Brahma Purana· Brahma Purāṇa
144
अध्याय 144 / 246

Adhyaya 144

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अध्याय १४४

श्लोक 1

परुष्णीसंगमं चेति तीर्थं त्रैलोक्यविश्रुतम् तस्य स्वरूपं वक्ष्यामि शृणु पापविनाशनम्

paruṣṇīsaṃgamaṃ ceti tīrthaṃ trailokyaviśrutam tasya svarūpaṃ vakṣyāmi śṛṇu pāpavināśanam

हिन्दी अर्थ

नारदजीने कहा--सुरत्रेष्ठ! एक ही गङ्गाके सुनकर महर्षि वसिष्ठने कुछ कालतक ध्यान आपने दो भेद बतलाये हैं। एक तो वह है, जो किया। उसके बाद राजासे कहा--'राजन्! तुम

English

Goddess Ganga stationed in your water-jar increased your merit. O lord, tell me in detail how it came to the mortal world.

अध्याय १४४

श्लोक 2

अत्रिर् आराधयाम् आस ब्रह्मविष्णुमहेश्वरान् तेषु तुष्टेषु स प्राह पुत्रा यूयं भविष्यथ

atrir ārādhayām āsa brahmaviṣṇumaheśvarān teṣu tuṣṭeṣu sa prāha putrā yūyaṃ bhaviṣyatha

हिन्दी अर्थ

गौतम नामक ब्राह्मणके द्वारा लाया गया और दूसरा अंश भगवान् शंकरको जटामें ही रह गया, जिसे क्षत्रिय राजा भगीरथ ले आये। अतः उसीका प्रसङ्ग मुझे सुनाइये ।

English

On seeing his prosperity increased Devas became wor¬ ried. They spoke to one another, "How will we conquer Bali?"

अध्याय १४४

श्लोक 3

तथा चैका रूपवती कन्या मम भवेत् सुराः तथा पुत्रत्वम् आपुस् ते ब्रह्मविष्णुमहेश्वराः

tathā caikā rūpavatī kanyā mama bhavet surāḥ tathā putratvam āpus te brahmaviṣṇumaheśvarāḥ

हिन्दी अर्थ

ब्रह्माजी बोले--देवर्षे! वैवस्वत मनुके वंशमें राजा इक्ष्वाकुके कुलमें सगर नामके एक अत्यन्त धार्मिक राजा हो गये हैं। वे यज्ञ करते, दान देते और सदा धार्मिक आचार-विचारसे रहते थे।

English

Devas did not have place or happiness because they were pierced by the arrows of his prosperity; they were severed by the sword of his renown, their limbs were cut by the spear of his command.

अध्याय १४४

श्लोक 4

कन्यां च जनयाम् आस शुभात्रेयीति नामतः दत्तः सोमो ऽथ दुर्वासाः पुत्रास् तस्य महात्मनः

kanyāṃ ca janayām āsa śubhātreyīti nāmataḥ dattaḥ somo 'tha durvāsāḥ putrās tasya mahātmanaḥ

हिन्दी अर्थ

उनके दो पत्तियाँ थीं। वे दोनों ही पतिभक्ति- परायणा थीं, किंतु उनमेंसे किसीको भी संतान न हुई। इसलिये राजाके मनमें बड़ी चिन्ता थी। एक दिन उन्होंने महर्षि वसिष्ठको अपने घर बुलाया

English

Keeping their jealousy in front they talked to one an¬ other. With their body set ablaze by the fire of his fame they were agitated. They approached Visnu.

अध्याय १४४

श्लोक 5

अग्नेर् अङ्गिरसो जातो ह्य् अङ्गारैर् अङ्गिरा यतः तस्माद् अङ्गिरसे प्रादाद् आत्रेयीम् अतिरोचिषम्

agner aṅgiraso jāto hy aṅgārair aṅgirā yataḥ tasmād aṅgirase prādād ātreyīm atirociṣam

हिन्दी अर्थ

और विधिपूर्वक उनको पूजा करके पूछा-- किस उपायसे मुझे संतान होगी ?' उनकी यह बात

English

O lord of the worlds, O lord holding conch, discus and club, we are distressed. Your lordship always holds weapons for our sake.

