Brahma Purana· Brahma Purāṇa
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अध्याय 190 / 246

Adhyaya 190

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अध्याय १९०

श्लोक 1

ककुद्मिनि हते ऽरिष्टे धेनुके च निपातिते प्रलम्बे निधनं नीते धृते गोवर्धनाचले

kakudmini hate 'riṣṭe dhenuke ca nipātite pralambe nidhanaṃ nīte dhṛte govardhanācale

हिन्दी अर्थ

शरणमें आया हूँ। श्रीकृष्ण! आप इस भवसागरसे जानेपर मुनिवर कण्डु बहुत प्रसन्न हुए और समस्त मेरा उद्धार कीजिये। सुरेश्वर! मैं आपको कृपासे कामनाओंका त्याग करके स्वस्थचित्त हो गये आपके ही सनातन परम पदको प्राप्त करना समस्त इन्द्रियोंको वशमें करके ममता और अहंकारसे चाहता हूँ, जहाँ जानेसे फिर इस संसारमें नहीं रहित हो एकाग्रचित्तसे भगवान् पुरुषोत्तमका ध्यान

English

After getting Moon as their husband, the medicinal herbs became joyous. They spoke these words liked by Ganga and the entire world.

अध्याय १९०

श्लोक 2

दमिते कालिये नागे भग्ने तुङ्गद्रुमद्वये हतायां पूतनायां च शकटे परिवर्तिते

damite kāliye nāge bhagne tuṅgadrumadvaye hatāyāṃ pūtanāyāṃ ca śakaṭe parivartite

हिन्दी अर्थ

आना पडता करने लगे। भगवानूके निर्लेप, निर्गुण, शान्त और

English

O king, you redeem him who gifts us on Ganga. You are the excellent one, O lord of herbs. The mobile and immo¬ bile beings are dependent on you.

अध्याय १९०

श्लोक 3

कंसाय नारदः प्राह यथावृत्तम् अनुक्रमात् यशोदादेवकीगर्भपरिवर्ताद्य् अशेषतः

kaṃsāya nāradaḥ prāha yathāvṛttam anukramāt yaśodādevakīgarbhaparivartādy aśeṣataḥ

हिन्दी अर्थ

श्रीभगवान् बोले--मुनिश्रेष्ठ! तुम मेरे भक्त सन्मात्र स्वरूपका चिन्तन करते हुए उन्होंने दुर्लभ हो। सदा मेरी ही आराधना करते रहो । तुम्हें मेरे मोक्ष प्राप्त कर लिया जो महात्मा कण्डुकी कथाको प्रसादसे अभीष्ट मोक्षपदकी प्राप्ति होगी । विप्रवर पढ़ता अथवा सुनता है, वह सब पापोंसे मुक्त हो मेरे भक्त क्षत्रिय, वैश्य, स्त्री, शूद्र तथा अन्त्यज स्वर्गलोकमें जाता है। मुनिवरो! इस प्रकार मैंने

English

The medicinal herbs conversed with king Soma: £t O king you redeem him who gifts us to brahmins.

अध्याय १९०

श्लोक 4

श्रुत्वा तत् सकलं कंसो नारदाद् देवदर्शनात् वसुदेवं प्रति तदा कोपं चक्रे स दुर्मतिः

śrutvā tat sakalaṃ kaṃso nāradād devadarśanāt vasudevaṃ prati tadā kopaṃ cakre sa durmatiḥ

हिन्दी अर्थ

भी परम सिद्धिको प्राप्त होते हैं; फिर तुम-जैसे इस कर्मभूमि तथा मोक्षदायक पुरुषोत्तमक्षेत्रका तपोनिष्ठ ब्राह्मणको तो बात ही क्या है! चाण्डाल वर्णन किया, जहाँ साक्षात् भगवान् पुरुषोत्तम निवास भी यदि उत्तम श्रद्धासे युक्त एवं मेरा भक्त हो करते हैं। जो मनुष्य संसारजनित दुःखोंका नाश तो उसे अभीष्ट सिद्धि प्रात होती है; फिर औरोंको और मोक्ष प्रदान करनेवाले वरदायक भगवान्

English

We are in the form of Brahman, we are in the form of vital airs. O king, you redeem him who gifts us to brahmins.

अध्याय १९०

श्लोक 5

सो ऽतिकोपाद् उपालभ्य सर्वयादवसंसदि जगर्हे यादवांश् चापि कार्यं चैतद् अचिन्तयत्

so 'tikopād upālabhya sarvayādavasaṃsadi jagarhe yādavāṃś cāpi kāryaṃ caitad acintayat

हिन्दी अर्थ

तो चर्चा ही क्या है। श्रीपुरुषोत्तमका भक्तिपूर्वक दर्शन, स्तवन और

English

O king, you redeem him who successfully performs holy rites and who gifts us away always to brahmins. It is an adoration unto us.

अध्याय १९०

श्लोक 6

यावन् न बलम् आरूढौ बलकृष्णौ सुबालकौ तावद् एव मया वध्याव् असाध्यौ रूढयौवनौ

yāvan na balam ārūḍhau balakṛṣṇau subālakau tāvad eva mayā vadhyāv asādhyau rūḍhayauvanau

हिन्दी अर्थ

व्यासजी कहते हैं-यों कहकर भक्तवत्सल ध्यान करते हैं, वे समस्त दोषोंसे मुक्त हो भगवान्के भगवान् विष्णु वहीं अन्तर्धान हो गये। उनके चले अविनाशी धाममें जाते हैं ।

English

O king, you redeem him who gifts away Havya or Kavya which is nectarous and which is consumed or some¬ thing which is weightier.

