Brahma Purana· Brahma Purāṇa
184
अध्याय 184 / 246

Adhyaya 184

60 श्लोकWhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ60 श्लोक

श्लोक पर जाएं:

अध्याय १८४

श्लोक 1

विमुक्तो वसुदेवो ऽपि नन्दस्य शकटं गतः प्रहृष्टं दृष्टवान् नन्दं पुत्रो जातो ममेति वै

vimukto vasudevo 'pi nandasya śakaṭaṃ gataḥ prahṛṣṭaṃ dṛṣṭavān nandaṃ putro jāto mameti vai

हिन्दी अर्थ

वैश्य अपने सम्पूर्ण अभीष्टोंको प्राप्त कर लेगा।'

English

The holy centre Avighna has been declared to be des¬ tructive of all obstacles. In this connection I shall narrate an incident. Listen devoutly, O Narada.

अध्याय १८४

श्लोक 2

वसुदेवो ऽपि तं प्राह दिष्ट्या दिष्ट्येति सादरम् वार्धके ऽपि समुत्पन्नस् तनयो ऽयं तवाधुना

vasudevo 'pi taṃ prāha diṣṭyā diṣṭyeti sādaram vārdhake 'pi samutpannas tanayo 'yaṃ tavādhunā

हिन्दी अर्थ

A ८ NY वह ओषधि दिखा दीजिये। विलम्ब न कीजिये

English

On the northern bank of Gautami a divine sacrifice was held but it could not be concluded due to some obstacles.

अध्याय १८४

श्लोक 3

दत्तो हि वार्षिकः सर्वो भवद्भिर् नृपतेः करः यदर्थम् आगतस् तस्मान् नात्र स्थेयं महात्मना

datto hi vārṣikaḥ sarvo bhavadbhir nṛpateḥ karaḥ yadartham āgatas tasmān nātra stheyaṃ mahātmanā

हिन्दी अर्थ

दूसरोंको पीड़ा दूर करनेसे बढ़कर तीनों लोकोंमें दूसरा कोई कल्याणकारी कार्य नहीं है। विभीषणने ' बहुत अच्छा' कहकर पुत्रको वह

English

Then Devas spoke to Hari and me. Thereupon, I entered in meditation, saw the cause and spoke to them:

अध्याय १८४

श्लोक 4

यदर्थम् आगतः कार्यं तन् निष्पन्नं किम् आस्यते भवद्भिर् गम्यतां नन्द तच् छीघ्रं निजगोकुलम्

yadartham āgataḥ kāryaṃ tan niṣpannaṃ kim āsyate bhavadbhir gamyatāṃ nanda tac chīghraṃ nijagokulam

हिन्दी अर्थ

और उसे ले आकर वैश्यके हृदयपर रख दिया।

English

"This sacrifice is not concluded on account of certain obstacles created by Vinayaka. Hence, let Devas eulogize the primordial lord Vinayaka."

अध्याय १८४

श्लोक 5

ममापि बालकस् तत्र रोहिणीप्रसवो हि यः स रक्षणीयो भवता यथायं तनयो निजः

mamāpi bālakas tatra rohiṇīprasavo hi yaḥ sa rakṣaṇīyo bhavatā yathāyaṃ tanayo nijaḥ

हिन्दी अर्थ

पट उसका स्पर्श होते ही वैश्यके नेत्र और हाथ ज्यों-

English

After saying "So be it" Devas took their holy plunge in Gautami. On the banks of the river Devas eulogized Ganesvara, the primordial lord.

अध्याय १८४

श्लोक 6

इत्य् उक्ताः प्रययुर् गोपा नन्दगोपपुरोगमाः शकटारोपितैर् भाण्डैः करं दत्त्वा महाबलाः

ity uktāḥ prayayur gopā nandagopapurogamāḥ śakaṭāropitair bhāṇḍaiḥ karaṃ dattvā mahābalāḥ

हिन्दी अर्थ

चक्षुस्तीर्थका माहात्म्य २६३

English

May that VighneSvara, son of Ambika, bestow upon us freedom from obstacles immediately, in this great sacrifice. If he is meditated upon, the heart wishes of all embodied beings become fulfilled.

अध्याय १८४

श्लोक 7

वसतां गोकुले तेषां पूतना बालघातिनी सुप्तं कृष्णम् उपादाय रात्रौ च प्रददौ स्तनम्

vasatāṃ gokule teṣāṃ pūtanā bālaghātinī suptaṃ kṛṣṇam upādāya rātrau ca pradadau stanam

हिन्दी अर्थ

के-त्यों हो गये। मणि, मन्त्र और ओषधियोंके बोले--' अहो, ये महानुभाव कोई देवता ही होंगे। प्रभावको कोई नहीं जानता वैश्यने धर्मका चिन्तन अन्यथा देवेतर मनुष्यमें ऐसी शक्ति कैसे देखी करते हुए गौतमी गङ्गामें खान किया और योगेश्वर जाती । अत: इन्हें राज्यके साथ ही अपनी कन्या भगवान् विष्णुको नमस्कार करके पुनः वहाँसे अवश्य दूंगा ।' मनमें ऐसा संकल्प करके राजाने

English

Literally, 'three cities', built by Maya for the Asuras out of gold, silver and iron and in Heaven, Sky and Earth respectively; they had the power to travel anywhere; said to have started tormenting Devas and so were burnt ultimately by Lord Siva.

अध्याय १८४

श्लोक 8

यस्मै यस्मै स्तनं रात्रौ पूतना संप्रयच्छति तस्य तस्य क्षणेनाङ्गं बालकस्योपहन्यते

yasmai yasmai stanaṃ rātrau pūtanā saṃprayacchati tasya tasya kṣaṇenāṅgaṃ bālakasyopahanyate

हिन्दी अर्थ

यात्रा की। उसने अपने साथ ओषधिकी टूटी हुई कन्यासहित राज्य वैश्यको दे दिया । मणिकुण्डल शाखा भी ले ली थी। देश-देशान्तरोंमें भ्रमण राज्यको पाकर भी मित्रके बिना संतुष्ट न हुआ । करता हुआ मणिकुण्डल एक राजधानीमें पहुँचा, वह सोचने लगा--'मित्रके बिना न तो राज्य जो महापुरके नामसे विख्यात थी । वहाँके महाबली अच्छा है और न सुख ही अच्छा लगता है ।' इस

English

He sucked the milk from the breasts of his mother. Still he was not satisfied. His heart had been rendered sour due to the jealousy of his brother. "Be Lambodara (pot-bellied).** Sambhu, thus, named Vighnaraja Lambodara.

