Matsya Purana· Matsya Purāṇa
155
अध्याय 155 / 176

Adhyaya 155

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अध्याय १५५

श्लोक 1

मत्स्य-पुराण १५५ शरीरे मम तन्वङ्गि सिते भास्यसितद्युतिः भुजंगीवासिता शुद्धा संश्लिष्टा चन्दने तरौ

matsya-purāṇa 155 śarīre mama tanvaṅgi site bhāsyasitadyutiḥ bhujaṃgīvāsitā śuddhā saṃśliṣṭā candane tarau

हिन्दी अर्थ

तब देवश्रेष्ठ इन्द्रने इधर-उधर जलाती हुई उस अग्निको बादलके जलसे चारों ओरसे शान्त कर दिया। तदनन्तर उस समुद्रके जलमें नाना प्रकारके रस, विशाल वृक्षोंके रस और ओषधियोंके रस अधिक मात्रामें टपकने लगे। उन अमृतके समान गुणकारी रसोंसे युक्त जलसे सुवर्णकी भाँति देदीप्यमान देवगण अमरताको प्राप्त हो गये। समुद्रका जल दुग्धके रूपमें परिणत हो गया था, पुनः अनेक प्रकारके रसोंके मिश्रणसे वह दुग्धसे घृतके

English

Yudliistliira saiil: — llrahmaria! I am desirous of hearing what Lord Brahma had said in the days gone by.— 1.

अध्याय १५५

श्लोक 2

चन्द्रातपेन संपृक्ता रुचिराम्बरया तथा रजनीवासिते पक्षे दृष्टिदोषं ददासि मे

candrātapena saṃpṛktā rucirāmbarayā tathā rajanīvāsite pakṣe dṛṣṭidoṣaṃ dadāsi me

हिन्दी अर्थ

ततो ब्रह्माणमासीनं देवा वचनमन्नुवन्। श्रान्ताः स्म सुभृशं ब्रह्मन् नोद्धवत्यमृतं च यत् ऋते नारायणात् सर्वे हैत्या देवोत्तमास्तथा । चिरायितमिदं चापि सागरस्य तु मन्थनम् ततो नारायणं देवं ब्रह्मा वचनमत्रवीत्। विधत्स्वैषां बलं विष्णो भवानेव परायणम्

English

How should people go to the sacred place of Prayiiga? Pray also tell me what benefits do they reap who die, bathe and live there? — 2.

अध्याय १५५

श्लोक 3

इत्युक्ता गिरिजा तेन मुक्तकण्ठा पिनाकिना उवाच कोपरक्ताक्षी भ्रुकुटीकुटिलानना

ityuktā girijā tena muktakaṇṭhā pinākinā uvāca koparaktākṣī bhrukuṭīkuṭilānanā

हिन्दी अर्थ

बलं ददामि सर्वेषां कर्मैतद् ये समास्थिताः। रूपमें परिवर्तित हो गया। तब वहाँ बैठे हए ब्रह्मासे देवताओंने इस प्रकार कहा--' ब्रह्मन्! हमलोग बहुत थक गये हैं, किंतु जो अभीतक अमृत नहीं निकला, इसका कारण यह है कि भगवान् विष्णुको छोड़कर हम सभी देवगण तथा हैत्यगण

English

THE MATSYA PD BAN AM.

अध्याय १५५

श्लोक 4

स्वकृतेन जनः सर्वो जाड्येन परिभूयते अवश्यमर्थी प्राप्नोति खण्डनां जनमण्डले

svakṛtena janaḥ sarvo jāḍyena paribhūyate avaśyamarthī prāpnoti khaṇḍanāṃ janamaṇḍale

हिन्दी अर्थ

समुद्रको मथनेमें देरी कर रहे हैं।' तब ब्रह्माने भगवान् विष्णुसे इस प्रकार कहा--'विष्णो! इन सबको बल प्रदान कीजिये; क्योंकि आप ही इनके शरणदाता हैं'॥ ७५--८१॥ भगवान् विष्णु बोले इस मन्थन-कार्यमें जितने लोग सम्मिलित हैं, उन सबको मैं बल प्रदान करता हूँ। अब सभी लोग मिलकर क्रमशः मन्दर पर्वतको घुमायें क्षुभ्यतां क्रमशः सर्वैर्मन्दरः परिवर्त्यताम्॥ ८२ । और सागरको क्षुब्ध करें

English

Mftrkandoya sJiid 'Son! I shall tell you the chief benefits from a pilgrimage to PrayAga, as I have heard them from the good sages in the past.— 3.

