Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
11
अध्याय 11 / 20

Kanda 11

काण्ड 11

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पूर्ण अध्याय पाठ161 श्लोक

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अध्याय ११

श्लोक 4.1

प्राणः।१-२६ भार्गवो वैदर्भिः।प्राणः।अनुष्टुप्, १ शङ्कुमती, ८ पथ्यापङ्क्तिः, १४ निचृत्, १५ भुरिक्, २० अनुष्टुगर्भा त्रिष्टुप्, २१ मध्येज्योतिर्जगती, २२ त्रिष्टुप्, २६ बृहतीगर्भा।प्रा॒णाय॒ नमो॒ यस्य॒ सर्व॑मि॒दं वशे॑ ।यो भू॒तः सर्व॑स्येश्व॒रो यस्मि॒न्त्सर्वं॒ प्रति॑ष्ठितम्

prāṇaḥ| 1-26 bhārgavo vaidarbhiḥ| prāṇaḥ| anuṣṭup, 1 śaṅkumatī, 8 pathyāpaṅktiḥ, 14 nicṛt, 15 bhurik, 20 anuṣṭugarbhā triṣṭup, 21 madhyejyotirjagatī, 22 triṣṭup, 26 bṛhatīgarbhā| prāṇāya namo yasya sarvamidaṃ vaśe | yo bhūtaḥ sarvasyeśvaro yasmintsarvaṃ pratiṣṭhitam

हिन्दी अर्थ

उपनयमानः- उपनयन -संस्कार हारा निज सामप्यमे लाता हृश्रा । वतंमान काल में पुरोहित बच्चो का उपनयन तो करा देते है, परन्तु उन के साथ समीपता में नहीं रहते । ब्रह्मचारिणम् = उपनयन के परचात् चारी को निज सामीप्य म लेकर उसकी रक्षा तथा पालन-पोषण इस प्रकार करे जते कि माता गभभेस्थ बच्चे की रक्षा. तथा पालन-पोषण करती है । यह काल रात्रीरूप है । इस कालं को ब्रह्मचारी निज. के लिये अन्धकाररूप कां० ११। सू० ५ भरथर्वेवेद-माष्य १२५

English

Together let all spirits meet: may these deliver us from woe. The five Sky regions, Goddesses, and the twelve Seasons which are Gods.

अध्याय ११

श्लोक 4.2

नम॑स्ते प्राण॒ क्रन्दा॑य॒ नम॑स्ते स्तनयि॒त्नवे॑ ।नम॑स्ते प्राण वि॒द्युते॒ नम॑स्ते प्राण॒ वर्ष॑ते

namaste prāṇa krandāya namaste stanayitnave | namaste prāṇa vidyute namaste prāṇa varṣate

हिन्दी अर्थ

कहीं से न रुकने वाली गति से अ्रभीष्ट स्थानो पर जा सकता है, भरन्यथा नही" । १३२ भ्रथववेद-भाष्य कां० ११ । सू9 ५, षवेतों पर (रेतः) जल (सिञ्चति) सचता है, (तेन) उस ढारा (पृथि- चारी) ब्रह्मचारी, (भूमौ) भूमिम (सानौ) मरौर पवंतों में (रेतः) निज सदुपदेशो का जल (सिञ्चति) सींचता है; (तेन) भ्रौर उस दारा (पृथि-

English

Verse, Song, and Sacrificial Text, chanting, the prelude, and the laud,

अध्याय ११

श्लोक 4.3

यत् प्रा॒ण स्त॑नयि॒त्नुना॑भि॒क्रन्द॒त्योष॑धीः ।प्र वी॑यन्ते॒ गर्भा॑न् दध॒तेऽथो॑ ब॒ह्वीर्वि जा॑यन्ते

yat prāṇa stanayitnunābhikrandatyoṣadhīḥ | pra vīyante garbhān dadhate'tho bahvīrvi jāyante

हिन्दी अर्थ

पक्षाः पक्षिणैश्च ये ते जाता ब्रह चारिणः ॥२१॥ का०११। सु०भ . श्रथरववेद-माष्य । १३७ . भौर जो ग्रामवासी (भ्रपक्षाः पशवः) पंलों से रहित पशुरहै, तथा (ये) (ब्रह्मचारिणः जाताः) ब्रह्मचारी हृए है 1 = २8

English

Call, deep-toned summons are therein, fine parts, through lore, of sacrifice,

अध्याय ११

श्लोक 4.4

यत् प्रा॒ण ऋ॒तावाग॑तेऽभि॒क्रन्द॒त्योष॑धीः ।सर्वं॑ त॒दा प्र मो॑दते॒ यत् किं च॒ भूम्या॒मधि॑

yat prāṇa ṛtāvāgate'bhikrandatyoṣadhīḥ | sarvaṃ tadā pra modate yat kiṃ ca bhūmyāmadhi

हिन्दी अर्थ

को पेदा करते हैँ । भ्रतः वे.भी नियत कालों के ब्रह्मचारी हए है । भ्राणि्यो के पालन कौ विधियो का भी ज्ञान विद्यमान है । उस ज्ञान के प्मौर प्राणियों की रक्षा करता है । देवानामेत् धरिषतमन॑भ्यारूढं चरति रोचमानम् ।

English

Sacrifice of four nights, of five, of six nights, day and night conjoined, Shodai, seven-night sacrifice, all these sprang from the Residue, these which the Immortal

अध्याय ११

श्लोक 4.5

य॒दा प्रा॒णो अ॒भ्यव॑र्षीद् व॒र्षेण॑ पृथि॒वीं म॒हीम्।प॒शव॒स्तत् प्र मो॑दन्ते॒ महो॒ वै नो॑ भविष्यति

yadā prāṇo abhyavarṣīd varṣeṇa pṛthivīṃ mahīm| paśavastat pra modante maho vai no bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

शक्तियां (्रमतेन साकम्) प्रजर-प्रमर परमेदवर के साथ मिल जाती है, परमेदवरीय कार्यो के भ्रचुल्प हो जतोदहैँ। १३८ भ्रथवेवेद-माष्य कां० ११ । सु०भ् भी एतद्नुरूप हो जाते है (मन्त्र ५) ।

English

One contains.

अध्याय ११

श्लोक 4.6

अ॒भिवृ॑ष्टा॒ ओष॑धयः प्रा॒णेन॒ सम॑वादिरन्।आयु॒र्वै नः॒ प्राती॑तरः॒ सर्वा॑ नः सुर॒भीर॑कः

abhivṛṣṭā oṣadhayaḥ prāṇena samavādiran| āyurvai naḥ prātītaraḥ sarvā naḥ surabhīrakaḥ

हिन्दी अर्थ

रथात् वेद का धारण तथा पोषण करता. है, (तस्मिन् भ्रधि) . उस वेद! में देवाः समोताः वेद मेँ सब दिव्य त॑त्व समवेत है, भोत-पोत है । अतिरिक्त वेद की सत्ता नहीं, वेद देवतामय ही है । इसलिये जिस ब्रह्म का० ११। सु०१ भथदेवेद-माष्य १३ ९

English

Pratihāra and Nidhanam, the Visvajit, the Abhijit, The two Sāhnātirātrās and Twelve-day rite are stored therein.

अध्याय ११

श्लोक 4.7

नम॑स्ते अस्त्वाय॒ते नमो॑ अस्तु पराय॒ते।नम॑स्ते प्राण॒ तिष्ठ॑त॒ आसी॑नायो॒त ते॒ नमः॑

namaste astvāyate namo astu parāyate| namaste prāṇa tiṣṭhata āsīnāyota te namaḥ

हिन्दी अर्थ

पर (श्रतिष्ठत्) जब स्थित होने भँ समथं हो जाता है, तब (तानि) उन वान् कर देता है । (सः) वह (स्नातः) स्नातकं होकर, (बभ्र) सवका में (बहु रोचते) बहुत रुचिकर भर्थात् प्रिय होता या चमक्ता है । - मादि सिद्धि के कारण योगी जल पर स्थित हो सकता है । मन्त्र में “सलि-

English

Pleasantness, reverence, peace, and power, strength, vigour, immortality

अध्याय ११

श्लोक 4.8

नम॑स्ते प्राण प्राण॒ते नमो॑ अस्त्वपान॒ते।प॒रा॒चीना॑य ते॒ नमः॑ प्रती॒चीना॑य ते॒ नमः॑ सर्व॑स्मै त इ॒दं नमः॑

namaste prāṇa prāṇate namo astvapānate| parācīnāya te namaḥ pratīcīnāya te namaḥ sarvasmai ta idaṃ namaḥ

हिन्दी अर्थ

दारा विहरण करने कां कथन किथा है । तथा “उदाननयानज्जलपंककण्ट- भे.संयम द्वारा जल भादि मेंयोगी काप्रतिरोष नहीं होता! उदान वायु भथरवैः ११।५।११ की व्याख्या देखो । "प्ाक्षेतिके दो भरं है, (१) भा.-निवासं करता है, (२) तथा वहं तक गति. करता है । “क्षिं निवासमत्योः” । “निवास करे का १४० अथववेद-माष्य. का०-११। सु०६

English

All forward wishes are with love satisfied in the Residue. Nine several oceans, earths, and skies are set within, the Residue,

अध्याय ११

श्लोक 4.9

या ते॑ प्राण प्रि॒या त॒नूर्यो ते॑ प्राण॒ प्रेय॑सी ।अथो॒ यद् भे॑ष॒जं तव॒ तस्य॑ नो धेहि जी॒वसे॑

yā te prāṇa priyā tanūryo te prāṇa preyasī | atho yad bheṣajaṃ tava tasya no dhehi jīvase

हिन्दी अर्थ

करते है" एसा किया है । सरायणाचायं ने इन मन्त्रौ मे .पटित श्रमः के दो भ्रथं दिये है, “स्तुमः यहा इष्टफलं याचामहे" । मन्त मे भरोषधियों, जड़ (६) मन्व ( १४) में “ऋचः, , सामानि, भेषजा यजं षि" मं “भेषजा” पद भौषध प्रघान श्रथंववेद काः निर्देशक है । ऋचः भरौरः सामानि का प्रायः का ११। सु०६. अथरववेवेद-माष्य १४१ इकटा वर्णन वेदो मे हृश्रा है । क्योंकि इन दोनों का परस्पर भआधाराषेय का सम्बन्ध है । ऋचाभ्रों के भ्राधाएर परसाम.गाया जातादहै, जसे किं गेय रचना पर राग या गान । इन दोनों भ्रौर यज् षि के मध्य में “भेषजा पद प्टितं है" यह दशानि के लिये कि “भेषजा पद भी वेद को सूचित करता है केवल प्रौषधों को नहीं । ।

English

Bright shines the Sun therein, in me, the Residue, are Day and

अध्याय ११

श्लोक 4.10

प्रा॒णः प्र॒जा अनु॑ वस्ते पि॒ता पु॒त्रमि॑व प्रि॒यम्।प्रा॒णो ह॒ सर्व॑स्येश्व॒रो यच्च॑ प्रा॒णति॒ यच्च॒ न

prāṇaḥ prajā anu vaste pitā putramiva priyam| prāṇo ha sarvasyeśvaro yacca prāṇati yacca na

हिन्दी अर्थ

बरह्मचारी समिधा मेख॑ख्यां ्रम्ण लोकास्तप॑सा पिपतिं ॥४॥ (इयं पृथिवी) यह् -पृथिव्री (समित्) पहली समिधा है, (चौः) दयुलोक वीस्थं लोकों को (पिपर्ति) पररिपालित्त तथा सुखो से प्ररिपूरिते करता है । को प्रथम पाथिव तत्वौ-तथा-किषयों का धरिज्ञान देना चाहिए, तदनन्तर

English

The teeth of the completed year, may these deliver us from woe.

अध्याय ११

श्लोक 4.11

प्रा॒णो मृ॒त्युः प्रा॒णस्त॒क्मा प्रा॒णं दे॒वा उपा॑सते ।प्रा॒णो ह॒ सत्यवा॒दिन॑मुत्त॒मे लो॒क आ द॑धत्

prāṇo mṛtyuḥ prāṇastakmā prāṇaṃ devā upāsate | prāṇo ha satyavādinamuttame loka ā dadhat

हिन्दी अर्थ

कटिबद्ध होकर, त्रिलोकी रूपी तीन समीघाभ्रो को; मन तथां -आत्मरूपी, ओर परिश्रम तथा तपोमय जीवन व्यतीत करता हभ, पृथिवीस्थ -लोगो को ज्ञानभ्रदान द्वारा परिपालित तथा सुखो से पूरित करता ह॑ । लोकाः लाग । पदा. होता है, जन्म लेता है, (चमम्) शरीर पर उष्णता का (वसानः) .. कार्यो के भ्रचुरूप. हो जाती दँ (मत्वं २३)

English

The deathless balm that Mātalī knows, purchased at a chariot’s price, Indra effused into the floods. Waters, give us that healing balm!

अध्याय ११

श्लोक 4.12

प्रा॒णो वि॒राट् प्रा॒णो देष्ट्री॑ प्रा॒णं सर्व॒ उपा॑सते ।प्रा॒णो ह॒ सूर्य॑श्च॒न्द्रमाः॑ प्रा॒णमा॑हुः प्र॒जाप॑तिम्

prāṇo virāṭ prāṇo deṣṭrī prāṇaṃ sarva upāsate | prāṇo ha sūryaścandramāḥ prāṇamāhuḥ prajāpatim

हिन्दी अर्थ

१२६ -भरथवंवेद-भाष्य का० ११।सु०भ् “विलियम डिवटद्भिटनी” भवं ° ११।१।५५ कौ टिप्पणी मे लिखते है कि का० ११।सु०५ भ्रय्वेवेद-माष्य १२७ (जनयन्) प्रकट करता हुभ्रा, इनके यथाथ स्वरूपो का कथन करता हा,

English

A glorification of the Uchchhishta or Residue of Sacrifice

अध्याय ११

श्लोक 4.13

प्रा॒णा॒पा॒नौ व्री॑हिय॒वाव॑न॒ड्वान् प्रा॒ण उ॑च्यते ।यवे॑ ह प्रा॒ण आहि॑तोऽपा॒नो व्री॒हिरु॑च्यते

prāṇāpānau vrīhiyavāvanaḍvān prāṇa ucyate | yave ha prāṇa āhito'pāno vrīhirucyate

हिन्दी अर्थ

कर्मो का (ततहे) विनाश करता है । (मनु०) ।म्रपःन्=कमं (निघं० २।१) गीतां मेँ कहा है कि “कि. कम्रं किमक. वेद को माता भी कहा है। यथा “स्तुता मया वरवा वेवमाता' (भ्रथव° १६।७१।१) । वेदमाता के गर्भम गस करश्रौर उस.केज्ञान दुग्धका पृथिवीं. दिवं च) नभो अर्थात् पृथिवी भ्रौर लोक को. (भराचायेः) भ्राचायं (ततक्ष) घड़ता है इन. के 00618, प्रतिरूप, नमूने बनाता है (ते)उन दो

English

The Residue of Sacrifice containeth name, and from, and world:

अध्याय ११

श्लोक 4.14

अपा॑नति॒ प्राण॑ति॒ पुरु॑षो॒ गर्भे॑ अन्त॒रा।य॒दा त्वं प्रा॑ण॒ जिन्व॒स्यथ॒ स जा॑यते॒ पुनः॑

apānati prāṇati puruṣo garbhe antarā| yadā tvaṃ prāṇa jinvasyatha sa jāyate punaḥ

हिन्दी अर्थ

रौर द्यूलोक के देव (संमनसः) सांमनस्यरूप में (भवन्ति) -हो जाते ह । -सग्राम मं भसुरयो भौर भरासुरी वृत्तयो पर.बिजय पा सकता है। किस-किस प्रकार के तारां ईहै--इन का ज्ञानं ब्रह्मचारी को देने के लिये ्राचा्यं, इन के 1100०18 बनाता है, प्रतिरूप, नमूने तथा चित्रपट बनाता खूप मे, परस्पर श्रविरोधरूप में रहता है, इस का कारण ब्रह्मचारी का तपोमय जीवन है, वह भोग विलास में न पड़ता हृश्रा सदा प्राप्त ज्ञान के

English

Indra and Agni and the whole universe are comprised therein.

अध्याय ११

श्लोक 4.15

प्रा॒णमा॑हुर्मात॒रिश्वा॑नं॒ वातो॑ ह प्रा॒ण उ॑च्यते ।प्रा॒णे ह॑ भू॒तं भव्यं॑ च प्रा॒णे सर्वं॑ प्रति॑ष्ठितम्

prāṇamāhurmātariśvānaṃ vāto ha prāṇa ucyate | prāṇe ha bhūtaṃ bhavyaṃ ca prāṇe sarvaṃ pratiṣṭhitam

हिन्दी अर्थ

भ्राहूत करता ह, प्राप्त करता है ! (ते) उन दो लोकों को (समिधौ त्वा) करता है । (तयोः) उन दोमें (विद्वा भुवनानि) सब सत्पदाथं सब है वह भूलोक श्रौर दयुलोक को समिधा बना कर, निजं ज्ञानाग्नि को, है । इसलिये इनः दोः नोकों के परिज्ञान के भ्रन्तगंत सभो सत्पदा्थोका

English

The Residue of Sacrifice holdeth Earth, Heaven, and all that is: The Residue of Sacrifice holdeth sea, waters, Moon, and Wind.

अध्याय ११

श्लोक 4.16

आ॒थ॒र्व॒णीरा॑ङ्गिर॒सीर्दैवी॑र्मनुष्य॒जा उ॒त।ओष॑धयः॒ प्र जा॑यन्ते य॒दा त्वं प्रा॑ण॒ जिन्व॑सि

ātharvaṇīrāṅgirasīrdaivīrmanuṣyajā uta| oṣadhayaḥ pra jāyante yadā tvaṃ prāṇa jinvasi

हिन्दी अर्थ

विशेषण है, जोकि इन दोनों के विस्तार का चोतक “हैः । “पृथिवीम्” पद -मन्त्र = मेँ परित “उर्वी” पद का, समानार्थक है । कां ११।सु०५ भरथवंवेद-माष्य १२६ तो र॑ तप॑सा बरह्मचारी तद् केव॑लं छृणुत ब्रह विदान् ॥१०।

English

Real, non-real, both are there, Prajāpati, and Death, and strength:

अध्याय ११

श्लोक 4.17

य॒दा प्रा॒णो अ॒भ्यव॑र्षीद् व॒र्षेण॑ पृथि॒वीं म॒हीम्।ओष॑धयः॒ प्र जा॑य॒न्तेऽथो॒ याः काश्च॑ वी॒रुधः॑

yadā prāṇo abhyavarṣīd varṣeṇa pṛthivīṃ mahīm| oṣadhayaḥ pra jāyante'tho yāḥ kāśca vīrudhaḥ

हिन्दी अर्थ

इर निधि है पृथिवी, भ्रौर द्युलोक की पीठ से परे.निधि है. हृभा भौर पूथिवी की परिक्रमा कर्ता है । १३० अथवेवेद-माष्य कां० ११।सु०५ भाग में ( समेतः+ ) परस्पर मिलती ै। (तयोः) उनदो भ्रग्नियो में

English

Thereon depend the worldly ones: in me are glory Dra and Vra. The firm, the fast, the strong, the hard, Brahma, the All-creating

अध्याय ११

श्लोक 4.18

यस्ते॑ प्राणे॒दं वेद॒ यस्मिं॒श्चासि॒ प्रति॑ष्ठितः ।सर्वे॒ तस्मै॑ ब॒लिं ह॑रान॒मुष्मिंल्लो॒क उ॑त्त॒मे

yaste prāṇedaṃ veda yasmiṃścāsi pratiṣṭhitaḥ | sarve tasmai baliṃ harānamuṣmiṃlloka uttame

हिन्दी अर्थ

मे संयमसे, भ्रौर हलकी कपास में चित्त को तल्लीन करनेसे, योगी . भाकारगमन करता है । इस सूत्र के भाष्य में व्यासमूनि नेकहाहै कि “योगी के शरीरके लधु हो जाने पर, योगी पैरों द्वारा जल के पुष्ट पर, तथा रदिमयों मे विहार करता, भ्रौर भ्राकाश्च में यथेष्ट गमन करता दहै" । सिद्धि । वतमान में बड़े-बड़े भारी विमान भ्राकाशविहारी हो रहै है, पक्षी रषिम हारा संगम होता है । भौर संगम के कारण योगी निचली भ्रौर उपर की , .रिमर्यो मे जा-भ्रा सकता दवै । विना संगम, भ्राश्चरय न मिलने के कारण, जाना-भाना २. रदिगर्यो के दृढ होने से ही, दृढ़ सीढ़ी के सदृक्ष, नीचे-ऊपर जाना-्राना

English

Ten.

अध्याय ११

श्लोक 4.19

यथा॑ प्राण बलि॒हृत॒स्तुभ्यं॒ सर्वाः॑ प्र॒जा इ॒माः ।ए॒वा तस्मै॑ ब॒लिं ह॑रा॒न् यस्त्वा॑ शृ॒णव॑त् सुश्रवः

yathā prāṇa balihṛtastubhyaṃ sarvāḥ prajā imāḥ | evā tasmai baliṃ harān yastvā śṛṇavat suśravaḥ

हिन्दी अर्थ

का० ११।सु० ५ भथरवेवेद-माष्य १३१ तो विना विमानो के भ्राकारविहारी है । योगी का योगाभ्यास भी एक भागो का श्राङ्खल भाषा में ्रनूवाद दिया जाता. है ताकि सीचातानी का करता, तो भी भ्रनुव्ाद से यह प्रकट हो जातादहैकिवायु मे विहरण भ्रौर

English

Gods, as a wheel about the nave, are fixed all round the Residue.

अध्याय ११

श्लोक 4.20

अ॒न्तर्गर्भ॑श्चरति दे॒वता॒स्वाभू॑तो भू॒तः स उ॑ जायते॒ पुनः॑ ।स भू॒तो भव्यं॑ भवि॒ष्यत् पि॒ता पु॒त्रं प्र वि॑वेशा॒ शची॑भिः

antargarbhaścarati devatāsvābhūto bhūtaḥ sa u jāyate punaḥ | sa bhūto bhavyaṃ bhaviṣyat pitā putraṃ pra viveśā śacībhiḥ

हिन्दी अर्थ

को सूचित क्रिया है । पुणेयुवा को उपदेल्च देने का भ्रधिकार है । “वृहुच्छेपः" ब्रह्मचारी है। रेतः उदकनाम (निघं० १।१२) । भ्ररुणः = श्रारोचमान तासांमचीषि पृथग च॑रन्ति ताखामाज्यं पुरुषो व्षमाप॑ः । १३॥ धम्) समिधा का (भ्रा दधाति) आघान करता है। (तासाम्) उन समि-

English

The hum is in the Residue, the tone, the murmur of the psalm. Within the Residue, like babes unborn, the parts of sacrifice,

अध्याय ११

श्लोक 4.21

एकं॒ पादं॒ नोत्खि॑दति सलि॒लाद्धंस उ॒च्चर॑न्।यद॒ङ्ग स तमु॑त्खि॒देन्नैवाद्य न श्वः स्या॒न्न रात्री॒ नाहः॑ स्या॒न्न व्युऽछेत् क॒दा च॒न

ekaṃ pādaṃ notkhidati salilāddhaṃsa uccaran| yadaṅga sa tamutkhidennaivādya na śvaḥ syānna rātrī nāhaḥ syānna vyu'chet kadā cana

हिन्दी अर्थ

परिणाम है;-- (राज्यम्) घृतादि. पदार्थे, - (पुरुषः) पुरुषादि प्राणी (वषंम्) वर्षा, (भ्रापः) तथा नदी भादि के जल । का ११। सु०५ भरयवबेद-माष्य, १२२ इन साधनों मे मिल कर वर्षा का कारण बनता है" । वेदानुसार सब बालकों भ्रावदयक है । पृथिवी के सब बालक बालिकाएं करोड़ों की संख्या मे है ।

English

Aindrāgne Pāvamāna lie. Mahānāmnī, Mahavrata.