अध्याय १८४

श्लोक 9

कृष्णस् तस्याः स्तनं गाढं कराभ्याम् अतिपीडितम् गृहीत्वा प्राणसहितं पपौ क्रोधसमन्वितः

kṛṣṇas tasyāḥ stanaṃ gāḍhaṃ karābhyām atipīḍitam gṛhītvā prāṇasahitaṃ papau krodhasamanvitaḥ

हिन्दी अर्थ

राजा महाराजके नामसे प्रसिद्ध थे। राजाके कोई प्रकार वह सदा गौतम ब्राह्मणका ही चिन्तन पुत्र नहीं था, एक पुत्री थी; उसकी भी आँखें नष्ट किया करता था। इस पृथ्वीपर उत्तम कुलमें हो चुकी थीं। वह कन्या ही राजाके लिये पुत्र उत्पन्न हुए साधुपुरुषोंका यही लक्षण है कि थी। राजाने यह निश्चय किया था कि (देवता, अहित करनेवालोंके प्रति भी उनके मनमें सदा

English

Surrounded by Devas MaheSasaid: "Startyourdance.** He was delighted by Ganesa by the sound of his anklets. He,:hcn crowned his son as the lord of Ganas.

अध्याय १८४

श्लोक 10

सा विमुक्तमहारावा विच्छिन्नस्नायुबन्धना पपात पूतना भूमौ म्रियमाणातिभीषणा

sā vimuktamahārāvā vicchinnasnāyubandhanā papāta pūtanā bhūmau mriyamāṇātibhīṣaṇā

हिन्दी अर्थ

दानव, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, गुणवान् या कारुण्य ही भरी रहती है । निर्गुण--कोई भी क्यों न हो, मैं उसीको यह एक दिन महाराज मणिकुण्डल बनमें गये थे । कन्या दूँगा, जो इसकी आँखें अच्छी कर देगा। वहाँ उन्होंने अपने पूर्व मित्र गौतम ब्राह्मणको मुझे अपने राज्यके साथ ही कन्याका दान करना देखा। पापी जुआरिओंने उसका सब धन छीन

English

This deity holds the noose of obstacles in one of his hands. With the other he holds the axe placed on the shoulder. If he is not worshipped he causes obstacles, even to his mother. Who else is equal to Vighnapati?

अध्याय १८४

श्लोक 11

तन्नादश्रुतिसंत्रासाद् विबुद्धास् ते व्रजौकसः ददृशुः पूतनोत्सङ्गे कृष्णं तां च निपातिताम्

tannādaśrutisaṃtrāsād vibuddhās te vrajaukasaḥ dadṛśuḥ pūtanotsaṅge kṛṣṇaṃ tāṃ ca nipātitām

हिन्दी अर्थ

है।' महाराजने यह घोषणा सब ओर करा दी थी। लिया था। धर्मज्ञ मणिकुण्डलने अपने ब्राह्मण वैश्यने वह घोषणा सुनकर कहा--'मैं निश्चय ही मित्रको साथ ले लिया, उसका विधिपूर्वक पूजन राजकुमारीकी खोयी हुई आँखें पुनः ला दूँगा।' किया और धर्मका सब प्रभाव भी बतलाया। राजकर्मचारी शीघ्र ही वैश्यको लेकर गया फिर समस्त पापोंको निवृत्तिके लिये गौतमको

English

In all undertakings for acquiring virtue, wealth, love etc., he is to be worshipped at the outset. He is worshipped by Devas and Asuras everyday. I bow down at firstto that lord who is worshipped at the beginning of every rite and whose worship prevents destruction.

अध्याय १८४

श्लोक 12

आदाय कृष्णं संत्रस्ता यशोदा च ततो द्विजाः गोपुच्छभ्रामणाद्यैश् च बालदोषम् अपाकरोत्

ādāya kṛṣṇaṃ saṃtrastā yaśodā ca tato dvijāḥ gopucchabhrāmaṇādyaiś ca bāladoṣam apākarot

हिन्दी अर्थ

और महाराजको उसने सब बातें बतायीं। वैश्यने गङ्गामें स्नान कराया। वैश्यके देशमें जो सगोत्र उस काष्ठका स्पर्श कराया और राजकुमारीके नेत्र बन्धु-बान्धव थे, उनको तथा गौतम ब्राह्मणके ठीक हो गये। यह देखकर राजाको बड़ा विस्मय बन्धु-बान्धव वृद्धकौशिक आदिको उन्होंने बुलवाया हुआ। उन्होंने पूछा-' आप कौन हैं ?' वैश्यने और सबके साथ देवपूजनपूर्वक गौतमीके तटपर

English

At the victorious campaign against Tripuras his father did an unusual thing (i.e. instead of being worshipped by his son he had to worship his son). I bow down to Ganesa who has been worshipped by his father with pleasure and who brought about freedom to his father.

अध्याय १८४

श्लोक 13

गोपुरीषम् उपादाय नन्दगोपो ऽपि मस्तके कृष्णस्य प्रददौ रक्षां कुर्वन्न् इदम् उदैरयत्

gopurīṣam upādāya nandagopo 'pi mastake kṛṣṇasya pradadau rakṣāṃ kurvann idam udairayat

हिन्दी अर्थ

राजासे अपना सब हाल ठीक-ठीक कह सुनाया। यज्ञ किया। तदनन्तर शरीरका अन्त होनेपर वे फिर बोला--'ब्राह्मणोंके प्रसादसे तथा धर्म, स्वर्गलोकमें गये। वह स्थान मृतसंजीवनतीर्थ, तपस्या, दान, यज्ञ और दिव्य ओषधिके प्रभावसे चक्षुस्तीर्थ और योगेश्वरतीर्थ कहलाने लगा। वह मुझमें ऐसी शक्ति आयी है।' वैश्यका यह कथन स्मरणमात्रसे पुण्य देनेवाला, मनको प्रसन्न रखनेवाला

English

Nanda the cowherd, taking cow-dung, gave protection on Krishna's head and said:

अध्याय १८४

श्लोक 14

रक्षतु त्वाम् अशेषाणां भूतानां प्रभवो हरिः यस्य नाभिसमुद्भूतात् पङ्कजाद् अभवज् जगत्

rakṣatu tvām aśeṣāṇāṃ bhūtānāṃ prabhavo hariḥ yasya nābhisamudbhūtāt paṅkajād abhavaj jagat

हिन्दी अर्थ

सुनकर महाराजको अत्यन्त आश्चर्य हुआ। वे और समस्त दुर्भावनाओंका नाश करनेवाला है।

English

"May Hari, origin of all beings, protect you, from whose navel-lotus the world arose;

अध्याय १८४

श्लोक 15

येन दंष्ट्राग्रविधृता धारयत्य् अवनी जगत् वराहरूपधृग् देवः स त्वां रक्षतु केशवः

yena daṃṣṭrāgravidhṛtā dhārayaty avanī jagat varāharūpadhṛg devaḥ sa tvāṃ rakṣatu keśavaḥ

हिन्दी अर्थ

एतदेव सुजातानां लक्षणं भुवि देहिनाम्। कृपार्द्र यन्मनो नित्यं तेषामप्यहितेषु हि॥

English

by whom the earth is supported on the tip of his tusk, may that god in the form of Varaha, Keshava, protect you.

