Brahma Purana· Brahma Purāṇa
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अध्याय 33 / 246

Adhyaya 33

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अध्याय ३३

श्लोक 1

भूयो ऽपि कथयास्माकं कथां सूर्यसमाश्रिताम् न तृप्तिम् अधिगच्छामः शृण्वन्तस् तां कथां शुभाम्

bhūyo 'pi kathayāsmākaṃ kathāṃ sūryasamāśritām na tṛptim adhigacchāmaḥ śṛṇvantas tāṃ kathāṃ śubhām

हिन्दी अर्थ

सुभद्राके दर्शन-पूजनका माहात्म्य

English

Lord Visou, lord Siva and I (Brahma) were stationed, there alone. All of us were deluded by all-enveloping darkness. We were meditating on the supreme god.

अध्याय ३३

श्लोक 2

यो ऽयं दीप्तो महातेजा वह्निराशिसमप्रभः एतद् वेदितुम् इच्छामः प्रभावो ऽस्य कुतः प्रभो

yo 'yaṃ dīpto mahātejā vahnirāśisamaprabhaḥ etad veditum icchāmaḥ prabhāvo 'sya kutaḥ prabho

हिन्दी अर्थ

ब्रह्माजी कहते हें-ब्राह्मणो! अब में पञ्चतीर्थकी त्रिलोचन नमस्तेऽस्तु नमस्ते शशिभूषण। विधि बतलाऊँगा तथा स्नान, दान और देव-दर्शनसे त्राहि मां त्वं विरूपाक्ष महादेव नमोऽस्तु ते॥ जो फल होता है, उसका वर्णन करूँगा । मार्कण्डेयहदमें 'तीन नेत्रोंवाले शंकर! आपको नमस्कार है, जाकर मनुष्य उत्तराभिमुख हो तीन बार डुबकी चन्द्रमाको भूषणरूपमें धारण करनेवाले! आपको

English

Thereafter, Sun-god the dispeller of darkness, the deity* of great brilliance, appeared. Then he was recognized as Savitr (Sun-god) by us by our Yogic power of meditation.

अध्याय ३३

श्लोक 3

तमोभूतेषु लोकेषु नष्टे स्थावरजङ्गमे प्रकृतेर् गुणहेतुस् तु पूर्वं बुद्धिर् अजायत

tamobhūteṣu lokeṣu naṣṭe sthāvarajaṅgame prakṛter guṇahetus tu pūrvaṃ buddhir ajāyata

हिन्दी अर्थ

लगाये और निम्राङ्कित मन्त्रका उच्चारण करे नमस्कार है । विकट नेत्रोंवाले शिवजी! आप मेरी

English

After realising him as the Supreme Soul we eulogised, him by means of divine hymns.

अध्याय ३३

श्लोक 4

अहंकारस् ततो जातो महाभूतप्रवर्तकः वाय्वग्निर् आपः खं भूमिस् ततस् त्व् अण्डम् अजायत

ahaṃkāras tato jāto mahābhūtapravartakaḥ vāyvagnir āpaḥ khaṃ bhūmis tatas tv aṇḍam ajāyata

हिन्दी अर्थ

संसारसागरे मग्रं पापग्रस्तमचेतनम्। रक्षा कीजिये। महादेव! आपको नमस्कार है।' त्राहि मां भगनेत्रघ त्रिपुरारे नमोऽस्तु ते॥ इस प्रकार मार्कण्डेयहृदमें स्नान करके भगवान् नमः शिवाय शान्ताय सर्वपापहराय च। शंकरका दर्शन करनेसे मनुष्य सब पापोंसे मुक्त सत्रानं करोमि देवेश मम नश्यतु पातकम्॥ । हो शिवके लोकमें जाता है।

English

Rrayer: You are the primordial lord of Devas. By your power of lordship you are called livara. You are the first maker of all living beings. You are the cause of daylight and. the lord of Devas.

अध्याय ३३

श्लोक 5

तस्मिन्न् अण्डे त्व् इमे लोकाः सप्त चैव प्रतिष्ठिताः पृथिवी सप्तभिर् द्वीपैः समुद्रैश् चैव सप्तभिः

tasminn aṇḍe tv ime lokāḥ sapta caiva pratiṣṭhitāḥ pṛthivī saptabhir dvīpaiḥ samudraiś caiva saptabhiḥ

हिन्दी अर्थ

' भगके नेत्रोंका नाश करनेवाले त्रिपुरशत्रु भगवान् वहाँसे कल्पान्तस्थायी वटवृक्षे पास जाकर शिव! में संसार-सागरमें निमग्न, पापग्रस्त एवं उसको तीन परिक्रमा करे । फिर निम्राङ्कित मन्त्रद्वारा अचेतन हूँ। आप मेरी रक्षा कीजिये। आपको बड़ी भक्तिके साथ उस वटकी पूजा करे- नमस्कार है। समस्त पापोंको दूर करनेवाले शान्तस्वरूप 3७ नमोऽव्यक्तरूपाय महाप्रलयकारिणे।

English

You are the enlivener of all living beings. Devas,. Gmidharvas, R&kfasas, sages, Kinnaras, Siddhas, Nagas and. birds.

अध्याय ३३

श्लोक 6

तत्रैवावस्थितो ह्य् आसीद् अहं विष्णुर् महेश्वरः विमूढास् तामसाः सर्वे प्रध्यायन्ति तम् ईश्वरम्

tatraivāvasthito hy āsīd ahaṃ viṣṇur maheśvaraḥ vimūḍhās tāmasāḥ sarve pradhyāyanti tam īśvaram

हिन्दी अर्थ

शिवको नमस्कार है। देवेश्वर! मैं यहाँ स्नान करता महद्रसोपविष्टाय न्यग्रोधाय नमोऽस्तु ते॥

English

You are Brahma, Siva, Viypu. You arc Praj&pati. You. are the wind god, Indra, Moon, Sun-god and Varupa.

