अध्याय १६८
श्लोक 1
भानुतीर्थम् इति ख्यातं त्वाष्ट्रं माहेश्वरं तथा ऐन्द्रं याम्यं तथाग्नेयं सर्वपापप्रणाशनम्
bhānutīrtham iti khyātaṃ tvāṣṭraṃ māheśvaraṃ tathā aindraṃ yāmyaṃ tathāgneyaṃ sarvapāpapraṇāśanam
हिन्दी अर्थ
समझा और प्रतिदिनकी भाँति माया करके उस माताएँ हैं। उन्हींमें यज्ञ, स्वाध्याय और धर्मकार्य पापी राक्षसने उनको भी अपना ग्रास बना लिया। प्रतिष्ठित है। ओषधियोंसे ही समस्त रोगोंका उसके शरीरमें प्रवेश करके शनिने उसकी आंतोंको निवारण होता है। उन्हींसे अन्नकी उत्पत्ति और देखा। शनिकी दृष्टि पड़ते ही वह पापात्मा राक्षस सबके प्राणोंकी रक्षा होती है। एक दिन ओषधियोंने
English
Any substance, e.g. clarified butter, food etc. to be offered as oblation, to gods; opposed to 'Kavya' or what is offered to ancestors.