अध्याय १८४

श्लोक 16

गुह्यं स जठरं विष्णुर् जङ्घापादौ जनार्दनः वामनो रक्षतु सदा भवन्तं यः क्षणाद् अभूत्

guhyaṃ sa jaṭharaṃ viṣṇur jaṅghāpādau janārdanaḥ vāmano rakṣatu sadā bhavantaṃ yaḥ kṣaṇād abhūt

हिन्दी अर्थ

सामुद्र, ऋषिसत्र आदि तीर्थांकी महिमा तथा गौतमी-माहात्म्यका उपसंहार

English

May Vishnu protect your private parts and belly, Janardana your shanks and feet, and Vamana, who was born in an instant, always protect you.

अध्याय १८४

श्लोक 17

त्रिविक्रमक्रमाक्रान्तत्रैलोक्यस्फुरदायुधः शिरस् ते पातु गोविन्दः कण्ठं रक्षतु केशवः

trivikramakramākrāntatrailokyasphuradāyudhaḥ śiras te pātu govindaḥ kaṇṭhaṃ rakṣatu keśavaḥ

हिन्दी अर्थ

- कहते हें--नारद! सामुद्रतीर्थ सब लिये कुछ भी असम्भव नहीं है । मैं तुम्हारे स्वागतमें तीर्थोंका फल देनेवाला है । उसके स्वरूपका वर्णन यहांतक आया हूँ। जो अपनेसे बड़ेके आनेपर करता हुँ, मन लगाकर सुनो। गौतमके विदा अहंकारवश आगे बढ़कर उसका स्वागत नहीं करनेपर पापनाशिनी गङ्गा जब तीनों लोकोंका करता, वह धर्म आदिसे भ्रष्ट होकर नरकमें पड़ता

English

May Govinda, whose weapons flash across the three worlds by Trivikrama's stride, guard your head, and Keshava your neck.

अध्याय १८४

श्लोक 18

मुखबाहू प्रबाहू च मनः सर्वेन्द्रियाणि च रक्षत्व् अव्याहतैश्वर्यस् तव नारायणो ऽव्ययः

mukhabāhū prabāhū ca manaḥ sarvendriyāṇi ca rakṣatv avyāhataiśvaryas tava nārāyaṇo 'vyayaḥ

हिन्दी अर्थ

उपकार करनेके लिये ब्रह्मगिरिसे पूर्व-समुद्रकी है। भगवती गङ्गा! तुमसे एक प्रार्थना करता हूँ। ओर चलीं, तब मार्ममें मैंने उनके जलको लेकर तुम सात धाराओंमें आकर मुझसे मिलो। यदि कमण्डलुमें धारण किया। परमात्मा शिवने उन्हें एक ही धाराके रूपमें आकर मिलोगी तो मैं मस्तकपर चढ़ाया। वे भगवान् विष्णुके चरणोंसे तुम्हारे दुःसह वेगको धारण न कर सकूँगा।'

English

May Narayana, the imperishable, of unobstructed lordship, protect your face, arms, forearms, mind and all senses.

अध्याय १८४

श्लोक 19

त्वां दिक्षु पातु वैकुण्ठो विदिक्षु मधुसूदनः हृषीकेशो ऽम्बरे भूमौ रक्षतु त्वां महीधरः

tvāṃ dikṣu pātu vaikuṇṭho vidikṣu madhusūdanaḥ hṛṣīkeśo 'mbare bhūmau rakṣatu tvāṃ mahīdharaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रकट हुई हैं। ब्रह्मर्षि गौतमने मर्त्यलोकमें उनका समुद्रका यह वचन सुनकर गौतमी गड़ाने कहा-- अवतरण कराया है। वे स्मरणमात्रसे सब पापोंका “तुम मेरी यह बात मानो; सप्तर्षियोंकी जो अरुन्धती नाश करनेवाली हैं और गुरुओंकी भी गुरु हैं। आदि पल्लियाँ हैं उन सबको उनके पतियोंसहित समुद्रने जब उन्हें अपनी ओर आते देखा, तब ले आओ; तब मैं छोटे रूपमें हो जाऊँगी।' ' बहुत

English

May Vaikuntha protect you in the directions, Madhusudana in the intermediate directions, Hrishikesha in the sky, and Mahidhara on earth."

अध्याय १८४

श्लोक 20

एवं कृतस्वस्त्ययनो नन्दगोपेन बालकः शायितः शकटस्याधो बालपर्यङ्किकातले

evaṃ kṛtasvastyayano nandagopena bālakaḥ śāyitaḥ śakaṭasyādho bālaparyaṅkikātale

हिन्दी अर्थ

मन-ही-मन विचार किया-- जो सम्पूर्ण जगत्को अच्छा' कहकर समुद्र सपर्षियों और उनकी पत्नियोंको वन्दनीया और सबको ईश्वरी हैं, जिन्हें ब्रह्मा तथा ु पट तका एक याक शिव आदि देवता भी मस्तक झुकाते हैँ, उनके स्वागतमें मुझे कुछ दूर आगेतक जाना चाहिए।

English

Thus, with the blessing performed by Nanda the cowherd, the boy was laid under the cart on the child's cot.

अध्याय १८४

श्लोक 21

ते च गोपा महद् दृष्ट्वा पूतनायाः कलेवरम् मृतायाः परमं त्रासं विस्मयं च तदा ययुः

te ca gopā mahad dṛṣṭvā pūtanāyāḥ kalevaram mṛtāyāḥ paramaṃ trāsaṃ vismayaṃ ca tadā yayuḥ

हिन्दी अर्थ

नहीं तो मेरे धर्ममें दोष आयेगा। जो अपने घर आते हुए महापुरुषको लेनेके लिये मोहवश स्वयं उपस्थित नहीं होता, उस पापीको रक्षा करनेवाला दोनों लोकोंमें कोई नहीं है।' यों विचारकर समुद्र वड f खड (ट

English

Those cowherds, seeing the huge body of the dead Putana, then felt great terror and amazement.