अध्याय १५५

श्लोक 5

तपोभिर्दीर्घचरितैर् यच्च प्रार्थितवत्यहम् तस्या मे नियतस्त्वेष ह्य् अवमानः पदे पदे

tapobhirdīrghacaritair yacca prārthitavatyaham tasyā me niyatastveṣa hy avamānaḥ pade pade

हिन्दी अर्थ

इति श्रीमत्स्ये महापुराणे ऽमृतमन्थने एकोनपञ्जाशदधिकद्विशततमोऽध्यायः इस प्रकार श्रीमत्स्यमहापुराणमें अमृत-मन्थन नामक दो सौ उनचासवाँ अध्याय सम्पूर्ण हुआ

English

From the site of the lcred Prayaga, in the town of Pratirfhana up to the deep pool of Vilsuki, tlio Kambala, Arfvatara and Bahu Mulaka, consecrated to the Naga., form the Prajapati-ksetra, which Is renowned in the three worlds. — 1.

अध्याय १५५

श्लोक 6

नैवास्मि कुटिला शर्व विषमा नैव धूर्जटे सविषयस्त्वं गतः ख्यातिं व्यक्तदोषाकराश्रयः

naivāsmi kuṭilā śarva viṣamā naiva dhūrjaṭe saviṣayastvaṃ gataḥ khyātiṃ vyaktadoṣākarāśrayaḥ

हिन्दी अर्थ

अमृतार्थं समुद्र-मन्थन करते समय चन्द्रमासे लेकर विषतकका प्रादुर्भाव सुरादेवी समुत्पन्ना तुरगः पाण्डुरस्तथा पारिजातश्च विकचकुसुमस्तबकाञ्चितः । अनन्तरमपश्यंस्ते धूममम्बरसंनिभम्

English

People who bathe there go to hea\cn. People who die there are liberated from the cycle of birth. Those who live there are guarded by the Devas, BruhniA, Ac. 0 Iviug! there are several other sacred tirthas that drive away sins which I would not be able to oinimcrate oven in the course of centuries: coiisoiiuently, 1 shall hrieHy confine myself to the narration of the virtues of Prayaga. — o-G.

अध्याय १५५

श्लोक 7

नाहं पूष्णो ऽपि दशना नेत्रे चास्मि भगस्य हि आदित्यश्च विजानाति भगवान्द्वादशात्मकः

nāhaṃ pūṣṇo 'pi daśanā netre cāsmi bhagasya hi ādityaśca vijānāti bhagavāndvādaśātmakaḥ

हिन्दी अर्थ

सूतजी कहते हैं-ऋषियो! भगवान् विष्णुकी बात सुनकर वे बलवान् सम्मिलित होकर उस महासमुद्रमें उसकी जलराशिको अत्यन्त क्षुभित करने लगे। इसके बाद समुद्रसे सौ सूर्योकी भाँति दीप्तिशाली शीतरश्मि उज्ज्वल चन्द्रमा उत्पन्न हुए। तत्पश्चात् समुद्रके जलसे पीले वस्त्रोंसे शोभित लक्ष्मी उत्पन्न हुई, फिर सुरादेवी तथा पीले रंगका घोड़ा उत्पन्न हुआ। तदनन्तर नारायणके वक्षःस्थलपर शोभित होनेवाली किरणोंसे व्याप्त, शोभा-

English

The Ganges is guarded l)y Gi>,i>00 the iainuna 'Jumna) by the.Sun drawn by liis sov'cn lurses, liio sacivd place Prayaga by lndra,aiid the •drciimfereucc of it by Lord Vi>nu, dlong with 'liior Devas. -• 7-8.

अध्याय १५५

श्लोक 8

मूर्ध्नि शूलं जनयसि स्वैर्दोषैर्मामधिक्षिपन् यस्त्वं मामाह कृष्णेति महाकालेति विश्रुतः

mūrdhni śūlaṃ janayasi svairdoṣairmāmadhikṣipan yastvaṃ māmāha kṛṣṇeti mahākāleti viśrutaḥ

हिन्दी अर्थ

सम्पन्न तथा अमृतसे उत्पन्न होनेवाली दिव्य कौस्तुभमणि उत्पन्न हुई। पुनः अनेक खिले हुए पुष्पोंके गुच्छंसे व्याप्त पारिजात प्रकट हुआ। तदुपरान्त देवताओं और हैत्योंने आकाशके समान नीले रंगके धुएँको निकलते हुए देखा, जो सभी दिशाओंमें परिव्याप्त और सभी तमाघ्राय सुराः सर्वे मूर्च्छिताः परिलम्बिताः॥ ६ प्राणियोंके लिये दुःसह था। उसे सूँघकर देवगण मूच्छित