अध्याय ३३

श्लोक 7

ततो वै सुमहातेजाः प्रादुर्भूतस् तमोनुदः ध्यानयोगेन चास्माभिर् विज्ञातः सविता तदा

tato vai sumahātejāḥ prādurbhūtas tamonudaḥ dhyānayogena cāsmābhir vijñātaḥ savitā tadā

हिन्दी अर्थ

यों कहकर बुद्धिमान् पुरुष नाभिके बराबर न्यग्रोध हर मे पापं कल्पवृक्ष नमोऽस्तु ते॥ जलमें स्नान करनेके पश्चात् देवताओं और ऋषियोंका 'अव्यक्तस्वरूप महाप्रलयकारी एवं महान् विधिपूर्वक तर्पण करे। फिर तिल और जल रससे युक्त आप वटवुक्षको नमस्कार है। है वट! लेकर पितरोंकी भी तृप्ति करे। उसके बाद आप प्रत्येक कल्पमें अमर हैं। आपपर भगवान्

English

You are time, the creator, annihilator and sustainer.

अध्याय ३३

श्लोक 8

ज्ञात्वा च परमात्मानं सर्व एव पृथक् पृथक् दिव्याभिः स्तुतिभिर् देवः स्तुतो ऽस्माभिस् तदेश्वरः

jñātvā ca paramātmānaṃ sarva eva pṛthak pṛthak divyābhiḥ stutibhir devaḥ stuto 'smābhis tadeśvaraḥ

हिन्दी अर्थ

आचमन करके शिव-मन्दिरमें जाय। उसके भीतर श्रीहरिका निवास है। न्यग्रोध! मेरे पाप हर प्रवेश करके तीन बार देवताकी परिक्रमा करे। लीजिये। कल्पवृक्ष! आपको नमस्कार है।' तदनन्तर 'मार्कण्डेयेश्वराय नमः' इस मूलमन्त्रसे इसके बाद भक्तिपूर्वक परिक्रमा करके उस अथवा अघोर'मन्त्रसे शंकरजीको पूजा करके कल्पान्तस्थायी वरको नमस्कार करे। ऐसा करनेवाला

English

You have thousand tays, thousand faces, thousand feet and thousand eyes. You are the cause of Elements. You are the worlds Bhu, Bhuvahj Svab, Mahar, Satya, Tapas and Jana.

अध्याय ३३

श्लोक 9

आदिदेवो ऽसि देवानाम् ऐश्वर्याच् च त्वम् ईश्वरः आदिकर्तासि भूतानां देवदेवो दिवाकरः

ādidevo 'si devānām aiśvaryāc ca tvam īśvaraḥ ādikartāsi bhūtānāṃ devadevo divākaraḥ

हिन्दी अर्थ

उन्हें प्रणाम करे और निम्राङ्कित मन्त्र पढ़कर उन्हें मनुष्य केंचुलसे छूटे हुए सर्पकी भाँति सहसा प्रसन्न करे पापोंसे मुक्त हो जाता है। उस वृक्षको छायामें

English

The form that you possess isunrealisable, unobservable and unchaining. It is not realized in meditation. It has neither a beginning nor an end. Obeisance to you.

अध्याय ३३

श्लोक 10

जीवनः सर्वभूतानां देवगन्धर्वरक्षसाम् मुनिकिंनरसिद्धानां तथैवोरगपक्षिणाम्

jīvanaḥ sarvabhūtānāṃ devagandharvarakṣasām munikiṃnarasiddhānāṃ tathaivoragapakṣiṇām

हिन्दी अर्थ

मार्कण्डेयेश्वर शिव, वटवृक्ष, श्रीकृष्ण, बलभद्र एवं सुभद्राके दर्शन-पूजनका माहात्म्य

English

Obeisance to the causes. Obeisance to you who liberate from sins. Obeisance to you honoured by Adid. Obeisance to* you who dispel ailments.

अध्याय ३३

श्लोक 11

त्वं ब्रह्मा त्वं महादेवस् त्वं विष्णुस् त्वं प्रजापतिः वायुर् इन्द्रश् च सोमश् च विवस्वान् वरुणस् तथा

tvaṃ brahmā tvaṃ mahādevas tvaṃ viṣṇus tvaṃ prajāpatiḥ vāyur indraś ca somaś ca vivasvān varuṇas tathā

हिन्दी अर्थ

पहुँच जानेपर मनुष्य ब्रह्महत्यासे भी मुक्त हो जाता है, फिर अन्य पापोंकी तो बात ही क्या है। भगवान् श्रीकृष्णके अङ्गसे प्रकट हुए ब्रह्मतेजोमय वटवृक्षरूपी विष्णुको प्रणाम करके मानव राजसूय

English

Obeisance, obeisance to you who bestow boons. Obeis¬ ance to you who bestow happiness. Obeisance, obeisance to you who bestow riches. Obeisance, obeisance to you who-

अध्याय ३३

श्लोक 12

त्वं कालः सृष्टिकर्ता च हर्ता भर्ता तथा प्रभुः सरितः सागराः शैला विद्युदिन्द्रधनूंषि च

tvaṃ kālaḥ sṛṣṭikartā ca hartā bhartā tathā prabhuḥ saritaḥ sāgarāḥ śailā vidyudindradhanūṃṣi ca

हिन्दी अर्थ

और अश्वमेध-यज्ञसे भी अधिक फल पाता है और अपने कुलका उद्धार करके विष्णुलोकमें जाता है। भगवान् श्रीकृष्णके सामने खड़े हुए गरुड़को जो नमस्कार करता है, वह सब पापोंसे

English

When eulogised thus, die I

अध्याय ३३

श्लोक 13

प्रलयः प्रभवश् चैव व्यक्ताव्यक्तः सनातनः ईश्वरात् परतो विद्या विद्यायाः परतः शिवः

pralayaḥ prabhavaś caiva vyaktāvyaktaḥ sanātanaḥ īśvarāt parato vidyā vidyāyāḥ parataḥ śivaḥ

हिन्दी अर्थ

मुक्त हो श्रीविष्णुके वैकुण्ठधाममें जाता है। वटवृक्ष और गरुड़का दर्शन करनेके पश्चात् जो पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण, बलभद्र और सुभद्रादेबीका दर्शन करता है, वह परम गतिको प्राप्त होता है। जगन्नाथ

English

"0 lordi none will be tempted to bear this excessively brilliant form of yours. Vor the weliare of the worldi may that form become bearable.''

