Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
20
अध्याय 20 / 20

Kanda 20

काण्ड 20

975 श्लोकभाग 1/6 · श्लोक 1.1–33.3WhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ192 श्लोक

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अध्याय २०

श्लोक 1.1

(१-३) १ विश्वामित्रः, २ गोतमः, ३ विरूपः।१ इन्द्रः, २ मरुतः, ३ अग्निः।गायत्री।इन्द्र॑ त्वा वृष॒भं व॒यं सु॒ते सोमे॑ हवामहे ।स पा॑हि॒ मध्वो॒ अन्ध॑सः

(1-3) 1 viśvāmitraḥ, 2 gotamaḥ, 3 virūpaḥ| 1 indraḥ, 2 marutaḥ, 3 agniḥ| gāyatrī| indra tvā vṛṣabhaṃ vayaṃ sute some havāmahe | sa pāhi madhvo andhasaḥ

हिन्दी अर्थ

है उसी (वेधसे) जगद्-विधाता (अग्नये) जगदग्रणी के लिये, ( स्तोमः ) - सामगानों की स्तुतियों द्वारा, ( विषे ) हम भरनी परिचर्याए भट. परमेदवसंग्नि के प्रतिही भेट की. जाती है। विघेम=परिचरणकर्मा

English

The best of guardian hath the man within whose dwelling-place ye drink, O Maruts, giants of the sky.

अध्याय २०

श्लोक 1.2

मरु॑तो॒ यस्य॒ हि क्षये॑ पा॒था दि॒वो वि॑महसः ।स सु॑गो॒पात॑मो॒ जनः॑

maruto yasya hi kṣaye pāthā divo vimahasaḥ | sa sugopātamo janaḥ

हिन्दी अर्थ

४. म॒रुत॑; पोव्रात् सुष्टुभः खरककाद्तना सोमं पिबतु ।1१॥ (मरुतः) मरणधर्मा उपासक से (ऋतुना) ऋतु-ऋतु मे (सोमम्) भक्ति- रस का (पिबतु) पान करे। । मरुतः = श्ियते इति मस्त =मनुष्यजातिः (उणा० कोष १।९४), पोत्रात् =पू पवने, पवित्र करना । पिबतु पान करने का अभिप्राय है स्वीकार करना, न कि मुख द्वारा पीना। भाः घातु का लाक्षणिकं प्रयोग. मी होता है । यथा--“पिबत्यसौ पाययते च सिन्धूः" ( रधुवंश .१३।९;८।१);

English

Let us serve Agni with our hyms, Sage who consumeth ox and cow, Who beareth Soma on his back.

अध्याय २०

श्लोक 1.3

उ॒क्षान्ना॑य व॒शान्ना॑य॒ सोम॑पृष्ठाय वे॒धसे॑ ।स्तोमै॑र्विधेमा॒ग्नये॑

ukṣānnāya vaśānnāya somapṛṣṭhāya vedhase | stomairvidhemāgnaye

हिन्दी अर्थ

का० २० सु०र२ म्रथववेद-भाष्य ३ परमात्माग्नि" को प्रदीप्त करनेवाले उपासक से ( ऋटुना ) ऋतु-ऋतु म (अग्निः). जगदग्रणी ( सोमम् ) भक्तिरस का ( पिबतु ) पान करे, उसे मे (सोमम्) भक्तिरस का (पिबतु) पानकरे। (न ।

English

Let the Maruts drink Trishtups from the Potar’s cup, according to the season Soma from heaven.

अध्याय २०

श्लोक 2.1

१-४ गृत्सोमदो ( मेधातिथिर्वा)।१ मरुतः, २ अग्निः, ३ इन्द्रः, ४ द्रविणोदाः।१-२ विराड् गायत्री, ३ आर्च्युष्णिक्, ४ साम्नी त्रिष्टुप् (१-४ एकावसाना)।म॒रुतः॑ पो॒त्रात् सु॒ष्टुभः॑ स्व॒र्कादृ॒तुना॒ सोमं॑ पिबन्तु

1-4 gṛtsomado ( medhātithirvā)| 1 marutaḥ, 2 agniḥ, 3 indraḥ, 4 draviṇodāḥ| 1-2 virāḍ gāyatrī, 3 ārcyuṣṇik, 4 sāmnī triṣṭup (1-4 ekāvasānā)| marutaḥ potrāt suṣṭubhaḥ svarkādṛtunā somaṃ pibantu

हिन्दी अर्थ

स्वाध्याय रौर जप करनेवाले उपासक से (ऋतुना ) ऋतु-ऋतु के भनुसार (सोमम्) भक्तिरस का (पिबतु) पान करे । यदनेनामिद्रवन्ति, तस्य दाता” (नि० ८।१।१)। परमेदवर जिन उपासको के भक्तिरसो को स्वीकार करतादहैवेयातो मन-वचन-कमं से पवित्र होने ् अथव॑वेद-माष्य - का० २०।य्० ४

English

Let Agni from the Kindler’s cup drink Trishtups, according to the season Soma from heaven. Let Indra the Brāhman from the Brāhman’s cup drink Trishtups, according to the season

अध्याय २०

श्लोक 2.2

अ॒ग्निराग्नी॑ध्रात् सु॒ष्टुभः॑ स्व॒र्कादृ॒तुना॒ सोमं॑ पिबतु

agnirāgnīdhrāt suṣṭubhaḥ svarkādṛtunā somaṃ pibatu

हिन्दी अर्थ

(इन्द्र) है परमेवर ! आप (भ्रा याहि) प्रकट हूजिये । (ते) भाष . कै लिये (हि) ही हम उपासकों ने (सुषुम) भक्तिरस का निष्पादने किया है। श्राप (इमम्) इस ( सोमम् ) भक्तिरस का ( पिब ) पान कीजिये, से स्वीकार कीजिये (इदम्) इस (मम) मेरे (बहिः) हदयाकाद मं

English

Soma from heaven. Let the God, Granter of Wealth, from the Potar’s cup drink

अध्याय २०

श्लोक 2.3

इन्द्रो॑ ब्र॒ह्मा ब्राह्म॑णात् सु॒ष्टुभः॑ स्व॒र्कादृ॒तुना॒ सोमं॑ पिबतु

indro brahmā brāhmaṇāt suṣṭubhaḥ svarkādṛtunā somaṃ pibatu

हिन्दी अर्थ

९. आ त्वौ बरह्मयुजा हरौ वहतामिन्द्र केषिन। । . देनेवाले, .( केशिना ) ज्ञान का प्रका करनेवाले, ( हरी ) पिषर्यो से हेर (भ्रा वहतम्) हमें प्राप्त करायें । है .परमेदवर । (उय) समीप होकर

English

Trishtups, according to the season Soma from heaven. Come, we have pressed the juice for thee: O Indra, drink this

अध्याय २०

श्लोक 2.4

दे॒वो द्र॑विणो॒दाः पो॒त्रात् सु॒ष्टुभः॑ स्व॒र्कादृ॒तुना॒ सोमं॑ पिबतु

devo draviṇodāḥ potrāt suṣṭubhaḥ svarkādṛtunā somaṃ pibatu

हिन्दी अर्थ

( इन्द्र ) है परमेदवर ! ( सुतावन्तः ) सन्तानो समेत (वयं) हम (यजा ) योगविधिपूवंक (सोमपाम्) भक्तिरस .के पान करनेवाले (त्वा ) जपं को (हवामहे) पुकार रहै । का० २०।सु०्४ भथववेद-माष्य ५

English

Soma here. Seat thee on this my sacred grass.

अध्याय २०

श्लोक 3

१-३ इरिम्बिठिः ।इन्द्रः

1-3 irimbiṭhiḥ | indraḥ

हिन्दी अर्थ

समीप, भ्रौर (नः) .हमारे समीप (भ्रा याहि) तु जाया कर। ( िप्रिन्). .. का ( पिब ) पान किया कर ।. इनद्र-=जीवात्मा, जो कि इन्द्रियो का स्थान है विचारों का, भौर हृदय स्थान है हादिक मावनार्ओं का । उपासक

English

Let both thy bay steeds, yoked by prayer long-maned, O Indra, bring thee nigh. We Soma-bearing Brāhmans call thee Soma-drinker with thy friend,

अध्याय २०

श्लोक 4.1

१-३ इरिम्बिठिः।इन्द्रः।गायत्री।आ नो॑ याहि सु॒ताव॑तो॒ऽस्माकं॑ सुष्टु॒तीरुप॑ ।पिबा॒ सु शि॑प्रि॒न्नन्ध॑सः

1-3 irimbiṭhiḥ| indraḥ| gāyatrī| ā no yāhi sutāvato'smākaṃ suṣṭutīrupa | pibā su śiprinnandhasaḥ

हिन्दी अर्थ

, कै विचार गौर उसकी हािकं भावनाए दोनो. ही भक्तिरस से रसीले ङ्प में निषुदन कर सके । यह मधुर भक्तिरस (तव) तेरे ( तन्वे ) समग्र शरीर के लिये (शम्) दान्तिदायक ( भ्रस्तु ) हो । ( सोमः ) यह मधुर स्वादुः--आध्यात्मिक मधुर-स्वाद के होते, सांसारिक भो कां स्वोद .फीका पड़ जाता है धावतु =गति गौर विशुद्धि; धावु गतिशुद्ध्योः।

English

We, Indra, who have pressed the juice. Like women, let this Soma juice invested with its raiment, glide..

अध्याय २०

श्लोक 4.2

आ ते॑ सिञ्चामि कु॒क्ष्योरनु॒ गात्रा॒ वि धा॑वतु ।गृ॒भा॒य जि॒ह्वया॒ मधु॑

ā te siñcāmi kukṣyoranu gātrā vi dhāvatu | gṛbhāya jihvayā madhu

हिन्दी अर्थ

६ 4 भाच भथर्वैवेद-भाष्य का०२ छ सू० ५ प्रकार (अभिसंवृतः) धिरे रहते है ( इव ) जंसे किं ( जनीः ) माताए (८ सोमः ) उपासको का भक्तिरस ( त्वा ) . आपकी ओर (प्र सयतु)

English

Most active Indra, close to thee. Mighty in bulk, strong-necked, stout-armed in the wild rapture. of the juice

अध्याय २०

श्लोक 4.3

स्वा॒दुष्टे॑ अस्तु सं॒सुदे॒ मधु॑मान् त॒न्वे॒३ तव॑ ।सोमः॒ शम॑स्तु ते हृ॒दे

svāduṣṭe astu saṃsude madhumān tanve3 tava | somaḥ śamastu te hṛde

हिन्दी अर्थ

(तुविग्रीवः) जसे महाभ्रीव, ( वपोदरः ) . स्थूलकाय, ( ुबाह ) ; (जिध्नते) विहनन करता है, वसे ( इन्द्रः ) परमेवर ( अन्धसः मदे ) आद्ये, (पुरः) हमे. दन दीजिये । भापः ( ओजसा ) दूसरों को नम्र कर

English

Doth Indra smite the foemen dead. Indra, advance, go forward thou who by thy might art Lord of all.

अध्याय २०

श्लोक 5.1

१-७ इरिम्बिठिः।इन्द्रः।गायत्री।अ॒यमु॑ त्वा विचर्षणे॒ जनी॑रिवा॒भि संवृ॑तः ।प्र सोम॑ इन्द्र सर्पतु

1-7 irimbiṭhiḥ| indraḥ| gāyatrī| ayamu tvā vicarṣaṇe janīrivābhi saṃvṛtaḥ | pra soma indra sarpatu

हिन्दी अर्थ

है। ( वृत्रहन् ) हे.राग-ढेष. काम-क्रोच आदि वृत्रो के हनन करनेवाले ! । भ्माप (वृत्राणि) हमारे संमग्र वृं का ( जहि ) हन कीजिये । मोजः = का०२०।सु०५ भरथरवेवेद-माष्य . ७

English

Slay, Vritra-slayer slay thy foes. Long be thy grasping-hook wherewith thou givest treasure unto- him

अध्याय २०

श्लोक 5.2

तु॒वि॒ग्रीवो॑ व॒पोद॑रः सुबा॒हुरन्ध॑सो॒ मदे॑ ।इन्द्रो॑ वृ॒त्राणि॑ जिघ्नते

tuvigrīvo vapodaraḥ subāhurandhaso made | indro vṛtrāṇi jighnate

हिन्दी अर्थ

हे परमेदवर ! (ते) आप का -(भंकृश्ः) न्यायव्यवस्थारूपी शंकु आपके लिये है, जो कि (बहिषि) हृदयान्तरिक्ष में हादिक भावनाओं दारा (निपूतः) नितरां पवित्र किया गया है । (दमम्) इस सक्तिरस कीओर (एहि) आदये, आवजित हृजिये, ( द्रव ) रीघ्ता कीजिये, गौर ( भस्य पिब) इस काः पान कीजिये । 1 ६ आखण्डल प्र हंयसे ॥द॥ . » + -(कषाचिगो) हेः अभिव्यक्त वेदवाणी के स्वामिन् ! (शाचिपूजन) हे भज्ञा वाणियो गौर कमो दवारा पूजनीय ! (गयम्) -यह भक्तिरस ( ते )

English

Who pours the juice and worships thee. Here, Indra, is thy Soma draught, made pure upon the sacred. grass.

अध्याय २०

श्लोक 5.3

इन्द्र॒ प्रेहि॑ पु॒रस्त्वं विश्व॒स्येशा॑न॒ ओज॑सा ।वृ॒त्राणि॑ वृत्रहं जहि

indra prehi purastvaṃ viśvasyeśāna ojasā |vṛtrāṇi vṛtrahaṃ jahi

हिन्दी अर्थ

नाम, वाङ्नाम, कर्मनाम (निषं० ३।९; १।११;.२।१) गौ =वाई, हे परमेद्वर ! (नपात्) भराकारा से न पतन होनेवाला, भौर (शृङ्ग वृषः ) किरणौ द्वारा . वर्षा करनेवाला, - ( -प्रणपौत् ) चिरकाल से न पतन होनेवाला, भौर (कुण्डपाय्यः) भरे कुण्डं के जलो को पी जानेवाला (यः) जो यह (ते) भाप का सूयं है, (भस्मिन्). इंस सूयं की सुरक्षा मे (मनः) श्राप कामन (निभादघ्रे) नितरां्राहितहैष . "क , भअथर्ववेद-भाष्य का० २० । सू०६

English

Run hither, come and drink thereof. Famed for thy radiance, worshipped well! this juice is shed for thy delight:

अध्याय २०

श्लोक 5.4

दी॒र्घस्ते॑ अस्त्वङ्कु॒शो येना॒ वसु॑ प्र॒यच्छ॑सि ।यज॑मानाय सुन्व॒ते

dīrghaste astvaṅkuśo yenā vasu prayacchasi | yajamānāya sunvate

हिन्दी अर्थ

पीकर उन्हे सुखा देता है । समुद्र मी एक जलमरे महाकुष्ड के सदुश है । सय, शुङ्ग समान तीखी किरणों द्वारा, समुद्र के जल को पीकर वषा करता है । जब से सूर्यं पैदा हरा है, वह निराधार भ्राकार में स्थित है। नीचे उसका सूयं के द्वारा सौरमण्डल परस्यराकरष॑ण इारा महाकाश मेँ गति कर रहा , है इस भावना को न्यस्मिनू बध्रे रा मनः” इन दानद द्वारा कविदली में

English

Thou art invoked, Ākhandala! 268

अध्याय २०

श्लोक 5.5

अ॒यं त॑ इन्द्र॒ सोमो॒ निपू॑तो॒ अधि॑ ब॒र्हिषि॑ ।एही॑म॒स्य द्रवा॒ पिब॑

ayaṃ ta indra somo nipūto adhi barhiṣi | ehīmasya dravā piba

हिन्दी अर्थ

४०।१७) । भर्थात् परमेदवर स्वयं कहता . है कि--“जो बह रादित्य में -नियामक खूप मँ स्थित पुरुष है, वहर्मै ही हुं, जिस का नाम शभोदेम् है, -दावित मेँ परमेदवर का मन अर्थात् यह इच्छा निहित है किं कहीं सूर्यं के. -शरीर का है (यजु० ३१।१२० १३) । हम भपने शारीर मे अनुभव करते

English

To Kundapāyya, grandson’s son, grandson of Sringavrish, to thee, To him have I addressed my thought.

अध्याय २०

श्लोक 5.6

शाचि॑गो॒ शाचि॑पूजना॒यं रणा॑य ते सु॒तः।आख॑ण्डल॒ प्र हू॑यसे

śācigo śācipūjanāyaṃ raṇāya te sutaḥ| ākhaṇḍala pra hūyase

हिन्दी अर्थ

-मानसिक स्थिति पर निर्भर है। मन के चाहे यरीर में चलना हीता, आंख , , का निमेषोन्मेष होता, हाथ-पांव चलते, तथा खान-पान भाषण तथा भन्य क्रियाये हयो रदी है । इसी प्रकार सूयं भादि की स्थिति आदिमं परमेदवरीय सोम के सम्बन्ध मे "पाहि तथा “पिब दोनों प्रयोग होते है ।

English

Indra, with all the Gods promote our wealth-bestowing sacrifice, Thou highly-lauded Lord of men.

अध्याय २०

श्लोक 5.7

यस्ते॑ शृङ्गवृषो नपा॒त् प्रण॑पात् कुण्ड॒पाय्यः॑ ।न्यस्मिन्दध्र॒ आ मनः॑

yaste śṛṅgavṛṣo napāt praṇapāt kuṇḍapāyyaḥ | nyasmindadhra ā manaḥ

हिन्दी अर्थ

२३. हनद्र भर भो धितावानं यज्ञं विभिदेवेभिः । . . (स्तवान) है वेदों के द्वारा जीवन-मागं का उपदेश देनेवाले, (विदपते) उपासना-य्ञ को (भ्र तिर) बढ़ाये, प्रगति दीजिये । ।

English

Lord of the brave, to thee proceed these drops of Soma juice expressed, The bright drops to thy dwelling-place.

अध्याय २०

श्लोक 6.1

१-९ विश्वामित्रः।इन्द्रः।गायत्री।इन्द्र॑ त्वा वृष॒भं व॒यं सु॒ते सोमे॑ हवामहे ।स पा॑हि मध्वो॒ अन्ध॑सः

1-9 viśvāmitraḥ| indraḥ| gāyatrī| indra tvā vṛṣabhaṃ vayaṃ sute some havāmahe | sa pāhi madhvo andhasaḥ

हिन्दी अर्थ

जैसे व्यक्ति भन्न को (जठरे) भ्रपने उदर में धारण करता है" वेते . (इन्दवः) भक्तिरस (तव) भरापकेलियेर्है। चुक्षासः= यु ( =प्रकाश ) + क्ष = क्षीण करनेवाले । २६. गिैणः पाहि नै; सृतं मघोर्षारामिरज्यसे ।

English

Within thy belly, Indra take Soma the juice most excellent: The heavenly drops belong to thee.

अध्याय २०

श्लोक 6.2

इन्द्र॑ क्रतु॒विदं॑ सु॒तं सोमं॑ हर्य पुरुष्टुत ।पिबा वृ॑षस्व॒ तातृ॑पिम्

indra kratuvidaṃ sutaṃ somaṃ harya puruṣṭuta | pibā vṛṣasva tātṛpim

हिन्दी अर्थ

हृमरि भक्तिरस की (पाहि) आप रक्षाः कीजिये । आप ( मधोः ) मधुर भक्तिरस की ( धाराभिः ) धाराओं द्वारा ( अज्यसे ) सीचे जाः रहे र्है। -इत्) भआपद्वारा ही दिया गया है।॥ - (वनिनः) भक्तिरसंवाले उपासक के (अरक्षिता) न क्षीण होनेवाले

English

Drink our libation, Lord of hymns: with streams of meath thou art bedewed: Our glory, Indra, is thy gift.

अध्याय २०

श्लोक 6.3

इन्द्र॒ प्र णो॑ धि॒तावा॑नं य॒ज्ञं विश्वे॑भिर्दे॒वेभिः॑।ति॒र स्त॑वान विश्पते

indra pra ṇo dhitāvānaṃ yajñaṃ viśvebhirdevebhiḥ| tira stavāna viśpate

हिन्दी अर्थ

का (पीत्वी ) पान करके (वावृधे ) उपासक की वृद्धि करता है। सचन्ते वाले, (ब) भौर (परावतः) प्रराविद्यावाले (नः) हम उपासको को (श्रा वाणियो का राप (जुषस्व) प्रीतिपू्वेक सेवन कीजिये ।

English

To Indra go the treasures of the worshipper which never fail: He drinks the Soma and is strong.

अध्याय २०

श्लोक 6.4

इन्द्र॒ सोमाः॑ सु॒ता इ॒मे तव॒ प्र य॑न्ति सत्पते ।क्षयं॑ च॒न्द्रास॒ इन्द॑वः

indra somāḥ sutā ime tava pra yanti satpate | kṣayaṃ candrāsa indavaḥ

हिन्दी अर्थ

का०२०।सु७. भरयववेदनमाष्यं .. : १९ . भभिप्राय यह है कि परमेरवर की प्राप्ति के लिये धारणा घ्यान या पराविद्या की पूस्तकीयु विच्चागों की मावदयकता नहीं .

English

From far away, from near at hand, O Vritra-slayer, come to us: Accept the songs we sing to thee.

अध्याय २०

श्लोक 6.5

द॒धि॒ष्वा ज॒ठरे॑ सु॒तं सोम॑मिन्द्र॒ वरे॑ण्यम्।तव॑ द्यु॒क्षास॒ इन्द॑वः

dadhiṣvā jaṭhare sutaṃ somamindra vareṇyam| tava dyukṣāsa indavaḥ

हिन्दी अर्थ

(हूयसे) पुकारे जाते है, प्राथित होते है, भतः (इह) इस मक्तिपरायण उपा- सक मे भी (इन्द्र) है परमेदवर ! राप (भ्रा गहि) प्रकट हृजिये । (ततः) आप सरव॑त्र वितत है, विस्तृत ह, व्पापक है । (अभि) रसे उपासक के प्रति (उद् एषि) ््यक्षरूप में उदित होते है, (शरुता-

English

Sūrya, thou mountest up to meet the Hero famous for his wealth, Who hurls the bolt and works for man:

अध्याय २०

श्लोक 6.6

गिर्व॑णः पा॒हि नः॑ सु॒तं मधो॒र्धारा॑भिरज्यसे ।इन्द्र॒ त्वादा॑त॒मिद् यशः॑

girvaṇaḥ pāhi naḥ sutaṃ madhordhārābhirajyase | indra tvādātamid yaśaḥ

हिन्दी अर्थ

ˆ कर्म नर-नारियो के लिये हितकर हँ, (अस्तारम्) गौर जिसने अपने पाप- रात्रं को परास्तं कर दियाहै। . (यः) जिस सूर्यँ के सूयं ने (बाह्वोजसा) निज भरोजरूपी बाहभों दारा (नवति नव) ९६ (पुरः) पाप-गढ़ों को ( बिभेद ) छिन्न-भिन्न कर. दिया है, उसी -परमेश्वर ने, ( वृत्रहा ) जो कि पापका विनाशक है. .. (अहि च) पाप-सांपो कामी (अवधीत्) वघ कर दिया है। .

English

Him who with might of both his arms brake nine-and ninety castles down, Slew Vritra and smote Ahi dead.

अध्याय २०

श्लोक 6.7

अ॒भि द्यु॒म्नानि॑ व॒निन॒ इन्द्रं॑ सचन्ते॒ अक्षि॑ता ।पी॒त्वी सोम॑स्य वावृधे

abhi dyumnāni vanina indraṃ sacante akṣitā | pītvī somasya vāvṛdhe

हिन्दी अर्थ

, : वृत्रः--वे पाप जिन्हनि जीवनो. पर षेरा डाला हृ है, जो कि प्रकटूप मे जीवनो को चेरे हए ह । अहिः पाप-सांपवे पापर्हैःजोकि भौर १ मन ( भरहंकार ) ये ११ प्रमुखं पाप-गढ़ है । सत्त्व रजस्. तमस इन तीनों के परस्पर मेल से ३०८३-६ भेद होते है । उपर्युक्त ११ पाप-गदढ़ के भ्रत्येक के € भेदो से ९९ पाप-गढ़ होते है । इनमे पाप-सांप छिपे पड़ रहते है

English

This Indra is our gracious Friend. He sends us in a full broad stream Riches in horses, kine, and corn.

अध्याय २०

श्लोक 6.8

अ॒र्वा॒वतो॑ न॒ आ ग॑हि परा॒वत॑श्च वृत्रहन्।इ॒मा जु॑षस्व नो॒ गिरः॑

arvāvato na ā gahi parāvataśca vṛtrahan| imā juṣasva no giraḥ

हिन्दी अर्थ

हमारा ( सखा ) वास्तविक सखा है । वह् हमे ( मरवावत् ) मानसिक रूप मे शारीरिक सम्पत्तियां ( उरुषारा इव . महाघारा्ओं केरूपमें . (दोहते) प्रदान करता है । 2 . "दंव" का अथं मन करके, “अधिकतर सात्विक मनसम्बन्धी उपनिषद्"

English

Indra, whom many laud, accept the strength-conferring Soma juice. Quaff, pour down drink that satisfies.

अध्याय २०

श्लोक 6.9

यद॑न्त॒रा प॑रा॒वत॑मर्वा॒वतं॑ च हू॒यसे॑ ।इन्द्रे॒ह तत॒ आ ग॑हि

yadantarā parāvatamarvāvataṃ ca hūyase | indreha tata ā gahi

हिन्दी अर्थ

- मे उसे भी "अश्व' कहा- जा सकता है । गौ =इन्ब्रियां ( उणादि कोष, द्वारां (मन्त २२ .मौर ३३) (परत्नथा) ्ननादिकाल के सदुश भाप (पाहि) . (उत) गौर (गीभिः) इन स्तुतियों के कारण (वावृधस्व ) हमारी वृद्धि

English

Drink as of old, and let the draught delight thee: hear thou my prayer and let our songs exalt thee.

