Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
8
अध्याय 8 / 20

Kanda 8

काण्ड 8

292 श्लोकभाग 2/2 · श्लोक 7.1–10.16WhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ144 श्लोक

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अध्याय ८

श्लोक 7.1

ओषधयः।१-२८ अथर्वा।भैषज्यं, आयुष्यं, ओषधयः।अनुष्टुप्, २ उपरिष्टाद् भुरिग्बृहती, ३ पुरउष्णिक्, ४ पञ्चपदा परानुष्टुबतिजगती, ५-६, १०, २५ पथ्यापङ्क्तिः ( ६ विराड् गर्भा भुरिक्) ९ द्विपदार्ची भुरिगनुष्टुप्, १२ पञ्चपदा विराडतिशक्वरी, १४ उपरिष्टान्निचृद् बृहती, २६ निचृत्, २८ भुरिक्।या ब॒भ्रवो॒ याश्च॑ शु॒क्रा रोहि॑णीरु॒त पृश्न॑यः ।असि॑क्नीः कृ॒ष्णा ओष॑धीः॒ सर्वा॑ अ॒च्छाव॑दामसि

oṣadhayaḥ| 1-28 atharvā| bhaiṣajyaṃ, āyuṣyaṃ, oṣadhayaḥ| anuṣṭup, 2 upariṣṭād bhurigbṛhatī, 3 purauṣṇik, 4 pañcapadā parānuṣṭubatijagatī, 5-6, 10, 25 pathyāpaṅktiḥ ( 6 virāḍ garbhā bhurik) 9 dvipadārcī bhuriganuṣṭup, 12 pañcapadā virāḍatiśakvarī, 14 upariṣṭānnicṛd bṛhatī, 26 nicṛt, 28 bhurik| yā babhravo yāśca śukrā rohiṇīruta pṛśnayaḥ | asiknīḥ kṛṣṇā oṣadhīḥ sarvā acchāvadāmasi

हिन्दी अर्थ

(१०) लोकलोकान्तर धासी देव तथा मनुभ्य भादि (२१) । (११) देवरथ, उस के भवयव (२२ ॥॥। (१२) संवत्सररथ, उस के भवयव (२९) । यथा हनाम सेनां अमित्राणां सहस्रशः ॥१॥ (मन्थिता) मथन करने वाला, (शक्रः) शव्तिशाली (पुरंदरः) पुरो तथा

English

For his long life, to last a hundred autumns, that to full age his days may be extended. Lord of the clan who brings, us bliss, fiend-slayer, queller of the foe,

अध्याय ८

श्लोक 7.2

त्राय॑न्तामि॒मं पुरु॑षं॒ यक्ष्मा॑द् दे॒वेषि॑ता॒दधि॑ ।यासां॒ द्यौष्पि॒ता पृ॑थि॒वी मा॒ता स॑मु॒द्रो मूलं॑ वी॒रुधां॑ ब॒भूव॑

trāyantāmimaṃ puruṣaṃ yakṣmād deveṣitādadhi | yāsāṃ dyauṣpitā pṛthivī mātā samudro mūlaṃ vīrudhāṃ babhūva

हिन्दी अर्थ

कर सकते ओर न बुजुगं ही । बहुरूपियो को प्रौर गायक-गायिकाभओं को १. गान्धवंवेद सामवेद का उपवेद है, जिसमे गायन विद्य' का वर्णन है २. एसे भ्रन्य बहुरूपिए जो करि गुप्तरूप से सप॑कृत्य कर सके । सवेथा निराकरण के लिये उग्रप्रयोग वेदानुमोदित है । मवश्च पृरिनबाहुश्च श्वं सेनाममूं तम् ॥१७॥

English

Karumas, These with thine odour, O thou Plant, drive far away to every side. Kukundhas and Kukūrabhas who dress themselves in hides and skins,

अध्याय ८

श्लोक 7.3

आपो॒ अग्रं दि॒व्या ओष॑धयः ।तास्ते॒ यक्ष्म॑मेन॒स्य॑१मङ्गा॑दङ्गादनीनशन्

āpo agraṃ divyā oṣadhayaḥ | tāste yakṣmamenasya1maṅgādaṅgādanīnaśan

हिन्दी अर्थ

लोहित ररिमयो हारा “अवतनोमि” इन दो रदिमयों के प्रयोग द्वारा शत्ुपक् को मूलसा देना होता है, तब ब्रपने घनुषों कौ डोरियां ढीली कर देनौ होती ह, क्योंकि शतु रहे ही नहीं । नील भौर लोहित लाल रशिया, रश्म- ॥18 ( १५।११६-८) । “स्वाहा” का वेदानुमत निवेचन = सु+अ।+-हा (त्यागे) काण्ड ८ अनुवाक ४ सूक्त ८ समाप्त । ॥ परमेष्वर की उपासना (६) र ॥ (६) कश्यप-परमेश्वर क ६ =) (श जिज्ञासा (४) । दक्षन कद करते है, कई नहीं (६) ।

English

The yellow Plant with mighty bow shall pierce him even to the heart. Those who kill infants unawares, and near the new-made mothers lie, Let Pinga chase the amorous Gandharvas as wind chases cloud.

अध्याय ८

श्लोक 7.4

प्र॒स्तृ॒ण॒ती स्त॒म्बिनी॒रेक॑शुङ्गाः प्रतन्व॒तीरोष॑धी॒रा व॑दामि ।अं॒शु॒मतीः॑ का॒ण्डिनी॒र्या विशा॑खा॒ ह्वया॑मि ते वी॒रुधो॑ वैश्वदे॒वीरु॒ग्राः पु॑रुष॒जीव॑नीः

prastṛṇatī stambinīrekaśuṅgāḥ pratanvatīroṣadhīrā vadāmi | aṃśumatīḥ kāṇḍinīryā viśākhā hvayāmi te vīrudho vaiśvadevīrugrāḥ puruṣajīvanīḥ

हिन्दी अर्थ

(६०) उषाग्मो मे पारमेए्वरी-माता चमकती है, (११) । 1 (११) प्रतिदिन कौ दो उषाणएं प्रातः कालीन तथा सायंकालीन (१२) ॥ (१२) तीन शक्तियों ओर तीन घर्मो के काय (१३) । (१३) यज्ञरूपी पुरुष के स्वरूप के ४ घटक (१४ ) 1 (१६) सप्तगृघ्राः के स्वरूप (१ ८) । (१७) छन्दां ओर स्तोमो का वणन (१६, २०) । (१६) गोदुग्ष के अधिकारी (२४) । (२०) एकं है गौ, एक है ऋषि, एक है यक्ष, एकं है ऋतु (२६) । । २६० श्रथवेवेद-भाष्य का०८।सू० ६ का० ८ । सु० भथरववेद-भाष्य २६१ के सम्बन्ध में पृछठाहै कि वह किस पृथिवी सेपेदा हु । पृथिवी त्रिविधा । ऋक र, जलभाग, स्थलभाग ओर पवंतभाग । इस दृष्टि से कहा है करि "चन्द्रमा" ऊ

English

Let it maintain the genial seed: let the laid embryo rest secure. Let both strong Healers, to be worn within the girdle, guard the babe.

अध्याय ८

श्लोक 7.5

यद् वः॒ सहः॑ सहमाना वी॒र्यं॑१यच्च॑ वो॒ बल॑म्।तेने॒मम॒स्माद् यक्ष्मा॒त् पुरु॑षं मुञ्चतौषधी॒रथो॑ कृणोमि भेष॒जम्

yad vaḥ sahaḥ sahamānā vīryaṃ1yacca vo balam| tenemamasmād yakṣmāt puruṣaṃ muñcatauṣadhīratho kṛṇomi bheṣajam

हिन्दी अर्थ

वत्सो विराजं: सछिलादुहैतां तो त्व पृच्छामि कतरेण दुग्धा ॥१॥ लोकात्) किस लोक से, तथा (कतमस्याः° पृथिव्याः) किस पृथिवी से। कि (कतरेण) दोमेसेकिसने (दुग्धा) विराट् दोही थी। उपादान कारण का । सूयं ओर चन्द्रमा प्रकृति रूपी उपादान कारणसे उत्पच्च हृए । “कतमः” प्रकृति का पूवे-दिशा' का भाग था, जोकि अधः"

English

From the Kimīdin, for thy lord and children, Pinga shield thee well, From Sāyaka, and Nagnaka, Tangalva, and Pavīnasa. From the five-footed, fingerless, from the four-eyed, the double- faced,

अध्याय ८

श्लोक 7.6

जी॒व॒लां न॑घारि॒षां जी॑व॒न्तीमोष॑धीम॒हम्।अ॒रु॒न्ध॒तीमु॒न्नय॑न्तीं पु॒ष्पां मधु॑मतीमि॒ह हु॑वे॒ऽस्मा अ॑रि॒ष्टता॑तये

jīvalāṃ naghāriṣāṃ jīvantīmoṣadhīmaham| arundhatīmunnayantīṃ puṣpāṃ madhumatīmiha huve'smā ariṣṭatātaye

हिन्दी अर्थ

हए । इस दिशा को पूवं श्रं" कहा है, अथवं० (४।२।६) । प्रकृति के मोर घुमते है, २९५४०1८ कर रहे है (कुतः) किंस उपादान कारणसे (तौ) वेदो (जातौ) पदा हुए, ह, अतः पृथिवी से पैदा हुभा कहा है, जसे कि प्रह, सूर्य की परिक्रमा करते रौर सूर्यं से पैदा हए हैँ । सम्भवतः जहां समूद्रजल है उस स्थल से चनमा पेदा हृगरा हो । सूं ओर चन्द्रमा “विराट् नाम॒ वाली प्रकृति से पदा हुए ये, इस लिये इन्हे “विराजः वत्सौ" कहा है ये दोनो 'सलिलात्” “सति उदित हुए ये । तथा परमेश्वर मौर जीव इन दो मंसे “कतरेण! अर्थात्

English

From the Close-creeper, from the Worm, from the Quick-roller guard her well. Those who eat flesh uncooked, and those who eat the bleeding flesh of men,

अध्याय ८

श्लोक 7.7

इ॒हा य॑न्तु॒ प्रचे॑तसो मे॒दिनी॒र्वच॑सो॒ मम॑ ।यथे॒मं पा॒रया॑मसि॒ पुरु॑षं दुरि॒तादधि॑

ihā yantu pracetaso medinīrvacaso mama | yathemaṃ pārayāmasi puruṣaṃ duritādadhi

हिन्दी अर्थ

हुए । जीवात्मा इस दोहन में निमित्त कारण थे, भोगापवगेदृष्टि से । (योनिम्) घर को (त्रिभुजम्) तीन भृजागों वाला (कृत्वा) कर के (शयानः) उस में शयन करते हए (यः) जिस ने (महित्वा) निज महिमा किया, गर्जना युक्त क्रिया, ग्रौर जौ (कामदः विराजः) कामना का (वत्सः) वत्सरूप है, या उसमे बसा हूर है (सः) उस परमेष्वरने (गुहा)

English

Feeders on babes unborn, long-haired, far from this place we banish these. Shy slinkers from the Sun, as slinks a woman from her husband’s sire, Deep down into the heart of these let Baja and let Pinga pierce.

अध्याय ८

श्लोक 7.8

अ॒ग्नेर्घा॒सो अ॒पां गर्भो॒ या रोह॑न्ति॒ पुन॑र्णवाः ।ध्रु॒वाः स॒हस्र॑नाम्नीर्भेष॒जीः स॒न्त्वाभृ॑ताः

agnerghāso apāṃ garbho yā rohanti punarṇavāḥ | dhruvāḥ sahasranāmnīrbheṣajīḥ santvābhṛtāḥ

हिन्दी अर्थ

लोक-लोकान्तरों को (चक्रे) उत्पन्न किया है। लावा ही हिमालय के उत्त्थानरूपमं प्रकट हुभ्राहौ। योनिः गृहनाम (निषं० ३)४ ) । त्रिमुजयोनिः = प्रकृति, बद्धजीव, कर रहार, ओर शयन करता हृता इनमे व्यवस्था कर रहा है । गौ से दूष भिलता है उसके वत्स के कारण । संसाररूपी विराट् से सुखसम्पत्तिरूपी दुग्ध मिलता है परभेश्वररूपी वत्स के कारण । प्रकृति सेजबर संसार पदा (वियुनक्ति) तीन वाणियों के साथ विक्चेषतया नियुक्त करता हैः सम्ब करता है, (एनत्) इस चौथे वाक्यरूप वाणी को (विपश्चित्) मेघावी

English

Pinga, preserve the babe at birth, make not the boy a female child. Let not Egg-eaters mar the germs: drive the Kimidins far away.

अध्याय ८

श्लोक 7.9

अ॒वको॑ल्बा उ॒दका॑त्मान॒ ओष॑धयः ।व्यृऽषन्तु दुरि॒तं ती॑क्ष्णशृ॒ङ्ग्यः

avakolbā udakātmāna oṣadhayaḥ | vyṛ'ṣantu duritaṃ tīkṣṇaśṛṅgyaḥ

हिन्दी अर्थ

बरहा सम्बद्ध है । दो बार कथन वृढतासूवक है।। बार कथन दुद़तासूचक है । २. “ग्रीणि बृहन्ति” दारा क्, यजुः साम को सूचित कियादहै। ये तीन मिल कर “श्रयवंवेद" से बड़ं हँ । भ्रथवेवेद के मन्त्र लगभग ६००० (६ हजार ) 1 शेष तीनों के लगभग १४००० मन्त्र ह 1 तथा सर्वंसाघारण के जीवनं के लिये ज्ञान, कमं प्रत्येक मनुष्य भ्रधिकारी नहीं। ३. भरथवेवेद को “वाचम्” कहा है । स कथन से शेष तीन वेद भी “वाक् ' रूप सूचित होते है। “वाक्” “संहिता” रूप दोती है, पदरूप नहीं । इस से सूचित । किया है करि परमेदवर से प्राप्त वेद “संहिता रूप मेये। इनका घटन पदोँद्ारा

English

Sterility, and infants’ death, and weeping that announceth woe, Dear! lay them on the fiend as thou wouldst pluck a garland from a tree. A charm to restore a sick man to health

अध्याय ८

श्लोक 7.10

उ॒न्मु॒ञ्चन्ती॑र्विवरु॒णा उ॒ग्रा या वि॑ष॒दूष॑णीः ।अथो॑ बलास॒नाश॑नीः कृत्या॒दूष॑णीश्च॒ यास्ता इ॒हा य॒न्त्वोष॑धीः

unmuñcantīrvivaruṇā ugrā yā viṣadūṣaṇīḥ | atho balāsanāśanīḥ kṛtyādūṣaṇīśca yāstā ihā yantvoṣadhīḥ

हिन्दी अर्थ

(उपध्मानी) जलती हुई तथा शब्द करती हुई (वुतिरज्जुः) दुगंन्षित शतु (हृत्सु) हृदयो मेँ (भयम्, भ्रादधताम्) भय धारण करे सेनाध्यक्ष ¦ (अमून्) उन शतु सेनिकों को (निः शृणीहि) निःशेषतया कुचल डाल, (खदिर) हैखा जाने वाले ! सेनाध्यक्ष (अमून्) उन्हे (ग्रजिरम्) शीघ्रतासे (खाद) खाजा। (ताजद््भेगः इव) टूटने वाले के6८। सूु० ८ भथववेद-माष्य २७७ भंग के सदश (भज्यन्ताम्) वे भग्न हो जांय (वधकः) वध करने वाला त्याग कर देने वाले अर्थात् मङगुर। क १.४. परुषानमून् धरूषाहः कणोत हन्त्वेनान् वधको वभः ।

English

May he, the conqueror, ne’er subdued, may Indra bind the Charm on thee, Bull, Soma-drinker, he who gives us peace.

अध्याय ८

श्लोक 7.11

अ॒प॒क्री॒ताः सही॑यसीर्वी॒रुधो॒ या अ॒भिष्टु॑ताः ।त्राय॑न्ताम॒स्मिन् ग्रामे॒ गामश्वं॒ पुरु॑षं प॒शुम्

apakrītāḥ sahīyasīrvīrudho yā abhiṣṭutāḥ | trāyantāmasmin grāme gāmaśvaṃ puruṣaṃ paśum

हिन्दी अर्थ

कठोर शब्दों मे , सश्राट् (कृणोतु) प्राहुत करे, (वधकः) वव करते अन्तरि जारमासीज्जालदुण्डा दिको महीः । तेनांभिधाय दम्यंनां शक्रः सेनापर्पावपत् ॥५॥ (महीः दिशः) महती दिशो के सदृश महान् (जालदण्डाः) जाल. के दण्डे, ये । (तेन) उस जाल द्वारा (अभिधाय) बाध कर, (शक्रः) शव्ितिशाली अवपत्) पृथक् कर छिक्न-भिघ्र कर दिया । . ५

English

May he protect thee round about, by night and day on every, side. A charm to exercise evil spirits who beset women

अध्याय ८

श्लोक 7.12

मधु॑मन्मू॑लं म॑धुमद॑ग्रमासाम्म॑धुमन्म॑ध्यं वीरु॑धां बभूव ।मधु॑मत् प॒र्णं मधु॑म॒त् पुष्प॑मासां॒ मधोः॒ संभक्ता अ॒मृत॑स्य भ॒क्षो घृ॒तमन्नं॑ दुह्रतां॒ गोपु॑रोगवम्

madhumanmūlaṃ madhumadagramāsāmmadhumanmadhyaṃ vīrudhāṃ babhūva | madhumat parṇaṃ madhumat puṣpamāsāṃ madhoḥ saṃbhaktā amṛtasya bhakṣo ghṛtamannaṃ duhratāṃ gopurogavam

हिन्दी अर्थ

यह अन्तरिक्ष में होने वाला युद्धं है । वतमान में ब॑हुचचित "ऽथा फ ' है, जिस का कि निर्देश मन्त्र में हुआ है । इससे भी बड़ा युद्ध “लोक-लोकः- यदधो मे नरसंहारी आयुधो का प्रयोग॒वदिक नहीं, जसे कि मन्तो की लिये कहा है किं यहीं विमानो द्वारा लडने वले शतरुसेनिकों को, सम्राट् चन) कोई भी (न मुच्यातै) न मुक्त हो सके, चछूट सके । उन्जू=

English

Let neither fiend of evil name, Alinsa, Vatsapa, desire Thy pair of husband-wooers which thy mother cleansed when, thou wast born. Palala, Anupalala, Sarku, Koka, Malimlucha, Palijaka Vavri- vāsas and Asresha, Rikshagriva

अध्याय ८

श्लोक 7.13

याव॑तीः किय॑तीश्चे॒माः पृ॑थि॒व्यामध्योष॑धीः ।ता मा॑ सहस्रप॒र्ण्योऽ मृ॒त्योर्मु॑ञ्च॒न्त्वंह॑सः

yāvatīḥ kiyatīścemāḥ pṛthivyāmadhyoṣadhīḥ | tā mā sahasraparṇyo' mṛtyormuñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

२७८ श्रथवेवेद-भाष्य का०ष८ । सू० जाल (वृहत्) बड़ा है । (तेन) उस जाल द्वारा (शक्रः) शक्तिशाली सेना- ॥ (सहम्) हजार, (अयुतम्) १० हजार (न्यवदम्) तथा लाखों संनिकों को, (सेनया) सेना द्वारा (जघान) मार दिया । अयं छोको जाकंपासीच्छक्रस्यं महतो महान् । १. जिसे साग्राज्य फे राजा, सामन्त तथा प्रजाएं मेदि देते है ।

English

and Pramilin. Approach not, come not hitherward: creep not thou in-between her thighs.

अध्याय ८

श्लोक 7.14

वैया॑घ्रो म॒णिर्वी॒रुधां॒ त्राय॑मानोऽभिशस्ति॒पाः ।अमी॑वाः॒ सर्वा॒ रक्षां॒स्यप॑ ह॒न्त्वधि॑ दू॒रम॒स्मत्

vaiyāghro maṇirvīrudhāṃ trāyamāno'bhiśastipāḥ | amīvāḥ sarvā rakṣāṃsyapa hantvadhi dūramasmat

हिन्दी अर्थ

हरा है । तामसास्तर का वर्णेन यथा, (अथवे० ३।२।५,६) । यथा के प्रयोग का विधान किया है, जिस से तमस् के आवरण से आवृत होकर शत्रुसेनिक कमं से रहित हो जाय, भौर परस्पर एक-दूसरे को पहचान न हो जाना, (च) ओौर (भनपवाचना) जिसका किं भ्रपाकरण कहा नहींजा उन सब शत्रुओं को (अभिदधामि) भ बाधिता हूं, जकड़ देता हूं । श्रवसाद- निराशा, निरुत्साहं । अनपवाचना -= मन् + भप (अपाकरण)

English

I set, to guard her, Baja, that which chases him of evil name. Durnāmā and Sunāmā both are eager to converse with her. We drive away Arāyas: let Sunāmā seek the women-folk,

अध्याय ८

श्लोक 7.15

सिं॒हस्ये॑व स्त॒नथोः॒ सं वि॑जन्ते॒ऽग्नेरि॑व विजन्त॒ आभृ॑ताभ्यः ।गवां॒ यक्ष्मः॒ पुरु॑षाणां वी॒रुद्भि॒रति॑नुत्तो ना॒व्याऽएतु स्रो॒त्याः

siṃhasyeva stanathoḥ saṃ vijante'gneriva vijanta ābhṛtābhyaḥ | gavāṃ yakṣmaḥ puruṣāṇāṃ vīrudbhiratinutto nāvyā'etu srotyāḥ

हिन्दी अर्थ

मृत्यु के (ये) जो (अघलाः) हत्यारे (दूताः) दूत ह (तेभ्यः) उन के प्रति (मृत्युदूताः) है मृत्यु के दरूतो ! (अमून्) उन शतृप्रो को (नयत) ले जाओ, (यमदूताः) है यम के दूतो ! (अपोम्भत) इन कौ सम्प्णं शक्तियों तियो द्वारा प्रजा का पालन करने वाला नागरिक अध्यक्ष, तथा “शवं है मारने वाला, ओौर यम है नियन्ता। यथा “सएव. मृत्युः सोऽमृतम्” उठा कर (ओजसा) गोज के साथ (यन्तु) चले, (रद्राः) खर (एकम्) एक को, (वसवः) वसु (एकम्) एक को उठा कर भ्रौज के साथ चलं

English

The black and hairy Asura, and Stambaja and Tundika, Arāyas from this girl we drive, from bosom, waist, and parts below.