अध्याय १८४

श्लोक 22

कदाचिच् छकटस्याधः शयानो मधुसूदनः चिक्षेप चरणाव् ऊर्ध्वं स्तनार्थी प्ररुरोद च

kadācic chakaṭasyādhaḥ śayāno madhusūdanaḥ cikṣepa caraṇāv ūrdhvaṃ stanārthī praruroda ca

हिन्दी अर्थ

मूर्तिमान् हो हाथ जोडे विनीत भावसे गङ्गाजीके ) न्य ) bs समीप आया और इस प्रकार बोला-- देवि ! तुम्हारा , १ यह जल, जो आकाश, पाताल और मर्त्यलोकमें EE फैला हुआ है, मुझमें आकर मिले-इसके लिये

English

Once, lying under the cart, Madhusudana, wanting the breast, flung his feet upward and cried.

अध्याय १८४

श्लोक 23

तस्य पादप्रहारेण शकटं परिवर्तितम् विध्वस्तभाण्डकुम्भं तद् विपरीतं पपात वै

tasya pādaprahāreṇa śakaṭaṃ parivartitam vidhvastabhāṇḍakumbhaṃ tad viparītaṃ papāta vai

हिन्दी अर्थ

मैं कुछ नहीं कहुँगा। मेरे भीतर रत्न, अमृत, पर्वत, राक्षस और असुर रहते हैं। इनको तथा अन्यान्य भयंकर जलजन्तुओंको भी मैं धारण i 0000095“ ट वि करता हूँ। मेरे जलमें लक्ष्मीसहित भगवान् विष्णु ले आया। तब गोदावरी देवी सात धाराओंमें

English

By the blow of his feet the cart was overturned; its vessels and pots shattered, it fell upside down.

अध्याय १८४

श्लोक 24

ततो हाहाकृतः सर्वो गोपगोपीजनो द्विजाः आजगाम तदा ज्ञात्वा बालम् उत्तानशायिनम्

tato hāhākṛtaḥ sarvo gopagopījano dvijāḥ ājagāma tadā jñātvā bālam uttānaśāyinam

हिन्दी अर्थ

सदा शयन करते हैं। इस चराचर जगत्में मेरे विभक्त हो गयीं और उसी रूपमें उनका समुद्रसे

English

Then all the cowherds and cowherdesses, Brahmins, cried "Alas!" and came, and saw the boy lying on his back.

अध्याय १८४

श्लोक 25

गोपाः केनेति जगदुः शकटं परिवर्तितम् तत्रैव बालकाः प्रोचुर् बालेनानेन पातितम्

gopāḥ keneti jagaduḥ śakaṭaṃ parivartitam tatraiva bālakāḥ procur bālenānena pātitam

हिन्दी अर्थ

महत्यभ्यागते कुर्यात्प्रत्युत्थानं न यो मदात् । स धर्मादिपरिभ्रष्टो निरयं तु समाप्नुयात् ।

English

The cowherds said, "By whom has the cart been overturned?" There the boys said, "It was knocked over by this child.

अध्याय १८४

श्लोक 26

रुदता दृष्टम् अस्माभिः पादविक्षेपताडितम् शकटं परिवृत्तं वै नैतद् अन्यस्य चेष्टितम्

rudatā dṛṣṭam asmābhiḥ pādavikṣepatāḍitam śakaṭaṃ parivṛttaṃ vai naitad anyasya ceṣṭitam

हिन्दी अर्थ

सामुद्र, ऋषिसत्र आदि तीर्थांकी महिमा तथा गौतमी-माहात्म्यका उपसंहार २६५

English

We saw it, crying, struck by the throw of his feet; the cart was overturned; it was no one else's doing."

अध्याय १८४

श्लोक 27

ततः पुनर् अतीवासन् गोपा विस्मितचेतसः नन्दगोपो ऽपि जग्राह बालम् अत्यन्तविस्मितः

tataḥ punar atīvāsan gopā vismitacetasaḥ nandagopo 'pi jagrāha bālam atyantavismitaḥ

हिन्दी अर्थ

संगम हुआ। सप्तर्षियोंके नामपर वे सप्तगड़ाके जानने चाहिए--क्रियमाण और कृत। क्रियमाण नामसे विख्यात हुईं। वहाँ भक्तिपूर्वक जो स्नान, कर्मका जो-जो साधन है, वह कर्तव्य बताया दान, श्रवण, पाठ और स्मरण आदि शुभ कर्म गया है। विद्वान् पुरुष कर्म करते हुए जो-जो किया जाता है, वह समस्त अभीष्ट वस्तुओंको भावना करता है, उसके अनुरूप ही फलको सिद्धि

English

Then the cowherds were again very amazed; Nanda the cowherd, greatly astonished, took up the boy.

अध्याय १८४

श्लोक 28

यशोदा विस्मयारूढा भग्नभाण्डकपालकम् शकटं चार्चयाम् आस दधिपुष्पफलाक्षतैः

yaśodā vismayārūḍhā bhagnabhāṇḍakapālakam śakaṭaṃ cārcayām āsa dadhipuṣpaphalākṣataiḥ

हिन्दी अर्थ

देनेवाला होता है। पापको हानि, भोग और मोक्षको होती है। यदि बिना भावनाके विधिपूर्वक कर्मका प्राप्ति तथा मनकी प्रसन्नताके लिये तीनों लोकोंमें अनुष्ठान करता है तो उसे अन्य प्रकारका फल सामुद्रतीर्थसे बढ़कर दूसरा कोई तीर्थ नहीं है। मिलता है। किंतु भावना करनेपर सम्पूर्ण फल सामुद्रतीर्थके अतिरिक्त वहाँ ऋषिसत्रतीर्थ भी उस भावनाके अनुरूप ही होता है; अतः तप,

English

Yashoda, rising in wonder, worshipped the cart with its broken pots and potsherds with curd, flowers, fruits and unbroken rice.