अध्याय २०

श्लोक 7.1

(१-४) १-३ सुकक्षः।४ विश्वामित्रः।इन्द्रः।गायत्री।उद् घेद॒भि श्रु॒ताम॑घं वृष॒भं नर्या॑पसम्।अस्ता॑रमेषि सूर्य

(1-4) 1-3 sukakṣaḥ| 4 viśvāmitraḥ| indraḥ| gāyatrī| ud ghedabhi śrutāmaghaṃ vṛṣabhaṃ naryāpasam| astārameṣi sūrya

हिन्दी अर्थ

कीजिये । (सूर्म ). हमारे तृतीय नेत्र को ( आविःकृणुहि ). आविष्कृत . कीजिये, प्रकद कीजिये । (इषः). हमारी भभिलाषारभो को ( पीपिहि) प्रगतिं . दीजिये या बढ़ाये । हसारे (शत्रून् ) कामादि शत्रुगो का ( जहि ) हनन कीजिये । (इन्द्र) है परमेश्वर ! ( गाः.) हमारी पाथिव भरभिलाषा्भों को काऽ २० सुव ्रथ्व॑वेद-माष्य कः १३

English

Make the Sun visible, make food abundant: slaughter the foes,. pierce through and free the cattle.

अध्याय २०

श्लोक 7.2

नव॒ यो न॑व॒तिं पुरो॑ बि॒भेद॑ बा॒ह्वोजसा ।अहिं॑ च वृत्र॒हाव॑धीत्

nava yo navatiṃ puro bibheda bāhvojasā | ahiṃ ca vṛtrahāvadhīt

हिन्दी अर्थ

३५. अबञिष्टि सोम॑कामं त्वाहुरयं सुतसतस पिवां मदाय । हि परमेश्वर ! ( भर्वाङ् एदि.) हमारी नोर कृपादुष्टि कीजिये । रस॒ की कामना करते हँ । (अयम्) यह.मक्तिरस (सुतः) निष्पत हा है,

English

Come to us; they have called thee Soma-lover. Here is the pressed juice: drink thereof for rapture.

अध्याय २०

श्लोक 7.3

सन॒ इन्द्रः॑ शि॒वः सखाश्वा॑व॒द् गोम॒द् यव॑मत्।उ॒रुधा॑रेव दोहते

sana indraḥ śivaḥ sakhāśvāvad gomad yavamat| urudhāreva dohate

हिन्दी अर्थ

(त॑स्य )उस का श्राप (मदाय) अपनी प्रसन्नता के लिये (पिब) पान कीजिये । कीजिये । (हृयमानः) बुलाए जाने-पर (शृणुहि) मेरी प्राथनाभ्मों को सुनिये, (इव पिता) जैसे कि पिता सन्तानो की प्रार्थनां को. सुनता है । उर

English

Widely-capacious, pour it down within thee, and invocated hear us like a father. Full is his chalice. Blessing! Like a pourer I have filled up the vessel for his drinking.

अध्याय २०

श्लोक 7.4

इन्द्र॑ क्रतु॒विदं॑ सु॒तं सोमं॑ हर्य पुरुष्टुत ।पिबा वृ॑षस्व॒ तातृ॑पिम्

indra kratuvidaṃ sutaṃ somaṃ harya puruṣṭuta | pibā vṛṣasva tātṛpim

हिन्दी अर्थ

३६. आधा अख करः खारा सेक्तेव कों सिपित पिवषये । . (अस्य) इख उपासक का (कलः) हृदय-कलश (भ्ापू्णः) भक्तिरस है। (दवं ) जसे (पिबध्यै) पीने के लिये (सेक्ता) दूष दिका सींचने- वाला (कोरम्) रषे भ्रन्नमय कोष को, शरीर को (सिसिचे) सीन्रता है,

English

Presented on the right, dear Soma juices have brought us Indra,. to rejoice him, hither. As cows low to their calves in stalls, so with our songs we glorify

अध्याय २०

श्लोक 8.1

(१-३) १ भरद्वाजः, २ कुत्सः, ३ विश्वामित्रः।इन्द्रः।त्रिष्टुप्।ए॒वा पा॑हि प्र॒त्नथा॒ मन्द॑तु त्वा श्रु॒धि ब्रह्म॑ वावृ॒धस्वो॒त गी॒र्भिः ।आ॒विः सूर्यं॑ कृणु॒हि पी॑पि॒हीषो॑ ज॒हि शत्रूं॑र॒भि गा इ॑न्द्र तृन्धि

(1-3) 1 bharadvājaḥ, 2 kutsaḥ, 3 viśvāmitraḥ| indraḥ| triṣṭup| evā pāhi pratnathā mandatu tvā śrudhi brahma vāvṛdhasvota gīrbhiḥ | āviḥ sūryaṃ kṛṇuhi pīpihīṣo jahi śatrūṃrabhi gā indra tṛndhi

हिन्दी अर्थ

१४ भरथरववेद-माष्य का०२०।सू० € है उपासको ! (वः) तुम्हारे लिये, (दस्मम्) दुःखों का.क्षण करने- 1 . (क्ष्) दुलोकनिवासी या मदा निन प्रकाश मेँ नित्रास करनेवाले,

English

This Indra, even your wondrous God who checks attack, who joys in the delicious juice. Celestial, bounteous Giver, girt about with might, rich, moun- tain-like, in precious things

अध्याय २०

श्लोक 8.2

अ॒र्वाङेहि॒ सोम॑कामं त्वाहुर॒यं सु॒तस्तस्य॑ पिबा॒ मदा॑य ।उ॒रु॒व्यचा॑ ज॒ठर॒ आ वृ॑षस्व पि॒तेव॑ नः शृणुहि हू॒यमा॑नः

arvāṅehi somakāmaṃ tvāhurayaṃ sutastasya pibā madāya | uruvyacā jaṭhara ā vṛṣasva piteva naḥ śṛṇuhi hūyamānaḥ

हिन्दी अर्थ

. . हए भरात् नाना सक्तियोवाले, (गिरि न) मेष के सदृशा (पुरुभोजसम् ) सब ¦ (मक्षू) शीघ्र ईमहे) हम प्राप्त होते हँ । गिरि मेघ (निच० १।१०) । का० २९ का०२०।दु९ भषवेवेदमाष्य १५ भू .. भयवेवेद-माष्य 1 १५ ( यतिभ्यः ) योगमा पर यत्न करनेवाले, यतियो के लिये, तथां ( भूमवे ) तप द्वारा कायिक गौर एेन्द्रियिक मलों का भजन करनेवाले

English

Him swift we seek for foodful booty rich in kine, brought hundredfold and thousandfold. I crave of thee that hero strength, that thou mayst first regard this prayer,

अध्याय २०

श्लोक 8.3

आपू॑र्णो अस्य क॒लशः॒ स्वाहा॒ सेक्ते॑व॒ कोशं॑ सिसिचे॒ पिब॑ध्यै ।समु॑ प्रि॒या आव॑वृत्र॒न् मदा॑य प्रदक्षि॒णिद॒भि सोमा॑स॒ इन्द्र॑म्

āpūrṇo asya kalaśaḥ svāhā sekteva kośaṃ sisice pibadhyai | samu priyā āvavṛtran madāya pradakṣiṇidabhi somāsa indram

हिन्दी अर्थ

तपस्वी-जन. के लिये, ( हिते घने ) उनके हितकर मोक्षघंन की प्राप्ति कं निमित्त, है परमेदवर आपः (थेन) जिस सात्विकवीर्यं, भौर (येन) जिस प्रवेद) पूरवचित्ति =पूवंचेतना = मविष्य मेँ होनेवाली घटना का पूवज्ञान, ताकि श्रभ्यासी उन दुर्घटना से भरपनी रक्षा कर सकं । यथा--परिणाम- श्रयसंयमादतीतानागतज्ञानम् (योग० ३।१६) । प्रतीत का अथं है-- भूत ्नौर अनागत का श्रथे है-मविष्य । योगी संयम द्वारा मतीत भौर भरनागत घटनाभ्रों का. परिज्ञान कर सकता है । इस पूर्वचित्ति के लिये “सुवीयं भौर ब्रह्मविद्या” की -भ्रावदयकता है ।

English

Wherewith thou helpest Bhrigu and the Yatis and Praskanva when the prize was staked. Wherewith thou sentest mighty waters to the sea, that, Indra, is. thy hero strength.

अध्याय २०

श्लोक 9.1

(१-४) १-२ नोधा, ३४ मेध्यातिथिः।इन्द्रः।१-२ त्रिष्टुप्, ३४ प्रगाथः।(बृहती+सतोबृहती)।तं वो॑ द॒स्ममृ॑ती॒षहं॒ वसो॑र्मन्दा॒नमन्ध॑सः ।अ॒भि व॒त्सं न स्वस॑रेषु धे॒नव॒ इन्द्रं॑ गी॒र्भिर्न॑वामहे

(1-4) 1-2 nodhā, 34 medhyātithiḥ| indraḥ| 1-2 triṣṭup, 34 pragāthaḥ| (bṛhatī+satobṛhatī)| taṃ vo dasmamṛtīṣahaṃ vasormandānamandhasaḥ | abhi vatsaṃ na svasareṣu dhenava indraṃ gīrbhirnavāmahe

हिन्दी अर्थ

(थेन) जिस साम्यं से आपने ( समुद्रम् ) समुद्र का, भौर उस भं (महीः भप: ) महाराशिरूप .म जलो का ( भ्रसृजः ) . सजन किया है, (ते) प्रापकाही ह। (भ्रस्य) इस परमेदवर की (सः) वह. महिमा ) . महिमा (सद्यः) शीघ्र (संनशे न) नहीं समी जा सकती, ( यम् ) जिस.

English

For ever unattainable is this power of him to whom the worlds. have called aloud. 269

अध्याय २०

श्लोक 9.2

द्यु॒क्षं सु॒दानुं॒ तवि॑षीभि॒रावृ॑तं गि॒रिं न पु॑रु॒भोज॑सम्।क्षु॒मन्तं॒ वाजं॑ श॒तिनं॑ सह॒स्रिणं॑ म॒क्षू गोम॑न्तमीमहे

dyukṣaṃ sudānuṃ taviṣībhirāvṛtaṃ giriṃ na purubhojasam| kṣumantaṃ vājaṃ śatinaṃ sahasriṇaṃ makṣū gomantamīmahe

हिन्दी अर्थ

अभिप्राय यह है कि परमेदवर में वर्षकारी सामर्थ्यं है ।. उसी. के दवारा समुद्रौ का सर्जन हरा है, गौर अन्तरिक्ष में मेषो की गजेनाए होती ह 1 . . १६ भयवेवेद-भाष्य का०२० ।सुऽ ५.

English

These songs of ours exceeding sweet, these hymns of praise as- cend to thee, Like ever-conquering chariots that display their strength, gain wealth and give unfailing aid.

अध्याय २०

श्लोक 9.3

तत् त्वा॑ यामि सु॒वीर्यं॒ तद् ब्रह्म॑ पू॒र्वचि॑त्तये ।येना॒ यति॑भ्यो॒ भृग॑वे॒ धने॑ हि॒ते येन॒ प्रस्क॑ण्व॒मावि॑थ

tat tvā yāmi suvīryaṃ tad brahma pūrvacittaye | yenā yatibhyo bhṛgave dhane hite yena praskaṇvamāvitha

हिन्दी अर्थ

. स्तुतिवाणियां, तथा (स्तोमासः). सामगान, (उद् ईरते) हम उप्रासकों के हृदयो से उत्थित हो रहे है । ये स्तुतिवाणियां भौर सामगान (सत्राजितः) होती, भौर ये (रथाः इव) रथों के सदृश ( वाजयन्तः ) उद्देश्य की भोर (सूर्या इव ) सूयं की किरणे जिस प्रकार जगत् को शुद्ध करती है, इसी प्रकार भरने कायिकं एेन्द्रियिक भौर मानसिक मलो का (भुगवः) भर्जन

English

The Bhrigus are like suns, like Kanvas, and have gained all that their thoughts were bent to win.

अध्याय २०

श्लोक 9.4

येना॑ समु॒द्रमसृ॑जो म॒हीर॒पस्तदि॑न्द्र॒ वृष्णि॑ ते॒ शवः॑ ।स॒द्यः सो अ॑स्य महि॒मा न सं॒नशे॒ यं क्षो॒णीर॑नुचक्र॒दे

yenā samudramasṛjo mahīrapastadindra vṛṣṇi te śavaḥ | sadyaḥ so asya mahimā na saṃnaśe yaṃ kṣoṇīranucakrade

हिन्दी अर्थ

करनेवाले तृपस्वीजन भमी ( कण्वा इव ) निमीलित-नेत्र होकर ध्यास करनेवाले योगियों के समानं (विष्वं धीतम्) ध्यानाम्थास के सब फलो को - ४३, शः पूमिदातिर् दास॑मकेषिददर दयमानो नं शतन ।

English

The living men of Priyamedha’s race have sung exalting Indra with their lauds. Fort-render, Lord of Wealth, dispelling foemen, Indra with lightnings hath o’ercome the

अध्याय २०

श्लोक 10.1

१-२ मेध्यातिथिः।इन्द्रः।प्रगाथ।(बृहती+ सतोबृहती)।उदु॒ त्ये मधु॑मत्तमा॒ गिर॒ स्तोमा॑स ईरते ।स॒त्रा॒जितो॑ धन॒सा अक्षि॑तोतयो वाज॒यन्तो॒ रथा॑ इव

1-2 medhyātithiḥ| indraḥ| pragātha| (bṛhatī+ satobṛhatī)| udu tye madhumattamā gira stomāsa īrate | satrājito dhanasā akṣitotayo vājayanto rathā iva

हिन्दी अर्थ

. छलकपटसरूी वुत्रों कां (भमिनात् का० २० सुऽ. ११ भथवंवेद-माष्य १७ , (इनदरः) परमेश्वर - (पूरभिद् ) वेहपुरियों का भेदन करतां है भरात् मृत्यु को करता, तथा मोक्षावस्था के अधिकारियों के देहो का मेदन क्र

English

Dāsa. Impelled by prayer and waxen great in body, he hath filled earth and heaven, the bounteous

अध्याय २०

श्लोक 10.2

कण्वा॑ इव॒ भृग॑वः॒ सूर्या॑ इव॒ विश्व॒मिद्धी॒तमा॑नशुः ।इन्द्रं॒ स्तोमे॑भिर्म॒हय॑न्त आ॒यवः॑ प्रि॒यमे॑धासो अस्वरन्

kaṇvā iva bhṛgavaḥ sūryā iva viśvamiddhītamānaśuḥ | indraṃ stomebhirmahayanta āyavaḥ priyamedhāso asvaran

हिन्दी अर्थ

परमेदवर (शत्रून्) उपासको के प्रतिबन्धको का (वि दयमानः) विशेषतया हनन करता है । (तन्वा) निज विस्तार से'(वावृघानः) बढ़ा हमा परमेश्वद (आपृणाद् ) दानरूप मेँ दे रखे है 1 पृणाति दानकर्म (निधं० २।२०)। हृदरं धितीनाम॑धि मादंषीणां विशं हैवीनामुत श्यावा ॥२॥

English

Giver. I stimulate this zeal, the Strong, the Hero, decking my song of praise for thee Immortal.

अध्याय २०

श्लोक 11.1

१-११ विश्वामित्र।इन्द्रः।त्रिष्टुप्।इन्द्रः॑ पू॒र्भिदाति॑र॒द् दास॑म॒र्कैर्वि॒दद्व॑सु॒र्दय॑मानो॒ वि शत्रू॑न्।ब्रह्म॑जूतस्त॒न्वा वावृधा॒नो भूरि॑दात्र॒ आपृ॑ण॒द् रोद॑सी उ॒भे

1-11 viśvāmitra| indraḥ| triṣṭup| indraḥ pūrbhidātirad dāsamarkairvidadvasurdayamāno vi śatrūn| brahmajūtastanvā vāvṛdhāno bhūridātra āpṛṇad rodasī ubhe

हिन्दी अर्थ

सब लोक-लोकान्तरो के, (-मानुषी्णां विशाम् ) समग्र. मानुष प्रजां के करने की नीतिवाले परमेदवर ने प् ) छलकपटोवाले प्राजनो के हनन किया. है; (उक्तषग्ः) केवलं निजं. कामना द्वारा दहन कर देनेवाले परमेदवर ने कामादि के .(व्यसम्) भङ्ग-. १८ भथ्वेवेद-माष्य का० २० 1 सू० ११

English

O Indra, thou art equally the leader of heavenly hosts and human generations. Leading his band Indra encompassed Vritra; weak grew the wily leader enchanters.

अध्याय २०

श्लोक 11.2

म॒खस्य॑ ते तवि॒षस्य॒ प्र जू॒तिमिय॑र्मि॒ वाच॑म॒मृता॑य॒ भूष॑न्।इन्द्र॑ क्षिती॒नाम॑सि॒ मानु॑षीणां वि॒शां दैवी॑नामु॒त पू॑र्व॒यावा॑

makhasya te taviṣasya pra jūtimiyarmi vācamamṛtāya bhūṣan| indra kṣitīnāmasi mānuṣīṇāṃ viśāṃ daivīnāmuta pūrvayāvā

हिन्दी अर्थ

का० २० । सू° १ १. भरयवेद-माष्य १६ धारण करता हं । (जरित्रे) स्तोता के लिये परमेदवर (दमाः धियः); इन सात्विक बुद्धियो को (अचेतयत्) जागरित करता है, गौर (आसाम्) इन उपासक जन (अस्य) इस (इन्द्रस्य) परभेदवर के (महः महानि) महान् से महान् (पुरूणि) नानाविष (सुकृता. कं ) सत्कमो का (पनयन्ति) स्तवन करते हैँ । (अभिभूत्योजाः) पराभवकारी भोज से सम्पन्न परमेदवर ने (वृजनेन) निज स्वाभाविक बल द्वाराः (मायाभिः) छलकपरटोँ से युक्त

English

For man the days’ bright ensign he illumined, and found the light for his great joy and gladness.

अध्याय २०

श्लोक 11.3

इन्द्रो॑ वृ॒त्रम॑वृणो॒च्छर्ध॑नीतिः॒ प्र मा॒यिना॑ममिना॒द् वर्प॑णीतिः ।अह॒न् व्यंसमु॒शध॒ग् वने॑ष्वा॒विर्धेना॑ अकृणोद् रा॒म्याणा॑म्

indro vṛtramavṛṇocchardhanītiḥ pra māyināmaminād varpaṇītiḥ | ahan vyaṃsamuśadhag vaneṣvāvirdhenā akṛṇod rāmyāṇām

हिन्दी अर्थ

पिपेष ) सम्यक्तया पीस दिमाहै। . बुनन =बल (निध० २।९) । उपासक अनुमव कर रहा है किः परमेश्वर ने उसके छल-कपट भ्रादि पापों को नितान्त समाप्त कर दिया है।. राष्ट का राजा भी पापियों को पीस दे, ग्रह राजनंतिक भावना भीः भरपूर करनेवाले परमेद्वर ने ( महवा युधा ) भासुर शक्तियों के साथः . घनं (चकार) प्रकट कर दिया है । ( विवस्वतः ) सुर्यं के (सदने) सदन

English

Forward to fiercely falling blows pressed Indra, hero-like doing many hero exploits. Those holy songs he taught the bard who praised him, and widely spread these Dawns’

अध्याय २०

श्लोक 11.4

इन्द्रः॑ स्व॒र्षा ज॒नय॒न्नहा॑नि जि॒गायो॒शिग्भिः॒ पृत॑ना अभि॒ष्टिः ।प्रारो॑चय॒न्मन॑वे के॒तुमह्ना॒मवि॑न्द॒ज्ज्योति॑र्बृह॒ते रणा॑य

indraḥ svarṣā janayannahāni jigāyośigbhiḥ pṛtanā abhiṣṭiḥ | prārocayanmanave ketumahnāmavindajjyotirbṛhate raṇāya

हिन्दी अर्थ

-परमेष्वर .के हदय-सदन मेँ ध्यान लगाये (विभ्रौः कवयः) -कवि उपासक (अस्प) इस परमेदवर कै (तानि) उन सत्कमोँ का (उक्थेभिः) सूर्तो द्वारा (गृणन्ति) स्तवन कंरते है । वरिवः धन (निघ ० २।१०)।

English

resplendent colour. They laud the mighty acts of him the mighty, the many glorious deeds performed by Indra.

अध्याय २०

श्लोक 11.5

इन्द्र॒स्तुजो॑ ब॒र्हणा॒ आ वि॑वेश नृ॒वद् दधा॑नो॒ नर्या॑ पु॒रूणि॑ ।अचे॑तय॒द् धिय॑ इ॒मा ज॑रि॒त्रे प्रेमं वर्ण॑मतिरच्छु॒क्रमा॑साम्

indrastujo barhaṇā ā viveśa nṛvad dadhāno naryā purūṇi | acetayad dhiya imā jaritre premaṃ varṇamatiracchukramāsām

हिन्दी अर्थ

५०. -सत्रासाई बरणयं सोद, संसवांप॑सं रप देवीः । दाम्) यह. दुलोक ( ससान ) दिया है, उस. ( सत्रासाहम्) वस्तुतः परां- (अनु) निरन्तर (मदन्ति) स्तुतिर्या करते. त

English

He in his strength, with all-surpassing prowess, through wond- rous arts crushed the malignant Dasyus.

अध्याय २०

श्लोक 11.6

म॒हो म॒हानि॑ पनयन्त्य॒स्येन्द्र॑स्य॒ कर्म॒ सुकृ॑ता पु॒रूणि॑ ।वृ॒जने॑न वृजि॒नान्त्सं पि॑पेष मा॒याभि॒र्दस्यूंर॒भिभू॑त्योजाः

maho mahāni panayantyasyendrasya karma sukṛtā purūṇi | vṛjanena vṛjināntsaṃ pipeṣa māyābhirdasyūṃrabhibhūtyojāḥ

हिन्दी अर्थ

(ससान) दिर ( उत ) भौर (सूयम्) सूरय (ससान) दिया है तथा पुरुभोजसम्) सब को पालनेवाली ( गाम् ) पृथिवी ( ससान ) दी है । += ) ५४ (हिरण्ययम्) सोना-चाम्दी के सदुश ( भोगम् ) भोगराचनः भवना की (प्र भ्रावत्) परमेदवरनं रक्षा कीहै।

English

Lord of the brave, Indra who rules the people gave freedom to the Gods by might and battle. Wise singers glorify with chanted praises these his achievements in Vivasvān’s dwelling.

अध्याय २०

श्लोक 11.7

यु॒धेन्द्रो॑ म॒ह्ना वरि॑वश्चकार दे॒वेभ्यः॒ सत्प॑तिश्चर्षणि॒प्राः ।वि॒वस्व॑तः॒ सद॑ने अस्य॒ तानि॒ विप्रा॑ उ॒क्थेभिः॑ क॒वयो॑ गृणन्ति

yudhendro mahnā varivaścakāra devebhyaḥ satpatiścarṣaṇiprāḥ | vivasvataḥ sadane asya tāni viprā ukthebhiḥ kavayo gṛṇanti

हिन्दी अर्थ

बभूवतुरिति वा" (६।३ ।१३) मी कहा है । नासिका . से पेदा होनेवाले हँ वीस प्नौर प्रदवास'। अदिवनौ' को "देवानां भिषजौ मी कहा है 1 श्वास- रोगो के निवारक है । शुद्ध श्वासप्रश्वास शारीरिक-मलो को दुर कर नासिका . मे सतत गति करनेवाले, मानो दो भरव . ्वास-प्ररवास

English

Excellent, conqueror, the victory-giver, the winner of the light and godlike waters, He who hath won this broad earth and this heaven,—in Indra they rejoice who love

अध्याय २०

श्लोक 11.8

स॒त्रा॒साहं॒ वरे॑ण्यं सहो॒दां स॑स॒वांसं॒ स्वर॒पश्च॑ दे॒वीः ।स॒सान॒ यः पृ॑थि॒वीं द्यामु॒तेमामिन्द्रं॑ मद॒न्त्यनु॒ धीर॑णासः

satrāsāhaṃ vareṇyaṃ sahodāṃ sasavāṃsaṃ svarapaśca devīḥ | sasāna yaḥ pṛthivīṃ dyāmutemāmindraṃ madantyanu dhīraṇāsaḥ

हिन्दी अर्थ

यावज्जीवन शरीर मे या नासिका में सतत गति करते रहते है । भ्रत्यः= का० २०1 सुऽ १२ गथववेवेद-माष्य । २१ ईदवर का पुत्र मानता ह वहु “भारयं' है, अर्थात् भास्तिक भावनावाला ।

English

devotions. He gained possession of the Sun and horses; Indra obtained the cow who feedeth many.

अध्याय २०

श्लोक 11.9

स॒सानात्यां॑ उ॒त सूर्यं॑ ससा॒नेन्द्रः॑ ससान पुरु॒भोज॑सं॒ गाम्।हि॒र॒ण्यय॑मु॒तभोगं॑ ससान ह॒त्वी दस्यू॒न् प्रार्यं॒ वर्ण॑मावत्

sasānātyāṃ uta sūryaṃ sasānendraḥ sasāna purubhojasaṃ gām| hiraṇyayamutabhogaṃ sasāna hatvī dasyūn prāryaṃ varṇamāvat

हिन्दी अर्थ

का कथन करनेवाले नास्तिको को (नूनुदे) धकेल. दिया ह । ( भ्रथ ) भौर (दमिता) नास्तिकता की मावनाभ्नों को दबानेवाला, 1 करनेवाला परमेदकर ( विवाचः ) वेदविरुद्धंभाषियों . के ( क्रतूनाम् ) संकल्पो कमो भौर प्रज्ञा का (अमि भ्र॑मवत्) पराभव करता है (अस्मिन्) इस (भरे) देवासुर-संग्राम मे ( वाजसातौ ) बल की भरार्थंनाओों को सुनता है, (उग्रम्) भसुर-मावनाभों के पराभवम उग्रहै।

English

Treasure of gold he won; he smote the Dasyus and gave protec- tion to the race of Aryas. He took the plants and days for his possession; he gained the forest trees and air’s mid region.

