Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
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अध्याय 20 / 20

Kanda 20

काण्ड 20

975 श्लोकभाग 6/6 · श्लोक 139.1–143.9WhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ30 श्लोक

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अध्याय २०

श्लोक 139.1

आ नू॒नम॑श्विना यु॒वं व॒त्सस्य॑ गन्त॒मव॑से ।प्रास्मै॑ यच्छतमवृ॒कं पृ॒थु च्छ॒र्दिर्यु॑यु॒तं या अरा॑तयः

ā nūnamaśvinā yuvaṃ vatsasya gantamavase | prāsmai yacchatamavṛkaṃ pṛthu cchardiryuyutaṃ yā arātayaḥ

हिन्दी अर्थ

भरदिवयो ! हमने (वाणीभिः) निजवाणियो द्वारा तुमे तुम्हारे करव्यो का का० २० प° १४० अथर्ववेद-माष्य ३६९ दवारा ्रासित प्रजावगं को (बोघतम्) तुम दोनों जता दिया करो । , (भष्िना)हे भषवियो! (वाम्) तुम दोनों के लिये(कक्षीवान्“ऋषिः')

English

To help and favour Vatsa now, O Asvins, come ye hitherward. Bestow on him a dwelling spacious and secure, and keep malig- nites afar.

अध्याय २०

श्लोक 139.2

यद॒न्तरि॑क्षे॒ यद्दि॒वि यत्पञ्च॒ मानु॑षाँ॒ अनु॑ ।नृ॒म्णं तद्ध॑त्तमश्विना

yadantarikṣe yaddivi yatpañca mānuṣā~ anu | nṛmṇaṃ taddhattamaśvinā

हिन्दी अर्थ

जो-जो कुछ ( जुहाव राष्टू-यज्ञ में भपनी-भपनी आहृतियां दी है; तथा वाम् ) तुम दोनों के लिये, ( दीघंतमाः “ऋषिः” ) दीर्घतमा ऋषि ने ( जुहाव ) राष्टू-यज्ञ मेँ भरनी ( यद् ) जो भाहृतियां दी दहै, ्रौर (स्वे सादने) बैठने के भरपने-भरपने मन्त्रालय मे, (पृथी, वैन्यः) . पृथी-ऋषि भ्रौर किय। है, (चेतयेथाम्) उस सब को तुम भपने चित्तो में धारण करो । ऋषि-कोटि.क होने चाहिए । भौर ऋषियों द्वारा दिये गये परामशे, राष्ट

English

All manliness that is in heaven, with the Five Tribes, or in mid- air, Bestow, ye Asvins, upon us. Remember Kārnva first of all among the singers,, Asvins, who

अध्याय २०

श्लोक 139.3

ये वां॒ दंसां॑स्यश्विना॒ विप्रा॑सः परिमामृ॒शुः ।ए॒वेत्का॒ण्वस्य॑ बोधतम्

ye vāṃ daṃsāṃsyaśvinā viprāsaḥ parimāmṛśuḥ | evetkāṇvasya bodhatam

हिन्दी अर्थ

भावना द्वारा होना चाहिए, भ्राथिक लाभ तंथा पदाधिकार कीं लालसा से नहीं होना. चाहिए । मन्त मँ कक्षीवान् भादि सभी ऋषिनार्मो कै साथ भज्रूषि"” पद का अन्वय समना चाहिए । इसी प्रकार “स्वे सादने का को जानकर, तदनुसार उपायों का भवलम्बन. करनेवाला मन्त्री (तमाः = अन्य भन्तरी ऋषि-कोटि के होने चाहिए । २७० मथरववेद-भाष्य - का० २०। सु° १४१

English

Have thought upon your wondrous deeds. Asvins, for you with song of praise this hot oblation is effused,

अध्याय २०

श्लोक 139.4

अ॒यं वां॑ घ॒र्मो अ॑श्विना॒ स्तोमे॑न॒ परि॑ षिच्यते ।अ॒यं सोमो॒ मधु॑मान्वाजिनीवसू॒ येन॑ वृ॒त्रं चिके॑तथः

ayaṃ vāṃ gharmo aśvinā stomena pari ṣicyate | ayaṃ somo madhumānvājinīvasū yena vṛtraṃ ciketathaḥ

हिन्दी अर्थ

बतिस्तोकाय तन॑याय यातम् ॥१॥ वि (-छ्दिष्पा)हे हमारे गृहो की रक्षा करनेवाले, (उत) तथा (नः) हमारी हरीरों की रक्षा करनेवाले . (भतम्) होभो । भापं (तोकाय) हमारे पत्रो .व्यवहार भौरं रोजी भादि के साधन है, (यातम्) इसलिये भ्राप प्रजाजनों मे भाया-जायो कीजिये 1 - तम् == भवतम् । वतिः साषनदरष्यम् (उणादि कोष .४।१४२)

