Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
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अध्याय 6 / 20

Kanda 6

काण्ड 6

453 श्लोकभाग 2/3 · श्लोक 48.1–96.3WhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ151 श्लोक

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अध्याय ६

श्लोक 48.1

स्वस्तिवाचनम्।१-३ अङ्गिराः, प्रचेताः।१ श्येनः, २ ऋभुः, ३ वृषा।उष्णिक्।श्ये॒नोऽसि गाय॒त्रच्छन्दा॒ अनु॒ त्वा र॑भे ।स्व॒स्ति मा॒ सं व॑हा॒स्य य॒ज्ञस्यो॒दृचि॒ स्वाहा॑

svastivācanam| 1-3 aṅgirāḥ, pracetāḥ| 1 śyenaḥ, 2 ṛbhuḥ, 3 vṛṣā| uṣṇik| śyeno'si gāyatracchandā anu tvā rabhe | svasti mā saṃ vahāsya yajñasyodṛci svāhā

हिन्दी अर्थ

(है) है (तदं) हिसक ! (है) है (पतङ्ख)पतङ्खं के सदश शोध्रगतिक ! (जभ्य) हस्य ! (हा -है। है (उपक्वस -उप + कु अस) ओ ! लगभग कुत्सित गति अर्थात् चाल वाले आखु ! चूटै (हविः)हवि को (अनदन्तः) न खाते हृए (इमान् यवान्) इन जौँ कौ (अहिसन्तः) हिसा न करते हए (अपोदित) अपगत हो जाजा भाग जाओ। (ब्रह्म इव हविः) ब्रह्म के जा सकता, अतः सुरक्षित है । तद, पतङ्गं आदि में जात्येकवचन है । उपक्वस मे "अस का अथे है, "गति (स्वादिः)। अथवा श्रय वैसे यज्ञयो्य हविः अन्न भी सुरक्षित है इसे आखु खा नहीं सकता । तव इस के दो विभाग कर “नवसस्येष्टि"” तथा अन्य यज्ञो के लिधे एक विभाग अलग रब लेना चाहिए, ओौर खाद्य अन्न का विभाग उससे अलग ' पतङ्खं = पतन् गच्छतीति, जो उड़ता हुंजा जाता है, पतङ्गा । (त्दपिते) टे हिसक आखओं के पति ! (वर्घांपते) है आक्षप

English

May Agni, Soma mark through this libation: may Vāyu, Savitar, and Bhaga guard us.

अध्याय ६

श्लोक 48.2

ऋ॒भुर॑सि॒ जग॑च्छन्दा॒ अनु॒ त्वा र॑भे ।स्व॒स्ति मा॒ सं व॑हा॒स्य य॒ज्ञस्यो॒दृचि॒ स्वाहा॑

ṛbhurasi jagacchandā anu tvā rabhe | svasti mā saṃ vahāsya yajñasyodṛci svāhā

हिन्दी अर्थ

नाश करते है । वघांपतेवघ् (क्विप्, कतरि, षष्ठी बहुवचन) । धान्य के लिये (अभयम् कृणुतम्) अभय प्रदान करो । अस्विनौ=सायणने दो अश्विनौ! को देवौ माना है । क्या देव आए है गृहवासी पति-ओौर-पत्नी । 1 निरुक्त के अनुसार अग्विनोौ है “यावा- । (शिरः छिन्तम्) सिर को काट डालो, (अपि पृष्टोः) पसलियोंकोभी

English

Again return to us our breath and spirit, again come back to us our life and vision! Vaisvānara, unscathed, our bodies’ guardian, stand between us and every woe and danger! We are again united with our bodies, with happy mind, with spirit, strength, and splendour.

अध्याय ६

श्लोक 48.3

वृषा॑सि त्रि॒ष्टुप्छ॑न्दा॒ अनु॒ त्वा र॑भे ।स्व॒स्ति मा॒ सं व॑हा॒स्य य॒ज्ञस्यो॒दृचि॒ स्वाहा॑

vṛṣāsi triṣṭupchandā anu tvā rabhe | svasti mā saṃ vahāsya yajñasyodṛci svāhā

हिन्दी अर्थ

पर किप्रजा का जीवन अवलम्बित है उसकी रक्षा, महापृुण्यका कामहै।ये अधिविनी डस आदि का विनाश कर प्रजा को जीवित रखते हैँ । । ६२ मथवेवेद-भाष्य का०६। मनु० ५। सु०५१ इन तीनों मन्त्रो में प्रायः आखुभों का वणन है । आखु = “विभवे सति चोर (आष्टे) । अर्थात् धन के होते जोन खाता, न दान करता,न यज्ञ करता, उसे आख कहते हैँ । एसे व्यक्तियों को धान्य के खाने से वञ्चित कर भूवे मार देना चाहिए । ये चाहे अरण्यवासी हों, या प्रामवासी

English

May Tvashtar here make room for us, and freedom and smooth whate’er is injured in our bodies.

अध्याय ६

श्लोक 49.1

अग्निस्तवः।१-३ गार्ग्यः।अग्निः।१ अनुष्टुप्, २ जगती, ३ विराड्जगती।न॒हि ते॑ अग्ने त॒न्वः क्रू॒रमा॒नंश॒ मर्त्यः॑ ।क॒पिर्ब॑भस्ति॒ तेज॑नं॒ स्वं ज॒रायु॒ गौरि॑व

agnistavaḥ| 1-3 gārgyaḥ| agniḥ| 1 anuṣṭup, 2 jagatī, 3 virāḍjagatī| nahi te agne tanvaḥ krūramānaṃśa martyaḥ | kapirbabhasti tejanaṃ svaṃ jarāyu gauriva

हिन्दी अर्थ

देना चाहिए (अपोदित मन्त्र २) । एसे व्यक्तिचोर है, समाजके धनको चुराकर विभवशालीहृएरह। इन्द चोरों को दण्ड देना ही चाहिए। पुरुष-भाचमों के सम्बन्ध मे. कहा, है “एष ते शद्रभाग आखुस्ते पशुः" (वायोः, पवित्रेण) वायुरूप पविश्रता के साधन दवारा (पूतः) पवित्र का०६1 अनु० ५) सू° ५१ अथर्ववेद-भाष्य ६३ भङ्खमे गति करताद् स्थूल रूप य प्रकट हना साम शरोर ह हौ जाता है, शरोर में ठहर नहीं सकता । इछ है जीवात्मा । यथा द्रि

English

A benediction on a newly elected King Win the love of Indra that his friend may reach yet higher state. Increase, as rain the grass, this man’s dominion and his lofty fame.

अध्याय ६

श्लोक 49.2

मे॒ष इ॑व॒ वै सं च॒ वि चो॒र्व॒ऽच्यसे॒ यदु॑त्तर॒द्रावुप॑रश्च॒ खाद॑तः ।शी॒र्ष्णा शिरोऽप्स॒साप्सो॑ अ॒र्दय॑न्नं॒शून् ब॑भस्ति॒ हरि॑तेभिरा॒सभिः॑

meṣa iva vai saṃ ca vi corva'cyase yaduttaradrāvuparaśca khādataḥ | śīrṣṇā śiro'psasāpso ardayannaṃśūn babhasti haritebhirāsabhiḥ

हिन्दी अर्थ

के साथजृता हुआ, शरीर रथ का संचालन कर्ता है । वोय के अभाव शरीर रथ का संचालन नहीं हो सक्ता । यूज्यः का अथं है जुता हमा, च सहयोग ओौर सांमनस्य सुचित किया है । विद्व हि रमं भवहन्ति देवीरुदिदाभ्यः शुचिरा पूत एमि ॥२॥ (मातरः) माताओं की तरह (आपः) जल (अस्मान्) हमे (सुदयन्तु) ्रक्षालित करे, शुद्ध करे । (घृतप्वः) घृत की तरह पवित्र करने वाले (नः) हमे (तेन) घृत सदृश जल द्वारा (पुनन्तु) पवित्र करें । (देवीः) दिव्य देते हँ । (कशचिः) णद्ध तथा (पूतः) पवित्र हआ, (आभ्यः) इन ज से (उद् इत्) उठ कर (भा एमि) म आता हू ।

English

Confirm the princely power in him, Agni and Soma! grant him wealth. In all the circuit of his rule make him yet higher for your friend.

अध्याय ६

श्लोक 49.3

सु॒प॒र्णा वाच॑मक्र॒तोप॒ द्यव्या॑ख॒रे कृष्णा॑ इषि॒रा अ॑नर्तिषुः ।नि यन्नि॒यन्त्युप॑रस्य॒ निष्कृ॑तिं पु॒रू रेतो॑ दधिरे सूर्य॒श्रितः॑

suparṇā vācamakratopa dyavyākhare kṛṣṇā iṣirā anartiṣuḥ | ni yanniyantyuparasya niṣkṛtiṃ purū reto dadhire sūryaśritaḥ

हिन्दी अर्थ

“मातरः'' मातां जसे निजबच्चो के मलों को धोकर उन्हं शुध करती है, बेसे जल हमारे मलों को क्षारित कर हमे शुद्ध करं । ये मल पाप तीन प्रकारका है। (१) भूमिष्ठ, जिस मे कि भौमतत्तव मिले रहते हैँ । मृ क्षरणे (जुहोत्यादिः), यह भौमजल को अपेक्षा शद होता है । देवो (अथरव० १४।१।३-५) मत्त भाष्य । सोम॒ (वीये) का सम्बन्ध ¦ वायु के साथहे यथा “वायूः सोमस्य रक्षिता (अथव० १४।१।४); प्राणा- से शारीरिक मल साथ-साथ प्रवाहित होता रहता है, जब कि टबके जल मे जल चिकित्सा करने से शारोरिक मल जलमें ही मिला रहता है।

English

The man who shows us enmity, whether a stranger or akin, Thou wilt give up entire to me who sacrifice and press the juice. A prayer for general protection and prosperity

अध्याय ६

श्लोक 50.1

अभययाचना।१-३ अथर्वा (अभयकामः)।अश्विनौ।१ विराड्जगती, २-३ पथ्यापङ्क्तिः।ह॒तं त॒र्दं स॑म॒ङ्कमा॒खुमश्वि॑ना छि॒न्तं शिरो॒ अपि॑ पृ॒ष्टीः शृ॑णीतम्।यवा॒न्नेददा॒नपि॑ नह्यतं॒ मुख॒मथाभ॑यं कृणुतं धा॒न्याऽय

abhayayācanā| 1-3 atharvā (abhayakāmaḥ)| aśvinau| 1 virāḍjagatī, 2-3 pathyāpaṅktiḥ| hataṃ tardaṃ samaṅkamākhumaśvinā chintaṃ śiro api pṛṣṭīḥ śṛṇītam| yavānnedadānapi nahyataṃ mukhamathābhayaṃ kṛṇutaṃ dhānyā'ya

हिन्दी अर्थ

(२) दूसरा है वर्पाजल जिसे कि “वृत” सदृश पवित्र या क्षरित कहा है ट अथवेवेद-भाष्य॒का० ६ । अनु० ५। सू° ५१ यजु० ४।२ मे भौ “घृतप्वः पाठ दहै । मन्म “शुचि"' द्वारा मानसिक मौर “पूत” द्वारा शारीरिक शुद्धि का कथन हमा है । यत् कि चेदं ज॑रुण देव्ये जनैऽमि द्रोहं मनुष्या शचर॑निति । (वरुण) है पापनिवारक परमेश्वर ! (मनुष्याः) मनुष्य (देग्ये जने)

English

Of all the many God-frequented pathways that traverse realms between the earth and heaven, Consign me, all ye Gods to that which leadeth to perfect and inviolable safety.

अध्याय ६

श्लोक 50.2

तर्द॒ है पत॑ङ्ग॒ है जभ्य॒ हा उप॑क्वस ।ब्र॒ह्मेवासं॑स्थितं ह॒विरन॑दन्त इ॒मान् यवा॒नहिं॑सन्तो अ॒पोदि॑त

tarda hai pataṅga hai jabhya hā upakvasa | brahmevāsaṃsthitaṃ haviranadanta imān yavānahiṃsanto apodita

हिन्दी अर्थ

देव कोटिके जनों के प्रति (यत् किच) जो कुछ (इदम्) यह (अभि- (युयोपिम) हम ने उल्लंघन किया है, तो (देव) है देव ! (तस्मात् एनसः) उस पापसे (नः) हमे (मा) न (रीरिषः) हसित कर । हम मनुष्यो द्वारा किसी भी देवकोटि के जनके प्रति कयि द्रोह से; परमेष्वर से क्षमा चाहते हँ । यह मानुष स्वभावहोहै। बेदमे वरण को “अपामधिपति"" भी कहा है (अथवे० ५ २४।४) । अतः (आपः प्रकरण मे वरुण नाम से परमेश्वर तथा आपः दोनों का कयन क्रिधा है, (रक्षांसि) अन्धकार, घोर, रोगजनक कीटाणुमों भादि की (निज्वेत्) नितरां हिसा करता हृभा (सूयः) सवं प्रेरक सूयं (पुरः) पूवं दिशा में (दिवः) द्युलोक के प्रकाशित प्रदेश से (उत् एति) उदित होतादहै।

English

Maintain us in well-being Summer, Winter Dew-time and Spring, Autumn, and Rainy Season Give us our share of cattle and of Children. May we enjoy your unassailed protection.

अध्याय ६

श्लोक 50.3

तर्दा॑पते॒ वघा॑पते॒ तृष्ट॑जम्भा॒ आ शृ॑णोत मे ।य आ॑र॒ण्या व्यऽद्व॒रा ये के च॒ स्थ व्यऽद्वरास्तान्त्सर्वा॑न् जम्भयामसि

tardāpate vaghāpate tṛṣṭajambhā ā śṛṇota me | ya āraṇyā vya'dvarā ye ke ca stha vya'dvarāstāntsarvān jambhayāmasi

हिन्दी अर्थ

ओर (पवतेभ्यः) पर्वतौ से उदित होता है, भौर (अदृष्टहा) अदुष्ट क्रिमियो का हनन करताहै। सूयं पवंतीय प्रदेशो मे परवतो से, तथा तद्धि प्रदेशों भँ प्रकाशित दयभागों से उदित होता है । उदित होनेसेपूर्व सौरप्रभासे पूवंकाभाग प्रकाशित हो जाता है । सूर्यं कौ उदय काल की, तथा सायंकाल को, लाल रश्मियां रोग कीटाणुओं क्रिमियों का हनन कर्ती र (अथवं० २।३२।१)। असदन्) नितरां स्थित हो गई है, (मुगासः) स्थान का अन्वेषण करने वाली रषिमियो ने (नि) नितरां (अविक्षत) निज स्थान में प्रवेश पा लिया है। कालीन स्तुति तरङ्ग भी परमेश्वर को स्तुति काल में पाती रहेगी ।

English

Pay to the Year your lofty adoration, to the first Year, the second, and the present. Many we abide in the auspicious favour and gracious love of these who claim our worship.

अध्याय ६

श्लोक 51.1

एनोनाशनम्।१-३ शन्तातिः।आपः, ३ वरुणः।१ गायत्री, २ त्रिष्टुप्, ३ जगती।वा॒योः पू॒तः प॒वित्रे॑ण प्र॒त्यङ् सोमो॒ अति॑ द्रु॒तः ।इन्द्र॑स्य॒ युजः॒ सखा॑

enonāśanam| 1-3 śantātiḥ| āpaḥ, 3 varuṇaḥ| 1 gāyatrī, 2 triṣṭup, 3 jagatī| vāyoḥ pūtaḥ pavitreṇa pratyaṅ somo ati drutaḥ | indrasya yujaḥ sakhā

हिन्दी अर्थ

२८१) 1 ७२ (१४), निरुक्त अतिस्तुति प्रकरण । गावः = "सवं रश्मयो रश्मयो का कथन हु है जो कि प्रवेश के लिये स्थान का अभी अन्वेषण अथवंवेद-भाष्य कां० ६। अनु०६। सू० ५२॥ कर रहीं थीं । ये भावी काल कौ अर्थात् जने वले दिनोंकौ रस्मि्यां है, गए सूर्यके सम-काल कौ घटनाओं का कथन कियाहै।

English

A charm against snakes Let not the serpent slay us, O Gods, with our children and our folk.

अध्याय ६

श्लोक 51.2

आपो॑ अ॒स्मान् मा॒तरः॑ सूदयन्तु घृ॒तेन॑ नो घृ॒तप्वः पुनन्तु ।विश्वं॒ हि रि॒प्रं प्र॒वह॑न्ति दे॒वीरुदिदा॑भ्यः॒ शुचि॒रा पू॒त ए॑मि

āpo asmān mātaraḥ sūdayantu ghṛtena no ghṛtapvaḥ punantu | viśvaṃ hi ripraṃ pravahanti devīrudidābhyaḥ śucirā pūta emi

हिन्दी अर्थ

आयुहैदं विपश्चितं श्रुतां कण्व॑स्य वीरुधं । (आयुदेदम्) पूणं जायुः प्रद, (विपश्चितम्) मेधा का चयन करने वालो जो फि सब प्रकारकेरोगों को अषधरूपहै उसको (आ भारिषम्, मँ विनाश करने वाली (मथर्वं० २।२५।१) । अथवे० २।२५।१ मे इसे ““पुष्निपर्णी' कटा है । विपः मेधाविनाम (निघं° ३।१५) ।

English

Let it not close the opened mouth nor open that which now is closed. Be worship paid unto the black, worship to that with stripes across!

अध्याय ६

श्लोक 51.3

यत् किं चे॒दं व॑रुण॒ दैव्ये॒ जने॑ऽभिद्रो॒हं म॑नु॒ष्या॒३श्चर॑न्ति ।अचि॑त्त्या॒ चेत् तव॒ धर्मा॑ युयोपि॒म मा न॒स्तस्मा॒देन॑सो देव रीरिषः

yat kiṃ cedaṃ varuṇa daivye jane'bhidrohaṃ manuṣyā3ścaranti | acittyā cet tava dharmā yuyopima mā nastasmādenaso deva rīriṣaḥ

हिन्दी अर्थ

कां० ६1 अनु०६। सू० ५३ अथववेद-भाष्य (१-३) । बहच्छुकः । नानादेवताः । त्रिष्टुभ्; १ जगतो । बड़ा सूयं (दक्षिणया) वृद्धि हारा (पिपतु) मेरा पालन करर; (स्वधा) इन में से प्रत्येक (नः पातु) हमारी र्ना करे। अनुदित परन्तु उदोयमान सूयं (निरुक्त) । परमेष्वरसे प्राथेना की गई हैकिये सब हमारा पालन करे।

English

To the brown viper reverence, reverence to the demon brood! I close together fangs with fang, I close together jaws with jaw. I close together tongue with tongue, I close together mouth with mouth.

अध्याय ६

श्लोक 52.1

भैषज्यम्।१-३ भागलिः।१ सूर्यः, २ गावः, ३ भेषजम्।अनुष्टुप्।उत् सूर्यो॑ दि॒व ए॑ति पु॒रो रक्षां॑सि नि॒जूर्व॑न्।आ॒दि॒त्यः पर्वतेभ्यो वि॒श्वदृ॑ष्टो अदृष्ट॒हा

bhaiṣajyam| 1-3 bhāgaliḥ| 1 sūryaḥ, 2 gāvaḥ, 3 bheṣajam| anuṣṭup| ut sūryo diva eti puro rakṣāṃsi nijūrvan| ādityaḥ parvatebhyo viśvadṛṣṭo adṛṣṭahā

हिन्दी अर्थ

(नः) हमें (रतु) प्राप्त हो; (वेश्वानरः) सब नर-नारियों का हितकारी (अदन्धः) अहिसित तथा (तनूपाः) ततन् का रक्षक परमेश्वर या शारीरिक अग्नि (विश्वा दुरितानि ) सब दृष्फलों का निवारण करता हुआ (नः अन्तः) हमारे भीतर अर्थात् शरीर मे (तिष्ठाति) स्थित रहै । रष्वास, ओर भसुहै शरीर ओर शरीराङ्खों मे संचारी प्राण । शय सथवेवेद-भाष्य॒का० ६ ' अनु° ६। सू० ५४ (वचसा) शारीरिक कान्ति भौर (पयसा) माता के दूध के (सम्, अगन्महि) साथ हम संगत हए है, (तनूभिः) स्थूल, सूक्ष्म तथा कारण ॑ तनुम, अथवा तन् के सर्वाङ्गो के साथ (सम्) हम संगत हुए ह, (शिवेन, मनसा) शिव संकल्पां वाले मन के साथ (सम्) हम संगत हए है।। नवजीवन म (वरीयः) उरुतम उदेश्य (कृणोतु) सफल करे, तथा (तन्वः)

English

A charm for a wound or bruise This is a medicine indeed, Rudra’s own medicine is this,

अध्याय ६

श्लोक 52.2

नि गावो॑ गो॒ष्ठे अ॑सद॒न् नि मृ॒गासो॑ अविक्षत ।न्यू॒३र्मयो॑ न॒दीनं॒ न्य॑१दृष्टा॑ अलिप्सत

ni gāvo goṣṭhe asadan ni mṛgāso avikṣata | nyū3rmayo nadīnaṃ nya1dṛṣṭā alipsata

हिन्दी अर्थ

(अनुमाष्टु ) अनुकूल रूप में शुद्ध करे, ठीक करे । पुनर्जन्म हो जाने पर यह प्राना परमेश्वर से की गई है । उरुतम उदेश्य है, मोक्ष प्राप्ति । ¦ जोतता हूं, (अष्टये) फल की प्राप्ति के लिये (सुम्भामि) से माला को (वधय) तू बढ़ा, (इव) जैसे (वृष्टिः) वर्षां (तृणम्) घास को कां० ६ अनु० ६ । सू० ५५ अथवेवेद-भाष्य ९€ है अग्रणीः (निरुक्त ७1४।१४), तथा सौम है सेनाध्यक्ष (यजु १७।४० ) । अग्नीषोमौ = उभयपद द्विवचन । वेदिक प्रथा ।

English

Wherewith he warns the arrow off one-shafted, with a hundred tips. Besprinkle it with anodyne, bedew it with relieving balm: Strong, soothing is the medicine: bless us therewith that we may live.

अध्याय ६

श्लोक 52.3

आ॒यु॒र्ददं॑ विप॒श्चितं॑ श्रु॒तां कण्व॑स्य वी॒रुध॑म्।आभा॑रिषं वि॒श्वभे॑षजीम॒स्यादृष्टा॒न् नि श॑मयत्

āyurdadaṃ vipaścitaṃ śrutāṃ kaṇvasya vīrudham| ābhāriṣaṃ viśvabheṣajīmasyādṛṣṭān ni śamayat

हिन्दी अर्थ

(अस्मान्) हमे (अभिदासति) उपक्षीण करता, या दास बनाता है, (तम्, सर्वम्) उस सब को (मे) मेरे (सुन्वते) राज्याभिषेक करने वाले, (यज- मानाय) यज्ञ कर रहे सम्राट् के लिये, (रन्धयामसि) हम सब मिल कर उसे उसके वशम करते ह) मे हु है । "दम्, तत्" ये दो पद वाक्यालंकार शूप मेह । अष्टये =, तेषामञ्यानि यतमो षहांति तस्मै पा देवा परं धत्ते सर्वे ॥१॥ १०० अथवेवेद-भाष्य का० ६। अनु० ६1 सू० ५५ (बहवः) नाना, (देवयानाः) व्यापारियों के जाने-आने के (पन्थानः) माग, (ये) जो (द्यावापृथिवी अन्तरा, चुलोक गौर पृथिवी के मध्यमे

English

Let it be health and joy to us. Let nothing vex or injure us. Down with the wound! Let all to us be balm, the whole be medicine.

अध्याय ६

श्लोक 53.1

सर्वतो रक्षणम्।१-३ बृहच्छुक्रः।१ द्यौः, पृथिवि, शुक्रः, सोमः, अग्निः, वायुः, सविता, १ भगः, २ वैश्वानरः, ३ त्वष्टा।त्रिष्टुप्, १ जगती।द्यौश्च॑ म इ॒दं पृ॑थि॒वी च॒ प्रचे॑तसौ शु॒क्रो बृ॒हन् दक्षि॑णया पिपर्तु ।अनु॑ स्व॒धा चि॑कितां॒ सोमो॑ अ॒ग्निर्वा॒युर्नः॑ पातु सवि॒ता भग॑श्च

sarvato rakṣaṇam| 1-3 bṛhacchukraḥ| 1 dyauḥ, pṛthivi, śukraḥ, somaḥ, agniḥ, vāyuḥ, savitā, 1 bhagaḥ, 2 vaiśvānaraḥ, 3 tvaṣṭā| triṣṭup, 1 jagatī| dyauśca ma idaṃ pṛthivī ca pracetasau śukro bṛhan dakṣiṇayā pipartu | anu svadhā cikitāṃ somo agnirvāyurnaḥ pātu savitā bhagaśca

हिन्दी अर्थ

(वहाति) ले चलता है, (तस्मे) उस माग के लिये (देवाः) है व्यापारियों ! (सवे) तुम सव । इह) इस राज्य मे (मा) मक्षे (परिधत्त) मागं के इन ऋतुओं म है देवाः (मन्त्र १) है दिव्य व्यापारियों ! (नः) हमें हमें धारित-पोषित करो । (नः) हमें (गोषु, प्रजायाम्) गौमों ओर कहते ह कि तुम हमें अपना आश्वय प्रदान करो, ताकि हम सुगमता से, कां० ६। अनु० ६ । सू० ५५ अथवेवेद-भाष्य १०१

English

A priest’s prayer for power and glory May Indra Maghavan give me name and glory. May Heaven and Earth, this couple, make me famous.

