Matsya Purana· Matsya Purāṇa
119
अध्याय 119 / 176

Adhyaya 119

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अध्याय ११९

श्लोक 1

मत्स्य-पुराण ११९ तत्र यौ तौ महाशृङ्गौ महावर्णौ महाहिमौ तृतीयं तु तयोर्मध्ये शृङ्गमत्यन्तमुच्छ्रितम्

matsya-purāṇa 119 tatra yau tau mahāśṛṅgau mahāvarṇau mahāhimau tṛtīyaṃ tu tayormadhye śṛṅgamatyantamucchritam

हिन्दी अर्थ

अयं स हैत्यचक्राणां कृतान्तः केशवोऽरिहा। एनमाश्रित्य लोकेषु यज्ञभागभुजोऽमराः महेन्द्रकौ पराजय मान ली, जो सम्पूर्ण लोकोंका विनाश करनेवाली थी। उस समय प्रधान-प्रधान पर्वत विचलित हो उठे, आकाशमण्डलसे उल्काएँ गिरने लगीं, दसों दिशाओंमें बादल गरजने लगे और महासागरोंमें ज्वार

English

Sflta said: — There were two great snowclad peaks, shining with variegated colours, and in their midst was a huge summit, covered with perpetual snows, never warmed (by the sun's rays) and where there is no cloud. Below on the west are trees also. — 1-2.

अध्याय ११९

श्लोक 2

नित्यातप्तशिलाजातं सदाभ्रपरिवर्जितम् तस्याधस्ताद्वृक्षगणे दिशां भागे च पश्चिमे

nityātaptaśilājātaṃ sadābhraparivarjitam tasyādhastādvṛkṣagaṇe diśāṃ bhāge ca paścime

हिन्दी अर्थ

उस समय पञ्चभूतोंके उस विकारको देखकर शेषशय्यापर शयन करते हुए भगवान् गरुडध्वज योगनिद्राका त्याग कर सहसा जाग पड़े। लक्ष्मी अपने दोनों हाथोंसे जिनके चरणकमलोंकी निरन्तर सेवा करती रहती हैं, जिनके शरीरको कान्ति शरत्कालीन आकाश एवं नीले कमल- सी सुन्दर है, जिनका वक्षःस्थल कौस्तुभ मणिसे उद्धासित होता रहता है, जो चमकीले बाजूबंदसे प्रकाशित होते रहते हैं, उन सर्वव्यापी भगवानूने देवताओंकी अस्त- व्यस्तताका विचार कर गरुडका आह्वान किया। बुलाते ही हाथीके समान विशाल शरीरवाले गरुडके उपस्थित होनेपर भगवान् उनपर सवार होकर स्वयं देवताओंके निकट गये, उस समय उनके नाना प्रकारके दिव्यास्त्रोंका प्रचण्ड

English

The king entered the hermitage, his curiosity awakened on seeing a picturesque cave encircled by creepers. — 3.

अध्याय ११९

श्लोक 3

जातीलतापरिक्षिप्तं विवरं चारुदर्शनम् दृष्ट्वैव कौतुकाविष्टस् तं विवेश महीपतिः

jātīlatāparikṣiptaṃ vivaraṃ cārudarśanam dṛṣṭvaiva kautukāviṣṭas taṃ viveśa mahīpatiḥ

हिन्दी अर्थ

प्रकाश फैल रहा था। वहाँ पहुँचकर उन्होंने देखा कि नूतन मेघको-सी कान्तिवाले एवं उत्कट पुरुषार्थी दानवेन्द्रोंद्वारा खदेड़े जाते हुए देवराज इन्द्र उसी प्रकार भाग रहे हैं, जैसे भयंकर अभाग्यसे युक्त विस्तृत परिवारसे घिरा हुआ पुरुष कष्ट पाता है । फिर तो उस सुन्दर अवसरपर भगवानूने तुरंत ही इन्द्रकी रक्षाके लिये निर्मल कर्म किया। उस समय हैत्योंको आकाशमें एक ज्योतिर्मण्डल दिखायी पड़ा, जो उदयाचलपर स्थित उष्ण कान्तिवाले सूर्यके समान

English

About 400 cubits (palva) of that cave was enveloped in darkness, and further off, it was full of light of its own, where there was a dome-like round place, very high and sombre. The sun and the moon did not shine there. — 4-5.

अध्याय ११९

श्लोक 4

तमसा चातिनिबिडं नल्वमात्रं सुसंकटम् नल्वमात्रमतिक्रम्य स्वप्रभाभरणोज्ज्वलम्

tamasā cātinibiḍaṃ nalvamātraṃ susaṃkaṭam nalvamātramatikramya svaprabhābharaṇojjvalam

हिन्दी अर्थ

चमक रहा था। तब दानवगण उस तेजके प्रभावको जाननेके इच्छुक हो उठे। इतनेमें ही उन्हें प्रलयकालीन अग्निक भाँति भयंकर गरुड दीख पड़े । तत्पश्चात् गरुडपर बैठे हुए मेघसमूहको-सी कान्तिवाले अविनाशी भगवान् अच्युतका दर्शन हुआ। उन्हें देखकर असुरेन्द्रोंका मन हर्षसे परिपूर्ण हो गया (और वे कहने लगे) “यही तो देवताओंका सर्वस्व है। इसे जीत लेनेपर देवताओंको पराजित हुआ ही समझना चाहिए । यही वह हैत्यसमूहोंका विनाश करनेवाला शत्रुसूदन केशव है। इसीका आश्रय ग्रहण कर देवगण लोकोंमें यज्ञ-भागके भोक्ता बने हुए हैं'