English

This your sweet Soma juice, ye Lords of wealth and spoil, through which ye think upon the foe. Whatever ye have done in floods, in the tree, Wonder-workers, and in growing plants,

अध्याय २०

श्लोक 139.5

यद॒प्सु यद्वन॒स्पतौ॒ यदोष॑धीषु पुरुदंससा कृ॒तम्।तेन॑ माविष्टमश्विना

yadapsu yadvanaspatau yadoṣadhīṣu purudaṃsasā kṛtam| tena māviṣṭamaśvinā

हिन्दी अर्थ

पतियो (भष्विना) दे दोनों भदिवयो ! नागरिक प्रजा तथा सेना के भधि- बैठकर (याथः) भ्रनाजनों के निरीक्षण के लिये जाते हो, (थद् वा) श्रथवा . वायुना) वायुयानों के भध्यक्ष के साथ (समोकसा समोकसौ ) अन्तरिक्षः कोटि के विद्रानों, तथां (ऋमुभिः) राष्ट्र के कारीगसों के साथ (सजोषसा)

English

Therewith, O Asvins, succour me. Continuation of the preceding hymn to the Asvins

अध्याय २०

श्लोक 140.1

यन्ना॑सत्या भुर॒ण्यथो॒ यद्वा॑ देव भिष॒ज्यथः॑ ।अ॒यं वां॑ व॒त्सो म॒तिभि॒र्न वि॑न्धते ह॒विष्म॑न्तं॒ हि गच्छ॑थः

yannāsatyā bhuraṇyatho yadvā deva bhiṣajyathaḥ | ayaṃ vāṃ vatso matibhirna vindhate haviṣmantaṃ hi gacchathaḥ

हिन्दी अर्थ

मिन्नकर उनके साथ प्रेमपदशंन तथा उनकी सेवाएः करते हो, ( यद् वा) होकर (तिष्ठथः). भरकर बैठते हो, ८१३७) वायुना = वायुाब्द दवारा वायुयानों का भरष्यक्ष लक्षित है । भरथवा-- वायु कै.साथ तुम दोनों एक भन्तरिक्च भ गति करते हो । वागु भन्तरिश्ष

English

What force, Nāsatyas, ye exert, whatever, Gods, ye tend and heal, This your own Vatsa gains not by his hymns alone: ye visit him who offers gifts. Now hath the Rishi splendidly thought out the Asvins’ hymn of praise.

अध्याय २०

श्लोक 140.2

आ नू॒नम॒श्विनो॒र्ऋषि॒ स्तोमं॑ चिकेत वा॒मया॑ ।आ सोमं॒ मधु॑मत्तमं घ॒र्मं सि॑ञ्चा॒दथ॑र्वणि

ā nūnamaśvinorṛṣi stomaṃ ciketa vāmayā | ā somaṃ madhumattamaṃ gharmaṃ siñcādatharvaṇi

हिन्दी अर्थ

का० २०1 सु १४१ । भथरवेवेद-माष्य ३७१ मे वास. करती है, दोनों भदवी भी वायुयानों द्वारां अन्तरिश्च भे गति करते . बाहुलकात्); ॥1०४७० (आपटे) । ऋभुभिः=शिल्पिमिः। यथा “ऋष् स (सह) +जुष् (प्रीनिसेवनयोः ) 1 विष्णुः == यज्ञः (निष० २।१७) ।

English

Let the Atharvan pour the warm oblation forth, and Soma very rich in sweets. Ye Asvins, now ascend your car that lightly rolls upon its way.

अध्याय २०

श्लोक 140.3

आ नू॒नं र॒घुव॑र्तनिं॒ रथं॑ तिष्ठाथो अश्विना ।आ वां॒ स्तोमा॑ इ॒मे मम॒ नभो॒ न चु॑च्यवीरत

ā nūnaṃ raghuvartaniṃ rathaṃ tiṣṭhātho aśvinā | ā vāṃ stomā ime mama nabho na cucyavīrata

हिन्दी अर्थ

९४१. यदद्याधिना वहं हुवेय वाल॑घातये । . ॑ (भषिवना) है नागरिक-प्रजा, तथा सेना के भ्रधिपतियो ! तुम दोनों कै लिये, (हवे) बूलाता हं" . निमन्त्रित करता हूं, यह् कहने के लिये (यद्) कि (रदिवनोः) तुम दोनों ्रषवियों का (भवः) राष्टर-संरक्षण (तत्) एेषा

English

May these my praises make you speed hitherward like a cloud of heaven. When, O Nāsatyas, we this day make you speed hither N ith our hymns, Or, Asvins, with our songs of praise, remember Kānva specially.