अध्याय २०

श्लोक 11.10

इन्द्र॒ ओष॑धीरसनो॒दहा॑नि॒ वन॒स्पतीँ॑रसनोद॒न्तरि॑क्षम्।बि॒भेद॑ ब॒लं नु॑नु॒दे विवा॒चोऽथा॑भवद् दमि॒ताभिक्र॑तूनाम्

indra oṣadhīrasanodahāni vanaspatī~rasanodantarikṣam| bibheda balaṃ nunude vivāco'thābhavad damitābhikratūnām

हिन्दी अर्थ

(उशिग्मिः) मेघावी व्यक्तियों के द्वारा ( पृतनाः ) कामादि की सेनां पर (जिगाय) विजय पाता है। ( मनवे ) मनुष्य-जाति के लिये (जह्वा केतुम्) दिनों के फण्डे सूयं को ( प्रारोचयत् ) परमेदवर ने चमकाया है 1 गौर (ब्रहते रणाय ) महारमणीयता प्रकट करने कै लिये (ज्योतिः) महा- ज्योतिरूप सूयं को (्विन्दत्) उसने भरपनाया है । निदिध्यासन करनेवाले उपासक जनों के लिये उनके नये दिनों का केतु भर्थात् भराष्यात्मिक-सू्यं चमका है, भौर जीवन को महारमणीय बनाने के

English

He who burns fierce in forests slaughtered Vyansa, and made the milch-kine of nights apparent.

अध्याय २०

श्लोक 11.11

शु॒नं हु॑वेम म॒घवा॑न॒मिन्द्र॑म॒स्मिन् भरे॒ नृत॑मं॒ वाज॑सातौ ।शृ॒ण्वन्त॑मु॒ग्रमू॒तये॑ स॒मत्सु॒ घ्नन्तं॑ वृ॒त्राणि॑ सं॒जितं॒ धना॑नाम्

śunaṃ huvema maghavānamindramasmin bhare nṛtamaṃ vājasātau | śṛṇvantamugramūtaye samatsu ghnantaṃ vṛtrāṇi saṃjitaṃ dhanānām

हिन्दी अर्थ

अचैतयद् धिय॑ इमा जरति परेम वणेमतिरच्छकरमासाम् ॥।५॥ विनाशिनी शक्ति के कारण उसके हृदय मेँ (आ विवेश) प्रवेश्य पाता वंह ( नर्या.) नरदहितकारी ( पुरूणि. ) प्रभूत सामग्री (दधानः) धारण

English

Indra, light-winner, days’ creator, conquered, as guardian, hostile bands with those who loved him.

अध्याय २०

श्लोक 12.1

(१-७) १-६ वसिष्ठः, ७ अत्रिः।इन्द्रः।त्रिष्टुप्।उदु॒ ब्रह्मा॑ण्यैरत श्रव॒स्येन्द्रं॑ सम॒र्ये म॑हया वसिष्ठ ।आ यो विश्वा॑नि॒ शव॑सा त॒तानो॑पश्रो॒ता म॒ ईव॑तो॒ वचां॑सि

(1-7) 1-6 vasiṣṭhaḥ, 7 atriḥ| indraḥ| triṣṭup| udu brahmāṇyairata śravasyendraṃ samarye mahayā vasiṣṭha | ā yo viśvāni śavasā tatānopaśrotā ma īvato vacāṃsi

हिन्दी अर्थ

हनन करता है, गौर (घनानाम्) उन की दाक्तियो पर (संजितम्) विजय आ यो विशवानि श्रव॑सा ततारनोपभ्नोवा म् हैवतो वर्चासि ॥१॥ २२ भथ्ववेद-माष्य का० २०। स° १२.

English

Vala he cleft, and chased away opponents: thus was he tamer of the overweening. Call we on Maghavan, auspicious Indra, best Hero in the fight where spoil is gathered,

अध्याय २०

श्लोक 12.2

अया॑मि॒ घोष॑ इन्द्र दे॒वजा॑मिरिर॒ज्यन्त॒ यच्छु॒रुधो॒ विवा॑चि ।न॒हि स्वमायु॑श्चिकि॒ते जने॑षु॒ तानीदंहां॒स्यति॑ पर्ष्य॒स्मान्

ayāmi ghoṣa indra devajāmirirajyanta yacchurudho vivāci | nahi svamāyuścikite janeṣu tānīdaṃhāṃsyati parṣyasmān

हिन्दी अर्थ

शान कर, परमेदवर-सम्बन्धी उपदे दिया कर । ( यः ) जिस (भ्रा ततान) सवत्र फंलाया है । वह (मे) मेरे (वचांसि वचनो को ६५. ) संमीप होने के कारण (श्रोता) सुनता है ।. मेरे हृदय म व्याप्त हृभरा-हुभा सनतो है, (ई वतः) जो मँ कि उस परभेदवरः तक पहुंच चुका हूं । ५५. अयामि घोष॑ इन्दा देवजामिरिरज्यन्त यच्छररुषो विवाचि ।

English

The Strong, who listens, who gives aid in battles, who slays the Vritras, wins and gathers treasures.

अध्याय २०

श्लोक 12.3

यु॒जे रथं॑ ग॒वेष॑णं॒ हरि॑भ्या॒मुप॒ ब्रह्मा॑णि जुजुषा॒णम॑स्थुः ।वि बा॑धिष्ट स्य रोद॑सी महि॒त्वेन्द्रो॑ वृ॒त्राण्य॑प्र॒ती ज॑घ॒न्वान्

yuje rathaṃ gaveṣaṇaṃ haribhyāmupa brahmāṇi jujuṣāṇamasthuḥ | vi bādhiṣṭa sya rodasī mahitvendro vṛtrāṇyapratī jaghanvān

हिन्दी अर्थ

(इन्द्र) है परमेरवर ! (घोषे) भ्ातंनादों के उठने पर, (यद्) जव म (देवजाभिः) भराप-देव का बन्धु. ( श्रयामि भराप्रकीररण्ेमाताह , (विवाचि) .मेरी मौनावस्था मे. ( शुरुषः ) शौक-सन्ताप को. रोकने- स द नृषं (इरज्यन्त ) ्राप की परिचर्या मे लग जाती ह ।

English

He who with might extends through all existence hears words which I, his faithful servant, utter.

अध्याय २०

श्लोक 12.4

आप॑श्चित् पिप्यु स्त॒र्यो॒३ न गावो॒ नक्ष॑न्नृ॒तं ज॑रि॒तार॑स्त इन्द्र ।या॒हि वा॒युर्न नि॒युतो॑ नो॒ अच्छा॒ त्वं हि धी॒भिर्दय॑से॒ वि वाजा॑न्

āpaścit pipyu staryo3 na gāvo nakṣannṛtaṃ jaritārasta indra | yāhi vāyurna niyuto no acchā tvaṃ hi dhībhirdayase vi vājān

हिन्दी अर्थ

जनों म (चिकिते नहि) प्रकट नहीं होता । क्योंकि उन सवंसाघारण ग भ (तानि इत्) वे प्रसिद्ध (मरहांसि ) पाप विद्यमान रहते है 1 है परमेरवर। (अस्मान्) हम उपासको को भाप (अति पपि) भवसागर से पार कीजिये । इश्ज्यन्त =परिचरणकर्मा ( निघं ० २।५ )' । शुखधः शुचं संद- का०२०। सु° १९ भरयववेद-भाष्य २३ करनेवाले परमेरवर का (उप भ्रस्थुः) उपस्थान करते है, उस के समीप उप.

English

A cry was raised which reached the Gods, O Indra, a cry to them to send us strength in combat.

अध्याय २०

श्लोक 12.5

ते त्वा॒ मदा॑ इन्द्र मादयन्तु शु॒ष्मिणं॑ तुवि॒राध॑सं जरि॒त्रे।एको॑ देव॒त्रा दय॑से॒ हि मर्ता॑न॒स्मिन्छू॑र॒ सव॑ने मादयस्व

te tvā madā indra mādayantu śuṣmiṇaṃ tuvirādhasaṃ jaritre| eko devatrā dayase hi martānasminchūra savane mādayasva

हिन्दी अर्थ

दवारा (रोदसी) भूलोक भौर द्युलोक का ( वि बाधिष्ट ) प्रलयकाल . विना कृर देता है । वह् ही (वृत्राणि) पाप-वृ्रौं का प्रती--भभतीनि ) विता विरोध. के (जघन्वान्) हनन कर देता है। याहि वायुनं नियुतो नो अच्छा सवै हि घीमिर्दय॑से वि वाजाम्॥४।।

English

None among men knows his own life’s duration: bear us in safety over these our troubles. The Bays, the booty-seeking car I harness: my prayers have reached him who accepts them

अध्याय २०

श्लोक 12.6

ए॒वेदिन्द्रं॒ वृष॑णं॒ वज्र॑बाहुं॒ वसि॑ष्ठासो अ॒भ्यर्चन्त्य॒र्कैः ।स न॑ स्तु॒तो वी॒रव॑द् धातु॒ गोम॑द् यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः

evedindraṃ vṛṣaṇaṃ vajrabāhuṃ vasiṣṭhāso abhyarcantyarkaiḥ | sa na stuto vīravad dhātu gomad yūyaṃ pāta svastibhiḥ sadā naḥ

हिन्दी अर्थ

भ्नाप्यायित हो जाती है, (न) जैसेः कि (स्त्यः) बां (गावः) गौए' खा- खाकर, आप्यायित हो जाती हैँ । तब (इन्दर) है परमेदवर ! (ते) भाप के का (वि दयसे) प्रदान करते हैँ । (नः) हम (निगूतः) हजारों उपासको के ब्राग हनारो प्राणियों को प्राप्त हो रही है ।

English

gladly. 270

अध्याय २०

श्लोक 12.7

ऋ॒जी॒षी व॒ज्री वृ॑ष॒भस्तु॑रा॒षाट्छु॒ष्मी राजा॑ वृत्र॒हा सो॑म॒पावा॑ ।यु॒क्त्वा हरि॑भ्या॒मुप॑ यासद॒र्वाङ् माध्यं॑दिने॒ सव॑ने मत्स॒दिन्द्रः॑

ṛjīṣī vajrī vṛṣabhasturāṣāṭchuṣmī rājā vṛtrahā somapāvā | yuktvā haribhyāmupa yāsadarvāṅ mādhyaṃdine savane matsadindraḥ

हिन्दी अर्थ

( इद्र है परमेदवर ! ( ते ) वे ( मदाः ) हर्षोत्पादक भक्तिरस मनोरथ करे । (देवता) देवों मे भ्राप ही (एकः) एक देव है जो कि (हि) दया कर रहे हँ । (बूर) है पराक्रमशील ! (भस्मन्) इस (सवने). भक्ति-

English

Indra, when he had slain resistless Vritras, forced with his might the two world-halves asunder.

अध्याय २०

श्लोक 13

(१-४) १ वामदेवः, २ गोतमः, ३ कुत्सः, ४ विश्वामित्रः।१ इन्द्राबृहस्पतिः, २ मरुतः, ३-४ अग्निः।१-३ जगती, ४ त्रिष्टुप्

(1-4) 1 vāmadevaḥ, 2 gotamaḥ, 3 kutsaḥ, 4 viśvāmitraḥ| 1 indrābṛhaspatiḥ, 2 marutaḥ, 3-4 agniḥ| 1-3 jagatī, 4 triṣṭup

हिन्दी अर्थ

२४ ह क्रथरवैवेद-भाष्य का०२०। सू० १३ को विलोडित कैरनेवाले, (इन्द्रम्) आप परमेरवर की ( एव) ही (भकः) हम उपासकों द्वारां स्तुति पाया हृभ्रा वह॒ परमेश्वर (धातु) हम में एेसी

English

Like barren cows, moreover, swelled the waters: the singers sought thy holy rite, O Indra. Come unto us as with his team comes Vāyu: thou, through our solemn hymns, bestowest

अध्याय २०

श्लोक 14.1

१-४ सोभरिः।इन्द्रः।प्रगाथः (विषमा ककुम्+समा सतोबृहती) व॒यमु॒ त्वाम॑पूर्व्य स्थू॒रं न कच्चि॒द् भर॑न्तोऽव॒स्यवः॑ ।वाजे॑ चि॒त्रं ह॑वामहे

1-4 sobhariḥ| indraḥ| pragāthaḥ (viṣamā kakum+samā satobṛhatī) vayamu tvāmapūrvya sthūraṃ na kaccid bharanto'vasyavaḥ | vāje citraṃ havāmahe

हिन्दी अर्थ

दयार (नः) हमारी (सदा पात) सदा-रक्षा करं । साम की विधियो द्वारा, ( युक्त्वा ) हम उपासको को योगयुक्त करके, ४४ वषं की भ्रायु को माध्यन्दिनं सवन कहा है 1

English

booty. So may these gladdening draughts rejoice thee, Indra, the Mighty, very bounteous to the

अध्याय २०

श्लोक 14.2

उप॑ त्वा॒ कर्म॑न्नू॒तये॒ स नो॒ युवो॒ग्रश्च॑क्राम॒ यो धृ॒षत्।त्वामिद्ध्य॑वि॒तारं॑ ववृ॒महे॒ सखा॑य इन्द्र सान॒सिम्

upa tvā karmannūtaye sa no yuvograścakrāma yo dhṛṣat| tvāmiddhyavitāraṃ vavṛmahe sakhāya indra sānasim

हिन्दी अर्थ

का०२०।सूु० १३. भयवंवेद-माष्य । २५ (बृहस्पते) है बृहती-सेना के पति ! आप (-च ) भ्रौर ( इन्द्रः ) (सोमम्) भक्तिरस का (पिबतम्) पान किया करो । ताकि (स्वामुवः) स्वामावतः प्रकट हो जानेवाले (इन्दवः) हृदयो को क्लेदित कर देनेवाले,

English

singer. Alone among the Gods thou pitiest mortals: O Hero, make thee glad at this libation.

अध्याय २०

श्लोक 14.3

यो न॑ इ॒दमि॑दं पु॒रा प्र वस्य॑ आनि॒नाय॒ तमु॑ व स्तुषे ।सखा॑य॒ इन्द्र॑मू॒तये॑

yo na idamidaṃ purā pra vasya ānināya tamu va stuṣe | sakhāya indramūtaye

हिन्दी अर्थ

(मरुतः) है संनिक योद्धान्नो, या श्रधिकारियो ! (वः) ञापको.. (बा वहन्तु) उपासना-यज्ञो मे लाया करे भ्राप (बाहुभिः) अपने बाहुबलों (सीदत) प्राकर बैषियि । (वः) तुम्हारे लिये (उरु) यह महती (सदः कृतम्)

English

Thus the Vasishthas glorify with praises Indra, the Mighty One, whose arm wields thunder. Praised, may he guard our wealth in kine and heroes. Ye Gods,. preserve us evermore with

अध्याय २०

श्लोक 14.4

हर्य॑श्वं॒ सत्प॑तिं चर्षणी॒सहं॒ स हि ष्मा॒ यो अम॑न्दत ।आ तु नः॒ स व॑यति॒ गव्य॒मश्व्यं॑ स्तो॒तृभ्यो॑ म॒घवा॑ श॒तम्

haryaśvaṃ satpatiṃ carṣaṇīsahaṃ sa hi ṣmā yo amandata | ā tu naḥ sa vayati gavyamaśvyaṃ stotṛbhyo maghavā śatam

हिन्दी अर्थ

होने पर, इसके मान मं हम् (मनीषया) बुद्धिपूवेक सोचकर, (इमम्) इस को महिमा्युक्त करते ह । (इव) जैसे.कि बुद्धिपूवंक (रथम.)रथ का निर्माण (संसदि) संसद् में उपस्थिति होने पर (नः) हम प्रजाजनों के ( प्रमतिः) विचार (भद्रा) सुखदामी भौर कल्याणकारी हो जातं ह । (अग्ने) है राष्ट के अ्रग्रगी ! ( तवं) भ्रापके साथ ( सस्ये ).हम प्रजाजनों का सखिभावः

English

blessings. Impetuous, Thunderer, strong, quelling the mighty, King, potent,

अध्याय २०

श्लोक 15.1

१-६गोतमः।इन्द्रः।त्रिष्टुप्।प्र मंहि॑ष्ठाय बृह॒ते बृ॒हद्र॑ये स॒त्यशु॑ष्माय त॒वसे॑ म॒तिं भ॑रे ।अ॒पामि॑व प्रव॒णे यस्य॑ दु॒र्धरं॒ राधो॑ वि॒श्वायु॒ शव॑से॒ अपा॑वृतम्

1-6gotamaḥ| indraḥ| triṣṭup| pra maṃhiṣṭhāya bṛhate bṛhadraye satyaśuṣmāya tavase matiṃ bhare | apāmiva pravaṇe yasya durdharaṃ rādho viśvāyu śavase apāvṛtam

हिन्दी अर्थ

जातवेदाः जातंविद्यः जातप्रजञात्ः (निर० ७।५।१६) । संसद् अधिकारियों के साथ सखिभाव से रंहनां चाहिए । . पत्मीवतर््तं त्रीथ॑देवानुष्वषमा. बह मादस ॥२॥

English

Vritra-slayer, Soma-drinker, May he come hither with his yoked bay horses. May Indra glad- den him at noon libation.

अध्याय २०

श्लोक 15.2

अध॑ ते॒ विश्व॒मनु॑ हासदि॒ष्टय॒ आपो॑ नि॒म्नेव॒ सव॑ना ह॒विष्म॑तः ।यत् पर्व॑ते॒ न स॒मशी॑त हर्य॒त इन्द्र॑स्य॒ वज्रः॒ श्नथि॑ता हिर॒ण्ययः॑

adha te viśvamanu hāsadiṣṭaya āpo nimneva savanā haviṣmataḥ | yat parvate na samaśīta haryata indrasya vajraḥ śnathitā hiraṇyayaḥ

हिन्दी अर्थ

(आयाहि) आदये । (नानारथम् आपके ध्रधिकार में नाना रथं है । (वा) तथा आप के पास (विभवः) प्रभूत सम्पत्तियां है (भ्रदवाः) भौर नाना च देवान्) ३३ देवों को (श्रा वह) हम प्रजाजनो.की ओर आने में प्रेरितं - किया कीजिये । ओौर वे (अनुस्वधम् ) भपनी-अपंनी रुचि के भरनुसार, प्रजा

English

Let your swift-gliding coursers bear you hitherward with their fleet pinions. Come ye forward with your arms.

अध्याय २०

श्लोक 15.3

अ॒स्मै भी॒माय॒ नम॑सा॒ सम॑ध्व॒र उषो॒ न शु॑भ्र॒ आ भ॑रा॒ पनी॑यसे ।यस्य॒ धाम॒ श्रव॑से॒ नामे॑न्द्रि॒यं ज्योति॒रका॑रि ह॒रितो॒ नाय॑से

asmai bhīmāya namasā samadhvara uṣo na śubhra ā bharā panīyase | yasya dhāma śravase nāmendriyaṃ jyotirakāri harito nāyase

हिन्दी अर्थ

राष्ट की दृष्टि से भराधिमौतिक ३३ देवता निम्नलिखित -प जो वसु-उपाधिवाले स्नातक है, ११ जो कि दद्र-उपाधिवाले स्नातक, तथां १२ क्रा०.२०.। सुऽ १४ जथर्वेवेद-माष्य २७

English

Sit on the grass; a wide seat hath been made for you: delight yourselves, O Maruts, in the pleasant food.

अध्याय २०

श्लोक 15.4

इ॒मे त॑ इन्द्र॒ ते व॒यं पु॑रुष्टुत॒ ये त्वा॒रभ्य॒ चरा॑मसि प्रभूवसो ।न॒हि त्वद॒न्यो गि॑र्वणो॒ गिरः॒ सध॑त् क्षो॒णीरि॑व॒ प्रति॑ नो हर्य॒ तद् वचः॑

ime ta indra te vayaṃ puruṣṭuta ye tvārabhya carāmasi prabhūvaso | nahi tvadanyo girvaṇo giraḥ sadhat kṣoṇīriva prati no harya tad vacaḥ

हिन्दी अर्थ

करनेवालो को “रुदर तथा "आदित्य" कहते है । ये सभी सदाचारी, संयमी, छो ठीक प्रकार चला सकते है । ये सब विवाहित होने चाये, ताकि सवं . साधारण गृहस्थ-परजाजनों की भावर्यकताभ्ो को जानकर टीक-टीकं चासन.

English

For Jātavedas, worthy of our praise, will we frame with our mind this eulogy as ‘twere a car. For good in his assembly is this care of ours. Let us not in thy friendship, Agni, suffer harm.

अध्याय २०

श्लोक 15.5

भूरि॑ त इन्द्र वी॒र्यं॑१ तव॑ स्मस्य॒स्य स्तो॒तुर्म॑घव॒न् काम॒मा पृ॑ण ।अनु॑ ते॒ द्यौर्बृ॑ह॒ती वी॒र्यं मम इ॒यं च॑ ते पृथि॒वी ने॑म॒ ओज॑से

bhūri ta indra vīryaṃ1 tava smasyasya stoturmaghavan kāmamā pṛṇa | anu te dyaurbṛhatī vīryaṃ mama iyaṃ ca te pṛthivī nema ojase

हिन्दी अर्थ

आपका (अरन्तः) भरणपोषणं करते हए, तथा (अवस्यवः) भ्राप से रक्षा चाहते हुए हम प्रजाजन, आपको (हवामहे) राज्यगदी पर बुलाते हैँ । (न) हम प्रजाजन (त्वा) भरापरको ( उष ) भरपने समीपं ( हवामहे ) बूलाते है हि) ही (भ्वितारम्) रक्षक का (ववृमहे) हम वरण करते ह. 1. (इनदर)

English

With these, borne on one car, Agni, approach us; or borne on many, for thy steeds are able. Bring, with their Dames, the Gods, the Three-and-Thirty, after thy Godlike nature, and he

अध्याय २०

श्लोक 15.6

त्वं तमि॑न्द्र॒ पर्व॑तं म॒हामु॒रुं वज्रे॑ण वज्रिन् पर्व॒शश्च॑कर्तिथ ।अवा॑सृजो॒ निवृ॑ताः॒ सर्त॒वा अ॒पः स॒त्रा विश्वं॑ दधिषे॒ केव॑लं॒ सहः॑

tvaṃ tamindra parvataṃ mahāmuruṃ vajreṇa vajrin parvaśaścakartitha | avāsṛjo nivṛtāḥ sartavā apaḥ satrā viśvaṃ dadhiṣe kevalaṃ sahaḥ

हिन्दी अर्थ

खां हम प्रजा्जन वरण करते द । । (सखायः) है म्नो ! ( वः ) तुम्हारी ( ऊतये ) रका के निमित्त कथन करता ह, (यः) जो कि (पुरा) पहिले भी (नः) हरम (इदम् इदम्)

English

joyful. We call on thee, O peerless One. We, seeking help, possessing nothing firm ourselves,

अध्याय २०

श्लोक 16.1

१-१२ अयास्यः।बृहस्पतिः।त्रिष्टुप्।उ॒द॒प्रुतो॒ न वयो॒ रक्ष॑माणा॒ वाव॑दतो अ॒भ्रिय॑स्येव॒ घोषाः॑ ।गि॒रि॒भ्रजो॒ नोर्मयो॒ मद॑न्तो॒ बृह॒स्पति॑म॒भ्य॑१र्का अ॑नावन्

1-12 ayāsyaḥ| bṛhaspatiḥ| triṣṭup| udapruto na vayo rakṣamāṇā vāvadato abhriyasyeva ghoṣāḥ | giribhrajo normayo madanto bṛhaspatimabhya1rkā anāvan

हिन्दी अर्थ

(दयंरवम्) जिसके अदवारोहियो ने शंभो का परिहार किया है, शाली है, उसका हम (ववृमहे) वरण करते है (मन्त्र ६६)। (सः हि स्म) मिलनेवाले (शतम्) संक प्रकार के सुख. (भ्रा वयति ्राप्त कराता है 1

English

Call on thee wonderful in fight. On thee for aid in sacrifice. This youth of ours, the bold, the mighty, hath gone forth.

