Matsya Purana· Matsya Purāṇa
136
अध्याय 136 / 176

Adhyaya 136

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अध्याय १३६

श्लोक 1

मत्स्य-पुराण १३६ मयः प्रहारं कृत्वा तु मायावी दानवर्षभः विवेश तूर्णं त्रिपुरम् अभ्रं नीलमिवाम्बरम्

matsya-purāṇa 136 mayaḥ prahāraṃ kṛtvā tu māyāvī dānavarṣabhaḥ viveśa tūrṇaṃ tripuram abhraṃ nīlamivāmbaram

हिन्दी अर्थ

और कर्म-इन चारों प्रकारोंसे प्रसन्न करता है तो श्रीकृष्ण भी उसे उसी प्रकार आनन्दित करते हैं। राजा च लभते राज्यमधनश्चोत्तमं धनम्। क्षीणायुर्लभते चायुः पुत्रकामः सुतं तथा यज्ञा वेदास्तथा कामास्तपांसि विविधानि च। प्राप्नोति विविधं पुण्यं विष्णुभक्तो धनानि च

English

The soldiers of both the armies falling on the ground under the blows of weapons, groaned with their last moans, which sounded like the cries of beings condemned to hell. The heads bedecked with coronets and the ears with ear-rings, falling on the ground looked like the mountain peaks rolling down on earth. The demons struck with the battle axes, swords, spears and hit with clubs, etc., fell on the ground

अध्याय १३६

श्लोक 2

स दीर्घमुष्णं निःश्वस्य दानवान्वीक्ष्य मध्यगान् दध्यौ लोकक्षये प्राप्ते कालं काल इवापरः

sa dīrghamuṣṇaṃ niḥśvasya dānavānvīkṣya madhyagān dadhyau lokakṣaye prāpte kālaṃ kāla ivāparaḥ

हिन्दी अर्थ

यद्यत्कामयते किञ्चित् तत्तल्लोकेश्वराद् भवेत् । सर्व विहाय य इमं पठेत् पौष्करकं हरेः एष पौष्करको नाम प्रादुर्भावो महात्मन: । कीर्तितस्ते महाभाग व्यासश्चुतिनिदर्शनात्

English

like elephants. The soldiers of Siva rejoiced and roared. The Siddhas also joined in the Gandharva fight. — 37-40.

अध्याय १३६

श्लोक 3

इन्द्रो ऽपि बिभ्यते यस्य स्थितो युद्धेप्सुरग्रतः स चापि निधनं प्राप्तो विद्युन्माली महायशाः

indro 'pi bibhyate yasya sthito yuddhepsuragrataḥ sa cāpi nidhanaṃ prāpto vidyunmālī mahāyaśāḥ

हिन्दी अर्थ

राजाको राज्यकी, निर्धनको उत्तम धनकी, क्षीणायुको दीर्घायुकी तथा पुत्रार्थीको पुत्रकी प्राप्ति होती है । विष्णुभक्त मनुष्य यज्ञ, वेद, कामनापूर्ति, अनेकविध तप, विविध पुण्य और धनको प्राप्त करता है। नृपश्रेष्ठ! जो मनुष्य सबका परित्याग करके श्रीहरिके इस पौष्कर-प्रादुर्भावका पाठ करता है, वह जो-जो कामनाएँ करता है, वह सब कुछ उस लोकेश्वरभगवानूसे प्राप्त हो जाता है और उसका कभी अमङ्गल नहीं होता। महाभाग! इस प्रकार मैंने तुमसे महात्मा विष्णुके पुष्कर या कमलके प्रादुर्भावका वर्णन कर चुका। यह व्यासके वचनों तथा श्रुतियोंका निदर्शन है

English

'' 0 Prarnathas! you are most valiant. 0 Demons! you are most haughty." Thus the Charanas uttered on the battlefield. — 41.

अध्याय १३६

श्लोक 4

दुर्गं वै त्रिपुरस्यास्य न समं विद्यते पुरम् तस्याप्येषो ऽनयः प्राप्तो न दुर्गं कारणं क्वचित्

durgaṃ vai tripurasyāsya na samaṃ vidyate puram tasyāpyeṣo 'nayaḥ prāpto na durgaṃ kāraṇaṃ kvacit

हिन्दी अर्थ

इति श्रीमत्स्ये महापुराणे पद्योदभवप्रादुर्भावो नामैकसप्तत्यधिकशततमोऽध्यायः इस प्रकार श्रीमत्स्यमहापुराणके पद्योद्धवप्रादुर्भाव-प्रसङ्गमें एक सौ एकहत्तरवाँ अध्याय सम्पूर्ण हुआ

English

The soldiers of iSiva crushed by the clubs of the demons vomited blood and looked like mountains ejecting gold. Whereas, other followers

अध्याय १३६

श्लोक 5

कालस्यैव वशे सर्वं दुर्गं दुर्गतरं च यत् काले क्रुद्धे कथं कालात् त्राणं नो ऽद्य भविष्यति

kālasyaiva vaśe sarvaṃ durgaṃ durgataraṃ ca yat kāle kruddhe kathaṃ kālāt trāṇaṃ no 'dya bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

अत्याचारसे दुःखी होकर देवताओंकी भगवान् विष्णुसे प्रार्थना और भगवानका उन्हें आश्वासन विष्णुत्वं श्रृणु विष्णोश्च हरित्वं च कृते युगे। वैकुण्ठत्वं च देवेषु कृष्णत्वं मानुषेषु च ईश्वरस्य हि तस्यैषा कर्मणां गहना गतिः। सम्प्रत्यतीतान् भव्यांश्च शृणु राजन् यथातथम्

English

of iva killed and wounded the demons with their arrows, trees, and rocks. — 42-43.

अध्याय १३६

श्लोक 6

एकेषु त्रिषु यत्किंचिद् बलं वै सर्वजन्तुषु कालस्य तद्वशं सर्वम् इति पैतामहो विधिः

ekeṣu triṣu yatkiṃcid balaṃ vai sarvajantuṣu kālasya tadvaśaṃ sarvam iti paitāmaho vidhiḥ

हिन्दी अर्थ

अव्यक्तो व्यक्तलिङ्गस्थो य एष भगवान् प्रभुः । नारायणो ह्यनन्तात्मा प्रभवोऽव्यय एव च ब्रह्मा वायुश्च सोमश्च धर्मः शक्रो बृहस्पतिः

English

The cleiuoin deputed by Maya took away those Daityas that were killed and tlirew tlieni in the life-giving well constructed by their lord. The dead demons riistored to life rose like the devas from the heavens with bright l)odics adorned witli leautiful ornaments on their handsome and radiant forms. Tims, in numerable deaf I demons were recalled to life and instantly repaired thumlering to the great battlefield. — 44-46.

अध्याय १३६

श्लोक 7

अस्मिन्कः प्रभवेद्योगो ह्य् असंधार्ये ऽमितात्मनि लङ्घने कः समर्थः स्याद् ऋते देवं महेश्वरम्

asminkaḥ prabhavedyogo hy asaṃdhārye 'mitātmani laṅghane kaḥ samarthaḥ syād ṛte devaṃ maheśvaram

हिन्दी अर्थ

एष विष्णुरिति ख्यात इन्द्रस्यावरजो विभुः प्रसादजं ह्यस्य विभोरदित्याः पुत्रकारणम्। वधार्थं सुरशत्रूणां हैत्यदानवरक्षसाम् प्रधानात्मा पुरा होष ब्रह्माणमसृजत् प्रभुः।

English

Those demons shouted out, " O comrades! fight the enemy fearlessly. Do not tarry, the well will recall you all to life if you lie dead."

