Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
19
अध्याय 19 / 20

Kanda 19

काण्ड 19

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पूर्ण अध्याय पाठ172 श्लोक

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अध्याय १९

श्लोक 24.1

राष्ट्रम्।१-८ अथर्वा।ब्रह्मणस्पतिः, बहुदैवत्यम्।अनुष्टुप्, ४-६, ८ त्रिष्टुप्, ७ त्रिपदाऽर्षी गायत्री।येन॑ दे॒वं स॑वि॒तारं॒ परि॑ दे॒वा अधा॑रयन्।तेने॒मं ब्र॑ह्मणस्पते॒ परि॑ रा॒ष्ट्राय॑ धत्तन

rāṣṭram| 1-8 atharvā| brahmaṇaspatiḥ, bahudaivatyam| anuṣṭup, 4-6, 8 triṣṭup, 7 tripadā'rṣī gāyatrī| yena devaṃ savitāraṃ pari devā adhārayan| tenemaṃ brahmaṇaspate pari rāṣṭrāya dhattana

हिन्दी अर्थ

त्रीणि वीर्याणि = ( १) कायिक वीयं । (२) मानंसिक वीयं, यथा हिरण्य या मानसिक-रेठसू है “संकल्पशक्ति"" या कामना । इस मानसिक ९०७. ये देवा दिम स्य ते द॑गलो रपद चनम् ॥११॥ का० १९ सुऽ २७ भयववेद-माष्य २५७

English

Advance to good old age: endue the mantle. Be thou our heifers’ guard from imprecation. Live thou a hundred full and plenteous autumns, and wrap thee in prosperity of riches.

अध्याय १९

श्लोक 24.2

परी॒ममिन्द्र॒मायु॑षे म॒हे क्ष॒त्राय॑ धत्तन ।यथै॑नं ज॒रसे॑ न॒यां ज्योक् क्ष॒त्रेऽधि॑ जागरत्

parīmamindramāyuṣe mahe kṣatrāya dhattana | yathainaṃ jarase nayāṃ jyok kṣatre'dhi jāgarat

हिन्दी अर्थ

(देवाः) है विद्रानो ! (ये) जो (दिवि) सूर्यादिलोक में (एकाद) दश प्राण भ्रौर ग्यारहूवां जीव, (स्थ) है, (ते) वे जसे है, वेते उन को जानके (देवासः) है विद्वानो ! तुम (इदम्) इस (हविः) हवि का ( जुषध्वम्

English

Thou for weal hast clothed thee in this garment: thou hast become our cows’ sure guard from curses. Live thou a hundred full and plenteous autumns: then living, fair thyself, shalt deal forth

अध्याय १९

श्लोक 24.3

परी॒मं सोम॒मायु॑षे म॒हे श्रोत्रा॑य धत्तन ।यथै॑नं ज॒रसे॒ नयां ज्योक् क्ष॒त्रेऽधि॑ जागरत्

parīmaṃ somamāyuṣe mahe śrotrāya dhattana | yathainaṃ jarase nayāṃ jyok kṣatre'dhi jāgarat

हिन्दी अर्थ

०७८ये हैवा अन्तरि एकादश स्थ ते देवासो इविरिदं जुषध्वम् ॥१२॥ करनेहारे ( एकादश) वशेन्दरिय भौर एक मन (स्थ) ह, (ति) वे जंसेहै वैसे उन को जानके (देवासः) है विद्वानो ! तुम (दम्) इस (हविः) हवि का (जुषध्वम्) प्रीतिपूर्वंक सेवन करो । भावानुसार धं दिया है । यजुवेद ७।१९, तथा ऋग्वेद १।१३९।११ में है--“भन्तरिक्ष वा जलो भे निवास करनेहारे, तथ। प्राणो मेँ ठहरनेवाले

English

treasures. In every need, in every fray we call, as friends, to succour us,

अध्याय १९

श्लोक 24.4

परि॑ धत्त ध॒त्त नो॒ वर्च॑से॒मं ज॒रामृ॑त्युं कृणुत दी॒र्घमायुः॑ ।बृह॒स्पतिः॒ प्राय॑च्छ॒द् वास॑ ए॒तत् सोमा॑य॒ राज्ञे॒ परि॑धात॒वा उ॑

pari dhatta dhatta no varcasemaṃ jarāmṛtyuṃ kṛṇuta dīrghamāyuḥ | bṛhaspatiḥ prāyacchad vāsa etat somāya rājñe paridhātavā u

हिन्दी अर्थ

गुदा, लिग भौर मन (स्थ) है" (ते) वे जसे मपने-्रपते कामों मे वतमानः , ई, वैसे (देवासः) है राजसभा के समासदो ! घाप लोग यथायोग्य भरपने- प्रपते कामों मं वर्तमान होकर -- “1

English

Indra the mightiest of all. Gold-coloured, undecaying, blest with heroes, dwell, dying in old age, with children round thee.

अध्याय १९

श्लोक 24.5

ज॒रां सु ग॑च्छ॒ परि॑ धत्स्व॒ वासो॒ भवा॑ गृष्टी॒नाम॑भिशस्ति॒पा उ॑ ।श॒तं च॒ जीव॑ श॒रदः॑ पुरू॒ची रा॒यश्च॒ पोष॑मुप॒संव्य॑यस्व

jarāṃ su gaccha pari dhatsva vāso bhavā gṛṣṭīnāmabhiśastipā u | śataṃ ca jīva śaradaḥ purūcī rāyaśca poṣamupasaṃvyayasva

हिन्दी अर्थ

“ष्ठु कितः" का “भरन्तरिक्ष. वा अलो मँ निवास करनेहारे” एेसा भथं भेत है । परन्तु यजुर्वेद के मन्त मं “परपु” का प्रथं महिने कियाहै-- २५८ । प्रथववेद-माष्य क० १९ । पु° २७ (देवाः) है विद्धानो (ये) जो (पृथिव्याम्) पृथिवी म (एकाद). उक्त एकादश गण दश प्राण मौर ग्यारहवां जीव (स्थ) है, (ते) बे वैसे है वसे उन को जानकर (देवासः) है विद्वानो! तुम (इदम्) इस (हविः) हवि को (जुषध्वम्) प्रीतिपुरवंक सेवन करो ।

English

This is the spoken word of Agni, Soma, Brihaspati and Savitar, and Indra. 251

अध्याय १९

श्लोक 24.6

परी॒दं वासो॑ अधिथाः स्व॒स्तयेऽभू॑र्वापी॒नाम॑भिशस्ति॒पा उ॑ ।श॒तं च॒ जीव॑ श॒रदः॑ पुरू॒चीर्वसू॑नि॒ चारु॒र्वि भ॑जासि॒ जीव॑न्

parīdaṃ vāso adhithāḥ svastaye'bhūrvāpīnāmabhiśastipā u | śataṃ ca jīva śaradaḥ purūcīrvasūni cārurvi bhajāsi jīvan

हिन्दी अर्थ

भावानुसार भथ दिया है । यनुवंद ७।१९ क मर्हषि-माष्यानुसार तिरिशीनघ्न्या रंषत॒ जातवेदा भृतढ़ृतों मे सवत॑; सन्तु वभ ॥१५॥ इन दोनों मन्त्रो के भं देखो-अथवं ° १३।१६।१-२ भे । काऽ १९। सुण २८ भयववेद-माष्य २५९

English

A charm to be used when a young ox is first yoked I yoke thee with the mind of one unwearied still and first of all. Be thou a bearer up the hill: run hither bearing up thy load.

अध्याय १९

श्लोक 24.7

योगे॑योगे त॒वस्त॑रं वाजे॑वाजे हवामहे ।सखा॑य॒ इन्द्र॑मू॒तये॑

yogeyoge tavastaraṃ vājevāje havāmahe | sakhāya indramūtaye

हिन्दी अर्थ

२१२. शमं बाम ते मणिं दीर्घायुत्वाय तेज॑से । हे राजन् ! (ते) तेरे"राज्य की (दीर्घायूत्वाय ) दीषं-आगु के. लिये घरान्तरिक शतरुभों को दबानेवाजे, तथा (द्विषतः) द्वेषी राजा के (हदः) हृदय को (तपनम्) तपानेवाले, (मणिम्) सेनापतयो मँ दिरोमणिर्प, (दर्मम्) शतरु्गो के विदारण द्वारा चमकनेवने, (इमम्) इस सेनापति को (बध्नामि) तेरे साय दुद् बदकरता ह. हपाता हुमा, भरौर (शत्रूणाम्) विनाशकारी दुदमनों के (मनः) मनो को या

English

A hymn accompanying investiture with an amulet of gold Gold that was born from Fire is immortal hath been deposited with mortal creatures.

अध्याय १९

श्लोक 24.8

हिर॑ण्यवर्णो अ॒जरः॑ सु॒वीरो॑ ज॒रामृ॑त्युः प्र॒जया॒ सं वि॑शस्व ।तद॒ग्निरा॑ह॒ तदु॒ सोम॑ आह॒ बृह॒स्पतिः॑ सवि॒ता तदिन्द्रः॑

hiraṇyavarṇo ajaraḥ suvīro jarāmṛtyuḥ prajayā saṃ viśasva | tadagnirāha tadu soma āha bṛhaspatiḥ savitā tadindraḥ

हिन्दी अर्थ

हदय वालों को, (अभीन् ) भौर भपने भ्रापको भय-रहित सममनेवालो को (दम) है शत्रुविदारक सेनपति ! (त्वम्) तु हो । (द्विषतः) दवेषी-शत्रुदल का (दर्भ) विदारण करनेवाले (मणे) शिरो-

English

He who knows this deserves to own this jewel, and in extreme old age dies he who wears it. The men of ancient time with children round them longed for this Gold, bright with the Sun’s own colour,

अध्याय १९

श्लोक 25.1

अश्वः।१ गोपथः।वाजी।अनुष्टुप्।अश्रा॑न्तस्य त्वा॒ मन॑सा यु॒नज्मि॑ प्रथ॒मस्य॑ च ।उत्कू॑लमुद्व॒हो भ॑वो॒दुह्य॒ प्रति॑ धावतात्

aśvaḥ| 1 gopathaḥ| vājī| anuṣṭup| aśrāntasya tvā manasā yunajmi prathamasya ca | utkūlamudvaho bhavoduhya prati dhāvatāt

हिन्दी अर्थ

मणिरूप है सेनापति ! (घमंः इव) ग्रीष्मऋतु के सूये के सदृश (अमि- २६० भधर्ववेद-माष्य का० १९ ॥ चु० २० तपन्) शनरुओं के संमुख तपता हुभ्रा, दमदमाता हृभ्रा, ( नितपन्) नितरां तपता हमरा, दमदमाता हुमा तु (बलम्) शत्रो के संनिक-बल को ( विरजं . या प्रबलरूप मेँ उमड़ हए मेष को तोडती-फोडती हई विद्युत् के सदृक्ष,

English

This shall endow thee, as it shines, with splendour, and long shall be the life of him who wears it.

अध्याय १९

श्लोक 26.1

हिरण्यधारणम्।१-४ अथर्वा।अग्निः, हिरण्यं च।त्रिष्टुप्, ३ अनुष्टुप्, ४ पथ्यापङ्क्तिः।अ॒ग्नेः प्रजा॑तं॒ परि॒ यद्धिर॑ण्यम॒मृतं॑ द॒ध्रे अधि॒ मर्त्ये॑षु ।य ए॑न॒द् वेद॒ स इदे॑नमर्हति ज॒रामृ॑त्युर्भवति॒ यो बि॒भर्ति॑

hiraṇyadhāraṇam| 1-4 atharvā| agniḥ, hiraṇyaṃ ca| triṣṭup, 3 anuṣṭup, 4 pathyāpaṅktiḥ| agneḥ prajātaṃ pari yaddhiraṇyamamṛtaṃ dadhre adhi martyeṣu | ya enad veda sa idenamarhati jarāmṛtyurbhavati yo bibharti

हिन्दी अर्थ

(भिन्दि) छिन्न-मिन्न कर दे । - (दर्भं) है शनतरुविदारक (मणे) शिरोमणि सेनापति (सपत्नानाम्) म (मिच्छ) तु विभेद डाल दे, इनमें भेदनीति को वर्त! तथा (एषाम्) इन के (शिरः) शिरोभ्रुव सेनापति या राजा को (वि पात्य) इनसे विगत करदे, भलग करदे, या मार गिरा। (इव) जेते कि (उद्यन्)

English

Long life and splendour let it bring energy and strength to thee. That thou mayst shine among the folk with all the brightness of the Gold. What Varuna the King knows well, and what the God

अध्याय १९

श्लोक 26.2

यद्धिर॑ण्यं॒ सूर्ये॑ण सु॒वर्णं प्र॒जाव॑न्तो॒ मन॑वः॒ पूर्व॑ ईषि॒रे।तत् त्वा॑ च॒न्द्रं वर्च॑सा॒ सं सृ॑ज॒त्यायु॑ष्मान् भवति॒ यो बि॒भर्ति॑

yaddhiraṇyaṃ sūryeṇa suvarṇaṃ prajāvanto manavaḥ pūrva īṣire| tat tvā candraṃ varcasā saṃ sṛjatyāyuṣmān bhavati yo bibharti

हिन्दी अर्थ

भमि को भावृत किये हए भूमि के राघ्यन्धकार को विगत कर हैतादहै, अलग कर देता है । वि पातय = वि +-षत्लू गतौ ; १त् गतौ । 1 (दमं) है शत्रुविदारक, (मणे) शिरोमणि सेनापति. (मे) मुक भिन्न-भिन्न कर । (मे) मुख राजा के राष्ट प्र (पृतनायतः) सेनां हारा भाक्रमण चाहनेवा्लो को (भिन्दि) भेदनीति दारा भिन्न-भिन्न कर । (मे) भुफ राजा के (सर्वान्) सब (दुर्हादः) दुष्ट हादिक भावनाओं वालो को का० १९। सु०.२८ भरथवंवेद-माष्य २९१

English

Brihaspati, And Indra, Slayer of the Foe, may that bestow long life on thee, may that increase thy

अध्याय १९

श्लोक 26.3

आयु॑षे त्वा॒ वर्च॑से॒ त्वौज॑से च॒ बला॑य च ।यथा॑ हिरण्य॒तेज॑सा वि॒भासा॑सि॒ जनाँ॒ अनु॑

āyuṣe tvā varcase tvaujase ca balāya ca | yathā hiraṇyatejasā vibhāsāsi janā~ anu

हिन्दी अर्थ

(द्म) है शत्रुविदारक, (मणे) शिरोमणि सेनापति.! (मे)मुफ राजा के राजा कै राष्ट पर ( पृतनायतः) सेना द्वारा आक्रमण चाहनेवार्लो (हिषतः) भरभित्रोौ को (छिन्डि) छिन्न-मिन्न कर ।

English

splendid strength. A benedictory hymn Let the Bull guard thee with the kine, the Stallien with the fleet- foot steeds.

अध्याय १९

श्लोक 26.4

यद् वेद॒ राजा॒ वरु॑णो॒ वेद॑ दे॒वो बृह॒स्पतिः॑ ।इन्द्रो॒ यद् वृ॑त्र॒हा वेद॒ तत् त॑ आयु॒ष्यं भुव॒त् तत् ते॑ वर्च॒स्यं भुवत्

yad veda rājā varuṇo veda devo bṛhaspatiḥ | indro yad vṛtrahā veda tat ta āyuṣyaṃ bhuvat tat te varcasyaṃ bhuvat

हिन्दी अर्थ

(दभ) है शत्रुविदारक, (मणे) शिरोमणि सेनापति ! (मे) मेरे पर (पृतनायतः) तेना वारा भ्ाक्रमण चाहनेवालो को (वृर) काट डाल । काट डल । (मे) मेरे (द्विषतः) परभित्रो को (वृश्च ) काट डाल ! वृद्व = (द्म) है शत्रुविदारक, (मणे) शिरोमणि सेनापति (मे) मेरे

English

Let Vāyu keep thee safe with prayer, and Indra with his mighty power. Let Soma guard thee with the plants, Sūrya protect thee with the stars;

अध्याय १९

श्लोक 27.1

सुरक्षा।१-१५ भृग्वङ्गिराः।त्रिवृत्, चन्द्रमाश्च।अनुष्टुप्, ३, ९ त्रिष्टुप्, १० जगती, ११ आर्ची उष्णिक्, १२ आर्च्यनुष्टुप्, १३ साम्नी त्रिष्टुप् (११-१३ एकावसानाः)।गोभि॑ष्ट्वा पात्वृष॒भो वृषा॑ त्वा पातु वा॒जिभिः॑ ।वा॒युष्त्वा॒ ब्रह्म॑णा पा॒त्विन्द्र॑स्त्वा पात्विन्द्रि॒यैः

surakṣā| 1-15 bhṛgvaṅgirāḥ| trivṛt, candramāśca| anuṣṭup, 3, 9 triṣṭup, 10 jagatī, 11 ārcī uṣṇik, 12 ārcyanuṣṭup, 13 sāmnī triṣṭup (11-13 ekāvasānāḥ)| gobhiṣṭvā pātvṛṣabho vṛṣā tvā pātu vājibhiḥ | vāyuṣtvā brahmaṇā pātvindrastvā pātvindriyaiḥ

हिन्दी अर्थ

(पृतनायतः) सेना द्वारा भाक्रमण चाहनेवालों को (कृन्त) कतर डाल ॥ कतर डाल । (मे) मेरे (द्विषतः) देवी =भ्रमित्रों को (कृन्त) कतर डाल । (दर्मं) है शूविदारक, (मणे) शिरोमणि सेनापति ! (मे) मेरे (सपत्नान्) भरान्तरिक-विद्रोहियों को (पिश) टुकड़-टुकडे कर डाल । (मे)

English

With breath let Wind protect thee, and the Moon, foe-slayer, with the months. Three are the earths, they say, and three the heavens, three are the atmospheres, and four the oceans.

अध्याय १९

श्लोक 27.2

सोम॑स्त्वा पा॒त्वोष॑धीभि॒र्नक्ष॑त्रैः पातु॒ सूर्यः॑ ।मा॒द्भ्यस्त्वा॑ च॒न्द्रो वृ॑त्र॒हा वातः॑ प्रा॒णेन॑ रक्षतु

somastvā pātvoṣadhībhirnakṣatraiḥ pātu sūryaḥ | mādbhyastvā candro vṛtrahā vātaḥ prāṇena rakṣatu

हिन्दी अर्थ

पर (पृतनायतः) सेना द्वारां भाक्रमण चाहनेवालो को (मृण) भाणदण्ड है । (भे) मेरे (सर्वान् ) सब (दुहा) दुष्ट-हादिक भावनाभ्रों वालो को (मृण) (दर्भं) है शतूविंदारक, (मणे) शिरोमणि सेनापति ! तु (मे) मेरे (पृतनायतः) सेना द्वारा भ्राक्रमण चाहनेवालों को (मन्थ) मथ डाल । (मे) डाल । (मे) मेरे (द्विषतः) देषी =भमित्रो को (मन्थ) मथ डाल ।

English

With friendly thoughts the Deities, three-and thirty, and three great Powers preserved it in the Waters.

अध्याय १९

श्लोक 27.3

ति॒स्रो दिव॑स्ति॒स्रः पृ॑थि॒वीस्त्रीण्य॒न्तरि॑क्षाणि च॒तुरः॑ समु॒द्रान्।त्रि॒वृतं॒ स्तोमं॑ त्रि॒वृत॒ आप॑ आहु॒स्तास्त्वा॑ रक्षन्तु त्रि॒वृता॑ त्रि॒वृद्भिः॑

tisro divastisraḥ pṛthivīstrīṇyantarikṣāṇi caturaḥ samudrān| trivṛtaṃ stomaṃ trivṛta āpa āhustāstvā rakṣantu trivṛtā trivṛdbhiḥ

हिन्दी अर्थ

पिण्डि मे सरवौन् दु्हहैः पिण्डि मे द्विषतो मणे ॥६॥ (दर्भ) है शतुविदारक, (मणे) शिरोमणि शेनापति ! तु(मे) मेरे को (पिण्ड्ढि) पीस डाल । (मे) मेरे (द्विषतः) दवेषो =भमिघों को (पिष्टि)

English

He made heroic powers with the gold that lies upon this Moon. O ye eleven Gods who are in heaven, accept this sacrifice. O ye eleven Gods who are in air, accept this sacrifice.

अध्याय १९

श्लोक 27.4

त्रीन्नाकां॒स्त्रीन्त्स॑मु॒द्रांस्त्रीन् ब्र॒ध्नांस्त्रीन् वै॑ष्ट॒पान्।त्रीन् मा॑त॒रिश्व॑न॒स्त्रीन्त्सूर्या॑न् गो॒प्तॄन् क॑ल्पयामि

trīnnākāṃstrīntsamudrāṃstrīn bradhnāṃstrīn vaiṣṭapān| trīn mātariśvanastrīntsūryān goptṝn kalpayāmi

हिन्दी अर्थ

(दभ) है दत्रुविदारकर, (मणे) हिरोमणि सेनापति तु (मे) मेरे पर (पृतनायतः) सेना द्वारा भ्राक्रमण चाहनेवालों को (प्रोष ) भूलसा दे । (मे) मेरे (सर्वान्) सब (दहदः) दुष्ट-हादिक भावनां वालों को (भोष) स्ुलसा दे ॥ (मे) मेरे (द्विषतः) षी = अमित्रो को (भोष) भुलसा दे 1 (दर्भ) ह शत्रुविदारकं, (भणे) शिरोमणि सेनापति ! तु (मे) भेरे पर (पृतनायतः) -सेना द्वारा भ्ाक्रमण चाहनेवालों को (दह) दग्ध कर दे । (मे) मेरे (सर्वान् ) सब (दुरहादंः) दुष्ट-हादिक मावनाों वालों को (दह्)

English

O ye eleven Gods who are on earth, accept this sacrifice.

अध्याय १९

श्लोक 27.5

घृ॒तेन॑ त्वा॒ समु॑क्षा॒म्यग्न॒ आज्ये॑न व॒र्धय॑न्।अ॒ग्नेश्च॒न्द्रस्य॒ सूर्य॑स्य॒ मा प्रा॒णं मा॒यिनो॑ दभन्

ghṛtena tvā samukṣāmyagna ājyena vardhayan| agneścandrasya sūryasya mā prāṇaṃ māyino dabhan

हिन्दी अर्थ

(दर्भ) है शतरुविदारक, (मणे) क्िरोमणि सेनापति ! त्रु (मे) मेरे (पृतनायतः) सेना द्वारा भ्राक्रमण चाहते वालो को (जहि) हनन कर ।( मे) भरे (सर्वान्) सब (दु्हदिः) दुष्ट-हादिक भावनां वालो को (जहि) हनन कर + (मे) मेरे (द्विषतः) षी मितो को (जहि) हनन कर । दृणाति विदारयतीति दर्भः (उणा० ३।१५१) शत्रु के विदारण के कारणं सेनापति को दभ कहा है । दर्भाङ्कुर का अग्रभाग कण्टकमय होता है, जो किपैरका विदारण करदेताहै। दस प्रकार रूपक दुष्टिसे भी सेनापति को "दर्भं" कहा जा सकता है । जपे किं बहादुर को "शेर" तथ निबुद्धिको “गदहा” कह दिया जाता है । मन्व १ ते ४ तक मँ साम-उपायों का वर्णन

English

repeated from XIX. 16. 1, 2. A charm for the destruction of enemies On thee I bind this Amulet for lengthened life and brilliancy.

अध्याय १९

श्लोक 27.6

मा वः॑ प्रा॒णं मा वो॑ऽपा॒नं मा हरो॑ मा॒यिनो॑ दभन्।भ्राज॑न्तो वि॒श्ववे॑दसो दे॒वा दैव्ये॑न धावत

mā vaḥ prāṇaṃ mā vo'pānaṃ mā haro māyino dabhan| bhrājanto viśvavedaso devā daivyena dhāvata

हिन्दी अर्थ

इंआा है, भौर मन्त्र ५ से € तक दण्ड-ढपाय कटे गए द । २६६ भ्रथर्ववेद-भाष्य क(० १९ ॥ पुण ३० १-५ ब्रह्मा । वर्भमणिः देवता । (द्भ) है शत्रुविदारक सेनापति ! (यत्) यत, (ते जरामृत्यु) तेरी मृत्यु जरावस्था मे सम्भव है, गौर (यत्) -यतः (तै) तेरे (वमंसु) कवच

English

The rival-quelling Darbha grass that burns the spirit of a foe. Burning the spirit of the foe, vexing the heart of enemies.

अध्याय १९

श्लोक 27.7

प्रा॒नेना॒ग्निं सं सृ॑जति॒ वातः॑ प्रा॒णेन॑ संहि॑तः ।प्रा॒णेन॑ वि॒श्वतो॑मुखं॒ सुर्यं॑ दे॒वा अ॑जनयन्

prānenāgniṃ saṃ sṛjati vātaḥ prāṇena saṃhitaḥ | prāṇena viśvatomukhaṃ suryaṃ devā ajanayan

हिन्दी अर्थ

है, भतः (तेन) उस कवच आदि द्वारा (इमम्) इस प्रत्येक सनिक को (सपत्नान्) राक्रृभों का (जहि) हनन कर ॥ जरामत्युः== इस पदं के दारा सेनापति को कहा दहै कितु भरभी युवा-

English

Darbha, on every side, like heat, inflame all evil-hearted men. O Darbha, burning round like heat, consuming foes, O Amulet,. Like Indra rending Vala cleave mine adversaries’ hearts in twain.

अध्याय १९

श्लोक 27.8

आयु॑षायुः॒कृतां॑ जी॒वायु॑ष्मान् जीव॒ मा मृ॑थाः ।प्रा॒णेना॑त्म॒न्वतां जीव॒ मा मृ॒त्योरुद॑गा॒ वश॑म्

āyuṣāyuḥkṛtāṃ jīvāyuṣmān jīva mā mṛthāḥ | prāṇenātmanvatāṃ jīva mā mṛtyorudagā vaśam

हिन्दी अर्थ

तमसौ निशे त्वां देवा जरसे भतेवा अदु; ॥२॥ (वर्म) है शत्रुविदारक सेनापति ! (ते) तेरे (शतं वर्माणि) संक्डों प्रकार के कवच भादि हैँ भौर (ते) तेरे (सहम्) हजारों (वीर्याणि ) वीर- २३६. तवामाहदेवमे तवां दंभ अहणस्पतिं् । का०१९ । सुऽ ३० प्रथववेद-माष्य २६७

English

Cleave through. O Darbha, Amulet, my foes’, mine adversaries’. heart. Rise thou and batter down their heads like growth that coverethl the earth.

