अध्याय ६७
श्लोक 1
मत्स्य-पुराण ६७ चन्द्रादित्योपरागे तु यत्स्नानमभिधीयते तदहं श्रोतुमिच्छामि द्रव्यमन्त्रविधानवित्
matsya-purāṇa 67 candrādityoparāge tu yatsnānamabhidhīyate tadahaṃ śrotumicchāmi dravyamantravidhānavit
हिन्दी अर्थ
भारत! यह प्रयाग तीनों लोकोंमें विख्यात है। इससे बढ़कर पुण्यप्रद तीर्थ तीनों लोकोंमें दूसरा नहीं है। इस प्रयागतीर्थका नाम सुननेसे, इसके नामोंका संकीर्तन करनेसे अथवा इसको मिट्टीका स्पर्श करनेसे मनुष्य पापसे छूट जाता है। जो व्रतनिष्ठ मनुष्य उस संगममें स्त्रान करता है, उसे राजसूय और अश्वमेध-यज्ञोंके समान फलकी प्राप्ति होती है। तात! इसलिये न तो किसी वेद-वचनसे, न लोगोंके आग्रहपूर्ण कथनसे ही तुम्हें प्रयाग-मरणके प्रति
English
Khasa or KliaM=A. mountainous country in the North of India.