अध्याय १३६

श्लोक 8

बिभेमि नेन्द्राद्धि यमाद् वरुणान्न च वित्तपात् स्वामी चैषां तु देवानां दुर्जयः स महेश्वरः

bibhemi nendrāddhi yamād varuṇānna ca vittapāt svāmī caiṣāṃ tu devānāṃ durjayaḥ sa maheśvaraḥ

हिन्दी अर्थ

मत्स्यभगवानूने कहा-राजन्! अब मैं कृतयुगमें घटित हुए भगवान् विष्णुके विष्णुत्व एवं हरित्व, देवताओंमें वैकुण्ठत्व और मनुष्योंमें कृष्णत्वका वर्णन कर रहा हूँ, सुनो। उस ईश्वरके कर्मोकी यह गति बड़ी गहन है। इस समय तुम विष्णुके भूत एवं भावी अवतारोंके विषयमें यथार्थरूपसे श्रवण करो। जो ये ऐश्वर्यशाली अव्यक्तस्वरूप भगवान् हैं, वे ही व्यक्तरूपमें भी प्रकट होते हैं। वे ही नारायण अनन्तात्मा, सबके उत्पत्तिस्थान और अविनाशी

English

Ia/ikukarafia, liva's attendant of formidable shape, hearing those ener- getic words of the demons hurried to the Lord and said '

अध्याय १३६

श्लोक 9

ऐश्वर्यस्य फलं यत्तत् प्रभुत्वस्य च यत्फलम् तदद्य दर्शयिष्यामि यावद्वीराः समन्ततः

aiśvaryasya phalaṃ yattat prabhutvasya ca yatphalam tadadya darśayiṣyāmi yāvadvīrāḥ samantataḥ

हिन्दी अर्थ

भी कहे जाते हें । ये सनातन नारायण श्रीहरि ब्रह्मा, वायु, सोम, धर्म, इन्द्र और बुहस्पतिके रूपमें भी प्रकट होते हैं। रविनन्दन! ये सर्वव्यापी विष्णु अदितिके पुत्ररूपमें उत्पन्न होकर इन्द्रके अनुज 'उपेन्द्र' के नामसे विख्यात होते हैं। इन सर्वव्यापीका अदितिके पुत्ररूपमें उत्पन्न होनेके दो कारण हैं-एक तो अदितिपर कृपा करना और दूसरा देवशत्रु हैत्यों, दानवों और राक्षसोंका वध करना। इन प्रधानात्मा प्रभुने सर्वप्रथम ब्रह्माको उत्पन्न सोऽसृजत् पूर्वपुरुषः पुराकल्पे प्रजापतीन्॥ ७ किया। उन पूर्वपुरुषने पूर्व कल्पमें प्रजापतियोंकी सृष्टि की।

English

" 0 Lord! The demons are being killed again and again by the Prarnathas but they are revived again like the parclied crops after being watered. There is, undoubtedly, a well of ambrosia in this fort where the dead demons aie being tlirown and regain their lives." — 47-50.

अध्याय १३६

श्लोक 10

वापीममृततोयेन पूर्णां स्रक्ष्ये वरौषधीः जीविष्यन्ति तदा दैत्याः संजीवनवरौषधैः

vāpīmamṛtatoyena pūrṇāṃ srakṣye varauṣadhīḥ jīviṣyanti tadā daityāḥ saṃjīvanavarauṣadhaiḥ

हिन्दी अर्थ

७०८ मत्स्यपुराण असृजन्मानवांस्तत्र ब्रह्मवंशाननुत्तमान्। तत्पश्चात् ब्रह्माके वंशमें उत्पन्न होनेवाले सर्वश्रेष्ठ मानवोंको

English

After afikukarana had narrated this to the Lord, there was a great commotion in the army of the demons. The demon Tarakasura with

अध्याय १३६

श्लोक 11

इति संचिन्त्य बलवान् मयो मायाविनां वरः मायया ससृजे वापीं रम्भामिव पितामहः

iti saṃcintya balavān mayo māyāvināṃ varaḥ māyayā sasṛje vāpīṃ rambhāmiva pitāmahaḥ

हिन्दी अर्थ

तेभ्योऽभवन्महात्मभ्यो बहुधा ब्रह्म शाश्वतम्॥ ८ उत्पन्न किया। उन महात्माओंके सम्पर्कसे एक ही शाश्वत ब्रह्म अनेक रूपोंमें विभक्त हो गया लोकोंमें वर्णन करनेयोग्य एतदाश्चर्यभूतस्य विष्णोः कर्मानुकीर्तनम्। भगवान् विष्णुके कर्मोंका यह अनुकीर्तन परम आश्चर्यजनक कीर्तनीयस्य लोकेषु कीर्त्यमानं निबोध मे॥ ९ है। मैं उसका वर्णन कर रहा हूँ, सुनो॥ १--९॥ . वृत्ते वृत्रवधे तत्र वर्तमाने कृते युगे। राजन्! कुतयुगकी स्थितिके समय वृत्रासुरका वध कः हो जानेके पश्चात् त्रिलोकीमें विख्यात तारकामय संग्राम आसीत् त्रैलोक्यविख्यातः संग्रामस्तारकामयः॥ १० हुआ था। जिसमें संग्राममें कठिनतासे जीते जानेवाले सभी

English

terrific eyes, ran towards the chariot of iiva with liis mouth wide open like an irritated lion with liis gaping mouth. — 51-52.

अध्याय १३६

श्लोक 12

द्वियोजनायतां दीर्घां पूर्णयोजनविस्तृताम् आरोहसंक्रमवतीं चित्ररूपां कथामिव

dviyojanāyatāṃ dīrghāṃ pūrṇayojanavistṛtām ārohasaṃkramavatīṃ citrarūpāṃ kathāmiva

हिन्दी अर्थ

यत्र ते दानवा घोराः सर्वे संग्रामदुर्जयाः। भयंकर दानव यक्ष, नाग और राक्षसोंसहित सभी देवगणोंका घ्नन्ति देवगणान् सर्वान् सयक्षोरगराक्षसान्॥ १९ संहार कर रहे थे। इस प्रकार मारे जाते हुए वे देवगण हे शस्त्ररहित हो युद्धसे विमुख हो गये और मनसे अपने ते काता विमुखाः जग्मुर्देवं क्षीणप्रहरणा रणे! रक्षक सामर्थ्यशाली भगवान् नारायणकी शरणमें गये । इसी त्रातारं मनसा जग्मुर्देवं नारायणं प्रभुम्॥ १२ नीच बुझते हुए अंगारकी-सी कान्तिवाले मेघोंने सूर्य, एतस्मिन्नन्तरे मेघा निर्वाणाङ्गारवर्चसः। चन्द्रमा और ग्रहगणोंसमेत आकाशमण्डलको आच्छादित सार्कचन्द्रग्रहगणं छादयन्तो नभस्तलम्॥ १३ कर लिया। वे प्रचण्ड बिजलियोंसे युक्त थे तथा भयंकर

English

The great drum was soumled and the conch shell was blown ill Tripura; the demons emerged from Tripura and beheld the Devas in the chariot of Lord fciva. — 53.

अध्याय १३६

श्लोक 13

इन्दोः किरणकल्पेन मृष्टेनामृतगन्धिना पूर्णां परमतोयेन गुणपूर्णामिवाङ्गनाम्

indoḥ kiraṇakalpena mṛṣṭenāmṛtagandhinā pūrṇāṃ paramatoyena guṇapūrṇāmivāṅganām

हिन्दी अर्थ

चण्डविद्युदणोपेता घोरनिहणांदकारिण गर्जना कर रहे थे। पुनः एक-दूसरेके वेगसे आहत हो 'अण्डानहुद्णा पता रनिर्हादकारिण: । सातों प्रकारकी वायु बहने लगी । उस समय कौंधती हुई अन्योऽन्यवेगाभिहताः प्रववुः सप्त मारुता:॥ १४ बिजली और जलसे युक्त बादलों, वज्रके समान वेगशाली दीप्ततोयाशनिघनैर्वज्रवेगानलानिलैः अग्नि और वायुके झकोरों तथा अत्यन्त भयंकर शब्दोंसे रवैः सुघोरेरुत्पातैर्दह्ममानमिवाम्बरम् युक्त उत्पातोंद्रारा आकाश जलता हुआ-सा दीख रहा था। सषु देहामानमिवाम्बरम्॥ १५ आकाशमें उड़ती हुई हजारों उल्काएँ भूतलपर गिरने लगीं। तत उल्कासहस्त्राणि निपेतुः खगतान्यपि। दिव्य विमान लड़खड़ाते हुए गिरने लगे । चारों युगोंकी

English

At that time the earth quaked ui\(ier the pressure of the armies, and

अध्याय १३६

श्लोक 14

उत्पलैः कुमुदैः पद्मैर् वृतां कादम्बकैस्तथा चन्द्रभास्करवर्णाभैर् भीमैर् आवरणैर्वृताम्

utpalaiḥ kumudaiḥ padmair vṛtāṃ kādambakaistathā candrabhāskaravarṇābhair bhīmair āvaraṇairvṛtām

हिन्दी अर्थ

दिव्यानि च विमानानि प्रपतन्त्युत्पतन्ति च॥ १६ समाप्तिके समय लोकोंके लिये जैसा भयकारी विनाश चतुर्युगान्ते पर्याये लोकानां यद्भयं भवेत्। उपस्थित होता है, वैसा ही उत्पात उस समय भी घटित हुआ। सभी रूपवती वस्तुएँ विकृत हो गयीं। सारा जगत् हपता रूपाणि तस्मिन्नुत्पातलक्षणे॥ १७ प्रकाशहीन हो गया, जिससे कुछ भी जाना नहीं जा सकता जातं च निष्प्रभं सर्वं न प्राज्ञायत किञ्चन। था। घने अन्धकारसे ढकी हुई दसों दिशाएँ शोभाहीन हो

English

the chariot of iva wont down and got stuck in the earth. At this, iiva and BrahmS. became much distressed. The cliariot containing those two Devas began to go down and down without finding any support, like a learned man without finding au adequate place of his liking. — 54-55.