अध्याय ३३

श्लोक 14

शिवात् परतरो देवस् त्वम् एव परमेश्वरः सर्वतःपाणिपादान्तः सर्वतोक्षिशिरोमुखः

śivāt parataro devas tvam eva parameśvaraḥ sarvataḥpāṇipādāntaḥ sarvatokṣiśiromukhaḥ

हिन्दी अर्थ

श्रीकृष्णके मन्दिरमें प्रवेश करके तीन बार प्रदक्षिणा करे। फिर नाममन्त्रसे बलभद्रजीका भक्तिपूर्वक पूजन करके निम्राङ्कित रूपसे प्रार्थना करे-

English

Saying "Let it be so/' the Sungodthe cause of all creation began to bestow hcat rain and snow for the fulfilment of all worldly affairs.

अध्याय ३३

श्लोक 15

सहस्रांशुः सहस्रास्यः सहस्रचरणेक्षणः भूतादिर् भूर् भुवः स्वश् च महः सत्यं तपो जनः

sahasrāṃśuḥ sahasrāsyaḥ sahasracaraṇekṣaṇaḥ bhūtādir bhūr bhuvaḥ svaś ca mahaḥ satyaṃ tapo janaḥ

हिन्दी अर्थ

नमस्ते रेवतीकान्त नमस्ते भक्तवत्सल॥

English

Ever since, the adherents of Sahkhya, Yoga and other systems of thought who seek salvation meditate on you who are seated in heart.

अध्याय ३३

श्लोक 16

प्रदीप्तं दीपनं दिव्यं सर्वलोकप्रकाशकम् दुर्निरीक्षं सुरेन्द्राणां यद् रूपं तस्य ते नमः

pradīptaṃ dīpanaṃ divyaṃ sarvalokaprakāśakam durnirīkṣaṃ surendrāṇāṃ yad rūpaṃ tasya te namaḥ

हिन्दी अर्थ

“हलधारण करनेवाले राम! आपको नमस्कार है। मूसलको आयुध रूपमें रखनेवाले! आपको नमस्कार है। रेवतीरमण! आपको नमस्कार है। भक्तवत्सल! आपको नमस्कार है। बलवानोंमें

English

The holy rite of Agnihotra, Vedas and sacrifices where«> in much wealth is distributed as gifts do not deserve even a sixteenth part of devout obeisance of the devotee being offered to you.

अध्याय ३३

श्लोक 17

सुरसिद्धगणैर् जुष्टं भृग्वत्रिपुलहादिभिः स्तुतं परमम् अव्यक्तं यद् रूपं तस्य ते नमः

surasiddhagaṇair juṣṭaṃ bhṛgvatripulahādibhiḥ stutaṃ paramam avyaktaṃ yad rūpaṃ tasya te namaḥ

हिन्दी अर्थ

रेष्ठ! आपको नमस्कार है। पृथ्वीको मस्तकपर धारण करनेवाले शेषजी! आपको नमस्कार है। प्रलम्बशत्रो! आपको नमस्कार है। श्रीकृष्णके अग्रज! मेरी रक्षा कोजिये।'

English

Devotees resort to you who are on a par with the eatest of all holy centres, the most auspicious of all auspicious things and the holiest of all holy objects.

अध्याय ३३

श्लोक 18

वेद्यं वेदविदां नित्यं सर्वज्ञानसमन्वितम् सर्वदेवातिदेवस्य यद् रूपं तस्य ते नमः

vedyaṃ vedavidāṃ nityaṃ sarvajñānasamanvitam sarvadevātidevasya yad rūpaṃ tasya te namaḥ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार कैलासशिखरके समान आकार और चन्द्रमासे भी कमनीय मुखवाले, नीलवस्त्रधारी,

English

Those who bow down to you, who are eulogised by Indra and others are liberated from sins and go to your world.

अध्याय ३३

श्लोक 19

विश्वकृद् विश्वभूतं च वैश्वानरसुरार्चितम् विश्वस्थितम् अचिन्त्यं च यद् रूपं तस्य ते नमः

viśvakṛd viśvabhūtaṃ ca vaiśvānarasurārcitam viśvasthitam acintyaṃ ca yad rūpaṃ tasya te namaḥ

हिन्दी अर्थ

भगवते वासुदेवाय'-से भगवान् श्रीकृष्णको पूजा करे। जो द्वादशाक्षर-मन्त्रके द्वारा भक्तिपूर्वक सदा भगवान् पुरुषोत्तमकी पूजा करते हैं, वे मोक्षको प्रात होते हैं । देवता, योगी तथा सोमपान करनेवाले

English

O Brahma, for a very long time we had been cherishing this desire to hear. Tell us the hundred and eight names of Sun-god which had previously been mentioned by you.

अध्याय ३३

श्लोक 20

परं यज्ञात् परं वेदात् परं लोकात् परं दिवः परमात्मेत्य् अभिख्यातं यद् रूपं तस्य ते नमः

paraṃ yajñāt paraṃ vedāt paraṃ lokāt paraṃ divaḥ paramātmety abhikhyātaṃ yad rūpaṃ tasya te namaḥ

हिन्दी अर्थ

याज्ञिक भी जिस गतिको नहीं पाते, उसीको द्वादशाक्षर-मन्त्रका जप करनेवाले पुरुष प्राप्त कर लेते हैं। अतः उसी मन्त्रसे भक्तिपूर्वक गन्ध-पुष्प आदि सामग्रियोंद्वारा जगद्गुरु श्रीकृष्णको पूजा

English

O brahmins, even as I recount to you the hundred and eight names of the Sungod, they constitute a great secret which yields celestial pleasures and salvation.