अध्याय १९०

श्लोक 7

चाणूरो ऽत्र महावीर्यो मुष्टिकश् च महाबलः एताभ्यां मल्लयुद्धे तौ घातयिष्यामि दुर्मदौ

cāṇūro 'tra mahāvīryo muṣṭikaś ca mahābalaḥ etābhyāṃ mallayuddhe tau ghātayiṣyāmi durmadau

हिन्दी अर्थ

मुनियोंका भगवान्के अवतारके सम्बन्धमें प्रश्‍न और श्रीव्यासजीद्वारा उसका उत्तर मुनि बोले--पुरुषश्रेष्ठ व्यासजी ! आपने भारतवर्ष भाँति अत्यन्त चञ्चल क्षणभङ्गर है। इसको तथा पुरुषोत्तमक्षेत्रके अद्भुत गुणोंका वर्णन किया। भयंकरता इतनी बढ़ी हुई है कि उसका विचार

English

O king, you redeem him who devoutly hears, remem¬ bers or reads this episode from the Vedic text."

अध्याय १९०

श्लोक 8

धनुर्महमहायागव्याजेनानीय तौ व्रजात् तथा तथा करिष्यामि यास्यतः संक्षयं यथा

dhanurmahamahāyāgavyājenānīya tau vrajāt tathā tathā kariṣyāmi yāsyataḥ saṃkṣayaṃ yathā

हिन्दी अर्थ

उस क्षेत्रके उत्तम माहात्म्यको सुनकर हमें बडी आते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। ऐसे संसारमें उन्हें प्रसन्नता हुई है। हमारे मनमें बहुत दिनोंसे एक जन्म ग्रहण करनेको क्या आवश्यकता थी? इस संदेह है। उसका निवारण करनेवाला आपके सिवा भूतलपर अवतीर्ण हो उन्होंने जो-जो लीलाएँ कीं, दूसरा कोई नहीं है। हम भूतलपर श्रीकृष्ण, बलदेव उनका विस्तारपूर्वक वर्णन कोजिये। उनका सम्पूर्ण

English

That place on the banks of Ganga where this episode had been told by the medicinal herbs in the company of Soma, the shining one, is called Dhanyatfrtha.

अध्याय १९०

श्लोक 9

इत्य् आलोच्य स दुष्टात्मा कंसो रामजनार्दनौ हन्तुं कृतमतिर् वीरम् अक्रूरं वाक्यम् अब्रवीत्

ity ālocya sa duṣṭātmā kaṃso rāmajanārdanau hantuṃ kṛtamatir vīram akrūraṃ vākyam abravīt

हिन्दी अर्थ

और सुभद्राके अवतारका रहस्य सुनना चाहते हैं । चरित्र अदभुत और अलौकिक है । भगवान् सम्पूर्ण वीरवर श्रीकृष्ण और बलभद्र किसलिये अवतीर्ण देवताओंके स्वामी एवं सुरश्रेष्ठ हैं और पृथ्वीको हुए थे? वे वसुदेवके पुत्र होकर नन्दके घरमें क्यों उत्पन्न करनेवाले तथा अविनाशी परमात्मा हैं। रहे? यह मर्त्यलोक सर्वथा निःसार है। इसमें उन्होंने अपने दिव्य स्वरूपको मनुष्योंके बीचमें

English

A holy plunge, Japa, Homa, charitable gifts, libation to the Manes and gifting of food performed there are capable of bestowing endless benefit.

अध्याय १९०

श्लोक 10

भो भो दानपते वाक्यं क्रियतां प्रीतये मम इतः स्यन्दनम् आरुह्य गम्यतां नन्दगोकुलम्

bho bho dānapate vākyaṃ kriyatāṃ prītaye mama itaḥ syandanam āruhya gamyatāṃ nandagokulam

हिन्दी अर्थ

अधिकतर दु:ख ही भरा है। यह पानीके बुलबुलेको कैसे प्रकट किया? जो भगवान् सम्पूर्ण जङ्गम श्रपाकोऽपि च मद्भक्तः सम्यक् श्रद्धासमन्वितः । प्राप्नोत्यभिमतां सिद्धिमन्येषां तत्र का कथा॥

English

On both banks there are altogether one thousand six hundred holy centres which dispel all sins and increase wealth.

अध्याय १९०

श्लोक 11

वसुदेवसुतौ तत्र विष्णोर् अंशसमुद्भवौ नाशाय किल संभूतौ मम दुष्टौ प्रवर्धतः

vasudevasutau tatra viṣṇor aṃśasamudbhavau nāśāya kila saṃbhūtau mama duṣṭau pravardhataḥ

हिन्दी अर्थ

प्राणियोंकी गति हैं, वे मानव-शरीरमें कैसे आये? विकारोंसे रहित, शुद्ध, नित्य, सदा एकरूप इसे देवता और हैत्य भी बड़े आश्चर्यकी बात रहनेवाले और विजयी हैं, उन परमात्मा श्रीविष्णुको मानते हैं। महामुने! आप भगवान् विष्णुके नमस्कार है। जो हिरण्यगर्भ, हरि, शंकर तथा आश्चर्यजनक अवतारकी कथा सुनाइये। भगवानूके वासुदेव कहलाते हैं, जिनसे समस्त प्राणियोंका

English

"There two sons of Vasudeva, born as portions of Vishnu, have indeed been born for my destruction; wicked, they are growing.