अध्याय १८४

श्लोक 29

गर्गश् च गोकुले तत्र वसुदेवप्रचोदितः प्रच्छन्न एव गोपानां संस्कारम् अकरोत् तयोः

gargaś ca gokule tatra vasudevapracoditaḥ pracchanna eva gopānāṃ saṃskāram akarot tayoḥ

हिन्दी अर्थ

है, जहाँ सातों ऋषि तपस्याके लिये बैठे थे और ब्रत, दान, जप और यज्ञ आदि क्रियाएं कर्मके जहाँ भीमेश्वर शिव विराजमान हैं। वहाँका वृत्तान्त अनुरूप भाव होनेसे ही अभीष्ट फल देती हैं। इस प्रकार है। सात ऋषियोंने गङ्गाको सात भाव भी तीन प्रकारका जानना चाहिए-सात्तिवक, धाराओंमें विभक्त किया। सबसे दक्षिणको धारा राजस और तामस। जिस भावनाके अनुरूप कर्म

English

Garga in Gokula, urged by Vasudeva, performed the naming rites of the two in secret among the cowherds.

अध्याय १८४

श्लोक 30

ज्येष्ठं च रामम् इत्य् आह कृष्णं चैव तथापरम् गर्गो मतिमतां श्रेष्ठो नाम कुर्वन् महामतिः

jyeṣṭhaṃ ca rāmam ity āha kṛṣṇaṃ caiva tathāparam gargo matimatāṃ śreṣṭho nāma kurvan mahāmatiḥ

हिन्दी अर्थ

वासिष्ठी कहलायी। उससे उत्तर वैश्वामित्री, उससे होगा, वैसा ही फल मिलेगा। अतः फलकी प्राप्ति उत्तर वामदेवी, बीचको धारा गौतमी, उससे उत्तर कर्मके अनुसार और भावनाके अनुरूप भी होती भारद्वाजी, उससे उत्तर आत्रेयी और अन्तिम धारा है; इसलिये कर्मोंकी स्थिति विचित्र है, यों समझकर जामदग्री है। उन सब ऋषियोंने मिलकर वहाँ विद्वान् पुरुषको अपनी इच्छाके अनुकूल भाव भी

English

The wise Garga, best of the intelligent, named the elder Rama and the other Krishna.

अध्याय १८४

श्लोक 31

अल्पेनैव हि कालेन विज्ञातौ तौ महाबलौ घृष्टजानुकरौ विप्रा बभूवतुर् उभाव् अपि

alpenaiva hi kālena vijñātau tau mahābalau ghṛṣṭajānukarau viprā babhūvatur ubhāv api

हिन्दी अर्थ

बहुत बड़े सत्रका अनुष्ठान किया। इसी बीचमें बनाना चाहिए। फिर उसके अनुरूप कर्म भी देबताओंका प्रबल शत्रु विश्वरूप वहाँ आया और करना चाहिए। फल देनेवाला भी जब फल ब्रह्मचर्यं तथा तपस्याके द्वारा उन ऋषियोंको प्रसन्न चाहनेवालोंको फल देनेमें प्रवृत्त होता है, तब करके विनयपूर्वक पूछा-' मुनिवरो! यज्ञ अथवा उसके कर्म और भावनाके अनुसार ही फल देता

English

In a short time those two mighty ones, Brahmins, grew and both crawled on knees and hands.

अध्याय १८४

श्लोक 32

करीषभस्मदिग्धाङ्गौ भ्रममाणाव् इतस् ततः न निवारयितुं शक्ता यशोदा तौ न रोहिणी

karīṣabhasmadigdhāṅgau bhramamāṇāv itas tataḥ na nivārayituṃ śaktā yaśodā tau na rohiṇī

हिन्दी अर्थ

तपस्या-जिस उपायसे भी मुझे बलवान् पुत्र प्राप्त है। कर्म धर्म, अर्थ, काम और मोक्षचारों हो, जिसे देवता भी परास्त न कर सकें, वह पुरुषार्थांका कारण है। यदि निष्कामभावसे कर्म उपाय बतलाइये।' हो तो वह मुक्तिदायक होता है और सकामभावसे तब परम बुद्धिमान् विश्वामित्रने कहा--' तात! होनेपर वही बन्धनका कारण बन जाता है। अपने

English

With limbs smeared with dried dung and ashes, roaming here and there, Yashoda and Rohini could not hold them back.

अध्याय १८४

श्लोक 33

गोवाटमध्ये क्रीडन्तौ वत्सवाटगतौ पुनः तदहर्जातगोवत्सपुच्छाकर्षणतत्परौ

govāṭamadhye krīḍantau vatsavāṭagatau punaḥ tadaharjātagovatsapucchākarṣaṇatatparau

हिन्दी अर्थ

कर्मसे नाना प्रकारके फल प्राप्त होते हैं। तीन भावके अनुसार ही कर्म बनता है तथा वही इस कारणोंमें कर्म ही पहला कारण है। दूसरा कारण लोक और परलोकमें भाँति-भाँतिके फल देता कर्ता है तथा तीसरे कारणके अन्तर्गत उपादान है। भावके अनुकूल कर्म होता और तदनुसार और बीज आदि अन्य उपकरण हैं। उपादान और भोग मिलता है; अतः भाव सबसे बढ़कर है। तुम

English

Playing in the middle of the cow-pen and again going to the calf-pen, they were intent on pulling the tails of calves born that day.

अध्याय १८४

श्लोक 34

यदा यशोदा तौ बालाव् एकस्थानचराव् उभौ शशाक नो वारयितुं क्रीडन्ताव् अतिचञ्चलौ

yadā yaśodā tau bālāv ekasthānacarāv ubhau śaśāka no vārayituṃ krīḍantāv aticañcalau

हिन्दी अर्थ

बीजको विद्वानोंने कर्म नहीं माना है। जहाँ बहुत- भी भावके अनुसार कर्म करो। फिर जो चाहोगे, से कारण उपस्थित हों, वहाँ कर्म ही प्रधान कारण प्राप्त कर लोगे।' सिद्ध होता है । क्योंकि कर्म करनेसे फलको सिद्धि बुद्धिमान् विश्वामित्र मुनिका कथन सुनकर देखी जाती है और न करनेसे नहीं। अत: फलको विश्वरूपने तामस भावका आश्रय ले दीर्घकालतक

English

When Yashoda was unable to restrain the two children, both going about together, playing and very restless,

अध्याय १८४

श्लोक 35

दाम्ना बद्ध्वा तदा मध्ये निबबन्ध उलूखले कृष्णम् अक्लिष्टकर्माणम् आह चेदम् अमर्षिता

dāmnā baddhvā tadā madhye nibabandha ulūkhale kṛṣṇam akliṣṭakarmāṇam āha cedam amarṣitā

हिन्दी अर्थ

सिद्धि कर्मके ही अधीन है। कर्म भी दो प्रकारके तपस्या को । प्रधान-प्रधान ऋषियोंके मना करनेपर

English

she then bound Krishna, of untroubled deeds, with a rope to a mortar in the middle, and said angrily:

अध्याय १८४

श्लोक 36

यदि शक्तो ऽसि गच्छ त्वम् अतिचञ्चलचेष्टित

yadi śakto 'si gaccha tvam aticañcalaceṣṭita

हिन्दी अर्थ

भी उसने अपने क्रोधके . अनुरूप देवताओंके लिये कर लेनेपर' जीव

English

"If you are able, go, you of restless conduct."

