अध्याय १२९
श्लोक 1
मत्स्य-पुराण १२९ कथं जगाम भगवान् पुरारित्वं महेश्वरः ददाह च कथं देवस् तन्नो विस्तरतो वद
matsya-purāṇa 129 kathaṃ jagāma bhagavān purāritvaṃ maheśvaraḥ dadāha ca kathaṃ devas tanno vistarato vada
हिन्दी अर्थ
सूतजी कहते हैं--ऋषियो ! देववन्दियांद्वारा उद्घोषित वह सारा प्रसङ्ग सुनकर तारकको ब्रह्माद्वारा कही हुई बालकके हाथसे वध होनेवाली बातका स्मरण हो आया। तब वह कालधर्मका स्मरण कर कवचरहित अवस्थामें अकेले पैदल ही तुरंत अपने भवनसे बाहर निकल पड़ा। उस समय उसका चित्त शोकसे ग्रस्त था। उसने पुकारकर कहा--' अरे कालनेमि आदि प्रमुख हैत्य योद्धाओ! यद्यपि आतुरतावश तुमलोगोंका चित्त उद्भ्रान्त हो उठा है, तथापि तुमलोग दौड़ो, इसे पकड़ लो और इस सेनाके साथ युद्ध करो।' तत्पश्चात् भयंकर आकृतिवाला तारक कुमारको देखकर बोला-- अरे बच्चे! क्या तुम युद्ध करना चाहते हो? यदि ऐसी बात
English
The Risis said:—T 9 ll us, 0, Sdta! bow in ancient days did Lord diva attain the name of Tripur&ri and how did He reduce the fort Tripura to ashes. Pray, be pleased to tell us all about it in detail. How the fortified town of Tripura was built by the mysterious power of Maya, and