English

The Akijayavata trea i• gUcirdrd l»y Si\a, anJ I lie Devas protect the -acrod places that ilispcl

अध्याय १५५

श्लोक 9

यास्याम्यहं परित्यक्त्वा चात्मानं तपसा गिरिम् जीवन्त्या नास्ति मे कृत्यं धूर्तेन परिभूतया

yāsyāmyahaṃ parityaktvā cātmānaṃ tapasā girim jīvantyā nāsti me kṛtyaṃ dhūrtena paribhūtayā

हिन्दी अर्थ

निरुक्त ७। २४ और निघण्टु, १। १२ के अनुसार घृतका जल अर्थ वेदोंमें बहुधा युक्त हुआ है। लक्ष्मीके प्राकट्यके समय इसका प्रयोग आवश्यक था।

English

King! the sinuerH i-» that sacred place. All

अध्याय १५५

श्लोक 10

निशम्य तस्या वचनं कोपतीक्ष्णाक्षरं भवः उवाचाविष्टसंभ्रान्तिप्रणयोन्मिश्रया गिरा

niśamya tasyā vacanaṃ kopatīkṣṇākṣaraṃ bhavaḥ uvācāviṣṭasaṃbhrāntipraṇayonmiśrayā girā

हिन्दी अर्थ

ज्चालामालाकुलाकारः समन्ताद् भीषणोऽचिषा। प्रधाना देवहैत्याश्च भीषितास्तेन वह्विना मशका भ्रमरा दंशा मक्षिकाः शलभास्तथा

English

minor sins arc waslnd..ff mcrclv b' 'h.' o hictahranco r,r that sacred place.— 10,

अध्याय १५५

श्लोक 11

अनात्मज्ञासि गिरिजे नाहं निन्दापरस्तव त्वद्भक्तिबुद्ध्या कृतवांस् तवाहं नामसंश्रयम्

anātmajñāsi girije nāhaṃ nindāparastava tvadbhaktibuddhyā kṛtavāṃs tavāhaṃ nāmasaṃśrayam

हिन्दी अर्थ

कर्णशल्याः कृकलासा अनेके चैव बभ्नमुः। प्राणिनो दंष्ट्रिणो रौद्रास्तथा हि विषजातयः शार्ङ्गहालाहलामुस्तवत्सकागुरु भस्मगाः ।

English

All the sms oi a inaii d»-c.|.j.c.n by iiic sighi. I'l'mcmbrance, or the rubbing on tht; bo<ly i.i ibc c!u> uf ilial phu-c. - U

अध्याय १५५

श्लोक 12

विकल्पः स्वस्थचित्ते ऽपि गिरिजे नैव कल्पना यद्येवं कुपिता भीरु त्वं तवाहं न वै पुनः

vikalpaḥ svasthacitte 'pi girije naiva kalpanā yadyevaṃ kupitā bhīru tvaṃ tavāhaṃ na vai punaḥ

हिन्दी अर्थ

लोकान्तरपूरकेण केशैश्च वहिप्रतिमैज्वलद्धि: केचिद् विलोक्यैव गता ह्यभावं केचित् त्ववाप्ता विषमामवस्थाम्

English

OKing! ilicrc an- ii\** d'Ct- < Irnn.iK ii. Prayaga. The Ganges Hows in tho inid'llc of ifU'in the iri'MicnP one enters

अध्याय १५५

श्लोक 13

नर्मवादी भविष्यामि जहि कोपं शुचिस्मिते शिरसा प्रणतश्चाहं रचितस्ते मयाञ्जलिः

narmavādī bhaviṣyāmi jahi kopaṃ śucismite śirasā praṇataścāhaṃ racitaste mayāñjaliḥ

हिन्दी अर्थ

श्वासेन तस्य निर्दग्धास्ततो विष्ण्वन्द्रदानवाः। दग्धाङ्कारनिभा जाता ये भूता दिव्यरूपिणः। ततस्तु सम्भ्रमाद् विष्णुस्तमुवाच सुरात्मकम् होकर गिरने लगे और हाथसे सिरको पकड़कर समुद्र- तटपर बैठ गये। तदनन्तर क्रमशः वह दुःसह अग्नि दिखायी पड़ी। उसका आकार ज्चालाओंसे व्याप्त था तथा चारों ओर फैली हुई लपटोंसे वह भीषण लग रही

