Brahma Purana· Brahma Purāṇa
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अध्याय 224 / 246

Adhyaya 224

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अध्याय २२४

श्लोक 1

भगवन् सर्वभूतेश सुरासुरनमस्कृत धर्माधर्मे नृणां देव ब्रूहि मे संशयं विभो

bhagavan sarvabhūteśa surāsuranamaskṛta dharmādharme nṛṇāṃ deva brūhi me saṃśayaṃ vibho

हिन्दी अर्थ

शौचं चैवात्मनः शुद्धिरिन्द्रियाणां च निग्रहः। एतैर्विवर्धते तेजः पाप्मानं चापकर्षति ॥

English

With great devotion Visnu performed the daily worship of the consort of Uma with a thousand divine sweet smelling golden lotuses.

अध्याय २२४

श्लोक 2

कर्मणा मनसा वाचा त्रिविधैर् देहिनः सदा बध्यन्ते बन्धनैः कैर् वा मुच्यन्ते वा कथं वद

karmaṇā manasā vācā trividhair dehinaḥ sadā badhyante bandhanaiḥ kair vā mucyante vā kathaṃ vada

हिन्दी अर्थ

कर्म तथा ज्ञानका अन्तर, परमात्मतत्त्वका निरूपण तथा अध्यात्मज्ञानका वर्णन ४१९

English

"Obeisance, the Pinaka-bearing Mahes'a, who removes great danger in the forest of worldly existence and who fulfils all cherished desires".

अध्याय २२४

श्लोक 3

केन शीलेन वै देव कर्मणा कीदृशेन वा समाचारैर् गुणैः कैर् वा स्वर्गं यान्तीह मानवाः

kena śīlena vai deva karmaṇā kīdṛśena vā samācārair guṇaiḥ kair vā svargaṃ yāntīha mānavāḥ

हिन्दी अर्थ

जाय और साधनासे कभी विचलित न हो। अपने उसे ब्रह्मका साक्षात्कार हो जाता है। दूसरे लोग रहनेके लिये शून्य गृहको स्वीकार करे, क्‍योंकि धनको इच्छा या संग्रह करनेके कारण अत्यन्त वहाँ चित्त एकाग्र रह सकता है। योगका साधक विकल हैं, यह देखकर उसकी ओरसे विरक्त हो मन, वाणी अथवा क्रियाद्वारा भी कहीं आसक्त न जाय। मिट्टीके ढेले, पत्थर और सुवर्णको समान

English

By means of this Mantra and with the mind endowed with devotion lord Visnu worshipped Siva, the lover of Bhavani.

अध्याय २२४

श्लोक 4

देवि धर्मार्थतत्त्वज्ञे धर्मनित्ये उमे सदा सर्वप्राणिहितः प्रश्नः श्रूयतां बुद्धिवर्धनः

devi dharmārthatattvajñe dharmanitye ume sadā sarvaprāṇihitaḥ praśnaḥ śrūyatāṃ buddhivardhanaḥ

हिन्दी अर्थ

हो। वह सबको ओरसे उपेक्षाका भाव रखे, समझे। इस प्रकार योग-मार्गपर चलनेवाला साधक नियमित भोजन करे तथा लाभ और अलाभको मोहवश कभी उससे विचलित न हो। कोई नीच समान समझे। जो उस योगीको निन्दा करे और वर्णका पुरुष अथवा स्त्री ही क्यों न हो, यदि उसे जो उसको मस्तक झुकाये, उन दोनोंके ही प्रति धर्म करनेकी अभिलाषा हो तो वह भी इस

English

O lord, you alone know the innermost feelings of men. You alone are refuge and overlord. What doubt can be there?

अध्याय २२४

श्लोक 5

सत्यधर्मरताः शान्ताः सर्वलिङ्गविवर्जिताः नाधर्मेण न धर्मेण बध्यन्ते छिन्नसंशयाः

satyadharmaratāḥ śāntāḥ sarvaliṅgavivarjitāḥ nādharmeṇa na dharmeṇa badhyante chinnasaṃśayāḥ

हिन्दी अर्थ

वह समान भाव रखे। वह किसी एकको बुराई योगमार्गसे परम गतिको प्राप्त कर सकता है। या भलाई न सोचे। कुछ लाभ होनेपर हर्षसे फूल योगी पुरुष अजन्मा, पुरातन, जरावस्थासे रहित, न उठे और लाभ न होनेपर चिन्ता न करे। अपितु सनातन, इन्द्रियातीत एवं अगोचर ब्रह्मको प्राप्त वायुका सहधर्मी' होकर सब प्राणियोंके प्रति होते हैं। जो मनीषी पुरुष इस योगको पद्धतिपर

English

Speaking thus with tears welled up in his eyes he got himself merged as though with I svara. Then Sambhu appeared in front of him, accompanied by Bhavani.

अध्याय २२४

श्लोक 6

प्रलयोत्पत्तितत्त्वज्ञाः सर्वज्ञाः सर्वदर्शिनः वीतरागा विमुच्यन्ते पुरुषाः कर्मबन्धनैः

pralayotpattitattvajñāḥ sarvajñāḥ sarvadarśinaḥ vītarāgā vimucyante puruṣāḥ karmabandhanaiḥ

हिन्दी अर्थ

समान भाव रखे।' इस प्रकार स्वस्थचित्त होकर दृष्टिपात करके इसे अपनाते हैं, वे ब्रह्माजीके सर्वत्र समान दृष्टि रखनेवाला साधक यदि छः समान हो उस उत्तम गतिको प्राप्त करते हैं, जहाँसे महीने भी निरन्तर योगके अभ्यासमें लगा रहे तो पुनः इस संसारमें नहीं आना पड़ता।

English

He embraced Hari closely and filled him with various boons. He got back his original eye as well as discus.

अध्याय २२४

श्लोक 7

कर्मणा मनसा वाचा ये न हिंसन्ति किंचन ये न मज्जन्ति कस्मिंश्चित् ते न बध्नन्ति कर्मभिः

karmaṇā manasā vācā ye na hiṃsanti kiṃcana ye na majjanti kasmiṃścit te na badhnanti karmabhiḥ

हिन्दी अर्थ

कर्म तथा ज्ञानका अन्तर, परमात्मतत््वका निरूपण तथा

English

Things such as water, honey etc. offered to deities, guest etc. as a token of respect.