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 5

तम् उच्छ्रितम् अथात्यन्तं गम्भीरं परिवर्तुलम् न तत्र सूर्यस्तपति न विराजति चन्द्रमाः

tam ucchritam athātyantaṃ gambhīraṃ parivartulam na tatra sūryastapati na virājati candramāḥ

हिन्दी अर्थ

ऐसा कहकर कालनेमि प्रभृति दस महारथी हैत्य तथा वे सभी दानव युद्धस्थलमें आते हुए भगवान् विष्णुको चारों ओरसे घेरकर उनपर विविध प्रकारके अस्त्रोंसे प्रहार करने लगे। कालनेमिप्रभृतयो दश हैत्या महारथाः। षष्ट्या विव्याध बाणानां कालनेमिर्जनार्दनम्

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 6

तथापि दिवसाकारं प्रकाशं तदहर्निशम् क्रोशाधिकपरीमाणं सरसा च विराजितम्

tathāpi divasākāraṃ prakāśaṃ tadaharniśam krośādhikaparīmāṇaṃ sarasā ca virājitam

हिन्दी अर्थ

शेषा हैत्येश्वराः सर्वे विष्णुमेकैकशः शरैः । दशभिश्चैव यत्तास्ते जघ्नुः सगरुडं रणे तेषाममृष्य तत् कर्म विष्णुर्दानवसूदनः । एकेकं दानवं जघ्ने षड्भिः षड्भिरजिहागै: आकर्णकृष्ट्रेर्भूयश्च कालनेमिस्त्रिभिः शरैः। विष्णुं विव्याध हृदये क्रोधाद् रक्तविलोचनः

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 7

समन्तात्सरसस्तस्य शैललग्ना तु वेदिका सौवर्णै राजतैर्वृक्षैर् विद्रुमैरुपशोभितम्

samantātsarasastasya śailalagnā tu vedikā sauvarṇai rājatairvṛkṣair vidrumairupaśobhitam

हिन्दी अर्थ

तस्याशोभन्त ते बाणा हृदये तप्तकाञ्चनाः। मयूखानीव दीप्तानि कौस्तुभस्य स्फुटत्विषः ततो विष्णुः प्रकुपितः प्रासं जग्राह भेरवम्। तेन हैत्यस्य हृदयं ताडयामास गाढतः

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 8

नानामाणिक्यकुसुमैः सुप्रभाभरणोज्ज्वलैः तस्मिन्सरसि पद्मानि पद्मरागच्छदानि तु

nānāmāṇikyakusumaiḥ suprabhābharaṇojjvalaiḥ tasminsarasi padmāni padmarāgacchadāni tu

हिन्दी अर्थ

क्षणेन लब्धसंज्ञस्तु कालनेमिर्महासुरः । शक्तिं जग्राह तीक्ष्णाग्रां हेमघण्टाइहासिनीम् पद्ारागमयेनेव केयूरेण विभूषितः। ततो विष्णुः प्रकुपितो जग्राह विपुलं धनुः हैत्यस्य हृदयं षड्भिर्विव्याध च त्रिभिः शंरैः

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 9

वज्रकेसरजालानि सुगन्धीनि तथा युतम् पत्त्रैर् मरकतैर् नीलैर् वैडूर्यस्य महीपते

vajrakesarajālāni sugandhīni tathā yutam pattrair marakatair nīlair vaiḍūryasya mahīpate

हिन्दी अर्थ

चतुर्भिः सारथिं चास्य ध्वजं चैकेन पत्रिणा। द्वाभ्यां ज्याधनुषी चापि भुजं सव्यं च पत्रिणा स विद्धो हृदये गाढं हैत्यो हरिशिलीमुखैः। सतरुतरक्तारुणप्रांशुः पीडाकुलितमानसः

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 10

कर्णिकाश्च तथा तेषां जातरूपस्य पार्थिव तस्मिन्सरसि या भूमिर् न सा वज्रसमाकुला

karṇikāśca tathā teṣāṃ jātarūpasya pārthiva tasminsarasi yā bhūmir na sā vajrasamākulā

हिन्दी अर्थ

उस समय कालनेमिने भगवान् जनार्दनको साठ बाणोंसे, निमिने सौ बाणोंसे, मथनने असी बाणोंसे, जम्भकने सत्तर और शुम्भने दस बाणोंसे बींध दिया। शेष सभी प्रयत्नशील हैत्येश्वरोंमेंसे एक-एकने रणभूमिमें गरुडसहित भगवान् विष्णुको दस-दस बाणोंसे चोटें पहुँचायीं। तब उनके उस कर्मको सहन न कर दानवोंके विनाशक भगवान् विष्णुने एक-एक दानवको सीधे चोट करनेवाले छ:-छ: बाणोंसे घायल कर दिया। यह देखकर कालनेमिके नेत्र क्रोधसे लाल हो गये। तब उसने पुन: कानतक खींचकर छोड़े गये

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 11

नानारत्नैरुपचिता जलजानां समाश्रयः कपर्दिकानां शुक्तीनां शङ्खानां च महीपते

nānāratnairupacitā jalajānāṃ samāśrayaḥ kapardikānāṃ śuktīnāṃ śaṅkhānāṃ ca mahīpate