अध्याय १९०

श्लोक 12

धनुर्महमहायागश् चतुर्दश्यां भविष्यति आनेयौ भवता तौ तु मल्लयुद्धाय तत्र वै

dhanurmahamahāyāgaś caturdaśyāṃ bhaviṣyati āneyau bhavatā tau tu mallayuddhāya tatra vai

हिन्दी अर्थ

बल और पराक्रम विख्यात हैं। उनके तेजकी तरण-तारण होता है, जो सृष्टि, पालन और संहार कोई माप नहीं है। वे अपने अलौकिक चरित्रोंके करनेवाले हैं, उन भगवान्को नमस्कार है। जो द्वारा आश्चर्यरूप जान पड़ते हैं। आप उनके तत्त्वका एक होते हुए भी अनेक रूपोंमें प्रकट होते हैं, वर्णन कोजिये। भगवान् पुरुषोत्तम देवताओंकी स्थूल और सूक्ष्म, व्यक्त और अव्यक्त जिनके

English

The great sacrifice of the bow will be on the fourteenth; you must bring those two there for a wrestling match.

अध्याय १९०

श्लोक 13

चाणूरमुष्टिकौ मल्लौ नियुद्धकुशलौ मम ताभ्यां सहानयोर् युद्धं सर्वलोको ऽत्र पश्यतु

cāṇūramuṣṭikau mallau niyuddhakuśalau mama tābhyāṃ sahānayor yuddhaṃ sarvaloko 'tra paśyatu

हिन्दी अर्थ

पीड़ा दूर करनेवाले और सर्वव्यापी हैं। जगत्के स्वरूप हैं और जो मोक्षके कारण हैं, उन भगवान् रक्षक और सर्वलोकमहेश्वर हैं। संसारकी सृष्टि, विष्णुको नमस्कार है। जो जगन्मय हैं, जगत्की पालन और संहार-सब वे ही करते हैं। वे ही सृष्टि, पालन और संहारके मूल कारण हैं, उन सब लोकोंको सुख देनेवाले हैं। वे अक्षय, सनातन, परमात्मा, भगवान् विष्णुको नमस्कार है। जो

English

Wrestlers Chanura and Mushtika are skilled in wrestling, mine; let all the world see the fight with them.

अध्याय १९०

श्लोक 14

नागः कुवलयापीडो महामात्रप्रचोदितः स तौ निहंस्यते पापौ वसुदेवात्मजौ शिशू

nāgaḥ kuvalayāpīḍo mahāmātrapracoditaḥ sa tau nihaṃsyate pāpau vasudevātmajau śiśū

हिन्दी अर्थ

अनन्त, क्षय और वृद्धिसे रहित, निर्लेप, निर्गुण, सूक्ष्मसे भी सूक्ष्मतर, सम्पूर्ण विश्वके आधारभूत, सूक्ष्म, निर्विकार, निरञ्जन, समस्त उपाधियोँसे समस्त प्राणियोंके भीतर विराजमान और अपनी रहित, सत्तामात्ररूपसे स्थित, अविकारी, विभु, महिमासे कभी च्युत न होनेवाले हैं, उन भगवान् नित्य, अचल, निर्मल, व्यापक, नित्यतृप्त, निरामय पुरुषोत्तमको प्रणाम है। जो वास्तवमें अत्यन्त

English

The elephant Kuvalayapida, driven by his great mahout, will kill those two sinful sons of Vasudeva, children.

अध्याय १९०

श्लोक 15

तौ हत्वा वसुदेवं च नन्दगोपं च दुर्मतिम् हनिष्ये पितरं चैव उग्रसेनं च दुर्मतिम्

tau hatvā vasudevaṃ ca nandagopaṃ ca durmatim haniṣye pitaraṃ caiva ugrasenaṃ ca durmatim

हिन्दी अर्थ

तथा शाश्वत परमात्मा हैं। सत्ययुगमें उनका विशुद्ध निर्मल ज्ञानस्वरूप होते हुए भी भ्रमपूर्ण दृष्टिके 'हरि' नाम सुना जाता है। देवताओंमें वे वैकुण्ठ कारण भिन्न-भिन्न पदार्थोके रूपमें स्थित दिखायी और मनुष्योंमें श्रीकृष्ण नामसे विख्यात हें । उन्हीं देते हैं, जिनका आदि नहीं है, जो सम्पूर्ण जगतूके परमेश्वरको भूत और भविष्य लीलाओंको, जिनका ईश्वर, अजन्मा, अक्षय और अविनाशी हैं, उन

English

Having killed them, I shall kill Vasudeva and the evil-minded Nanda the cowherd, and my father and the evil-minded Ugrasena.

अध्याय १९०

श्लोक 16

ततः समस्तगोपानां गोधनान्य् अखिलान्य् अहम् वित्तं चापहरिष्यामि दुष्टानां मद्वधैषिणाम्

tataḥ samastagopānāṃ godhanāny akhilāny aham vittaṃ cāpahariṣyāmi duṣṭānāṃ madvadhaiṣiṇām

हिन्दी अर्थ

रहस्य अत्यन्त गहन है, हम सुनना चाहते हैं। भगवान् श्रीहरिको नमस्कार करके मैं उनके व्यासजी बोले--जो सम्पूर्ण देवताओंके स्वामी, अवतारकी कथा आरम्भ करता हूँ। सबको उत्पत्तिके कारण, पुराणपुरुष, सनातन, पूर्वकालमें दक्ष आदि श्रेष्ठ मुनियोंके पूछनेपर अविनाशी, चतुर्व्यूहस्वरूप, निर्गुण, गुणरूप, परम कमलयोनि भगवान् ब्रह्माने जो कुछ कहा था,

English

Then I shall seize all the cattle-wealth and property of all the cowherds, evil ones wishing my death.