अध्याय २०

श्लोक 140.4

यद॒द्य वां॑ नासत्यो॒क्थैरा॑चुच्युवी॒महि॑ ।यद्वा॒ वाणी॑भिरश्विने॒वेत्क॒ण्वस्य॑ बोधतम्

yadadya vāṃ nāsatyokthairācucyuvīmahi | yadvā vāṇībhiraśvinevetkaṇvasya bodhatam

हिन्दी अर्थ

करने का बल श्रेष्ठ तथा प्रशंसनीय होता है।. . ए (अदिवना) है अवयो ! ( आ यातम् ) आप दोनों राष्ट्र के रासन (इमे) ये ( सोमासः एेदवयं हैः वे भी ( वाम् ) आप दोनों के भ्रधि) . श्रधिकार मे सुरक्षाथं समर्पित है। ह ३७२ भयवंवेद-माष्य का०२०। सु° १४२

English

As erst Kakshivān and the Rishi Vyasva, as erst Dirghatamas invoked your presence, Or, in the sacrificial chambers, Vainya Prithī, so be ye mindful of us here, O Asvins.

अध्याय २०

श्लोक 140.5

यद्वां॑ क॒क्षीवां॑ उ॒त यद्व्य॑श्व॒ ऋषि॒र्यद्वां॑ दी॒र्घत॑मा जु॒हाव॑ ।पृथी॒ यद्वां॑ वै॒न्यः साद॑नेष्वे॒वेदतो॑ अश्विना चेतयेथाम्

yadvāṃ kakṣīvāṃ uta yadvyaśva ṛṣiryadvāṃ dīrghatamā juhāva | pṛthī yadvāṃ vainyaḥ sādaneṣvevedato aśvinā cetayethām

हिन्दी अर्थ

भदिवयो (पराके) दूर प्रदेश मेँ तथा (अवकि) समोप प्रदेश पे ‹ यत् ) (छदिः) गृहो का भी (यच्छतम्) प्रबन्ध किया करो । । उपदेशानुसार, ( साकम् श्रदिवनोः ) साथ-साथ. दोनों दिवो को उनके

English

Hymn to the Asvins Come as home-guardians, saving us from foemen, guarding our living creatures and our bodies,

अध्याय २०

श्लोक 141.1

या॒तं छ॑र्दि॒ष्पा उ॒त नः॑ पर॒स्पा भू॒तं ज॑ग॒त्पा उ॒त न॑स्तनू॒पा।व॒र्तिस्तो॒काय॒ तन॑याय यातम्

yātaṃ chardiṣpā uta naḥ paraspā bhūtaṃ jagatpā uta nastanūpā| vartistokāya tanayāya yātam

हिन्दी अर्थ

दानरूप मँ कर लेना है, तथा प्रत्युषकार मे जो उन्होने प्रजावगं को-देनां है उसे भी (वि श्रावः) ने विशेषतया प्रकट कर दिया । ९४५. प्र ब्ौषयोषो अश्विना प्र देवि धतत महि । प्र यहोतरानुषङ् प्र मदाय भवो बृहत् ॥२॥ (उषः) है उषा ! तू समय पर (अन्विना ) भरिवर्यो को जगा दिया कर । (देवि सुनते). है प्रिय तथा सत्य मौर दिव्य (महि) महावेदवाणी ।. (बोधय) तु दिव्यो को प्रातःकाल म बोधं प्रदान किया कर (यज्ञहोतः) सावधानः किया कर. तथा ( मदाय ) उनकी रौर राष्ट कौ प्रसन्नता के

English

Come to the house to give us seed and offspring: Whatever with Indra ye be faring, Asvins, or resting in one dwelling-place with Vāyu,

अध्याय २०

श्लोक 141.2

यदिन्द्रे॑ण स॒रथं॑ या॒थो अ॑श्विना॒ यद्वा॑ वा॒युना॒ भव॑थः॒ समो॑कसा ।यदा॑दि॒त्येभि॑रृ॒भुभिः॑ स॒जोष॑सा॒ यद्वा॒ विष्णो॑र्वि॒क्रम॑णेषु॒ तिष्ठ॑थः

yadindreṇa sarathaṃ yātho aśvinā yadvā vāyunā bhavathaḥ samokasā | yadādityebhirṛbhubhiḥ sajoṣasā yadvā viṣṇorvikramaṇeṣu tiṣṭhathaḥ