अध्याय १३६

श्लोक 15

खगैर् मधुररावैश्च चारुचामीकरप्रभैः कामैषिभिर् इवाकीर्णां जीवानामरणीम् इव

khagair madhurarāvaiśca cārucāmīkaraprabhaiḥ kāmaiṣibhir ivākīrṇāṃ jīvānāmaraṇīm iva

हिन्दी अर्थ

तिमिरौघपरिक्षिा न रेजुश्च दिशो दश॥ १८ गयीं। उस समय काले मेघोंके अवगुण्ठनसे युक्त काला रूप धारण करनेवाली देवी आकाशमें प्रविष्ट हुई। घोर विवेश रूपिणी काली कालमेघावगुण्ठिता। अन्धकारसे आवृत होनेके कारण सूर्यके छिप जानेसे द्यौर्नभात्यभिभूतार्का घोरेण तमसावृता॥ १९ आकाशमण्डलकी शोभा जाती रही॥ १०--१९॥

English

It became supportless and looked dull, like the body devoid of potency, the small quantity of water during the hot weather, and love shewn by a twice-born Brahmin. Then Brahma descending from the chariot made an attempt to raise it and became successful by His great power; and Lord Janardana, dressed in yellow garb, assumed the form of the bull and placed the yoke on his neck and lifted up the

अध्याय १३६

श्लोक 16

तां वापीं सृज्य स मयो गङ्गामिव महेश्वरः तस्यां प्रक्षालयामास विद्युन्मालिनमादितः

tāṃ vāpīṃ sṛjya sa mayo gaṅgāmiva maheśvaraḥ tasyāṃ prakṣālayāmāsa vidyunmālinamāditaḥ

हिन्दी अर्थ

तान् घनौघान् सतिमिरान् दोर्भ्यामाक्षिप्य स प्रभुः । कक उसी समय सामर्थ्यशाली भगवानूने अपने दोनों ; सन्दर्शयामास दिव्यं कृष्णवपुर्हरिः॥ २० हाथोंसे अन्धकारसहित घन-समूहोंको दूर हटाकर वपुः i कृष्णवर्णका दिव्य शरीर प्रकट किया। उसकी कान्ति 'बलाहकाञ्जननिभं बलाहकतनूरुहम्। काले मेघ और कज्जलके समान थी, उसके रोएँ भी

English

THE MAT8YA PUUANAM.

अध्याय १३६

श्लोक 17

स वाप्यां मज्जितो दैत्यो देवशत्रुर्महाबलः उत्तस्थाविन्धनैरिद्धः सद्यो हुत इवानलः

sa vāpyāṃ majjito daityo devaśatrurmahābalaḥ uttasthāvindhanairiddhaḥ sadyo huta ivānalaḥ

हिन्दी अर्थ

चैव कृष्णं कृष्णमिवाचलम्॥ २९ काले मेघ-जैसे थे, वह तेज और शरीर-दोनोंसे हा वपुषा बधं ह i कञ्जलगिरिकी भाँति कृष्ण था, उसपर उद्दीस पीताम्बर दीस्तपीताम्बरधरं तप्तकाञ्चनभूषणम्। शोभा पा रहा था, वह तपाये हुए स्वर्णमय आभूषणोंसे धूमान्धकारवपुष युगान्ताग्मिमिवोत्थितम्॥ २२ विभूषित, धुएँके अन्धकारकी-सी कान्तिसे युक्त तथा बभौ चामीकरप्रख्यैरायुधैरुपशोभितम् नन्दकानन्दितकरं शराशीविषधारिणम्

English

chariot by his horns, as an illustrious scion elevates his falnil 3 The demon Tarakasura also jumped out like a winged mountain and dealt a heavy blow to Brahnnl. — oii-dO.

अध्याय १३६

श्लोक 18

मयस्य चाञ्जलिं कृत्वा तारकाख्यो ऽभिवादितः विद्युन्मालीति वचनं मयमुत्थाय चाब्रवीत्

mayasya cāñjaliṃ kṛtvā tārakākhyo 'bhivāditaḥ vidyunmālīti vacanaṃ mayamutthāya cābravīt

हिन्दी अर्थ

विष्णुशैलं क्षमामूलं श्रीवृक्षं शाङ्गधन्विनम् सर्वलोकमनः कान्तं सर्वसत्त्वमनोहरम्

English

Brahma pxitting aside liis wliip on the yoke began to gasp, seeing whicli the demons sent forth a shrilling yell and thundered like clouds to please Tarakasura. — 61»62.

अध्याय १३६

श्लोक 19

क्व नन्दी सह रुद्रेण वृतः प्रमथजम्बुकैः युध्यामो ऽरीन् विनिष्पीड्य दया देहेषु का हि नः

kva nandī saha rudreṇa vṛtaḥ pramathajambukaiḥ yudhyāmo 'rīn viniṣpīḍya dayā deheṣu kā hi naḥ

हिन्दी अर्थ

विद्याहंकारसाराढ्यं महाभूतप्ररोहणम् हैत्यलोकमहास्कन्धं मर्त्यलोके प्रकाशितम् सागराकारनिर्हादं रसातलमहाश्रयम्। मृगेन्द्रपाशैर्विततं पक्षजन्तुनिषेवितम्

English

Lord Visnu, the holder of the disc and revered by jjiva, trampled over the demons and entered the Tripura, in the form of a bull and destroying the lotus beds, drank up all the nectar of the well to the bottom and emptied it as the Sun drives away the darkness. After drinking this, Lord Visnu bellowed and came again before Siva. — G3-65.

अध्याय १३६

श्लोक 20

अन्वास्यैव च रुद्रस्य भवामः प्रभविष्णवः तैर्वा विनिहता युद्धे भविष्यामो यमाशनाः

anvāsyaiva ca rudrasya bhavāmaḥ prabhaviṣṇavaḥ tairvā vinihatā yuddhe bhaviṣyāmo yamāśanāḥ

हिन्दी अर्थ

शीलार्थचारुगन्धाढ्यं सर्वलोकमहाद्रुमम्। अव्यक्तानन्तसलिलं व्यक्ताहङ्कारफेनिलम् जन्तुमत्स्यगणाकीर्ण शैलशङ्ककुलैर्युतम्। त्रैगुण्यविषयावर्त सर्वलोकतिमिङ्गिलम्

English

The Asuras, then began to be killed by the deadly attendants of Siva and rivers flowed tinged red with blood of the slain Daityas and all the Clemons took to their heels like the ignorant fool, getting illumined by the teachings of the learned. — tiO.

अध्याय १३६

श्लोक 21

विद्युन्मालेर् निशम्यैतन् मयो वचनमूर्जितम् तं परिष्वज्य सार्द्राक्ष इदमाह महासुरः

vidyunmāler niśamyaitan mayo vacanamūrjitam taṃ pariṣvajya sārdrākṣa idamāha mahāsuraḥ

हिन्दी अर्थ

द्वादशार्कमहाद्वीपं रुद्रैकादशपत्तनम् वस्वष्टपर्वतोपेतं त्रैलोक्याम्भोमहोदधिम्। संध्यासंख्योर्मिसलिलं सुपर्णानिलसेवितम् हैत्यरक्षोगणग्राहं यक्षोरगझषाकुलम्। पितामहमहाबी्य॑ सर्वस्त्रीरत्नशोभितम्

English

Afterwards, TnrakAsura, Vidyiininuli and Maya being overpowered by the showers the arrows of the lhainathas went, inside tlie 'Pripiira. When the principal attendants of Siva, riz. — iMahendra, NandWvara and Svainikartika, etc, laughed a hearty laugh and ciied out we shall conquer along with the Moon and the Dikpalas.*' — t)7-l)8.

अध्याय १३६

श्लोक 22

विद्युन्मालिन्न मे राज्यम् अभिप्रेतं न जीवितम् त्वया विना महाबाहो किमन्येन महासुर

vidyunmālinna me rājyam abhipretaṃ na jīvitam tvayā vinā mahābāho kimanyena mahāsura

हिन्दी अर्थ

प्रलयकालमें प्रकट हुई अग्निके समान उद्धासित हो रहा था, उसके कंधे दुगुने एवं चौगुने मोटे थे, उसके बाल किरीटसे ढके होनेके कारण शोभा पा रहे थे, वह स्वर्ण- सदृश चमकीले आयुधोंसे सुशोभित था, उससे चन्द्रमा और सूर्यकी किरणों-जैसी प्रभा निकल रही थी, वह पर्वत-शिखरकी तरह ऊँचा था, उसके हाथ नन्दक नामक खड्ग और विषैले सर्पो-जैसे बाणोंसे युक्त थे, वह चित्तल मछलीके समान विशाल शक्ति, शङ्ख, चक्र और गदा

English

Here en/Js the one hinnlrvd and thirl ij-ti.vtli (diapter on Vmius drinhimj the life'diving tcell in the Tvtpara fort.