अध्याय २२४

श्लोक 8

प्राणातिपाताद् विरताः शीलवन्तो दयान्विताः तुल्यद्वेष्यप्रिया दान्ता मुच्यन्ते कर्मबन्धनैः

prāṇātipātād viratāḥ śīlavanto dayānvitāḥ tulyadveṣyapriyā dāntā mucyante karmabandhanaiḥ

हिन्दी अर्थ

अध्यात्मज्ञान और उसके साधनोंका वर्णन मुनि बोले-महर्षे! यदि वेदको ऐसी आज्ञा है--एकका नाम प्रवृत्तिधर्म है और दूसरेको निवृत्तिधर्म है कि 'कर्म करो' तथा यह भी आदेश है कि कहा गया है। प्रवृत्तिमार्गको कर्म और निवृत्तिमार्गको 'कर्मका त्याग करो' तो यह बताइये कि मनुष्य ज्ञान भी कहते हैं। कर्म (अविद्या)- से मनुष्य

English

With great delight, Dadhici welcomed and honoured Devas severally. Accompanied by his wife he thereafter per¬ formed the duties of a householder to them.

अध्याय २२४

श्लोक 9

सर्वभूतदयावन्तो विश्वास्याः सर्वजन्तुषु त्यक्तहिंस्रसमाचारास् ते नराः स्वर्गगामिनः

sarvabhūtadayāvanto viśvāsyāḥ sarvajantuṣu tyaktahiṃsrasamācārās te narāḥ svargagāminaḥ

हिन्दी अर्थ

ज्ञानके द्वारा कर्म त्याग देनेपर किस गतिको प्राप्त बन्धनमें पड़ता है और ज्ञानसे मुक्त हो जाता है; होते हैं तथा कर्म करनेसे उन्हें किस फलको इसलिये पारदशी यति कर्म नहीं करते। कर्मसे प्राप्ति होती है इस बातको हम सुनना चाहते हैं । मरनेके बाद जन्म लेना पड़ता है, सोलह तत्त्वोंसे क्योंकि उक्त दोनों आज्ञाएँ परस्पर विरुद्ध प्रतीत बने हुए शरीरको प्राप्ति होती है। किंतु ज्ञानसे

English

We are happy, O brahmin, and especially so since we see you here. We have no use for our weapons. Indeed, we are not capable of carrying them.

अध्याय २२४

श्लोक 10

परस्वनिर्ममा नित्यं परदारविवर्जिकाः धर्मलब्धार्थभोक्तारस् ते नराः स्वर्गगामिनः

parasvanirmamā nityaṃ paradāravivarjikāḥ dharmalabdhārthabhoktāras te narāḥ svargagāminaḥ

हिन्दी अर्थ

होती हैं। नित्य, अव्यक्त एवं अविनाशी परमात्मा प्राप्त होते व्यासजीने कहा- ब्राह्मणो ! ज्ञानसे मनुष्य जिस हैं। कुछ मन्दबुद्धि मानव कर्मको प्रशंसा करते हैं, गतिको पाते हैं और कर्मसे उन्हें जैसी गति मिलती अतः वे भोगासक्त होकर बारंबार देहके बन्धनमें है, उसका वर्णन करता हूँ; सुनो। तुम्हारे इस पड़ते हैं। परंतु जो धर्मके तत्त्वको भलीभाँति

English

The divine wish-fulfilling tree obtained by the churning of the ocean (Vide Agnipurana, Gh. 3).

अध्याय २२४

श्लोक 11

मातृवत् स्वसृवच् चैव नित्यं दुहितृवच् च ये परदारेषु वर्तन्ते ते नराः स्वर्गगामिनः

mātṛvat svasṛvac caiva nityaṃ duhitṛvac ca ye paradāreṣu vartante te narāḥ svargagāminaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रश्नका उत्तर गहन है । शास्त्रमें दो मार्गोका वर्णन समझते हैं तथा जिन्हें उत्तम बुद्धि प्राप्त है, वे १-सर्वत्र विचरते हुए भी कहीं आसक्त न होना ही वायुका सहधर्मी होना है।

English

A long time elapsed. A thousand years according to the reckoning of Devas passed away. Devas neither spoke

अध्याय २२४

श्लोक 12

स्वदारनिरता ये च ऋतुकालाभिगामिनः अग्राम्यसुखभोगाश् च ते नराः स्वर्गगामिनः

svadāraniratā ye ca ṛtukālābhigāminaḥ agrāmyasukhabhogāś ca te narāḥ svargagāminaḥ

हिन्दी अर्थ

न प्रहृष्येत लाभेषु नालाभेषु च चिन्तयेत्। समः सर्वेषु भूतेषु सधर्मा मातरिश्वनः॥

English

Dadhlci said to Gabhasti: "O gentle lady, Asuras are powerful, behaving inimically toward me. Devas do not appear to be desirous of taking away their weapons deposited with us. Tell me what is proper in the circumstances."

अध्याय २२४

श्लोक 13

स्तैन्यान् निवृत्ताः सततं संतुष्टाः स्वधनेन च स्वभाग्यान्य् उपजीवन्ति ते नराः स्वर्गगामिनः

stainyān nivṛttāḥ satataṃ saṃtuṣṭāḥ svadhanena ca svabhāgyāny upajīvanti te narāḥ svargagāminaḥ

हिन्दी अर्थ

कर्मको उसी तरह प्रशंसा नहीं करते, जेसे नदीका मनसहित इऱ्द्रियोंको तथा इन्द्रियोंके साथ उनके पानी पीनेवाला मनुष्य कुएँका आदर नहीं करता । विषयोंको भी बुद्धिके द्वारा अन्तरात्मामें लीन करके कर्मके फल मिलते हैं-सुख और दुःख, जन्म नाना प्रकारके दृश्योंका चिन्तन न करे। ध्यानके और मृत्यु। किंतु ज्ञानसे उस पदकी प्राप्ति होती द्वारा मनको विषयोंकी ओरसे हटाकर विवेकके

English

She said to her husband humbly: "It has already been said, dear lord. You know what is proper in this situation. The powerful Daityas, who have increased their efficiency and who are endowed with the power of penance will take away these weapons'*.