अध्याय ३३

श्लोक 21

अविज्ञेयम् अनालक्ष्यम् अध्यानगतम् अव्ययम् अनादिनिधनं चैव यद् रूपं तस्य ते नमः

avijñeyam anālakṣyam adhyānagatam avyayam anādinidhanaṃ caiva yad rūpaṃ tasya te namaḥ

हिन्दी अर्थ

करके उन्हें प्रणाम करे। फिर इस प्रकार प्रार्थना करे-' जगन्नाथ श्रीकृष्ण! आपकी जय हो। सब पापोंका नाश करनेवाले प्रभो! आपको जय हो। चाणूर और केशीके नाशक! आपकी जय हो।

English

Unknowable, imperceptible, beyond meditation, imperishable, without beginning or end: salutation to that form of yours.

अध्याय ३३

श्लोक 22

नमो नमः कारणकारणाय नमो नमः पापविमोचनाय नमो नमस् ते दितिजार्दनाय नमो नमो रोगविमोचनाय

namo namaḥ kāraṇakāraṇāya namo namaḥ pāpavimocanāya namo namas te ditijārdanāya namo namo rogavimocanāya

हिन्दी अर्थ

कंसनाशन! आपको जय हो। कमललोचन! आपको जय हो। चक्रगदाधर! आपको जय हो। नील मेघके समान श्यामवर्ण! आपकी जय हो। सबको सुख देनेवाले परमेश्वर! आपकी जय हो।

English

Salutations again and again to the cause of causes; salutations again and again to the liberator from sin; salutation to you, destroyer of the Daityas; salutations again and again to the liberator from disease.

अध्याय ३३

श्लोक 23

नमो नमः सर्ववरप्रदाय नमो नमः सर्वसुखप्रदाय नमो नमः सर्वधनप्रदाय नमो नमः सर्वमतिप्रदाय

namo namaḥ sarvavarapradāya namo namaḥ sarvasukhapradāya namo namaḥ sarvadhanapradāya namo namaḥ sarvamatipradāya

हिन्दी अर्थ

जगत्पूज्य देव! आपकी जय हो। संसारसंहारक! आपको जय हो। लोकपते नाथ! आपकी जय हो। मनोवाञ्छित फल देनेवाले देवता! आपको जय हो। यह भयङ्कर संसारसागर सर्वथा निःसार

English

Salutations again and again to the giver of all boons; to the giver of all happiness; to the giver of all wealth; to the giver of all understanding.

अध्याय ३३

श्लोक 24

स्तुतः स भगवान् एवं तैजसं रूपम् आस्थितः उवाच वाचा कल्याण्या को वरो वः प्रदीयताम्

stutaḥ sa bhagavān evaṃ taijasaṃ rūpam āsthitaḥ uvāca vācā kalyāṇyā ko varo vaḥ pradīyatām

हिन्दी अर्थ

है। इसमें दुःखमय फेन भरा हुआ है। यह क्रोधरूपी ग्राहसे पूर्ण है। इसमें विषयरूपी जलराशि भरी हुई है। भाॉति-भाँतिके रोग ही इसमें उठती हुई लहरें हैं। मोहरूपी भँवरोंके कारण यह

English

Thus praised, the revered one, assuming a brilliant form, spoke in a gracious voice: "What boon shall be given to you?"

अध्याय ३३

श्लोक 25

तवातितैजसं रूपं न कश्चित् सोढुम् उत्सहेत् सहनीयं तद् भवतु हिताय जगतः प्रभो

tavātitaijasaṃ rūpaṃ na kaścit soḍhum utsahet sahanīyaṃ tad bhavatu hitāya jagataḥ prabho

हिन्दी अर्थ

अत्यन्त दुस्तर जान पड़ता है। सुरश्रेष्ठ! मैं इस घोर संसाररूपी समुद्रमें डूबा हुआ हूँ। पुरुषोत्तम! मेरी रक्षा कोजिये।' इस प्रकार प्रार्थना करके जो देवेश्वर, वरदायक, भक्तवत्सल, सर्वपापहारी,

English

"Your form is exceedingly brilliant, no one can bear it; may it be bearable, Lord, for the good of the world."

अध्याय ३३

श्लोक 26

एवम् अस्त्व् इति सो ऽप्य् उक्त्वा भगवान् आदिकृत् प्रभुः लोकानां कार्यसिद्ध्यर्थं घर्मवर्षहिमप्रदः

evam astv iti so 'py uktvā bhagavān ādikṛt prabhuḥ lokānāṃ kāryasiddhyarthaṃ gharmavarṣahimapradaḥ

हिन्दी अर्थ

समस्त अभिलषित फलोंके दाता, मोटे कंधे और

English

Saying "So be it," the lord, the primal maker, for the accomplishment of the worlds' work, giver of heat, rain and cold,

अध्याय ३३

श्लोक 27

ततः सांख्याश् च योगाश् च ये चान्ये मोक्षकाङ्क्षिणः ध्यायन्ति ध्यायिनो देवं हृदयस्थं दिवाकरम्

tataḥ sāṃkhyāś ca yogāś ca ye cānye mokṣakāṅkṣiṇaḥ dhyāyanti dhyāyino devaṃ hṛdayasthaṃ divākaram

हिन्दी अर्थ

देवपूजित, अनन्त, अजेय, एक कुण्डलसे विभूषित, दो भुजाओंवाले, श्यामवर्ण, कमलपत्रके समान फणोंके द्वारा विकट मस्तकवाले, महाबली हलधरको विशाल नेत्रोंवाले, चौड़ी छाती, विशाल भुजा, प्रसन्न करे। बलरामजीको पूजाके पश्चात् विद्वान् पीत वस्त्र और सुन्दर मुखवाले, शह्लु-चक्र- पुरुष एकाग्रचित्त हो द्वादशाक्षर-मन्त्र 'ॐ नमो गदाधर, मुकुटाङ्गदभूषित, समस्त शुभ लक्षणोंसे

English

then Sankhyas, Yogis, and others seeking liberation, meditating, meditate on the Day-maker god residing in the heart.