हिन्दी अर्थ

तीन बाणोंसे भगवान् विष्णुके हृदयपर चोट की । तपाये हुए सुवर्णकी-सी कान्तिवाले कालनेमिके वे बाण विष्णुके हृदयपर उसी प्रकार शोभित हो रहे थे मानो फैलती हुई कान्तिवाले कौस्तुभ मणिकी उद्दीप्त किरणें हों । उन बाणोंके आघातसे कुछ कष्टका अनुभव कर श्रीहरिने अपना मुदृर उठाया और उसे लगातार वेगपूर्वक घुमाकर उस दानवपर फेंक दिया। वह मुदूर अभी उसके निकटतम पहुँचा भी न था कि क्रोधसे भरे हुए दानवराजने अपने हाथकी फुर्ती

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 12

मकराणां च मत्स्यानां चण्डानां कच्छपैः सह तत्र मरकतखण्डानि वज्राणां च सहस्रशः

makarāṇāṃ ca matsyānāṃ caṇḍānāṃ kacchapaiḥ saha tatra marakatakhaṇḍāni vajrāṇāṃ ca sahasraśaḥ

हिन्दी अर्थ

दिखलाते हुए आकाशमार्गमें ही सैकड़ों बाणोंके प्रहारसे उसे तिल-तिल करके काट डाला। यह देखकर विशेषरूपसे कुपित हुए भगवान् विष्णुने भयंकर भाला हाथमें लिया और

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 13

पद्मरागेन्द्रनीलानि महानीलानि पार्थिव पुष्परागाणि सर्वाणि तथा कर्कोटकानि च

padmarāgendranīlāni mahānīlāni pārthiva puṣparāgāṇi sarvāṇi tathā karkoṭakāni ca

हिन्दी अर्थ

उससे उस हैत्यके हृदयपर गहरी चोट पहुँचायी (जिसके आघातसे वह मूर्च्छित हो गया)

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 14

तुत्थकस्य तु खण्डानि तथा शेषस्य भागशः राजावर्तस्य मुख्यस्य रुचिराक्षस्य चाप्यथ

tutthakasya tu khaṇḍāni tathā śeṣasya bhāgaśaḥ rājāvartasya mukhyasya rucirākṣasya cāpyatha

हिन्दी अर्थ

क्षणभरके पश्चात् जब उसकी चेतना लौटी, तब महासुर कालनेमिने तीखे अग्रभागवाली शक्ति हाथमें ली, जिसमें स्वर्णनिर्मित क्षुद्र घंटिकाएँ बज रही थीं। उस शक्तिसे हैत्य कालनेमिने भगवान् विष्णुकी बायीं भुजाको विदीर्ण कर दिया। शक्तिके आघातसे घायल हुई भगवान् विष्णुकी भुजा रक्त बहाती हुई ऐसी शोभा पा रही थी। मानो पद्मरागमणिके बने हुए बाजूबंदसे विभूषित को गयी हो। तब कुपित हुए भगवान् विष्णुने विशाल धनुष और सतरह तीखे एवं मर्मभेदी बाणोंको हाथमें लिया। उनमेंसे उन्होंने नौ बाणॉंसे उस हैत्यके हृदयको, चार बाणॉसे उसके सारथिको, एक बाणसे ध्वजको, दो बाणोंसे प्रत्यञ्चासहित धनुषको और एक

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 15

सूर्येन्दुकान्तयश्चैव नीलो वर्णान्तिमश्च यः ज्योतीरसस्य रम्यस्य स्यमन्तस्य च भागशः

sūryendukāntayaścaiva nīlo varṇāntimaśca yaḥ jyotīrasasya ramyasya syamantasya ca bhāgaśaḥ

हिन्दी अर्थ

बाणसे उसकी दाहिनी भुजाको बींध दिया। उस समय भगवान् विष्णुके बाणोंसे उस हैत्यका हृदय गम्भीररूपसे घायल हो गया था, उससे रक्तकी मोटी धाराएँ निकल रही थीं, उसका मन पीडासे व्याकुल हो गया था और तमाकम्पितमालक्ष्य गदां जग्राह केशवः

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 16

सुरोरगवलक्षाणां स्फटिकस्य तथैव च गोमेदपित्तकानां च धूलीमरकतस्य च

suroragavalakṣāṇāṃ sphaṭikasya tathaiva ca gomedapittakānāṃ ca dhūlīmarakatasya ca

हिन्दी अर्थ

तां च वेगेन चिक्षेप कालनेमिरथं प्रति। सा पपात शिरस्युग्रा विपुला कालनेमिनः ततः स्वल्पेन कालेन अहमेव तवान्तकः। एतच्छुत्वा वचस्तस्य सारथिः कालनेमिनः ।

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 17

वैडूर्यसौगन्धिकयोस् तथा राजमणेर्नृप वज्रस्यैव च मुख्यस्य तथा ब्रह्ममणेरपि

vaiḍūryasaugandhikayos tathā rājamaṇernṛpa vajrasyaiva ca mukhyasya tathā brahmamaṇerapi