अध्याय १४४

श्लोक 6

अग्नेः प्रभावात् परुषम् आत्रेयीं सर्वदावदत् आत्रेय्य् अपि च शुश्रूषां कुर्वती सर्वदाभवत्

agneḥ prabhāvāt paruṣam ātreyīṃ sarvadāvadat ātreyy api ca śuśrūṣāṃ kurvatī sarvadābhavat

हिन्दी अर्थ

पत्नीसहित सदा ऋषि-महर्षियोंका सेवन करते रहो।' याँ कहकर महर्षि वसिष्ठ अपने आश्रमको चले गये। एक समयकी बात है-राजर्षि सगरके घरपर एक तपस्वी महात्मा पधारे। राजाने उन

English

On hearing these words, the slayer of the asuras spoke with reference to the tasks of the Devas.

अध्याय १४४

श्लोक 7

तस्याम् आङ्गिरसा जाता महाबलपराक्रमाः अङ्गिराः परुषं वादीद् आत्रेयीं नित्यम् एव च

tasyām āṅgirasā jātā mahābalaparākramāḥ aṅgirāḥ paruṣaṃ vādīd ātreyīṃ nityam eva ca

हिन्दी अर्थ

महर्षिका पूजन किया। इससे संतुष्ट होकर वे बोले--' महाभाग! वर माँगो।' यह सुनकर राजाने पुत्र होनेके लिये प्रार्थना को। मुनि बोले- “तुम्हारी एक पल्लीके गर्भसे एक ही पुत्र होगा,

English

After saying "so be it" Devas went to heaven. The holy lord, the lord of Devas entered the womb of Aditi. 1

अध्याय १४४

श्लोक 8

पुत्रास् त्व् आङ्गिरसा नित्यं पितरं शमयन्ति ते सा कदाचिद् भर्तृवाक्याद् उद्विग्ना परुषाक्षरात् कृताञ्जलिपुटा दीना प्राब्रवीच् छ्वशुरं गुरुम्

putrās tv āṅgirasā nityaṃ pitaraṃ śamayanti te sā kadācid bhartṛvākyād udvignā paruṣākṣarāt kṛtāñjalipuṭā dīnā prābravīc chvaśuraṃ gurum

हिन्दी अर्थ

किंतु वह वंशधर होगा; और दूसरी स्त्रीके गर्भसे साठ हजार पुत्र उत्पन्न होंगे।' वरदान देकर जब मुनि चले गये, तब उनके कथनानुसार यथासमय राजाके हजारों पुत्र हुए। राजा सगरने उत्तम

English

The mother of gods.

अध्याय १४४

श्लोक 9

अत्रिजाहं हव्यवाह भार्या तव सुतस्य वै शुश्रूषणपरा नित्यं पुत्राणां भर्तुर् एव च

atrijāhaṃ havyavāha bhāryā tava sutasya vai śuśrūṣaṇaparā nityaṃ putrāṇāṃ bhartur eva ca

हिन्दी अर्थ

दक्षिणासे युक्त बहुतेरे अश्वमेध-यज्ञ किये। फिर एक अश्वमेध-यज्ञके लिये उन्होंने विधिपूर्वक

English

The dwarf incarnation of Vi?QU.

अध्याय १४४

श्लोक 10

पतिर् मां परुषं वक्ति वृथैवोद्वीक्षते रुषा प्रशाधि मां सुरज्येष्ठ भर्तारं मम दैवतम्

patir māṃ paruṣaṃ vakti vṛthaivodvīkṣate ruṣā praśādhi māṃ surajyeṣṭha bhartāraṃ mama daivatam

हिन्दी अर्थ

भागीरथी गङ्गाके अवतरणकी कथा ९५५

English

Subjects necessary for the study and proper understanding of the Vedas, eg. £ikfa (Phonetics), Nirukta (Etymology) etc.

