अध्याय १४१
श्लोक 1
मत्स्य-पुराण १४१ कथं गच्छत्यमावास्यां मासि मासि दिवं नृपः ऐलः पुरूरवाः सूत तर्पयेत कथं पितॄन् एतदिच्छामहे श्रोतुं प्रभावं तस्य धीमतः
matsya-purāṇa 141 kathaṃ gacchatyamāvāsyāṃ māsi māsi divaṃ nṛpaḥ ailaḥ purūravāḥ sūta tarpayeta kathaṃ pitṝn etadicchāmahe śrotuṃ prabhāvaṃ tasya dhīmataḥ
हिन्दी अर्थ
मातृकाओंको सृष्टि की, वे सभी महान् भाग्यशालिनी थीं। मैं उनके नामोंका वर्णन कर रहा हूँ, तुम उन्हें मुझसे श्रवण करो। उनके नाम हैं-घण्टाकर्णी, त्रैलोक्यमोहिनी, पुण्यमयी सर्वसत्त्ववशंकरी, चक्रहृदया, पाँचवीं व्योमचारिणी, शद्धिनी, लेखिनी और काल-संकर्षणी। राजन्! ये वागीश्वरीके पीछे चलनेवाली उनकी अनुचरी कही गयी हैं। राजन्! संकर्षणी, अश्वत्था, बीजभावा, अपराजिता, कल्याणी, मधुदंष्ट्री, कमला और उत्पलहस्तिका-
English
The lefiThd describe the, very same lotus as the terra-firma, the Maharfis call it the. lotus horn of H&rlyapa. Rasd,, also known as Padm& Devi, is the, earth. The weighty portions of the lotus are the moun- tains. — 3-4.