अध्याय ३३

श्लोक 28

सर्वलक्षणहीनो ऽपि युक्तो वा सर्वपातकैः सर्वं च तरते पापं देवम् अर्कं समाश्रितः

sarvalakṣaṇahīno 'pi yukto vā sarvapātakaiḥ sarvaṃ ca tarate pāpaṃ devam arkaṃ samāśritaḥ

हिन्दी अर्थ

युक्त और वनमालाविभूषित भगवान् श्रीकृष्णका मनुष्य दुर्लभ मोक्षतक प्राप्त कर लेता है। दर्शन और उन्हें प्रणाम करता है, वह हजारों तत्पश्चात् भक्तोंपर स्नेह रखनेवाली सुभद्रादेवीका अश्वमेध-यज्ञोंका और सब तीर्थोमें स्नान और भी नाममन्त्रसे पूजन करके उन्हें प्रणाम करे और दान करनेका फल पाता है। सम्पूर्ण वेद, समस्त हाथ जोड़कर निम्राङ्कित रूपसे प्रार्थना करे-

English

Even one devoid of all marks or joined with all sins crosses over all sin by taking refuge in the god Arka.

अध्याय ३३

श्लोक 29

अग्निहोत्रं च वेदाश् च यज्ञाश् च बहुदक्षिणाः भानोर् भक्तिनमस्कारकलां नार्हन्ति षोडशीम्

agnihotraṃ ca vedāś ca yajñāś ca bahudakṣiṇāḥ bhānor bhaktinamaskārakalāṃ nārhanti ṣoḍaśīm

हिन्दी अर्थ

यज्ञ, सारे दान, व्रत, नियम, उग्र तपस्या और नमस्ते सर्वगे देवि नमस्ते शुभसौख्यदे। ब्रह्मचर्यके सम्यक् पालनसे जो फल मिलता है, त्राहि मां पदापत्राक्षि कात्यायनि नमोऽस्तु ते॥ वही भगवान् श्रीकृष्णके दर्शन और वन्दनसे प्रा (देवि! तुम सर्वत्र व्याप्त रहनेवाली और शुभ होता है । शास्त्रोक्त आचारका पालन करनेवाले सौख्य प्रदान करनेवाली हो । तुम्हें बारंबार नमस्कार

English

Agnihotra, Vedas, sacrifices with many fees do not equal a sixteenth part of the bow of devotion to the Sun.

अध्याय ३३

श्लोक 30

तीर्थानां परमं तीर्थं मङ्गलानां च मङ्गलम् पवित्रं च पवित्राणां प्रपद्यन्ते दिवाकरम्

tīrthānāṃ paramaṃ tīrthaṃ maṅgalānāṃ ca maṅgalam pavitraṃ ca pavitrāṇāṃ prapadyante divākaram

हिन्दी अर्थ

गृहस्थको, वनवासके नियमोंका पालन करनेसे है । पद्मपत्रके समान विशाल नेत्रोंबाली कात्यायनि ! वानप्रस्थको और शास्त्रोक्त रीतिसे संन्यास-धर्मका मेरी रक्षा करो। तुम्है नमस्कार है ।'

English

The supreme of tirthas, the auspicious of auspicious things, the pure of pure things: they take refuge in the Day-maker.

अध्याय ३३

श्लोक 31

शक्राद्यैः संस्तुतं देवं ये नमस्यन्ति भास्करम् सर्वकिल्बिषनिर्मुक्ताः सूर्यलोकं व्रजन्ति ते

śakrādyaiḥ saṃstutaṃ devaṃ ye namasyanti bhāskaram sarvakilbiṣanirmuktāḥ sūryalokaṃ vrajanti te

हिन्दी अर्थ

पालन करनेपर संन्यासीको जो फल प्रात होता है, इस प्रकार सम्पूर्ण जगत्को धारण करनेवाली, वही श्रीकृष्णका दर्शन और उन्हें प्रणाम करनेवाला लोकहितकारिणी, वरदायिनी एवं कल्याणमयी मनुष्य प्राप्त कर लेता है । भगवद्दर्शनके माहात्म्यके बलभद्रभगिनी सुभद्रादेवीको प्रसन्न करके मनुष्य सम्बन्धमें अधिक कहनेकी क्या आवश्यकता, इच्छानुसार गतिसे चलनेवाले विमानके द्वारा श्रीविष्णुके

English

Those who bow to the god Bhaskara, praised by Shakra and others, are freed from all sins and go to the Sun's world.

अध्याय ३३

श्लोक 32

चिरात् प्रभृति नो ब्रह्मञ् श्रोतुम् इच्छा प्रवर्तते नाम्नाम् अष्टशतं ब्रूहि यत् त्वयोक्तं पुरा रवेः

cirāt prabhṛti no brahmañ śrotum icchā pravartate nāmnām aṣṭaśataṃ brūhi yat tvayoktaṃ purā raveḥ

हिन्दी अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णका भक्तिपूर्वक दर्शन करके वैकुण्ठधाममें जाता है।

English

"For a long time, Brahma, a desire to hear has arisen in us: tell us the hundred and eight names of the Sun that you told formerly."

अध्याय ३३

श्लोक 33

अष्टोत्तरशतं नाम्नां शृणुध्वं गदतो मम भास्करस्य परं गुह्यं स्वर्गमोक्षप्रदं द्विजाः

aṣṭottaraśataṃ nāmnāṃ śṛṇudhvaṃ gadato mama bhāskarasya paraṃ guhyaṃ svargamokṣapradaṃ dvijāḥ

हिन्दी अर्थ

पुरुषोत्तमक्षेत्रमे भगवान् नृसिंह तथा श्रेतमाधवका माहात्म्य

English

"Hear the hundred and eight names as I tell, the supreme secret of Bhaskara, Brahmins, which gives heaven and liberation.