अध्याय ८

श्लोक 7.16

मु॒मु॒चा॒ना ओष॑धयो॒ऽग्नेर्वै॑श्वान॒रादधि॑ ।भूमिं॑ संतन्व॒तीरि॑त॒ यासां॒ राजा॒ वन॒स्पतिः॑

mumucānā oṣadhayo'gnervaiśvānarādadhi | bhūmiṃ saṃtanvatīrita yāsāṃ rājā vanaspatiḥ

हिन्दी अर्थ

शक्तियां । इन शक्तियों को भवलम्ब देने वाले हँ सध्य, खर, वसु मौर आदित्य । ये मनुष्य है । साध्याः है महात्मगण (यजु° ३१।९ ), यथा महात्माश्रों मौर पठितो के सहयोग से उत्साहित हो कर प्रजावगे भी युद निमित्त भपने-भ्राप को न्यौछावर कर देता है । शत्रुओं को, ऊपर की ओर से (उन्जन्तः ) ऋजु करते हुए, (जोजसा) भोज से (यन्तु) गति करे । गौर (्रङ्किरसः) भ्रङ्गारों के सदृश ूलसाने वाने महती सेना को (घ्नन्तः) मारते हए (यन्तु) गति करं ।

English

Sniffer, and Feeler, him who eats raw flesh, and him who licks his lips, Arāyas with the tails of dogs, the yellow Baja hath destroyed. Whoever, in thy brother’s shape or father’s comes to thee in sleep,

अध्याय ८

श्लोक 7.17

या रोह॑न्त्याङ्गिर॒सीः पर्व॑तेषु स॒मेषु॑ च ।ता नः॒ पय॑स्वतीः शि॒वा ओष॑धीः सन्तु॒ शं हृ॒दे

yā rohantyāṅgirasīḥ parvateṣu sameṣu ca | tā naḥ payasvatīḥ śivā oṣadhīḥ santu śaṃ hṛde

हिन्दी अर्थ

शत्रुसेना, जब अन्तक में स्थित हुई, निज सेना पर प्रहार करती हो, तो उस सेना से भौर ऊपर जा कर, निज सैनिक, उन की प्रहरण शवित को ऋजु करदे, ठीली करदे, ताकि उन की प्रहरण-शविति कम हो जाय । ओर यदि शतरसेना पृथिवीस्थ हुई प्रहार करती हो तो भङ्खारो के सदृश विश्वे देवाः =- विष्वे (सब) +देवाः (विजिगीषवः) “दिव् कीडा- दविपास्चतुष्वादिष्णामि यथा सेनाममूं हन॑न् ॥१४॥ (उत) ठथा (वीरुधः) लताओं को, (द्विपात्, चतुष्पाद्) तथा दो-पायों , म्रोर चौपायोंको (इष्णामि) मै बार-बार भेजता हु (यथा) ताक्रिवे (अमूम्, सेनाम्) उस सेना का (हनन्) हनन करे ।

English

Let Baja rout and chase them like eunuchs with woman’s head- dress on. Whoever steals to thee asleep or thinks to harm thee when awake,—

अध्याय ८

श्लोक 7.18

याश्चा॒हं वेद॑ वी॒रुधो॒ याश्च॒ पश्या॑मि॒ चक्षु॑षा ।अज्ञा॑ता जानी॒मश्च॒ या यासु॑ वि॒द्म च॒ संभृ॑तम्

yāścāhaṃ veda vīrudho yāśca paśyāmi cakṣuṣā | ajñātā jānīmaśca yā yāsu vidma ca saṃbhṛtam

हिन्दी अर्थ

समय-समय पर भजते रहना चाहिए ताक्रि वन्दीकृत सेनिकों मे इनके ४ अमुष्यां हन्त॒ सेनाया हदं करटं सहस्रशः ॥१६॥ (इमे) ये (मृत्युपाशाः) मृत्यु के फन्दे (उप्ताः) बीजरूप में बोएरहै, भभिप्राय यह है कि युद्ध मे पकड़ गये सैनिकों को, वृक्षौ के फलो, र

English

These hath it banished, as the Sun travelling round drives shade away. Whoever causeth her to lose her child or bear untimely fruit,— Destroy him, O thou Plant, destroy the slippery fiend who lusts for her.

अध्याय ८

श्लोक 7.19

सर्वाः॑ सम॒ग्रा ओष॑धी॒र्बोध॑न्तु॒ वच॑सो॒ मम॑ ।यथे॒मं पा॒रया॑मसि॒ पुरु॑षं दुरि॒तादधि॑

sarvāḥ samagrā oṣadhīrbodhantu vacaso mama | yathemaṃ pārayāmasi puruṣaṃ duritādadhi

हिन्दी अर्थ

ओर लताएं तो पूवेतः स्थित है, भओषधियों तथा मांसभक्षियों को बार-बार उदेश्य है हनन", अतः हननोपायों का मवलम्बन कहा है । ृष्टानदृष्टानिष्णामि यथा सेनाममूं हनन् ॥१५॥ बार-बार भेजता हु, (यथा) ताकि वे (अमू सेनाम्) उन बन्दीकृत सैनिकों को (हनन्) मार डाले । गायको श्रौर गायिकाओं का प्रेषण सैनिकों के मनो विनोद के लिये है।

English

Those who at evening, with the bray of asses, dance around the house, Kukshilas, and Kusfilas, and Kakubhas, Srimas,

अध्याय ८

श्लोक 7.20

अ॒श्व॒त्थो द॒र्भो वी॒रुधां॒ सोमो॒ राजा॒मृतं॑ ह॒विः ।व्री॒हिर्यव॑श्च भेष॒जौ दि॒वस्पु॒त्रावम॑र्त्यौ

aśvattho darbho vīrudhāṃ somo rājāmṛtaṃ haviḥ | vrīhiryavaśca bheṣajau divasputrāvamartyau

हिन्दी अर्थ

(सहसखरहः) हजारों शत्रुसेनिकों का हनन करने वाली है । (शर्वं) है शवे ! (अमूम् सेनाम्) उस शत्रु सेना को (हतम्) मारो। “मं” का अभिप्राय है “घमेदुघा" नामिका गौ से दुहा दूध । मन्तरमें सनिकाहूति । शंवं है सेनाधिपति, भव है नागरिक अध्प्रक्ष, इसे पुर्निबाहू कहा है । पृश्नि है नाना वणँ से रञ्जित पृथिवी । पृथिवी के रक्षाथं, बाहुश्रों वाला “भव” है । पृिनिबाहु मे मध्यपदलोपी समास है । पृश्निः दो जालो द्वारा।येदो्है (१) समिद्धः घर्मः, ओर (२) हौमः(मन्तर १७) ।

English

Who dance about like eunuchs, who raise a wild clamour in the wood, all these we banish far 130

अध्याय ८

श्लोक 7.21

उज्जि॑हीध्वे स्त॒नय॑त्यभि॒क्रन्द॑त्योषधीः ।य॒दा वः॑ पृश्निमातरः प॒र्जन्यो॒ रेत॒साव॑ति

ujjihīdhve stanayatyabhikrandatyoṣadhīḥ | yadā vaḥ pṛśnimātaraḥ parjanyo retasāvati

हिन्दी अर्थ

वेद की विधि द्वाय (पराजिताः) पराजित , हुए तुम (रसत) त्रास प्र्थात् दन में से (कश्चन) कोई भी (मा मोचि) मृत्युसेन टे । साम्राज्य की समग्र सेना का पति । सोमः सेनानायक । मरुतः मारने में ये (इषुम्, प्रतिघाम्) शरसंघान (मा एकन्) न॒ कर सकं । (अथ) ध (बहु विभ्यताम् ) बहुत भयभीत हए (एषाम्) इन के (ममंणि) ममेस्थल मे (इषवः) हमारे इषु वाण (घ्नन्तु) प्रहार करं ।

English

away. All those who cannot bear the Sun who warms us yonder from the sky, Arāyas with the smell of goats, malodorous, with bloody mouths, the Makakas we drive afar.

अध्याय ८

श्लोक 7.22

तस्या॒मृत॑स्ये॒मं बलं॒ पुरु॑षं पाययामसि ।अथो॑ कृणोमि भेष॒जं यथा स॑च्छ॒तहा॑यनः

tasyāmṛtasyemaṃ balaṃ puruṣaṃ pāyayāmasi | atho kṛṇomi bheṣajaṃ yathā sacchatahāyanaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रतिधाम् इषुम् इषु का धनुष् पर चढाना । सं कोक्चतामेनान् चावापृथिवी समन्तरिक्षं सह हैवतांमिः। (चावापृथिवी) चुलोक श्रौर प्ृथिवीलोक (सम्) मिलकर (एनान्) प्राणियों तथा मनुष्यों मरौर मुक्तात्माभं देवताओं का भी निवास है।ये सब परस्पर मिलकर सांसारिक घटनाओं से प्रभावित होते रहते है । श्रतः इन द्वारा कोसना कोई अस्वामाविक बात नहीं । समग्र संसार एक “ये सब भूगोल, लोक ओौर इनमे मनुष्यादि प्रजा भी रहती है । जेसे दयलोक ओर पृथिवी लोक के निवासियो द्वारा कोसना उपपन्न हो सकता है ।

English

All those who on their shoulders bear a head of monstrous magnitude, Who pierce the women’s loins with pain,—those demons, Indra drive away!

अध्याय ८

श्लोक 7.23

व॒रा॒हो वे॑द वी॒रुधं॑ नकु॒लो वे॑द भेष॒जीम्।स॒र्पा ग॑न्ध॒र्वा या वि॒दुस्ता अ॒स्मा अव॑से हुवे

varāho veda vīrudhaṃ nakulo veda bheṣajīm| sarpā gandharvā yā vidustā asmā avase huve

हिन्दी अर्थ

(चतघखः दिशः) चार दिशां हँ (भश्वतयंः) चार खच्चरियां (देव+ रथस्य) परमेश्वर देव के रथ की, (पुरोडाशाः ) पुरोडाश हैँ (शफाः) खुर, यलोक ओर पृथिवीलोक है (पक्षसी) रथ के दो पक्ष, पाश्वं, (ऋतवः) जगत् में रथ का, तथा जगत् के घटकों मेँ रथ ऊ घटकों का आरोप

English

Those, bearing horns upon their hands, who first of all approach the brides; Standing in ovens, laughing loud, those who in bushes flash forth light, all these we banish hence away.

अध्याय ८

श्लोक 7.24

याः सु॑प॒र्णा आ॑ङ्गिर॒सीर्दि॒व्या या र॒घतो॑ वि॒दुः ।वयां॑सि हं॒सा या वि॒दुर्याश्च॒ सर्वे॑ पत॒त्रिणः॑ ।मृ॒गा या वि॒दुरोष॑धी॒स्ता अ॒स्मा अव॑से हुवे

yāḥ suparṇā āṅgirasīrdivyā yā raghato viduḥ | vayāṃsi haṃsā yā viduryāśca sarve patatriṇaḥ | mṛgā yā viduroṣadhīstā asmā avase huve

हिन्दी अर्थ

आरोप द्वारा दर्शाया है कि जगत् गतिमान् है, तथा इसमे देव।धिदेव पर- मेश्वर रममाण हुआ स्थित है । इसलिये जगत् को “देवरथ” कहा है। पुरोडाण यज्ञिय हँ जो कि गोल होते है, अतः इन्दं भश्वतरियों के शफाः रचना करता तथ। संचालन करता है । जंमे पारमेश्वरी वेदव।कं जगत की रक्षिका है, वैसे रथ के पहियों पर चढ़ा लोहचक्र पहियों की रक्षा करता है । पुरोडाशाः शफाः अन्तदेशाः-=क्िकराः (मृत्य) द्यावापृथिवी =पक्षसी(रथ के दो पाश्वं) के लोह चक्र)

English

Those who have retroverted toes, and heels and faces in the front, Khalajas, Sakadhūmajas, Urundas, all the Matmatas, impotent

अध्याय ८

श्लोक 7.25

याव॑तीना॒मोष॑धीनां॒ गा॑वः प्रा॒श्नन्त्य॒घ्न्या याव॑तीनामजा॒वयः॑ ।ताव॑ती॒स्तुभ्य॒मोष॑धीः॒ शर्म॑ यच्छ॒न्त्वाभृ॑ताः

yāvatīnāmoṣadhīnāṃ gāvaḥ prāśnantyaghnyā yāvatīnāmajāvayaḥ | tāvatīstubhyamoṣadhīḥ śarma yacchantvābhṛtāḥ

हिन्दी अर्थ

(संवत्सरो रथः) संवत्सर है रथ, (परिवत्सरो रथोपस्थ: परिवत रथ में बैठने का स्थान, (विराट् ईषा) विराट् हैरथ का र जो व (४०1६९) के साथ लगा रहता है, (अ्रग्निः रथमुखमू्) अग्नि है रथ का मुख (चन्द्रमाः) चन्धमा है (सारथिः) सारथि । + संवत्सरः वष, पृथिवी का एक भ्रमण, सूर्यं की परिक्रमा के रूप मे । संवत्सर का वणेन यथा-- “एक चक्रवाला रथ" है सूर्यमण्डल, इस रथ मेँ ७ रर्मियां जुती हुई है,

English

Kumbhamushkas, these, Drive thou, O Brāhmanaspati, far from this girl with vigilance. Sightless and with distorted eyes, impotent. woman less be they.

अध्याय ८

श्लोक 7.26

याव॑तीषु मनु॒ष्याऽ भेष॒जं भि॒षजो॑ वि॒दुः ।ताव॑तीर्वि॒श्वभे॑षजी॒रा भ॑रामि॒ त्वाम॒भि

yāvatīṣu manuṣyā' bheṣajaṃ bhiṣajo viduḥ | tāvatīrviśvabheṣajīrā bharāmi tvāmabhi

हिन्दी अर्थ

ओौर हेमन्त । यह संवत्सर चक्र जीणं नहीं होता ओौर न इसके. चलने वाला भुवन ्रधिष्ठित है" (निरुक्त ४।४।२७) । रप्मियां ऽल्7णा॥ में दिखाई देती है, यथा, २८५ (लाल) 0121186 14120 (नील के पौधे से निकाले रंग जेसा) ऽ1०€। (बगनी रंगवाली) । संवत्सरः न्=पुथिवी की एक बार सूयं की परिक्रमा का काल । परिवत्सरः

English

O Healing Plant, cast each away who, not her husband, would approach this woman wedded to her lord.

अध्याय ८

श्लोक 7.27

पुष्प॑वतीः प्र॒सूम॑तीः फ॒लिनी॑रफ॒ला उ॒त।सं॒मा॒तर॑ इव दुह्राम॒स्मा अ॑रि॒ष्टता॑तये

puṣpavatīḥ prasūmatīḥ phalinīraphalā uta| saṃmātara iva duhrāmasmā ariṣṭatātaye

हिन्दी अर्थ

१. रथ स्वय निमित नहीं होता । इस की सत्ता, दस के निर्माति को सुचित करती है । संवत्सर कोरथ कहु कर सके निर्माता परमेदवर सूचित किया है। अ अथववेद-माष्य का० त । सुनः (६), ऋग्वेदादि वेदों (७), अश्वो, गौओं, अजावयः (८ ): का क्रमशः ; रथ का मूख है । अर्थात् इस रथ के अग्रभागमें जुतौ हई प्रतीत होती है

English

The Bristly-haired, the Maniac-haired, the Biter, and the Groper-fiend, The Creeper-near, the Copper-hued, the Snouty, and the Saluda,

अध्याय ८

श्लोक 7.28

उत् त्वा॑हार्षं॒ पञ्च॑शला॒दथो॒ दश॑शलादु॒त।अथो॑ य॒मस्य॒ पड्वी॑शा॒द् विश्व॑स्माद् देवकिल्बि॒षात्

ut tvāhārṣaṃ pañcaśalādatho daśaśalāduta| atho yamasya paḍvīśād viśvasmād devakilbiṣāt

हिन्दी अर्थ

लगती है । इसलिए ग्रग्नि संवत्सर-रथ के मुख मे जुती हुई है--यद कथनं स्थिति परस्पर विरुद्ध दिशाभों मे होती है । सूयं पूवं मे उदित होता ओौर , पूणं चन्द्रमा उसका सारथि रथ के दक्षिण में स्थित होगा ही । (इतः) इधर से (जय) त्रु जीत (इतः) इधर से (विजय) विजय को कीडोरियां ढीली करदेताहूं।॥ ॥

English

With foot and heel kick over, as a hasty cow her milking-pan. If one should touch thy coming babe or kill thine infant newly born,

अध्याय ८

श्लोक 8.1

शत्रुपराजयः।भृग्वङ्गिराः।इन्द्रः, वनस्पतिः, परसेनाहननं च।अनुष्टुप्, २, ८-१०, २३ उपरिष्टाद्बृहती, ३ विराड् बृहती, ४ बृहती पुरस्तात्प्रस्तारपङ्क्तिः, ६ आस्तारपङ्क्तिः, ७ विपरीतपादलक्ष्मा चतुष्पदातिजगती, ११ पथ्याबृहती, १२ भुरिक्, १९ पुरस्ताद्विराड् बृहती, २० पुरस्तान्निचृद्बृहती, २१ त्रिष्टुप्, २२ चतुष्पदा शक्वरी, २४ त्र्यवसाना त्रिष्टुबुष्णिग्गर्भा पराशक्वरी पञ्चपदा जगती।इन्द्रो॑ मन्थतु॒ मन्थि॑ता श॒क्रः शूरः॑ पुरंद॒रः ।यथा॒ हना॑म॒ सेना॑ अ॒मित्रा॑णां सहस्र॒शः

śatruparājayaḥ| bhṛgvaṅgirāḥ| indraḥ, vanaspatiḥ, parasenāhananaṃ ca| anuṣṭup, 2, 8-10, 23 upariṣṭādbṛhatī, 3 virāḍ bṛhatī, 4 bṛhatī purastātprastārapaṅktiḥ, 6 āstārapaṅktiḥ, 7 viparītapādalakṣmā catuṣpadātijagatī, 11 pathyābṛhatī, 12 bhurik, 19 purastādvirāḍ bṛhatī, 20 purastānnicṛdbṛhatī, 21 triṣṭup, 22 catuṣpadā śakvarī, 24 tryavasānā triṣṭubuṣṇiggarbhā parāśakvarī pañcapadā jagatī| indro manthatu manthitā śakraḥ śūraḥ puraṃdaraḥ | yathā hanāma senā amitrāṇāṃ sahasraśaḥ

हिन्दी अर्थ

के स्थान में “चत्वारि पठित है । चतुथे का हुआ है । मन्त्रे वेदौ को “वाक् कटा हः परतः परमेदवर वाक्यरूप सें, वाणीरूप म, वेद प्रकट ईए पदखूप मे नदीं -यह भावना वस्तुतः ठीक है । अथववेद के वर्णन अतिगूढ श्रौर गहन रह। 1 र वहतः परि सामानि षष्ठात् पञ्चाधि निषिता ।

English

The tawny-coloured, and the pale, the variegated and the red, The dusky-tinted, and the black,—all Plants we summon hither- ward.

अध्याय ८

श्लोक 8.2

पू॒ति॒रज्जुरु॑प॒ध्मानी॒ पूतिं॒ सेनां॑ कृणोत्व॒मूम्।धू॒मम॒ग्निं प॑रा॒दृश्या॒मित्रा॑ हृ॒त्स्वा द॑धतां भ॒यम्

pūtirajjurupadhmānī pūtiṃ senāṃ kṛṇotvamūm| dhūmamagniṃ parādṛśyāmitrā hṛtsvā dadhatāṃ bhayam

हिन्दी अर्थ

संचरेते) संचार करती हैँ । (सूयेपत्नी) ये दोनों सूयं की पलिर्या, (प्रजा- नती) निजमागं को जानती हुई, (ॐतमती ) मानो कण्डा ली हु, (अजरे) चलोक मे उड़ने वाली पक्षीरूप दो उषाः प्रातःकालीन ,उषा तथा सायं उषाएं । उषा-काल ध्यान का काल है 1 इन कालों मे परमेश्वर का ध्यान मानो दो पंख है पक्षीके दोही पंख होते ह । उपासना के मन्त्र नहीं कहे,

English

Let purchased Plants of mightier power, Plants that are praised for excellence. Here in this village safely keep cattle and horses, man and beast. Sweet is their root, sweet are these Plants’ top branches, sweet also is their intermediate

अध्याय ८

श्लोक 8.3

अ॒मून॑श्वत्थ॒ निः शृ॑णीहि॒ खादा॒मून् ख॑दिराजि॒रम्।ता॒जद्भङ्ग॑ इव भजन्तां॒ हन्त्वे॑नान् वध॑को व॒धैः

amūnaśvattha niḥ śṛṇīhi khādāmūn khadirājiram| tājadbhaṅga iva bhajantāṃ hantvenān vadhako vadhaiḥ

हिन्दी अर्थ

ऋतुप्रो की प्रत्येक ऋतु मे, पृथिवीके प्रदेशों मे उषाओं की चमकोंमेभी पंचविध भेद हो जाता है। तथा ऋतुभेद के कारण पृथिवी मे पञ्चविध दोह ्र्थात् उत्पत्तियां भी होती रहती हैँ । इन पांच दिशाओं. कौ रूपी मूर्घा से पाच दिशाएं निकल कर “एकलोक”' पृथिवी मे व्याप्त हो रही है 1 मन्त्र मे सब वणेन कवितामेंहै। इसलिये वेद को कान्य कहते) यथा "देवस्य पश्य काव्यम्” (अथवं० १०।८।३२; €।१५।९) । तथा पर- मेश्वर को कवि कहा है ) यथा “केविमेनीषी परिभरः स्वयम्भूः” (यजु°

English

These Plants of the Angirases which grow on mountains and on plains. The Plants I know myself, the plants that with mine eye I look upon, Plants yet unknown, and those we know, wherein we find that power is stored,

अध्याय ८

श्लोक 8.4

प॒रु॒षान॒मून् प॑रुषा॒ह्वः कृ॑णोतु॒ हन्त्वे॑ना॒न् वध॑को व॒धैः ।क्षि॒प्रं श॒र इ॑व भजन्तां बृहज्जा॒लेन॒ संदि॑ताः

paruṣānamūn paruṣāhvaḥ kṛṇotu hantvenān vadhako vadhaiḥ | kṣipraṃ śara iva bhajantāṃ bṛhajjālena saṃditāḥ

हिन्दी अर्थ

४०।८) 1 वेदों मे कल्पनाएं केवल कल्पनाएं ही नहीं अपितु इन कल्पनाभों मे यथार्थता अनुस्यूत रहती है । नि पड जाता भूता परथम॒जतेस्थ॒ समानि षडहं व॑हन्ति करते हैँ । (षड्योगम्) ६ बैल के योगवाले हल द्वारा कयि (सीरम्) कृषिकमं के (अनु) अनुरूप (सामसाम) प्रत्येक योग के साथ एक-एक साम होता है । (षट्) ६ (यावापृथिवी) द्यौ ओर पृथिवी है (ग्राहः) एषा कहते ह ओर (षट् उर्वीः) ६ विस्तृत दिशाएं है । (ग्रथवें० १५।४३,५,८,११) इन ६ सामों के अतिरिक्त श्यैत ओर नौधस सामों काभी वणेन प्रथवेवेद में हुम है ।

English

Let all the congregated Plants attend and mark mine utterance, That we may rescue this man here and save him from severe distress.

अध्याय ८

श्लोक 8.5

अ॒न्तरि॑क्षं॒ जाल॑मासीज्जालद॒ण्डा दिशो॑ म॒हीः ।तेना॑भि॒धाय॒ दस्यू॑नां श॒क्रः सेना॒मपा॑वपत्

antarikṣaṃ jālamāsījjāladaṇḍā diśo mahīḥ | tenābhidhāya dasyūnāṃ śakraḥ senāmapāvapat

हिन्दी अर्थ

“सीरम्” सीर का श्रथं है हल, जिस द्वारा चेत जोता जाता है। हल के साथ ६ बेलों को जोतना हास्यास्पदहै। गीता के ्रनुस।र (१३।१-२) येही ६ बेल रह, जोकि बुद्धिरूपी हल के आगे जुते हए ँ। इस आध्यात्मिक कृषिकमं कौ सफलता के लिये जीवन में भक्ति भरे ६ सामगान भी होने चाहिए, ्रजञानेन्ियों श्रौर मन कौ शुद्धि के लिये । इन ६ री शुद्धि हो जाने - १ पदपाठ मे, जाता। भूता। प्रथमजा--देे पाठर, जोक्रि नपुसकलिङ्खौी प्रतीत होते ह । ्रतः भूता = भूतानि । जाता जातानि । प्रथमजा = प्रथम जात्तानि । की स्थिति भी वेदानुमत है (यजु° ३१।१६) ।

English

Asvattha, Darbha, King of Plants, is Soma, deathless sacrifice Barley and Rice are healing balms, the sons of Heaven who never die. Lift yourselves up, ye Healing Plants, loud is the thunder’s crash and roar.