हिन्दी अर्थ

श्रदिवयों को उषाकाल के समय निद्रासे स्वयं जाग कर, वेदवाणी चाद्ये, ओर होता दवारा वेदोपदेशों का प्रभूत-श्रवण करते रहना चाहिए । (उवः) है उषाः! तू (सूर्येण) सूयं के.कारण.( सम् रोचसे ) तिं रोचक ू7 चारण करती £ । (यद्) जब तू (मनुना) भ्रपनी भमा के साय

English

In concord with the Ribhus or Ādityas, or standing still in Vishnu’s striding-places. When 1, O Asvins, call on you to-day that I may gather strength,

अध्याय २०

श्लोक 141.3

यद॒द्याश्विना॑व॒हं हु॒वेय॒ वाज॑सातये ।यत्पृ॒त्सु तु॒र्वणे॒ सन॒स्तच्छ्रेष्ठ॑म॒श्विनो॒रवः॑

yadadyāśvināvahaṃ huveya vājasātaye | yatpṛtsu turvaṇe sanastacchreṣṭhamaśvinoravaḥ

हिन्दी अर्थ

को लकय करके, (ह) निंर से, (अिवनोः) दोनों भरदिवरयो का (अयम् धन्धे (याति) चलने लगते हैँ । . . दिवना)हे नागरिक प्रजाधिपति, तथा है सेनाधिपति! तुम् दान» जिसे किं (गावः दृह) गौए" देती रह (ऊचभिः) भ्रपने थनं दारा; (यद् वा) तथा जब (देवयन्तः) परमेश्वर देव के भ्रभिलाषी प्रजाजन ( वाणीः ) वेद-

English

Or as all-conquering might in war, be that the Asvins’ noblest grace. Now come, ye Asvins, hitherward: here are oblations set for you;

अध्याय २०

श्लोक 141.4

आ नू॒नं या॑तमश्विने॒मा ह॒व्यानि॑ वां हि॒ता।इ॒मे सोमा॑सो॒ अधि॑ तु॒र्वशे॒ यदा॑वि॒मे कण्वे॑षु वा॒मथ॑

ā nūnaṃ yātamaśvinemā havyāni vāṃ hitā| ime somāso adhi turvaśe yadāvime kaṇveṣu vāmatha

हिन्दी अर्थ

३७४ । भ्रथवंवेद-भाष्य का? २० । सु० १४३ कर्मों कं अनुसार, (यद् वा) तथा (सुम्नेभिः) प्रजाजनों को सुख पृहंाने की भावनाओं न भनुसार, (पितुः) परमपिता परमेश्वर कं (योनौ) सहासन

English

These Soma draughts to aid Yadu and Turvasa, these offered you mid Kanva’s sons. Whatever healing balm is yours, Nāsatyas near or far away, Therewith, great Sages, grant a home to Vatsa and to Vimāda.

अध्याय २०

श्लोक 141.5

यन्ना॑सत्या परा॒के अ॑र्वा॒के अस्ति॑ भेष॒जम्।तेन॑ नू॒नं वि॑म॒दाय॑ प्रचेतसा छ॒र्दिर्व॒त्साय॑ यच्छतम्

yannāsatyā parāke arvāke asti bheṣajam| tena nūnaṃ vimadāya pracetasā chardirvatsāya yacchatam

हिन्दी अर्थ

. -बलम् (निघ ० २।९) 1. दक्षाय = दक्ष गतिव॑दघोः । धीभिः धीः कर्मनाम -.१-७ पुख्मीहः तथा अजमील्हः; ८ वामदेवः; ९ मेध्यातिथिः तथा (अर्वन) नागरिक प्रजा, तथा सेना के भरधिपतियो ! (वाम्)भाप -नागरिक तथा संनिक (हुवेम). माह्वान करते है, जो रथ कि (पृथुखयम्) महावेग तथां काघाभों का पराभव करनेवाला है, तथा जिसमे (गोः) प्रकाशं

English

Hymn to Dawn and the Asvins Together with the Goddess, with the Asvins’ Speech have I awoke.

अध्याय २०

श्लोक 142.1

अभु॑त्स्यु॒ प्र दे॒व्या सा॒कं वा॒चाहम॒श्विनोः॑ ।व्या॑वर्दे॒व्या म॒तिं वि रा॒तिं मर्त्ये॑भ्यः

abhutsyu pra devyā sākaṃ vācāhamaśvinoḥ | vyāvardevyā matiṃ vi rātiṃ martyebhyaḥ

हिन्दी अर्थ

तुम्हारी पत्नियों का तुम्हारे साथ वहन करता है, ( बन्धुरायुः ) रथ के भ्रधिपतिर्यो के . निदेशानुसार चलाय जाता है, ( पुरूतमम् ) सुख-सामग्री से वेद मे““ऋभमु"" कहा है । यथा- “ऋभु रथस्येवाद्धानि सं दधत् परषा पयः त ( भरथवं० ४।१२।७ । रथम् = “रथ मेँ एकवचन.है । सम्भवतः दोनों भ्रधिपतियों को निदश्च दिया गया है किं वे दोनों एक-रथ मेँ जाकर प्रजा का निरीक्षण मिलकर किया करं ।

English

Thou, Goddess, hast disclosed the hymn and holy gift from mortal men. Awake the Asvins, Goddess Dawn! Up, mighty Lady of Sweet Strains!