अध्याय २०

श्लोक 16.2

सं गोभि॑रङ्गिर॒सो नक्ष॑माणो॒ भग॑ इ॒वेद॑र्य॒मणं॑ निनाय ।जने॑ मि॒त्रो न दम्प॑ती अनक्ति॒ बृह॑स्पते वा॒जया॒शूंरि॑वा॒जौ

saṃ gobhiraṅgiraso nakṣamāṇo bhaga ivedaryamaṇaṃ nināya | jane mitro na dampatī anakti bṛhaspate vājayāśūṃrivājau

हिन्दी अर्थ

इस कठोरता .मे भी न्यायेवच््र है हितकारी गौर रमणीय । क्योंकि यह् प्रजा के. बुरे कर्मोको सुचित कर उसे सच्चे मागं की भ्रोर चलने की चेतावनी देता है, जो किं अन्ततोगत्वा प्रजा के लिये हितकर होकर रमणीयता का रूप धारण कर लेता है । (हासत्=भ्रोहाङ. गतौ । समशीत सम्+ य्य धाम् अवसे नामेन्दियं ज्योतिरकारि हरितो नाय॑से ।।३॥ , है उपासक ! (अध्वरे) हिसारहित उपासना-यज्ञ मे, तू (मीमाय)

English

To him most liberal, lofty Lord of lofty wealth, verily powerful and strong, I bring my hymn, Whose checkless bounty, as of waters down a slope, is spread abroad for all that live, to give

अध्याय २०

श्लोक 16.3

सा॒ध्व॒र्या अ॑ति॒थिनी॑रिषि॒रा स्पा॒र्हाः सु॒वर्णा॑ अनव॒द्यरू॑पाः ।बृह॒स्पतिः॒ पर्व॑तेभ्यो वि॒तूर्या॒ निर्गा ऊ॑पे॒ यव॑मिव स्थि॒विभ्यः॑

sādhvaryā atithinīriṣirā spārhāḥ suvarṇā anavadyarūpāḥ | bṛhaspatiḥ parvatebhyo vitūryā nirgā ūpe yavamiva sthivibhyaḥ

हिन्दी अर्थ

समपित कर । (न) जसे करि (उषाः) उषा शुभ्रं ) दिन के शुध्रं हो जाने पर सूयं के निमित्त आत्मसमपंण कर देती है । (नाभ) सब.को नमानेवाला (यस्य) जिस परभेदवर का (इन्द्रियं घाम ) परमेव रीय निज तेज (श्रवसे) ३० . भ्रथरवंवेद-माष्य काऽ २० सु° १५ ज्योति (भ्रकारि) प्रकट कर दी है। (न) जंसे कि (हरितः) अन्धकार का हरण करनेवाली सूयंकिरणे ( भ्रयसे ) आते समय ( ज्योतिः ) उषारूपी ज्योति प्रकट कर देती + । शुभ्र = उषा सूर्यं से प्रथम आती है, भौर सूयं पे भाता है । जन

English

them strength. Now all this world, for worship, shall come after thee—the offerer’s libations like descending

अध्याय २०

श्लोक 16.4

आ॒प्रु॒षा॒यन् मधु॑न ऋ॒तस्य॒ योनि॑मवक्षि॒पन्न॒र्क उ॒ल्कामि॑व॒ द्योः ।बृह॒स्पति॑रु॒द्धर॒न्नश्म॑नो॒ गा भूम्या॑ उ॒द्नेव॒ वि त्वचं॑ बिभेद

āpruṣāyan madhuna ṛtasya yonimavakṣipannarka ulkāmiva dyoḥ | bṛhaspatiruddharannaśmano gā bhūmyā udneva vi tvacaṃ bibheda

हिन्दी अर्थ

कर दिया । जब तक भ्राकांश .लाल रहता है, तब तक उषा रहती है । सूयं के ्रा जाने पर जब .दिन शुभ्र हो जाता हे, : तब. उषा अपने स्वरूप. से . . मिट जाती है । -मानो उस्ने सूयं के भरति आट्मसमपंण कर दिया ह । हम उपासक (ते) भरापके है, ( ते ) प्रापक ही. है ( प्रभूवसो ) है भ्भूत

English

floods, When the well-loved one seems to rest upon the hill, the thun- derbolt of Indra, shatterer

अध्याय २०

श्लोक 16.5

अप॒ ज्योति॑षा॒ तमो॑ अ॒न्तरि॑क्षादु॒द्नः शीपा॑लमिव॒ वात॑ आजत्।बृह॒स्पति॑रनु॒मृश्या॑ व॒लस्या॒भ्रमि॑व॒ वात॒ आ च॑क्र॒ आ गाः

apa jyotiṣā tamo antarikṣādudnaḥ śīpālamiva vāta ājat| bṛhaspatiranumṛśyā valasyābhramiva vāta ā cakra ā gāḥ

हिन्दी अर्थ

आश्रय लेकर, (चरामंर्षि) विचर रे ह (गिवंणः). है वेदवाणिर्यो दरार वाणियों का (सघत). संवरण करनेवाला, सम्यक् वरण करनेवाला, उन्हे स्वीकृत करनेवाला (नहि) नही है । (नः) हमारे (तद् वचः) उन स्तुति- इव) जसे किं भ्राप पृथिवी भरादि. लोक-लोकान्तरों को चाहनापुरवंक भपना है! सवेत्-षे संवरणे । , ७१. भूरिं त हदर वीय! तव॑ सस्यस्य सतोतेषवृम् काममा ण । अते चौ्रुहृती शीयं मम इयं च॑ ते पृथिवी नैम ओज॑से ॥५॥

English

wrought of gold. To him the terrible, most worthy of high praise, like radiant

अध्याय २०

श्लोक 16.6

य॒दा व॒लस्य॒ पीय॑तो॒ जसुं॒ भेद् बृह॒स्पति॑रग्नि॒तपो॑भिर॒र्कैः ।द॒द्भिर्न जि॒ह्वा परि॑विष्ट॒माद॑दा॒विर्नि॒धींर॑कृणोदु॒स्रिया॑णाम्

yadā valasya pīyato jasuṃ bhed bṛhaspatiragnitapobhirarkaiḥ | dadbhirna jihvā pariviṣṭamādadāvirnidhīṃrakṛṇodusriyāṇām

हिन्दी अर्थ

वीर्यम्) पके सामथ्यं का (जनु) -अनुचर- बना हुमा "हे । (भम). है मेरे पृरमेदवर ! (नं). जसं कि . (दयम्) यह (ते) भ्रापकी (पृथिवी) थिवी श्राप भनुत्ररी बनी हई है । (इमे). य दोनो लोक. (भोजसे) प्रापकं गोज को लक्ष्य करकं ध्रापके भनुचर बने हुए... 1

English

Dawn, bring gifts with reverence in this rite, Whose being, for renown, yea, Indra-power and light, have been created, like bay steeds, to

अध्याय २०

श्लोक 16.7

बृह॒स्पति॒रम॑त॒ हि त्यदा॑सां॒ नाम॑ स्व॒रीणां॒ सद॑ने॒ गुहा॒ यत्।आ॒ण्डेव॑ भि॒त्वा श॑कु॒नस्य॒ गर्भ॒मुदु॒स्रियाः॒ पर्व॑तस्य॒ त्मना॑जत्

bṛhaspatiramata hi tyadāsāṃ nāma svarīṇāṃ sadane guhā yat| āṇḍeva bhitvā śakunasya garbhamudusriyāḥ parvatasya tmanājat

हिन्दी अर्थ

का०२ ०।समु०.१६ भ्रथ्ववेद-भाष्य अ्सूजो निवृताः सतवा अपः सत्रा विशं दधिषे केव॑लं सई।६॥ वचारा (महाम्) महान् भौर ( उरम ) विस्तारो पतम् ) मेषः को

English

move with speed.

अध्याय २०

श्लोक 16.8

अश्नापि॑नद्धं॒ मधु॒ पर्य॑पश्य॒न्मत्स्यं॒ न दी॒न उ॒दनि॑ क्षि॒यन्त॑म्।निष्टज्ज॑भार चम॒सं न वृ॒क्षाद् बृह॒स्पति॑र्विर॒वेणा॑ वि॒कृत्य॑

aśnāpinaddhaṃ madhu paryapaśyanmatsyaṃ na dīna udani kṣiyantam| niṣṭajjabhāra camasaṃ na vṛkṣād bṛhaspatirviraveṇā vikṛtya

हिन्दी अर्थ

( परवशः ) टुकड़े-टुकंड़ . करके. ( चकति काट. गिराया.हं । भ्रौरं (निवृताः) मेष मे.नित्तरां धिरे हुए (भ्रपः).जलों को (स्तवं ) सरण करने के लिये, बहने के लिये (भ्रवासूृ्ः) नीचे. भमि की भोर प्रकट कर दिया है ।

English

Thine, Indra, praised by many excellently rich! are we who trusting in thy help draw near to thee.

अध्याय २०

श्लोक 16.9

सोषाम॑विन्द॒त् स स्वः॑१ सो अ॒ग्निं सो अ॒र्केण॒ वि ब॑बाधे॒ तमां॑सि ।बृह॒स्पति॒र्गोव॑पुषो व॒लस्य॒ निर्म॒ज्जानं॒ न पर्व॑णो जभार

soṣāmavindat sa svaḥ1 so agniṃ so arkeṇa vi babādhe tamāṃsi | bṛhaspatirgovapuṣo valasya nirmajjānaṃ na parvaṇo jabhāra

हिन्दी अर्थ

पोषण कर रहे हँ । (सहः) यह सामथ्यं (केवलम्) केवल आपका. ही हं । पवत से अभिप्रायः बफनिमित -पवंत का भी हे, जो किं पवतो की.वाटिर्यौ लगानेवाले (वावदतः==वावदन्तः) कलरव करते हए ( वयः पक्षी (न)

English

Lover of praise, none else but thou receives our laud: as Earth loves all her creatures, love thou this our hymn.

अध्याय २०

श्लोक 16.10

हि॒मेव॑ प॒र्णा मु॑षि॒ता वना॑नि॒ बृह॒स्पति॑नाकृपयद् व॒लो गाः ।अ॒ना॒नु॒कृ॒त्यम॑पु॒नश्च॑कार॒ यात् सूर्या॒मासा॑ मि॒थ उ॒च्चरा॑तः

himeva parṇā muṣitā vanāni bṛhaspatinākṛpayad valo gāḥ | anānukṛtyamapunaścakāra yāt sūryāmāsā mitha uccarātaḥ

हिन्दी अर्थ

६९. मंदिं्ठाय बते बृहद्रये सत्यशच्माय तवसं मतिं रे । मै मननीय स्तुतियां (भरे) मेंट करता हूं । (प्रवणे) निम्न प्रदेहा भें बहते हए (अपाम् इव) जलो के सदृश (यस्य राधः) जिसका धन (अपावृतम्)

English

We, therefore, we thy friends, Indra, have chosen thee, free- giver, as our guardian God. Him who of old hath brought to us this and that blessing, him

अध्याय २०

श्लोक 16.11

अ॒भि श्या॒वं न कृश॑नेभि॒रश्वं॒ नक्ष॑त्रेभिः पि॒तरो॒ द्याम॑पिंशन्।रात्र्यां॒ तमो॒ अद॑धु॒र्ज्योति॒रह॒न् बृह॒स्पति॑र्भि॒नदद्रिं॑ वि॒दद् गाः

abhi śyāvaṃ na kṛśanebhiraśvaṃ nakṣatrebhiḥ pitaro dyāmapiṃśan| rātryāṃ tamo adadhurjyotirahan bṛhaspatirbhinadadriṃ vidad gāḥ

हिन्दी अर्थ

खुले रूप मे बहु रहा है, (दुर्धरम्) जो घन कि सदा धरा नहीं जा सकता; (शवसे) तथा बल की प्राप्ति के लिये है ! मंहिष्ठाय हतेः बानकर्मेणः (निर० १।३।७) । . विवाय = किह्व + ध्रागु .( = मनुष्य, निषं० २।३) । का०२०। सुऽ १५ भरथरवंवेद-माष्य । २९

English

I magnify for you, Even Indra, O my friends, for help:

अध्याय २०

श्लोक 16.12

इ॒दम॑कर्म॒ नमो॑ अभ्रि॒याय॒ यः पू॒र्वीरन्वा॒नोन॑वीति ।बृह॒स्पतिः॒ स हि गोभिः॒ सो अश्वैः॒ स वी॒रेभिः॒ स नृभि॑र्नो॒ वयो॑ धात्

idamakarma namo abhriyāya yaḥ pūrvīranvānonavīti | bṛhaspatiḥ sa hi gobhiḥ so aśvaiḥ sa vīrebhiḥ sa nṛbhirno vayo dhāt

हिन्दी अर्थ

एसे प्रवाहित हो रहे ह, (न) जैसे कि (भ्रापः) जल (निम्ना निम्नानि) नीचे का (हयंतः) कान्तिमान् (वचरः) विदयुद्-वच्र (समशीत) सोया रहता है, परन्तु मौके पर ( इनधिता ) हिसकरूप भी धारण कर लेता है, वैसे परमेश्वर का (हिरण्ययः) हितकर भ्रौर रमणीय ( वजः; ) र7ायवच्र भी , ( समरीत ) सोया पड़ासा प्रतीत होता है, -परन्तु समय-खमथः पर (इनथिता) हिस्ररूप भी धारण कर लेता है । । . मूचाल, बाढ़, कम वर्षा, भ्रति वर्षा, उल्कापात, अतिरीत, अति-

English

Borne by bay steeds, the Lord of heroes, ruling men, for it is he who takes delight. The Bounteous Lord bestows on us his worshippers hundreds of cattle and of steeds.

अध्याय २०

श्लोक 17.1

(१-१२) १-११ कृष्णः, १२ वसिष्ठः।इन्द्रः।१-१० जगती, ११-१२ त्रिष्टुप्।अच्छा॑ म॒ इन्द्रं॑ म॒तयः॑ स्व॒र्विदः॑ स॒ध्रीची॒र्विश्वा॑ उश॒तीर॑नूषत ।परि॑ ष्वजन्ते॒ जन॑यो॒ यथा॒ पतिं॒ मर्यं॒ न शु॒न्ध्युं म॒घवा॑नमू॒तये॑

(1-12) 1-11 kṛṣṇaḥ, 12 vasiṣṭhaḥ| indraḥ| 1-10 jagatī, 11-12 triṣṭup| acchā ma indraṃ matayaḥ svarvidaḥ sadhrīcīrviśvā uśatīranūṣata | pari ṣvajante janayo yathā patiṃ maryaṃ na śundhyuṃ maghavānamūtaye

हिन्दी अर्थ

करते है, तथा (वावदतः) कड्कते हए (. अशियस्प्र ) . मेषस्थ-विचयुदूवख, के (घोषाः) घोष. (इव ) जसे मानोः बृहस्पति की स्तुत्तियां करते है, गौर (गिरिभ्रजः) पतों से गिरती हई (ऊ्मथः) नदिय की लर (न) जब करते है । अभिप्राय यह है कि प्रङ़ृतिक संसार मी मानी भ्रमे प्रभु.कीः , ३२ भ्रथववेद-माष्य का०.२० ।सू० १६ । ७६. -द भोभिराज्गिरसो न॑माणो भग॑शवेदर्मणं निनाय ।

English

Great is thy power, O Indra, we are thine. Fulfil, O Maghavan, the wish of this thy worshipper.

अध्याय २०

श्लोक 17.2

न घा॑ त्व॒द्रिगप॑ वेति मे॒ मन॒स्त्वे इत् कामं॑ पुरुहूत शिश्रय ।राजे॑व दस्म॒ नि ष॒दोऽधि॑ ब॒र्हिष्य॒स्मिन्त्सु सोमे॑व॒पान॑मस्तु ते

na ghā tvadrigapa veti me manastve it kāmaṃ puruhūta śiśraya | rājeva dasma ni ṣado'dhi barhiṣyasmintsu somevapānamastu te

हिन्दी अर्थ

दधकते पत्थर को फकता है । तथा ( अद्मनः ) भाकाश में फले मेध से , (त्वचम्) मेष की त्वचा को (बिभेद) काट दिया । (इव) जैसे ( उल्लः ) त्वचा को, ऊपर के स्तर को (वि बिभेद) काट देता है । . ॑

English

Like birds who keep their watch, plashing in water, like the loud voices of the thundering rain-cloud,

अध्याय २०

श्लोक 17.3

वि॒षू॒वृदिन्द्रो॒ अमु॑तेरु॒त क्षु॒धः स इद् रा॒यो म॒घवा॒ वस्व॑ ईशते ।तस्येदि॒मे प्र॑व॒णे स॒प्त सिन्ध॑वो॒ वयो॑ वर्धन्ति वृष॒भस्य॑ शु॒ष्मिणः॑

viṣūvṛdindro amuteruta kṣudhaḥ sa id rāyo maghavā vasva īśate | tasyedime pravaṇe sapta sindhavo vayo vardhanti vṛṣabhasya śuṣmiṇaḥ

हिन्दी अर्थ

(बृहस्पतिः) .बृहती-पृथिवी के भ्रधिपति (वातः) वायु ने (वलस्य) तमोभूत-मेव को देसे हटाया है, (इव ) जसे कि (उद्वः) जलक्रीडा करता हुमा बेल, जल से ( शीपालम् ) हवाल भर्थात् सेवार को हटा देता है ।. (वातः) वायु ने (इव) जैसे (अश्रम्) मेष को ( भाचक्रं ) पेदाक्िया था, वैसे ही उसने (गाः) मेष से जलो को भी प्रकट कर दिया है 1

English

Like merry streamlets bursting from the mountain thus to Brihaspati our hymns have sounded.

अध्याय २०

श्लोक 17.4

वयो॒ न वृ॒क्षं सु॑पला॒शमास॑द॒न्त्सोमा॑स॒ इन्द्रं॑ म॒न्दिन॑श्चमू॒षदः॑ ।प्रैषा॒मनी॑कं॒ शव॑सा॒ दवि॑द्युतद् वि॒दत् स्व॑१र्मन॑वे॒ ज्योति॒रार्य॑म्

vayo na vṛkṣaṃ supalāśamāsadantsomāsa indraṃ mandinaścamūṣadaḥ | praiṣāmanīkaṃ śavasā davidyutad vidat sva1rmanave jyotirāryam

हिन्दी अर्थ

-(यदा) जब (बृहस्पतिः) वायु . (म्रगनितपोभिः) श्रग्नि के समान परितप्त (भकः) सूरय-किरणों दवारा ( पीयंतः ) मानो जल को पी जने- के निषीन्) निषिस्वरूप जल को (आविः शरङृणोत्) प्रकट कर देती है । २।११ । मन्त्र मेँ बृहस्पति पद द्वारा सेनापति का भी वणेन हुमा है, जो

English

The son of Angiras, meeting the cattle, as Bhaga, brought in Aryaman among us.

अध्याय २०

श्लोक 17.5

कृ॒तं न श्व॒घ्नी वि चि॑नोति॒ देव॑ने सं॒वर्गं॒ यन्म॒घवा॒ सूर्यं॒ जय॑त्।न तत् ते॑ अ॒न्यो अनु॑ वी॒र्यं शक॒न्न पु॑रा॒णो म॑घव॒न् नोत नूत॑नः

kṛtaṃ na śvaghnī vi cinoti devane saṃvargaṃ yanmaghavā sūryaṃ jayat| na tat te anyo anu vīryaṃ śakanna purāṇo maghavan nota nūtanaḥ

हिन्दी अर्थ

डले शुके षेरे को तोड़ देता है । . भौर धिरे राष्ट कोशत्रुसे छृडाकर किरणो के सदृश शुढ-पवित्र प्रजाजन । = - का (नाम) जल (गृहा) छिपा पड़ा था, उसे (भ्रमत) जान निया । भौर

English

As Friend of men he decks the wife and husband. As for the race, Brihaspati, nerve our coursers.

अध्याय २०

श्लोक 17.6

विशं॑विशं म॒घवा॒ पर्य॑शायत॒ जना॑नां॒ धेना॑ अव॒चाक॑श॒द् वृषा॑ ।यस्याह॑ श॒क्रः सव॑नेषु॒ रण्य॑ति॒ स ती॒व्रैः सोमैः॑ सहते पृतन्य॒तः

viśaṃviśaṃ maghavā paryaśāyata janānāṃ dhenā avacākaśad vṛṣā | yasyāha śakraḥ savaneṣu raṇyati sa tīvraiḥ somaiḥ sahate pṛtanyataḥ

हिन्दी अर्थ

वृहस्पतिः का अथं बृहती-सेना का भ्रधिपति भी है। इस भाधि- का० २०1 सुर १६ भथवंवेद-भाष्य ३५ भौतिक दृष्टि में सेनानी ने घोष करती हूर, तथा तापकं अस्वररास्त्रौ से

English

Brihaspati, having won them from the mountains, strewed down, like barley out of winnowing-baskets,

अध्याय २०

श्लोक 17.7

आपो॒ न सिन्धु॑म॒भि यत् स॒मक्ष॑र॒न्त्सोमा॑स॒ इन्द्रं॑ कु॒ल्या इ॑व ह्र॒दम्।वर्ध॑न्ति॒ विप्रा॒ महो॑ अस्य॒ साद॑ने॒ यवं॒ न वृ॒ष्टिर्दि॒व्येन॒ दानु॑ना

āpo na sindhumabhi yat samakṣarantsomāsa indraṃ kulyā iva hradam| vardhanti viprā maho asya sādane yavaṃ na vṛṣṭirdivyena dānunā

हिन्दी अर्थ

सम्पन्न इन शत्रु सेनाओं को, . जो कि अपने सदनं छिप गई थीं, उनके “नामः भर्थात् नमन को भरात्मसमपंण को अमत" = मान लिया,स्वीकार कर . शस्वरीणाम्"= स्वर करती हू, भाघोष या निनाद करती हुईं बहती नदियां । (बहस्पतिः) बृहती-पथिवी के भधिपति वायु नें (भरना पिनद्धम्)

English

The vigorous, wandering cows who aid the pious, desired of all, of blameless form, well coloured. As the Sun dews with meath the seat of Order, and casts a flam- ing meteor down from

अध्याय २०

श्लोक 17.8

वृषा॒ न क्रु॒द्धः प॑तय॒द् रजः॒स्वा यो अ॒र्यप॑त्नी॒रकृ॑णोदि॒मा अ॒पः ।स सु॑न्व॒ते म॒घवा॑ जी॒रदा॑न॒वेऽवि॑न्द॒ज्ज्योति॒र्मन॑वे ह॒विष्म॑ते

vṛṣā na kruddhaḥ patayad rajaḥsvā yo aryapatnīrakṛṇodimā apaḥ | sa sunvate maghavā jīradānave'vindajjyotirmanave haviṣmate

हिन्दी अर्थ

मेष से. बन्वे पड़ (मधु) -मधुर-जल को (प्यंपदयत्) जान लिया । ( न ) को जान लिया जाता है । वायु ने (विरवेण) विशेष गरजनावाले विद्युद्- वचर के द्वारा ( विकृत्य ) मेष को काट कर ( तत् ) उस मधुर-जल को (निर् जभार). निकाल लिया। (न) जसे किं बठृई (वृक्षात्) वृक्ष को काट कर उस से (चमसम्). खान-पान के बतंन निकाल लेता है, बना लेता है । वायु यद्यपि जडहै'तोभी वायुका वणेन एसा हृभा है मानो वह् है। वेदों म परमेदवर कोकवि कहा है। यथा--' कविर्मनीषी परिभूः स्वयंभूः" (यजुः ४०।८) । तथा वेद को काव्य कहां है, यथा देवस्य षदय

English

heaven, So from the rock Brihaspati forced the cattle, and cleft the earth’s skin as it were with water.

अध्याय २०

श्लोक 17.9

उज्जा॑यतां पर॒शुज्योति॑षा स॒ह भू॒या ऋ॒तस्य॑ सु॒दुघा॑ पुराण॒वत्।वि रो॑चतामरु॒षो भा॒नुना॒ शुचिः॒ स्व॑१र्ण शु॒क्रं शु॑शुचीत॒ सत्प॑तिः

ujjāyatāṃ paraśujyotiṣā saha bhūyā ṛtasya sudughā purāṇavat| vi rocatāmaruṣo bhānunā śuciḥ sva1rṇa śukraṃ śuśucīta satpatiḥ

हिन्दी अर्थ

इत्यादि । भाधिभौतिक वृष्टि में सेनापति ने.फंली हुई पवंतश्रेणी मेँ बन्धे कर नदीखूप में या. नहर के रूप मे उस बन्धे जल को भ्रपने राष्ट ८३. सोषाम॑विन्दुत् स ख: सो अधिं सो अर्केण वि ष॑बाधे तमसि।

English

Forth from mid-air with light he draye the darkness, as the gale blows a lily from the river. Like the wind grasping at the cloud of Vala, Brihaspati gathered to himself the cattle.

अध्याय २०

श्लोक 17.10

गोभि॑ष्टरे॒माम॑तिं दु॒रेवां॒ यवे॑न॒ क्षुधं॑ पुरुहूत॒ विश्वा॑म्।व॒यं राज॑भिः प्रथ॒मा धना॑न्य॒स्माके॑न वृ॒जने॑ना जयेम

gobhiṣṭaremāmatiṃ durevāṃ yavena kṣudhaṃ puruhūta viśvām| vayaṃ rājabhiḥ prathamā dhanānyasmākena vṛjanenā jayema

हिन्दी अर्थ

(भद्जखिरसः) प्राणायामाम्यासी उपासक, ( गोभिः ) वेदवाणियों .. से शुका लेता है, (इव) जैसे कि (भगः) भगवान् ने (अर्यमणम्) भन्ध- काररूपी-भ्ररि को नियमन करनेवाले भ्रादित्य को ( सं निनाय ) हमारी भ्नोर काया हुआ है । (जने) जन-समुदाय मे (न) जैसे (मित्रः) मित्र .

English

After thee lofty heaven hath measured out its strength to thee and to thy power this earth hath bowed itself.

अध्याय २०

श्लोक 17.11

बृह॒स्पति॑र्नः॒ परि॑ पातु प॒श्चादु॒तोत्त॑रस्मा॒दध॑रादघा॒योः ।इन्द्रः॑ पु॒रस्ता॑दु॒त म॑ध्य॒तो नः॒ सखा॒ सखि॑भ्यो॒ वरि॑वः कृणोतु

bṛhaspatirnaḥ pari pātu paścādutottarasmādadharādaghāyoḥ | indraḥ purastāduta madhyato naḥ sakhā sakhibhyo varivaḥ kṛṇotu

हिन्दी अर्थ

क्ररता है, वेसे ही प्राणायामाभ्यासी योगी, परभेदवर के गुणों को जन समू- दाय म भरसिन्यक्त करता रहता है । भौर प्राथेना करता है कि (बृहस्पते) हे महाब्रह्याण्ड के पति ! वाजय ) हमः सब को बल प्रदान कीजिये, भौर प्रगतिशील कीजिये । (इव) जंसे कि बृहती सेना का पति (भराजौ) युद्ध में परमेद्वर ने (निर् ऊपे) पृथिवी पर उपजाऊ रूप मे भेजा है । (इव) जसे कि ( स्थिविभ्यः ) कषत्र-स्थलो से काट कर किसान ( यवम.) जौ आदि

English

Thou, who hast thunder for thy weapon, with thy bolt hast shattered into pieces this broad massive cloud.