अध्याय ६

श्लोक 53.2

पुनः॑ प्रा॒णः पुन॑रा॒त्मा न॒ ऐतु॒ पुन॒श्चक्षुः॒ पुन॒रसु॑र्न॒ ऐतु॑ ।वै॒श्वा॒न॒रो नो॒ अद॑ब्धस्तनू॒पा अ॒न्तस्ति॑ष्ठाति दुरि॒तानि॒ विश्वा॑

punaḥ prāṇaḥ punarātmā na aitu punaścakṣuḥ punarasurna aitu | vaiśvānaro no adabdhastanūpā antastiṣṭhāti duritāni viśvā

हिन्दी अर्थ

तेषां वयं संमतौ यश्तियानामपिं भद्रे सौमनसे स्याम ॥र॥ (संवत्सराय) अग्नि के लिये (वृहत्) बहुत (नमः) अश्राहुतियां (कृणुत, कल्याणमय (सौमनसे) उत्तम-मानसिक प्रसन्नता में (अपि) भी हों वायुरनुवत्सरः” (तै० ब्रा० १।४।१०।१) । वत्सर का अथं है “वष”, यथा अग्नि, चन्द्रमा, आदित्य, वाथु, सृखपुवेक वास के लिये हो सक, इस उश से अग्नि मे बहुतायत मे अन्नादि की अहुतियां होनी चाहिए । नमः अन्ननाम (निघं० २।७) । उचित पदार्थो की अहृतिमों से वायु आदि

English

May Savitar the deity make me honoured. Here may the man who gives the guerdon love me. Indra from Heaven and Earth receiveth glory among the plants the Waters have their glory;

अध्याय ६

श्लोक 53.3

सं वर्च॑सा॒ पय॑सा॒ सं त॒नूभि॒रग॑न्महि॒ मन॑सा॒ सं शि॒वेन॑ ।त्वष्टा॑ नो॒ अत्र॒ वरी॑यः कृणो॒त्वनु॑ नो मार्ष्टु त॒न्वो॒३यद् विरि॑ष्टम्

saṃ varcasā payasā saṃ tanūbhiraganmahi manasā saṃ śivena | tvaṣṭā no atra varīyaḥ kṛṇotvanu no mārṣṭu tanvo3yad viriṣṭam

हिन्दी अर्थ

यजुर्वेद (३०।१५)मे निम्नलिखित वत्सरो का कथन हुभा द । यथा (संव शिक्षित करना है । एतदथं उन्हे वायुयानों को चला सकने, उनकी मुरम्मत कर सकने, तीन वर्षो के नामोंका भी कथन हमा है, जिससे कि सिन्न-सिन्न वषं कौ पहिषान देवयानाः; देव है व्यापारी, यथा "दिव् क्रीडा विजिगीषा “व्यवहार । कां० ६। अनु० ६। सू० ५७ अथववेद-भाष्य १०३

English

Even so may we be glorious’mid all the Universal Gods. Indra and Agni were renowned, famous was Soma at his birth; So too am I illustrious, most glorious of all that is.

अध्याय ६

श्लोक 54.1

अमित्रदम्भनम्।१-३ ब्रह्मा।अग्नीषोमौ।अनुष्टुप्।इ॒दं तद् यु॒ज उत्त॑र॒मिन्द्रं॑ शुम्भा॒म्यष्ट॑ये ।अ॒स्य क्ष॒त्रं श्रियं॑ म॒हीं वृ॒ष्टिरि॑व वर्धया॒ तृण॑म्

amitradambhanam| 1-3 brahmā| agnīṣomau| anuṣṭup| idaṃ tad yuja uttaramindraṃ śumbhāmyaṣṭaye | asya kṣatraṃ śriyaṃ mahīṃ vṛṣṭiriva vardhayā tṛṇam

हिन्दी अर्थ

स्वजाय॑ ब्रवै नमो नमां देवज॒नेभ्य॑ः ॥२॥ हो, (तिरस्चिराजये) टेढ़ी रेखाओं वाले सापि के लिये ल ) वच्प्रहार सांप क लिये (नमः) वज्रप्रहार हो, (देवजनेभ्यः) जौर देवजनों के लिये १०२ अथवेवेद-भाष्य कां० ६। अनु० ६१ सु° ५६ षान्) भूत्यादि पुरुषों सहित (नः) हमारा (अहिः) सपि (मा) न ) । स्वजाय = सु+ मज गतिक्षेपणयोः

English

A charm to protect cattle and men First, O Arundhatī, protect our oxen and milky kine:

अध्याय ६

श्लोक 54.2

अ॒स्मै क्ष॒त्रम॑ग्नीषोमाव॒स्मै धा॑रयतं र॒यिम्।इ॒मं रा॒ष्ट्रस्या॑भीव॒र्गे कृ॑णु॒तं यु॒ज उत्त॑रम्

asmai kṣatramagnīṣomāvasmai dhārayataṃ rayim| imaṃ rāṣṭrasyābhīvarge kṛṇutaṃ yuja uttaram

हिन्दी अर्थ

याप दिग्यजनों के लिये (नमः) नमस्कार हो । देवाः देवजनाः, यथा देवदत्तः दत्तः । देवजन ह स्प-तथा-विष ¦ अभिलाषा व्यक्त की है, देवजनों से। ये देवजनर्है, देवकोटि के “जम सुगमता से हो सके । इस अथं मे “तेषां यज्ञियानाम् सुमतौ” भादि कायंहैकि “उन गुरुभो,-जो कि व्यापार-यज्ञ कराने की योग्यता रसते है,-को सुमति तथा (ते) तेरे (दता)ऊपर के दान्तो के साथ (वतः ) नीचे फे दान्तौ को (सं हन्मि) ओ मिला देता ह, संहित कर देता हं (ते) तेर (हन्वा) ऊपर के जवाडे के साथ (हनः) नीचे के जादे को (सम् उ) संहित फर देता हृ,

English

Protect each one that is infirm, each quadruped that yields no milk. Let the Plant give us sheltering aid, Arundhatī allied with Gods; Avert Consumption from our men and make our cow-pen rich in milk.

अध्याय ६

श्लोक 54.3

सब॑न्धु॒श्चास॑बन्धुश्च॒ यो अ॒स्मां अ॑भि॒दास॑ति ।सर्वं॒ तं र॑न्धयासि मे॒ यज॑मानाय सुन्व॒ते

sabandhuścāsabandhuśca yo asmāṃ abhidāsati | sarvaṃ taṃ randhayāsi me yajamānāya sunvate

हिन्दी अर्थ

जिह्वा को (सम्) संहित कर देता हू, मिला देता हृ, १ है सांप (आस्ना) तेरे मुख के साथ (आस्यम ) मुख को (सम् उ) संहित कर देता सम्भवतः 'देवजन' की है, जो कि सपैविष चिकित्सक है। आस्यके उत्तर भाग को नीचे के भाग ॐ साथ संदिष्ट करता हूं (सायण) । जन्नबीज बोने पर वह जितने फाल मेँ परिपक्व हो जाता है वह् कान। ददरत्सरमे १. वह सांपके सिरकोदुढृतासे पकडलेतादहै, जिससे सापिन मुख खोल वहू काल । वत्सर है नक्षत्र के उदय होने से अगले दिनम उस कै उदय होने तक का काल, से नाक्षत्र दिन कहते है, पसे ३६० दिन होते है, नाक्षत्र वषं मे। इन

English

I welcome the auspicious Plant, life-giving, wearing every hue. Far from our cattle may it turn the deadly dart which Rudra casts.

अध्याय ६

श्लोक 55.1

सौमनस्यम्।१-३ ब्रह्म।१ विश्वे देवाः, २-३ रुद्रः।जगती, २ त्रिष्टुप्।ये पन्था॑नो ब॒हवो॑ देव॒याना॑ अन्त॒रा द्यावा॑पृथि॒वी सं॒चर॑न्ति ।तेषा॒मज्या॑निं यत॒मो वहा॑ति॒ तस्मै॑ मा देवाः॒ परि॑ धत्ते॒ह सर्वे॑

saumanasyam| 1-3 brahma| 1 viśve devāḥ, 2-3 rudraḥ| jagatī, 2 triṣṭup| ye panthāno bahavo devayānā antarā dyāvāpṛthivī saṃcaranti | teṣāmajyāniṃ yatamo vahāti tasmai mā devāḥ pari dhatteha sarve

हिन्दी अर्थ

(देवाः) है देवजनों ! (सतोकान्) पूर्रपौत्रादि समेत, यथा (सहपुर- 4; कालो या वत्सरो का यथाथं ज्ञान वायुयार्नो के संचालकों के लिये आवश्यक है। १०४ अथववेद-भाष्य कां० ६। अनु० ६ । सू०५७ अग्रभागो वाले (इषुम्) वाण को भी (अप ब्रवीत्) वेद ने अपाकृत निवा- रित करने वाला कहा है । अर्थात् तद्वारा कि क्षत को निवारित करने (उपषिञ्चत) समीप से सेक करो । (जालाषम्) गमं या प्रतप्त जल (उग्रम्, भेषजम्) उग्र भषज है (तेन) उस ओषध हारा (नः) हमें (जीवसे) जीने के लिये (मृड) है जलं चिकित्सक ! तू सुखी कर।

English

The wooing of a bride With forelock loosened o’er his brow here comes the wooer of the bride, p. a228 Seeking a husband for this maid, a wife for this unmarried man.

अध्याय ६

श्लोक 55.2

ग्री॒ष्मो हे॑म॒न्तः शिशि॑रो वस॒न्तः श॒रद् व॒र्षाः स्वि॒ते नो॑ दधात ।आ नो॒ गोषु॒ भज॒ता प्र॒जायां॑ निवा॒त इद् वः॑ शर॒णे स्या॑म

grīṣmo hemantaḥ śiśiro vasantaḥ śarad varṣāḥ svite no dadhāta | ā no goṣu bhajatā prajāyāṃ nivāta id vaḥ śaraṇe syāma

हिन्दी अर्थ

जल द्वारा धोने से क्षत प्रदेश में कीटाणु-प्रवेश (1761101) नहीं होता । सुख हो, (नः च) ओर हमे (कि चन) कोईभोरोग (मा) न (आममत्) जौषध सूप हौ जाय, (स्वम्) विश्व के सब तत्व (नः) हमारे लिये चकारद्रय समुच्चयाथक हैँ । आममत् --आ-+अम रोगे (चुरादि १. साथणानुसार पाठ है “जलाषम्; ओर अर्थं है "गोमूत्रफेन'' ।

English

Wooer! this girl hath toiled in vain, going to others’ marriages. Now to her wedding, verily, wooer! another maid shall come.

अध्याय ६

श्लोक 55.3

इ॒दा॒व॒त्स॒राय॑ परिवत्स॒राय॑ संवत्स॒राय॑ कृणुता बृ॒हन्नमः॑ ।तेषां॑ व॒यं सु॑म॒तौ य॒ज्ञिया॑ना॒मपि॑ भ॒द्रे सौ॑मन॒से स्या॑म

idāvatsarāya parivatsarāya saṃvatsarāya kṛṇutā bṛhannamaḥ | teṣāṃ vayaṃ sumatau yajñiyānāmapi bhadre saumanase syāma

हिन्दी अर्थ

अर्थात् पाप क्षीण हो जाय, उसका क्षय हो जाय। य॒शस॑ मा देवः सविता कृगोतु भियो दातुरहै्षिणाया इह स्याम् ॥१॥ (कृणोतु) करे, (इमे उभे) ये दोनों (दावापृथिवो) चुलोक भौर पृथिवी (यशसम्) यशस्वो करे । (सविता देवः) उत्पादकं पितृदेव (मा) गृह्ञ (यशसम्) यशस्वी (कृणोतु) करे ताकि (इह) इस जीवन में (दक्षिणायाः) सम्राट् मूङ्षे एसे पद पर आरूढ करे जिस सेमेरा यश बद, म एसे श॒ भकमं करूं जिससे दोनो लोकोमे मेरा यश फले, मेरा पितृदेव मुद सुशिक्षित करे, जिससे र्म यशस्वी हौ जाऊ, भौर सबके दाता परमेश्वर (यथा) जैसे (इन्दः) सूये (यावापृथिग्योः) ुलोक "भौर पृथिवी में

English

Dhātar upholds the spacious earth, upholds the sky, upholds the Sun. Dhātar bestow upon this maid a husband suited to her wish!

अध्याय ६

श्लोक 56.1

सर्पेभ्यो रक्षणम्।१-३ शन्तातिः।१ विश्वे देवाः, २-३ रुद्रः।१ उष्णिग्गर्भा पथ्यापङ्क्तिः, २ अनुष्टुप्, ३ निचृत्।मा नो॑ देवा॒ अहि॑र्वधी॒त् सतो॑कान्त्स॒हपु॑रुषान्।सम्य॑तं॒ न वि ष्प॑रद् व्यात्तं॒ न सं य॑म॒न्नमो॑ देवज॒नेभ्यः॑

sarpebhyo rakṣaṇam| 1-3 śantātiḥ| 1 viśve devāḥ, 2-3 rudraḥ| 1 uṣṇiggarbhā pathyāpaṅktiḥ, 2 anuṣṭup, 3 nicṛt| mā no devā ahirvadhīt satokāntsahapuruṣān| samyataṃ na vi ṣparad vyāttaṃ na saṃ yamannamo devajanebhyaḥ

हिन्दी अर्थ

(यथा) शंसेः (आपः) जल (ओषधीषु) अत्न प्रदान कै दहतु होनेसे हम (यशसः). कोत्तिमान् (स्याम) हौ जाय । इस मन्त्र की व्याख्या के लिए देखो (अथवं ° ६।३६।२) । अधनवे वयसे क्षमं यच्छ चतुष्पदे ॥१॥ अथवेवेद-भाष्य॒कां० ६॥ अनु० ६। सू०५६

English

A prayer for prosperity and greatness The Waters send me what is sweet and pleasant, Sūra bring all

अध्याय ६

श्लोक 56.2

।नमो॑ऽस्त्वसि॒ताय॒ नम॒स्तिर॑श्चिराजये ।स्व॒जाय॑ ब॒भ्रवे॒ नमो॒ नमो॑ देवज॒नेभ्यः॑

| namo'stvasitāya namastiraścirājaye | svajāya babhrave namo namo devajanebhyaḥ

हिन्दी अर्थ

(षेनुभ्यः) दूध देने बाली गौओं के लिय, (अधेनवे) न दध देने वाली (वयसे) छोटी आयु वाली गौ के लिये, (चतुष्पदे) तथा अन्य चौपाए पद्यु के लिये (शमं) सुख (यच्छ) प्रदान कर । सूखा देने वालो, स्वस्थ कर देने वाली ओौषध सहदेवी, मन्त्र २ । ( मरुन्धती ) घावों को पी कर सूखा देने वालो, स्वस्थ कर देने वाली (सहदेवी) सहदेवी (ओषधिः) ओषधि (शमं) सुख (यच्छतु) प्रदान करे ।

English

I need for light and vision! The deities, and all of pious nature, and Savitar the God afford me freedom! I set the heaven and the earth asunder, I brought all seven sea- sons into being.

अध्याय ६

श्लोक 56.3

सं ते॑ हन्मि द॒ता द॒तः समु॑ ते॒ हन्वा॒ हनू॑ ।सं ते॑ जि॒ह्वया॑ जि॒ह्वां सम्वा॒स्नाह॑ आ॒स्यऽम्

saṃ te hanmi datā dataḥ samu te hanvā hanū | saṃ te jihvayā jihvāṃ samvāsnāha āsya'm

हिन्दी अर्थ

करने वाली, (जीवलाम्) जीवन देने वाली, सहदेवी ओषध को, वाले व्र को (नः) हमारी (गोभ्यः) गौभों से, (दूरम्) दुर (नयतु) ले जाय, रखे । अर्थात् गोशाला का निर्माण इस प्रकार फा होना चाहिए कि उस पर विद्युत् का प्रभावन हो सके । सहदेवी ओषधि दो प्रकार की होती है सहदेवी मौर सहदेवी बष्टी । सहदेवी के एूल बगनी रंग के भौर बीज कालो जीरी के समान होते है । इस का पौदात्रिरोष, क्षप तथा दमा, खांसी मे लाभदायक हदोतादहै, तथा (अर्यमा) अन्धकार आदि भरियों का नियमन करने वाला आदित्य (आ याति) आया है (पुरस्तात्) हमारे संमुख या पूवेमें, (अस्ये) इस के लिये (पतिम्) पति को (उत) तथा (मजानये) जाया रदित पुरुष के लिये (जायाम्) जाया को (इच्छन् ) चाहता हुञा ।

English

My word is truth, what I deny is falsehood, above celestial Vāk, above the nations. I gave existence to the earth and heaven, I made the seasons and the seven rivers.

अध्याय ६

श्लोक 57.1

जलचिकित्सा।१-३ शन्तातिः।रुद्रः।१-२ अनुष्टुप् ३ पथ्याबृहती।इ॒दमिद् वा उ॑ भेष॒जमि॒दं रु॒द्रस्य॑ भेष॒जम्।येनेषु॒मेक॑तेजनां श॒तश॑ल्यामप॒ब्रव॑त्

jalacikitsā| 1-3 śantātiḥ| rudraḥ| 1-2 anuṣṭup 3 pathyābṛhatī| idamid vā u bheṣajamidaṃ rudrasya bheṣajam| yeneṣumekatejanāṃ śataśalyāmapabravat

हिन्दी अर्थ

इच्छन् = चाहता हुभा, इच्छा करता हुआ । इच्छा या चाहूना चेतन का धर्महै, जडका नहीं। आदित्य जड है, चेतन नहीं, अतः आदित्य का २. अथवा “अगि गतौ +- रः ओणादिक प्रत्यय (४।१०२-१०४), बाहुलकात् इस कन्या के (समनम्) सामाजिक जोवन सम्बन्धो विवाह मे (आ परमेश्वर ! (नु) निचय से (अन्याः) अन्य धाताम्या अग्रे पतिं दधातु मतिकाम्यम् ॥२॥

English

My word is truth; what I deny is falsehood, I who rejoice in Agni’s, Soma’s friendship. A prayer for purification and riches

अध्याय ६

श्लोक 57.2

जा॒ला॒षेणा॒भि षि॑ञ्चत जालाषेणोप॑ सिञ्चत ।जा॒ला॒षमु॒ग्रं भे॑ष॒जं तेन॑ नो मृड जी॒वसे॑

jālāṣeṇābhi ṣiñcata jālāṣeṇopa siñcata | jālāṣamugraṃ bheṣajaṃ tena no mṛḍa jīvase

हिन्दी अर्थ

(धाता) विधाता ने (पृथिवीम्) पृथिवी को (दाधार) धारित किया है (धाता) विधाता (याम्) दुलोक को (उत्त) तथा (सूर्यम्) सूयं को अयमा को धाता कहा है । उस धाता ने सूयं काभो धारण किया हुभाहै) मं देवा उत॒ रिश्च तणोजा म्यं देवः संदिता व्यचो धात् ॥१॥ (मद्यम्) मेरे" लिये (आपः) नदियों के जल, (मधुमत्) मधुर-जल १. मेरी प्रसन्नताके लिये, यामेरी आज्ञाके पालन के लिये; भाज्ञामंग होने अथवेवेद-भाष्य का० ६। अतरु९। सू० ६१

English

Cleanse us Vaisvānara with rays of splendour! With breath and clouds let quickening Vāyu cleanse us.

अध्याय ६

श्लोक 57.3

शं च॑ नो॒ मय॑श्च नो॒ मा च॑ नः॒ किं च॒नाम॑मत्।क्ष॒मा रपो॒ विश्वं॑ नो अस्तु भेष॒जं सर्वं॑ नो अस्तु भेष॒जम्

śaṃ ca no mayaśca no mā ca naḥ kiṃ canāmamat| kṣamā rapo viśvaṃ no astu bheṣajaṃ sarvaṃ no astu bheṣajam

हिन्दी अर्थ

का० ६1 अनु ९ । सू० ६१ अथववेवेद-भाष्य १०६ घारण कयि. हए ह । (मह्यम्) मेरे लिये हँ (देवाः) देव, (उत) तथा लिये (देवः सविता) चुतिमान् सविता ने (व्यचः) विस्तार (धात्) स्थापित कियादहै। ¢ „4 उदित सूयं जब कि आकाश तो चमक जातादहै, परन्तु पृथिवी पर ५५ अन्धकार शेष रहता है (निरुक्त १२।२।१४) । सविता के उदय होने से रवं अन्धकार था, दूर की वस्तु दौखती न थी ! सविता के उदय होने पर (सहम्) मैने (पृथिवीम्) पृथिवी को (उत) तथा (बयाम्) द्युलोक कौ (विवेच) विवेक पूवेक पृथक्-पृथक् किया है; (अहम्) मने (सप्त ऋतन) सात ऋतुभों को (साकम्) साथ-साथ (अजनयम्) पेदा किया हे।

English

And, rich in milky rain, let Earth and Heaven, worshipful, holy, cleanse us with their water. Lay hold on Sūnritā whose forms and regions have fair smooth backs, her who is all men’s treasure.

अध्याय ६

श्लोक 58.1

यशः प्राप्तिः।१-३ अथर्वा (यशस्कामः)।बृहस्पतिः, १-२ इन्द्रः, द्यावापृथिवि, सविता, ३ अग्निः, इन्द्रः, सोमः।१ जगती, २ प्रस्तारपङ्क्तिः, ३ अनुष्टुप्।य॒शसं॒ मेन्द्रो॑ म॒घवान् कृणोतु य॒शसं॒ द्यावा॑पृथि॒वी उ॒भे इ॒मे।य॒शसं॑ मा दे॒वः स॑वि॒ता कृ॑णोतु प्रि॒यो दा॒तुर्दक्षि॑णाया इ॒ह स्या॑म्

yaśaḥ prāptiḥ| 1-3 atharvā (yaśaskāmaḥ)| bṛhaspatiḥ, 1-2 indraḥ, dyāvāpṛthivi, savitā, 3 agniḥ, indraḥ, somaḥ| 1 jagatī, 2 prastārapaṅktiḥ, 3 anuṣṭup| yaśasaṃ mendro maghavān kṛṇotu yaśasaṃ dyāvāpṛthivī ubhe ime| yaśasaṃ mā devaḥ savitā kṛṇotu priyo dāturdakṣiṇāyā iha syām

हिन्दी अर्थ

वदामि) म ही कहता हं, (च) भौर (विशः परि) सब प्रजा को (देवीम्, वाचम्) दिन्य वेदवाणी (अहम् वदामि) मै कहता हूं । विमितं तरिशदङ्ध प्रयोदशं मासं यो निर्मिमीते” (अथं १३।३।८) । यहं १३बां मास, सौरमासों भौर चान्द्रमासों के वर्षो मे दिनोंद्ारा हुई विषमता की पूति के लिये ह । परमेश्वर सत्य शौर भनृत का भेद वेदवाक् व्रारा २. अथवा देवाः विद्वांसः, तपोजाः तपस्विनः । ११० अथहैमेद-भाष्य कां० ६। धनु° ६। सू० ६१ ने सत्य ओर अनृत के स्वकूपों को देख कर उन का भेद दर्शया है । उस

English

Through her may we, in sacrificial banquets singing her glory, be the lords of riches. For splendour, seize on her whom all men worship, becoming pure yourselves, and bright,

अध्याय ६

श्लोक 58.2

यथेन्द्रो॒ द्यावा॑पृथि॒व्योर्यश॑स्वा॒न् यथाप॒ ओष॑धीषु॒ यश॑स्वतीः ।ए॒वा विश्वे॑षु दे॒वेषु॑ व॒यं सर्वे॑षु य॒शसः॑ स्याम

yathendro dyāvāpṛthivyoryaśasvān yathāpa oṣadhīṣu yaśasvatīḥ | evā viśveṣu deveṣu vayaṃ sarveṣu yaśasaḥ syāma

हिन्दी अर्थ

अहं सत्यमतं यद् वदामि यो अगनीषोपावयंषे सखाया ॥२॥ (अहम्) मै ने (जजान) पेदा किया है (पृथिवीम्) पृथिषी को, (उत) तथा (चाम्) दुलोक को, (अहम्) मैने (तृन्) ऋतुगो को, (सप्त रूप है उस का (अहम् वदामि) मै कथन करता ह, (यः) जिस र्मैनेकि (सखायौ) परस्पर-सखि रूप (अग्नीषोमौ) अग्नि भौर सोम का (अजुषे) सेवन किया है सुष्ट्युत्पादन मे सात प्रकार की नदियां रई ग्धा आदि (ऋ १०।७५।५)ये काकुदं सुम्यं सुषिरामिव ॥” (ऋ० ८।६६।१२). (निरुक्त ५।४।२७) ।

English

and brilliant. Here, through our prayer rejoicing in the banquet, long may we look upon the Sun ascending. The symbolical liberation of a sacrificial victim

अध्याय ६

श्लोक 58.3

य॒शा इन्द्रो॑ य॒शा अ॒ग्निर्य॒शाः सोमो॑ अजायत ।य॒शा विश्व॑स्य भू॒तस्या॒हम॑स्मि य॒शस्त॑मः

yaśā indro yaśā agniryaśāḥ somo ajāyata | yaśā viśvasya bhūtasyāhamasmi yaśastamaḥ

हिन्दी अर्थ

अथवा सात प्रकार के भौम समुद्र । जाता है तोये परस्पर सखा के रूपमे योनिमे वासकरतेर्हँ भौर दोनों का सेवन करता है, सहायता लेताहै। हसी प्रकार “तस्मादा (वेश्वानरः) सब नर-नारियों का हितकारी सूर्यं (रश्मिभिः) रश्मयो द्वारा (नः) हमे (पुनातु) पवित्र करे; (वातः) वायु (प्राणेन) प्राण सत्यनियमों वाली, (यज्ञिये) यज्ञो मेँ साधनरूप (चावापुथिवी) घौ भौर पृथिवी (पयसा) जल द्वारा (नः) हमे (पुनोताम्) पवित्र करं ।

English

That collar round thy neck, not to be loosened, which Nirriti the Goddess bound and fastened, I loose for thy long life and strength and vigour. Eat, liberated, food that brings no sorrow.