अध्याय १९

श्लोक 27.9

दे॒वानां॒ निहि॑तं नि॒धिं यमिन्द्रो॒ऽन्ववि॑न्दत् प॒थिभि॑र्देव॒यानैः॑ ।आपो॒ हिर॑ण्यं जुगुपुस्त्रि॒वृद्भि॒स्तास्त्वा॑ रक्षन्तु त्रि॒वृता॑ त्रि॒वृद्भिः॑

devānāṃ nihitaṃ nidhiṃ yamindro'nvavindat pathibhirdevayānaiḥ | āpo hiraṇyaṃ jugupustrivṛdbhistāstvā rakṣantu trivṛtā trivṛdbhiḥ

हिन्दी अर्थ

देववमं = विदासौ वै देवाः + तथा मातृदेव,- पितृदेव, आचा्येदेव, हिरण्यसदुश चमकीला या बहुमूल्य वीर्य-विन्दु (भरजायत ) पदा हवा, २६८ भ्रथवेवेद-माष्य का० १९1 सु०३१

English

Cleave thou my rivals, Darbha, cleave the men who fain would, fight with me. Cleave all who wish me evil, cleave the men who hate me,. Amulet!

अध्याय १९

श्लोक 27.10

त्रय॑स्त्रिंशद् दे॒वता॒स्त्रीणि॑ च वी॒र्याऽणि प्रिया॒यमा॑णा जुगुपुर॒प्स्व॑१न्तः ।अ॒स्मिंश्च॒न्द्रे अधि॒ यद्धिर॑ण्यं॒ तेना॒यं कृ॑णवद् वी॒र्या॑णि

trayastriṃśad devatāstrīṇi ca vīryā'ṇi priyāyamāṇā jugupurapsva1ntaḥ | asmiṃścandre adhi yaddhiraṇyaṃ tenāyaṃ kṛṇavad vīryāṇi

हिन्दी अर्थ

२६२ प्रथवंवेद-माष्य का० १९॥। सु०२९ भरे राष्ट् पर (पृतनायतः) सेना हारा भाक्रमण चाहनेवालों को (पिष) टुकडे-टुकड़े कर डाल । (भे) मेरे (सर्वान्) सब (दुरहादः) दुष्ट-हादिक आवना्भोवालो को (पिक) दुकड़े-टुकड कर डाल । (मे) मेरे (द्विषतः) षी अमित्रो को (विश) दुकड़-ट्कड़ं कर डाल । पिश =पिच् श्रवयवे।

English

Threefold the hymn of praise, threefold the Waters. Let these with triple song and triplets guard thee.

अध्याय १९

श्लोक 27.11

ये दे॑वा दि॒व्येका॑दश॒ स्थ ते दे॑वासो ह॒विरि॒दं जु॑षध्वम्

ye devā divyekādaśa stha te devāso haviridaṃ juṣadhvam

हिन्दी अर्थ

(दर्म) है शत्रुविदारक, (मणे) शिरोमणि सेनापति ! (मे) मेरे पर (पृतनायतः) सेना द्वारा भाक्रमण चाहनेवालों को (विध्य) वेध को (विष्य) वेध डाल । (मे) मेरे (द्विषतः) दंषी =भमितरों को (विष्य)

English

Three vaults of heaven, and three seas, three bright, three stationary ones, Three Mātarisvans, and three suns, protectors, I arrange for thee. Increasing thee with butter I, Agni! with fatness sprinkle thee.

अध्याय १९

श्लोक 27.12

ये दे॑वा अ॒न्तरि॑क्ष॒ एका॑दश॒ स्थ ते दे॑वासो ह॒विरि॒दं जु॑षध्वम्

ye devā antarikṣa ekādaśa stha te devāso haviridaṃ juṣadhvam

हिन्दी अर्थ

(दर्म) है शत्रुविदारक, (मणे) शिरोमणि सेनापति ! (मे) मेरे -कर । निक्ष =-निक्ष चुम्बने । दात्र को भरपने भनुकूलं करने फे चार उपाष का० १९ । सु २९ भरथर्वेवेद-माष्य २६३ पत्थर निन शक्ति द्वारा लोहे का भराकर्षण करता है, वैसे राजा उदासीन

English

Let not magicians harm the life of Agni or of Moon or Sun. Let not magicians mar your heat, your vital or diffusive breath.

अध्याय १९

श्लोक 27.13

ये दे॑वा पृथि॒व्यामेका॑दश॒ स्थ ते दे॑वासो ह॒विरि॒दं जु॑षध्वम्

ye devā pṛthivyāmekādaśa stha te devāso haviridaṃ juṣadhvam

हिन्दी अर्थ

से पूवं- साम दान भौर भेद उपायों का भ्रवलम्ब करना श्रेयस्कर है। (दर्भं) है शशरुविदारक, (मणे) शिरोमणि सेनापति ! -(मे) यरे भ्रनादर किया कर । (मे) मेरे (सर्वान्) सब (दुहदिः) दृष्ट-हादिक भाव-

English

Brilliant and all-possessing Gods, run ye your course with God- like power. Fire they endow with vital breath, Wind is compact, with vital breath: With vital breath the Gods produced the Sun whose face turn every way.

अध्याय १९

श्लोक 27.14

अ॒स॒प॒त्नं पु॒रस्ता॑त् प॒श्चान्नो॒ अभ॑यं कृतम्।स॒वि॒ता मा॑ दक्षिण॒त उ॑त्त॒रान्मा॒ शची॒पतिः॑

asapatnaṃ purastāt paścānno abhayaṃ kṛtam| savitā mā dakṣiṇata uttarānmā śacīpatiḥ

हिन्दी अर्थ

मित्रों का (तद्दि) तू अनादर किया कर! उपाय की प्रावह्यकता भ इन की हिसा कर । (दभ) है शध्रुविदारक, (मणे) शिरोमणि सेनापति ! (मे) भरे धर घेरा डाल । ( मे) मेरे राष्ट् पर ( पृतनायतः) सेना द्वारा भाक्रमण

English

Live with the Life-Creators’ life. Die not, live on to lengthened age. Live with the breath of men with souls. Submit not to the power of Death.

अध्याय १९

श्लोक 27.15

दि॒वो मा॑दि॒त्या र॑क्षन्तु॒ भूम्या॑ रक्षन्त्व॒ग्नयः॑ ।इ॒न्द्रा॒ग्नी र॑क्षतां मा पु॒रस्ता॑द॒श्विना॑व॒भितः॒ शर्म॑ यच्छताम्।ति॒र॒श्चीन॒घ्न्या र॑क्षतु जा॒तवे॑दा भूत॒कृतो॑ मे स॒र्वतः॑ सन्तु॒ वर्म॑

divo mādityā rakṣantu bhūmyā rakṣantvagnayaḥ | indrāgnī rakṣatāṃ mā purastādaśvināvabhitaḥ śarma yacchatām| tiraścīnaghnyā rakṣatu jātavedā bhūtakṛto me sarvataḥ santu varma

हिन्दी अर्थ

२६४ भथर्वंवेद-माघ्य का० १६॥ सु° २९ को रोकदेनाहोताहै। यह् भी एक प्रकारका साम उपायै, ग्र उपाय नहीं । घेरा डालने को “भ्रवरोध तथा उपरोध” कहते है । (दभ) है शुविदारक, (मणे) शिरोमणि सेनापति ! तू (भे) मेरे

English

The secret treasure of the Gods which Indra, by pathways travelled by the Gods, discovered, That gold the Waters with the triplets guarded. May they keep thee with threebold hymn and triplets.

अध्याय १९

श्लोक 28.1

दर्भमणिः।१-१० ब्रह्मा (सपत्नक्षयकामः)।दर्भमणिः. मन्त्रोक्ताश्च।अनुष्टुप्।इ॒मं ब॑ध्नामि ते म॒णिं दी॑र्घायु॒त्वाय॒ तेज॑से ।द॒र्भं स॑पत्न॒दम्भ॑नं द्विष॒तस्तप॑नं हृ॒दः

darbhamaṇiḥ| 1-10 brahmā (sapatnakṣayakāmaḥ)| darbhamaṇiḥ. mantroktāśca| anuṣṭup| imaṃ badhnāmi te maṇiṃ dīrghāyutvāya tejase | darbhaṃ sapatnadambhanaṃ dviṣatastapanaṃ hṛdaḥ

हिन्दी अर्थ

१-१४ सविता (पुष्टिकामः) । प्रौदुम्बरमणिः । २६६. ओदम्बरेण मणिना पूुष्टिकामाय वेधसां । उदुम्बर आदि वृक्षो के अधिपति ( भणिना ) राज्यरत्नङूपी वनाधिपति स्पते” ! दवारा सम्बोधित किया है । वनस्पतिः वनस्य पाता वा पाल. यिता, भर्थात् वनो का रक्षक तथा पालक । इते टी ३१।११ भै “प्रामणीः"

English

Wound thou, my rivals, Darbha, etc. (as in 5, substituting. ‘wound’ for cleave.)

अध्याय १९

श्लोक 28.2

द्वि॒ष॒तस्ता॒पय॑न् हृ॒दः शत्रू॑णां ता॒पय॒न् मनः॑ ।दु॒र्हार्दः॒ सर्वां॒स्त्वं द॑र्भ घ॒र्म इ॑वा॒भिन्त्संता॒पय॑न्

dviṣatastāpayan hṛdaḥ śatrūṇāṃ tāpayan manaḥ | durhārdaḥ sarvāṃstvaṃ darbha gharma ivābhintsaṃtāpayan

हिन्दी अर्थ

९३८. करीषिणीं फलवतीं खधाभिरा च नो गृहे । ढारा (नः) हमारे (गृहे) घरों मे (करीषिणीम्) गोबर देनेवाली गौ को, करनेवाले भ्रन्न को, (च इराम्) भ्रौर जल को (दघातु) धारित करे करीष = गोबर 1 लेपने जलने भौर खाद मे गोबर उपयोगी है ।

English

Pierce thou my rivals, Darbha, pierce the men who fain would fight with me. Pierce those who wish me evil, pierce the men who hate me,

अध्याय १९

श्लोक 28.3

घ॒र्म इ॑वाभि॒तप॑न् दर्भ द्विष॒तो नि॒तप॑न् मणे ।हृ॒दः स॒पत्ना॑नां भि॒न्द्धीन्द्र॑ इव विरु॒जं ब॒लम्

gharma ivābhitapan darbha dviṣato nitapan maṇe | hṛdaḥ sapatnānāṃ bhinddhīndra iva virujaṃ balam

हिन्दी अर्थ

लो विविध भ्रन्न हँ (ये) जो (€ रसाः) दूष तथा दक्षुरस भादिरहै, (भौव की (भ्रमानम्) बहुतायत को (गृह्भ) ग्रहण करता हूं । जन परन्नादि द्वारा ठसका भरण-पोषण करे । बिभ्रत कर्मंविशेषण है

English

Amulet! A charm for the destruction of enemies, continued from 28 Pierce thou my rivals, Darbha, pierce the men who fain would fight with me.

अध्याय १९

श्लोक 28.4

भि॒न्द्धि द॑र्भ स॒पत्ना॑नां॒ हृद॑यः द्विष॒तां म॑णे ।उ॒द्यन्त्वच॑मिव॒ भूम्याः॒ शिर॑ ए॒षा वि पा॑तय

bhinddhi darbha sapatnānāṃ hṛdayaḥ dviṣatāṃ maṇe | udyantvacamiva bhūmyāḥ śira eṣā vi pātaya

हिन्दी अर्थ

२७ ९ भयवंवेद-भाष्य का० १९1 सुर ३१ मु परतयेक प्रजालेनं लिंथे (पशूनां पयः) पदुप्रों का दूष, भौर ( भोषधी- पयःन्=पद्यु्रों का दूध लेना चाहिए न कि मासि । रोगनिवृत्ति तथा भ्रधिपति (भरसानि) होऊ (पृष्टपतिः) पोषक वस्तु््रो का स्वाभी ( मयि)

English

Pierce all who wish me evil, pierce the men who hate me,. Amulet!

अध्याय १९

श्लोक 28.5

भि॒न्द्धि द॑र्भ स॒पत्ना॑न्मे भि॒न्द्धि मे॑ पृतनाय॒तः ।भि॒न्द्धि मे॒ सर्वान् दु॒र्हार्दो॑ भि॒न्द्धि मे॑ द्विष॒तो म॑णे

bhinddhi darbha sapatnānme bhinddhi me pṛtanāyataḥ | bhinddhi me sarvān durhārdo bhinddhi me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

(रजय) राष्ट के प्रजाजनों के साथ; (च) भौर ( घनेन) रष्टरकी का० १९।सू० ३१ भयववेद-माष्य २७१ प्रवानमन्ती की सहायतां जते वनाधिपति को नियुक्त किया दहै, वैसे राष्ट

English

Split thou my rivals, Darbha, etc. (as in 1, with ‘split’ for ‘pierce’ throughout). Check thou, etc.

अध्याय १९

श्लोक 28.6

छि॒न्द्धि द॑र्भ स॒पत्ना॑न् मे छि॒न्द्धि मे॑ पृतनाय॒तः ।छि॒न्द्धि मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ छि॒न्द्धि मे॑ द्विष॒तो म॑णे

chinddhi darbha sapatnān me chinddhi me pṛtanāyataḥ | chinddhi me sarvān durhārdo chinddhi me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

२४३. देवो मणि! संपलदहा धनंसा धनसातये । (देवः) दिव्यगुणी (मणिः) राज्यरत्न वनाचधिपति (सपत्नहा) वन- विरोधी शक्तियों का हनन करदा है इस प्रकार (धनसातये) धन प्रदान करनेवाले प्रजाजन के लिये. (वनसाः) वह वन्यघन प्रदान् करता है । वह गाकपुणि भ्राचायं कहते ह कि वनस्पति है अग्नि (निद०८।३।१८.) । परन्तु यास्काचायं वनस्पति का भं करते है-"बनानां पाता वा पालयिता वा" के भर्थं के भनुकूल है । मंत्रायणी संहिता ४। १३७ में “वनस्पते -““ ---गयु-

English

Crush thou, etc. Shake thou, etc.

अध्याय १९

श्लोक 28.7

वृ॒श्च द॑र्भ स॒पत्ना॑न्मे वृ॒श्च मे॑ पृतनाय॒तः ।वृ॒श्च मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ वृ॒श्च मे॑ द्विष॒तो म॑णे

vṛśca darbha sapatnānme vṛśca me pṛtanāyataḥ | vṛśca me sarvān durhārdo vṛśca me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

२७२ अथर्ववेद-माष्य का० १६९ । सु०३१ पुष्ट्या सह वनाधिपति भावि प्रधिकारी नियुक्त होते ही, यदि निल सिनीवली = सिनमभ्नं तद्वती ; वाली = वारणकरत्र । निवारणकर्षी,

English

Bruise thou, etc. Burn thou, etc. Consume, etc.

अध्याय १९

श्लोक 28.8

कृ॒न्त द॑र्भ स॒पत्ना॑न् मे कृ॒न्त मे॑ पृतनाय॒तः ।कृ॒न्त मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ कृ॒न्त मे॑ द्विष॒तो म॑णे

kṛnta darbha sapatnān me kṛnta me pṛtanāyataḥ | kṛnta me sarvān durhārdo kṛnta me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

भरत्यय । सिनीवाली देवपत्नी (नि ९० ११।३।३१) भतः सिनीवाली = पति- देव की पत्नी, गृहपत्नी । वनों का भिपति,जौर (वृषा) वन्य सम्पत्तियों की वर्षा करनेवाला (भसि) किया है। (त्वयि) तेरे भरधिकार मे (वाजाः) परनन भौर (सर्वा) सब (्रारात्) दूर के, (हस्व) भौर विरोधी शक्तियो को पराभूत कर ।

English

Slay thou my rivals. Darbha, slay the men who fain would fight with me. Slay all who wish me evil, slay the men who hate me, Amulet.

अध्याय १९

श्लोक 28.9

पिं॒श द॑र्भ स॒पत्ना॑न्मे पिं॒श मे॑ पृतनाय॒तः ।पिं॒श मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ पिं॒श मे॑ द्विष॒तो म॑णे

piṃśa darbha sapatnānme piṃśa me pṛtanāyataḥ | piṃśa me sarvān durhārdo piṃśa me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

का० १९. 1 सु° ३१ भ्रथववेद-माष्य २७३ जाता है । बुभुक्षितः कि न करोति पापम्! सीच दे, मूक पर अन्नो की वर्षा कर । (तेजः भसि) तु तेजस्वी है, (मयि) मूकरमे तू (तेजः) तेज (श्रधि धारय) स्थापित कर । (रयिः भसि) तू

English

A protective charm accompanying investiture with an amulet of Darbha grass Darbha, with that good shield of thine, of hundred guards tilt death in eld, Arm thou this man, and with thy might strike thou his adver- saries down.

अध्याय १९

श्लोक 28.10

विध्य॑ दर्भ स॒पत्ना॑न् मे॒ विध्य॑ मे पृतनाय॒तः ।विध्य॑ मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ विध्य॑ मे द्विष॒तो म॑णे

vidhya darbha sapatnān me vidhya me pṛtanāyataḥ | vidhya me sarvān durhārdo vidhya me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

के सदृश रक्षक, शौर (पदूनाम्) पशुओं का (भरषिपाः ) भधिपालक (भसत्) (पुष्टा) पुष्टि के साथ (खं सुजतु) संसं करे,सम्बन्ध करे । नेता है, इसलिये इसे ग्रामणी भी कहा है ( भयं ० १।३१।१२) । अर्थात् प्रामसमार्भो का मेता, नायक ।

English

Tear thou my rivals, Darbha, etc. How thou my rivals, Darbha, etc. Carve thou my rivals, Darbha, etc.

अध्याय १९

श्लोक 29.1

दर्भमणिः।१-९ ब्रह्मा।दर्भमाणिः।अनुष्टुप्।निक्ष॑ दर्भ स॒पत्ना॑न् मे॒ निक्ष॑ मे पृतनाय॒तः ।निक्ष॑ मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ निक्ष॑ मे द्विष॒तो म॑णे

darbhamaṇiḥ| 1-9 brahmā| darbhamāṇiḥ| anuṣṭup| nikṣa darbha sapatnān me nikṣa me pṛtanāyataḥ | nikṣa me sarvān durhārdo nikṣa me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

को प्धिक्रार सौपते समय उसका श्रभिषेक होना चाहिए । वच॑सा = भरन्नेन है । प्रामाधिपति होने से वनाधिपति “गार्हुपत्य“मी हैगृहपतियों का शासक २७४ छथर्ववेद-माष्य का० १९ । सुर ३२ पालक (कृणु) केर दे । (त्वम्) तु (भरौदुम्बरः) वनाधिपति है (सः) वह तू

English

Darbha, thou hast a hundred shields, thou hast a thousand. manly powers. All Gods have given thee to him to bear thee till extreme old age.

अध्याय १९

श्लोक 29.2

तृ॒न्द्धि द॑र्भ स॒पत्ना॑न् मे तृ॒न्द्धि मे॑ पृतनाय॒तः ।तृ॒न्द्धि मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्द॑तृ॒न्द्धि मे॑ द्विष॒तो म॑णे

tṛnddhi darbha sapatnān me tṛnddhi me pṛtanāyataḥ | tṛnddhi me sarvān durhārdatṛnddhi me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

(घेहि) स्थापित कर । (च) गौर (नः) हमे (सर्ववीरम्) सबकोवीर (रायस्पोषाय) राष्ट की सम्पत्तियों के परिपोषण के लियेहे वनाधिपति ! है । (सः) वह् वनाधिपति (नः) हमारे (सनिम्) घन-विभाजन को (मघु-

English

They call thee, ‘Darbha, shield of Gods, they call the Brāhmanas- pati. They call thee shield of Indra: thou protectest kingdoms from attack. 253

अध्याय १९

श्लोक 29.3

रु॒न्द्धि द॑र्भ स॒पत्ना॑न् मे रु॒न्द्धि मे॑ पृतनाय॒तः ।रु॒न्द्धि मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ रु॒न्द्धि मे॑ द्विष॒तो म॑णे

runddhi darbha sapatnān me runddhi me pṛtanāyataḥ | runddhi me sarvān durhārdo runddhi me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

(नि यच्छात्) देवे, जिससे कि (सवंवीरम्) हम सब वीर बन जाय । २५०. शतकाण्डो दुश्च्यवनः सहद॑पणे उत्तिरः । (शतकाण्डः) सैकड़ों दवारा कमनीय अर्थात् चाहा गया, (दुष्यवनः) न्यायपय से च्यत न होनेवाला या ध्रपराभवनीय, (सहस्रपणंः) हजारो का परिपालकः, (उत्तिरः) क्लेशो से तैरातेवाला (यः) जो (उग्रः भोषधिः) उग्र तेरे (भ्रायुषे) जीवन के लिथे (बध्नामि) तेरे साथ यै दुद् बद्धकरता हं ।

English

Darbha, destroyer of the foe, vexing the hearts of enemies, An Amulet that strengthens rule I make thee, and the body’s. guard.

अध्याय १९

श्लोक 29.4

मृ॒ण द॑र्भ स॒पत्ना॑न् मे मृ॒ण मे॑ पृतनाय॒तः ।मृ॒ण मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ मृ॒ण मे॑ द्विष॒तो म॑णे

mṛṇa darbha sapatnān me mṛṇa me pṛtanāyataḥ | mṛṇa me sarvān durhārdo mṛṇa me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

का० १९1 सु० ३२ भयवंवेद-भाष्य २७५ वोषं धयतीति वा (निरु० । ३। २७) । परमेदवर भ्रविद्यादि रोगों का भरोषघहूप है, उग्र भौषघरूप है 1 २५१, नाख केशान् प्र वपन्ति नोरसि ताडमा कते ।

English

What time Parjanya roared to it with lightning flashes in the sea, Thence came the drop, the golden drop, thence Darbha into being sprang. A charm to ensure general prosperity, accompanying self-investiture with an amulet of

अध्याय १९

श्लोक 29.5

मन्थ॑ दर्भ स॒पत्ना॑न् मे॒ मन्थ॑ मे पृतनाय॒तः ।मन्थ॑ मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॒ मन्थ॑ मे द्विष॒तो म॑णे

mantha darbha sapatnān me mantha me pṛtanāyataḥ | mantha me sarvān durhārdo mantha me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

(अस्य) इसके केशान्) केशो को (प्र वपन्ति न) कोद उखाइते नहीं, (न) भ्रौरन (उरसि) इसकी छाती पर (ताडम् ) ताडना भर्थात् चोट (शमं) सुख गौर भ्राश्रय (यच्छति) प्रदान करता है । त्वया सद्काण्डेनायुः प्र ब॑धेयामेहे ॥३॥। (भोषघे ) ताप-सन्तान तथा सरमग्रदोषो के शोषधिरूप है परमेदवर ।

English

Udumbara Savitar make all cattle grow and prosper in my stable with.

अध्याय १९

श्लोक 29.6

पि॒ण्ड्ढि द॑र्भ स॒पत्ना॑न् मे पि॒ण्ड्ढि मे॑ पृतनाय॒तः ।पि॒ण्ड्ढि मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ पि॒ण्ड्ढि मे॑ द्विष॒तो म॑णे

piṇḍḍhi darbha sapatnān me piṇḍḍhi me pṛtanāyataḥ | piṇḍḍhi me sarvān durhārdo piṇḍḍhi me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

नक्षत्र तथा तारागण नौर सूर्यं आपके ररह, इनमें भ्राप निवास किये हये है । तथा “योऽसावावित्ये पुरुषः सोऽसावहम. । भोम. खं ब्रह्म" १. वेद मेँ “पणं” शाब्द पु ल्लिङ्गं भी पठित है ( अथव इ३।४।४, ८; तथा परमेदवर । आयुः जीवनकाल तथा जीवन । तुलम् = तुल निष्कषं, निष्कषं

English

Amulet of Udumbara, helper of him who longs for wealth! May he who was our Household Fire, the ruler of our cattle, strong. Amulet of Udumbara endow us with prosperity.

अध्याय १९

श्लोक 29.7

ओष॑ दर्भ स॒पत्ना॑न् मे॒ ओष॑ मे पृतनाय॒तः ।ओष॑ मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ ओष॑ मे द्विष॒तो म॑णे

oṣa darbha sapatnān me oṣa me pṛtanāyataḥ | oṣa me sarvān durhārdo oṣa me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

परमेश्वर प्रलय में (तिस्रः) तीन (दिवः) चुलोकों को (उत) ओौरं (इमाः) इन (तिन्नः) तीन (पृथिवी!) पृथिवियों को (भतुणत्) विनष्ट कर देता । है परमेदवर ! (त्वया) भ्राप की सहायता द्वारा (अहम्) मै भर्थात् (वचांसि) हुव चनो को (तृणद्मि) समाप्त कर देता हूं, उन दुरव॑चनों जाती है किं उसके निन्दक मी उसके प्रशंसक हो जति हैउन कौ जिह्वाकी कटुता मधुरूप मेँ परिणत हो जाती है । तिलः दिवः, तिरः पुथिवीः=देवो- प्रथं ० काण्ड १६।सु०२७। मन्त्र ३। उभौ सदहंखन्तौ भूत्वा सपलान्त्सदिषीवहि ॥५॥।

English

By power of the Udumbara Charm may Dhātar give me plenty, rich. In the kine’s droppings and in fruit, and, in our dwelling, food, and drink.

अध्याय १९

श्लोक 29.8

दह॑ दर्भ स॒पत्ना॑न् मे॒ दह॑ मे पृतनाय॒तः ।दह॑ मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॒ दह॑ मे द्विष॒तो म॑णे

daha darbha sapatnān me daha me pṛtanāyataḥ | daha me sarvān durhārdo daha me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

है दोषों के भ्रोषधिरूप परमेइवर 1 (त्वम्) श्राप (सहमानः) सहन- शील होते हृए कामादि दातुप्रों का पराभव करनेवाले है, (्रहम् ) पेभी (सहस्वान् ) सहनक्षील होता हुमा कामादि शत्रुं का पराभव करनेवाला (भ्रस्मि) हृं । (उभौ ) हम दोनों (सहस्वन्तौ) सहनशील तथा पराभव करने वाले (भुत्वा ) होकर (सपत्नान्) कामादि शत्रो का (सहिषीवहि ) पराभवं पराभव के लिते यत्नवान् होता है, तो परमेदवर भी इस प्रयत्न भें उसका सहायक होता है । सहमानः षह मषणे। का०१९ । सू० २३२ प्रयवेवेद-माष्य २७७

English

I win great plenty, while I wear the Amulet of Udumbara. Of quadrupeds and bipeds, of juices and food of every sort. I have obtained abundant wealth of cattle, bipeds and quad- rupeds, and corn in plenty.