अध्याय २०

श्लोक 17.12

बृह॑स्पते यु॒वमिन्द्र॑श्च॒ वस्वो॑ दि॒व्यस्ये॑शाथे उ॒त पार्थि॑वस्य ।ध॒त्तं र॒यिं स्तु॑व॒ते की॒रये॑ चिद् यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः

bṛhaspate yuvamindraśca vasvo divyasyeśāthe uta pārthivasya | dhattaṃ rayiṃ stuvate kīraye cid yūyaṃ pāta svastibhiḥ sadā naḥ

हिन्दी अर्थ

दषिराः-= इषु इच्छायाम् । गाः गमनशील जल ( उणा० कोशा, पादं २, का० २०। सु०.१६ भ्रथर्वेवेद-माष्य ३३ हृए ( 4 बृहस्पति ने (मधुनः) मधुर (ऋतस्य) जल के (योनिम्) उत्पादक मेष को (शभ्रवक्षिपन्) नीचे पृथिवी पर ेसे फेंका, (इव ) जसे कि

English

Thou hast sent down obstructed floods that they may flow: thou hast, thine own for ever, all victorious might.

अध्याय २०

श्लोक 18.1

(१-६) १-३ मेधातिथिः प्रियमेधाश्च, ४-६ वसिष्ठः।इन्द्रः।गायत्री।व॒यमु॑ त्वा त॒दित॑र्था॒ इन्द्र॑ त्वा॒यन्तः॒ सखा॑यः ।कण्वा॑ उ॒क्थेभि॑र्जरन्ते

(1-6) 1-3 medhātithiḥ priyamedhāśca, 4-6 vasiṣṭhaḥ| indraḥ| gāyatrī| vayamu tvā taditarthā indra tvāyantaḥ sakhāyaḥ | kaṇvā ukthebhirjarante

हिन्दी अर्थ

३६ भ्रथवेवेद-माष्य का० २० सु° १६. (सः) उसने मेष के कारण उत्पन्न हए (तमांसि) भन्धकारों का (भ्रकंण) सूयं के. वारा (विबबाधे) वघ किया.। (बहस्पतिः) वायु ने गोवपुषः .

English

Brihaspati, when he with fiery lightnings cleft through the weapon of reviling Vala, Consumed him as tongues eat what teeth have compassed: he threw the prisons of the red

अध्याय २०

श्लोक 18.2

न घे॑म॒न्यदा प॑पन॒ वज्रि॑न्न॒पसो॒ नवि॑ष्टौ ।तवेदु॒ स्तोमं॑ चिकेत

na ghemanyadā papana vajrinnapaso naviṣṭau | tavedu stomaṃ ciketa

हिन्दी अर्थ

(मज्जानं न) जलरूपी मज्जा को (निर् जभार) निकाल. लिया । भराधिभौतिक अथं मेँ सेनापति ने राष्ट पर भरावरण घेरा वलय उलि शत्रु के भङ्खों को.काटकर उसका मज्जा निकाल दिया, जो दात्रुकि .. राक्तियों को चमका दिया । भोवपुषः = गौः(- जल, उणादिकोषः २।६८) +

English

cows open. That secret name borne by the lowing cattle within the cave

अध्याय २०

श्लोक 18.3

इ॒च्छन्ति॑ दे॒वाः सु॒न्वन्तं॒ न स्वप्ना॑य स्पृहयन्ति ।यन्ति॑ प्र॒माद॒मत॑न्द्राः

icchanti devāḥ sunvantaṃ na svapnāya spṛhayanti | yanti pramādamatandrāḥ

हिन्दी अर्थ

(दमा इव ) हेमन्त ऋतु द्वारा जैसे ( वनानि ) वनो. के (पर्णा पर्णानि ) पत्ते ( मुषिता = मुषितानि ) मानो. लूट लिये जति है, वैसे जलो को ( अकृपयत् ) लूटकर उनपर मानो कृपा की । मेष की वायुने (अनानुङकृत्यम्) घेरा डालने के क्म को न करं सकने योग्य, भौर (अपुनः).

English

Brihaspati discovered, And draye, himself, the bright kine from the mountain, like a bird’s young after the eggs’

अध्याय २०

श्लोक 18.4

व॒यमि॑न्द्र त्वा॒यवो॒ऽभि प्र णो॑नुमो वृषन्।वि॒द्धि त्व॑१स्य नो॑ वसो

vayamindra tvāyavo'bhi pra ṇonumo vṛṣan| viddhi tva1sya no vaso

हिन्दी अर्थ

पुनः घेरा डालने के.्रयोग्य ( चकार ) कर दिया । ( यात् ) तबंसे भ्राकार मों फिर उदित होने लगते है। (= चन्द्रमसू) । आधिभौतिक मे सेनापति जब घेरा डालनेवालि शत्रुओं की

English

disclosure. He looked around on rock-imprisoned sweetness as one who eyes a fish in scanty water.

अध्याय २०

श्लोक 18.5

मा नो॑ नि॒दे च॒ वक्त॑वे॒ऽर्यो र॑न्धी॒ररा॑व्णे ।त्वे अपि॒ क्रतु॒र्मम॑

mā no nide ca vaktave'ryo randhīrarāvṇe | tve api kraturmama

हिन्दी अर्थ

भूमियां जीत लेता हँ, तब वहु उन्हँ कठोर दण्डः न देकर -उन परकृपा मन्त मेँ वर्षाकाल की समाप्ति का वणन हषा है । का०२०। सू० १६ . अथववैवेद-माष्य ३७

English

Brihaspati, cleaving through with varied clamour, brought it forth like a bowl from out the timber.

अध्याय २०

श्लोक 18.6

त्वं वर्मा॑सि स॒प्रथः॑ पुरोयो॒धश्च॑ वृत्रहन्।त्वया॒ प्रति॑ ब्रुवे यु॒जा

tvaṃ varmāsi saprathaḥ puroyodhaśca vṛtrahan| tvayā prati bruve yujā

हिन्दी अर्थ

(न) जसे (यावम्) स्याम वर्ण॑वाले (अरवम् ) भरव को (पितरः) उसके पालक स्वामी, (कृदानेभिः) भरग्नि-खदृदा चमकीली मणिर्यो के हारों . द्वारा ( अर्षिदान् ) सुशोभित करते है, वैसे ( पितरः ). पालक-ऋतुभों ने द्युलोक .को (भपिदन ) सुशोभित कर दिया है । पालक-ऋतुभ्रों ने (राध्याम्)

English

He found the light of heaven, and fire, and Morning: with lucid rays he forced apart the darkness.

अध्याय २०

श्लोक 19.1

१-७ विश्वामित्रः।इन्द्रः।गायत्री।वार्त्र॑हत्याय॒ शव॑से पृतना॒षाह्या॑य च ।इन्द्र॒ त्वा व॑र्तयामसि

1-7 viśvāmitraḥ| indraḥ| gāyatrī| vārtrahatyāya śavase pṛtanāṣāhyāya ca | indra tvā vartayāmasi

हिन्दी अर्थ

म (ज्योतिः) ज्योति को स्थापित किंया है, जबकि ( बृहस्पतिः ) वायुने करान = कृशानु ( भग्न) । मन्त्र में पालक-ऋतुभों के. नुसार, लिया, तब भ्राकाच स्वच्छ हौ गया । ओौर दिन में सूर्यँ चभकने लगा, भौर

English

As from a joint, Brihaspati took the marrow of Vala as he gloried in his cattle. As trees for foliage robbed by winter, Vala mourned for the cows Brihaspati had taken.

अध्याय २०

श्लोक 19.2

अ॒र्वा॒चीनं॒ सु ते॒ मन॑ उ॒त चक्षुः॑ शतक्रतो ।इन्द्र॑ कृ॒ण्वन्तु॑ वा॒घतः॑

arvācīnaṃ su te mana uta cakṣuḥ śatakrato | indra kṛṇvantu vāghataḥ

हिन्दी अर्थ

१०. ओर ११ में वर्षा्छतु की समाप्ति पर द्यो का वर्णेन हुभा है पितरः ऋतवः (रात ० त्रा ०. २।६।१।३२) में सायण । तथा 'पितुमते' की हैम उपासको ने (इदं नमः) यह नमस्कार ( प्रन्ियाय ) मेघो के (अकम) किया है । ( यः ) जो परमे्वर कि (पूर्वीः) पूव॑कालों से चली

English

He did a deed ne’er done, ne’er to be equalled, whereby the sun and moon ascend alternate. Like a dark steed adorned with pearl, the Fathers have decorat- ed heaven with constellations.

अध्याय २०

श्लोक 19.3

नामा॑नि ते शतक्रतो॒ विश्वा॑भिर्गी॒र्भिरी॑महे ।इन्द्रा॑भिमाति॒षाह्ये॑

nāmāni te śatakrato viśvābhirgīrbhirīmahe | indrābhimātiṣāhye

हिन्दी अर्थ

( नोनवीति ) बार-बार स्तवन करता है, उपदेश करता है । ( सः ) वह (बृहस्पतिः हि) ब्रहस्पति ही (गोभिः) गौभों दवारा, ( सः भरद्व॑ः ) वह ही अवो द्वारा, (सः वीरेभिः) वह ही वीर सन्तानो द्वारा, ( सः नभिः ) बह ही नेतारो दारा (नः) हमें (यः) जीवन, दीर्घायु तथा अन्न (धात्) प्रदान करता है । वयः श्न्नम् (निघ० २।७)1 + वर्णन भा है । भरौर मध्य के मरो में -बृहस्पति' पद द्वारा सेनापति तथा . वायुकाभी वर्णन हमा है । . ४. ५ जो कि ( स्वविदः ) सुख प्राप्त कराती, ( सध्रीचीः ).जो कि परमेदवर के साथ विचरतीं, (उशतीः) ओौर परमेदवर की ही कामना करती है। मेरी

English

They set the light in day, in night the darkness, Brihaspati cleft the rock and found the cattle. 272

अध्याय २०

श्लोक 19.4

पु॒रु॒ष्टु॒तस्य॒ धाम॑भिः श॒तेन॑ महयामसि ।इन्द्र॑स्य चर्षणी॒धृतः॑

puruṣṭutasya dhāmabhiḥ śatena mahayāmasi | indrasya carṣaṇīdhṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

मतियां (परिष्वजन्ते ) परमेदवर का भ्रालिङ्गन करती हैँ 1 (यथा) जेसेकि .. वैसे ही मेरी मतियां(मचवानभ) एेच्वयंद्याली परमेश्वर का आलिङ्गन करती है, (ऊतये) ताकि मेरी रक्षा हो सके । (पुरुहूत). है बार-बार पुकारे गये परमेदवर ! (मे) मेरा (मनः)

English

This homage have we offered to the Cloud-God who thunders out to many in succession. May this Brihaspati vouchsafe us fulness of life with kine and horses, men, and heroes.

अध्याय २०

श्लोक 19.5

इन्द्रं॑ वृ॒त्राय॒ हन्त॑वे पुरुहू॒तमुप॑ ब्रुवे ।भरे॑षु॒ वाज॑सातये

indraṃ vṛtrāya hantave puruhūtamupa bruve | bhareṣu vājasātaye

हिन्दी अर्थ

दर्ंनीय परमे्वर ! भ्राप (राजा इव) राजा के समान (बहिषि भधि) मेरे हृदयासन पर (निषदः) नितरां विराजिये । भरौर (अस्मिन्) इस मेरे (सोमे) भक्तिरस में (ते) भ्राप का (अवपानम् ) रस-पान (अस्तु) हो । क्षुधा का, (वि ५१४० भिन्न-भिन्न प्रकार से निवारण करता है। (सः) का०२० । सु० १७ भ्रथर्ववेद-माष्य - ३९

English

I. In perfect unison all yearning hymns of mine that find the light of heaven have sung forth Indra’s praise.

अध्याय २०

श्लोक 19.6

वाजे॑षु सास॒हिर्भ॑व॒ त्वामी॑महे शतक्रतो ।इन्द्र॑ वृ॒त्राय॒ हन्त॑वे

vājeṣu sāsahirbhava tvāmīmahe śatakrato | indra vṛtrāya hantave

हिन्दी अर्थ

की वर्षा करनेवाले, भरौर (शुष्मिणः) बलशाली (तस्य इत्) उस ही परमे- सप्त सिन्धवः सात प्रकार की जलमय नदियां पृथिवी पर सुदेवो श्रसि वरुण यस्य ते सप्तसिन्धवः।

English

As wives embrace their lord, the comely bridegroom, so they compass Maghavan about that he may help.

अध्याय २०

श्लोक 19.7

द्यु॒म्नेषु॑ पृत॒नाज्ये॑ पृ॒त्सु॒तूर्षु॒ श्रवः॑सु च ।इन्द्र॒ साक्ष्वा॒भिमा॑तिषु

dyumneṣu pṛtanājye pṛtsutūrṣu śravaḥsu ca | indra sākṣvābhimātiṣu

हिन्दी अर्थ

भनु भरन्ति काकुदं पुम्यं सुषिरामिव । ऋ० ६।६।१२ ॥ कोकूयतेर्वा स्याच्छन्दकमंणः' ( निर० ५।४।२७) । (आसदन्). भा. बेठते हैः वसे ( मन्दिनः ) हर्षदायक् ( चमुषदः ) भूलोक

English

Directed unto thee my spirit never strays, for I have set my hopes on thee, O much-invoked! Sit, wonderful! as King upon the sacred grass, and let thy drinking-place be by the Soma

अध्याय २०

श्लोक 20.1

(१-७) १-४ विश्वामित्रः, ५-७ गृत्समदः।इन्द्रः।गायत्री।शु॒ष्मिन्त॑मं न ऊ॒तये॑ द्यु॒म्निनं॑ पाहि॒ जागृ॑विम्।इन्द्र॒ सोमं॑ शतक्रतो

(1-7) 1-4 viśvāmitraḥ, 5-7 gṛtsamadaḥ| indraḥ| gāyatrī| śuṣmintamaṃ na ūtaye dyumninaṃ pāhi jāgṛvim| indra somaṃ śatakrato

हिन्दी अर्थ

्रद्योतित हो रही है, चमक रही है 1 भ्रौर इस प्राणदायिनी शक्ति ने (मनवे) भर्थात् संसार के सब पदार्थं जिस परमेषवर के : उत्तम-शासन की उपासना मेँ लगे हृए है । उपासना पद द्वारा समग्र विदव.में भक्तिरस की सत्ता का ४० भरथर्वेवेद-माष्य का० २० । सु° १७

English

juice. From indigence and hunger Indra turns away: Maghavan hath dominion over precious

अध्याय २०

श्लोक 20.2

इ॒न्द्रि॒याणि॑ शतक्रतो॒ या ते॒ जने॑षु प॒ञ्चसु॑ ।इन्द्र॒ तानि॑ त॒ आ वृ॑णे

indriyāṇi śatakrato yā te janeṣu pañcasu | indra tāni ta ā vṛṇe

हिन्दी अर्थ

की उपासना कर रै हैँ "उपासनाः पद द्वारा इन गतिमान् पदार्थो गें भवतिस की सत्ता काः कथन किया ह । चमू =चछावापूथिष्यौ ( निर्० (वि चिनोति) विनिर्वय करता हें, या विदेष चयन करता है, सीं प्रकार को साघनरूप मे विनिरिचतं करता है, है परमेदवर ! (तत्) उस ( ते )

English

wealth. These the Seven Rivers flowing on their downward path increase the vital vigour of the

अध्याय २०

श्लोक 20.3

अग॑न्निन्द्र॒ श्रवो॑ बृ॒हद् द्यु॒म्नं द॑धिष्व दु॒ष्टर॑म्।उत् ते॒ शुष्मं॑ तिरामसि

agannindra śravo bṛhad dyumnaṃ dadhiṣva duṣṭaram| ut te śuṣmaṃ tirāmasi

हिन्दी अर्थ

(न्यः न शकत्) अन्य को नहीं कर सकता (मघवन्) है एेदवयंशाली . परमेश्वरं ! (न पुराणः) न कोई पुराना व्यक्ति, भौर (न उत नूतनः) न नाम्) प्रजाजनों की (धेनाः) बोलियों भौर बातचीत को (भवचाककत्) जान रहा होता है । (शक्रः) रक्तिराली परमेदवर, (यस्य अह) जिस किसी उपासंक के (. सवनेषु ) भक्तिरसो मे ( रण्यति ) रमणं करता है, उन भक्तिरसो दवारा (पृतन्यतः) कामादि की सेना को (सहते) पराभूत कर देतां है । .

English

Mighty Steer. As on the fair-leafed tree rest birds, to Indra flow the gladden- ing Soma juices that the bowls

अध्याय २०

श्लोक 20.4

अ॒र्वा॒वतो॑ न॒ आ ग॒ह्यथो॑ शक्र परा॒वतः॑ ।उ॒ लो॒को यस्ते॑ अद्रिव॒ इन्द्रे॒ह तत॒ आ ग॑हि

arvāvato na ā gahyatho śakra parāvataḥ | u loko yaste adriva indreha tata ā gahi

हिन्दी अर्थ

काऽ २०।सु० १८ प्रथववेद-माष्य ४१ (यत्) जब (समक्षरन् ) मिलकर बहते ह, तथा (कुल्याः) नालियां (इव) जसे (हदम्) तालाब की ओर बहती है, वसे ही (सोमासः) सब भक्तिरस (इन्द्रम्) परमेरवर कीं भोर बहते हँ । (सादने) हृदय-सदन मेँ परमेश्वर के स्थित हो जने पर (विप्राः) मेधावी उपासक (भरस्य) इस परमेष्वर की (महः) महिमा को (वर्ष॑न्ति) बढाते ह । (न) जैसे किं (दिव्येन दानुना) .

English

contain. Their face that glows with splendour through their mighty power hath found the shine of

अध्याय २०

श्लोक 20.5

इन्द्रो॑ अ॒ङ्गं म॒हद् भ॒यम॒भी षदप॑ चुच्यवत्।स हि स्थि॒रो विच॑र्षणिः

indro aṅgaṃ mahad bhayamabhī ṣadapa cucyavat| sa hi sthiro vicarṣaṇiḥ

हिन्दी अर्थ

९४. शषा करद प॑तयत् रजः खा यो अयप॑त्नीरङ्णोदिमा अपः । ही भव (रजः) इन प्राणो के रजोगुणों को (पतयत्) गिरा दिया है, हटा . दिया है। (न) जैसे कि (क्रुः) क्रुद्ध हा (वृषा) बैल ( रजः ) मिद्टी . ..

English

heaven for man, the Aryas’ light. As in the game a gambler piles his winnings, so Maghavan, sweeping all together, gained the

अध्याय २०

श्लोक 20.6

इन्द्र॑श्च मृ॒लया॑ति नो॒ न नः॑ प॒श्चाद॒घं न॑शत्।भ॒द्रं भ॑वाति नः पु॒रः

indraśca mṛlayāti no na naḥ paścādaghaṃ naśat| bhadraṃ bhavāti naḥ puraḥ

हिन्दी अर्थ

को हविरूप मे लिये हुए, (जीरदानवे ) भौर रीघ्रता से इस हवि को समपित केर देनेवाले ( मनवे ): मननरील उपासक के लिये सः मघवा ) वह् हे उपासकृ ! (ज्योतिषा सह) परमेदवरीय ज्योतिं के साथ-साथ (सुदघा) सुगमता से दोहनेवाला ( भूयाः ) हो जा । ताकि ( भानुना )

English

Sun. This mighty deed of thine none other could achieve, none,

अध्याय २०

श्लोक 20.7

इन्द्र॒ आशा॑भ्य॒स्परि॒ सर्वा॑भ्यो॒ अभ॑यं करत्।जेता॒ शत्रू॑न् विच॑र्षणिः

indra āśābhyaspari sarvābhyo abhayaṃ karat|jetā śatrūn vicarṣaṇiḥ

हिन्दी अर्थ

. के सुमान (शुचिः) पवित्र तथा! शुक्र शुदुचीत ज्योतिर्मयं रूप मे चमका दे । (गोभिः) वेदवाणियों द्वारा हम (दुरेवाभ् ) दुष्परिणामी (भमतिम्) कुमति को ( तरेम ) दर कररे। तथा गौग्नों के सात्विक दूष द्वारा मति की हीनता को दर करे । भ्रौर (यवेन) जौ आदि सात्विक भन्न दारा विदवां (राजभिः) योगिराजों की सहायता दारा, तथा (भस्माकेन वृजनेन निज'

English

Maghavan, before thee, none in recent time. Maghavan came by turns to all the tribes of men: the Steer took notice of the people’s songs

अध्याय २०

श्लोक 21.1

१-११ सव्यः।इन्द्रः।जगती, १०-११ त्रिष्टुप्।न्यू॒३षु वाचं॒ प्र म॒हे भ॑रामहे॒ गिर॒ इन्द्रा॑य॒ सद॑ने वि॒वस्व॑तः ।नू चि॒द्धि रत्नं॑ सस॒तामि॒वावि॑द॒न्न दु॑ष्टु॒तिर्द्र॑विणो॒देषु॑ शस्यते

1-11 savyaḥ| indraḥ| jagatī, 10-11 triṣṭup| nyū3ṣu vācaṃ pra mahe bharāmahe gira indrāya sadane vivasvataḥ | nū ciddhi ratnaṃ sasatāmivāvidanna duṣṭutirdraviṇodeṣu śasyate

हिन्दी अर्थ

(बृहस्पतिः) बृहती-वेदवाणी का भ्राचार्यं, तथा (इनदरः) परमेदवरं पर आक्रमण करनेवाले भौर (अघायोः) हमारी इत्या चाहनेवाले पापों से इनमे .से प्रत्येक (सखा) हमारा सखा वनकर (नः सखिम्यः) हम सखा

English

of praise. The man in whose libations Sakra hath delight by means of potent Somas vanquisheth his

अध्याय २०

श्लोक 21.2

दु॒रो अश्व॑स्य दु॒र इ॑न्द्र॒ गोर॑सि दु॒रो यव॑स्य॒ वसु॑न इ॒नस्पतिः॑ ।शि॒क्षा॒न॒रः प्र॒दिवो॒ अका॑मकर्शनः॒ सखा॒ सखि॑भ्य॒स्तमि॒दं गृ॑णीमसि

duro aśvasya dura indra gorasi duro yavasya vasuna inaspatiḥ | śikṣānaraḥ pradivo akāmakarśanaḥ sakhā sakhibhyastamidaṃ gṛṇīmasi

हिन्दी अर्थ

1, भ्रधर्ववेद-माष्य कौ० २०। सु° १८ (यन्ति) सदा प्राप्त होते है । . (इन्द्र) है परमेदवर ! (वयम ) हम उपासक (त्वायवः) केवल

English

He rushes through the region like a furious bull, he who hath made these floods the dames of worthy lords.

अध्याय २०

श्लोक 21.3

शची॑व इन्द्र पुरुकृद् द्युमत्तम॒ तवेदि॒दम॒भित॑श्चेकिते॒ वसु॑ ।अतः॑ सं॒गृभ्या॑भिभूत॒ आ भ॑र॒ मा त्वा॑य॒तो ज॑रि॒तुः काम॑मूनयीः

śacīva indra purukṛd dyumattama tavedidamabhitaścekite vasu | ataḥ saṃgṛbhyābhibhūta ā bhara mā tvāyato jarituḥ kāmamūnayīḥ

हिन्दी अर्थ

सरव॑त्र वसंनेवाले ! (अस्य) इस मेरी, भौर (नः) हम सब की स्तुतियो.को (भ्रयः) है परमेदवर ! आप सर्वाधीश हैँ । (निदे) भ्रापकी निन्दा करनेवाले, (च) भौर (वक्तवे) बकवासी, तथा ( भरराव्प़रे ) भ्रदानी के

English

This Maghavan hath found light for the man who brings oblation, sheds the juice, and promptly pours his gifts.

अध्याय २०

श्लोक 21.4

ए॒भिर्द्युभिः॑ सु॒मना॑ ए॒भिरिन्दु॑भिर्निरुन्धा॒नो अम॑तिं॒ गोभि॑र॒श्विना॑ ।इन्द्रे॑ण॒ दस्युं॑ द॒रय॑न्त॒ इन्दु॑भिर्यु॒तद्वे॑षसः॒ समि॒षा र॑भेमहि

ebhirdyubhiḥ sumanā ebhirindubhirnirundhāno amatiṃ gobhiraśvinā | indreṇa dasyuṃ darayanta indubhiryutadveṣasaḥ samiṣā rabhemahi

हिन्दी अर्थ

(रन्धीः मा नः) वश मेँ हमे न कीजिये । (मम) मुभ उपासक के (क्रतुः) ( त्वम. ) हैँ परमेषवर ! अप ( वर्म भ्रसि ) हमारी कवच है, हनन करनेवाले ! (च) भौर ( पुरोयोधः ) हमारे सामने उपस्थित पापों

English

Let the keen axe come forth together with the light: here be, as erst, the teeming cow of sacrifice.