हिन्दी अर्थ

वह झंझावातसे झकझोरे हुए पलाश-वृक्षकी भाँति काँप रहा था। उसे काँपता हुआ देखकर भगवान् केशवने गदा उठायी और उसे वेगपूर्वक कालनेमिके रथपर फेंक दिया। वह भयंकर एवं विशाल गदा कालनेमिके मस्तकपर जा गिरी। उसके आघातसे उस असुरका मस्तक चूर्ण हो गया, मुकुट पिस गया और शरीरके छिद्रोंसे रक्‍तकी धाराएँ बहने लगीं। उस समय वह ऐसा दीख रहा था मानो चूते हुए गेरु आदि धातुओंसे युक्त पर्वत हो।

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 18

मुक्ताफलानि मुक्तानां ताराविग्रहधारिणाम्

muktāphalāni muktānāṃ tārāvigrahadhāriṇām

हिन्दी अर्थ

तत्पश्चात् वह मूच्छित होकर अपने टूटे हुए रथपर गिर पड़ा। उसके प्राणमात्र अवशेष थे। इस प्रकार रथके पिछले भागमें पड़े हुए उस दानवके प्रति चक्रायुधधारी एवं सामर्थ्यशाली शत्रुसूदन अच्युतने मुसकराते हुए यह बात कही--' असुर! जाओ, इस समय तुम छोड़ दिये गये हो, अतः निर्भय होकर जीवन धारण करो। फिर थोड़े ही समयके बाद मैं ही तुम्हारा विनाश करूँगा।' भगवान् विष्णुके उस वचनको सुनकर कालनेमिका सारथि रथको लौटाकर कालनेमिको रणभूमिसे दूर हटा

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 19

सुखोष्णं चैव तत्तोयं स्नानाच्छीतविनाशनम् वैडूर्यस्य शिला मध्ये सरसस्तस्य शोभना

sukhoṣṇaṃ caiva tattoyaṃ snānācchītavināśanam vaiḍūryasya śilā madhye sarasastasya śobhanā

हिन्दी अर्थ

अपवाह्य रथं दूरमनयत् कालनेमिनम्॥ २४३ ले गया इति श्रीमत्स्ये महापुराणे देवासुरसंग्रामे कालनेमिपराजयो नाम पञ्चाशदधिकशततमोऽध्यायः

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 20

प्रमाणेन तथा सा च द्वे च राजन्धनुःशते चतुरस्रा तथा रम्या तपसा निर्मितात्रिणा

pramāṇena tathā sā ca dve ca rājandhanuḥśate caturasrā tathā ramyā tapasā nirmitātriṇā

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार श्रीमत्स्यमहापुराणके देवासुरसंग्राममें कालनेमिपराजय नामक एक सौ पचासवाँ अध्याय सम्पूर्ण हुआ भगवान् विष्णुपर दानवोंका सामूहिक आक्रमण, भगवान् विष्णुका अद्भुत युद्ध- कौशल और उनके द्वारा दानवसेनापति ग्रसनकी मृत्यु प्रभिन्नकरटामुखे

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 21

बिलद्वारसमो देशो यत्र यत्र हिरण्मयः प्रदेशः स तु राजेन्द्र द्वीपे तस्मिन्मनोहरे

biladvārasamo deśo yatra yatra hiraṇmayaḥ pradeśaḥ sa tu rājendra dvīpe tasminmanohare

हिन्दी अर्थ

चित्रपञ्जपताकेषु आरुह्याजी निमिर्हैत्यो हरिं प्रत्युद्ययौ बली

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 22

तथा पुष्करिणी रम्या तस्मिन्राजञ्शिलातले सुशीतामलपानीया जलजैश्च विराजिता

tathā puṣkariṇī ramyā tasminrājañśilātale suśītāmalapānīyā jalajaiśca virājitā

हिन्दी अर्थ

सूतजी कहते हैं-ऋषियो! भगवान् विष्णुको देखकर क्रोधमें भरे हुए सभी दानवेन्द्र अपनी-अपनी सेनाके साथ उनके ऊपर इस प्रकार टूट पड़े जैसे मधु निकालते समय मधु निकालनेवालेको मधुमक्खियाँ चारों ओरसे घेर लेती हैं। उस समय महाबली हैत्यराज निमिने जो काले चँवरोंसे सुशोभित था, जिसके मस्तकपर उज्वल पत्रभंगी की गयी थी, जिसके गण्डस्थलका मुख फूट जानेसे मद चू रहा था, जो पर्वतके समान विशालकाय था और जिसपर रंग-विरंगी पाँच पताकाएँ फहरा रही थीं, ऐसे दुर्धर्ष एवं भयंकर गजराजपर चढ़कर युद्धस्थलमें श्रीहरिपर आक्रमण किया। उसके हाथीकी पदरक्षामें

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 23

आकाशप्रतिमा राजंश् चतुरस्रा मनोहरा तस्यास्तदुदकं स्वादु लघु शीतं सुगन्धिकम्

ākāśapratimā rājaṃś caturasrā manoharā tasyāstadudakaṃ svādu laghu śītaṃ sugandhikam

हिन्दी अर्थ

सप्तविंशतिसाहस्त्राः किरीटकवचोज्चलाः॥ ४ सत्ताईस हजार भयंकर दानव नियुक्त थे, जो उज्वल आजघ्नुः समरे क्रुद्धा विष्णुमक्लिष्टकारिणम्