अध्याय १३६

श्लोक 23

महामृतमयी वापी ह्य् एषा मायाभिरीश्वर सृष्टा दानवदैत्यानां हतानां जीववर्धिनी

mahāmṛtamayī vāpī hy eṣā māyābhirīśvara sṛṣṭā dānavadaityānāṃ hatānāṃ jīvavardhinī

हिन्दी अर्थ

धारण किये हुए था, क्षमा जिसका मूल था, जो श्रीवृक्षसे सम्पन्न, शार्ङ्गधनुषसे युक्त, देवताओंको उत्तम फल देनेवाला, देवाङ्गनारूपी रुचिर पल्लवोंसे सुशोभित, सभी लोगोंके मनको प्रिय लगनेवाला, सम्पूर्ण जीवोंसे युक्त होनेके कारण मनोहर, नाना प्रकारके विमानरूपी वृक्षोंसे युक्त और बादलोंके मीठे जलको टपकानेवाला, विद्या और अहंकारके सारसे सम्पन्न तथा महाभूतरूपी वृक्षोंको उगानेवाला था, वह घने पत्तोंसे आच्छादित था, उसपर ग्रह-नक्षत्ररूप पुष्प खिले हुए थे, हैत्योंके लोक उसकी विशाल शाखाके रूपमें थे, ऐसा वह विष्णुशैल मृत्युलोकमें प्रकाशित हो रहा था

English

Here en/Js the one hinnlrvd and thirl ij-ti.vtli (diapter on Vmius drinhimj the life'diving tcell in the Tvtpara fort.

अध्याय १३६

श्लोक 24

दिष्ट्या त्वां दैत्य पश्यामि यमलोकाद् इहागतम् दुर्गतावनयग्रस्तं भोक्ष्यामो ऽद्य महानिधिम्

diṣṭyā tvāṃ daitya paśyāmi yamalokād ihāgatam durgatāvanayagrastaṃ bhokṣyāmo 'dya mahānidhim

हिन्दी अर्थ

रसातलतक व्याप्त रहनेवाला वह नारायणरूप महासागर सागरकी भाँति शब्द कर रहा था, वह मृगेन्द्ररूपी पाशोंसे व्याप्त, पंखधारी जन्तुओंसे सेवित, शील और अर्थकी सुन्दर गन्धसे युक्त तथा सम्पूर्ण लोकरूपी महान् वृक्षसे सम्पन्न था, नारायणका अव्यक्त स्वरूप उसका अगाध जल था, वह व्यक्त अहंकाररूप फेनसे युक्त था, उसमें महाभूतगण लहरोंके समूह थे, ग्रह और नक्षत्र बुद्बुदकी तरह शोभा पा रहे थे, वह

English

Here en/Js the one hinnlrvd and thirl ij-ti.vtli (diapter on Vmius drinhimj the life'diving tcell in the Tvtpara fort.

अध्याय १३६

श्लोक 25

दृष्ट्वा दृष्ट्वा च तां वापीं मायया मयनिर्मिताम् हृष्टाननाक्षा दैत्येन्द्रा इदं वचनमब्रुवन्

dṛṣṭvā dṛṣṭvā ca tāṃ vāpīṃ māyayā mayanirmitām hṛṣṭānanākṣā daityendrā idaṃ vacanamabruvan

हिन्दी अर्थ

विमानोंके चलनेसे होनेवाले शब्दोंसे व्याप्त था, वह बादलोंके आडङम्बरसे सम्पन्न, जलजन्तुओं और मत्स्यसमूहोंसे परिपूर्ण और समुद्रस्थ पर्वतों एवं शङ्खसमूहसे युक्त था। उसमें त्रिगुणयुक्त विषयोंकी भँवरें उठ रही थीं और सारा लोक तिमिंगिल (बहुत बड़ी मछली) - के समान था, वीरगण वृक्षों और लताओंके झुरमुट थे, बड़े-बड़े नाग सेवारके समान थे, बारहों आदित्य महाद्वीप और ग्यारहों रुद्र नगर थे, वह महासागर आठों वसुऑंरूप पर्वतसे युक्त और त्रिलोकीरूप जलसे भरा हुआ था, उसके जलमें असंख्य संध्यारूप लहरें उठ रही थीं, बह सुपर्णरूप वायुसे सेवित, हैत्य और राक्षसगणरूप ग्राह तथा यक्ष एवं नागरूप मीनसे व्याप्त

English

Here en/Js the one hinnlrvd and thirl ij-ti.vtli (diapter on Vmius drinhimj the life'diving tcell in the Tvtpara fort.

अध्याय १३६

श्लोक 26

दानवा युध्यतेदानीं प्रमथैः सह निर्भयाः मयेन निर्मिता वापी हतान्संजीवयिष्यति

dānavā yudhyatedānīṃ pramathaiḥ saha nirbhayāḥ mayena nirmitā vāpī hatānsaṃjīvayiṣyati

हिन्दी अर्थ

था, पितामह ब्रह्मा ही उसमें महान् पराक्रमी व्यक्ति थे, श्रीकीर्तिकान्तिलक्ष्मीभिर्नदीभिरुपशोभितम् । 'कालयोगिमहापर्वप्रलयोत्पत्तिवेगिनम्

English

Here en/Js the one hinnlrvd and thirl ij-ti.vtli (diapter on Vmius drinhimj the life'diving tcell in the Tvtpara fort.

अध्याय १३६

श्लोक 27

ततः क्षुब्धाम्बुधिनिभा भेरी सा तु भयंकरी वाद्यमाना ननादोच्चै रौरवी सा पुनः पुनः

tataḥ kṣubdhāmbudhinibhā bherī sā tu bhayaṃkarī vādyamānā nanādoccai rauravī sā punaḥ punaḥ

हिन्दी अर्थ

हैवाधिदेबं वरदं भक्तानां भक्तवत्सलम् अनुग्रहकरं देवं प्रशान्तिकरणं शुभम्। हर्यश्वरथसंयुक्ते सुपर्णध्वजसेविते

English

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अध्याय १३६

श्लोक 28

श्रुत्वा भेरीरवं घोरं मेघारम्भितसंनिभम् न्यपतन्नसुरास्तूर्णं त्रिपुराद्युद्धलालसाः

śrutvā bherīravaṃ ghoraṃ meghārambhitasaṃnibham nyapatannasurāstūrṇaṃ tripurādyuddhalālasāḥ

हिन्दी अर्थ

ग्रहचन्द्रार्करचिते मन्दराक्षवरावृते। अनन्तरश्मिभिर्युक्ते विस्तीर्णे मेरुगह्वरे तारकाचित्रकुसुमे ग्रहनक्षत्रबन्धुरे ।

English

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अध्याय १३६

श्लोक 29

लोहराजतसौवर्णैः कटकैर्मणिराजितैः आमुक्तैः कुण्डलैर्हारैर् मुकुटैरपि चोत्कटैः

loharājatasauvarṇaiḥ kaṭakairmaṇirājitaiḥ āmuktaiḥ kuṇḍalairhārair mukuṭairapi cotkaṭaiḥ

हिन्दी अर्थ

भयेष्वभयदं व्योम्नि देवा हैत्यपराजिताः ददूशुस्ते स्थितं देवं दिव्ये लोकमये रथे। ते कृताञ्जलयः सर्वे देवाः शक्रपुरोगमाः स तेषां तां गिरं श्रुत्वा विष्णुर्हैबतहैवतम्

English

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अध्याय १३६

श्लोक 30

धूमायिता ह्यविरमा ज्वलन्त इव पावकाः आयुधानि समादाय काशिनो दृढविक्रमाः

dhūmāyitā hyaviramā jvalanta iva pāvakāḥ āyudhāni samādāya kāśino dṛḍhavikramāḥ

हिन्दी अर्थ

आकाशे तु स्थितो विष्णुरुत्तमं वपुरास्थितः उवाच देवताः सर्वाः सप्रतिज्ञमिदं वचः। शान्तिं व्रजत भद्रं वो मा भैष्ट मरुतां गणा:

English

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अध्याय १३६

श्लोक 31

नृत्यमाना इव नटा गर्जन्त इव तोयदाः करोच्छ्रया इव गजाः सिंहा इव च निर्भयाः

nṛtyamānā iva naṭā garjanta iva toyadāḥ karocchrayā iva gajāḥ siṃhā iva ca nirbhayāḥ

हिन्दी अर्थ

जिता मे दानवाः सर्वे त्रैलोक्यं परिगृह्यताम्। ते तस्य सत्यसंधस्य विष्णोर्वाक्येन तोषिताः देवाः प्रीतिं समाजग्मुः प्राश्यामृतमिवोत्तमम्। ततस्तमः संहृतं तद्विनेशुश्च बलाहकाः विरजस्काभवन् मार्गा नाकवर्गादयस्त्रयः