अध्याय २०

श्लोक 21.5

समि॑न्द्र रा॒या समि॒षा र॑भेमहि॒ सं वाजे॑भिः पुरुश्च॒न्द्रैर॒भिद्यु॑भिः ।सं दे॒व्या प्रम॑त्या वी॒रशु॑ष्मया॒ गोअ॑ग्र॒याश्वा॑वत्या रभेमहि

samindra rāyā samiṣā rabhemahi saṃ vājebhiḥ puruścandrairabhidyubhiḥ | saṃ devyā pramatyā vīraśuṣmayā goagrayāśvāvatyā rabhemahi

हिन्दी अर्थ

(प्रतिब्रुवे) पापों को फटकार देता हूं । का० २० भु° १९६ . अथर्ववेद-माष्य ४५ १०५. बर्रहत्याय छसे एतनाषाद्माय च ।

English

Let the Red God shine pure with his refulgent ray, and let the Lord of heroes glow like heaven’s clear sheen.

अध्याय २०

श्लोक 21.6

ते त्वा॒ मदा॑ अमद॒न् तानि॒ वृष्ण्या॒ ते सोमा॑सो वृत्र॒हत्ये॑षु सत्पते ।यत् का॒रवे॒ दश॑ वृ॒त्राण्य॑प्र॒ति ब॒र्हिष्म॑ते॒ नि स॒हस्रा॑णि ब॒र्हयः॑

te tvā madā amadan tāni vṛṣṇyā te somāso vṛtrahatyeṣu satpate | yat kārave daśa vṛtrāṇyaprati barhiṣmate ni sahasrāṇi barhayaḥ

हिन्दी अर्थ

(वार््रहत्याय) पाप-वृत्रों के हनन के लिये, ( शवसे ) दस निमित्त (वतंयामसि ) भ्रपनी भोर वृत्त करते है । भन को (उत) भौर (चक्षुः) आप की कृपादृष्टि को (अर्वाचीनम्) हमारी

English

O much-invoked, may we subdue all famine and evil want with store of grain and cattle. May we allied, as first in rank, with princes, obtain possessions by our own exertion.

अध्याय २०

श्लोक 21.7

यु॒धा युध॒मुप॒ घेदे॑षि धृष्णु॒या पु॒रा पुरं॒ समि॒दं हं॒स्योज॑सा ।नम्या॒ यदि॑न्द्र॒ सख्या॑ परा॒वति॑ निब॒र्हयो॒ नमु॑चिं॒ नाम॑ मा॒यिन॑म्

yudhā yudhamupa ghedeṣi dhṛṣṇuyā purā puraṃ samidaṃ haṃsyojasā | namyā yadindra sakhyā parāvati nibarhayo namuciṃ nāma māyinam

हिन्दी अर्थ

. की कुपादष्टि हुम नव-उपासकों की ओर भी हो सके। (शतक्रतो) है विरवकमन् थाः सैकड़ों भदूमृत क्मावाले ! (विदवाभिः) सब (गीर्भिः) वैदिक-स्तुतिवाणियों द्वारा ( ते ) भ्रापके ही ( नामानि)

English

Brihaspati protect us from the rearward, and from above, and from below, from sinners. May Indra from the front, and from the centre, as friend to friends, vouchsafe us room and

अध्याय २०

श्लोक 21.8

त्वं कर॑ञ्जमु॒त प॒र्णयं॑ वधी॒स्तेजि॑ष्ठयातिथि॒ग्वस्य॑ वर्त॒नी।त्वं श॒ता वङ्गृ॑दस्याभिन॒त् पुरो॑ऽनानु॒दः परि॑षूता ऋ॒जिश्व॑ना

tvaṃ karañjamuta parṇayaṃ vadhīstejiṣṭhayātithigvasya vartanī| tvaṃ śatā vaṅgṛdasyābhinat puro'nānudaḥ pariṣūtā ṛjiśvanā

हिन्दी अर्थ

नाना नामों का (ईमहे) हंय"कीत्तंन करते हँ । (इन्द्र) है परमेश्वर ! ताकि हम (भभिंमातिषाह्ये) स्वाभिमानं को पराभव कर सकं । गुण-कमं निरतिशशयी है । उपासक उन नामों कां स्तवन करता हृश्ा, प्रत्येक करता है । इस प्रकार उसका स्वामिमान टूट जाता है । “शतक्रतो दरार

English

freedom. Ye twain are Lords of wealth in earth and heaven, thou, O

अध्याय २०

श्लोक 21.9

त्वमे॒तां ज॑न॒राज्ञो॒ द्विर्दशा॑ब॒न्धुना॑ सु॒श्रव॑सोपज॒ग्मुषः॑ ।ष॒ष्टिं स॒हस्रा॑ नव॒तिं नव॑ श्रु॒तो नि च॒क्रेण॒ रथ्या॑ दु॒ष्पदा॑वृणक्

tvametāṃ janarājño dvirdaśābandhunā suśravasopajagmuṣaḥ | ṣaṣṭiṃ sahasrā navatiṃ nava śruto ni cakreṇa rathyā duṣpadāvṛṇak

हिन्दी अर्थ

४६ . भध्वेवेद-माष्य का० २० । सु० १९ यह दर्चाया है किं परमेदवर के.गुणकमं संकडं प्रकार के हैँ । इसलिये प्रत्येक गुण-कमं की वृष्टि से उसके नाम भी सेकडों ्ह। ऋगेदमे कहा हैकि

English

Brihaspati, and thou, O Indra. Mean though he be, give wealth to him who lauds you. Preserve us evermore, ye Gods, with

अध्याय २०

श्लोक 21.10

त्वमा॑विथ सु॒श्रव॑सं॒ तवो॒तिभि॒स्तव॒ त्राम॑भिरिन्द्र॒ तूर्व॑याणम्।त्वम॑स्मै॒ कुत्स॑मतिथि॒ग्वमा॒युं म॒हे राज्ञे॒ यूने॑ अरन्धनायः

tvamāvitha suśravasaṃ tavotibhistava trāmabhirindra tūrvayāṇam| tvamasmai kutsamatithigvamāyuṃ mahe rājñe yūne arandhanāyaḥ

हिन्दी अर्थ

घतत रयिं सतुवते कीर चिव् युयं प॑त खत्तिभि; सदा नः ॥ १९॥ , अहस्पते) है बृहती-वेदवाणी के श्राचायं ! (च इन्रः) गौर परमेश्वर। शक्तियो ! तुम सब मिलकर .(नः) हम उपासको की ( सदा पात ).सदा रक्षा करते रहो, (स्वस्तिभिः) कल्याणमयी विधियो हारा ।

English

foes. As waters flow together to the river, thus Somas to Indra flow, as rivulets to the lake.

अध्याय २०

श्लोक 21.11

य उ॒दृची॑न्द्र दे॒वगो॑पाः॒ सखा॑यस्ते शि॒वत॑मा॒ असा॑म ।त्वां स्तो॑षाम॒ त्वया॑ सु॒वीरा॒ द्राघी॑य॒ आयुः॑ प्रत॒रं दधा॑नाः

ya udṛcīndra devagopāḥ sakhāyaste śivatamā asāma | tvāṃ stoṣāma tvayā suvīrā drāghīya āyuḥ prataraṃ dadhānāḥ

हिन्दी अर्थ

कीरिः-=स्तोता (निव ० ३।१६); कीर्तन करनेवाला । (इन्द्र) है परभेदवर ! ( कण्वाः ) समाधि में निमीलितनेत्र योगी ही चाहते है, ओौर (सखायः) भ्रपनी स्नुतियों के दारा भ्रापके मित्र बनना .

English

In place of sacrifice sages exalt his might, as the rain swells the corn by moisture sent from heaven.

अध्याय २०

श्लोक 22.1

(१-६) १-३ त्रिशोकः, ४-६ प्रियमेधः।इन्द्रः।गायत्री।अ॒भि त्वा॑ वृषभा सु॒ते सु॒तं सृ॑जामि पी॒तये॑ ।तृ॒म्पा व्यऽश्नुही॒ मद॑म्

(1-6) 1-3 triśokaḥ, 4-6 priyamedhaḥ| indraḥ| gāyatrī| abhi tvā vṛṣabhā sute sutaṃ sṛjāmi pītaye | tṛmpā vya'śnuhī madam

हिन्दी अर्थ

एक ही है, परन्तु मेधावी. ऋषि उसके नाम नाना कहते हैँ । १०८. पुरुष्टुतस्य धामभिः शतेन महयामसि । भ्रजा का धारण-पोषण करनेवाले, (इन्द्रस्य ) परमेदवर कं (शतेन) सैकड़ों ( धामभिः ) नामों दवारा ( महयामसि ). उस की महिमा का हम स्तवन करते है। घांमभिः-नासभिः। यथा “धामानि ज्रयाणि भवन्ति स्थानानि

English

blessings. This, even this, O Indra, we implore: as thy devoted friends,

अध्याय २०

श्लोक 22.2

मा त्वा॑ मू॒रा अ॑वि॒ष्यवो॒ मोप॒हस्वा॑न॒ आ द॑भन्।माकीं॑ ब्रह्म॒द्विषो॑ वनः

mā tvā mūrā aviṣyavo mopahasvāna ā dabhan| mākīṃ brahmadviṣo vanaḥ

हिन्दी अर्थ

( भरेषु ) देवासुर-संभ्रामों मे ( वाजसातये ) बल-प्राप्ति के लिये (वृत्राय हन्तवे) तथा पाप-वृत्रों है हनन कं लिये (पुरूतम् ) नाना नामों देवासुर-संग्रामो मे भासुरभावों भरौर आसुरकर्मों का भाप (सासहिः भव) पू्णंतया पराभव कीजिये । (वृत्राय हन्तवे) भ्रासुरी पापों के हनन केलिये . (त्वाम्) आप से (ईमहे) याचना करते हैँ । ईमहे याच्थ्नाकर्मा (निघं० ३।१९)।

English

The Kanvas praise thee with their hymns. Naught else, O Thunderer, have I praised in the skilled singer’s eulogy:

अध्याय २०

श्लोक 22.3

इ॒ह त्वा॒ गोप॑रीणसा म॒हे म॑न्दन्तु॒ राध॑से ।सरो॑ गौ॒रो यथा॑ पिब

iha tvā goparīṇasā mahe mandantu rādhase | saro gauro yathā piba

हिन्दी अर्थ

( इन ) है परमेश्वर । ( दयुम्नेषु ) योगज विभुतिरूपी धनो की का० २०. सू०२० भरर्वैवेद-माष्य ४७ हृए जा रहै है, एेसे देवासुर संग्राम के निमित्त, (पृत्सुतृषुं ) देवासुर-संम्रामों मे असुरो की हिसा के. निमित्त, (च श्ववःसु) भौर देवासुर-संग्रामों मे विजय यशो की प्राप्ति के निमित्त, तथा ( भरभिमातिषु ) भरभिमान को भावनाभों कं जागरित हो जाने पर (साक्ष्व ) भाप हमे सहायकरूप में प्राप्त हुजिये 1 पतनाश्ये पृतना मनुष्यनाम (निच०.२।३) +भाज्य. (= घी) ..

English

On thy laud only have I thought. The Gods seek him who presses out the Soma; they desire not sleep:

अध्याय २०

श्लोक 22.4

अ॒भि प्र गोप॑तिं गि॒रेन्द्र॑मर्च॒ यथा॑ वि॒दे।सू॒नुं स॒त्यस्य॒ सत्प॑तिम्

abhi pra gopatiṃ girendramarca yathā vide| sūnuṃ satyasya satpatim

हिन्दी अर्थ

नाम (निषं० २।१७) +-तृषु (तुवि हिसायाम्) ।. साक््व = सक्षतिः गतिकर्मा जागरूक (सोमम्) हमारे भक्तिरस की (पाहि) प्राप रक्षा कीजिये । (न ऊतये ) ताकि हमारी रक्षा हो सके । (शतक्रतो इन्दर ) है सैकड़ों भदत कमोँवाले परमेद्वरं ! (पञ्चसु)

English

Incessantly they punish sloth. Faithful to thee we loudly sing, heroic Indra, songs to thee.

अध्याय २०

श्लोक 22.5

आ हर॑यः ससृज्रि॒रेऽरु॑षी॒रधि॑ ब॒र्हिषि॑ ।यत्रा॒भि सं॒नवा॑महे

ā harayaḥ sasṛjrire'ruṣīradhi barhiṣi | yatrābhi saṃnavāmahe

हिन्दी अर्थ

प्रदान की हर्द, (तानि) वे बनी रह । (ते) भ्रपसे यह वर(भ्रा वृणे) ररह । यह वर्म भ्रापसे मांगेता हूं । य भ्रथववेद-माष्य का० २०।सु० २०

English

Mark, gracious Lord, this act of ours. Give us not up to man’s reproach, to foeman’s hateful calumny:

अध्याय २०

श्लोक 22.6

इन्द्रा॑य॒ गाव॑ आ॒शिरं॑ दुदु॒ह्रे व॒ज्रिणे॒ मधु॑ ।यत् सी॑मुपह्व॒रे वि॒दत्

indrāya gāva āśiraṃ duduhre vajriṇe madhu | yat sīmupahvare vidat

हिन्दी अर्थ

(इन्द्र) ह परमेदवर !. भराय की कृपा से ( बृहद् श्रवः ) महायदः जो कि उन के लिये दुलंङ्घ्य हो । ( उत ) तदनन्तर ( ते.) प्रापके दिय (दयुष्मम्) बल को (तिरामसि) हम भ्रौर भ्रधिक बढ़ाते हैँ ।

English

In thee alone is all my strength. Thou art mine ample coat of mail, my champion, Vritra-slayes, thou.

अध्याय २०

श्लोक 23.1

१-९ विश्वामित्रः।इन्द्रः।गायत्री।आ तू न॑ इन्द्र म॒द्र्यऽग्घुवा॒नः सोम॑पीतये ।हरि॑भ्यां याह्यद्रिवः

1-9 viśvāmitraḥ| indraḥ| gāyatrī| ā tū na indra madrya'gghuvānaḥ somapītaye | haribhyāṃ yāhyadrivaḥ

हिन्दी अर्थ

उ कोको यत्तं अद्रिव इन्द्रेह तत॒ आ ग॑हि ॥४॥ वह भ्रज्ञातरूप (लोकः) तुरीयावस्था का लोकं है, (ततः) वहां से इह - इस मेरे हृदय में (आ गहि) भ्रा विराजिये। .

English

With thee for Friend I brave the foe. O Indra, for the strength that slays the foe and conquers in the fight

अध्याय २०

श्लोक 23.2

स॒त्तो होता॑ न ऋ॒त्विय॑स्तिस्ति॒रे ब॒र्हिरा॑नु॒षक्।अयु॑ज्रन् प्रा॒तरद्र॑यः

satto hotā na ṛtviyastistire barhirānuṣak| ayujran prātaradrayaḥ

हिन्दी अर्थ

पराविद्यावाले किसी भी उपासक को प्राप्त हो सकता है । परमेदवर की यदि वह निष्पापः है, तो परमेशवर-प्राप्ति का भ्रधिकारी है। परभेदवर सर्व॑व्यापक है, - प्रतः किसी भाधिदेविकया हैरिक दृष्टि क किसी लोकसे

English

We turn thee hitherward to us. O Indra, Lord of Hundred Powers, may those who praise thee hitherward.

अध्याय २०

श्लोक 23.3

इ॒मा ब्रह्म॑ ब्रह्मवाहः क्रि॒यन्त॒ आ ब॒र्हिः सी॑द ।वी॒हि शू॑र पुरो॒लाश॑म्

imā brahma brahmavāhaḥ kriyanta ā barhiḥ sīda | vīhi śūra purolāśam

हिन्दी अर्थ

रहते भी परमेश्वर की तुरीयावस्था कायम रहती है । जसे जीवात्मा की का०.२० । सु°० २१ भथववेद-भाष्य ४९ (इन्द्रः) परमेश्वर (नः) हमे जब (मृलयाति). .सुखी कर देता है,

English

Direct thy spirit and thine eye. O Indra, Lord of Hundred Powers, with all our songs we invocate.

अध्याय २०

श्लोक 23.4

रा॒र॒न्धि सव॑नेषु ण ए॒षु स्तोमे॑षु वृत्रहन्।उ॒क्थेष्वि॑न्द्र गिर्वणः

rārandhi savaneṣu ṇa eṣu stomeṣu vṛtrahan| uktheṣvindra girvaṇaḥ

हिन्दी अर्थ

सामने वह परमेदवर (मद्रं मवति) सदा सुखदायी भौर कल्याणकारी रूप सब शत्रु पर (जेता) विजय पाए हृए है। -विचषेणिः ) वह् विविघ उत्तम-विधि से (भ्र भरामहे) भेट करते हँ । (चु चित् हि) निद्चवयसेही

English

Thy names for triumph over foes. We strive for glory through the powers immense of him whom many praise,

अध्याय २०

श्लोक 23.5

म॒तयः॑ सोम॒पामु॒रुं रि॒हन्ति॒ शव॑स॒स्पति॑म्।इन्द्रं॑ व॒त्सं न मा॒तरः॑

matayaḥ somapāmuruṃ rihanti śavasaspatim| indraṃ vatsaṃ na mātaraḥ

हिन्दी अर्थ

सम्पत्तियों को (भविदत् ) हर लेता है । (इव) जसे कि वह. ( ससताम् ) . . शिञानरः परदिवो अकामक्ेनः सखा सदिभ्यतमिदं गूणीमसि ॥२॥ (दुरः) दार (असि) है, साधन ह! भाप (गोः) गौगों या इन्द्रियो की

English

Of Indra who supports mankind. For the foe’s slaughter I address Indra whom many invocate,

अध्याय २०

श्लोक 23.6

स म॑न्दस्वा॒ ह्यन्ध॑सो॒ राध॑से त॒न्वा म॒हे।न स्तो॒तारं॑ नि॒दे क॑रः

sa mandasvā hyandhaso rādhase tanvā mahe| na stotāraṃ nide karaḥ

हिन्दी अर्थ

सब के स्वामी तथा पालक हैँ । है परमेदवर ! भ्राप ( शिक्षानरः ) वैदिक शिक्षान्नो के नेता है ( प्रदिवः ) भाप पुराण पुरुषैः ( अकोमकर्टनः ) कामना के वशवर्ती नहीं है ! भ्राप (सखिभ्यः) उपासक सखाभ्रो के लिये (सखा) सखा हँ । (तम्) उस भ्रापके प्रति इदम् ) इस सब कुछ को . गृणीमसि) हम भ्चंनारूपम भेट करते है । प्रदिवः पुराण नामं ( निध० ३ २७ ).। गृणाति भर्चतिकर्मा

English

To win us booty in the wars. In battles be victorious. We seek thee, Lord of Hundred Powers,

अध्याय २०

श्लोक 23.7

व॒यमि॑न्द्र त्वा॒यवो॑ ह॒विष्म॑न्तो जरामहे ।उ॒त त्वम॑स्म॒युर्व॑सो

vayamindra tvāyavo haviṣmanto jarāmahe | uta tvamasmayurvaso

हिन्दी अर्थ

१९१. शीव सद्र रद् मदग तवेदिदमसितयकति षं । अवः संगम्याभिपूत॒ आ भ॑र॒ मा त्वायतो जरितुः; काम॑मूनवौः॥ ३॥ , विभूतियां जो (चेकिते) दृष्टिगोचर हो रही है, वे ( तवे ) . भ्रापकी है। (भ्रभिभूते) है सर्वत्र सत्तावाले ! ( भरतः ) इन विभरूतियों में से कतिपय विभरुतिर्थो. का ( संगुभ्य ) संग्रह करके ( भराभर ) मू प्रदान कीजिये । (त्वायतः) भापको चाहनेवाले (जरितुः) भाप के स्तोता की (कामम्) कामना को (मा ऊनयीः) न्युन न कीजिये, असफल न कीजिये । ।

English

O Indra, that the foe may fall. In splendid combats of the hosts, in glories where the fight is won,

अध्याय २०

श्लोक 23.8

मारे अ॒स्मद् वि मु॑मुचो॒ हरि॑प्रिया॒र्वाङ् या॑हि ।इन्द्र॑ स्वधावो॒ मत्स्वे॒ह

māre asmad vi mumuco haripriyārvāṅ yāhi | indra svadhāvo matsveha

हिन्दी अर्थ

का०२०। सु०२१. भथर्वंवेद-माष्य । ५१ श्ण दस्यु दरयन्त शन्दुभियतहैषसः खभिषा मेमदि ॥४।। हे उपासक ! (एभिः) इन (दयुभिः) ज्ञान से द्योतमान ( गोभिः ) वेदवाणियों द्वारा तु (सुमनाः) भपने मन को स्वच्छ कर । भ्रौर (एभिः) इन ( इन्दुभिः ) सरस ( गोभिः ) वेदवाणियो द्वारा तु (भमतिम् ) अंपने भज्ञान को (निरन्धानः) निरढ.कर, हटा । हम सब उपासक (भदिवना)

English

Indra, be victor over foes. Drink thou the Soma for our help, bright, vigilant, exceeding strong,

अध्याय २०

श्लोक 23.9

अ॒र्वाञ्चं॑ त्वा सु॒खे रथे॒ वह॑तामिन्द्र के॒शिना॑ ।घृ॒तस्नू॑ ब॒र्हिरा॒सदे॑

arvāñcaṃ tvā sukhe rathe vahatāmindra keśinā | ghṛtasnū barhirāsade

हिन्दी अर्थ

को ( दरयन्त; ) . विदीणं करते हुए, ( युतद्रेषसः ) तथा द्वेष भावनार्भो ते पथक् रहते हए; (सम्) सब भिलकर (इषा ) परमेश्व रीयेच्छा के भनुकूल (रमेमहि) सत्कायों मे प्रयत करते रहे । "कालो भ्रद्वो बहति सप्तरदिमिः'.( भयव ° १९।५३।१) में काल को प्रव. कहा है । भवा मन्व के पूर्वां का प्रथं निम्न भकार कादहै। यथा-

English

O Indra, Lord of Hundred Powers. O Satakratu, powers which thou mid the Five Races hast dis- played

अध्याय २०

श्लोक 24.1

१-९ विश्वामित्रः।इन्द्रः।गायत्री।उप॑ नः सु॒तमा ग॑हि॒ सोम॑मिन्द्र॒ गवा॑शिरम्।हरि॑भ्यां॒ यस्ते॑ अस्म॒युः

1-9 viśvāmitraḥ| indraḥ| gāyatrī| upa naḥ sutamā gahi somamindra gavāśiram| haribhyāṃ yaste asmayuḥ

हिन्दी अर्थ

(इन्र) है परमेदवर ! ( राया ) योगजं-विभूति को भ्राप्त करके (सम् रभेमहि) हम दइकटूठे होकर सत्क मे प्रवृत्त हों ।. ( इषा ) भरापवी सन्मति.से प्रेरित होकर ( सम् ) हम मिलकर ( रभेमहि ) सत्कमोँ को

English

These, Indra, do I claim of thee. Indra, great glory hast thou gained. Win splendid fame which none may mar:

अध्याय २०

श्लोक 24.2

तमि॑न्द्र॒ मद॒मा ग॑हि बर्हि॒ष्ठां ग्राव॑भिः सु॒तम्।क॒विन्न्वऽस्य तृ॒प्णवः॑

tamindra madamā gahi barhiṣṭhāṃ grāvabhiḥ sutam| kavinnva'sya tṛpṇavaḥ

हिन्दी अर्थ

५२ ४ , , - (नतत्रदवाष्य कार भे । ४ समथववेद-भाष्य का० २०) सू० २१ (सत्पते) है सच्चे पत्ति ! (ते) उन हमारी भक्तिकी ( मदाः) ,. क्योंकि पापों की जड़ काटने में लगे हए (कारवे) स्तुतिकर्ता उपासक कै,

English

We make thy might perpetual. Come to us either from anear, or, Sakra, come from far away.

अध्याय २०

श्लोक 24.3

इन्द्रमि॒त्था गिरो॒ ममाच्छा॑गुरिषि॒ता इ॒तः ।आ॒वृते॒ सोम॑पीतये

indramitthā giro mamācchāguriṣitā itaḥ | āvṛte somapītaye

हिन्दी अर्थ

विरोध के, भर्थात् आसानी से (यत्) जो भापने (नि बहंयः) काट दिया है 1 बुषण्या वृष्ण्यानि वषकर्माणि (निरु० १०।१।१०)। कारवे. १२५. युषायुघमुप् बेहैषि ष्णुया पुरा पुरं समिदं हंखोजंसा । (धृष्णुया) हटीले कामादि के साय (युघम्) युद्ध करना, आप (उप एषि) स्वीकार कर लेते है ।(च इत्) गव्य ही स्वीकार कर लेते हैँ । शौर (पुरा)

English

Indra, wherever be thy home, come to us thence, O Thunder- armed. Verily Indra, conquering all, driveth even mighty fear away;

अध्याय २०

श्लोक 24.4

इन्द्रं॒ सोम॑स्य पी॒तये॒ स्तोमै॑रि॒ह ह॑वामहे ।उ॒क्थेभिः॑ कु॒विदा॒गम॑त्

indraṃ somasya pītaye stomairiha havāmahe | ukthebhiḥ kuvidāgamat

हिन्दी अर्थ

अनादिकाल से (इदं पुरम्) कामादि की इस पुरी को (भ्रोजसा) निज भोज म्राप (नेम्या) रात्रिकाल में (सख्या) निज सखिमाव कं कारणः (परावति) पुरम् = कामादि की पुरी है रजोगुण भ्रौर तमोगुण, जो कि चित्त पर राज्य कर रहे होते है । नम्याः रात्रि के १२ बजे के उपरान्त, भदिव-

English

For firm is he and swift to act. Indra be gracious unto us: sin shall not reach us afterward .