अध्याय ८

श्लोक 8.6

बृ॒हद्धि जालं॑ बृह॒तः श॒क्रस्य॑ वा॒जिनी॑वतः ।तेन॒ शत्रू॑न॒भि सर्वा॒न् न्युऽब्ज॒ यथा॒ न मुच्या॑तै कत॒मश्च॒नैषा॑म्

bṛhaddhi jālaṃ bṛhataḥ śakrasya vājinīvataḥ | tena śatrūnabhi sarvān nyu'bja yathā na mucyātai katamaścanaiṣām

हिन्दी अर्थ

पृथिवी भी त्रिविधा है, समुद्र, समतल, तथा पवेत । अथवा पृथिवी का उपर का पाथिव स्तर इस के नीचे जलीय स्तर, जिस कौ सूचन। कृपजलों सूचना ज्वालामुखी पवतो तथा गमेचश्मो द्वारा मिलती है । इस प्रकार दौः ओर पृथिवी मिलकर षट् है। नाकः स्थान विशेष अतीत होते है जोकि चौके श्रद्धरूप हैं स्वः--सुख को, भ्रौर नाकः सब दु-लों से रहित मोक्ष को“ सूचित करते है ६ उष्ण मास है--यह् (कवयः) मेधावी लोग (आहुः) कहते हँ, (यतमः) जो (अतिरिक्तः) इन से अतिरिक्त (ऋतुम्) ऋतु है उसे (नः ब्रूत) हमं

English

When with full flow Parjanya, ye Children of Prisni! blesseth; you. We give the essence of that stream of nectar of this man to drink:

अध्याय ८

श्लोक 8.7

बृ॒हत् ते॒ जालं॑ बृह॒त इ॑न्द्र शूर सहस्रा॒र्घस्य॑ श॒तवी॑र्यस्य ।तेन॑ श॒तं स॒हस्र॑म॒युतं॒ न्यऽर्बुदं ज॒घान॑ श॒क्रो दस्यू॑नामभि॒धाय॒ सेन॑या

bṛhat te jālaṃ bṛhata indra śūra sahasrārghasya śatavīryasya | tena śataṃ sahasramayutaṃ nya'rbudaṃ jaghāna śakro dasyūnāmabhidhāya senayā

हिन्दी अर्थ

स।र (सप्त दीक्षाः) ७ दीक्षां है। “कवयः"" के दो अभिगप्रायर्है, (१) “कविः मेधाविनाम" (निघं० ३।१५) ; (२) “कवते गतिकर्मा” (निषं० २।१४) । सुपर्णाः = सुपतना पक्षी कहा है । ये रषमियां मानो दूरस्थ, आदित्य से, शीघ्र उड़कर, पृथिवी पर श्रा पटहूंचती हैँ । ये सातर्हैँ। इन सातोँका मिश्रणहै भादित्यकी

English

So I prepare a remedy that he may live a hundred years. Well doth the wild boar know a Plant, the mungoose knows the Healing Herb.

अध्याय ८

श्लोक 8.8

अ॒यं लो॒को जाल॑मासीच्छ॒क्रस्य॑ मह॒तो म॒हान्।तेना॒हमि॑न्द्रजा॒लेना॒मूंस्तम॑सा॒भि द॑धामि॒ सर्वा॑न्

ayaṃ loko jālamāsīcchakrasya mahato mahān| tenāhamindrajālenāmūṃstamasābhi dadhāmi sarvān

हिन्दी अर्थ

णीत-उष्ण-१२ मासो से अतिरिक्त यदि कोईऋतुदहैतो उसे को, क्योंकि १२ मासही ६ ऋतुं मे विभक्त हँ । उत्तर के अभाव में मन्त्र (१८) मे स्वयं कह दिया कि “ऋतवो ह सप्त” कि निश्चय से ऋतुएं 3 ह । (होमाः सप्त) होम ७ है, (ह्) निश्चय से (समिधः सप्त) समिधाए ७ है, (मधूनि सप्त) मधु ७ है, (ह्) निश्चय से (ऋतवः सप्त) ऋतुएं ७ है । यह् (वयम्) हम ने (शुश्रुम) सूना है। मनुष्यों द्वारा इन ७ सप्तकं की अभिकक्षा होती है, अभिलाषा होतीहै

English

I call, to aid this man, the Plants which Serpents and Gandhar- vas know. Plants of Angirases which hawks, celestial Plants which eagles. know;

अध्याय ८

श्लोक 8.9

से॒दिरु॒ग्रा व्यृऽद्धि॒रार्ति॑श्चानपवाच॒ना।श्रम॑स्त॒न्द्रीश्च॒ मोह॑श्च॒ तैर॒मून॒भि द॑धामि॒ सर्वा॑न्

sedirugrā vyṛ'ddhirārtiścānapavācanā| śramastandrīśca mohaśca tairamūnabhi dadhāmi sarvān

हिन्दी अर्थ

ही प्राप्त होती है । इस लिये कष्ठमयी समिधाग्रों को भी समिधा कहते हैँ । रूपी समिधाश्रोंके लिये भी होता दहै) भथवा “त्रिःसप्त समिधः कृताः." (यजु० ३१।१५) में कथित २१ समिधाओंमेंसे किन्हीं ७ समिधाभोंका “यो वे कशायाः सप्तमधूनि वेद मघुमान् भवति । इस मन्त्र मे सप्तमधूनि का वणेन हुआ है ।

English

Plants known to swans and lesser fowl, Plants known to all the birds that fly. Plants that are known to sylvan beasts,—I call them all to aid this man. The multitude of herbs whereon the Cows whom none may slaughter feed, all that are food

अध्याय ८

श्लोक 8.10

मृ॒त्यवे॒ऽमून् प्र य॑च्छामि मृत्युपा॒शैर॒मी सि॒ताः ।मृ॒त्योर्ये अ॑घ॒ला दू॒तास्तेभ्य॑ एना॒न् प्रति॑ नयामि ब॒द्ध्वा

mṛtyave'mūn pra yacchāmi mṛtyupāśairamī sitāḥ | mṛtyorye aghalā dūtāstebhya enān prati nayāmi baddhvā

हिन्दी अर्थ

(बृहतः, षष्ठात्" परि अधि) ५ बृहत् पादीं सहित छठे बृहत् पाद से अर्थात् ६ बृहत् पादो से (पञ्च सामानि) ५ साम सामगान 1( निमिता = से (निमितम्) निर्मित होता है । (बृहती) बृहती छन्द (कुतः) किससे (सिता) निमित होता है ?। ह सम्भवतः ५ बृहत्-पादो द्वारा ४ सामगान निर्मित होते हा, ओर ६ बृहत् पादो दवाय भवां बड़ा सामगान निमित होता ही, दूसलिये षष्ठात् का पथकं व्णंन हृभा हो । बृहत् पाद् बृहती छन्द दारा निमित होता है बृहती वेदः” 1 एक ही छन्दोमयी रचना को विविध नाना स्वरो मेगायाजा सकता है । साम है स्वर । दस लिये सामवेद के मन्त्रोको हजार सामो बाह हनार वतो भं गाप ना चन क न हजार स्वरो में गाएजा तकने का निर्देश हा है । छान्दोग्य उप

English

This man let them deliver from Consumption which the Gods have sent. The father of these Herbs was Heaven, their mother Earth, the Sea their root.

अध्याय ८

श्लोक 8.11

नय॑ता॒मून् मृ॑त्युदूता॒ यम॑दूता॒ अपो॑म्भत ।प॒रः॒स॒ह॒स्रा ह॑न्यन्तां तृ॒णेढ्वे॑नान् म॒त्यं भ॒वस्य॑

nayatāmūn mṛtyudūtā yamadūtā apombhata | paraḥsahasrā hanyantāṃ tṛṇeḍhvenān matyaṃ bhavasya

हिन्दी अर्थ

या कण्डिका ४) । अथर्ववेद मेँ सामों के नाम प्रतिपादित है यथा, (बृहती) वृहती छन्द॒ (मात्रायाः परि) मावा से; (मात्रा) गौर मात्रा (मातुः श्रधि) निज परिमाण से (निर्मिता) निर्मित हुई है! (माया) बृहती छन्द मात्रामों को मापसंख्यासे भी निमित होता है--यह मन्त दारा कहते हैँ । मात्रा का निर्माण भी निज परिमाण द्वारा निश्चित होता है। का निर्माण करने वाली “मातली प्रकट होती है । मातली=मा

English

The Waters are the best, and heavenly Plants. From every limb of thine have they removed Consumption caused by sin.

अध्याय ८

श्लोक 8.12

सा॒ध्या एकं॑ जालद॒ण्डमु॒द्यत्य॑ य॒न्त्योज॑सा ।रु॒द्रा एकं॒ वस॑व॒ एक॑मादि॒त्यैरेक॒ उद्य॑तः

sādhyā ekaṃ jāladaṇḍamudyatya yantyojasā | rudrā ekaṃ vasava ekamādityaireka udyataḥ

हिन्दी अर्थ

है उसके विघटनमें बाधक हो रहौ है। (ततः) उस (मुतः) दुरस्थ का०ष८। सूु० ध्रथवंवेद-भाष्य २६५ रूप मे चमक रही है । यौः यद्यपि वैश्वानर श्नग्निसे चमकती है" तो भी ओर तारे, न वियुते चमकतीं ; अग्नि पार्थिव अग्नि का तो कहना ही क्था, अपितु उस परमेश्वरके चमकते हीये सब चमक रहे है । उसको चमक द्वारा ही यहु सब कुछ चमक रहा है। परमेश्वर कौ यह दिव्य

English

I speak to Healing Herbs spreading, and bushy, to creepers, and to those whose sheath is single, I call for thee the fibrous and the reed-like, and branching.

अध्याय ८

श्लोक 8.13

विश्वे॑ दे॒वाः उ॒परि॑ष्टादु॒ब्जन्तो॑ य॒न्त्वोज॑सा ।मध्ये॑न॒ घ्नन्तो॑ यन्तु॒ सेना॒मङ्गि॑रसो म॒हीम्

viśve devāḥ upariṣṭādubjanto yantvojasā | madhyena ghnanto yantu senāmaṅgiraso mahīm

हिन्दी अर्थ

होता है। परमेश्वरीय कामन से जगत् जब पदा होतार, तो जगत् की ज्योति भी परमेश्वरीय कामना सेही प्रकट होती है। अतः परमेश्वर ज्योतिमय है, यह् समा जा सकता है । इस लिये परमेश्वर को “आदित्य- व्णेम्"' भी कहा है (यजु ° ३१।१८) । दिन है 1 तथा प्रलयकाल मे सत्यलोकरूपी ब्रह्म मे वापिस चले जाते ट । --पर्यक) है सवंद्रष्टः ॥ (दमे षट् ऋषयः) ये ६ ऋ जते सृष्टिरथ को (युयुकषे) जोता है, (च) ओौरतू ही ( योग्यम्) जुतनं हणः) ब्रह्म का (पितरं) पिता हैः = क र (1 सखियों के लिये (यतिघा जितने कि हम हैवि) ˆ

English

Plants, dear to the Visve Devas, powerful, giving life to men.

अध्याय ८

श्लोक 8.14

वन॒स्पती॑न् वानस्प॒त्यानोष॑धीरु॒त वी॒रुधः॑ ।द्वि॒पाच्चतु॑ष्पादिष्णामि॒ यथा॒ सेना॑म॒मूं हन॑न्

vanaspatīn vānaspatyānoṣadhīruta vīrudhaḥ | dvipāccatuṣpādiṣṇāmi yathā senāmamūṃ hanan

हिन्दी अर्थ

तिमोँ द्वारा विराट् से उत्पन्न । ४ । य . विराट को ब्रहम का पिता कहाद। सलः, ज्ञात होता है, अत सुपर्णा सयुजा सखाया ) । सखा होने के करण ६ ऋषि परमेश्वर से । ॥ व ज्ञान सम्बन्धी अभिलाषा वालेहो जाते है, रौर सवं अ सप्ति" कहा भी हि। यथा “सप्त ऋषयः प्रति प्माकाश मे व्याप्त है। । ९, + ¢ ४

English

The conquering strength, the power and might which ye, victo- rious Plants, possess, Therewith deliver this man here from this Consumption, O ye Plants: so I prepare the remedy.

अध्याय ८

श्लोक 8.15

ग॒न्ध॒र्वा॒प्स॒रसः॑ स॒र्पान् दे॒वान् पु॑ण्यज॒नान् पितॄ॒न्।दृ॒ष्टान॒दृष्टा॑निष्णामि॒ यथा॒ सेना॑म॒मूं हन॑न्

gandharvāpsarasaḥ sarpān devān puṇyajanān pitṝn| dṛṣṭānadṛṣṭāniṣṇāmi yathā senāmamūṃ hanan

हिन्दी अर्थ

काल मे जब परमेश्वर सृष्टि मे उपस्थित हो जाता है तब यज्ञकमें भी का प्रलय करना भौर प॑दाकरना परमेश्वर काव्रतदहै, इसी कौ प्रेरणासे परमेदवर की उपस्थिति श्रावश्यक है । वारे ॥ स देखते है, (त्वे) कई (न) नहीं (एनाम्) इसे (पश्यन्ति) का नहीं। यह् रूपवती है दहस केरूप को योगी तो देखते है, श्रयोगी नहीं देखते । प्राणेन = हेतौ तृतीया (अष्टा० २।३।२३) । विराज् = राजु

English

The living Plant that giveth life, that driveth malady away, Arundhatr, the rescuer, strengthening, rich a sweets I call, to free this man from scath and

अध्याय ८

श्लोक 8.16

इ॒म उ॒प्ता मृ॑त्युपा॒शा याना॒क्रम्य॒ न मु॒च्यसे॑ ।अ॒मुष्या॑ हन्तु॒ सेना॑या इ॒दं कूटं॑ सहस्र॒शः

ima uptā mṛtyupāśā yānākramya na mucyase | amuṣyā hantu senāyā idaṃ kūṭaṃ sahasraśaḥ

हिन्दी अर्थ

, (कः) कौन (विराजः) सुष्टि मे विशेषतया प्रदीप्त हुई प्रकृति के है, (कः) कौन (ऋतून्) ऋतुधरमोँ के कालों को, (क उ) मौर कोन इस प्रकृति के (क्रमान्) क्रमों को, तेथा (कतिधा) कितनी वार यह (विदु- को, तथा (कतिधा ) कितने प्रकार या कितनी (व्युष्टीः) यह् विविध उषा मे चमकी - इन सब को सम्पक् रूप मे जानता है ।

English

harm. Hitherward let the sapient come, the friendly sharers o f my speech. That we may give this man relief and raise him from his evil plight.

अध्याय ८

श्लोक 8.17

घ॒र्मः समि॑द्धो अ॒ग्निना॒यं होमः॑ सहस्र॒हः ।भ॒वश्च॒ पृश्नि॑बाहुश्च॒ शर्व॒ सेना॑म॒मूं ह॑तम्

gharmaḥ samiddho agnināyaṃ homaḥ sahasrahaḥ | bhavaśca pṛśnibāhuśca śarva senāmamūṃ hatam

हिन्दी अर्थ

परमेवर है उस का पति । परमेश्वर की कामना किरम सष्टिको रच् यह् है रेतस् वीयं जिस का किं आधान वह प्रकृति के गभं मे करताहै, गौर सृष्टि पैदा होती है । यथा “कामस्तदग्रे समवतंताधि मनसो रेतः प्रथमं ऋतुधमं है जिनके होते स्त्री गभधारण करती है। कल्पम् = जितने काल तक सृष्टि बनी रहती है उतना काल, जिसे कि ब्राह्मदिन कहते है जोकि १००० यर्गोकाकालहोताहै। माकाश, आकाश से वायु, वायु से षग्नि, अग्नि से भपः, आपः से पृथिवी पृथिवी से भोषधियां, ओषधियों से अन्न, अश्न से रेतस्, रेतस् से पुरुष” (तै० कतिघा = सृष्टि कितनी हई है,-इसे भी कौन जानता है ।

English

Germ of the Waters, Agni’s food, Plants ever growing fresh and new, Sure, healing, bearing thousand names, let them be all collected here.

अध्याय ८

श्लोक 8.18

मृ॒त्योराष॒मा प॑द्यन्तां॒ क्षुधं॑ से॒दिं व॒धं भ॒यम्।इन्द्र॑श्चाक्षुजा॒लाभ्यां॒ शर्व॒ सेना॑म॒मूं ह॑तम्

mṛtyorāṣamā padyantāṃ kṣudhaṃ sediṃ vadhaṃ bhayam| indraścākṣujālābhyāṃ śarva senāmamūṃ hatam

हिन्दी अर्थ

विदुगघान् के दो अथं द, (१) दुग से विशिष्ट होना, इसके द्वारा सृष्टिकी होता है । (२) दूसरा अथं है “दुग्धरदित' होना, यह् अवस्था प्रलयकाल धाम = घाम फे अर्थं हैँ नाम, स्थान, जन्म ओर तेज । यतः यह् उषा- कालों मे चमकी है, इसलिये धाम का अथे तेज कियादहै। उषाश्रों द्वाराभी सृष्टिकालों को सूचित करिया है । सुक्त मे विविध पहैलियों का कथन हुमा है जिनके सुलभाने मे मतभेद सम्भव है । (हयम्) यह परमेश्वर-माता (एव) ही (सा या) वह है जोकि (प्रथमा)

English

Let Plants whose soul is water, girt with Avakās, piercing with their sharp horns expel the malady. Strong, antidotes of poison, those releasers, free from Varuna,

अध्याय ८

श्लोक 8.19

परा॑जिताः॒ प्र त्र॑सतामित्रा नु॒त्ता धा॑वत॒ ब्रह्म॑णा ।बृह॒स्पति॑प्रनुत्तानां॒ मामीषां॑ मोचि कश्चन

parājitāḥ pra trasatāmitrā nuttā dhāvata brahmaṇā | bṛhaspatipranuttānāṃ māmīṣāṃ moci kaścana

हिन्दी अर्थ

ह (जिगाय) इस ने सब पर विजय पाई हुई है, जैसे कि (नवगत् जनित्री ) २३०० श्रथवेवेद-भाष्य कीा० ८1 सुर € वध् पतिगृह मे जा कर यदि सन्तानोत्यादन करती है तो वहं पतिगृह की वंशवृद्धि कर पतिगृह मे मान पाती है, यह् पतिगृह पर विजय पाना है। बन्ध्यावधू पतिगृह मे मान नहीं पाती । सूर्येपरनी सं च॑रतः प्रजानती केंतुमतीं अजरे भूरिरेतसा ॥१२॥

English

And those that drive away Catarrh, and those that frustrate magic arts, let all those Plants come hitherward.

अध्याय ८

श्लोक 8.20

अव॑ पद्यन्तामेषा॒मायु॑धानि॒ मा श॑कन् प्रति॒धामिषु॑म्।अथै॑षां ब॒हु बिभ्य॑ता॒मिष॑वः घ्नन्तु॒ मर्म॑णि

ava padyantāmeṣāmāyudhāni mā śakan pratidhāmiṣum| athaiṣāṃ bahu bibhyatāmiṣavaḥ ghnantu marmaṇi

हिन्दी अर्थ

अधिकःरी सभी मनुष्य नहीं होते । समीप बैठनेमेवेही सशक्त हो सकते ह जो क्रि निज चित्तवृत्तियों का निरोध कर सकते हँ । सवं साधारण इसमें निःणक्तं होते हैँ । अतः वे केवलः स्तुति ओर प्राथंना ही कर.सक्ते है समान यानि है चुलोक । इसी मे दोनों उषाएं विचरती हँ । "योनिः गृह नाम'' (निधं ६।४) । दोनों उषाणएं स्यं की पली ह 1 सूयक माशे-भागे का० ८ । सू० € प्रथवेवेद-भाष्य १५१ चलती है श्नौर सायंकाल की उष।एं अर्थात् लालिमाणए सूं के अस्त होने के समनन्तर यलोक में कुछ काल तक चमकती है । इन का केतु अर्धात् मण्डा सूयं ही प्रतीत होता है।ये भ्रजरा है। इन पर बृढ़ापा नहीं आता, ये सदा शक्तिमती होती दँ । जब से सृष्टिरचना हुई ॥ है तवसे चमकती रहगीं । अतः ये प्रजरा है । अनुसार (तिः) तीन शक्तियां (मा अगुः) भाई .हुद है, (वयः ) तीन को (जिन्वति) प्रीणित करती है, (एका) दूसरी एक (ऊर्जम्) बल ओर प्राण के दाता भन्न कोप्रीणितकरती है, (एका) तीसरी एक (देवमूनमम्)

English

portion; Sweet is their foliage, and sweet their blossom, combined with sweetness is their taste of

अध्याय ८

श्लोक 8.21

सं क्रो॑शतामेना॒न् द्यावा॑पृथि॒वी सम॒न्तरि॑क्षं स॒ह दे॒वता॑भिः ।मा ज्ञा॒तारं॒ मा प्र॑ति॒ष्ठां वि॑दन्त मि॒थो वि॑घ्ना॒ना उप॑ यन्तु मृ॒त्युम्

saṃ krośatāmenān dyāvāpṛthivī samantarikṣaṃ saha devatābhiḥ | mā jñātāraṃ mā pratiṣṭhāṃ vidanta mitho vighnānā upa yantu mṛtyum

हिन्दी अर्थ

राष्ट की (रक्षति) रक्नाकरती है। र जब समग्र संसार परमेश्वर के दर्शाए मागे पर चलता है, भौर मनुष्य तप्तं करती है, इतना उत्पादन कर . देती है कि कोई प्राणी अन्नाभावका अनुभव नहीं करता “ऊक् ˆ अघ्ननाम"' (निषं० २।७) । तथा वर्षा, पृथिवी; ३०२ अथर्ववेद-भाष्य का०प८्। सु°्श

English

Amrit: food, fatness let them yield, with kine preceding. These Plants that grow upon the earth, whate’er their number and their size, Let these with all their thousand leaves free me from Death and misery.

अध्याय ८

श्लोक 8.22

दिश॒श्चत॑स्रोऽश्वत॒र्यो देवर॒थस्य॑ पुरो॒डाशाः॑ श॒फा अन्तरि॑क्षमु॒द्धिः ।द्यावा॑पृथि॒वी पक्ष॑सी ऋ॒तवो॒ऽभीश॑वोऽन्तर्दे॒शाः किं॑क॒रा वाक् परि॑रथ्यम्

diśaścatasro'śvataryo devarathasya puroḍāśāḥ śaphā antarikṣamuddhiḥ | dyāvāpṛthivī pakṣasī ṛtavo'bhīśavo'ntardeśāḥ kiṃkarā vāk parirathyam

हिन्दी अर्थ

कापाक करने लगती है, किसौ के घर की पाथिव प्रम्नि अन्नाभाव के हए (ऋषयः) ऋषियों ने (भ्रग्नीषोमौ) मनिनि मौर सोम की (म्रदधः) (आसीत्) थी उस की भी परिपुष्ट की । तथा (यजमानाय स्वः अम- बरहदकी = परमेश्वर की स्तुति करने वाली महती ऋक् । रूप मे कल्पित किया है । जैसे अस्मदादि पुरुषों के शरीर दो पाव वाले

English

May the Plants’ Tiger-amulet, protective, guardian from the curse, Beat off the brood of demons, drive all maladies afar from us.