अध्याय २२४

श्लोक 14

परदारेषु ये नित्यं चारित्रावृतलोचनाः जितेन्द्रियाः शीलपरास् ते नराः स्वर्गगामिनः

paradāreṣu ye nityaṃ cāritrāvṛtalocanāḥ jitendriyāḥ śīlaparās te narāḥ svargagāminaḥ

हिन्दी अर्थ

है, जहाँ जाकर मनुष्य सदाके लिये शोकसे मुक्त द्वारा उसे स्थिर करे और शान्तभावसे स्थित हो हो जाता है। जहाँ जन्म, मृत्यु, जरा और वृद्धि जाय; ऐसा करनेसे साधक परम पदको प्राप्त होता उसका स्पर्श नहीं करते, वहाँ केवल अव्यक्त, है। जो इन्द्रियोंके वशमें रहता है, वह मानव अचल, ध्रुव, अव्याकृत एवं अमृतस्वरूप परब्रह्मकी विवेकशक्तिको खो देता है और अपनेको काम

English

Therefore, Dadhlci did thus for protecting weapons. He washed those weapons with holy water inspired with Mantras. The water absoxbed the essential splendour of all the weapons and Dadhlci drank this holy water.

अध्याय २२४

श्लोक 15

एष दैवकृतो मार्गः सेवितव्यः सदा नरैः अकषायकृतश् चैव मार्गः सेव्यः सदा बुधैः

eṣa daivakṛto mārgaḥ sevitavyaḥ sadā naraiḥ akaṣāyakṛtaś caiva mārgaḥ sevyaḥ sadā budhaiḥ

हिन्दी अर्थ

ही स्थिति है। उस स्थितिमें पहुँचे हुए मनुष्योंको आदि शत्रुओंके हाथमें देकर मृत्युको प्राप्त होता शीत-उष्ण आदि द्वन्द्व बाधा नहीं पहुँचाते। मानसिक है । इसलिये सब प्रकारके संकल्पोंका नाश करके विकार और क्रियाद्वारा भी उन्हें कष्ट नहीं होता । चित्तको सत्त्वयुक्त बुद्धिमें स्थापित करे । यों करनेसे वे समत्वभावसे युक्त, सबके प्रति मैत्री रखनेवाले चित्तमें प्रसाद गुण आता है, जिससे यति पुरुष

English

Deprived of their intrinsic splendour those weapons gradually wasted away as time passed by.

अध्याय २२४

श्लोक 16

अवृथापकृतश् चैव मार्गः सेव्यः सदा बुधैः दानकर्मतपोयुक्तः शीलशौचदयात्मकः स्वर्गमार्गम् अभीप्सद्भिर् न सेव्यस् त्व् अत उत्तरः

avṛthāpakṛtaś caiva mārgaḥ sevyaḥ sadā budhaiḥ dānakarmatapoyuktaḥ śīlaśaucadayātmakaḥ svargamārgam abhīpsadbhir na sevyas tv ata uttaraḥ

हिन्दी अर्थ

और सम्पूर्ण प्राणियोंके हितमें रहनेवाले होते हैं। शुभ और अशुभ दोनोंको जीत लेता है। प्रसन्नचित्त ब्राह्मणो! देह, इन्द्रिय और मन आदि जो साधक परमात्मामें स्थित होकर अत्यन्त आनन्दका प्रकृतिके विकार हैं, वे क्षेत्रज्ञे ही आधारपर अनुभव करता है। चित्तको प्रसन्नताका लक्षण यह स्थित हैं। वे जड होनेके कारण क्षेत्रज्ञको नहीं है कि सदा सुषुप्तिके समान सुखका अनुभव होता

English

"O leading sage, give us the weapons. Can you say'Yes' or do you refuse? Without them we will be lost for ever. Our enemies are powerful. Where shall we go?

अध्याय २२४

श्लोक 17

वाचा तु बध्यते येन मुच्यते ह्य् अथवा पुनः तानि कर्माणि मे देव वद भूतपते ऽनघ

vācā tu badhyate yena mucyate hy athavā punaḥ tāni karmāṇi me deva vada bhūtapate 'nagha

हिन्दी अर्थ

जानते, किंतु क्षेत्रज्ञ उन सबको जानता है। जैसे रहे अथवा वायुशून्य स्थानमें जलते हुए निष्काम चतुर सारथि अपने वशमें किये बलवान् एवं दीपककी लौके समान मन कभी चञ्चल न हो। उत्तम घोड़ोंसे अच्छी तरह काम लेता है, उसी जो मिताहारी और शुद्धचित्त होकर रातके पहले प्रकार क्षेत्रज्ञ भी अपने अधीन किये हुए मन और तथा पिछले भागमें आत्माको परमात्माके ध्यानमें

English

"By what is a man bound by speech, or released again? Those actions, god, tell me, lord of beings, sinless one."

अध्याय २२४

श्लोक 18

आत्महेतोः परार्थे वा अधर्माश्रितम् एव च ये मृषा न वदन्तीह ते नराः स्वर्गगामिनः

ātmahetoḥ parārthe vā adharmāśritam eva ca ye mṛṣā na vadantīha te narāḥ svargagāminaḥ

हिन्दी अर्थ

इन्द्रियोंद्रारा सम्पूर्ण कार्य सिद्ध करता है । इन्द्रियोंकी लगाता है, वही अपने अन्तःकरणमें परमात्माका अपेक्षा उनके विषय (शब्दादि तन्मात्रा) पर-- दर्शन करता है। यह उपदेश सम्पूर्ण वेदोंका रहस्य सूक्ष्म और श्रेष्ठ हैं। विषयोंसे मन पर है। मनसे है। यह परमात्माका बोध करानेवाला शास्त्र है बुद्धि पर है। बुद्धिसे महत्तत्त्व पर है । महत्तत्त्वसे धर्म और सत्यके सम्पूर्ण उपाख्यानोंमें जो सार

English

"Those men who do not speak falsehood here for themselves or for others, or resting on unrighteousness, go to heaven.