अध्याय ११

श्लोक 4.22

अ॒ष्टाच॑क्रं वर्तत॒ एक॑नेमि स॒हस्रा॑क्षरं॒ प्र पु॒रो नि प॒श्चा।अ॒र्धेन॒ विश्वं॒ भुव॑नं ज॒जान॒ यद॑स्या॒र्धं क॑त॒मः स के॒तुः

aṣṭācakraṃ vartata ekanemi sahasrākṣaraṃ pra puro ni paścā| ardhena viśvaṃ bhuvanaṃ jajāna yadasyārdhaṃ katamaḥ sa ketuḥ

हिन्दी अर्थ

(्राचा्येः मृत्यु ) भराचायं मृत्यु रूपदहै, (वरुणः) वरुणरूप है, (सोमः भरोषधयः पयः) सोम, श्रोषधि तथा जल भ्रथवा दुगधरूप है । मरतः भ्राचायं मृत्युरूप है । वह उन्हें पापकम से निवारित करता है, भरतः रोगोपचार करता है, प्रतः भ्रोषधिरूप है । सुल तथा सदपदेश की वर्षा करता है, भरतः मेधरूप है । स्वभाव से जलसमान शीतल, तथा दुग्धादि भ्रन्न प्रदान दारा भातुषूप' है । चाहता है, (वरणो भूत्वा) पापनिवारकरूपं धारण कर भ्राचायं उस-उस

English

The Vājapeya, Royal Rite, the Agnishoma and its forms, Hymns, joyfullest with living grass the Asvamedha, are therein,

अध्याय ११

श्लोक 4.23

यो अ॒स्य वि॒श्वज॑न्मन॒ ईशे॒ विश्व॑स्य॒ चेष्ट॑तः ।अन्ये॑षु क्षि॒प्रध॑न्वने॒ तस्मै॑ प्राण॒ नमो॑ऽस्तु ते

yo asya viśvajanmana īśe viśvasya ceṣṭataḥ | anyeṣu kṣipradhanvane tasmai prāṇa namo'stu te

हिन्दी अर्थ

धारण कर सन्तानो का रक्षक- होता है । (प्रजापतिः) प्रजापति होकर को पातां है, परम एेदव्यवान् संन्यासी या चतु्थश्विमी होता है । का० ११।सु०५ भ्रथरववेद-माष्य १३५ इच्छते) शिष्य को श्रभिलाषा करता है।

English

Dikshā and Agnyādheya rite that sates the wish, with magic- hymn,

अध्याय ११

श्लोक 4.24

यो अ॒स्य स॒र्वज॑न्मन॒ ईशे॒ सर्व॑स्य॒ चेष्ट॑तः ।अत॑न्द्रो॒ ब्रह्म॑णा॒ धीरः॑ प्रा॒णो मानु॑ तिष्ठातु

yo asya sarvajanmana īśe sarvasya ceṣṭataḥ | atandro brahmaṇā dhīraḥ prāṇo mānu tiṣṭhātu

हिन्दी अर्थ

साथ ही अनुभवी होने के कारण ब्रह्मचारियों का पालन मातृवत् कर सकता है (मन्व ३,१४) । इस भाव को सूचित करने के लिये मन्त्र १६ में घासम्) घास को (जिगीषति) निगलना चाहता है । रह सकती । पाचनदाक्ति के बिना पशु खाना भी नहीं चाहता ।

English

Suspended rites, long sessions, are contained within the Residue. Faith fire-oblation, fervent zeal, service, and sacrificial cry,

अध्याय ११

श्लोक 4.25

ऊ॒र्ध्वः सु॒प्तेषु॑ जागार न॒नु ति॒र्यङ् नि प॑द्यते ।न सु॒प्तम॑स्य सु॒प्तेष्वनु॑ शुश्राव॒ कश्च॒न

ūrdhvaḥ supteṣu jāgāra nanu tiryaṅ ni padyate | na suptamasya supteṣvanu śuśrāva kaścana

हिन्दी अर्थ

ब्रहमचर्येण. तप॑सा देवा मूत्युमपांध्नत । १३६ भ्थ्वेवैद-माष्य काण ११। सु० ५ कथित देवो के लिये (स्वः भ्राभरत्) मूत के पुख का मागं दर्शाता है । तथा ऋतुरभरो सहित बं, (ते) वे सब (ब्रह्मचारिणः) ब्रह्मचारी (जाताः)

English

Guerdon, good works and their reward, are stored within the

अध्याय ११

श्लोक 4.26

प्राण॒ मा म॑त् प॒र्यावृ॑तो॒ न मद॒न्यो भ॑विष्यसि ।अ॒पां गर्भ॑मिव जी॒वसे॒ प्राण॑ ब॒ध्नामि॑ त्वा॒ मयि॑

prāṇa mā mat paryāvṛto na madanyo bhaviṣyasi | apāṃ garbhamiva jīvase prāṇa badhnāmi tvā mayi

हिन्दी अर्थ

यव रादि पौषे, प्नौर बड़े-बड़े वृक्ष भी पूणं यौवन पर -पर्ुच कर् पूरा यौवन-काल बिताकर ही श्रगले काल के मानो उत्पादक होते है । ग्रतः मानो ये भी निज ब्रहमावयं कालके नियमको णं करते । दिनके के नियत काल के पदचात् ही दिन का जन्म होता है । इनका भ्रपना श्रपना नियतकाल ही इन का कालिक-्रह्यवथे है । इसी प्रकार प्रत्येक ऋतु नियत जगत, तथा काल, सभी श्रपने अपने नियतकालों के ब्रह्मचय. का पालन

English

Residue. Sacrifice of one night, or two, Sadya1 kri, Ukthya, and Prakri,

अध्याय ११

श्लोक 5.1

ब्रह्मचर्यम्।१-२६ ब्रह्मा।ब्रह्मचारी।त्रिष्टुप्, १ पुरोऽतिजागता विराड् गर्भा, २ पञ्चपदा बृहतीगर्भा विराट् शक्वरी, ३ उरोबृहती, ६ शाक्वरगर्भा चतुष्पदा जगती, ७ विराड् गर्भा, ८ पुरोऽतिजागता विराड् जगती, ९ बृहतीगर्भा, १० भुरिक्, ११, १३ जगती, १२ शाक्वरगर्भा चतुष्पदा विराडतिजगती, १५ पुरस्ताज्ज्योतिः, १४, १६-२२ अनुष्टुप्, २३ पुरोबार्हतातिजागतगर्भा, २५ एकावसानार्च्युष्णिक्, २६ मध्येज्योतिर ष्णिग्गर्भा।ब्र॒ह्म॒चा॒रीष्णंश्च॑रति॒ रोद॑सी उ॒भे तस्मि॑न् दे॒वाः संम॑नसो भवन्ति ।स दा॑धार पृथि॒वीं दिवं॑ च॒ स आ॑चा॒र्यं१ तप॑सा पिपर्ति

brahmacaryam| 1-26 brahmā|brahmacārī| triṣṭup, 1 puro'tijāgatā virāḍ garbhā, 2 pañcapadā bṛhatīgarbhā virāṭ śakvarī, 3 urobṛhatī, 6 śākvaragarbhā catuṣpadā jagatī, 7 virāḍ garbhā, 8 puro'tijāgatā virāḍ jagatī, 9 bṛhatīgarbhā, 10 bhurik, 11, 13 jagatī, 12 śākvaragarbhā catuṣpadā virāḍatijagatī, 15 purastājjyotiḥ, 14, 16-22 anuṣṭup, 23 purobārhatātijāgatagarbhā, 25 ekāvasānārcyuṣṇik, 26 madhyejyotira ṣṇiggarbhā| brahmacārīṣṇaṃścarati rodasī ubhe tasmin devāḥ saṃmanaso bhavanti | sa dādhāra pṛthivīṃ divaṃ ca sa ācāryaṃ1 tapasā piparti

हिन्दी अर्थ

करते है, वणेन करते ह, (ते) वे है परमेष्वर ! (नः) हमे (रंहसः) हनन से (मुञ्चन्तु) मुक्त करे, हमारा हनन न करर । मन्त्र मे जिन कारणों से हनन की सम्भावना है, उन का केन किया हैँ । तथा उनके हारा हनन न होने की याचना की गई है । यह् याचना हनन के कारण रूपं मे, वणित क्रिया है । यदि ए््थना इनसे की होती तो , यह कहा जाता कि “ते दरुयं हसः नो मुञ्चत,” न कि “भुञ्चन्तु" । देखो

English

Night. The Residue the Father’s sire, who bears this universe, supports

अध्याय ११

श्लोक 5.2

ब्र॒ह्म॒चा॒रिणं॑ पि॒तरो॑ देवज॒नाः पृथ॑ग् दे॒वा अ॑नु॒संय॑न्ति॒ सर्वे॑ ।ग॒न्ध॒र्वा ए॑न॒मन्वा॑य॒न् त्रय॑स्त्रिंशत् त्रिश॒ताः ष॑ट्सह॒स्राः सर्वा॒न्त्स दे॒वांस्तप॑सा पिपर्ति

brahmacāriṇaṃ pitaro devajanāḥ pṛthag devā anusaṃyanti sarve | gandharvā enamanvāyan trayastriṃśat triśatāḥ ṣaṭsahasrāḥ sarvāntsa devāṃstapasā piparti

हिन्दी अर्थ

रकार पिण्ड हरीर मे भी ऋषियों की सत्ता दई है! यथा “तप्त ऋषयः शरीरे, रह्मयं धादित्ये"" (निर० १२।४।३७) । इसी प्रकार राष्ट शरीरम २, भ्रादित्य की ७ रदिमियों को निरुक्त मे ७ चऋषिकहा है। वर्षकराल मँ म भ्रादित्य की ७ रदिमरयों काही प्रेष ही र्हा होता है ।

English

Great gain and wealth, are laid, concealed and treasured, in the

अध्याय ११

श्लोक 5.3

आ॒चा॒र्यऽ उप॒नय॑मानो ब्रह्मचा॒रिणं॑ कृणुते॒ गर्भ॑म॒न्तः ।तं रात्री॑स्ति॒स्र उ॒दरे॑ बिभर्ति॒ तं जा॒तं द्रष्टु॑मभि॒संय॑न्ति दे॒वाः

ācārya' upanayamāno brahmacāriṇaṃ kṛṇute garbhamantaḥ | taṃ rātrīstisra udare bibharti taṃ jātaṃ draṣṭumabhisaṃyanti devāḥ

हिन्दी अर्थ

वाते चन्द्र तथा सू । भरतंवान् =ऋतुश्रो से बने छः छः मासौ के अयन, (भथवं० ६।३६।२) में चन्द्रमा को मी तुकतष्टा कहा है । तथा “ऋतुरन्यो शयं भौर चन्दर दोनों ऋतुपति है । कां० ११।सु० ६. भथरववेद-भाष्य १५९

English

All pleasures and enjoyments, all delights and rapturous ecsta- sies,

अध्याय ११

श्लोक 5.4

इ॒यं स॒मित् पृ॑थि॒वी द्यौर्द्वितीयो॒तान्तरि॑क्षं स॒मिधा॑ पृणाति ।ब्र॒ह्म॒चा॒री स॒मिधा॒ मेख॑लया॒ श्रमे॑ण लो॒कांस्तप॑सा पिपर्ति

iyaṃ samit pṛthivī dyaurdvitīyotāntarikṣaṃ samidhā pṛṇāti | brahmacārī samidhā mekhalayā śrameṇa lokāṃstapasā piparti

हिन्दी अर्थ

एतं देवा दक्षिणतः पथात् भाश्च उदेतं । उदित होभ्रो । (ते विदे देवाः) वे तुम सब देव (समेत्य) मिल कर नः हमे (श्र हसः) हनन से (मुञ्चत) मुक्त करो । 1 कर्ेन्तीति, जो सदा -गतिवाली हैँ ।. सूयं रदिमयां सदा गतिशोल है । ये का विना विश्वाम किये सदा चलता रहता है । शक्राः = सूं रदिमयां शक्ति-

English

All the celestial Gods whose home is heaven sprang from the Residue.

अध्याय ११

श्लोक 5.5

पूर्वो॑ जा॒तो ब्रह्म॑णो ब्रह्मचा॒री घ॒र्मं वसा॑न॒स्तप॒सोद॑तिष्ठत्।तस्मा॑ज्जा॒तं ब्राह्म॑णं॒ ब्रह्म॑ ज्ये॒ष्ठं दे॒वाश्च॒ सर्वे॑ अ॒मृते॑न सा॒कम्

pūrvo jāto brahmaṇo brahmacārī gharmaṃ vasānastapasodatiṣṭhat| tasmājjātaṃ brāhmaṇaṃ brahma jyeṣṭhaṃ devāśca sarve amṛtena sākam

हिन्दी अर्थ

रहता है, श्रौर सूयंरदिमियां इस का पीछा करती रहती हँ । सूर्य रदिमयां करतीं तथा नाना प्रकार से शक्ति प्रदान करती हँ 1 सूये रदिमर्यो के सेवन से श्राय बढ़ती है । इस प्रकार से हम हनन से मुक्त करती है । सायणाचायं विश्वान देवानिदं ब्रुमः सत्यसंधानूृराटषः । विश्वाभिः पत्नीभिः सह ते नो सुजन्त्वहसः ॥ १६॥

English

The Deities, the Fathers, men, Gandharvas, and Apsarases.

अध्याय ११

श्लोक 5.6

ब्र॒ह्म॒चा॒र्येऽति स॒मिधा॒ समि॑द्धः कार्ष्णं॒ वसा॑नो दीक्षि॒तो दी॒र्घश्म॑श्रुः ।स स॒द्य ए॑ति॒ पूर्व॑स्मा॒दुत्त॑रं समु॒द्रं लो॒कान्त्सं॒गृभ्य॒ मुहु॑रा॒चरि॑क्रत्

brahmacārye'ti samidhā samiddhaḥ kārṣṇaṃ vasāno dīkṣito dīrghaśmaśruḥ | sa sadya eti pūrvasmāduttaraṃ samudraṃ lokāntsaṃgṛbhya muhurācarikrat

हिन्दी अर्थ

बृद्धि करने वाले पुरुषों का (त्र मः) हम कथन करते है कि (विर्वाभिः पत्नीभिः सह) श्रपनी-अपनी पत्नियों सहित (ते) वे है परमेच्वर ! (नः) हमे (अहसः) हनन से (मुञ्चन्तु) मुक्त कर, हमें हनन से बचाएं । १५२ . भ्रथववेद-भाष्य कां ११। सु०६ दिव्यगुणी पुरुष तथा उन की पत्नियां, कृपापूर्वंक, सदुपदेशो द्वारा हमें हनन से बचाने की क्षमता रखते हैँ । परमेदवर से यह प्रार्थना की गई है कि भ्रष

English

All the celestial Gods whose home is heaven sprang from the Residue.

अध्याय ११

श्लोक 5.7

ब्र॒ह्म॒चा॒री ज॒नय॒न् ब्रह्मा॒पो लो॒कं प्र॒जाप॑तिं परमे॒ष्ठिनं॑ वि॒राज॑म्।गर्भो॑ भू॒त्वामृत॑स्य॒ योना॒विन्द्रो॑ ह भू॒त्वासु॑रांस्ततर्ह

brahmacārī janayan brahmāpo lokaṃ prajāpatiṃ parameṣṭhinaṃ virājam| garbho bhūtvāmṛtasya yonāvindro ha bhūtvāsurāṃstatarha

हिन्दी अर्थ

इन्द इस निमित्त प्रेरणा भदान करते रहिये +वेद मे पलिनियोँ का भी मान है, यहु भी मन्त्र द्वारा प्रकट होता है । सर्वीन् देवानिदं वर॑मः सत्यसंधानृताृषंः । से (सर्वा भूतानि) सब पञ्वभूत (संगत्य ) मिल कर, एकमत से हो करु, (नः) हम (अंहसः) हनन से (मूञ्चन्तु) मुक्त कर" हमारा. हनन न करे ।

English

On the origin of some Gods and the creation of man

अध्याय ११

श्लोक 5.8

आ॒चा॒र्यऽ स्ततक्ष॒ नभ॑सी उ॒भे इ॒मे उ॒र्वी ग॑म्भी॒रे पृ॑थि॒वीं दिवं॑ च ।ते र॑क्षति॒ तप॑सा ब्रह्मचा॒री तस्मि॑न् देवाः संम॑नसो भवन्ति

ācārya' statakṣa nabhasī ubhe ime urvī gambhīre pṛthivīṃ divaṃ ca | te rakṣati tapasā brahmacārī tasmin devāḥ saṃmanaso bhavanti

हिन्दी अर्थ

भूतम् = मवतीति, त्र॑कालिक सत्ता वाला, सदा सद्र पं से वतंमान, श्रपने उग्ररूप में हमारा हनन भी करते रहते है; पृथिवी भूचाल दवारा, भ्रप् प्रवाह दारा; भौर पराकाश ककश, कठोर ध्वनियों तथा .शन्दों द्वारा । केवशमें है, श्रतः इनमें प्रेरगाए दीजिये किये इस ढंगसे वते, जिससे हमारा हनन न हो । वे परस्पर मिल कर हमें हनन से मुक्त करते रहु, इन ंसेएकभी श्रपनेमे उग्रह्मनहो। . -

English

When Manyu brought his consort home forth from Sankalpa’s dwelling-place, Who were the wooers of the bride, who was the chief who courted her?

अध्याय ११

श्लोक 5.9

इ॒मां भूमिं॑ पृथि॒वीं ब्र॑ह्मचा॒री भि॒क्षामा ज॑भार प्रथ॒मो दिवं॑ च ।ते कृ॒त्वा स॒मिधा॒वुपा॑स्ते॒ तयो॒रार्पि॑ता॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॑

imāṃ bhūmiṃ pṛthivīṃ brahmacārī bhikṣāmā jabhāra prathamo divaṃ ca | te kṛtvā samidhāvupāste tayorārpitā bhuvanāni viśvā

हिन्दी अर्थ

का० ११।सू० ६ अथर्ववेद-माष्य १५३ या देवीः पञ्च॑ परदिशो ये देषा दवारशवः । (या ) जो (देवीः) दिग्य (पञ्चदिडाः) विस्तृत दिश्ाए है, (ये सौरवषं की (ये) जो दाढ़ृ है, (ते) वे (हे परमेश्वर ! ) (नः) हमे (सदा शिवाः सन्तु) सवा कल्याणकारी हों । .

English

Fervour and Action were the two, in depths of the great billowy sea?

अध्याय ११

श्लोक 5.10

अ॒र्वाग॒न्यः प॒रो अ॒न्यो दि॒वस्पृ॒ष्ठाद् गुहा॑ नि॒धी निहि॑तौ॒ ब्राह्म॑णस्य ।तौ र॑क्षति॒ तप॑सा ब्रह्मचा॒री तत् केव॑लं कृणुते॒ ब्रह्म॑ वि॒द्वान्

arvāganyaḥ paro anyo divaspṛṣṭhād guhā nidhī nihitau brāhmaṇasya | tau rakṣati tapasā brahmacārī tat kevalaṃ kṛṇute brahma vidvān

हिन्दी अर्थ

१४२ भरथरवेवेद-भाष्य काऽ ११1 सु०६ धीन ह । वह इन का नियन्ता है । भ्रतः नियन्ता से भराथेना उचित प्रतीत बृहस्पति, गजना द्वारा मेष को काट कर, वर्षा प्रदान करता है । जैसे किं बडहर वृक्ष से चमस को काट निकालता है । तथाः “बृहस्पति्िरवेण दाब्देन तथा (भगम्) मग का (ब्रूमः) -हम कथन करते है; (अंशम्) शरंश, (विव

English

Vishūvān, Upahavya, and all worship offered secretly.

अध्याय ११

श्लोक 5.11

अ॒र्वाग॒न्य इ॒तो अ॒न्यः पृ॑थि॒व्या अ॒ग्नी स॒मेतो॒ नभ॑सी अन्त॒रमे।तयोः॑ श्रयन्ते र॒श्मयोऽधि॑ दृ॒ढास्ताना ति॑ष्ठति॒ तप॑सा ब्रह्मचा॒री

arvāganya ito anyaḥ pṛthivyā agnī sameto nabhasī antarame| tayoḥ śrayante raśmayo'dhi dṛḍhāstānā tiṣṭhati tapasā brahmacārī

हिन्दी अर्थ

मेदवर ! (नः) हमे (रहस) हनन से (शुञ्चन्तु) मुक्त कर" हमारा हनन के सूचक है । वर्ण = सूय जोकि ररिम्ों दवारा. मेष "पदा कर, उस द्वारा शमो देवं सवितारं भातार॑युत पूष्ण । कां० ११। सुऽ ६. म्रथवेवेद-माष्य. १४३

English

The Father’s sire, the Residue, grandson of Spirit, primal Sire, Lord of the universe, the Bull, dwells on the earth victorious.