अध्याय ८

श्लोक 8.23

सं॒व॒त्स॒रो रथः॑ परिवत्स॒रो र॑थोप॒स्थो वि॒राडी॒षाग्नी र॑थमु॒खम्।इन्द्रः॑ सव्य॒ष्ठाश्च॒न्द्रमाः॒ सार॑थिः

saṃvatsaro rathaḥ parivatsaro rathopastho virāḍīṣāgnī rathamukham| indraḥ savyaṣṭhāścandramāḥ sārathiḥ

हिन्दी अर्थ

श्रौर सोमादि हव्यपदाथं । इन दो पाण्वोँक मेल से यज्ञपुरुष बनता है। तथा जैसे हमारे शरीरो की आत्माएं हँ, जीवात्माएं, वैसे यज्ञपुरुष कौ होता है (१) अग्नि; (२) सोमादि हव्यपदारथे; (३) यज्ञ मेँ पूजनीया वयुष्टियो के (अनु) अनुसार (पञ्चदोहाः) पञ्चविध दोह ह, पृथिवी में उत्त्तियां ई, ओर पञ्चविध नमनों के अनुसार (पञ्च ऋतवः) पांच ऋतुं है । (पञ्च दिशः) पांच दिशाएं (पञ्चदशेन) १५ कलाओं अभि) एक पुथिवीलोक की भोर है फली हृरद ।

English

Before the gathered Plants they fly and scatter, as though a lion’s roar or fire dismayed them. Expelled by Plants, let men’s and kine’s Consumption pass from us to the navigable rivers. Emancipated from the sway of Agni, of Vaisvānara, go, covering the earth, ye Plants whose

अध्याय ८

श्लोक 8.24

इ॒तो ज॑ये॒तो वि ज॑य॒ सं ज॑य॒ जय॒ स्वाहा॑ ।इ॒मे ज॑यन्तु॒ परा॒मी ज॑यन्तां॒ स्वाहै॒भ्यो दु॒राहा॒मीभ्यः॑ ।नी॒ल॒लो॒हि॒तेना॒मून॒भ्यव॑तनोमि

ito jayeto vi jaya saṃ jaya jaya svāhā | ime jayantu parāmī jayantāṃ svāhaibhyo durāhāmībhyaḥ | nīlalohitenāmūnabhyavatanomi

हिन्दी अर्थ

गक्ष पर ६६१ अंश का कोण बनाती हुई सूयं की परिक्रमा, घडी कौ सूर्यो कके उतल्टे क्रम में अर्थात् दाएं से बाद गोर करती है । ६दका कोण पृथिवी का एक “नमन” है । इस “नमन” के साथ पृथिवी के भिन्न-मिन्न भागोके २०४ अथवेवेद-भाष्य का० ८ । सूर ६ “नमन'' अर्थात् भकाव भी, भिन्न-भिन्न कालो मे, सूये के संमृख होते रहते है । इन द्विकिध नमनो के कारण ऋतुओं का निर्माण होता है। वेदानुसार शिशिर ऋतुग्रों मे सर्दी लगभग एक समान होने के कारण इनका पार- स्परिक भेद अनुभूत नहीं होता, अतः इन दः ऋतुओओं को एक ऋतु मानकर द्वारा दिशाओं कौ संख्या भी पांच कही है, पुवं, पटिचिम, उत्तर, दक्षिणं पूवं मे होता है) इस प्रकार चन्द्रमाभी दिशओंका ज्ञापकहै। दिनिमें

English

ruler is Vanaspati. May these be pleasant to our heart, auspicious, rich in store of milk,

अध्याय ८

श्लोक 9.1

विराट्।१-२६ अथर्वा।कश्यपः, सर्वे ऋषयः, छन्दांसी च, विराट्।त्रिष्टुप्, २ पङ्क्तिः, ३ आस्तारपङ्क्तिः, ४-५, २३, २५-२६ अनुष्टुप्, ८, ११-१२, २२ जगती, ९ भुरिक्, १४ चतुष्पदातिजगती।कुत॒स्तौ जा॒तौ क॑त॒मः सो अर्धः॒ कस्मा॑ल्लो॒कात् क॑त॒मस्याः॑ पृथि॒व्याः ।व॒त्सौ वि॒राजः॑ सलि॒लादुदै॑तां॒ तौ त्वा॑ पृछामि कत॒रेण॑ दु॒ग्धा

virāṭ| 1-26 atharvā| kaśyapaḥ, sarve ṛṣayaḥ, chandāṃsī ca, virāṭ| triṣṭup, 2 paṅktiḥ, 3 āstārapaṅktiḥ, 4-5, 23, 25-26 anuṣṭup, 8, 11-12, 22 jagatī, 9 bhurik, 14 catuṣpadātijagatī| kutastau jātau katamaḥ so ardhaḥ kasmāllokāt katamasyāḥ pṛthivyāḥ | vatsau virājaḥ salilādudaitāṃ tau tvā pṛchāmi katareṇa dugdhā

हिन्दी अर्थ

ओर शिशिर को एक मानकर । मन्त्र (१७) मे ६ ऋतुरएं अभिप्रत ह, हेमन्त है । सातवीं ऋतु "त्रयोदश मस" रूपहै, इसे मलमासमभौ क्तेर्हु। यया ३।८) । इस त्रयोदश मास को श्रधिकमास भी कहते ह । इसकी व्याख्याके कररहे रह, “परिभरतमायन्'" ये सव्रहैँ ७ गृध्राः। आदित्य की सप्तरर्मियों को द्विविध मानाहै।

English

for goats and sheep, 132

अध्याय ८

श्लोक 9.2

यो अक्र॑न्दयत् सलि॒लं म॑हि॒त्वा योनिं॑ कृ॒त्वा त्रि॒भुजं॒ शया॑नः ।व॒त्सः का॑म॒दुघो॑ वि॒राजः॒ स गुहा॑ चक्रे त॒न्वःऽ परा॒चैः

yo akrandayat salilaṃ mahitvā yoniṃ kṛtvā tribhujaṃ śayānaḥ | vatsaḥ kāmadugho virājaḥ sa guhā cakre tanvaḥ' parācaiḥ

हिन्दी अर्थ

(कः, नु) कौन है निस्वयसे (गौः) सौ, (कः) कौन है (एकः) एक (ऋषिः) ऋषि (किम्, उ क्या है निश्चय से (धाम) धाम, (काः) (एकवत्) एकवत्, (एकर्तुः) एक है ऋतु, (सः) वहु छतु (नु) निश्चय से (कतमः) ऋतुभों मे कौनसी है । ॑ एको गोरे एकऋषिरेकं धा्मैकेधाज्चिषंः । (एकः) एक (गौः) गौ है, (एकः) एक है (एक ऋषिः) एक ऋषि है (एकधा) एक ही प्रकार की (आशिषः) म्राशीर्वादोक्तियां हैँ । (पुथि-

English

Dasyus a hundred, thousand, myriad, hundred millions. This world so mighty was the net of Sakra, of the Mighty One: With this, the net of Indra, I envelop all those men with gloom.

अध्याय ८

श्लोक 9.3

यानि॒ त्रीणि॑ बृ॒हन्ति॑ येषां॑ चतु॒र्थं वि॑यु॒नक्ति॒ वाच॑म्।ब्र॒ह्मैन॑द् विद्या॒त् तप॑सा विप॒श्चिद् यस्मि॒न्नेकं॑ यु॒ज्यते॒ यस्मि॒न्नेक॑म्

yāni trīṇi bṛhanti yeṣāṃ caturthaṃ viyunakti vācam| brahmainad vidyāt tapasā vipaścid yasminnekaṃ yujyate yasminnekam

हिन्दी अर्थ

समपित किया है । मन्त्र के उत्तरार्धं मं सात पशुओं का वणेन हुआ है । कां वहन करते हुँ अतः पशु है। ६५ रलयोरभेदः, उलयोरभेदः । पदम् -=एकांश । तय्यार क्रिया पुरोडाश, आः.मा पुष्टे च पोषे चरत्रि देवानां सुमतौ स्पाम । ॥ि

English

The Gharma hath been warmed with fire: this Homa slays a thousand men. Let Bhava, Prisnibāhu, and Sarva destroy that armament. Their portion be the fire of Death, hunger, exhaustion, slaughter, fear.

अध्याय ८

श्लोक 9.4

बृ॒ह॒तः परि॒ सामा॑नि ष॒ष्ठात् पञ्चाधि॒ निर्मि॑ता ।बृ॒हद् बृ॑ह॒त्या निर्मि॑तं॒ कुतोऽधि॑ बृह॒ती मि॒ता

bṛhataḥ pari sāmāni ṣaṣṭhāt pañcādhi nirmitā | bṛhad bṛhatyā nirmitaṃ kuto'dhi bṛhatī mitā

हिन्दी अर्थ

३२० अथर्वेवेद-भाष्य का० ३ सू० १० तथा (पोषे च) पुत्रादि के परिपोषणमें (आ “स्थापय ) स्थापितं कर, (देवानाम्) दिव्य गुणो वाले सज्जनो की ( सुमतौ) सुमति मे (स्याम) हम ह, हम रहँ । (दवं) है यज्ञिय होम की कड्छी (पूर्णा) घृत आदिसे तदनन्तर (सुपूर्णा) यज्ञिय फल से पूणं हुई त् (आपत) हमारी ओर ओआ। रहता है जो कि अमावास्या के दिन पूर्णं होता है । इस दिन की रात्री को “रात्रि कहा है । यज्ञ का फल है पुष्टि, ष् मौर ऊजं । आयमगन्त्संवत्सरः पतिरेकाष्टके तव ।

English

With your entangling snares and nets, Sarva and Indra! slay that host.

अध्याय ८

श्लोक 9.5

बृ॒ह॒ती परि॑ मात्रा॑या मा॒तुर्मात्राधि॒ निर्मि॑ता ।मा॒या ह॑ जज्ञे मा॒याया॑ मा॒याया॒ मातली॒ परि॑

bṛhatī pari mātrāyā māturmātrādhi nirmitā | māyā ha jajñe māyāyā māyāyā mātalī pari

हिन्दी अर्थ

पततिः) तेरा पति (ग्रा गन्) भाया है। (सा) वहतु संवत्सर पतिके प्रभूत धघन-सम्पत् की अभिलाषा प्रकट कीहै। (ऋतून् आदि) ऋतुओं श्रादि को लक्षय करके (यजे) ओ यन्न करता के लिये (यजे) यज्ञ करता हूं ।

English

Fly, conquered, in alarm, ye foes, run driven by the spell away! Let not one man escape of those when routed by Brihaspati. Down fall their weapons on the ground: no strength be theirs to point a shaft:

अध्याय ८

श्लोक 9.6

वै॒श्वा॒न॒रस्य॑ प्रति॒मोपरि॒ द्यौर्याव॒द् रोद॑सी विबबा॒धे अ॒ग्निः ।ततः॑ ष॒ष्ठादामुतो॑ यन्ति॒ स्तोमा॒ उदि॒तो य॑न्त्य॒भि ष॒ष्ठमह्नः॑

vaiśvānarasya pratimopari dyauryāvad rodasī vibabādhe agniḥ | tataḥ ṣaṣṭhādāmuto yanti stomā udito yantyabhi ṣaṣṭhamahnaḥ

हिन्दी अर्थ

का० ३। सू० १० एकाष्टका-परिशिष्ट ३२९ परस्येक व्यित संकल्प करता है कि वह ऋतु आदि की शुद्धि ओर त्याग, तथा शिल्पकर्मो द्वारा वायु आदि में मल बढ़ता रहता है । अतः उन मे हुञा है । तभी हैनिक अशुद्धि रौर अस्वच्छता का निराकरण सम्भव है! ऋतुपतीन् = ऋतुर्न के पति है, प्रत्येक ऋतुकाल के नियामक सूयं

English

Then in their dreadful terror let their arrows wound their vital parts. Let Heaven and Earth roar out in wrath against them, and Air with all the Deities in concert,

अध्याय ८

श्लोक 9.7

षट् त्वा॑ पृछाम॒ ऋष॑यः कश्यपे॒मे त्वं हि यु॒क्तं यु॑यु॒क्षे योग्यं॑ च ।वि॒राज॑माहु॒र्ब्रह्म॑णः पि॒तरं॒ तां नो॒ वि धे॑हि यति॒धा सखि॑भ्यः

ṣaṭ tvā pṛchāma ṛṣayaḥ kaśyapeme tvaṃ hi yuktaṃ yuyukṣe yogyaṃ ca | virājamāhurbrahmaṇaḥ pitaraṃ tāṃ no vi dhehi yatidhā sakhibhyaḥ

हिन्दी अर्थ

आदि, या कतुओं के समूहरूप उत्तरायण तथा दक्षिणायन के काल । हायन = ““्वन्द्रो माता” (निरुक्त ११।१।६) , के “मा” का समास “सह के साथ हुमा है । इस प्रकार “समाः चानद्र-वषं । “सहस्य सः (अष्टा° ६१३। ७८) द्वारा सह को “स” भदेश हृुप्रा है । संवत्सरः सौरवषं । (यजे) मै यज्ञ करता हूं, (समे) समृद्धि के लिये । तथा (धात्रे) जगत् के घारक-पोषक (विधात्रे) विधाता भौर (भूतस्य) भरूत-मौतिक जगत् के (पतये) पति कौ प्रस्नता के लिये ्मयज्ञ करता हं । भादिके विकृतहो जाने प्रर रोगश्रादिकासंचार हौ जाताहै। यज्ञमें

English

Let them not find a surety or a refuge, but torn away go down to Death together. The mules of the Gods’ car are heaven’s four quarters; their hooves are sacred cakes, the air its body.

अध्याय ८

श्लोक 9.8

यां प्रच्यु॑ता॒मनु॑ य॒ज्ञाः प्र॒च्यव॑न्त उप॒तिष्ठ॑न्त उप॒तिष्ठ॑मानाम्।यस्या॑ व्र॒ते प्र॑स॒वे य॒क्षमेज॑ति॒ सा वि॒राडृषयः पर॒मे व्योऽमन्

yāṃ pracyutāmanu yajñāḥ pracyavanta upatiṣṭhanta upatiṣṭhamānām| yasyā vrate prasave yakṣamejati sā virāḍṛṣayaḥ parame vyo'man

हिन्दी अर्थ

हकिः चतुधिव होनी चहिये । यथा प्रथम सुगन्धित, द्वितीय पृष्टिकारक, तृतीय मिष्ट, चतुर्थं रोगनाशक (संस्कारवि ध, ऋषि दयानन्द) । इनमे इडया जुह्वतो वयं देवान् प्रृतवता यजे। (घृतवता) घृतवाले (इडया) अर द्वारा (देवान् ) अग्नि वायु भ्रादि धरो को प्राप्त कर, (गोमतः) गौओं वाले (वयम् ) हम (भलुभ्यतः) लोभ- मोह से रहित हए (संविशेम) मिल कर गृहो मे प्वेण करे । ब्रथवा लोभ. मोह से रहित गृहों में प्रवेश करे । कथन हआ है । गृहस्थ-धर्मं पालते हए भी जीवन मे लोभ-मोह न होना ,

English

Its sides are Heaven and Earth, its reins the Seasons, Voice is its hood, its grooms are sky’s mid-regions.

अध्याय ८

श्लोक 9.9

अ॒प्रा॒णैति॑ प्रा॒णेन॑ प्राण॒तीनां॑ वि॒राट् स्व॒राज॑म॒भ्येऽति प॒श्चात्।विश्वं॑ मृ॒शन्ती॑म॒भिरू॑पां वि॒राजं॒ पश्य॑न्ति॒ त्वे न त्वे प॑श्यन्त्येनाम्

aprāṇaiti prāṇena prāṇatīnāṃ virāṭ svarājamabhye'ti paścāt| viśvaṃ mṛśantīmabhirūpāṃ virājaṃ paśyanti tve na tve paśyantyenām

हिन्दी अर्थ

चाहिए । केवल कतव्य समभ कर : गृहस्थ कृत्य करने चाहिए । पुष्टिके लिये गृहस्थ को गोसंग्रह भी करना चाहिए ताकि गोघृत द्वारा यज्ञ मी करिये जा सके ओर पारिवारिक पालन-पोषणभी हो सके , (तपसा) ताप से ( तप्यमाना) तप्त होती हुई ( एकाष्टका) मुख्य

English

Year is the car, Full Year the seat for driving, Virāj the pole, the chariot’s front is Agni, Indra the warrior, and the Moon the driver. Hence conquer, conquer, Hail! be thou the victor! Let these be conquerors and those be

अध्याय ८

श्लोक 9.10

को वि॒राजो॑ मिथुन॒त्वं प्र वे॑द॒ क ऋ॒तून् क उ॒ कल्प॑मस्याः ।क्रमा॒न् को अ॑स्याः कति॒धा विदु॑ग्धा॒न् को अ॑स्या॒ धाम॑ कति॒धा व्युऽष्टीः

ko virājo mithunatvaṃ pra veda ka ṛtūn ka u kalpamasyāḥ | kramān ko asyāḥ katidhā vidugdhān ko asyā dhāma katidhā vyu'ṣṭīḥ

हिन्दी अर्थ

पय दर्णाकर कारणभाव ग्रौर क्यभाव सूचित कर ओर दोनों मे अभेद" मान हारा कथित किया है, भ्रौर सप्त छन्दांसि का पृथक् कथन नहीं किया । इस अघि) पूषे-पूवे के छन्द मे (आगतानि) श्रपित होतेह, आध्रित होते है प्रक्रार (ग्रापितानि) अपित होतेह, ्राित होते ह ।

English

So many Plants, brought hitherward, give shelter and defence to thee! Hitherward unto thee I bring the Plants that cure all maladies, All Plants wherein physicians have discovered health-bestowing power.

अध्याय ८

श्लोक 9.11

इ॒यमे॒व सा या प्र॑थ॒मा व्यौच्छ॑दा॒स्वित॑रासु चरति॒ प्रवि॑ष्टा ।म॒हान्तो॑ अस्यां महि॒मानो॑ अ॒न्तर्वधूर्जि॑गाय नव॒गज्जनि॑त्री

iyameva sā yā prathamā vyaucchadāsvitarāsu carati praviṣṭā | mahānto asyāṃ mahimāno antarvadhūrjigāya navagajjanitrī

हिन्दी अर्थ

„ यजु १७२३ेमें नाना स्तोमो का कथन हृश्रा है।॥ यथा" चरिवत होता है, दोहराना होता है । कहा भी है “विः प्रयमामन्वाह चिरुत्तमाम्'' समन्वय, अपने-प्रपने ढंग से होते है। घटक मन्त्रो" को जानाजा सकताहै। २. तथा जिसे स्तोमो के स्वरूप ज्ञात हैँ वह सुगमतासे जान सकताहैकि

English

Let Plants with flower and Plants with bud, the fruitful and the fruitless, all, Like children of one mother, yield their stores for this man’s perfeet health.

अध्याय ८

श्लोक 9.12

छन्दः॑पक्षे उ॒षसा॒ पेपि॑शाने समा॒नं योनि॒मनु॒ सं च॑रेमे ।सूर्य॑पत्नी॒ सं च॑रतः प्रजान॒ती के॑तु॒मती॑ अ॒जरे॒ भूरि॑रेतसा

chandaḥpakṣe uṣasā pepiśāne samānaṃ yonimanu saṃ careme | sūryapatnī saṃ carataḥ prajānatī ketumatī ajare bhūriretasā

हिन्दी अर्थ

स्तोम के मौलिक मन्त्र जान लिये जाते ह का०८॥ सुऽ € भ्रथवंवेद-मष्य ३११ (हव्यम्) हवि को (एति) प्राप्त होती है । अदितिः प्रकृति, जो कभी क्षीण नहीं होती म्र +-दीडः क्षये । इस के आए्पूत्र पैदा हए । यथा--

English

From the Five-arrowed, from the Ten-arrowed have I delivered thee, Freed thee from Yama’s fetter and from all offence against the Gods,

अध्याय ८

श्लोक 9.13

ऋ॒तस्य॒ पन्था॒मनु॑ ति॒स्र आगु॒स्त्रयो॑ घ॒र्मा अनु॑ रेत॒ आगुः॑ ।प्र॒जामेका॒ जिन्व॒त्यूर्ज॒मेका॑ रा॒ष्ट्रमेका॑ रक्षति देवयू॒नाम्

ṛtasya panthāmanu tisra āgustrayo gharmā anu reta āguḥ | prajāmekā jinvatyūrjamekā rāṣṭramekā rakṣati devayūnām

हिन्दी अर्थ

अदितिकेशरीरसे जो आठ पुत्र पैदा हए थे, उनमेसे ७ पूत्रो द्वारा के सात पुत्र है, सात प्रहु-बुध, शुक, पृथिवी, मंगल, गुरु बृहस्पति , शनं- श्वर । ये सातो या पुथिवी का उपग्रहचांदतो रात्रि कालमें चुलोकमें समय-समय पर यह् दष्टिगोचर होते रहते है, यह हँ अदिति का७ पूत्रो सहित काल में दृष्टिगोचर नहीं होता, यह् है उसका परे फेंकना (१०।७२।८) । तथा पूवं युग मे अदिति ७ पुत्रो समेत हुई, जौर प्रजा की उत्पत्ति तथा मी पैदा किया । बुष आदि ७ पत्र यद्यपि मातेण्डगेही पैदा हुए है, परन्तु रात्रिकाल में सात की दुष्टिगोचरता ओर दष्टिगोचरन होने वाले सूरय के दस भेद को दशनि के लिये इन मे परस्पर पाथक्य दर्शायाहै (१०।७२।९) 1

English

Imprecations directed against a hostile army Indra the Shaker shake them up, brave, hero, fortdemolisher,

अध्याय ८

श्लोक 9.14

अ॒ग्नीषोमा॑वदधु॒र्या तु॒रीयासी॑द् य॒ज्ञस्य॑ प॒क्षावृष॑यः क॒ल्पय॑न्तः ।गा॒य॒त्रीं त्रि॒ष्टुभं॒ जग॑तीमनु॒ष्टुभं॑ बृहद॒र्कीं यज॑मानाय॒ स्वऽरा॒भर॑न्तीम्

agnīṣomāvadadhuryā turīyāsīd yajñasya pakṣāvṛṣayaḥ kalpayantaḥ | gāyatrīṃ triṣṭubhaṃ jagatīmanuṣṭubhaṃ bṛhadarkīṃ yajamānāya sva'rābharantīm

हिन्दी अर्थ

८ ऋत्विक् हँ जो कि सौरमण्डलरूपी यज्ञ को रचा रहे है । २१२ श्रथवेवेद-भाष्य का० ८ । सू € अष्टयोनिः =भाठ को पद करने वाली योनि से सम्बद्ध अदिति । यह “एकाष्टका-रा्नी'' हो, जिसमेंफि हव्य प्रदान किया जाता है, हव्य

English

That into thousand fragments we may strike the armies of our foes! Let Pūtirajju with her breath corrupt and putrefy that host, And terror smite our foemen’s heart when fire and smoke are seen afar.

अध्याय ८

श्लोक 9.15

पञ्च॒ व्युऽष्टी॒रनु॒ पञ्च॒ दोहा॒ गां पञ्च॑नाम्नीमृ॒तवोऽनु॒ पञ्च॑ ।पञ्च॒ दिशः॑ पञ्चद॒शेन॑ क्लृ॒प्तस्ता एक॑मूर्ध्नीर॒भि लो॒कमेक॑म्

pañca vyu'ṣṭīranu pañca dohā gāṃ pañcanāmnīmṛtavo'nu pañca | pañca diśaḥ pañcadaśena klṛptastā ekamūrdhnīrabhi lokamekam

हिन्दी अर्थ

कथन नहीं हुआ । “भूतस्य पत्ये यजे" (, १०) मे भूतपति के लिये, तथा देवों के लिये (११) यज्ञ का विधान हुंभा है। सूक्त ६।२१ मेँ देव्याः पद होता ह । ग्रदिति परमेदवर की जागारूप से प्रघर्जिनी है, अतः परमेश्वरा- पित हवि, अधाङ्किनी रूपमे अदितिको भी प्राप्त समी जा सक्ती है। जन्मा) सब को जन्म देने वाला या मुे-गीर-तुम्हं समानरूपं में जन्म रूपो म धियमान प्रकृति (श्रदिति) भी सुखी रहती है । श्रम्यथा नानाविव बीमा- मे सखा, निज सखा को, दुःख नहीं देता । ्रात्माग्नों के संग वाली श्रदिति माता तभी

English

Asvattha, rend those men; do thou devour them quickly, Khadira!