अध्याय ६

श्लोक 59.1

औषधिः।१-३ अथर्वा।रुद्रः, अरुन्धती औषधिः।अनुष्टुप्।अ॒न॒डुद्भ्य॒स्त्वं प्र॑थ॒मं धे॒नुभ्य॒स्त्वम॑रुन्धति ।अधे॑नवे॒ वय॑से॒ शर्म॑ यच्छ॒ चतु॑ष्पदे

auṣadhiḥ| 1-3 atharvā| rudraḥ, arundhatī auṣadhiḥ| anuṣṭup| anaḍudbhyastvaṃ prathamaṃ dhenubhyastvamarundhati | adhenave vayase śarma yaccha catuṣpade

हिन्दी अर्थ

(वैश्वानरीम्) सब नर-नारियो के लिये हितकारिणी, (सूनृताम्) प्रि उस वेदवाणी द्वारा (सधमादेषु) सामाजिक हषो अर्थात् उत्सवो में स्याम) एेष्वयों के स्वामी हों । ११२ अथरवेवेद-भाष्य का०६॥। अनु० ७1 सू० ६३ है । सधमादेषु = सहस्य सधादेशः-+ मदी हषं (भ्वादिः) ।

English

To thee, sharp-pointed Nirriti, be homage! Loose thou the binding fetters wrought of iron. To me, in truth, again doth Yama give thee. To him, to Yama, yea, to Death, be homage! Compassed by death which comes in thousand manners, here art thou fastened to the iron

अध्याय ६

श्लोक 59.2

शर्म॑ यच्छ॒त्वोष॑धिः स॒ह दे॒वीर॑रुन्ध॒ती।कर॒त् पय॑स्वन्तं गो॒ष्ठम॑य॒क्ष्मां उ॒त पूरु॑षान्

śarma yacchatvoṣadhiḥ saha devīrarundhatī| karat payasvantaṃ goṣṭhamayakṣmāṃ uta pūruṣān

हिन्दी अर्थ

वेद्वानरीं वचस आ रमध्वं शुद्धा भवन्तः शलयः पावकाः । नारियों के लिये हितकारिणो वेदवाणो का स्वाध्याय (आरभध्वम्) . मन से शुचि तथा शरोर से (पावकाः) पवित्र होकर (इह) इस पाथिव जीवन में, (इडया!) अन्न दारा सहभोजों द्वारा (सधमादम्) पारस्परिक चिरकाल के लिये (उच्चरन्तम्) ऊपर भाकाशमे विचरते (सूयम्) सूय को (पश्येम) हम देखं । नस-नाडियों मे (आ बबन्ध) सव म्रोर वान्ध रखीदहै, (यत्) जो कि ।

English

pillar. Unanimous with Yama and the Fathers, make this man rise and reach the loftiest heaven.

अध्याय ६

श्लोक 59.3

वि॒श्वरू॑पां सु॒भगा॑म॒च्छाव॑दामि जीव॒लाम्।सा नो॑ रु॒द्रस्या॒स्तां हे॒तिं दू॒रं न॑यतु॒ गोभ्यः॑

viśvarūpāṃ subhagāmacchāvadāmi jīvalām| sā no rudrasyāstāṃ hetiṃ dūraṃ nayatu gobhyaḥ

हिन्दी अर्थ

(अविमोक्यम्) खोली नहीं जा सकती, (ते) तेरी (तत्) उस रस्सीको (जामुषे) दीं तथा स्वस्थ जीवन के लिये, (वचसे) तेज के लिये, (बलाय) कां० ६1 अनु० ७। सु० ६३ अयववेद-माष्य ११३ निच्् तिः कच्छापत्तिः (निरत २।२।८) । खाने में असंग्रम के कारण . वस्तुभों के अधिक प्रथोगसे प्रीवा की नस नाडियां सूज जाती रहै । अतः आघायं द्वारा प्रेरित होकर खाने मे मधुर अन्न का सेवन करना चाहिए ।

English

Thou, mighty Agni, good and true, gatherest up all precious things. Bring us all treasures as thou art enkindled at libation’s place. To promote unanimity in an assembly

अध्याय ६

श्लोक 60.1

पतिलाभः।१-३ अथर्वा।अर्यमा।अनुष्टुप्।अ॒यमा या॑त्यर्य॒मा पु॒रस्ता॒द् विषि॑तस्तुपः ।अ॒स्या इ॒चछन्न॒ग्रुवै॒ पति॑मु॒त जा॒याम॒जान॑ये

patilābhaḥ| 1-3 atharvā| aryamā| anuṣṭup| ayamā yātyaryamā purastād viṣitastupaḥ | asyā icachannagruvai patimuta jāyāmajānaye

हिन्दी अर्थ

(तिरमतेजः) है तिग्म ओर तेज वस्तुओं वाली (निक ते) कृच्छापत्ति (ते) तेरे शमन के लिये (नमः) उचित अन्न का प्रयोग (भस्तु) हौ, (विचृत) तु खोल दे । (यमः) नियन्ता परमेश्वर (त्वा) तुक्ष है रूण (यमाय) नियन्ता" परमेश्वर के किये (मृत्यवे) जो कि मृत्युः करता है (नमः अस्तु) नमस्कार हो । है । एसे पदार्थो के अधिक खाने-पोने से गल बन्ध हो जातादहै, गला रुग्ण हो जाता है। नमः अन्ननाम (निघं० २७) नमः का अर्थं नमस्कारतो प्रसिद्ध ही है। विचृत=वि+चृती हिसाग्रन्थनयोः (तुदादिः). वि (विगत करना ) +- चत (वन्धन से) 1 परमेषवर का नाम मृघ्यु भहै । यथा'स एव हे शिष्य ! तुजे स्वस्थ कर मृज प्रदान किया हि

English

Agree and be united: let your minds be all of one accord, Even as the Gods of ancient days, unanimous, await their share.

अध्याय ६

श्लोक 60.2

अश्र॑मदि॒यम॑र्यमन्न॒न्यासां॒ सम॑नं य॒ती।अ॒ङ्गो न्वऽर्यमन्न॒स्या अ॒न्याः सम॑न॒माय॑ति

aśramadiyamaryamannanyāsāṃ samanaṃ yatī| aṅgo nva'ryamannasyā anyāḥ samanamāyati

हिन्दी अर्थ

को द्विजन्मा बनाकर नवजीवन देने वाला, यथा “आचार्यो मृत्युः” (मयं ११।५।१४। षस अथं मे (“मह्यम्" दारा ब्रह्मचारी के पिता का निदेश हमा ह। ११४ अथवेवेद-भाष्य॒का० ६ । अनु० ७ । सू० ६३ हे निकंति अर्थात् कच्छापति ! (इह) इस मरत्य॑लोक में (अय- स्मधै) लोहनि्मित (दुपदे) पैरकीबेडीमेंतु (बेधिष) बान्धती दहै, तो गुरुम के साय (संविदानः) एेकमत्य को प्राप्त हो जा उनके निर्देशानु- सार निज जीवनचर्या कर , मौर है भाचायं ! तु (इमम्) इस शिष्य को , पितुभिः = विद्या प्रदाता गुर भौ पिता के सदृश ह । यथा--

English

The rede is common, common the assembly, common the law, so be their thoughts united. I offer up your general oblation: together entertain one common purpose. One and the same be your resolve, be all your hearts in har- mony:

अध्याय ६

श्लोक 60.3

धा॒ता दा॑धार पृथि॒वीं धा॒ता द्यामु॒त सूर्य॑म्।धा॒तास्या अ॒ग्रुवै॒ पतिं॒ दधा॑तु प्रतिका॒म्यऽम्

dhātā dādhāra pṛthivīṃ dhātā dyāmuta sūryam| dhātāsyā agruvai patiṃ dadhātu pratikāmya'm

हिन्दी अर्थ

१टस्पदे समिध्यसे स नो वसून्या भ॑र ॥४॥ या इस पाथिव शरीर के हृदय-स्थल में (समिष्यसे) मु प्रदीप्त होता च, . (सः) वह तु (नः) हमे (वसूनि) वास योग्य उत्तम गृणरूपी सम्पत्तियां गृङ ओर शिष्यो के भिवास स्थान आश्रम मे या उपासनालयमें कां० ६। अनु० ७ । सु० ६४ अथवववेद-भाष्य ११५

English

One and the same be all your minds that all may happily con- sent. A sacrificial charm against enemies

अध्याय ६

श्लोक 61.1

विश्वस्रष्टा।१-३ अथर्वा।रुद्रः।१ त्रिष्टुप्, २-३ भुरिक्।मह्य॒मापो॒ मधु॑म॒देर॑यन्तां॒ मह्यं॒ सूरो॑ अभर॒ज्ज्योति॑षे॒ कम्।मह्यं॑ दे॒वा उ॒त विश्वे॑ तपो॒जा मह्यं॑ दे॒वः स॑वि॒ता व्यचो॑ धात्

viśvasraṣṭā| 1-3 atharvā| rudraḥ| 1 triṣṭup, 2-3 bhurik| mahyamāpo madhumaderayantāṃ mahyaṃ sūro abharajjyotiṣe kam| mahyaṃ devā uta viśve tapojā mahyaṃ devaḥ savitā vyaco dhāt

हिन्दी अर्थ

देवा मागं यथा पूव सं जानाना उपाधते ॥१॥ मन (सं जानताम्) एक विध सकल्पो वाले हों । (यथा) जंसे (पूवं) विद्या से सम्पूणं (देवाः) विद्वान् (सं जानानाः) एक मत हो कर (भागम्) भज- नीय परमेएवर का (उपासते) उपासना करते्ह वेसेतुम भी किया (समितिः) राजसभा (समानो) एक हो, (व्रतम्) ब्रत (समानम्) एकरूप (जुहोमि) मे यन्न करता हुं, माहुति्यांः देता हू, (समानम) तुम्हारा एक- विध (चेतः) चिन्तनदहो (अभि सं विशध्वम्) एक चित्त दौ कर तुम राजसभा मे प्रवेश किया करो। १. पथवा मन्त्रः वेदिक विचार, वेदानुकूल विचार ।

English

The angry spirit hath relaxed: loose are the arms that act with mind. Do thou, destroyer, overcome and drive these foemen’s might away, and then bring opulence to us.

अध्याय ६

श्लोक 61.2

अ॒हं वि॑वेच पृथि॒वीमु॒त द्याम॒हमृ॒तूंर॑जनयं स॒प्त सा॒कम्।अ॒हं स॒त्यमनृ॑तं॒ यद् वदा॑म्य॒हं दैवीं॒ परि॒ वाचं॒ विश॑श्च

ahaṃ viveca pṛthivīmuta dyāmahamṛtūṃrajanayaṃ sapta sākam| ahaṃ satyamanṛtaṃ yad vadāmyahaṃ daivīṃ pari vācaṃ viśaśca

हिन्दी अर्थ

३. राजसमा मे प्रवेश फर, कार्यारम्म करने से पूवं, समान हवि दारा यज्ञ ११६ करणवेवेद-भाष्य कां० ६॥ गनु° ७। सु° ६५. एकरूप हो । हादिक भावनाएं एकरूप हों । (वः) तुम्हारा (मनः) मनन (समानम्) एकरूप (अस्तु) हा, (यथा) जिस प्र॑कार से कि (वः) (मनोयुजा = मनोयुजौ) विचयेषी मनो द्वारा प्रगृक्त हुए (वाहु) दोनों बाहु (अव) नीचे हो जांय। (पराशरः “पर” अर्थात् शत्रुओं का “आ” पूर्णरूप

English

The shaft for handless fiends which, Gods! ye cast against the handless ones,

अध्याय ६

श्लोक 61.3

अ॒हं ज॑जान पृथि॒वीमु॒त द्याम॒हमृ॒तूंर॑जनयं स॒प्त सिन्धू॑न्।अ॒हं स॒त्वमनृ॑तं॒ यद् वदा॑मि यो अ॑ग्नीषो॒मावजु॑षे॒ सखा॑या

ahaṃ jajāna pṛthivīmuta dyāmahamṛtūṃrajanayaṃ sapta sindhūn| ahaṃ satvamanṛtaṃ yad vadāmi yo agnīṣomāvajuṣe sakhāyā

हिन्दी अर्थ

(अदय) हिसित भर, (अधा अथा) तत्पश्चात् (रयिम्) उनके धन॑ को (नः) हमे (आ कृधि) प्राप्त करा । कां० ६.1 अनु° ७ । 'सू° ६६ अथववेद-भाष्यः ११७ प्रयोग पुमः भ क. सरके, परन्तु उनके जीवनो का अपहरण मँ नहीं करता । मन्व (१) मे भी बाहुं का कथन हुमा है, वहां केवल श््रुओं को नीचा कर उन के बाहुभों को निकम्मे कर देने का मभिप्रायहै,, उन्हे काटने का किया । हविषा द्वारा “सैनिक हविः” प्रतीत होते है, “अहम्” द्वारा सेना का मुख्याधिकारी है, जिे बाहु-छेदनरूपी दण्ड प्रदान करभे का अधिकार

English

With this, in shape of sacrifice, I rend the arms of enemies. Indra made first for Asuras the shaft designed for handless foes: Victorious shall my heroes be with Indra as their constant friend.

अध्याय ६

श्लोक 62.1

पावमानम्।१-३ अथर्वा।रुद्रः, वैश्वानरः, वातः, द्यावापृथिवि।त्रिष्टुप्।वै॒श्वा॒न॒रो र॒श्मिभि॑र्नः पुनातु॒ वातः॑ प्रा॒णेने॑षि॒रो नभो॑भिः ।द्यावा॑पृथि॒वी पय॑सा॒ पय॑स्वती ऋ॒ताव॑री य॒ज्ञिये॑ न पुनीताम्

pāvamānam| 1-3 atharvā| rudraḥ, vaiśvānaraḥ, vātaḥ, dyāvāpṛthivi| triṣṭup| vaiśvānaro raśmibhirnaḥ punātu vātaḥ prāṇeneṣiro nabhobhiḥ | dyāvāpṛthivī payasā payasvatī ṛtāvarī yajñiye na punītām

हिन्दी अर्थ

। " हस्वकार पथमं तेईस्तमघुरेभ्यः । पौषकों के लिये (नैहस्तम्) निहत््येपन का (चकार) दण्ड दिया । (मेदिना) सहायता द्वारा (मम) मुज्ञ सेनाधिपति के (सत्वानः) . शक्तिशाली सेनिक -=जो केवल जीवन का उेश्य भाणपोषण मात्र मानते है. अतः देवविरोधी हवि द्वारा (८: पं सेनाधिपति, (वृश्चामि) काटता हूं । (देवाः = दिवु

English

A charm for the destruction and plunder of enemies Handless be every foeman who assaileth, they who with missiles come to fight against us!

अध्याय ६

श्लोक 62.2

वै॒श्वा॒न॒रीं सू॒नृता॒मा र॑भध्वं॒ यस्या॒ आशा॑स्त॒न्वोऽवी॒तपृ॑ष्ठाः ।तया॑ गृ॒णन्तः॑ सध॒मादे॑षु व॒यं स्या॑म॒ पत॑यो रयी॒नाम्

vaiśvānarīṃ sūnṛtāmā rabhadhvaṃ yasyā āśāstanvo'vītapṛṣṭhāḥ | tayā gṛṇantaḥ sadhamādeṣu vayaṃ syāma patayo rayīnām

हिन्दी अर्थ

रहित कर दि, “-च्रओं के लिये, देवाः) है हमारे विजिगीषु सेनार्धिका- शतुओं के ˆ गहजं को, (अनेन) इस (हविषा) यृद्ध-यज्ञ साघक सम॑पयेनदर महता वधेन दरात्वषामघहारो विविधः ॥१॥ । अरि वजय प्राप्त कर शत्रुओं को.एक वार जर हथि- अस्तु) निहत्था हो जाय, हेधिहारो से रहित हो जाय, (ये) जौ शतु कि रियो ! तुम ¦ नम्) निर्या करने वाले (यम्) जिस (शरम्) हसक आयुध के साय श्ट (समपेय) सम्बद्ध कर, (एषाम्) इन शतुजो मे ( अघं-

English

Dash them together with great slaughter, Indra! and let their robber chief run pierced with arrows. Ye who run hither bending bows, brandishing swords and cast- ing darts.

अध्याय ६

श्लोक 62.3

वै॒श्वा॒न॒रीं वर्च॑स॒ आ र॑भध्वं शु॒द्धा भव॑न्तः॒ शुच॑यः पाव॒काः ।इ॒हेड॑या सध॒मादं॒ मद॑न्तो॒ ज्योक् प॑श्येम॒ सूर्य॑मु॒च्चर॑न्तम्

vaiśvānarīṃ varcasa ā rabhadhvaṃ śuddhā bhavantaḥ śucayaḥ pāvakāḥ | iheḍayā sadhamādaṃ madanto jyok paśyema sūryamuccarantam

हिन्दी अर्थ

ओर इस बाहुं को मै काटदेताहू, ताकिवे हथि रोका ११८ अथववेवेद-भाष्य का० ६ । भनु° ७। पू ६७ अघहारःन्पापी, जो कि सेनानायकं है । द्रातु=द्रा कत्सायां गवौ (तन्वानाः) धनुषो को ताने हुए, (आयच्छन्तः) धनुषो पर वाण चदा कर उन्हे खे चते हृए, (च) ओर (अस्यन्तः) वाणो को हेम पर फकते हुए (ये) जो तुम (शत्रवः) हि शत्रु ! (धावथ) फिस्भी भय के कारण से रहित कर दिये गए हो; (इन्द्रः) हमारा सच्राट् (अद) आजं (वः तुम्हारी (पराशरीत्) पराङ्मुख हओं की हिसा करे । परा, अशरीत्;

English

Handless be ye, O enemies! Let Indra mangle you to-day. Handless be these our enemies! We enervate their languid limbs.

अध्याय ६

श्लोक 63.1

वर्चोबलप्राप्तिः।१-४ द्रुणः।१ निर्ऋतिः, २ यमः, ३ मृत्युः, ४ अग्नि।१-3 जगती, २ अतिजगतीगर्भा, ४ अनुष्टुप्।यत् ते॑ दे॒वी निरृ॑तिराब॒बन्ध॒ दाम॑ ग्री॒वास्व॑विमो॒क्यं यत्।तत् ते वि ष्या॒म्यायु॑षे॒ वर्च॑से॒ बला॑यादोम॒दमन्न॑मद्धि॒ प्रसू॑तः

varcobalaprāptiḥ| 1-4 druṇaḥ| 1 nirṛtiḥ, 2 yamaḥ, 3 mṛtyuḥ, 4 agni| 1-3 jagatī, 2 atijagatīgarbhā, 4 anuṣṭup| yat te devī nirṛtirābabandha dāma grīvāsvavimokyaṃ yat| tat te vi ṣyāmyāyuṣe varcase balāyādomadamannamaddhi prasūtaḥ

हिन्दी अर्थ

अथँषामिन्दर वेदांसि श्तश्षो वि भ॑जामहै ॥३॥ हे सञ्राट् ! (एषाम्) इन के (शतशःवेदां घि) संकडों प्रकारके धनो को हषक्षये (भ्वादिः) । वेदः)धननाम निघं° २।१०) (इन्रः) सम्राट (च) ओौर (पूषा) पोषणाधिकारी (सर्वतः) सबं भय कां०,६ । अनु० ७। सू०६७ अथववेद-भाष्य

English

So let us part among ourselves, in hundreds, Indra! all their wealth. A charm for the destruction and plunder of enemies Indra and Pūshan have gone forth along the ways on every side.

अध्याय ६

श्लोक 63.2

नमो॑ऽस्तु ते निरृते तिग्मतेजोऽय॒स्मया॒न् वि चृ॑ता बन्धपा॒शान्।य॒मो मह्यं॒ पुन॒रित् त्वां द॑दाति॒ तस्मै॑ य॒माय॒ नमो॑ अस्तु मृ॒त्यवे॑

namo'stu te nirṛte tigmatejo'yasmayān vi cṛtā bandhapāśān| yamo mahyaṃ punarit tvāṃ dadāti tasmai yamāya namo astu mṛtyave

हिन्दी अर्थ

बाकि शतरगों की (अमूः) वे (सेनाः) सेनाए, (अदय) आज या अब सब मागो का निरीक्षण स्वयं करं या करवाए फि शत्रु सेनाएं किस-किस मागे से आक्मण कर सकती है, मौर किस-किस मागं सेः अपनी सेना को बायुध मौर खाद्य सामग्री पहुंचा जा सकती है । हस का निरीक्षण कर, यथोचित प्रबन्ध करें, ताकि शतु सेनाओं का सब प्रयत्न विफल हौ जाय । (भमिधाः) है तमो ! (मूढाः चरत) तुम जयके उपायकेज्ञानसे रहित हुए विचरो, (इव) जसे (अशीर्षाणः) सिरकटे (अहयः) साप दध र्-उघर समुढुकते रहते ह । (अग्निमूढानाम्) हमारे अग्रणी की को मारदेनेको आज्ञादे। शेष सेनिक मारने न चाहिए । अथवा (अजिनम्) चमो को (एषु) इनं निज संनिकोंने (शा नद्य) बान्ध

English

To-day those hosts of enemies must flee bewildered far away. Ye foes, come hitherward dismayed like serpents when their heads are gone.

अध्याय ६

श्लोक 63.3

अ॒य॒स्मये॑ द्रुप॒दे बे॑धिषे इ॒हाभिहि॑तो मृ॒त्युभि॒र्ये स॒हस्र॑म्।य॒मेन॒ त्वं पि॒तृभिः॑ संविदा॒न उ॑त्त॒मं नाक॒मधि॑ रोहये॒मम्

ayasmaye drupade bedhiṣe ihābhihito mṛtyubhirye sahasram| yamena tvaṃ pitṛbhiḥ saṃvidāna uttamaṃ nākamadhi rohayemam

हिन्दी अर्थ

(अभयम् कृधि) मौर हमे भय रदित कर । (अमित्रः) शतु (पराङ्) २. पदपाठ मेँ “भियं कृधि” पाठ है । अर्थात् शत्रु कै लिये मयैदा कर।वे यह् भान कर भयमीत हो कि यै हरिण कोर गदूमृत शषच्छ्यां है जो कि युद्ध कर रही ये हमारा साक्ष कर देगी । अतः वे गुद स्थल से भाग ओय । कां० ६। अनु० ७ । सु ६८ अथवंवेद-भाष्य १२१ म २ कि उदकं को उष्ण करके लाता है 1 अन्तरिक्ष कों वापं उदक को उष्ण १२० अथवेवेद-माष्य॒का० ६। गनु० ७। सू° दन

English

Let Indra slay each bravest one of you whom Agni hath con- fused. Gird thou a bullock’s hide on these, make those as timid as the deer. Let the foe flee away, and let his kine come hither-ward to us.