अध्याय १९

श्लोक 29.9

ज॒हि द॑र्भ स॒पत्ना॑न् मे ज॒हि मे॑ पृतनाय॒तः ।ज॒हि मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ ज॒हि मे॑ द्विष॒तो म॑णे

jahi darbha sapatnān me jahi me pṛtanāyataḥ | jahi me sarvān durhārdo jahi me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

सद॑ सवोन् दुहीहैः सृदादौ मे बहन् षि ॥६॥ भअभिमनमावनाभों का (स्स्व) पराभव कीजिये 1 (पृतनायतः) कामादि, जो कि भ्रपने वर्गोके साथ सेनारूपमें हम पर आक्रमण करते है, उनका (सहस्व) पराभव कीलिये । (मे) मेरे (दुहः) कुत्सित हदयस्थभावों का २५६. दमेण देवजतिन दिनि दम्भेन शरश्वदित् । ( देवजातेन) देवकोटि के उपासको द्वारा प्रकट हए, साक्षात् किये गये (दिवि) दयूलोक मे (स्तम्भेन) तारागण को थामनेवाले (तेन) उस (दर्भेण)

English

Savitar and Brihaspati vouchsafe me the milk of kine and herbs’ refreshing juices! Fain would I be the lord of herds of cattle: may he who rules o’er riches send me riches!

अध्याय १९

श्लोक 30.1

दर्भमणिः।१-५ ब्रह्मा।दर्भमणिः।अनुष्टुप्।यत् ते॑ दर्भ ज॒रामृ॑त्युः श॒तं वर्म॑सु॒ वर्म॑ ते ।तेने॒मं व॒र्मिणं॑ कृ॒त्वा स॒पत्नां॑ जहि वी॒र्यैः

darbhamaṇiḥ| 1-5 brahmā| darbhamaṇiḥ| anuṣṭup| yat te darbha jarāmṛtyuḥ śataṃ varmasu varma te | tenemaṃ varmiṇaṃ kṛtvā sapatnāṃ jahi vīryaiḥ

हिन्दी अर्थ

(असनम्) परामव प्रदान किया है, (च) भौर (सनवानि ) परमेदवर फी छपा सरम भ्रागे भी पराभव प्रदान करता रहं । जनान् यथा “पञ्च यस्म च कामयामहे स्रस्मै च विपद्यते ॥८॥ कामयामहे ) जिसकी हम कामना करते है, उसके भरति (च) भौर (स्वं

English

May the Udumbara Amulet vouchsafe possessions unto me. To me with wealth and children come the Amulet of Udumbara. With splendour come the Amulet hastened by Indra on its way!

अध्याय १९

श्लोक 30.2

श॒तं ते॑ दर्भ॒ वर्मा॑णि स॒हस्रं॑ वी॒र्या॑णि ते ।तम॒स्मै विश्वे॒ त्वां दे॒वा ज॒रसे॒ भर्त॒वा अ॑दुः

śataṃ te darbha varmāṇi sahasraṃ vīryāṇi te | tamasmai viśve tvāṃ devā jarase bhartavā aduḥ

हिन्दी अर्थ

नाता है । “भ्रयः स्वामिवेश्ययोः(अष्टा०३।१।१०३)। २७८ क्रथवैवेद-भाष्य. काऽ १९।स्०३९ यं बिभ्रतं ननु पाप्मा विवेद स नोऽयं दर्मो वरणो दिवा कः ।९॥ (जायमानः) प्रकट होते हुए (यः) जिसने (पृथिवीम्) पुथिवीः को

English

Divine, foe-quelling Amulet, wealth-winner for the gain of wealth— May it give store of beasts and food and cause our kine to multiply.

अध्याय १९

श्लोक 30.3

त्वामा॑हुर्देव॒वर्म॒ त्वां द॑र्भ॒ ब्रह्म॑ण॒स्पति॑म्।त्वामिन्द्र॑स्याहु॒र्वर्म॒ त्वं रा॒ष्ट्राणि॑ रक्षसि

tvāmāhurdevavarma tvāṃ darbha brahmaṇaspatim| tvāmindrasyāhurvarma tvaṃ rāṣṭrāṇi rakṣasi

हिन्दी अर्थ

द्वारक परमेश्वर को (पाप्मा) पाप या पापी ने (नु) निश्चय ते (न) नहीं (विवेद) जाना, (सः) वह (भयम्) यह ( वरुणः) वरूण नामवाला करता है। इस वर्णन से निदचय होता है कि“दभं "कुशा घास नहीं। सायणा- हतु-=यथा-- “येन च्यौरण्रा पुथिवौ च दृढा ' (यजु ° ३२।६) । वंरुणः = यहं परमेदवर का नाम है, कुशाघास नहीं । देखो--वरुण सूक्त ( प्रथं ० ४।१६। १--९) । दिवायह वरूण ही ज्ञानप्रकाश करता है, कुशा चास नहीं । यं बिभ्रतम् =भथवा जिसे धारण करनेवलि को पाप स्पशं नहीं करता । दिवा=प्रकाशम् (सायण)

English

As thou, O Forest Tree, wast born with increase when thy life began, So let Sarasvati bestow abundant growth of wealth on me. Sarasvati vouchsafe me wealth, household prosperity, and corn!

अध्याय १९

श्लोक 30.4

स॒प॒त्न॒क्षय॑णं दर्भ द्विष॒तस्तप॑नं हृ॒दः ।म॒णिं क्ष॒त्रस्य॒ वर्ध॑नं तनू॒पानं॑ कृणोमि ते

sapatnakṣayaṇaṃ darbha dviṣatastapanaṃ hṛdaḥ | maṇiṃ kṣatrasya vardhanaṃ tanūpānaṃ kṛṇomi te

हिन्दी अर्थ

२५९. सपहा शतकाण्डः सदानोष॑धीनां प्रथमः सं बभूव । (सपत्नहा) कामादि शत्रुभों का हनन करनेवाला, (शतकाण्डः) बाधाभ्रों का पराभव करनेवाला, (जोषधोनाम्) भध्यात्मरोगों के निवारण करनेवाले उपायों मँ (प्रथमः) सवे श्रेष्ठ उपाय (संबभूव) परमेश्वर हा है । (खः) वह॒ (बयम्) यह (दभः) भविद्यादि का विदारक परमेश्वर (नः) हमारी (विष्वतः) सब प्रकार से (परि पातु) पू्णेतया रक्षा करे । (तेन) उसकी सहायता द्वारा (पृतन्यतः) सेनाभ्रो हारा भाक्रमण चाहने कामादि के उहीपक कामादि कीसेनषए है -

English

Let Sinivāli bring them, and this Amulet of Udumbara. The Lord of amulets art thou, most mighty: in thee wealth’s ruler hath engendered riches,

अध्याय १९

श्लोक 30.5

यत् स॑मु॒द्रो अ॒भ्यक्र॑न्दत् प॒र्जन्यो॑ वि॒द्युता॑ स॒ह।ततो॑ हिर॒ण्ययो॑ बि॒न्दुस्ततो॑ द॒र्भो अ॑जायत

yat samudro abhyakrandat parjanyo vidyutā saha| tato hiraṇyayo bindustato darbho ajāyata

हिन्दी अर्थ

का० १९ । सु० ३३ भय्वंवेद-माष्य २७१ २६०. य॒हुसराषेः श॒तकांण्डः पयंखानपामभिर्वीरषा राजघय॑म् । स॒ मोऽयं दुर्भ; परं पातु विश्वतो देवो मगिरायुंषा स॑ घंजाति नः। १ रूप ( सः भ्रयम् ) यह वह (दर्भः) अविद्यादिविदारक परमेदवर (नः) हमारी (विष्वतः) सब भ्रोर से (परि पातु) परिपालना करे 1 (देवः मणि)

English

These gains are lodged in thee, and all great treasures. Amulet, conquer thou: far from us banish malignity and indigence, and hunger. Vigour art thou, in me do thou plant vigour: riches art thou, so do thou grant me riches.

अध्याय १९

श्लोक 31.1

औदुम्बरमणिः।१-१४ सविता (पुष्टिकामः)।औदुम्बरमणिः।अनुष्टुप्, ५, १२ त्रिष्टुप्, ६ विराट् प्रस्तारपङ्क्तिः, ११ , १३ पञ्चपदा शक्वरी, १४ विराडास्तारपङ्क्तिः।औदु॑म्बरेण म॒णिना॒ पुष्टि॑कामाय वे॒धसा ।प॒शूणां॒ सर्वे॑षां स्फा॒तिं गो॒ष्ठे मे॑ सवि॒ता क॑रत्

audumbaramaṇiḥ| 1-14 savitā (puṣṭikāmaḥ)| audumbaramaṇiḥ| anuṣṭup, 5, 12 triṣṭup, 6 virāṭ prastārapaṅktiḥ, 11 , 13 pañcapadā śakvarī, 14 virāḍāstārapaṅktiḥ| audumbareṇa maṇinā puṣṭikāmāya vedhasā | paśūṇāṃ sarveṣāṃ sphātiṃ goṣṭhe me savitā karat

हिन्दी अर्थ

बाली यज्ियाग्नि कै सदुश सुखदायी, (मधुमान्) मधुभरे छन्ते के ५ परास्त करनेवाले, (सपत्नान्) कामादि शुभो को (नुदन्) घकेलते हए, २८० भथरवंवेद-माष्य का० १९ । सु° ३३ हे परभेदवर ! (त्वम्) प्राप (गोजसा) निज भोज के कारण (भूमिम्

English

Plenty art thou, so prosper me with plenty: House-holder, hear” a householder’s petition. Amulet of Udumbara, enrich us: vouchsafe us wealth with all good men about us. I bind thee

अध्याय १९

श्लोक 31.2

यो नो॑ अ॒ग्निर्गार्ह॑पत्यः पशू॒नाम॑धि॒पा अस॑त्।औदु॑म्बरो॒ वृषा॑ म॒णिः सं मा॑ सृजतु पु॒ष्ट्या

yo no agnirgārhapatyaḥ paśūnāmadhipā asat| audumbaro vṛṣā maṇiḥ saṃ mā sṛjatu puṣṭyā

हिन्दी अर्थ

ग्धं को निस्तेज ओौर भरस करती दहै। इसी प्रकार इस भरौषधके रोगकीटाणुओं (= कृभियो )के लिये देखो --भ्रथवं० कां २, सू० ३१, ३२; तथा कां° ५। सू° २३। विनक्तु = विचिर् पृथग्भावे! भाविक (नादम्) सर-खर ध्वनि को (भ्ररसम्)रसरदित कर दे, सुखा दे; (सप्त ) शिरोगतं सात छिद्रों से (विन्लसः) बहनेवाजञ -दुरगन्धित रस (भररसाः) सूख जायें । (इव ) जंसे (भस्ता) धनुर्षारी (इषुम्) बाण को दूर फकता है, वैसे तु (इतः) इस व्यक्ति से (अमतिम्) मति कै भ्रमाव या कुमति को (भ्रप शातय) दुर फक दे । का० १९ । सु° ३४ परथवेवेद-भाष्य २८३

English

Thou art victorious in thy might I am endowed with conquering strength:

अध्याय १९

श्लोक 31.3

क॒री॒षिणीं॒ फल॑वतीं स्व॒धामिरां॑ च नो गृ॒हे।औदु॑म्बरस्य॒ तेज॑सा धा॒ता पु॒ष्टिं द॑धातु मे

karīṣiṇīṃ phalavatīṃ svadhāmirāṃ ca no gṛhe| audumbarasya tejasā dhātā puṣṭiṃ dadhātu me

हिन्दी अर्थ

जङ्जिंड के सेवन ते कफ रोग,जुकाम प्रादि, तथा करमति का भ्रमाव, भौर मननशक्ति का प्रादुर्माव होता है 1.शातय =-शदूलु चातन; चातनम् भावना को दूर करती है । (भरथो) तथा (सहस्वान्) रोगों का पराभव करनेवाली (जङ्गिडः) जङ्ज्गिड भौषध (नः) हमारी (भरायुंषि) भयुभ्रों को (प्र तारिषत्) बढाती है । (जच्किंडस्य) जङ्जखिड-मौषध की (सः) बहु ( महिमा) महिमा (विद्वतः) सब गोर सेशौर सव प्रकार से (नः) हमारी (परि पातु) पूरण रक्षा करे । (येन) लिख महिमा के कारण, (गजः) ओजोमय जङ्किड

English

Possessed of overpowering force we two will quell our enemies. Subdue our foeman, overcome the men who fain would fight: with us. Conquer all evil-hearted ones: make many well-disposed to me.

अध्याय १९

श्लोक 31.4

यद् द्वि॒पाच्च॒ चतु॑ष्पाच्च॒ यान्यन्ना॑नि॒ ये रसाः॑ ।गृ॒ह्णे॒३हं॑ त्वेषां॑ भू॒मानं॒ बिभ्र॒दौदु॑म्बरं म॒णिम्

yad dvipācca catuṣpācca yānyannāni ye rasāḥ | gṛhṇe3haṃ tveṣāṃ bhūmānaṃ bibhradaudumbaraṃ maṇim

हिन्दी अर्थ

प्रद्रा नाम्न से (विदुः) जानते हँ । देवाः = विद्ासो वै देवाः (श०ब्रा० ३। ७। ३। १०) । पूर्व्या = पुवं २८४ भरथवंवेद-माष्य का० १९ ॥ सुर ३४ तथा ब्रह्म का अथं “मन्व भी होता है । जङ्कखिंड को “अंगिराः” कहा है, क्योंकि यह कृषिजन्य मरोषधियो के गङ्ख का ररूप है, देखो- भ्रथवं १६।३४५१ की व्याख्या । धङ्किराः= भङ्कानां रसः

English

With Darbha that hath sprung from Gods, stationed in heaven, full many a time. With this have I won many men, have won and may I win them still.

अध्याय १९

श्लोक 31.5

पु॒ष्टिं प॑शू॒नां परि॑ जग्रभा॒हं चतु॑ष्पदां द्वि॒पदां॒ यच्च॑ धा॒न्यम्।पयः॑ पशू॒नां रस॒मोष॑धीनां॒ बृह॒स्पतिः॑ सवि॒ता मे॒ नि य॑च्छात्

puṣṭiṃ paśūnāṃ pari jagrabhāhaṃ catuṣpadāṃ dvipadāṃ yacca dhānyam| payaḥ paśūnāṃ rasamoṣadhīnāṃ bṛhaspatiḥ savitā me ni yacchāt

हिन्दी अर्थ

न) बढ़कर नहीं हँ, (याः) भ्रौर जो (नवाः) नवीन प्रोषधियां हैःवेभी (त) तुकसे (तरन्तिन) बदृकर नहीं हं । (जङ्किडः) जङ्जगिंड परौषध (विवाघः) रोगों को विशेषरूप से रोकती है, (उग्रः) प्रभावमें उग्रै, (परिपाणः) सब प्रकार से रक्षा करती है, (सुमंगलः) बड़ी मंगल- (अथ) तथा (उपदान) है शक्तिप्रद ¡ (भगवः) रोगनिवारण मेँ भ्रथवं ° १६।३५।१) । प्रसते =ग्रास करना, खाना, तवन करना ।.

English

Do thou, O Darbha, make me dear to Brāhman and Rājanya, dear to Sūdra, and to Arya dear, Yea, dear to every man we love, to every man with eyes to see. He who first born fixed earth in her position, he who established heaven and air’s mid-region,

अध्याय १९

श्लोक 31.6

अ॒हं प॑शू॒नाम॑धि॒पा अ॑सानि॒ मयि॑ पु॒ष्टं पु॑ष्ट॒पति॑र्दधातु ।मह्य॒मौदु॑म्बरो म॒णिर्द्रवि॑णानि॒ नि य॑च्छतु

ahaṃ paśūnāmadhipā asāni mayi puṣṭaṃ puṣṭapatirdadhātu | mahyamaudumbaro maṇirdraviṇāni ni yacchatu

हिन्दी अर्थ

दधौ) तुक मे प्राहित किया है, स्थापित किया है । (भ्रोषधे ) है दोषनाशक जङ्जगिंड ! (सर्वाः) सब (अमीवाः) रोगों को (चातयन् ) बिनष्ट करती हई त् (रक्षांसि) रोग-कीटाणुश्रो का (जहि) हनन कर । का०.१९ १ सुऽ २५ परयवंवेद-माष्य ददन् निर्मित होता है, इसलिये इसे वनस्पति कहा है । देखो -अथवं ° १९।३४।१ शरीर के किसी विशेष भद्ध के जीणं-शीणे हो जाने को, (बलासम्) बल

English

Whom sinner ne’er hath known as his supporter,—this Darbha be our shelter and protection! First of all plants it sprang into existence, victorious, hundred- stemmed, the foe-subduer,

अध्याय १९

श्लोक 31.7

उप॒ मौदु॑म्बरो म॒णिः प्र॒जया॑ च॒ धने॑न च ।इन्द्रे॑ण जिन्वि॒तो म॒णिरा मा॑गन्त्स॒ह वर्च॑सा

upa maudumbaro maṇiḥ prajayā ca dhanena ca | indreṇa jinvito maṇirā māgantsaha varcasā

हिन्दी अर्थ

नामक ओौषघ (ददुः) प्रदान करती हैँ; (देवाः) भौर देवकोटि के महामेध को फलाया है, भौर उदकदाता मेष को ताडित कर तूने जल- धारार्भो का नीचे पृथिवी की गोर विसर्जन किया है । भरतः इनदर मेधस्थ २८६ भथर्ववेद-साष्य का० १६ ।सु० ३५

English

So may this Darbha from all sides protect us: with this may I subdue our foes in battle. A protective and benedictive charm Hundred stemmed, succulent, and worth a thousand, the Royal

अध्याय १९

श्लोक 31.8

दे॒वो म॒णिः स॑पत्न॒हा ध॑न॒सा धन॑सातये ।प॒शोरन्न॑स्य भू॒मानं॒ गवां॑ स्फा॒तिं नि य॑च्छतु

devo maṇiḥ sapatnahā dhanasā dhanasātaye | paśorannasya bhūmānaṃ gavāṃ sphātiṃ ni yacchatu

हिन्दी अर्थ

उत्पन्न होती है । ऋषयः = सूयं रदमयः (निरु० १२।४।३७) । ददुः, चक्र: देवा य॑ चद्गु्यणाः प॑रिपार्णमरातिहम् ।.२॥ करे, (इव ) जैसे कि (धनपालः) धन का स्वामी (धनाघनानि) धनौं रूपी शत्रु के हनन के लिये (चक्र) प्रयुक्तं करते ह ।

English

Rite of plants, the Water’s Agni, Let this same Darbha guard us from all quarters. This Godlike

अध्याय १९

श्लोक 31.9

यथाग्रे॒ त्वं व॑नस्पते पु॒ष्ठ्या स॒ह ज॑ज्ञि॒षे।ए॒वा धन॑स्य मे स्फा॒तिमा द॑धातु॒ सर॑स्वती

yathāgre tvaṃ vanaspate puṣṭhyā saha jajñiṣe| evā dhanasya me sphātimā dadhātu sarasvatī

हिन्दी अर्थ

द्वारा रोगियों को रोगोपचारके बोध द्वारा ( नाराय ) विनष्ट कर। (परिपाणः) पूणणंतया रोगो से रक्षा करनेवाली (जक्किडः भ्रसि) तु जच्जिडि (जङ्गिडः) जङ्किंड भौषधघ (मा) मेरी (परि पातु) पूणं रक्षा करे का० १९1 सूु० ३६ भथर्ववेद-माष्य २८७

English

Amulet shall with life endow us. Drawn forth from butter, juicy, sweetly-flavoured, firm as the earth, unshaken, overthrowing. Driving off foes and casting them beneath me, mount with the strength of mighty Ones, O

अध्याय १९

श्लोक 31.10

आ मे॒ धनं॒ सर॑स्वती॒ पय॑स्फातिं च धा॒न्यऽम्।सि॒नी॒वा॒ल्युपा॑ वहाद॒यं चौदु॑म्बरो म॒णिः

ā me dhanaṃ sarasvatī payasphātiṃ ca dhānya'm| sinīvālyupā vahādayaṃ caudumbaro maṇiḥ

हिन्दी अर्थ

हटाकर (पुनीहि) हमें पवित्र कीजिये । ओजं देवानां बर॑मु्रमेतप् तं त॑ बध्नामि जरसं खस्तयं ॥४॥ (विषासहिः) तो भी पराभमवकारी है, (रक्षोहा ) राक्षस स्वमाववालों का हूनन करता है, भौर (विदवचषं णिः) विदवद्रष्टा है । (देवानाम् ) पापकर्मा

English

on for increase of possessions. For hero is this hero bound, Amulet of Udumbara. So may he make our offering sweetly-savoured, and grant us wealth with all good men about

अध्याय १९

श्लोक 31.11

त्वं म॑णी॒नाम॑धि॒पा वृषा॑सि॒ त्वयि॑ पु॒ष्टं पु॑ष्ट॒पति॑र्जजान ।त्वयी॒मे वाजा॒ द्रवि॑णानि॒ सर्वौदु॑म्बरः॒ स त्वम॒स्मत् स॑हस्वा॒रादरा॑ति॒मम॑तिं॒ क्षुधं॑ च

tvaṃ maṇīnāmadhipā vṛṣāsi tvayi puṣṭaṃ puṣṭapatirjajāna | tvayīme vājā draviṇāni sarvaudumbaraḥ sa tvamasmat sahasvārādarātimamatiṃ kṣudhaṃ ca

हिन्दी अर्थ

उग्र बलरूप है, है विजयेच्छो ¡ (ते) तेरी (जरसे) सुखभयी जरावस्था के तेरे सार्य दृढ बद्ध करता हूं । देवानाम्; दिव् = विजिगीषा 1 का०१९। सु० ३४ भ्रथवेवेद-माष्य २८१ (वीर्याणि) वीरकं (कृणवत्) किया कर । (द्भेम्) मयविदारक परमे-

English

us. A charm, with an amulet of Darbha grass, to subdue enemies and win the affection of others

अध्याय १९

श्लोक 31.12

ग्रा॒म॒णीर॑सि ग्राम॒णीरु॒त्थाया॒भिषि॑क्तो॒ऽभि मा॑ सिञ्च॒ वर्च॑सा ।तेजो॑ऽसि॒ तेजो॒ मयि॑ धार॒याधि॑ र॒यिर॑सि र॒यिं मे॑ धेहि

grāmaṇīrasi grāmaṇīrutthāyābhiṣikto'bhi mā siñca varcasā | tejo'si tejo mayi dhārayādhi rayirasi rayiṃ me dhehi

हिन्दी अर्थ

(सूयं इव) सूयं के सदृश (चतस्रः प्रदिश्षः) चारो विस्तृत दिशां को रोगो को निगल जाती है; (रक्षिता भसि) तू रक्षा करती है, ( जद्किडः ) पचुभो की (रक्षतु) रोगोंसे रक्षाकरे।

English

For lengthened life I bind on thee the Darbha grass, the mighty plant. Excellent, hard to overthrow, with hundred stems and thousand blades. They cut not off his hair, they strike blow upon the breast for’ him.

अध्याय १९

श्लोक 31.13

पु॒ष्टिर॑सि पु॒ष्ट्या मा॒ सम॑ङ्ग्धि गृहमे॒धी गृ॒हप॑तिं मा कृणु ।औदु॑म्बरः॒ स त्वम॒स्मासु॑ धेहि र॒यिं च॑ नः॒ सर्व॑वीरं॒ नि य॑च्छ रा॒यस्पोषा॑य॒ प्रति॑ मुञ्चे अ॒हं त्वाम्

puṣṭirasi puṣṭyā mā samaṅgdhi gṛhamedhī gṛhapatiṃ mā kṛṇu | audumbaraḥ sa tvamasmāsu dhehi rayiṃ ca naḥ sarvavīraṃ ni yaccha rāyaspoṣāya prati muñce ahaṃ tvām

हिन्दी अर्थ

जच्िंढ-भौषध, कृषिजनित पदार्थो के रसो से प्राप्त होती है + यथा- कृष्या अन्यो रतेभ्यः' (भरयवं ०२,४।५) । इस मनर में शण (सन) भौर दारीराद्खं का सुख जाना। स्कन्दिर गतौ, शोषणे च । शण के क्वाधकते. २०८२ प्रथर्ववेद-भाष्य कं।० १९ । प° ३४

English

To whom one gives protection by Darbha that hath uninjured leaves. O Plant, thy root is in the sky, and thou art stationed on the earth:

अध्याय १९

श्लोक 31.14

अ॒यमौदु॑म्बरो म॒णिर्वी॒रो वी॒राय॑ बध्यते ।स नः॑ स॒निं मधु॑मतीं कृणोतु र॒यिं च॑ नः॒ सर्व॑वीरं॒ नि य॑च्छात्

ayamaudumbaro maṇirvīro vīrāya badhyate | sa naḥ saniṃ madhumatīṃ kṛṇotu rayiṃ ca naḥ sarvavīraṃ ni yacchāt

हिन्दी अर्थ

(त्रिपञ्चा्नीः) तीन भौर पांचमें व्याप्त होने वाली (याः) जो (कृत्याकृतः) हिसा करनेवाले (ये ) जो (चतम्) सेकड़ों रोग कीटाणु ई (जङ्कगिंडः) जङ्गड ओषध (सर्वान्) उन सव को (तेजसः) उनके निज (करत्) कर दे, विषले रसो से रहित कर दे ।

English

With thee who hast a thousand stalks we strengthen all the powers of life. Through all three skies the plant hath pierced, and the three regions of the earth; With thee I split in twain the tongue and words of the bad- hearted man.

अध्याय १९

श्लोक 32.1

दर्भः।१-१० भृगुः (आयुष्कामः)।दर्भः।अनुष्टुप्, ८ पुरस्ताद्बृहती, ९ त्रिष्टुप्, १० जगती।श॒तका॑ण्डो दुश्च्यव॒नः स॒हस्र॑पर्ण उत्ति॒रः ।द॒र्भो य उ॒ग्र ओष॑धि॒स्तं ते॑ बध्ना॒म्यायु॑षे

darbhaḥ| 1-10 bhṛguḥ (āyuṣkāmaḥ)| darbhaḥ| anuṣṭup, 8 purastādbṛhatī, 9 triṣṭup, 10 jagatī| śatakāṇḍo duścyavanaḥ sahasraparṇa uttiraḥ | darbho ya ugra oṣadhistaṃ te badhnāmyāyuṣe

हिन्दी अर्थ

(दिवः) लोकसे; (मा) मेरी (परि) पूर्णं रक्षा करे (पृथिव्याः) पृथिवी पूणे रक्षा करे (भरतात्) भ्रुत से; (उत) भौर (मा) मेरी (परि) पूणे रक्षा दिवः सूर्यं के भ्रधिक ओर कम तापके कारण होनेवाते रोगोँसे। उत्पन्न होनेवाले रोगो से, मेरी भौर हम सब की पूणं रक्षा जद्किड भरौषध

English

Darbha. Thou movest o’er the earth with vigour: lovely in sacrifice thou sittest on the altar.