अध्याय ३३

श्लोक 34

ॐ सूर्यो ऽर्यमा भगस् त्वष्टा पूषार्कः सविता रविः गभस्तिमान् अजः कालो मृत्युर् धाता प्रभाकरः

oṃ sūryo 'ryamā bhagas tvaṣṭā pūṣārkaḥ savitā raviḥ gabhastimān ajaḥ kālo mṛtyur dhātā prabhākaraḥ

हिन्दी अर्थ

ब्रह्माजी कहते हैं--इस प्रकार बलराम, श्रीकृष्ण मनोवाञ्छित फलको प्राप्ति होती है। अतः सब और सुभद्राको प्रणाम करके भगवानूके मन्दिरसे प्रकारसे प्रयत्न करके भगवान् नृसिंहकी शरण ले; बाहर निकले तत्पश्चात् जगन्नाथजीके मन्दिरको क्‍योंकि वे धर्म, अर्थ, काम और मोक्षरूप फल प्रणाम करके एकाग्रचित्त हो उस स्थानपर जाय, प्रदान करते हें ।

English

Om. Surya, Aryaman, Bhaga, Tvashta, Pusha, Arka, Savita, Ravi, Gabhastiman, Aja, Kala, Mrityu, Dhata, Prabhakara,

अध्याय ३३

श्लोक 35

पृथिव्य् आपश् च तेजश् च खं वायुश् च परायणम् सोमो बृहस्पतिः शुक्रो बुधो ऽङ्गारक एव च

pṛthivy āpaś ca tejaś ca khaṃ vāyuś ca parāyaṇam somo bṛhaspatiḥ śukro budho 'ṅgāraka eva ca

हिन्दी अर्थ

जहाँ भगवान् विष्णुकी इन्द्रनीलमयी प्रतिमा बालूके मुनियोने कहा--इस पृथ्वीपर भगवान् नृसिंहका भीतर छिपी है। वहाँ अदृश्यरूपसे स्थित भगवानूको माहात्म्य सुखदायक और दुर्लभ है। हम उनका प्रणाम करके मनुष्य श्रीविष्णुके धाममें जाता है। प्रभाव विस्तारके साथ सुनना चाहते हैं। इसके ब्राह्मणो! जो भगवान् सर्वदेवमय हैं, जिन्होंने लिये हमें बड़ी उत्कण्ठा है।

English

Earth, Water, Fire, Space, Wind, the Supreme Refuge, Soma, Brihaspati, Shukra, Budha, Angaraka,

अध्याय ३३

श्लोक 36

इन्द्रो विवस्वान् दीप्तांशुः शुचिः शौरिः शनैश्चरः ब्रह्मा विष्णुश् च रुद्रश् च स्कन्दो वैश्रवणो यमः

indro vivasvān dīptāṃśuḥ śuciḥ śauriḥ śanaiścaraḥ brahmā viṣṇuś ca rudraś ca skando vaiśravaṇo yamaḥ

हिन्दी अर्थ

आधा शरीर सिंहका बनाकर असुरराज ब्रह्माजी बोले- ब्राह्मणो! में अजित, अप्रमेय हिरण्यकशिपुका वध किया था, वे भगवान् तथा भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाले भगवान् नृसिंह भी पुरुषोत्तमतीर्थमें निवास करते हैं। जो नुसिंहका प्रभाव बतलाता हूँ; सुनो। उनके समस्त भक्तिपूर्वक उनका दर्शन करके प्रणाम करता है, गुणोंका वर्णन कौन कर सकता है, अतः मैं भी

English

Indra, Vivasvan, Diptamshu, Shuchi, Shauri, Shanaishchara, Brahma, Vishnu, Rudra, Skanda, Vaishravana, Yama,

अध्याय ३३

श्लोक 37

वैद्युतो जाठरश् चाग्निर् ऐन्धनस् तेजसां पतिः धर्मध्वजो वेदकर्ता वेदाङ्गो वेदवाहनः

vaidyuto jāṭharaś cāgnir aindhanas tejasāṃ patiḥ dharmadhvajo vedakartā vedāṅgo vedavāhanaḥ

हिन्दी अर्थ

वह समस्त पातकोंसे निश्चय ही मुक्त हो जाता है। संक्षेपसे ही बतलाऊँगा। इस लोकमें जो कोई हैवी जो मानव इस पृथ्वीपर भगवान् नृसिंहके भक्त अथवा मानुषी सिद्धियाँ सुनी जाती हैं, वे सब होते हैं, उन्हें पाप कभी छू नहीं सकते और भगवानके प्रसादसे ही सिद्ध होती हैं। स्वर्ग,

English

Vaidyuta, Jatharagni, Aindhana, Lord of Lights, Dharmadhvaja, Vedakarta, Vedanga, Vedavahana,

अध्याय ३३

श्लोक 38

कृतं त्रेता द्वापरश् च कलिः सर्वामराश्रयः कलाकाष्ठामुहूर्ताश् च क्षपा यामास् तथा क्षणाः

kṛtaṃ tretā dvāparaś ca kaliḥ sarvāmarāśrayaḥ kalākāṣṭhāmuhūrtāś ca kṣapā yāmās tathā kṣaṇāḥ

हिन्दी अर्थ

पुरुषोत्तमक्षेत्रमें भगवान् नृसिंह तथा श्रेतमाधवका माहात्म्य १२९

English

Krita, Treta, Dvapara, Kali, the refuge of all immortals, Kala, Kashtha, Muhurta, Kshapa, Yama, Kshana,

अध्याय ३३

श्लोक 39

संवत्सरकरो ऽश्वत्थः कालचक्रो विभावसुः पुरुषः शाश्वतो योगी व्यक्ताव्यक्तः सनातनः

saṃvatsarakaro 'śvatthaḥ kālacakro vibhāvasuḥ puruṣaḥ śāśvato yogī vyaktāvyaktaḥ sanātanaḥ