अध्याय ६

श्लोक 63.4

संस॒मिद् यु॑वसे वृष॒न्नग्ने॒ विश्वा॑न्य॒र्यृ आ।इ॒डस्प॒दे समि॑ध्यसे॒ स नो॒ वसू॒न्या भ॑र

saṃsamid yuvase vṛṣannagne viśvānyaryṛ ā| iḍaspade samidhyase sa no vasūnyā bhara

हिन्दी अर्थ

मादित्य, श्र मौर वसु भो ४८, ३६ ओर २४ वर्षो के स्नातक है, जोकि बरह्मचयश्िम मे गुरेरूप हैँ । चिकषैत्सतु भ्रनाप॑तिदीर्थायुखाय चक्ष॑से ॥२॥ रूपा, आचाययेपत्नी (एमष्शरु) मोछठो का (वपतु) छदन करे, आपः उन्दन्तु) परस्पर सहयोग से मुण्डन करो । ब्रह्मचारो के उपनयन कमे में इस सूक्त का विनियोग हमा है (कौशिक सूत्र ५५।१-३) । उपनयन का अथं है “समीप लाना” । आचाय अशरीरो देवता विशेष नहीं । (अथवं० ८।२।१७) मे सायणाचाये ने कहा ।

English

A charm to accompany the shaving of the beard Savitar hath come hither with the razor: come thou, O Vāyu, with the heated water.

अध्याय ६

श्लोक 64.1

सांमनस्यम्।१-३ अथर्वा।सांमनस्यम्, १ विश्वे देवाः।अनुष्टुप्, (२ त्रिष्टुप्)।सं जा॑नीध्वं॒ सं पृ॑च्यध्वं॒ सं वो॒ मनां॑सि जानताम्।दे॒वा भा॒गं यथा॒ पूर्वे॑ संजाना॒ना उ॒पास॑ते

sāṃmanasyam| 1-3 atharvā| sāṃmanasyam, 1 viśve devāḥ| anuṣṭup, (2 triṣṭup)| saṃ jānīdhvaṃ saṃ pṛcyadhvaṃ saṃ vo manāṃsi jānatām| devā bhāgaṃ yathā pūrve saṃjānānā upāsate

हिन्दी अर्थ

जोकिकेण छेदन को जानता है,-(वरुणस्थ) वरण-कर्ता आचार्यं के है कि "हे देव सवितः, संस्कारकपुरुष, स्वं “वप्ता” केशानां छेता “नापितः” मे सायणाचायं॒ने “सविता” को “पुरुष” तथा “नापित” कहा है । होता है जो कि क्षुरेण" उस्तरे के साथ ¦ “भा अगन्” भाया है । १२२ मथवेवेद-भाष्य का० ६। अनु०७। सू० ६ ..

English

One-minded let Ādityas, Rudras, Vasus moisten the hair: shave ye who know King Soma. Let Aditi shave the beard, and let the Waters bathe it with their strength: p. a232 Prajāpati restore his health for sight and days of lengthened life!

अध्याय ६

श्लोक 64.2

स॒मा॒नो मन्त्रः॒ समि॑तिः समा॒नी स॑मा॒नं व्र॒तं स॒ह चि॒त्तमे॑षाम्।स॒मा॒नेन॑ वो ह॒विषा॑ जुहोमि समा॒नं चेतो॑ अभि॒संवि॑शध्वम्

samāno mantraḥ samitiḥ samānī samānaṃ vrataṃ saha cittameṣām| samānena vo haviṣā juhomi samānaṃ ceto abhisaṃviśadhvam

हिन्दी अर्थ

वपत) इस केशछछठेदन को केरो ताकि विद्याकी समाप्ति के अनन्तर सुरायां सिच्यमानायां कोले मधु तन्मयि ॥१॥ (गोषु) गौभों मे (यत्) जो (यशः) यश है; (सिच्यमानायाम्) सीचे जाने वाले (सुरायाम्) शुद्ध जल में, (कीलाले') अन्न में (मधु) जो मिठास दहै (तत्) वह् सब (मयि) मूक्ञमेहो। पवत मे यश है दुता । भरगराटो अर्थात् अरों षाले घराटोंमे यश है अन्न को पोसना; यहां केवल पीसना भथ अभिप्रेत है, कुकर्मो तथा व्यसनो को प१।स डालना । “मरो वाले राट” ह “पनचक्कियां” जो कि पानीके वेग द्वारा चलतीदहैँ। हिरण्यमें यश दहे हूदयरमणीयता, सबके हृदयो को रमणीय होना । गौओंमे यश द निज दुग्ध द्वारा पालन-पोषण, कृषि कममे सीचा गना, मीठा उदक मीठे अखका उत्पादनं करेतादहै,

English

The razor used by Savitar, for shaving, who knoweth Varuna and royal Soma, Even with this shave ye this man, O Brāhman. Let him be rich in horses, kine, and children.

अध्याय ६

श्लोक 64.3

स॒मा॒नी व॒ आकू॑तिः समा॒ना हृद॑यानि वः ।स॒मा॒नम॑स्तु वो॒ मनो॒ यथा॑ वः॒ सुस॒हास॑ति

samānī va ākūtiḥ samānā hṛdayāni vaḥ | samānamastu vo mano yathā vaḥ susahāsati

हिन्दी अर्थ

खारा-उदक कृषि कमं मे न सींचना चाहिय । भारतीय दशन शास्त्रों के अनुसार शुद्ध जलकागृणहै माधुयं । कीलाल दहै अघ्न (निघं० २।७) प्रकरणानुसार मधुर अस्र, न कि खटा कसला मन्न) सायणाचायं ने “भरगराटेषु” के निम्नलिखित अथं किये हँ “रथचक्रा- , का० ६। अनु ७। सु° ६९ अथर्ववेद-भाष्य १२२ वयवाः कोलका. अराः । तान् गिरति आत्मना संश्नेषयतीति अरगरो (मा) मक्षे (सारघेण) सरघा अर्थात् मधुमक्खी के ( मधुना) मधु सदश (जनान् अनु) सब जनों के प्रति, अनुकूललूप, (भगेस्वतीम्) माधय के

English

A priest’s prayer for power and glory Mine be the glory in the hill, in vales, in cattle, and in gold, Mine be the sweetness that is found in nectar and in flowing wine!

अध्याय ६

श्लोक 65.1

शत्रुनाशनम्।१-३ अथर्वा।(चन्द्रमाः) इन्द्रः, पराशरः।अनुष्टुप्, १ पथ्यापङ्क्तिः।अव॑ म॒न्युरवाय॒ताव॑ बा॒हू म॑नो॒युजा॑ ।परा॑शर॒ त्वं तेषां॒ परा॑ञ्चं॒ शुष्म॑मर्द॒याधा॑ नो र॒यिमा कृधि

śatrunāśanam| 1-3 atharvā|(candramāḥ) indraḥ, parāśaraḥ| anuṣṭup, 1 pathyāpaṅktiḥ| ava manyuravāyatāva bāhū manoyujā | parāśara tvaṃ teṣāṃ parāñcaṃ śuṣmamardayādhā no rayimā kṛdhi

हिन्दी अर्थ

(भयो) तथा (यशः)कीति को, (अथो) तथा (यज्ञस्य) यज्ञ का (यत्) जो (पयः) सारभूत फल है ५( तत् ) उप को प्रजापतिः ) प्रजाभों का स्वामी परमेश्वर (मयि) मृक्षमे (दहतु) सुदुढ़ खूप में स्थापित करे, (दिवि) द्युलोक में (इव) . .जसे (याम्) द्यौ को उसने स्थापित किया हृभा है, सुदृढ शूप में । १२४ सथवेवेद-भाष्य कां० ६। अनु० ७। सू० ७० (१-३) । काड्धायनः । अघ्न्या अगतौ । (यथा) जिस प्रकार मांसाहारी को (मांसम्) मांस, (यथा) जसे सुरापायी को (सुरा) सुरा, (यथा )जेसे कितव को (अधिदेवने) यूतकमं म (अक्षाः) पासे प्रिय होते है, (यथा) जंसे (वृषण्यतः पुसः) कामाभिलाषी है (एवा) इसी प्रकार (अघ्न्ये) है अह्ननीये गौ (ते मनः) तेरा मन

English

With your delicious honey balm me, Asvins, Lords of splendid light! That clear and resonant may be the voice I utter to mankind.

अध्याय ६

श्लोक 65.2

निर्ह॑स्तेभ्यो नैर्ह॒स्तं यं दे॑वाः॒ शरु॒मस्य॑थ ।वृ॒श्चामि॒ शत्रू॑णां बा॒हून॒नेन॑ ह॒विषा॒हम्

nirhastebhyo nairhastaṃ yaṃ devāḥ śarumasyatha | vṛścāmi śatrūṇāṃ bāhūnanena haviṣāham

हिन्दी अर्थ

तथा पदनाम (निषं० ५।४) । पदनाम का मर्भिप्रायहै “योगिकनाम” । कर सकती । गौ का निज जात वत्स के साथ स्वाभाविक प्रम होतादहीहै, है । यथा “अन्यौ अन्यमभिजातमिवाण्न्या” (अथवं० ३।३०।१) 1 भतः गौ मौर गृहिणी दोनों ही सन्तानोत्पादन करतीं तथा सन्तानों को निज दुग्ध पालन-पोषण मे तेरा विशेष ध्यान होना चाहिए । “मातृमान् पुरुषो वेद" '

English

In me be strength, in me be fame, in me the power of sacrifice: Prajāpati establish this in me as firm as light in heaven! A benediction on cow and calf

अध्याय ६

श्लोक 65.3

इन्द्र॑श्चकार प्रथ॒मं नै॑र्ह॒स्तमसु॑रेभ्यः ।जय॑न्तु सत्वा॑नो॒ मम॑ स्थि॒रेणेन्द्रे॑ण मे॒दिना॑

indraścakāra prathamaṃ nairhastamasurebhyaḥ | jayantu satvāno mama sthireṇendreṇa medinā

हिन्दी अर्थ

चा रों दृष्टान्त यद्यपि हीनोपमाखूप है, परुनतु ्रमासक्ति के दणनि मे उप- का० ६। अनु० ७। सू० ७० भथववेद-भाष्य १२५ (यथा) जसे (हस्ती) हाथी (हस्तिन्याः) हिनो के (पदेन) पग के अनुकल (पदम्) निज पद को प्रेमवश हुजा ( उदयुजे) उद्-यक्त करता टे, चलते समय उठाता है, (यथा) जेसे (वृषण्यतः) कामाभिलाषी (पुसः) “त” का लोप तथा छान्दस विकरण का लुक् (सायण) । (यथा) जसे (प्रधिः) रथचक्र की नेमि, (यथा) जेसे (उपधिः) शैमि से सम्बद्ध रथचक्र का चेरा, वलय, जिसके साथ “अरे” लगे रहते है;

English

As wine associates with flesh, as dice attend the gaming-board, As an enamoured man’s desire is firmly set upon a dame,

अध्याय ६

श्लोक 66.1

शत्रुनाशनम्।१-३ अथर्वा।इन्द्रः।अनुष्टुप्, १ त्रिष्टुप्।निर्ह॑स्तः शत्रु॑रभि॒दास॑न्नस्तु॒ ये सेना॑भि॒र्युध॑मा॒यन्त्य॒स्मान्।सम॑र्पयेन्द्र मह॒ता व॒धेन॒ द्रात्वे॑षामघहा॒रो विवि॑द्धः

śatrunāśanam| 1-3 atharvā| indraḥ| anuṣṭup, 1 triṣṭup| nirhastaḥ śatrurabhidāsannastu ye senābhiryudhamāyantyasmān| samarpayendra mahatā vadhena drātveṣāmaghahāro vividdhaḥ

हिन्दी अर्थ

१२६ अथवेवेद-भाष्य का० ६ । अनु० ७। सू° ७१ गौ, बकरी, भेड (यद् एव) जो ही (किच) कुच्छ (अहम्) भेन (प्रति जग्रह) दानरूप मे ग्रहण क्रिया है, (तत्) उस सब को (होता) दाता द्वारा उत्तम विधि पूवक दिथा हुमा (कृणोतु) करे । नामक परमेश्वरसे प्रार्थना करता क्रि आगे से सदा सुहत होने वाला की भी अभिलाषा सूचित कौ है, ताकि व्यक्ति विवेकपूर्वेक अन्न

English

So let thy heart and soul, O Cow, be firmly set upou thy calf. As the male elephant pursues with eager step his female’s track, As an enamoured man’s desire is firmly set upon a dame,

अध्याय ६

श्लोक 66.2

आ॒त॒न्वा॒ना आ॒यच्छ॒न्तोऽस्य॑न्तो॒ ये च॒ धाव॑थ ।निर्ह॑स्ताः शत्रवः स्थ॒नेन्द्रो॑ वोऽद्य परा॑शरीत्

ātanvānā āyacchanto'syanto ye ca dhāvatha | nirhastāḥ śatravaḥ sthanendro vo'dya parāśarīt

हिन्दी अर्थ

एक गोल फलक नम्य होता है, जिस कैसा अरोका एकं किनारा सम्बद्ध रहता है, ओर दूसरा किनारा पिये कौ प्रधि अर्थात् परिधिके साथ लगा रहता है । मौर गोलाकार परिधि प्रधि मी गोलाकार में कुकौ हुई ऽउपधियों अर्थात् पुदिव्यो, अवयवो के जोह द्वारा बनी होकर इन पुद्ठ्यों उपधियों के साथ कां० ६ । अनु ७। सू० ७१ अथववेद-भाष्य १२७ खा सके, ओौर विवेकपूवंक प्रतिग्रह कर सके । मनुनेतो कहाहै कि यन्मां हुतमहूंतमाजगामं दन्तं पितृभिरलुंमतं मनुष्यः । मनः) मेरा मन (इव) मानो (उद् रारजोति) उद्धषित हृभाहै, या राग उत्तम यज्ञशेषरूप (कृणोतु) करे ।

English

So let thy heart and soul, O Cow, be firmly set upon the calf.

अध्याय ६

श्लोक 66.3

निर्ह॑स्ताः सन्तु॒ शत्र॒वोऽङ्गै॑षां म्लापयामसि ।अथै॑षामिन्द्र॒ वेदां॑सि शत॒शो वि भ॑जामहै

nirhastāḥ santu śatravo'ṅgaiṣāṃ mlāpayāmasi | athaiṣāmindra vedāṃsi śataśo vi bhajāmahai

हिन्दी अर्थ

बन्न तो हुतरूप है । उसके ग्रहण करने से मन उदीप्त होता है, उद्धषित होता है उद् राजु दीप्तौ, भौर यज्ञ किये विना, परन्तुफिरभी सवं साधारण मनुष्यों दवारा अनुज्ञात अन्न, जोकि सेवन करने वाले को ससारिकयाधनकेराग से रञ्जितकर देताहै। इन दोनों प्रकारके १ अथववेद-भाष्य कां० ६। अनु० ७। समूु० ७२ छन 1 बतु ७.। पुर ७९ अयुननेवन्ाश्य १८२९ यह् मनुष्य का स्वभाव है कि वह् अनुचित काम करके भी उस कफे † ओौर वह् अनुचित कर्मो के करने से उपरत हो जाता. है ।

English

Close as the felly and the spoke, fixt as the wheel-rim on the nave, As an enamoured man’s desire is firmly set upon a dame, So let thy heart and soul, O Cow, be firmly set upon thy calf.

अध्याय ६

श्लोक 67.1

शत्रुनाशनम्।१-३ अथर्वा।इन्द्रः।अनुष्टुप्।परि॒ व॑र्त्मा॑नि स॒र्वत॒ इन्द्रः॑ पू॒षा च॑ सस्रतुः ।मुह्य॑न्त्व॒द्यामूः सेना॑ अ॒मित्रा॑णां परस्त॒राम्

śatrunāśanam| 1-3 atharvā| indraḥ| anuṣṭup| pari vartmāni sarvata indraḥ pūṣā ca sasratuḥ | muhyantvadyāmūḥ senā amitrāṇāṃ parastarām

हिन्दी अर्थ

हारा, (असितः) बन्धन रहित अर्थात् सीमा रहित भाकाश (प्रथयते) प्रथित होता है, विस्तृत हीता है, ओर (वशान् अनु) कामनानुसार (वपुषि). नानाविध शरीरो का (कृण्वन्) वहं परमेष्वर पदा करता है (एवा) दसी प्रकार (सदसा) षाह द्वारा (ते) है राजन् ! तेरा (शेप राञ्य,, (अयम् अकरः) जो कि इस सूरय को तरह ज्ञानप्रकाश से प्रकाशित हुमा है वायुविकार द्वारा पेटस्थूलहो जातादहै, फुल जाता है । परस्वतः=पुवे- काल फे चक्रवर्ती" राजा का । “पारस्वतम्'पंछान्दस पाठ है, ओर लौकिक संस्कृत पाठ है "पाराव- 1 पद प्रतोत होता है, जो कि “पारावतम्” सम्भव है । पारावतं ्है।इनः मे जितने-जितने तारा हवे उस-उस के गङ्ख है, गवयव

English

A priest’s benediction after meat What food I eat of varied form and nature, food whether gold, or horse, sheep, goat, or

अध्याय ६

श्लोक 67.2

मू॒ढा अ॒मित्रा॑श्चरताशी॒र्षाण॑ इ॒वाहयः॑ ।तेषां॑ वो अ॒ग्निमू॑ढाना॒मिन्द्रो॑ हन्तु॒ वरं॑वरम्

mūḍhā amitrāścaratāśīrṣāṇa ivāhayaḥ | teṣāṃ vo agnimūḍhānāmindro hantu varaṃvaram

हिन्दी अर्थ

इच्छा कामना । शपः =पसः = राष्ट्रम् ह) राट् (भथर्व० २।४१) कहा है । अर्थात् पृथिवीके सब जनों का एक राजा, 4 मथवेवेद-भाष्य कां० ६। अनु०° ७। सु०७२ ( है । प्रत्येक “पारावत” आदि जितनी डिगयियों अंशो मे फला हुमा है, विस्तृत हभ है, उतने विस्तार वाला उस-उस का मानो राष्ट है, राड

English

bullock, Whatever gift I have received, may Agni the Hotar make it sacrifice well-offered. Whatever, sacrificed or not, hath reached me, bestowed by men and sanctioned by the

अध्याय ६

श्लोक 67.3

ऐषु॑ नह्य॒ वृषा॒जिनं॑ हरि॒णस्या॒ भियं॑ कृधि ।परा॑ङ॒मित्र॒ एष॑त्व॒र्वाची॒ गौरुपे॑षतु

aiṣu nahya vṛṣājinaṃ hariṇasyā bhiyaṃ kṛdhi | parāṅamitra eṣatvarvācī gaurupeṣatu

हिन्दी अर्थ

सदृश विस्तृत हो र वतमान द्युलोक के चित्र अभिप्रेत वेदिक-चि्षो फे अनवाक = सवेथा अनुरूप नहीं ह । चित्रो कौ व्याख्या परिशिष्ट मं देखिए । नि ॐ (इह) यहां (आयातु) आए (वर्णः) वरुण राजा, (सोमः) सेना- यहां (आ यातु) आए, (वसुभिः) वघुमों श््रौ, आदित्यो के साथ । ७।४।२४) । वसुभिः पद, षां ओर आदित्यो का उपलक्षक है । ये है लगाया गया है, मौर अधिकारियों तथा विद्वानों को तदथं आमन्त्रित

English

Fathers, Whereby my heart seems to leap up, may Agni the Hotar make that sacrifice well-offered.

अध्याय ६

श्लोक 68.1

वपनम्।१-३ अथर्वा।१ सविता, आदित्याः, रुद्राः, वसवः, २ अदितिः, आपः, प्रजापतिः, ३ सविता, सोमः, वरुणः।१ पुरोविराडतिशाक्वरगर्भा चतुष्पदा जगती, २ अनुष्टुप्, ३ अतिजगतीगर्भा त्रिष्टुप्।आयम॑गन्त्सवि॒ता क्षु॒रेणो॒ष्णेन॑ वाय उद॒केनेहि॑ ।आ॒दि॒त्या रु॒द्रा वस॑व उन्दन्तु॒ सचे॑तसः॒ सोम॑स्य॒ राज्ञो॑ वपत॒ प्रचे॑तसः

vapanam| 1-3 atharvā| 1 savitā, ādityāḥ, rudrāḥ, vasavaḥ, 2 aditiḥ, āpaḥ, prajāpatiḥ, 3 savitā, somaḥ, varuṇaḥ| 1 purovirāḍatiśākvaragarbhā catuṣpadā jagatī, 2 anuṣṭup, 3 atijagatīgarbhā triṣṭup| āyamagantsavitā kṣureṇoṣṇena vāya udakenehi | ādityā rudrā vasava undantu sacetasaḥ somasya rājño vapata pracetasaḥ

हिन्दी अर्थ

विदानो फी, देखो (छान्दोग्य उप० ६।१६); जसे कि बी ०.ए, एम०ए०, खाक्टर । ० ६ । अनु० ८ । सु ७४ अथववेद-भाष्य १३२ भयवंवेद-भाष्य का०६। अनु ८। सू० ७४ तान्त्सीवयामि हविषां घृतेन मयि सजाता रमां जी न पर्षा अ ¢ करं ब्रह्मणश्तिङार श

English

What food I eat unjustly, Gods! or, doubtful between bestow- ing and refusing, swallow, Through greatness of Vaisvānara the mighty may that same food be sweet to me and blessed! A charm to restore or increase virile power

अध्याय ६

श्लोक 68.2

अदि॑तिः॒ श्मश्रु॑ वप॒त्वाप॑ उन्दन्तु॒ वर्च॑सा ।चिकि॑त्सतु प्र॒जाप॑तिर्दीर्घायु॒त्वाय॒ चक्ष॑से

aditiḥ śmaśru vapatvāpa undantu varcasā | cikitsatu prajāpatirdīrghāyutvāya cakṣase

हिन्दी अर्थ

शरीरो, मनो, तथा ब्रतों भौर क्मोकीदृष्टिसे तुम आपसमें मिले लगे दरवार मे एकच्रित हए अधिकारियों ओौर शिक्षकों पौ भाषण है । शुष्मम् बलनाम (निषं० २।९) । वास्तोष्पतिरतुं बो जोहवीतु मयि सजाता रमातिवों अस्त ।३। सनं वो मनसोऽयो ०१ दः । (वः) तुम्हारे (मनसः) मनो का (संज्ञपनम्) सांमनस्य हो, (अयो)

English

Sicut anguis niger ad voluntatem se extendit, Asurarum arte magica formas novas efficiens, sic fascinum tuum, partem cum parte, conjunctum, hic hymnus efficiat.

अध्याय ६

श्लोक 68.3

येनाव॑पत् सवि॒ता क्षु॒रेण॒ सोम॑स्य॒ राज्ञो॒ वरु॑णस्य वि॒द्वान्।तेन॑ ब्रह्माणो वपते॒दम॒स्य गोमा॒नश्व॑वान॒यम॑स्तु प्र॒जावा॑न्

yenāvapat savitā kṣureṇa somasya rājño varuṇasya vidvān| tena brahmāṇo vapatedamasya gomānaśvavānayamastu prajāvān

हिन्दी अर्थ

हे मभ्यागतरो ! (इह एव) यहां ही मेरे बातिच्य भे (स्त) होभो पथा (हृदः) हृदयो का (संज्ञपनम्) सांमनस्य हो । (अथो ) तथा (भगस्य) रोध (कृणोतु) करे । (वास्तोष्पतिः ) राजकीय गृहोंका स्वामो (अनु) निरन्तर (वः) वहारा (जोहवीतु)बार-बार आह्वान करता रहै (सजाताः) रहा, (मा गपयात) हम से जुदा न होभो । (पूषा) अक्नादि द्वारा पोषक

English

Velut penis (tayadarus quem ventus permagnum fecit, quantus. est onagri penis, tantus penis tuus increscat. Quantum estonagri membrum masculinum, elephanti, asinique, quantum est fortis equi,

अध्याय ६

श्लोक 69.1

वर्चःप्राप्तिः।१-३ अथर्वा।बृहस्पतिः, अश्विनौ।अनुष्टुप्।गि॒राव॑र॒गरा॑टेषु॒ हिर॑ण्ये॒ गोषु॒ यद् यशः॑ ।सुरा॑यां सि॒च्यमा॑नायां की॒लाले॒ मधु॒ तन्मयि॑

varcaḥprāptiḥ| 1-3 atharvā| bṛhaspatiḥ, aśvinau| anuṣṭup| girāvaragarāṭeṣu hiraṇye goṣu yad yaśaḥ | surāyāṃ sicyamānāyāṃ kīlāle madhu tanmayi

हिन्दी अर्थ

मनो का साम्मनस्य है एकविचार, हूदयों का साम्मनस्य है एकसवृश भसु कोटि के विद्भानों के साथ (संबभूवुः) सांमनस्यमे होते है, (उग्राः) उर ¦ (अहणीयमानाः) धिना लज्जा ओौर संकफोषं के (संबमूवः) सांमनस्य मे पोषकसामग्री दवारा तुम्हारो इतनी सेवा करे कि वापिस जानेका तुम्हारा होते है, (एवा) इसी प्रकार (त्रिणामन्) तीन लोकों को अपने प्रति.