अध्याय १९०

श्लोक 17

त्वाम् ऋते यादवाश् चेमे दुष्टा दानपते मम एतेषां च वधायाहं प्रयतिष्याम्य् अनुक्रमात्

tvām ṛte yādavāś ceme duṣṭā dānapate mama eteṣāṃ ca vadhāyāhaṃ prayatiṣyāmy anukramāt

हिन्दी अर्थ

महान्, परम गुरु, वरेण्य, असीम, यज्ञाङ्ग और वही मैं भी आपलोगोंसे कहूँगा। जो अपने चारों

English

Except you, lord of givers, these Yadavas are wicked to me; I shall strive in order to kill them.

अध्याय १९०

श्लोक 18

ततो निष्कण्टकं सर्वं राज्यम् एतद् अयादवम् प्रसाधिष्ये त्वया तस्मान् मत्प्रीत्या वीर गम्यताम्

tato niṣkaṇṭakaṃ sarvaṃ rājyam etad ayādavam prasādhiṣye tvayā tasmān matprītyā vīra gamyatām

हिन्दी अर्थ

मैं नमस्कार करता हूँ। जिनसे लघु और जिनसे करते हुए तीनों लोकोंको पवित्र करते हैं, जिनका महान् दूसरा कोई नहीं है, जिन अजन्मा प्रभुने प्रादुर्भाव एकार्णवके जलसे हुआ है, असुरगण सम्पूर्ण चराचर जगत्को व्याप्त कर रखा है, जो जिनके यज्ञोंका लोप नहीं कर पाते, उन भगवान् आविर्भाव, तिरोभाव, दृष्ट और अदृष्टसे विलक्षण ब्रह्माजीको प्रणाम करके में उन्हींकी कही हुई

English

Then I shall rule this entire kingdom, free of thorns and without Yadavas, with your help; therefore, hero, go out of love for me.

अध्याय १९०

श्लोक 19

यथा च माहिषं सर्पिर् दधि चाप्य् उपहार्य वै गोपाः समानयन्त्य् आशु त्वया वाच्यास् तथा तथा

yathā ca māhiṣaṃ sarpir dadhi cāpy upahārya vai gopāḥ samānayanty āśu tvayā vācyās tathā tathā

हिन्दी अर्थ

हैं, सृष्टि और संहारको भी जिनका स्वरूप कथा आरम्भ करता हूँ। जिन्होंने सृष्टिके उद्देश्यसे बतलाया जाता है, उन आदिदेव परब्रह्म परमात्माको धर्म आदिको प्रकट किया है, उन अव्यक्तजन्मा मैं समाधिके द्वारा प्रणाम करता हूँ। जो सम्पूर्ण ब्रह्माजीके सम्पूर्ण मतका ही मैं वर्णन करूँगा।

English

And as the cowherds quickly bring buffalo ghee and curd as presents, so you must speak to them accordingly."

अध्याय १९०

श्लोक 20

इत्य् आज्ञप्तस् तदाक्रूरो महाभागवतो द्विजाः प्रीतिमान् अभवत् कृष्णं श्वो द्रक्ष्यामीति सत्वरः

ity ājñaptas tadākrūro mahābhāgavato dvijāḥ prītimān abhavat kṛṣṇaṃ śvo drakṣyāmīti satvaraḥ

हिन्दी अर्थ

मुनियोंका भगवानूके अवतारके सम्बन्धमें प्रश्न और श्रीव्यासजीद्वारा उसका उत्तर २८३

English

Thus commanded, Akrura, a great devotee, Brahmins, was pleased, thinking "Tomorrow I shall see Krishna," and was in haste.

अध्याय १९०

श्लोक 21

तथेत्य् उक्त्वा तु राजानं रथम् आरुह्य सत्वरः निश्चक्राम तदा पुर्या मथुराया मधुप्रियः

tathety uktvā tu rājānaṃ ratham āruhya satvaraḥ niścakrāma tadā puryā mathurāyā madhupriyaḥ

हिन्दी अर्थ

तत्त्वदर्शी मुनियोंने जलको 'नार' कहा है। वह सोते रहे। वास्तवमें वे योगनिद्राका आश्रय ले नार पूर्वकालमें भगवानूका अयन (निवासस्थान) अपनी योगमहिमामें स्थित हो गये थे। सम्पूर्ण हुआ। इसलिये वे नारायण कहलाते हैं। वे चराचर जगत्को उन्होंने अपने उदरमें स्थापित भगवान् नारायण सबको व्याप्त करके स्थित हैं। कर रखा था। जनलोकनिवासी सिद्ध और महर्षि

English

Saying "So be it" to the king, he quickly mounted a chariot and left Mathura city, fond of Madhu.

अध्याय १९०

श्लोक 22

केशी चापि बलोदग्रः कंसदूतः प्रचोदितः कृष्णस्य निधनाकाङ्क्षी वृन्दावनम् उपागमत्

keśī cāpi balodagraḥ kaṃsadūtaḥ pracoditaḥ kṛṣṇasya nidhanākāṅkṣī vṛndāvanam upāgamat

हिन्दी अर्थ

वे ही सगुण और निर्गुण कहलाते हैं। वे दूर भी उनकी स्तुति करते थे। उसी समय उनकी नाभिसे हैं और समीप भी। उनको 'वासुदेव' संज्ञा है। एक कमल प्रकट हुआ, जो दिशारूपी पत्रोंसे ममताका त्याग करनेपर ही उनका साक्षात्कार सुशोभित, अग्नि और सूर्यके समान तेजोमय और होता है। उनमें रूप और वर्ण आदि काल्पनिक पर्वतरूपी केसराँसे अलंकृत था। सुवर्णमय मेरुगिरि

English

Keshi too, proud of strength, Kamsa's messenger, impelled, desiring Krishna's death, came to Vrindavana.