हिन्दी अर्थ

मर्त्यलोक, पाताल, दिशा, जल, गाँव तथा पर्वत-- सदा भक्तिपूर्वक पूजा करनी चाहिए । ब्राह्मण, इन सब स्थानोंमें भगवानूके प्रसादसे मनुष्यको क्षत्रिय, वैश्य, स्त्री, शूद्र और अन्त्यज भी सुरश्रेष्ठ अबाध गति होती है। इस चराचर जगत्में कोई नृसिंहका भक्तिपूर्वक पूजन करके कोटिजन्मोंके भी ऐसी वस्तु नहीं है, जो भक्तवत्सल भगवान् पाप और दुःखोंसे मुक्त हो जाते हैं । मनोवाज्छित

English

Maker of the year, Ashvattha, Kalachakra, Vibhavasu, Purusha, Eternal, Yogi, Manifest-Unmanifest, Sanatana,

अध्याय ३३

श्लोक 40

कालाध्यक्षः प्रजाध्यक्षो विश्वकर्मा तमोनुदः वरुणः सागरो ऽंशश् च जीमूतो जिवनो ऽरिहा

kālādhyakṣaḥ prajādhyakṣo viśvakarmā tamonudaḥ varuṇaḥ sāgaro 'ṃśaś ca jīmūto jivano 'rihā

हिन्दी अर्थ

नृसिंहके लिये असाध्य हो। मुनिवरो! सनातन फल पाते हें । देव, गन्धर्व एवं इन्द्रका पद भी कल्पराज (पूजाको सर्वश्रेष्ठ विधि) एवं नरसिंहका प्राप्त कर लेते हें । एक बार भी भगवान् नरसिंहका तत्त्व, जिसे देवता या असुर भी नहीं जानते, तुम्हें भक्तिपूर्वक दर्शन करनेसे करोड़ों जन्मोंके पापों बताता हूँ; सुनो। उत्तम साधकको चाहिए कि और दुःखोंसे छुटकारा मिल जाता है। संग्राम,

English

Overseer of Time, Overseer of creatures, Vishvakarma, Dispeller of darkness, Varuna, Sagara, Amsha, Jimuta, Jivana, Foe-slayer,

अध्याय ३३

श्लोक 41

भूताश्रयो भूतपतिः सर्वलोकनमस्कृतः स्रष्टा संवर्तको वह्निः सर्वस्यादिर् अलोलुपः

bhūtāśrayo bhūtapatiḥ sarvalokanamaskṛtaḥ sraṣṭā saṃvartako vahniḥ sarvasyādir alolupaḥ

हिन्दी अर्थ

साग, जौकी लपसी, मूल, फल, खली अथवा संकट, दुर्गमस्थान, चोर-व्याप्र आदिकी पीड़ा, सत्त्से भोजनको आवश्यकता पूर्ण करे अथवा प्राणसंशय, विष, अग्नि, जल, राजभय, समुद्रभय दूध पीकर रहे । इन्द्रियोंको काबूमें रखकर धर्मपरायण तथा ग्रह-रोग आदिजनित कष्ट प्राप्त होनेपर जो रहे । वन, एकान्त प्रदेश, पर्वत, नदी-संगम, कसर, पुरुष भगवान् नरसिंहका स्मरण करता है, वह

English

Refuge of beings, Lord of beings, Bowed to by all worlds, Creator, Samvartaka, Fire, Beginning of all, Free from greed,

अध्याय ३३

श्लोक 42

अनन्तः कपिलो भानुः कामदः सर्वतोमुखः जयो विशालो वरदः सर्वभूतनिषेवितः

anantaḥ kapilo bhānuḥ kāmadaḥ sarvatomukhaḥ jayo viśālo varadaḥ sarvabhūtaniṣevitaḥ

हिन्दी अर्थ

सिद्धक्षेत्र अथवा नृसिंहके मन्दिरमें जाकर या सब प्रकारको आपत्तियोंसे छुटकारा पा जाता है। स्वयं स्थापना करके भगवानूकी विधिपूर्वक पूजा जैसे सूर्योदय होनेपर महान् अन्धकार दूर हो करे। शुक्ल पक्षकी द्वादशीको उपवास करके जाता है, उसी प्रकार भगवान् नरसिंहका दर्शन जितेन्द्रियमावसे बीस लाख भगवन्नामका जप करे । होनेपर सभी उपद्रव नष्ट हो जाते हैं।

English

Ananta, Kapila, Bhanu, Giver of desires, Facing all sides, Jaya, Vishala, Boon-giver, Served by all beings,

अध्याय ३३

श्लोक 43

मनः सुपर्णो भूतादिः शीघ्रगः प्राणधारणः धन्वन्तरिर् धूमकेतुर् आदिदेवो ऽदितेः सुतः

manaḥ suparṇo bhūtādiḥ śīghragaḥ prāṇadhāraṇaḥ dhanvantarir dhūmaketur ādidevo 'diteḥ sutaḥ

हिन्दी अर्थ

ऐसा करनेवाला साधक उपपातक और महापातकोंसे अनन्त नामक वासुदेवका भक्तिपूर्वक दर्शन युक्त होनेपर भी मुक्त हो जाता है । पहले भगवान् और उन्हें वन्दन करनेपर मनुष्य सब पापोंसे मुक्त नृसिंहकी प्रदक्षिणा करके चन्दन और धूप आदिके हो परम पदको प्राप्त होता है। मैंने, इन्द्रने तथा द्वारा उनकी पूजा करे। मस्तक झुकाकर प्रभुको विभीषणने भी उनकी आराधना को हे। फिर

English

Mind, Suparna, Origin of beings, Swift-moving, Sustainer of life, Dhanvantari, Dhumaketu, Primal God, Aditi's son,

अध्याय ३३

श्लोक 44

द्वादशात्मा रविर् दक्षः पिता माता पितामहः स्वर्गद्वारं प्रजाद्वारं मोक्षद्वारं त्रिविष्टपम्

dvādaśātmā ravir dakṣaḥ pitā mātā pitāmahaḥ svargadvāraṃ prajādvāraṃ mokṣadvāraṃ triviṣṭapam