अध्याय १४४

श्लोक 11

अङ्गारेभ्यः समुद्भूतो भर्ता ते ह्य् अङ्गिरा ऋषिः यथा शान्तो भवेद् भद्रे तथा नीतिर् विधीयताम्

aṅgārebhyaḥ samudbhūto bhartā te hy aṅgirā ṛṣiḥ yathā śānto bhaved bhadre tathā nītir vidhīyatām

हिन्दी अर्थ

दीक्षा ग्रहण को और अश्वको रक्षाके लिये इसका वध कर डालें।' फिर क्या था, वे मुनिको सेनासहित अपने पुत्रोंको नियुक्त किया। अश्व कटु वचन सुनाते हुए लातोंसे मारने लगे।

English

A priest officiating at a Vedic sacrifice. There are usually four such

अध्याय १४४

श्लोक 12

आग्नेयो ऽग्निं समायातो तव भर्ता वरानने तदा त्वं जलरूपेण प्लावयेथा मदाज्ञया

āgneyo 'gniṃ samāyāto tava bhartā varānane tadā tvaṃ jalarūpeṇa plāvayethā madājñayā

हिन्दी अर्थ

पृथ्वीपर भ्रमण करने लगा। इसी बीचमें कहीं इससे मुनिश्रेष्ठ कपिलको बड़ा क्रोध हुआ। अवसर पाकर इन्द्रने उस अश्वको हर लिया और उन्होंने सगरपुत्रोंको ओर रोषपूर्ण दृष्टिसे देखा रक्षकोंको सौंप दिया। राजकुमार घोड़ेको इधर- और भस्म कर डाला। वे सब-के-सब जलकर उधर ढूँढने लगे, परंतु कहीं भी वह उन्हें दिखायी राख हो गये। नारद! यज्ञमें दीक्षित महाराज सगरको

English

So addressed by Sukra, his priest, Bali, accompanied by his wife, went to that place where the leading brahmin Vamana, the son of Aditi, was present.

अध्याय १४४

श्लोक 13

सहेयं परुषं वाक्यं मा भर्ताग्निं समाविशेत् भर्तरि प्रतिकूलानां योषितां जीवनेन किम्

saheyaṃ paruṣaṃ vākyaṃ mā bhartāgniṃ samāviśet bhartari pratikūlānāṃ yoṣitāṃ jīvanena kim

हिन्दी अर्थ

न दिया। तब उन्होंने देवलोकमें जाकर ढुँढा, इन सब बातोंका पता न लगा। उस समय तुमने पर्वतों और सरोवरोंमें खोजा और कितने हीही जाकर सगरको यह सब समाचार सुनाया। जङ्गल छान डाले; मगर कहीं भी उसका पता न इससे राजाको बड़ी चिन्ता हुई। अब क्या करना लगा। इसी समय आकाशवाणी हुई--' सगरपुत्रो! चाहिए, यह बात उनको समझमें न आयी। राजा

English

Vamana said slowly: "Hail to you, O king, Be happy. Grant me the measured g/ound, the three steps that have been promised."

अध्याय १४४

श्लोक 14

इच्छेयं शान्तिवाक्यानि भर्तारं लभते तथा

iccheyaṃ śāntivākyāni bhartāraṃ labhate tathā

हिन्दी अर्थ

तुम्हारा घोड़ा रसातलमें बँधा है और कहीं नहीं है।' यह सुनकर वे रसातलमें जानेके लिये सब ओरसे पृथ्वीको खोदने लगे। क्षुधासे पीड़ित

English

O Visnu, O lord of worlds identifying with the Uni¬ verse, take the steps as many as you can. O lord of Devas, O creator of the Universe, it is I who have conquered in every respect.

अध्याय १४४

श्लोक 15

अग्निस् त्व् अप्सु शरीरेषु स्थावरे जङ्गमे तथा तव भर्तुर् अहं धाम नित्यं च जनको मतः

agnis tv apsu śarīreṣu sthāvare jaṅgame tathā tava bhartur ahaṃ dhāma nityaṃ ca janako mataḥ

हिन्दी अर्थ

खोदते रहते। इस प्रकार वे शीघ्र ही रसातलमें जा पहुँचे। सगरके बलवान् पुत्रोंको वहाँ आया सुनकर राक्षस थर्रा उठे और उनके वधका उपाय करने लगे। वे बिना युद्ध किये ही भयभीत हो

English

O lord of Daityas, of great arms, O king of Daityas, I shall take steps. See.