English

tantus penis tuus increscat. A King’s charm to conciliate his discontented kinsmen

अध्याय ६

श्लोक 69.2

अश्वि॑ना सार॒घेण॑ मा॒ मधु॑नाङ्क्तं शुभस्पती ।यथा॒ भर्ग॑स्वतीं॒ वाच॑मा॒वदा॑नि॒ जनाँ॑ अनु॑

aśvinā sāragheṇa mā madhunāṅktaṃ śubhaspatī | yathā bhargasvatīṃ vācamāvadāni janā~ anu

हिन्दी अर्थ

नमानेवाने,लुकाने बाले, उन्हँ पराजित करनेवाले है परमेश्वर ! (बहूणीय- मानः) विना संकोच क्रियेत (इमान्) हन (जनान्) प्रजाजनों को (सं- मनसः) परस्पर सांमनस्थ वाले, तथा निज के साथ मिले मनोवाले (दह्) , है तब भी गुरुकलो म परस्पर सांमनस्य में रहते, प्रेमपूर्वक रहते । उग्र सेनाध्यक्ष ओर सेनाधिपति तथा सेनिक एक-संनिक स्यान मे भो पर- ,, उपासक मे भो परस्पर अनुरागयुक्त हौना चाहिए ।

English

Let Varuna come hither, Soma, Agni, Brihaspati come hither with the Vasus! Unanimous, ye kinsmen, come united, come to the glory of this mighty guardian. The inclination which your hearts have harboured, the purpose which hath occupied your

अध्याय ६

श्लोक 69.3

मयि॒ वर्चो॒ अथो॒ यशोऽथो॑ य॒ज्ञस्य॒ यत् पयः॑ ।तन्मयि॑ प्र॒जाप॑तिर्दि॒वि द्यामि॑व दृंहतु

mayi varco atho yaśo'tho yajñasya yat payaḥ | tanmayi prajāpatirdivi dyāmiva dṛṃhatu

हिन्दी अर्थ

वरुण-राष्टृपति निकाल देना हुं, (यः) जो (सपत्नः) शत्रु फि (पृत- नितरां बाधा डालने वालो (हविषा) नुद्धयज्ञ में हविरूप सेना दर रा(एनम्) ¦ इस सपत्न को (पराशरीत्) हिसा करे । ॑ ॑ क० ६ । मनु० ८। सू० ७६ अथववेद-भाष्य (वृव्रहा) आवरण अर्थात् घेरा डालने वाले शतुदल का ट्नन करने

English

spirits, This I annul with sacrifice and butter. In me be your sweet resting-place, O kinsmen.

अध्याय ६

श्लोक 70.1

अघ्न्याः।१-३ काङ्कायनः।अघ्न्याः।जगती।यथा॑ मां॒सं॑ यथा॒ सुरा॒ यथा॒क्षा अ॑धि॒देव॑ने ।यथा॑ पुं॒सो वृ॑षण्य॒त स्त्रि॒यां नि॑ह॒न्यते॒ मनः॑ ।ए॒वा ते॑ अघ्न्ये॒ मनोऽधि॑ व॒त्से नि ह॑न्यताम्

aghnyāḥ| 1-3 kāṅkāyanaḥ| aghnyāḥ| jagatī| yathā māṃsaṃ yathā surā yathākṣā adhidevane | yathā puṃso vṛṣaṇyata striyāṃ nihanyate manaḥ | evā te aghnye mano'dhi vatse ni hanyatām

हिन्दी अर्थ

वर्षो से भौ (पुनः) धिर लोट करं (न आयति) न जाये । अभिप्राय यह् किं इन्द्र उसे मार डाले, जहा से लौटकर आना नहं होता । मन्त्र में "तम्" द्वारा शतर-राजा का निदेश हुमा है । परावतः दर शसु (परावतः) दूरवर्ती (तिस्रः) तीन भूमिं को (अति एतु ) अति- कर जाए । (तिस्रः रोचनाः) तीन प्रदीप्त लोकों का ( अति एतु) अत- क्रमण कर जाय, (यतः) जहां से (न पुनः भायति) न फिर आए, न लौट

English

Stand even here; forsake me not. Before us may Pūshan make your path unfit to travel. Vāstoshpati incessantly recall you! In me be your sweet resting- place, O kinsmen! A King’s charm to secure the fidelity of his people

अध्याय ६

श्लोक 70.2

यथा॑ ह॒स्ती ह॑स्ति॒न्याः प॒देन॑ प॒दमु॑द्यु॒जे।यथा॑ पुं॒सो वृ॑षण्य॒त स्त्रि॒यां नि॑ह॒न्यते॒ मनः॑ ।ए॒वा ते॑ अघ्न्ये॒ मनोऽधि॑ व॒त्से नि ह॑न्यताम्

yathā hastī hastinyāḥ padena padamudyuje| yathā puṃso vṛṣaṇyata striyāṃ nihanyate manaḥ | evā te aghnye mano'dhi vatse ni hanyatām

हिन्दी अर्थ

दूरवर्ती" तीन भूमियां है बुध, वृहस्पति, शनैश्चर । पञ्चजन हँ शार वणो के जन ओर एक निषादरूपी, दस प्रकार पांच प्रकार के मनुष्य । शत जब मर कर पथिदी से दूर चला गया तो उसका सम्पकं पृथिवीवासी य एनं परिषीदंन्ति समादधति चक्षसे । १. भौर समीप की तीन भूमियां है, पृथिवीजो कि हमारे अत्यन्त समीप दहै, १२९ अथववेद-भाष्य कार ६। अनु० ८ । सुर ७ ओर बैठते है, ओर (चक्षसे) अग्विके दशन के लिये (समादधति)

English

Close gathered be your bodies: be your minds and vows in. unison! Here present Brāhmanaspati and Bhaga have assembled you.

अध्याय ६

श्लोक 70.3

यथा॑ प्र॒धिर्यथो॑प॒धिर्यथा॒ नभ्यं॑ प्र॒धावधि॑ ।यथा॑ पुं॒सो वृ॑षण्य॒त स्त्रि॒यां नि॑ह॒न्यते॒ मनः॑ ।ए॒वा ते॑ अघ्न्ये॒ मनोऽधि॑ व॒त्से नि ह॑न्यताम्

yathā pradhiryathopadhiryathā nabhyaṃ pradhāvadhi | yathā puṃso vṛṣaṇyata striyāṃ nihanyate manaḥ | evā te aghnye mano'dhi vatse ni hanyatām

हिन्दी अर्थ

अधि) क्षत्रिय के हृदय से (उदेतु) उद्गत हो, उ । । । होती है उसके दशन के लिये क्षत्रिय के चारों ओर बैठे संनिकों के उत्साहु- से उठती है मौर प्रजाजन इस अग्नि का दर्णन ध्यानपू्वक करते है । अग्नि के (पदम्) पैरको, चरण को (आयुषे) निज, प्रजाजन ओर राष्ट

English

Let there be union of your minds, let there be union of your hearts: All that is troubled in your lot with this I mend and harmonize. As, free from jealousy, the strong Ādityas have been the Vasus’ and the Rudras’ fellows.

अध्याय ६

श्लोक 71.1

अन्नम्।१-३ ब्रह्मा।अग्निः, ३ वैश्वानरः, देवाः।जगती, ३ त्रिष्टुप्।यदन्न॒मद्मि॑ बहु॒धा विरू॑पं॒ हिर॑ण्य॒मश्व॑मु॒त गाम॒जामवि॑म्।यदे॒व किं च॑ प्रतिज॒ग्रहाह॑म॒ग्निष्टद्धोता॒ सुहु॑तं कृनोतु

annam| 1-3 brahmā| agniḥ, 3 vaiśvānaraḥ, devāḥ| jagatī, 3 triṣṭup| yadannamadmi bahudhā virūpaṃ hiraṇyamaśvamuta gāmajāmavim| yadeva kiṃ ca pratijagrahāhamagniṣṭaddhotā suhutaṃ kṛnotu

हिन्दी अर्थ

के जीवन के लिये, (अहम्) मँ (आरभे भालमे) पक्ता हू, छता ह । वद्धा सत्यनाम (निषं० ३।१०) । अद्धातयः मेधाबिनाम (निषं ३। १५) । भग्नि जब सन्दीप्त होती है तो उस से घुयां उठता है, इसी प्रकार क्षात्राग्नि के मुख से धुञं उठता ह । सम्भवतः यह मूख “फेन हो । यो अंस्य समिधे वेद पतरियेण समाहिताम् । ॥॥1 प्रजाजन (अभिहार) कुटिल अर्थात् छल-कपट की नौति मे ( पदम्) षैर को (न निदधाति) नहीं रखता, पदन्यास नहीं करता, ओर न (मृत्यवे) मृत्यु के लिये पदन्यास वरता है । का०६। अनु० ८ । सु० ७७ अथववेद-भाष्य १३७

English

So free from jealousy, Lord of Three Titles! cause thou these people here to be one-minded. A charm to effect the removal of an enemy

अध्याय ६

श्लोक 71.2

यन्मा॑ हु॒तमहु॑तमाज॒गाम॑ द॒त्तं पि॒तृभि॒रनु॑मतं मनु॒ष्यैः ।यस्मा॑न्मे॒ मन॒ उदि॑व॒ रार॑जीत्य॒ग्निष्टद्धोता॒ सुहु॑तं कृणोतु

yanmā hutamahutamājagāma dattaṃ pitṛbhiranumataṃ manuṣyaiḥ | yasmānme mana udiva rārajītyagniṣṭaddhotā suhutaṃ kṛṇotu

हिन्दी अर्थ

अर्भिह्वारे = अभि +ह, कौटिल्ये (्वादिः) । कुटिल है छल-कषपट से नुमोदित छल-कपट रहित युद्ध को भपनाताहै। क्षत्रिय की समिधाहै हत कर देता है, परन्तु छलकपट का आश्रय नहीं लेता । को (न ध्नन्ति) नहीं मार पाते, (न) ओर न (सक्नान्) घेरा डाले बेठे शत्रुओं को वह् (मवगच्छति) अगत हो करतादहै, इन्दं कुछ जानताहो

English

Forth from his dwelling drive that man, the foeman who assaileth us: Through the Expellent sacrifice hath Indra rent and mangled him. Indra, Foe-Slayer, drive him forth into the distance most remote,

अध्याय ६

श्लोक 71.3

यदन्न॒मद्म्यनृ॑तेन देवा दा॒स्यन्नदा॑स्यन्नु॒त सं॑गृ॒णामि॑ ।वै॒श्वा॒न॒रस्य॑ मह॒तो म॑हि॒म्ना शि॒वं मह्यं॒ मधु॑मद॒स्त्वन्न॑म्

yadannamadmyanṛtena devā dāsyannadāsyannuta saṃgṛṇāmi | vaiśvānarasya mahato mahimnā śivaṃ mahyaṃ madhumadastvannam

हिन्दी अर्थ

ग्रहण करता है, नाम जपता है, इसे प्राप्तव्य देव जानकर इस को उपासना १. वथा अण्व; =मादित्यः । यथा “एको मश्वौ बहति सप्तनामा” (-ऋ० १। १६४।२) । “एकोऽश्यो बहति सप्तनामादित्यः'” (निरुक्त ४।४।२७) । रखा है। ये सब चलायमान ह- यह् दशनि के लिये मन्म विश्वको. (यः) जो (गोपाः) पृथिवी भौर वेदवाक् का रक्षकं परमेश्वर (परा-

English

Whence never more shall be return in all the years that are to come.

अध्याय ६

श्लोक 72.1

वाजीकरणम्।१-३ अथर्वाङ्गिराः।शेपोऽर्कः।१ जगती, २ अनुष्टुप्, ३ भुरिक्।यथा॑सि॒तः प्र॒थय॑ते॒ वशाँ॒ अनु॒ वपूं॑षि कृ॒ण्वन्नसु॑रस्य मा॒यया॑ ।ए॒वा ते॒ शेपः॒ सह॑सा॒यम॒र्कोऽङ्गे॒नाङ्गं॒ संस॑मकं कृणोतु

vājīkaraṇam| 1-3 atharvāṅgirāḥ| śepo'rkaḥ| 1 jagatī, 2 anuṣṭup, 3 bhurik| yathāsitaḥ prathayate vaśā~ anu vapūṃṣi kṛṇvannasurasya māyayā | evā te śepaḥ sahasāyamarko'ṅgenāṅgaṃ saṃsamakaṃ kṛṇotu

हिन्दी अर्थ

(तम्) उस परमेश्वर का (अपि) भी (हवे) मँ स्तुति-परार्थना में बलवान जाषवेदो निन्॑तय शृतं तं सन्त्वाटत॑ः । १. जगत् = गच्छतीति, गम् घातोः जगादेशः तथा (उणा० २।८५) । २. द्र के मागं =धुलोक सम्बन्धी । नीचे के मागे = बम्बर के मोर मूलोक अयवेवेद-भाष्य कां ६॥ भनु० ८। सु०७७

English

To the three distances, beyond mankind’s Five Races, let him go, Beyond the three skies let him go, whence he shall never come- again In all the years that are to be, long as the Sun is in the heaven.

अध्याय ६

श्लोक 72.2

यथा॒ पस॑स्तायाद॒रं वाते॑न स्थूल॒भं कृ॒तम्।याव॒त् पर॑स्वतः॒ पस॒स्ताव॒त् ते वर्धतां॒ पसः॑

yathā pasastāyādaraṃ vātena sthūlabhaṃ kṛtam| yāvat parasvataḥ pasastāvat te vardhatāṃ pasaḥ

हिन्दी अर्थ

कां० ६। अनु० ८। सु° ७८ अथववेद-भाष्य १२३६ हमारे राग-देष आदि की निवृत्ति कर, ताकि (शतम्) ' सौ (ते आवृतः) माता-पिता ने प्राप्त कराया है (ताम्) उसे (रसेन) दुग्ध, दधि, घृत तथा उस मे आहुतिषू्प में आहूत करना घाष्ठिये । भौर एक बार प्रभूत अन्न न खाकर बार-बार ्टसका सेवन करना चाद्ये । एसे सेवकं को 'मात्मयाजीः कहते ह । पत्नौ ने सन्तानोत्पादन करना है, अतः उस का पोषण रसदाश पौष्टिक भोयो वारा करते रहूना पति का कर्तेम्य है। अभिवधताम् न रय्या सहसरवर्यसेमो स्तामनुंपक्षितोः ॥२॥

English

A benediction on a new-born Kshatriya child Those who are sitting round this babe prepare him to be looked upon.

अध्याय ६

श्लोक 72.3

या॒व॒द॒ङ्गीनं॒ पार॑स्वतं॒ हास्ति॑नं॒ गार्द॑भं च॒ यत्।याव॒दश्वस्य वा॒जिन॒स्ताव॑त् ते वर्धतां॒ पसः॑

yāvadaṅgīnaṃ pārasvataṃ hāstinaṃ gārdabhaṃ ca yat| yāvadaśvasya vājinastāvat te vardhatāṃ pasaḥ

हिन्दी अर्थ

१, ये दोनों पदं “बहूत्व'" के सूष्रक है । २. ये वोर्नो रसे अश्वादि का सेवन करे कि गृहस्य धमे का पालन करते हुए भीन का तेज बहुता रहे । १४० जयवेवेद-भाष्य कां० ६। अनु० ८। सु० ७९ आयुए तुम्हारी कीं मूतकाल में, वह् (वाम्) पुम दोर्मोकी (अयुः) वतमान भयु को (दीघम् कृणोतु) दीघं करे ।

English

Let Agni thoroughly inflamed with all his tongues rise from his- heart. For length of life I use the name of Agni the Consuming God, Whose smoke the sage who knows the truth beholds proceeding. from his mouth.

अध्याय ६

श्लोक 73.1

सांमनस्यम्।१-३ अथर्वा।सांमनस्यम्, वरुणसोमाग्निबृहस्पतिवसवः, ३ वास्तोष्पतिः, १,३ भुरिक्, २ त्रिष्टुप्।एह या॑तु॒ वरु॑णः॒ सोमो॑ अ॒ग्निर्बृह॒स्पति॒र्वसु॑भि॒रेह या॑तु ।अ॒स्य श्रिय॑मुप॒संया॑त॒ सर्व॑ उ॒ग्रस्य॑ चे॒त्तुः संम॑नसः सजाताः

sāṃmanasyam| 1-3 atharvā| sāṃmanasyam, varuṇasomāgnibṛhaspativasavaḥ, 3 vāstoṣpatiḥ, 1,3 bhurik, 2 triṣṭup| eha yātu varuṇaḥ somo agnirbṛhaspatirvasubhireha yātu | asya śriyamupasaṃyāta sarva ugrasya cettuḥ saṃmanasaḥ sajātāḥ

हिन्दी अर्थ

अथवा हजार वर्षो को दीषं आयु तुम्हारी करे । भयु; जीवनकाल । करनेवाला परमेश्वर (नः) हमारी (अभिरक्षतु) पुणंतया रक्षा करे बौर (नः) हमारे (गृहेषु) घरो मे (असमातिम्) मापरहितत धान्य की रक्षा करे । मेघ के वर्णन से तदुत्पादिव धान्य की असमाति अभिग्रेत है। जसमा- (नभसस्पते) है मेष के पति ! (त्वम) तू (नः गृहेषु), हमारे घरोर्मे (ऊजेम.) बलदायक भौर प्राणप्रद अन्न (धारय) स्थापित कर, जिससे कां० ६। अनु० ८ । प्ु० ८० अथर्ववेद-भाष्य १४१

English

The man who knows his fuel laid in order by the Kshatriya Sets not his foot upon the steep declivity that leads to Death.

अध्याय ६

श्लोक 73.2

यो वः॒ शुष्मो॒ हृद॑येष्व॒न्तराकू॑ति॒र्या वो॒ मन॑सि॒ प्रवि॑ष्टा ।तान्त्सी॑वयामि ह॒विषा॑ घृ॒तेन॒ मयि॑ सजाता र॒मति॑र्वो अस्तु

yo vaḥ śuṣmo hṛdayeṣvantarākūtiryā vo manasi praviṣṭā | tāntsīvayāmi haviṣā ghṛtena mayi sajātā ramatirvo astu

हिन्दी अर्थ

देव संस्फान सहसनापो षस्येकिषे । खरापोषस्य) हजार प्रकार के पोषक धन का(ईषिषे)तू अधीश्वर है, (तस्य) उस का भाग (नः) हमें (रास्व) दे, (तस्य) उसका भाग (नः) हमारे किये (हि) धारित या पोषित कर निर्धारित कर (ते) तेरे (तस्य) उस अघ्न के (भक्तिवांसः) भागवाले (स्याम) हम हो । अथवा उस तुक्च कौ भक्तिवाले, भजन करने वाले हम हो, तेरे दिये अक्के सेवनद्वारा भूता = विश्वानि मतानि) सव भूत-भौतिक तत्त्वो का (अव) जो कि नीचे (यत्) जो (महः) तेज है (तेन हविषा) उस हविः हारा (ते) तेरी (विधेम) परिचर्यां हम करते द ।

English

Those who encompass slay him not: he goes not near his lurk— ing foes The Kshatriya who, knowing well, takes Agni’s name for length of life. A charm to bring the cattle home

अध्याय ६

श्लोक 73.3

इ॒हैव स्त॒ माप॑ या॒ताध्य॒स्मत् पू॒षा प॒रस्ता॒दप॑थं वः कृणोतु ।वास्तो॒ष्पति॒रनु॑ वो जोहवीतु॒ मयि॑ सजाता र॒मति॑र्वो अस्तु

ihaiva sta māpa yātādhyasmat pūṣā parastādapathaṃ vaḥ kṛṇotu | vāstoṣpatiranu vo johavītu mayi sajātā ramatirvo astu

हिन्दी अर्थ

(निषं० २।५) । द्युलोकस्थ शवा है 91775, जिसे 12085197 भी कते है तया 0व776प2 भी । द्युलोक मे सर्वाधिक चमकीला यह ताराहैजोकि ८0775 00807 मै स्थित है । यह् जब सूये के साथ उदित ओर मस्त होता है उन दिनों को 1202028 कहते हँ । यह् सर्वाधिक चमकीला दहै इसलिये परमेश्वर की चमक को श्वा की चमक फे सदु कहा । चमक के की स्तुति करना परमेश्वर की परिचर्या है । ये अय॑ः कालकाश्जा दिवि देवा ईव भिताः । (ये) जो (त्रयः) तीन (कालकाञ्जाः) काल को अभिव्यक्त करनेवसे (अह्व ) म माहवान करता हूं (ऊतये) रक्षा के लिये मौर (अस्म मरिष्ट- ¦

English

Firm stands the heaven, firm stands the earth, firm stands this universal world, Firm stand the rooted mountains. I have put the horses in the stall.

अध्याय ६

श्लोक 74.1

सांमनस्यम्।१-३ अथर्वा।सांमनस्यम्, नाना देवताः, त्रिणामा।अनुष्टुप्, ३ त्रिषटुप्।सं वः॑ पृच्यन्तां त॒न्वः॑१ सं मनां॑सि॒ समु॑ व्र॒ता।सं वोऽयं ब्रह्म॑ण॒स्पति॒र्भगः॑ सं वो॑ अजीगमत्

sāṃmanasyam| 1-3 atharvā| sāṃmanasyam, nānā devatāḥ, triṇāmā| anuṣṭup, 3 triṣaṭup| saṃ vaḥ pṛcyantāṃ tanvaḥ1 saṃ manāṃsi samu vratā| saṃ vo'yaṃ brahmaṇaspatirbhagaḥ saṃ vo ajīgamat

हिन्दी अर्थ

तातये) इस अविनाशके करनेके लिये या विस्तार के लिये । अथववेद-भाष्यं का० ६। अनु० द। सू० ८० (रधादिः) । ये तीन रहै सूय, चन्द्रमा तथा सप्तपिमण्डल । तीनों दारा कां० ६ । अनु० ८। सू० ८१ अथववेद-भाष्य १४३

English

I call the Herdsman, him who knows the way to drive the cattle forth, Who knows the way to drive them home, to drive them back and drive them in. O Jātavedas turn them back: a hundred homeward ways be thine!

अध्याय ६

श्लोक 74.2

सं॒ज्ञप॑नं वो॒ मन॒सोऽथो॑ सं॒ज्ञप॑नं हृ॒दः ।अथो॒ भग॑स्य॒ यच्छ्रा॒न्तं तेन॒ संज्ञ॑पयामि वः

saṃjñapanaṃ vo manaso'tho saṃjñapanaṃ hṛdaḥ | atho bhagasya yacchrāntaṃ tena saṃjñapayāmi vaḥ

हिन्दी अर्थ

यन्ताऽक्षि यच्छ॑से हस्तावेप॒ रासि सेधसि । के लियेतु अपने दोनों हाथों का सहारा (यच्छसे) देता है, (रक्नासि) राक्षसी प्रवृत्तियों को तु (अप सेधसि) गृहस्थ जीवन से अपगत करता है, करनेवाला, पाणिग्रहण करनेवाला (धभूत्) हुमा है कालगणना के लिये इन तनो! कालों का आह्वान करना चाद्ये, इस से पाणि का ग्रहण किया है, पाणिग्रहण की विधि के अनुसार ।

English

Thou hast a thousand avenues: by these restore our kine to us A nuptial benediction

अध्याय ६

श्लोक 74.3

यथा॑दि॒त्या वसु॑भिः संबभू॒वुर्म॒रुद्भि॑रु॒ग्रा अहृ॑णीयमानाः ।एवा त्रि॑णाम॒न्नहृ॑णीयमान इ॒मान् जना॒न्त्संम॑नसस्कृधी॒ह

yathādityā vasubhiḥ saṃbabhūvurmarudbhirugrā ahṛṇīyamānāḥ | evā triṇāmannahṛṇīyamāna imān janāntsaṃmanasaskṛdhīha

हिन्दी अर्थ

धातवे) गभधिान कफे लिये (योनिम् विधारय) योनि का विशेषरूपं तू धारण-पोषण कर । (मयदि) गौर है मयदि! (पुत्रमाषेहि) तु पृत्रका आधान कर, (तम्) उस पत्र को (त्वम्) तु (गमे) भागमनकालमे, प्रसवकाल मेँ (आगमय) हमे प्राप्तं करा। गर्भाधान से पूवं पत्नी की योनि परिपुष्ट होनी चाष्टिये । नि्बला- वस्या मेँ गर्भाधान होने पर सन्तान निबेल पेदा होतो, मौर गभपातकी मन्म परष्मेवर का वर्णन दहै यह दर्शानेकेलिये कितुहौ सूयं, ह होती है । मयदिा की तिथियों का निदंश मनुस्मृति मे हुमा है । आगमन काल है १० मासका काल । परिहृस्त=परिगृहीतद्स्त, मध्यपदलोपी

English

Let this man be again bedewed with this presented sacrifice. And comfort with the sap of life the bride whom they have brought to him. With life’s sap let him comfort her, and raise her high with princely sway.