अध्याय २२४

श्लोक 19

वृत्त्यर्थं धर्महेतोर् वा कामकारात् तथैव च अनृतं ये न भाषन्ते ते नराः स्वर्गगामिनः

vṛttyarthaṃ dharmahetor vā kāmakārāt tathaiva ca anṛtaṃ ye na bhāṣante te narāḥ svargagāminaḥ

हिन्दी अर्थ

अव्यक्त (मूल प्रकृति) पर है और अव्यक्तसे वस्तु है, उसका दस हजार वर्षांतक मन्थन करके अविनाशी परमात्मा पर है। अविनाशी परमात्मासे यह अमृतमय उपदेश निकाला गया है। जैसे दहीसे पर कुछ भी नहीं है। वही परताकी सीमा है तथा मक्खन निकलता और काष्ठसे अग्नि प्रकट होती वही परम गति है। इस प्रकार सम्पूर्ण प्राणियोंके है, उसी प्रकार मोक्षके लिये विद्वानोंका ज्ञान यहाँ

English

Those who for livelihood, for dharma, or by willfulness do not utter untruth go to heaven.

अध्याय २२४

श्लोक 20

श्लक्ष्णां वाणीं स्वच्छवर्णां मधुरां पापवर्जिताम् स्वगतेनाभिभाषन्ते ते नराः स्वर्गगामिनः

ślakṣṇāṃ vāṇīṃ svacchavarṇāṃ madhurāṃ pāpavarjitām svagatenābhibhāṣante te narāḥ svargagāminaḥ

हिन्दी अर्थ

भीतर छिपा हुआ यह परमात्मा सबके जाननेमें प्रकट किया गया है। इस शास्त्रका उपदेश स्नातकोंको नहीं आता। उसे तो सूक्ष्मदर्शी ज्ञानी महात्मा ही देना चाहिए। जिसका मन शान्त नहीं है, इन्द्रियाँ अपनी सूक्ष्म एवं श्रेष्ठ बुद्धिसे देखते हैं। वशमें नहीं हैं तथा जो तपस्वी नहीं है, उसे इस

English

Those who speak smooth speech, of clear sound, sweet and free of evil, with self-restraint, go to heaven.

अध्याय २२४

श्लोक 21

परुषं ये न भाषन्ते कटुकं निष्ठुरं तथा न पैशुन्यरताः सन्तस् ते नराः स्वर्गगामिनः

paruṣaṃ ye na bhāṣante kaṭukaṃ niṣṭhuraṃ tathā na paiśunyaratāḥ santas te narāḥ svargagāminaḥ

हिन्दी अर्थ

महतः परमव्यक्तमव्यक्तात्परतोऽमृतम्। अमृतान्न परं किंचित्सा काष्ठा सा परा गतिः ॥

English

Those who do not speak harsh, bitter or cruel words, and not delighting in slander, being good, go to heaven.

अध्याय २२४

श्लोक 22

पिशुनं न प्रभाषन्ते मित्रभेदकरं तथा परपीडाकरं चैव ते नराः स्वर्गगामिनः

piśunaṃ na prabhāṣante mitrabhedakaraṃ tathā parapīḍākaraṃ caiva te narāḥ svargagāminaḥ

हिन्दी अर्थ

एवं सर्वेषु भूतेषु गूढात्मा न प्रकाशते। दृश्यते त्वग्रथया बुद्धया सूक्ष्मया सूक्ष्मदर्शिभिः ॥

English

Those who do not speak slander, or what causes division of friends, or what causes pain to others, go to heaven.

अध्याय २२४

श्लोक 23

ये वर्जयन्ति परुषं परद्रोहं च मानवाः सर्वभूतसमा दान्तास् ते नराः स्वर्गगामिनः

ye varjayanti paruṣaṃ paradrohaṃ ca mānavāḥ sarvabhūtasamā dāntās te narāḥ svargagāminaḥ

हिन्दी अर्थ

कर्म तथा ज्ञानका अन्तर, परमात्मतत्त्वका निरूपण तथा अध्यात्मञ्चानका वर्णन

English

Men who avoid harshness and treachery to others, equal to all beings, self-controlled, go to heaven.

अध्याय २२४

श्लोक 24

शठप्रलापाद् विरता विरुद्धपरिवर्जकाः सौम्यप्रलापिनो नित्यं ते नराः स्वर्गगामिनः

śaṭhapralāpād viratā viruddhaparivarjakāḥ saumyapralāpino nityaṃ te narāḥ svargagāminaḥ

हिन्दी अर्थ

ज्ञानका उपदेश नहीं करना चाहिए। जो वेदका गुण हैं। ये गुणोंकी सीमाको लाँघ जाते हैं, अतः ज्ञाता नहीं है, जिसके मनमें गुरुके प्रति भक्ति उनसे श्रेष्ठ माने गये हें । जैसे कछुआ अपने अङ्गोंको नहीं है, जो दोष देखनेवाला, कुटिल, आज्ञाका फैलाकर फिर सिकोड लेता है, उसी प्रकार बुद्धिके

English

Those refraining from deceitful prattle, avoiding the contrary, always speaking gently, go to heaven.

अध्याय २२४

श्लोक 25

न कोपाद् व्याहरन्ते ये वाचं हृदयदारिणीम् शान्तिं विन्दन्ति ये क्रुद्धास् ते नराः स्वर्गगामिनः

na kopād vyāharante ye vācaṃ hṛdayadāriṇīm śāntiṃ vindanti ye kruddhās te narāḥ svargagāminaḥ

हिन्दी अर्थ

पालन न करनेवाला, व्यर्थ तर्क-वितर्कसे दूषित और चुगलखोर है, उसे भी इसका उपदेश नहीं देना चाहिए । जो प्रशंसनीय, शान्त, तपस्वी तथा सेवापरायण शिष्य अथवा पुत्र हो, उसीको इस

English

Those who in anger do not utter speech that tears the heart, who find peace when angry, go to heaven.