अध्याय २०

श्लोक 142.2

प्र बो॑धयोषो अ॒श्विना॒ प्र दे॑वि सूनृते महि ।प्र य॑ज्ञहोतरानु॒षक्प्र मदा॑य॒ श्रवो॑ बृ॒हत्

pra bodhayoṣo aśvinā pra devi sūnṛte mahi | pra yajñahotarānuṣakpra madāya śravo bṛhat

हिन्दी अर्थ

९५१. युं धिव॑म्िना देवता तां दिवो नपाता बनथः शचीभिः । युबोवेपुरभि पृष: सचन्ते वहन्ति यत् ककुदामो रथं बाम्॥२।। (भ्रर्विना) है भ्रदिवयो ! , (नपाता) है राष्ट को पतन से बचाने- वालो ! (युवम्) तुम दोनों, (देवता तां देवताता देवतातौ). देवतासदृशच (युवोः) तुम दोनों के (वपुः) शरीरो पर (पृक्षः) मानपदक (भ्रमि सचन्ते) लगे रहते है (यत्) जब कि (ककुहासः) महानिपुण रथ-संचालक (वाम्) तुम दोनो को (रथे) रथ मे (वहन्ति) ले जाति है ।

English

Rise straightway, priest of sacrifice! High glory to the glad- dening draught!

अध्याय २०

श्लोक 142.3

यदु॑षो॒ यासि॑ भा॒नुना॒ सं सूर्ये॑ण रोचसे ।आ हा॒यम॒श्विनो॒ रथो॑ व॒र्तिर्या॑ति नृ॒पाय्य॑म्

yaduṣo yāsi bhānunā saṃ sūryeṇa rocase | ā hāyamaśvino ratho vartiryāti nṛpāyyam

हिन्दी अर्थ

दिवः श्रियम् = द्युलोक की शोभा द्लोक मं जड़ सितारों दारा होती है । इसी प्रकार की शोभा मानपदकों दारा अदिवियों की होती है । कक्हाः= ९५२. को वामद्या करते रातहव्य ऊतय वा सुतपेयाय बाकैः । (म्रदिवना) है भरहिवयो (कः). कौन एेसा व्यक्ति है.जो कि ऊतये

English

Thou, Dawn, approaching with thy light, shinest together with the Sun, And to this man-protecting home the chariot of the Asvins comes. When yellow stalks give forth the juice as cows from udders pour their milk,

अध्याय २०

श्लोक 142.4

यदापी॑तासो अं॒शवो॒ गावो॒ न दु॒ह्र ऊध॑भिः ।यद्वा॒ वाणी॒रनु॑षत॒ प्र दे॑व॒यन्तो॑ अ॒श्विना॑

yadāpītāso aṃśavo gāvo na duhra ūdhabhiḥ | yadvā vāṇīranuṣata pra devayanto aśvinā

हिन्दी अर्थ

राष्टू-यज्ञ में आहृतिरूप मे देता है.?. (वा) तथा ( कः कौन वह व्यक्ति है, जोकि ( सुतपेयाय भ्रापको अन्न रस पिलाने के लिये ( भकः ) भरनो भरभिलाषा.के निमित्त, कौन सदा (भ्रा करते) यत्न करता है ? । तथा ध (अर्विना) है अदिवियो ! (नमः) अन्न यमानः) दान करत हरभरा (कवतत् धमं के नियमों में वतंमान रहता है ? 4 म ३७६ भ्रयववेद-माष्य का०.२० ।सू ५४३ श्रुतानि” ( निर० ५।१।४ ) । उनुषे= वन् याचने-+ उ . ( तनादि + से

English

And voices sound the song of praise, the Asvins’ worshippers show first. Forward for glory and for strength, protection that shall con- quer men,