अध्याय १९

श्लोक 32.2

नास्य॒ केशा॒न् प्र वप॑न्ति॒ नोर॑सि॒ ताड॒मा घ्न॑ते ।यस्मा॑ अछिन्नप॒र्णेन॑ द॒र्भेण॒ शर्म॑ यच्छति

nāsya keśān pra vapanti norasi tāḍamā ghnate | yasmā achinnaparṇena darbheṇa śarma yacchati

हिन्दी अर्थ

रोगो को (अरसान्) रसरहित, नीरस तथा निष्प्रमाव ( करत्) करती है । (शतवारः) संकडों यक्ष्मरोगो का निवारण करनेवाली “कशतवार” रवण भ्रथववेद-माष्य का० १९। सु०३६ करती है । (वच॑सा सहु) भ्रपनी पूरी चक्ति के साथ (भ्रारोहन्) सरीर पर भ्रारूढृ होकर (मणिः) शतवार मणि, (दुर्णामचातनः) दुष्परिणामी नाना रोगों का विनारकरती है

English

Achieve heroic deeds with Darbha, wearing this Darbha never let thy soul be troubled. In splendour and precedence over others illumine like the Sun the heaven’s four regions.

अध्याय १९

श्लोक 32.3

दि॒वि ते॒ तूल॑मोषधे पृथि॒व्याम॑सि॒ निष्ठि॑तः ।त्वया॑ स॒हस्र॑काण्डे॒नायुः॒ प्र व॑र्धयामहे

divi te tūlamoṣadhe pṛthivyāmasi niṣṭhitaḥ | tvayā sahasrakāṇḍenāyuḥ pra vardhayāmahe

हिन्दी अर्थ

शततवारः = सम्भवतः “शतावरी” भौषध । भावभकाश्च मेँ इसे भ ' वारये पद की दृष्टि से “शतवार” में “वार का श्रयं “निवारण करनेवाली, एसा किया है । दुर्णाम= रोग दहै--गुल्म, भ्रतिसार, वातरोग, २८१. शृज्गौम्यां रक्षो दते मुहैन याहुघान्य ; ।

English

A protective charm addressed to the panacea called A Jangida Jangida, thou art Angiras: thou art a guardian, Jangida. Let Jangida, keep safely all our bipeds and our quadrupeds.

अध्याय १९

श्लोक 32.4

ति॒स्रो दि॒वो अत्य॑तृणत् ति॒स्र इ॒माः पृ॑थि॒वीरु॒त॑।त्व॑याहं दु॒र्हार्दो॑ जि॒ह्वां नि तृ॑णद्मि॒ वचां॑सि

tisro divo atyatṛṇat tisra imāḥ pṛthivīruta| tvayāhaṃ durhārdo jihvāṃ ni tṛṇadmi vacāṃsi

हिन्दी अर्थ

के कीटाणुश्रों को (नुदते) दूर करती है । (मूलेन) जड़ द्वारा (यातुधान्यः) महाशतावरी कटिदार होती है । भावप्रकाश्च मेँ इसे “ऊध्वंकंटिका" कहा है। शुङ्खं का भ्रभिप्राय है-कटि। महाशतावरी कै काटो द्वारा निमित पौषधघ सम्भवतः यक्ष्मरोग के कीटाणुओों कोमार देतीहौ। अन्यभी श्रोषधियां ह, जिनके साथ श्यृद्खो का वणेन हुगा है । यथा--पृङ्खी, ककट- का० १९1 सु० ३६ . प्रघरववेद-माष्य २८९ दुष्परिणामी रोगों का हनन करनेवाला (मणिः) रत्नरूप (शतवारः) शत

English

Dice-witcheries, the fifty-threes, the hundred witchcraft-practi- sers, All these may Jangida make weak, bereft of their effectual force.

अध्याय १९

श्लोक 32.5

त्वम॑सि॒ सह॑मानो॒ऽहम॑स्मि॒ सह॑स्वान्।उ॒भौ सह॑स्वन्तौ भू॒त्वा स॒पत्ना॑न्सहिषीवहि

tvamasi sahamāno'hamasmi sahasvān| ubhau sahasvantau bhūtvā sapatnānsahiṣīvahi

हिन्दी अर्थ

र्णा; स्यू त्वाव रकांपि पूलुते ।४॥ शततवार (शतम्) संकडों (वीरन्) वीरो को (भजनयत्) मानो वीरान् वीर पुरुषों को भी यदि यक्ष्मरोग हो जाय, भ्रौर इय कारण वे निबंल हो जांय, तो शततवार उन्दँ पुनः वीरता-सम्पन्न कर देतां है, मानो उन्हें नवीन-जन्म प्रदान कर देता है।

English

Baffle the loud factitious howl, make impotent the seven decays. As when an archer speeds the shaft, drive away want, O Jangida,

अध्याय १९

श्लोक 32.6

सह॑स्व नो अ॒भिमा॑तिं॒ सह॑स्व पृतनाय॒तः ।सह॑स्व॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दः॑ सु॒हार्दो॑ मे ब॒हून् कृ॑धि

sahasva no abhimātiṃ sahasva pṛtanāyataḥ | sahasva sarvān durhārdaḥ suhārdo me bahūn kṛdhi

हिन्दी अर्थ

(शातवारः) हतवार-जाति की (भ्रयम्) यह (मणिः) रत्नसमान बहुमूल्य विषाणी कहा है । तथा जीवर भौर ऋषभ प्रोषर्धो को “'क्षयापही" अर्थात क्षयरोग-विनाश्क भी कहा है । २९० भरथवेवैद-माष्य का० १९॥। सु° ३७ (शतवारेण)रतवार-भौषघ द्वारा (वारये) निवारित करता हूं ।

English

This counteracts the sorceress, this banishes malignity: Then may victorious Jangida’s prolong the days we have to live.

अध्याय १९

श्लोक 32.7

द॒र्भेण॑ दे॒वजा॑तेन दि॒वि ष्ट॒म्भेन॒ शश्व॒दित्।तेना॒हं शश्व॑तो॒ जनाँ॒ अस॑नं॒ सन॑वानि च

darbheṇa devajātena divi ṣṭambhena śaśvadit| tenāhaṃ śaśvato janā~ asanaṃ sanavāni ca

हिन्दी अर्थ

माता" तथा “हुतस्वसा" का है (अथं ० २।३२।४; तथा ५।२३।११) 1 हतस्वसा = क्रिमि जिस की माताभ्रौर बहनि भीमारदी गरदर्ह। माता का०१९ । पुऽ ३७ प्रथववेद-माष्य २९१

English

Let Jangida’s protecting might encompass us on every side. Wherewith he quells Vishkandha and Sanskandha, might by greater might. Three times the Gods engendered thee fixt on the surface of the earth;

अध्याय १९

श्लोक 32.8

प्रि॒यं मा॑ दर्भ कृणु ब्रह्मराज॒न्याऽभ्यां शू॒द्राय॒ चार्या॑य च ।यस्मै॑ च का॒मया॑महे॒ सर्व॑स्मै च वि॒पश्य॑ते

priyaṃ mā darbha kṛṇu brahmarājanyā'bhyāṃ śūdrāya cāryāya ca | yasmai ca kāmayāmahe sarvasmai ca vipaśyate

हिन्दी अर्थ

(यानि) जो (यस्तत्) ३३ (वीर्याणि) शक्तियां है, (तानि) उन तन्मात्राघों की रक्तया, १ मन, १ भहंकार, १ बुद्धि । २८७. मच आ वेदि मे तन्वं सह ओजो भयो बल॑ । के लिये, (कर्मणे) त्यागमावना से कर्मों को करने के लिये, (वीर्याय ) वो्यं- रक्षा क लिये, (शतशारदाय) सौ वर्षो तक जीवन के लिये (त्वा) है पर

English

The Brāhmans of the olden time knew that thy name was Angiras;

अध्याय १९

श्लोक 32.9

यो जाय॑मानः पृथि॒वीमदृं॑ह॒द् यो अस्त॑भ्नाद॒न्तरि॑क्षं॒ दिवं॑ च ।यं बिभ्र॑तं न॒नु पा॒प्मा वि॑वेद॒ स नो॒ऽयं द॒र्भो वरु॑णो दि॒वा कः॑

yo jāyamānaḥ pṛthivīmadṛṃhad yo astabhnādantarikṣaṃ divaṃ ca | yaṃ bibhrataṃ nanu pāpmā viveda sa no'yaṃ darbho varuṇo divā kaḥ

हिन्दी अर्थ

९८८. छने त्रा बलाय स्वोजसे सर्दसे त्वा । अभिमू्याय त्वा राषटमत्याय पामि शतर्चारकाय ॥३॥ हे भग्निनामक परमेश्वर (शतशारदाय) सौ वषो की घ्रायु के लिये (बलाय) शारीरिक बल प्राप्त करने कै लिये (त्वा) अण को, भोजते)

English

The ancient plants surpass thee not, nor any herbs of recent days. A potent charm is Jangida, a most felicitous defence. Then when thou sprangest into life, Jangida of un-measured strength,

अध्याय १९

श्लोक 32.10

स॒प॒त्न॒हा श॒तका॑ण्डः॒ सह॑स्वा॒नोष॑धीनां प्रथ॒मः सं ब॑भूव ।स नो॒ऽयं द॒र्भः परि॑ पातु वि॒श्वत॒स्तेन॑ साक्षीय॒ पृत॑नाः पृतन्य॒तः

sapatnahā śatakāṇḍaḥ sahasvānoṣadhīnāṃ prathamaḥ saṃ babhūva | sa no'yaṃ darbhaḥ pari pātu viśvatastena sākṣīya pṛtanāḥ pṛtanyataḥ

हिन्दी अर्थ

२७९. य ऋषणवें देवदता य उतो ब॑वतेऽन्यः + (ये) जो (्णवः) रोगजन्यहिसाएं (देवकृताः) प्राकृतिक शक्तियों भिन्न कारणों से रोग (ववृते) प्रवृत्त हो जाते है, (विदवभेषजः) उन

English

The Rishis bear thee as a purifier: cleanse thou us from all evil deeds’ defilement. A stern and all-victorious king, foe-queller, dear to every man— That energy of Gods and mighty power, I bind this on thee for long life and welfare.

अध्याय १९

श्लोक 33.1

दर्भः।१-५ भृगुः।दर्भः।१ जगती, २, ५ त्रिष्टुप्, ३ आर्षी पङ्क्तिः, ४ आस्तारपङ्क्तिः।स॒ह॒स्रा॒र्घः श॒तका॑ण्डः॒ पय॑स्वान॒पाम॒ग्निर्वी॒रुधां॑ राज॒सूय॑म्।स नो॒ऽयं द॒र्भः परि॑ पातु वि॒श्वतो॑ दे॒वो म॒णिरायु॑षा॒ सं सृ॑जाति नः

darbhaḥ| 1-5 bhṛguḥ| darbhaḥ| 1 jagatī, 2, 5 triṣṭup, 3 ārṣī paṅktiḥ, 4 āstārapaṅktiḥ| sahasrārghaḥ śatakāṇḍaḥ payasvānapāmagnirvīrudhāṃ rājasūyam| sa no'yaṃ darbhaḥ pari pātu viśvato devo maṇirāyuṣā saṃ sṛjāti naḥ

हिन्दी अर्थ

तथा राष्ट् के मरण-पोषण के लिये (पयुहामि) वै राप क्तो निज जीवन में पग हामि = परि +-वह । छान्दस प्रयोग । यथा-““पगु ढा" ( गथवं° ११।६।१५; तथा १२।५१३) । अभिप्राय यह है छि प्रार्थी परमेषटवर कै प्रति २६९२ प्रथ्वेवेद-माष्य का० १९१ सू०३८ पर्यन्त सदा अपने जीवन मे भ्राप को घारण करता हृभ्ा विचरूगा, ताकि मै ऊजं. भ्रादिकी प्राप्ति के लिये कूुपथगामी न हो जाऊं । उजं. ऊजं

English

Indra, O mighty One, bestowed great power upon thee from the first. 255

अध्याय १९

श्लोक 33.2

घृ॒तादुल्लु॑प्तो॒ मधु॑मा॒न् पय॑स्वान् भूमिदृं॒होऽच्यु॑तश्च्यावयि॒ष्णुः ।नु॒दन्त्स॒पत्ना॒नध॑रांश्च कृ॒ण्वन् दर्भा रो॑ह मह॒तामि॑न्द्रि॒येण॑

ghṛtādullupto madhumān payasvān bhūmidṛṃho'cyutaścyāvayiṣṇuḥ | nudantsapatnānadharāṃśca kṛṇvan darbhā roha mahatāmindriyeṇa

हिन्दी अर्थ

हे भग्निनामक परमेदवर! (ऋतुभ्यः) ऋतु से (्रातवेभ्यः ) ऋतुजन्य प्राप्त करने के लिये, (घात्रे) धारण-पोषण करनेवाले, (विधात्रे) विधियो का यजन करता हू, राप देव का पूजन तथा संग करता हूं, तथा प्रापक परति आत्मसमपंण करता हू" । यजे यज देवपुजासंगतिकरणदानेषु ।

English

To thee in truth, O Forest Tree, Indra the mighty One gave strength. Driving away all maladies, strike thou the demons down, O Plant.

अध्याय १९

श्लोक 33.3

त्वं भूमि॒मत्ये॒ष्योज॑सा॒ त्वं वेद्यां॑ सीदसि॒ चारु॑रध्व॒रे।त्वां प॒वित्र॒मृष॑योऽभरन्त॒ त्वं पुनीहि दुरि॒तान्य॒स्मत्

tvaṃ bhūmimatyeṣyojasā tvaṃ vedyāṃ sīdasi cāruradhvare| tvāṃ pavitramṛṣayo'bharanta tvaṃ punīhi duritānyasmat

हिन्दी अर्थ

न्ते) भवसद्ध नहीं करते, शौर (न) न (एनम्) इसे (पथः) शपथ लेने == दपथ श्र्थात् सौगन्ध या कसम की भादत मानसिक कमजोरी को सूचित करती है 1 गुग्गुल की गन शपथ खाने की प्रवृत्तिको कम करती है। गुग्गुल-गन्ध से भतिरिक्तं भ्रौर मी भोषधियांरह,जो कि शपथ खाते कीं का०.१९ । सु° ३९ भ्रथववेद-माष्य २९३ प्रवृत्ति को कम करती ह, जिन्हें कि ““रापथयावनी (भ्रथवं० ४।१७।२),

English

Lumbago and rheumatic pain, consumptive cough, and pleurisy, And fever which each Autumn brings, may Jangida make- powerless.

अध्याय १९

श्लोक 33.4

ती॒क्ष्णो राजा॑ विषास॒ही र॑क्षो॒हा वि॒श्वच॑र्षणिः ।ओजो॑ दे॒वानां॒ बल॑मु॒ग्रमे॒तत् तं ते॑ बध्नामि ज॒रसे॑ स्व॒स्तये॑

tīkṣṇo rājā viṣāsahī rakṣohā viśvacarṣaṇiḥ | ojo devānāṃ balamugrametat taṃ te badhnāmi jarase svastaye

हिन्दी अर्थ

तंथा “शपथयोपनी (भ्रथवं ०२।७।१) कहा है । है, (उभयोः) इन दोनो का (नाम) नाम (भस्मं) इस व्यक्ति के लिये जाते हैँ । ईरते दर कम्पने । नाम भग्रभम् =नामनि्देश करना, प्रौषधं का कथन करना, यक्ष्मरोग की निवृत्ति के लिये ॥

English

A similar charm addressed to the same While their lips uttered Indra’s name the Rishis gave us Jangida.. Which in the earliest time Gods made a remedy, Vishkandha’s- cure.

अध्याय १९

श्लोक 33.5

द॒र्भेण॒ त्वं कृ॑णवद् वी॒र्याऽणि द॒र्भं बिभ्र॑दा॒त्मना॒ मा व्य॑थिष्ठाः ।अति॑ष्ठाया॒ वर्च॒साधा॒न्यान्त्सूर्य॑ इ॒वा भा॑हि प्र॒दिश॒श्चत॑स्रः

darbheṇa tvaṃ kṛṇavad vīryā'ṇi darbhaṃ bibhradātmanā mā vyathiṣṭhāḥ | atiṣṭhāyā varcasādhānyāntsūrya ivā bhāhi pradiśaścatasraḥ

हिन्दी अर्थ

(हिमवतः परि) बर्फलि पर्व॑त से, (यमाणः) यह रक्षक (देवः कुष्ठः) २९४ अथर्ववेद-माष्य का० १९ । सुर ३९ (कुष्ठ) है कुष्ठनामक भ्रौषध (ते) तेरे (त्रीणि नामानि) तीन हे कुष्ठौषध (परिब्रवीमि) मै क्ता कि वह (त्वा) तेरा सेवन करे (सायम्) सायंकाल, (प्रातः) प्रातःकाल, ( भ्रथोदिवा) भौरदिनं के समय अर्थात् प्रतिदिन ३ तीन बार ।

English

So may this Jangida guard us, even as a treasurer guards wealth,. Even this which Gods and Brāhmans made a malice-quelling sure defence.

अध्याय १९

श्लोक 34.1

जङ्गिडमणिः।१-१० अङ्गिराः।वनस्पतिः, लिङ्गोक्ताः।अनुष्टुप्।जा॒ङ्गि॒डोऽसि जङ्गि॒डो रक्षि॑तासि जङ्गि॒डः ।द्वि॒पाच्चतु॑ष्पाद॒स्माकं॒ सर्वं॑ रक्षतु जङ्गि॒डः

jaṅgiḍamaṇiḥ| 1-10 aṅgirāḥ| vanaspatiḥ, liṅgoktāḥ| anuṣṭup| jāṅgiḍo'si jaṅgiḍo rakṣitāsi jaṅgiḍaḥ | dvipāccatuṣpādasmākaṃ sarvaṃ rakṣatu jaṅgiḍaḥ

हिन्दी अर्थ

है, (ते) तेरा (पिता) पिता ( जीवन्तः नाम) नीवन्त नामवाला है। (नद) हि नदीप्रदेशोत्पनन रोग ॒! (अयम्) यह ( पुरुषः) कुष्टौषधसेवी पुरुष (रिषत्) तेरा विनाश करे । (यस्मै " ". ) इत्यादि धुवंवत् । येन सष: (उणा०३।१२७), प्र्थात् मेघः 1 पृथवी को माता तथा मेष को पित्ता का भी है । यथा--"माता भुमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः । पजन्यः पिता स छ नः पिषतु" ( भरथवं०१२।१।१२) । जमिप्राय यह् है कि जहां मेव बर- सता रहता है, पैसी जलप्राय चुमि मे कुष्ठटौषध उत्पन्न होती है । का०-१९.1 सु० ३६ भरधर्ववेद-भाष्य २६१

English

Hard-hearted men, the cruel eye, the sinner who hath come to- us, Destroy thou these with watchful care, O thou who hast a. thousand eyes. Thou, Jangida, art my defence.

अध्याय १९

श्लोक 34.2

या गृत्स्य॑स्त्रिपञ्चा॒शीः श॒तं कृ॑त्या॒कृत॑श्च॒ ये।सर्वा॑न् विनक्तु॒ तेज॑सोऽर॒सां ज॑ङ्गि॒डस्क॑रत्

yā gṛtsyastripañcāśīḥ śataṃ kṛtyākṛtaśca ye| sarvān vinaktu tejaso'rasāṃ jaṅgiḍaskarat

हिन्दी अर्थ

दान्द तीन वार मन्व मेँ पठित है 4 यह ददानि के लिये किकृष्ठकेतीनही २९६ भयर्ववेद-भाष्य क।° १९६ । पु° ३९ के साथ सादुद्य रखनेवाले दो शब्द है--शम्बरः == मेषः (निघं० १।१०)

English

Protect me from the present and the future. From every region Jangida preserve us! All sorcerers made by the Gods, all that arise from mortal men,.

अध्याय १९

श्लोक 34.3

अ॒र॒सं कृ॒त्रिमं॑ ना॒दम॑र॒साः स॒प्त विस्र॑सः ।अपे॒तो ज॑ङ्गि॒डाम॑ति॒मिषु॒मस्ते॑व शातय

arasaṃ kṛtrimaṃ nādamarasāḥ sapta visrasaḥ | apeto jaṅgiḍāmatimiṣumasteva śātaya

हिन्दी अर्थ

“भ्रकाश्चमयी किरणे" करना उचित प्रतीत होता है । सूं भौरचनद्रका २।४।१३ ), भर्थात् आदित्य पाथिव जलादि रसो काम्रादान करतार, जि के द्वारा कि मेघ बनते ह, इसलिये भादित्य को भ्रादित्य.कहते है । रसों का भ्रादान, भादित्य की तापमयी किरणों द्वारा होता है, इसलिये तापमयी किरणों द्वारा निमित मेघोंसे वर्षा द्वारा कुष्ठ आदि भोषधियां न जयंति" (अथवं १०।८।३२) मे वेदको परमेश्वर देव कां काव्य कहा है भरतः कविता की दुष्ट से, जड का सम्बोधन भी उचित ही प्रतीत

English

These, one and all, let Jangida, healer of all, make impotent. A charm against disease and evil spirits

अध्याय १९

श्लोक 34.4

कृ॒त्या॒दूष॑ण ए॒वायमथो॑ अराति॒दूष॑णः ।अथो॒ सह॑स्वां जङ्गि॒डः प्र ण आयूं॑षि तारिषत्

kṛtyādūṣaṇa evāyamatho arātidūṣaṇaḥ | atho sahasvāṃ jaṅgiḍaḥ pra ṇa āyūṃṣi tāriṣat

हिन्दी अर्थ

(इतः) इस पुथिषी से (तृतीयस्यां दिवि) तीसरे पर्थात् यलोके को० १९1 सू० २९ भरथर्ववेद- २९७ सर्वोत्तिम कूट या कुठ (अजायत) पदा होता है । (स कुष्ठो - "“"यातुघान्यः). मण्डल मे, या इस दिशा में सूयं जब प्रपनी वार्षिक गति से भाता है, तब

English

The Hundred-haired hath banished hence fiends and Consump- tions by its might. With splendour hath the charm that scares demons of ill-name mounted up. It drives off demons with its horns and sorceresses with its root,

अध्याय १९

श्लोक 34.5

स ज॑ङ्गि॒डस्य॑ महि॒मा परि॑ णः पातु वि॒श्वतः॑ ।विष्क॑न्धं॒ येन॑ सा॒सह॒ संस्क॑न्ध॒मोज॒ ओज॑सा

sa jaṅgiḍasya mahimā pari ṇaḥ pātu viśvataḥ | viṣkandhaṃ yena sāsaha saṃskandhamoja ojasā

हिन्दी अर्थ

बन्धी हुई (नौः) नौका (दिवि) चुलोक में (भचरत्) विच्तरती है । (तत्र) दुष्टिगोचर होता £ । (तततः) उस उदक से (कुष्ठः) उत्तम कूट या कुठ २९८ प्रथरववेद-माष्य क।° १९ । पु° ३९ ढलवान् नहीं है, भरपि तु (यत्र) जहां बर्फलि पवत का (चिरः) उच्च भाग ,.

English

It stays Consumption with its waist: from this no wickedness escapes. Consumptions, light and serious, and those which sounds accompany,

अध्याय १९

श्लोक 34.6

त्रिष्ट्वा॑ दे॒वा अ॑जनय॒न् निष्ठि॑तं॒ भूम्या॒मधि॑ ।तमु॒ त्वाङ्गि॑रा॒ इति॑ ब्राह्म॒णाः पू॒र्व्या वि॑दुः

triṣṭvā devā ajanayan niṣṭhitaṃ bhūmyāmadhi | tamu tvāṅgirā iti brāhmaṇāḥ pūrvyā viduḥ

हिन्दी अर्थ

दर्शन होता है, तो (ततः) उस भाग से (कुष्ठः) उत्तम कूट या उत्तम कृष्ठ कै लिये सतत जलं चाहिए । हिमवतः दस पद द्वारा हिमालय पर्वत का ग्रहण नहीं है । भपितु केवल बर्फलि पवंतो का ग्रहण है) इसी दक्तथमिलाषी (यं त्वा) जिस तुक को (वेद) अपने रोग की भ्ोषधिरूप जानता है; (यंवा) तथा जिस (त्वा) तुक को (काम्यः) कामातुर ध्यक्ति म्मपने कामरोग की गोषंधिखूप जानता है; (यं वा) या जिस तुरू को (वसो)

English

All these the Amulet, Hundred-haired, scarer of fiends, hath banished hence. A hundred men hath it produced, hundred Consumptions chased away, All fiends of evil-name it hath smitten, and shakes the

अध्याय १९

श्लोक 34.7

न त्वा॒ पूर्वा॒ ओष॑धयो॒ न त्वा॑ तरन्ति॒ या नवाः॑ ।विबा॑ध उ॒ग्रो ज॑ङ्गि॒डः प॑रि॒पाणः॑ सुम॒ङ्गलः॑

na tvā pūrvā oṣadhayo na tvā taranti yā navāḥ | vibādha ugro jaṅgiḍaḥ paripāṇaḥ sumaṅgalaḥ

हिन्दी अर्थ

की गोषधिरूप जनता है, (तेन) इस कारण (विदवभेषजः) सर्व रोगौषधः भिति । काम्यः कामपृश्र (सायण), कामातुर । वसो =वसा-1- उन वसा- का० १६॥ सु० ४० भथववेद-भाष्य २९९ तीसरे दिन आनेवाले ज्वर को, (यः) जो कि (खन्ददि!) शरीर को जकड़ देता है; (च) मरौर (हायनः ) जो वार्षिक ज्वर है उसे; (भरराञ्नवम्) तथा

English

Rākshasas. The Bull that weareth horns of gold, this Amulet with hundred hairs,

अध्याय १९

श्लोक 34.8

अथो॑पदान भगवो॒ जाङ्गि॒डामि॑तवीर्य ।पु॒रा त॑ उ॒ग्रा ग्र॑सत॒ उपेन्द्रो॑ वी॒र्यं ददौ

athopadāna bhagavo jāṅgiḍāmitavīrya | purā ta ugrā grasata upendro vīryaṃ dadau

हिन्दी अर्थ

वीयं) है सब प्रकारके सामथ्यं वाले उत्तम कष्ठ (परासुव) तु परे वहु ञ्वरजोकिं सिर को चठ जाता है । सन्ददिः, सन्दान=रस्सी। ““सन्ददिः” मानो रस्सो से जकड़ देनेवाला । १--४ ब्रह्मा । बहस्पतिः, विषवेदेवादं ।

English

Hath cleft the demons of ill-name and overcome the Rākshasas. Hundred she-fiends, a hundred of Gandharvas and Apsarasas, A hundred of dog-mated nymphs, I keep away with Hundred Hair

अध्याय १९

श्लोक 34.9

उ॒ग्र इत् ते॑ वनस्पत॒ इन्द्र॑ ओ॒ज्मान॒माद॑धौ ।अमी॑वाः॒ सर्वा॑श्चा॒तयं॑ ज॒हि रक्षां॑स्योषधे

ugra it te vanaspata indra ojmānamādadhau | amīvāḥ sarvāścātayaṃ jahi rakṣāṃsyoṣadhe

हिन्दी अर्थ

विभरैरतद् देवैः सह संविदानः सं दधातु बृहस्पतिः ॥१॥ (मे) मेरे (मनसः) मन का (यत्) जो (छिद्रम्) दोष है, (च) भ्रौर (यत्) जो (वाचः) वाणी कादोषहै, तथा जो मेरी (सरस्वती) ज्ञान- देवेभ्यः षह ) भन्य सब भ्राचार्यं भादि देवों के साथ (संविदानः) सहमत. होकर (बृहस्पतिः) वेदवाणी का भराचार्यं (सं दधातु) उपचार करे, उन दोषों भर्थात् छिद्रो को पूरित करे । मनसः मन का दोष है-भिवसरंकल्प, नास्तिकता भादि । वाचः = वाणी का दोष है-भरसत्य व चन,निन्दा,कटूता भादि । सरस्वती =

English

A charm to secure long life and dominion to a prince To me hath come this word given by Agni, fame, force and might, and strength, and life, and

अध्याय १९

श्लोक 34.10

आश॑रीकं॒ विश॑रीकं ब॒लासं॑ पृष्ट्याम॒यम्।त॒क्मानं॑ वि॒श्वशा॑रदमर॒सां ज॑ङ्गि॒डस्क॑रत्

āśarīkaṃ viśarīkaṃ balāsaṃ pṛṣṭyāmayam| takmānaṃ viśvaśāradamarasāṃ jaṅgiḍaskarat

हिन्दी अर्थ

भ्रोषधि (असि) तु है, (इव ) जेते कि (अनड्वान्) चकटवाही बल (जग- तैरा विनाश करे, (यस्म. ) पूववत् । प्रकाहमयी किरणों से, तथा (आदित्येभ्यः) रसादान करनेवाली तापमयी भेषजः) सर्वौषधर्प है, गौर (सोमेन साकम्) सोम पभरोषधि के संगमे

English

Guard me from earth and guard me from the heavens, guard me from middle air, from plants protect me.