अध्याय १४४

श्लोक 16

यो ऽहं सो ऽहम् इति ज्ञात्वा न चिन्तां कर्तुम् अर्हसि किं चापो मातरो देव्यो ह्य् अग्निः श्वशुर इत्य् अपि इति बुद्ध्या विनिश्चित्य मा विषण्णा भव स्नुषे

yo 'haṃ so 'ham iti jñātvā na cintāṃ kartum arhasi kiṃ cāpo mātaro devyo hy agniḥ śvaśura ity api iti buddhyā viniścitya mā viṣaṇṇā bhava snuṣe

हिन्दी अर्थ

उस स्थानपर आये, जहाँ महामुनि कपिल सो रहे थे। कपिलजीका क्रोध बड़ा प्रचण्ड था। राक्षसोंने वह घोड़ा ले जाकर तुरंत कपिलजीके सिरहानेकी

English

After standing firmly on the back of the tortoise he placed a step in the sacrificial hall of Bali. He, the eternal lord, placed the second step over the whole world.

अध्याय १४४

श्लोक 17

आपो जनन्य इति यद् बभाषे अग्नेर् अहं तव पुत्रस्य भार्या कथं भूत्वा जननी चापि भार्या विरुद्धम् एतज् जलरूपेण नाथ

āpo jananya iti yad babhāṣe agner ahaṃ tava putrasya bhāryā kathaṃ bhūtvā jananī cāpi bhāryā viruddham etaj jalarūpeṇa nātha

हिन्दी अर्थ

होकर देखने लगे कि अब क्या होता है। इतनेमें ही सगरके पुत्र रसातलमें घुसकर देखते हैं कि घोड़ा बंधा है और भास ही कोई पुरुष सो रहा है। उन्होंने कपिलजीको ही अश्व चुराकर यज्ञमें सगरके एक दूसरा पुत्र भी था, जिसका नाम

English

Then he said to Bali: "O lord of Asuras, there is no place for the third step. Where shall I place the third step? Give me the ground."

अध्याय १४४

श्लोक 18

आदौ तु पत्नी भरणात् तु भार्या जनेस् तु जाया स्वगुणैः कलत्रम् इत्यादिरूपाणि बिभर्षि भद्रे कुरुष्व वाक्यं मदुदीरितं यत्

ādau tu patnī bharaṇāt tu bhāryā janes tu jāyā svaguṇaiḥ kalatram ityādirūpāṇi bibharṣi bhadre kuruṣva vākyaṃ madudīritaṃ yat

हिन्दी अर्थ

विघ्न डालनेवाला माना और यह निश्चय किया असमञ्जा था। वह मूर्खतावश नगरके बालकोंको कि इस महापापीको मारकर हमलोग अपना अश्व उठाकर पानीमें फेंक देता था। तब पुरवासियोंने महाराजके निकट ले चलें। कोई बोले--' अपना एकत्रित होकर राजा सगरको इस बातकी सूचना पशु बँधा है, इसे ही खोलकर ले चलें। इस सोये दी। पुत्रका यह अन्याय जानकर महाराजको बड़ा

English

"What is that work which shall be auspicious in this second step of Visnu whereby my water-jar shall become excel¬ lent?"

अध्याय १४४

श्लोक 19

यो ऽस्यां प्रजातः स तु पुत्र एव सा तस्य मातैव न संशयो ऽत्र तस्माद् वदन्ति श्रुतितत्त्वविज्ञाः सा नैव योषित् तनये ऽभिजाते

yo 'syāṃ prajātaḥ sa tu putra eva sā tasya mātaiva na saṃśayo 'tra tasmād vadanti śrutitattvavijñāḥ sā naiva yoṣit tanaye 'bhijāte

हिन्दी अर्थ

हुए पुरुषको मारनेसे क्या लाभ।' यह सुनकर क्रोध हुआ। उन्होंने अपने अमात्योंसे कहा-- यह दूसरे बोल उठे-- हम शूरवीर राजा हैं, शासक असमञ्जा बालकोंकी हत्या करनेवाला तथा हैं। इस पापीको उठायें और क्षत्रियोचित्त तेजसे क्षत्रियधर्मका त्यागी है। अतः यह इस देशका

English

"Whoever is born from her is verily her son and she his mother, no doubt here; therefore those who know the truth of the Shruti say she is not a mere woman once a child is born."

