अध्याय १३८
श्लोक 1
मत्स्य-पुराण १३८ मघवा तु निहन्तुं तानसुरानमरेश्वरः लोकपाला ययुः सर्वे गणपालाश्च सर्वशः
matsya-purāṇa 138 maghavā tu nihantuṃ tānasurānamareśvaraḥ lokapālā yayuḥ sarve gaṇapālāśca sarvaśaḥ
हिन्दी अर्थ
हुए। इस प्रकार और्वी मायाके सम्पर्कसे जलते हुए देवगण शीतल किरणोंवाले एवं जलप्रदाता इन्द्रकी शरणमें गये। और्व अग्निसे जलनेके कारण देवताओंकी चेतना नष्ट हो रही थी। तब संतप्त हुए देवगणोंने शरणकी इच्छासे वज्रधारी इन्द्रके पास जाकर उन्हें सूचित किया ॥१२--२१॥ इस प्रकार अपनी सेनाको मायाद्वारा संतप्त होती तथा दानवोंँद्वारा मारी जाती देखकर देवराज इन्द्रके पूछनेपर वरुणने इस प्रकार कहा--'इन्द्र! ऊर्व एक ब्रह्म्षिके पुत्र हैं। वे पहलेसे ही तेजस्वी और गुणोंमें ब्रह्माके समान थे। उन्होंने अत्यन्त कठोर तप किया था। जब उनकी तपस्यासे सारा जगत् सूर्यकी भाँति संतप्त हो उठा, तब उनके निकट देवर्षियोंसहित दिव्य महर्षिगण
English
Suta said: — Indra, then, the Lord of the Devas, wont with tlie LokapPdas and tlio atteu lants of i:ivato kill those 'lemons. They, encour- aged by Siv'a, began to fly in the atmospliore like tho wingnl mountains They started to destiMy Tripura like a <lisease setting out to attack the human body. The demons saw them a*h•lncing towards them blowing their conches and heating their (/rums. — 1-3