अध्याय २०

श्लोक 142.5

प्र द्यु॒म्नाय॒ प्र शव॑से॒ प्र नृ॒षाह्या॑य॒ शर्म॑णे ।प्र दक्षा॑य प्रचेतसा

pra dyumnāya pra śavase pra nṛṣāhyāya śarmaṇe | pra dakṣāya pracetasā

हिन्दी अर्थ

सुवणं कीसी चमकवलि (पुरश रथेन) सर्वत्र भ्रा-जा सक्नेवाले रथ के ठार, या मघूर दुग्धरस का (पित्राथ) प्रान किया कीजिये, तथा विधते जनाय) राष्टू-सेवक भरजाजनः लिये (रत्नम्) विविध रतन (दधथः). प्रदान किया कीजिये । .. पुरुभू पुरत्र भवतीति । विधते; विधेम परिचरणकर्मा , हि.भ्रदिवयो ! (हिरण्ययेन) सुवं कीसी चमकवाले, . ( सुवृता )

English

And power and skill, most sapient Ones! When, Asvins worthy of our lauds, ye seat you in the father’s house. With wisdom or the bliss ye bring.

अध्याय २०

श्लोक 142.6

यन्नू॒नं धी॒भिर॑श्विना पि॒तुर्योना॑ नि॒षीद॑थः ।यद्वा॑ सु॒म्नेभि॑रुक्थ्या

yannūnaṃ dhībhiraśvinā pituryonā niṣīdathaḥ | yadvā sumnebhirukthyā

हिन्दी अर्थ

भाप दौनी को, (मा नियमन्) मध्य मोर्गमेन रोके, (-यत् ); वरयोकि -सम्बन्ध भ्राप दोनौको ( संददे ) प्रेम के कारण बांध सकता, रोक सकता है । भ्रभ्ये--जस स्थान जाने का वचन आपने पिते पे दे रा है, उस स्थान में श्राप समय पर पटुचिये + प्रापक मार्गं में रहनेवाले अनथ "कै कारण .सम्मावित हो जाता है । नाभिः नह बन्धने । संददे = संदानम् .( दस्ता परदिवना ) कष्टों क्रा निवारण करनेवाले है . भरष्वयो ! (

English

Hymn to the Asvins We invocate this day your car, far-spreading, O Asvins, even the gathering of the sunlight,

अध्याय २०

श्लोक 143.1

तं वां॒ रथं॑ व॒यम॒द्या हु॑वेम पृथु॒ज्रय॑मश्विना॒ संग॑तिं॒ गोः ।यः सू॒र्यां वह॑ति वन्धुरा॒युर्गिर्वा॑हसं पुरु॒तमं॑ वसू॒युम्

taṃ vāṃ rathaṃ vayamadyā huvema pṛthujrayamaśvinā saṃgatiṃ goḥ | yaḥ sūryāṃ vahati vandhurāyurgirvāhasaṃ purutamaṃ vasūyum

हिन्दी अर्थ

को मिलते रहते है, भौर ( सधस्तुतिम् ) स्तुतियो के साथ ( वाम् ) भाप ९९द. इदे यदू वा सम॒ना पपे सेयम॒स्मे संमतिष रत्ना । इदुष्यतं जरितारं युष ईं चितः कमे नासत्या यद्वि ॥७॥

English

Car praised in hymns, most ample, rich in treasure, fitted with seats, the car that beareth Sūryā. Asvins, ye gained that glory by your Godhead, ye Sons of

अध्याय २०

श्लोक 143.2

यु॒वं श्रिय॑मश्विना दे॒वता॒ तां दिवो॑ नपाता वनथः॒ शची॑भिः ।यु॒वोर्वपु॑र॒भि पृक्षः॑ सचन्ते॒ वह॑न्ति॒ यत्क॑कु॒हासो॒ रथे॑ वाम्

yuvaṃ śriyamaśvinā devatā tāṃ divo napātā vanathaḥ śacībhiḥ | yuvorvapurabhi pṛkṣaḥ sacante vahanti yatkakuhāso rathe vām

हिन्दी अर्थ

लो (वाम्) है भरदिवयो । तुम दोनो की (समना) मानो एक मन होकर सुनिश्चित (सुमतिः) सुमति है, ( सा.) वह सुमति ( अस्मे पपृक्षे ) हम. प्रजाजनो को दीजिये, . उसीके साथ हमारा.संपकं रहे । (दयम्). यहं सुमति ( वाजरत्ना ) हमे. भन्न .बल तथा नानाविध रत्न प्रदान करती. है। (म्) हु दनो (वरस्) भाप अज्र पजान की (उतम) , रक्षा करो । (नासत्या ) असत्य ष्यवहारों से रहित है अदिवयो ! (कामः) ३७८ भरथर्ववेदं-माष्य का०र२ ०। सु° १४३

English

Heaven, by your own might and power. Food followeth close upon your bright appearing when stately horses in your chariot draw