English

the boundary of Pray ga,- -I J

अध्याय १५५

श्लोक 14

स्नेहेनाप्यवमानेन निन्दितेनैति विक्रियाम् तस्मान्न जातु रुष्टस्य नर्मस्पृष्टो जनः किल

snehenāpyavamānena ninditenaiti vikriyām tasmānna jātu ruṣṭasya narmaspṛṣṭo janaḥ kila

हिन्दी अर्थ

थी। उस अग्निसे प्राय: सभी देवता और दानवगण विक्षिप्त हो उठे और कुछ जले तथा कुछ अधजले हुए सभी दिशाओंमें घूमने लगे। इस प्रकार सभी प्रधान देव तथा हैत्यगण उस अग्निसे भयभीत हो गये। कुछ देरके बाद उस अग्निसे डुण्डुभ जातिके सर्प उत्पन्न हुए। उसी प्रकार काले, विशाल दाढ़ोंवाले, लाल, वायु पीकर तथा मशक, भ्रमर, डँसा, मक्खियाँ, पतंगे, कर्णशल्य, गिरगिट आदि अनेकों जीव उत्पन्न होकर इधर-उधर घूमने लगे। इनके अतिरिक्त अति भीषण दाढ़ोंवाले बहुत-से जीव तथा विषकी अनेकों जातियाँ उत्पन्न

English

The mer«3 1 of lif*' in»m (fio of a thousand

अध्याय १५५

श्लोक 15

अनेकैश्चाटुभिर्देवी देवेन प्रतिबोधिता कोपं तीव्रं न तत्याज सती मर्मणि घट्टिता

anekaiścāṭubhirdevī devena pratibodhitā kopaṃ tīvraṃ na tatyāja satī marmaṇi ghaṭṭitā

हिन्दी अर्थ

हुई--जैसे शार्ङ्ग, हालाहल, मुस्त, वत्स, अगुरु, भस्मग और नील-पत्र आदि। इसी प्रकार अन्य सैकड़ों भेदोपभेदवाले विष उत्पन्न हुए, जिनकी गन्धसे पर्वतोंके शिखर भी तुरंत ही जलने लगे तदनन्तर देवताओं और दानवोंने सागरके मध्यमें स्थित एक ऐसा स्वरूप देखा, जिसकी शरीर-कान्ति नीलरस, भ्रमर और घिसे हुए अञ्जनके समान काली थी, जो विषमरूपसे श्वास ले रहा था और शरीरसे

English

yojanas, niells away all {iio J'lio tin- evil deeds oven attain

अध्याय १५५

श्लोक 16

अवष्टब्धम् अथास्फाल्य वासः शंकरपाणिना विपर्यस्तालका वेगाद् यातुमैच्छत शैलजा

avaṣṭabdham athāsphālya vāsaḥ śaṃkarapāṇinā viparyastālakā vegād yātumaicchata śailajā

हिन्दी अर्थ

लोकान्तरको व्याप्त कर लिया था, जिसके केश जलती हुई अग्निके समान दिखायी पड़ रहे थे, जिसका शरीर सुवर्ण और मोतियोंसे विभूषित था, जो किरीट धारण किये हुए था, जिसके शरीरपर पीताम्बर सुशोभित था और देहकी कान्ति नीले कमलके समान थी, जो पुष्पोंद्वारा अलंकृत और मेघकी तरह अत्यन्त भयंकर रूपसे गर्जना कर रहा था तथा प्राणियोंके लिये शरीरधारी भयका आश्रयस्थान था। उस भीषण एवं उग्र नेत्रवाले स्वरूपको देखकर सभी प्राणी भयभीत हो उठे। कितने तो देखते ही चल बसे, कितने मूर्छित हो गये, कुछ मुखसे फेन उगलने लगे और कुछ लोग विषम अवस्थाको प्राप्त हो गये। उसकी श्वाससे विष्णु, इन्द्र

English

emancipation by lin; meie niehtion of the sacred iiarno of the (langos. — 13.

अध्याय १५५

श्लोक 17

तस्या व्रजन्त्याः कोपेन पुनराह पुरान्तकः सत्यं सर्वैरवयवैः सुतासि सदृशी पितुः

tasyā vrajantyāḥ kopena punarāha purāntakaḥ satyaṃ sarvairavayavaiḥ sutāsi sadṛśī pituḥ

हिन्दी अर्थ

दिव्य रूपवाले थे, वे जले हुए अंगारके समान हो गये। तब भगवान् विष्णुने भयभीत होकर उस सुरात्मकसे इस प्रकार प्रश्‍न किया श्रीभगवानुवाच को भवानन्तकप्रख्यः किमिच्छसि कुतोऽपि च। किं कृत्वा ते प्रियं जायेदेवमाचक्ष्व मेऽखिलम्

English

The sins disappear by the iittoranco .f the naino of the Ganges, the sight of Her leudrt iC) [)rosperity; aiid the bal.liing in ainl drinking of ' Her sacre'l walcj purifier one'- soni along witli tle*se of his ancestors, for 7 generation. — 14.