हिन्दी अर्थ

प्रणाम करे तथा उनके माथेपर कपूर और चन्दन कौन मनुष्य उनकी आराधना न करेगा। जो मनुष्य मिले हुए चमेलीके फूल चढ़ावे। इससे सिद्धि श्वेतगड़ामें स्नान करके श्रेतमाधव तथा मत्स्यमाधवका प्राप्त होती है। किसी भी कार्यमें भगवानूकी गति दर्शन करता है, वह श्वेतद्वीपमें जाता है । कुण्ठित नहीं होती। ब्रह्मा, रुद्र आदि देवता भी मुनियोंने कहा--भगवन् आप श्वेतमाधवके

English

Twelvefold Self, Ravi, Daksha, Father, Mother, Grandfather, Door of heaven, Door of creatures, Door of liberation, Trivishtapa,

अध्याय ३३

श्लोक 45

देहकर्ता प्रशान्तात्मा विश्वात्मा विश्वतोमुखः चराचरात्मा सूक्ष्मात्मा मैत्रेयः करुणान्वितः

dehakartā praśāntātmā viśvātmā viśvatomukhaḥ carācarātmā sūkṣmātmā maitreyaḥ karuṇānvitaḥ

हिन्दी अर्थ

उनके तेजको नहीं सह सकते । फिर संसारमें माहात्म्यका पूर्णरूपसे वर्णन कीजिये। साथ ही सिद्ध, गन्धर्व, मानव, दानव, विद्याधर, यक्ष, भगवानूको प्रतिमाका वृत्तान्त भी विस्तारके साथ किंनर और महानागोंकी तो बात ही क्या है। बतलाइये। भूतलमें विख्यात भगवानूके पवित्र अन्य साधक जिन असुरोंका नाश करनेके लिये क्षेत्रमें श्वेतमाधवकी स्थापना किसने की थी?

English

Maker of bodies, Tranquil-souled, Universal Self, Facing all sides, Self of the moving and unmoving, Subtle Self, Maitreya, Compassionate.

अध्याय ३३

श्लोक 46

एतद् वै कीर्तनीयस्य सूर्यस्यामिततेजसः नाम्नाम् अष्टशतं रम्यं मया प्रोक्तं द्विजोत्तमाः

etad vai kīrtanīyasya sūryasyāmitatejasaḥ nāmnām aṣṭaśataṃ ramyaṃ mayā proktaṃ dvijottamāḥ

हिन्दी अर्थ

समान तेजस्वी देखकर तत्क्षण नष्ट हो जाते हैं। बलवान् राजा थे। वे बड़े बुद्धिमान्, धर्मज्ञ, शूरवीर, महाबली भगवान् नरसिंह सदा अपने भक्तोंकी सत्यप्रतिज्ञ और दृढ़तापूर्वक व्रतका पालन करनेवाले रक्षा करते हैं। अतः मुनीश्वरो ! समस्त अभिलषित थे। उनके राज्यमें दस हजार वर्षोतक मनुष्योंकी फलोंके दाता महापराक्रमी भगवान् नरसिंहकी आयु होती थी और किसी बालककी मृत्यु नहीं

English

This lovely hundred and eight names of the praiseworthy Sun of immeasurable brilliance has been told by me, best of Brahmins.

अध्याय ३३

श्लोक 47

सुरगणपितृयक्षसेवितं ह्य् असुरनिशाकरसिद्धवन्दितम् वरकनकहुताशनप्रभं प्रणिपतितो ऽस्मि हिताय भास्करम्

suragaṇapitṛyakṣasevitaṃ hy asuraniśākarasiddhavanditam varakanakahutāśanaprabhaṃ praṇipatito 'smi hitāya bhāskaram

हिन्दी अर्थ

होती थी। इस प्रकार राजा श्वेतके राज्यमें कुछ काल व्यतीत होनेके पश्चात् एक घटना घटित हुई । कपालगौतम नामक एक परम धर्मात्मा ऋषि थे। उनके एक पुत्र हुआ, जो कालवश दाँत

English

"Served by hosts of gods, ancestors and Yakshas, worshipped by Asuras, the moon and Siddhas, bright as excellent gold and fire — I bow to Bhaskara for my welfare."

अध्याय ३३

श्लोक 48

सूर्योदये यः सुसमाहितः पठेत् स पुत्रदारान् धनरत्नसंचयान् लभेत जातिस्मरतां नरः स तु स्मृतिं च मेधां च स विन्दते पराम्

sūryodaye yaḥ susamāhitaḥ paṭhet sa putradārān dhanaratnasaṃcayān labheta jātismaratāṃ naraḥ sa tu smṛtiṃ ca medhāṃ ca sa vindate parām

हिन्दी अर्थ

निकलनेके पहले ही चल बसा । उसे गोदमें लेकर बुद्धिमान् ऋषि राजाके निकट आये । राजाने ऋषिकुमारको अचेत अवस्थामें सोया देख उसको जीवित करनेके लिये प्रतिज्ञा की।

English

The man who, well composed, recites this at sunrise gains wife and sons, heaps of wealth and jewels, remembrance of past births, and attains supreme memory and intelligence.

अध्याय ३३

श्लोक 49

इमं स्तवं देववरस्य यो नरः प्रकीर्तयेच् छुद्धमनाः समाहितः विमुच्यते शोकदवाग्निसागराल् लभेत कामान् मनसा यथेप्सितान्

imaṃ stavaṃ devavarasya yo naraḥ prakīrtayec chuddhamanāḥ samāhitaḥ vimucyate śokadavāgnisāgarāl labheta kāmān manasā yathepsitān

हिन्दी अर्थ

राजा बोले-यदि यमलोकमें गये हुए इस बालकको मैं सात दिनके भीतर न ला सकूँ तो

English

The man who with pure mind and composure recites this hymn of the best of gods is freed from the ocean of the wildfire of grief and obtains the desires he wishes in mind.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_brahmapurANa-1-246.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Brahma Purana — Chapter 33
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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