अध्याय २०

श्लोक 143.3

को वा॑म॒द्या क॑रते रा॒तह॑व्य ऊ॒तये॑ वा सुत॒पेया॑य वा॒र्कैः ।ऋ॒तस्य॑ वा व॒नुषे॑ पू॒र्व्याय॒ नमो॑ येमा॒नो अ॑श्वि॒ना व॑वर्तत्

ko vāmadyā karate rātahavya ūtaye vā sutapeyāya vārkaiḥ | ṛtasya vā vanuṣe pūrvyāya namo yemāno aśvinā vavartat

हिन्दी अर्थ

मवतु ) मधुर तथा सुखदायी हो । ( क्षत्रस्य पतिः ) कृषि का स्वामी प्रनाजन दुःखों गौर कष्टों की मार से हिसितं-न होते हए ( एनम्) इस (भ्रदिविना) है भरदिवथो ! (वाम्) आप दोनों का (कृतम् ) किया

English

you. Who bringeth you to-day for help with offered oblations, or with hymns to drink the juices? Who, for the sacrifice’s ancient lover, turneth you hither, Asvins, offering homage?

अध्याय २०

श्लोक 143.4

हि॒र॒ण्यये॑न पुरुभू॒ रथे॑ने॒मं य॒ज्ञं ना॑स॒त्योप॑ यातम्।पिबा॑थ॒ इन्मधु॑नः सो॒म्यस्य॒ दध॑थो॒ रत्नं॑ विध॒ते जना॑य

hiraṇyayena purubhū rathenemaṃ yajñaṃ nāsatyopa yātam| pibātha inmadhunaḥ somyasya dadhatho ratnaṃ vidhate janāya

हिन्दी अर्थ

लोक से (वृषः) सुखो की वर्षा करता है । (उत) त॒था (शंसा शंसौ) उन सव के समीप, (इत्) अव्य (यातः = आ यात्) भया करो + १३९ से १४३ सूक्तं मे अशिवो का वर्णन हृभरा है । भाधिभौतिक होते ह, भर्थात् ©।५॥ 980 तथा 1111 -1680 । निरक्तमे "अर्विनौ"

English

Borne on your golden car, ye omnipresent! come to this sacrifice of ours, Nāsatyas. Drink of the pleasant liquor of the Soma: give riches to the people who adore you.

अध्याय २०

श्लोक 143.5

आ नो॑ यातं दि॒वो अच्छा॑ पृथि॒व्या हि॑र॒ण्यये॑न सु॒वृता॒ रथे॑न ।मा वा॑म॒न्ये नि य॑मन्देव॒यन्तः॒ सं यद्द॒दे नाभिः॑ पू॒र्व्या वा॑म्

ā no yātaṃ divo acchā pṛthivyā hiraṇyayena suvṛtā rathena | mā vāmanye ni yamandevayantaḥ saṃ yaddade nābhiḥ pūrvyā vām

हिन्दी अर्थ

(निरु° १२।१।१)। यद्यपि यह मत पेतिहासिकों का दर्शाया है, परन्तु इन भी इतिहास का सम्बन्ध प्रतीत नहीं हुभ्रा । “द्विराजे पद मे“"दो-राजा“ इन अर्थो मेँ समन्वय भी है । राष्ट मेँ इतने

English

Come hitherward to us from earth, from heaven, borne on your golden chariot rolling lightly. Suffer not other worshippers to stay you: here are ye bound by earlier bonds of friendship. Now for us both, mete out, O Wonder-Workers, riches exceed- ing great with store of heroes,

अध्याय २०

श्लोक 143.6

नू नो॑ र॒यिं पु॑रु॒वीरं॑ बृ॒हन्तं॒ दस्रा॒ मिमा॑थामु॒भये॑ष्व॒स्मे।नरो॒ यद्वा॑मश्विना॒ स्तोम॒माव॑न्त्स॒धस्तु॑तिमाजमी॒ल्हासो॑ अग्मन्

nū no rayiṃ puruvīraṃ bṛhantaṃ dasrā mimāthāmubhayeṣvasme| naro yadvāmaśvinā stomamāvantsadhastutimājamīlhāso agman

हिन्दी अर्थ

ऊश्च पवो का-भौर तदनुसांरी मान भ्रौर सत्कार का मिलना, पुण्यकमो का ही तो फल है । इसी प्रकार ऋग्वेद ७।३९।२ भे"विरपतीव” इस द्विवचम् के. का० २० । सु° १४३ भथववेद-भाष्य ३७९ किया यग्रा है । निरुक्त ५।४।२७ मे“विदपतीव "का भथं किया है“सर्वंपतीव राजानौ" । स्वपति का भभिप्राय है--राष्टर मँ रहनेवाले सभी प्रजावगोँ के दो राजा” ।. “विदाः” पद सभी प्रजावगं के -लिये प्रयुक्त होता है।