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 24

न क्षिणोति यथा कण्ठं कुक्षिं नापूरयत्यपि तृप्तिं विधत्ते परमां शरीरे च महत्सुखम्

na kṣiṇoti yathā kaṇṭhaṃ kukṣiṃ nāpūrayatyapi tṛptiṃ vidhatte paramāṃ śarīre ca mahatsukham

हिन्दी अर्थ

परिघेण निमिर्हैत्यो मथनो मुदरेण तु। शुम्भः शूलेन तीक्ष्णेन प्रासेन ग्रसनस्तथा असम्भ्रान्तो रणे विष्णुरथ जग्राह कार्मुकम्। शरांश्राशीविषाकारांस्तैलधौतानजिह्यगान् ततोऽभिसंध्य हैत्यांस्तानाकर्णाकृष्टकार्मुकः। अभ्यद्रवद् रणे क्रुद्धो हैत्यानीके तु पौरुषात्

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 25

मध्ये तु तस्याः प्रासादं निर्मितं तपसात्रिणा रुक्मसेतुप्रवेशान्तं सर्वरत्नमयं शुभम्

madhye tu tasyāḥ prāsādaṃ nirmitaṃ tapasātriṇā rukmasetupraveśāntaṃ sarvaratnamayaṃ śubham

हिन्दी अर्थ

एकेन महिषं क्रुद्धो विव्याधोरसि पत्त्रिणा। जम्भं द्वादशभिस्तीक्ष्णैः सर्वाश्चैकैकशोऽष्टभिः किरीट और कवचसे लैस थे। साथ ही घोड़ेपर चढ़ा हुआ मथन, ऊँटपर बैठा हुआ जम्भक और विशालकाय मेषपर सवार हुआ शुम्भ भी रणभूमिमें पहुँचे। क्रुद्ध हुए अन्यान्य दानवेन्द्र भी विभिन्न प्रकारके अस्त्र हाथमें

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 26

शशाङ्करश्मेः संकाशं प्रासादं राजतं हितम् रम्यवैडूर्यसोपानं विद्रुमामलसारकम्

śaśāṅkaraśmeḥ saṃkāśaṃ prāsādaṃ rājataṃ hitam ramyavaiḍūryasopānaṃ vidrumāmalasārakam

हिन्दी अर्थ

लिये हुए सतर्क होकर समरभूमिमें अक्लिष्टकर्मा विष्णुपर प्रहार कर रहे थे। उस भयंकर युद्धमें हैत्यराज निमिने परिघसे, मथनने मुदूरसे, शुम्भने त्रिशूलसे, ग्रसनने तीखे भालेसे, महिषने चक्रसे, क्रोधसे भरे हुए जम्भने शक्तिसे तथा शेष सभी दानवराज तीखे बाणोंसे नारायणपर चोट कर रहे थे। हैत्योंद्वारा चलाये गये वे अस्त्र श्रीहरिके शरीरमें उसी प्रकार प्रवेश कर रहे थे, जैसे गुरुद्वारा उपदिष्ट वाक्य उत्तम शिष्यके कानमें प्रविष्ट हो जाते हैं

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 27

इन्द्रनीलमहास्तम्भं मरकतासक्तवेदिकम् वज्रांशुजालैः स्फुरितं रम्यं दृष्टिमनोरमम्

indranīlamahāstambhaṃ marakatāsaktavedikam vajrāṃśujālaiḥ sphuritaṃ ramyaṃ dṛṣṭimanoramam

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर भगवान् विष्णुने रणभूमिमें स्थिरचित्त हो अपने धनुष तथा तेलसे धुले हुए एवं सीधे लक्ष्यवेध करनेवाले सर्पाकार बाणोंको हाथमें लिया और उन हैत्योंको लक्ष्य बनाकर धनुषको कानतक खींचकर उसपर उन बाणोंका संधान किया। तत्पश्चात् वे क्रोधमें भरकर रणभूमिमें पुरुषार्थपूर्वक हैत्योंकी सेनापर चढ़ आये। उन्होंने अग्निके समान तेजस्वी बीस बाणोंसे निमिको, दस बाणोंसे मथनको और पाँच बाणोंसे शुम्भको बींध दिया। फिर क्रुद्ध हो एक

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 28

प्रासादे तत्र भगवान् देवदेवो जनार्दनः भोगिभोगावलीसुप्तः सर्वालंकारभूषितः

prāsāde tatra bhagavān devadevo janārdanaḥ bhogibhogāvalīsuptaḥ sarvālaṃkārabhūṣitaḥ

हिन्दी अर्थ

बाणसे महिषकी छातीपर चोट पहुँचायी तथा बारह तीखे बाणोंसे जम्भको घायल कर शेष सभी दानवेश्वरोंमेंसे प्रत्येकको आठ-आठ बाणोंसे छेद डाला। भगवान् विष्णुके उस हस्तलाघवको देखकर दानवगण क्रोधसे तिलमिला उठे और सिंहनाद करते हुए प्रयत्नपूर्वक अत्यन्त अदभुत युद्ध करने लगे। उस समय दानवराज निमिने भल्ल नामक बाण मारकर भगवान् विष्णुके धनुषको काट दिया। फिर महिषासुरने संधान किये जाते हुए बाणको उनके हाथमें ही काट गिराया। जम्भने तीखे बाणोंके प्रहारसे गरुडको पीड़ित कर दिया। पर्वताकार शुम्भने उनकी भुजापर गम्भीर आघात किया। धनुषके कट जानेपर भगवान् गोविन्दने भीषण गदा हाथमें ली और उस भयंकर युद्धके समय उसे