अध्याय १४४

श्लोक 20

श्वशुरस्य तु तद् वाक्यं श्रुत्वात्रेयी तदैव तत् आग्नेयं रूपम् आपन्नम् अम्भसाप्लावयत् पतिम्

śvaśurasya tu tad vākyaṃ śrutvātreyī tadaiva tat āgneyaṃ rūpam āpannam ambhasāplāvayat patim

हिन्दी अर्थ

त्याग कर दे।' महाराजका यह आदेश सुनकर मुनिका यह वचन सुनकर भगीरथने उन्हें अमात्योंने राजकुमारको तुरंत देशनिकाला दे दिया । प्रणाम किया और कैलासपर्वतकी यात्रा को। असमञ्जा वनमें चला गया । अब राजा सगर चिन्ता वहाँ पहुंचकर पवित्र हो बालक भगीरथने तपस्याका करने लगे कि “हमारे सब पुत्र ब्राह्मणके शापसे निश्चय किया और भगवान् शंकरको सम्बोधित

English

Hearing that speech of her father-in-law, Atreyi at once poured water on her husband, who had become fiery in form.

अध्याय १४४

श्लोक 21

उभौ तौ दंपती ब्रह्मन् संगतौ गाङ्गवारिणा शान्तरूपधरौ चोभौ दंपती संबभूवतुः

ubhau tau daṃpatī brahman saṃgatau gāṅgavāriṇā śāntarūpadharau cobhau daṃpatī saṃbabhūvatuḥ

हिन्दी अर्थ

रसातलमें नष्ट हो गये। एक बचा था, वह भी करके इस प्रकार कहा--'प्रभो! मैं बालक हूँ, वनमें चला गया । इस समय मेरी क्या गति होगी ?' मेरी बुद्धि भी बालककी ही है और आप भी असमञ्जाके एक पुत्र था, जो अंशुमान् नामसे अपने मस्तकपर बाल चन्द्रमाको धारण करते हें । विख्यात हुआ । यद्यपि अंशुमान् अभी बालक था मैं कुछ भी नहीं जानता । आप मेरे इस अनजानपनसे

English

Both that couple, Brahmin, met by the water of the Ganga, and both became a couple in peaceful forms.

अध्याय १४४

श्लोक 22

लक्ष्म्या युक्तो यथा विष्णुर् उमया शंकरो यथा रोहिण्या च यथा चन्द्रस् तथाभून् मिथुनं तदा

lakṣmyā yukto yathā viṣṇur umayā śaṃkaro yathā rohiṇyā ca yathā candras tathābhūn mithunaṃ tadā

हिन्दी अर्थ

तो भी राजाने उसे बुलाकर अपना कार्य बतलाया। ही प्रसन्न होइये। अमरेश्वर! जो लोग वाणीसे, अंशुमानने भगवान् कपिलको आराधना की और मनसे और क्रियासे कभी मेरा उपकार करते हैं घोडा ले आकर राजा सगरको दे दिया । इससे तथा हितसाधनमें संलग्न रहते हैं, उनका कल्याण वह यज्ञ पूर्ण हुआ। अंशुमानूके तेजस्वी पुत्रका करनेके लिये मैं उमासहित आपको प्रणाम करता

English

As Vishnu with Lakshmi, as Shankara with Uma, and as the Moon with Rohini, so then was the pair.

अध्याय १४४

श्लोक 23

भर्तारं प्लावयन्ती सा दधाराम्बुमयं वपुः परुष्णी चेति विख्याता गङ्गया संगता नदी

bhartāraṃ plāvayantī sā dadhārāmbumayaṃ vapuḥ paruṣṇī ceti vikhyātā gaṅgayā saṃgatā nadī

हिन्दी अर्थ

नाम दिलीप था। दिलीपके पुत्र परम बुद्धिमान् हूँ। आप देवता आदिके लिये भी पूज्य हैं। जिन भगीरथ हुए । भगीरथने जब अपने समस्त पितामहाँकी पूर्वजोंने मुझे अपने सगोत्र और समानधर्माके दुर्गतिका हाल सुना, तब उन्हें बडा दुःख हुआ। रूपमें उत्पन्न किया और पाल-पोसकर बडा उन्होंने नृपश्रेष्ठ सगरसे विनयपूर्वक पूछा-- महाराज! बनाया, भगवान् शिव उनका अभीष्ट मनोरथ पूर्ण

English

Flooding her husband she bore a body of water; she became the river known as Parushni, joined with the Ganga.