English

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अध्याय १३६

श्लोक 32

ह्रदा इव च गम्भीराः सूर्या इव प्रतापिताः द्रुमा इव च दैत्येन्द्रास् त्रासयन्तो बलं महत्

hradā iva ca gambhīrāḥ sūryā iva pratāpitāḥ drumā iva ca daityendrās trāsayanto balaṃ mahat

हिन्दी अर्थ

वह सभी रत्री-रत्नों तथा श्री, कीर्ति, कान्ति और लक्ष्मीरूपी नदियोंसे सुशोभित था, उसमें समयानुसार महान् पर्व और प्रलयकी उत्पत्ति होती रहती थी, ऐसा वह योगरूप महान् तटवाला नारायण-महासागर था उस समय हैत्योंसे पराजित हुए देवताओंने आकाशमें उन देवाधिदेव भगवानको, जो भक्तोंके वरदायक, भक्तवत्सल, अनुग्रह करनेवाले, प्रशान्तिकारक, शुभमय और भयके अवसरोंपर अभय प्रदान करनेवाले हैं

English

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अध्याय १३६

श्लोक 33

प्रमथा अपि सोत्साहा गरुडोत्पातपातिनः युयुत्सवो ऽभिधावन्ति दानवान्दानवारयः

pramathā api sotsāhā garuḍotpātapātinaḥ yuyutsavo 'bhidhāvanti dānavāndānavārayaḥ

हिन्दी अर्थ

देखा। वे ऐसे लोकमय दिव्य रथपर विराजमान थे, जो इन्द्रके रथके समान था, जिसपर गरुडध्वज फहरा रहा था, जिसमें सभी ग्रह, चन्द्र और सूर्य उपस्थित थे, जो मन्दराचलको श्रेष्ठ धुरीपर आधारित था, वह असंख्य किरणोंसे युक्त मेरुकी विस्तृत गुफा-जैसा लग रहा था, उसमें तारकाएँ विचित्र पुष्पोंके सदृश तथा ग्रह और नक्षत्र हंसके समान शोभा पा रहे थे। तब इन्द्र आदि वे सभी देवता हाथ जोड़कर जय-जयकार करते हुए उन शरणागतवत्सलकी शरणमें गये ॥३७--४१ ३॥ इस प्रकार देवताओंकी वह आर्त-वाणी सुनकर देवाधिदेव भगवान् विष्णुने महासमरमें दानवोंका विनाश करनेको सोचा। तब उत्तम शरीर धारण करके आकाशमें

English

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अध्याय १३६

श्लोक 34

नन्दीश्वरेण प्रमथास् तारकाख्येन दानवाः चक्रुः संहत्य संग्रामं चोद्यमाना बलेन च

nandīśvareṇa pramathās tārakākhyena dānavāḥ cakruḥ saṃhatya saṃgrāmaṃ codyamānā balena ca

हिन्दी अर्थ

स्थित हुए भगवान् विष्णु सभी देवताओंसे प्रतिज्ञापूर्वक ऐसी वाणी बोले-' देवगण! तुम्हारा कल्याण हो। तुमलोग शान्त हो जाओ, भय मत करो, ऐसा समझो कि मैंने सभी दानवोंको जीत लिया है। अब तुमलोग पुनः त्रिलोकोका राज्य ग्रहण करो।' इस प्रकार उन सत्यसंध भगवान् विष्णुके वचनसे वे देवगण परम संतुष्ट हुए और

English

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अध्याय १३६

श्लोक 35

ते ऽसिभिश्चन्द्रसंकाशैः शूलैश्चानलपिङ्गलैः बाणैश्च दृढनिर्मुक्तैर् अभिजघ्नुः परस्परम्

te 'sibhiścandrasaṃkāśaiḥ śūlaiścānalapiṅgalaiḥ bāṇaiśca dṛḍhanirmuktair abhijaghnuḥ parasparam

हिन्दी अर्थ

करनेको मिल गया हो। तदनन्तर वह निबिड अन्धकार चलने लगी और दसो दिशाएँ शान्त हो गयीं । ज्योतिर्गणोंकी प्रदक्षिणा करने लगे। ग्रहोंमें परस्पर विग्रहका भाव नष्ट

English

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अध्याय १३६

श्लोक 36

शराणां सृज्यमानानाम् असीनां च निपात्यताम् रूपाण्यासन्महोल्कानां पतन्तीनामिवाम्बरात्

śarāṇāṃ sṛjyamānānām asīnāṃ ca nipātyatām rūpāṇyāsanmaholkānāṃ patantīnāmivāmbarāt

हिन्दी अर्थ

स्वर्गादि तीनों लोकोंमें शान्ति स्थापित हो गयी। नदियाँ यथार्थरूपसे प्रवाहित होने लगीं। समुद्रोंका ज्वार-भाटा शान्त हो गया। मनुष्योंकी अन्तरात्माएँ तथा इन्द्रियाँ महर्षयो वीतशोका वेदानुच्चैरधीयत। यज्ञेषु च हविः पाकं शिवमाप च पावकः

English

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अध्याय १३६

श्लोक 37

शक्तिभिर्भिन्नहृदया निर्दया इव पातिताः निरयेष्विव निर्मग्नाः कूजन्ते प्रमथासुराः

śaktibhirbhinnahṛdayā nirdayā iva pātitāḥ nirayeṣviva nirmagnāḥ kūjante pramathāsurāḥ

हिन्दी अर्थ

प्रवृत्तधर्माः संवृत्ता लोका मुदितमानसाः । शुभकारिणी हो गयीं। महर्षियोंका शोक नष्ट हो गया, वे उच्च स्वरसे वेदोंका अध्ययन करने लगे। यज्ञोमें अग्निको पके हुए मङ्गलकारक हविको प्राप्ति होने लगी। इस प्रकार शत्रुका विनाश करनेके विषयमें दत्तप्रतिज्ञ भगवान् विष्णुकी वाणी सुनकर सभी लोगोंका मन हर्षित

English

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अध्याय १३६

श्लोक 38

हेमकुण्डलयुक्तानि किरीटोत्कटवन्ति च शिरांस्युर्व्यां पतन्ति स्म गिरिकूटा इवात्यये

hemakuṇḍalayuktāni kirīṭotkaṭavanti ca śirāṃsyurvyāṃ patanti sma girikūṭā ivātyaye

हिन्दी अर्थ

विष्णोर्दत्तप्रतिज्ञस्य श्रुत्वारिनिधने गिरम्॥ ५१ हो गया, तब वे अपने-अपने धर्मोमें संलग्न हो गये। इति श्रीमत्स्ये महापुराणे तारकामयसंग्रामे द्विसप्तत्यधिकशततमोऽध्यायः

English

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अध्याय १३६

श्लोक 39

परश्वधैः पट्टिशैश्च खड्गैश्च परिघैस्तथा छिन्नाः करिवराकारा निपेतुस्ते धरातले

paraśvadhaiḥ paṭṭiśaiśca khaḍgaiśca parighaistathā chinnāḥ karivarākārā nipetuste dharātale

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार श्रीमत्स्यमहापुराणके तारकामयसंग्राममें एक सौ बहत्तरवाँ अध्याय सम्पूर्ण हुआ हैत्यों और दानवोंकी युद्धार्थ तैयारी ततोऽभयं विष्णुवचः श्रुत्वा हैत्याश्च दानवाः। उद्योगं विपुलं चक्रुर्युद्धाय विजयाय च

English

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अध्याय १३६

श्लोक 40

गर्जन्ति सहसा हृष्टाः प्रमथा भीमगर्जनाः साधयन्त्यपरे सिद्धा युद्धगान्धर्वमद्भुतम्

garjanti sahasā hṛṣṭāḥ pramathā bhīmagarjanāḥ sādhayantyapare siddhā yuddhagāndharvamadbhutam

हिन्दी अर्थ

मयस्तु काञ्जनमयं त्रिनल्वायतमक्षयम्। चतुश्चक्रं सुविपुलं सुकम्पितमहायुगम् ईहामृगगणाकीर्ण पक्षिपङ्क्तिविराजितम्। दिव्यास्त्रतूणीरधरं पयोधरनिनादितम्

English

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अध्याय १३६

श्लोक 41

बलवान्भासि प्रमथ दर्पितो भासि दानव इति चोच्चारयन्वाचं वारणा रणधूर्गताः

balavānbhāsi pramatha darpito bhāsi dānava iti coccārayanvācaṃ vāraṇā raṇadhūrgatāḥ

हिन्दी अर्थ

हैमकेयूरवलयं स्वर्णमण्डलकूबरम्। सपताकध्वजोपेतं सादित्यमिव मन्दरम् गजेन्द्राभोगवपुषं क्वचित् केसरिवर्चसम्। युक्तमृक्षसहस्त्रेण समृद्धाम्बुदनादितम् दीप्रमाकाशगं दिव्यं रथं पररथारुजम्।