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 29

जानुनाकुञ्चितस्त्वेको देवदेवस्य चक्रिणः फणीन्द्रसंनिविष्टो ऽङ्घ्रिर् द्वितीयश्च तथानघ

jānunākuñcitastveko devadevasya cakriṇaḥ phaṇīndrasaṃniviṣṭo 'ṅghrir dvitīyaśca tathānagha

हिन्दी अर्थ

वेगपूर्वक घुमाकर मथनके ऊपर छोड़ दिया। वह उसके निकटतक पहुँच भी न पायी थी कि निमिने रणभूमिमें अपने बाणोंके प्रहारसे उसके तिलके समान टुकड़े-टुकड़े तां नाशमागतां दृष्ट्रा हीनाग्रे प्रार्थनामिव॥ १८ कर दिये। दयाहीन पुरुषके समक्ष विफल हुई प्रार्थनाको

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 30

लक्षयुत्सङ्गगतो ऽङ्घ्रिस्तु शेषभोगप्रशायिनः फणीन्द्रभोगसंन्यस्तबाहुः केयूरभूषणः

lakṣayutsaṅgagato 'ṅghristu śeṣabhogapraśāyinaḥ phaṇīndrabhogasaṃnyastabāhuḥ keyūrabhūṣaṇaḥ

हिन्दी अर्थ

तमायान्तं व्रियत्येव त्रयो हैत्या न्यवारयन्। गदया जम्भहैत्यस्तु ग्रसनः पट्टिशेन तु शक्त्या च महिषो हैत्यः स्वपक्षजयकाङ्क्षया। निराकृतं तमालोक्य दुर्जने प्रणवं यथा गृहीतां तां समालोक्य शिक्षामिव विवेकिभिः

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 31

अङ्गुलीपृष्ठविन्यस्तदेवशीर्षधरं भुजम् एकं वै देवदेवस्य द्वितीयं तु प्रसारितम्

aṅgulīpṛṣṭhavinyastadevaśīrṣadharaṃ bhujam ekaṃ vai devadevasya dvitīyaṃ tu prasāritam

हिन्दी अर्थ

दृढं भारसहं सारमन्यदादाय कार्मुकम्। रौद्रास्त्रमभिसंधाय तस्मिन् बाणं मुमोच ह ततोऽस्त्रतेजसा सर्व व्याप्तं लोकं चराचरम्। ततो बाणमयं सर्वमाकाशं समदृश्यत

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 32

समाकुञ्चितजानुस्थमणिबन्धेन शोभितम् किंचिदाकुञ्चितं चैव नाभिदेशकरस्थितम्

samākuñcitajānusthamaṇibandhena śobhitam kiṃcidākuñcitaṃ caiva nābhideśakarasthitam

हिन्दी अर्थ

दृष्टा तवस्त्रमाहात्म्यं सेनानीर्ग्रसनोऽसुरः ब्राह्ममस्त्रं चकारासौ सर्वास्त्रविनिवारणम्। तेन तत् प्रशमं यातं रौद्रास्त्रं लोकघस्मरम् अस्त्रे प्रतिहते तस्मिन् विष्णुर्दानवसूदनः। कालदण्डास्त्रमकरोत् सर्वलोकभयंकरम्

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 33

तृतीयं तु भुजं तस्य चतुर्थं तु तथा शृणु आत्तसंतानकुसुमं घ्राणदेशानुसर्पिणम्

tṛtīyaṃ tu bhujaṃ tasya caturthaṃ tu tathā śṛṇu āttasaṃtānakusumaṃ ghrāṇadeśānusarpiṇam

हिन्दी अर्थ

चकम्पे च मही देवी हैत्या भिन्नधियोऽभवन् ऐषीकमस्त्रं च चकारजम्भ- स्तत्कालदण्डास्त्रनिवारणाय

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 34

लक्ष्म्या संवाह्यमानाङ्घ्रिः पद्मपत्त्रनिभैः करैः संतानमालामुकुटं हारकेयूरभूषितम्

lakṣmyā saṃvāhyamānāṅghriḥ padmapattranibhaiḥ karaiḥ saṃtānamālāmukuṭaṃ hārakeyūrabhūṣitam

हिन्दी अर्थ

हैत्येश्वराश्चास्त्रनिवारणाय तावत्क्षणेनेव जघान कोटी- हैत्येश्वराणां सगजान् सहाश्चान् तरह उस गदाको नष्ट हुई देखकर भगवानूने दिव्य रत्नोंसे सुसज्जित भयंकर मुद्र उठाया और दानवराज निमिको लक्ष्य करके उसे वेगपूर्वक फेंक दिया

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 35

भूषितं च तथा देवम् अङ्गदैरङ्गुलीयकैः फणीन्द्रफणविन्यस्तचारुरत्नशिरोज्ज्वलम्

bhūṣitaṃ ca tathā devam aṅgadairaṅgulīyakaiḥ phaṇīndraphaṇavinyastacāruratnaśirojjvalam