अध्याय ११

श्लोक 5.12

अ॒भि॒क्रन्द॑न् स्त॒नय॑न्नरु॒णः शि॑ति॒ङ्गो बृ॒हच्छेपोऽनु॒ भूमौ॑ जभार ।ब्र॒ह्म॒चा॒री सि॑ञ्चति॒ सानौ॒ रेतः॑ पृथि॒व्यां तेन॑ जीवन्ति प्र॒दिश॒श्चत॑स्रः

abhikrandan stanayannaruṇaḥ śitiṅgo bṛhacchepo'nu bhūmau jabhāra | brahmacārī siñcati sānau retaḥ pṛthivyāṃ tena jīvanti pradiśaścatasraḥ

हिन्दी अर्थ

पोषण करने वाले, (उत) -तथा (पूषणम्) ररिमयों द्वारा परिपुष्ट का त्वष्टा का (भ्रमः) हम कथन करते रहँ (ते) वे है परमेरवर। (नः) हमे (रंहसः) हनन से (मुञ्चन्तु) मुक्त करे हमारा हनन न करे । भवति, भ्रधस्तात् तद्वेलायां तमो भवति (निकट १२।२।१२) । यह काल उषा के प्रयाण करने के परदचात्ः का है । यथा “सवितो वरेण्योऽनु भ्रयाणमुषसो विभाति (ऋ० ५।८१।२) । धाता मध्यस्थानी देवता + मन गन्ववे है, ऋक् भ्रौर साम भरप्सराएं है (यजु १८१३८४३) ;

English

Right, truth, dominion, fervent zeal, toil, duty, action, future, past,

अध्याय ११

श्लोक 5.13

अ॒ग्नौ सूर्ये॑ च॒न्द्रम॑सि मात॒रिश्व॑न् ब्रह्मचा॒र्य॑१प्सु स॒मिध॒मा द॑धाति ।तासा॑म॒र्चींषि॒ पृथ॑ग॒भ्रे च॑रन्ति॒ तासा॒माज्यं॒ पुरु॑षो व॒र्षमापः॑

agnau sūrye candramasi mātariśvan brahmacārya1psu samidhamā dadhāti | tāsāmarcīṃṣi pṛthagabhre caranti tāsāmājyaṃ puruṣo varṣamāpaḥ

हिन्दी अर्थ

(यः अयमा नाम देवः) जो ्रयेमा नाम देवर है, (ब्रमः) इन का हम कथन करते है, (ते) वे है परभेदवरः (नः) हमे (रंहसः) हनन से (गुज्चन्तु) मुक्त करे" हमारा हनन न करे । , १४४ भ्रथवेवेद-माष्य कां० ११। सु०६. द्वारा हमारा हनन न करे -यह प्राना परमेदनरसे को है । चन्दर दोनों का (इदं ब्रूमः) हम यह कथन करते.है, तथा (विद्वान्) सभी

English

Valour; prosperity, and strength dwell in the Residue in strength. Welfare, resolve and energy, the six expanses, kingship, sway,

अध्याय ११

श्लोक 5.14

आ॒चा॒र्योऽ मृ॒त्युर्वरु॑णः॒ सोम॒ ओष॑धयः॒ पयः॑ ।जी॒भूता॑ आस॒न्त्सत्वा॑न॒स्तैरि॒दं स्व॑१राभृ॑तम्

ācāryo' mṛtyurvaruṇaḥ soma oṣadhayaḥ payaḥ | jībhūtā āsantsatvānastairidaṃ sva1rābhṛtam

हिन्दी अर्थ

हम कथन करतेर्हैकि (ते) वे (हे परमेश्वर !) (नः) हमे (प्रहसः) हनन से (मुञ्चन्तु) मुक्त करे, हमारा हनन न करे । मात कष्टों तथा मृत्युभ्रों से बचे रहने की प्रा्थनाए परमेदवर से इन विनष्ट न होने वाली प्रकृति । तदनन्तर (दिशः) दिंशाभों का (ब्रूमः) हम कथन करते है; (च सर्वाः

English

Prayer, and direction, and the year, oblation, planets, are there- in;

अध्याय ११

श्लोक 5.15

अ॒मा घृ॒तं कृ॑णुते॒ केव॑लमाचा॒र्यो भू॒त्वा वरु॑णो॒ यद्य॒दैच्छत् प्र॒जाप॑तौ ।तद् ब्र॑ह्मचा॒री प्राय॑च्छत् स्वन् मि॒त्रो अध्या॒त्मनः॑

amā ghṛtaṃ kṛṇute kevalamācāryo bhūtvā varuṇo yadyadaicchat prajāpatau | tad brahmacārī prāyacchat svan mitro adhyātmanaḥ

हिन्दी अर्थ

नियच्छति" के; रावारः पर न्यायावीरे प्रथं क्याहै कां» ११।बु० ६. भ्रथववेद-माष्य १४१५ कारी वृप्तिदायक मेष । तप् (तृप्तौ) +-जन्यः (जनहितकारी । दिशः = सोमो मा देवो भुंञ्चतु यमाहुश्चन्दरमा इतिं ॥७॥

English

And the four Hotars, Apri hymns, the Nivids, and Four- monthly rites, Oblations, sacrifices, and animal offerings, and their forms.

अध्याय ११

श्लोक 5.16

आ॒चा॒र्योऽ ब्रह्मचा॒री ब्र॑ह्मच॒री प्र॒जाप॑तिः ।प्र॒जाप॑ति॒र्वि रा॑जति वि॒राडिन्द्रो॑ऽभवद् व॒शी

ācāryo' brahmacārī brahmacarī prajāpatiḥ | prajāpatirvi rājati virāḍindro'bhavad vaśī

हिन्दी अर्थ

. (रहो रात्रे) दिन भ्रौर रात, (रथो) तथा (उषाः) उषः काल, इस नाम से (आहुः) कहते है वह भी (मा) ममे (मुञ्चतु) उन दुष्परि.. के लिपे शपर्थे लते है, जो कि भूटी होती है, सत्य॑रूप नहीं होतीं । इन शग्थो के कारण चित्वृत्तियां दूषित हौ जाती ह यंह दुष्परिणाम है । भ्रापे को मुक्त करना चाहता है ! दिन-रात तथा उषः काल में मनुष्य सटी रपय लाता रहता है । वह इन्ह त्यागने का भ्रभिलाषी है । रतः इन्हे

English

Months, half-months, sections of the year, seasons are in the

अध्याय ११

श्लोक 5.17

ब्र॒ह्म॒चर्ये॑ण॒ तप॑सा॒ राजा॑ रा॒ष्ट्रं वि र॑क्षति ।आ॒चा॒र्योऽ ब्रह्म॒चर्ये॑ण ब्रह्मचा॒रिण॑मिच्छते

brahmacaryeṇa tapasā rājā rāṣṭraṃ vi rakṣati | ācāryo' brahmacaryeṇa brahmacāriṇamicchate

हिन्दी अर्थ

भौर उषाः शब्द द्वारा दिन का काल । “शपथ्य” परिणाम है, रौर “शपथ उस का कारण है । परिणाम से छृटकारा चाहने वाला व्यक्ति, सुतरां कारण से भी छटकारे का भरभिलाषी है । । (पाथिवा-) पृथिवी के (दिव्याः) तथा द्युलोक के (पावः) पशु, के (मृगाः) मृग है, तथा १४६ श्रथर्ववेद-माष्य कां० ११। सुर द केरते है, (ते) वे है परमेश्वर! (नः) हमे (ग्रहसः) हनन से (मुञ्चन्तु) मुक्त करर, हमारा हनत न कर, हमे कष्ट नं पडटुचाए । दिव्याः परावः मेष, सिह, वृहिचक, मकर भादि नक्षत्रगण । .

English

Residue, The waters resonant afar, the thunder, and the mighty noise.

अध्याय ११

श्लोक 5.18

ब्र॒ह्म॒चर्ये॑ण क॒न्या॒३ युवा॑नं विन्दते॒ पति॑म्।अ॒न॒ड्वान् ब्र॑ह्म॒चर्ये॒णाश्वो॑ घा॒सं जि॑गीर्षति

brahmacaryeṇa kanyā3 yuvānaṃ vindate patim| anaḍvān brahmacaryeṇāśvo ghāsaṃ jigīrṣati

हिन्दी अर्थ

रूप चवं सेनापतिं है--इन दोनो का (ब्रणः) हम कथन करते है, (एषां या वे इषु भ्र्थात् बाण, है परमेदवर ! (नः) हमारे लिये (सदा शिवाः) प्राणि वं का पालक, रक्षक अधिकारी भव । पशुः “तवेमे पञ्च पावो विभवता गाव भ्मदवाः पुरुषा प्रंजावयः" (अथवं० ११।२।९), पशुप्रों के (नः) हमे. (श्रंहसः) हनन से (मुञ्चन्तु) मक्त कर, हमारा हनन न करर

English

Pebbles, sand, stones, and herbs, and plants, and grass are in the Residue,

अध्याय ११

श्लोक 5.19

ब्र॒ह्म॒चर्ये॑ण॒ तप॑सा दे॒वा मृ॒त्युमपा॑घ्नत ।इन्द्रो॑ ह ब्र॒ह्मचर्ये॑ण दे॒वेभ्यः॒ स्व॑१राभ॑रत्

brahmacaryeṇa tapasā devā mṛtyumapāghnata | indro ha brahmacaryeṇa devebhyaḥ sva1rābharat

हिन्दी अर्थ

श्रभिभ्राय यह कि हम इन स्थानो मे कहीं भी जाय या विमानो दारा यलोक तथा नक्ष्नरों की भोर जाये, तो हमारा. न हनन हो, भ्रौरन जोकि इन सब स्थानो का शासक है, उस सेस्वरक्षा कीप्राथेना की दहै। कंज ११1 सू०६ भरथववेवेद-माष्व । १४७. सप्तर्षीन् वा इदं बर॑मोऽपो देवीः प॒जायंतिप ।

English

Closely embraced and laid therein are lightnings and the clouds and rain. Gain, acquisition, and success, fulness, complete prosperity.

अध्याय ११

श्लोक 5.20

ओष॑धयो भूतभ॒व्यम॑होरा॒त्रे वन॒स्पतिः॑ ।सं॒व॒त्स॒रः स॒हर्तुभि॒स्ते जा॒ता ब्र॑ह्मचा॒रिणः॑

oṣadhayo bhūtabhavyamahorātre vanaspatiḥ | saṃvatsaraḥ sahartubhiste jātā brahmacāriṇaḥ

हिन्दी अर्थ

१४८ भ्रथरवंवेद-भाष्य कां९ ११।सु०६ ये देवा विषदां अन्तरि्रसद्श्च ये । (ये) जो (देवाः) देव (दिविषदः) दूलोक में स्थित है, (चये शक्तिशाली देव (पृथिव्याम्) पृथिवी मे (शिताः) आश्रय पाए हृएहै

English

179 Residue.

अध्याय ११

श्लोक 5.21

पार्थि॑वा दि॒व्याः प॒शव॑ आर॒ण्या ग्रा॒म्याश्च॒ ये।अ॒प॒क्षाः प॒क्षिण॑श्च॒ ये ते जा॒ता ब्र॑ह्मचा॒रिणः॑

pārthivā divyāḥ paśava āraṇyā grāmyāśca ye| apakṣāḥ pakṣiṇaśca ye te jātā brahmacāriṇaḥ

हिन्दी अर्थ

(ते) वे सब है परमेश्वर ! (नः) हमें (श्रंहसः) मरण या कष्टोँसे (मुञ्चन्तु) मुक्त करे, हमारा हनन न करे । भ्रदशित है । पृथिवी के देव हैँ शासक तथा प्रबन्वक राज्याधिकारी, तथा आदित्या शद्रा वसो दिवि देवा अथर्वाणः मेद्वर ! (नः) हमे (रहसः) मरण से (मृञ्चन्तु) मक्त करे ।

English

All things that breathe the breath of life, all creatures that have eyes to see,

अध्याय ११

श्लोक 5.22

पृथ॒क् सर्वे॑ प्राजाप॒त्याः प्रा॒णाना॒त्मसु॑ बिभ्रति ।तान्त्सर्वा॒न् ब्रह्म॑ रक्षति ब्रह्मचा॒रिण्याभृ॑तम्

pṛthak sarve prājāpatyāḥ prāṇānātmasu bibhrati | tāntsarvān brahma rakṣati brahmacāriṇyābhṛtam

हिन्दी अर्थ

रस म्रथवेवेद वेद के ऋषियों का. ग्रहण कियाहै । “श्रथर्वाणः" को रूप से भ्रपने-भ्रपने स्थानों म स्थित है । कां० ११।सु०६ श्रयवंवेद-माष्य १४९ . सामवेद के गानो, (भेषजा) विविध भ्रोषधियों का वणेन करने वाले भ्रथवं- वेद का (ब्रमः) हम कथन करते रहते हँ । (यजुषि) यजुर्वेद के मन्तो

English

All the celestial Gods whose home is heaven sprang from the Residue.

अध्याय ११

श्लोक 5.23

दे॒वाना॑मे॒तत् प॑रिषू॒तमन॑भ्यारूढं चरति॒ रोच॑मानम्।तस्मा॑ज्जा॒तं ब्राह्म॑णं॒ ब्रह्म॑ ज्ये॒ष्ठं दे॒वाश्च॒ सर्वे॑ अ॒मते॑न सा॒कम्

devānāmetat pariṣūtamanabhyārūḍhaṃ carati rocamānam| tasmājjātaṃ brāhmaṇaṃ brahma jyeṣṭhaṃ devāśca sarve amatena sākam

हिन्दी अर्थ

(ते) वे सब है परमेहवर ! ) (नः) हमे (श्रंहसः) मरण से (मूञ्चन्तु) मुरूत करे । भेषजा = श्रथवा “भेषज” रूपी सामभ्री की भरोषधियां । प्रत्यवाय के हो जाने पर भ्राशंकित मृत्यु से बचाव के लिये परमेदवरसे भ्रनुकूल है । “भेषजा” पद वारा ब्रथवैवेद भ्रभिमत है । नानाविच. श्रोष- धियो को वर्णेन श्रथवैवेदे मे है, श्रत: अथर्ववेद को “भेषजा” कहा ह + इस प्रकार मन्त्रम चारों वेदों के नाम पठितर्है। जौ, तथा सह, (ते) वे (नः) हमे (अहसः) मृत्युकारक रोगोसे हे परमेदवर (मुञ्चन्तु) . मुक्त करं ।

English

Verses, and Songs, and magic hymns, Purāna, sacrificial text.

अध्याय ११

श्लोक 5.24

ब्र॒ह्म॒चा॒री ब्रह्म॒ भ्राज॑द् बिभर्ति॒ तस्मि॑न् दे॒वा अधि॒ विश्वे॑ स॒मोताः॑ ।प्रा॒णा॒पा॒नौ ज॒नय॒न्नाद् व्या॒नं वाचं॒ मनो॒ हृद॑यं॒ ब्रह्म॑ मे॒धाम्

brahmacārī brahma bhrājad bibharti tasmin devā adhi viśve samotāḥ | prāṇāpānau janayannād vyānaṃ vācaṃ mano hṛdayaṃ brahma medhām

हिन्दी अर्थ

दः = कुला, जिसे कि पदटृभ्रा कहते है, क्गिस से रस्सियां बनाई अन्तरगत है । अ्रभिपायःयह है.कि कोई भी श्रोषि फल प्रदात्री. नहीं होती यदि प्रमेदवरीय कषा न हो । यथा “विषमप्यमुतं क्वचिद् भवेदमृतं वा भो विष हो जाता है, रईस्वर को इच्छा से । पञ्च राज्यानि=सोम

English

All the celestial Gods whose home is heaven sprang from the Residue.

अध्याय ११

श्लोक 5.25

चक्षुः॒ श्रोत्रं॒ यशो॑ अ॒स्मासु॑ धे॒ह्यन्नं॒ रेतो॒ लोहि॑तमु॒दर॑म्

cakṣuḥ śrotraṃ yaśo asmāsu dhehyannaṃ reto lohitamudaram

हिन्दी अर्थ

ृतयुनेकञते व्रमस्ते नो युशन्त्वहसः ॥१६॥ ११० अथवंवेद-माष्य कां० ११1 भु० ६ पुण्यात्मा जताने वाले दुरात्मा, (पितृन्) तथा पितरो का (्र.मः) हम कथन करते है, तथा (एकशतं .भुत्यून्) एक सौ एक मृत्युम का (ब्रमः) हम

English

Inbreath and outbreath, eye and ear, decay and freedom from decay,

अध्याय ११

श्लोक 5.26

तानि॒ कल्प॑द् ब्रह्मचा॒री स॑लि॒लस्य॑ पृ॒ष्ठे तपो॑ऽतिष्ठत् त॒प्यमा॑नः समु॒द्रे।स स्ना॒तो ब॒भ्रुः पि॑ङ्ग॒लः पृ॑थि॒व्यां ब॒हु रो॑चते

tāni kalpad brahmacārī salilasya pṛṣṭhe tapo'tiṣṭhat tapyamānaḥ samudre| sa snāto babhruḥ piṅgalaḥ pṛthivyāṃ bahu rocate

हिन्दी अर्थ

कथन करते है (ते)वे है परमेश्वर ! (नः) हमे (श्रहसः) मरणसे (मुञ्चन्तु) मुक्त करर, हमारा हनन न करे । सर्पो के से व्यवहार वाले विष द्वारां मार देने वाले । पितृन जननी जनक. ये पितृनामधारी, जब पितरों के संमान व्यनहार न करते हृए, भ्रपिततर रूप से बरताव करते है, ५-111678 श्रादि । एकशतं मृत्यून् = १०० वर्षों कथन करते है,-- (ते) वे सब है परमेदवर ! (नः) हमे (ग्रहंसः) हनन से (मुञ्चन्तु) मुक्त करे, हमारा हनन न करं ।

English

All the celestial Gods whose home is heaven sprang from the Residue.

अध्याय ११

श्लोक 6.1

पापमोचनम्।१-२३ शन्तातिः।चन्द्रमाः, मन्त्रोक्ताः।अनुष्टुप्, २३ बृहतीगर्भा।अ॒ग्निं ब्रू॑मो॒ वन॒स्पती॒नोष॑धीरु॒त वी॒रुधः॑ ।इन्द्रं॒ बृह॒स्पतिं॒ सूर्यं॒ ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

pāpamocanam| 1-23 śantātiḥ| candramāḥ, mantroktāḥ| anuṣṭup, 23 bṛhatīgarbhā| agniṃ brūmo vanaspatīnoṣadhīruta vīrudhaḥ | indraṃ bṛhaspatiṃ sūryaṃ te no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

मुखवाला शेर । दिशाए श्रौर १२ मास तो देवीः श्नौर देव है, भरतः कल्याण- कारो है । परमेश्वरसेप्राथंनाकी गई हैकिये सदा दिव्य रूप रहकर हमारे लिये कल्याणकारी हों । तथा संवत्सरकाल मेँ जो ददानकारी सपं मासाः, यथा मधुरुच माववश्च वासन्तिकावृतू" (यजु० १३-२५) मे ऋतु- यन्मातंटी रथक्री तमत वेद् भेषजम् । (मात्तली) निर्माणकायं की भ्राषारभूत पारमेरुवरी माता, (रयक्री-

English

These were the wooers of the bride; Brahma the chief who courted her. Ten Gods before the Gods were born together in the ancient time.

अध्याय ११

श्लोक 6.2

ब्रू॒मो राजा॑नं॒ वरु॑णं मि॒त्रं विष्णु॒मथो॒ भग॑म्।अंशं॒ विव॑स्वन्तं ब्रूम॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

brūmo rājānaṃ varuṇaṃ mitraṃ viṣṇumatho bhagam| aṃśaṃ vivasvantaṃ brūmaste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

कि को गई कामना वेदानुकूल हैया नहीं । सुरापान, मांसमक्षण, पशुहिसा, कमं किये .जाते हैँ । इन के निषेघ के लिये “छन्दा सह“ यह कथन हृश्रा की दृष्टि मेँ वेदाविर्भाव से पूवं उन यज्ञो की सत्ता माननी पड़ेगी, जो कि ही लुप्त हो चुके थे । वेदों को नित्य मानने वाले सायणाचायं . की दृष्टि से यह व्याख्या उस के मन्तव्य की विरोधिनी है।

English

What world do they inhabit since they gave the world unto their sons?

अध्याय ११

श्लोक 6.3

ब्रू॒मो दे॒वं स॑वि॒तारं॑ धा॒तार॑मु॒त पू॒षण॑म्।त्वष्टा॑रमग्रि॒यं ब्रू॑म॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

brūmo devaṃ savitāraṃ dhātāramuta pūṣaṇam| tvaṣṭāramagriyaṃ brūmaste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

निहित ह (विंद्वस्य भर्ता) विद्व का भरण-पोषण करने वाला (जनि- तुः पिता) पिता का भी पिता, (उच्छिष्टः) प्रलय मे भी अ्रवशिष्ट रहने वाला परमेदवर. उन सव का (बिभत्ति) भरण-पोषण करताहै। का योग हृदय गुहा के लिये भी होता है । खर भी यज्ञशाला है, देखो उत्पादक पिता का (पिता) पिता है, (भरसोः) प्राण का (पौवः) पौत्रहैः तो भी (पितामहः) हमारा पितामह है, हमारे पिताभरों का भी पिता है।. (भूम्याम्) भूमि में (क्षियति) निवास करताहै।

English

The thighs, the knee-bones, and the feet, the head, the face, Land both the hands,

अध्याय ११

श्लोक 6.4

ग॒न्ध॒र्वा॒प्स॒रसो॑ ब्रूमो अ॒श्विना॒ ब्रह्म॑ण॒स्पति॑म्।अ॒र्य॒मा नाम॒ यो दे॒वस्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

gandharvāpsaraso brūmo aśvinā brahmaṇaspatim| aryamā nāma yo devaste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

„ भ्रसोः पौत्रः=प्राणायाम से संयम का परिपोषण होता है । संयम होते ह-बारणः ध्यान भ्रौर समाधि । ये तीनों जब एक ध्येय मे एकत्र होते हैतोइनकानाम हो जाता ह “संयम । यथा “त्रयमेकत्र संयमः” (योग विस्तृत है । पृथिवी प्रथ विस्तारे । . ध कां० ११ सू० ७ भ्रथववेदे-भाष्यं १६७

English

The ribs, the nipples, and the sides—what I ishi hath constructed that?

अध्याय ११

श्लोक 6.5

अ॒हो॒रा॒त्रे इ॒दं ब्रू॑मः सूर्याचन्द्र॒मसा॑वु॒भा।विश्वा॑नादि॒त्यान् ब्रू॑म॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

ahorātre idaṃ brūmaḥ sūryācandramasāvubhā| viśvānādityān brūmaste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

मबत्सरः = सूं के चारो श्रोर पृथिवी की एक प्रदक्षिणा का काल । याज्ञिक पक्ष मेः--इडा =देवता के लिये यज्ञशेष र्मेसे भाग दिया को ग्रहण करने के ऊर्घ्वाकार पात्र । । वेदन करने वाले मन्त्र, नथा (यज्ञाः) यागं, (होराः) होता के समेत ७

English

Head, both the hands, and face, and tongue, and neck, and inter- coastal parts, 180

अध्याय ११

श्लोक 6.6

वातं॑ ब्रूमः प॒र्जन्य॑म॒न्तरि॑क्ष॒मथो॒ दिशः॑ ।आशा॑श्च॒ सर्वा॑ ब्रूम॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

vātaṃ brūmaḥ parjanyamantarikṣamatho diśaḥ | āśāśca sarvā brūmaste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

जाने वाले यज्ञ, भर्थात् वंदवदेव, वरुणप्रधास, साकमेव शुनासीरीय । .. सह्, भततंवाः) ऋतुधो के-साथ ऋतुसमूह, (घोषिणीः श्रापः) शब्द करने वाले जल सम्भवतः नदियों मे बहने वाले वर्षा के जल , (स्तनयित्नुः) १६० . भ्रथर्वतेद-भाष्य कां० ११। सु° ७ श्रुतिः = वेदवाणी गुरमुख से सुनी जाती है, अतः घोषमयी दहै ।

English

All this, investing it with skins, Mahi conjoined with bond and tie.

अध्याय ११

श्लोक 6.7

मु॒ञ्चन्तु॑ मा शप॒थ्याऽदहोरा॒त्रे अथो॑ उ॒षाः ।सोमो॑ मा दे॒वो मु॑ञ्चतु॒ यमा॒हुश्च॒न्द्रमा॒ इति॑

muñcantu mā śapathyā'dahorātre atho uṣāḥ | somo mā devo muñcatu yamāhuścandramā iti

हिन्दी अर्थ

शकराः सिफ़ता अदमान ओषंषयो वीरुषस्तृणां । माण कमं का पूरा होना, (व्याप्तिः) विविध कर्मो मे व्यापृत रहना, (महः) है, (निहिता) निधिवत् सुरक्षित है" (हिता) स्थि रतया स्थित है । “भ्राहिता, निहिता, हिता” इन सब मे विद्य लोप छान्दस है ।. हिता =हिताः==भ्रथवा थे सब हमारे हितकर है । ता है, तथा (सवं देवाः) सब देव (दिवि) जो कि द्युलोक मेँ है, (दिवि-

English

What time the might body lay firmly compact with tie and bond, Who gave its colour to the form, the hue wherewith it shines to-day?