English

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अध्याय १३६

श्लोक 42

परिघैराहताः केचिद् दानवैः शंकरानुगाः वमन्ते रुधिरं वक्त्रैः स्वर्णधातुमिवाचलाः

parighairāhatāḥ kecid dānavaiḥ śaṃkarānugāḥ vamante rudhiraṃ vaktraiḥ svarṇadhātumivācalāḥ

हिन्दी अर्थ

मत्स्यभगवान् बोले-रविनन्दन ! तदनन्तर देवताओंके लिये उपयुक्त भगवान् विष्णुके उस अभयदायक वचनको सुनकर हैत्य और दानव युद्ध एवं उसमें विजयप्रापिके लिये महान् उद्योग करने लगे। उस समय युद्धाकाड़ी मय एक ऐसे दिव्य रथपर सवार हुआ, जो सोनेका बना हुआ था। वह अविनाशी रथ तीन नल्व विस्तारवाला अत्यन्त विशाल तथा चार पहियों और परम सुन्दर महान् जुएसे युक्त था। उसमें क्षुद्र घंटिकाओंके रुनझुन शब्द हो रहे थे। वह गैंडेके

English

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अध्याय १३६

श्लोक 43

प्रमथैरपि नाराचैर् असुराः सुरशत्रवः द्रुमैश्च गिरिशृङ्गैश्च गाढमेवाहवे हताः

pramathairapi nārācair asurāḥ suraśatravaḥ drumaiśca giriśṛṅgaiśca gāḍhamevāhave hatāḥ

हिन्दी अर्थ

चमड़ेसे आच्छादित, रत्नों और सुवर्णकी सुन्दर जालियोंसे सुशोभित, भेड़ियों और पङ्किबद्ध पक्षियोंकी पच्चीकारीसे समलंकृत तथा दिव्यास्त्र और तरकससे परिपूर्ण था। उससे मेघकी गड॒गडाहटके समान शब्द निकल रहा था। वह श्रेष्ठ रथ सुन्दर धुरी और सुदृढ़ मध्यभागसे युक्त, आकाशमण्डल- जैसा विस्तृत तथा गदा और परिघसे परिपूर्ण होनेके कारण मूर्तिमान् सागर-सा लग रहा था। उसके केयूर, बलय और कूबर (युगंधर) सोनेके बने हुए थे तथा उसपर पताकाएँ और ध्वज फहरा रहे थे, जिससे वह सूर्ययुक्त मन्दराचलकी भाँति शोभित हो रहा था। उसका ऊपरी भाग कहीं गजेन्द्र- चर्म तो कहीं सिंह-चर्म-जैसा चमक रहा था। उसमें एक हजार रीछ जुते हुए थे, वह घने बादलकी तरह शब्द कर

English

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अध्याय १३६

श्लोक 44

सूदितानथ तान्दैत्यान् अन्ये दानवपुंगवाः उत्क्षिप्य चिक्षिपुर् वाप्यां मयदानवचोदिताः

sūditānatha tāndaityān anye dānavapuṃgavāḥ utkṣipya cikṣipur vāpyāṃ mayadānavacoditāḥ

हिन्दी अर्थ

रहा था, शत्रुओंके रथको रौंदनेवाला वह दीस्तिशाली रथ आकाशगामी था, उसपर बैठा हुआ मय ऐसा लग रहा था अध्यतिष्ठद्रणाकाङ्क्षी मेरुं दीत इवांशुमान्॥ ८ मानो दीप्तिमान् सूर्य सुमेरु पर्वतपर विराजमान हों ॥१--८ ॥

English

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अध्याय १३६

श्लोक 45

ते चापि भास्वरैर्देहैः स्वर्गलोक इवामराः उत्तस्थुर्वापीमासाद्य सद्रूपाभरणाम्बराः

te cāpi bhāsvarairdehaiḥ svargaloka ivāmarāḥ uttasthurvāpīmāsādya sadrūpābharaṇāmbarāḥ

हिन्दी अर्थ

एक फर्लांगका एक प्राचीन माप। शैलाकारमसम्बाधं नीलाञ्जनचयोपमम् कार्ष्णायसमयं दिव्यं लोहेषाबद्धकूबरम्। तिमिरोद्गारिकिरणं गर्जन्तमिव तोयदम्

English

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अध्याय १३६

श्लोक 46

अथैके दानवाः प्राप्य वापीप्रक्षेपणाद् असून् आस्फोट्य सिंहनादं च कृत्वाधावंस्तथासुराः

athaike dānavāḥ prāpya vāpīprakṣepaṇād asūn āsphoṭya siṃhanādaṃ ca kṛtvādhāvaṃstathāsurāḥ

हिन्दी अर्थ

स्फुरदन्तोष्ठनयनं संग्रामं सोऽभ्यकाङ्क्षत श्वेतशैलप्रतीकाशो युद्धायाभिमुखे स्थितः

English

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अध्याय १३६

श्लोक 47

दानवाः प्रमथानेतान् प्रसर्पत किम् आसथ हतानपि हि वो वापी पुनरुज्जीवयिष्यति

dānavāḥ pramathānetān prasarpata kim āsatha hatānapi hi vo vāpī punarujjīvayiṣyati

हिन्दी अर्थ

अभवद्. हैत्यसैन्यस्य मध्ये रविरिवोदितः। लम्बस्तु नवमेघाभः प्रलम्बाम्बरभूषणः हैत्यव्यूहगतो भाति सनीहार इवांशुमान्। इसी प्रकार जो अत्यन्त ऊँचा और दूरतक शब्द करनेवाला था, जिसके सभी अङ्ग स्वर्णमय थे, जो आकारमें पर्वतके समान और नीलाझ्जनकी राशि-सा दीख रहा था, काले लोहेका बना हुआ था, जिसके लोहेके हरसेमें कूबर

English

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अध्याय १३६

श्लोक 48

एवं श्रुत्वा शङ्कुकर्णो वचो ऽग्रग्रहसंनिभः द्रुतमेवैत्य देवेशम् इदं वचनमब्रवीत्

evaṃ śrutvā śaṅkukarṇo vaco 'gragrahasaṃnibhaḥ drutamevaitya deveśam idaṃ vacanamabravīt

हिन्दी अर्थ

बँधा हुआ था, जिसमें कहीं-कहीं अंधकारको फाड़कर किरणें चमक रही थीं, जो बादलको तरह गर्जना कर रहा था, लोहेकी विशाल जाली और झरोखोंसे सुशोभित था, लोहनिर्मित परिघ, क्षेपणीय (ढेलवाँस) और मुद्ररोंसे परिपूर्ण और कुठारोंसे सुशोभित था, शत्रुओंसे युद्ध करनेके लिये उद्यत दूसरे मन्दराचलकी भाँति दीख रहा था तथा जिसमें एक हजार गधे जुते हुए थे, ऐसे उत्तम दिव्य रथपर तारकासुर सवार हुआ। क्रोधसे भरा हुआ विरोचन हाथमें गदा लिये

English

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अध्याय १३६

श्लोक 49

सूदिताः सूदिता देव प्रमथैरसुरा ह्यमी उत्तिष्ठन्ति पुनर्भीमाः सस्या इव जलोक्षिताः

sūditāḥ sūditā deva pramathairasurā hyamī uttiṣṭhanti punarbhīmāḥ sasyā iva jalokṣitāḥ

हिन्दी अर्थ

हुए उस सेनाके मुहानेपर खड़ा हुआ। वह देदीप्यमान शिखरवाले पर्वतके समान लग रहा था। शत्रुसेनाका मर्दन करनेवाले दानवश्रेष्ठ हयग्रीवने एक हजार रथके साथ अपने रथको आगे बढ़ाया। वाराह नामक दानव अपने एक हजार किष्कु लम्बे विशाल धनुषका टंकार करते हुए सेनाके अग्रभागमें स्थित हुआ, जो वृक्षोंसहित पर्वत-सा दीख रहा था। खर नामक हैत्य अभिमानवश नेत्रोंसे रोषजनित जल गिराता हुआ संग्रामके लिये उद्यत हुआ, उस समय उसके इसी प्रकार पराक्रमी दानवराज त्वष्टा, जिसमें आठ हाथी जुते हुए थे, ऐसे भयंकर रथपर बैठकर दानवसेनाको व्यूहबद्ध करनेका प्रयत्न करने लगा। विप्रचित्तिका पुत्र श्वेत, जो श्वेत पर्वतके समान विशालकाय और श्वेत

English

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अध्याय १३६

श्लोक 50

अस्मिन्किल पुरे वापी पूर्णामृतरसाम्भसा निहता निहता यत्र क्षिप्ता जीवन्ति दानवाः

asminkila pure vāpī pūrṇāmṛtarasāmbhasā nihatā nihatā yatra kṣiptā jīvanti dānavāḥ