अध्याय १९०

श्लोक 23

स खुरक्षतभूपृष्ठः सटाक्षेपधुताम्बुदः पुनर् विक्रान्तचन्द्रार्कमार्गो गोपान्तम् आगमत्

sa khurakṣatabhūpṛṣṭhaḥ saṭākṣepadhutāmbudaḥ punar vikrāntacandrārkamārgo gopāntam āgamat

हिन्दी अर्थ

भाव नहीं हैं। वे सदा शुद्ध, सुप्रतिष्ठित और उसका किञ्जल्क (केसरका मध्यभाग) था। वह एकरूप हैं जब-जब धर्मकी हानि और अधर्मका कमल ही पितामह ब्रह्माजीका सुन्दर गृह था। उत्थान होता है, तब-तब वे अपने-आपको उसीमें चार मुखोंवाले देवाधिदेव ब्रह्माजी प्रकट संसारमें प्रकट करते हैं। पूर्वकालमें उन्हीं प्रजापालक हुए। उस समय भगवान् विष्णुके कानोंकी मैलसे

English

With the earth's surface wounded by his hooves, shaking the clouds by tossing his mane, again crossing the path of moon and sun, he came to the cowherds' edge.

अध्याय १९०

श्लोक 24

तस्य ह्रेषितशब्देन गोपाला दैत्यवाजिनः गोप्यश् च भयसंविग्ना गोविन्दं शरणं ययुः

tasya hreṣitaśabdena gopālā daityavājinaḥ gopyaś ca bhayasaṃvignā govindaṃ śaraṇaṃ yayuḥ

हिन्दी अर्थ

भगवानूने वाराहरूप धारण करके थूथुनसे जलको दो महाबली और महापराक्रमी दानव उत्पन्न हुए, हटाया और रसातलमें डूबी हुई पृथ्वीको अपनी जो ब्रह्माजीको मार डालनेके लिये उद्यत हो गये। एक दाढ़से कमलके फूलकी भाँति ऊपर उठा उनका नाम मधु और कैटभ था। भगवानूने समुद्ररूपी लिया। उन्होंने ही नृसिंहरूप धारण करके शयनगृहसे उठकर उन दोनों दुर्धर्ष हैत्योंका वध

English

At his neighing sound the cowherds, the Daitya's horse, and the gopis, agitated by fear, took refuge in Govinda.

अध्याय १९०

श्लोक 25

त्राहि त्राहीति गोविन्दस् तेषां श्रुत्वा तु तद्वचः सतोयजलदध्वानगम्भीरम् इदम् उक्तवान्

trāhi trāhīti govindas teṣāṃ śrutvā tu tadvacaḥ satoyajaladadhvānagambhīram idam uktavān

हिन्दी अर्थ

हिरण्यकशिपुका वध किया और विप्रचित्ति आदि किया। ये तथा और भी भगवानूकी असंख्य अन्य दानवोंको भी मार गिराया। फिर वामन लीलाएँ हैं, जिनकी मैं गणना नहीं कर सकता। अवतार लेकर मायासे बलिको बाँधा और हैत्योंको इस समय अजन्मा भगवानूके जिस अवतारका जीतकर तीनों लोकोंको अपने तीन पगोंसे ही प्रसद्ध चल रहा है, वह मथुरामें हुआ था। इस

English

Hearing their "Save, save!" Govinda, deep as the thunder of a water-bearing cloud, said:

अध्याय १९०

श्लोक 26

अलं त्रासेन गोपालाः केशिनः किं भयातुरैः भवद्भिर् गोपजातीयैर् वीरवीर्यं विलोप्यते

alaṃ trāsena gopālāḥ keśinaḥ kiṃ bhayāturaiḥ bhavadbhir gopajātīyair vīravīryaṃ vilopyate

हिन्दी अर्थ

नाप लिया। वे ही भृगु-वंशमें परमप्रतापी प्रकार भगवानूकी जो सात्त्विक मूर्ति है, वही जमदग्निकुमार परशुरामके रूपमें उत्पन्न हुए, जिन्होंने अवतार धारण करती है। वह प्रद्युम्न नामसे विख्यात पिताके वधका बदला लेनेके लिये क्षत्रियोंका है और सदा रक्षाकार्यमें संलग्न रहती है। वह संहार कर डाला। उन्हीं भगवानूने अत्रिकुमार भगवान् वासुदेवकी इच्छाके अनुसार देवता, मनुष्य

English

"Enough of fear, cowherds; why be afraid of Keshi? By you, of the cowherd class, the valour of heroes is lost.

अध्याय १९०

श्लोक 27

किम् अनेनाल्पसारेण ह्रेषितारोपकारिणा दैतेयबलवाह्येन वल्गता दुष्टवाजिना

kim anenālpasāreṇa hreṣitāropakāriṇā daiteyabalavāhyena valgatā duṣṭavājinā

हिन्दी अर्थ

प्रतापी दत्तात्रेयके रूपमें अवतीर्ण हो महात्मा और तिर्यक् योनिमें अवतीर्ण होती है और अलर्कको अष्टाङ्गयोगका उपदेश दिया। त्रेतामें उसीके अनुकूल स्वभाव बना लेती है। भक्त दशरथनन्दन श्रीरामके रूपमें प्रकट होकर उन्होंने पुरुषोंद्वारा पूजित होनेपर वह उनकी मनोवाञ्छित ही त्रिभुवनको भय देनेवाले रावणका युद्धमेंकामनाओंको भी पूर्ण करती है। इस तरह मैंने

English

What use is this one of little substance, who helps by neighing, a wicked horse driven by Daitya force, prancing?