अध्याय २२४

श्लोक 26

एष वाणीकृतो देवि धर्मः सेव्यः सदा नरैः शुभसत्यगुणैर् नित्यं वर्जनीया मृषा बुधैः

eṣa vāṇīkṛto devi dharmaḥ sevyaḥ sadā naraiḥ śubhasatyaguṇair nityaṃ varjanīyā mṛṣā budhaiḥ

हिन्दी अर्थ

गूढ धर्मका उपदेश देना उचित है; दूसरे किसीको नहीं । यदि कोई रत्नोंसे भरी हुई सम्पूर्ण पृथ्वी देने लगे तो भी तत्त्ववेत्ता पुरुष उसकी अपेक्षा इस ज्ञानको ही श्रेष्ठ माने। अत: मैं तुम्हें अत्यन्त गूढ॒

English

This dharma of speech, goddess, should always be served by men; falsehood should be avoided by the wise, with good qualities of truth."

अध्याय २२४

श्लोक 27

मनसा बध्यते येन कर्मणा पुरुषः सदा तन् मे ब्रूहि महाभाग देवदेव पिनाकधृक्

manasā badhyate yena karmaṇā puruṣaḥ sadā tan me brūhi mahābhāga devadeva pinākadhṛk

हिन्दी अर्थ

अर्थवाले अध्यात्म ज्ञानका उपदेश देता हुँ, जो मानवीय ज्ञानसे बाहर हे, जिसे महर्षियोंने ही जाना है तथा जिसका सम्पूर्ण उपनिषदोंमें वर्णन किया गया है मुनिवरो! तुमलोग जो बात पूछते

English

"By what action of mind is a man always bound? Tell me that, fortunate one, god of gods, bearer of the Pinaka."

अध्याय २२४

श्लोक 28

मानसेनेह धर्मेण संयुक्ताः पुरुषाः सदा स्वर्गं गच्छन्ति कल्याणि तन् मे कीर्तयतः शृणु

mānaseneha dharmeṇa saṃyuktāḥ puruṣāḥ sadā svargaṃ gacchanti kalyāṇi tan me kīrtayataḥ śṛṇu

हिन्दी अर्थ

थे और तुम्हारे हृदयमें जिसके विषयमें संदेह था, वह सब तुमने सुन लिया। मेरे मनमें जैसा निश्चय था, वह सब बता दिया; अब और क्या सुनाऊँ ? मुनियोंने कहा--ऋषिश्रेष्ट ! अब पुनः अध्यात्म

English

"Men joined here with dharma of the mind always go to heaven, auspicious one; hear that as I tell.

अध्याय २२४

श्लोक 29

दुष्प्रणीतेन मनसा दुष्प्रणीतान्तराकृतिः नरो बध्येत येनेह शृणु वा तं शुभानने

duṣpraṇītena manasā duṣpraṇītāntarākṛtiḥ naro badhyeta yeneha śṛṇu vā taṃ śubhānane

हिन्दी अर्थ

ज्ञानका विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिये। अध्यात्म क्या है और उसे हम किस प्रकार जानें? व्यासजी बोले--ब्राह्मणो ! अध्यात्मका जो स्वरूप है, उसे बताता हुँ। तुम उसकी व्याख्या ध्यान

English

By a badly directed mind, with inner form badly directed, a man is bound here; or hear that, fair-faced one:

अध्याय २२४

श्लोक 30

अरण्ये विजने न्यस्तं परस्वं दृश्यते यदा मनसापि न गृह्णन्ति ते नराः स्वर्गगामिनः

araṇye vijane nyastaṃ parasvaṃ dṛśyate yadā manasāpi na gṛhṇanti te narāḥ svargagāminaḥ

हिन्दी अर्थ

देकर सुनो। पृथ्वी, जल, तेज, वायु और आकाश-- ये पञ्चमहाभूत सम्पूर्ण प्राणियोंके शरीरमें स्थित हैं। शब्द, श्रवणेन्द्रिय और शरीरके सम्पूर्ण छिद्र आकाशसे प्रकट हुए हैं। प्राण, चेष्टा और स्पर्शकी

English

when another's property is seen left in a solitary forest, those who do not take it even in mind go to heaven.

अध्याय २२४

श्लोक 31

तथैव परदारान् ये कामवृत्ता रहोगताः मनसापि न हिंसन्ति ते नराः स्वर्गगामिनः

tathaiva paradārān ye kāmavṛttā rahogatāḥ manasāpi na hiṃsanti te narāḥ svargagāminaḥ

हिन्दी अर्थ

उत्पत्ति वायुसे हुई है। रूप, नेत्र और जठरानल-- ये तीन अग्निके कार्य हैं। रस, रसना और चिकनाहट--ये जलके गुण हैं। गन्ध, नासिका और देह--ये पृथ्वीके कार्य हैं। यह पाञ्चभौतिक

English

Likewise those who, acting out of desire, in private do not harm others' wives even in mind go to heaven.

अध्याय २२४

श्लोक 32

शत्रुं मित्रं च ये नित्यं तुल्येन मनसा नराः भजन्ति मैत्र्यं संगम्य ते नराः स्वर्गगामिनः

śatruṃ mitraṃ ca ye nityaṃ tulyena manasā narāḥ bhajanti maitryaṃ saṃgamya te narāḥ svargagāminaḥ

हिन्दी अर्थ

विकार बताया गया। स्पर्श वायुका, रस जलका,

English

Men who always with equal mind treat enemy and friend with friendship, meeting, go to heaven.

अध्याय २२४

श्लोक 33

श्रुतवन्तो दयावन्तः शुचयः सत्यसंगराः स्वैर् अर्थैः परिसंतुष्टास् ते नराः स्वर्गगामिनः

śrutavanto dayāvantaḥ śucayaḥ satyasaṃgarāḥ svair arthaiḥ parisaṃtuṣṭās te narāḥ svargagāminaḥ

हिन्दी अर्थ

गुण है। मन-बुद्धि और स्वभाव--ये स्वयोनिज

English

The learned, compassionate, pure, truthful, content with their own wealth go to heaven.

