḍā ye ca maṭmaṭāḥ kumbhamuṣkā ayāśavaḥ | tānasyā brahmaṇaspate pratībodhena nāśaya

हिन्दी अर्थ

ललाई लिये हए पीन्ञे रङ्ग के होते हैँ । एक जाति के सरसां के बीज सफद होते है । लाल भौर सफेद सरसों समान ही गृण वाली होती ह । किन्तुतो भी सफेद सरसों, लाल की श्रपेक्षा उत्तम होती है। इन दोनो के गुणाव- गृण नाना वर्णित हए है । परन्तु यहां वे ही लिखे जाते हँ जिन का सम्बन्ध मुक्त ६ के विषय के साथ सम्बद्ध है। “यथा” ये कृमिनाशक तथा गृह-

English

Potent, foe-slayer, served by valiant heroes, happy and fortu- nate defence. This Charm, foe-slayer, served by many heroes, strong, power- ful, victorious, and mighty,

अध्याय ८

श्लोक 6.16

प॒र्य॒स्ता॒क्षा अप्र॑चङ्कशा अस्त्रै॒णाः स॑न्तु॒ पण्ड॑गाः ।अव॑ भेषज पादय॒ य इ॒मां सं॒विवृ॑त्स॒त्यप॑तिः स्वप॒तिं स्त्रिय॑म्

paryastākṣā apracaṅkaśā astraiṇāḥ santu paṇḍagāḥ | ava bheṣaja pādaya ya imāṃ saṃvivṛtsatyapatiḥ svapatiṃ striyam

हिन्दी अर्थ

करते, तथा विष नाश करते । सरसोका रसग्रोर पाक रक्षस बाघा, कृमि,श्रौर गृह की बाधा को दुर करताहै। “सरसों को पीस कर उसका शाफा वना कर, मासिकघमं के स्नान के पण्चात् तीन दिनि तक यौनिमें रखने से गभ॑धारण होता है" (वनौषधि चन्द्रोदय, चन््रराज भण्डारी, २- पाप का फल, यक्ष्म (मन्त्र ३, २८) । ३-- पुरुषजी वनी भोषधियां (मन्व ४) । ४--भ्रोषधियों की भस्मं (मन्त्र ८) ९--हूदयकल्याणकारी ओौषघ (मन्प्र १७) 1

English

goes bravely forth to meet and ruin witchcraft. With this same Amulet wise Indra routed the Asuras, with this he slaughtered Vritra, With this he won this pair, both Earth and Heaven, and made the sky’s four regions his

अध्याय ८

श्लोक 6.17

उ॒द्ध॒र्षिणं॒ मुनि॑केशं ज॒म्भय॑न्तं मरीमृ॒शम्।उपेष॑न्तमुदु॒म्बलं॑ तु॒ण्डेल॑मु॒त शालु॑डम्।प॒दा प्र वि॑ध्य॒ पार्ष्ण्या॑ स्था॒लीं गौरि॑व स्पन्द॒ना

uddharṣiṇaṃ munikeśaṃ jambhayantaṃ marīmṛśam| upeṣantamudumbalaṃ tuṇḍelamuta śāluḍam| padā pra vidhya pārṣṇyā sthālīṃ gauriva spandanā

हिन्दी अर्थ

(याः) जो (बश्रवः) भूरे रङ्खकीया भरण-पोषण भरने वाती, (याः । च) श्रौर जो (शुक्राः) सफेद या वीर्यवर्धिका, (रोहिणीः) लाल या घाव को न शुक्ल न काली (कृष्णाः) काली (जोषधीः) श्रोषधियां है (सर्वाः) उन पैदा हृद भओषषियां (यासाम्) जिन का क्रि (पिता) उत्पादक (यौः) चुलोक है, (माता) माता (पृथिवी) पृथिवी है, मौर (मूलम्) मूल (समुद्रः बश्रुव) समीपवर्ती प्रदेशों मे उत्पन्न हुई है ।

English

possession. May this encircling magic cord, this Amulet of Srāktya wood,

अध्याय ८

श्लोक 6.18

यस्ते॒ गर्भं॑ प्रतिमृ॒शाज्जा॒तं वा॑ मा॒रया॑ति ते ।पि॒ङ्गस्तमु॒ग्रध॑न्वा कृ॒णोतु॑ हृदया॒विध॑म्

yaste garbhaṃ pratimṛśājjātaṃ vā mārayāti te | piṅgastamugradhanvā kṛṇotu hṛdayāvidham