अध्याय ११

श्लोक 6.8

पार्थि॑वा दि॒व्यः प॒शव॑ आर॒ण्या उ॒त ये मृ॒गाः ।श॒कुन्ता॑न् प॒क्षिणो॑ ब्रूम॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

pārthivā divyaḥ paśava āraṇyā uta ye mṛgāḥ | śakuntān pakṣiṇo brūmaste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

भ्वरिष्ट परमेदवर से (जज्ञिरे) पैदा हुए है । काऽ ११। सुर ७ अथवेवेद-माष्यं १६९ तथा (सवे देवाः) सब देव (दिवि) जोकि लोक मँ है, (दिविश्रितः) भ्रौर परमेदवर से (जज्ञिरे) पैदा हए ई ।

English

All Deities had lent their aid: of this a noble Dame took note,

अध्याय ११

श्लोक 6.9

भ॒वा॒श॒र्वावि॒दं ब्रू॑मो रु॒द्रं प॑शु॒पति॑श्च॒ यः ।इषू॒र्या ए॑षां संवि॒द्म ता नः॑ सन्तु॒ सदा॑ शि॒वाः

bhavāśarvāvidaṃ brūmo rudraṃ paśupatiśca yaḥ | iṣūryā eṣāṃ saṃvidma tā naḥ santu sadā śivāḥ

हिन्दी अर्थ

८॥७) । तथा पुराण = प्रकृति (अथवं० १०।७।२३) । देवाः = ोतमानाः तथा (सरवे देवाः) सब देव (दिवि) जोकि दयूलोक मे टै, (दिव्रिध्रितः) श्रौर मेश्वर से (जज्ञिरे) पैदा हृए है । उत्पन्न-मन तब तक स्थिर रहता है, विनष्ट नहीं होता, जब तक

English

Tsā, the Consort of Command. She gave its colour to the form. When Tvashtar, Tvashtar’s loftier Sire, had bored it out and hollowed it.

अध्याय ११

श्लोक 6.10

दिवं॑ ब्रूमो॒ नक्ष॑त्राणि॒ भूमिं॑ य॒क्षाणि॒ पर्व॑तान्।स॒मु॒द्रा न॒द्योऽ वेश॒न्तास्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

divaṃ brūmo nakṣatrāṇi bhūmiṃ yakṣāṇi parvatān| samudrā nadyo' veśantāste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

(१) कथानक के भ्रनुसार मातलि (मातली) इन्ध का रथवाहक है । मन्त (मातली) करने लगती है,--यह योगशास्त्र का सिद्धान्त है, तथां गीता दाया १५४ भ्रथरवेवेद-माष्य कां० ११। सू०६ जगत् के निर्माण में पारमेश्वरी माता भराधाररूप, नींवरूप है, जैसे कि मानु- षी माता शिशु के निर्माण में श्राधारलूप होती है, वह पारंमेरवरी माता

English

Whoso may know them face to face may now pronounce the mighty word.

अध्याय ११

श्लोक 6.11

स॒प्त॒र्षीन् वा इ॒दं ब्रू॑मो॒ऽपो दे॒वीः प्र॒जाप॑तिम्।पि॒तॄन् य॒मश्रे॑ष्ठान् ब्रूम॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

saptarṣīn vā idaṃ brūmo'po devīḥ prajāpatim| pitṝn yamaśreṣṭhān brūmaste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

दना होगा । उस का मूल्य है “शरीररथ” । इसे मोक्ष प्राप्ति के साधनों तथा पारमेश्वरीमाता के प्रति स्मित करना होगा । जब वस्तु खरीदी जाती है, तो उस के निमित्त दिया घन वस्तु के स्वामी कोदे. देना होता है, उस धन पर फिर खरीद करने वाले का स्वत्व नहीं रहता ॥ यही भव- स्थाशरीरकी हौ जाती “श्रमुत-भौषव के खरीदने पर । रथक्रीतम् भी तक शरीर रथ का स्वामी बना हृभा दहै (कटठोप० १।३।३)› उसे भी इस निमित्त परिश्षम कसना होगा । वह परिभरम है निज शरीर के रस- भ्रमृत-मेषज दे सके गे । इन रस-रक्तों का मूल स्नोत है हदय । ईस हृदय मे परमेदवर के प्रवेश पूर्वक, योगाङ्ग का सेवन करना होगा । भाषः मरने (अमृत न मृत होने) की भेषज =. भ्रापः जल । यथा भ्रपो याचामि भेषजम्” (भ्रथववं ° १।५।४); “मै जलो से भेषज की याचना करता हु" । “रपु मे सोमो भ्रब्रवीदन्तविदवानि भेषजा” (अथवं० १।६।२) “सोम ने मु कहा है कि जलो के भीतर सब भेषजं है । “श्रप्स्वन्तरमृत- मप्तु भेषजम्” (श्रथरवे० १।४।४), “जलो मे भ्रमत हं, जलो में भेषज है ।

English

Inbreath and outbreath, eye and ear, decay and freedom from. decay, Spiration upward and diffused, voice, mind have brought us wish and plan.

अध्याय ११

श्लोक 6.12

ये दे॒वा दि॑वि॒षदो॑ अन्तरिक्ष॒सद॑श्च॒ ये।पृ॒थि॒व्यां श॒क्रा ये श्रि॒तास्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

ye devā diviṣado antarikṣasadaśca ye| pṛthivyāṃ śakrā ye śritāste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

कां० ११। सु० ७ भ्रथववंवेद-माष्य १५५ मे ही उपपन्न हो सकता है (१-६.२४) ।. । ४-- मन्त्र ७ से १६ तक में नानाविध यज्ञोकेनाम दिये है, जिन ४--ये यज्ञ मुख्य रूप मे निम्न लिखित है--राजभूय, वाजपेय, ्रग्नि- १५६ भथवेवेद-भाष्य कां० १ १। सू० ७

English

As yet the Seasons were unborn, and Dilator and Prajāpati,

अध्याय ११

श्लोक 6.13

आ॒दि॒त्या रु॒द्रा वस॑वो दि॒वि दे॒वा अथ॑र्वाणः।अङ्गि॑रसो मनी॒षिण॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

ādityā rudrā vasavo divi devā atharvāṇaḥ| aṅgiraso manīṣiṇaste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

लाप ही वेदाभिमत समभे जाने चाहिए, यह प्रदन भ्रति. गम्भीर है । रहस्यार्थो का भी निदेश प्रतीत होता है । परन्तु भरथवेवेदमे न तो इन मुख्यरूप मे शतपथ ब्राह्मण मेँ ही वणित हुए है । ७-मन्व ११ भौर १५के भ्रनुसार सब यज्ञो भ्रौर गुहा.हितोः यज्ञो को उच्छिष्टः ही पेदा करता, तथा उन को धारण करता है । “गृहा-

English

Both Asvins, Indra, Agni. Whom then did they worship as supreme? Fervour and Action were the two, in depths of the great billowy sea;

अध्याय ११

श्लोक 6.14

य॒ज्ञं ब्रू॑मो॒ यज॑मान॒मृचः॒ सामा॑नि भेष॒जा।यजूं॑षि॒ होत्रा॑ ब्रूम॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

yajñaṃ brūmo yajamānamṛcaḥ sāmāni bheṣajā| yajūṃṣi hotrā brūmaste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

. गया था । इस रथ मं क्या भथववेद की नित्यता उपपन्न हो सकती है ? ९- मन्व १४ मे, “नव भ्रमी" द्वारा ९ भ्रुमियों का कथन. हाः पुथिवी (निघं० १।१) । इन के प्रभिप्रायों पर प्रका डाला है । का कथन हूभा है । पुराण का भ्रं विचारणीय है ।

English

Fervour sprang up from Action: this they served and worship- ped as supreme.

अध्याय ११

श्लोक 6.15

पञ्च॑ रा॒ज्यानि॑ वी॒रुधां॒ सोम॑श्रेष्ठानि ब्रूमः ।द॒र्भो भङ्गो यवः॒ सह॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

pañca rājyāni vīrudhāṃ somaśreṣṭhāni brūmaḥ | darbho bhaṅgo yavaḥ sahaste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

(मनुस्मृति) । वेद यतः. गुरमुख से श्रवण किये जाते है, इसलिये वेद.को कां० ११। सु० ७ भ्रथववेद-माष्य १५७. १२- मनर २७ “गन्धर्वाप्सरसः” का कथन हूभ्रा है । यजुवंदाि- मत इन कै यथार्थं स्वरूपो का निदंदा किया है । ग्रन्थो मे अग्निष्टोम में हिसा,का विधान है । इसलिये वेदविद होने से

English

He may account himself well versed in ancient time who knows by name. The earth that was before this earth, which only wisest Sages know.

अध्याय ११

श्लोक 6.16

अ॒राया॑न् ब्रूमो॒ रक्षां॑सि स॒र्पान् पु॑ण्यज॒नान् पि॒तृन्।मृ॒त्यूनेक॑शतं ब्रूम॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

arāyān brūmo rakṣāṃsi sarpān puṇyajanān pitṛn| mṛtyūnekaśataṃ brūmaste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

परमेदवर मे (नाम रूपम्) सृष्ट जगत् के. नाम भौर रूप स्थित रह, (च) भौर कत्वरूप मे नहीं होती, जीवात्मा भी निंशचेष्ट रहते है । परमेद्वर उस शन अंथर्ववेद-माष्य कां० ११ सु० ७. माना है । इसलिये इन्द्र का भरथं “विद्युत् ˆ किया है

English

From whom did Indra spring? from whom sprang Soma? whence was Agni born?

अध्याय ११

श्लोक 6.17

ऋ॒तून् ब्रू॑म ऋतु॒पती॑नार्त॒वानु॒त हा॑य॒नान्।समाः॑ संवत्स॒रान् मासां॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

ṛtūn brūma ṛtupatīnārtavānuta hāyanān| samāḥ saṃvatsarān māsāṃste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

नाभिमिव सर्पतक्रमुचछिष्टे देवताः भिताः ॥४॥ कां० ११।सू०७ भ्रथर्वेवेद-माष्य । १४९ (ऋक्) ऋग्वेद, (साम) सामवेद, (यजुः) यजुर्वेद, (उद्गीथः) सामगान के ५ भाग होते है-हिकार, प्रस्ताव, उद् गीथ, प्रतिहार

English

From whom did Tvashtar spring to life? and whence is Dilator’s origin? Indra from Indra, Soma from Soma, Agni from Agni sprang

अध्याय ११

श्लोक 6.18

एत॑ देवा दक्षिण॒तः प॒श्चात् प्राञ्च॑ उ॒देत॑ ।पु॒रस्ता॑दुत्त॒राच्छ॒क्रा विश्वे॑ दे॒वाः स॒मेत्य॒ ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

eta devā dakṣiṇataḥ paścāt prāñca udeta | purastāduttarācchakrā viśve devāḥ sametya te no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

का उच्चार करते ै,यह हिङ्कार है हिकार हि" शब्द करना। सामगान १६० भ्रथवेवेदमाष्य कां० ११ । सु०७ गान, (पावमानम्) सोमदेवता सम्बन्धी पवित्र करने वाला सोमगानः कावप धावुच्छष्टे जीववंहिमेदिन्त॑मः ।।७॥

English

Tvashtar from Tvashtar was produced, Dilator was Dhātar’s origin.

अध्याय ११

श्लोक 6.19

विश्वा॑न् दे॒वानि॒दं ब्रू॑मः स॒त्यसं॑धानृता॒वृधः॑ ।विश्वा॑भिः॒ पत्नी॑भिः स॒ह ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

viśvān devānidaṃ brūmaḥ satyasaṃdhānṛtāvṛdhaḥ | viśvābhiḥ patnībhiḥ saha te no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

ञगन्याधेयमयों दीक्षा कामभग्न्दसा सह । म श्रग्निष्टोम में हिसा का विधानं है) - ५ कार ११। सू० ७ भ्रथ्ववेद-माष्य = । कामप्रः=काम+प्रा (पूरणे) । कामनाभ्रों को पूणं करने वाला यज्ञ । कामनाए वेदानुकूल भी होती हं, प्रतिकूल भौ । - “कामप्रद-यज्ञ"" छन्दों

English

Those Gods who were of old, the Ten begotten earlier than the Gods,

अध्याय ११

श्लोक 6.20

सर्वा॑न् दे॒वानि॒दं ब्रू॑मः स॒त्यसं॑धानृता॒वृधः॑ ।सर्वा॑भिः॒ पत्नी॑भिः स॒ह ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

sarvān devānidaṃ brūmaḥ satyasaṃdhānṛtāvṛdhaḥ | sarvābhiḥ patnībhiḥ saha te no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

१६२ श्रथर्वेवेद-माष्य कां० ११। सु° ७ हिताः) समाधि है 1 भ्र्थात् ये सव कृत्य परमेदवरा्पित करः करने एकरातो द्विराघ्रः संचयः कीः प्रकीर्य : । कां° ११। सु ७ -भ्रथवेवेद-माष्य १६३

English

When he had brought together hair, sinew and bone, marrow and flesh. And to the body added feet, then to what world did he depart?

अध्याय ११

श्लोक 6.21

भू॒तं ब्रू॑मो भूत॒पतिं॑ भू॒ताना॑मु॒त यो व॒शी।भू॒तानि॒ सर्वा॑ सं॒गत्य॒ ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

bhūtaṃ brūmo bhūtapatiṃ bhūtānāmuta yo vaśī| bhūtāni sarvā saṃgatya te no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

जाता है, (निधनम्) सामगान का पंचमं भाग जिस मे सामगान समाप्त होता है भौर जिसे सब उद्गाता मिलकर गाते है, (विदवजित्, भभिजित् त्र) इन नामों वाले दो सोमयाम, (साह्खातिरार््रौ) एकं दिन में समाप्य होने वाला सोमथाग भी उस परमेदवर मे भाश्रित है। (तत्) वहं यतः सब कामनाए (कामेन) परमेदवर की कामना भ्र्थात् इच्छा दरार १६४ अथववेद-माष्य कां° ११। सुऽ ७

English

Whence, from what region did he bring the hair, the sinews, and the bones,

अध्याय ११

श्लोक 6.22

या दे॒वीः पञ्च॑ प्र॒दिशो॒ ये दे॒वा द्वाद॑श॒र्तवः॑ ।सं॒व॒त्स॒रस्य॒ ये दंष्ट्रा॒स्ते नः॑ सन्तु॒ सदा॑ शि॒वाः

yā devīḥ pañca pradiśo ye devā dvādaśartavaḥ | saṃvatsarasya ye daṃṣṭrāste naḥ santu sadā śivāḥ

हिन्दी अर्थ

नव भूमीः इस के दो अभिप्राय हैँ । एक यह किं पृथिवी एक है, रौर भ्रपने स्थान बदलते रहते है, एसा वर्तमान वज्ञानिके मानते है । सायणने भी नवभूमीः का भ्रथं किया है । “नवखण्डात्मिकाः पृथिव्य, नेपचून, चन्द्रमा । दिवः तीन चौः, ्रथंवा द्यौः के तीन भ'ग (देखो मक्कृत- भ्रथवेवेद-माश्यं १९।१।१०; १३।३।२१; १६।२७।३) । १९०८२ मं प्रकाशित एक लेख में से. निम्नलिखित उद्धरण विशेष प्रका

English

Marrow and limbs, and joints, and flesh? Who was the bringer, and from whence? Casters, those Gods were called who brought together all the elements:

अध्याय ११

श्लोक 6.23

यन्मात॑ली रथक्री॒तम॒मृतं॒ वेद॑ भेष॒जम्।तदिन्द्रो॑ अ॒प्सु प्रावे॑शय॒त् तदापो॑ दत्त भेष॒जम्

yanmātalī rathakrītamamṛtaṃ veda bheṣajam| tadindro apsu prāveśayat tadāpo datta bheṣajam

हिन्दी अर्थ

रहा है, भौर बर्मा के नीचे घुस रहा है । गत ७५ वषो भे जो इस भाग में कां० ११।सु०७ भरथवेवेद-माष्य . १४ भूचाल श्राए है, उन के भ्राधार पर यह परिणाम निकलता है । वैज्ञानिकों ने इस भू-भाग म एेसा भाग पाया है जहां कि भारत भू-माग, ३५ से ६९. डिग्री पर, २०० किलो मीटर, शनैः-रनैः, बर्मा के भूमाग में चुसता जा रहा है । पृथिवी के स्तरों की रचनानुसार, पृथिवी के भिन्न भिन्न महाखण्ड वैज्ञानिकों की इस खोज के भ्रनुसार -मन्त्रगत “नव भूमीः” का भरं नवखण्डात्मिकाः पृथिव्यः” ठीक प्रतीत होता है ।

English

When they had fused the mortal man complete, they entered into him.

अध्याय ११

श्लोक 7.1

उच्छिष्ट ब्रह्म-सूक्तम्।१-२७ अथर्वा।अध्यात्मं, उच्छिष्टः।अनुष्टप्, ६ पुर उष्णिग्बार्हतपरा, २१ स्वराट्, २२ विराट् पथ्याबृहती।उच्छि॑ष्टे॒ नाम॑ रू॒पं चोच्छि॑ष्टे लो॒क आहि॑तः ।उच्छि॑ष्ट॒ इन्द्र॑श्चा॒ग्निश्च॒ विश्व॑म॒न्तः स॒माहि॑तम्

ucchiṣṭa brahma-sūktam| 1-27 atharvā| adhyātmaṃ, ucchiṣṭaḥ| anuṣṭap, 6 pura uṣṇigbārhataparā, 21 svarāṭ, 22 virāṭ pathyābṛhatī| ucchiṣṭe nāma rūpaṃ cocchiṣṭe loka āhitaḥ | ucchiṣṭa indraścāgniśca viśvamantaḥ samāhitam

हिन्दी अर्थ

भौर क्षिति के भ्र्थो में कुछ भेद हुभा है । १७० अथरवेवेद-माध्य कां० ११1 सू०७ हर्षातिरेक, (सर्व देवाः) तथा सब देव (दिवि) जो किं द्यलोकमे ह भी भ्रवशिष्ट परमेक्वर से (जज्ञिरे) पैदा हृए है।

English

Gods made the mortal their abode, and entered and possessed the man.

अध्याय ११

श्लोक 7.3

उच्छि॑ष्टे॒ द्यावा॑पृथि॒वी विश्वं॑ भू॒तं स॒माहि॑तम्।आपः॑ समु॒द्र उच्छि॑ष्टे च॒न्द्रमा॒ वात॒ आहि॑तः ॥ सन्नुच्छि॑ष्टे॒ असं॑श्चो॒भौ मृ॒त्युर्वाजः॑ प्र॒जाप॑तिः ।लै॒क्या उच्छि॑ष्ट॒ आय॑त्ता॒ व्रश्च॒ द्रश्चापि॒ श्रीर्मयि॑

ucchiṣṭe dyāvāpṛthivī viśvaṃ bhūtaṃ samāhitam| āpaḥ samudra ucchiṣṭe candramā vāta āhitaḥ || sannucchiṣṭe asaṃścobhau mṛtyurvājaḥ prajāpatiḥ | laikyā ucchiṣṭa āyattā vraśca draścāpi śrīrmayi

हिन्दी अर्थ

स्नाव = वे मांसतन्तु जिन के द्वारा मांस हडयों के साथ बन्वा पड़ा है । इन तन्तुं को कण्डराए कहते है । नाली वाली ही मेँ जो स्नेह भाग विद्यामान होता है वह मज्जा है 1. अज्ञा पर्वाणि मृश्जानं को मासं त॒ आभरत् ॥१२॥

English

For all the Deities abide in him as cattle in their pen. At his first death he goeth hence, asunder, in three separate parts.

अध्याय ११

श्लोक 7.4

दृ॒ढो दृं॑हस्थि॒रो न्यो ब्रह्म॑ विश्व॒सृजो दश॑ ।नाभि॑मिव स॒र्वत॑श्च॒क्रमुच्छि॑ष्टे दे॒वताः॑ श्रि॒ताः

dṛḍho dṛṃhasthiro nyo brahma viśvasṛjo daśa | nābhimiva sarvataścakramucchiṣṭe devatāḥ śritāḥ

हिन्दी अर्थ

(कुतः) कहां ने भ्नौर. किस नेः (केशान्). के्ो-को, (कुतः). कां० ११। सु० क म्रथर्ववेद-माष्य १८१ कहां से श्रौर किघने (स्नाव) मांस तन्तुर को, (कुतः) कहां से भौर मास को (कः) किस ने (कुतः) कहांसे (भ्राभरत्) दारीर मे भर

English

He goeth yonder with one part, with one he goeth yonder: here he sinketh downward with a

अध्याय ११

श्लोक 7.5

ऋक् साम॒ यजु॒रुच्छि॑ष्ट उद्गी॒थः प्रस्तु॑तं स्तु॒तम्।हि॒ङ्का॒र उच्छि॑ष्टे॒ स्वरः॒ साम्नो॑ मे॒डिश्च॒ तन्मयि॑

ṛk sāma yajurucchiṣṭa udgīthaḥ prastutaṃ stutam| hiṅkāra ucchiṣṭe svaraḥ sāmno meḍiśca tanmayi

हिन्दी अर्थ

सर्वं संसिच्य सत्यै देवाः पुरुषमाविशन् ॥१३॥ ते देवाः) वे देव (संसिचः नाम) संसिच् नाम वाले ईँ, (ये) संसिचः- सीं चने वाले देव “श्रापः” प्रतीतं होते है । रस-रक्तरूपी द्रवो को “श्रापः“नेहीसीचाहै । वेदने रस-रक्त को भरापःकहाहै। न=शरीरमें सब श्रोर गति करने वाले भ्रापः । शरीर की समग्र रचनां पिता के वीयंद्रव तथा माताके रजोद्रव से होती है । ये दोनोंद्रवरहैः

English

third. In the primeval waters cold the body is deposited.

अध्याय ११

श्लोक 7.6

ऐ॒न्द्रा॒ग्नं पा॑वमा॒नं म॒हाना॑म्नीर्महाव्र॒तम्।उच्छि॑ष्टे य॒ज्ञस्याङ्गा॑न्य॒न्तर्गर्भ॑ इव मा॒तरि॑

aindrāgnaṃ pāvamānaṃ mahānāmnīrmahāvratam| ucchiṣṭe yajñasyāṅgānyantargarbha iva mātari

हिन्दी अर्थ

- भाषः हैः इन्हीं से केशः भ्रादिका निर्माण हुमांदहै । अतः ये संसिच् देव है, इन्दी से समग्रशरीर सीचागयाहै, ये ही शरीर मँ प्रविष्ट संसि छरू पादाष्ठीवन्तौ शिरो इस्तावयो सुसंम् । (शिरो हस्तौ) सिर भौर हाथो, (अथो). तथा . (मुखम्) मुख को, (पृष्टीः) पसलियों को, (बजंह्य ) दौ कन्धों या हंसलियों कौ, पार्ष्वे) दो कोलो को (कः षिः) किंस ऋषि ने (तत्) वह् सब (समदधात्) जोड दिया ।

English

In this there is the power of growth: from this is power of growth declared.