अध्याय १५५

श्लोक 18

हिमाचलस्य शृङ्गैस्तैर् मेघजालाकुलैर्नभः तथा दुरवगाह्येभ्यो हृदयेभ्यस्तवाशयः

himācalasya śṛṅgaistair meghajālākulairnabhaḥ tathā duravagāhyebhyo hṛdayebhyastavāśayaḥ

हिन्दी अर्थ

तच्च तस्य वचः श्रुत्वा विष्णोः कालाग्निसंनिभः। उवाच कालकूटस्तु भिन्नदुन्दुभिनिःस्वनः अहं हि कालकूटाख्यो विषोऽम्बुधिसमुद्भवः । यदा तीव्रतरामर्षैः परस्परवधैषिभिः सम्भूतोऽहं तदा सर्वान् हन्तुं देवान् सदानवान्

English

Those who Spoil's Tne irnth, keep tlnnn.sidvos free from anger and the vice of killing or eausing pain to living beings, are wise and learned, are the lovers of the cow and Pirahniiina are libeiated from their sins and attain the fruits of their desire hy bathing at the confluence of the Ganges and the Yamuna. 'lo-lG.

अध्याय १५५

श्लोक 19

काठिन्याङ्कस्त्वमस्मभ्यं वनेभ्यो बहुधा गता कुटिलत्वं च वर्त्मभ्यो दुःसेव्यत्वं हिमादपि संक्रान्तिं सर्वदैवेति तन्वङ्गि हिमशैलराट्

kāṭhinyāṅkastvamasmabhyaṃ vanebhyo bahudhā gatā kuṭilatvaṃ ca vartmabhyo duḥsevyatvaṃ himādapi saṃkrāntiṃ sarvadaiveti tanvaṅgi himaśailarāṭ

हिन्दी अर्थ

ब्रह्मविष्णू पुरस्कृत्य गतास्ते शङ्करान्तिकम् मन्दरस्य गुहां हैमीं मुक्तामणिविभूषिताम्। सुस्वच्छमणिसोपानां वैदूर्यस्तम्भमण्डिताम्

English

Those who maintain their sexual purity for a month in that sacred

अध्याय १५५

श्लोक 20

इत्युक्ता सा पुनः प्राह गिरिशं शैलजा तदा कोपकम्पितमूर्धा च प्रस्फुरद्दशनच्छदा

ityuktā sā punaḥ prāha giriśaṃ śailajā tadā kopakampitamūrdhā ca prasphuraddaśanacchadā

हिन्दी अर्थ

तत्र देवासुरैः सर्वैर्जानुभिर्धरणिं गतैः। ब्रह्माणमग्रतः कृत्वा इदं स्तोत्रमुदाहृतम् नमस्त्रैलोक्यनाथाय नमः सुरारिहन्त्रे च सोमाग्न्यर्काग्र्यचक्षुषे। ब्रह्मणे चैव रूद्राय नमस्ते विष्णुरूपिणे

English

OBAPTBU GV.

अध्याय १५५

श्लोक 21

मा सर्वान्दोषदानेन निन्दान्यान्गुणिनो जनान् तवापि दुष्टसंपर्कात् संक्रान्तं सर्वमेव हि

mā sarvāndoṣadānena nindānyānguṇino janān tavāpi duṣṭasaṃparkāt saṃkrāntaṃ sarvameva hi

हिन्दी अर्थ

ब्रह्मणे वेदरूपाय नमस्ते देवरूपिणे। सांख्ययोगाय भूतानां नमस्ते शम्भवाय ते मन्मथाङ्गविनाशाय नमः कालक्षयंकर। रंहसे देवदेवाय नमस्ते

English

place, protected by the Devau, and offer libations of water to the inanca of the deceased ancestors and to the Gods, always attain what they desire, wherever they are born. — 17.