अध्याय ८

श्लोक 9.16

षड् जा॒ता भू॒ता प्र॑थम॒जर्तस्य॑ षडु॒ सामा॑नि षड॒हं व॑हन्ति ।ष॒ड्यो॒गं सीर॒मनु॒ साम॑साम॒ षडा॑हु॒र्द्यावा॑पृथि॒वीः षडु॒र्वीः

ṣaḍ jātā bhūtā prathamajartasya ṣaḍu sāmāni ṣaḍahaṃ vahanti | ṣaḍyogaṃ sīramanu sāmasāma ṣaḍāhurdyāvāpṛthivīḥ ṣaḍurvīḥ

हिन्दी अर्थ

करते है । स्थान-स्थान मेँ वैदिक वणेन श्रति रहुस्मयी भाषा तथा कवितां पाये जति है । मन्त्र (२२) में भी कवितामपी तथा रहस्यमयी भाषाटहै। ( शिवः) कल्याण करने वाला है, (सः) वहु (वः) तुम्हारी (सर्वाः) सब मनुष्यो के प्रति कथन करती हुई कहती है । अदितिः न देवभात।” प्रकृति है मदिति । वह॒ सबकी माताहै, तथा पिताभीहै। मता म्मौर

English

Like reeds let them be broken through, down-smitten by a lifted rush. Let Parushāhva make them reeds, and let the bulrush strike them down: Bound in a mighty net let them break quickly like an arrow’s shaft.

अध्याय ८

श्लोक 9.17

षडा॑हुः शी॒तान् षडु॑ मा॒स उ॒ष्णानृ॒तुं नो॑ ब्रूत यत॒मोऽति॑रिक्तः ।स॒प्त सु॑प॒र्णाः क॒वयो॒ नि षे॑दुः स॒प्त च्छन्दां॒स्यनु॑ स॒प्त दी॒क्षाः

ṣaḍāhuḥ śītān ṣaḍu māsa uṣṇānṛtuṃ no brūta yatamo'tiriktaḥ | sapta suparṇāḥ kavayo ni ṣeduḥ sapta cchandāṃsyanu sapta dīkṣāḥ

हिन्दी अर्थ

भाषा में भ्रदिति कहती है किहे मनुष्यों! तुम्हारा ओर अपना निःश्रयस चाहती हुई मँ इस जगद्रप मेँ आई हूं । शरीरो के होते ही योगसाधनाओं केरूपमें परिणत नदहोतो निःश्रेयस को प्राप्ति नहीं हो सकती जिस-जिस भी पाक्षिक-निःश्रेयस है। इस लिये प्रदिति मनुष्यों के साथ सखिभावमें सुखी है । “शेवम् सुखनाम” (निघं० ३।६) । “शरीरो तथा जगत् के रूप मे" तथा साम्यावस्था से विषमावस्थाकेरूप सब कृतियों तथा चेष्टाओं को तथा (२) तुम सब प्रजाभों को जानता

English

Air was the net; the poles thereof were the great quarters of the sky: Sakra therewith enveloped and cast on the ground the Dasyus’ host.

अध्याय ८

श्लोक 9.18

स॒प्त होमाः॑ स॒मिधो॑ ह स॒प्त मधू॑नि स॒प्तर्तवो॑ ह स॒प्त।स॒प्ताज्या॑नि॒ परि॑ भू॒तमा॑य॒न् ताः स॑प्तगृ॒ध्रा इति॑ शुश्रुमा व॒यम्

sapta homāḥ samidho ha sapta madhūni saptartavo ha sapta| saptājyāni pari bhūtamāyan tāḥ saptagṛdhrā iti śuśrumā vayam

हिन्दी अर्थ

भप मनुष्या नोषधीस्ता उ पञ्चायु सेचिरे ॥२३॥ ओषधियों को (पञ्च) पाच (श्रनु) ऋतुप्रों के भ्रनुसार (सेचिरे) सींचते है । २३)- मन्त्र १५ से २२ तक के विषयों का उपसंहार अथ ति संग्रहस्प ह ज्ञान नहीं होता जोन तो ऋषि है, बौर न तपस्वी । तो भी परलोक भ्रीर अवरलोक सम्बन्धी पराविद्या भौर अपरा विद्या के जानने वालों मे, जिसे

English

Verily mighty is the net of mighty Sakra rich in wealth: Therewith press all the foemen down so that not one of them escape! Great is thy net, brave Indra, thine the mighty match for a thousand, Lord of Hundred

अध्याय ८

श्लोक 9.19

स॒प्त च्छन्दां॑सि चतुरुत्त॒राण्य॒न्यो अ॒न्यस्मि॒न्नध्यार्पि॑तानि ।क॒थं स्तोमाः॒ प्रति॑ तिष्ठन्ति॒ तेषु॒ तानि॒ स्तोमे॑षु॒ क॒थमार्पि॑तानि

sapta cchandāṃsi caturuttarāṇyanyo anyasminnadhyārpitāni | kathaṃ stomāḥ prati tiṣṭhanti teṣu tāni stomeṣu kathamārpitāni

हिन्दी अर्थ

होतः है" । निरुक्त में “तपः” का अभिप्राय शारीरिक .““तपः'” नहीं, अपितु सम्यक् जाना जा सकता है । 4. केवलीनदरौय दुदुहे हि गृष्टिवंशं पीयूष भ्रयमं दुहाना । (केवली) सेवनीया (गृष्टिः) गौ (वशम्) कान्तिमय (पीगूषम् ) पेय का०८। सूरश अथवेवेद-माष्य ३१५ (हि) ही (दुदृहे) दोही जाती है । (अथ) तदनन्तर (देवान्, मनुष्यान्, करना चाहिए । केवली = केवृ सेवने (भ्वादिः) वशम् = वश कान्तौ (अदारिः) तथा र ते कृण्वन्ति कीकटेषु गावः'' (ऋ०.३।५३।१४) की भावना मन्त्र (२४) में प्रतीत होती है । गृष्टिः = ०प0छ 0०५ (्राप्टे) । कोयुगोःक पएंकष्टषिः किमु धाम् का ्ारिषः।

English

Powers! Holding them, with his host, therewith hath Indra slaughtered

अध्याय ८

श्लोक 9.20

क॒थं गा॑य॒त्री त्रि॒वृतं॒ व्याऽप क॒थं त्रि॒ष्टुप् प॑ञ्चद॒शेन॑ कल्पते ।त्र॒य॒स्त्रिं॒शेन॒ जग॑ती क॒थम॑नु॒ष्टुप् क॒थमे॑कविं॒शः

kathaṃ gāyatrī trivṛtaṃ vyā'pa kathaṃ triṣṭup pañcadaśena kalpate | trayastriṃśena jagatī kathamanuṣṭup kathamekaviṃśaḥ

हिन्दी अर्थ

एक ही ऋतु है, (न अति रिच्यते) उस से बढ़कर भौर कों नहीं । साथ “गृष्टि” कोभी तप्त करती दहै, व्ह है पुथिवी। (गौः पृयिवीनाम' अभिप्राय यह् किगौ के कान्तिमय, पेषदुगधामृत पर, प्रथम दका २३१६ जयर्ववेद-माष्य का०८।सूु०९ (निघं० १।१) । पुथिवी से गृष्टि भी पैदा होती, श्रौर पाथिव घासं आदि

English

Great weakness and misfortune, pain which words can never charm away, Languor, fatigue, bewilderment, with these I compass all the foes.

अध्याय ८

श्लोक 9.21

अ॒ष्ट जा॒ता भू॒ता प्र॑थम॒जर्तस्या॒ष्टेन्द्र॒र्त्विजो॒ दैव्या॒ ये।अ॒ष्टयो॑नि॒रदि॑तिर॒ष्टपु॑त्राष्ट॒मीं रात्रि॑म॒भि ह॒व्यमे॑ति

aṣṭa jātā bhūtā prathamajartasyāṣṭendrartvijo daivyā ye| aṣṭayoniraditiraṣṭaputrāṣṭamīṃ rātrimabhi havyameti

हिन्दी अर्थ

धत द्वारा देवयज्ञ होता, परमेश्वर के प्रति आहृतियां दी जातीं; ओर है । अतः वास्तविक गौ है पृथिवी । तथा एक ही ऋषि है परमेश्वर । ऋषि पारदृश्वा है । अतः वह् ही एक ऋषि है, मुख्य ऋषि है । परमेश्वर ही सब के लिये एक धामरूप है, एकाश्रयरूप है । वह् ही सब धामो मेधामरहै, सब तेजस्वियों मे तेजोरूप है । वेदों द्वारा दिये उस के आशीर्वाद सव के आशीवदिों में मेदभाव नहीं । उसने आशीर्वादरूप मे दी कल्याणी वेदवाक्'

English

I give those foemen up to Death: bound in the bonds of Death are they. I bind and carry them away to meet Death’s wicked messengers. Bear them away, Death’s messengers! envoys of Yama! bind them fast.

अध्याय ८

श्लोक 9.22

इ॒त्थं श्रेयो॒ मन्य॑माने॒दमाग॑मं यु॒ष्माकं॑ स॒ख्ये अ॒हम॑स्मि॒ शेवा॑ ।स॒मा॒नज॑न्मा॒ क्रतु॑रस्ति वः शि॒वः स वः॒ सर्वाः॒ सं च॑रति प्रजा॒नन्

itthaṃ śreyo manyamānedamāgamaṃ yuṣmākaṃ sakhye ahamasmi śevā | samānajanmā kraturasti vaḥ śivaḥ sa vaḥ sarvāḥ saṃ carati prajānan

हिन्दी अर्थ

वह् एक ही वतंमान है ) “एकः वतते” इति एकवृत् । ऋतुओं मे ऋतु भी एक है, वह् है वसन्त-ऋतु । यथा “ऋतूनां कुसुमा- करः" (गीता १०।३५) कुसुमाकरः = कुयुमों अर्थात् पूलों को खान । वसन्त से बढ़ कर कोई ऋतु नहीं । एकतुं : = एकः मृख्यः ऋतुः । २. “स एष एकवत्, एक एव” (श्रव ० १३।४।१२) । तथा “व एतं हैव- मेकवृतं वेद (श्रथवं° १३।४।२ (१५) । (सा) वह (प्रथमा) पहिली उषा (ह व्युवास) चमकी, (सा) वह (यमे) नियन्ता-परमेश्वर के नियमन मे (घेनुः) दुगधदात्नी गौ के सदृश फलदात्री (अभवत्) हुई । (सा) वह् उषा (पयस्वती) दुगवाली गौ

English

More than a thousand be their slain: the club of Bhava pierce them through! Forth go the Sādhyas in their might bearing one netpole raised aloft.

अध्याय ८

श्लोक 9.23

अ॒ष्टेन्द्र॑स्य॒ षड् य॒मस्य॒ ऋषी॑णां स॒प्त स॑प्त॒धा।अ॒पो म॑नु॒ष्या॒३नोष॑धी॒स्ताँ उ॒ पञ्चानु॑ सेचिरे

aṣṭendrasya ṣaḍ yamasya ṛṣīṇāṃ sapta saptadhā| apo manuṣyā3noṣadhīstā~ u pañcānu secire

हिन्दी अर्थ

(दुहाम्) अभिमत फल का दोहन करे । दुहाम् = दुग्धाम् । प्रलयकाल म तम ही तम था । सजेनकालमें जो पहली उषा चमकी उसे फलदात्री होने के कारण धेनु तथा पयस्वती कहा है । यां देवाः प्रतिनन्दन्ति राति घेतुमुपायतीम् । (याम् रातिम्) जिस रात्रि को (उपायतीम्) समीप आती हुई देख सृष्टि के उत्पन्न हो जाने पर संवत्सर अदि कालविभाग होता है,

English

One pole the Rudras carry, one the Vasus, and the Ādityas one. The Visve Devas from above shall come depressing it with might, And in the midst the Angirases, slaying the mighty host, shall go.

अध्याय ८

श्लोक 9.24

केव॒लीन्द्रा॑य दुदु॒हे हि गृ॒ष्टिर्वशं पी॒यूषं॑ प्रथ॒मं दुहा॑ना ।अथा॑तर्पयच्च॒तुर॑श्चतु॒र्धा दे॒वान् म॑नु॒ष्याँ॒३ असु॑रानु॒त ऋषी॑न्

kevalīndrāya duduhe hi gṛṣṭirvaśaṃ pīyūṣaṃ prathamaṃ duhānā | athātarpayaccaturaścaturdhā devān manuṣyā~3 asurānuta ṛṣīn

हिन्दी अर्थ

३१८ अथर्वंवेद-माष्य का०३। सू० १० संवत्सर की निमर्तरीरूप मे (उपास्महे) हम सेवित करते है, (सा) वहतु प्राथमिक उषा में (महान्तः महिमानः) अप्ररिमित महिमां हँ, यह् (नव- गत्) नये-नये रूप को ्राप्त होने वालो उषा (वधु) वधूवत्' (जनित्री) जो कि नये-नये दिन को पैदा करती हुई (जिगाय) वजयिनी हुई है । नव- एकाष्टके सुप्रजसः सुवीरा वयं स्याम पतयो रयीणाम् ॥५॥ (वानस्पत्याः) वनस्पति के काष्ठ से निमित ऊखल मुसलं आदि ने, व।ली (हविः) हवि को (कृष्वन्तः). तय्यार करते हृए । (एकाष्टके) हे

English

Trees of the forest, trees that bear flower and fruit, and herbs and plants, Quadruped, biped send I forth that they may strike this army dead,

अध्याय ८

श्लोक 9.25

को नु गौः क ए॑कऋ॒षिः किमु॒ धाम॒ का आ॒शिषः॑ ।य॒क्षं पृ॑थि॒व्यामे॑क॒वृदे॑क॒र्तुः क॑त॒मो नु सः

ko nu gauḥ ka ekaṛṣiḥ kimu dhāma kā āśiṣaḥ | yakṣaṃ pṛthivyāmekavṛdekartuḥ katamo nu saḥ

हिन्दी अर्थ

उखल-मुसल द्वारा घान से तण्डल तय्यार किये जाते हैँ । तदनन्तर दुषद्-उपल द्वारा तण्डुलो की पीठी तथ्यार कर, पुरोडाश पका कर, हविः निष्पन्न होती है, ओौर संवत्सर कौ पूवंभाविनी भष्टमी मे इस पुरोडाश १. वधु जसे विवाहानन्तर नरन पति के घर जा कर, प्रर जननी बन कर संमान को प्राप्त नटीं होती । † क हविः की श्राहृतियां दी जाती ह । उत्तम-सन्तान पदा करने, तथा धमेकाये म सुवीर रहने, तथा विक्रमी बनने का संकल्प कर, . धनोपाजेन में प्रवृत्त

English

Gandharvas, and Apsarases, Gods, Serpents, Fathers, Holy Men, Seen and unseen, I send them forth that they may strike this army dead.

अध्याय ८

श्लोक 9.26

एको॒ गौरेक॑ एकऋ॒षिरेकं॒ धामै॑क॒धाशिषः॑ ।य॒क्षं पृ॑थि॒व्यामे॑क॒वृदे॑क॒र्तुर्नाति॑ रिच्यते

eko gaureka ekaṛṣirekaṃ dhāmaikadhāśiṣaḥ | yakṣaṃ pṛthivyāmekavṛdekarturnāti ricyate

हिन्दी अर्थ

होना चाहिए । सुप्रजसः सु+-प्रजा+असिच् (अष्टा° ५।४।१२२ ) । (पदम्) इस एकांश को - (घृतवत्) जो कि घत वाला, तथा (सरीसृपम्) जिस से घृत सर्पण कर रहा है, टपक रहा है -एेसे प्रन्न को, तथा (हव्या) को निरूपित करने वाले या नानारूपों वाले (ग्राम्याः)ग्राम के, या समूह्रूप उन सातो की (रन्तिः) रति (मयि) मूभमें (अस्तु).हो।

English

Here spread are snares of Death wherefrom thou, once within them, ne’er art freed: Full many a thousand of the host yonder this horn shall smite and slay.

अध्याय ८

श्लोक 10.1

विराट्।१-१३ अथर्वाचार्यः।विराट्।(षट्-पर्यायाः)।१-१३, १ त्रिपदार्ची पङ्क्तिः, २-७ याजुषी जगती, ३, ९ साम्न्यनुष्टुप्, ५ आर्च्यनुष्टुप्, ७, १३ विराड् गायत्री, ११ साम्ननी बृहती।वि॒राड् वा इ॒दमग्र॑ आसी॒त् तस्या॑ जा॒तायाः॒ सर्व॑मबिभेदि॒यमे॒वेदं भ॑वि॒ष्यतीति॑

virāṭ| 1-13 atharvācāryaḥ| virāṭ| (ṣaṭ-paryāyāḥ)| 1-13, 1 tripadārcī paṅktiḥ, 2-7 yājuṣī jagatī, 3, 9 sāmnyanuṣṭup, 5 ārcyanuṣṭup, 7, 13 virāḍ gāyatrī, 11 sāmnanī bṛhatī| virāḍ vā idamagra āsīt tasyā jātāyāḥ sarvamabibhediyamevedaṃ bhaviṣyatīti

हिन्दी अर्थ

(जजान) पैदा किया । (तेन) उस इन्द्र द्रारा (देवाः) संसार कौ दिव्य- का (न्ता) हनन करने वाला (ग्रभवत्) ह! । फात्गुन-मास वसन्त काल है । यथा “फाल्गुनः = एय18 58९4807 (वसन्त का०३॥ सु° १० एकाष्टक।-परिशिष्ट ३२३ से उत्तर कौ ओर आता है, ओर इस का ताप बढ़ने लगता है । एकाष्टका की अष्टमी भी वासन्तिक कालके सूरयके तपद्वारा तप्त होने लगती रूपी शतुओं का विशेषतया पराभव करने लगतो है! ये शेत्य-अन्धकार आदि दस्यु ह, उपक्षयकारी हैँ । शची = कर्मनाम (निषं० २।१) । शची दहै,

English

They call Virāj the Father of Devotion: tell her to us thy friends in all her figures. She whom, advancing, sacrifices follow, and when she takes her station stand beside her, By whose control and hest the spirit moveth, she is Virāj, in highest heaven, O Rishis.

अध्याय ८

श्लोक 10.1-2

(७) (2) १-१०) १ त्रिपदा साम्नी अनुष्टुप्, २ उष्णिग्गर्भा चतुष्पदोपरिष्टाद्विराड्बृहती, ३ एकपदा याजुषी गायत्री, ४ एकपदा साम्नी पङ्क्तिः ५ विराड् गायत्री, ६ आर्च्यनुष्टुप्, ७ साम्नी पङ्क्तिः, ८ आसुरी गायत्री, ९ साम्नी अनुष्टुप्, १० साम्नी बृहती।सोद॑क्राम॒त् सान्तरि॑क्षे चतु॒र्धा विक्रा॑न्तातिष्ठत्

(7) (2) 1-10) 1 tripadā sāmnī anuṣṭup, 2 uṣṇiggarbhā catuṣpadopariṣṭādvirāḍbṛhatī, 3 ekapadā yājuṣī gāyatrī, 4 ekapadā sāmnī paṅktiḥ 5 virāḍ gāyatrī, 6 ārcyanuṣṭup, 7 sāmnī paṅktiḥ, 8 āsurī gāyatrī, 9 sāmnī anuṣṭup, 10 sāmnī bṛhatī| sodakrāmat sāntarikṣe caturdhā vikrāntātiṣṭhat

हिन्दी अर्थ

विस्तार; (२) रथन्तर स्तन पृथिवी से बोषधियां; (३) वामदेव्य काल में पूनः प्ररोहित हो जाते हँ! प्राकृतिक-घटना के इस दृश्य से शिक्षा का०८। सू० १० प्रथर्ववेद-भाष्य ३२५ (१) असुरराज्य । असुर ह परकृत्ति के उपासक । प्राह्वादि विरोचन है (२) पितरराज्य । पितर दँ सभा भौर समिति के सदस्य । यम राजा

English

They call Virāj the Father of Devotion: tell her to us thy friends in all her figures. She whom, advancing, sacrifices follow, and when she takes her station stand beside her, By whose control and hest the spirit moveth, she is Virāj, in highest heaven, O Rishis.

अध्याय ८

श्लोक 10.1-3

(१७) (3) (१-८) १ चतुष्दा विराडनुष्टुप्, २ आर्ची त्रिष्टुप्, ३,५,७ चतुष्पदा प्राजापत्या पङ्क्तिः, ४,६,८ आर्ची बृहती।सोद॑क्राम॒त् सा वन॒स्पती॒नाग॑च्छत् तां वन॒स्पत॑योऽघ्नत॒ सा सं॑वत्स॒रे सम॑भवत्

(17) (3) (1-8) 1 catuṣdā virāḍanuṣṭup, 2 ārcī triṣṭup, 3,5,7 catuṣpadā prājāpatyā paṅktiḥ, 4,6,8 ārcī bṛhatī| sodakrāmat sā vanaspatīnāgacchat tāṃ vanaspatayo'ghnata sā saṃvatsare samabhavat

हिन्दी अर्थ

का साधन 1 यावत धृतराष्ट है विराट्-गौ का दोहनकर्ता उस ने विषरूपी विष के प्रयोक्ता को प्रतीकाररूपमे मार डालना चाहिए, इसमें मनुष्यहत्या न समनी चाहिए । अपितु यह् समभना चाहिए कि इस के हनन द्वारा अन्यों को विषप्रयोग से मैने बचा दिया का० ८ । सु° १० अयवेवेद-भाष्य ३२७ विराद् वा इदभग्रं आसीत् तस्यां जातायाः सवैमविभेदियमेवेदं भीत हो गया, श्रौर कहने लगा कि (इयम्) यह राज्य वरिहीन अवस्था (एव) ही (इदम्) इस रूप में (भविष्यति, इति) भविष्य मे हौगी, रहेगी ।

English

They call Virāj the Father of Devotion: tell her to us thy friends in all her figures. She whom, advancing, sacrifices follow, and when she takes her station stand beside her, By whose control and hest the spirit moveth, she is Virāj, in highest heaven, O Rishis.