अध्याय १९०

श्लोक 28

एह्य् एहि दुष्ट कृष्णो ऽहं पूष्णस् त्व् इव पिनाकधृक् पातयिष्यामि दशनान् वदनाद् अखिलांस् तव

ehy ehi duṣṭa kṛṣṇo 'haṃ pūṣṇas tv iva pinākadhṛk pātayiṣyāmi daśanān vadanād akhilāṃs tava

हिन्दी अर्थ

संहार किया। यहाँ भगवान्के अवतारका रहस्य बतलाया है।

English

Come, come, wicked one; I am Krishna, bearing the Pinaka like Shiva with Pushan; I shall make all your teeth fall from your mouth."

अध्याय १९०

श्लोक 29

इत्य् उक्त्वा स तु गोविन्दः केशिनः संमुखं ययौ विवृतास्यश् च सो ऽप्य् एनं दैतेयश् च उपाद्रवत्

ity uktvā sa tu govindaḥ keśinaḥ saṃmukhaṃ yayau vivṛtāsyaś ca so 'py enaṃ daiteyaś ca upādravat

हिन्दी अर्थ

प्रलयकालमें जब सारी सृष्टि एकार्णवमें निमग्न भगवान् विष्णु यद्यपि कृतकृत्य हैं, उन्हें कुछ हो गयी, उस समय देवताओंके भी देवता जगत्पति करना अथवा पाना नहीं है तो भी वे लोक- श्रीविष्णु एक सहस्र युगोंतक शेषनागको शय्यापर कल्याणके लिये ही मानवरूपमें प्रकट हुए थे।

English

Having said so, Govinda went before Keshi; open-mouthed, the Daitya also rushed at him.

अध्याय १९०

श्लोक 30

बाहुम् आभोगिनं कृत्वा मुखे तस्य जनार्दनः प्रवेशयाम् आस तदा केशिनो दुष्टवाजिनः

bāhum ābhoginaṃ kṛtvā mukhe tasya janārdanaḥ praveśayām āsa tadā keśino duṣṭavājinaḥ

हिन्दी अर्थ

भगवानूके अवतारका उपक्रम

English

Making his arm coiled, Janardana then put it into the mouth of the wicked horse Keshi.

अध्याय १९०

श्लोक 31

केशिनो वदनं तेन विशता कृष्णबाहुना शातिता दशनास् तस्य सिताभ्रावयवा इव

keśino vadanaṃ tena viśatā kṛṣṇabāhunā śātitā daśanās tasya sitābhrāvayavā iva

हिन्दी अर्थ

व्यासजी कहते हैं-मुनिवरो ! अब मैं संक्षेपसे पृथ्वीका यह वचन सुनकर सम्पूर्ण देवताओंने श्रीहरिके अवतारका वर्णन करता हूँ, सुनो। भगवान् उसका भार उतारनेके लिये ब्रह्माजीको प्रेरित इस पृथ्वीका भार उतारनेकी इच्छासे अवतार लेते किया। तब ब्रह्माजी बोले--'देवताओ ! पृथ्वी जो हैं। जब-जब अधर्मकी वृद्धि होती है और धर्मका कुछ कहती है, वह सब ठीक है। वास्तवमें मैं

English

By Krishna's arm entering Keshi's mouth, his teeth were broken like pieces of white cloud.

अध्याय १९०

श्लोक 32

कृष्णस्य ववृधे बाहुः केशिदेहगतो द्विजाः विनाशाय यथा व्याधिर् आप्तभूतैर् उपेक्षितः

kṛṣṇasya vavṛdhe bāhuḥ keśidehagato dvijāḥ vināśāya yathā vyādhir āptabhūtair upekṣitaḥ

हिन्दी अर्थ

हास होने लगता है, तब-तब भगवान् जनार्दन

English

Krishna's arm in Keshi's body grew, Brahmins, like a disease neglected by friends, for destruction.

अध्याय १९०

श्लोक 33

विपाटितौष्ठो बहुलं सफेनं रुधिरं वमन् सृक्कणी विवृते चक्रे विश्लिष्टे मुक्तबन्धने

vipāṭitauṣṭho bahulaṃ saphenaṃ rudhiraṃ vaman sṛkkaṇī vivṛte cakre viśliṣṭe muktabandhane

हिन्दी अर्थ

अपने स्वरूपके दो भाग करके यहाँ अवतीर्ण

English

With split lips, vomiting much frothy blood, the corners of his mouth wide, his bonds loosened, his eyes rolling,

अध्याय १९०

श्लोक 34

जगाम धरणीं पादैः शकृन्मूत्रं समुत्सृजन् स्वेदार्द्रगात्रः श्रान्तश् च निर्यत्नः सो ऽभवत् ततः

jagāma dharaṇīṃ pādaiḥ śakṛnmūtraṃ samutsṛjan svedārdragātraḥ śrāntaś ca niryatnaḥ so 'bhavat tataḥ

हिन्दी अर्थ

होते हैं। साधु पुरुषोंकी रक्षा, धर्मकी स्थापना, £ दुष्टों तथा अन्य देव-द्रोहियोंका दमन और प्रजावर्गका पालन करनेके लिये वे प्रत्येक युगमें अवतार धारण करते हैं। पहलेकी बात है--यह पृथ्वी ट्ट

English

he struck the ground with his feet, releasing dung and urine, his body wet with sweat, wearied and without effort.