हिन्दी अर्थ

अंशमतीं; फाण्डिनीर्या विश्षाखा हवयामि ते वीरुधो वेवदेवीरप्राः वाली, (अंणुमत्तीः) छोटी-छोटी णाखांओं वालो, (काण्डिनीः) अनेक गांठों या बड़ तनो वाली (याः विशालाः) ओर जो शाखा विरहित, (वैश्वदेवीः) जीवनीः। पुरुष को जीवन देने वाली (उग्राः) बलशाली (वीरुधः) विरोहण करने वली(ओषधोः ग्रोषधियां है, उन्हे(ते प्रवदामि) म तेरे लिये कहता हः उनका कथन करत। हूं, इसलिये (ह्वयामि) तुभं श्रपने समीप बुलाता हूं ।

English

Mighty, subduing enemies, keep us secure on every side. This Agni hath declared, Soma declared it, Brihaspati, and Savitar, and Indra.

अध्याय ८

श्लोक 6.19

ये अ॒म्नो जा॒तान् मा॒रय॑न्ति॒ सूति॑का अनु॒शेर॑ते ।स्त्रीभा॑गान् पि॒ङ्गो ग॑न्ध॒र्वान् वातो॑ अ॒भ्रमि॑वाजतु

ye amno jātān mārayanti sūtikā anuśerate | strībhāgān piṅgo gandharvān vāto abhramivājatu

हिन्दी अर्थ

श्नोषयियां गुणो ओर आकृतियों मे नानाविध है, मौर इन के उत्पादक तत्तव भी नानाविध ह, परन्तु उपादान कारण की दृष्टि से वे एकविधर्हू एकरूप । इन का उपादान कारण एक है, प्रकृति; श्रौर उत्पादक एक दहै, परमेरवर । “शुद्ध'' क। अभिप्राय है उपादान कारण या मूल कारण (छान्दो- का०८। सु० ७ ग्रथवंवेद-भाष्य २६५ (सहमानाः) रोगो का पराभव करने वाली है श्रोषधिधो ! (प्त) जो (ओषधीः) है ओषधियो ! तुम (मुञ्चत) मुक्त करो, (यथौ) अव (भेषजम् कृणोमि) ्रौषधोपचार ओँ करता हं यक्ष्म निराकरणाथ ।

English

So may these Gods whom I have set before me oppose with saving charms and banish witchcraft.

अध्याय ८

श्लोक 6.20

परि॑सृष्टं धरयतु॒ यद्धि॒तं माव॑ पादि॒ तत्।गर्भं॑ त उ॒ग्रौ र॑क्षतां भेष॒जौ नी॑विभा॒र्यौऽ

parisṛṣṭaṃ dharayatu yaddhitaṃ māva pādi tat| garbhaṃ ta ugrau rakṣatāṃ bheṣajau nīvibhāryau'

हिन्दी अर्थ

त्यते सूखदुःखविवजिताः"' (मनु०) मनु के इस कथनानुसार ओषधियौं को चेतन जान कर “हुवे” पद का प्रयोग हभ है । १, भ्र्थदृष्टघा “वचसा, उ" एेसा पदच्छेद करिया है । पदपाठ “वचसः'" है । मेरे (वचसो वचसा-+- उ) कथनानुसार (इह) यहां अर्थात् मेरे पास (ग्रा यन्तु) आ जाय, (यथा) जिस से कि (इमम्, पुरुषम्) इस पुरुष को कर दें । मेदिनी मेदस्वतीः । ॑ “प्रचेतसः” दारा ओषधिं भौ अभिप्रेत हो सकती ह, भोषधियोँ को

English

Whoever for his armour takes an amulet of the Srāktya tree, Like the Sun risen up to heaven, quells witchcraft with superior might.