अध्याय ६

श्लोक 75.1

सपत्नक्षयणम्।१-३ कबन्धः।इन्द्रः।अनुष्टुप्, ३ षट्-पदा जगती।निर॒मुं नु॑द॒ ओक॑सः स॒पत्नो॒ यः पृ॑त॒न्यति॑ ।नै॒र्बा॒ध्येऽन ह॒विषेन्द्र॑ एनं॒ परा॑शरीत्

sapatnakṣayaṇam| 1-3 kabandhaḥ| indraḥ| anuṣṭup, 3 ṣaṭ-padā jagatī| niramuṃ nuda okasaḥ sapatno yaḥ pṛtanyati | nairbādhye'na haviṣendra enaṃ parāśarīt

हिन्दी अर्थ

यं प॑रिहस्तमबिमरदिंतिः पुत्रकाम्या । २. कालका निर्माण करने वाले तथा उसकी पभिव्यक्ति करने वसि तीन, १. जंसे कि वतमान मे विक्रम, ईसा, शक आदि कालो का प्रयोग होता ( क । जिस हस्तम्रहण करने वाज्ने पति को , (मविभः) धारित (अस्थे) इस पत्नी के लिये (आ बध्नात् दिया है, (थथा) ताकि (पुत्रम्, जनप, दति)

English

In wealth that hath a thousand powers, this pair be inexhausti- ble! Tvashtar formed her to be thy dame, Tvashtar made thee to be her lord.

अध्याय ६

श्लोक 75.2

प॒र॒मां तं प॑रा॒वत॒मिन्द्रो॑ नुदतु वृत्र॒हा।यतो॒ न पुन॒राय॑ति शश्व॒तीभ्यः॒ समा॑भ्यः

paramāṃ taṃ parāvatamindro nudatu vṛtrahā| yato na punarāyati śaśvatībhyaḥ samābhyaḥ

हिन्दी अर्थ

ग्रहण तथा पति-पत्नी मे गठ-जोड् किया आता है (१--३) । भगः (जायाकामः) इः । अनष्टु म. । (जायतः) सव प्रकार से प्रयतशील, उद्यमी, अथवा संयमी र्म हं; 8 (वृत्रघ्नः । विवाहमण्डप पर घेरा डालनेवाले विरोधियो का हनन करने

English

Long life let Tvashtar give you both. Let Tvashtar give a thousand lives. A prayer for seasonable rain and prosperity May this our Lord of Cloudy Sky, bedewed with liquid drops preserve unequalled riches in

अध्याय ६

श्लोक 75.3

एतु॑ ति॒स्रः प॑रा॒वत॒ एतु॒ पञ्च॒ जनाँ॒ अति॑ ।एतु॑ ति॒स्रोऽति॑ रोच॒ना यतो॒ न पुन॒राय॑ति ।शश्व॒तीभ्यः॒ समा॑भ्यो॒ यावत् सूर्यो॒ अस॑द् दि॒वि

etu tisraḥ parāvata etu pañca janā~ ati | etu tisro'ti rocanā yato na punarāyati | śaśvatībhyaḥ samābhyo yāvat sūryo asad divi

हिन्दी अर्थ

हनन के. लिये । “राज्ञः वन्वे" (पेप्प० शाखा । वन्वे =वनु याचने, तना- तेन मामंत्रवीद् मगो जायामा वहतादिति ॥२॥ य माता-पिताने पृ्रके लिये (सावित्रीम्) जीवित पिता की पृतरी अथ्वेवेद-भाष्य का० ६ अनु० ८ । सू°० ८२ के (नाम) नाम को (गृह्णामि) म घोषित करता हूं, (वन्वे) ओर उस से याचना करता हं विवाह को सफलता के

English

our homes. Lord of the Cloudy Sky, bestow vigour and strength on our abodes. Let wealth and treasure

अध्याय ६

श्लोक 76.1

आयुष्यम्।१-४ कबन्धः।सान्तपनाग्निः।अनुष्टुप्, ३ ककुम्मती।य ए॑नं परि॒षीद॑न्ति समा॒दध॑ति॒ चक्ष॑से ।सं॒प्रेद्धो॑ अ॒ग्निर्जि॒ह्वाभि॒रुदे॑तु॒ हृद॑या॒दधि॑

āyuṣyam| 1-4 kabandhaḥ| sāntapanāgniḥ| anuṣṭup, 3 kakummatī| ya enaṃ pariṣīdanti samādadhati cakṣase | saṃpreddho agnirjihvābhirudetu hṛdayādadhi

हिन्दी अर्थ

का०६। अनु०प सूऽ ८२ अयवषेद-भाष्य १४५ वहतात्) तू भावहन कर (इति) यह् । निरुक्त अ० २। पाद १। ण्ड १--६ वेस जीवित-पितुका-पृद्री के विवाह को भी नियन्त्रित किया है (अथवं० काण्ड १४, सूक्त १।२) । इस ४ वें == मश्व ¬- इनिः (अत इनिठनौ, अष्टा० ५।२।१२५), अर्थात् धुडसवार

English

come to us. Thou, God bedewed with drops, art Lord of infinite prosperity. Grant us thereof, give us thereof: may we enjoy this boon of thine.

अध्याय ६

श्लोक 76.2

अ॒ग्नेः सा॑न्तप॒नस्या॒हमायु॑षे प॒दमा र॑भे ।अ॒द्धा॒तिर्यस्य॒ पश्य॑ति धू॒ममु॒द्यन्त॑मास्य॒तः

agneḥ sāntapanasyāhamāyuṣe padamā rabhe | addhātiryasya paśyati dhūmamudyantamāsyataḥ

हिन्दी अर्थ

विभाग कर, देने वाला, (हिरण्ययः) सुवणेनि्मित (वृहत् अङ्कुशः) बड़ा अङ्कुश हाथो को हांकने के लिये लोहुनिमित्त दण्डा । एमे प्रजा के शासन के लिये राजा! का दण्डा! इस राजदण्डे को 80९)€ कहते ह । यह् राजा का दण्डा है अतः वेदानुसार सुवणेनिमित होना चाहिए, लोह- निमित नहीं । वसुदानः = (यनुर्वेद अ० ३० मन्त्र ४) में वसुविभक्ता को (निघं० २।१; ३।६) । सूक्तम दर्शाया है कि वसुविभाग तथा विवाह, राजकीय नियमों द्वारा नियन्त्रित होने चाहिए । (अपचितः) है गले से आरम्भ करके नीचे की गोरं सञ्चित हुई, फली टई गण्डमालाभों ! सायण, (प्रपतत) शीघ्र उड़ जाभो, (इव) जेसे फिं (सुपणंः) पक्षी (वसतेः) अपने निवास-स्थानसे शीघ्र उड जाताहै।

English

A prayer for help and protection He flieth in the firmament observing all the things that be:

अध्याय ६

श्लोक 76.3

यो अ॑स्य स॒मिधं॒ वेद॑ क्ष॒त्रिये॑ण स॒माहि॑ताम्।नाभि॑ह्वा॒रे प॒दं नि द॑धाति॒ स मृ॒त्यवे॑

yo asya samidhaṃ veda kṣatriyeṇa samāhitām| nābhihvāre padaṃ ni dadhāti sa mṛtyave

हिन्दी अर्थ

अपचितः = अपचयन की हई गण्डमालाए; अपचयन = बुरी तरह से चिनी गर्ह या अपाक् नीचे की ओर चिनी गई गण्डमालाएं । ये गण्ड+ मालां क्षय रोग की सूचिका ह । सूर्य॑ की रश्मियां सुप्तविध होती है, का०६। अनु € । सू० ८२ अथववेद-भाष्य १४७ गण्डमालाक्षयरोगदहै जोकि निर्बेलों का हनन करती है । अतः

English

We with this offering will adore the greatness of the Heavenly Hound. The three, the Kālakānjas, set aloft in heaven as they were Gods All these I call to be our help and keep this man secure from harm.

अध्याय ६

श्लोक 76.4

नैनं घ्नन्ति पर्या॒यिणो॒ न स॒न्नाँ अव॑ गच्छति ।अ॒ग्नेर्यः क्ष॒त्रियो॑ वि॒द्वान् नाम॑ गृ॒ह्णात्यायु॑षे

nainaṃ ghnanti paryāyiṇo na sannā~ ava gacchati | agneryaḥ kṣatriyo vidvān nāma gṛhṇātyāyuṣe

हिन्दी अर्थ

पौष्टिकं अत्र मोय ओषधों के सेवन करने का विधान हुआ है असूतिका रामायण्यपचित् प प॑तिष्यति (असूतिका) पूयस्राव न करती हई (रामायणी कृष्णा (अपचित्) गल- जायगी, (सः) वह रोग (गलुन्तः) गल कर, सवित होकर ( नशिष्यति) असूतिका पीप पेदा न करनेवाली गण्डमाला । रामायणी : -= रामा

English

In waters is thy birth, in heaven thy station, thy majesty on earth and in the ocean.

अध्याय ६

श्लोक 77.1

प्रतिष्ठापनम्।१-३ कबन्धः।जातवेदाः।अनुष्टुप्।अस्था॒द् द्यौरस्था॑त् पृथि॒व्यस्था॒द् विश्व॑मि॒दं जग॑त्।आ॒स्थाने॒ पर्व॑ता अस्थु॒ स्थाम्न्यश्वां॑ अतिष्ठिपम्

pratiṣṭhāpanam| 1-3 kabandhaḥ| jātavedāḥ| anuṣṭup| asthād dyaurasthāt pṛthivyasthād viśvamidaṃ jagat| āsthāne parvatā asthu sthāmnyaśvāṃ atiṣṭhipam

हिन्दी अर्थ

गलन्तः = गण्ड, जो कि वित होता है, पीपवाला है। गलन्तः = गल् है भपचित्रोगी ! (मनसा) मन से (जुषाणः) प्रीतिपूर्वैक तू चिकित्सा सूचित की गई है । अपोच्छतु अप उषी विवासे । रागिनि मे आहुतिरूप में देता हं उसे (मनसा) विचारपूर्व॑कं (स्वाहा) ओर

English

We with this offering will adore the greatness of the Heavenly Hound. A charm to facilitate child-birth Thou art a grasper, holding fast both hands: drivest fiends away.

अध्याय ६

श्लोक 77.2

य उ॒दान॑ट् प॒राय॑णं॒ य उ॒दान॒ण् न्याय॑नम्।आ॒वर्त॑नं नि॒वर्त॑नं॒ यो गो॒पा अपि॒ तं हु॑वे

ya udānaṭ parāyaṇaṃ ya udānaṇ nyāyanam| āvartanaṃ nivartanaṃ yo gopā api taṃ huve

हिन्दी अर्थ

एक प्रकार की होती है, (कृष्णा) काली गण्डमाला (एका) एक प्रकार की होती है, (रोहिणी) लाल गण्डमालाएं (द्वै) दो प्रकार की होती है । करता है, यतः यहु क्षयकाही कूपहै, तदर्थं पौष्टिकं अघ्न करा सेवन करना जाठरानिनि में आहूत करना चाहिए, ओर दृढसंकल्पपूवेक भोज्यान्न का १. अपपचितः -- “अप'' चिन् चयने, अथवा “अपाक् चिब चयने । मे उपासनोपमेय माव दरण से इन दोनों में अथं भेद ज्ञात होता है।

English

A holder both of progeny and riches hath this Ring become. Prepare accordantly, O Ring, the mother for the infant’s birth.

अध्याय ६

श्लोक 77.3

जात॑वेदो॒ नि व॑र्तय श॒तं ते॑ सन्त्वा॒वतः॑ ।स॒हस्रं॑ त उपा॒वृत॒स्तभि॑र्नः॒ पुन॒रा कृ॑धि

jātavedo ni vartaya śataṃ te santvāvataḥ | sahasraṃ ta upāvṛtastabhirnaḥ punarā kṛdhi

हिन्दी अर्थ

चनाव करना चाहिए । अपचित् है "गले के ऽशछणिलपऽ 08765 का । सूजन' । गण्डमाला के लिये देखो (अथवे० ६।२५।१-३) । वहती; ३ जगती; ४ भुरिक् त्रिष्टुभ् । भूमिरिति त्वायि परमनवते जना निकतिरिति तवाहं परि वेद सर्वतः १

English

On the right way bring forth the boy. Make him come hither. I am here. The Amulet which Aditi wore when desirous of a son,

अध्याय ६

श्लोक 78.1

दम्पत्यो रयिप्राप्तये प्रार्थना।१-३ अथर्वा।१-२ चन्द्रमाः, ३ त्वष्टा।अनुष्टुप्।तेन॑ भू॒तेन॑ ह॒विषा॒यमा प्या॑यतां॑ पुनः॑ ।जा॒यां याम॑स्मा॒ आवा॑क्षु॒स्तां रसे॑ना॒भि व॑र्धताम्

dampatyo rayiprāptaye prārthanā| 1-3 atharvā| 1-2 candramāḥ, 3 tvaṣṭā| anuṣṭup| tena bhūtena haviṣāyamā pyāyatāṃ punaḥ | jāyāṃ yāmasmā āvākṣustāṃ rasenābhi vardhatām

हिन्दी अर्थ

(यस्याः ते) जिस तुज्ञ के (आसनि) मूख भे (जुहोमि) म आहूतियां देता हु, (त्वा) उस तुज्ञ को (जनाः) सवेसाधारण जन (भूमिः इति प्रमन्वते) (नि ऋ तिः इति) कष्टापत्तिरूप (परिवेद ) ठीक प्रकार से जानता हं । संसार से विरक्त कर परमेश्वर को ओर प्रेरित करताहै। इस निमित्त सद्गुरु उसे शरणागत करलेता है । वणेन कविताशेली में मन्त्र में हुमा है। आहृतियां तो यज्ञाग्निके मृखमें ही देनी हैँ ।' कम्= यथा कमिति

English

Tvashtar hath bound upon this dame and said, Be mother of a boy. A charm to win a bride

अध्याय ६

श्लोक 78.2

अ॒भि व॑र्धतां॒ पय॑सा॒भि रा॒ष्ट्रेण॑ वर्धताम्।र॒य्या स॒हस्र॑वर्चसे॒मौ स्तामनु॑पक्षितौ

abhi vardhatāṃ payasābhi rāṣṭreṇa vardhatām| rayyā sahasravarcasemau stāmanupakṣitau

हिन्दी अर्थ

वादी यह मानते हैँकिहमभरमिसेही पेदा हुए, भूमिसेदही पलते, भूमि मे ही रहते, अतः भूमि ही निति" है। निक्छंति' वस्तुतः कृच्छापत्ति .. १. मोक्षाभिलाषौ शिष्यो के सदगुरु का कथन सूक्त पमे है। अयववेवेद-भाष्य का० ६। अनु० ६ । सु०्ड

English

I call the name of him who comes, hath come, and still draws- nigh to us. p. a238 Foe-slaying Indra’s name I love, the Vasus’ friend with hundred powers. Thus Bhaga spake to me: Let him bring thee a consort by the path.

अध्याय ६

श्लोक 78.3

त्वष्टा॑ जा॒याम॑जनय॒त् त्वष्टा॑स्यै॒ त्वां पति॑म्।त्वष्टा॑ स॒हस्र॒मायूं॑षि दी॒र्घमायुः॑ कृणोतु वाम्

tvaṣṭā jāyāmajanayat tvaṣṭāsyai tvāṃ patim| tvaṣṭā sahasramāyūṃṣi dīrghamāyuḥ kṛṇotu vām

हिन्दी अर्थ

कां० ६ । अनु० । सु° ८४ अथववेद-भाष्य १४९ को ग्रहण करनेवालो (भव) तू हो जा, (एषः) यह हवि (ते भागः) तेरा भागदहै तेरा आंशिकस्वरूपहै, तुहीतद्रपदहै जोकि (अस्मासु) हम से अतिरिक्त है (एनसः) पाप से (मुञ्च) मुक्त कर दे, (स्वाहा) तदथ हुम परमेश्व रापित आहुतियां प्रदान करते ह । इस मे कृच्छापत्ति विद्यमान है, वह तू ही आंशिकरूप मे विद्यमान है।

English

Whereon the Asvins brought the bride Sūryā the child of Savitar.

अध्याय ६

श्लोक 79.1

ऊर्जःप्राप्तिः।१-३ अथर्वा।संस्फानम्।गायत्री, ३ त्रिपदा प्राजापतया गायत्री।अ॒यं नो॒ नभ॑स॒स्पतिः॑ सं॒स्फानो॑ अ॒भि र॑क्षतु ।अस॑मातिं गृहेषु॑ नः

ūrjaḥprāptiḥ| 1-3 atharvā| saṃsphānam| gāyatrī, 3 tripadā prājāpatayā gāyatrī| ayaṃ no nabhasaspatiḥ saṃsphāno abhi rakṣatu | asamātiṃ gṛheṣu naḥ

हिन्दी अर्थ

प्रदान कीदटै, उसे तू स्वीकार कर । ओौर मेरे इन शिष्यो ओर उन भावी शिष्यो को पापकर्म करने से मूक्त कर, डा '' जंसे-जेसे यज्ञिय कमं किये जाते है वैसे-वैसे पापकर्मोकाक्षय होते जाना स्वाभाविकी है ) (नि ते) है ृच्छापत्ति ! (अनेहा) पाप से ्डानेवाली (त्वम्) तु नियन्ता के लिये (नमः) नमस्कार (अस्तु) हो । रिमिक, आधिभौतिक तथा आधिदेविक । इन फन्दों मे जीवात्मा बन्धा हुभा है । यम ओौर मृत्यु परमेश्वर के नाम ह। यथा “स महायमः, स्र एव मृत्युः" (अथववे० काण्ड १३। अनुवाक ४। पर्याय १। मन्त्र ५; तथा (अथवे०

English

Great, Indra. is that hook of thine, bestowing treasure, wrought of gold: Therewith, O Lord of Might, bestow a wife on me who long to wed. A charm against sores and pustules (apachitas)

अध्याय ६

श्लोक 79.2

त्वं नो॑ नभसस्पत ऊर्जं॑ गृ॒हेषु॑ धारय ।आ पु॒ष्टमेत्वा वसु॑

tvaṃ no nabhasaspata ūrjaṃ gṛheṣu dhāraya | ā puṣṭametvā vasu

हिन्दी अर्थ

१५० अथवेवेद-भाष्य कां० ६। अनु० € । भु० ८५ पादबन्धन मे (वेधिष) तू जव विद्ध करदेतीहै, तव (ये सहस्रम्) जो सहस्रविध मृतं ह उन (मृ्युभिः) मृत्युभोंके दारा (इह) इस भ्रूलौक में (अभिहितः) जीवात्मा बदरहोजातादहै। है मृमृक्षु! (स्वम्) तू जब के साथ (संविदानः) रैक्यमतका प्राप्त होताहै तबहेनि्छति ! तु जीवात्मा निकऋतिके कारण विद्धदहो जातादहै भौर नित्य होने के कारण अनादिकाल से हजारों योनियों मे जन्म पा कर, सहखविध ङृच्छा- पत्तियो को भोगता, ओर अपने को वन्धा हमा अनुभव कर मुमृक्षुहो एेक्यमत को प्राप्त हो जाता, तदनुक्ल अपनी मति बनानेतादहै; तब

English

Hence, Sores and Pustules, fly away even as the eagle from his home. Let Sūrya bring a remedy, the Moon shine forth and banish you.

अध्याय ६

श्लोक 79.3

देव॑ संस्फान सहस्रापो॒षस्ये॑शिषे ।तस्य॑ नो रास्व॒ तस्य॑ नो धेहि॒ तस्य॑ ते भक्ति॒वांसः॑ स्याम

deva saṃsphāna sahasrāpoṣasyeśiṣe | tasya no rāsva tasya no dhehi tasya te bhaktivāṃsaḥ syāma

हिन्दी अर्थ

न किसी प्रकार सुखाभावही । अपितु मोक्षमें इन दोनोंसे भिन्न आनन्दा नुमूति होतीदहै। मौक्षमें जौवात्माका संग परमेश्वर के साथ रहताहै ओर वहु परमेष्वरीय आनन्दमाच्रा मेंलीन रहूतादहै। परमेश्वर ओर पितरो का शिन्नानुसार तदनुरूप मति वाला हुमाभौ भुभृक्षु जब तक सांसारिक सुख-दुःखो से विरक्त नहीं होता ततर तक वह् नाक) को प्राप्त. नहीं होता । इसलिये (नाक' पर अधिगोहण मेँ अन्तिम कारण नि्छति पुलिङ्घंमे है। अतः मन्त्रमेदोका वणेन हुजा टै एक का नहीं । वरणो वार्ता अयं देवो वन॒स्पतिः ।

English

One bright with variegated tints, one white, one black, a couple red:— The’names of all have I declared. Begone, and injure not our men. Hence, childless, shall the Pustule flee, grand-daughter of the dusky one.

अध्याय ६

श्लोक 80.1

अरिष्टक्षयणम्।१-३ अथर्वा।चन्द्रमाः।१ भुरिक्, २ अनुष्टुप्, ३ प्रस्तारपङक्तिः।अ॒न्तरि॑क्षेण पतति॒ विश्वा॑ भू॒ताव॒चाक॑शत्।शुनो॑ दि॒व्यस्य॒ यन्मह॒स्तेना॑ ते ह॒विषा॑ विधेम

ariṣṭakṣayaṇam| 1-3 atharvā| candramāḥ| 1 bhurik, 2 anuṣṭup, 3 prastārapaṅaktiḥ| antarikṣeṇa patati viśvā bhūtāvacākaśat| śuno divyasya yanmahastenā te haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

(अयम्) यह् (देवः) दिव्यगुणों वाला (वरणः) वरण नाम वाला,या का०६। अनु° € । सू ८५ अथवेवेद-भाष्य १५१ दिन्यगणी वेद्यो ने (अवीवरन्) निवारित कियादहै। देवानां सर्वेषां वाचा यक्ष्म ते बारयामहे ॥२॥ नर अग्नि को यक्ष्मनिवारक कहा टै ।

English

The Boil shall fly away from us, the morbid growth shall vanish hence. Taste, happy in thy mind, thine own oblation, as I with Svāhā with my heart present it.

अध्याय ६

श्लोक 80.2

ये त्रयः॑ कालका॒ञ्जा दि॒वि दे॒वा इ॑व श्रि॒ताः ।तान्त्सर्वा॑नह्व ऊ॒तये॒ऽस्मा अ॑रि॒ष्टता॑तये

ye trayaḥ kālakāñjā divi devā iva śritāḥ | tāntsarvānahva ūtaye'smā ariṣṭatātaye

हिन्दी अर्थ

एवा तें अभ्रिना यक्ष्मं वेदवानरेणं वारये ॥३॥ (यथा) जसे (वृधः) आवरण करनेवाले मेघ ने (विश्वधा) सबके १५२ अथवेवेदभाष्य :कां¢ ६। भनु० € । सू० ८६ १-३ । अथर्वा (वृषकामः) । एकवुषः । अनुष्टुभ् ।

English

A charm to accompany the symbolical loosing of sacrificial victims Thou in whose dread mouth I present oblation, that these bound victims may obtain their freedom,

अध्याय ६

श्लोक 80.3

अ॒प्सु ते॒ जन्म॑ दि॒वि ते॑ स॒धस्थं॑ समु॒द्रे अ॒न्तर्म॑हि॒मा ते॑ पृथि॒व्याम्।शुनो॑ दि॒व्यस्य॒ यन्मह॒स्तेना॑ ते ह॒विषा॑ विधेम

apsu te janma divi te sadhasthaṃ samudre antarmahimā te pṛthivyām| śuno divyasya yanmahastenā te haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

(दिवः) दयलोक का (वृषा) मुखिया है, (पृथिव्याः) पृथिवी का (वृषा) मखिया है, (त्वम्) है राजन् ! तरु (एकवृषः) भकेला सब का मुखिया कां० ६। अनु० ६ । सू० ८9 अथयवेवैद-भाष्य १५३ है गौर एक सम्राट् भो। अतः देव, असुर ओर मनुष गुणकर्मछरत् है जातिपरक नदीं । देवानाम्, अघेभाग् =इप के नाना अथर ।(१) देव- कोटि! के ऋषि-मुनियों के आसन में एकासन के भधभाग का अधिकारी । (२) देवानाम्" केदो अभिप्रायः तरिजिगोषु सैनिक, तथा ग्यवहारो विजिगीषु सेना को देषसेना अथवा देवानां सेनाकहा भीहै। यथा

English

The people deem that thou art Earth: I know thee thoroughly, and I say thou art Destruction. Be thou enriched, O Welfare, with oblations, here among us is thine allotted portion.