अध्याय १९

श्लोक 35.1

जङ्गिडः।१-५ अङ्गिराः।वनस्पतिः।अनुष्टुप्, ३ पथ्याबृहतीः, ४ शक्वरी निचृत् त्रिष्टुप्।इन्द्र॑स्य॒ नाम॑ गृ॒ह्णन्त॒ ऋस॑यो जङ्गि॒डं द॑दुः ।दे॒वा यं च॒क्रुर्भे॑ष॒जमग्रे॑ विष्कन्ध॒दूष॑णम्

jaṅgiḍaḥ| 1-5 aṅgirāḥ| vanaspatiḥ| anuṣṭup, 3 pathyābṛhatīḥ, 4 śakvarī nicṛt triṣṭup| indrasya nāma gṛhṇanta ṛsayo jaṅgiḍaṃ daduḥ | devā yaṃ cakrurbheṣajamagre viṣkandhadūṣaṇam

हिन्दी अर्थ

३०० भधरवववेद-माष्य कार १९॥ सुम ४९ वाणीमें भी यदिक्षोभहो जाये, तो वहू दोष ही है। ब्रहस्पतिः=बहती शिक्षक, मातुदेव, पितुदेव प्रादि । संदधातु = मन्वमे दोष को चद्र कहा

English

lustre. May Agni too bestow on me three-times a hundred manly powers. For mighty strength, for action, I receive thee, for manly power, to last a hundred autumns.

अध्याय १९

श्लोक 35.2

स नो॑ रक्षतु जङ्गि॒डो ध॑नपा॒लो धने॑व ।दे॒वा यं च॒क्रुर्ब्रा॑ह्म॒णाः प॑रि॒पाण॑मराति॒हम्

sa no rakṣatu jaṅgiḍo dhanapālo dhaneva | devā yaṃ cakrurbrāhmaṇāḥ paripāṇamarātiham

हिन्दी अर्थ

है। खिद्रको भरना होता है । इसलिये संदधातु का पथं है-संघान करना । “दोष प्रथं भं इसका पथं होगा--उपचार करना । भ्रापः) है भराप्त जनो श्रष (मा) न (नः) हमारी (मेषाम्) मिलकर प्रवाहरूप में धति रहिये, (सुष्यदाः) जैसे कि उत्तमरूप मँ प्रवा- हित होनेवाले जल, मिलकर समृद्र. की भोर प्रवाहित होते है। ताकि

English

For conquering strength and energy and vigour I fasten thee for chieftainship, for bearing royal dominion through a hundred autumns.

अध्याय १९

श्लोक 35.3

दु॒र्हार्दः॒ संघो॑रं॒ चक्षुः॑ पाप॒कृत्वा॑न॒माग॑मम्।तांस्त्वं स॑हस्रचक्षो प्रतीबो॒धेन॑ नाशय परि॒पाणो॑ऽसि जङ्गि॒डः

durhārdaḥ saṃghoraṃ cakṣuḥ pāpakṛtvānamāgamam| tāṃstvaṃ sahasracakṣo pratībodhena nāśaya paripāṇo'si jaṅgiḍaḥ

हिन्दी अर्थ

हे माता-पिता ! घाप दोनों (मा) न (नः) हमारी बुद्धि को, (मा) न (नः) हमारे (दीक्षाम्) - व्रत-नियमों को, (यत्) जो (नः). हमारा (तपः) तपदहै (मा) न उसको ( हिसिष्टम् ) हसित होने दीलियें। पितृवगं (नः) हमारे लिये ( शिवाः ) कल्याणकारी पौर ( शम् ) शल. शान्तिकर (सन्तु) हो, भ्रौर (मातरः) माताए' (शिवाः) कल्याणकारिणी का० १९ । सू०° ४९ भ्रथववेद-माष्य ३०१ (तमस्तिरः) भ्रन्धकार को तिरोहितं करके (नः) हमारा (पीपरत् ) पालन

English

With Seasons and with Season-groups, for vigour and extended life. With splendour of the perfect year we fasten thee about the neck. 256

अध्याय १९

श्लोक 35.4

परि॑ मा दि॒वः परि॑ मा पृथि॒व्याः पर्य॒न्तरि॑क्षा॒त् परि॑ मा वी॒रुद्भ्यः॑ ।परि॑ मा भू॒तात् परि॑ मो॒त भव्या॑द् दि॒शोदि॑शो जङ्गि॒डः पा॑त्व॒स्मान्

pari mā divaḥ pari mā pṛthivyāḥ paryantarikṣāt pari mā vīrudbhyaḥ | pari mā bhūtāt pari mota bhavyād diśodiśo jaṅgiḍaḥ pātvasmān

हिन्दी अर्थ

मावना भौर राष्ट्य बल तथा भोज की पूतिक प्रति (देवाः) राष्टू के ३०८. बह्म होता बरं यज्ञा जकषणा खरंगो भिताः । छे साथ (स्वरवः) यज्ञसतुप आदि (मिताः) उपमित हए है । (अध्व : ३०२ मर्थवेवेद-माष्य का० १९ ।सु०४२

English

A protective charm Never Consumption, never curse touches the man, Arundhatī!

अध्याय १९

श्लोक 35.5

य ऋ॒ष्णवो॑ दे॒वकृ॑ता॒ य उ॒तो व॑वृ॒तेऽन्यः ।सर्वां॒स्तान् वि॒श्वभे॑षजोऽर॒सां ज॑ङ्गि॒डस्क॑रत्

ya ṛṣṇavo devakṛtā ya uto vavṛte'nyaḥ | sarvāṃstān viśvabheṣajo'rasāṃ jaṅgiḍaskarat

हिन्दी अर्थ

निहित की जाती है, उसे समपित की जाती. है 1 पजा के लिये, भौर सके नाम पर हविश्रदान केलिये ही होते है । यथा- यज्ञ किया जाता ह, बह यज्ञ का चिर है"।

English

Whom the delicious odour of the healing Bdellium penetrates Consumptions flee apart from it as from a wild beast fly the deer. If thou, O Bdellium, art produced from Sindhu or hast come from sea,

अध्याय १९

श्लोक 36.1

शतवारो मणिः।१-६ ब्रह्मा।शतवारः।अनुष्टुप्।श॒तवा॑रो अनीनश॒द् यक्ष्मा॒न् रक्षां॑सि॒ तेज॑सा ।आ॒रोह॒न् वर्च॑सा स॒ह म॒णिर्दु॑र्णाम॒चात॑नः

śatavāro maṇiḥ| 1-6 brahmā| śatavāraḥ| anuṣṭup| śatavāro anīnaśad yakṣmān rakṣāṃsi tejasā | ārohan varcasā saha maṇirdurṇāmacātanaḥ

हिन्दी अर्थ

. मँ उपमानोपमेयभाव दर्थाया है । जिस गुणकम की दृष्टि से वस्तुभ्रो मे उपमान का०१९। सु० ४३ भथववेद-माष्य ३०३ इस मनीषारूपी हवि को (प्रतिगृमाय) स्वीकार कीजिये । आपकी कृपासे (यजमनस्य) समपंणखूपो यज्ञ के कर्ता की (कामाः) कामनाएं (सत्याः) मन भौर बुद्धि को कूमागं मे न पतन होने देनेवाले परमेश्वर का (हवे ) मै सदा भाह्वान करता हूं । परमेदवर प्रार्थी को कहता है कि (भिवन)

English

The quality of both have I taken to keep this man unscathed. A protective charm

अध्याय १९

श्लोक 36.2

शॄङ्गा॑भ्यां॒ रक्षो॑ नुदते॒ मूले॑न यातुधा॒न्यः ।मध्ये॑न॒ यक्ष्मं॑ बाधते॒ नैनं॑ पा॒प्माति॑ तत्रति

śṝṅgābhyāṃ rakṣo nudate mūlena yātudhānyaḥ | madhyena yakṣmaṃ bādhate nainaṃ pāpmāti tatrati

हिन्दी अर्थ

अ होमुचम् = परमेवर का सभ्चा-उपासक, परमेदवर से शकितं पाकर, पार्पो से विमूख हो जाता है । भष्विनौ समाज के सुघारके लिये यह् भरावदयकं है कि प्रत्येक परिवार में माता पिता इन्दिय-संयमी होकर ३०४ अयर्ववेद-माष्य का० १९ । घु° ४३ भग्निः = “श्रग्रणी्मवति' (निर० ७।४।१४), तथा ““तदेवाग्नि-

English

Let Kushtha from the Hill of Snow come, a divine deliverer. Banish thou all Consumption, drive all sorceresses far away. Kushtha, three several names hast thou, Naghamāra,

अध्याय १९

श्लोक 36.3

ये यक्ष्मा॑सो अर्भ॒का म॒हान्तो॒ ये च॑ श॒ब्दिनः॑ ।सर्वा॑न् दुर्णाम॒हा म॒णिः श॒तवा॑रो अनीनशत्

ye yakṣmāso arbhakā mahānto ye ca śabdinaḥ | sarvān durṇāmahā maṇiḥ śatavāro anīnaśat

हिन्दी अर्थ

(दीक्षया) ब्रतो-नियमो भरौर (तपसा सह) - तपष्चर्या के साथ वतमानं (वायुः) वायुवत् प्राणप्रदाता परमेदवर (मा) मूके (नयतु) पहुचाए, ले को (दधातु) स्थापित ओर परिपृष्ट करे । (वायवे) प्राणप्रदाता परमेदवर के लिये. (स्वाहा ) यै स्वस्व समर्पण करता हूं । (सूयः) सुयंवत् स्वततप्रकाशमान परमेश्वर (मा) मुभे (नयतु) कहंनाए

English

Naghārisha: let not mishap befall this man, For whom I make a charm of thee at eve, at morning, and by day.

अध्याय १९

श्लोक 36.4

श॒तं वी॒रान॑जनयच्छ॒तं यक्ष्मा॒नपा॑वपत्।दु॒र्णाम्नः॒ सर्वा॑न् ह॒त्वाव॒ रक्षां॑सि धूनुते

śataṃ vīrānajanayacchataṃ yakṣmānapāvapat| durṇāmnaḥ sarvān hatvāva rakṣāṃsi dhūnute

हिन्दी अर्थ

का० १६ । सु° ४३ भ्रथववेद-माष्य ३०४ (चन्द्रः) प्राह्लादकारी षरमेदवर (मा) मुभे (नयतु) पहुंबये, ले चले । मयी या भ्राह्वादमयी हो जाती है यह परमेरवरीय कृपा भौर योगा-

English

Jivalā is thy mother’s name, thy father’s name is Jivala; let not mishap, etc. Thou art the best amid the plants, even as the ox is best of tame, the tiger of rapacious beasts: let not mishap, etc.

अध्याय १९

श्लोक 36.5

हिर॑ण्यशृङ्ग ऋष॒भः शा॑तवा॒रो अ॒यं म॒णिः ।दु॒र्णाम्नः॒ सर्वां॑स्तृ॒ड्ढ्वाव॒ रक्षां॑स्यक्रमीत्

hiraṇyaśṛṅga ṛṣabhaḥ śātavāro ayaṃ maṇiḥ | durṇāmnaḥ sarvāṃstṛḍḍhvāva rakṣāṃsyakramīt

हिन्दी अर्थ

(दीक्षयां) व्रतो निवमों भौर (तपसा सहु) तपरचर्था के साथ वतमान (सोभः) जगदु्पादक परमेदवर (मे) मूक में (पयः) सारिष्ठं वी्यत॑त्त्व ३०६ भयर्ववेद-माष्य का० १९॥ सूु० ४३ (दधातु) स्थापित करे, भ्रौर, परिपृष्ट करे। (सोमाय) जगदुत्पादक परमेरवर के भ्रति (स्वाहा) मै सवेंस्व समर्पित करता हुं । सोमः षु

English

Born thrice from the Ādityas, thrice from Bhrigus, thrice from Angiras’ sons, born from the Visve Devas thrice,

अध्याय १९

श्लोक 36.6

श॒तम॒हं दु॒र्णाम्नी॑नां गन्धर्वाप्स॒रसां॑ श॒तम्।श॒तं श॑श्व॒न्वती॑नां श॒तवा॑रेण वारये

śatamahaṃ durṇāmnīnāṃ gandharvāpsarasāṃ śatam| śataṃ śaśvanvatīnāṃ śatavāreṇa vāraye

हिन्दी अर्थ

(दीक्षया) तरतो नियमों भौर (तपसा सह ) तपश्चर्या के साथ वतमान (ऋ० १। १६४। ४६) ; निर०१३।२।१४। बलम् “या च का च बल- कतिरिन्रकर्मेव तत्” (निङ० ७।३।१०) । बलम् शारीरिक, मानसिक, (दीक्षया) त्रतों नियमों भौर (तपसा सह) तपदचर्या के साथ विद्य-

English

Healer of every malady, that Kushtha stands by Soma’s side. Banish thou all Consumption, drive all sorceresses far away. In the third heaven above us stands the Asvattha tree, the seat of Gods:

अध्याय १९

श्लोक 37.1

बलप्राप्तिः।१-४ अथर्वा।।अग्निः।१ त्रिष्टुप्, २ आस्तारपङ्क्तिः, ३ त्रिपदा महाबृहती, ४ उष्णिक्।इ॒दं वर्चो॑ अ॒ग्निना॑ द॒त्तमाग॒न् भर्गो॒ यशः॒ सह॒ ओजो॒ वयो॒ बल॑म्।त्रय॑स्त्रिंश॒द् यानि॑ च वी॒र्याणि॒ तान्य॒ग्निः प्र द॑दातु मे

balaprāptiḥ| 1-4 atharvā|| agniḥ| 1 triṣṭup, 2 āstārapaṅktiḥ, 3 tripadā mahābṛhatī, 4 uṣṇik| idaṃ varco agninā dattamāgan bhargo yaśaḥ saha ojo vayo balam| trayastriṃśad yāni ca vīryāṇi tānyagniḥ pra dadātu me

हिन्दी अर्थ

वहां (ब्रह्मा ) चारों वेदो का विद्वान् (मा) मे (नयतु) पहुचाने बड़ा परमेदवर । “आ” का सम्बन्ध "नयतु" के साथ होकर “जा नयतु का ३२०. आदुषोऽसि प्रतरणं विप्र भेषृजयुंच्यसे । है । (विप्रम्) मेवावी है, (भेषजम्) सवं रोगो कीः चिकित्सा करनेवाले महौ.

English

There is embodiment of life that dies not: thence was Kushtha born. There moved through heaven a golden ship, a ship with cordage wrought of gold:

अध्याय १९

श्लोक 37.2

वर्च॒ आ धे॑हि मे त॒न्वां॒३ सह॒ ओजो॒ वयो॒ बल॑म्।इ॒न्द्रि॒याय॑ त्वा॒ कर्म॑णे वी॒र्याय॒ प्रति॑ गृह्णामि श॒तशा॑रदाय

varca ā dhehi me tanvāṃ3 saha ojo vayo balam| indriyāya tvā karmaṇe vīryāya prati gṛhṇāmi śataśāradāya

हिन्दी अर्थ

गौर (आपः) है मेरे प्राणो ! तुम दोनों. (शम्) मेरे उपस्थित रोगो की शान्ति, तथा मु (जमयम्) भावी रोगो से निभेय (कृतम्) कीजिये । २०८ भयर्ववेद-माष्य का० १९ ॥। सूर ४४ (भथवं ०४।९।१) कहा है । भक्ष्यम् का थं है-“श्रांखो के लिये हितकर" ।

English

There is embodiment of life that dies not; thence was Kushtha born. Where is the Sinking of the Ship, the summit of the Hill of Snow,

अध्याय १९

श्लोक 37.3

ऊ॒र्जे त्वा॒ बला॑य॒ त्वौज॑से॒ सह॑से त्वा ।अ॒भि॒भूया॑य त्वा रा॒ष्ट्रभृ॑त्याय॒ पर्यू॑हामि श॒तशा॑रदाय

ūrje tvā balāya tvaujase sahase tvā | abhibhūyāya tvā rāṣṭrabhṛtyāya paryūhāmi śataśāradāya

हिन्दी अर्थ

जमति भेषजं गवेऽश्वाय पुरुषाय भेषजम् । सुखं मेषाय मेष्ये ॥ (यजु० ३। रोगों के आक्तमणकोन होने देने के कारण निर्भय बनाता दहै। (यः) जो (हरिमा) विषयों हारा इन्द्रियो का भरपहुरण है, (लायात्यः) जो जाया को जीवन का साधन समना है, (भच्ुभेदः ) जो भषुष्ठित योगाङ्खो मे तृटि भा गई है, (विसल्पकः) जो चित्त का विविध विष्यो में का० १९॥ सुऽ ४४ धथ्वंवेद-माष्य ३०९

English

There is embodiment of life that dies not: thence was Kustha born. Healer of every malady, that Kushtha stands by Soma’s side.

अध्याय १९

श्लोक 37.4

ऋ॒तुभ्य॑ष्ट्वार्त॒वेभ्यो॑ मा॒द्भ्यः सं॑वत्स॒रेभ्यः॑ ।धा॒त्रे वि॑धा॒त्रे स॒मृधे॑ भू॒तस्य॒ पत॑ये यजे

ṛtubhyaṣṭvārtavebhyo mādbhyaḥ saṃvatsarebhyaḥ | dhātre vidhātre samṛdhe bhūtasya pataye yaje

हिन्दी अर्थ

१३२२. आञ्जन एृथिव्यां जातं भद्रं पुरुषजी्नम् । तथा कल्याणकारी है, (परुषजीवनम्) क्षरीरपुरी मे वसनेवालो का जीवन- से रहित (कृणोतु) करे ¦ (रथजूतिम्) हमारे शरीर-रथों मेँ वेगदे, भौर ह्मे (भ्रनागस्षम्) पापों से रदित करे ।

English

Banish thou all Consumption, drive all sorceresses far away. Thou whom Ikshvāku’s ancestor, whom he who well-loved Kushtha, knew,

अध्याय १९

श्लोक 38.1

यक्षमनाशनम्।१-३ अथर्वा।गुल्गुलुः।१ अनुष्टुप्, २ चतुष्पदा उष्णिक्, ३ एकावसाना प्राजापत्याऽनुष्टुप्।न तं यक्ष्मा॒ अरु॑न्धते॒ नैनं॑ श॒पथो॑ अश्नुते ।यं भे॑ष॒जस्य॑ गुल्गु॒लोः सु॑र॒भिर्ग॒न्धो अ॑श्नु॒ते

yakṣamanāśanam| 1-3 atharvā| gulguluḥ| 1 anuṣṭup, 2 catuṣpadā uṣṇik, 3 ekāvasānā prājāpatyā'nuṣṭup| na taṃ yakṣmā arundhate nainaṃ śapatho aśnute | yaṃ bheṣajasya gulguloḥ surabhirgandho aśnute

हिन्दी अर्थ

तथा--पृथिवी मं पदा सुरमा सुख देता, सानुषजीवन को बढाता, शीघ्र मृत्यु से बचाता, शरीर को सक्रिय करता.श्नौरं रोगों का विनाशक है । पुरुषजीवनम्, पुरुषः पुरि वसतीति । त्राण कीजिये । (रसो) हि प्रज्ञानमय ! (मृड) हमे सुखी कीजिये, ताकि हम है परमेदवर ! जाप (सिन्धोः) नदियों भौर समदो के (गर्मः) जन्म- ३१० भरथर्वेवेद-माष्य क० १९ 1 धु ४४

English

Whom Vāyasa and Mātsya knew, hence healer of all ills art thou. O thou who hast all-reaching might drive away Fever, drive it down,

अध्याय १९

श्लोक 38.2

विष्व॑ञ्च॒स्तस्मा॒द् यक्ष्मा॑ मृ॒गा अश्वा॑ इवेरते ।यद् गु॑ल्गु॒लु सै॑न्ध॒वं यद् वाप्यासि॑ समु॒द्रिय॑म्

viṣvañcastasmād yakṣmā mṛgā aśvā iverate | yad gulgulu saindhavaṃ yad vāpyāsi samudriyam

हिन्दी अर्थ

गणो को (पुष्पम्) विकसित करते हँ । (वातः) भाप की वायु (प्राणः) ३२५. देवान् त्रैककुदं परं मा पाहि विशतः । प्राप रक्षा करते है । (मा) मेरी भी (विदवतः) सब भोर के, प्रौर (परि) सब

English

Head racking Fever, tertian, continual, lasting for a year. A prayer for pardon of error in sacrifice, and for wisdom, strength, and life For each defect of mine in voice and spirit I have approached

अध्याय १९

श्लोक 38.3

उ॒भयो॑रग्रभं॒ नामा॒स्मा अ॑रि॒ष्टता॑तये

ubhayoragrabhaṃ nāmāsmā ariṣṭatātaye

हिन्दी अर्थ

प्रकार से (पाहि) भराव रक्षा कीजिये । (बाह्याः) बाहिर की (उत) तथा भवासपद्) हृदय के विशिष्ट-स्थान मँ निजप्रकाशरूप च फल . जाता , तब परमेश्वर (रक्षोहा ) राक्षसी भावों का हनन करता, भौर (भ्रमीव- परमेश्वर भेषल है (मन्त्र १, तथा ६ 1 तथा परमेदवर को “सुभि- शरीर भन्तःकरण इन्द्रिय पौर पाय रादि पद्यु कै रोग नाश करनेवाले

English

One vehement and ardent. With all the Deities, fully approving, Brihaspati supply the want!

अध्याय १९

श्लोक 39.1

कुष्ठनाशनम्।१-१० भृग्वङ्गिराः।कुष्ठः।अनुष्टुप्, २, ३ त्र्यवसाना पथ्यापङ्क्तिः, ४ षट्-पदा जगती, ५ सप्तपदा शक्वरी, ६-८ अष्टिः (५-८ चतुरवसाना)।ऐतु॑ दे॒वस्त्राय॑माणः॒ कुष्ठो॑ हि॒मव॑त॒स्परि॑ ।त॒क्मानं॒ सर्वं॑ नाशय॒ सर्वा॑श्च यातुधा॒न्यः

kuṣṭhanāśanam| 1-10 bhṛgvaṅgirāḥ| kuṣṭhaḥ| anuṣṭup, 2, 3 tryavasānā pathyāpaṅktiḥ, 4 ṣaṭ-padā jagatī, 5 saptapadā śakvarī, 6-8 aṣṭiḥ (5-8 caturavasānā)| aitu devastrāyamāṇaḥ kuṣṭho himavataspari | takmānaṃ sarvaṃ nāśaya sarvāśca yātudhānyaḥ

हिन्दी अर्थ

का०१९. । सुर ४४ भरयववेद-माष्य १११ प्रकाश का स्थान है” (योग० १।३६) पर वाचस्पति टीका ॥. भ्रमीवाः= (निद० ६।३।१२) 1 मन्त्र ऋ० १०।१६२।२ मे अमीवा क्रिमि को योनि का क्रिमि कहा हैभरौर इसके नाशके दो साधन कहे है,पगिनि (प्रग्निहोत्र ?)

English

Disturb ye not our intellect, O Waters, nor the power of prayer_ Glide on your way, strength-giving, invocated: may I be vigor- ous and wise. Mar not our consecrating rite, our intellect, or fervent zeal.

अध्याय १९

श्लोक 39.2

त्रीणि॑ ते कुष्ठ॒ नामा॑नि नद्यमा॒रो न॒द्यारि॑षः ।नद्या॒यं पुरु॑षो रिषत्।यस्मै॑ परि॒ब्रवी॑मि त्वा सा॒यंप्रा॑त॒रथो॒ दिवा॑

trīṇi te kuṣṭha nāmāni nadyamāro nadyāriṣaḥ | nadyāyaṃ puruṣo riṣat| yasmai paribravīmi tvā sāyaṃprātaratho divā

हिन्दी अर्थ

अन्त्र मे प्रार्थी पापों को छृडाने की सहायता परमेदवर से चाहता ( चर्ण ) है पापनिवारक वरणीय परमेषवर (यद) जो ३१२ प्रथववेद-भाष्य का० १६।सू० ४४

English

May through the darkness carry us. 257 A benediction on a newly elected king

अध्याय १९

श्लोक 39.3

जी॒व॒ला नाम॑ ते मा॒ता जी॑व॒न्तो नाम॑ ते पि॒ता।नद्या॒यं पुरु॑षो रिषत्।यस्मै॑ परि॒ब्रवी॑मि त्वा सा॒यंप्रा॑त॒रथो॒ दिवा॑

jīvalā nāma te mātā jīvanto nāma te pitā| nadyāyaṃ puruṣo riṣat| yasmai paribravīmi tvā sāyaṃprātaratho divā

हिन्दी अर्थ

सते ह) यथा-“मुङे दूध-पूत की सौगन्द है, यदिर्गैने. भमुक काम किया हो” । मन्त।८ के भरनुसार सोगन्द खाना अनृतकथन है, क्योंकि सौगन्दं सत्य नहीं हीतीं । एेसे अनृतकथनो से बचे रहने के लिये शक्तिमान् पर- मेदवर से सहायता की प्रार्थना की गई है 1 दुष्कमोँ का निवारण करनेवाला व्यक्ति- ये दोनो (त्वा) भाप के (भनु) अनुकूल (प्रेयतुः) प्रयाण करते है, भ्रपना आचार-व्पवहार रखते हैँ । (तौ) भ्रौर भागे चलने मे असमर्थं हो जाते ह, इसलिये पुनर्जन्म पाकर वे (भोगाय) भवकिष्ट कमो के फलमोग के लिये (पुनः) फिर (भ्रोहृतुः) दारीरों का वहून करते है । पुनः शरीर धारण कर मोग भोगने पडते हैँ । इस सूक्त मे भ्राञ्जन पदं

English

Desiring bliss, at first, light-finding Rishis began religious rite and holy fervour. Thence energy was born, and might, and kingship: so to this man let gathered Gods incline

अध्याय १९

श्लोक 39.4

उ॒त्त॒मो अ॒स्योष॑धीनामन॒ड्वान् जग॑तामिव व्या॒घ्रः श्वप॑दामिव ।नद्या॒यं पुरु॑षो रिषत्।यस्मै॑ परि॒ब्रवी॑मि त्वा सा॒यंप्रा॑त॒रथो॒ दिवा॑

uttamo asyoṣadhīnāmanaḍvān jagatāmiva vyāghraḥ śvapadāmiva | nadyāyaṃ puruṣo riṣat| yasmai paribravīmi tvā sāyaṃprātaratho divā

हिन्दी अर्थ

गौणखूप े। भ्रग्रेजी मे प्रौषधरूप भञ्जन को (10४ कहते है । रोगो का० १६ । सु° ४५ प्रथववेद-भाष्य ३१३ (ऋणात्) ऋण लेने के परनात् ऋणी (इव) जेसे (ऋणम्) छण को, ऋणदाता के (गृहम्) चर (सं नयन्) पहु चाता है, वसे (भराञ्जन) हे कान्तिकारक राजन् (कृत्याकृतः) हिल सेना तेय्यार करनेवाले की

English

them. In praise of Brahma, Prayer, or Devotion Brahma is Hotar, sacrifice: with Brahma are the stakes set up.