हिन्दी अर्थ

कुण्डलोंसे विभूषित था, युद्धके लिये सेनाके अग्रभागमें स्थित हुआ। बलिका पुत्र अरिष्ट, जो महान् बलसम्पन्न और पर्वतको कँपा देनेवाला था तथा पर्वत-शिलाएँ जिसकी आयुधभूता थीं, युद्धको कामनासे सेनाके सम्मुख खड़ा हुआ। किशोर नामक हैत्य प्रेरित किये गये सिंह-किशोरकी तरह अत्यन्त हर्षके साथ हैत्य-सेनाके मध्यभागमें उपस्थित हुआ, जो उदयकालीन सूर्य-सा प्रतीत हो रहा था। नवीन मेघकी-सी कान्तिवाला लम्ब नामक दानव, जो लम्बे वस्रं

English

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अध्याय १३६

श्लोक 51

इति विज्ञापयद्देवं शङ्कुकर्णो महेश्वरम् अभवन्दानवबल उत्पाता वै सुदारुणाः

iti vijñāpayaddevaṃ śaṅkukarṇo maheśvaram abhavandānavabala utpātā vai sudāruṇāḥ

हिन्दी अर्थ

और आभूषणोंसे विभूषित था, हैत्यसेनामें पहुँचकर कुहासेसे घिरे हुए सूर्यकी तरह शोभा पा रहा था। महान् स्वर्भानुरास्ययोधी तु दशनोष्ेक्षणायुधः॥ २३ ग्रह राहु, जो मुख, दाँत, होंठ और नेत्रोंसे युद्ध करनेवाला बीस अंगुल या मतान्तरसे एक हाथका प्राचीन माप।

English

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अध्याय १३६

श्लोक 52

तारकाख्यः सुभीमाक्षो दारितास्यो हरिर्यथा अभ्यधावत्सुसंक्रुद्धो महादेवरथं प्रति

tārakākhyaḥ subhīmākṣo dāritāsyo hariryathā abhyadhāvatsusaṃkruddho mahādevarathaṃ prati

हिन्दी अर्थ

हसंस्तिष्ठति हैत्यानां प्रमुखे स महाग्रह: । अन्ये हयगतास्तत्र गजस्कन्धगता: परे केचित्खरोष्ट्रयातारः केचिच्छूवापदवाहना:

English

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अध्याय १३६

श्लोक 53

त्रिपुरे तु महान्घोरो भेरीशङ्खरवो बभौ दानवा निःसृता दृष्ट्वा देवदेवरथे सुरम्

tripure tu mahānghoro bherīśaṅkharavo babhau dānavā niḥsṛtā dṛṣṭvā devadevarathe suram

हिन्दी अर्थ

पत्तिनस्त्वपरे हैत्या भीषणा विकृतानना: । एकपादार्धपादाश्च ननुतुर्युद्धकाङ्किणः बाहुभिः परिघाकारैस्तर्जयन्ति स्म देवता: चक्रैश्च हैत्यप्रवराश्चक्रुरानन्दितं बलम्

English

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अध्याय १३६

श्लोक 54

भूकम्पश्चाभवत्तत्र शताङ्गो भूगतो ऽभवत् दृष्ट्वा क्षोभमगाद्रुद्रः स्वयम्भूश्च पितामहः

bhūkampaścābhavattatra śatāṅgo bhūgato 'bhavat dṛṣṭvā kṣobhamagādrudraḥ svayambhūśca pitāmahaḥ

हिन्दी अर्थ

देवानभिमुखे तस्थौ मेघानीकमिवोद्धतम् तदद्भुतं हैत्यसहस्त्रगाढं

English

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अध्याय १३६

श्लोक 55

ताभ्यां देववरिष्ठाभ्याम् अन्वितः स रथोत्तमः अनायतनम् आसाद्य सीदते गुणवानिव

tābhyāṃ devavariṣṭhābhyām anvitaḥ sa rathottamaḥ anāyatanam āsādya sīdate guṇavāniva

हिन्दी अर्थ

युयुत्सयोन्मत्तमिवावभासे था, हँसते हुए हैत्योंके आगे खड़ा हुआ ।इस प्रकार अन्यान्य दानव भी क्रमश: सेनासहित कवच धारण करके युद्धके लिये प्रस्थित हुए । उनमें कुछ लोग घोड़ोंपर सवार थे तो कुछ लोग गजराजोंके कंधोंपर बैठे थे। दूसरे कुछ लोग सिंह, व्याघ्र, वराह और रीछोंपर सवार थे । कुछ गधे और ऊँटोंपर चढ़कर चल रहे थे तो किन्हींके वाहन चीते थे

English

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अध्याय १३६

श्लोक 56

धातुक्षये देह इव ग्रीष्मे चाल्पमिवोदकम् शैथिल्यं याति स रथः स्नेहो विप्रकृतो यथा

dhātukṣaye deha iva grīṣme cālpamivodakam śaithilyaṃ yāti sa rathaḥ sneho viprakṛto yathā

हिन्दी अर्थ

दूसरे भीषण हैत्य, जिनमें कुछके मुख टेढ़े थे, किन्हींके एक पैर तथा किन्हींके आधा पैर ही था, युद्धकी अभिलाषासे पैदल ही नाचते हुए चल रहे थे। उन दानवश्रेष्ठोंमें कुछ ताल ठोंक रहे थे, बहुतेरे उछल- कूद रहे थे और कुछ हर्षित होकर सिंहनाद कर रहे थे। इस प्रकार वे दानवगण हाथोंमें भयंकर गदा, परिघ, शिला और मुसल धारण करके अपनी परिघाकार भुजाओंसे देवताओंको धमका रहे थे। उस समय श्रेष्ठ

English

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अध्याय १३६

श्लोक 57

रथादुत्पत्यात्मभूर् वै सीदन्तं तु रथोत्तमम् उज्जहार महाप्राणो रथं त्रैलोक्यरूपिणम्

rathādutpatyātmabhūr vai sīdantaṃ tu rathottamam ujjahāra mahāprāṇo rathaṃ trailokyarūpiṇam

हिन्दी अर्थ

हैत्यगण पाश, भाला, परिघ, तोमर (लकड़ीका बना गोलाकार अस्त्र), अङ्कुश, पट्टिश, शतघ्नी (तोप), शतधार, मुद्र, गण्डशैल, शैल, उत्तम लोहेके बने हुए परिघ और चक्रोंसे क्रीडा करते हुए हैत्यसेनाको आनन्दित करने लगे। इस प्रकार दानवोंकी वह सारी सेना युद्धके मदसे उन्मत्त हो देवताओंके सम्मुख खड़ी हुई, जो उमड़े हुए मेघोंकी सेना-सी प्रतीत हो रही थी। दानवोंकी वह अद्भुत एवं प्रचण्ड सेना, जो हजारों प्रधान हैत्योंसे भरी हुई तथा वायु, अग्नि, पर्वत और मेघके समान भीषण दीख रही थी, युद्धकी तैयारीके समय युद्धकी इच्छासे उन्मत्त हुई-सी शोभा पा रही थी

English

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अध्याय १३६

श्लोक 58

तदा शराद्विनिष्पत्य पीतवासा जनार्दनः वृषरूपं महत्कृत्वा रथं जग्राह दुर्धरम्

tadā śarādviniṣpatya pītavāsā janārdanaḥ vṛṣarūpaṃ mahatkṛtvā rathaṃ jagrāha durdharam

हिन्दी अर्थ

इति श्रीमत्स्ये महापुराणे तारकामयसंग्रामे त्रिसप्तत्यधिकशततमोऽध्यायः इस प्रकार श्रीमत्स्यमहापुराणके तारकामय-संग्राममें एक सौ तिहत्तरवाँ अध्याय सम्पूर्ण हुआ

English

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अध्याय १३६

श्लोक 59

स विषाणाभ्यां त्रैलोक्यं रथमेव महारथः प्रगृह्योद्वहते सज्जं कुलं कुलवहो यथा

sa viṣāṇābhyāṃ trailokyaṃ rathameva mahārathaḥ pragṛhyodvahate sajjaṃ kulaṃ kulavaho yathā

हिन्दी अर्थ

श्रुतस्ते हैत्यसैन्यस्य विस्तारो रविनन्दन। मत्स्यभगवान्ने कहा-रविनन्दन! तुम हैत्योंको सेनाका विस्तार तो सुन ही चुके, अब देवताओंकी सुराणामपि सैन्यस्य विस्तारं वैष्णवं शृणु॥ ९ विशेषकर विष्णुकी सेनाका विस्तार श्रवण करो। उस

English

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अध्याय १३६

श्लोक 60

तारकाख्यो ऽपि दैत्येन्द्रो गिरीन्द्र इव पक्षवान् अभ्यद्रवत्तदा देवं ब्रह्माणं हतवांश्च सः

tārakākhyo 'pi daityendro girīndra iva pakṣavān abhyadravattadā devaṃ brahmāṇaṃ hatavāṃśca saḥ