अध्याय १४४

श्लोक 24

गोशतार्पणजं पुण्यं परुष्णीस्नानतो भवेत् तत्र चाङ्गिरसाश् चक्रुर् यज्ञांश् च बहुदक्षिणान्

gośatārpaṇajaṃ puṇyaṃ paruṣṇīsnānato bhavet tatra cāṅgirasāś cakrur yajñāṃś ca bahudakṣiṇān

हिन्दी अर्थ

उन सबका उद्धार कैसे होगा ?' राजाने उत्तर करें। मैं बालचन्द्रका मुकुट धारण करनेवाले दिया-- बेटा! यह तो भगवान् कपिल ही जानते भगवान् शंकरको नित्य प्रणाम करता हूँ।' हैं।' यह सुनकर बालक भगीरथ रसातलमें गये भगीरथके यों कहते ही भगवान् शिव उनके और कपिलको नमस्कार करके अपना सब सामने प्रकट हो गये और बोले-' महामते! तुम

English

The merit of giving a hundred cows comes from bathing in the Parushni, and there the Angirases performed sacrifices with abundant fees.

अध्याय १४४

श्लोक 25

तत्र त्रीणि सहस्राणि तीर्थान्य् आहुः पुराणगाः उभयोस् तीरयोस् तात पृथग् यागफलं विदुः

tatra trīṇi sahasrāṇi tīrthāny āhuḥ purāṇagāḥ ubhayos tīrayos tāta pṛthag yāgaphalaṃ viduḥ

हिन्दी अर्थ

मनोरथ उन्हें कह सुनाया। कपिल मुनि बहुत निर्भय होकर कोई वर माँगो। जो वस्तु देवताओंके देरतक ध्यान करके बोले--' राजन्! तुम तपस्याद्वारा लिये भी सुलभ नहीं है, वह भी में तुम्हें निश्चय भगवान् शंकरकी आराधना करो और उनकी ही दे दूँगा। यह आश्वासन पाकर भगीरथने जटामें स्थित गङ्ाके जलसे अपने पितरोंको महादेवजीको प्रणाम किया और प्रसन्न होकर

English

There, the Purana-reciters say, are three thousand holy places; dear one, they know a separate sacrificial fruit on each of the two banks.

अध्याय १४४

श्लोक 26

तेषु स्नानं च दानं च वाजपेयाधिकं मतम् विशेषतस् तु गङ्गायाः परुष्ण्या सह संगमे

teṣu snānaṃ ca dānaṃ ca vājapeyādhikaṃ matam viśeṣatas tu gaṅgāyāḥ paruṣṇyā saha saṃgame

हिन्दी अर्थ

भस्मको आप्लावित करो। इससे तुम तो कृतार्थ कहा देवेश्वर! आपकी जटामें जो सरिताओंमें होगे ही, तुम्हारे पितर भी कृतकृत्य हो जायँगै ।' श्रेष्ठ गङ्गाजी विराजमान हैं, उन्हें ही मेरे पितरोंका यह सुनकर भगीरथने कहा-- बहुत अच्छा, मैं उद्धार करनेके लिये दे दीजिये। इससे मुझे सब ऐसा ही करूँगा। मुनिश्रेष्ठ! बताइये, मैं कहाँ जाऊँ कुछ मिल जायगा।' तब महे धरने हसकर कहा--

English

Bathing and giving there are held greater than the Vajapeya, especially at the confluence of the Ganga and the Parushni.

अध्याय १४४

श्लोक 27

स्नानदानादिभिः पुण्यं यत् तद् वक्तुं न शक्यते

snānadānādibhiḥ puṇyaṃ yat tad vaktuṃ na śakyate

हिन्दी अर्थ

और कौन-सा कार्य करूं ?' 'बेटा! मैंने तुम्हें गङ्गा दे दी। अब तुम उनको कपिलजी बोले नरश्रेष्ठ! केलासपर्वतपर जाकर स्तुति करो।' महादेवजीका वचन सुनकर भगीरथने महादेवजीकी स्तुति करो और अपनी शक्तिके गङ्ाजीको प्राप्तिक लिये भारी तपस्या की और अनुसार तपस्या करते रहो इससे तुम्हारे अभीष्टकी मनको संयममें रखकर भक्तिपूर्वक गङ्गाका स्तवन

English

The merit gained by bathing, giving and the like cannot be told.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_brahmapurANa-1-246.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Brahma Purana — Chapter 144
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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