अध्याय ११

श्लोक 7.7

रा॒ज॒सूयं॑ वाज॒पेय॑मग्निष्टो॒मस्तद॑ध्व॒रः ।अ॒र्का॒श्व॒मे॒धावुच्छि॑ष्टे जी॒वब॑र्हिर्म॒दिन्त॑मः

rājasūyaṃ vājapeyamagniṣṭomastadadhvaraḥ | arkāśvamedhāvucchiṣṭe jīvabarhirmadintamaḥ

हिन्दी अर्थ

१८२. भरथर्वेवेद-माष्य कां० ११।सु० ८ उरू 11 ्, इस का अनुवाद प्रायः जाएं किया जाता है । पृथक् पठित हैँ । मन्त्र मेँ ऋषिपद दवारा उत्तर भी दे.दिया है कि “कः यथा “को वं नाम प्रजापतिः' (एे° ३।२.१) 1

English

An incantation for the destruction of a hostile army All arms and every arrow, all the power and might that bows possess,

अध्याय ११

श्लोक 7.8

अ॒ग्न्या॒धेय॒मथो॑ दी॒क्षा का॑म॒प्रश्छन्द॑सा स॒ह।उत्स॑न्ना य॒ज्ञाः स॒त्राण्युच्छि॒ष्टेऽधि॑ स॒माहि॑ताः

agnyādheyamatho dīkṣā kāmapraśchandasā saha| utsannā yajñāḥ satrāṇyucchiṣṭe'dhi samāhitāḥ

हिन्दी अर्थ

शिरो दस्तावथो सुस जिह्वा ग्रीवाश्च कीकताः। (शिरः, हस्तौ, श्रयो, मुखम्) सिर, दोनों हाथों भ्रौर मूख को, (जिह्वा, प्रीवादच, कीकसाः) जौ पर, गदेन की नसनाद्ियो, रीड को हदिड- कर के, (मही संधा) जोड़ने वाली बड़ी शक्ति ने (समदधात्) परस्पर संधा = सन्धि पेदाः करने वाली पारमे्वरी शक्ति ।

English

The warlike weapon, axes, swords, the plan and purpose in the heart,

अध्याय ११

श्लोक 7.9

अ॒ग्नि॒हो॒त्रं च॑ श्र॒द्धा च॑ वषट्का॒रो व्र॒तं तपः॑ ।दक्षि॑णे॒ष्टं पू॒र्तं चोच्छि॒ष्टेऽधि॑ स॒माहि॑ताः

agnihotraṃ ca śraddhā ca vaṣaṭkāro vrataṃ tapaḥ | dakṣiṇeṣṭaṃ pūrtaṃ cocchiṣṭe'dhi samāhitāḥ

हिन्दी अर्थ

येनेदमचय रोष॑ते को अस्मिन् वणेमाभ॑रत् ॥१६॥ . (इदम्) यह शरीर (श्रय) भ्राज (रोचते) चमकता या रुचिकर होता है, कः=प्रदनवाची ; तथा “कः प्रजापतिः, करोति इति कः, जगत्क- सर्वे देवा उपाशषिक्षन् तदजानादु' वधूः -सती ।

English

All this, O Arbudi, make thou visible to our enemies, and let them look on mist and fog. Arise ye and prepare yourselves: ye, the celestial hosts, are friends.

अध्याय ११

श्लोक 7.10

ए॒क॒रा॒त्रो द्वि॑रा॒त्रः स॑द्यः॒क्रीः प्र॒क्रीरु॒क्थ्यः ।ओतं॒ निहि॑त॒मुच्छि॑ष्टे य॒ज्ञस्या॒णूनि॑ वि॒द्यया॑

ekarātro dvirātraḥ sadyaḥkrīḥ prakrīrukthyaḥ | otaṃ nihitamucchiṣṭe yajñasyāṇūni vidyayā

हिन्दी अर्थ

(देवाः) विद्रानूलोग, (पितरः) गृहस्थी, (मनुष्याः) साघारण मनुष्य ये गन्धर्वाः) जो गो भर्थात् पृथिवी का धारण करने वाले राजा भादि दिवि) जोकि लोक मेँ है, (दिविश्रितः) भ्रौर द्यलोक में जिन का १-मननरील ब्रह्म का विवाह प्रकृति के साथ (१)। २ विवाह मेँ वरपक्ष के बराती, भ्रौर कन्यापक्ष के धंराती तपः

English

Sleep, specially, Sloth, Nirriti, and deities whose name is Sin, Baldness, old age, and hoary hairs within the body found their way.

अध्याय ११

श्लोक 7.11

च॒तू॒रा॒त्रः प॑ञ्चरा॒त्रः ष॑ड्रा॒त्रश्चो॒भयः॑ स॒ह।षो॒ड॒शी स॑प्तरा॒त्रश्चोच्छि॑ष्टाज्जज्ञिरे॒ सर्वे॒ ये य॒ज्ञा अ॒मृते॑ हि॒ताः

catūrātraḥ pañcarātraḥ ṣaḍrātraścobhayaḥ saha| ṣoḍaśī saptarātraścocchiṣṭājjajñire sarve ye yajñā amṛte hitāḥ

हिन्दी अर्थ

४--कर्मः से तपः को उत्पत्ति (६) । ४५-- पुराणवित् का स्वरूप (७) । ७-संसिचः देवाः, उन द्वारा छरीर का सेच॑न (१३) । १९-वेवो का धर, त्येदेह (१८) । १२-पापमय देवताः . (१६) । १४-ज्ञरीरस्थ भराठ प्रकार के जलं (२८) ।

English

Theft, evil-doing, and deceit, truth, sacrifice, exalted fame,

अध्याय ११

श्लोक 7.12

प्र॒ती॒हा॒रो नि॒धनं॑ विश्व॒जिच्चा॑भि॒जिच्च॒ यः ।सा॒ह्ना॒ति॒रा॒त्रावुच्छि॑ष्टे द्वादशा॒होऽपि॒ तन्मयि॑

pratīhāro nidhanaṃ viśvajiccābhijicca yaḥ | sāhnātirātrāvucchiṣṭe dvādaśāho'pi tanmayi

हिन्दी अर्थ

६--शरीर का श्रषिपति प्रजापति जीवं (३०) । १७--मृतद्यरीर का दाहकमं (३१) । १६-कर्मो द्वारा त्रिविध गति (३३) । १७२ भथववंवेद-माष्यं कां० ११। सू क आंसुन् जन्याः के वराः क उ जयेष्टवरो ऽभवत् ॥१॥

English

Strength, princely power, and energy entered the body as a home. Prosperity and poverty, kindnesses and malignities,

अध्याय ११

श्लोक 7.13

सू॒नृता॒ संन॑तिः॒ क्षेमः॑ स्व॒धोर्जामृतं॒ सहः॑ ।उच्छि॑ष्टे॒ सर्वे॑ प्र॒त्यञ्चः॒ कामाः॒ कामे॑न ततृपुः

sūnṛtā saṃnatiḥ kṣemaḥ svadhorjāmṛtaṃ sahaḥ | ucchiṣṭe sarve pratyañcaḥ kāmāḥ kāmena tatṛpuḥ

हिन्दी अर्थ

तब, (जन्याः) जायापक्ष के लाग (के भ्रासन्) कौन थे, (के वराः) वर ने वरण करना हँ (श्रभवत्) हृभ्रा था । परमेरवरीय मनन कां निर्देश किया है । यह मनन. भालोचनारूप है कि सृष्टि को पैदा करू तो प्रकार, किस काल, भ्रौर किस क्रमं से कर ! इस मानुष स्वमाव का भ्रारोप, परमेदवर के सुष्टच त्पादन मे, परमेरवर मँ किया तमी का है “तन्मे मनः दिवसंकल्पमस्तु"" (यजु° २४।१-६) । मन्युः

English

Hunger and thirst of every kind entered the body as a home.

अध्याय ११

श्लोक 7.14

नव॒ भूमीः॑ समु॒द्रा उच्छि॒ष्टेऽअधि॑ श्रि॒ता दिवः॑ ।आ सूर्यो॑ भा॒त्युच्छि॑ष्टेऽहोरा॒त्रे अपि॒ तन्मयि॑

nava bhūmīḥ samudrā ucchiṣṭe'adhi śritā divaḥ | ā sūryo bhātyucchiṣṭe'horātre api tanmayi

हिन्दी अर्थ

मे भी कामना की सत्ता का कथन हभ है । यही कामना जब फलोन्ुखी हो जाती है तो इसे संकल्प कहते है 1 परमेदवरनिष्ठ कामना सदा संकल्प- रूपी होती है, वह सदा फलोन्मुखी होती है भस्मदादि की कामना सदा फलोन्मुखी नहीं होती । इसं लिये भ्रस्भदादि की कामना गौर संकल्प में भेद विवाह मँ कई लोग तो जनी-पक्ष के होते है, भौर करई वर.पक्च के । वर-पक्ष के. लोग कन्या का वरण. करते है, चुनाव करते है, भत; मन्व मेँ उन सब को “वरा” कहा है । परन्तु भ्रन्तिम चुनाव जिसने करना है । १. सोऽकामयत् बहू स्यां प्रजायेय' (तै° भा० ८।६।१) । काऽ ११।सु० ८ श्रथववेद-माष्य. १७१ उसे “चयेष्ठवरः” कहा है, भ्रौर वह है जिस ने कि कन्या को विवाहित कर प्राप्त करना है । भरावहत् = मा +-वह (प्रापणे) 1

English

Reproaches, freedom from reproach, all blamable, all blameless deeds, Bounty, belief, and unbelief entered the body as a home.

अध्याय ११

श्लोक 7.15

उ॒प॒हव्यं॑ विषू॒वन्तं॒ ये च॑ य॒ज्ञा गुहा॑ हि॒ताः ।बिभ॑र्ति भ॒र्ता विश्व॒स्योच्छि॑ष्टो जनि॒तुः पि॒ता

upahavyaṃ viṣūvantaṃ ye ca yajñā guhā hitāḥ | bibharti bhartā viśvasyocchiṣṭo janituḥ pitā

हिन्दी अर्थ

जनौपक्ष के धराती, (श्रासन्) थे, (ते) वे दो (वराः) वरपक्ष के बराती “प्राणियों के कमो रौर तदनुरूप सुष्टि की रचना का पर्यालोचनरूषी तपः । करना होता हैँ । व्यापक के लिये स्थान परिवतंन श्रसम्भव है । परमेरवर मे कर्मं या किया स्वाभाविकी है। यथा “परास्य शक्तिविविधैव भूयते सकता । इसलिये वह॒ विभ्रु तथापि चेतने होने से उसमें क्रिया भीर!

English

All knowledge and all ignorance, each other thing that one may learn,

अध्याय ११

श्लोक 7.16

पि॒ता ज॑नि॒तुरुच्छि॒ष्टोऽसोः॒ पौत्रः॑ पिताम॒हः ।स क्षि॑यति॒ विश्व॒स्येशा॑नो॒ वृषा॒ भूम्या॑मति॒घ्न्यः

pitā janiturucchiṣṭo'soḥ pautraḥ pitāmahaḥ | sa kṣiyati viśvasyeśāno vṛṣā bhūmyāmatighnyaḥ

हिन्दी अर्थ

. खूप क्रिया का निषेधपूर्वंक क्रियाविशेष का समर्थेन हृभा है । कमं मानसिक भी कहे है, चाहे उन कर्मों के करने मेँ मन, शरीर से बाहिर गतिं नहीं कैरता। भौर परमेदवंर के कमं रागद्वेष से प्रेरित भी नहीं होते. - सुष्टि की रचना मोग भौर रपव के लिये होती है, “भोगापवर्गार्थं चाहिए जोकि मनुष्यों कौ.भपवे की भरोर बढ़ाने .वाले हो । दुरित कां १७४ भथर्ववेद-भाष्य , कां० ११।सु०८

English

Entered the body, prayer, and hymns, and songs, and sacrificial texts. Enjoyments, pleasures, and delights, gladness, and rapturous ecstasies.

अध्याय ११

श्लोक 7.17

ऋ॒तं स॒त्यं तपो॑ रा॒स्ट्रं श्रमो॒ धर्म॑श्च॒ कर्म॑ च ।भू॒तं भ॑वि॒ष्यदुच्छि॑ष्टे वी॒र्यं ल॒क्ष्मीर्बलं॒ बले॑

ṛtaṃ satyaṃ tapo rāsṭraṃ śramo dharmaśca karma ca | bhūtaṃ bhaviṣyaducchiṣṭe vīryaṃ lakṣmīrbalaṃ bale

हिन्दी अर्थ

ग्रपव्गं कौ कामना बनो रहती हैँ । भद्रकमं परिणाम में सुखदायक भ्रौरः न मे सहायक होते है, बाधक नहीं । एसे भद्रकमों के सम्बन्ध म कहा कूवन्नेवेह कर्माणि निजी विषेच्छरत समाः । कमं मनुष्य.को ससार मे लिप्त नहीं करते ।

English

Laughter and merriment and dance entered the body as a home.

अध्याय ११

श्लोक 7.18

समृ॑द्धि॒रोज॒ आकू॑तिः क्ष॒त्रं रा॒ष्ट्रं षडु॒र्व्यः ।सं॒व॒त्स॒रोऽध्युच्छि॑ष्ट इडा॑ प्रै॒षा ग्रहा॑ ह॒विः

samṛddhiroja ākūtiḥ kṣatraṃ rāṣṭraṃ ṣaḍurvyaḥ | saṃvatsaro'dhyucchiṣṭa iḍā praiṣā grahā haviḥ

हिन्दी अर्थ

तपः भ्र्थात् तपोमय जीवन भी भ्रपवगे में सहायक होता है । “तपः मरौर इन्द्रियों को शुद्धि होती है, इन के तमोगुण भ्रौर रजोगुण का हास चेतनजगत् के भोग भौर भरपव्गे के लिये ही है । भरतः चेतन-जगत् के तप- दवीरा गृहस्थ जीवन की उपादेयता प्रतीत होती है" ।

English

Discourse and conversation, and the shrill-resounding cries of woe, All entered in, the motives and the purposes combined there- with.

अध्याय ११

श्लोक 7.19

चतु॑र्होतार आ॒प्रिय॑श्चातुर्मा॒स्यानि॑ नी॒विदः॑ ।उच्छि॑ष्टे य॒ज्ञाः होत्राः॑ पशुब॒न्धास्तदिष्ट॑यः

caturhotāra āpriyaścāturmāsyāni nīvidaḥ | ucchiṣṭe yajñāḥ hotrāḥ paśubandhāstadiṣṭayaḥ

हिन्दी अर्थ

कां० ११1 सु०८ श्रय्ववेद-माष्य १७५ दशं साकण्जायन्त देवा देषेभ्य॑ः पुरा । (्रजायन्त) पदा हई । (यः) जो कोई (वं ) निदचयपू्वं क (तान् विद्यात्) भ्रौर उदान, (वाक्) वाणी (मनः) . मन (ते) बे (व) निक्वय से (श्राकः-

English

Inbreath and outbreath, ear and eye, decay and freedom from decay.

अध्याय ११

श्लोक 7.20

अ॒र्ध॒मा॒साश्च॒ मासा॑श्चार्त॒वा ऋ॒तुभिः॑ स॒ह।उच्छि॑ष्टे घो॒षिणी॒रापः॑ स्तनयि॒त्नुः श्रुति॑र्म॒ही

ardhamāsāśca māsāścārtavā ṛtubhiḥ saha| ucchiṣṭe ghoṣiṇīrāpaḥ stanayitnuḥ śrutirmahī

हिन्दी अर्थ

१७६ भरधववेवेद-माष्य कां० १९१॥ सुग सब इन्द्रियों को प्रेरित करने वाला सुखादिज्ञान का साधन । दस देव है, ्रौर एकां मे नित्यः। मन यद्यपि महत्त्व का परिणाम-है, इस लिये (यजु. ३४१४) द्वारा मन को नित्य कहा है । भ्राकूतिः = मानुष संकल्प ।

English

Breath upward and diffused, voice, mind, these quickly with the body move, All earnest wishes, all commands, directions, and admonish- ments.

अध्याय ११

श्लोक 7.21

शर्क॑राः॒ सिक॑ता॒ अश्मा॑न॒ ओष॑धयो वी॒रुध॒स्तृणा॑ ।अ॒भ्राणि॑ वि॒द्युतो॑ व॒र्षमुच्छि॑ष्टे॒ संश्रि॑ता श्रि॒ता

śarkarāḥ sikatā aśmāna oṣadhayo vīrudhastṛṇā | abhrāṇi vidyuto varṣamucchiṣṭe saṃśritā śritā

हिन्दी अर्थ

अजाता आसन्नृतवो्थो घाता बृहस्पतिः । अदिवना) धारण पोषण-करने वाला मेष, वायु, विचुतू-रौर-प्रग्नि, सूरये- उत्पत्ति के लिये प्रतीक्षा करते थे । वणित किया है । घाता (धाञ् ध.रणपोषणयोः) भर्थात् मेघ । बृहस्पतिः

English

Reflections, all deliberate plans entered the body as a home.

अध्याय ११

श्लोक 7.22

राद्धिः॒ प्राप्तिः॒ समा॑प्ति॒र्व्याऽप्ति॒र्मह॑ एध॒तुः ।अत्या॑प्ति॒रुच्छि॑ष्टे॒ भूति॒श्चाहि॑ता॒ निहि॑ता हि॒ता

rāddhiḥ prāptiḥ samāptirvyā'ptirmaha edhatuḥ | atyāptirucchiṣṭe bhūtiścāhitā nihitā hitā

हिन्दी अर्थ

वागु प्राणधार है । विना वायु के जीवन कतिपय क्षणो मेँ समाप्त हो जाता है, भरतः वायु महापालक है, बृहस्पति है । सत्का्यवाद का समथक है (रथव. .१७।१।१९६) । वेदिक वृष्टि म वस्तु का. तु भ्रादि जड़ है, परन्तु कविता मेँ इन्दं चेतनरूप देकर इन की उपासना परिपाक के कारण ही हैँ । इसलिये जीवात्माभ्रों के सामूहिक कम॑, सृष्टध -

English

They laid in the abhorrent frame those waters hidden, bright, and thick, Which in the bowels spring from blood, from mourning or from hasty toil.

अध्याय ११

श्लोक 7.23

यच्च॑ प्रा॒णति॑ प्रा॒णेन॒ यच्च॒ पश्य॑ति॒ चक्षु॑षा ।उच्छि॑ष्टाज्जज्ञिरे॒ सर्वे॑ दि॒वि दे॒वा दि॑वि॒श्रितः॑

yacca prāṇati prāṇena yacca paśyati cakṣuṣā | ucchiṣṭājjajñire sarve divi devā diviśritaḥ

हिन्दी अर्थ

(या शरुभिः) जो भूमि (इतः) इस प्रत्यक दुष्ट ्रूमि से (पर्वा) या सत्यज्ञानी (इत्) ही (विदुः) जानते हैँ । (यः) जो ( व॑) निद्वय से भूमिः जिस मं कि प्राणी प्रादि पेदा होते है “भवन्ति पदार्था ग्रतः उस का नाम उस श्रवस्था मं “पृथिवी” था, भूमि नहीं । भ्रडातयः,

English

Fuel they turned to bone, and then they set light waters in the frame.

अध्याय ११

श्लोक 7.24

ऋचः॒ सामा॑नि॒ च्छन्दां॑सि पुरा॒णं यजु॑षा स॒ह।उच्छि॑ष्टाज्जज्ञिरे॒ सर्वे॑ दि॒वि दे॒वा दि॑वि॒श्रितः॑

ṛcaḥ sāmāni cchandāṃsi purāṇaṃ yajuṣā saha| ucchiṣṭājjajñire sarve divi devā diviśritaḥ

हिन्दी अर्थ

इ, मूमि को पृथिवी मी कृते है । (कुतः) कहां से (इन्द्रः) इन्द्र, (कुतः) कहां से (सोमः). सोम, (कुतः) कहां से (अग्निः) अग्नि (भ्रजायत) प्रादुभूत हई थी । (कृतः) बनस्पतियां पैदा हो रदी है, इसलिये इसु का नाम है “भूमि परन्तु इस भ्रवस्था से पूवं की भवस्था मे सूमि उत्पादिकावस्था मेँ न थी । सुं से जन यह पृथक् हई तो

English

The molten butter they made seed: then the Gods entered into man. All Waters, all the Deities. Virāj with Brahma at her side:

अध्याय ११

श्लोक 7.25

प्रा॒णा॒पा॒नौ चक्षुः॒ श्रोत्र॒मक्षि॑तिश्च॒ क्षिति॑श्च॒ या।उच्छि॑ष्टाज्जज्ञिरे॒ सर्वे॑ दि॒वि दे॒वा दि॑वि॒श्रितः॑

prāṇāpānau cakṣuḥ śrotramakṣitiśca kṣitiśca yā| ucchiṣṭājjajñire sarve divi devā diviśritaḥ

हिन्दी अर्थ

मर परिणामो में भ्रधिकाधिक विस्तृत थी, फली हई थी, प्रथितावस्था में थी । इसलिये भमि, वतंमान प्रवस्था मे भरधिक प्रथित है। भ्रतः दुसे पृथिवी कहा जाता है । कांर ११।सु०८ भ्रथर्ववेदनमाष्य १७६ त्यादक होने से सब प्राणियों का धारण-पोषण करता ह, प्रतः घाता है ।

English

Brahma into the body passed: Prajāpati is Lord thereof.

अध्याय ११

श्लोक 7.26

आ॒न॒न्दा मोदाः॑ प्र॒मुदो॑ऽभिमोद॒मुद॑श्च॒ ये।उच्छि॑ष्टाज्जज्ञिरे॒ सर्वे॑ दि॒वि दे॒वा दि॑वि॒श्रितः॑

ānandā modāḥ pramudo'bhimodamudaśca ye| ucchiṣṭājjajñire sarve divi devā diviśritaḥ

हिन्दी अर्थ

१८० भ्रथवेवेद-माष्य कांऽ ११॥ सुऽ द नः होने से नाना रोग षेदाहो जाति । मूत्रचिकित्सक तो शरीर के लिये मूत्र को महौषध कहते हैँ । भयव. ६।४४।२ मे “खस्य मूत्रमस्य- उसकैद्वारा वरते वर्षा जल को मूत्र सदुश लाभकारी कहा है । भमृतम् उदकनाम ( निधं० १।१२ ) । वर्षा जल स्वच्छ तथा गुणकारी होने से ये त आसन् दशं जाता देवा देवेभ्यः पुरा ।

English

The Sun and Wind formed, separate, the eye and vital breath of man. His other person have the Gods bestowed on Agni as a gift.

अध्याय ११

श्लोक 7.27

दे॒वाः पि॒तरो॑ मनु॒ष्याऽ गन्धर्वाप्स॒रस॑श्च॒ ये।उच्छि॑ष्टाज्जज्ञिरे॒ सर्वे॑ दि॒वि दे॒वा दि॑वि॒श्रितः॑

devāḥ pitaro manuṣyā' gandharvāpsarasaśca ye| ucchiṣṭājjajñire sarve divi devā diviśritaḥ

हिन्दी अर्थ

, येते दश्च देवाः) वे जो १० देव (भन्ते ३-४), (पुरा) पूरवंकाल (लोकं दत्वा) स्थान या यह लोक देकर (कस्मिन्) किस (लोके) लोक में यदा केशानस्थि स्नाव मांसं मञ्जानमा म॑रत् । › कण्डरा्रो, मांस, मज्जा को (भ्रा भरत्) उस ने शरीर में मर दिया, रौर (शरीरम्) शरीर को (पादवत् कृत्वा) पैरों समेत कर के वह कारी-

English

Therefore whoever knoweth man regardeth him as Brāhman’s self:

अध्याय ११

श्लोक 8.1

अध्यात्मम्।१-३४ कौरुपथिः।अध्यात्मं, मन्युः।अनुष्टुप्, ३३ पथ्यापङ्क्तिः।यन्म॒न्युर्जा॒यामाव॑हत् संक॒ल्पस्य॑ गृ॒हादधि॑ ।क आ॑सं॒ जन्याः॒ के व॒राः क उ॑ ज्येष्ठव॒रोऽभवत्

adhyātmam| 1-34 kaurupathiḥ| adhyātmaṃ, manyuḥ| anuṣṭup, 33 pathyāpaṅktiḥ| yanmanyurjāyāmāvahat saṃkalpasya gṛhādadhi | ka āsaṃ janyāḥ ke varāḥ ka u jyeṣṭhavaro'bhavat

हिन्दी अर्थ

(सवं देवाः) सबं देवों ने (उपािकान्) समीप होकर शक्ति ल्षगारई, (सती वधूः) साध्वी वधू ने (तत्) उसे (भजानात्) जान लिया । वह वधू कां० ११।सू०८ । भ्रथवंवेद-माष्य १८३ है, शरकृति । कः ऋषिः (१४); कः (१६) ; संवा (१५, १६) ध्या दाक्ति्यो के नाम ह शशा है शासनश्षक्ति (देशो ११।६।२५०२६) । अरभि- प्राय यह है कि ब्रहतर कोई शक्ति न तो शरीर में सन्वियां कर सकती है.‡न कोई प्रजा का पति है, भौर न कोद शासक है) ।

English

Let your mysterious natures be seen by our friends O Arbudi.