अध्याय ८

श्लोक 10.1-4

(२१) (4-5) (१-१६, १-१६) २२-२३, २६,२९(प्र०) चतुष्पदा साम्नी जगती, २२-२४, २८-२९(द्वि०) साम्नी बृहती, २२,२६ (तृ०) साम्नी उष्णिक्, २२-२३,२६,२९ (च०) आर्च्यनुष्टुप्, २३ (तृ०) आर्ची गायत्री, २४-२५, २८ (प्र०) चतुष्पदा उष्णिक्, २४ (तृ०) प्राजापत्यानुष्टुप्, २४-२५, २७ आर्ची त्रिष्टुप्, २५-२६ (द्वि०) साम्नी उष्णिक्, २५, २७-२८ (तृ०) विराड् गायत्री २७ (प्र०)चतुष्पदा प्राजापत्या जगती, २७ (द्वि०) साम्नी बृहती त्रिष्टुप्, २८ (च०) त्रिपदा ब्राह्मी भुरिग्गायत्री, २९ (तृ०) साम्नी अनुष्टुप्।सोद॑क्राम॒त् सासु॑रा॒नाग॑च्छ॒त् तामसु॑रा॒ उपा॑ह्वयन्त॒ माय॒ एहीति॑

(21) (4-5) (1-16, 1-16) 22-23, 26,29(pra0) catuṣpadā sāmnī jagatī, 22-24, 28-29(dvi0) sāmnī bṛhatī, 22,26 (tṛ0) sāmnī uṣṇik, 22-23,26,29 (ca0) ārcyanuṣṭup, 23 (tṛ0) ārcī gāyatrī, 24-25, 28 (pra0) catuṣpadā uṣṇik, 24 (tṛ0) prājāpatyānuṣṭup, 24-25, 27 ārcī triṣṭup, 25-26 (dvi0) sāmnī uṣṇik, 25, 27-28 (tṛ0) virāḍ gāyatrī 27 (pra0)catuṣpadā prājāpatyā jagatī, 27 (dvi0) sāmnī bṛhatī triṣṭup, 28 (ca0) tripadā brāhmī bhuriggāyatrī, 29 (tṛ0) sāmnī anuṣṭup| sodakrāmat sāsurānāgacchat tāmasurā upāhvayanta māya ehīti

हिन्दी अर्थ

मानुष-सृष्टि से पुव केवल ईश्वरीय व्यवस्था थी, उस समय मानुषी- सृष्टि अभी पेदा ही नहीं हुई थी, अतः मनुष्यकृत भय भी उस समय न था । यह् एक विचाररूप है कि श्रारम्भ में सामाजिक तथा राजनंतिक' अवस्था सामाजिक श्रौर राजनेतिक व्यवस्था का विकास हुआ होगा। यहतो होना; (३) पति सम्बन्धी पत्नी का होना । इस दवारा यह सूचित हूंभा है

English

Calf of Virāj, giving each wish fulfilment, made bodies for him- self far off, in secret. Which are the three, the mighty three, whereof the fourth divides the voice, This may the Brāhman know by prayer and fervour, whereto belongs the one, whereto the

अध्याय ८

श्लोक 10.1-5

(२५) (5) सोद॑क्राम॒त् सा दे॒वानाग॑च्छ॒त् तां दे॒वा उपा॑ह्वय॒न्तोर्ज॒ एहीति॑

(25) (5) sodakrāmat sā devānāgacchat tāṃ devā upāhvayantorja ehīti

हिन्दी अर्थ

(यः) जो व्यविति (एवम्) इस प्रकार (वेद) जानता है वह (गृह मेधी) गृह-यज्ञ का करने वाला भौर (गृहपतिः) गृह का षति ( भवति) मनुष्यसमाज की दुरवस्था को जान कर जिस जानी ने इस दुरवस्था को हटाना चाहा, उसने पहिले स्वयं गृहमेध किया, गृहयज्ञ का संगम किया, गृहरचना की, भौर गृहपति बना, उसने पति-पलनीभाव् को भी व्यवस्थित सोदक्रामत् साईवनीये न्यऽकरामत् ॥८॥ सीमित थी उस ने ्रन्यों का आह्वान किया, आसपास रहने वालों को बुलाया, गौर उन्दँ मी गाहपत्य-न्यवस्था के लाभ समभाए ओर आहवनीय व्यवस्था की चर्चा की ।

English

They call Virāj the Father of Devotion: tell her to us thy friends in all her figures. She whom, advancing, sacrifices follow, and when she takes her station stand beside her, By whose control and hest the spirit moveth, she is Virāj, in highest heaven, O Rishis.

अध्याय ८

श्लोक 10.1-6

।तद् वि॒षं स॒र्पा उप॑ जीवन्त्युपजीव॒नीयो॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥१६ (२९) (6) (-१-४) १ द्विपदा विराड् गायत्री, २ द्विपदा साम्नी त्रिष्टुप्, ३ द्विपदा प्राजापत्यानुष्टुप्, ४ द्विपदार्च्युष्णिक्।तद् यस्मा॑ ए॒वं वि॒दुषे॒ऽलाबु॑नाभिषि॒ञ्चेत् प्र॒त्याह॑न्यात्

| tad viṣaṃ sarpā upa jīvantyupajīvanīyo bhavati ya evaṃ veda ||16 (29) (6) (-1-4) 1 dvipadā virāḍ gāyatrī, 2 dvipadā sāmnī triṣṭup, 3 dvipadā prājāpatyānuṣṭup, 4 dvipadārcyuṣṇik| tad yasmā evaṃ viduṣe'lābunābhiṣiñcet pratyāhanyāt

हिन्दी अर्थ

जीवनों वाले हो गये हु । यह आहवनीय “्रामसंस्था'” का पूवंूप है । जो कि समय पाकर एक संगठ्ति “्रामसमा” बन जाती है, भौर इसका प्यश्च ये” (अथवं ° ३।५।७) । इस “ग्रामसभा'' के नियमों तथा आ्रज्ञानों को उद्घोषित करने के लिये एक कममंचारी रख लिया जाता है, जिसे कि “श्रापघोषी'' कहा है (अथवं ° ५।२०।६) । यतो दक्षिणीयो वासंतेयो मवति य पं वेद् ॥७।॥ को (वेद) जानता है वहु (यज्ञतः) इस संस्थारूपी-यज्ञ मे जाने योग्यहो जाता है, भ्रौर (वासतेयः) वसती का शुभकारी (भवति) होता है ।

English

They call Virāj the Father of Devotion: tell her to us thy friends in all her figures. She whom, advancing, sacrifices follow, and when she takes her station stand beside her, By whose control and hest the spirit moveth, she is Virāj, in highest heaven, O Rishis.

अध्याय ८

श्लोक 10.2

सोद॑क्राम॒त् सा गार्ह॑पत्ये॒ न्यऽक्रामत्

sodakrāmat sā gārhapatye nya'krāmat

हिन्दी अर्थ

चमकते-दमकते कपड़ पहनने वाल। भौर इस प्रकार विविध-रुचियों वाला प्रतिनिधि का है । इसे मन्त्र मे ेन्दियिक-सुख का पूवर कहा है! असुरो पालक है “भ्रयः” अर्थात् लोहा । लोहा तमोगुण है, प्रकृति का तामसिक- के दोहने के लिये “विरोचन को वत्स कलह है। वत्स के विनागौ दुही नहीं जा सकती । इसी प्रकार विरोचन स्वभाव वाले नेता के विना श्रासुरी- सम्पत्ति, विराट् गौसे दोहीनहींजासकती। ! ॥ ३४२ भ्रथववेवेद-माष्य का०८ 1 सू० १०

English

The Spirit dwelling on the earth is single: the Single Season never is transcended. A glorification of the mystical abstraction Virāj Viraj at first was This. At birth all feared her; the thought, She will become this All, struck

अध्याय ८

श्लोक 10.2-2

(८) तां दे॑वमनु॒ष्याऽ अब्रुवन्नि॒यमे॒व तद् वे॑द॒ यदु॒भय॑ उप॒जीवे॑मे॒मामुप॑ ह्वयामहा॒ इति॑

(8) tāṃ devamanuṣyā' abruvanniyameva tad veda yadubhaya upajīvememāmupa hvayāmahā iti

हिन्दी अर्थ

के पुत्र ने (अधोक्) दुहा, (ताम्) उस से (मायाम् एव ) मायाकोही विरोचन को दों सिसे बाला कहा है, वह एक सिरसे तो सोचता है, ओर दूसरे सिर से वाणी बोलता है, अर्थात् मन मेँ कु भौर वाणी मेक । है, ऋतुओ के सदृश परसिवितनभील है, अस्थिरमति है । उसने विराद्-गौ से (वेद) जानता है, वह् मी (उपजीवनीयः) अन्यो के लिये जीवन का जश्रय (भवति) हो जाता है, ्नन्यो को जीवन प्रदान करतादहै। मन्त्र यमं “परसुर-राज्य” का वणन हुभ्रा है)

English

Jagatī fashioned on the three-and-thirty? How is Anushtup formed? how Ekavinsa? Eight Elements sprang up, first born of Order: the Priests divine are eight in number, Indra! Eight are the wombs of Aditi, eight her children; for the eighth night is the libation destined.

अध्याय ८

श्लोक 10.2-3

।तस्मा॒द् वन॒स्पती॑नां संवत्स॒रे वृ॒क्णमपि॑ रोहति वृ॒श्चते॒ऽस्याप्रि॑यो॒ भ्रातृ॑व्यो॒ य ए॒वं वेद॑

| tasmād vanaspatīnāṃ saṃvatsare vṛkṇamapi rohati vṛścate'syāpriyo bhrātṛvyo ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

पितरः है समा श्रौर समिति के सदस्य । सभा है लोकसभा, श्रौर समिति है राजसभा (अथवं ० ८।१०।८-११ ) । समा मौर समिति के संयुक्त अधिवेशन मे स्थित सभ्यो ब्रौर सामित्यों को “पितरः कहा है । यथा-- का० ८ सूु० १० श्रयर्षवेद-भाष्य ३४२ नियमन करने वाला (राजा) राजा, (रजतपात्रम्) रक्षक ओर पालकं रजत पितरों अर्थात् सभासदों भौर समिति क सदस्यों को विराट्-गौ के धारण-पोषण करने की शक्ति, स्वतन्त्रता, अपराधीनता

English

So planning bliss for you have I come hither to win your friendship: kind am I, and gracious. Born from one source, propitious is your wisdom: knowing full well to all of you it cometh.

अध्याय ८

श्लोक 10.2-4

।तस्या॑ वि॒रोच॑नः॒ प्राह्रा॑दिर्व॒त्स आसी॑दयस्पा॒त्रं पात्र॑म्

| tasyā virocanaḥ prāhrādirvatsa āsīdayaspātraṃ pātram

हिन्दी अर्थ

सैन्य विभाग है “मरने भौर मारने के लिये' । अतः यह समग्र विभाग मृत्यु का पूर है, भौर सेनापति भी । अतः सेनापति को मार्त॑व्य कहा है । परन्तु श्ञासन तथा राज्यरक्षा नहीं हौ सकती । (पितरः) सभा-समिति के सदस्य (जीवन्ति) जीवित होतेहै, वह् भी म् जीवनीयः) अन्यो के जीवित रहने का आश्रय ( भवति) हो जाता है (यः) श्रौर जलवाली ! (एहि) आ (इति) इस प्रकार -

English

To Indra eight, to Yama six, seven to the Rishis, seven to each: The number five accompanies waters and men and healing herbs. The Heifer, all his own, poured forth for Indra control and milk at her first time of milking;

अध्याय ८

श्लोक 10.2-5

।तस्या॒ इन्द्रो॑ व॒त्स आसी॑च्चम॒सः पात्र॑म्

| tasyā indro vatsa āsīccamasaḥ pātram

हिन्दी अर्थ

पालन का साघन थी । पात्रम् =पा+तेड. (पालने) । परन्तु विशेषाभिभाय से “ननु” को विरस्वान् भात् चव का एन कहा € । गनौर जल का मिलना सूर्याधित है । दसी के श्राश्रयसेषेती फततीहै। खेतीके फलने पर किसानवर्भं से निराशा का प्रन्धकार दुर होता है । का० ८. सू० १० अथवेवेद-माष्य २४५ यह् “मनु” है जनपद निवासी किसान-वगं (मन्त्र ११,१२) । इस वगं ने “वत्स'" बनकर विराट्-गौ का दोहन किया । दोहन का फल हुआ “करृषि ओर

English

And he then satisfied the four divisions, the Gods and men and Asuras and Rishis.

अध्याय ८

श्लोक 10.2-6

।न च॑ प्रत्याह॒न्यान्मन॑सा त्वा प्र॒त्याह॒न्मीति॑ प्र॒त्याह॑न्यात्

| na ca pratyāhanyānmanasā tvā pratyāhanmīti pratyāhanyāt

हिन्दी अर्थ

कृषि-सस्य, पृथिवी से ही प्राप्त होतेह, जो कि.किसान-वशभे कौ रक्षा ्रौर (ताम्) उस विराट्-गौ को (पृथी) कृषिविस्तार करने वाले, (वैन्यः) छर षि-मेधावी कृषकों कौ वंशपरम्परा में उत्पन्न किसन ने (अधोक्) दोहा, पृथो' = जसे पृथिवी विस्तृत है उसी प्रकार कृषिकमं का विस्तार करने वाला कृषिकमं में प्रस्यात कृषक । वैन्यः = वेनः मेधाविनाम (निघं० ३।१५) । वैन्यः = मेधावी कृषकवंण मे उत्पन्न, जिस को वंशपरम्परामें कृषिकमं रहा है, वह् कृषि का विशेषज्ञ सम्भावित है । वैन्यः =वेनृ गति- हो जाता है भौर (उपजीवनीयः) ग्रौरों के जीवनो का आश्रय (भवति) हो जाता ह (यः) जो कि (एवम्) इस प्रकार के तथ्य को (वेद) जानता है ।

English

Who is the Cow? Who is the Single Rishi? What is the law, what are the benedictions? What on the earth is the one only Spirit? Which of the number is the Single Season? One is the Cow, one is the Single Spirit, one is the law, single are benedictions.

अध्याय ८

श्लोक 10.3

गृ॒ह॒मे॒धी गृ॒हप॑तिर्भवति॒ य ए॒वं वेद॑

gṛhamedhī gṛhapatirbhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

२।१०) +-किः । शासन की दृष्टिसे राष्टरकेदो विभाग, नागरिक ओर शासन सभा-समिति का शासन ग्रामवासियों कौ रजत आदि की आव- २४६ अथर्ववेद-भाष्य का० ८।सूु० १० श्यकता को पूरित करता तथा उन की स्वावस्था को सुरक्षित करता द, नगरवासियों की कृषि ओर सस्य की आवश्यकता को पूरित करता है । इस प्रकार राष्टकेये दो विभाग एक दूसरे के पूरक होकर एक राष्टरूप है । इसे “पितर-मनुष्य राज्य'' कह सकते हँ । हे ब्रह्मवाली ! (एहि) तू आ (इति) इस प्रकार ।

English

She mounted up, she entered Consultation. Whoso knows this is fit to be consulted, and to his consultation come the people. She mounted up, and, into four divided, she took her station in the air’s mid-region.

अध्याय ८

श्लोक 10.3-2

(९) तामुपा॑ह्वयन्त

(9) tāmupāhvayanta

हिन्दी अर्थ

द्धि । मनुष्य के निःश्रेयस के लिये ये सात “ऋषिकोटि” के होने चाहियं । इस भावना को अभिव्यक्त करने के लिये इन सातको ऋषि कहाहै। मे समता कही है । इसलिये आधिभौतिक शासन मे भी सात ऋषियों द्वारा की सात रदिमयां ह (निरुक्त १२।४।३७) ।

English

Viraj at first was This. At birth all feared her; the thought, She will become this All, struck terror. She rose, the Gārhapatya fire she entered. He who knows this becomes lord of a household,

अध्याय ८

श्लोक 10.3-3

(१८) सोद॑क्राम॒त् सा पि॒तॄनाग॑च्छ॒त् तां पि॒तरो॑ऽघ्नत॒ सा मा॒सि सम॑भवत्

(18) sodakrāmat sā pitṝnāgacchat tāṃ pitaro'ghnata sā māsi samabhavat

हिन्दी अर्थ

दस का स्पष्टीकरण हृभ्रा है । २. मनुनेभीसात या भ्राठ सचिवों का कथन क्रिया । यथा “सचिवान् सप्त का० ८1 स्० १५ भशथवेवेद-भाष्य ३४७ यद्यपि वैदिक साहित्यानुसार राजा क्षत्रिय होना चाहिए । परनपु प्रजा के शासन में उसे सौम्य स्वभाववाला होकर, शासक होन चाहिए, शासन, वैदिकमन्त्प्रतिपादित विधि द्वारा होना चाहिए ( देखो यजु° (वृहस्पतिः) बृहती वेदवाणी के पति ने (अषोक्) दोहा (ताम्) उस विराट्

English

performer of domestic sacri- fices. She mounted up, the Eastward fire she entered. He who knows this becomes the Gods’

अध्याय ८

श्लोक 10.3-4

।तां द्विमू॑र्धा॒र्त्व्योऽधो॒क् तां मा॒यामे॒वाधो॑क्

| tāṃ dvimūrdhārtvyo'dhok tāṃ māyāmevādhok

हिन्दी अर्थ

ऋषयः) सात ऋषि (जीवन्ति) जीवित रहते है, (यः) जो (एवम्) इस मौर (उपजीवनीयः) अन्यो के जीवन का प्राश्चय (भवति) हो जातादहै। जीवन में ढालने का निर्देश मन्त्र द्वारा हा है। २४८ अथर्ववेद-भाष्य का० ८।सु० १०

English

beloved, and to his call they come when she invokes them. She mounted up, the Southward fire she entered. He who knows this becomes a fit performer of sacrifice, meet for honour, shelter-giver.

अध्याय ८

श्लोक 10.3-5

।तां दे॒वः स॑वि॒ताधो॒क् तामू॒र्जामे॒वाधो॑क्

| tāṃ devaḥ savitādhok tāmūrjāmevādhok

हिन्दी अर्थ

शन््रादिदेवताकराज्य (भ्राधिदविका्थं ) (सा) वहू विराट् (उदकामत्) उत्कान्त हई, ऊपर की गोर गतिवाली इन (चमसः) भौर मेष था (पात्रम् ) रक्षा ओौर पालन का साधनं । को उत्पत्ति का कारण है, अतः “चमस है । यह “चमस” है पात्र अर्थति रक्ना भौर पालन का साधने, पा (रक्षणे) + तड पालने । चमस चमु तां देवः संविताषोक् तामूनमिवा्धोक् ॥३॥

English

She mounted up, she entered the Assembly. He who knows this becomes polite and courtly, and people come as guests to his assembly.

अध्याय ८

श्लोक 10.3-6

।यत् प्र॑त्या॒हन्ति॑ वि॒षमे॒व तत् प्र॒त्याह॑न्ति

| yat pratyāhanti viṣameva tat pratyāhanti

हिन्दी अर्थ

र (ताम्) उस विराट््-गौ को (देवः) दु तिसम्पनन (सविता ) सयं ने कहा है । बछ्ड के विना गौ द्ध नहीं देती रौर दोहने वाला ग्वाला है निर्माण होता है, श्रौर मेधीय- विदुत् फ ताडन द्वारा मेष से जल बरसता है, का० ८ । सू० १० भ्रथवेवेद-भाष्य १४९ तामूं देवा उप॑ जीवन्तयुपजीवनीयो मवति य एवं वेदं ॥४॥

English

She mounted up, she passed within the meeting. He who knows this becomes fit for the meeting, and to his hall of meeting come the people. She mounted up, she entered Consultation. Whoso knows this is fit to be consulted, and to his

अध्याय ८

श्लोक 10.4

।सोद॑क्राम॒त् साह॑व॒नीये॒ न्यऽक्रामत्

| sodakrāmat sāhavanīye nya'krāmat

हिन्दी अर्थ

जीवित होति ह (यः) जो (एषम्) हस प्रकार इस तथ्य को (वेद) जानता है वह भी (उपजीवनीयः) आचरितो के जीवनों का साधक (भवति) हो देवाः = प्राकृतिके देव । उप = उपाश्रित्य । प्राकृतिक देव वायु, परज्ञान के लिये देखो (यजु० १४५२० । ति ॥ वेश्यप्रकृतिक राज्य (भ्राधिभौतिका्थ) उस को (देवाः) व्यापारी-वेश्यो ने (उप अह्वयन्त) अपने समीप बुलाया कि (उजं) है बल ओौरप्राण देने वाले अन्नरूपिणी । (एहि) प्रा; (इत्ति)

English

She rose, she came unto the tress: they killed her. A year went by and she again existed. Hence in a year the wounds of trees heal over. He who knows this sees his loathed rival wounded.

अध्याय ८

श्लोक 10.4-2

(१०) ऊर्ज॒ एहि॒ स्वध॒ एहि॒ सूनृ॑त॒ एहीरा॑व॒त्येहीति॑

(10) ūrja ehi svadha ehi sūnṛta ehīrāvatyehīti

हिन्दी अर्थ

देवाः = दिवु क्रीडा विजिगीषाव्यवहार “““ (दिवादिः) । मन्त्र मे (तस्याः) उस विराटृरूपी गौ का (वत्सः) बडा (्रासीत्) था दारा विराट् का आह्वान करिया है। तथा “इन्द्रमह वणिजं चोदयामि” (श्रथवं० ३।१५।१) मे इन्द्र को वणिक् कहा भी है ।. “चमसः मेषनाम”

English

Of her the Gods and men said, This she knoweth. That we may both have life let us invoke her. Thus did they cry to her:

अध्याय ८

श्लोक 10.4-3

।तस्मा॑त् पि॒तृभ्यो॑ मा॒स्युप॑मास्यं ददति॒ प्र पि॑तृ॒याणं॒ पन्थां॑ जानाति॒ य ए॒वं वेद॑

| tasmāt pitṛbhyo māsyupamāsyaṃ dadati pra pitṛyāṇaṃ panthāṃ jānāti ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

श्मयर्वयेद-भाष्य का० ८ । सू० १० सहाथक है, अतः उसे “चमस कटा है । इस प्रकार “मेघः' रक्षा पालन का साघन है । पात्रम् =पा (रक्षणे) + तम् (वड. पालने) 1 । तां देवः स॑धिताऽधोक तामू्ामवाधोक् ॥२॥ (ताम्) उस विराटृरूपी गौ को, (सविता) प्रेरक (देवः) तथा व्यवहार कोही (अधोक्) दोहा । तामृजें देवा उप॑ जीवन्त्युपजीव नीयों मवति य एवं वेदं ॥४॥ (जीवन्ति) जीवित होते रहै, (यः ) जो ( एवम्) इस प्रकार दस तथ्य को (वेद) जानता है, वह् (उपजीवनीयः) भ्रन्यों के जीवनो का आश्रय(मवति)

English

Come, Strength! come, Food! come, Charmer! come, Free- giver! Her calf, her well-beloved calf, was Indra: Gāyatri was her rope, the cloud her udder.

अध्याय ८

श्लोक 10.4-4

।तां मा॒यामसु॑रा॒ उप॑ जीवन्त्युपजीव॒नीयो॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑

| tāṃ māyāmasurā upa jīvantyupajīvanīyo bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

समीप बुलाया कि (पुण्यगन्धे) है पवित्रगन्धवालो ! (एहि) तू आ “आपः द्वारा मेष" का वर्णेन हा है 1 तथा यजुवद से जिन मन्त्रो के द्योतन प्रं भमिगप्रत है 1 तथा युस्थानवासी भी । का०८।सूु० १० जथवेवेद-माष्य ३५१

English

Two teats she had, Rathantara and Brihat, two, Yajnāyajniya and Vāmadevya. With the Rathantara the Gods milked from her the Plants, and all the wide expanse with Brihat.

अध्याय ८

श्लोक 10.4-5

।तामू॒र्जां दे॒वा उप॑ जीवन्त्युपजीव॒नीयो॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑

| tāmūrjāṃ devā upa jīvantyupajīvanīyo bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

सहायक हैँ । इस भावना को ६-ठ मन्त्रो में दर्शाया है । यथः-- रमणीय गति करने वाला मेघ (तस्याः) उस विराट-गौ करा (वत्सः) बडा चित्ररथः = मेघ । वर्षाऋतु में मेघ नानाकृतियो में दृष्टिगोचर होता, गतियो मे अन्तरिक्ष मे विचरता है । रथः ““रहतेगैतकमेणः'' (निरुक्त ओौर चमकता हुभा अन्तरिक्ष कं पक्षों मे गति करता है । रथः “रमम।णो-

English

They drew the Waters forth with Vāmadevya, with Yajnayaj- niya they milked out worship. For him who knoweth this, Rathantara poureth out Plants, and Brihat yieldeth wide

अध्याय ८

श्लोक 10.4-6

वि॒षमे॒वास्याप्रि॑यं॒ भ्रातृ॑व्यमनु॒विषि॑च्यते॒ य ए॒वं वेद॑

viṣamevāsyāpriyaṃ bhrātṛvyamanuviṣicyate ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

ओर रश्मियों को विशेषरूप से क।रण कहा है । दोहन करता है, जिस से वर्षा होती, श्रौर ““ुष्करपणं"” आदि पेदा होते हैँ । पणं का अभिप्राय है पुष्कर की पंखुडियां । एकवचन जात्येकवचन है । इ दारा पृष्करों का विकसितरूप दर्शाया है। ये विकसित-पुष्कर भ्रमरो, मधुकरो के पात्र है, रक्षक-ओौर-पालक हँ । इन के साथ सूयेकाभी वणेन २५२ प्रथवंवेद-भाष्य का० ठ । सु० ११ हुआ है, सूयं के होते ही पुष्कर विकसित होते ह, ग्रौर सूर्यास्त पर मंकुलित

English

expansion. Waters from Vāmdevya come, from Yajnāyajniya sacrifice. She rose, she came unto the tress: they killed her. A year went by and she again existed.