हिन्दी अर्थ

सबलाः सानुगाश्चैव सन्नह्मन्त यथाक्रमम्॥ २ सेना और अनुयायियासहित कवच धारण कर लिया। पुरुहूतस्तु पुरतो लोकपालः सहस्त्रदूक्। ग्रामणीः सर्वदेवानामारुरोह सुरद्विपम्

English

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अध्याय १३६

श्लोक 61

स तारकाख्याभिहतः प्रतोदं न्यस्य कूबरे विजज्वाल मुहुर्ब्रह्मा श्वासं वक्त्रात् समुद्गिरन्

sa tārakākhyābhihataḥ pratodaṃ nyasya kūbare vijajvāla muhurbrahmā śvāsaṃ vaktrāt samudgiran

हिन्दी अर्थ

देवगन्धर्वयक्षौधैरनुयातः सहस्त्रशः । दीसिमद्धिः सदस्यैश्च ब्रहार्षिभिरभिष्टतः युक्तो बलाहकगणैः पर्वतैरिव कामगैः यमारूढः स भगवान् पर्येति सकलं जगत्।

English

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अध्याय १३६

श्लोक 62

तत्र दैत्यैर्महानादो दानवैरपि भैरवः तारकाख्यस्य पूजार्थं कृतो जलधरोपमः

tatra daityairmahānādo dānavairapi bhairavaḥ tārakākhyasya pūjārthaṃ kṛto jaladharopamaḥ

हिन्दी अर्थ

स्वगे शक्रानुयातेषु देवतूर्यनिनादिषु। सुन्दर्यः परिनृत्यन्ति शतशोऽप्सरसां गणाः केतुना नागराजेन राजमानो यथा रविः। युक्तो हयसहस्त्रेण मनोमारुतरंहसा

English

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अध्याय १३६

श्लोक 63

रथचरणकरो ऽथ महामृधे वृषभवपुर्वृषभेन्द्रपूजितः दितितनयबलं विमर्द्य सर्वं त्रिपुरपुरं प्रविवेश केशवः

rathacaraṇakaro 'tha mahāmṛdhe vṛṣabhavapurvṛṣabhendrapūjitaḥ dititanayabalaṃ vimardya sarvaṃ tripurapuraṃ praviveśa keśavaḥ

हिन्दी अर्थ

कृत्स्नः परिवृतो मेरुर्भास्करस्येव तेजसा यमस्तु दण्डमुद्यम्य कालयुक्तश्च मुद्गरम्। तस्थौ सुरगणानीके हैत्यान् नादेन भीषयन् कालपाशान् समाविध्यन् हयैः शशिकरोपमैः । वाय्वीरितैर्जलाकारैः कुर्वल्लीलाः सहस्त्रशः

English

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अध्याय १३६

श्लोक 64

सजलजलदराजितां समस्तां कुमुदवरोत्पलफुल्लपङ्कजाढ्याम् सुरगुरुरपिबत्पयो ऽमृतं तद् रविरिव संचितशार्वरं तमो ऽन्धम्

sajalajaladarājitāṃ samastāṃ kumudavarotpalaphullapaṅkajāḍhyām suragururapibatpayo 'mṛtaṃ tad raviriva saṃcitaśārvaraṃ tamo 'ndham

हिन्दी अर्थ

वरुणः पाशधृङ्मध्ये देवानीकस्य तस्थिवान्। युद्धवेलामभिलषन् भिन्नवेल इवार्णवः सहस्र नेत्रधारी लोकपाल इन्द्र जो समस्त देवताओंके नायक हैं, सर्वप्रथम सुरगजेन्द्र ऐरावतपर आरूढ़ हुए। सेनाके मध्यभागमें इन्द्रका वह रथ भी खड़ा किया गया, जो समस्त पक्षियोंमें श्रेष्ठ गरुडके समान वेगशाली था।

English

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अध्याय १३६

श्लोक 65

वापीं पीत्वासुरेन्द्राणां पीतवासा जनार्दनः नर्दमानो महाबाहुः प्रविवेश शरं ततः

vāpīṃ pītvāsurendrāṇāṃ pītavāsā janārdanaḥ nardamāno mahābāhuḥ praviveśa śaraṃ tataḥ

हिन्दी अर्थ

उसमें सुन्दर पहिये लगे हुए थे तथा वह स्वर्ण और वञ्रसे विभूषित था। सहस्रोंकी संख्यामें देवताओं, गन्धर्वो और यक्षोंके समूह उसके पीछे-पीछे चल रहे थे। दीसिशाली सदस्य और महर्षि उसकी स्तुति कर रहे थे तथा वह वज्रकी गड्गड़ाहटके सदृश शब्द करनेवाले, बिजली और इन्द्रधनुषसे सुशोभित तथा स्वेच्छाचारी पर्वतको तरह दीखनेवाले मेघसमूहोंसे घिरा हुआ था। उसपर सवार होकर ऐश्वर्यशाली इन्द्र समस्त जगत्में भ्रमण करते हैं, यज्ञोंमें स्थित ब्राह्मणलोग यज्ञके प्रारम्भमें उसको प्रशंसा करते हैं, स्वर्गलोकमें उसपर बैठकर इन्द्रके प्रस्थित होनेपर उनके पीछे देवताओंकी तुरहियाँ बजने लगती हैं और सैकड़ों सुन्दरी अप्सराएँ संगठित

English

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अध्याय १३६

श्लोक 66

ततो ऽसुरा भीमगणेश्वरैर्हताः प्रहारसंवर्धितशोणितापगाः पराङ्मुखा भीममुखैः कृता रणे यथा नयाभ्युद्यततत्परैर्नरैः

tato 'surā bhīmagaṇeśvarairhatāḥ prahārasaṃvardhitaśoṇitāpagāḥ parāṅmukhā bhīmamukhaiḥ kṛtā raṇe yathā nayābhyudyatatatparairnaraiḥ

हिन्दी अर्थ

होकर नृत्य करती हैं। वह रथ शेषनागसे अङ्कित ध्वजसे युक्त होकर सूर्यकी भाँति शोभा पाता है तथा उसमें मन और वायुके समान वेगशाली एक हजार घोड़े जोते जाते हैं। उस समय मातलिद्वारा सुरक्षित वह श्रेष्ठ रथ उसी प्रकार सुशोभित हो रहा था, जैसे सूर्यके तेजसे पूर्णतया घिरा हुआ सुमेरुपर्वत हो

English

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अध्याय १३६

श्लोक 67

स तारकाख्यस् तडिन्मालिरेव च मयेन सार्धं प्रमथैरभिद्रुताः पुरं परावृत्य नु ते शरार्दिता यथा शरीरं पवनोदये गताः

sa tārakākhyas taḍinmālireva ca mayena sārdhaṃ pramathairabhidrutāḥ puraṃ parāvṛtya nu te śarārditā yathā śarīraṃ pavanodaye gatāḥ

हिन्दी अर्थ

इसी प्रकार कालसहित यमराज भी दण्ड और मुदूरको हाथमें लेकर अपने सिंहनादसे हैत्योंको भयभीत करते हुए देवसेनामें खड़े हुए। पाशधारी वरुण जलमय शरीर धारणकर देवसेनाके मध्यभागमें स्थित हुए। उनके साथ चारों सागर तथा जीभ लपलपाते हुए नाग भी थे, वे शङ्ख और मुक्ताजटि केयूर धारण किये हुए थे, हाथमें कालपाश लिये हुए थे, वायुके समान वेगशाली, चन्द्र-किरणोंके-से उज्ज्वल तथा जलाकार घोड़ोंसे युक्त रथपर सवार थे। वे हजारों प्रकारकी लीलाएँ कर रहे थे, पीले वस्त्र और प्रवालजटित आङ्गारसे विभूषित थे, उनकी शरीरकान्ति नीलमणिकी-सी सुन्दर थी, उन श्रेष्ठ देवपर इद्धने अपना भार सौंप रखा था। वे तटको छिन्न-भिन्न कर देनेवाले सागरकी तरह युद्ध-वेलाकी बाट जोह रहे थे।

English

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अध्याय १३६

श्लोक 68

गणेश्वराभ्युद्यतदर्पकाशिनो महेन्द्रनन्दीश्वरषण्मुखा युधि विनेदुरुच्चैर्जहसुश्च दुर्मदा जयेम चन्द्रादिदिगीश्वरैः सह

gaṇeśvarābhyudyatadarpakāśino mahendranandīśvaraṣaṇmukhā yudhi vineduruccairjahasuśca durmadā jayema candrādidigīśvaraiḥ saha

हिन्दी अर्थ

तत्पश्चात् निधियोंके अधिपति एवं विमानद्वारा युद्ध करनेवाले सामर्थ्यशाली राजराजेश्वर श्रीमान् कुबेर यक्षों,

English

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स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_matsyapurANa1-176.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Matsya Purana — Chapter 136
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.