अध्याय १५५

श्लोक 22

व्यालेभ्यो ऽनेकजिह्वत्वं भस्मना स्नेहबन्धनम् हृत्कालुष्यं शशाङ्कात्तु दुर्बोधित्वं वृषादपि

vyālebhyo 'nekajihvatvaṃ bhasmanā snehabandhanam hṛtkāluṣyaṃ śaśāṅkāttu durbodhitvaṃ vṛṣādapi

हिन्दी अर्थ

श्रीभगवानूने पूछा-यमराजके समान आप कौन हैं? क्या चाहते हैं? और कहाँसे आ रहे हैं? क्या करनेसे आपकी कामना पूर्ण होगी? ये सभी बातें मुझे बताइये । भगवान् विष्णुकी वह बात सुनकर कालाग्निके समान भयंकर एवं फटी हुई दुन्दुभिके समान बोलनेवाला कालकूट बोला कालकूटने कहा--विष्णो! मैं समुद्रसे उत्पन्न हुआ कालकूट नामक विष हूँ। जब परस्पर एक-दूसरेके वधके अभिलाषी देवता तथा हैत्योंद्वारा उग्र वेगसे अद्भुत क्षीरसागर मथा गया, तब मैं उन सभी देवताओं और

English

Tiie Goddess Yamuna — the daughter of the Sun, renowned in all tlu' three worlds — is present in Prayuga, and the place where she meets is the abode of iva. — 18.

अध्याय १५५

श्लोक 23

तथा बहु किमुक्तेन अलं वाचा श्रमेण ते श्मशानवासान् निर्भीस् त्वं नग्नत्वान्न तव त्रपा निर्घृणत्वं कपालित्वाद् दया ते विगता चिरम्

tathā bahu kimuktena alaṃ vācā śrameṇa te śmaśānavāsān nirbhīs tvaṃ nagnatvānna tava trapā nirghṛṇatvaṃ kapālitvād dayā te vigatā ciram

हिन्दी अर्थ

दानवोंका संहार करनेके लिये उत्पन्न हुआ हूँ । मैं क्षणभरमें ही सभी शरीरधारियोंका संहार कर सकता हुँ। अतः ये सभी लोग या तो मुझे निगल जायँ अथवा शंकरकी शरणमें जायँँ। कालकूटकी वह बात सुनकर देवता और असुर भयभीत हो गये, तब वे ब्रह्मा और विष्णुको आगे करके शंकरजीके पास जानेके लिये प्रस्थित हुए। वहाँ पहुँचनेपर द्वारपाल गणेश्वरोंने जाकर शिवजीसे देवताओं और हैत्योंके आगमनकी सूचना दी। तब शंकरजीसे

English

The merit of a pilgrimage to the Ganges at the saered place of Prayuga, does not fall to the lot of every one, 0 King! The Devas, the Dd.navas, the fiisis, the Siddhas and the Oharanas — they all go to heaven by bathing at Prayfiga. — 19.

अध्याय १५५

श्लोक 24

इत्युक्त्वा मन्दिरात्तस्मान् निर्जगाम हिमाद्रिजा

ityuktvā mandirāttasmān nirjagāma himādrijā

हिन्दी अर्थ

आज्ञा पाकर वे लोग शिवजीके निकट मन्दराचलकी उस सुवर्णमयी गुफामें गये, जो मुक्तामणियोंसे विभूषित थी, जिसमें स्वच्छ मणिजटित सीढ़ियाँ लगी थीं और जो वैदूर्य मणिके स्तम्भसे शोभायमान थी। वहाँ ब्रह्माजीको आगे कर सभी देवताओं और असुरोंने पृथिवीपर घुटने टेककर शिवजीको (पञ्चाङ्ग) नमस्कार किया और फिर वे इस स्तोत्रका पाठ करने लगे नमस्कार है। दिव्य नेत्रधारी आपको प्रणाम है। आप अपने हाथोंमें पिनाक, वज्र और धनुष धारण करनेवाले हैं, आपको अभिवादन है। हाथमें त्रिशूल और दण्ड धारण करनेवाले जटाधारीको नमस्कार है। आप त्रिलोकीनाथ

English

Here anfh the, one hundred and fourtlt eliapfer deserihinfj the 'jveatneBx

अध्याय १५५

श्लोक 25

तस्यां व्रजन्त्यां देवेशगणैः किलकिलो ध्वनिः क्व मातर्गच्छसि त्यक्त्वा रुदन्तो धाविताः पुनः

tasyāṃ vrajantyāṃ deveśagaṇaiḥ kilakilo dhvaniḥ kva mātargacchasi tyaktvā rudanto dhāvitāḥ punaḥ

हिन्दी अर्थ

और प्राणिसमूहके शरीररूप हैं, आपको प्रणाम है। देव- शत्रुओंका संहार करनेवाले तथा चन्द्रमा, अग्नि और सूर्यरूप नेत्र धारण करनेवालेको अभिवादन है। ब्रह्मा, विष्णु और रुद्ररूप आपको नमस्कार है। आप ब्रह्मस्वरूप, वेदस्वरूप और देवरूप हैं, आपको प्रणाम है। आप सांख्ययोगस्वरूप और प्राणियोंका कल्याण करनेवाले हैं, आपको अभिवादन है। कामदेवके शरीरके विनाशक और कालके क्षयकर्ता आपको नमस्कार है। आप वेगशाली,

English

of Prayofja.