अध्याय २०

श्लोक 24.5

इन्द्र॒ सोमाः॑ सु॒ता इ॒मे तान् द॑धिष्व शतक्रतो ।ज॒ठरे॑ वाजिनीवसो

indra somāḥ sutā ime tān dadhiṣva śatakrato | jaṭhare vājinīvaso

हिन्दी अर्थ

कालं म उपासना के परिपक्व हो जाने पर परमेदवर सखा बन् कर उपासक का उपकार करता है । नस्या = रात्रि (निष १।७)। का० २०। सू०.२१ भरथवंवेद-भाष्य द.

English

And good shall be before us still, From all the regions of the world let Indra send security.

अध्याय २०

श्लोक 24.6

वि॒द्मा हि त्वा॑ धनंज॒यं वाजे॑षु दधृ॒षं क॑वे ।अधा॑ ते सु॒म्नमी॑महे

vidmā hi tvā dhanaṃjayaṃ vājeṣu dadhṛṣaṃ kave | adhā te sumnamīmahe

हिन्दी अर्थ

१२६. . त्वं करंञ्जगृत पणेयं वधीसिचषठयातिथिग्वर्यं बतुनी । (अतिथिग्वस्य) जिनके भ्रागमन की कोद. नियत तिथि नही, एसे योगी राजो -की सेवा के लिये उनके प्रति गमन करनेवाले. उपासक की दवारा, ह परमेरवर । आपने उसके (करञ्जम्) वंषयिक-सुखो में मनोरञ्जेन का, तथा (पर्णयम्) पतते के सदुदा चञ्चलं चेष्टा का (वधीः) वध कर दिया है, विनाश कर दिया है । ( ऋजिदवना ). ऋजु अर्थात् सत्यमाग पर

English

The foe-subduer, swift to act. We will present fair praise unto the Mighty One, our hymns to

अध्याय २०

श्लोक 24.7

इ॒ममि॑न्द्र॒ गवा॑शिरं॒ यवा॑शिरं च नः पिब ।आ॒गत्या॒ वृष॑भिः सु॒तम्

imamindra gavāśiraṃ yavāśiraṃ ca naḥ piba | āgatyā vṛṣabhiḥ sutam

हिन्दी अर्थ

कुटिल गतियो = वक्र गतियो के प्रदाता कामादि के (कला पुरः) सेकड़ों गढ़ को (त्वम्) है परमेदवर ! भापने (अभिनत्) तोड़-फोड़् दिया है ! . करञ्जम् कं = वेषयिक सुखभोग-+-रञ्जन पणयम् पणं , ( भवन्धुना .) सांसारिक तथा बन्घु-बान्धवों के बन्धन से रदित,

English

Indra in Vivasvān’s dwelling-place; For he hath ne’er found wealth in those who seem to sleep; those who give wealth to men

अध्याय २०

श्लोक 24.8

तुभ्येदि॑न्द्र॒ स्व ओ॒क्ये॒३ सोमं॑ चोदामि पी॒तये॑ ।ए॒ष रा॑रन्तु ते हृ॒दि

tubhyedindra sva okye3 somaṃ codāmi pītaye | eṣa rārantu te hṛdi

हिन्दी अर्थ

सहस्रा) -सोए पड़े हजारो संस्कारो को, म्नौर ( नवति नव ) एक वषं मातूु- म संचित हए (एतान्) -इन संस्कारों को, ( त्वम् ) हैं परमे्वर । भापने करानेवाले (रथ्या चक्रंण) रथ के चक्र द्वारां वतु कुचल दी जाती है । भरभिप्राय यह है कि इन्दं कुचल करः जीवात्मा को मुक्त कर

English

accept no paltry praise. 274

अध्याय २०

श्लोक 24.9

त्वां सु॒तस्य॑ पी॒तये॑ प्र॒त्नमि॑न्द्र हवामहे ।कु॒शि॒कासो॑ अव॒स्यवः॑

tvāṃ sutasya pītaye pratnamindra havāmahe | kuśikāso avasyavaḥ

हिन्दी अर्थ

रथ को योगमार्गं पर शीघ्र चलानेवाले उपासक की (आविथ) 4 रक्ला- राजा, (गुने ) सदा युवा (भस्म) इस जीवात्मा कं लिये ( त्वम् ) भापने तथां (अतिथिग्वम्) अतिथिरूप में प्राप्त होनेवाले सदुगुर कं सेवक को (अरन्धनायः) उसके वरीभ्रूत करदियाहै। .

English

Giver of horses, Indra, giver, thou, of kine, giver of barley, thou art Lord and guard of wealth: Man’s helper from of old, not disappointing hope, Friend of our friends, to thee as such we

अध्याय २०

श्लोक 25.1

(१-७) १-५ गोतमः, ७ अष्टकः।इन्द्रः।जगती, ७ त्रिष्टुप्।अश्वा॑वति प्रथ॒मो गोषु॑ गच्छति सुप्रा॒वीरि॑न्द्र॒ मर्त्य॒स्तवो॒तिभिः॑ ।तमित् पृ॑णक्षि॒ वसु॑ना॒ भवी॑यसा॒ सिन्धु॒मापो॒ यथा॒भितो॒ विचे॑तसः

(1-7) 1-5 gotamaḥ, 7 aṣṭakaḥ| indraḥ| jagatī, 7 triṣṭup| aśvāvati prathamo goṣu gacchati suprāvīrindra martyastavotibhiḥ | tamit pṛṇakṣi vasunā bhavīyasā sindhumāpo yathābhito vicetasaḥ

हिन्दी अर्थ

९); भ्रतिथि गाङ् गतौ +-उ भ्रागु-=मनुष्य (निघ०.२।२)1 १२९. य उुख्चीनद् देवगोपाः सखौयलते शिवतमा अर्साम । जो हम (ते) भ्राप के ( सखायः ) सखा उपासक, ( देवगोपाः ) भाप देव

English

sing this praise. Indra, most splendid, powerful, rich in mighty deeds, this treasure spread around is known to

अध्याय २०

श्लोक 25.2

आपो॒ न दे॒वीरुप॑ यन्ति हो॒त्रिय॑म॒वः प॑श्यन्ति॒ वित॑तं॒ यथा॒ रजः॑ ।प्रा॒चैर्दे॒वासः॒ प्र ण॑यन्ति देव॒युं ब्र॑ह्म॒प्रियं॑ जोषयन्ते व॒रा इ॑व

āpo na devīrupa yanti hotriyamavaḥ paśyanti vitataṃ yathā rajaḥ | prācairdevāsaḥ pra ṇayanti devayuṃ brahmapriyaṃ joṣayante varā iva

हिन्दी अर्थ

प्रापकी कृपा से (सुवीराः) उपासना मागं मेँ उत्तम वीर बन कर (प्रतरं राधीयः प्रायः) बहुत लम्बी भ्रायु (दधानाः ) धारण करे ॥ - बुप्रम ) है आनन्द रसवर्षी ! ( भरा युते) भक्तिरस फे पु्णतयां , का०२०। सुर २ अथवेवेद-माष्य ५५ तय्यार हो जाने पर, सँ उपासक (सुतम्) तय्यार किये भक्तिरस को (पीतये)

English

be thine own. Gather therefrom. O Conqueror, and bring to us: fail not the hope of him who loves and sings

अध्याय २०

श्लोक 25.3

अधि॒ द्वयो॑रदधा उ॒क्थ्यं॑१ वचो॑ य॒तस्रु॑चा मिथु॒ना या स॑प॒र्यतः॑ ।असं॑यत्तो व्र॒ते ते॑ क्षेति॒ पुष्य॑ति भ॒द्रा श॒क्तिर्यज॑मानाय सुन्व॒ते

adhi dvayoradadhā ukthyaṃ1 vaco yatasrucā mithunā yā saparyataḥ | asaṃyatto vrate te kṣeti puṣyati bhadrā śaktiryajamānāya sunvate

हिन्दी अर्थ

. . है उपासक ! (अविष्यवः) चापलूख लो" (श्वा) तुभे, तेरे उपासना मागे से ( मा जा दमन्). च्युत न करे । (मा) भौर न (उपहंस्वानः). तेरे उपासनामाग का उपहास करनेवाले (मूद्यः) मूखं लोग तु तेरे उपासना १३२. इह त्वा गोपरीणसा मेहे मदन्तु रासे । . 1 ¶,रगत भ्रथ।त् चरे हए गुरुजन, (त्वा) तुके (महे राधसे) महाधन

English

to thee. Well-pleased with these bright flames and with these Soma drops, take thou away our

अध्याय २०

श्लोक 25.4

आदङ्गि॑राः प्रथ॒मं द॑धिरे॒ वय॑ इ॒द्धाग्न॑यः॒ शम्या॒ ये सु॑कृ॒त्यया॑ ।सर्वं॑ प॒णेः सम॑विन्दन्त॒ भोज॑न॒मश्वा॑वन्तं॒ गोम॑न्त॒मा प॒शुं नरः॑

ādaṅgirāḥ prathamaṃ dadhire vaya iddhāgnayaḥ śamyā ye sukṛtyayā | sarvaṃ paṇeḥ samavindanta bhojanamaśvāvantaṃ gomantamā paśuṃ naraḥ

हिन्दी अर्थ

का पान कर. श जैसे कि ( ५ ) तुषित मृग (सरः) तालाब के जल का पान करता है मदन्तु =मद् गतौ । परीणस-=परि+नस्( गतौ ) ˆ है उपासकं ! (यथा विदे) यथार्थं ज्ञान की प्राप्ति के लिये (गिरा) भ्रचना किया कर । जो परमेदवर किं ( गोपतिम् ) वेदवाणि्यो का पति है,

English

poverty with steeds and kine. With Indra scattering the Dasyu through these drops, freed from their hate may we obtain

अध्याय २०

श्लोक 25.5

य॒ज्ञैरथ॑र्वा प्रथ॒मः प॒थस्त॑ते॒ ततः॒ सूर्यो॑ व्रत॒पा वे॒न आज॑नि ।आ गा आ॑जदु॒शना॑ का॒व्यः सचा॑ य॒मस्य॑ जा॒तम॒मृतं॑ यजामहे

yajñairatharvā prathamaḥ pathastate tataḥ sūryo vratapā vena ājani | ā gā ājaduśanā kāvyaḥ sacā yamasya jātamamṛtaṃ yajāmahe

हिन्दी अर्थ

वाणिर्यो वारा सत्यज्ञान का भ्रेरक है । ४५६ . , भरथवंवेद-माष्य का० २०।सू० २३ है परमेश्वर ! (बद्िषि भधि) हृदयाकार मे भापकी ( भ्ररुषीः )

English

abundant food. Let us obtain, O Indra, plenteous wealth and food, with strength exceeding glorious, shining

अध्याय २०

श्लोक 25.6

ब॒र्हिर्वा॒ यत् स्व॑प॒त्याय॑ वृ॒ज्यते॒ऽर्को वा॒ श्लोक॑मा॒घोष॑ते दि॒वि।ग्रावा॒ यत्र॒ वद॑ति का॒रुरु॒क्थ्य॑१स्तस्येदिन्द्रो॑ अभिपि॒त्वेषु॑ रण्यति

barhirvā yat svapatyāya vṛjyate'rko vā ślokamāghoṣate divi| grāvā yatra vadati kārurukthya1stasyedindro abhipitveṣu raṇyati

हिन्दी अर्थ

(नवामहे) हम आपकी -सतुतियां करते ह । स्तुतियां करनेवाले उपासको ने .(मघु) मधुर, (भ्राशिरम्) तथा परिपक्व ,. भक्तिरसरूपी-दुग्ध को (दहे) दोहन किया है । (यत्) जिस भक्तिरस को

English

to the sky. May we obtain the Goddess Providence, the strength of heroes, special source of cattle, rich

अध्याय २०

श्लोक 25.7

प्रोग्रां पी॒तिं वृष्ण॑ इयर्मि स॒त्यां प्र॒यै सु॒तस्य॑ हर्यश्व॒ तुभ्य॑म्।इन्द्र॒ धेना॑भिरि॒ह मा॑दयस्व धी॒भिर्विश्वा॑भिः॒ शच्या॑ गृणा॒नः

progrāṃ pītiṃ vṛṣṇa iyarmi satyāṃ prayai sutasya haryaśva tubhyam| indra dhenābhiriha mādayasva dhībhirviśvābhiḥ śacyā gṛṇānaḥ

हिन्दी अर्थ

है । (सीम्) श्रौर जो भक्तिरस उपासको के जीवन में फल गयां है 1: उपासक की भोर भ्राद्ये, -( सोमपीतये ) मेरे मक्तिक्तरस के पान के ४ । याहि) प्रवृत्त हृजिये । द्विः भ्रः (निरद० काशा )1 १३७; घो. होता न ऋत्विय त्तिसिरे बहिरानुषक् ।

English

in steeds. These our libations, strength inspiring Soma draughts, gladdened thee in the fight with Vritra,

अध्याय २०

श्लोक 26.1

योगे॑योगे त॒वस्त॑रं॒ वाजे॑वाजे हवामहे ।सखा॑य॒ इन्द्र॑मू॒तये॑

yogeyoge tavastaraṃ vājevāje havāmahe | sakhāya indramūtaye

हिन्दी अर्थ

का० २० सु० २३ अथ्ववेद-माष्य ५ नेः (भ्रातः) प्रातःकाल की उपासना मे (भयुखन्) योगविधि द्वारा भापको भरपने साथ योगयुक्त कर लिया है । रौर उन्होने ( बर्हिः ) हृदयासनों को -. -मुके मी यह उपासनाकाल प्राप्त हृभ्रा है, भौर मै. ( सत्तः ) उपासना में स्थित होकर ( होता न ) होता-ऋत्विकं के सदुश आपका आह्वान कर भ्रापकं समक्न है, इसे भ्राप (वीहि) स्वीकार कोजिये ।

English

Hero-Lord, What time thou slewest for the singer with trimmed grass ten thousand Vritras, thou resistless

अध्याय २०

श्लोक 26.2

आ घा॑ गम॒द् यदि॒ श्रव॑त् सह॒स्रिणी॑भिरू॒तिभिः॑ ।वाजे॑भि॒रुप॑ नो॒ हव॑म्

ā ghā gamad yadi śravat sahasriṇībhirūtibhiḥ | vājebhirupa no havam

हिन्दी अर्थ

या भाप प्रसन्न हजिये, या हमे योग-साधना मे सिद्ध कोजिये । ( मातरः ) माताए' ( सोमपाम् वत्सं न ) जसे दुग्धपायी बच्चे के साथ (रिहन्ति) स्नेह करती है. वसे (मतयः) भननरील उपासक (उरम्) भर्थात् दोही गई गौमों सेसोमक्षरितहृभाहं।

English

in thy might. Thou goest on from fight to fight intrepidly, destroying castle after castle here with strength;

अध्याय २०

श्लोक 26.3

अनु॑ प्र॒त्नस्यौक॑सो हु॒वे तु॑विप्र॒तिं नर॑म्।यं ते॒ पूर्वं॑ पि॒ता हु॒वे

anu pratnasyaukaso huve tuvipratiṃ naram| yaṃ te pūrvaṃ pitā huve

हिन्दी अर्थ

१४१. स मन्द॑खा बन्स राध॑से तन्वा रद। न स्तोतारं निदे करः ॥६॥ हे परमेदवर ! (सः) वे भाप (अन्धसः)-मक्तिरसरूपी भन्न रस को .. (इन्दर) है परमेदवर ! (वयम्) हम उपासक (त्वायवः) आपको चाहते है, इसलिये (हविष्मन्तः) भक्तिरस की हवियां लिये हम (जरामहे)

English

Thou Indra, with thy friend who makes the foe bow down, slewest from far away the guileful Namuchi.

अध्याय २०

श्लोक 26.4

यु॒ञ्जन्ति॑ ब्र॒ध्नम॑रु॒षं चर॑न्तं॒ परि॑ त॒स्थुषः॑ ।रोच॑न्ते रोच॒ना दि॒वि

yuñjanti bradhnamaruṣaṃ carantaṃ pari tasthuṣaḥ | rocante rocanā divi

हिन्दी अर्थ

न हमे (वि मूमुचः). छोड़ दीजिये । (हरिगप्रिय) हि भनोहारी भक्तिरस के (घृतस्नू) तथा. जल के सदृश्च प्रवाहरूप में बहते हुए हमारे भक्तिरसो को को० २८। सुर २४ . प्रथववेद-माष्य ५६

English

Thou hast stuck down in death Karanja, Parnaya, in Atithigva’s very glorious going forth: Unyielding, when Rijisvan compassed them with siege, thou hast destroyed the hundred

अध्याय २०

श्लोक 26.5

यु॒ञ्जन्त्य॑स्य॒ काम्या॒ हरी॒ विप॑क्षसा॒ रथे॑ ।शोणा॑ धृ॒ष्णू नृ॒वाह॑सा

yuñjantyasya kāmyā harī vipakṣasā rathe | śoṇā dhṛṣṇū nṛvāhasā

हिन्दी अर्थ

.-भोर ( वहताम्) प्रेरित करं । ताकि भ्राप ( बहिः ) हमारे. हृदयासनों पर . के (उप) समीप (रा गहि) भ्राद्ये । (यः) जो भक्तिरस कि ते केवल भ्रापके भरषनुौ लं । गवाशिरस्तू्गौः वाक् (निव ०१।११) बु पके धुं

English

towns of Vangrida. With all-outstripping chariot wheel, O Indra, thou far-famed, hast overthrown the twice ten

अध्याय २०

श्लोक 26.6

के॒तुं कृ॒ण्वन्न॑के॒तवे॒ पेशो॑ मर्या अपे॒शसे॑ ।समु॒षद्भि॑रजायथाः

ketuṃ kṛṇvannaketave peśo maryā apeśase | samuṣadbhirajāyathāḥ

हिन्दी अर्थ

भ्रा गहि-=गम् घ्रातु का भयं “गति"।. भौर. गति के तीन भरथं पद द्वारा "रक्त का वणन हरां ह । यथा,- किसने इस पुरुष में शरीरव्यापी (रापः) जल स्थापित क्ये,

English

kings of men, With sixty thousand nine-and-ninety followers, who came in arms to fight with friendless

अध्याय २०

श्लोक 27.1

यदि॑न्द्रा॒हं यथा॒ त्वमीशी॑य॒ वस्व॒ एक॒ इत्।स्तो॒ता मे॒ गोष॑खा स्यात्

yadindrāhaṃ yathā tvamīśīya vasva eka it| stotā me goṣakhā syāt

हिन्दी अर्थ

कि विविध रूपोवाले, राशि मेँ प्रभूत है भौर हदंय-सिन्धु भे सरण करते है, ६० भथवेवेद-माष्य का०२० । सु० २४ जो स्वाद मेँ नमकीनः; तथा रंग मे धूसर लाल । तथा ताम्बे के धूए जसे नीले । जो पुरुष में ऊपर-नीचे तथा आर-पार की नाडयो में प्रवाहित हो

English

Susravas. Thou hast protected Susravas with succour, and Tūrvayāna with thine aid, O Indra:

अध्याय २०

श्लोक 27.2

शिक्षे॑यमस्मै॒ दित्से॑यं॒ शची॑पते मनी॒षिणे॑ ।यद॒हं गोप॑तिः॒ स्याम्

śikṣeyamasmai ditseyaṃ śacīpate manīṣiṇe | yadahaṃ gopatiḥ syām

हिन्दी अर्थ

रहे है । भ्रावभिं ग्रावाणः गृणातेर्वा (निर० ९।१।६)। भ्रयवा बहिषि = . । (इत्था) वस्तुतः (इतः) इस मेरे हृदय से इषिताः ) निकली हई, भक्तिरस के पान के लिये (भ्रावृते) परमेदवर का मेरी भोर भ्रावतंन करर

English

Thou madest Kutsa, Atithigva, Ayu subject unto this king, the young, the mighty. May we protected by the Gods hereafter remain thy very pro- sperous friends, O Indra.

अध्याय २०

श्लोक 27.3

धे॒नुष्ट॑ इन्द्र सू॒नृता॒ यज॑मानाय सुन्व॒ते।गामश्वं॑ पि॒प्युषी॑ दुहे

dhenuṣṭa indra sūnṛtā yajamānāya sunvate| gāmaśvaṃ pipyuṣī duhe

हिन्दी अर्थ

भूकाव कर । इत्था सत्यम् (निघ ० ३।१०)। (सोमस्य) भक्तिरस के (पीतये) स्वीकार करने के लिये (स्तोमैः) सामगानों द्वारा, तथा (उक्थेभिः) वं दिक सूक्तं की स्तुतियों दारा (इह) इस ।

English

Thee we extol, enjoying through thy favour life-long and joyful and with store of heroes. Hero, the Soma being pressed I pour the juice for thee to drink

अध्याय २०

श्लोक 27.4

न ते॑ व॒र्तास्ति॒ राध॑स॒ इन्द्र॑ दे॒वो न मर्त्यः॑ ।यद् दित्स॑सि स्तु॒तो म॒घम्

na te vartāsti rādhasa indra devo na martyaḥ |yad ditsasi stuto magham

हिन्दी अर्थ

हदय मे (इन्द्र हवामहे) हम परमेदवर का ्राह्वुन करते र्हं । इस विधि से परमेवर (कुविद्) बार-बार (भ्रागमत्) -हमे द्ंन देता है । (इन्द्र) है परमेरवर ! (इमे) ये ( सोमाः ) भक्तिरस ( सुताः ) (दधिष्व ) आप अपने मेँ वारण कीजिये, जे कि बुंमु्षितं व्यक्ति अन्न को (जठरे) अपने पेट मं धारण करता है ।

English

Sate thee and finish thy carouse. Let not the fools, or those who mock, beguile thee when they seek thine aid:

अध्याय २०

श्लोक 27.5

य॒ज्ञ इन्द्र॑मवर्धय॒द् यद् भूमिं॒ व्यव॑र्तयत्।च॒क्रा॒ण ओ॑प॒शं दि॒वि

yajña indramavardhayad yad bhūmiṃ vyavartayat| cakrāṇa opaśaṃ divi

हिन्दी अर्थ

(कवे)हे वेदकारो के कवि ! (हि विसमा तवा) हः्ञापको निद्बय- : का० २० । सूु०.२४ . भ्रथर्ववेद-माष्य ६१. पर विजय पाई हुई ह. ओरं (वाजेषु ) देवासुर-संग्रामों मे (दघुषम्) भाप आसुरी भावनाभ्रों का धषंण करनेवाले हैँ (भधा ) इसलिये (सुम्नम्) राप से सुख की, तथां आपकी प्रसन्नता की (ईमहे) हम प्राथनाए करते है ।

English

Love not the enemies of prayer. Here let them with rich milky draught cheer thee to great munificence:

अध्याय २०

श्लोक 27.6

वा॒वृ॒धा॒नस्य॑ ते व॒यं विश्वा॒ धना॑नि जि॒ग्युषः॑ ।ऊ॒तिमि॒न्द्रा वृ॑णीमहे

vāvṛdhānasya te vayaṃ viśvā dhanāni jigyuṣaḥ | ūtimindrā vṛṇīmahe

हिन्दी अर्थ

१९१. . इमर्िनद्र गकारं यवां्िरं .च नः पिब । (इन्द्र) है परमेदवर 1 .( वृषभिः ) भक्तिरसो की वर्षा करनेवाले ्राकर हमारे तय्यार किये ( गवारिरम् ) पकाए हए गोदुग्ध का, तथा (यवाशिरम्) पकारई जौ की.लप्सी का पान करता ह

English

Drink as the wild bull drinks the lake. Praise, even as he is known, with song Indra, the guardian of the kine,

अध्याय २०

श्लोक 28.1

व्य॑१न्तरि॑क्षमतिर॒न्मदे॒ सोम॑स्य रोच॒ना।इन्द्रो॒ यदभि॑नद् व॒लम्

vya1ntarikṣamatiranmade somasya rocanā| indro yadabhinad valam

हिन्दी अर्थ

श्मोकेये ) भरपने हृदय-गृह में (सोमं) मक्तिरसं को (चोदामि) प्रेरितं करता हं, (पीतये) ताकि भ्राप इते स्वीकार करे । ( हृदि ) मेरे हृदय में स्थित - (एषः) यह भक्तिरस (ते). भापके - लिये ( रारन्तु ) प्रस्नतादायक हो । . (इन्द्र). है परमेदवर ! ( कुशिकासः ) भक्ति भौर योग के विषयों

English

The Son of Truth, Lord of the brave. Hither his bay steeds have been sent, red steeds are on the sacred grass.