English

Because the men have sent you praise, O Asvins, and Ajamīlhas come to the laudation. Whene’er I gratified you here together, your grace was given us,

अध्याय २०

श्लोक 143.7

इ॒हेह॒ यद्वां॑ सम॒ना प॑पृ॒क्षे सेयम॒स्मे सु॑म॒तिर्वा॑जरत्ना ।उ॒रु॒ष्यतं॑ जरि॒तारं॑ यु॒वं ह॑ श्रि॒तः कामो॑ नासत्या युव॒द्रिक्

iheha yadvāṃ samanā papṛkṣe seyamasme sumatirvājaratnā | uruṣyataṃ jaritāraṃ yuvaṃ ha śritaḥ kāmo nāsatyā yuvadrik

हिन्दी अर्थ

ऋषि-कोटि का कटौ है, भौर ्रिवनौ" को नासत्यौ कह कर इन दोनों कौ नतिक जीवन परं प्रकाश डाला है कि ये दोनों “असत्य व्यवहा से रहित” किया करे । दमु प्रकार सात्विक अधिकारियों द्वारा, सातिवक प्रजा पर किया गया शासन आदं शासन है । नवम अनुवाक समाप्त ॥ भी पण्डित विश्वनाथ विच्ालंकार विधामाततेण्ड कत भरयववेद के बीते काण्ड का!

English

O ye rich in booty. Protect, ye twain, the singer of your praises: to you, Nāsatyas, is my wish directed. Sweet be the plants for us, the heavens, the waters, and full of sweets for us be air’s mid region!

अध्याय २०

श्लोक 143.8

मधु॑मती॒रोष॑धी॒र्द्याव॒ आपो॒ मधु॑मन्नो भवत्व॒न्तरि॑क्षम्।क्षेत्र॑स्य॒ पति॒र्मधु॑मान्नो अ॒स्त्वरि॑ष्यन्तो॒ अन्वे॑नं चरेम

madhumatīroṣadhīrdyāva āpo madhumanno bhavatvantarikṣam| kṣetrasya patirmadhumānno astvariṣyanto anvenaṃ carema

हिन्दी अर्थ

२. ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका-सं"-युण्मी" १००.००. संस्कृत टीका सहित । १५०.०० ६. ऋग्वेद की ऋक्सख्या-युन्मीः नि ५.०० ७. ऋ्वेदपरिचय-पंः विश्वनाथ २५.०० ८. यजुर्वेदभाष्य-विवरण-प्रथमभाग ३००.००,.द्वितीयभाग २००.०० ९. माध्यन्दिनिपदपाठः (यनुर्वेद-पदपाठ) + = १००.०० ४-५ काण्ड ७५.००, ६ काण्ड ७५.१०, ७-८ काण्ड ७८.००, ९-१०. काण्ड ७५.००,११-१३. काण्डः ७५.००, १४- ७७ काण्ड ७५.००, १८-१९ काण्ड ७५ 99, -२9. काण्ड १००.०० ॥

English

May the Field’s Lord for us be full of sweetness, and may we follow after him uninjured. Asvins, that work of yours deserves our wonder, the Bull of firmament and earth and heaven;

अध्याय २०

श्लोक 143.9

प॒नाय्यं॒ तद॑श्विना कृ॒तं वां॑ वृष॒भो दि॒वो रज॑सः पृथि॒व्याः ।स॒हस्रं॒ शंसा॑ उ॒त ये गवि॑ष्टौ॒ सर्वाँ॒ इत्ताँ उप॑ याता॒ पिब॑ध्यै

panāyyaṃ tadaśvinā kṛtaṃ vāṃ vṛṣabho divo rajasaḥ pṛthivyāḥ | sahasraṃ śaṃsā uta ye gaviṣṭau sarvā~ ittā~ upa yātā pibadhyai

हिन्दी अर्थ

१४. अथर्ववेदीया बृहत्सर्वानुक्रमणिका- भूमिका तथा ॥ि - गुजरांवाला मँ तथा बाद में स्नातक (सन् १९१४) तक गुरुकुल कांगड़ी मे। अध्यापन- सन् १९१४ में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय मेँ पद् पर नियुक्त तथा सन् १९४२ मेँ वँ से सेवामुक्त हृए। अनुसन्धान- सन् १९२२-२४ मेँ परोपकारिणी सभा अजमेर मे। सन् रहने के कारण आपको ४ स्वर्णपदक ओर एक रजतपदक प्राप्त हुआ। : निधन- १०३ वर्षं की आयु मे ११ मार्च सन् १९९१।

English

Yes, and your thousand promises in battle. Come near to all these men and drink beside us. THE END 316

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Atharva Veda — Chapter 20
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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