अध्याय १५५

श्लोक 26

विष्टभ्य चरणौ देव्या वीरको बाष्पगद्गदम् प्रोवाच मातः किंत्वेतत् क्व यासि कुपितान्तरा

viṣṭabhya caraṇau devyā vīrako bāṣpagadgadam provāca mātaḥ kiṃtvetat kva yāsi kupitāntarā

हिन्दी अर्थ

बसुरेतसे॥ ३२ देवाधिदेव और वसुरेता हैं, आपको प्रणाम है। सर्वश्रेष्ठ उमाभरत्रे नमस्तुभ्यं यज्ञत्रिपुरघातिने लोकत्रयविधात्रे च वरुणेन्द्राग्गिरूपिणे

English

of Prayofja.

अध्याय १५५

श्लोक 27

अहं त्वामनुयास्यामि व्रजन्तीं स्नेहवर्जिताम् नो चेत्पतिष्ये शिखरात् तपोनिष्ठे त्वयोज्झितः

ahaṃ tvāmanuyāsyāmi vrajantīṃ snehavarjitām no cetpatiṣye śikharāt taponiṣṭhe tvayojjhitaḥ

हिन्दी अर्थ

रजसे चैव सत्त्वाय तमसे तिमिरात्मने। अनित्यनित्यभावाय नमो नित्यचरात्मने धन्विने रथिने चैव यतये ब्रह्मचारिणे। इत्येवमादिचरितैः स्तुतं तुभ्यं नमो नमः

English

of Prayofja.

अध्याय १५५

श्लोक 28

उन्नाम्य वदनं देवी दक्षिणेन तु पाणिना उवाच वीरकं माता शोकं पुत्रक मा कृथाः

unnāmya vadanaṃ devī dakṣiṇena tu pāṇinā uvāca vīrakaṃ mātā śokaṃ putraka mā kṛthāḥ

हिन्दी अर्थ

किं वाभीष्टं ददाम्यद्य कामं प्रब्रत मा चिरम्। इत्युक्तास्ते तु देवेन प्रोचुस्तं ससुरासुराः अमृतार्थं महादेव मध्यमाने महोदधौ। विषमद्भुतमुद्भूतं लोकसंक्षमकारकम् स॒ उवाचाथ सर्वेषां देवानां भयकारकः। सर्वान् वो भक्षयिष्यामि अथवा मां पिबन्त्वथ

English

of Prayofja.

अध्याय १५५

श्लोक 29

शैलाग्रात्पतितुं नैव न चागन्तुं मया सह युक्तं ते पुत्र वक्ष्यामि येन कार्येण तच्छृणु

śailāgrātpatituṃ naiva na cāgantuṃ mayā saha yuktaṃ te putra vakṣyāmi yena kāryeṇa tacchṛṇu

हिन्दी अर्थ

विष्णुः कृष्णः कृतस्तेन यमश्च विषमात्मवान्। वीर, सर्वस्वरूप और पीले रंगकी जटा धारण करनेवालेको अभिवादन है। उमाके पति तथा यज्ञ एवं त्रिपुरका विनाश करनेवाले आपको नमस्कार है। आप शुद्ध ज्ञानसे परिपूर्ण, मुक्त कैवल्यरूप, तीनों लोकोंके विधाता, वरुण, इन्द्र

English

of Prayofja.

अध्याय १५५

श्लोक 30

कृष्णेत्युक्त्वा हरेणाहं निन्दिता चाप्यनिन्दिता सार्हं तपः करिष्यामि येन गौरीत्वमाप्नुयाम्

kṛṣṇetyuktvā hareṇāhaṃ ninditā cāpyaninditā sārhaṃ tapaḥ kariṣyāmi yena gaurītvamāpnuyām

हिन्दी अर्थ

और अग्निके स्वरूप, ऋकू, यजुः और सामवेदरूप, पुरुषोत्तम, परमेश्वर, सर्वश्रेष्ठ, भयंकर, ब्राह्मणस्वरूप, श्रुतिरूप नेत्रवाले, सत्त्व, रजस्, तमस्-तीनों गुणोंसे युक्त अन्धकारस्वरूप, अनित्य और नित्य भावसे सम्पन्न तथा नित्यचरात्मा हैं। आपको प्रणाम है। आप व्यक्त, अव्यक्त और व्यक्ताव्यक्त हैं, आपको अभिवादन है। आप भक्तोंको पीड़ाके विनाशक, नारायणके मित्र, उमाके प्रियतम, संहारकर्ता, नन्दीके मुखसे सुशोभित, मन्वन्तर- सिरवाले, स्थूल दण्ड और कवच धारण करनेवाले,

English

of Prayofja.

