Brihadaranyaka Upanishad· Bṛhadāraṇyakopaniṣad
30
अध्याय 30 / 45

Adhyāya 30

1 श्लोकWhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ1 श्लोक

अध्याय ३०

श्लोक 1

॥ चतुर्थं ब्राह्मणम् ।[V.iv.1] तद्वै तद् एतदेव तदास सत्यमेव ।स यो हैतं महद्यक्षं प्रथमजं वेद सत्यं ब्रह्मेति जयतीमाँल्लोकाञ् जित इन्न्वसावसद् य एवमेतन्महद्यक्षं प्रथमजं वेद सत्यं ब्रह्मेति सत्यँ ह्येव ब्रह्म

|| chaturthaM brAhmaNam . ##[V.iv.1]## tadvai tad etadeva tadAsa satyameva | sa yo haitaM mahadyakShaM prathamajaM veda satyaM brahmeti jayatImA{\m+}llokA~n jita innvasAvasad ya evametanmahadyakShaM prathamajaM veda satyaM brahmeti satya{\m+} hyeva brahma

हिन्दी अर्थ

११९२ बहदारण्यकोपनिषद्‌ ध्याय ५ तत्‌ तदति हृदयं ब्रह्म परा- तत्‌--तत्‌" टेसा कहकर हृदथ- ब्रह्मका परासहं किया गया है । पूज्य, प्रथमज अर्थात्‌ समस्त संसा- रियो पहले उत्पत्न हुए-यह्‌ ब्रह्य ही सबसे पहले उत्पन्न हुआ था, प्रथमज सत्य-ब्रह्म श्रौर “सत्य' नामक ग्रक्षरोकौ उपासना सत्यस्य ब्रह्मणः स्तुत्यथंमिद- सत्य -्रह्मकी स्तुतिके लिये यह ब्राह्मण उसे महत्‌, यक्ष, प्रथमजः

English

This (heart) indeed is even that, it was indeed the true (Brahman). And whosoever knows this great glorious first-born as the true Brahman, he conquers these worlds, and conquered likewise may that (enemy) be ! yes, whosoever knows this great glorious first-born as the true Brahman; for Brahman is the true.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/brihadaaraNyaka.itx · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Brihadaranyaka Upanishad — Chapter 30
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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