अध्याय १८४

श्लोक 37

इत्य् उक्त्वा च निजं कर्म सा चकार कुटुम्बिनी व्यग्रायाम् अथ तस्यां स कर्षमाण उलूखलम्

ity uktvā ca nijaṃ karma sā cakāra kuṭumbinī vyagrāyām atha tasyāṃ sa karṣamāṇa ulūkhalam

हिन्दी अर्थ

भयंकर कार्य.किया। भयंकर कुण्ड खोदकर उसमें भयानक अग्रिदेवको प्रज्वलित किया और उसीमें बैठकर मन-ही-मन अत्यन्त भयंकर रौद्रपुरुषका आत्मरूपसे चिन्तन किया। उसे इस प्रकार तपस्या

English

Having said this, the housewife did her own work. While she was busy, he dragged the mortar,

अध्याय १८४

श्लोक 38

यमलार्जुनयोर् मध्ये जगाम कमलेक्षणः कर्षता वृक्षयोर् मध्ये तिर्यग् एवम् उलूखलम्

yamalārjunayor madhye jagāma kamalekṣaṇaḥ karṣatā vṛkṣayor madhye tiryag evam ulūkhalam

हिन्दी अर्थ

करते देख आकाशवाणी हुई--' भीमस्वरूप जगदीश्वर शिवकी महिमाको कौन जानता है। वे सम्पूर्ण जगतूकी सृष्टि करते हैं तो भी उसकी आसक्तिसे लिप्त नहीं होते।' यों कहकर आकाशवाणी मौन

English

the lotus-eyed one went between the twin arjuna trees, dragging the mortar crosswise between the trees.

अध्याय १८४

श्लोक 39

भग्नाव् उत्तुङ्गशाखाग्रौ तेन तौ यमलार्जुनौ ततः कटकटाशब्दसमाकर्णनकातरः

bhagnāv uttuṅgaśākhāgrau tena tau yamalārjunau tataḥ kaṭakaṭāśabdasamākarṇanakātaraḥ

हिन्दी अर्थ

हो गयी। मुनीश्वरगण भगवान् भीमेश्वरको नमस्कार करके अपने-अपने आश्रमको चले गये । विश्वरूप महाभीम (अत्यन्त भयंकर) था। उसके कर्म भी भयंकर थे। उसको आकृति भी बड़ी भयानक

English

By it the tops of the tall branches of the twin arjunas were broken; then, afraid at the sound of crashing,

अध्याय १८४

श्लोक 40

आजगाम व्रजजनो ददृशे च महाद्रुमौ भग्नस्कन्धौ निपातितौ भग्नशाखौ महीतले

ājagāma vrajajano dadṛśe ca mahādrumau bhagnaskandhau nipātitau bhagnaśākhau mahītale

हिन्दी अर्थ

थी। उसके हृदयका भाव भी भयंकर ही था। उसने भीमस्वरूप भगवान् रुद्रका ध्यान करके अग्निमें अपनी आहुति दे दी। तबसे उसके द्वारा आराधित भगवान् शङ्कर भीमेश्वर कहलाते हें ।

English

the people of Vraja came and saw the two great trees fallen, trunks broken, branches broken on the ground.

अध्याय १८४

श्लोक 41

ददर्श चाल्पदन्तास्यं स्मितहासं च बालकम् तयोर् मध्यगतं बद्धं दाम्ना गाढं तथोदरे

dadarśa cālpadantāsyaṃ smitahāsaṃ ca bālakam tayor madhyagataṃ baddhaṃ dāmnā gāḍhaṃ tathodare

हिन्दी अर्थ

वहाँ किया हुआ सान और दान निस्सन्देह मोक्ष देनेवाला होता है। जो सदा भक्तिपूर्वक इस प्रसङ्गका पाठ और श्रवण करता है तथा देवताओंके स्वामी भीमस्वरूप भगवान् शिवको प्रणाम करता है,

English

They saw the boy with a few teeth in his mouth, smiling, standing between them, tightly bound by the rope at his belly.

अध्याय १८४

श्लोक 42

ततश् च दामोदरतां स ययौ दामबन्धनात् गोपवृद्धास् ततः सर्वे नन्दगोपपुरोगमाः

tataś ca dāmodaratāṃ sa yayau dāmabandhanāt gopavṛddhās tataḥ sarve nandagopapurogamāḥ

हिन्दी अर्थ

उसे भगवान् शिव अपने सर्वपापापहारी चरणोंको शरणमें लेकर मुक्ति प्रदान करते हैं। यों तो भगवती गोदावरी सर्वत्र और सदा ही सम्पूर्ण पापराशिका विनाश करनेवाली तथा परम पुरुषार्थ

English

From the binding with the rope he came to be named Damodara. Then all the old cowherds led by Nanda

अध्याय १८४

श्लोक 43

मन्त्रयाम् आसुर् उद्विग्ना महोत्पातातिभीरवः स्थानेनेह न नः कार्यं व्रजामो ऽन्यन् महावनम्

mantrayām āsur udvignā mahotpātātibhīravaḥ sthāneneha na naḥ kāryaṃ vrajāmo 'nyan mahāvanam

हिन्दी अर्थ

(मोक्ष) देनेवाली हैं, तथापि जहाँ वे समुद्रमें मिली हैं, वहाँ उनका माहात्म्य विशेषरूपसे बढ़ा हुआ है। जो पुण्यात्मा प्राणी गोदावरी-सागर- संगममें स्नान कर लेता है, वह अपने पूर्वजोंका

English

took counsel, agitated, fearful of the great portents: "We have no business to stay at this place; let us go to another great forest."