अध्याय ८

श्लोक 10.5

।यन्त्य॑स्य दे॒वा दे॒वहू॑तिं प्रि॒यो दे॒वानां॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑

| yantyasya devā devahūtiṃ priyo devānāṃ bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

(वसुरुचिः) वसुओं के उत्पादन में रुचिवाले मेष ने, (अधोक्) दोहा (ताम्) अचेतन है, उसमे “रुचि"" सम्भव नहीं क्योंकि रुचि चतन काधमदहै।तोभो कं विसम्प्रदायानुसार अचेतन मे भी चेतनधर्मों काञआरोपहुभा करता है। (उपजीवनीयः) अर्यो के लिये जीवन का आश्रय (भवति) हो जाता, (यः) जो कि (एवम्) इस प्रकार (वेद) इस तथ्य को जानत है । बुलाया किं (पुम्यगन्धे) है पुण्यकमोँ की गन्ध वाली (एदि) आ; (इति) का० ८। सुऽ १० अथवेषेद-माष्यः १५३

English

Come, O Māyā, come thou hither. Her dear calf was Virochana Prāhrādi: her milking vessel was a. pan of iron.

अध्याय ८

श्लोक 10.5-2

(११) तस्या॒ इन्द्रो॑ व॒त्स आसी॑द् गाय॒त्र्यऽभि॒धान्य॒भ्रमूधः॑

(11) tasyā indro vatsa āsīd gāyatrya'bhidhānyabhramūdhaḥ

हिन्दी अर्थ

१।३) । परति त सा्ुद्रिक जलो मे तथा भ्रन्तरिक्ष मे सरण करनी वाली (तेत्तिरीय आरण्यक १०।६) । इस भावना को सूचित करने के लिये मन्व मधुकर मंङरातेः है, पुष्कर की सुगन्ध से आकृष्ट होकर । दारा सुसज्जित रथों वाला सेन्यवगे । (पुष्करपणम्) विकसित पंसुदधियों वाला कमल था (पत्रम्) रक्षा भौर पालन का साधन।

English

Come, O Māyā, come thou hither. Her dear calf was Virochana Prāhrādi: her milking vessel was a. pan of iron.

अध्याय ८

श्लोक 10.5-3

(१९) सोद॑क्राम॒त् सा दे॒वानाग॑च्छ॒त् तां दे॒वा अ॑घ्नत॒ सार्ध॑मा॒से सम॑भवत्

(19) sodakrāmat sā devānāgacchat tāṃ devā aghnata sārdhamāse samabhavat

हिन्दी अर्थ

भौर पालन पाम् का साधन था विकसित कमल । अभिप्राय यह कि ३५४ प्रयवंवेदे-माष्य का०८। सू० १० चाहने. वाला; यह् प्राकृतिक विभ्ूतियो को निज रक्षक तथा पालक समता वसुरुचिः वसुभं के उपाजन मे रुचिवाला वैश्यवर्णं । यह् भी उस को (इतरजना) इतरजनों ने (उप) अपने समीप (म्रह्वयन्त) बुलाया कि (तिरोधे) है अन्तर्घानरूपिणी ! धा कुटिलता का धारण-पोषण करने वाली ! (एहि) भ, (एति) इस प्रकार ।

English

Come, O Māyā, come thou hither. Her dear calf was Virochana Prāhrādi: her milking vessel was a. pan of iron.

अध्याय ८

श्लोक 10.5-4

(२२) सोद॑क्राम॒त् सा पि॒तॄ॒नाग॑च्छत् तां पि॒तर॒ उपा॑ह्वयन्त॒ स्वध॒ एहीति॑

(22) sodakrāmat sā pitṝnāgacchat tāṃ pitara upāhvayanta svadha ehīti

हिन्दी अर्थ

का० ८। शुम १० प्रथर्ववेद-भाष्य ३५५ भधिमौतिकं वणेन हृभा है । इतरजन उन से भिन्न प्रकारके है जेसी तिरोधे ! = इतश्जनो की विराट्-व्यवस्था “तिरोघा' रूप है । "तिरोधा! ही किये जाते हँ (मन्त्र (१२), तथा तिरोधा काथं यह् भीहैकि

English

Come, O Māyā, come thou hither. Her dear calf was Virochana Prāhrādi: her milking vessel was a. pan of iron.

अध्याय ८

श्लोक 10.5-5

(२६) सोद॑क्राम॒त् सा ग॑न्धर्वाप्स॒रस॒ आग॑च्छत् तां ग॑न्धर्वाप्स॒रस॒ उपा॑ह्वयन्त॒ पुण्य॑गन्ध॒ एहीति॑

(26) sodakrāmat sā gandharvāpsarasa āgacchat tāṃ gandharvāpsarasa upāhvayanta puṇyagandha ehīti

हिन्दी अर्थ

जिसे कि “इतरजन"” अपनाते हैँ । तिरः (कुटिलता, टेढापन +-धा (घारण- का राजा । (आमपात्रम्) तथा उन कौ अपरिपक्वनीति के रक्षा-पालन के साधन थे (पात्रम्) उनके रक्षक-पालक 1 कुबेरः कुवि (आच्छादने) +र तां रजतनांमिः कावेरकोऽधोक् तां तिरोधायेवार्धोक् ।११॥ (ताम्) उस इतरजनव्यवस्थारूपी विराट्-गौ को, (रजतनाभिः) ओर कुत्सित वीरता वाले कुबेर ने (अधोक् ) दोहा (ताम्) उस विराट् से

English

Come, O Māyā, come thou hither. Her dear calf was Virochana Prāhrādi: her milking vessel was a. pan of iron.

अध्याय ८

श्लोक 10.6

सोद॑क्राम॒त् सा द॑क्षिणा॒ग्नौ न्यऽक्रामत्

sodakrāmat sā dakṣiṇāgnau nya'krāmat

हिन्दी अर्थ

१. ““कावेरकः” ९2, तथा एए? पाण्डुलिपियों के भाठ । कावेरकः, यथा ““कापुरषः' । तथा “रज्तनाभिः"' दवारा यह सूचित कियाद करि नाभिनाल द्वारा कृत्सितवीर या कावीरः यथा कापुरुष । रजतन्मर्ि-- माता से जन्मलाभ करतेहीजो प्रभूत रजत आदि का स्वामी बन गयाःहै वहः। “इतरजन राज्य में कूबर था बखडा, भौर रजतनाभिः कूत्सितवीर था दोग्धा ( ईसे कुत्सितवीर दस लिये कलहा है किं इसकी वीरत;, तिरोधानः को तथा कुटिल कर्मोको दही दोहृरूप में प्राप्त करतीहै। , जीवनीयो मवति य एवं वेदं ।॥१२॥ पः पापकमों को. छिषाने रूप.में (उप) श्राश्रय मान कर (इतरजनाः) इतर- जन (जीवन्ति) जीवित रहते है, (य । जो (एवम्) इस प्रकारके तथ्य को (वेद) जानन्ञा है वहु (सवं पाप्मानम्) सब. पापों को (तिरोधत्ते) छिपाता रहता है, भ्रौर अभ्य पापियों के लिये ' (उपजीवनीयः) जीवनो का आश्रय (भवति) हो जाता है।

English

These men depend for life on corn and tillage. He who knows this becomes a meet supporter, successful in the culture of his_ corn-land. She rose, she came unto the Seven Rishis. They called her,.

अध्याय ८

श्लोक 10.6-2

(१२) बृ॒हच्च॑ रथन्त॒रं च॒ द्वौ स्तना॒वास्तां॑ यज्ञाय॒ज्ञियं॑ च वामदे॒व्यं च॒ द्वौ

(12) bṛhacca rathantaraṃ ca dvau stanāvāstāṃ yajñāyajñiyaṃ ca vāmadevyaṃ ca dvau

हिन्दी अर्थ

पास (अह्वयन्त) बुलाया किं (विषवति) है विषवाली ! (एहि) आ (इति) (कि. सपे सदश पर-छिद्रो मेःपरवेश कर उनकी हत्या के लिये, विष प्रयोग का०.८। सुर १० अथयर्ववेदभाष्प ३१७ एसे सापो के सहारे सप॑प्रकृतिक लोग जीवनचर्या करते हँ" एसे सपं ही उन के जीवनों के रक्षक ओौर पालकं होते हैँ । जलवाले, तथा (धृतरष्ट्रः). सांपप्रकृतिकों के राष्ट कोः धारण करने वाले

English

These men depend for life on corn and tillage. He who knows this becomes a meet supporter, successful in the culture of his_ corn-land. She rose, she came unto the Seven Rishis. They called her,.

अध्याय ८

श्लोक 10.6-3

।तस्मा॑द् दे॒वेभ्यो॑ऽर्धमा॒से वष॑ट्कुर्वन्ति॒ प्र दे॑व॒यानं॒ पन्थां॑ जानाति॒ य ए॒वं वेद॑

| tasmād devebhyo'rdhamāse vaṣaṭkurvanti pra devayānaṃ panthāṃ jānāti ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

उसने दोह्।, दोहरूप में प्राप्त किया । नागपुर, नागालेण्ड पदों मे “नाग” पद का. भथंहै, नाग जाति के मनुष्य को (वेद) जानता है, वहु (उषजीवनीयः) अन्यो के अर्थात अन्य विष प्रयोक्तागों के जीवनों.का भ्राश्रय (भवति). हो जाता है। ३४८ परथवगेद-भाष्य काऽ .ठ८ सू०.१९

English

These men depend for life on corn and tillage. He who knows this becomes a meet supporter, successful in the culture of his_ corn-land. She rose, she came unto the Seven Rishis. They called her,.

अध्याय ८

श्लोक 10.6-4

।तस्या॑ य॒मो राजा॑ व॒त्स आसी॑द् रजतपा॒त्रं पात्र॑म्

| tasyā yamo rājā vatsa āsīd rajatapātraṃ pātram

हिन्दी अर्थ

भ्रतिफलसरूप मे (आहन्मि) मै मार डालता हू, (इति) इपर प्रकार संकल्प कर के (प्रति) प्रतिफलरूप मे (आहन्यात्) मार डाले । ही.दाले, ताकि वह् निरभेय होकर म्रन्यों पर मी विषप्रयोग न करतः रहै । ३. मनु के श्नुसार ““शरद'' अर्थात् विषदाता भ्रातताय है भौर नुने कहा है छि “प्नाततायिनमावन्त हुन्धादेवाविचारयन्” । का०८। सू० १० अथर्ववेद-माष्य ३५६९ के विषप्रयोक्ता को, -यहु सम कर उसे मार इसे। उसे मारने ते समभना चाहिए किं विष को सदा के लिये मार दिया । जब विषप्रयोक्षता न रहा तो विष मौर विषकाप्रयोगभोन रहा। .

English

These men depend for life on corn and tillage. He who knows this becomes a meet supporter, successful in the culture of his_ corn-land. She rose, she came unto the Seven Rishis. They called her,.

अध्याय ८

श्लोक 10.6-5

।तस्या॑श्चि॒त्रर॑थः सौर्यवर्च॒सो व॒त्स आसी॑त् पुष्करप॒र्णं पात्र॑म्

| tasyāścitrarathaḥ sauryavarcaso vatsa āsīt puṣkaraparṇaṃ pātram

हिन्दी अर्थ

विपमेषास्याभियं भरात॑व्यमनुविषिष्यते य एवं वेद् ॥; रा (यः) जो (एवम्) इस प्रकार इस तथ्य को (वेद ) जामता है (अस्य हं ९ हए भी सपत्न को (एव) ही (विषम्) विष (विषिच्यतै) विशेषतया एवं वेद = मन्त्र (३) मे कथित समाधान कोजो जान त्रो उसे भी विषदेने मे शद्धुत नहीं होता, जोकरिदहैतो न

English

These men depend for life on corn and tillage. He who knows this becomes a meet supporter, successful in the culture of his_ corn-land. She rose, she came unto the Seven Rishis. They called her,.

अध्याय ८

श्लोक 10.7

।य॒ज्ञर्तो॑ दक्षि॒णीयो॒ वास॑तयो भवति॒ य ए॒वं वेद॑

| yajñarto dakṣiṇīyo vāsatayo bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

समाप्त केर देने बाले विषैले जल द्वारा । । । प्रकाशित वा प्रसारित प्रामाणिक परन्य भ्रति भाग सहस्राधिक टिप्पणियां, १०-११ प्रकारः ५ शव ४. तैत्तिरीय संहिता-पवपाठः-- ५० वषं से दुलंम ग्रन्थ का पु (+ क --श्री पं० विद्वनाथ जी वेदोपाघ्याय कृत ।,६-१०

English

He who knows this becomes a meet supporter. She rose approached the Apsarases and Gandharvas. They called her, Come to us, O

अध्याय ८

श्लोक 10.7-2

(१३) ओष॑धीरे॒व र॑थन्त॒रेण॑ दे॒वा अ॑दुह्र॒न् व्यचो॑ बृह॒ता

(13) oṣadhīreva rathantareṇa devā aduhran vyaco bṛhatā

हिन्दी अर्थ

6 काष्ड क । बीसवां काण्ड २५-००। काण्ड ७-८ छप रहा है । एवं न रिप्फणियो से युक्त । साधारण जिल्दं ३०-००, पूरे कषड ह. -परििष्ट --मूमिका पर किए गये भ्राक्षेपो ७. ॥ग्वेदादिभाष्यभूमिका ह के ग्रन्थकार द्वारा दिये उत्तर । ध मू वारिधि । सर्वाधिक शुद्ध सस्करण । वा ध

English

He who knows this becomes a meet supporter. She rose approached the Apsarases and Gandharvas. They called her, Come to us, O

अध्याय ८

श्लोक 10.7-3

(२०) सोद॑क्राम॒त् सा म॑नु॒ष्या॒३नाग॑च्छ॒त् तां म॑नु॒ष्याऽ अघ्नत॒ सा स॒द्यः सम॑भवत्

(20) sodakrāmat sā manuṣyā3nāgacchat tāṃ manuṣyā' aghnata sā sadyaḥ samabhavat

हिन्दी अर्थ

सिरमिय संस्कृत टीका सहित । टीका का पूरा पाठ प्रथम वार छापा ६ नि विजयपाल जी विद्यावारिधि । उत्तम संस्करण ३५-००; साधारण २५-०० प्रकाश साहित्यदर्पण श्रादि के समान १४. वेदसं्ञा-मीमांसा- युधिष्ठिर मीमांसक २-०० १५. वेविक-छन्दोमीमांसा -यु० मी०। नया संस्करण २५-०० १६. वदिक-स्वर-मीमांसा -यु० मी० । नया संस्करण ३०-०० १८. वेर्वो का महत्व तथा उनके प्रचार के उपायः; वेदाथ को विविष

English

He who knows this becomes a meet supporter. She rose approached the Apsarases and Gandharvas. They called her, Come to us, O

अध्याय ८

श्लोक 10.7-4

।तामन्त॑को मार्त्य॒वोऽधो॒क् तां स्व॒धामे॒वाधो॑क्

| tāmantako mārtyavo'dhok tāṃ svadhāmevādhok

हिन्दी अर्थ

२१. निरुक्तकार भ्रौर षेद में हतिहास- + „+ २-५० शरो प° धमेदेव जी निरुक्ताचायं । मूल्य २-५० कन्यतीथं लिखित वेदविषयक चतुदश-मुवन, वसिष्ठ-नन्विनी, वैदिक जो वेदोपाध्याय । बहधिया जिल्द २५-००, साधारण २०-००।

English

He who knows this becomes a meet supporter. She rose approached the Apsarases and Gandharvas. They called her, Come to us, O

अध्याय ८

श्लोक 10.7-5

।तां वसु॑रुचिः सौर्यवर्च॒सोऽधो॒क् तां पुण्य॑मे॒व ग॒न्धम॑धोक्

| tāṃ vasuruciḥ sauryavarcaso'dhok tāṃ puṇyameva gandhamadhok

हिन्दी अर्थ

२९. वेविक-पीयूष-धारा--लेखक-- श्री देवेन््कुमार जी कपुर । चुने गीतों से युक्त । उत्तम जित्द १५-००; साधारण १०-००। ३१. उरज्योति -डा० वासुदेवशरण भ्रग्रवाल लिखित वेदविषयकं ३२. वेदो कौ प्रामाणिकता--डा० श्रीनिवास शास्त्री । १-५० फमेकाण्ठ-विषयक्र अ्रन्थ ३४. बौधायन-घौत-सूत्रम्-- ( दशंपणमास प्रकरण ) - भवस्वामी तथा

English

He who knows this becomes a meet supporter. She rose approached the Apsarases and Gandharvas. They called her, Come to us, O

अध्याय ८

श्लोक 10.8

सोद॑क्राम॒त् सा स॒भायां॒ न्यऽक्रामत्

sodakrāmat sā sabhāyāṃ nya'krāmat

हिन्दी अर्थ

सायणकरृत भाष्य सहित (संस्कृत) । ४५-०० ३५. बौधायन-भौत-घुत्रम् (आधान-प्रकरण )- सुबोधिनी वृत्ति सहित । २६. दक्षपू्णमास-पद्धति पं भीमसेन कत्, भाषां सहित । २५-०० हमने इसे प्रथम बार छापा है । । २५-०० सं्लोधित संस्कारःविधिका म्राघार् बना। २०-००

English

and makes all evil disappear and vanish. She mounted up, she came unto the Serpents. The Serpents called her, Venomous! come hither.

अध्याय ८

श्लोक 10.8-2

(१४) अ॒पो वा॑मदे॒व्येन॑ य॒ज्ञं य॑ज्ञाय॒ज्ञिये॑न

(14) apo vāmadevyena yajñaṃ yajñāyajñiyena

हिन्दी अर्थ

सोमयाग, चातुर्मास्य ग्रौर वाजपेय आदि यागो का वणन है। (दोनों भाग बरृह॒द् हवन के मन्त्रौ सहित । मूल्य १-०० एेतिह्य दिया गया है (संस्कृत) सम्पादक - डा ° विजयपाल विद्यावारिषि ५८. धातुपाठ -धात्वादिसूचौ सहित, शुद्ध संस्करण । ३-५० ५९. क्षीरतरङ्किणी--क्षी रस्वामीकृत । पाणिनीय धातुपाठ की सबसे ६०. धातुप्रदौप-मेत्रेयरक्षित . विरचित पाणिनीय धातुपाठ को

English

and makes all evil disappear and vanish. She mounted up, she came unto the Serpents. The Serpents called her, Venomous! come hither.

अध्याय ८

श्लोक 10.8-3

।तस्मा॑न्मनु॒ष्ये॒ऽभ्य उभय॒द्युरुप॑ हर॒न्त्युपा॑स्य गृ॒हे ह॑रन्ति॒ य ए॒वं वेद॑

| tasmānmanuṣye'bhya ubhayadyurupa harantyupāsya gṛhe haranti ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

कागज श्रौर छपाई सुन्दर, सजिल्द २५-००। ६५. उभाविकोष-- ० द० स° कृत व्याख्या तथा प० य° मी० कृत ६६. वेवम् पुरुषकारवातिकोपेतम्-लीलाशुकमुनि कृत । १२-०० ६७. लिट् भ्रौर लुङ लकार की रूप-बोधक सरलविषि-- ४५-००

English

and makes all evil disappear and vanish. She mounted up, she came unto the Serpents. The Serpents called her, Venomous! come hither.

अध्याय ८

श्लोक 10.8-4

।तां स्व॒धां पि॒तर॒ उप॑ जीवन्त्युपजीव॒नीयो॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑

| tāṃ svadhāṃ pitara upa jīvantyupajīvanīyo bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

७१. शाब्बरूपावलौ-- विना रटे शब्दरूपो का ज्ञान कराने वाली ३-५० ७२. संस्कृत-धातुकोक्ष- पाणिनीय धातु्रों का हिन्दी में भ्रथं निदेश । छपाई, उत्तम कागज, बदिया जिल्द सहित । मूल्य ५०-०० विषय परिपणे महत्त्वपूणे भूमिका छपी है । मूल्य ५०-०० प्रतिपादन करने वाला दानिक ग्रन्य 1 मूल्य ४०-०० अग्रजी व्याख्या सहित । मूल्य ईशो० २-००; केनो० २-००; कठो० ४-००

English

and makes all evil disappear and vanish. She mounted up, she came unto the Serpents. The Serpents called her, Venomous! come hither.

अध्याय ८

श्लोक 10.8-5

।तं पुण्यं॑ ग॒न्धं ग॑न्धर्वाप्स॒रस॒ उप॑ जीवन्ति॒ पुण्य॑गन्धिरुपजीव॒नीयो॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑

| taṃ puṇyaṃ gandhaṃ gandharvāpsarasa upa jīvanti puṇyagandhirupajīvanīyo bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

9. मानवता कौ श्रोर--श्री शान्तिस्वरूप कपुर के विविध विचारो- तजक सरल भाषा मे लिखे गये लेखो का संग्रह । ५-०० सहिते । सुन्दर काण्ड २०-०० युद्धकाण्ड १२-०० स्वती । विस्तृत विषय-सूची तथा शलोक-पची सहित । उत्तम कागज, सून्दर ६०. विदुर-नोति -पं° युधिष्ठिर मीमांसक करत प्रतिपद पदाथं भौर

English

and makes all evil disappear and vanish. She mounted up, she came unto the Serpents. The Serpents called her, Venomous! come hither.