अध्याय ८

श्लोक 6.21

प॒वी॒न॒सात् त॑ङ्ग॒ल्वा॒३च्छाय॑कादु॒त नग्न॑कात्।प्र॒जायै॒ पत्ये॑ त्वा पि॒ङ्गः परि॑ पातु किमी॒दिनः॑

pavīnasāt taṅgalvā3cchāyakāduta nagnakāt| prajāyai patye tvā piṅgaḥ pari pātu kimīdinaḥ

हिन्दी अर्थ

को निदेश देता प्रतीत होता है, कि यक्ष्मरोग की सब भोषधियां, समय पर, पुनः पुनः नवीन पेदा होने वाली, अर्थात् प्रतिवषं नई पदा होने वाली, (ध्रुवाः) स्थिर परिणाम पैदा करने वाली, (सहस्रनाम्नीः विविघ नामों वाली (भेषजीः) म्रोषधियां हैँ वे, (आभृताः सन्तु) आहूताः सन्तु, लाई जाठरागिि को प्रदीप्त करने वाली ओषधियां । (२) अग्नि दारा भस्ममें. का०द८। सू० ७ प्रथवेवेद-माष्य २६७ व्यषन्तु = पि ऋषी गतौ (तुदादिः), विगत करे । दुरितम् दुर् (बुरे कमा द्वारा) +इतम् (प्राप्त) । रोगोंका मुल कारण है, पाप । यथ.

English

With Amulet of Srāktya wood, as with a thoughtful Rishi’s aid, In every fight have I prevailed; I smite the foes and Rākshasas. All witchcraft of Angirases,”all witchcraft wrought by Asuras,

अध्याय ८

श्लोक 6.22

द्व्याऽस्याच्चतुर॒क्षात् पञ्चपदादनङ्गु॒रेः ।वृन्ता॑द॒भि प्र॒सर्प॑तः॒ परि॑ पाहि वरीवृ॒तात्

dvyā'syāccaturakṣāt pañcapadādanaṅgureḥ | vṛntādabhi prasarpataḥ pari pāhi varīvṛtāt

हिन्दी अर्थ

विरहित करने वाली, (उग्राः) उद्गणं बलशाली, (याः) जो ( विषदूषणीः) विषापहारी, (प्रथो) ओौर (बलासनाशनीः) शलेष अर्थात् कफरोग का दूर करने वाली हँ, (ताः) वे (ओषधीः) ओषधियां (इह) यहां अर्थात् मेरे विवरुणाः = वरुण के पाशो का वणेन; देखो रथवं० (४।१६। १-६) ; श्रथवा वरुण है जल, श्रतः जलीय रोगों से रहिन करने वाली ओषधियां । जलोदर रोग जलीय है । जलप्राय प्रदेशों में होने वालि रोग भी जनीय है। “बलास” है कफ तथा कफोत्पन्न रोग । कफ बलास है, बल को क्षीण करता है, बल +-असु क्षेपणे (दिवादिः) (भपक्रीताः) खरीदी गर्द, (सहीयसीः) बलशालिनी या रोगों का पराभव करने वाली, (अभिष्टुताः) मन्त्रो में स्तुत हुई. (याः) जो (वीरुधः) विरोहण करने वाली लताएं आदि ओषधियां है, वे (अस्मिन् ग्रामे) इस की (त्रायन्ताम्) पालना तथा रक्षा करें

English

All witchcraft self-originate, and all that others have prepared, May these depart to both remotest spaces, past ninety ample water-floods.

अध्याय ८

श्लोक 6.23

यआ॒मं मां॒सम॒दन्ति॒ पौरु॑षेयं च॒ ये क्र॒विः ।गर्भा॒न् खाद॑न्ति केश॒वास्तानि॒तो ना॑शयामसि

yaāmaṃ māṃsamadanti pauruṣeyaṃ ca ye kraviḥ | garbhān khādanti keśavāstānito nāśayāmasi

हिन्दी अर्थ

९६० ग्रथववेद-भाष्य । । का०ठ। सु० ७ का० ८1 सू०७। अथवेवेद-भाष्य २९६ । (अभिशस्तिपाः) तथा रोगजन्य दसा से रक्षा करता है। (अमीवाः) करे । अमोवाः=ग्रम रोगे (चुरादिः) । । (प्रासाम्, वीरुधाम्) इन विरोहणशील लता आदि का (मूलम्, मधू-

English

May the Gods bind the Charm on him for armour, Indra, and Vishnu, Savitar Rudra, Agni, Prajāpati, sublimest Parameshlhin, Virāj, Vaisvānara, and all the Rishis.