अध्याय १९

श्लोक 39.5

त्रिः शाम्बु॑भ्यो॒ अङ्गि॑रेभ्य॒स्त्रिरा॑दि॒त्येभ्य॒स्परि॑ ।त्रिर्जा॒तो वि॒श्वदे॑वेभ्यः ।स कुष्ठो॑ वि॒श्वभे॑षजः सा॒कं सोमे॑न तिष्ठति ।त॒क्मानं॒ सर्वं॑ नाशय॒ सर्वा॑श्च यातुधा॒न्यः

triḥ śāmbubhyo aṅgirebhyastrirādityebhyaspari | trirjāto viśvadevebhyaḥ | sa kuṣṭho viśvabheṣajaḥ sākaṃ somena tiṣṭhati | takmānaṃ sarvaṃ nāśaya sarvāśca yātudhānyaḥ

हिन्दी अर्थ

की (पृष्टीः भपि) हडडी-पक्चलियों को भी (शुण ) तोड-फोड़ दे । पद गृप्तचरों का सुचक है + राजाभ्रों को “्वारचक्षुः" कहा गया है। यथा उस सेनाको उसीके राष्ट् में वापिस चले जाने के लिये बाधितं करना ३१४ प्रथवंवेद-माष्य का० १६ ।सु०४५

English

From Brahma was the Adhvaryu born, from Brahma hidden offering. Brahma is fatness-dropping scoops: with Brahma was the altar reared.

अध्याय १९

श्लोक 39.6

अ॒श्व॒त्थो दे॑व॒सद॑नस्तृ॒तीय॑स्यामि॒तो दि॒वि।तत्रा॒मृत॑स्य॒ चक्ष॑णं॒ ततः॒ कुष्ठो॑ अजायत ।स कुष्ठो॑ वि॒श्वभे॑षजः सा॒कं सोमे॑न तिष्ठति ।त॒क्मानं॒ सर्वं॑ नाशय॒ सर्वा॑श्च यातुधा॒न्यः

aśvattho devasadanastṛtīyasyāmito divi| tatrāmṛtasya cakṣaṇaṃ tataḥ kuṣṭho ajāyata | sa kuṣṭho viśvabheṣajaḥ sākaṃ somena tiṣṭhati | takmānaṃ sarvaṃ nāśaya sarvāśca yātudhānyaḥ

हिन्दी अर्थ

कुटिल हृदयवाला कि (प्रियः) भब तुम्हारा श्रिय बनना चाहता है, वह् (भरनासगः) बदनाम होकर विचरे । ३३२. शपाम ओजसो बाडृधानमपरर्जातमधिं जातवेदसः चतुबीरं पवंदीयं यदाञ्जनं दिश॑ः प्रदिशः करदिच्छिवसत ॥६॥ चार प्रकार की सेना के वीरों वाला (यद्) जो तेरा संनिक-बल है, वह

English

Brahma is worship, lengthened rite, the Rishis who pay sacrifice, the victim’s Immolators. Hail! To him who frees from woe mine hymn I offer, to the Good

अध्याय १९

श्लोक 39.7

हि॒र॒ण्ययी॒ नौर॑चर॒द्धिर॑ण्यबन्धना दि॒वि।तत्रा॒मृत॑स्य॒ चक्ष॑णं॒ ततः॒ कुष्ठो॑ अजायत ।स कुष्ठो॑ वि॒श्वभे॑षजः सा॒कं सोमे॑न तिष्ठति ।त॒क्मानं॒ सर्वं॑ नाशय॒ सर्वा॑श्च यातुधा॒न्यः

hiraṇyayī nauracaraddhiraṇyabandhanā divi| tatrāmṛtasya cakṣaṇaṃ tataḥ kuṣṭho ajāyata | sa kuṣṭho viśvabheṣajaḥ sākaṃ somena tiṣṭhati | takmānaṃ sarvaṃ nāśaya sarvāśca yātudhānyaḥ

हिन्दी अर्थ

शिवाः) भ्रवह्य कल्याणकारिणी (करत्) कर दे । सेनाम्रो के वीर नरोवाला संनिक बल । चतुरंग =-हृस्तीःभरव, रथ, पदाति । बल के भ्रधिष्ठाता + (ते) भ्रापके लिये, इस सैनिक बलः दारा (सर्वा (आयं) है शेष्ठ (सविता इव) सूयं के सदृश (घ्रुवः) घ्व होकर, स्थिर

English

Guardian, as I seek his favour. Accept this offering of mine, O Indra. Fulfilled be all the sacri- ficer’s wishes!

अध्याय १९

श्लोक 39.8

यत्र॒ नाव॑प्र॒भ्रंश॑नं॒ यत्र॑ हि॒मव॑तः॒ शिरः॑ ।तत्रा॒मृत॑स्य॒ चक्ष॑णं॒ ततः॒ कुष्ठो॑ अजायत ।स कुष्ठो॑ वि॒श्वभे॑षजः सा॒कं सोमे॑न तिष्ठति ।त॒क्मानं॒ सर्वं॑ नाशय॒ सर्वा॑श्च यातुधा॒न्यः

yatra nāvaprabhraṃśanaṃ yatra himavataḥ śiraḥ | tatrāmṛtasya cakṣaṇaṃ tataḥ kuṣṭho ajāyata | sa kuṣṭho viśvabheṣajaḥ sākaṃ somena tiṣṭhati | takmānaṃ sarvaṃ nāśaya sarvāśca yātudhānyaḥ

हिन्दी अर्थ

का० १९। सुऽ ४५ भयर्ववेद-भाष्य ३१५ (विद्यः) प्रजाए (ते) भाप के लिये (बलिम्) राज-कर (भमि हरन्तु) सबध्रोरसे भेट करती रै ३१४. आहवेकं मणिमेकं कृुप्व स्नाषठेकेनापिवेकमेषाम् ।

English

With prayer I call on him who frees from trouble, Prince of Gods, Splendid, chief of sacrifices, I call the Waters’ Child and both the Asvins, Vigour is mine, and strength bestowed by Indra.

अध्याय १९

श्लोक 39.9

यं त्वा॒ वेद॒ पूर्व॒ इक्ष्वा॑को॒ यं वा॑ त्वा कुष्ठ का॒म्यः ।यं वा॒ वसो॑ यमात्स्य॒स्तेनासि॑ वि॒श्वभे॑षजः

yaṃ tvā veda pūrva ikṣvāko yaṃ vā tvā kuṣṭha kāmyaḥ | yaṃ vā vaso yamātsyastenāsi viśvabheṣajaḥ

हिन्दी अर्थ

कर उस मँ व्याप्त हो जानेवाला (कृणुष्व ) नियत कीजिये । (एकम्) भौर एक को (मणिम्) सवं्षिरोमणि रूप में नियत कोजिये । (एकेन) एक के दवारा (स्नाहि) सेनिक शिविरों की शुद्धि भौर सफाई कराये । (एकम्) तथा एक को (भ्रा पिब) खानपान अर्थात् रसद का भधिष्ठाता नियत कीजिये । इस प्रकार (चतुभ्यंः नेक तेभ्यः) चार दिशाभों से भ्रानेवाले ३ ३५. अधिर्माभरिनावतु प्राणा्यपानायाथषे बस ओज॑से तेज॑से लिये, (वर्चसे) दीप्ति के लिये, (भोजसे) पराक्रम कै लिये, (तेजसे) प्रताप के लिये, (स्वस्तये) कल्याण कै लिये, तथा (पुभूतये) उत्तम विभुतिके लिये (स्वाहा ) भरपने प्राप को समपित कर् । मा इस पद द्वारा राजा निज व्यक्तित्व का निदा नहीं कर रहा है, ¦ जपितु प्रजाजन भें भात्म-मावना दारा प्रजाका निदंदकररहादहै भौर

English

In praise of Brahma, Prayer, or Devotion Whither men versed in Brahma go, with fervour and the cleans- ing rite,

अध्याय १९

श्लोक 39.10

शी॒र्ष॒लो॒कं तृ॒तीय॑कं सद॒न्दिर्यश्च॑ हाय॒नः ।त॒क्मानं॑ विश्वधावीर्याध॒राञ्चं॒ परा॑ सुव

śīrṣalokaṃ tṛtīyakaṃ sadandiryaśca hāyanaḥ | takmānaṃ viśvadhāvīryādharāñcaṃ parā suva

हिन्दी अर्थ

भे जब यह भेषज “वि भसुपत्"“ विशेषतया फल जाता हैतब यह रोगो का विनाश करता ह । सब रोगों का उद्गमस्थान शरीर का मध्य स्थान ही है । पेट हृदय भौर फफ के स्वस्थ रहते रोग भाक्रमण नीं करते । (राजन् ) है ब्रह्माण्ड के राजा, (वरुणं ) पापनिवारक वरणीय पर- दरस प्रकार के बहुत से प्रसत्य (बाह) कथन करता है । (सहस्रवीयं) हे पापसे भाप (नः) हमें (परि मुञ्च) सर्वथा छड़ादइये 1

English

Gracious to us for lengthened life, propitious let the Mothers be. Vouchsafe to us, ye Asvins twain, such strength as, with atten- dant light,

अध्याय १९

श्लोक 40.1

मेधा।१-४ ब्रह्माः बृहस्पतिः, विश्वे देवाश्च।१ पराऽनुष्टुप् त्रिष्टुप्, २ पुरः ककुम्मत्युपरिष्टाद्बृहती, ३ बृहतीगर्भा, ४ त्रिपदाऽर्षी गायत्री।यन्मे॑ छि॒द्रं मन॑सो॒ यच्च॑ वा॒चः सर॑स्वती मन्यु॒मन्तं॑ ज॒गाम॑ ।विश्वै॒स्तद् दे॒वैः स॒ह सं॑विदा॒नः सं द॑धातु॒ बृह॒स्पतिः॑

medhā| 1-4 brahmāḥ bṛhaspatiḥ, viśve devāśca| 1 parā'nuṣṭup triṣṭup, 2 puraḥ kakummatyupariṣṭādbṛhatī, 3 bṛhatīgarbhā, 4 tripadā'rṣī gāyatrī| yanme chidraṃ manaso yacca vācaḥ sarasvatī manyumantaṃ jagāma | viśvaistad devaiḥ saha saṃvidānaḥ saṃ dadhātu bṛhaspatiḥ

हिन्दी अर्थ

को सभितत करने का निर्दे कर रहा । जैसे कि कहा है-“"'विक्षो ३१६ भवर्वधैद-माष्य का० १९॥। पु ४५ ३३६. दनद मेन्द्ियेणावतु श्राणायापानायाधुषे बरख ओंसे तेजसे

English

Thither let Agni lead me, let Agni give me intelligence, All hail to Agni! Whither etc. Thither let Vāyu lead me, let Vāyu vouchsafe me vital breath.

अध्याय १९

श्लोक 40.2

मा न॒ आपो॑ मे॒धां मा ब्रह्म॒ प्र म॑थिष्टन ।सु॒ष्य॒दा यू॒यं स्य॑न्दध्व॒मुप॑हूतो॒ऽहं सु॒मेधा॑ वर्च॒स्वी

mā na āpo medhāṃ mā brahma pra mathiṣṭana | suṣyadā yūyaṃ syandadhvamupahūto'haṃ sumedhā varcasvī

हिन्दी अर्थ

३३७. सोमो मा सौम्यैनावतु प्राणार्यापानायारयुे चस ओलंसे तेज॑से खस्तये सुभूतये खाहां ॥८॥ ३३८. मर्गो मा भगेनावतु प्राणायापानायारभुषे बैस ओसे तेजसे दारा (मा) मेरी ( भ्रवतु) रक्षा करे । ताकि भ (प्राणाय भ्रपानाय ") ते मन्त्र मेँ “समग्र पेश्वयं” भरथं लिया गया है ।

English

All hail to Vāyu! Whither, etc.

अध्याय १९

श्लोक 40.3

मा नो॑ मे॒धां मा नो॑ दी॒क्षां मा नो॑ हिंसिष्टं॒ यत् तपः॑ ।शि॒वा नः॒ शं स॒न्त्वायु॑षे शि॒वा भ॑वन्तु मा॒तरः॑

mā no medhāṃ mā no dīkṣāṃ mā no hiṃsiṣṭaṃ yat tapaḥ | śivā naḥ śaṃ santvāyuṣe śivā bhavantu mātaraḥ

हिन्दी अर्थ

३६९. मरतां मा गणेरबन्तु भ्राणार्यापानायायुे बसु ओज॑से तेजसे अथवा--मक्तः=शतरुभरो को मारने मेँ कशल सेनिक, ""मारयीति भरत् (उणा० १।९४) । मरुतः भर्थाति मरुत॒नामी सैनिक प्माक्रमण करने मे महावेगी होते हँ -"“मर्तः महव् प्रवन्ति वा” (निर० ११।२।१३ )। मरुत स निक है-इसके लिये देखो (भ्रथवं ० १६ । १३।६, १०) । मन्त्र में राजा मुष्ठानाथं ऋत्विक्-गणों को चाहता है । यज्ञो हारा रोगों का विनाश, वायु

English

Thither let Sūrya lead me, let Sūrya vouchsafe me power of sight. All hail to Sürya Whither, etc. Thither let Chandra lead me, let Chandra vouchsafe me intellect.

अध्याय १९

श्लोक 40.4

या नः॒ पीप॑रद॒श्विना॒ ज्योति॑ष्मती॒ तम॑स्ति॒रः ।ताम॒स्मे रा॑सता॒मिष॑म्

yā naḥ pīparadaśvinā jyotiṣmatī tamastiraḥ | tāmasme rāsatāmiṣam

हिन्दी अर्थ

राजन् ¡ ( ते) तैरी (आयुषे) दीर्घं भ्रायुकै लिये, (वचसे) तेरी दीप्ति बनाए रखने के लिये, (च) ओर (भोजसे) पराक्रम के लिये, (च) भौर (बलाय) सेनिक बल के लिये, (तत् तम्) उस अपराजित महाराज को ३१८ प्रथर्ववेद-माष्य क।० १९ । घू° ४६ जित महाराज (त्वा) तेरी (अमि रक्षतु) सब प्रकार से रक्षा करे। जौर बांघने वाले का । प्रजापति माण्डलिक राजा प्रतीत होता है । प्रजा- पति के राज्य मदो शासन संस्थाए होती है-समा गौर समिति । सभा

English

All hail to Chandra! Whither, etc.

अध्याय १९

श्लोक 41.1

राष्ट्रं बलमोजश्च।१ ब्रह्मा।तपः।त्रिष्टुप्।भ॒द्रमि॒च्छन्त॒ ऋष॑यः स्व॒र्विद॒स्तपो॑ दी॒क्षामु॑प॒निषे॑दु॒रग्रे॑ ।ततो॑ रा॒ष्ट्रं बल॒मोज॑श्च जा॒तं तद॑स्मै दे॒वा उ॑प॒संन॑मन्तु

rāṣṭraṃ balamojaśca| 1 brahmā| tapaḥ| triṣṭup| bhadramicchanta ṛṣayaḥ svarvidastapo dīkṣāmupaniṣeduragre | tato rāṣṭraṃ balamojaśca jātaṃ tadasmai devā upasaṃnamantu

हिन्दी अर्थ

व्यक्तियों की सभा । यथा--“घभां च मा समितिष्चावतां प्रजापतेदु हिषे (भथवं०७।१३।१)। समिति राज्यसभा है । यथा-“राजानः समिताविव" (यजुः १२।८०)।भ्रस्तृतम् =अपरालित; युद्ध में जिसको हिसा या जिसका परा- जोयते कदाचन” ॥ (भरयर्व० १।२०।४) में “जस्तृत” को “महान् शासः" रथात् महाशासक कहा है । तथा यह कहा है कि इसकासखा नतोमारा जाता है, न कभी पराजित होता है 1 यह अमित्रो का पराभव करता है । इसं लिये एेसे महाराजा कै साथ राजनंतिक सन्वि मे, माण्डलिक राजाजों

English

Thither let Soma lead me, let Soma vouchsafe me vital sap. All hail to Soma! Whither, etc. Thither let Indra lead me, let Indra bestow upon me power. All hail to Indra!

अध्याय १९

श्लोक 42.1

ब्रह्मयज्ञः।१-४ ब्रह्मा।ब्रह्म।१ अनुष्टुप्, २ त्र्यवसाना ककुम्मती पथ्यापङ्क्तिः, ३ त्रिष्टुप्, ४ जगती।ब्रह्म॒ होता॒ ब्रह्म॑ य॒ज्ञा ब्रह्म॑णा॒ स्वर॑वो मि॒ताः ।अ॒ध्व॒र्युर्ब्रह्म॑णो जा॒तो ब्रह्म॑णो॒ऽन्तर्हि॑तं ह॒विः

brahmayajñaḥ| 1-4 brahmā| brahma| 1 anuṣṭup, 2 tryavasānā kakummatī pathyāpaṅktiḥ, 3 triṣṭup, 4 jagatī| brahma hotā brahma yajñā brahmaṇā svaravo mitāḥ | adhvaryurbrahmaṇo jāto brahmaṇo'ntarhitaṃ haviḥ

हिन्दी अर्थ

राज्यों मे पारस्परिक राजनंतिक सन्धियां होती है । राजनेतिक सन्धि करानेवाला तीसरा व्यक्ति है, जो कि माण्डविक या महाशासक का राजा को, (च) प्रौर (त्वाम्) बाप महालासकं को (पणयः) कुव्यवहारी तथा (यातुधानाः) यातना देनेवले शत्रु (मा दमन्) दबा न सकं । है माण्ड- संनिक (न तस्तरे) भ्राप का वघ नहीं कर सकते । (च) रौर (निघ्नन्तः) हनन करनेवाने संकड़ों सैनिक (ग) आपका वघ नहीं कर सकते । (तस्मिन्) ३४३. हन्द्रख त्वा वरभैणा परं धापयामो यो देवानामविराजो बभू!

English

Whither, etc. Thither, let Waters lead me, let the Waters give me deathless life. All hail to Waters!

अध्याय १९

श्लोक 42.2

ब्रह्म॒ स्रुचो॑ घृ॒तव॑ती॒र्ब्रह्म॑णा॒ वेदि॒रुद्धि॑ता ।ब्रह्म॑ य॒ज्ञस्य॒ तत्त्वं॑ च ऋ॒त्विजो॒ ये ह॑वि॒ष्कृतः॑ ।श॒मि॒ताय॒ स्वाहा॑

brahma sruco ghṛtavatīrbrahmaṇā vediruddhitā | brahma yajñasya tattvaṃ ca ṛtvijo ye haviṣkṛtaḥ | śamitāya svāhā

हिन्दी अर्थ

(यः) जो (देवानाम्) विजिगीषु संनिकों का (मधिराजः) भ्रधिराट् (त्वा) है राजन् ! श्राप को (परि धापयामः)हम ढकते है । (पुनः) तदन- न्तर (सवं )सब (देवाः) विजिगीषु सेनिक (त्वा) आप के साथ (प्रणयन्तु) (भ्रसिमिन् मणौ ) इस शिरोमणि ( भस्तृतते ) भ्रपराजित महाशासक

English

Whither, etc. Thither let Brahma lead me, let Brahma give Brahma unto me. All hail to Brahma!

अध्याय १९

श्लोक 42.3

अं॒हो॒मुचे॒ प्र भ॑रे मनी॒षामा सु॒त्राव्णे॑ सुम॒तिमा॑वृणा॒नः ।इ॒दमि॑न्द्र॒ प्रति॑ ह॒व्यं गृ॑भाय स॒त्याः स॑न्तु॒ यज॑मानस्य॒ कामाः॑

aṃhomuce pra bhare manīṣāmā sutrāvṇe sumatimāvṛṇānaḥ | idamindra prati havyaṃ gṛbhāya satyāḥ santu yajamānasya kāmāḥ

हिन्दी अर्थ

(यः) जो शत्रु (पृतन्यात्) सेनाभों हारा प्राप का मुकाबिला करना चाहे, , (चृत्) धृत से (उल्लुप्तः) लुप्त न होनेवाली भरषितु चमकनेवाली प्रकार की जोवनीय सामभ्नर्यो वाला, (शतयोनिः) संकड़ों प्रकार के गृहं जनों के लिये शान्तिप्रद, (च) भ्रौर (मयोभूः) सुखप्रद, (च) भौर (ऊजं-

English

A curative and protective charm Thou art the lengthening of life, thy name is Universal Cure:

अध्याय १९

श्लोक 42.4

अं॒हो॒मुचं॑ वृष॒भं य॒ज्ञिया॑नां वि॒राज॑न्तं प्रथ॒मम॑ध्व॒राणा॑म्।अ॒पां नपा॑तम॒श्विना॑ हुवे॒ धिय॑ इन्द्रि॒येण॑ त इन्द्रि॒यं द॑त्त॒मोजः॑

aṃhomucaṃ vṛṣabhaṃ yajñiyānāṃ virājantaṃ prathamamadhvarāṇām| apāṃ napātamaśvinā huve dhiya indriyeṇa ta indriyaṃ dattamojaḥ

हिन्दी अर्थ

सब पोर से (रक्षतु) सुरक्षित करे । का०१९ । सुऽ ४७ भरथवेवेद-माष्य ३२९१ त्रुविनाशक, भ्रौर (सजातानाम्) समानपदवालों या सजातियों को (वरी) वश मेँ करनेवाले (श्रसद्) हो जायें, (तथा) उस प्रकार का(त्वा) भाप

English

Then, Ointment! send felicity; Waters, send happiness and peace. The yellow hue, the feverish heat, the shooting pain that rends II the limbs, All the consumptive malady let the Ointment drive from out thy frame.

अध्याय १९

श्लोक 43.1

ब्रह्मा।१-८ ब्रह्मा।ब्रह्म, बहुदैवत्यम्।त्र्यवसाना शङ्कुमती पथ्यापङ्क्तिः।यत्र॑ ब्रह्म॒विदो॒ यान्ति॑ दी॒क्षया॒ तप॑सा स॒ह।अ॒ग्निर्मा॒ तत्र॑ नयत्व॒ग्निर्मे॒धा द॑धातु मे ।अ॒ग्नये॒ स्वाहा॑

brahmā| 1-8 brahmā| brahma, bahudaivatyam| tryavasānā śaṅkumatī pathyāpaṅktiḥ| yatra brahmavido yānti dīkṣayā tapasā saha| agnirmā tatra nayatvagnirmedhā dadhātu me | agnaye svāhā

हिन्दी अर्थ

(रात्रि) है रात्रि! (पितुः) पितुभ्रुत या पालकं पजन्य के (घामरभिः) से भर दिया है । (ब्रहती ) बहुत फेलकर तू (दिवः) द्युलोक के (सदांसि) स्थानों भी ( वि तिष्ठसे ) विविध खण्डो मं स्थित होतीदहै, जबकि (त्वेषं तमः) चमकता भन्धकार (भ्रा वतंते) रत्रिमंभाजातादहै। वेदिक वणन परमेदवर कवि के काव्यख्प है । इसीलिये परमेश्वर को कवि (यजु° ४०।८), भ्रौर वेद को काव्य (भ्रथवं० १०।८।३२) कहा वर्णन कवि सम्मत शेली का है । पितुः अथर्ववेद मे पजन्य को पिता कहा है । यथा--“माता भुमिः पुत्रो अहं परथिव्याः। पर्जन्यः पितासडनः

English

Let the Salve born upon the earth, benignant, giving life to man.

अध्याय १९

श्लोक 43.2

यत्र॑ ब्रह्म॒विदो॒ यान्ति॑ दी॒क्षया॒ तप॑सा स॒ह।वा॒युर्मा॒ तत्र॑ नयतु वा॒युः प्रा॒णान् द॑धातु मे।वा॒यवे॒ स्वाहा॑

yatra brahmavido yānti dīkṣayā tapasā saha| vāyurmā tatra nayatu vāyuḥ prāṇān dadhātu me| vāyave svāhā

हिन्दी अर्थ

रालों मे नोल-नभ के खण्ड दृष्टिगोचर होते दँ ।. इन्दं “त्वेषंतमः" कटा ३२२ धवर्वेवेद-माष्य का० १९॥। सुण ४७ (यस्याः) जिस रात्री का (पारम्) पार (ददुशे न) दिखाई नहीं

English

Make the swift rider on the car sinless, exempt from sudden death. Preserve our breath, O Vital Breath, have mercy on our life, O Life.