अध्याय १९०

श्लोक 35

व्यादितास्यो महारौद्रः सो ऽसुरः कृष्णबाहुना निपपात द्विधाभूतो वैद्युतेन यथा द्रुमः

vyāditāsyo mahāraudraḥ so 'suraḥ kṛṣṇabāhunā nipapāta dvidhābhūto vaidyutena yathā drumaḥ

हिन्दी अर्थ

अत्यन्त भारसे पीडित हो मेरुपर्वतपर देवताओंके समाजमें गयी और ब्रह्मा आदि सब देवताओंको प्रणाम करके खेद एवं करुणामिश्रित वाणीमें 52 bP ञ्छ अपना सब हाल सुनाने लगी--'सुवर्णके गुरु ६

English

That very terrible Asura with open mouth fell, split in two by Krishna's arm, like a tree by lightning.

अध्याय १९०

श्लोक 36

द्विपादपृष्ठपुच्छार्धश्रवणैकाक्षनासिके केशिनस् ते द्विधा भूते शकले च विरेजतुः

dvipādapṛṣṭhapucchārdhaśravaṇaikākṣanāsike keśinas te dvidhā bhūte śakale ca virejatuḥ

हिन्दी अर्थ

अग्नि, गौओंके गुरु सूर्य तथा मेरे गुरु सम्पूर्ण लोकोंके वन्दनीय भगवान् नारायण हैं। इस समय ६ ये कालनेमि आदि हैत्य मर्त्यलोकमें जन्म लेकर दिन-रात प्रजाको कष्ट देते रहते हें । सर्वशक्तिमान्

English

With his two feet, back, tail-half, ear, eye and nose, the two halves of Keshi shone.

अध्याय १९०

श्लोक 37

हत्वा तु केशिनं कृष्णो मुदितैर् गोपकैर् वृतः अनायस्ततनुः स्वस्थो हसंस् तत्रैव संस्थितः

hatvā tu keśinaṃ kṛṣṇo muditair gopakair vṛtaḥ anāyastatanuḥ svastho hasaṃs tatraiva saṃsthitaḥ

हिन्दी अर्थ

भगवान् विष्णुने जिस कालनेमि नामक महान् महादेवजी और तुमलोग-सब भगवान् नारायणके असुरका वध किया था, वही अब उग्रसेनकुमार ही स्वरूप हैं। भगवानको जो विभूतियाँ हैं, कंसके रूपमें उत्पन्न हुआ है। अरिष्ट, धेनुक, उन्हींकी परस्पर न्यूनता और अधिकता बाध्य- केशी, प्रलम्ब, नरक, सुन्दासुर, अत्यन्त भयंकर बाधकरूपसे रहा करती है। इसलिये आओ,

English

Having killed Keshi, Krishna, surrounded by delighted cowherds, stood right there, unwearied in body, at ease, laughing.

अध्याय १९०

श्लोक 38

ततो गोपाश् च गोप्यश् च हते केशिनि विस्मिताः तुष्टुवुः पुण्डरीकाक्षम् अनुरागमनोरमम्

tato gopāś ca gopyaś ca hate keśini vismitāḥ tuṣṭuvuḥ puṇḍarīkākṣam anurāgamanoramam

हिन्दी अर्थ

बलिकुमार बाणासुर तथा और भी जो महापराक्रमी हमलोग क्षीरसागरके उत्तम तटपर चलें और वहाँ दुरात्मा हैत्य राजाओंके घरमें उत्पन्न हुए हें, श्रीहरिको आराधना करके यह सब वृत्तान्त उनसे उनकी मैं गणना नहीं कर सकती। दिव्यमूर्तिधारी निवेदन करें। वे सबके आत्मा हैं, सम्पूर्ण जगत्

English

Then the cowherds and cowherd women, amazed at Keshi's death, praised the lotus-eyed one, charming with love.

अध्याय १९०

श्लोक 39

आययौ त्वरितो विप्रो नारदो जलदस्थितः केशिनं निहतं दृष्ट्वा हर्षनिर्भरमानसः

āyayau tvarito vipro nārado jaladasthitaḥ keśinaṃ nihataṃ dṛṣṭvā harṣanirbharamānasaḥ

हिन्दी अर्थ

गर्वीले हैत्योंकी अनेक अक्षौहिणी सेनाएँ हैं। करनेके लिये अपने अंशसे अवतार ले धर्मकी सुरेश्वरो! में आपलोगोंको बताये देती हूँ कि उन स्थापना करते हैं।'

English

The Brahmin Narada, standing among clouds, came in haste, his mind overflowing with joy at seeing Keshi killed:

अध्याय १९०

श्लोक 40

साधु साधु जगन्नाथ लीलयैव यद् अच्युत निहतो ऽयं त्वया केशी क्लेशदस् त्रिदिवौकसाम्

sādhu sādhu jagannātha līlayaiva yad acyuta nihato 'yaṃ tvayā keśī kleśadas tridivaukasām

हिन्दी अर्थ

हैत्योंके भारी भारसे पीडित होनेके कारण अब यों कहकर ब्रह्माजी सम्पूर्ण देवताओंके साथ मुझमें अपनेको धारण करनेकी भी शक्ति नहीं रह क्षीरसागरके तटपर गये और एकाग्रचित्त होकर गयी है। अतः आपलोग मेरा भार उतारिये।' भगवान् गरुड्ध्वजको स्तुति करने लगे।

English

"Well done, well done, lord of the world, that you, Achyuta, have in sport slain this Keshi, giver of trouble to the dwellers in heaven.

अध्याय १९०

श्लोक 41

सुकर्माण्य् अवतारे तु कृतानि मधुसूदन यानि वै विस्मितं चेतस् तोषम् एतेन मे गतम्

sukarmāṇy avatāre tu kṛtāni madhusūdana yāni vai vismitaṃ cetas toṣam etena me gatam

हिन्दी अर्थ

भगवानूके अवतारका उपक्रम

English

The good deeds you have done in this incarnation, Madhusudana, by them my mind is amazed; by this I am gratified.