अध्याय १५५

श्लोक 31

एष स्त्रीलम्पटो देवो यातायां मय्यनन्तरम् द्वाररक्षा त्वया कार्या नित्यं रन्ध्रान्ववेक्षिणा

eṣa strīlampaṭo devo yātāyāṃ mayyanantaram dvārarakṣā tvayā kāryā nityaṃ randhrānvavekṣiṇā

हिन्दी अर्थ

और ब्रह्मचारी हैं, आपको नमस्कार है। इस प्रकारके अनेकों चरि्रॉँसे स्तुत होनेवाले आपको बारंबार प्रणाम है। इस प्रकार देवासुरोंद्वारा स्तवन किये जानेपर शंकरजी प्रसन्न हो गये। तब वे उन भयभीत देवासुरोंसे मुसकराते हुए सुन्दर अक्षरोंसे युक्त वचन बोले॥ २८--४१॥ भगवान् श्रीशंकरने कहा--देवता एवं दानवो! तुम्हारे मुखकमल भयके कारण मलिन दीख रहे हैं, बतलाओ, तुमलोग यहाँ किसलिये आये हो? मैं आज

English

of Prayofja.

अध्याय १५५

श्लोक 32

यथा न काचित् प्रविशेद् योषिदत्र हरान्तिकम् दृष्ट्वा परांस्त्रियं चात्र वदेथा मम पुत्रक

yathā na kācit praviśed yoṣidatra harāntikam dṛṣṭvā parāṃstriyaṃ cātra vadethā mama putraka

हिन्दी अर्थ

तुमलोगोंको कौन-सी अभीष्ट वस्तु दूँ, यह निर्भय होकर बतलाओ, देर मत करो। भगवान् शंकरद्वारा ऐसा कहे जानेपर देवासुरोंने उनसे इस प्रकार कहा देवासुर बोले-महादेव! अमृतके लिये महासागरको मथते समय अद्भुत विष उत्पन्न हुआ है, जो सभी लोकोंका विनाश करनेवाला है। सभी देवताओंको भयभीत करनेवाले उस विषने स्वयं कहा है कि “मैं तुम सभीको खा जाऊँगा, अन्यथा तुमलोग मुझे पी जाओ।' ऐसी दशामें हमलोग उस विषको पान करनेमें सर्वथा असमर्थ हैं, किंतु वह महाबली विष हमलोगोंको खा सकता है। उसने अपने निःश्वासमात्रसे सैकड़ों चन्द्रमाके समान कान्तिमान्

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of Prayofja.

अध्याय १५५

श्लोक 33

शीघ्रम् एव करिष्यामि यथायुक्तम् अनन्तरम् एवमस्त्विति देवीं स वीरकः प्राह सांप्रतम्

śīghram eva kariṣyāmi yathāyuktam anantaram evamastviti devīṃ sa vīrakaḥ prāha sāṃpratam

हिन्दी अर्थ

भगवान् विष्णुको कृष्णवर्ण तथा यमराजको विक्षिप्त कर दिया है। कुछ लोग मूर्छित हो गये हैं और कुछ नष्ट हो गये। विषमेतत् समुद्भूतं तस्माद् वामृतकाङ्क्षया। अस्माद् भयान्मोचय त्वं गतिस्त्वं च परायणम्

English

of Prayofja.

अध्याय १५५

श्लोक 34

मातुराज्ञामृताह्लादप्लाविताङ्गो गतज्वरः जगाम कक्षां संद्रष्टुं प्रणिपत्य च मातरम्

māturājñāmṛtāhlādaplāvitāṅgo gatajvaraḥ jagāma kakṣāṃ saṃdraṣṭuṃ praṇipatya ca mātaram

हिन्दी अर्थ

सज्ञाग्रभुक् सर्वहविः सौम्यः सोमः स्मरान्तकृत् त्वमेको नो गतिर्देव गीर्वाणगणशर्मकृत्। रक्षास्मान् भक्षसंकल्पाद् विरूपाक्ष विषज्चरात् तच्छुत्वा भगवानाह भगनेत्रान्तकृद् भवः

English

of Prayofja.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_matsyapurANa1-176.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Matsya Purana — Chapter 155
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.