अध्याय ११

श्लोक 8.2

तप॑श्चै॒वास्तां॒ कर्म॑ चा॒न्तर्म॑ह॒त्यऽर्ण॒वे।त आ॑सं॒ जन्या॒स्ते व॒रा ब्रह्म॑ ज्येष्ठव॒रोऽभवत्

tapaścaivāstāṃ karma cāntarmahatya'rṇave| ta āsaṃ janyāste varā brahma jyeṣṭhavaro'bhavat

हिन्दी अर्थ

इदं शहा = पुरुष को . “इदं ब्रहम कहना, नवीन् बरेदात्तियो के “हं का० ११।सूु० . भ्रथरवेवेद-माष्य १८९ सबं देवताग्रों का निवास है, इस सादुश्य से विद्वान् गौणरूप मं पुरष को अद् एकेन गच्छत्यद एकन गच्छतीदेकेन नि चवते ॥३३॥

English

Her husband, brother, kin, when one, Arbudi! hath been pierc- ed by thee. Let vultures, ravens, kites, and crows, and every carrion-eating bird.

अध्याय ११

श्लोक 8.3

दश॑ सा॒कम॑जायन्त दे॒वा दे॒वेभ्यः॑ पु॒रा।यो वै तान् वि॒द्यात् प्र॒त्यक्षं॒ स वा अ॒द्य म॒हद् व॑देत्

daśa sākamajāyanta devā devebhyaḥ purā| yo vai tān vidyāt pratyakṣaṃ sa vā adya mahad vadet

हिन्दी अर्थ

(अबुदिः नाम) भ्वुंदि नाम बाला (यः देवः) ओ विजिगीषु सेना- पति है, (ईशानः च न्यु दिः) भौर सेनाधीरवर जो न्यबु दि है, (याभ्याम्) (आवृतम्) बेरा गया है, (इयं च महः पृथिवी) भौर यह विस्तृत गुदभूमि कार १ १। सुई अचवेवेद-भाष्य १६१५ उन भवृदि श्रौर न्थबुं दि के साथ (सेनया) तथा सेना कं साथ (जितम्) विजित राष्ट मे श्रनु एभि) उन के पीछे पीछे या विजित राष्ट के भनुकूल

English

All these, O Arbudi, do thou make visible to our enemies and let them look on mists and fog.

अध्याय ११

श्लोक 8.4

प्रा॒णा॒पा॒नौ चक्षुः॒ श्रोत्र॒मक्षि॑तिश्च॒ क्षिति॑श्च॒ या।व्या॒नो॒दा॒नौ वाङ् मन॒स्ते वा आकू॑ति॒माव॑हन्

prāṇāpānau cakṣuḥ śrotramakṣitiśca kṣitiśca yā| vyānodānau vāṅ manaste vā ākūtimāvahan

हिन्दी अर्थ

श्रलिः= भौरे जसे पुष्पमधृ के लिये उत्तेजित होते है, वंसे मांस के अथो सवं श्वापदं म्षिका ठप्यतु करिभिः । हिलप्राणी, (मक्षिका) मक्लियां, (क्रिमिः) मौर कीड़े .मकौडे, ( पौरषेये कुणपे भ्रधि) पुरषो के मृतशरीरो पर (तृप्यतु) तृप्त हो, (भवुं दे) है हसक सेनापति ! (तव) तुक द्वारा (रदिते) शुभो के कंटने पर .। (न्यबुं दे, श्रव दे) है न्यव दि सेनाधीश ! भ्रौर भबरुदिं सेनापति !

English

Stifled and crushed, O Nyarbudi, low let the smitten foeman lie.

अध्याय ११

श्लोक 8.5

अजा॑ता आसन्नृ॒तवोऽथो॑ धा॒ता बृह॒स्पतिः॑ ।इ॒न्द्रा॒ग्नी अ॒श्विना॒ तर्हि॒ कं ते ज्ये॒ष्ठमुपा॑सत

ajātā āsannṛtavo'tho dhātā bṛhaspatiḥ | indrāgnī aśvinā tarhi kaṃ te jyeṣṭhamupāsata

हिन्दी अर्थ

(श्रवुदे) है शत्रुषातक (तव) तुक द्वारा (रदिते) दात्रु्रो को काटने १९६८ भ्रथववेद-माष्य कां० ११। सु०..९ भय के साथ (संसृज) उन का संसर्गे कर । (अभित्रान्) चतुभ्रोको कर देने बाले, या टेढ़ा कर देते वाले; तथा (२). बाहों को भद्धत कर देने

English

With tongue of fire and crest of smoke go conquering maidens with our host! May Indra, Lord of Might, strike down each bravest warrior of the foes,

अध्याय ११

श्लोक 8.6

तप॑श्चै॒वास्तां॒ कर्म॑ चा॒न्तर्म॑ह॒त्यर्ण॒वे।तपो॑ ह जज्ञे॒ कर्म॑ण॒स्तत् ते ज्ये॒ष्ठमुपा॑सत

tapaścaivāstāṃ karma cāntarmahatyarṇave| tapo ha jajñe karmaṇastat te jyeṣṭhamupāsata

हिन्दी अर्थ

तोड़ देने को वणेन हरभरा है, जिसे कि “वक्र कर देना.कह सकते ह । टांगों के कड् जाने से रात्रुसेनिक गतिहीन हो जते है, भौर बाह्ृभ्रो के भगन या (एषाम्) इन छतों की (वाहवः) बाह ) मृद. हो जाय, कत्य रितं हो जावे, इन के (हदि) हवयों मे (ल ( + . - ४" -भशषवा व्रिस्तृतं पक़-करने बाले जालो द्वारा पकड्ना. भी -वीयने के सदृशच. ही है । "खाल" ढे लिए देखो भयव (९।६-७ ) (

English

Whom this our band hath put to flight: let not one man of those escape.

अध्याय ११

श्लोक 8.7

येत आसी॒द् भूमिः॒ पूर्वा॒ याम॑द्धा॒तय॒ इद् वि॒दुः ।यो वै तां वि॒द्यान्ना॒मथा॒ स म॑न्येत पुराण॒वित्

yeta āsīd bhūmiḥ pūrvā yāmaddhātaya id viduḥ | yo vai tāṃ vidyānnāmathā sa manyeta purāṇavit

हिन्दी अर्थ

कां०११।स्०९ . भ्रथवत्रेद-माष्य, १६९ (एषाम्) इन का (किचन) कुछ भी (मा उच्छेष) ११९ न बचे, (अरवुंदे) हे शत्रुधातक सेनापति! (तव रदिते) तुं वारा शत्रुं के. कट जाने पर । अधारिणींविकेश्यो रुदत्य £: पुरुषे इते रंदिते अंबे तवं ॥१४॥ (पुषे हते) पति भ्रादि के मर जाने पर, उन की स्त्रियां (खदत्यः )' रोती हई, (तिष्नानाः) युद्धभरूमि से प्रतिमुख हो कर जाती हई, भ्रौर (उरः) छातियो को तथा (पट्रौ) पटूरों को (भ्राष्नानाः) हार्थो दारां पीटती हुई, (भरारिणीः) दुःख से रातं, तथा (विकेद्यः) बिखरे केश षटूरौ = पटृरू=पट् (गतौ) +-उरू । गति के साधन “उरू भ्रथात् कटि प्रदेश्च रौर दो घुटनों के बीच के .दो भाग, पंजाबी भाषा में “दो-पटर ' । उरू का प्रथं प्रायः जंघा किया जाता है जोकि वैदिक दृष्टि में ठीक नहीं । भ्रथरववेद “ऊर्बोरोजो जद्खयो्जव."” ( १९।६०।२). म, उसभो भौर जक्घाभाों को पृथक्-पृथक् कटा है । भतिध्नानाः=भति+ हन् (गतौ) ।

English

Let their hearts burst asunder, let their breath fly up and pass away. Let dryness of the mouth o’ertake our foemen, not the friendly ones.

अध्याय ११

श्लोक 8.8

कुत॒ इन्द्रः॒ कुतः॒ सोमः॒ कुतो॑ अ॒ग्निर॑जायत ।कुत॒स्त्वष्टा॒ सम॑भव॒त् कुतो॑ धा॒ताजा॑यत

kuta indraḥ kutaḥ somaḥ kuto agnirajāyata | kutastvaṣṭā samabhavat kuto dhātājāyata

हिन्दी अर्थ

श न्वी प्रसरो रूपका उतारे । .. सनिको वाली सेनाभ्रों को, (अप्सरसः) अन्तरिक्ष मे विचरने वाली सनिक- टूकहियों को, (रूपकाः) नानारूप घारण करने वाली संनिक दुकडियों को, (पात्रे अन्तः) सत्पा्रो मे बेड कर (रेरिहतीम् ) एूजायाठ करने वाली,

English

The clever and the foolish ones, those who are twisted round, the deaf,

अध्याय ११

श्लोक 8.9

इन्द्रा॒दिन्द्रः॒ सोमा॒त् सोमो॑ अ॒ग्नेर॒ग्निरजायत ।त्वष्टा॑ ह जज्ञे॒ त्वष्टु॑र्धा॒तुर्धा॒ताजा॑यत

indrādindraḥ somāt somo agneragnirajāyata | tvaṣṭā ha jajñe tvaṣṭurdhāturdhātājāyata

हिन्दी अर्थ

मे बुरी इच्छाए निहित है एेसी सेनिक-दुकडि्यो को-- तिः सर्वाः)'उन सय टो को (डु दे) दे सतुषातक धेनापठि ! (तवम्) तुः ( भरमि- २०० भ्रथवंवेद-भाष्य कां० ११।सु०९ रम्यः दृशे कूर) तुभो के देखने के लिए त्यार कर, ्रौर (उदारान् च)

English

The dusky-hued, the hornless goats and those whose voice is like the buck’s, All these, O Arbudi, do thou make visible to our enemies: cause them to look on mists and

अध्याय ११

श्लोक 8.10

ये त आस॒न् दश॑ जा॒ता दे॒वा दे॒वेभ्यः॑ पु॒रा।पु॒त्रेभ्यो॑ लो॒कं द॒त्त्वा कस्मिं॒स्ते लो॒क आ॑सते

ye ta āsan daśa jātā devā devebhyaḥ purā| putrebhyo lokaṃ dattvā kasmiṃste loka āsate

हिन्दी अर्थ

गृहं कृत्वा मर्त्यं देवाः पुरुष मारिन् ॥१८॥ दारीर-गृह में चद्ंका निर्माण करता है, भरतः कारीगर है । व्यतृणत् = (कठ. उप. २।१)। सन्तानं “उत्” उत्कृष्टं तब होती है जब किं पिता-माता, खष्नो वे तनदरीनिकतिः पाप्मानो नाम॑ देवताः ।

English

Rise both of you: begin your work with fettering and binding. fast, Assail, both of you, Arbudi, the armies of our enemies.

अध्याय ११

श्लोक 8.11

य॒दा केशा॒नस्थि॒ स्नाव॑ मां॒सं म॒ज्जान॒माभ॑रत्।शरी॑रं कृ॒त्वा पाद॑व॒त् कं लो॒कमनु॒ प्रावि॑शत्

yadā keśānasthi snāva māṃsaṃ majjānamābharat| śarīraṃ kṛtvā pādavat kaṃ lokamanu prāviśat

हिन्दी अर्थ

१. “या तयोधच्यते घा वेवता,-- दस दुष्ट सेः स्वप्न भादि भी देवता ही. है, बाहे इन मे दिव्यता हो, चाहे न हो । अगले मन्तो भे भी देवता कौ यही . लक्षण १८४ -श्रय्ववेद-माष्य कां० ११।सु१ ८ "खालत्यम्" । देवताः == इन पापमय स्वप्नं रादि को भी देवता कहा है।. रादि को देवता कहा हो, दिव्यता की दुष्टि से नहीं । भनु = उत्पन्न शिशु

English

Arise ye and prepare yourselves: ye, the celestial hosts, are friends.

अध्याय ११

श्लोक 8.12

कुतः॒ केशा॒न् कुतः॒ स्नाव॒ कुतो॒ अस्थी॒न्याभ॑रत्।अङ्गा॒ पर्वा॑णि म॒ज्जानं को मां॒सं कुत॒ आभ॑रत्

kutaḥ keśān kutaḥ snāva kuto asthīnyābharat| aṅgā parvāṇi majjānaṃ ko māṃsaṃ kuta ābharat

हिन्दी अर्थ

रजस्तमोमय जीवन के कारण शरीर में पापमय तत्त्वो का भी प्रवेशो यच्च । पप्लोप चाखा मे बृहत् के स्थान मे “सहः” पाढहै। जन्म के अनन्तर, शनेः-दानेः, कष दगुण तया करई सदृगुण शरीर भे प्रविष्ट होते रहते है । (च धतिः) भौर समृद्धि, (व) निदचय से (च भ्रभूतिः) भ्रौर समृद्धि का भ्रभाव, (रातयः) दानभाव, उदारता (च.भरातयः). भ्रौर दाननदेना

English

The God whose name is Arbudi, and Nyarbudi the Mighty One,

अध्याय ११

श्लोक 8.13

सं॒सिचो॒ नाम॒ ते दे॒वा ये सं॑भा॒रान्त्स॒मभ॑रन्।सर्वं॑ सं॒सिच्य॒ मर्त्यं॑ दे॒वाः पुरु॑ष॒मावि॑शन्

saṃsico nāma te devā ye saṃbhārāntsamabharan| sarvaṃ saṃsicya martyaṃ devāḥ puruṣamāviśan

हिन्दी अर्थ

कां ११।ब्रु०८ . भ्रथदवेद-माष्यः १८५ स्तुतियां, (च यत् ओर जो (हन्त इति) “हां” यह, (च न इति) भौर “न” ग्थवेवेद, (भरथो) तथा (ऋचः, साम, यजुः) ऋग्वेद, सामवेद, यजुवद सुख, भरथवा नरनारियों की इच्छाएे, मनो कौ मनाए, (नृत्तानि) नाच

English

The two by whom the air and this great earth are compassed and possessed,

अध्याय ११

श्लोक 8.14

ऊ॒रू पादा॑वष्ठी॒वन्तौ॒ शिरौ॒ हस्ता॒वथो॒ मुख॑म्।पृ॒ष्टीर्ब॑र्ज॒ह्ये पा॒र्श्वे कस्तत् सम॑दधा॒दृषिः॑

ūrū pādāvaṣṭhīvantau śirau hastāvatho mukham| pṛṣṭīrbarjahye pārśve kastat samadadhādṛṣiḥ

हिन्दी अर्थ

नदष्टाःन्=भर्थवौ नरिष्टानि । पदपाठ मे विसगे रहित पाठ है । निरर्थक भाषण, (भभोलापलपः च ये) भौर जो परस्पर संमुख हो कर १८६ भ्रथरवेवेद-माष्य कार १११ सु०८. गानविद्या तंथा नृत्य के सूचक है । ..

English

With these two friends of Indra I go forth to conquer with the host. Rise with our army stand thou up. O Godlike Being, Arbudi.

अध्याय ११

श्लोक 8.15

शिरो॒ हस्ता॒वथो॒ मुखं॑ जि॒ह्वां ग्री॒वाश्च॒ कीक॑साः ।त्व॒चा प्रा॒वृत्य॒ सर्वं॒ तत् सं॒धा सम॑दधान्म॒ही

śiro hastāvatho mukhaṃ jihvāṃ grīvāśca kīkasāḥ | tvacā prāvṛtya sarvaṃ tat saṃdhā samadadhānmahī

हिन्दी अर्थ

वाक् मन, (ते) वे (शरीरेण) शरीर के साथ (ईयन्ते) गति करते ह, सक्रिय चित्तानि सर्वे संकराः क्षरौरमनु भािंशम् ॥२७॥ विविध प्रकार के शासन, (चित्तानि) नाना प्रकार.के विचार या मन, बुद्धि, कृपणाः) भरौर जो मन्दगति वाले, (गुह्याः) छिपे हृए भर्थातु शरीर के. घटक,

English

Breaking the hosts of enemies, surround them with thy winding coils.

अध्याय ११

श्लोक 8.16

यत् तच्छरी॑र॒मश॑यत् सं॒धया॒ संहि॑तं म॒हत्।येने॒दम॒द्य रोच॑ते॒ को अ॑स्मि॒न् वर्ण॒माभ॑रत्

yat taccharīramaśayat saṃdhayā saṃhitaṃ mahat| yenedamadya rocate ko asmin varṇamābharat

हिन्दी अर्थ

जलो को (बीमत्सौ) कल्याणकारी तथा सुख के साधन भूत शरीर मेँ (भरसा- निष्ठ श्राप आठ प्रकार के है, (देडो मन्व २९) । कां० ११।सु० ८ भथर्ववेद-भाष्य १८७ हृश्रा है, लान श्रौर नीले। शरीर मे दोनों प्रकार के खून है । “वास्तेयी”

English

Exhibiting, O Arbudi, seven children of the mist and fog, When butter hath been offered, rise with all of these and with the host.

अध्याय ११

श्लोक 8.17

सर्वे॑ दे॒वा उपा॑शिक्ष॒न् तद॑जानाद् व॒धूः स॒ती।ई॒शा वश॑स्य॒ या जा॒या सास्मि॒न् वर्ण॒माभ॑रत्

sarve devā upāśikṣan tadajānād vadhūḥ satī| īśā vaśasya yā jāyā sāsmin varṇamābharat

हिन्दी अर्थ

हैशरीरकी रचनाका निर्माण करने वाते भ्रापः । शरीर की रचनामें दवारा नासिकामल, भरांखों का मल, बलगम भ्रादि का ब्रहण क्याहै । ये कल्याणे सूखे है । शरीर कल्याण काभी हेतु है, ्रौर सुख का साधन रेत॑ः कृत्वाज्यं देवाः पुरुषमाविशन् ॥२९॥ (भ्रस्थि) शरीर की हहं को (समिधम् कत्वा) समिधा कर के

English

Beating her breast, with tearful face, let the short-earned, the wild-haired hag.

अध्याय ११

श्लोक 8.18

य॒दा त्वष्टा॒ व्यतृ॑णत् पि॒ता त्वष्टु॒र्य उत्त॑रः ।गृ॒हं कृ॒त्वा मर्त्यं॑ दे॒वाः पुरु॑ष॒मावि॑शन्

yadā tvaṣṭā vyatṛṇat pitā tvaṣṭurya uttaraḥ | gṛhaṃ kṛtvā martyaṃ devāḥ puruṣamāviśan

हिन्दी अर्थ

(यजु, ३१।१७) -में क्षरीर की रचना जल, पृथिवी भौर रस द्वारा कही है ।. - भरतः “गुह्याः. पद द्वारा, शरीर के घटक जलो का प्रहण, वेदानुमोदित १८८ भ्रथववेद-माष्य कां९-११। सुर या आपो याश देवंता या विराड् बरह्मणा चह । -

English

Shriek loudly when a man is slain, pierced through by thee, O Arbudi;

अध्याय ११

श्लोक 8.19

स्वप्नो॒ वै त॒न्द्रीर्निरृ॑तिः पा॒प्मानो॒ नाम॑ दे॒वताः॑ ।ज॒रा खाल॑त्यं॒ पालि॑त्यं॒ शरी॑र॒मनु॒ प्रावि॑शन्

svapno vai tandrīrnirṛtiḥ pāpmāno nāma devatāḥ | jarā khālatyaṃ pālityaṃ śarīramanu prāviśan

हिन्दी अर्थ

अथास्येत॑रमात्मानं देवाः पराय॑च्छन्नगरये ॥३ १॥ सर्वा हस्िन् देवता मावो गोष्ठ इसते ॥३२॥ (पुम्) (मन्यते) मानतां है कि (इदं हा) यह् बरहम है ¦ . . (आसते) निवास करते है, (इवं) खसे किं (गावः) गौएः (गोष्ठे) गोः

English

Snatching away the vertebra, while with her thought she seeks her son,

अध्याय ११

श्लोक 8.20

स्तेयं॑ दुष्कृ॒तं वृ॑जि॒नं स॒त्यं य॒ज्ञो यशो॑ बृ॒हत्।बलं॑ च क्ष॒त्रमोज॑श्च॒ शरी॑र॒मनु॒ प्रावि॑शन्

steyaṃ duṣkṛtaṃ vṛjinaṃ satyaṃ yajño yaśo bṛhat| balaṃ ca kṣatramojaśca śarīramanu prāviśan

हिन्दी अर्थ

तीन प्रकार कें (वि गच्छति) विविध स्थानों में जाता दहै (निषेवते) सुखदुःख का सेवन करता है । परमेदवर ही मृत्यु है, वह भमत है । कारण (शवः) बलस्वरूप.या बली जीवात्मा (ग्रधि) शरीर का अधिष्ठाता (उच्यते) कहा जाता हं ।

English

Feast on our foes, and show where one, Arbudi! hath been pierced by thee.

अध्याय ११

श्लोक 8.21

भूति॑श्च॒ वा अभू॑तिश्च रा॒तयोऽरा॑तयश्च॒ याः ।क्षुध॑श्च॒ सर्वा॒स्तृष्णा॑श्च॒ शरी॑र॒मनु॒ प्रावि॑शन्

bhūtiśca vā abhūtiśca rātayo'rātayaśca yāḥ | kṣudhaśca sarvāstṛṣṇāśca śarīramanu prāviśan

हिन्दी अर्थ

कारण भ्न्तरिश्ष मं .घूमता रहता है । २. इह = इस पृथिवीलोक मे । भरथवा “पुष्येन पुण्यं लोकं नयति पापेन पाप १९० . भथरववेद-भाष्य कां० ११।सुग्८ मातग म. विद्यमान शरीर का वर्णन हृभ्राहै। यहमी कहा है कि उस भवस्था का शरीर निरात्मक नहीं होता, भ्रपितु उस में बलस्वरूप या बली जीवात्मा रहता है, जोकि शरीर का भ्रधिष्ठाता हो कर उस की रक्षा तथा

English

Then let each greedy beast of prey, and fly and worm regale itself Upon the human corpse where one, Arbudi, hath been pierced by thee.

अध्याय ११

श्लोक 8.22

नि॒न्दाश्च॒ वा अनि॑न्दाश्च॒ यच्च॒ हन्तेति॒ नेति॑ च ।शरी॑रं श्र॒द्धा दक्षि॒णाश्र॑द्धा॒ चानु॒ प्रावि॑शन्

nindāśca vā anindāśca yacca hanteti neti ca | śarīraṃ śraddhā dakṣiṇāśraddhā cānu prāviśan

हिन्दी अर्थ

भरसङ्गानूसार जीवात्मा के र्मवास का वणन उचित ही प्रतीतं होता है । काण. ११। सु° ६-१० भथवेवेद-बाष्य १९ वि . १० वें सूक्त मे “केतुभिः सह” तथा “श्रदणेः केतुभिः सह" (१०।१,२) दारा ण्डे घोर युद्ध मे हए रक्तपात के सूचक हैँ । = “प

English

Attack them, both of you; bear off their vital breath O Nyar- budi.