अध्याय ६

श्लोक 81.1

गर्भाधानम्।१-३ अथर्वा।आदित्यः, ३ त्वष्टा।अनुष्टुप्।य॒न्तासि॒ यच्छ॑से॒ हस्ता॒वप॒ रक्षां॑सि सेधसि ।प्र॒जां धनं॑ च गृह्णा॒नः प॑रिह॒स्तो अ॑भूद॒यम्

garbhādhānam| 1-3 atharvā| ādityaḥ, 3 tvaṣṭā| anuṣṭup| yantāsi yacchase hastāvapa rakṣāṃsi sedhasi | prajāṃ dhanaṃ ca gṛhṇānaḥ parihasto abhūdayam

हिन्दी अर्थ

उस को आधी सम्पत्ति सम्राट् को, भौर शेष आधो सेनिकोंकी हो । इसी प्रफार व्यापारियों कोव्यापारमे जो (लाभ दहो उसका आधा-आधा मुखिया । इस अभिप्राय मँ मन््र एमे “ईशे” का प्रयोग हमा है । अथवा ॥ “वृषा” का अर्थं है वर्षा करने वाला शक्ति का प्रदाता । । ख्पमेंदहै। व्यापारियों के लाभ को “उत्थितम् कहाहै, ओर मूलधन को

English

Free—Hail to thee!—from sin those here and yonder. Do thou, Destruction, thus, without a rival, release us from the iron bonds that hind us. To me doth Yama verily restore thee. To him, to Yama, yea, to

अध्याय ६

श्लोक 81.2

परि॑हस्त॒ वि धा॑रय॒ योनिं॒ गर्भा॑य॒ धात॑वे ।मर्या॑दे पु॒त्रमा धे॑हि॒ तं त्वमा ग॑मयागमे

parihasta vi dhāraya yoniṃ garbhāya dhātave | maryāde putramā dhehi taṃ tvamā gamayāgame

हिन्दी अर्थ

देवानामथ भाग॑सि सवमेकवृषो भौव ॥३॥ हि अनुसार प्रजापति के तन पत्र ह देव, मनुष्व मौर अकुर। भौर तीनोंही २. चरित है मूलधन, जिसे कि व्यापारमे लगाया, गौर उस वारा प्राप्त लाम है “उत्थित” । इस लाम का अधा “करस्पहे। १५२ अथर्ववेद-भाष्य का० ६॥ अनु° । सु० ८७ वेदानुसार वंशपरम्परागत व्यक्ति राजा नहीं होता किसो याभ्य

English

Death be worship! Thou hast been fastened to an iron pillar, here compassed with a thousand deaths around thee.

अध्याय ६

श्लोक 81.3

यं प॑रिह॒स्तमबि॑भ॒रदि॑तिः पुत्रका॒म्या।त्वष्टा॒ तम॑स्या॒ आ ब॑ध्ना॒द् यथा॑ पु॒त्रं जना॒दिति॑

yaṃ parihastamabibharaditiḥ putrakāmyā| tvaṣṭā tamasyā ā badhnād yathā putraṃ janāditi

हिन्दी अर्थ

लाया है । भ्रशत् श्रु अधःपतने । इहैव धि माऽप॑ च्योष्ठाः परवत इवापिचाचखत् । (इह) इस राज्यासन पर (एव) ही (एधि) हौ, (मा अप च्योष्ठाः) मपच्युत न हो, (पर्वतः इव ) पवेत के सदृश (अविचाचलत्) विना विच- ही है । (तस्म) उस राजा के लिये (सोमः) राष्ट का सेनानायक (च) भौर

English

In full accord with Yama and the Fathers, send this man up- ward to the loftiest heaven. A charm against Consumption 88

अध्याय ६

श्लोक 82.1

जायाकामना।१-३ भगः।इन्द्रः।अनुष्टुप्।आ॒गच्छ॑त॒ आग॑तस्य॒ नाम॑ गृह्णाम्याय॒तः ।इन्द्र॑स्य वृत्र॒घ्नो व॑न्वे वास॒वस्य॑ श॒तक्र॑तोः

jāyākāmanā| 1-3 bhagaḥ| indraḥ| anuṣṭup| āgacchata āgatasya nāma gṛhṇāmyāyataḥ | indrasya vṛtraghno vanve vāsavasya śatakratoḥ

हिन्दी अर्थ

"राज्यकर' का प्रबन्ध करता है। तथा राष्ट का सेनानायक (यजु° १७। का० ६ ?अनु० । सु° ८८ अथवेवेद-भाष्य १५५ (घ्र.वा) घ्व है (यौः) चूलोक, (घरवा) घ्रूब है (पुथिवो) पृथिवो गतिमान् है। (घूवाषः) धक रहै (दमे पवंताः) ये पवेत, ( घ्व) घ्व द (अयय्) यह् (विशाम् राजा) प्रजाओंका राजा। धरुवं ते राजा वरुणौ धवं देवो बृहस्पर्तिः

English

Let Varana the heavenly tree here present keep disease away. The Gods have driven off Decline that entered and possessed this man.

अध्याय ६

श्लोक 82.2

येन॑ सू॒र्यां सा॑वि॒त्रीम॒श्विनो॒हतुः॑ प॒था।तेन॒ माम॑ब्रवी॒द् भगो॑ जा॒यामा व॑हता॒दिति॑

yena sūryāṃ sāvitrīmaśvinohatuḥ pathā| tena māmabravīd bhago jāyāmā vahatāditi

हिन्दी अर्थ

को (अधरान् पादयस्व) अपने नीचे कर । (सर्वाः दिशः) सब दिशाओं के १५६ अथवेवेद-माष्य . कां० ६ 1 अनु० ९ । सू° ८६ कर चलनेवाली हों, (ध्रवायते) स्थिररूप मं विद्यमान तेरे लिये (श्ट) के कारण (ते) तेरे (हादिम्) हृदयवर्ती चित्त को (शोचयामसि) हम

English

We with the speech of Indra and of Mitra and of Varuna. We with the speech of all the Gods will drive Decline away from thee. Even as Vritra checked and stayed these waters flowing every way,

अध्याय ६

श्लोक 82.3

यस्ते॑ऽङ्कु॒शो व॑सु॒दानो॑ बृ॒हन्नि॑न्द्र हिर॒ण्ययः॑ ।तेना॑ जनीय॒ते जा॒यां मह्यं॑ धेहि शचीपते

yaste'ṅkuśo vasudāno bṛhannindra hiraṇyayaḥ | tenā janīyate jāyāṃ mahyaṃ dhehi śacīpate

हिन्दी अर्थ

मन्त मे कारणवश कुपित-पत्नी के प्रति कथन हणा है। उसे कहा करते के कारण प्रायशित्तस्पमे दुःखित करते है, ताकि इस प्रकोप का तीनकौ व्याख्या मे सायणानुसार सम्बोधन जायापरक है, यथा--हे (उद्गौथ तथा वेद्ुटमाधव; ऋ° १०।७१।१ ) । कां ६। अनु० ६। सू० ६० अथववेद-भाष्य १५७

English

With Agni, God of all mankind. I check and banish thy Decline. A glorification of a newly consecrated King

अध्याय ६

श्लोक 83.1

भैषज्यम्।१-४ भगः।२ सूर्यः, चन्द्रमाः, २ रोहिणी, ३ रामायणी।अनुष्टुप्, ४ एकावसाना द्विपदा निचृदार्च्यनुष्टुप्।अप॑चितः॒ प्र प॑तत सुप॒र्णो व॑स॒तेरि॑व ।सूर्यः॑ कृ॒णोतु॑ भेष॒जं च॒न्द्रमा॒ वोऽपो॑च्छतु

bhaiṣajyam| 1-4 bhagaḥ| 2 sūryaḥ, candramāḥ, 2 rohiṇī, 3 rāmāyaṇī| anuṣṭup, 4 ekāvasānā dvipadā nicṛdārcyanuṣṭup| apacitaḥ pra patata suparṇo vasateriva | sūryaḥ kṛṇotu bheṣajaṃ candramā vo'pocchatu

हिन्दी अर्थ

हे पत्नी ! (ते) तेरे (हादिम्) हूदयगत चित्त को (शोचयामसि) हम शोकयुक्त करते है, (ते) तेरे (मनः) संकत्पविकत्पात्मक मनः को (शोचयामसि) हम शोकयुक्त करते हैँ । (धूमः) धुआं (इव) जसे (वायुम्) वायु के (सघ्रयङ्) साथ शति करता है वसे (ते) तेरा (मनः) मन (माम् एव) मेरा हो (अनु एतु) अनुगमन करे। मच त्वा मि्ावरणो महयं देवी सरस्वती । करे। तथा शानसम्पत्न वेदवाणी भी ज्ञान प्रदान कर हम दोनों को पर- स्पस् सम्बद्ध करे । हे वाण विद्ध ! (वै) तैरे (अङ्खभ्यः) अङ्गो के लिये, (च) ओर

English

This is the Lord of Indra, this the Lord of Heaven, the Lord of Earth, The Lord of all existing things: the one and only Lord be thou,

अध्याय ६

श्लोक 83.2

एन्येका॒ श्येन्येका॑ कृ॒ष्णैका॒ रोहि॑णी॒ द्वे।सर्वा॑सामग्रभं॒ नामावी॑रघ्नी॒रपे॑तन

enyekā śyenyekā kṛṣṇaikā rohiṇī dve| sarvāsāmagrabhaṃ nāmāvīraghnīrapetana

हिन्दी अर्थ

१५८ अथववेवेद-भाष्य रका० ६। अनु० । सूु० ९० रथाय) लदयके लिये, (खरः) श्र ने (याम्, इषुम्) (४ है, (ताम्) उसे (इदम) यह (अद्य) भाज या इस समय रुलाता है, "“सोदयतेर्वा'' ( निक्त रुद्रहै परमेश्वर जो ४ दिद के दषु अर्थात् वाण ह (तासाम्, सर्वासाम्; उन सब नाडयो के (विषाणि) विषों को (वयम्) हम (निर् ह्वधामससि) बाहर कर देते है । ।

English

The Sea is regent of the floods, Agni is ruler of the land, The Moon is regent of the stars: the one and only Lord be thou.

अध्याय ६

श्लोक 83.3

अ॒सूति॑का रामाय॒ण्यऽप॒चित् प्र प॑तिष्यति ।ग्लरि॒तः प्र प॑तिष्यति॒ स ग॑लु॒न्तो न॑शिष्यति

asūtikā rāmāyaṇya'pacit pra patiṣyati | glaritaḥ pra patiṣyati sa galunto naśiṣyati

हिन्दी अर्थ

रोग अङ्खोमे विष फला देते । ध्रमनिथां है लाल रक्त-को-ताडियां, जिन में स्पन्दन होता रहता है । नम॑ से .रदरास्य॑ते नमः प्रतिहिताय । (सद्र) है रलाने वाने परमेश्वर ! (अस्यते) न्रोगषटपौ इषु फंकते हए (ते) तञ (नमः) नमस्कार हो, (्रतह्गाय) धनुष पर ठ । लिये (नमः)नमः टा । ( विसुञ्यमानाये) छाड़ जात हए ईषु केलि १ नमः हो, (विपक्तिताये लक्ष्य पर गिरे इषु के लिये (नमः ) नमः हो, नमस्कार किया है, रोष तौन पादौ म इषुल्प-रोग। ‡ प्रति नमः कदा है । दन तान पादो रौपकौ तीन अवस्यापु निर्दिष्ट को ५८ रोग का पवल्प, मध्यरूप, तथा रोग का आविर्भाव । इनत तोन भवस्थाओंमेरोगरे अपा- करण के उपाय का वणन "नम." द्रा किथाहै। अवस्थाओंमें

English

Thou art the King of Asuras, the crown and summit of man- kind: Thou art the partner of the Gods: the one and only Lord be thou. A benediction addressed to a newly elected King

अध्याय ६

श्लोक 83.4

वी॒हि स्वामाहु॑तिं जुषा॒णो मन॑सा॒ स्वाहा॒ मन॑सा॒ यदि॒दं जु॒होमि॑

vīhi svāmāhutiṃ juṣāṇo manasā svāhā manasā yadidaṃ juhomi

हिन्दी अर्थ

दोष से रोगोत्यन्न होत अतः जनन पर निपन्रण का कथन तीन पारदो स्कार करवेसे रोगों का शमन नही हाता । इस ल सूक्त ६९१ सँ नाना आष के योगों का वणेन भी हुआ है । ० ६। अनु० ९) ०९१ अथववेद-भाष्य १५९ साथ (षडचंगेभिः) तया षड्-मौषधों के योगों के साथ ¦ अच पुः) कृषि दारा पदा किया है । (तेन) इस दोनों योगों से युक्त यव द्वारा, है रुग्ण हे रोगिन् ! (ते तन्वः) तेरे शरीरके (रपः) पाप तथां तज्जन्य रोगको (अपाचनम्) हटने वाला करके (अपव्यये) पृथक् करदेता हूं

English

Here art thou: I have chosen thee. Stand stedfast and immov- able. Let all the clans desire thee: let not thy kingdom fall away.

अध्याय ६

श्लोक 84.1

निर्ऋतिमोचनम्।१-४ भगः।निर्ऋतिः।१ भुरिग्जगती, २ त्रिपदार्षी बृहती, ३ जगती, ४ भुरिक् त्रिष्टुप् (जगती) यस्या॑स्त आ॒सनि॑ घो॒रे जु॒होम्ये॒षां ब॒द्धाना॑मव॒सर्ज॑नाय॒ कम्।भूमि॒रिति॑ त्वाभि॒प्रम॑न्वते॒ जना॒ निरृ॑ति॒रिति॑ त्वा॒हं परि॑ वेद स॒र्वतः॑

nirṛtimocanam| 1-4 bhagaḥ|nirṛtiḥ| 1 bhurigjagatī, 2 tripadārṣī bṛhatī, 3 jagatī, 4 bhurik triṣṭup (jagatī) yasyāsta āsani ghore juhomyeṣāṃ baddhānāmavasarjanāya kam| bhūmiriti tvābhipramanvate janā nirṛtiriti tvāhaṃ pari veda sarvataḥ

हिन्दी अर्थ

कृषि द्वारा कहा है । यव ओौर ब्रोहि दानों भोज्यान्न होते हए, ओौषधरूपं वाले कहा है । अवलासौ - अरवल (बलाभाव) + असौ ( असु क्षेपणे भिधीयते" (गोता १६।१) । इस क्षेमे भी कृषि कर्म हो रहा है, क्म॑- रहे है । यमनियमादिन् योगाङ्गं बैल, तथा ५ ज्ञानेन्धियां मौर छटा मन ये षट् भीव॑लहँ। इसो लिये इन छः के विषयों फो गोचर कहते हैँ जिन मे कि गौएं विचरतीर्है। मौ -वैल । भोजन तोयोमी को भी चाहिए जिस करा कथन “यव"' शब्द द्वारा हुआ है । “यव” सात्विकं ओर पौस्टिक

English

Be even here: fall not away: be like a mountain unremoved. Stand stedfast here like Indra’s self, and hold the kingship in the grasp. This man hath Indra stablished, made secure by constant sacri- fice.

अध्याय ६

श्लोक 84.2

भूते॑ ह॒विष्म॑ती भवै॒ष ते॑ भा॒गो यो अ॒स्मासु॑ ।मु॒ञ्चेमान॒मूनेन॑सः॒ स्वाहा॑

bhūte haviṣmatī bhavaiṣa te bhāgo yo asmāsu | muñcemānamūnenasaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

मे “रपः” कहा है । “रपः रिप्रमिति पापनामनी" (निरक्त ४।३ २१) । १६० अययेवेद भाष्य कां० ६॥ अनु० । सू ९ नोचे की ओर शुक कर (ददे) दुही जाती है, (ते) तेरा (रषः) पाप भौ (न्यक् भवनु) नीचे को ओर से पृथक् हौ जाए) उपरि भाग के पापों समेत नीचै की इन्द्रिय के पापों को पृथक् करने का (आपः) जल (दद् वै!उ) दी निश्चय से (भेषजीः चिकित्सक है, ओषध है, (आपः) जल ( समो वचातनीः) रोग ओर रोगजनक अमीवा” नामक रोग कीटाणु के विनाशक हैं । (आपः) जल (विश्वस्य ) सव रोग समूह के (भेषजीः) चिकित्सक ह्, भौषध है, (ताः) वे जल (ति) तेरी

English

Soma, and Brāhmanaspati here present bless and comfort him! A benediction addressed to a newly elected King

अध्याय ६

श्लोक 84.3

ए॒वो ष्व॑१स्मन्नि॑रृतेऽने॒हा त्वम॑य॒स्मया॒न् वि चृ॑ता बन्धपा॒शान्।य॒मो मह्यं॒ पुन॒रित् त्वां द॑दाति॒ तस्मै॑ य॒माय॒ नमो॑ अस्तु मृ॒त्यवे॑

evo ṣva1smannirṛte'nehā tvamayasmayān vi cṛtā bandhapāśān| yamo mahyaṃ punarit tvāṃ dadāti tasmai yamāya namo astu mṛtyave

हिन्दी अर्थ

(भेषजम् ¦ चिकित्सा या भौषध (कृण्वन्तु) करे । ""जलविकित्ा" का वणेन है । तथा देखो (अथवं पुरुवुतः सिन्धुसृत्याय जाताः घ्व अवाचीः पुरुषे तिरश्ची; ।। “को अस्मिन्नापो व्यदधात् विपूवृतः अर्थात् सिराओं के कृष्णरक्त, षत शरोर

English

Firm is the sky, firm is the earth, and firm is all this living world; Firm are these mountains on their base, and stedfast is this King of men. Stedfast may Varuna the King, stedfast the God Brihaspati,

अध्याय ६

श्लोक 84.4

अ॒य॒स्मये॑ द्रुप॒दे बे॑धिष इ॒हाभिहि॑तो मृ॒त्युभि॒र्ये स॒हस्र॑म्।य॒मेन॒ त्वं पि॒तृभिः॑ संविदा॒न उ॑त्त॒मं नाक॒मधि॑ रोहये॒मम्

ayasmaye drupade bedhiṣa ihābhihito mṛtyubhirye sahasram| yamena tvaṃ pitṛbhiḥ saṃvidāna uttamaṃ nākamadhi rohayemam

हिन्दी अर्थ

जसे-जसे खान-पान सात्त्विक हो रष्वास में शुद्ध वायु. का सेवन बढता जाता ने रोगों के निरोध तथा शमन करनेकीण के लिये ““रक्तरूपी'' आपः का यहां कथन किया है । ता जाता, ओर प्राणायाम तथा श्वास ह, वैसे-वेसे रक्त रूपी “आपः ' क्ति बढ़ती जाती है, यह दशनि । कः ५ ४. वाले अश्व ! (वातरंहाः) ज्ञा गायुके वेग वाला एना व युज्यमानः) जता जाता हृजा तयम्यार किया जातः १ ५५. युदभ॒मि मे जा, (विश्ववेदसः) समग्र युद्ध विद्या के

English

Stedfast may Indra stedfast, too, may Agni keep thy stedfast reign. Firm, never to be shaken, crush thy foemen, under thy feet lay those who strive against thee.

अध्याय ६

श्लोक 85.1

यक्ष्मनाशनम्।१-३ अथर्वा।वनस्पतिः।अनुष्टुप्।व॒र॒णो वा॑रयाता अ॒यं दे॒वो वन॒स्पतिः॑ ।यक्ष्मो॒ यो अ॒स्मिन्नावि॑ष्ट॒स्तमु॑ दे॒वा अ॑वीवरन्

yakṣmanāśanam| 1-3 atharvā| vanaspatiḥ| anuṣṭup| varaṇo vārayātā ayaṃ devo vanaspatiḥ | yakṣmo yo asminnāviṣṭastamu devā avīvaran

हिन्दी अर्थ

0 रा त्यार करे, (त्वष्टा) कारोगर-परमेश्वर (त) ते छ ५ वाजिन्” पद जात्येकषचन मे है । युद्ध मुमि ् ५९८ याप्त संख्याम चाहिय, एक अश्व विजय केसेदे त द ४ (ते) तेरी (गृहा) हृदय गृहा में (यः जवः श स्थापित हुमा है, (उत) तथा (यः) जो (परेत्तः) परमे- (व ता रै, (वाजिन्) है वेग वाले अश्व ! (तेन) उस (बलन

English

One-minded, true to thee be all the regions: faithful to thee, the firm, be this assembly! A man’s love charm This strength that Soma hath bestowed, the head of her who gladdeneth,—

अध्याय ६

श्लोक 85.2

इन्द्र॑स्य॒ वच॑सा व॒यं मि॒त्रस्य॒ वरु॑णस्य च ।दे॒वानां॒ सर्वे॑षां वा॒चा यक्ष्मं॑ ते वारयामहे

indrasya vacasā vayaṃ mitrasya varuṇasya ca | devānāṃ sarveṣāṃ vācā yakṣmaṃ te vārayāmahe

हिन्दी अर्थ

, (समने) ओर संग्राम मे (पारयिष्णुः) पार करने वाला हो । चि १६२ म॒यवेवेद-माष्य; काँ ¶1.अनु°. .१.चु° ९९ को 1 तन् को (नयन्ती) युदधममि मेले जाती हुई + धारण के लिये(अह्व.तः) अकुटिल हुआ (देवः) द्युतिमान् सूय ध ५ (महः) महान् सौर मण्डल के (धरुणाय)

English

With that which thence hath been produced we make thy spirit sorrowful. We make thy spirit sorrowful, we fill thy mind with pain and grief.

अध्याय ६

श्लोक 85.3

यथा॑ वृ॒त्र इ॒मा आप॑स्त॒स्तम्भ॑ वि॒श्वधा॑ य॒तीः ।ए॒वा ते॑ अ॒ग्निना॒ यक्ष्मं॑ वैश्वान॒रेण॑ वारये

yathā vṛtra imā āpastastambha viśvadhā yatīḥ | evā te agninā yakṣmaṃ vaiśvānareṇa vāraye

हिन्दी अर्थ

(अघमारः) व्यक्तिकेपापके अनुसार मृत्यु का निर्णय देने वाला, (नि- फंकने वाला (नीलशिष्ण्डः) नीलो ज्वाला देने वला, (देवजनाः) ये देवजन हैँ । युद्ध मे (सेनया) सेनाः के साथ ये देवजन भी (उत्तस्थिवांसः) उठते, है, (ते) वे देवजन , (अस्माकम्) हमारे (वीरन्) वीरो को (परि- मन्त्रमें मूख्य खूप मे देवजनो का वर्णन है मौर सेना का वणेन गौणहै। लिये जाते हँ उन के अपराधो के अनुसार दण्ड का निश्चय तो अघमा अधिकारी करता है, ओौर जो निश्चित. किये दण्ड को क्रियात्मक रूप देता है वह् “मृत्यु संज्ञक अधिकारीहे, वध्र" है, सेनिकों को भरण-पोषण

English

As smoke accompanies the wind, so let thy fancy follow me. May Varuna and Mitra, may Sarasvati the Goddess, May the centre of the earth, and both her limits bring thee close to me.