अध्याय २२४

श्लोक 34

अवैरा ये त्व् अनायासा मैत्रचित्तरताः सदा सर्वभूतदयावन्तस् ते नराः स्वर्गगामिनः

avairā ye tv anāyāsā maitracittaratāḥ sadā sarvabhūtadayāvantas te narāḥ svargagāminaḥ

हिन्दी अर्थ

द्वारा श्रेष्ठ पुरुष सम्पूर्ण इन्द्रियोंको विषयोंको ओरसे समेट लेता है। मनुष्यके शरीरमें पाँच इन्द्रियाँ हैं, छठा तत्त्व मन है, सातवाँ तत्त्व बुद्धि है और क्षेत्रजको आठवाँ समझो। आँख देखनेके लिये ही

English

Those without enmity, without strain, always fond of friendly thoughts, compassionate to all beings go to heaven.

अध्याय २२४

श्लोक 35

ज्ञातवन्तः क्रियावन्तः क्षमावन्तः सुहृत्प्रियाः धर्माधर्मविदो नित्यं ते नराः स्वर्गगामिनः

jñātavantaḥ kriyāvantaḥ kṣamāvantaḥ suhṛtpriyāḥ dharmādharmavido nityaṃ te narāḥ svargagāminaḥ

हिन्दी अर्थ

है, मन संदेह करता है, बुद्धि निश्चय करनेके लिये है और क्षेत्रज्ञको साक्षी कहा जाता है। सत्त्व, रज और तम--ये तीनों गुण अपने कारणभूत प्रकृतिसे प्रकट हैं। वे सम्पूर्ण प्राणियोंमें समान

English

Those who know, who act, who are patient, dear to friends, always knowing dharma and adharma go to heaven.

अध्याय २२४

श्लोक 36

शुभानाम् अशुभानां च कर्मणां फलसंचये निराकाङ्क्षाश् च ये देवि ते नराः स्वर्गगामिनः

śubhānām aśubhānāṃ ca karmaṇāṃ phalasaṃcaye nirākāṅkṣāś ca ye devi te narāḥ svargagāminaḥ

हिन्दी अर्थ

भावसे स्थित हैं । उनके कार्योद्रारा उनकी पहचान करनी चाहिए। जब अन्तःकरण कुछ प्रीतियुक्त- सा जान पड़े, अत्यन्त शान्तिका-सा अनुभव हो, तब उसे सत्त्वगुण जानना चाहिए। जब शरीर और

English

Those, goddess, who are without expectation about the accumulated fruit of good and bad actions go to heaven.

अध्याय २२४

श्लोक 37

पापोपेतान् वर्जयन्ति देवद्विजपराः सदा समुत्थानम् अनुप्राप्तास् ते नराः स्वर्गगामिनः

pāpopetān varjayanti devadvijaparāḥ sadā samutthānam anuprāptās te narāḥ svargagāminaḥ

हिन्दी अर्थ

मनमें कुछ संतापका-सा अनुभव हो, तब उसे रजोगुणकी प्रवृत्ति मानना चाहिए। जब अन्त:करणमें अव्यक्त, अतर्क्य और अज्ञेय मोहका संयोग होने लगे, तब उसे तमोगुण समझना चाहिए। जब

English

Always devoted to gods and Brahmins, avoiding the sinful, having attained resolve, they go to heaven.

अध्याय २२४

श्लोक 38

शुभैः कर्मफलैर् देवि मयैते परिकीर्तिताः स्वर्गमार्गपरा भूयः किं त्वं श्रोतुम् इहेच्छसि

śubhaiḥ karmaphalair devi mayaite parikīrtitāḥ svargamārgaparā bhūyaḥ kiṃ tvaṃ śrotum ihecchasi

हिन्दी अर्थ

अकस्मात् किसी कारणवश अत्यन्त हर्ष, प्रेम, आनन्द, समता और स्वस्थचित्तताका विकास हो, तब उसे सात्त्विक गुण कहते हैं। अभिमान, असत्य- भाषण, लोभ और असहनशीलता--ये रजोगुणके

English

These have been declared by me, goddess, with the fruits of good actions, devoted to the path of heaven; what more do you wish to hear?"

अध्याय २२४

श्लोक 39

महान् मे संशयः कश्चिन् मर्त्यान् प्रति महेश्वर तस्मात् त्वं निपुणेनाद्य मम व्याख्यातुम् अर्हसि

mahān me saṃśayaḥ kaścin martyān prati maheśvara tasmāt tvaṃ nipuṇenādya mama vyākhyātum arhasi

हिन्दी अर्थ

तमोगुणका कार्य जानना चाहिए।

English

"I have a great doubt, Maheshvara, about mortals; therefore you ought to explain it carefully to me today.

अध्याय २२४

श्लोक 40

केनायुर् लभते दीर्घं कर्मणा पुरुषः प्रभो तपसा वापि देवेश केनायुर् लभते महत्

kenāyur labhate dīrghaṃ karmaṇā puruṣaḥ prabho tapasā vāpi deveśa kenāyur labhate mahat

हिन्दी अर्थ

जैसे जलचर पक्षी जलमें विचरता हुआ भी उससे लिप्त नहीं होता, उसी प्रकार मुक्तात्मा योगी संसारमें रहकर भी उसके गुण-दोषोंसे लिप्त नहीं होता । इसी प्रकार ज्ञानी पुरुष विषयोंमें आसक्त

English

By what action does a man get long life, lord? Or by austerity, lord of gods, by what does one get great life?

अध्याय २२४

श्लोक 41

क्षीणायुः केन भवति कर्मणा भुवि मानवः विपाकं कर्मणां देव वक्तुम् अर्हस्य् अनिन्दित

kṣīṇāyuḥ kena bhavati karmaṇā bhuvi mānavaḥ vipākaṃ karmaṇāṃ deva vaktum arhasy anindita

हिन्दी अर्थ

न होनेके कारण उनका उपभोग करते हुए भी उनके दोषॉसे लिप्त नहीं होता । जो सदा परमात्माके चिन्तनमें ही लगा रहता है, वह पूर्वकृत कर्मोके बन्धनसे रहित हो सम्पूर्ण प्राणियोंका आत्मा हो

English

By what action on earth does a man become short-lived? You ought to tell, blameless one, the results of actions.