अध्याय ११

श्लोक 8.23

वि॒द्याश्च॒ वा अवि॑द्याश्च॒ यच्चा॒न्यदु॑पदे॒श्यऽम्।शरी॑रं॒ ब्रह्म॒ प्रावि॑श॒दृचः॒ सामाथो॒ यजुः॑

vidyāśca vā avidyāśca yaccānyadupadeśya'm| śarīraṃ brahma prāviśadṛcaḥ sāmātho yajuḥ

हिन्दी अर्थ

. २. €वेमेंसुक्तर्मे भवुंदिभ्रौरन्यबरुंदिदो सेनापति ै। ्रबुंदि न्यवुं दि सेना संचाल मे उसे निर्देश देता है । इसी लिये न्यबुं दि को “ईशान कहा है (४) । श्रवु दिः = भर्व (भ्रवं हिसायाम्) +दा (दनि), जो कि मत्यधिक हिसा दायक । ईशान होने के कारण हसे भ्रत्यधिक हिसादायक = ही देवासेना के अधिपति ख्पमें युद्ध करते है । (१०।२०,२१) मे भ्रबुदि

English

Let mingled shouts and echoing cries of woe amid our foemen show where thou, O Arbudi, hast pierced

अध्याय ११

श्लोक 8.24

आ॒न॒न्दा मोदाः॑ प्र॒मुदो॑ऽभिमोद॒मुद॑श्च॒ ये।ह॒सो न॒रिष्टा॑ नृ॒त्तानि॒ शरी॑र॒मनु॒ प्रावि॑शन्

ānandā modāḥ pramudo'bhimodamudaśca ye| haso nariṣṭā nṛttāni śarīramanu prāviśan

हिन्दी अर्थ

के सहायक रूप मे न्यबुं दि को पुनः नियुक्त किया हैँ । इस प्रकार (१०।२०, में बन्धे तीन मित्रराष्टरो का प्रतिनिधि होकर सेनासंचालन करता है। भरतः हृभा है । परन्तु . साथ ही.उदार. भावों का प्रदद्येन भी अनुमोदित हृभ्रा है, ताकि भरासुरी-सेना उदार भावों से प्रभावित हो कर भ्रात्मसमर्पण करदे भौर -घोर युद्ध समाप्त हो सके (९।,१.६,१५.१६,२२,२४) 1 (१०।१) में सायणाचायं ने भी “उदाराः” का. भरं किया है “श्रौदायं गुणोपेताः सेना- (क ) इवन्वतीः सेनाएं (६।१५), भर्थात् शिकारी, खोजी ग्रा दोनों भ्रकार के कुत्तो वाली सेनाए ॥

English

Shake them, and let them sink with fear: e’erwhelm our enemies with dread.

अध्याय ११

श्लोक 8.25

आ॒ला॒पाश्च॑ प्रला॒पाश्चा॑भिलाप॒लप॑श्च॒ ये।शरी॑रं॒ सर्वे॒ प्रावि॑शन्ना॒युजः॑ प्र॒युजो॒ युजः॑

ālāpāśca pralāpāścābhilāpalapaśca ye| śarīraṃ sarve prāviśannāyujaḥ prayujo yujaḥ

हिन्दी अर्थ

, करने वाला भस्त्र (६।२२,१०।१६) के सदुश र्चबाने. वाले .४ दाढ़ों वाले नोकोले बाण, चयावदतः भ्र्थात्ः काले- केवेल शितिपदी, सम्मवतः विभोहनास्तर के गणो वाला भस्त्र (१०।२०) . याणि) भौर धनुर्घारियो की वीरता के कमं हया उनके पराक्रमर्है, उर,

English

With widely-grasping bends of arm, O Arbudi, crush down our foes. Let those mens’ arms grow faint and weak, dull be the purpose of their heart;

अध्याय ११

श्लोक 8.26

प्रा॒णा॒पा॒नौ चक्षुः॒ श्रोत्र॒मक्षि॑तिश्च॒ क्षिति॑श्च॒ या।व्या॒नो॒दा॒नौ वाङ् मनः॒ शरी॑रेण॒ त ई॑यन्ते

prāṇāpānau cakṣuḥ śrotramakṣitiśca kṣitiśca yā| vyānodānau vāṅ manaḥ śarīreṇa ta īyante

हिन्दी अर्थ

है, (तद् सर्व॑म्) उस सब को (अबुदे) है हिसा करने वालि सेनापति (च) भ्रौर (उदारान्) उदार भावों कामी (प्र ददंय) प्रददोन कर। +-दा +-किंः = हिसा देने बाला -श्र्थात् हिसा करने वाला सेनापति या सेना- है, यथा-जलचिः; इषुत्रिः (्रष्टा० ३।३।६३) ।

English

And let not aught of them be left when thou, O Arbudi, hast pierced.

अध्याय ११

श्लोक 8.27

आ॒शिष॑श्च प्र॒शिष॑श्च सं॒शिषो॑ वि॒शिष॑श्च॒ याः ।चि॒त्तानि॒ सर्वे॑ संक॒ल्पाः शरी॑र॒मनु॒ प्रावि॑शन्

āśiṣaśca praśiṣaśca saṃśiṣo viśiṣaśca yāḥ | cittāni sarve saṃkalpāḥ śarīramanu prāviśan

हिन्दी अर्थ

विचारों तथा संकल्पो भ्रौर उदारभावो को भी प्रकट कर देना चाहिए, जिस , से वंह जान सके कि हम किसीप्रकार भी युद्ध नही चाहते, यदि युद्धके लिये' हरमे बोधिते ही नँ कर दिया जाथ १९४ भ्रयवेवेद-माष्य कां० ११।सु० ६

English

Self-smiting, beating breast and thigh, careless of unguent, with their hair dishevelled, weeping, hags shall run together, when a man is slain, when thou, O

अध्याय ११

श्लोक 8.28

आस्ते॑यीश्च॒ वास्ते॑यीश्च त्वर॒णाः कृ॑प॒णाश्च॒ याः ।गुह्याः॑ शु॒क्रा स्थू॒ला अ॒पस्ता बी॑भ॒त्साव॑सादयन्

āsteyīśca vāsteyīśca tvaraṇāḥ kṛpaṇāśca yāḥ | guhyāḥ śukrā sthūlā apastā bībhatsāvasādayan

हिन्दी अर्थ

(देवजनाः मित्राः) है भित्र विजिगीषु सैनिक जनो (उत्तिष्ठत) दे) है हिसा मे कुशल सेनापति ! (नः) हमारे (या मित्राणि) मित्रैः यदि युद्ध के लिये. बाधित ही होना पड़ तो युद्ध की तय्यारी करनी लेनी चाहिए । भ्रपनी पूरी सैनिक शक्ति को युद्ध भूमि मेननाखड़ाकरना

English

Arbudi, hast pierced.

अध्याय ११

श्लोक 8.29

अस्थि॑ कृ॒त्वा स॒मिधं॒ तद॒ष्टापो॑ असादयन्।रेतः॑ कृ॒त्वाज्यं॑ दे॒वाः पुरु॑ष॒मावि॑शन्

asthi kṛtvā samidhaṃ tadaṣṭāpo asādayan| retaḥ kṛtvājyaṃ devāḥ puruṣamāviśan

हिन्दी अर्थ

चाहिए । कु युद्ध भमि में लाने चाहिए, शेष गुप्त रखने चािर्ये । संदृष्टा, गुप्ता = संदृष्टानि गुप्तानि मित्राणि । देवजनाः दिवु विजिगीषा . अमित्राणां सेनां अमि ष॑चमहदे ।।३॥ (भ्रबुंदे) है वंदि ! भौर न्यवुंदि ! (४) तुम दोनों (उत्तिष्ठ- अबुदिरनाम्. यो देवः नच्च न्यडेदिः ।

English

Apsarases with dog-like mates, and Rūpakās, O Arbudi, And her who licks the cup inside, and seeks to wound in ill- kept place,

अध्याय ११

श्लोक 8.30

या आपो॒ याश्च॑ दे॒वता॒ या वि॒राड् ब्रह्म॑णा स॒ह।शरी॑रं॒ ब्रह्म॒ प्रावि॑श॒च्छरी॒रेऽधि॑ प्र॒जाप॑तिः

yā āpo yāśca devatā yā virāḍ brahmaṇā saha| śarīraṃ brahma prāviśaccharīre'dhi prajāpatiḥ

हिन्दी अर्थ

देवः = दिवु विजिगीषा, तान् । न्यत्रंदि बडा आफिखर है, तभी ८।३७) । सश्नाट् दोनों भ्राफिसरों तथा सेना के पीछे पीछे विजित राष्ट के भति भ्रनुकल भावनाभ्रो सित, विजित राष्ट्र मे पदापंण करता है, विरोधी या बदला लेने की मावना से नहीं । । उन्चिष्ठ त्वं देवजनाबदे सेन॑या सह । मरञ्जन्नमित्रांणां सेनां मोगेमिः प्ररिबारय ॥५॥ (देवजन अबु दे) है विजिगीषु-जन, भवुं दिं ! (त्वम्) तु (सेनया

English

The fiend who creeps upon the sword, maimed, dwelling where Lthe wounded lie,

अध्याय ११

श्लोक 8.31

सूर्य॒श्चक्षु॒र्वातः॑ प्रा॒णं पुरु॑षस्य॒ वि भे॑जिरे ।अथा॒स्येत॑रमा॒त्मानं॑ दे॒वाः प्राय॑च्छन्न॒ग्नये॑

sūryaścakṣurvātaḥ prāṇaṃ puruṣasya vi bhejire | athāsyetaramātmānaṃ devāḥ prāyacchannagnaye

हिन्दी अर्थ

(मोगेभिः) मोग की वस्तुं के द्वारा (परिवाहय) षेर'। सेनापति का यहु कर्तव्य है कि वह जब शत्र राष्टरकी सेना््रों पर विजयपाले, तो वह शत्रु राष्ट कीप्रनाको.तंगन करे, श्रपितुभोगकी बस्तुए दे कर, उसे भपने भनुकूल बनाने या यत्न करे । के साथ, भीर (सेनया) पर राष्ट की सेना के साथ (उतिष्ठ) भ्रपने राष्ट का उत्थान कर, समुन्नति कर । नि

English

The misty shapes that lurk concealed, Gandharvas and Apsara- ses, demons, and snakes and

अध्याय ११

श्लोक 8.32

तस्मा॒द् वै विद्वान् पुरु॑षमि॒दं ब्रह्मेति॑ मन्यते ।सर्वा॒ ह्यऽस्मिन् दे॒वता॒ गावो॑ गो॒ष्ठ इ॒वास॑ते

tasmād vai vidvān puruṣamidaṃ brahmeti manyate | sarvā hya'smin devatā gāvo goṣṭha ivāsate

हिन्दी अर्थ

१९६ प्रथववेद-माष्य . रका० ११। सूु०8 उदारतां प्रदशित करनो चाहिए इस पर सम्यक् विचार कर के, इन सब उदार भावों के साथ, पर-राष्टर मे प्रवेश कर भ्रौर शुभ-यज्ञ मे घुताहुतियां विवी पुरुषे इते रदिते अंबदे तव॑ ॥५७॥. (भ्रबुं दे) है हिसा करने वाले सेनापति ! (तव रदिते) तेरं काटने

English

Other Folk; Armed with four fangs and yellow teeth, deformed, with faces smeared with blood, the

अध्याय ११

श्लोक 8.33

प्र॒थ॒मेन॑ प्रमा॒रेण॑ त्रे॒धा विष्व॒ङ् वि ग॑च्छति ।अ॒द एके॑न॒ गच्छ॑त्य॒द एके॑न गच्छती॒हैके॑न॒ नि षे॑वते

prathamena pramāreṇa tredhā viṣvaṅ vi gacchati | ada ekena gacchatyada ekena gacchatīhaikena ni ṣevate

हिन्दी अर्थ

पर (पुरषे हते) पुरुष के मर जाने पर उस की पत्नी (भतिष्नाना) छाती पीटती हई, (भधुमूखी ) मुख पर श्रांसुभ्रो वालो, (कृधुकर्णी) हलके , कानों वाती, (विकेशी) भौर बिलरे केशों वाली होकर (क्रोशतु) चिल्लाएं । कषु = हस्वनाम (निरुक्त ६।१।३), दुःख कै कारण कर्णाभषण उतार लेने पर हलके कानों वाली । रदित = कोटना, तलवार, कुल्हा, बाण (श्रवु दे) है हिसा करने वाले सेनापति ! (तव रदिते) तेरे काटने , पर, (करूकरम्) करूकर को (संकषन्ती) खीचती हुई, (मनसा पुत्रम्

English

terrible and fearless ones,

अध्याय ११

श्लोक 8.34

अ॒प्सु स्ती॒मासु॑ वृ॒द्धासु॒ शरी॑रमन्त॒रा हि॒तम्।तस्मिं॒छवोऽध्य॑न्त॒रा तस्मा॒च्छवोऽध्यु॑च्यते

apsu stīmāsu vṛddhāsu śarīramantarā hitam| tasmiṃchavo'dhyantarā tasmācchavo'dhyucyate

हिन्दी अर्थ

पति, भाई तदनन्तर निज सम्बन्वियो को मन से चाहती हृईः (क्रोशतु) “कुरीर” पत्नी के हाथ का भ्राभ्रूषण है, जिसे कि पन्जांबी माषा सें कलीरा कहते है । भ्रव ० ६।१३८।३ मे करीर को शिरोभूषेण कहा है । यथा कांश १ १। सु € भरथवववेद-भाष्य १६७ शरींरों पर (तृप्यन्तु) तृप्त ह, (श्रवु दे तव रदिते) है भबुंदि ! तेरे काटने पर । (समीक्षयन्) तु इस दृश्य को देखता रह् । त,

English

Make thou, O Arbudi, those wings of hostile armies quake with dread. Let Conqueror and Victor, friends of Indra, overcome our foes.

अध्याय ११

श्लोक 9.1

शत्रुनिवारणम् ।१-२६ काङ्कायनः।अर्बुदिः।अनुष्टुप्, १ सप्तपदा विराट् शक्वरी त्र्यवसाना, ३ परोष्णिक्, ४ त्र्यवसाना उष्णिग्बृहतीगर्भा परा त्रिष्टुप् षट् पदातिजगती, ९, ११, १४, २३, २६ पथ्यापङ्क्तिः, १५, २२, २४-२५ त्र्यवसाना सप्तपदा शक्वरी, १६ त्र्यवसाना पञ्चपदा विराडुपरिष्टाज्ज्योतिस्त्रिष्टुप्, १७ त्रिपदा गायत्री।ये बा॒हवो॒ या इष॑वो॒ धन्व॑नां वी॒र्याऽणि च ।अ॒सीन् प॑र॒शूनायु॑धं चित्ताकू॒तं च॒ यद्धृ॒दि ।सर्वं॒ तद॑र्बुदे॒ त्वम॒मित्रे॑भ्यो दृ॒शे कु॑रूदा॒रांश्च॒ प्र द॑र्शय

śatrunivāraṇam | 1-26 kāṅkāyanaḥ| arbudiḥ| anuṣṭup, 1 saptapadā virāṭ śakvarī tryavasānā, 3 paroṣṇik, 4 tryavasānā uṣṇigbṛhatīgarbhā parā triṣṭup ṣaṭ padātijagatī, 9, 11, 14, 23, 26 pathyāpaṅktiḥ, 15, 22, 24-25 tryavasānā saptapadā śakvarī, 16 tryavasānā pañcapadā virāḍupariṣṭājjyotistriṣṭup, 17 tripadā gāyatrī| ye bāhavo yā iṣavo dhanvanāṃ vīryā'ṇi ca | asīn paraśūnāyudhaṃ cittākūtaṃ ca yaddhṛdi | sarvaṃ tadarbude tvamamitrebhyo dṛśe kurūdārāṃśca pra darśaya

हिन्दी अर्थ

उदारभावों को भी (प्रदय) प्रद्ित कर । समूहे । रेरिहतीम् =रिहति भर्च॑तिकर्मा (निघं० ३।१४) । रिचाम् = रिश. हमारा श्रपनों के तथां परा्योँ के साथ टेकमत्य तथा समकौता हो । तथा .. विनाश कर सकता है । इसलिये हमे युद्ध से उपरत हो जाना त्राहिये ।

English

fog.

अध्याय ११

श्लोक 9.2

उत् ति॑ष्ठत॒ सं न॑ह्यध्वं॒ मित्रा॒ देव॑जना यू॒यम्।संदृ॑ष्टा गु॒प्ता वः॑ सन्तु॒ या नो॑ मि॒त्राण्य॑र्बुदे

ut tiṣṭhata saṃ nahyadhvaṃ mitrā devajanā yūyam| saṃdṛṣṭā guptā vaḥ santu yā no mitrāṇyarbude

हिन्दी अर्थ

हजार-हजार शतरुभ्रो को. एक-एक उद्योग मे मारने के लिये अधिक. तरिषन्ि कहा है । तिषन्वि की व्याख्या (१९।१०।२) में विष कीं गई है । मानी वाः (सायण ) इस लेल से प्रतीत होता है.कि सायणाचौयं मी त्िषन्वि को चेतन तत्त्व मानता है, केवल जंड़ वचं वदी ।. २०६. भ्रथववेद-भाष्य कां ११। ० ९

English

sphere, apart. Rise up, with all your banners rise; prepare your strength, ye vapoury Forms!

अध्याय ११

श्लोक 9.3

उत् ति॑ष्ठत॒मा र॑भेतामादानसंदा॒नाभ्या॑म्।अ॒मित्रा॑णां॒ सेना॑ अ॒भि ध॑त्तमर्बुदे

ut tiṣṭhatamā rabhetāmādānasaṃdānābhyām| amitrāṇāṃ senā abhi dhattamarbude

हिन्दी अर्थ

विचारणीय है । भ्रथवा वतमान काल मे हम देखते ह॑ कि अमरीका श्रौर एशिया द्वारा एेसे १९०५४०७ तथा णभ"71९8 भ्राकश्च मे छोड गए जो कि सूयं को भी षार कर भ्रागे-भरागे बढते जा रहै । यद्यपि इन मे मनुष्य नरही"¶तो भी कभी एेसा समय मरा सकता है जब कि इन १२००८४७ में मनुष्यों को भी इतनी दूरी तक भेजा जा सके चान्द तक्र तो इर वायुयानों मे तक की. चर्चा भी हई है । सहूषि दयानन्द की दृष्टि में जब इन लोक लोक- न्तरो मे भी मानुष-सुष्टि है तो इनं मे रहने वाले दुणमि-प्रजा के सांथ युद्ध कीः सस्भावना.भी किसी समय वास्तविक हो संकतो है वेद तो वर्तमान, "भूत.तथा भविष्यत् की घटनाभ्रो का मी वणन करते है । .

English

Tribute is sacrificed to thee, Trishandhi’s welcome offering May this four-footed White-foot, may this arrow brace and bind thee fast:

अध्याय ११

श्लोक 9.4

अर्बु॑दि॒र्नाम॒ यो दे॒व ईशा॑नश्च॒ न्यऽर्बुदिः ।याभ्या॑म॒न्तरि॑क्ष॒मावृ॑तमि॒यं च॑ पृथि॒वी म॒ही।ताभ्या॒मिन्द्र॑मेदिभ्याम॒हं जि॒तमन्वे॑मि॒ सेन॑या

arbudirnāma yo deva īśānaśca nya'rbudiḥ | yābhyāmantarikṣamāvṛtamiyaṃ ca pṛthivī mahī| tābhyāmindramedibhyāmahaṃ jitamanvemi senayā

हिन्दी अर्थ

(श्रथो) तथा (विकद्तीमुखाः) विशेषं प्रकार की कद्ध के सदृश नाना पने मुखो वाले बाण,- (क्रव्याहैः). दात्रुभों के कच्चे मांसों .को मानो खाने वाले ये बाण, (वातरंहसः) तथा वायु के वेग वाले ये बोण, (ग्मित्रान्) नामक सेनाधिपति, द्वारा प्रेरित हृए ।. १. ११।१०।१-२७ मे भी कहीं-कहीं न्यबुदि का व्णन,हुभा है (दलो मन्त्र

English

Together with Trishandhi’s host, be thou, O Witchcraft, meant for foes.

अध्याय ११

श्लोक 9.5

उत् ति॑ष्ठ॒ त्वं दे॑वज॒नार्बु॑दे॒ सेन॑या स॒ह।भ॒ञ्जन्न॒मित्रा॑णां॒ सेनां॑ भो॒गेभिः॒ परि॑ वारय

ut tiṣṭha tvaṃ devajanārbude senayā saha| bhañjannamitrāṇāṃ senāṃ bhogebhiḥ pari vāraya

हिन्दी अर्थ

है । सन्धा मरौर सन्वि समानार्थेक है । सन्वान= णा, 2380०, 10 त्रिषन्वि कों वच््ररूपता दी श्रई है.॥ गीता १०।२०८ म भायुधों मे वचर के सदुश महा- संहारी होने के कारण श्री कष्णन “्रायुघानोमहं वम्” दारा ' भषने-भाप को कां9 ११। भुः १५. प्रथववेद-भाष्य २११. अन्तर्हि जातवेदु आदित्य. कुणपं बहु । त्रिष॑न्धेरियं सेना सुतास्तु मे वशे ॥४॥ (जातवेदः) है उत्प संग्राम की विद्या को जानने वाले 1 (रादित्य). हे शत्रभों का भ्रादान करने वाले, उन्हुं पकड़ने वाले भबुदि! (बहू (चेह). गाड़ दे । (त्रिषन्धेः इयं सेना) . त्रिषन्वि कौ यह सेना (मे) सुम साट् के लिये (सुहिता भस्तु) उत्तम हित करने वाली हो, तथा (वशे)

English

Down let the dim-eyed demon fly, and let her shorteared sister shriek: Red be the banners when the host of Arbudi hath won the day.

