अध्याय ५६
श्लोक 1
मत्स्य-पुराण ५६ कृष्णाष्टमीमथो वक्ष्ये सर्वपापप्रणाशिनीम् शान्तिर्मुक्तिश्च भवति जयः पुंसां विशेषतः
matsya-purāṇa 56 kṛṣṇāṣṭamīmatho vakṣye sarvapāpapraṇāśinīm śāntirmuktiśca bhavati jayaḥ puṃsāṃ viśeṣataḥ
हिन्दी अर्थ
बादल, नद-ये सभी सम्पूर्ण कामनाओंकी सिद्धिके लिये तुम्हारा अभिषेक करें'॥ ४९--५७॥ इस प्रकार श्रेष्ठ ब्राह्मणद्वारा सर्वौषध एवं सम्पूर्ण सुगन्धित पदार्थोसे युक्त जलसे स्त्रान करा दिये जानेके पश्चात् सपत्नीक यजमान श्वेत वस्त्र धारण करके श्वेत चन्दनका अनुलेपन करे और विस्मयरहित होकर शान्तचित्तवाले ऋत्विजोंका प्रयत्नपूर्वक दक्षिणा आदि देकर पूजन करे तथा सूर्यके लिये कपिला गौका, चन्द्रमाके लिये शङ्कका, मंगलके लिये भार वहन करनेमें समर्थ एवं ऊँचे डीलवाले लाल रंगके बैलका, बुधके लिये सुवर्णका,
English
The tirtha of Prayaga i.s by its own virtue sacred of all the tirthas. The place having the Ganges along \yth 3 crores aiul 10,000 tirthas is the holiest of all. The whole of Prayaga is sacred owing to its being situated on the banks of tlie Ganges. -—1 1-12.