अध्याय २२४

श्लोक 42

अपरे च महाभाग्या मन्दभाग्यास् तथा परे अकुलीनाः कुलीनाश् च संभवन्ति तथा परे

apare ca mahābhāgyā mandabhāgyās tathā pare akulīnāḥ kulīnāś ca saṃbhavanti tathā pare

हिन्दी अर्थ

जाता है और विषयोंमें कभी आसक्त नहीं होता गुण आत्माको नहीं जानते, किंतु आत्मा उन्हें सदा जानता रहता है; क्योंकि वह गुणोंका द्रष्टा है। प्रकृति और आत्मामें यही अन्तर है। एक (प्रकृति)

English

Others are greatly fortunate, others ill-fortunate; some are of poor family, others of good family, and others are born so.

अध्याय २२४

श्लोक 43

दुर्दर्शाः केचिद् आभान्ति नराः काष्ठमया इव प्रियदर्शास् तथा चान्ये दर्शनाद् एव मानवाः

durdarśāḥ kecid ābhānti narāḥ kāṣṭhamayā iva priyadarśās tathā cānye darśanād eva mānavāḥ

हिन्दी अर्थ

तो गुणोंको सृष्टि करती है, किन्तु दूसरा (आत्मा) ऐसा नहीं करता। वे दोनों स्वभावतः पृथक् होते हुए भी एक-दूसरेसे संयुक्त हैं। जेसे पत्थरमें सुवर्ण जड़ा होता है, जैसे गूलर और उसके कीड़े साथ-

English

Some men appear hard to look at, as if made of wood; others are pleasant to look at merely by sight.

अध्याय २२४

श्लोक 44

दुष्प्रज्ञाः केचिद् आभान्ति केचिद् आभान्ति पण्डिताः महाप्रज्ञास् तथा चान्ये ज्ञानविज्ञानभाविनः

duṣprajñāḥ kecid ābhānti kecid ābhānti paṇḍitāḥ mahāprajñās tathā cānye jñānavijñānabhāvinaḥ

हिन्दी अर्थ

साथ रहते हैं तथा जिस प्रकार मूँजमें सींक होती है और ये सभी वस्तुएँ पृथक् होती हुई भी परस्पर संयुक्त रहती हैं, उसी प्रकार प्रकृति और पुरुष भी एक-दूसरेसे संयुक्त रहते हैं।

English

Some appear dull-witted, some appear learned, others greatly wise, possessing knowledge and wisdom.

अध्याय २२४

श्लोक 45

अल्पवाचास् तथा केचिन् महावाचास् तथा परे दृश्यन्ते पुरुषा देव ततो व्याख्यातुम् अर्हसि

alpavācās tathā kecin mahāvācās tathā pare dṛśyante puruṣā deva tato vyākhyātum arhasi

हिन्दी अर्थ

प्रकृति गुणोंकी सृष्टि करती है और क्षेत्रज्ञ आत्मा उदासीनकी भाँति अलग रहकर समस्त विकारशील गुणोंको देखा करता है । प्रकृति जो इन

English

Some are of few words, others of great speech; men are seen thus, god; therefore you ought to explain."

अध्याय २२४

श्लोक 46

हन्त ते ऽहं प्रवक्ष्यामि देवि कर्मफलोदयम् मर्त्यलोके नरः सर्वो येन स्वं फलम् अश्नुते

hanta te 'haṃ pravakṣyāmi devi karmaphalodayam martyaloke naraḥ sarvo yena svaṃ phalam aśnute

हिन्दी अर्थ

जानते हैं, वे कष्टमें नहीं पड़ते, वे तो जलमें भी स्थलकी ही भाँति विचरते हैं, उसी प्रकार ज्ञानस्वरूप आत्माको प्राप्त हुआ तत्त्ववेत्ता पुरुष संसार-सागरसे पार हो जाता है। जो सम्पूर्ण प्राणियोंके आवागमनको

English

"Well, I shall tell you, goddess, the rising of the fruit of action, by which every man in the world of mortals experiences his own fruit.

अध्याय २२४

श्लोक 47

प्राणातिपाती योगीन्द्रो दण्डहस्तो नरः सदा नित्यम् उद्यतशस्त्रश् च हन्ति भूतगणान् नरः

prāṇātipātī yogīndro daṇḍahasto naraḥ sadā nityam udyataśastraś ca hanti bhūtagaṇān naraḥ

हिन्दी अर्थ

जानकर सबके प्रति समभाव रखते हुए बर्ताव करता है, वह उत्तम शान्तिको प्राप्त होता है । ब्राह्मणमें इस ज्ञानको प्राप्त करनेको सहज शक्ति होती है। मन और इन्द्रियोंका संयम तथा आत्माका

English

A man who kills living beings, bearing a rod in hand, a lord of yogis (cruel), always with raised weapon, kills hosts of beings.

अध्याय २२४

श्लोक 48

निर्दयः सर्वभूतेभ्यो नित्यम् उद्वेगकारकः अपि कीटपतंगानाम् अशरण्यः सुनिर्घृणः

nirdayaḥ sarvabhūtebhyo nityam udvegakārakaḥ api kīṭapataṃgānām aśaraṇyaḥ sunirghṛṇaḥ

हिन्दी अर्थ

ज्ञान--ये मोक्षप्रापिके लिये पर्याप्त साधन हें । तत्त्वका ज्ञान प्राप्त करके मनुष्य बुद्ध (ज्ञानी) हो जाता है। बुद्धका इसके सिवा और क्या लक्षण हो सकता है। बुद्धिमान् मनुष्य इस आत्मतत्त्वको

English

Merciless to all beings, constantly causing agitation, a refugeless one, very pitiless even to insects and moths —

अध्याय २२४

श्लोक 49

एवंभूतो नरो देवि निरयं प्रतिपद्यते विपरीतस् तु धर्मात्मा स्वरूपेणाभिजायते

evaṃbhūto naro devi nirayaṃ pratipadyate viparītas tu dharmātmā svarūpeṇābhijāyate

हिन्दी अर्थ

जानकर कृतकृत्य हो संसार-बन्धनसे मुक्त हो जाते हैं। अज्ञानी पुरुषोंको परलोकमें जो महान् भय प्राप्त होता है, वह ज्ञानीको नहीं होता। ज्ञानी

English

such a man, goddess, goes to hell; but the opposite, righteous-souled, is born in his own form.

