Brihadaranyaka Upanishad· Bṛhadāraṇyakopaniṣad
36
अध्याय 36 / 45

Adhyāya 36

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पूर्ण अध्याय पाठ1 श्लोक

अध्याय ३६

श्लोक 11

॥ एकादशं ब्राह्मणम् ।[V.xi.1] एतद्वै परमं तपो यद्व्याहितस्तप्यते परमँ हैव लोकं जयति य एवं वेदैतद्वै परमं तपो यं प्रेतमरण्यँ हरन्ति प्रेतम् अरण्यम् हरन्ति परमँ हैव लोकं जयति य एवं वेदैतद्वै परमं तपो यं प्रेतमग्नावभ्यादधति प्रेतम् अग्नौ अभ्यादधति परमँ हैव लोकं जयति य एवं वेद

|| ekAdashaM brAhmaNam . ##[V.xi.1]## etadvai paramaM tapo yadvyAhitastapyate parama{\m+} haiva lokaM jayati ya evaM vedaitadvai paramaM tapo yaM pretamaraNya{\m+} haranti pretam araNyam haranti parama{\m+} haiva lokaM jayati ya evaM vedaitadvai paramaM tapo yaM pretamagnAvabhyAdadhati pretam agnau abhyAdadhati parama{\m+} haiva lokaM jayati ya evaM veda

हिन्दी अर्थ

प्रकरणान्तगंत उपासनाग्रोमे प्रप्र होनेवाली गति सर्वेषामस्मिन्‌ प्रकरण उपास्- इस प्रकरणम बतलायी गयी 15 वी समस्त उपासनाओंका यहु गतिरूप जिस समय यह्‌ पुरुष इस लोकसे मरकर जाता है, उस समय वह वागुको प्राप्त होता है । वहां वह्‌ वागु उ्षके लिये च््रगुक्त हौ जाता मागंदे देता ह, जैसा कि रथके पहियेका छिद्र होता ह । उसके द्वारा कात्‌ प्रेति शरीरं परित्यजति स परिमणं चिद्रम्‌ ? इस्युच्यते-- ब्रह्मलोकं जिगमिषोर्मागनिरोधं

English

This is indeed the highest penance, if a man, laid up with sickness, suffers pain . He who knows this, conquers the highest world.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/brihadaaraNyaka.itx · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Brihadaranyaka Upanishad — Chapter 36
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.