हिन्दी अर्थ

उस मुदूरको आते हुए देखकर तीन हैत्योंने-जम्भ हैत्यने गदासे, ग्रसनने पट्टिससे और महिष हैत्यने शक्तिसे प्रहार करके आकाशमार्गमें ही उसका निवारण कर दिया; क्योंकि उनके मन अपने पक्षकी विजयकी अभिलाषासे पूर्ण थे। तब दुर्जनके प्रति किये गये प्रेमालापकी भाँति उस मुदूरको विफल हुआ देखकर रणभूमिमें भयानक कर्म करनेवाले भगवानूने आठ घंटियोंके उत्कट शब्दसे युक्त एवं कठोर अग्रभागवाली शक्ति हाथमें ली और उसे

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 36

अज्ञातवस्तुचरितं प्रतिष्ठितम् अथात्रिणा सिद्धानुपूज्यं सततं संतानकुसुमार्चितम्

ajñātavastucaritaṃ pratiṣṭhitam athātriṇā siddhānupūjyaṃ satataṃ saṃtānakusumārcitam

हिन्दी अर्थ

जम्भको लक्ष्य करके छोड़ दिया। दानवनन्दन गजने उस शक्तिको आकाशमार्गमें ही पकड़ लिया। विवेकियोंद्वारा धारण की गयी शिक्षाकी भाँति उस शक्तिको पकड़ी गयी देखकर भगवानूने एक दूसरा धनुष उठाया, जो सुदृढ़, सारयुक्त और भार सहन करनेमें सक्षम था। उसपर रौद्रास्त्रका अभिसंधान करके उन्होंने उस बाणको छोड़ दिया। उस अस्त्रके तेजसे सारा चराचर जगत् व्याप्त हो गया और सारा आकाशमण्डल बाणमय दिखायी पड़ने लगा। सारी पृथ्वी, दिशाएँ और विदिशाएँ बाणसमूहसे आच्छादित हो गयीं। उस अस्त्रके प्रभावको देखकर सेनापति असुरराज ग्रसनने ब्रह्मास्त्रको प्रकट किया, जो सम्पूर्ण अस्त्रोंको निवारण करनेमें समर्थ था। उसके प्रभावसे

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 37

दिव्यगन्धानुलिप्ताङ्गं दिव्यधूपेन धूपितम् सुरसैः सुफलैर्हृद्यैः सिद्धैरुपहृतैः सदा

divyagandhānuliptāṅgaṃ divyadhūpena dhūpitam surasaiḥ suphalairhṛdyaiḥ siddhairupahṛtaiḥ sadā

हिन्दी अर्थ

वह लोकभक्षक रोद्रास्त्र शान्त हो गया। उस अस्त्रके विफल हो जानेपर दानवोंके संहारक विष्णुने कालदण्डास्त्रको प्रकट किया, जो सम्पूर्ण लोकोंको भयभीत करनेवाला था। उस अस्त्रके संधान करते ही प्रचण्ड वायु बहने लगी, पृथ्वीदेवी काँप उठीं और हैत्योंकी बुद्धि विकृत हो गयी। युद्धस्थलमें उस भयंकर अस्त्रको देखकर युद्धदुर्मद दानव नाना प्रकारके दिव्यास्त्रोंका प्रयोग करने लगे ॥२०--३०॥

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 38

शोभितोत्तमपार्श्वं तं देवमुत्पलशीर्षकम् ततः सम्मुखम् उद्वीक्ष्य ववन्दे स नराधिपः

śobhitottamapārśvaṃ taṃ devamutpalaśīrṣakam tataḥ sammukham udvīkṣya vavande sa narādhipaḥ

हिन्दी अर्थ

उस कालदण्डास्त्रका निवारण करनेके लिये ग्रसनने नारायणास्त्रको और निमिने अपने श्रेष्ठ अस्त्र चक्रको लेकर उसपर फेंका तथा जम्भने ऐषीकास्त्रका प्रयोग किया। उस अस्त्रके निवारणार्थ जबतक हैत्येश्वरगण अपने बाणोंका संधान भी नहीं कर पाये थे, उतनी ही देरमें कालदण्डास्तरने हैत्येश्वरोंकि घोड़े-हाथीसहित करोड़ों सैनिकोंका सफाया कर दिया। हैत्यास्त्रयोगेन तु कालदण्डम्। शान्तं तदालोक्य हरिः स्वशस्त्रं स्वविक्रमे मन्युपरीतमूर्तिः

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 39

जानुभ्यां शिरसा चैव गत्वा भूमिं यथाविधि नाम्नां सहस्रेण तदा तुष्टाव मधुसूदनम्

jānubhyāṃ śirasā caiva gatvā bhūmiṃ yathāvidhi nāmnāṃ sahasreṇa tadā tuṣṭāva madhusūdanam

हिन्दी अर्थ

चिक्षेप सेनापतयेऽभिसंध्य कण्ठस्थलं वञ्रकठोरमुग्रम् चक्रं तदाकाशगतं विलोक्य

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TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 40

प्रदक्षिणमथो चक्रे स तूत्थाय पुनः पुनः रम्यमायतनं दृष्ट्वा तत्रोवासाश्रमे पुनः

pradakṣiṇamatho cakre sa tūtthāya punaḥ punaḥ ramyamāyatanaṃ dṛṣṭvā tatrovāsāśrame punaḥ