अध्याय १८४

श्लोक 44

उत्पाता बहवो ह्य् अत्र दृश्यन्ते नाशहेतवः पूतनाया विनाशश् च शकटस्य विपर्ययः

utpātā bahavo hy atra dṛśyante nāśahetavaḥ pūtanāyā vināśaś ca śakaṭasya viparyayaḥ

हिन्दी अर्थ

दुःसह नरकसे उद्धार करके स्वयं भी भगवान् शिवके धाममें जाता है। जो वेदान्तद्वारा जानने योग्य तथा सबका उपास्य है, साक्षात् वह ब्रह्म ही भीमेश्वरके रूपमें प्रकट है। भीमेश्वरका दर्शन

English

"Many portents causing destruction are seen here: Putana's death, the overturning of the cart,

अध्याय १८४

श्लोक 45

विना वातादिदोषेण द्रुमयोः पतनं तथा वृन्दावनम् इतः स्थानात् तस्माद् गच्छाम मा चिरम्

vinā vātādidoṣeṇa drumayoḥ patanaṃ tathā vṛndāvanam itaḥ sthānāt tasmād gacchāma mā ciram

हिन्दी अर्थ

फिर - भयंकर दु:ख देनेवाले संसारमें नहीं प्रवेश करते।

English

the falling of the two trees without wind or other cause. Therefore let us go from this place to Vrindavana without delay,

अध्याय १८४

श्लोक 46

यावद् भौममहोत्पातदोषो नाभिभवेद् व्रजम् इति कृत्वा मतिं सर्वे गमने ते व्रजौकसः

yāvad bhaumamahotpātadoṣo nābhibhaved vrajam iti kṛtvā matiṃ sarve gamane te vrajaukasaḥ

हिन्दी अर्थ

मिलीं, तब सम्पूर्ण देवता और मुनि उनके पीछे- पीछे स्तुति करते हुए गये। वसिष्ठ, जाबालि,

English

before the evil of great earthly portents overwhelms Vraja." Having so resolved, all those dwellers of Vraja

अध्याय १८४

श्लोक 47

ऊचुः स्वं स्वं कुलं शीघ्रं गम्यतां मा विलम्ब्यताम् ततः क्षणेन प्रययुः शकटैर् गोधनैस् तथा

ūcuḥ svaṃ svaṃ kulaṃ śīghraṃ gamyatāṃ mā vilambyatām tataḥ kṣaṇena prayayuḥ śakaṭair godhanais tathā

हिन्दी अर्थ

वैष्णवगण, शातातप, शौनक, देवरात, भृगु, अग्निवेश, अत्रि, मरीचि, मनु, गौतम, कौशिक, तुम्बुरु, पर्वत,

English

said, "Let each go to his own family quickly; do not delay." Then in a moment they set out with carts and cattle wealth,

अध्याय १८४

श्लोक 48

यूथशो वत्सपालीश् च कालयन्तो व्रजौकसः सर्वावयवनिर्धूतं क्षणमात्रेण तत् तदा

yūthaśo vatsapālīś ca kālayanto vrajaukasaḥ sarvāvayavanirdhūtaṃ kṣaṇamātreṇa tat tadā

हिन्दी अर्थ

ब्रामदेव, आङ्गिरस तथा भार्गव--ये समस्त पुराणवेत्ता महर्षि प्रसन्नचित्तसे वैदिक मन्त्रोद्वारा देवी गोदावरीकी स्तुति करते थे। गोदावरीको समुद्रमें मिली हुई देख भगवान् शिव और विष्णुने भी मुनियोंको

English

the Vraja-dwellers driving the herds and the calf-keepers in groups. In an instant the place of Vraja, shaken in all its parts,

अध्याय १८४

श्लोक 49

काककाकीसमाकीर्णं व्रजस्थानम् अभूद् द्विजाः वृन्दावनं भगवता कृष्णेनाक्लिष्टकर्मणा

kākakākīsamākīrṇaṃ vrajasthānam abhūd dvijāḥ vṛndāvanaṃ bhagavatā kṛṣṇenākliṣṭakarmaṇā

हिन्दी अर्थ

प्रत्यक्ष दर्शन दिया। देवताओं और पितरोंने भी सबको पीड़ा दूर करनेवाले उन दोनों देवताओंका

English

became filled with crows and she-crows, Brahmins. Vrindavana, by the revered Krishna of untroubled deeds,

अध्याय १८४

श्लोक 50

शुभेन मनसा ध्यातं गवां वृद्धिम् अभीप्सता ततस् तत्रातिरुक्षे ऽपि धर्मकाले द्विजोत्तमाः

śubhena manasā dhyātaṃ gavāṃ vṛddhim abhīpsatā tatas tatrātirukṣe 'pi dharmakāle dvijottamāḥ

हिन्दी अर्थ

मरुदूण, लोकपाल-ये सब हाथ जोड़कर भगवान् शिव और विष्णुको स्तुति करते थे। समुद्र और

English

thought of with a good mind, wishing the increase of cows, then, though very dry, in the season of dharma, best of Brahmins,

अध्याय १८४

श्लोक 51

प्रावृट्काल इवाभूच् च नवशष्पं समन्ततः स समावासितः सर्वो व्रजो वृन्दावने ततः

prāvṛṭkāla ivābhūc ca navaśaṣpaṃ samantataḥ sa samāvāsitaḥ sarvo vrajo vṛndāvane tataḥ

हिन्दी अर्थ

गङ्गाके सातों प्रसिद्ध

English

became everywhere like the rainy season with fresh grass. Then all Vraja was settled in Vrindavana,

अध्याय १८४

श्लोक 52

शकटीवाटपर्यन्तचन्द्रार्धाकारसंस्थितिः वत्सबालौ च संवृत्तौ रामदामोदरौ ततः

śakaṭīvāṭaparyantacandrārdhākārasaṃsthitiḥ vatsabālau ca saṃvṛttau rāmadāmodarau tataḥ

हिन्दी अर्थ

» सामुद्र, ऋषिसत्र आदि तीर्थोकी महिमा तथा गौतमी-माहात्म्यका उपसंहार

English

arranged in the shape of a half-moon bounded by carts and fences. Rama and Damodara then became calf-keeping boys.