अध्याय ८

श्लोक 10.9

।यन्त्य॑स्य स॒भां सभ्यो॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑

| yantyasya sabhāṃ sabhyo bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

नया परिष्कृत परिवधित संस्करण । तीनो भागों का मूल्य १२५-०० ९३. ऋषि दयानन्द के पत्र भ्रौर विज्ञापन-इस बार इसमे ऋषि दयानन्द के अनेक नये उपलब्ध प श्रौर विज्ञापन संगृहीत किय गये हु। शस बार यह संग्रह चार भागो मे छपा है प्रथम दो भागोंमें ऋ° द के पत्र बौर विज्ञापन भादि संगृहीत है । तीसरे मौर चौथे भाग मे विविध ६४. विरजानन्द प्रकाड--लेखक-पं° -पीमसेन शास्त्री एम ए०) नया परिवर्धित ओौर शुद्ध संस्करण। मूल्य ४.०० द्विष्टे के सहित । मूल्य ४०-५० १०५. भागवत-खण्डनम्-ऋ० द० की प्रथमङ़ृति । श्रनुवादक

English

The poison that it drives away, that poison verily repels. The man who hath this knowledge pours its venom on his hated foe. 137

अध्याय ८

श्लोक 10.9-2

(१५) ओष॑धीरे॒वास्मै॑ रथन्त॒रं दु॑हे॒ व्यचो॑ बृ॒हत्

(15) oṣadhīrevāsmai rathantaraṃ duhe vyaco bṛhat

हिन्दी अर्थ

१०६. ऋषि दयानन्द के दास्तां नोर प्रवचन इसमे पौराणिक विद्वानों तथा ईसाई मुसलमानों के साथ हए ऋ° द° के शास्त्राथे तथा पूना संग्रह है । उत्तम कागज, कपड़े को जिल्द । मूल्य ३५-०० १०६. ऋषि दयानन्द सरस्वती के ग्रन्थों का इतिहास लेखक-- युधिष्ठिर मीमांसक । नया परिशोधित परिवर्धित संस्करण । ४०-०० ११०. व्यवहारभानु - ऋषि दयानन्द कृत । +

English

The poison that it drives away, that poison verily repels. The man who hath this knowledge pours its venom on his hated foe. 137

अध्याय ८

श्लोक 10.9-3

(२३) सोद॑क्राम॒त् सा म॑नु॒ष्या॒३नाग॑च्छ॒त् तां म॑नु॒ष्या॒३ उपा॑ह्वय॒न्तेरा॑व॒त्येहीति॑

(23) sodakrāmat sā manuṣyā3nāgacchat tāṃ manuṣyā3 upāhvayanterāvatyehīti

हिन्दी अर्थ

खण्डन श्री पं० महाराणी शंकर । अपने विषय की सुन्दर सामयिक पुस्तक । हः ), ॐ „ (अक्षेपों के उत्तरं सहित) मूल्य ८-०० वेद में इतिहास है वा नहीं' विषय पर लाहौर में सन् १६३३ मे म० हंस राज जी के सभापतित्वमे हुआथा1 । छ्मप्राप्य ३६ वषो से विना नागा नियत समय प्रकाशित होने वाली वेदादि पूणं विषय पर एक बृहद् षिशेषांक दिया जाता है । वार्षिके चन्दा १५-०० रपये म।तर । विदेशों के लिये ४०-०० रुपया वार्षिक ।

English

The poison that it drives away, that poison verily repels. The man who hath this knowledge pours its venom on his hated foe. 137

अध्याय ८

श्लोक 10.9-4

(२७) सोद॑क्राम॒त् सेत॑रज॒नानाग॑च्छत् तामि॑तरज॒ना उपा॑ह्वयन्त॒ तिरो॑ध॒ एहीति॑

(27) sodakrāmat setarajanānāgacchat tāmitarajanā upāhvayanta tirodha ehīti

हिन्दी अर्थ

बहालगटू, जिका सोनीपत (हरयाणा) १३१०२१ पद पर नियुक्त तथा सन् १९४२ मे वहाँ से सेवामुक्त हुए। अनुसन्धान - सन् १९२३-२४ मे परोपकारिणी सभा अजमेर मे। सन् १९५६-५७ आर्य सार्वदेशिक वाटिका में साथ ही ' वैदिक अनुसन्धान ' त्रैमासिक पत्रिका का सम्पादन भी। अन्य लेखन- ९. सामवेद का आध्यात्मिक भाष्य। रहन के कारण आपको ४ स्वर्णपदक ओर एक रजतपदक प्राप्त हुआ।

English

The poison that it drives away, that poison verily repels. The man who hath this knowledge pours its venom on his hated foe. 137

अध्याय ८

श्लोक 10.10

सोदक्राम॒त् सा समि॑तौ॒ न्यऽक्रामत्

sodakrāmat sā samitau nya'krāmat

हिन्दी अर्थ

कामानस्माकं पूरय परति ग्रृह्वाहि नौ हविः ॥१३॥ हे एकाष्टके ! तु (प्रजापतेः) प्रजाओं के पति परमेश्वर की (दुहिता असि) श्रौर (नः) हमारी (हविः) हवि को (प्रति गृह्णाहि) स्वीकारकर। हँ नवीन वषं ४ वषं भर होनी वाली मानुषी कामनाएं । वे अव्याहतरूप में पूरी होती रहँ इस निमित्त, हविर्यज्ञ करते रहने का निर्देश हृभा है ताकरि वायु भादि की शुद्धि ग्रौर सम्पुष्टि होती रहे ।

English

We, Kagyapa! six present Rishis, ask thee—for thou hast prov- ed things tried and meet for trial

अध्याय ८

श्लोक 10.10-2

(१६) अ॒पो वा॑मदे॒व्यं य॒ज्ञं य॑ज्ञाय॒ज्ञियं॒ य ए॒वं वेद॑

(16) apo vāmadevyaṃ yajñaṃ yajñāyajñiyaṃ ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

३२६ श्रथववेद-भाष्य कान सू० १० गन्धरवाप्सिरसराज्य गन्धवं हैँ गौः पृथिवी के धारकं राजा लोग, जिन्हे कि ""पाधिवाः" कहते है, रौर अप्सरसः हँ जल तथा अन्तरिक्ष कौ (३) इतरजनराज्य । इतरजन है ( आधिभौतिकाथं) गन्धर्वा्सराजं त सिन्त प्रकार के छलौ-कपटी लोग । विराट्-गौ है तिरोधा । वश्रवण ताण का साधन । रजतनाभि कविरक है विराट्-गौ का दोहन-कर्ता । दोहा-दूध है तिरोधा, छ्लकपट, पापों को छिपाना ।

English

We, Kagyapa! six present Rishis, ask thee—for thou hast prov- ed things tried and meet for trial

अध्याय ८

श्लोक 10.10-3

।तस्या॒ मनु॑र्वैवस्व॒तो व॒त्स आसी॑त् पृथि॒वी पात्र॑म्

| tasyā manurvaivasvato vatsa āsīt pṛthivī pātram

हिन्दी अर्थ

थी,.गृह् नहीं तो उस का अधिपतिभमीन था,भ्रौर न पति-पत्नी भावक ३२८ प्रथ्वेवेद-भाष्य का०८॥। सू १० पद भूतकाल केह, रतः तदनुसार अथं दर्शाए है, वस्तुतः, अभिप्राय सावतिक होते है । छन्दसि लुड. लड लिटः (भ्रष्टा ° ३।४।६ ) । गृहमेधी गृहपंतिभवति य एवं वेदं ॥२॥

English

We, Kagyapa! six present Rishis, ask thee—for thou hast prov- ed things tried and meet for trial

अध्याय ८

श्लोक 10.10-4

।तस्याः॒ कुबे॑रो वैश्रव॒णो व॒त्स आसी॑दामपा॒त्रं पात्र॑म्

| tasyāḥ kubero vaiśravaṇo vatsa āsīdāmapātraṃ pātram

हिन्दी अर्थ

उन देवों का (प्रियः) प्यारा (भवति) हो जाता है (यः) जो (एवम्) इस प्रकार की श्राहवनीय व्यवस्था को (वेद) जानता है। एकत्रित कर, निज पारस्परिक जीवनों को सुखी बनाने के लिये, आहवनीय का०८। सु० १० अथववैद-माधष्य २२६ बन जाता है, श्रीर वे आहूत देव इसे भ्राहवनीय व्यवस्था का मुखिया चुन लेते है, यह् भावना मन्त्र मे निहित दहै! यह भावना अगले मन्वोंदयारा जीवन फो अपनाया भौर जाङ्खलिक जीवन को त्याग कर पति-पली

English

We, Kagyapa! six present Rishis, ask thee—for thou hast prov- ed things tried and meet for trial

अध्याय ८

श्लोक 10.11

।यन्त्य॑स्य॒ समि॑तिं सामि॒त्यो भ॑वति॒ य ए॒वं वेद॑

| yantyasya samitiṃ sāmityo bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

देवकोटि के रमणी ही होते तथा इनमें परस्पर सगम होता है, समभ्र जिला के निवासियों के हितकर कार्योके लिये । आगामी मन्त्रों मे उक्त तीन संस्थायो का वणेन हरा है । सोदक्राम॒त् सा सभायां न्यकरामत् ॥८॥ (यः) जो (एवम्) एस प्रकार (वेद) सभा-संस्था के महत्व को जानता सभासद् होकर सभा का सभापति हो जाता है। (दुहितरौ) तुम दोनों सभा, समिति दुहिता के सदृश कामनाओंका दोहन करने वाली हो, (संविदाने) तुम दोनों सम्यक् ज्ञानी हो, परस्पर ेकमत्य होकर कामनाओं का दोहन करो । (येन) तुममेंसे जिस किसीके साय (संगच्छ) मेँ सभा-समिति का पति संगकरू । (सः) वह् (मा) मुभे (उपशिक्षात्) मेरे समीप प्राकर परामशं प्रदान करे। । ( पितरः) हे

English

Who knows her steps, how oft, how far extended, who knows her home and number of her dawnings?

अध्याय ८

श्लोक 10.11-2

।तां पृथी॑ वै॒न्योऽधो॒क् तां कृ॒षिं च॑ स॒स्यं चा॑धोक्

| tāṃ pṛthī vainyo'dhok tāṃ kṛṣiṃ ca sasyaṃ cādhok

हिन्दी अर्थ

समिति का वर्णन मन्त्र (१०; ११) में होगा । यह समिति राजसमा है । “सभ्य सभां मे पाहि ये च सभ्याः सभासदः'” (अथवं० १६।५५।५), प्रजापति राजा कहता है कि “है सभ्य 1 अर्थात् सभापति ! तथाह सभा मे उपस्थित सभासदों ! तुम मिलकर मेरी समाकौ रक्षा करो । यह् सभा- पति समभा का संचालक है, जो कि प्रजापति द्वारा नियत क्रिया जाता है । संगतेषु = समा ओर समिति के संधुक्त श्रपिवेशनों को “संगत'' कहा है । सोदकरामत् सा सातो स्य क्रामत् ॥१०॥ को (वेद) जानता है वह (सामित्यः) समिति का समितिपति (भवति) हो जाता है, (अस्य) मौर इस की (समितिरौ समितिमे (यन्ति) राजा

English

Who knows her steps, how oft, how far extended, who knows her home and number of her dawnings?

अध्याय ८

श्लोक 10.11-3

।तां र॑ज॒तना॑भिः काबेर॒कोऽधो॒क् तां ति॑रो॒धामे॒वाधो॑क्

| tāṃ rajatanābhiḥ kāberako'dhok tāṃ tirodhāmevādhok

हिन्दी अर्थ

समिति है राजसभा, राजाभों की समा । यथा “यत्रौषधीः समग्मत १२।८०), अर्थात् जिस में ओषधियों का संगम होता है, जेसे कि राजाथों रोगोत्पादक क्रिमिरूपराक्षसों का हनन करता है, ओर अमौवाग्रों का विनाश करता है । अमीवा अम रोगे (चुरादिः) । इस प्रकार यजुवद मे भिषक् के लक्षण में, समिति में राजाओं का संगम दशया दहै । समिति में रष्टरों के राजा एकत्रित होते ह! यह् है "राजसभा" वेदानुसार राष्ट के राजा वंशानुगत नहीं ह अपितु प्रादेशिक प्रजाभं दारा चुने" गए होतेहँ। (अथवं० ६।८७।१; ४।८।४) । यजुर्वेद के “युद्धमिति” अथं प्रायः किया जाता है । यहं ठीक नहीं प्रतीत होता ।

English

Who knows her steps, how oft, how far extended, who knows her home and number of her dawnings?

अध्याय ८

श्लोक 10.12

सोद॑क्राम॒त सामन्त्र॑णे॒ न्यऽक्रामत्

sodakrāmata sāmantraṇe nya'krāmat

हिन्दी अर्थ

जघ राजसमिति का निर्माण हो जाता है, तब राष्टू-समा प्रौर राज-समिति मिल कर “सम्राट्” का चनाव करती है । इसलिये कहा है “ये राजानो राजकृतः" करते हं, “राजानं कुवेन्तीति राजकृतः” 1 (मन्व १) का अंश भी सम्भावित विद्यमान रहता है ।

English

dwelling. Sūrya’s two wives, unwasting, most prolific, knowing their way, move, rich in light, together. The three have passed along the path of Order—three warm libations have regarded offspring

अध्याय ८

श्लोक 10.12-2

।ते कृ॒षिं च॑ स॒स्यं च॑ मनु॒ष्या॒३उप॑ जीवन्ति कृ॒ष्टरा॑धिरुपजीव॒नीयो॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑

| te kṛṣiṃ ca sasyaṃ ca manuṣyā3upa jīvanti kṛṣṭarādhirupajīvanīyo bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

कहलाता है । सम्राट् संगत हुए राजाश्रों की संस्था। यजुवेदमें कहा कि का० ८ सु० १० श्रथवेवेद-भाष्य ३३३ तां देवमनुष्था अघ्रुवन्नियमेव तद् वेद यदुभयं उपजीेमेमामुपं के आश्रय पर (उभये) हम दोनों देव, मनुष्य (उप जीवेम) जीवित हो सकते हँ । अतः (इमाम्) इसे (उप) समीप (ह्वयामहे) हम बृलाते है । देवाः विद्वांसो वै देवाः । मनुष्य! = मननशील सवंसाधारण मनुष्य । विध प्रजां का पत्ति । “वरुणदच राजा” में राजा कौ वर्ण कहा है, यतः राजा

English

dwelling. Sūrya’s two wives, unwasting, most prolific, knowing their way, move, rich in light, together. The three have passed along the path of Order—three warm libations have regarded offspring

अध्याय ८

श्लोक 10.12-3

तां ति॑रो॒धामि॑तरज॒ना उप॑ जीवन्ति॒ ति॒रो ध॑त्ते॒ सर्वं॑ पा॒प्मान॑मुपजीव॒नीयो॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑

tāṃ tirodhāmitarajanā upa jīvanti tiro dhatte sarvaṃ pāpmānamupajīvanīyo bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

३३४ भ्रथववेद-माष्य का० ८ सु० १० हे स्वधारण-पोषण की शक्ति देने वाली विराट् (एहि) तु भ्रा, (सूनृते) हे देवों ओर मनुष्यों ने श्रनुभव किया कि हम दोनों के जीवन इसी विराट् पर भाश्ित रह, अतः इस का उन दोनों ने स्वागत करते हुए कहा (मन्व ४) कि सब को प्रात होता है। इरावती = इरा श्रन्ननाम (निघं० २।७) ; इरा जल-

English

dwelling. Sūrya’s two wives, unwasting, most prolific, knowing their way, move, rich in light, together. The three have passed along the path of Order—three warm libations have regarded offspring

अध्याय ८

श्लोक 10.13

।(६) यन्त्य॑स्या॒मन्त्र॑णमामन्त्र॒णीयो॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑

|(6) yantyasyāmantraṇamāmantraṇīyo bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

द्वारा बान्धकर दोहा जाता है, ताकि वहु इधरुूउधर विचलित नहो सके । गौ, विना वत्स के दूध नहीं देती । विराट् गौ का वत्स है विद्यत । “यो गायव्याः अधिपति्बेभूव (अथवं० ४।३५।६) । वह् परमेश्वर अभि का० ८ । सू० १० मथववंवेद-माष्य ३३५ गौ के चार स्तन होते है। बृहत् श्रादि चारको विराटू-गौ के चार ओषधीरेव रंथन्तरेणं देवा अंदृहन् व्यचो बहुता ॥७॥

English

The five sky-regions made fifteen in number, one head have these to one sole world directed. Six Elements arose, first-born of Order: the six-day time is carried by six Sāmans.

अध्याय ८

श्लोक 10.13-2

(२४) सोद॑क्राम॒त् सा स॑प्तऋ॒षीनाग॑च्छ॒त् तां स॑प्तऋ॒षय॒ उपा॑ह्वयन्त॒ ब्रह्म॑ण्व॒त्येहीति॑

(24) sodakrāmat sā saptaṛṣīnāgacchat tāṃ saptaṛṣaya upāhvayanta brahmaṇvatyehīti

हिन्दी अर्थ

(देवाः) देवों ने (रथंतरेण) रथंतर द्वारा (श्रोषधीः एव) ओषधियों अपो वामदेव्येन यन्न॒ यन्ञायश्ियैन ॥८॥ चार स्तनो से हुआ कहा है 1 सम्भवतः एक-एक स्तन से एक-एक ओषधि आदि का दोहन । ये चार फल हँ “विराट् रूपी गौ" से प्राप्त । रथंतर है पृथिवी, जिसमें रथों द्वारा मगेरूपी समुद्र तेरा जाता है।

English

The five sky-regions made fifteen in number, one head have these to one sole world directed. Six Elements arose, first-born of Order: the six-day time is carried by six Sāmans.

अध्याय ८

श्लोक 10.13-3

(२८) सोद॑क्राम॒त् सा स॒र्पानाग॑च्छ॒त् तां स॒र्पा उपा॑ह्वयन्त॒ विष॑व॒त्येहीति॑

(28) sodakrāmat sā sarpānāgacchat tāṃ sarpā upāhvayanta viṣavatyehīti

हिन्दी अर्थ

३३६ श्रथववेद-भाष्य का०८। सू० १० जीवन साधन, विराट्-गौ के दुग्धरूप हु । ओषधीरेवास्मै रथंतरं है भ्यचों बृहत् ॥९॥ अपो वामदेव्ये य॒त यज्ञायज्ञियं य एवं वेदं ॥१०॥ (अस्मे) इसके लिये (रथंतरम्) रथंतर स्तन पृथिवी (ओषधीः एव) भरोषधियों का ही (दुहे) दोहन करती है (बृहत्) बृहत् स्तन (व्यचः') स्तन (अपः) जल का दोहन करता है, (यज्ञायज्ञियं) ओर यज्ञायसिय स्तन (यज्ञम) यज्ञका दोहन करता है, (यः) जो कि (एवम्) इस प्रकार श्रोषधि आदि का जीवन के साधन वेद) जानता है।

English

The five sky-regions made fifteen in number, one head have these to one sole world directed. Six Elements arose, first-born of Order: the six-day time is carried by six Sāmans.

अध्याय ८

श्लोक 10.14

।तस्याः॒ सोमो॒ राजा॑ व॒त्स आसी॒च्छन्दः॒ पात्र॑म्

| tasyāḥ somo rājā vatsa āsīcchandaḥ pātram

हिन्दी अर्थ

गौ के1 ओौर ग्रोषधि भादि चार दुग्धरूपर्ह, विराटरूपीगौके। जो का० = सु० १० प्रथर्ववेद-भाष्य २३७ वृष्चतेस्यामिंषो भाव्यो य णवं वेद् ॥२॥ परोहित हौ जाता है । (यः) जो (एवम्) इस तथ्य को (वेद) जानता हे

English

redundant? Seven sages, eagles, have sat down together: seven metres match the seven Consecrations.

अध्याय ८

श्लोक 10.14-2

।तस्या॑स्तक्ष॒को वै॑शले॒यो व॒त्स आसी॑दलाबुपा॒त्रं पात्र॑म्

| tasyāstakṣako vaiśaleyo vatsa āsīdalābupātraṃ pātram

हिन्दी अर्थ

तियो के कटे अंश भी प्ररोहितहोजतेहैँ तौ वह भी निज मनोभावनाभं के कटु अंशो मे सुधार करता है, ओर उसके मन का मालिन्य अर्थात् पाप भी कट जाता है । “धातृव्य”” पद मनोगत “पाप” को सूचित करता है । णेति तुपचारात्” (भटोजदीक्षित कोमुदी, अष्टा० ४।१।१४५)। भभिप्राय जीवन को समूक्नत करता रहता है । यथपि दो मासो की एक ऋतु होती है । तो भी ऋतु केदोमासोग्में से प्रत्येक मास में विराट् प्रकट होती है। (मास्यम्) मासमे देय हविः (उप ददति) उपहाररूप मे देते है, वह् (पितुयाणम् पन्थाम्) पितृयाणः नामक मागे को ( प्रजानाति) जानता है (यः) जो (एवम्) इस प्रकार ऋतुप्रों के स्वरूप को (वेद) जानता है । सोदंकामत् सा देवानाग॑च्छत् तां देवा अघ्नत साधेभासे

English

redundant? Seven sages, eagles, have sat down together: seven metres match the seven Consecrations.

अध्याय ८

श्लोक 10.15

।तां बृह॒स्पति॑राङ्गिर॒सोऽधो॒क् तां ब्रह्म॑ च॒ तप॑श्चाधोक्

| tāṃ bṛhaspatirāṅgiraso'dhok tāṃ brahma ca tapaścādhok

हिन्दी अर्थ

२. बैदिक साहित्य मे प्रत्येक मास कोभी छतु कहा है 1 यथा ““मधुरच माघव- प्रतः दो मास को सुचित करते । दसी प्रकार देखो (यजु° १४।१६; १४। २७) । फा०८। सूु० १० प्रथववेद-माष्य ३३६ (अधंमासे) श्रधंमास मे (सम्, अभवत्) प्रकट हुई !

English

Vultures. Seven metres, by four syllables increasing, each of the seven founded upon another

अध्याय ८

श्लोक 10.15-2

तां धृ॒तरा॑ष्ट्र ऐराव॒तोऽधो॒क् तां वि॒षमे॒वाधो॑क्

tāṃ dhṛtarāṣṭra airāvato'dhok tāṃ viṣamevādhok

हिन्दी अर्थ

चन्द्रमा देवता...” (यजु० १४।२० । अतः चन्द्रमा कौ कलाएं भी, (तस्मात्) इसलिये (देवेभ्यः) देवों के प्रति (अधंमासे) अघेमास में (देवयानं पन्थाम्) “देवयान” नामक मागं को (प्रजानःति) जानता है (यः) जो कि (एवम्) इस प्रकार के तत्त्व को (वेद) जानता है । दिन (उप हरन्ति) उपहाररूप में अन्न लाते है, (भस्य) इसके (गृहे) घर मे (उप हरन्ति) उपहाररूप मे भन्न लाते रहै (यः) जो (एवम्) स प्रकार (वेद) जानता है । के. लिये दिन मे एकं बार भोजन करने का निर्दश हृञा है । एकवार प्रति- दन भोजन करने पर सुपच होकर अगले दिन भूख चमक उटती है, तब पूनः भोजन करने पर कोष्ठबद्धता आदि की शिकायत नहीं रहती, शरीर

English

Vultures. Seven metres, by four syllables increasing, each of the seven founded upon another

अध्याय ८

श्लोक 10.16

।तद् ब्रह्म॑ च॒ तप॑श्च सप्तऋ॒षय॒ उप॑ जीवन्ति ब्रह्मवर्च॒स्युऽपजीव॒नीयो॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑

| tad brahma ca tapaśca saptaṛṣaya upa jīvanti brahmavarcasyu'pajīvanīyo bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

मे “अहरहः” पाठ है, जिस का अथं है दिन-प्रतिदिन । मन्त्र ४ श्रौर में मास भौर भ्रधेमासमें हविः देने का विधन, ओौर मन्त्र में प्रतिदिन एक वार मनुष्य को भोजनाहुति देने का संकेत हआ है । “उभयद्युः” का श्रभिप्राय है दो लगातार दिन । अर्धात् एक दिन भोजन लेकर उसके अगले दिन भी भोजन लेना चाहिए, बीच के व्यवधान न हैना चाहिए, अन्यथा निर्बलता असरों ने (उपाह्वयन्त) श्रपनै समीप बुलाया कि (माये) है माया ! (एहि) आ, (इति) इस प्रकार । का० ८ । सू० १० अथवेवेद-माष्य ३४१ असुर है प्राण" के ओौर धनः के अनुयायी, जो कि निज प्राणों के पोषण ओर धनाजेन को जीवन का ध्येय समभते हँ । उन्होने विराट् को श्रपने पास बुलाया, प्रौर वह् मायारूप मे उनके पास ्राई। भाया है प्रकृति को “असुराः'” कहा है, ये प्राकृतिक उन्नति को निज ध्येय जानते हँ । आसुरः

English

How are the hymns of praise on these supported, and how are these imposed upon the praise songs? How hath the Gāyatri filled out three triads? On the fifteen how is the Trishtup moulded, Jagatī fashioned on the three-and-thirty? How is Anushtup formed? how Ekavinsa?

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Atharva Veda — Chapter 8
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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