अध्याय २२४

श्लोक 50

निरयं याति हिंसात्मा याति स्वर्गम् अहिंसकः यातनां निरये रौद्रां सकृच्छ्रां लभते नरः

nirayaṃ yāti hiṃsātmā yāti svargam ahiṃsakaḥ yātanāṃ niraye raudrāṃ sakṛcchrāṃ labhate naraḥ

हिन्दी अर्थ

गुणोंकी सृष्टि करती है, वह सब उसका स्वाभाविक पुरुषोंको जो सनातन गति प्राप्त होती है, उससे कर्म है। जैसे मकड़ी अपने शरीरसे तन्तुओंकी बढ़कर दूसरी कोई गति नहीं है।

English

The violent-souled goes to hell; the non-violent goes to heaven; a man gets terrible, painful torment in hell."

अध्याय २२४

श्लोक 51

यः कश्चिन् निरयात् तस्मात् समुत्तरति कर्हिचित् मानुष्यं लभते वापि हीनायुस् तत्र जायते

yaḥ kaścin nirayāt tasmāt samuttarati karhicit mānuṣyaṃ labhate vāpi hīnāyus tatra jāyate

हिन्दी अर्थ

सृष्टि करती है, वैसे ही प्रकृति भी समस्त त्रिगुणात्मक

English

Whoever at some time rises from that hell obtains human birth, and is born there short-lived.

अध्याय २२४

श्लोक 52

पापेन कर्मणा देवि युक्तो हिंसादिभिर् यतः अहितः सर्वभूतानां हीनायुर् उपजायते

pāpena karmaṇā devi yukto hiṃsādibhir yataḥ ahitaḥ sarvabhūtānāṃ hīnāyur upajāyate

हिन्दी अर्थ

मुनि बोले- भगवन्! अब आप उस धर्मका

English

Goddess, one joined with sinful action, with violence and the like, hostile to all beings, is born short-lived.

अध्याय २२४

श्लोक 53

शुभेन कर्मणा देवि प्राणिघातविवर्जितः शुभेन कर्मणा देवि प्राणिघातविवर्जितः निक्षिप्तशस्त्रो निर्दण्डो न हिंसति कदाचन

śubhena karmaṇā devi prāṇighātavivarjitaḥ śubhena karmaṇā devi prāṇighātavivarjitaḥ nikṣiptaśastro nirdaṇḍo na hiṃsati kadācana

हिन्दी अर्थ

पदार्थोंको जन्म देती है। किन्हींका मत है कि वर्णन कीजिये, जो सब धर्मोसे श्रेष्ठ है तथा तत्त्वज्ञाससे जब गुणोंका नाश कर दिया जाता है, जिससे बढ़कर दूसरा कोई धर्म नहीं है।

English

By good action, goddess, free of killing living beings, with weapons laid down, without the rod, he never harms;

अध्याय २२४

श्लोक 54

न घातयति नो हन्ति घ्नन्तं नैवानुमोदते सर्वभूतेषु सस्नेहो यथात्मनि तथा परे

na ghātayati no hanti ghnantaṃ naivānumodate sarvabhūteṣu sasneho yathātmani tathā pare

हिन्दी अर्थ

तब वे फिर उत्पन्न नहीं होते, उनका सर्वथा बाध

English

he neither kills, nor causes to kill, nor approves of one who kills; affectionate to all beings, as to himself so to others —

अध्याय २२४

श्लोक 55

ईदृशः पुरुषो नित्यं देवि देवत्वम् अश्नुते उपपन्नान् सुखान् भोगान् सदाश्नाति मुदा युतः

īdṛśaḥ puruṣo nityaṃ devi devatvam aśnute upapannān sukhān bhogān sadāśnāti mudā yutaḥ

हिन्दी अर्थ

व्यासजीने कहा- मुनिवरो! में ऋषियोंके द्वारा

English

such a man, goddess, always attains godhood; he always eats joyfully the pleasures and enjoyments that come to him.

अध्याय २२४

श्लोक 56

अथ चेन् मानुषे लोके कदाचिद् उपपद्यते एष दीर्घायुषां मार्गः सुवृत्तानां सुकर्मणाम् प्राणिहिंसाविमोक्षेण ब्रह्मणा समुदीरितः

atha cen mānuṣe loke kadācid upapadyate eṣa dīrghāyuṣāṃ mārgaḥ suvṛttānāṃ sukarmaṇām prāṇihiṃsāvimokṣeṇa brahmaṇā samudīritaḥ

हिन्दी अर्थ

हो जाता है। क्योंकि फिर उनका कोई चिह्न नहीं प्रशंसित प्राचीन धर्मका, जो सम्पूर्ण धर्मोसे श्रेष्ठ उपलब्ध होता। इस प्रकार वे भ्रम या अविद्याके है, वर्णन करता हूँ। तुम एकाग्रचित्त होकर सुनो। निवारणको ही मुक्ति मानते हैं । दूसरोंके मतमें जैसे पिता अपने छोटे बालकोंको अपनी आज्ञाके त्रिविध दुःखोंकी आत्यन्तिक निवृत्ति ही मोक्ष है। अधीन रखता है, उसी प्रकार मनुष्य बुद्धिके

English

If then at some time he is born in the human world, this is the path of the long-lived, of the well-conducted, of good actions, declared by Brahma as release from violence to living beings.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_brahmapurANa-1-246.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Brahma Purana — Chapter 224
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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