अध्याय ४४
श्लोक 1
मत्स्य-पुराण ४४ किमर्थं तद्वनं दग्धम् आपवस्य महात्मनः कार्तवीर्येण विक्रम्य सूत प्रब्रूहि तत्त्वतः
matsya-purāṇa 44 kimarthaṃ tadvanaṃ dagdham āpavasya mahātmanaḥ kārtavīryeṇa vikramya sūta prabrūhi tattvataḥ
हिन्दी अर्थ
अमित तेजस्वी पुत्रोंकी संख्या एक सौ थी। वे सभी राजा थे और नीप नामसे ही विख्यात थे। काव्यसे समर नामक पुत्र उत्पन्न हुआ, जो उन नीपवंशियोंका वंशप्रवर्तक, लक्ष्मीसे युक्त और कीर्तिवर्धक था। वह समरके लिये सदा प्रयत्नशील रहता था। समरके पार, सम्पार और सदश्च-ये तीन पुत्र हुए, जो सम्पूर्ण गुणोंसे सम्पन्न तथा भूतलपर विख्यात थे। पारका पुत्र पृथु हुआ और पृथुसे सुकृतकी उत्पत्ति हुई। विशेष द्रष्टव्य-ऋवेदसंहिता- ८।५५। ४, ब्राह्मणोत्पत्ति मार्तण्ड, भागवत १२। १। ४९ तथा पुनः मत्स्यपुराण १९१
English
The Risis said Sflta! Why did the thousand-armed King ESrta- vlrya, burn the forest of the Sage Apara? Please tell us fully the reason of his having done so. We have been given to understand that that royal sage was the protector of his subjects; how then did he bum the forest of that ascetic. — 1-2.