अध्याय १८४

श्लोक 53

तत्र स्थितौ तौ च गोष्ठे चेरतुर् बाललीलया बर्हिपत्त्रकृतापीडौ वन्यपुष्पावतंसकौ

tatra sthitau tau ca goṣṭhe ceratur bālalīlayā barhipattrakṛtāpīḍau vanyapuṣpāvataṃsakau

हिन्दी अर्थ

और विष्णु स्थित रहते हैं। वहाँ महादेवजी गौतमेश्वरके महान् है। नारद! किसमें इतनी शक्ति है, जो नामसे विख्यात हैं। लक्ष्मीसहित भगवान् विष्णु गोदावरीकी महिमाका पूरा-पूरा वर्णन कर सके भी वहाँ नित्य निवास करते हैं। मैंने जो वहाँ जो भक्तिपूर्वक उनके गुणगानमें प्रवृत्त हो यथाकथंचित् शिवंकी स्थापना की है, वह शिवलिङ्ग ब्रह्येश्वरके उनकी महिमाका दिग्दर्शन कराता है, उसके ऐसा

English

Staying there, the two roamed the cow-pen with child's play, with peacock-feather crests, garlands of forest flowers,

अध्याय १८४

श्लोक 54

गोपवेणुकृतातोद्यपत्त्रवाद्यकृतस्वनौ काकपक्षधरौ बालौ कुमाराव् इव पावकौ

gopaveṇukṛtātodyapattravādyakṛtasvanau kākapakṣadharau bālau kumārāv iva pāvakau

हिन्दी अर्थ

नामसे प्रसिद्ध है । देवताओंसहित मैंने अपने लिये करनेमें निःसंदेह कोई अपराध नहीं है; इसलिये कारण उपस्थित होनेपर सम्पूर्ण लोकोंके उपकारके मैंने भी लोक-कल्याणके उद्देश्यसे अत्यन्त प्रयास लिये भगवान् विष्णुका भी स्तवन कियाः थां। वे करके गङ्गाके माहात्म्यको संक्षेपसे सूचित किया विष्णु वहाँ चक्रपाणिके नामसे विख्यात हैं। वहीं । है । कौन गोदावरीके प्रत्येक तीर्थका प्रभाव बता

English

making music with cowherds' flutes and leaf-instruments, with crow-wing locks, like two youthful fires.

अध्याय १८४

श्लोक 55

हसन्तौ च रमन्तौ च चेरतुस् तन् महद् वनम् क्वचिद् धसन्ताव् अन्योन्यं क्रीडमानौ तथा परैः

hasantau ca ramantau ca ceratus tan mahad vanam kvacid dhasantāv anyonyaṃ krīḍamānau tathā paraiḥ

हिन्दी अर्थ

ऐन्द्रतीर्थ भी है औरं उसीको हयग्रीवतीर्थ 'भी सकता है। कहीं, किसी स्थानपर, किसी विशेष कहते हैं। वहाँ सोमतीर्थ भी' है, जहाँ भगवान् समयमें कोई उत्तम तीर्थ प्रकट होते हैं; परंतु शिव सोमेश्वरके नामंसे: प्रसिद्ध हैं। एक समय गौतमीमें सर्वत्र और सदा ही तीर्थाका वास है। इन्द्रने बड़े-बड़े यज्ञाँद्वारा मेरी आराधना करके वे मनुष्योंके लिये सब जगह और सब समय

English

Laughing and sporting they wandered through that great forest; sometimes laughing at one another, playing with others,

अध्याय १८४

श्लोक 56

गोपपुत्रैः समं वत्सांश् चारयन्तौ विचेरतुः कालेन गच्छता तौ तु सप्तवर्षौ बभूवतुः

gopaputraiḥ samaṃ vatsāṃś cārayantau viceratuḥ kālena gacchatā tau tu saptavarṣau babhūvatuḥ

हिन्दी अर्थ

मेरे प्रसादसे अपना मनोरथ सिद्ध किया था। पवित्र हैं। उनके गुणोंका वर्णन कौन कर सकता तबसे मैं भी वहीं सब लोगोंका उपकार करनेके है। उनके लिये तो केवल नमस्कार करना ही

English

with the cowherds' sons they wandered tending calves. In passing time the two became seven years old,

अध्याय १८४

श्लोक 57

सर्वस्य जगतः पालौ वत्सपालौ महाव्रजे प्रावृट्कालस् ततो ऽतीव मेघौघस्थगिताम्बरः

sarvasya jagataḥ pālau vatsapālau mahāvraje prāvṛṭkālas tato 'tīva meghaughasthagitāmbaraḥ

हिन्दी अर्थ

लिये रहता हुँ, विष्णु और शिव तो वहाँ हैं ही। उचित जान पड़ता है ।

English

the protectors of the whole world, calf-keepers in the great Vraja. Then came the rainy season, with the sky covered by masses of clouds,

अध्याय १८४

श्लोक 58

बभूव वारिधाराभिर् ऐक्यं कुर्वन् दिशाम् इव प्ररूढनवपुष्पाढ्या शक्रगोपवृता मही

babhūva vāridhārābhir aikyaṃ kurvan diśām iva prarūḍhanavapuṣpāḍhyā śakragopavṛtā mahī

हिन्दी अर्थ

अग्रिने जहाँ यज्ञ किया, वह स्थान आग्नेयतीर्थके

English

making the directions as one with streams of rain, the earth rich with newly grown flowers, covered with red insects,

अध्याय १८४

श्लोक 59

यथा मारकते वासीत् पद्मरागविभूषिता ऊहुर् उन्मार्गगामीनि निम्नगाम्भांसि सर्वतः

yathā mārakate vāsīt padmarāgavibhūṣitā ūhur unmārgagāmīni nimnagāmbhāṃsi sarvataḥ

हिन्दी अर्थ

नामसे प्रसिद्ध है। तदनन्तर आदित्यतीर्थ है, जहाँ

English

as if adorned with emerald and ruby. Rivers flowed on all sides, going off their courses,

अध्याय १८४

श्लोक 60

मनांसि दुर्विनीतानां प्राप्य लक्ष्मीं नवाम् इव विकाले च यथाकामं व्रजम् एत्य महाबलौ गोपैः समानैः सहितौ चिक्रीडाते ऽमराव् इव

manāṃsi durvinītānāṃ prāpya lakṣmīṃ navām iva vikāle ca yathākāmaṃ vrajam etya mahābalau gopaiḥ samānaiḥ sahitau cikrīḍāte 'marāv iva

हिन्दी अर्थ

वेदमय आदित्य प्रतिदिन मध्याह्कालमें दूसरा रूप धारण करके मेरा, शिवका तथा विष्णुका

English

like the minds of the ill-disciplined on getting new fortune; and the two mighty ones came to Vraja at will out of season and played with the equal cowherds like two immortals.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_brahmapurANa-1-246.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Brahma Purana — Chapter 184
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.