अध्याय १९

श्लोक 43.3

यत्र॑ ब्रह्म॒विदो॒ यान्ति॑ दी॒क्षया॒ तप॑सा स॒ह।सूर्यो॑ मा॒ तत्र॑ नयतु॒ चक्षुः॒ सूर्यो॑ दधातु मे ।सूर्या॑य॒ स्वाहा॑

yatra brahmavido yānti dīkṣayā tapasā saha| sūryo mā tatra nayatu cakṣuḥ sūryo dadhātu me | sūryāya svāhā

हिन्दी अर्थ

मे (विदम् ) वह सब (नि विषते) विश्वामपाजाता दहै (यद्) जो कि (एजति) वेष्टा वाला है । (उवि) है भ्राच्छादन करनेवाली ! (तमस्वति रात्रि) है तमोमयी रात्रि! (अरिष्टासः) अहिसित हृए हम (तै) तेरे तेरे पार को (अक्ीमहि) हम प्राप्त करे । ३५१. हौ चै ते वश्यतिदच॑ ते राश्येकादशचावमाः । (रेवति) है सम्पतु-शालिनि रात्रि ! (षष्टिः चषट् च) भौर जो

English

From snares of Nirriti do thou, O Nirriti, deliver us. Thou art the babe of Sindhu, thou art lightnings’ flower, wind, breath, and Sun: thou art the

अध्याय १९

श्लोक 43.4

यत्र॑ ब्रह्म॒विदो॒ यान्ति॑ दी॒क्षया॒ तप॑सा स॒ह।च॒न्द्रो मा॒ तत्र॑ नयतु॒ मन॑श्च॒न्द्रो द॑धातु मे ।च॒न्द्राय॒ स्वाहा॑

yatra brahmavido yānti dīkṣayā tapasā saha| candro mā tatra nayatu manaścandro dadhātu me | candrāya svāhā

हिन्दी अर्थ

द्वौचतेः विशतिः च) भौर जो तेरे २२ द्रष्टारहै, (राति). ह रात्नि (ते) जो तेरे (एकादश अवमाः) कम पे कम ११ द्रष्टा हैः का० १९ । सु° ४७ प्रथवेवेद-माष्य ३२३ हमारी (पाहि) तु रक्षा कर, (दिवः दुहितः) है धुलोक की पृत्नि! (नु) भवदय (पाहि) रक्षाकर।

English

eye and milk of heaven. Gods’ Ointment from the Three Peaked Hill, preserve thou me on every side. No plants of earth surpass thee, none from mountain or from cultured ground.

अध्याय १९

श्लोक 43.5

यत्र॑ ब्रह्म॒विदो॒ यान्ति॑ दी॒क्षया॒ तप॑सा स॒ह।सोमो॑ मा॒ तत्र॑ नयतु॒ पयः॒ सोमो॑ दधातु मे ।सोमा॑य॒ स्वाहा॑

yatra brahmavido yānti dīkṣayā tapasā saha| somo mā tatra nayatu payaḥ somo dadhātu me | somāya svāhā

हिन्दी अर्थ

च्छायाम्) । रात्री मँ शयन से प्राणियों में पुनः बलसंचार हो जाता है इस- लिये रात्री “वाजिनी” है । वाजः बलनाम (निधं २1९) । रात्री के भरथवा- एकादश, भरवमाः-- रात्री मेँ सोने पर प्राणमयकोश कै १७ म्रादि, धपान के कमं हँ मलमूत्रत्याग आदि, उदरस्थ समान के कमं है परि

English

Now hath it gently crept within, fiend-slaying, chasing malady. And driving all diseases hence, and evil omens, banished them.

अध्याय १९

श्लोक 43.6

यत्र॑ ब्रह्म॒विदो॑ यान्ति॑ दी॒क्षया॒ तप॑सा स॒ह।इन्द्रो॑ मा॒ तत्र॑ नयतु॒ बल॒मिन्द्रो॑ दधातु मे ।इन्द्रा॑य॒ स्वाहा॑

yatra brahmavido yānti dīkṣayā tapasā saha| indro mā tatra nayatu balamindro dadhātu me | indrāya svāhā

हिन्दी अर्थ

है, व्यान सर्वंशषरीर व्यापी है भौर रुधिर का संचारकरतादहै, नाग उकार भौर छींक भरादिका कारण है, कूं द्वारा निमीलन. भौर संकोचन आदि भ्रथवंवेद ङे अनुसार मनुष्य पे ९ कोश है । यथा--“तस्येसे नवकोशा प्रथमतः विद्यमान रहती है । उपरिलिखित नवकोशो मे जीवात्मसत्ता तो

English

Full many a falsehood, O thou King Varuna, man hath uttered here: Do thou who hast a thousand powers preserve us from that misery. If we have cried, O Waters! Cows! if we have cried, O

अध्याय १९

श्लोक 43.7

यत्र॑ ब्रह्म॒विदो॒ यान्ति॑ दी॒क्षया॒ तप॑सा स॒ह।आपो॑ मा॒ तत्र॑ नयत्व॒मृतं॒ मोप॑ तिष्ठतु ।अ॒द्भ्यः स्वाहा॑

yatra brahmavido yānti dīkṣayā tapasā saha| āpo mā tatra nayatvamṛtaṃ mopa tiṣṭhatu | adbhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

शक्तया प्राणमय कोश मेँ भी लीन रहती है । प्राणमयकोश की निज ११ कोश मे ६६ शक्तियाँ, पांचवें कोम ५५ राक्तियां, चौथे कोश मे ४४ शक्तियां, तीसरे कोश भं ३३ चक्तियां, दूसरे कोशम २२ शक्तिर्या, भौर शन्तिम कोद अर्थात् भन्नमयकोदा शरीर मेँ “एकादका भरवमाः" कम से कम १ शक्तियां निहित ह । इसप्रकार ९ कोशो की प्रपनी-भरपनी जागरित है 1 यहां भन्नमय कोश को प्रथम कोषय मानकर, ।इससे पुर्वं के कारणरूप कोशो समेत, संख्या € जाननी चाहिए । लिखितरूप भरे बार्येमाषा में दिया जाता है । यथा--"“उदहालक आरुणि ने

English

Varuna! For this endowed with thousand powers! deliver us from misery.

अध्याय १९

श्लोक 43.8

यत्र॑ ब्रह्म॒विदो॒ यान्ति॑ दी॒क्षया॒ तप॑सा स॒ह।ब्र॒ह्मा मा॒ तत्र॑ नयतु ब्र॒ह्मा ब्रह्म॑ दधातु मे ।ब्र॒ह्मणे॒ स्वाहा॑

yatra brahmavido yānti dīkṣayā tapasā saha| brahmā mā tatra nayatu brahmā brahma dadhātu me | brahmaṇe svāhā

हिन्दी अर्थ

यह् ले भाया + इसे तोड़ ? । भगवन् ! तोड़ दिया । इसमे तु क्या देखता , है ? । भगवन् ! भ्रणुरूप ये दाने देखता हूं । इन दानो मेँ से एक दाना तोड़ ? । भगवन् ! तोड़ दिया । इसमे तु क्या देखता है ? । भगवन् दरु न्धी देखता देखता ॥१॥ उसे उदहालक भरारखुणि बोला है प्रिय जिस सूक्ष्म मय बुद्धि कोच मे लीन रहते, भौर इसी मुल. को से करदः भराविभूत मानौ अद्य गरबा सेनो माबीनां बकं रशत ॥६॥

English

Mitra and Varuna, O Salve have closely followed after thee May they, when they have followed thee afar, restore thee for our use. A curative and protective charm

अध्याय १९

श्लोक 44.1

भैषज्यम्।१-१० भृगुः।आञ्जनम्, ८-९ वरुणः।अनुष्टुप्, ४ चतुष्पदा शङ्कुमत्युष्णिक्, ५ निचृद्विषमा त्रिपदा गायत्री।आयु॑षोऽसि प्र॒तर॑णं॒ विप्रं॑ भेष॒जमु॑च्यसे ।तदा॑ञ्जन॒ त्वं शं॑ताते॒ शमापो॒ अभ॑यं कृतम्

bhaiṣajyam| 1-10 bhṛguḥ| āñjanam, 8-9 varuṇaḥ| anuṣṭup, 4 catuṣpadā śaṅkumatyuṣṇik, 5 nicṛdviṣamā tripadā gāyatrī| āyuṣo'si prataraṇaṃ vipraṃ bheṣajamucyase | tadāñjana tvaṃ śaṃtāte śamāpo abhayaṃ kṛtam

हिन्दी अर्थ

कोा० १९१ सुऽ ४७ भरथरववेद-भाष्य ३२५ (स्तेनः) चोर (नः गवाम्) हमारी गौर्भो का (ईशत मा) प्रधीदवरनहो, तथा (वृकः) भेडिया या लुटेरा (भ्रवीनाम्) मेड का (ईरात मा) अषी- ३९५३. माश्वानां भद्रे तस्करो मा मणां यातुधान्यः । प्रमेभिंः प्थिमि सेनो धाबतु तस्क॑रः । करः । (स्तेनः) चोर तथा (तस्करः) लुटेरा हम से डर कर (परमेभिः) दुर-दुर के (पथिभिः) मागो से (धावतु) भाग जाय । (दत्वती) दान्तोवाली

English

As debt from debt repay and send sorcery to the sorcerer’s house. Split, Salve! the cruel villain’s ribs whose evil eye bewitches us.

अध्याय १९

श्लोक 44.2

यो ह॑रि॒मा जा॒यान्यो॑ऽङ्गभे॒दो वि॒सल्प॑कः ।सर्वं॑ ते॒ यक्ष्म॒मङ्गे॑भ्यो ब॒हिर्नि॑र्ह॒न्त्वाञ्ज॑नम्

yo harimā jāyānyo'ṅgabhedo visalpakaḥ | sarvaṃ te yakṣmamaṅgebhyo bahirnirhantvāñjanam

हिन्दी अर्थ

(वृकस्य) भेदिये के (हन् ) दो जबर को (जम्भयाः) ठीले कर दे, तोड़. दे । (तिन) उससे (तम्) उस को (बहि) मार डान्न, जैसे फि किसी को (द्रपदे) कठ भर्थात् पैरों की बेडीं डाल कर भार दिया जाता है । ३२९ भयर्ववेद-माष्य का० १९॥ सू° ४८ तृष्टधूमम् = जहरीने सपक एकार भी धातक होते है। एसे साप के विष के प्रवेश दारा व्यक्तिकी जिह्वा भौर मुख खुदकदहोजते है जिख से प्यास लगती है । प्यास लगने पर पानी देना घातक हो जाता है 1 धूमम् (रात्रि) हि रात्रि! (त्वयि) तु में (वसामसि) हम निवास करते

English

Strong as four heroes, mountain born, this Ointment make for thee quarters and mind-points auspicious!

अध्याय १९

श्लोक 44.3

आञ्ज॑नं पृथि॒व्यां जा॒तं भ॒द्रं पु॑रुष॒जीव॑नम्।कृ॒णोत्वप्र॑मायुकं॒ रथ॑जूति॒मना॑गसम्

āñjanaṃ pṛthivyāṃ jātaṃ bhadraṃ puruṣajīvanam| kṛṇotvapramāyukaṃ rathajūtimanāgasam

हिन्दी अर्थ

हमारी (गोभ्यः) गौं को (भदवेभ्यः) भष्वों को (पृरषेम्यः) पृषो को ३।६) । गृह (निषं° ३।४) । वैदिक वर्णन प्रायः कवितामय होते है वतं- मान सूक्त का वर्णन भी कवितामय है । रात्रीं म चोर लुटेरे तथा हि्तप्राणी जाताहै। यथा रात्री कै समय भ्राक्रमणकारियों को भगा देना चाहिए, प्रौर हिलतप्राणियो के वघ में संकोच न करना चाहिए, भौर दस निमित्त रात्री मँ सावधान रहना चाहिए ।

English

On thee is laid the Chaturvira Ointment: let all the regions give thee peace and safety. Secure like precious Savitar thou standest: to thee let all these regions bring their tribute. Make one thy salve, thine amulet another, drink one, and with another bathe thy body.

अध्याय १९

श्लोक 44.4

प्राण॑ प्रा॒णं त्रा॑य॒स्वासो॒ अस॑वे मृड ।निरृ॑ते॒ निरृ॑त्या नः॒ पाशे॑भ्यो मुञ्च

prāṇa prāṇaṃ trāyasvāso asave mṛḍa | nirṛte nirṛtyā naḥ pāśebhyo muñca

हिन्दी अर्थ

सबश्रोरसे बन्धे घरके भीतर है, (तानि) उन वस्तुओं को (ते) तेरे परति (परि दद्मसि) हम सुपुदं करते है भर्थात् घर कै बाहर भौर मीतर का० १९ । सुऽ ४८ भथवंवेद-माष्य ३२७ इषा नो अदे परिं ददातवहुस्त॒भ्थं विभावरि ॥२॥ (मातः) माता के सदृश सुख प्रदायिनी (रात्रि) है राति (उषसे)

English

So let the Chaturvira keep us guarded from the four bonds of Nirriti and Grāhi.

अध्याय १९

श्लोक 44.5

सिन्धो॒र्गर्भो॑ऽसि वि॒द्युतां॒ पुष्प॑म्।वातः॑ प्रा॒णः सूर्य॒श्चक्षु॑र्दि॒वस्पयः॑

sindhorgarbho'si vidyutāṃ puṣpam| vātaḥ prāṇaḥ sūryaścakṣurdivaspayaḥ

हिन्दी अर्थ

उषा (नः) हमें (श्रह्ण) दिन कै प्रति (परि ददातु) सोपि । (विभावरि) है चमकीली रात्रि । (महः) दिन (तुभ्यम्) तेरे प्रति पूनः हमे संपि। विभावरि चान्द, तारागणों के कारण चमकीली रत्री (इदम्) यह (यत् कि च) जो कु (सरीसुपम्) सरके वाला खपं

English

May Agni protect me with fire for inspiration and expiration, for strength, for energy, for vigour, for weal and prosperity. All Hail!

अध्याय १९

श्लोक 44.6

देवा॑ञ्जन॒ त्रैक॑कुदं॒ परि॑ मा पाहि वि॒श्वतः॑ ।न त्वा॑ तर॒न्त्योष॑धयो॒ बाह्याः॑ पर्व॒तीया॑ उ॒त

devāñjana traikakudaṃ pari mā pāhi viśvataḥ | na tvā tarantyoṣadhayo bāhyāḥ parvatīyā uta

हिन्दी अर्थ

(सा) वह तु (पदचात्) पदिचम ते, (सा) वहतु (परः) सामने दक्षिण से (पाहि) हमे सुरक्षित कर । (विभावरि) है चमकीली. रात्रि (नः) हम (गोपाय) सुरक्षित कर, (इह) यहां पर् (ते) तेरे (स्तोतांरः) हम परमेश्वर के स्तवन कीर्तन करनेवाले हं । विभावरि = वि+भा रात्चि में चान्वःभ्रौर तारागण द्वारा चमकोली । ..

English

May Indra protect me with his Indra-power for inspiration, etc. May Soma protect me with Soma-power, etc.

अध्याय १९

श्लोक 44.7

वी॒३दं मध्य॒मवा॑सृपद् रक्षो॒हामी॑व॒चात॑नः ।अमी॑वाः॒ सर्वा॑श्चा॒तय॑न् ना॒शय॑दभि॒भा इ॒तः

vī3daṃ madhyamavāsṛpad rakṣohāmīvacātanaḥ | amīvāḥ sarvāścātayan nāśayadabhibhā itaḥ

हिन्दी अर्थ

३२८ प्रथर्ववेद-माष्य . का° १९ । पुग ४८. योग का प्रभ्यास करते ह, (च) भौर (ये) नो (सूतेषु) प्राणियों की (जाग्रति) जागरूक भर्थात् सावधान रहते है, ओर (तै) वे (नः) हमारे

English

May Bhaga with good fortune protect me, etc. May the Maruts protect me with their troops for inspiration and expiration, for strength, for energy, for vigour, for weal and prosperity. All Hail!

अध्याय १९

श्लोक 44.8

ब॒ह्वि॒३दं रा॑जन् वरु॒णानृ॑तमाह॒ पूरु॑षः ।तस्मा॑त् सहस्रवीर्य मु॒ञ्च नः॒ पर्यंह॑सः

bahvi3daṃ rājan varuṇānṛtamāha pūruṣaḥ | tasmāt sahasravīrya muñca naḥ paryaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

वर्णेन है । योगिजन् घब प्राणियों की सदा उन्नति में लगे रहते है ।वे पशुभरों तकं की रक्षा करते भौर हिसा से खदा परे रहते है, तथा सब लोगों ३६१. वेद बे रात्रि ते नाम॑ षृताची नाम् बा जसि । तांत्वां भरद्वाजो वेदसा नो वित्तेऽधिं जाग्रति ॥६॥ (रात्रि) है रात्रि! (वै) निश्चये (ते) तेरा (नाम) नाम (वेव) मै जानता हूं (वं) निश्चय से (घृताची) ज्ञान प्रकाश्च देनेवाली, (नाम)

English

A charm accompanying investiture with an amulet that ensures safety and victory For manly strength Prajāpati bound thee on first, invincible.

अध्याय १९

श्लोक 44.9

यदापो॑ अ॒घ्न्या इति॒ वरु॒णेति॒ यदू॑चि॒म।तस्मा॑त् सहस्रवीर्य मु॒ञ्च नः॒ पर्यंह॑सः

yadāpo aghnyā iti varuṇeti yadūcima| tasmāt sahasravīrya muñca naḥ paryaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

इस नामसेतु सिद्ध (भसि) है। (भरद्वाजः) ज्ञानभरा मेरा मन (तां त्वाम्) उस तुक को एेसा (वेद) जानता है, (सा) वह तु (नः) हरमे (वित्ते देने ® लिये (जाग्रति) जागरूक रहते है । घृताची =घृत (प्रकाश, घु

English

This for long life on thee I bind for splendour, strength, and energy. Invincible, let it guard thee well. Erect, invincible, be this man’s watchful keeper: let not the

अध्याय १९

श्लोक 44.10

मि॒त्रश्च॑ त्वा॒ वरु॑णश्चानु॒प्रेय॑तुराञ्जन ।तौ त्वा॑नु॒गत्य॑ दू॒रं भो॒गाय॒ पुन॒रोह॑तुः

mitraśca tvā varuṇaścānupreyaturāñjana | tau tvānugatya dūraṃ bhogāya punarohatuḥ

हिन्दी अर्थ

(भरघायुः) तथा हत्या चाहनेवाला (परेण भ्रषतु) दुर के मागं द्वारा चला तस्करः तत्करः उस पापकमं को करनेवाला (नि० ३।३।१५)। थवा उपक्षयकारी, तसु (उपक्षये) +-करः. । वत्वती रज्जुः ( रूप- (भध) तथां (रात्रि) है राति! तु (तृष्टधूमम्) पिपासाजनक

English

Whatever evil dream we have, what’er befall our kine or home, Be this that is salubrity, the evil-hearted’s foe applied. Increasing from the Waters’ strength and vigour, sprung into life from Agni Jātavedas,

अध्याय १९

श्लोक 45.1

आञ्जनम्।१-१० भृगुः।आञ्जनम्, मन्त्रोक्ताः।१-२ अनुष्टुप्, ३-४ त्रिष्टुप्, ६-१० एकावसाना महाबृहती ( ६ विराट् ७-१० निचृत्)।ऋ॒णादृ॒णमि॑व सं॒नय॑न् कृ॒त्यां कृ॑त्या॒कृतो॑ गृ॒हम्।चक्षु॑र्मन्त्रस्य दु॒र्हार्दः॑ पृ॒ष्टीरपि॑ शृणाञ्जन

āñjanam| 1-10 bhṛguḥ| āñjanam, mantroktāḥ| 1-2 anuṣṭup, 3-4 triṣṭup, 6-10 ekāvasānā mahābṛhatī ( 6 virāṭ 7-10 nicṛt)| ṛṇādṛṇamiva saṃnayan kṛtyāṃ kṛtyākṛto gṛham| cakṣurmantrasya durhārdaḥ pṛṣṭīrapi śṛṇāñjana

हिन्दी अर्थ

से भात्म रक्षा करनी चाहिए । रात्रि मेँ परमेदवर का स्तवन तथा योगा- नुष्ठान लाभप्रद है । योमानुष्ठान करनेवालों को प्राणिवगं की तेवा तथा प्रश्ुगं की रक्षा करनी चाहिए पद्यु हिसा नहीं करनी चाहिए तथा निब का० १६९ ॥ सुण ४९ धथर्ववेद-भाष्य ३२९ (दमूनाः) गृहकायों प दत्तचित्त, (युवतिः) युवावस्थावाली, (देवस्य सवितुः मगस्य) दिष्य गुणों वाले, सन्तानोत्पादन मेँ समथं तथा सेवनीय या माग्यश्चाली पति की (योषा) पत्नी के सदृश (रा्री) रात्री (इषिरा) शोभाभरी रात्री ने (महित्वा) निज महत्ता के कारण (चावापृथिवी) चू-

English

Panis or the sorcerers harm thee. 259

अध्याय १९

श्लोक 45.2

यद॒स्मासु॑ दु॒ष्वप्न्यं॒ यद् गोषु॒ यच्च॑ नो गृ॒हे।अना॑मग॒स्तं च॑ दु॒र्हार्दः॑ प्रि॒यः प्रति॑ मुञ्चताम्

yadasmāsu duṣvapnyaṃ yad goṣu yacca no gṛhe| anāmagastaṃ ca durhārdaḥ priyaḥ prati muñcatām

हिन्दी अर्थ

= भर्व (सूयं ) यथा- “एकः भ्रष्वो वहति सप्तनामा” (निर० ४।५।२७) मे “एकोऽश्वो वहति सप्तनासादित्यः (निद०४।५।२७) + (क्षय ) +-मा मता से पहुंच जातो है । संभृतश्रीः चान्द भौर नक्षत्रों तथा तारागणों की शोमावाली रात्रि। ३३० धयर्ववेद-भाष्य का० १९ ॥ सुऽ ४९ महाकाश मे (भरण्हन्त ) उदित हृए है । (भद्रा) सुखदायिनी (सा रात्री) वह रात्री (भ्रनु उदाती) मानो हमारां निरन्तर कल्याण चाहती हई,

English

Whom even a hundred combatants, striking, have failed to over- come. Invincible, let it guard thee well.

अध्याय १९

श्लोक 45.3

अ॒पामू॒र्ज ओज॑सो वावृधा॒नम॒ग्नेर्जा॒तमधि॑ जा॒तवे॑दसः ।चतु॑र्वीरं पर्व॒तीयं॒ यदाञ्ज॑नं॒ दिशः॑ प्र॒दिशः॑ कर॒दिच्छि॒वास्ते॑

apāmūrja ojaso vāvṛdhānamagnerjātamadhi jātavedasaḥ | caturvīraṃ parvatīyaṃ yadāñjanaṃ diśaḥ pradiśaḥ karadicchivāste

हिन्दी अर्थ

की सहायता के लिये, निज धारक शौर पोषक-सामभ्री के साथ, म्रा उप- भस्मांसतरायख नयणि जाता अथो यानि गव्यानि पुष्ट्या ॥द॥ (वर्य) है घेष्ठ रात्रि ! (बन्दे) ् तेरा अभिवादन करता हूं । (सुभगे)

English

Around thy limbs I place the mail of Indra who hath become the Gods’ imperial Sovran. Again let all the Deities bring thee hither. Invincible let it guard thee well. One and a hundred manly powers, a thousand lives hath this

अध्याय १९

श्लोक 45.4

चतु॑र्वीरं बध्यत॒ आञ्ज॑नं ते॒ सर्वा॒ दिशो॒ अभ॑यास्ते भवन्तु ।ध्रु॒वस्ति॑ष्ठासि सवि॒तेव॒ चार्य॑ इ॒मा विशो॑ अ॒भि ह॑रन्तु ते ब॒लिम्

caturvīraṃ badhyata āñjanaṃ te sarvā diśo abhayāste bhavantu | dhruvastiṣṭhāsi saviteva cārya imā viśo abhi harantu te balim

हिन्दी अर्थ

भन्त्रद्रारा वधू का भी निर्वेदा किथादहै। वर कहतादहैकिटिवरण की पृष्टिद्रारा हम कुलवासियो की रक्षा करती रह । का० १९ सु० ४९ प्रथर्ववेद-भाष्य ३३१ हाथी के, बाध भौर चीते के (वर्चः) तेज को (भ्राददे) हर लेतीहै।

English

Amulet, unconquered ever. Go forth a tiger, strike down all thy foemen: let him who would oppose fall low beneath thee.