अध्याय ८

श्लोक 6.24

ये सूर्या॑त् परि॒सर्प॑न्ति स्नु॒षेव॒ श्वशु॑रा॒दधि॑ ।ब॒जश्च॒ तेषां॑ पि॒ङ्गश्च॒ हृद॒येऽधि॒ नि वि॑ध्यताम्

ye sūryāt parisarpanti snuṣeva śvaśurādadhi | bajaśca teṣāṃ piṅgaśca hṛdaye'dhi ni vidhyatām

हिन्दी अर्थ

मन्त्र मे घृत, अन्न, तथा गोदुग्ध को अमृतभोजन कहा है । इन में (ऋ० €।४६।४) इति पयसः'' (निरुक्त २।२।५) । सभी भोषधियो के सेवन, मधुर परिणामी होता है, अतः इनका वणेन मधुमत्-रूप में हुआ है । । हजारो पत्तो वाली, या सहस्रविधि से पालने वाली, (मा) मुभे (मृत्योः) मृत्थु से, (अंहसः) ओर मृत्यु के कारणभूत पप से (मूजञ्चन्तु) छृडा दं । ( पु पालने) हजारो का पालन करने वाली । मन्त्र द्वारा यह योतित होता है किं ओषध-सेवन द्वारा पापकर्मो मे प्रवृत्ति का भी शमन होता है

English

Thou art the chief of all the plants, even as a bull among the beasts. A tiger of the beasts of prey. Him whom we sought for have we found, him lying near in wait

अध्याय ८

श्लोक 6.25

पिङ्ग॒ रक्ष॒ जाय॑मानं॒ मा पुमां॑सं॒ स्त्रियं॑ क्रन्।आ॒ण्डादो॒ गर्भा॒न्मा द॑भ॒न् बाध॑स्वे॒तः कि॑मी॒दिनः॑

piṅga rakṣa jāyamānaṃ mā pumāṃsaṃ striyaṃ kran| āṇḍādo garbhānmā dabhan bādhasvetaḥ kimīdinaḥ

हिन्दी अर्थ

आयल पौधे को मणि इस लिये कहा है कि बद्धकोष्ठता कन्ज के लिये कांप जाते है रोग; (इव) जैसे (सिहस्य स्तनथोः) ।षह् कौ गजना से वन्य भय से (विजन्ते)कांप जाते ह! (गवाम् पृरूषाणाम् ) गौग्रों भौर पूरुषो का ओर तेज नदियों से पार हो जाते है, वैसे यक्ष्म आदि रोग वीरुधो द्वारा शारीरिक नस-नाडियों से पार हो जति हँ (देखो श्रथवे० ८।५।९ ) । चानः) मुक्त हुई (ओषधयः) है प्नोषथियो (भूमिम्) ५ भूमि को(म्रभिलक्ष्य) लक्षित कर (संतन्वतीः) फेलती हई (हत) तुम श्रामो, (यासाम्) जिनका

English

for us. A tiger verily is he, he is a lion, and a bull, Subduer of his foes is he, the man who wears this Amulet.

अध्याय ८

श्लोक 6.26

अ॒प्र॒जा॒स्त्वं मार्त॑वत्स॒माद् रोद॑म॒घमा॑व॒यम्।वृ॒क्षादि॑व॒ स्रजं॑ कृ॒त्वाप्रि॑ये॒ प्रति॑ मुञ्च॒ तत्

aprajāstvaṃ mārtavatsamād rodamaghamāvayam| vṛkṣādiva srajaṃ kṛtvāpriye prati muñca tat

हिन्दी अर्थ

कि (राजा) अध्यक्ष (वनस्पतिः) वनो का पालक है, रक्षक है । किवनोंकी रक्षा करे, ओर पथिव अग्निस इन्हौ बचाए । 1 है विद्युत् ओर सूयं । इन से पाथिव अग्नि पैदा होती है, अतः पाथिव अनि वेषवानर. है । इस सम्बन्ध में देखो निरुक्त (७।६।२१ से ७। ६।२३) 1 वन- व महावृक्ष । 1 अध्यक्ष की दृष्टिसे कहा है कि “वनानां पतये नमः" (याः) जो (आङ्किरसीः) “शरीर श्रौर गङ्घोमें 4 ङ्गम प्राणरूपी रसकी उत्पादिका" ( मोषीः) मोषधियां (पवंतेषु, समेषु, च) पवतो मौर समतलों मे (रोहन्ति) प्रादुर्भूत होती हैँ (ताः) वे ओषधियां जोकि (पयस्वतीः) रसवाली ह (नः) हमारे (हृदे) हृदयो के लिये (शिवा) कल्याणकारिणी १. जात्येकवचन ॥ भ्रमिप्राय है राष्ट के सब वनों का पति।

English

No mortal beings slay him, no Gāndharvas, no Apsarases; O’er all the regions he is king, the man who wears this Amulet.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Atharva Veda — Chapter 8
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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