अध्याय ११

श्लोक 9.6

स॒प्त जा॒तान् न्यऽर्बुद उदा॒राणां॑ समी॒क्षय॑न्।तेभि॒ष्ट्वमाज्ये॑ हु॒ते सर्वै॒रुत्ति॑ष्ठ॒ सेन॑या

sapta jātān nya'rbuda udārāṇāṃ samīkṣayan| tebhiṣṭvamājye hute sarvairuttiṣṭha senayā

हिन्दी अर्थ

तिषन्धि को कहता है निज सेना के साथ प्रेम से वर्ताव करना जिस सेसेना भेर वद्य मे रहे, भौर मेरे लिये उत्तम. हितकारिणी हो । कहीं युद्ध में बलवां . या युद्धबन्दी न कर दे सुहिताभ्रथवा सुपुष्ट=मु+घाः.(षारण उष्टं त्वं देवजनाबैदे सेनया: सह ।

English

Let all the birds that move on wings come downward, all fowls that roam the heavens and

अध्याय ११

श्लोक 9.7

प्र॒ति॒घ्ना॒नाश्रु॑मु॒खी कृ॑धुक॒र्णी च॑ क्रोशतु ।वि॒के॒शी पुरु॑षे ह॒ते र॑दि॒ते अ॑र्बुदे॒ तव॑

pratighnānāśrumukhī kṛdhukarṇī ca krośatu | vikeśī puruṣe hate radite arbude tava

हिन्दी अर्थ

(देवजन बुं दे) है विजिगीषु" जनं ! शात्रषौतक सेनापतिः! (त्वम्) तु (उत्तिष्ठ) उठ (सेनया. सह): निज . सेना के साथ । (वः) तुम सबक भ्रा है । (भराहृतिः) यह .भराहूति- (चिषन्् ). बुस्हारे. सेनासंचालक को (प्रिया) प्रिय है, भरभीष्ट है। भरद दि है। त्रिषन्धि सेना का संचालक. है: ।

English

air’s midregion. Let beasts of prey and flies attacks, and vultures that eat raw flesh mangle and gnaw the

अध्याय ११

श्लोक 9.8

सं॒कर्ष॑न्ती क॒रूक॑रं॒ मन॑सा पु॒त्रमि॒च्छ॑न्ती॑ ।पतिं॒ भ्रात॑र॒मात्स्वान् र॑दि॒ते अ॑र्बुदे॒ तव॑

saṃkarṣantī karūkaraṃ manasā putramicchantī | patiṃ bhrātaramātsvān radite arbude tava

हिन्दी अर्थ

च्यविजिगीषु; . दिवु क्रीडा विजिगीषा व्यवहार भ्रादि। २१२ भरथर्वेवेद-माष्य को० ११। सु०१० (चितिपदी) काले लोहे के पैरो वाली, (चतुष्पदी) चार पैरों वाली . के संहारके) लिये तू हो, (त्रिषन्धेः सेनया सह) त्रिषन्धिं की सेनाके

English

carcase.

अध्याय ११

श्लोक 9.9

अ॒लिक्ल॑वा जाष्कम॒दा गृध्राः॑ श्ये॒नाः प॑त॒त्रिणः॑ ।ध्वाङ्क्षाः॑ श॒कुन॑यस्तृप्यन्त्व॒मित्रे॑षु समी॒क्षय॑न् रदि॒ते अ॑र्बुदे॒ तव॑

aliklavā jāṣkamadā gṛdhrāḥ śyenāḥ patatriṇaḥ | dhvāṅkṣāḥ śakunayastṛpyantvamitreṣu samīkṣayan radite arbude tava

हिन्दी अर्थ

यव्या दवारा शत्रु को गरो द्वारा षेरा जाता है शरव्या =शर (बाण) ¬ व्येञ्. संवरणे । सायणाचाये ने शरव्या का श्रं किया है “शरसमृहः' शरव्या चार परो वानी तोप प्रतीत होती है । धूमाक्षी से प॑ततु ढृषुकणी चं क्रोशतु । त्रिषन्धेः सेन॑या जिते अरुणाः सन्तु केतवः ॥७॥ (धूमाक्षी ) धूमपीडित ्रांखो वाली शत्रुसेना (सपततु) पृथिवी षर मिर पड़े, (च कृधुकर्णी) भौर चिल्लाहट तथा शोर द्वारा कटे कानों वाली

English

By that same binding treaty which thou madest, Brihaspati! with Indra! and with Brahma, By Indra’s pledge I bid the Gods come hither. Conquer on this side, not on their side yonder.

अध्याय ११

श्लोक 9.10

अथो॒ सर्वं॒ श्वाप॑दं॒ मक्षि॑का तृप्यतु॒ क्रिमिः॑ ।पौरु॑षे॒येऽधि॒ कुण॑पे रदि॒ते अ॑र्बुदे॒ तव॑

atho sarvaṃ śvāpadaṃ makṣikā tṛpyatu krimiḥ | pauruṣeye'dhi kuṇape radite arbude tava

हिन्दी अर्थ

खडुरंभिषङ्करन्ां सविं सवेवासिनीमू । वाली सेनिक-टुकंडी को, (लविकाम्) पराक्रमं मे गर्वीली को; तथा (खव-. वासिनीम्) गवली शतु सना कदनं करी सैनिक दुक को तथा (भे) जो (उदाराः) उदारा भाव (भरन्तं्िताः)भ्रभी छिपा रते है; अभी प्रकट नहीं कांग ११। सु०९ प्रथवंवेद-माष्य २०१

English

Arbudi and Trishandhi fall upon our foes and scatter them, So that, O Indra, Lord of Might, Slayer of Vritra, we may kill thousands of these our

अध्याय ११

श्लोक 9.11

आ गृ॑ह्णीतं॒ सं बृ॑हतं प्रानापानान् न्य॑र्बुदे ।नि॒वा॒शा घोषाः॒ सं य॑न्त्व॒मित्रे॑षु समी॒क्षयन् रदि॒ते अ॑र्बुदे॒ तव॑

ā gṛhṇītaṃ saṃ bṛhataṃ prānāpānān nyarbude | nivāśā ghoṣāḥ saṃ yantvamitreṣu samīkṣayan radite arbude tava

हिन्दी अर्थ

किये, ये) तथा. जो (गन्र्वासरसः च) पृथिवी-पति भने साथी है, भौर जो (निष. १।१)+-घुज. (वारणे), पृथवी का घारण करने वाले राजा । सर्पाः मानो उस का रक्त पीते है एसे वाणो को, (स्वभ्यसाः) जो निजस्वरूप में अग्रमागका मी वाचक है । दन्तः 1176 0ंणा ग धा 27, 0 (श्राष्टे ) 1

English

fog.

अध्याय ११

श्लोक 9.12

उद् वे॑पय॒ सं वि॑जन्तां भि॒यामित्रा॒न्त्सं सृ॑ज ।उ॒रु॒ग्रा॒हैर्बा॑ह्व॒ङ्कैर्विध्या॒मित्रा॑न् न्यर्बुदे

ud vepaya saṃ vijantāṃ bhiyāmitrāntsaṃ sṛja | urugrāhairbāhvaṅkairvidhyāmitrān nyarbude

हिन्दी अर्थ

१. छेदना्थंक “वस्” धातु मे-““वसा' शद निष्पत है, जिसका भ्रथं है चर्बी । (ऋ० ६।७५।११)। निरुक्त मेँ कहा है कि ““मृगमयो भ्रस्या दन्तः” (९।२।१५ इषु के-भग्र माग भं लगी तीकष्म वैस्तु को भीः "दन्त" कहा है । । कथे की श्रग्र भागों को भी दन्त कहते है । भवै, (१४।२।६८) मे “शतदन्

English

enemies! Tall trees, and those who live in woods, the herbs and creeping plants of Earth,

अध्याय ११

श्लोक 9.13

मुह्य॑न्त्वेषां बा॒हव॑श्चित्ताकू॒तं च॒ यद्धृ॒दि।मैषा॒मुच्छे॑षि॒ किं च॒न र॑दि॒ते अ॑र्बुदे॒ तव॑

muhyantveṣāṃ bāhavaścittākūtaṃ ca yaddhṛdi| maiṣāmuccheṣi kiṃ cana radite arbude tava

हिन्दी अर्थ

लोहे से निमित दष्टा वाले बार्णो कै सदुदा विघातकं भग्नि १ यावदतः-=काले के दान्त वाले बाण । इन्हे “श्रयोमुखाः” मी कटा है एसे बाण । लोहा काला होता है, रौर द्याव का भरथं काला भी है। मेँ तो मयानक है, परन्तु खाय ही शस्वास्वधारी भी है 1 शवो की (भ्रमः) उन (सिचः) गवं से सिक्त हुई, सची हई सेनाभों को

English

Gandharvas, and Apsarases, Snakes, [] Beings, Fathers,

अध्याय ११

श्लोक 9.14

प्र॒ति॒घ्ना॒नाः सं धा॑व॒न्तूरः॑ पटू॒रावा॑घ्ना॒नाः ।अ॒घा॒रिणी॑र्विके॒श्योऽ रुद॒त्यः॑१ पुरु॑षे ह॒ते र॑दि॒ते अ॑र्बुदे॒ तव॑

pratighnānāḥ saṃ dhāvantūraḥ paṭūrāvāghnānāḥ | aghāriṇīrvikeśyo' rudatyaḥ1 puruṣe hate radite arbude tava

हिन्दी अर्थ

हरा तु, (च जिष्णुः) भ्रौर जीतने के स्वभाव वाना न्यवरंदि, तुम दोनों सिचः का अर्थं “कपड़े के किनारे” मी होता है । यथा “चे अन्ता यावतीः सिच य श्रोतवो ये च तन्तवः” (अथव १४।२।५१) -इस र्थं मे मन्तगत “सिचः” का श्रयं - होगा “युद्ध भूमि के दुर के किनारो, सीमाभ्नो तक फली अगनिजिहा प्ंपशिखा जय॑न्तीयेन्तु सेन॑या ॥१६॥ - नकु दे).हे. नितरां शत्रुषातक सेनाधीश ! (भ्रमिः) शत्रु मण

English

Gods, All these do thou, O Arbudi, make visible to our enemies: cause them to look on mists and

अध्याय ११

श्लोक 9.15

श्वऽन्वतीरप्स॒रसो॒ रूप॑का उ॒तार्बु॑दे ।अ॒न्तः॒पा॒त्रे रेरि॑हतीं रि॒शां दु॑र्णिहितै॒षिणी॑म्।सर्वा॒स्ता अ॑र्बुदे॒ त्वम॒मित्रे॑भ्यो दृ॒शे कु॑रूदा॒रांश्च॒ प्र द॑र्शय

śva'nvatīrapsaraso rūpakā utārbude | antaḥpātre rerihatīṃ riśāṃ durṇihitaiṣiṇīm| sarvāstā arbude tvamamitrebhyo dṛśe kurūdārāṃśca pra darśaya

हिन्दी अर्थ

कां० ११। सु० ९ भरथर्ववेद-भाष्य २०३ इषु, (धूमदिखाः) तथा धूए की शिखाभ्रों वाले इषु. (जयन्तीः) विजयं पाते हए, (सेनया). हमारी सेना क साथ (यन्तु) युद्ध भूमि मे चलं । धूमश्रौर अग्नि कोदुरसे देख कर शत्रु, हृदयो मे मय धारण कर् । तथा

English

fog.

अध्याय ११

श्लोक 9.16

ख॒डूरे॑ऽधिचङ्क्र॒मां खर्वि॑कां खर्ववा॒सिनी॑म्।य उ॑दा॒रा अ॒न्तर्हि॑ता गन्धर्वाप्स॒रस॑श्च॒ ये ।स॒र्पा इ॑तरज॒ना रक्षां॑सि

khaḍūre'dhicaṅkramāṃ kharvikāṃ kharvavāsinīm| ya udārā antarhitā gandharvāpsarasaśca ye | sarpā itarajanā rakṣāṃsi

हिन्दी अर्थ

: (भकुंदे) है दात्रुधातक सेनापति ! (तया) उस सेना हारा (१९) (एषाम्) इन मुखिरयो मे (कंचन) को भी (मा) न (मोचि) चट । „करे । शची कर्मनाम (निषं° २।१) ॥ शौष्कास्यमलुं वतेतामुमनरान् मोत मित्रिणः ।२१॥

English

High sway have Maruts, and the God Āditya, Brāhmanaspati, High sway have Indra, Agni, and Dilator, Mitra, Prajāpati,

अध्याय ११

श्लोक 9.17

चतुर्दंष्ट्रांछ्या॒वद॑तः कु॒म्भमु॑ष्काँ॒ असृ॑ङ्मुखान्।स्व॒भ्य॒सा ये चो॑द्भ्य॒साः

caturdaṃṣṭrāṃchyāvadataḥ kumbhamuṣkā~ asṛṅmukhān| svabhyasā ye codbhyasāḥ

हिन्दी अर्थ

से उद्गत हो जोय, निकल: जांय उत्-+कपि (गतौ) (प्राणः) प्राण (भित्रिणः) भिर के मुख (मां) न सूरे, भ्रपितु प्रसन्न हों । २०४ भरथवेवेद-माष्य कां० ११ सुऽ € (पराञ्चः) जोकि युद्ध से पराङमुखहों करभंगे हैः (गरेक्धिंराः) जो

English

High sway have Rishis given to you, showing upon our enemies where thou, O Arbudi, hast

अध्याय ११

श्लोक 9.18

उद् वे॑पय॒ त्वम॑र्बुदे॒ऽमित्रा॑णाम॒मूः सिचः॑ ।जयां॑श्च जि॒ष्णुश्चा॒मित्रां॒ जय॑ता॒मिन्द्र॑मेदिनौ

ud vepaya tvamarbude'mitrāṇāmamūḥ sicaḥ | jayāṃśca jiṣṇuścāmitrāṃ jayatāmindramedinau

हिन्दी अर्थ

(च) श्रौर (तमसा) विजयी सेना द्वारा फंके तामसास्त्रो के कारण (ये) . जो (तूपराः) शुङ्गविहीन पशुभ्रो के सदु पराक्रम रहित हो गये. (अथो) रौर जो (बस्ताभिवासिनः) बकरों की खाल के वस्त्र कवचो के रूपम धारण कयि हए है, (तान् सर्वान्) उन सब को, (अवुंदे) हेः के लिये (कूरं) उपस्थित कर, (उदारान् च) भ्रौरं उदार भवोंकोभी (भ्रदशेय) प्रद्वित कर । जब श्रकुंदि शत्रुपरा पर विजय पा ले, तदनन्तरं वह शतुपक्ष.के.

English

pierced. With full dominion over these, rise, stand ye up, prepare your- selves,

अध्याय ११

श्लोक 9.19

प्रब्ली॑नो मृदि॒तः श॑यां ह॒तो॒३मित्रो॑ न्यर्बुदे ।अ॒ग्नि॒जि॒ह्वा धू॑मशि॒खा जय॑न्तीर्यन्तु॒ सेन॑या

prablīno mṛditaḥ śayāṃ hato3mitro nyarbude | agnijihvā dhūmaśikhā jayantīryantu senayā

हिन्दी अर्थ

करके, देखो इन दीन संनिकों कौ भ्रवस्था को । परन्तु भ्रधिकारियो के प्रति उदारभावों को भो, दर्शाए जिस से उन्हें निक्चय हो जाय कि के दवारा शतरुम्नो को वोन्ध” । तथा. “उस रशात्रुसेना को क्मेरहित कर देने होता है 1 देखो (यजु° १७।४४) तथा (ऋक् १०।१०३।१२1 । कींऽ ११॥।सु०8९ भ्रथवेवेद-भाष्य २०१४

English

Ye are our friends, celestial hosts. When ye have won this battle, go, each to his several

अध्याय ११

श्लोक 9.20

तया॑र्बुदे॒ प्रणु॑त्ताना॒मिन्द्रो॑ हन्तु॒ वरं॑वरम्।अ॒मित्रा॑णां॒ शची॒पति॒र्मामीषां॑ मोचि॒ कश्च॒न

tayārbude praṇuttānāmindro hantu varaṃvaram| amitrāṇāṃ śacīpatirmāmīṣāṃ moci kaścana

हिन्दी अर्थ

दशे) मित्रो के लिथे दरष्टिगोचर (कु) कर, (उदारान् च) भ्रौर उस समय उदार भावों को भी (प्रदक्षय) प्रदित कड । हुई शक्ति के द्वारा यह कायं कर सरके; या (२) त्रिषन्धिवजं इतना घातक- वहोकिदइसकेप्रयोग द्वारा हजारों सैनिक एक बार मेँ मारे जा सकं । मारे जाने पर यह सम्भावना हो सकती ह किं शातरुपक्च युद्ध से उपरत होने साथ ही उदार भावौ को भीं प्रकट करे । साथ ही यह कटे कि शान्तिकी

English

Serpents and fiends and Other Folk, charge and pursue our enemies!

अध्याय ११

श्लोक 9.21

उत्क॑सन्तु॒ हृद॑यान्यू॒र्ध्वः प्रा॒ण उदी॑षतु ।शौ॒ष्का॒स्यमनु॑ वर्तताम॒मित्रा॒न्मोत मि॒त्रिणः॑

utkasantu hṛdayānyūrdhvaḥ prāṇa udīṣatu | śauṣkāsyamanu vartatāmamitrānmota mitriṇaḥ

हिन्दी अर्थ

शत्रु पर विजय पा लेने के परवात्, शवुराष्ट भँ शासन के लिये ईशां वौ अक्तौ देव आदित्यो ब्रक्षणसपतिः । कर सकने वाला व्यविति, (मित्रः) तथा तुम्हारे साथ मित्र बन कर रहने लोग (ईशाम्, चक्रः) . चासन करे, (भ्रवुदे) है शवूषातक सेनापति !

English

Let those who bear an evil name, in air, in heaven on earth, and men, After Trishandhi’s will, revere your power, the sway that Know- ledge gives, together with

अध्याय ११

श्लोक 9.22

ये च॒ धीरा॒ ये चाधी॑राः॒ परा॑ञ्चो बधि॒राश्च॒ ये।त॒म॒सा ये च॑ तूप॒रा अथो॑ बस्ताभिवा॒सिनः॑ ।सर्वां॒स्ताँ अ॑र्बुदे॒ त्वम॒मित्रे॑भ्यो दृ॒शे कु॑रूदा॒रांश्च॒ प्रद॑र्शय

ye ca dhīrā ye cādhīrāḥ parāñco badhirāśca ye| tamasā ye ca tūparā atho bastābhivāsinaḥ | sarvāṃstā~ arbude tvamamitrebhyo dṛśe kurūdārāṃśca pradarśaya

हिन्दी अर्थ

(तव रदिते) तुक दारा शतुभ्ों के कट जाने पर, (समीक्षयन्) तु इस ब्य- लिये हो । ऋषयः = ऋषि कोटि के लोग॒पक्षपाती तथा भ्रत्याचार करने चले । विजित राष्ट के शासन म यह कितना ऊंचा भौर सहानुभतिपूरणं (मित्राः, देवजनाः) है मत्री पूरवंक व्यवहार करने वाले दिव्यजनो ¦

English

your ruddy flags.

अध्याय ११

श्लोक 9.23

अर्बु॑दिश्च॒ त्रिषंधिश्चा॒मित्रा॑न् नो॒ वि वि॑ध्यताम्।यथै॑षामिन्द्र वृत्रहन् हना॑म शचीपते॒ऽमित्रा॑णां सहस्र॒शः

arbudiśca triṣaṃdhiścāmitrān no vi vidhyatām| yathaiṣāmindra vṛtrahan hanāma śacīpate'mitrāṇāṃ sahasraśaḥ

हिन्दी अर्थ

करो, भौर पराजित राष्ट मे अपने-अपने नियत किये स्थानोंमें जा बटो, भौर मत्री पूर्वक तथा दिव्यभावनारभो के साथ उन पर शासन करो । ९० भ्रचरवेवेद-भाष्व का ११.।.सु० १० उ्तिष्ठत सं भहध्व॒मुदाराः केतुभिः सह । (उदाराः) है उदार सैनिको ! (उत्तिष्ठत) 'उठो (केतुभिः सह)

English

Let those with iron faces, with faces like needles or like combs, Flesh-eaters, rapid as the wind, cling closely to our foemen with

अध्याय ११

श्लोक 9.24

वन॒स्पती॑न् वानस्प॒त्यानोष॑धीरु॒त वी॒रुधः॑ ।ग॒न्ध॒र्वा॒प्स॒रसः॑ स॒र्पान् दे॒वान् पु॑ण्यज॒नान् पि॒तॄ॒न्।सर्वां॒स्तां अ॑र्बुदे॒ त्वम॒मित्रे॑भ्यो दृ॒शे कु॑रूदा॒रांश्च॒ प्र द॑र्शय

vanaspatīn vānaspatyānoṣadhīruta vīrudhaḥ | gandharvāpsarasaḥ sarpān devān puṇyajanān pitṝn| sarvāṃstāṃ arbude tvamamitrebhyo dṛśe kurūdārāṃśca pra darśaya

हिन्दी अर्थ

. धावत) ज्ञत्रुमो का पीडा करो । उदाराः =्रौवारयगरुणोपेताः -सायणा) सूक्त € के मन््र २५. ९६ से ध पुनः युदधो्त हो जाय, या -कोई नया युद्ध. उपस्थित होः जाय, तो पसे गृद्ध का- वर्णन सूक्त १० मे जाननांँ चहिये । . ईशां वौ षेद राज्यं निष॑न्पे अरुणैः केतुभिः सह 1 मे भरबुंदिभ्रौरन्यबरंदिकाही वणेन हमा है, त्रिषन्षि का नहीं ।

English

Trishandhi for their thunderbolt.

अध्याय ११

श्लोक 9.25

ई॒शां वो॑ म॒रुतो॑ दे॒व आ॑दि॒त्यो ब्रह्म॑ण॒स्पतिः॑ ।ई॒शां व॒ इन्द्र॑श्चा॒ग्निश्च॑ धा॒ता मि॒त्रः प्र॒जाप॑तिः ।ई॒शां व॒ ऋष॑यश्चक्रुर॒मित्रे॑षु समी॒क्षय॑न् रदि॒ते अ॑र्बुदे॒ तव॑

īśāṃ vo maruto deva ādityo brahmaṇaspatiḥ | īśāṃ va indraścāgniśca dhātā mitraḥ prajāpatiḥ | īśāṃ va ṛṣayaścakruramitreṣu samīkṣayan radite arbude tava

हिन्दी अर्थ

कां० ११।सू० १० भरथवंवेद-अष्यि २०६ उठ । यि अन्तरिक्षे) जो अन्तरिक्षे, (ये दिवि) जो लोके, (चये लाल ऊण्डे खून की निच्चानी है, चिन दारा यह् द्वया है कि खनी युद्ध होने वाला है । भन्तरिख् मे मानव, वायुयानों वाते संनिक ह! पृथिवी , के मानव तो प्रसिद्धही ह। वेदको दृष्टि मेंचुलोकमें भी मानव सदश्च

English

Omniscient Āditya, make full many a corpse to disappear. Let this devoted army of Trishandhi be in my control.

अध्याय ११

श्लोक 9.26

तेषां॒ सर्वे॑षा॒मीशा॑ना॒ उत् ति॑ष्ठत॒ सं न॑ह्यध्वं॒ मित्रा॒ देव॑जना यू॒यम्।इ॒मं सं॑ग्रा॒मं सं॒जित्य॑ यथालो॒कं वि ति॑ष्ठध्वम्

teṣāṃ sarveṣāmīśānā ut tiṣṭhata saṃ nahyadhvaṃ mitrā devajanā yūyam| imaṃ saṃgrāmaṃ saṃjitya yathālokaṃ vi tiṣṭhadhvam

हिन्दी अर्थ

सुष्टि है । महर्षि दयानन्द की दृष्टि मे ये सब भुगोल, लोक भौर इन मे मनुष्यादि प्रजा सी रहतो ह । जब पृथिवी केःसमान सूयं . चन्द्र भौर असंख्य लोकों मे मनुष्यादि सृष्टि नही, तो क्या... परमेदवर का काम सफल कभी हो सकता है । इसलिये सवत्र सनुष्यादि सुष्टि है + जिस जाति की जंसी सृष्टि इस देव मे है वंसी जातिदहीको सृष्टि भ्रत्य लोकोमेंभी कपूर टृस्ट) । तथा महषि ने यह भी माना.है कि जंसे वेदोंका इस लोक मे प्रका है उन्दींका उन लोकोँमे भी प्रका है" । इस लोकसे यह सनुष्य है; तभी तो वेदों को सत्ता लोकों में प्रयोजनवती हो सक्ती है । इन

English

Rise up, O Godlike Being, rise, Arbudi, with thine army: this,

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Atharva Veda — Chapter 11
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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