अध्याय १९०

श्लोक 42

तुरगस्यास्य शक्रो ऽपि कृष्ण देवाश् च बिभ्यति धुतकेसरजालस्य ह्रेषतो ऽभ्रावलोकिनः

turagasyāsya śakro 'pi kṛṣṇa devāś ca bibhyati dhutakesarajālasya hreṣato 'bhrāvalokinaḥ

हिन्दी अर्थ

ब्रह्माजी बोले--सहस्रमूर्ते! आपको बारंबार देवकीदेवी हैं, उनके आठवें गर्भसे मेरा यह

English

Even Shakra and the gods are afraid of this horse, Krishna, with his shaken mane, neighing, looking at the clouds.

अध्याय १९०

श्लोक 43

यस्मात् त्वयैष दुष्टात्मा हतः केशी जनार्दन तस्मात् केशवनाम्ना त्वं लोके गेयो भविष्यसि

yasmāt tvayaiṣa duṣṭātmā hataḥ keśī janārdana tasmāt keśavanāmnā tvaṃ loke geyo bhaviṣyasi

हिन्दी अर्थ

नमस्कार है। आपके सहस्रों बाहे, अनेक मुख और अनेक चरण हैं। आप जगतूकी सृष्टि, पालन और संहारमें संलग्न रहते हें । अप्रमेय परमेश्वर! आपको बारंबार नमस्कार है। भगवन्! आप

English

Since by you this wicked Keshi has been killed, Janardana, therefore you will be sung in the world by the name Keshava.

अध्याय १९०

श्लोक 44

स्वस्त्य् अस्तु ते गमिष्यामि कंसयुद्धे ऽधुना पुनः परश्वो ऽहं समेष्यामि त्वया केशिनिषूदन

svasty astu te gamiṣyāmi kaṃsayuddhe 'dhunā punaḥ paraśvo 'haṃ sameṣyāmi tvayā keśiniṣūdana

हिन्दी अर्थ

सूक्ष्मसे भी अत्यन्त सूक्ष्म, परम महान् और बडे- बडे गुरुओंसे भी अधिक गौरवशाली हें । आप प्रकति, समष्टि बुद्धि (महत्तत्त्व), अहंकार तथा वाणीके भी प्रधान मूल हैँ। अपरा-प्रकृतिमय

English

May it be well with you; I shall go. In the battle with Kamsa I shall meet you again the day after tomorrow, slayer of Keshi.

अध्याय १९०

श्लोक 45

उग्रसेनसुते कंसे सानुगे विनिपातिते भारावतारकर्ता त्वं पृथिव्या धरणीधर

ugrasenasute kaṃse sānuge vinipātite bhārāvatārakartā tvaṃ pṛthivyā dharaṇīdhara

हिन्दी अर्थ

सम्पूर्ण जगत् आपका ही स्वरूप है। आप हमपर प्रसन्न होइये। देव! यह पृथ्वी आपकी शरणमें आयी है। इस समय भूतलपर जो बड़े-बड़े असुर

English

When Kamsa, son of Ugrasena, with his followers is felled, you, supporter of the earth, will be the remover of the earth's burden.

अध्याय १९०

श्लोक 46

तत्रानेकप्रकारेण युद्धानि पृथिवीक्षिताम् द्रष्टव्यानि मया युष्मत्प्रणीतानि जनार्दन

tatrānekaprakāreṇa yuddhāni pṛthivīkṣitām draṣṭavyāni mayā yuṣmatpraṇītāni janārdana

हिन्दी अर्थ

श्याम केश प्रकट होगा। भूतलपर अवतीर्ण हो यह कालनेमिके अंशसे उत्पन्न हुए कंसका वध करेगा।' यों कहकर भगवान् श्रीहरि अन्तर्धान हो गये। अदृश्य हो जानेपर उन परमात्माको प्रणाम

English

There, Janardana, the battles of the kings of the earth, led by you, are to be seen by me in many ways.

अध्याय १९०

श्लोक 47

सो ऽहं यास्यामि गोविन्द देवकार्यं महत् कृतम् त्वया सभाजितश् चाहं स्वस्ति ते ऽस्तु व्रजाम्य् अहम्

so 'haṃ yāsyāmi govinda devakāryaṃ mahat kṛtam tvayā sabhājitaś cāhaṃ svasti te 'stu vrajāmy aham

हिन्दी अर्थ

करके सम्पूर्ण देवता मेरुपर्वतके शिखरपर चले गये और वहाँसे पृथ्वीपर अवतीर्ण हुए

English

I shall go, Govinda; a great task of the gods has been done by you. Having been honoured by you, may it be well with you; I go."

अध्याय १९०

श्लोक 48

नारदे तु गते कृष्णः सह गोपैर् अविस्मितः विवेश गोकुलं गोपीनेत्रपानैकभाजनम्

nārade tu gate kṛṣṇaḥ saha gopair avismitaḥ viveśa gokulaṃ gopīnetrapānaikabhājanam

हिन्दी अर्थ

एक दिन महर्षि नारदने कंससे जाकर कहा-- 'देवकीके आठवें गर्भसे भगवान् विष्णु उत्पन्न होंगे, जो तुम्हारा वध करेंगे।' यह सुनकर कंसको बड़ा क्रोध हुआ और उसने देवकी तथा वसुदेवको

English

When Narada had gone, Krishna, unamazed, with the cowherds entered Gokula, the one vessel for the gopis' eyes to drink.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_brahmapurANa-1-246.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Brahma Purana — Chapter 190
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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