अध्याय १९

श्लोक 45.5

आक्ष्वैकं॑ म॒णिमेकं॑ कृष्णुष्व स्ना॒ह्येके॒ना पि॒बैक॑मेषाम्।चतु॑र्वीरं नैरृ॒तेभ्य॑श्च॒तुर्भ्यो॒ ग्राह्या॑ ब॒न्धेभ्यः॒ परि॑ पात्व॒स्मान्

ākṣvaikaṃ maṇimekaṃ kṛṣṇuṣva snāhyekenā pibaikameṣām| caturvīraṃ nairṛtebhyaścaturbhyo grāhyā bandhebhyaḥ pari pātvasmān

हिन्दी अर्थ

(मायुम्) बोलचालको भीहरलेतीदहै। है रात्री! तु (विभाती) रात्रिकाल मे चमकती हुई (पुर रूपाणि) भरपने नानारूपों को (कृणुषे) प्रकट करती है । (बन्दे) मै भ्रमिवादन करता हूं । (हिमस्य माता) रात्री के समान शीतल दान्ति की माता, (नः) हमारे लिये (सुहवा) सुगमतया भाहानयोग्या पहचानिये । (येन) निस स्तुति द्वारा (विवासु दिक्षु) सब दिशो में

English

Invincible, let it guard thee well. Drawn forth from butter, rich in milk and sweetness, hundred- lived, thousand-homed, bestowing vigour,

अध्याय १९

श्लोक 45.6

अ॒ग्निर्मा॒ग्निना॑वतु प्रा॒णाया॑पा॒नायायु॑षे॒ वर्च॑स॒ ओज॑से॒ तेज॑से स्व॒स्तये॑ सुभू॒तये॒ स्वाहा॑

agnirmāgnināvatu prāṇāyāpānāyāyuṣe varcasa ojase tejase svastaye subhūtaye svāhā

हिन्दी अर्थ

को उपमानं भ्रौर जगन्माता को उपमेय मानकर वर्णन किया गया है। काल में निदवल-घ्यान द्वारा की गई उपासना मे, परमेदवरं सम्बन्धी भनु- “मनसा परिक्रमा” की विधि हारा स्तवनं करना चाहिए । ३९६७, सोस्य नो विभावरि रात्रि राजैव जोषसे ।

English

Kindly, delightsome, full of sap, and mighty, invincible let it guard thee well. That thou mayst be pre-eminent, slayer of rivals, rivalless,

अध्याय १९

श्लोक 45.7

इन्द्रो॑ मेन्द्रि॒येणा॑वतु प्रा॒णाया॑पा॒नायायु॑षे॒ वर्च॑स॒ ओज॑से॒ तेज॑से स्व॒स्तये॑ सुभू॒तये॒ स्वाहा॑

indro mendriyeṇāvatu prāṇāyāpānāyāyuṣe varcasa ojase tejase svastaye subhūtaye svāhā

हिन्दी अर्थ

(राति) है रात्री के. मान सुखदांयिके, (विमावरि) ज्योतति्मेयी हृद (उषसः) उषाओं को (अनु ) लक्ष्य करके, , भर्यात् उषाकाल के चमकंते शान्त कर देनेवाली, उन का वध करनेवाली है (दधिषे) इस प्रकार हमारा तू घारण-पोषण करती ह १. (ये) जो (मम) मेरे (घना-=धनानि)

English

May Savitar cause thee to be chief and controller of thy kin. Invincible, let it guard thee well. A hymn to Night for protection from fiends, robbers, snakes and wolves

अध्याय १९

श्लोक 45.8

सोमो॑ मा॒ सौम्ये॑नावतु प्रा॒णाया॑पा॒नायायु॑षे॒ वर्च॑स॒ ओज॑से॒ तेज॑से स्व॒स्तये॑ सुभू॒तये॒ स्वाहा॑

somo mā saumyenāvatu prāṇāyāpānāyāyuṣe varcasa ojase tejase svastaye subhūtaye svāhā

हिन्दी अर्थ

तपाः) उनके प्राणों को तपानेवाली होकर, (ददि) प्राप्त हो ! ताकि (यः) जो कोई भी (स्तेनः) चोर हो, बह (न विद्यते) हमारे मध्यमे न रहे। (यत्) यदि ( पनः ) फिर, भर्थात् दोबारा चोर बने, तो वह (न विद्यते) मिलता है किं चोरोंको अपनी बस्ती भँ रहने न देना चाहिए । यदिवे दोबारा चोरी करे, तो उन्हे मृत्युदण्ड देना चाहिए । भ्रथवा-हे रात्रि तु "शम्या" नाम धारण करती है, चूंकितू स्वयं शान्तस्वरूपा है, भौर सब को शान्ति पहूवाती है । जोमेरेषनों को दम्म देकिरात्री मेको चोरभी न रहे, को चोरी न करे । यदि एक बार चोरी करे भी, तो वह बार-बार चोरी न करे, चान्त सोया रहे । शम्या =

English

Night! the terrestrial realm hath been filled with the Father’s power and might. Thou spreadest forth on high unto the seats of Heaven: dark- ness that strikes with awe comes

अध्याय १९

श्लोक 45.9

भगो॑ मा॒ भगे॑नावतु प्रा॒णाया॑पा॒नायायु॑षे॒ वर्च॑स॒ ओज॑से॒ तेज॑से स्व॒स्तये॑ सुभू॒तये॒ स्वाहा॑

bhago mā bhagenāvatu prāṇāyāpānāyāyuṣe varcasa ojase tejase svastaye subhūtaye svāhā

हिन्दी अर्थ

का०१९ 1 सुऽ ४९ प्रथववेद-भाष्य ३३३ (विष्टः) परोसे हृए (चमसः न) रन्नपात्र के सदुश (रात्रि) हि राधि! तु (मद्रा) सुखप्रदा (प्रसि) है। (युवतिः) युवावस्थावाली. हुई तु करती है । (चक्षुष्मती) सू्यंरूपी प्रशस्त आंखवाली होकर, (उती) कामना करती हुई (त्वम्) तूने, (ये) मेरे लिये (दिव्या == दिव्यानि, न) मानो दिम्य (वपूषि) देहो को (प्रति भमुक्थाः) धारण किया है । जब कि

English

near. Each moving thing finds rest in her whose yonder boundary is not seen, nor that which keeps her separate.

अध्याय १९

श्लोक 45.10

म॒रुतो॑ मा ग॒णैर॑वन्तु प्रा॒णाया॑पा॒नायु॑षे॒ वर्च॑स॒ ओज॑से॒ तेज॑से स्व॒स्तये॑ सुभू॒तये॒ स्वाहा॑

maruto mā gaṇairavantu prāṇāyāpānāyuṣe varcasa ojase tejase svastaye subhūtaye svāhā

हिन्दी अर्थ

लोक भौर पृथिवीलोक को (भ्रापप्रौ) पूणंतया भरदियाहै, व्याप्त कर लिया है । इषिरा इष गतौ +-किरवच्(उणा० १।५१),घदा गतिद्ील । रात्री विश्राम नहीं करती । दमूनाः “भ्रपि वा दम इति गृहनाम, तन्मनाः”

English

Shake off thy foes as Indra scattered Dasyus: quell all enemies. Invincible, let it guard thee well. Indra hath lent the power of sight, and vital breath and strength to this.

अध्याय १९

श्लोक 46.1

अस्तृतमणिः।१-७ प्रजापतिः।अस्तृतमणिः।त्रिष्टुप्, १ पञ्चपदा ज्योतिष्मती त्रिष्टुप्, २ षट्-पदा भुरिक्शक्वरी, ३, ७ पञ्चरदा पथ्यापङ्क्तिः, ४, ५ अतिजगती ( ४ चतुष्पदा, पञ्चपदा), ६ पञ्चपदोष्णिग्गर्भा विराड् जगती पङ्क्तिः।प्र॒जाप॑तिष्ट्वा बध्नात् प्रथ॒ममस्तृ॑तं वी॒र्याय॒ कम्।तत् ते॑ बध्ना॒म्यायु॑षे॒ वर्च॑स॒ ओज॑से च॒ बला॑य॒ चास्तृ॑तस्त्वा॒भि र॑क्षतु

astṛtamaṇiḥ| 1-7 prajāpatiḥ| astṛtamaṇiḥ| triṣṭup, 1 pañcapadā jyotiṣmatī triṣṭup, 2 ṣaṭ-padā bhurikśakvarī, 3, 7 pañcaradā pathyāpaṅktiḥ, 4, 5 atijagatī ( 4 catuṣpadā, pañcapadā), 6 pañcapadoṣṇiggarbhā virāḍ jagatī paṅktiḥ| prajāpatiṣṭvā badhnāt prathamamastṛtaṃ vīryāya kam| tat te badhnāmyāyuṣe varcasa ojase ca balāya cāstṛtastvābhi rakṣatu

हिन्दी अर्थ

११७) । युवतिः मध्यरात्रिकाल भं । गोकूपम् गौ जैसे पालती है, वैसे (रघुवंश ३।४६) । दिव्या वपु षि दिन मँ दिव्यर्पो को । ये रूपया देह है गोचर होते हैँ ! यह् कल्पना की गई है कि भानो रात्री ने रात्रीरूप को छोड़ कर दिनिकारूपधारण कर लिया है । यहां यह निदेश दिया दहै कि युवतीः स््रीमी रात्रीके वस्नं को त्यागकर, दिन म विविध वेशभूषा हारा भ्लंकृत होकर नानारूपो को धारण करे । (भरषायुः) हत्या चाहने वाला, यः जो (रिपुः मत्यः) कषतर मनुष्य, (स्तेनः) चोर बन कर, (भरद) प्राज (भायति) भरावा, (रात्री) रात्री ( प्रतीत्य ) उपे पूरी तरह से जान-पहिचान कर ( तस्य ) उस की ( ग्रीवाः ) गर्दन-नादि्यो को ( प्र हनत् ) तोड़ दे, ( चिरः) गौर सिरको

English

O spacious, darksome Night, may we uninjured reach the end of thee, reach, O thou blessed One, thine end.

अध्याय १९

श्लोक 46.2

ऊ॒र्ध्वस्ति॑ष्ठतु॒ रक्ष॒न्नप्र॑माद॒मस्तृ॑ते॒मं मा त्वा॑ दभन् प॒णयो॑ यातु॒धानाः॑ ।इन्द्र॑ इव॒ दस्यू॒नव॑ धूनुष्व पृतन्य॒तः सर्वां॒छत्रू॒न् वि ष॑ह॒स्वास्तृ॑तस्त्वा॒भि र॑क्षतु

ūrdhvastiṣṭhatu rakṣannapramādamastṛtemaṃ mā tvā dabhan paṇayo yātudhānāḥ | indra iva dasyūnava dhūnuṣva pṛtanyataḥ sarvāṃchatrūn vi ṣahasvāstṛtastvābhi rakṣatu

हिन्दी अर्थ

पिले ठीक प्रकारसे जांच कर सेनी चाहिए कि भमुक भाषत उसके सिर तक को च्तार देना मी वेदानुभोदित है । वेद कठोर दण्डकी ध्रान्ञा देता है, ताकि पापकमों की पुनरावृत्ति न होती रहे । ३३४ भयववेद-माष्य का० १९1 सु ५०

English

Thy ninety-nine examiners, O Night, who look upon mankind, Eighty-and-eight in number, or seven-and-seventy are they. Sixty-and-six, O opulent, fifty-and-five, O happy One,

अध्याय १९

श्लोक 46.3

श॒तं च॒ न प्र॒हर॑न्तो नि॒घ्नन्तो॒ न त॑स्ति॒रे।तस्मि॒न्निन्द्रः॒ पर्य॑दत्त॒ चक्षुः॑ प्रा॒णमथो॒ बल॒मस्तृ॑तस्त्वा॒भि र॑क्षतु

śataṃ ca na praharanto nighnanto na tastire| tasminnindraḥ paryadatta cakṣuḥ prāṇamatho balamastṛtastvābhi rakṣatu

हिन्दी अर्थ

अपौयति ख्पायति शष्के स्थाणाव्पौयति ॥१०॥ रात्रीं चोरके (पादौ) दोनों पैर (प्र हनत्) काट दे, (यथा) जिस से कि बह (न भयत्ति) न चल सके । (हस्तौ ) दोनों हाथ (प्रहनत् ) काट दे, (यथा) लिस से फि वह (न आशिषत्)खा न सके 1 (यः) जो ( मलिम्लुः (सः) वेह (संपिष्टः) मारपीट खाकर (अपायति) दुर चला जाय! (भ्रपायति) दूर चला जाय (सु श्रपायति) बहुत दुर चला जाय । (शुष्के ) सूखे तथा किसी सुद्र एकान्त भौर सूखे जङ्गल मे कंदी के कप भँ उसके अवरुद्ध

English

Forty-and-four and thirty-three are they, O thou enriched with spoil. Twenty-and-two hast thou, O Night, eleven, yea, and fewer still.

अध्याय १९

श्लोक 46.4

इन्द्र॑स्य त्वा॒ वर्म॑णा॒ परि॑ धापयामो॒ यो दे॒वाना॑मधिरा॒जो ब॒भूव॑ ।पुन॑स्त्वा दे॒वाः प्र ण॑यन्तु॒ सर्वेऽस्तृ॑तस्त्वा॒भि र॑क्षतु

indrasya tvā varmaṇā pari dhāpayāmo yo devānāmadhirājo babhūva | punastvā devāḥ pra ṇayantu sarve'stṛtastvābhi rakṣatu

हिन्दी अर्थ

(प्र) नौर (रात्रि) है राति! (तृष्टधूमम्) पिपासाजनक पुकार लुटेरे की -( भक्षौ ) दोनों आंखों को ( नि्जंह्याः ) निकाल फक (तेन) इस प्रकार ( त् ) उसे (द्रुपदे) काठ की बेदी में डालकर को दण्डका विधान किया है। पैप्पलाद संहिता ( थरवंवेद ) मे "रुप जलहि" के स्थान में “नृपते जहि" पाठ. है 1 इससे प्रतीत होता है कि दण्ड. विधान राजनियमों हारा होना चाहिए ।

English

With these protectors guard us well. O Daughter of the Sky, to- day. Let not a fiends or spiteful man, let no ill-wisher master us. Let not the robber seize our cows, nor the wolf take our sheep today.

अध्याय १९

श्लोक 46.5

अ॒स्मिन् म॒णावेक॑शतं वी॒र्याणि स॒हस्रं॑ प्रा॒णा अ॑स्मि॒न्नस्तृ॑ते ।व्या॒घ्रः शत्रू॑न॒भि ति॑ष्ठ॒ सर्वा॒न् यस्त्वा॑ पृत॒न्यादध॑रः॒ सो अ॒स्त्वस्तृ॑तस्त्वा॒भि र॑क्षतु

asmin maṇāvekaśataṃ vīryāṇi sahasraṃ prāṇā asminnastṛte | vyāghraḥ śatrūnabhi tiṣṭha sarvān yastvā pṛtanyādadharaḥ so astvastṛtastvābhi rakṣatu

हिन्दी अर्थ

का० १९।सूु० ४५० भ्रथर्ववेद-माष्य ३३१ ठेभिनों अच पारयाति दुर्गाणिं विश्वह ॥२।। शीघ्रगामी, ( अनड्वाहः ) रथ का वहन करने मँ समथं बेल है, (तेभिः) हे राधि ॥ (नः) हमे (दुर्गाणि) दुर्गम मागो को (भ्रति) लंघा कर (पारय)

English

Let not the thief, O Blessed, seize our horses, nor she-fiends our men. Let thief and robber run away on pathways most remote from us.

अध्याय १९

श्लोक 46.6

घृ॒तादुल्लु॑प्तो॒ मधु॑मा॒न् पय॑स्वान्त्स॒हस्र॑प्राणः श॒तयो॑निर्वयो॒धाः ।श॒म्भूश्च॑ मयो॒भूश्चोर्ज॑स्वांश्च॒ पय॑स्वां॒श्चास्तृ॑तस्त्वा॒भि र॑क्षतु

ghṛtādullupto madhumān payasvāntsahasraprāṇaḥ śatayonirvayodhāḥ | śambhūśca mayobhūścorjasvāṃśca payasvāṃścāstṛtastvābhi rakṣatu

हिन्दी अर्थ

रात्री में यात्रा करने पर यह निदेश दिया है कि रथ कै बेल प्रौढा- वस्था के तेज संगोवाल, हीघ्यगामी, तथा रथ को ले चलने मं समथं होने करे, तो उन से रक्षां, बेन तीक्ष्णशुङ्खोवाले होने चाहिए । भरातयःअ+रा (दने) ¬+-ति। वैदिक सभ्यतामें दान की बडी महिमा है । अराति चन्द शत्रु अथं मे प्रयुक्त होता है । अदानी समाज बौर

English

Far from us let Rope with Fangs, far from us let the wicked flee. Do thou make blind and headless. Night, the serpent with his pungent breath. Crush the wolf’s jaws in pieces, strike the robber dead against a post.

अध्याय १९

श्लोक 46.7

यथा॒ त्वमु॑त्त॒रोऽसो॑ असप॒त्नः स॑पत्न॒हा।स॒जा॒ताना॑मसद् व॒शी तथा॑ त्वा सवि॒ता क॑र॒दस्तृ॑तस्त्वा॒भि र॑क्षतु

yathā tvamuttaro'so asapatnaḥ sapatnahā| sajātānāmasad vaśī tathā tvā savitā karadastṛtastvābhi rakṣatu

हिन्दी अर्थ

म्रतिथियों की सेवा, पितृयज्ञ मँ जीवित माता-पिता, भाचायं तथा भन्य दान मावना पर निर्भर है । हसीलिये “श्राति” को समाज गौर राष्ट्का शत्रु कहा ह 1 यह् दान घार्भिक दान है, राजनेतिक दुष्टि से दिया गयाया (यथा) जंघे (इयाम्याकः) सामा अन्त का दानां (प्रपतन्) भूमि पर गिरता हृभरा, या (प्रपवान्) वायु द्वारा परे फंका हषा (भरनुविद्यते न) पनः

English

In thee, O Night, do we abide: we here will sleep. Be watchful thou. Give thou protection to our kine; and to our horses, and our men.

अध्याय १९

श्लोक 47.1

रात्रिः।१-९ गोपथः।रात्रिः।अनुष्टुप्, १ पथ्याबृहती, २ पञ्चपदाऽनुष्टुब्गर्भा पराऽतिजगती, ६ पुरस्ताद्बृहती, ७ त्र्यवसाना षट्पदा जगती।आ रा॑त्रि॒ पार्थि॑वं॒ रजः॑ पि॒तुर॑प्रायि॒ धाम॑भिः ।दि॒वः सदां॑सि बृह॒ती वि ति॑ष्ठस॒ आ त्वे॒षं व॑र्तते॒ तमः॑

rātriḥ| 1-9 gopathaḥ| rātriḥ| anuṣṭup, 1 pathyābṛhatī, 2 pañcapadā'nuṣṭubgarbhā parā'tijagatī, 6 purastādbṛhatī, 7 tryavasānā ṣaṭpadā jagatī| ā rātri pārthivaṃ rajaḥ pituraprāyi dhāmabhiḥ | divaḥ sadāṃsi bṛhatī vi tiṣṭhasa ā tveṣaṃ vartate tamaḥ

हिन्दी अर्थ

गिरा दे, (या) जो कि (घस्मान्) हरमे (प्रभ्यघायति) मारना चाहता है, या हमारे प्रति पापकं करना चाहता है, ताकि वह पृनःप्राप्त न हो सके । प्रतः गिरेहृए को, या वायु द्वारा परे फके गएको फिरपाना नहीं

English

A hymn to Night for protection Then all that we accumulate, all that the treasure-chest contains,. All this do we entrust to thee.

अध्याय १९

श्लोक 47.2

न यस्याः॑ पा॒रं ददृ॑शे॒ न योयु॑व॒द् विश्व॑म॒स्यां नि वि॑शते॒ यदेज॑ति ।अरि॑ष्टासस्त उर्वि तमस्वति॒ रात्रि॑ पा॒रम॑शीमहि॒ भद्रे॑ पा॒रम॑शीमहि

na yasyāḥ pāraṃ dadṛśe na yoyuvad viśvamasyāṃ ni viśate yadejati | ariṣṭāsasta urvi tamasvati rātri pāramaśīmahi bhadre pāramaśīmahi

हिन्दी अर्थ

३७६. अप॑ लेनं बासों गोञजमुत तस्करम् । (गो भ्रजम्) गौको हाक कर ले जाने वाले (स्तेनम्) चोर को; (उत) भौर (तस्करम्) उपक्षयकारी लुटेरे को; (अथो) तथा (यः) जो (भवंतः) पर्व के (शिरः) सिर को (अभिधाय) रस्सीसे बान्ध कर. (विनीषति) ले जाना चाहता है, स को (प्रप वासरः) अलग बसा ।

English

Entrust thou us to Dawn, O Mother Night. May Dawn entrust us to the Day, and Day to thee, O splendid.

अध्याय १९

श्लोक 47.3

ये ते॑ रात्रि नृ॒चक्ष॑सो द्र॒ष्टारो॑ नव॒तीर्नव॑ ।अ॒शी॒तिः सन्त्य॒ष्टा उ॒तो ते॑ स॒प्त स॑प्त॒तिः

ye te rātri nṛcakṣaso draṣṭāro navatīrnava | aśītiḥ santyaṣṭā uto te sapta saptatiḥ

हिन्दी अर्थ

(घुभगे रारि) है उत्तमशोमावाली राच्रि ! (द्) जिस (धयः) आपस भे बाट ते है, यत् एतत्) शो यह् उत्तराधिकार गं व ष धन है इसे, वथा (यथा) चिस पभरकार (इत्) ही तु (भन्यान् ) धन्य धनिको का० १९। सुऽ ५१ भयवधेद-माष्य ३३७

English

One. Whatever flying thing be here, whatever thing that creeps and. crawls.

अध्याय १९

श्लोक 47.4

ष॒ष्टिश्च॒ षट् च॒ रेवति पञ्चा॒शत् पञ्च॑ सुम्नयि ।च॒त्वार॑श्चत्वारिं॒शच्च॒ त्रय॑स्त्रिं॒शच्च॑ वाजिनि

ṣaṣṭiśca ṣaṭ ca revati pañcāśat pañca sumnayi | catvāraścatvāriṃśacca trayastriṃśacca vājini

हिन्दी अर्थ

( १) । खं ३२ (१९) । सुवणं प्रौर धन दो प्रकार का है-उत्तराधि- सौप दे, (विभावरि) है चमकीली रात्रिं . नागसःन्=निष्पापियों का जीवन दींकाल का होता है। विभा वटि == चान्द भौर तारागणों द्वारा चमकीली ज भ्रथवा भरनागसः==विना हो गई है, (अयुत) होषरहित (मे) मेरा प्राणः) प्रणि हो ग्या है, (श्युतः) दोषरहित (मे) मेरा (अपानः) पान हो गया है, (पतः) १. रात्री हमे जीवित रखे, ताकि हम इन - दोनों प्रकार के धनो का, ठपमोग्

English

Whatever fastens on a joint, therefrom do thou protect us, Night.

अध्याय १९

श्लोक 47.5

द्वौ च॑ ते विंश॒तिश्च॑ ते॒ रात्र्येका॑दशाव॒माः ।तेभि॑र्नो अ॒द्य पा॒युभि॒र्नु पा॑हि दुहितर्दिवः

dvau ca te viṃśatiśca te rātryekādaśāvamāḥ | tebhirno adya pāyubhirnu pāhi duhitardivaḥ

हिन्दी अर्थ

दोषरहित (मे) मेरा (व्यानः) व्यान हो गया है । (भहम्) मै (सर्वेः) सब दवास । भपानः-= बाहिर निकलनेवाला प्रष्वास, या पेट की पपानवायु । मानो हो गया हूं । जँ मानो विभक्त होकर हजारों रूप धारण कयि हुए हं । हजारों धां, कान, प्राण, अपान, व्यान मानो मेरे हीरूपरहै) गही सर्वं-

English

So guard thou us from west and east, protect us from the north and south. O splendid One, preserve us: we, the singers of thy praise, are here. They who are followers of Night, and they who watch o’er living things.

अध्याय १९

श्लोक 47.6

रक्षा॒ माकि॑र्नो अ॒धशं॑स ईशत॒ मा नो॑ दुः॒शंस॑ ईशत ।मा नो॑ अ॒द्य गवां॑ स्ते॒नो मावी॑नां॒ वृक॑ ईशत

rakṣā mākirno adhaśaṃsa īśata mā no duḥśaṃsa īśata | mā no adya gavāṃ steno māvīnāṃ vṛka īśata

हिन्दी अर्थ

भ्नौर प्रात्मीयतता की भावना करके यह समभे कि वह मानो भरन्यो की सेवा मं अपनी, तथा अपनो की ही सेवा कर रहा है! इस प्रकार प्रेम धौर सहानुभूति हारा भूमण्डल के समी मनुष्य परस्पर एकं संगठन मे संगसित को सुदृढ बनाए रखने क लिये वेदो तथा सच्छास्त्रौ ये सरवेमूतमंत्री, पितुः यज्ञ, प्रतिथियज्ञ तथा बलिवै्वयज्ञ मादि का विधान किया गया है । बलि- वैदवदेवयज्ञ पिं समथ्र प्राणियों की रक्षा की भावना ओत-्रोत है । यथा- खानेवालों, पापकमं के कारण हुए रोगियों, कौभो, कृमियों तक को भोजन (प्रसूतः) परमेषवर द्वारा भ्र रित हुमा म ( परदिवनोः ) भषिवदेवता्ों कौ

English

They who protect all cattle, they keep watch and ward over our lives, over our herds keep watch and ward.

अध्याय १९

श्लोक 47.7

माश्वा॑नां भद्रे॒ तस्क॑रो॒ मा नृ॒णां या॑तुधा॒न्यः ।प॒र॒मेभिः॑ प॒थिभिः॑ स्ते॒नो धा॑वतु॒ तस्क॑रः ।परे॑ण द॒त्वती॒ रज्जुः॒ परे॑णाघा॒युर॑र्षतु

māśvānāṃ bhadre taskaro mā nṛṇāṃ yātudhānyaḥ | paramebhiḥ pathibhiḥ steno dhāvatu taskaraḥ | pareṇa datvatī rajjuḥ pareṇāghāyurarṣatu

हिन्दी अर्थ

का०१९ । सु° ५२ भरयववेद-माष्य ३३९ चाये किं सूयं भौर चन्द्रमा जैसे निज किरर्णोरूपी बाहुभो वारा सव का उपकार करते है, वैसे म मी सब के उपकार के लिये निज बाहुभों दारा तथा वर्षा-प्रदान हाया सबका पालन-पोषण कररहीहै । मनुष्य भ्रपने हाथो मे वायुके हाथों की भावना करता हृभ्रा सर्वोपकार के कार्यों का

English

Verily, Night, I know thy name, Dropper of Fatness art thou called. Thee Bharadvāja knew as such: as such be watchful o’er our wealth. A hymn of Praise and prayer to Night

अध्याय १९

श्लोक 47.8

अध॑ रात्रि तृ॒ष्टधू॑ममशी॒र्षाण॒महिं॑ कृणु ।हनू॒ वृक॑स्य ज॒म्भया॒स्तेन॒ तं द्रु॑प॒दे ज॑हि

adha rātri tṛṣṭadhūmamaśīrṣāṇamahiṃ kṛṇu | hanū vṛkasya jambhayāstena taṃ drupade jahi

हिन्दी अर्थ

कि यै परमेदवर दवारा प्ररणा पाकर कार्यारम्म करता, न कि निज रागः जीवनमागं का प्रदर्शन कराती है । पूषा का भथं पृथिवी भी है । पृथिवो सन को समग्र पोषक पदार्थो का प्रदान करती है । मनुष्य धपते हथो को पुथिवी के हाथ समकर इन हार्थोःके दारा सभी प्राणियों कै पोषण के निमित्त कायो का भारम्म करे । पृथिवी को माता कहा है--“भूनिः माता पुतो भ्रहं पुथिव्याः” (अथर्व ° १२।१।१२) । जेषे पृथिवी भ माताकी १-५ ब्रह्मा । कामः । ३८१. कामलदग्रे सम॑बत॑त् मन॑सो रेतः प्रथमं यदासीत् । स कम कामेन बृहता सयोनी रायस्पोषं यज॑मानाय बेहि ।॥।१॥ (भरम) सृष्टि के भारम्मकाल मँ ( कामः) ईदवरीयं काम कामना मेरे काम कामना वा इच्छाः (षः) बह तु (बृहता कामेन) बृहत्-कास

English

Friend of the home, the strong and youthful maiden, Night, dear to Savitar the God, and Bhaga,

अध्याय १९

श्लोक 47.9

त्वयि॑ रात्रि वसामसि स्वपि॒ष्याम॑सि जागृ॒हि।गोभ्यो॑ नः॒ शर्म॑ य॒च्छाश्वे॑भ्यः॒ पुरु॑षेभ्यः

tvayi rātri vasāmasi svapiṣyāmasi jāgṛhi| gobhyo naḥ śarma yacchāśvebhyaḥ puruṣebhyaḥ

हिन्दी अर्थ

३४० भथर्ववेद-माष्य क(० १६ । पू० ४२ कामना या इच्छा प्रकट होती दहै । यथा--“सोऽकामयत्" (बृह° उप० मनसः--इसका भथं “ऋग्वेदादिभाष्यभुमिका” के “ृष्टिविद्याविषय" मे, तथा युवद ३१।१२ में “मनसः” शब्द के किये भथं के ्ननुसार किया है । परमेदवर मन द्वारा कायं नहीं करता, जंसे कि मनुष्य मन द्वारा कां

English

All-compassing, all-glorious, prompt to listen, hath with her greatness filled the earth and heaven. Over all depths hath she gone up, and mounted, most mighty

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Atharva Veda — Chapter 19
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.