हिन्दी अर्थ

सर्वात्मना हैत्यवराः स्ववीर्यैः। हैवं यथा कर्म मुधा प्रपन्नम् तदनन्तर हैत्योंद्वारा प्रयुक्त किये गये अस्त्रोंके संयोगसे वह कालदण्डास्त्र शान्त हो गया। अपने उस अस्त्रको शान्त हुआ देखकर श्रीहरि अपने पराक्रममें ठेस लगी समझकर क्रोधसे उबल पड़े। फिर तो उन्होंने उस

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TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 41

बिलाद्बहिर्गुहां कांचिद् आश्रित्य सुमनोहराम् तपश्चकार तत्रैव पूजयन्मधुसूदनम्

bilādbahirguhāṃ kāṃcid āśritya sumanoharām tapaścakāra tatraiva pūjayanmadhusūdanam

हिन्दी अर्थ

चक्रको हाथमें लिया, जो दस हजार सूर्योके समान तेजोमय, कठोर अरोंसे युक्त और प्रभावमें अपनी द्वितीय मूर्तिके समान था। उन्होंने उस वज्रको भाँति कठोर एवं भयंकर चक्रको सेनापति ग्रसनके कण्ठस्थलको लक्ष्य करके छोड़ दिया। उस चक्रको आकाशमें पहुँचा हुआ देखकर हैत्येश्वरगण अपने पराक्रमसे पूरा बल लगानेपर भी उसी प्रकार निवारण करनेमें समर्थ न हो सके, जैसे अनिष्ट कर्मसे निष्पन्न हुए प्रचण्ड दुर्भाग्यको हटाया नहीं

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 42

नानाविधैस्तथा पुष्पैः फलमूलैः सगोरसैः नित्यं त्रिषवणस्नायी वह्निपूजापरायणः

nānāvidhaistathā puṣpaiḥ phalamūlaiḥ sagorasaiḥ nityaṃ triṣavaṇasnāyī vahnipūjāparāyaṇaḥ

हिन्दी अर्थ

जा सकता। परिणामस्वरूप वह अतर्क्य महिमाशाली एवं अजेय चक्र ग्रसनके कण्ठपर जा गिरा और उसके गलेको दो भागोंमें विभक्त कर दिया। उससे बहते हुए रक्तकी धारासे उस चक्रकी कठोर नाभि लाल हो गयी थी। तत्पश्चात् धधकती हुई अग्निके समान वह उद्दीप्त चक्र पुनः प्रवृद्धानलतुल्यदीसि ॥ ३६ भगवान् जनार्दनके हाथमें लौट गया॥ ३१--३६॥

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 43

देववापीजलैः कुर्वन् सततं प्राणधारणम् सर्वाहारपरित्यागं कृत्वा तु मनुजेश्वरः

devavāpījalaiḥ kurvan satataṃ prāṇadhāraṇam sarvāhāraparityāgaṃ kṛtvā tu manujeśvaraḥ

हिन्दी अर्थ

इति श्रीमत्स्ये महापुराणे देवासुरसंग्रामे ग्रसनवधो नामैकपञ्चाशदधिकशततमोऽध्यायः इस प्रकार श्रीमत्स्यमहापुराणके देवासुरसंग्राममें ग्रसन-वध नामक एक सौ इक्यावनवाँ अध्याय सम्पूर्ण हुआ

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 44

अनास्तृतगुहाशायी कालं नयति पार्थिवः त्यक्ताहारक्रियश्चैव केवलं तोयतो नृपः न तस्य ग्लानिमायाति शरीरं च तदद्भुतम्

anāstṛtaguhāśāyī kālaṃ nayati pārthivaḥ tyaktāhārakriyaścaiva kevalaṃ toyato nṛpaḥ na tasya glānimāyāti śarīraṃ ca tadadbhutam

हिन्दी अर्थ

भगवान् विष्णुका मथन आदि हैत्योंके साथ भीषण संग्राम और अन्तमें घायल होकर युद्धसे पलायन तस्मिन् विनिहते हैत्ये ग्रसने बलनायके। निर्मर्यादमयुध्यन्त हरिणा सह दानवाः सूतजी कहते हैं-ऋषियो ! उस सेनानायक हैत्यराज ग्रसनके मारे जानेपर दानवगण श्रीहरिके साथ युद्ध- मर्यादाका परित्याग कर (भयंकर) युद्ध करने लगे।

English

TEE MATSYA PUEANAM.

अध्याय ११९

श्लोक 45

एवं स राजा तपसि प्रसक्तः सम्पूजयन्देववरं सदैव तत्राश्रमे कालमुवास कंचित् स्वर्गोपमे दुःखम् अविन्दमानः

evaṃ sa rājā tapasi prasaktaḥ sampūjayandevavaraṃ sadaiva tatrāśrame kālamuvāsa kaṃcit svargopame duḥkham avindamānaḥ

हिन्दी अर्थ

मुखवाले बाण, चक्र और शक्तियोंसे प्रहार कर रहे थे। तब विचित्र ढंगसे युद्ध करनेवाले भगवान् जनार्दनने अपने अग्निकी लपटोंके समान उद्दीप्त बाणोंसे हैत्योंद्वारा छोड़े गये उन उस्त्रोंमे प्रत्येकके सौ-सौ टुकड़े कर दिये। तब दानवोंके अस्त्र प्रायः नष्ट हो गये और उनका चित्त व्याकुल हो गया। इस प्रकार जब

English

TEE MATSYA PUEANAM.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_matsyapurANa1-176.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Matsya Purana — Chapter 119
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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