अध्याय २०

श्लोक 28.2

उद् गा आ॑ज॒दङ्गि॑रोभ्य आ॒विष्कृ॒ण्वन् गुहा॑ स॒तीः ।अ॒र्वाञ्चं॑ नुनुदे व॒लम्

ud gā ājadaṅgirobhya āviṣkṛṇvan guhā satīḥ | arvāñcaṃ nunude valam

हिन्दी अर्थ

राप पुराण पुरुष का (हवामहे) आह्वान करते है । ६२ भरयवंवेद-भाष्य . काऽ २० । सु०.२५ रक्षा पाता है." (तम् इत् ) -उसे ही भप (भवीयसा) प्रभूत (वसुना ) वेदिक

English

Where we in concert sing our songs. For Indra, Thunder-armed, the kine have yielded mingled milk and meath,

अध्याय २०

श्लोक 28.3

इन्द्रे॑ण रोच॒ना दि॒वो दृ॒ल्हानि॑ दृंहि॒तानि॑ च ।स्थि॒राणि॒ न प॑रा॒णुदे॑

indreṇa rocanā divo dṛlhāni dṛṃhitāni ca | sthirāṇi na parāṇude

हिन्दी अर्थ

जसे कि (अभितः) समुद्र के.चारों ओर बहनेवाली (. विचेतसः ) अचेतन (आपः) नदियां (सिन्वुम्) समुद्र को जलो से पालित तथा पूरित करती ह 1. (ऋ० १।१६४।२) पर निरुक्तकार कहते हँ किं - 'एकोऽदवो बहति सप्त- अरिप्रता (==पाप-शुन्यता) की भ्रावश्यकता, होती है । यथा "यदेषां शेषठं यदरिप्रमासीत्प्रेणा तदेषां निहितं गुहाविः (ऋ० १०।७१।१)। इसी प्रकार वैदिकं ज्ञानरस का स्थिर रूप से प्रानं करते रहना, तथा वेदं का सतत स्वा- घ्यायये भी कारण ह वेदो के रहस्याथोँ कै ज्ञान मे (ऋ° १०।७१।५; ६)। . गोषु गौः वाक् (वेदवाणी, निष० १।११)।

English

What time he found them in the vault. Invoked to drink the Soma juice come with thy bay steeds,

अध्याय २०

श्लोक 28.4

अ॒पामू॒र्मिर्मद॑न्निव॒ स्तोम॑ इन्द्राजिरायते ।वि ते॒ मदा॑ अराजिषुः

apāmūrmirmadanniva stoma indrājirāyate | vi te madā arājiṣuḥ

हिन्दी अर्थ

(जापः न) जलो के-सदृश विषयुद्ध प्रौरःपवित्र. करनेवाली (देवीः) स्पष्टतया देखते है 1. ( यथा ). जैसे कि सवंसाधारण जन ( विततं रजः ) का०.२० सुऽ २५ भ्रथववेद-भाष्य ६३

English

Thunder-armed! Come, Indra, hitherward, to me.

अध्याय २०

श्लोक 29.1

त्वं हि स्तो॑म॒वर्ध॑न॒ इन्द्रास्यु॑क्थ॒वर्ध॑नः ।स्तो॒तॄ॒णामु॒त भ॑द्र॒कृत्

tvaṃ hi stomavardhana indrāsyukthavardhanaḥ | stotṝṇāmuta bhadrakṛt

हिन्दी अर्थ

भगे-भ्रागे बदुने के उपायो द्वारा (देवासः) योगाचायं देव रणयन्त) योगमागं (जोषयन्ते) भरौर उसकी मार्ग-प्रदर्शंन इरा सेवा करते ह । (इव) जसे कि .. (बराः) नव-विवाहित पुरुष नव-विवाहित श्रपनी पलनियो के साथ प्रणय. (या मिथुना ) जो - पति-पत्नी ( यतस्.चा ) यज्ञिय-लूच् पकड़ कर भर हुतियों हारा (सपयंतः) परमेदवरं की परिचर्या. करते है, (दयोः षधि)

English

Our priest is seated true to time; the grass is regularly strewn; The pressing-stones were set at morn.

अध्याय २०

श्लोक 29.2

इन्द्र॒मित् के॒शिना॒ हरी॑ सोम॒पेया॑य वक्षतः ।उप॑ य॒ज्ञं सु॒राध॑सम्

indramit keśinā harī somapeyāya vakṣataḥ | upa yajñaṃ surādhasam

हिन्दी अर्थ

हारा भापकी स्तुतियां करने लग जाते हैँ । है परमेदवर !. ( ते आपके क्षीण होता जाता ह 1. भौर जो ते) भापके दर्शाए (ब्रते) व्रतो मे (शक्तिः) शक्ति .्राप्त होती है ।. वि सुच् = यज्ञ का चमचा, जिस के दारां भ्रग्नि मेँ घुताहृति दी जाती

English

These prayers, O thou who bearest prayer, are offered. Seat thee on the grass. Hero, enjoy the offered cake.

अध्याय २०

श्लोक 29.3

अ॒पां फेने॑न॒ नमु॑चेः॒ शिर॑ इ॒न्द्रोद॑वर्तयः ।विश्वा॒ यदज॑य॒ स्पृधः॑

apāṃ phenena namuceḥ śira indrodavartayaḥ | viśvā yadajaya spṛdhaḥ

हिन्दी अर्थ

६४ भरथववेद-माष्य . का० २० सु० २५ (त° उप० ३।१०।६), - परमेदवर कहता है कि “म भरन्त हु, भ्रौर मे भन्नाद प्रथमं वयः=-भरंथवा वे सर्वेश्वष्ठ जीवन को धारण करते हैँ ।

English

O Vritra-slayer, be thou pleased with these libations, with these hymns, Song-loving Indra, with our lauds.

अध्याय २०

श्लोक 29.4

मा॒याभि॑रु॒त्सिसृ॑प्सत॒ इन्द्र॒ द्यामा॒रुरु॑क्षतः ।अव॒ दस्यूं॑रधूनुथाः

māyābhirutsisṛpsata indra dyāmārurukṣataḥ | ava dasyūṃradhūnuthāḥ

हिन्दी अर्थ

१५८. युहैरथर्वा प्रथमः पथस्तते ततः रया तुषा वेन आज॑नि। आ गा आजदुशना काव्यः सचा यमखं जातमसते यजामहे ॥ ५॥ बर्णाश्चमि्यों के जीवन-मागोँ का ( तंते ) विस्तारसे वर्णेन किया । भौर एतद्थं (उशना). प्रजा के सुख भ्रौर कल्याण की कामनावाले परमेहवर ने (सचा) एक साथ (गाः) वेदवाणि्यो को ( रा ) पू्ण॑र्प से ( भाजत् ) (अमृतम्) भरमृतस्वरूप का (यजामहे ) हम यजन करते है, उस स्वरूप के साथ हम प्रपना.संग करते है ।

English

Our hymns caress the Lord of Strength, vast, drinker of the Soma’s juice,

अध्याय २०

श्लोक 29.5

अ॒सु॒न्वामि॑न्द्र सं॒सदं॒ विषू॑चीं॒ व्यनाशयः ।सो॒म॒पा उत्त॑रो॒ भव॑न्

asunvāmindra saṃsadaṃ viṣūcīṃ vyanāśayaḥ | somapā uttaro bhavan

हिन्दी अर्थ

ह । (ब्रतपाः) भग्नं वायु सूयं तथा ग्रह भादि अपने-अपने नियत कर्मो मेः सदा स्थित रहते है, भरतः ये व्रतपति है, व्रतपा है । उदनाः वष्टि कामयते का०२०। सू० २६ भथववंवेद-भाष्य ६५ (दिवि) चुलोक मे (भरकः) सूयं, जिस परमेदवर की श्लोकम्) कीत्ति

English

Indra, as mother-cows their calf. Delight thee with the juice we pour for thine own great munificence:

अध्याय २०

श्लोक 30.1

प्र ते॑ म॒हे वि॒दथे॑ शंसिषं॒ हरी॒ प्र ते॑ वन्वे व॒नुषो॑ हर्य॒तं मद॑म्।घृ॒तं न यो हरि॑भि॒श्चारु॒ सेच॑त॒ आ त्वा॑ विशन्तु॒ हरि॑वर्पसं॒ गिरः॑

pra te mahe vidathe śaṃsiṣaṃ harī pra te vanve vanuṣo haryataṃ madam| ghṛtaṃ na yo haribhiścāru secata ā tvā viśantu harivarpasaṃ giraḥ

हिन्दी अर्थ

स्तुत्ियां करता, रौर (वंदत्ति) मानो परमेरवर के साथ संवाद करने लगता भरन्नो में (अमि रण्यति) भ्रभिरमण करने लगता है। (निर०.६।१।६) । कारः स्तोता (निघ० ३।१६) । पित्वेषु पितु = न्न्

English

Yield not thy singer to reproach. We, Indra, dearly loving thee, bearing oblation, sing thee hymns:

अध्याय २०

श्लोक 30.2

हरिं॒ हि योनि॑म॒भि ये स॒मस्व॑रन् हि॒न्वन्तो॒ हरी॑ दि॒व्यं यथा॒ सदः॑ ।आ यं पृ॒णन्ति॒ हरि॑भि॒र्न धे॒नव॒ इन्द्रा॑य शू॒षं हरि॑वन्तमर्चत

hariṃ hi yonimabhi ye samasvaran hinvanto harī divyaṃ yathā sadaḥ | ā yaṃ pṛṇanti haribhirna dhenava indrāya śūṣaṃ harivantamarcata

हिन्दी अर्थ

दवर ! (घेनाभिः) भानन्दरसरूपी दुग्ध पिलानेवाली वेदवाणियों द्वारा (दह) इस जीवन मे (मादयस्व) मुभे तृप्त कर दीजिये । मै उपासक तथा (राच्या) वाणी द्वारा (गृणानः) भाप की स्तुतियां कर रहा हं । उग्रां पीतिम् --5॥०00 ५९ तीव्रसंवेगी भक्तिरस का पान ।

English

Thou, Vasu, nearly lovest us. O thou to whom thy Bays are dear, loose not thy horses far from us:

अध्याय २०

श्लोक 30.3

सो अ॑स्य॒ वज्रो॒ हरि॑तो॒ य आ॑य॒सो हरि॒र्निका॑मो॒ हरि॒रा गभ॑स्त्योः ।द्यु॒म्नी सु॑शि॒प्रो हरि॑मन्युसायक॒ इन्द्रे॒ नि रू॒पा हरि॑ता मिमिक्षिरे

so asya vajro harito ya āyaso harirnikāmo harirā gabhastyoḥ | dyumnī suśipro harimanyusāyaka indre ni rūpā haritā mimikṣire

हिन्दी अर्थ

६६ शरयवेवेद-माष्य का० २०। सू० २६ (सखायः) है योगाभ्यास के साथियो ¡ (ऊतये) आत्मरक्षां (योगे- बाले (इन्द्रम्) परभेदवर का (हवामहे) हम आह्वान करते । .

English

Here glad thee, Indra, Lord Divine. May long-maned courses, dropping oil, bring thee on swift car hitherward.

अध्याय २०

श्लोक 30.4

दि॒वि न के॒तुरधि॑ धायि हर्य॒तो वि॒व्यच॒द् वज्रो॒ हरि॑तो॒ न रंह्या॑ ।तु॒ददहिं हरि॑शिप्रो॒ य आ॑य॒सः स॒हस्र॑शोका अभवद्धरिंभ॒रः

divi na keturadhi dhāyi haryato vivyacad vajro harito na raṃhyā | tudadahiṃ hariśipro ya āyasaḥ sahasraśokā abhavaddhariṃbharaḥ

हिन्दी अर्थ

(यदि श्ववत्) यदि परमेदवर हमारी भ्राथनाभ को स्वीकार कर लेता है, तो वहं (घ) निश्चय से (सहस्िणीभिः ऊतिभिः) हजारों प्रकार के रक्षा-साघनों के साथ, तथा (वाजेभिः) हजारों प्रकार केः बलों समेत के नेता परभेख्वर को (प्रत्नस्य) पुराकाल से माने हुए (ओकसः) (हुवे) तेरी सहायता के लिये बुलाता हूं । (यम्) जिस परमेदवर का कि (ते पिता). तेरे पिता मैने (पूवम्) पहले भरपने जीवन में (हुवे). आह्वान क्र लिया है, प्रत्यक्ष कर लिया है ।

English

Indra, to seat thee on the grass. Come to the juice that we have pressed, to Soma, Indra! blent with milk:

अध्याय २०

श्लोक 30.5

त्वंत्व॑महर्यथा॒ उप॑स्तुतः॒ पूर्वे॑भिरिन्द्र हरिकेश॒ यज्व॑भिः ।त्वं ह॑र्यसि॒ तव॒ विश्व॑मु॒क्थ्य॑१मसा॑मि॒ राधो॑ हरिजात हर्य॒तम्

tvaṃtvamaharyathā upastutaḥ pūrvebhirindra harikeśa yajvabhiḥ | tvaṃ haryasi tava viśvamukthya1masāmi rādho harijāta haryatam

हिन्दी अर्थ

मागं पर भरूढ् हुभरां है, तेरी सफलता.के लिये वँ परमेश्वर की सहायता की प्राना करता हूं । निल्वय जान किं तुभे परमेश्वर की सहायता मिलेगी-। क्योंकि मैने भरपने जीवन में इसका. अनुभव कर लिया है खूपचद़ा देता है । वेक्षः रूपम् (निष ० . ३।७)।

English

Come, favouring us, thy bay-drawn car! Come, Indra, to this gladdening drink, placed on the grass, pressed out with stones:

अध्याय २०

श्लोक 31.1

ता व॒ज्रिणं॑ म॒न्दिनं॒ स्तोम्यं॒ मद॒ इन्द्रं॒ रथे॑ वहतो हर्य॒ता हरी॑ ।पु॒रूण्य॑स्मै॒ सव॑नानि॒ हर्य॑त॒ इन्द्रा॑य॒ सोमा॒ हर॑यो दधन्विरे

tā vajriṇaṃ mandinaṃ stomyaṃ mada indraṃ rathe vahato haryatā harī | purūṇyasmai savanāni haryata indrāya somā harayo dadhanvire

हिन्दी अर्थ

का०२०॥ सु° २७ अथरवैवेद-भाष्य ६५ . है । इसी परमेदवर के प्रकाश से (दिवि). द्युलोक मे (रोचना) चमकते नदहव्-तारागण (रोचन्ते). च्रमक रहे है । तथा इसी परमेश्वर की रचिकर

English

Wilt thou not drink thy fill thereof? To Indra have my songs of praise gone forth, thus rapidly sent hence,

अध्याय २०

श्लोक 31.2

अरं कामा॑य॒ हर॑यो दधन्विरे स्थि॒राय॑ हिन्व॒न् हर॑यो॒ हरी॑ तु॒रा।अर्व॑द्भि॒र्यो हरि॑भि॒र्जोष॒मीय॑ते॒ सो अ॑स्य॒ कामं॒ हरि॑वन्तमानशे

araṃ kāmāya harayo dadhanvire sthirāya hinvan harayo harī turā| arvadbhiryo haribhirjoṣamīyate so asya kāmaṃ harivantamānaśe

हिन्दी अर्थ

१६९. युञन्त्यस्य काम्या इरी विधसा रथै । . (काम्या =काम्यौ योग-सांघना के लिये चाही गई, (हरी) चित्त को विषयों से हर लेनेवाली, (विपक्षसा) सुषुम्णा-नाड़ौ क अलग-अलग दो पावो मे लगी हृद, (शोणा) भरे भ्रौर पीले से रगो वाली, (धृष्णू)

English

To turn him to the Soma-draught. Hither with songs of praise we call Indra to drink the Soma. juice:

अध्याय २०

श्लोक 31.3

हरि॑श्मशारु॒र्हरि॑केश आय॒सस्तु॑र॒स्पेये॒ यो ह॑रि॒पा अव॑र्धत ।अर्व॑द्भि॒र्यो हरि॑भिर्वा॒जिनी॑वसु॒रति॒ विश्वा॑ दुरि॒ता पारि॑ष॒द्धरी॑

hariśmaśārurharikeśa āyasasturaspeye yo haripā avardhata | arvadbhiryo haribhirvājinīvasurati viśvā duritā pāriṣaddharī

हिन्दी अर्थ

मजब्ूत,. (नृवाहसा) योगिजनों को उनके . उदेश्य तक. पूहुंवानेवाली इडा भ्रौर पिङ्गला नाडयो को भस्य ) इस परमेदवर के (रथे) रमणीय १६६. केतं ुग्बंकेतेे पेश मयां असं । समुषद्भिरजायथाः ॥६॥ (इन्र) है परमेदवर ! (यथा) जैसे (त्वम् ) भाप (एक इत ) भकेले ही (वस्वः) वैदिक ज्ञान-सम्पत्ति कै (ईशीय) भधीदवर है, वसे.

English

Will he not come to us by lauds? Indra, these Somas are expressed, Take them within thy belly,

अध्याय २०

श्लोक 31.4

स्रुवे॑व॒ यस्य॒ हरि॑णी विपे॒ततुः॒ शिप्रे॒ वाजा॑य॒ हरि॑णी॒ दवि॑ध्वतः ।प्र यत् कृ॒ते च॑म॒से मर्मृ॑ज॒द्धरी॑ पी॒त्वा मद॑स्य हर्य॒तस्यान्ध॑सः

sruveva yasya hariṇī vipetatuḥ śipre vājāya hariṇī davidhvataḥ | pra yat kṛte camase marmṛjaddharī pītvā madasya haryatasyāndhasaḥ

हिन्दी अर्थ

६८ भ्रथर्वेवेद-भाष्य का० २० । सु° २७ ग्रभीदवर बन जाऊं, तो (मे) मेरा (स्तोता) शिष्य (गोषखा) वेदव्राणी ज्ञाता हो जाता । उपासक परमेदवर से शिकायत करता है किर्गीभ्रापका स्तोता हृं, परन्तु भ्राप" की कृषा भ्रभी तक नहीं हुई कि मँ मी. वेदवाणी ररहस्या्थो को जान पाता । १६८. धिक्षैयमस्मे दित्सेयं शचीपते मनीषिणं ।

English

Lord Of Hundred Powers, thou Prince of wealth. We know thee winner of the spoil and resolute in battles, Sage!

अध्याय २०

श्लोक 31.5

उ॒त स्म॒ सद्म॑ हर्य॒तस्य॑ प॒स्त्यो॒३रत्यो॒ न वाजं॒ हरि॑वां अचिक्रदत्।म॒ही चि॒द्धि धि॒षणाह॑र्य॒दोज॑सा बृ॒हद् वयो॑ दधिषे हर्य॒तश्चि॒दा

uta sma sadma haryatasya pastyo3ratyo na vājaṃ harivāṃ acikradat| mahī ciddhi dhiṣaṇāharyadojasā bṛhad vayo dadhiṣe haryataścidā

हिन्दी अर्थ

(शचीपते) है प्रज्ञा भरौर वेदवाणियों के पति ! (यद्) जो (्रहम्) मै (गोपतिः) वदवाणियोँ का आौर समग्र पुथिवी का पति (स्याम्) पाथिव-सम्पत्तियो का दान भी करू । उपासक वेदज्ञान भौर पाथिव सम्पत्ति, इन दोनों का पति होना चाहता है । इसीलिये उसे “मन्त २ के अनुसार वेदवाणी कै

English

Therefore thy blessing we implore. Borne hither by thy stallions, drink, Indra, this juice which we have pressed,

अध्याय २०

श्लोक 32.1

आ रोद॑सी॒ हर्य॑माणो महि॒त्वा नव्यं॑नव्यं हर्यसि॒ मन्म॒ नु प्रि॒यम्।प्र प॒स्त्यमसुर हर्य॒तं गोरा॒विष्कृ॑धि॒ हर॑ये॒ सूर्या॑य

ā rodasī haryamāṇo mahitvā navyaṃnavyaṃ haryasi manma nu priyam| pra pastyamasura haryataṃ gorāviṣkṛdhi haraye sūryāya

हिन्दी अर्थ

गर्धा रखता है, भौर वैदिक रहस्यार्थोँ की भी । इसलिये वह . भ्रसफल है । मो वाक् वेदवाणी (निघ० १।११) ; तथा पृथिवी (निष० १।१)१. (सूनृता) प्रिय तथां सत्यरूपा (षेनुः) वेदवाणी (सुन्वते) भक्तिरसवाले भ्रौर अरव का ज्ञान (दुहे) प्रदान करती है। ।

English

Mingled with barley and with milk. Indra, for thee in thine own place I urge the Soma for thy draught:

अध्याय २०

श्लोक 32.2

आ त्वा॑ ह॒र्यन्तं॑ प्र॒युजो॒ जना॑नां॒ रथे॑ वहन्तु॒ हरि॑शिप्रमिन्द्र ।पिबा॒ यथा॒ प्रति॑भृतस्य॒ मध्वो॒ हर्य॑न् य॒ज्ञं स॑ध॒मादे॒ दशो॑णिम्

ā tvā haryantaṃ prayujo janānāṃ rathe vahantu hariśipramindra | pibā yathā pratibhṛtasya madhvo haryan yajñaṃ sadhamāde daśoṇim

हिन्दी अर्थ

किरणः, वच , चन्द्रमा, भूमिः, वाणी जलं बा(उणा० कोष २।६७) वं दिक पुस्तकालय, भरजमेर । अरव = इन्द्रियां, मन, सूयं, बहि, भ्रषव, पशु, वीयं भ्रादि । वेदवाणी इन सब विष्यो का ज्ञान प्रदान करतीदहै।+ १७०. नते वर्ताि राध॑स इन्दं देवो न मत्यः । 1क० २० । सु०.२८ ग्थवंवेद-मोष्य । । ६९.

English

Deep in thy heart let it remain. We call on thee, the Ancient One, Indra, to drink the Soma juice,

अध्याय २०

श्लोक 32.3

अपाः॒ पूर्वे॑षां हरिवः सु॒ताना॒मथो॑ इ॒दं सव॑नं॒ केव॑लं ते ।म॒म॒द्धि सोमं॒ मधु॑मन्तमिन्द्र स॒त्रा वृ॑षं ज॒ठर॒ आ वृ॑षस्व

apāḥ pūrveṣāṃ harivaḥ sutānāmatho idaṃ savanaṃ kevalaṃ te | mamaddhi somaṃ madhumantamindra satrā vṛṣaṃ jaṭhara ā vṛṣasva

हिन्दी अर्थ

जो धन (दित्ससि). देना चाहते ह, उस (ते). भाप के (राधसः) धन मेँ (वर्ता) खकावट डालनेवाला (न देवः स्ति) न कोरर देव है, भ्रौर (न मत्यः) न कोई मनुष्य । वर्ता = निवारणकर््ता.। (भ्रोपशम्) सौरमण्डले के शिरोभूषणरूप सूयं को (दिवि) द्युलोक (चक्राणः ) भरकट करते हए प रमेदवंर ने (यद्, जो (भ्रमिम्) भूमि को

English

We Kusikas who seek thine aid. Indra, the mortal man well guarded by thine aid goes foremost in the wealth of horses and of

अध्याय २०

श्लोक 33.1

अ॒प्सु धू॒तस्य॑ हरिवः॒ पिबे॒ह नृभिः॑ सु॒तस्य॑ ज॒ठरं॑ पृणस्व ।मि॒मि॒क्षुर्यमद्र॑य इन्द्र॒ तुभ्यं॒ तेभि॑र्वर्धस्व॒ मद॑मुक्थवाहः

apsu dhūtasya harivaḥ pibeha nṛbhiḥ sutasya jaṭharaṃ pṛṇasva | mimikṣuryamadraya indra tubhyaṃ tebhirvardhasva madamukthavāhaḥ

हिन्दी अर्थ

, (न्द्र) है प रमेदवर ! (वावृधानस्य) संसार की वुद्धि करते हृए, तथां (विद्वा धनानि) संसारके सभी प्रकार के धनों पर (जिग्युषः) विजय पाए हृए (ते) भापके (वयम्) हेम उपासक, भ्राप से ( ऊतिम्) सुरक्षा का (भ्रावृणीमहे) वर मागतेर्है। . । विशेषरूपे फलाया है । भौर (रोचना) -चुलोक के चमकते सूरयं-नक्षत्र- तारागणं को विविधरूप में फलाया है । तथा (सोमस्य मदे) भक्तिरस

English

kine. With amplest wealth thou fillest him, as round about the waters clearly seen afar fill Sindhu

अध्याय २०

श्लोक 33.2

प्रोग्रां पी॒तिं वृष्ण॑ इयर्मि स॒त्यां प्र॒यै सु॒तस्य॑ हर्यश्व॒ तुभ्य॑म्।इन्द्र॒ धेना॑भिरि॒ह मा॑दयस्व धी॒भिर्विश्वा॑भिः॒ शच्या॑ गृणा॒नः

progrāṃ pītiṃ vṛṣṇa iyarmi satyāṃ prayai sutasya haryaśva tubhyam| indra dhenābhiriha mādayasva dhībhirviśvābhiḥ śacyā gṛṇānaḥ

हिन्दी अर्थ

७० . , ' भ्रथर्वंवेद-माष्य का० २० सू०.२८ अङ्किरोभ्यः) प्राणायाम के भभ्यासियों के लिये प रमेदवर ने (गाः) हदय की गुफा में छिपी हई ज्ञान की किरणों को (भराविष्छृण्वन्) प रभेदवर ने भ्राविष्कृत कर दिया है, प्रकट कर दिया है । भौर ज्ञान-किरणो पर पड़

English

full. The heavenly waters come not nigh the priestly bowl: they but look down and see how far

अध्याय २०

श्लोक 33.3

ऊ॒ती श॑चीव॒स्तव॑ वी॒र्येण॒ वयो॒ दधा॑ना उ॒शिज॑ ऋत॒ज्ञाः ।प्र॒जाव॑दिन्द्र॒ मनु॑षो दुरो॒णे त॒स्थुर्गृ॒णन्तः॑ सध॒माद्या॑सः

ūtī śacīvastava vīryeṇa vayo dadhānā uśija ṛtajñāḥ | prajāvadindra manuṣo duroṇe tasthurgṛṇantaḥ sadhamādyāsaḥ

हिन्दी अर्थ

मानो (भर्वाव्चं नुनुदे) नीचे पटक दिया है । भर्जिरसः=प्राणादि- (सोयण)। प्राणायाम के परिपक्क हौ जाने पर चित्त पर पड़ा भावरण क्षीण हो जाता है । य॒थाः- “ततः क्षीयते प्रकाशावरणम् (योग०.२।५२)। हृईः (न रोचना) दृढ़ दीप्तियों को (दृ"हितानि) ओर सुदृढ कर दिया हैः. (स्थिराणि) इन्हं स्थिर कर दिया है ! (न पराणुदे) गब थे दीप्तियां हटाई नहीं जा सकतीं । ६ १

English

mid-air is spread: The Deities conduct the pious man to them: like suitors they delight in him who loveth

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Atharva Veda — Chapter 20
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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