अध्याय ६

श्लोक 86.1

वृषकामना।१-३ अथर्वा।एकवृषः।अनुष्टुप्।वृषेन्द्र॑स्य॒ वृषा॑ दि॒वो वृषा॑ पृथि॒व्या अ॒यम्।वृषा॒ विश्व॑स्य भू॒तस्य॒ त्वमे॑कवृ॒षो भ॑व

vṛṣakāmanā| 1-3 atharvā| ekavṛṣaḥ| anuṣṭup| vṛṣendrasya vṛṣā divo vṛṣā pṛthivyā ayam| vṛṣā viśvasya bhūtasya tvamekavṛṣo bhava

हिन्दी अर्थ

““तामसास्त्र“ को शत्रु परः फकने वाला अधिकारी, भसु क्षेपणे; “नीलशि- खण्ड" है सूर्यं को नीलो. शिखा, ज्वालाखूपा? सौर रश्मियोंका देने वाला मधिकारी “नीलां शिखां ददातीति सूर्य को नीलो रप्र, शत्रुः दल पर फकने से शत्रुदल जला दिया जाता है। सूयं की शुक्ल रर्मि सति प्रकार की रश्मियों का समूदरूप होती है। ये सप्तविध रष्मियां वर्षा-ऋतु में ५; । अथववेद-भाष्य का० ६ अनु १० । सू° ६३ रष्मियोमे एक ओरता लोहित र्म होती है, दूसरी मर नील (णंगृल), बौर इन दोनों के मध्य मे शेष ५ रक्िमियां । “असौ या सेना मरुतः परेषामस्मानभ्येत्योज सा स्पधमाना । विष्ट हो कर भिथः हनन करती रहे । स्वकोय सेना भी इसी अन्धकार मे शतु सेनाके साय युद्ध कररही है) अतः हमारे सेनाधिकारी धमवश कहीं निज सैनिकों का भी वध न कर दे, इस लिये “अस्माकं परि वृजन्तु वीरान्" द्वारा उन्हँ सचेत किया गया है । मन्परमं "मरुतः" है मारनेमें

English

A charm to cure a poisoned man The shaft that Rudra hath shot forth against thy members and thy heart,

अध्याय ६

श्लोक 86.2

स॒मु॒द्र ई॑शे स्र॒वता॑म॒ग्निः पृ॑थि॒व्या व॒शी।च॒न्द्रमा॒ नक्ष॑त्राणामीशे॒ त्वमे॑कवृ॒षो भ॑व

samudra īśe sravatāmagniḥ pṛthivyā vaśī| candramā nakṣatrāṇāmīśe tvamekavṛṣo bhava

हिन्दी अर्थ

के लिये, (उतत) तथा (भवाय राज्ञे) सुखसम्पत्ति के उत्पादक राजा के (नमः कृणोमि) भँ नमस्कार करता ह, वे (मनसा) मननपूवक (होमः) संनिकों को आत्माहृतियों द्वारा (हरसा) शबृहारी (घृतेन) वीर्यशक्तदवारा क°६। अनु० १० । सु० ९३ अथवेवेद-भाष्य १६५

English

Here do we draw from thee to-day, and turn it hence to every side. From all the hundred vessels spread throughout the members of thy frame. 89

अध्याय ६

श्लोक 86.3

स॒म्राड॒स्यसु॑राणां क॒कुन्म॑नु॒ष्याऽणाम्।दे॒वाना॑मर्ध॒भाग॑सि॒ त्वमे॑कवृ॒षो भ॑व

samrāḍasyasurāṇāṃ kakunmanuṣyā'ṇām| devānāmardhabhāgasi tvamekavṛṣo bhava

हिन्दी अर्थ

(विश्वे देवाः) है राष्ट के सब दिव्य अधिकारियो! तथा (विश्व- वेदसः) सब वेदों के वेत्ता (मरुतः) ऋत्विजो ! (नः) हम प्रजाजनों को, (अघविषाभ्यः) घातक विषवाली प्रजाओों दारा किये गए (वधात्) चुना गया राजा, जो कि (पूतदक्षाः) पविश्र गौर वृद्धिकारकंर्हैः वे सब सदश सुखवुष्टिप्रद परमेश्वर कौ (सुमतौ) सुमति मे, अनुकूल मति में मघ।वषामभ्यः - घातक विषधारी प्रनाओं से सुरक्षा । मरूतः ऋतिवि- दारा प्रजाओं को पवित्र विचार-आचारवान् करते हं ।

English

From all those vessels and canals we call the poisonous matter forth. Worship to thee, the archer, and O Rudra, to thy levelled shaft!

अध्याय ६

श्लोक 87.1

राज्ञः संवरणम्।१-३ अथर्वा।ध्रुवः।अनुष्टुप्।आ त्वा॑हार्षम॒न्तर॑भूर्ध्रु॒वस्ति॒ष्ठावि॑चाचलत्।विश॑स्त्वा॒ सर्वा॑ वाञ्छन्तु॒ मा त्वद् रा॒ष्ट्रमधि॑ भ्रशत्

rājñaḥ saṃvaraṇam| 1-3 atharvā| dhruvaḥ| anuṣṭup| ā tvāhārṣamantarabhūrdhruvastiṣṭhāvicācalat| viśastvā sarvā vāñchantu mā tvad rāṣṭramadhi bhraśat

हिन्दी अर्थ

कारकः; दक्ष वृद्धौ (भ्वादिः) । ध घृतेन = रेतः कृत्वाज्यं देवाः पुरुषमाविशन् (अयवं० ११।०८।२९) । (१) अयवं० ५।२२।१ ममी पृतदकषाः विशेषण है वरुणः का । यथा "वरुणः । मघरविषाः= अघम् "माहृन्ति' + विषम्; जो किं घातक विषवाली है पूतदक्षः । जैसे (द्यावापृथिवी) द्यौः मौर पृथिवी (जोते) पट म ताने-वानेके

English

Yea, worship to thine arrow when it left the bow, and when it fell! A charm against disease They made this barley ready with a team of eight, a team of six.

अध्याय ६

श्लोक 87.2

इ॒हैवैधि॒ माप॑ च्योष्ठाः॒ पर्व॑त इ॒वावि॑चाचलत्।इन्द्र॑ इवे॒ह ध्रु॒वस्ति॑ष्ठे॒ह रा॒ष्ट्रमु॑ धारय

ihaivaidhi māpa cyoṣṭhāḥ parvata ivāvicācalat| indra iveha dhruvastiṣṭheha rāṣṭramu dhāraya

हिन्दी अर्थ

(वः) तुम्हारे (मनांसि) मनो को (सं नमामसि) परस्पर कै प्रति हम ॥ ॥ क प्रति नत करते है कलक है, (आकूतीः) संकल्पो को । ( 1 शक्त ९५ (चित्तेभिः) चित्तो के साथ (एत) आओ । (मम) मेरे (वरेषु) वशो! ॥/ १ यथा “द्यौरहं पृथिवी त्वम् । ताविह संभवाव प्रजामाजनयावदहै 1" । (वः) तुम्हारे (हृदयानि) हृदयो को (कृणोमि) म कृरता हु, (मम) मेरे । (यातम्, अनु व्राः) मागं के अनुसार मागेवाले हुए (एत) मामो, अर्थात् ममानुगामी बनो । ं

English

With this I drive to westward, far away, thy bodily disease. Vita breathes downward from above, and downward Sūrya sends his heat:

अध्याय ६

श्लोक 87.3

इन्द्र॑ ए॒तम॑दीधरत् ध्रु॒वं ध्रु॒वेण॑ ह॒विषा॑ ।तस्मै॒ सोमो॒ अधि॑ ब्रवद॒यं च॒ ब्रह्म॑ण॒स्पतिः॑

indra etamadīdharat dhruvaṃ dhruveṇa haviṣā | tasmai somo adhi bravadayaṃ ca brahmaṇaspatiḥ

हिन्दी अर्थ

॑ हं = इधर-उधर भटङ्ने नहीं देता । यहं कथन सभापति का है सभासदौं २ सूरत ६४ में कथन, राष्ट्र के राजाद्रारा हुमा है, जिसे कि वरण कहते हैँ । आत मे च्ावंपृथिवी ओतां देवी सरंस्वतो । = (नौः) नौका (दिवि) युलोक मे (अचरत्) चली है, (तत्र) उस कान

English

Downward is drawn the milch-cow’s milk: so downward go thy malady! The Waters verily bring health, the Waters drive disease away. The Waters cure all malady: may they bring medicine for thee.

अध्याय ६

श्लोक 88.1

ध्रुवो राजा।१-३ अथर्वा।ध्रुवः।अनुष्टुप्, ३ त्रिष्टुप्।ध्रु॒वा द्यौर्ध्रु॒वा पृ॑थि॒वी ध्रु॒वं विश्व॑मि॒दं जग॑त्।ध्रु॒वासः॒ पर्व॑ता इ॒मे ध्रु॒वो राजा॑ वि॒शाम॒यम्

dhruvo rājā| 1-3 atharvā| dhruvaḥ| anuṣṭup, 3 triṣṭup| dhruvā dyaurdhruvā pṛthivī dhruvaṃ viśvamidaṃ jagat| dhruvāsaḥ parvatā ime dhruvo rājā viśāmayam

हिन्दी अर्थ

फुल को (कुष्ठम्) कू5 रूप (अवन्वत) याचितं किया । है , युलोकस्थ नौकाके तारागण हिरण्यस्षवृश चमकते है, ओर उन कौ रमयां रस्वी रूप है जिन द्वारा तारागण परस्पर बन्धे एर मौर नौका के नौकाषूप को बनाए हृए ह । रात्ोकाल में द्युलोक मे यह् नौका “विशेष समथ” मे दुष्टिगोचर होतो है, नौका काल में कुष्ठ या कषठ पुत्व का संग्रह करना चाहिए । नौः अचरत् पृथिवी निज धुरी पर पश्चिम से पूर्वं को आर श्रमण २९५०।१८६) करती है, अतः य-लोक ूर्व-से-पश्चिम की भर गति करता प्रतीत हता है । नौकां भी बुलोकस्थ है, अतः वभा युलोक रूपो-समृद्र मे पूर्व-से-पश्चिम.की ओर चलतो हई अचरत् प्रतीत होती है ।

English

A charm to strengthen and inspirit a war-horse Be fleet as wind, Strong Steed, when thou art harnessed; go forth as swift as thought at

अध्याय ६

श्लोक 88.2

ध्रु॒वं ते॒ राजा॒ वरु॑णो ध्रु॒वं दे॒वो बृह॒स्पतिः॑ ।ध्रु॒वं त॒ इन्द्र॑श्चा॒ग्निश्च॑ रा॒ष्ट्रं धा॑रयतां ध्रु॒वम्

dhruvaṃ te rājā varuṇo dhruvaṃ devo bṛhaspatiḥ | dhruvaṃ ta indraścāgniśca rāṣṭraṃ dhārayatāṃ dhruvam

हिन्दी अर्थ

(गोषधीनाम्) ओषध्यो का (गभः) गर्भरूप (असि) तु है, (उत) (इमम्) इस रोगी को (अगदम्) रोगरहित (कृधि) तु कर। प्रकरण की दुष्टिसे कष्ठ-जषध का वणेन प्रतीत होता है । का०६; अनु° १०॥। सू० ६६ अयवेपरेद-भाष्प १९६

English

lndra’s sending. Let the possessors of all wealth, the Maruts, yoke thee, and Tvashtar in thy feet lay swiftness.

अध्याय ६

श्लोक 88.3

ध्रु॒वोऽच्यु॑तः॒ प्र मृ॑णीहि॒ शत्रू॑न्छत्रूय॒तोऽध॑रान् पादयस्व ।सर्वा॒ दिशः॒ संम॑नसः स॒ध्रीची॑र्ध्रु॒वाय॑ ते॒ समि॑तिः कल्पतामि॒ह

dhruvo'cyutaḥ pra mṛṇīhi śatrūnchatrūyato'dharān pādayasva | sarvā diśaḥ saṃmanasaḥ sadhrīcīrdhruvāya te samitiḥ kalpatāmiha

हिन्दी अर्थ

(सोमराज्ञोः) सोम-मौषधी जिन मे राजा है, (वह्लीः)जो बहुत भधात प्रयुक्त की जाती (वाः) वे (नः) हमे (अदसः) पाप से (मुञ्चन्तु) शरीर में लगभग सौ १०७ मम॑स्थल ह अतः मर्मस्थलों कौ दुष्ट से लगभग सौ में ओषधियों को विभक्त शिया है । बृहस्पतिप्रसूताः = उत्पन्न पाप से, (अथो) तथा (वरुण्यात् ) ,जलोदर रोग से, (उत) भी। शपथ च्ूढो होती है। यह भी रोगरूप दहै, सत्यवादी शपथ नहीं करता । वरुण का अरथहै मेष । अतः वरुण्य है जलोध रोग, अर्थात् जलोदर । पड्वोश =है पादो मे प्रविष्ट रोग, शलीपद्, 21601120112.813 देव ह दन्दियां । किल्विष है प्राप, जोकि निश्चय से विषरूप होता है, किल-

English

That speed, that lies concealed in thee, O Charger, speed granted to the hawk or wind that wandered,

अध्याय ६

श्लोक 89.1

प्रीतिसंजननम्।१-३ अथर्वा।(रुद्रः,) १ सोमः, २ वातः, ३ मित्रावरुणौ।अनुष्टुप्।इ॒दं यत् प्रे॒ण्यः शिरो॑ द॒त्तं सोमे॑न॒ वृष्ण्य॑म्।ततः॒ परि॒ प्रजा॑तेन॒ हार्दिं॑ ते शोचयामसि

prītisaṃjananam| 1-3 atharvā| (rudraḥ,) 1 somaḥ, 2 vātaḥ, 3 mitrāvaruṇau| anuṣṭup| idaṃ yat preṇyaḥ śiro dattaṃ somena vṛṣṇyam| tataḥ pari prajātena hārdiṃ te śocayāmasi

हिन्दी अर्थ

। १. जैसे गर्भस्थ शिघ्यु, माताङे गमं से, पोषण तषा गुण प्रहण करता है, वपे २२ 18 कष्ठ मे मानो सब मौषघों की पुष्टियां तथा गुण दिद्यामान द । ६ १७० अथववेद-भाष्य काण ६। भनु० १० । सुऽ ९७। (उपारिम) हम ने उपगत करिया है, प्राप्त किया है, (तानि नः) उन हमारे (हक कं० ६। गनु° १० । मु० ९ थवेवेद-भाष्य £ पवित्र करे, उन का संश्नोधन करे ।

English

Therewith, Strong Steed, saving in shock of battle endowed with might by might win thou the contest. Bearing thy body, Charger, may thy body run blessing us and winning thee protection.

अध्याय ६

श्लोक 89.2

शो॒चया॑मसि ते॒ हार्दिं॑ शो॒चया॑मसि ते॒ मनः॑ ।वातं॑ धू॒म इ॑व स॒ध्र्य॑१ङ्मामे॒वान्वे॑तु ते॒ मनः॑

śocayāmasi te hārdiṃ śocayāmasi te manaḥ | vātaṃ dhūma iva sadhrya1ṅmāmevānvetu te manaḥ

हिन्दी अर्थ

सोम जिनका राजा है वे सेकड़ों ओषधियां अभिप्रेत द (मन्त्र १) । भवकारो हो, (सोमः) सेनाध्यक्ष (अभिभः - ५ ) (अभिभूः) पराभवकारी हो, (इन्रः) वाले हम (इदम्) इख (हविः) आत्माषटूति को (विधेम) समपित करे । पराभवकारी हो । (अहम्) यै वरुण-राजा (विश्वाः ¦ पृतनाः) शत्रू की सब सेनामों का (यथा अभि असानि) जिस ५१ परा- दी जाती है, इसी प्रकार युद्धारम्भ करने से पूरव, सामूहिक क्प मे, ,

English

May he, unswerving, to uphold the mighty, stablish his lustre as a God in heaven. A prayer for protection from poison

अध्याय ६

श्लोक 89.3

मह्यं॑ त्वा मि॒त्रावरु॑णौ॒ मह्यं॑ दे॒वी सर॑स्वती ।मह्यं॑ त्वा॒ मध्यं॒ भूम्या॑ उ॒भावन्तौ॒ सम॑स्यताम्

mahyaṃ tvā mitrāvaruṇau mahyaṃ devī sarasvatī | mahyaṃ tvā madhyaṃ bhūmyā ubhāvantau samasyatām

हिन्दी अर्थ

युदाग्नि मेँ आत्माहुतियां देने के दृढ संकल्प कयि जाते है । (विपश्चिता = विपस्विनौ) है मेधावी (मित्रावसणा- मित्रावरुणौ) सीचा करो । (नि्ऋ तिम्) कृष्ट को (पराचैः) पराडमुख करने के उपायों दारा ( दूरम्) दूर (बधेथाम्) हटाया करो, (कृतं चित्) हम प्रजा हारा

English

Yama, Death direly fatal, the Destroyer, with his black crest, Sarva the tawny archer, And all the Gods uprisen with their army, may these on every side avoid our heroes.

अध्याय ६

श्लोक 90.1

इषुनिष्कासनम्।१-३ अथर्वा।रुद्रः।अनुष्टुप्, ३ आर्षी भुरिगुष्णिक्।यां ते॑ रु॒द्र इषु॒मास्य॒दङ्गे॑भ्यो॒ हृद॑याय च ।इ॒दं ताम॒द्य त्वद् व॒यं विषू॑चीं॒ वि वृ॑हामसि

iṣuniṣkāsanam| 1-3 atharvā| rudraḥ| anuṣṭup, 3 ārṣī bhuriguṣṇik| yāṃ te rudra iṣumāsyadaṅgebhyo hṛdayāya ca | idaṃ tāmadya tvad vayaṃ viṣūcīṃ vi vṛhāmasi

हिन्दी अर्थ

(कृतम् एनः) द्वि गए एक भी पापसे मुक्ति को अभिलाषा प्रकट की करके जीतते हुए, (गोजितम्) शत्रू की पृथिवो को जीत लेने वाले, (वः जोतते हए, ओर १ (मोजसा) बल द्वारा (प्रमृणन्तम्) शतु सैनिकों को होमो, ओर (सखायः) मित्रभूत सेनिकों ! (अनु) इसके अनुसार (सं रभध्वम्) मिलकर युद्धारम्भ करो। (दृनब्रः) सम्राट् (जयाति) विजयीहोया विजयी होता है (षरा

English

With mind, burnt offerings, butter, and libation, to royal Bhava and the archer Sarva, To these the worshipful I pay my worship: may they turn else- where things with deadly

अध्याय ६

श्लोक 90.2

यास्ते॑ श॒तं ध॒मन॒योऽङ्गा॒न्यनु॒ विष्ठि॑ताः ।तासां॑ ते॒ सर्वा॑सां व॒यं निर्वि॒षाणि॑ ह्वयामसि

yāste śataṃ dhamanayo'ṅgānyanu viṣṭhitāḥ | tāsāṃ te sarvāsāṃ vayaṃ nirviṣāṇi hvayāmasi

हिन्दी अर्थ

जयाते न) पराजितन ट, या पयजित नहीं होता, (अधिराजः) वहं याजाधिराज (राजु) राजाभों पर (राजयातै) राज्यकरे या करता है। र् -माष्य करां ६। अनु० १०।सु० € वादन योग्य है, (उपसद्यः) सेवनीय है न । ए वा अय राजा जयाति'“(सायण) इस प्रा विकल्प मे सायण

English

venom. Save us, All-Gods and all-possessing Maruts, from murderous stroke and things that slay with poison.

अध्याय ६

श्लोक 90.3

नम॑स्ते रु॒द्रास्य॑ते॒ नमः॒ प्रति॑हितायै ।नमो॑ विसृ॒ज्यमा॑नायै॒ नमो॒ निप॑तितायै

namaste rudrāsyate namaḥ pratihitāyai | namo visṛjyamānāyai namo nipatitāyai

हिन्दी अर्थ

राजा” (यजु ° ८।३७) की भावना के अनुकूल है । । ध । क ४ (त्वम्) तु (जधि राजः राजाधिराज है, (श्रव- 2 न ध इः त् (जनानाम्) सब जनों का (अभि- ९ भुः) है, सव जनोंमे उक्कृष्ट है । (त्वम्) तु ५: क ! (उत) ४ आओौरत् उदीच्याः दिशः) उत्तर की दिशाके वसः असि) शतुजों का हनन करने वाला है। (यत्र) जितस ओर 4 ध जलप्रवाह (यन्ति) जाते, प्रवाहित होते है (तत्) 9 १ ) तेरा (जितम्) जतादहूभा है, (हव्यः) हमद्वारा आहूत को वर्षा करता हुआ, (दक्षिणतः) दक्षिण प्रदेश से (एषि) तू भाताहै। का० ६१ अनु० १० ।सु० ३६ अथर्ववेद-भाष्य १७३

English

Pure is the might of Varuna, Agni, Soma. May Vāta’s and Parjanya’s favour bless us.

अध्याय ६

श्लोक 91.1

यक्ष्मनाशनम्।१-३ भृग्वङ्गिराः।यक्ष्मनाशनम्, ३ आपः।अनुष्टुप्।इ॒मं यव॑मष्टायो॒गैः ष॑ड्यो॒गेभि॑रचर्कृषुः ।तेना॑ ते त॒न्वो॒३रपो॑ ऽपा॒चीन॒मप॑ व्यये

yakṣmanāśanam| 1-3 bhṛgvaṅgirāḥ| yakṣmanāśanam, 3 āpaḥ| anuṣṭup| imaṃ yavamaṣṭāyogaiḥ ṣaḍyogebhiracarkṛṣuḥ | tenā te tanvo3rapo 'pācīnamapa vyaye

हिन्दी अर्थ

दारा कियाहै पृथिकी की नदियों के प्रवाह प्रायः पश्चिमं तथा मे मेष पश्चिम तथा दक्षिण के समुद्रौ से ही उत्ते ह। या दत्त कहु दिया जाता है । इसी अभिप्राय को दुष्टिगत कर कहा है कि कहा है । यथा “इन््रन्र मनुष्या हैः प

English

A charm to reconcile a King’s discontented people We bend your minds in union, bend in harmony your hopes and plans: You there, who turn to sundered ways, we bend and bow in unison.

अध्याय ६

श्लोक 91.2

न्य॑१ग्वातो॑ वाति॒ न्यऽक् तपति॑ सूर्यः॑ ।नी॒चीन॑म॒घ्न्या दु॑हे॒ न्यऽग् भवतु ते॒ रपः॑

nya1gvāto vāti nya'k tapati sūryaḥ | nīcīnamaghnyā duhe nya'g bhavatu te rapaḥ

हिन्दी अर्थ

क मन्धो प्रकट होता है मदुष्यान अथवा मचु्वाः है मनुष्य (अंहूरणात्) हनन हीने से (पुरा ) पूवं ही (स्वा) तुक्षे (मभि हुवे) स्वाभि- “मनुष्याः” पाठ संगत नहीं प्रतीत हुआ, अतः उस ने मनुष्याः का अर्थं कियाद १७४ अथवेवेद-भाष्य कां० ६। अनु० १०। सू० ६९ मानम्) बहुत नामों वाने अधवा नाना शत्रुम को नत करने वाते को, तथा (एकजम् ) अकेले ही जगत् पेदा करने वाले को (ल्ुयामि) यै आह्वान

English

I with my spirit make your spirits captive: these with their thoughts follow my thought and wishes.

अध्याय ६

श्लोक 91.3

आप॒ इद् वा उ॑ भेष॒जीरापो॑ अमीव॒चात॑नीः ।आपो॑ विश्व॑स्य भेष॒जीस्तास्ते॑ कृण्वन्तु भेष॒जम्

āpa id vā u bheṣajīrāpo amīvacātanīḥ | āpo viśvasya bheṣajīstāste kṛṇvantu bheṣajam

हिन्दी अर्थ

आदि द्वारा निज हनन को अनुभव करता हुआ उपासक, जगत् ॐ कर्ता आ ठ्न +र । एकजम् = अथवा “एकेन प्रकरृतिष्पेण कारणेन जनयतीति" यो अग्र सेन्यो व॒धो जिघांसन् न उगीरते। (अद्य) माज (यः) जौ (सेन्यः वधः) आसुरी सेना! का वधकारी आयुध, (नः व मारी हत्या चाहता हूभा (उदीरते) उठा है,

English

I make your hearts submissive to mine order closely attending go where I precede you. I have invoked both Heaven and Earth, invoked divine Sarasvati,

अध्याय ६

श्लोक 92.1

वाजी।१-३ अथर्वा।इन्द्रः, वाजी।त्रिष्टुप्, १ जगती।वात॑रम्हा भव वाजिन् यु॒ज्यमा॑न॒ इन्द्र॑स्य याहि प्रस॒वे मनो॑जवाः ।यु॒ञ्जन्तु॑ त्वा म॒रुतो॑ वि॒श्ववे॑दस॒ आ ते॒ त्वष्टा॑ प॒त्सु ज॒वं द॑धातु

vājī| 1-3 atharvā| indraḥ, vājī| triṣṭup, 1 jagatī| vātaramhā bhava vājin yujyamāna indrasya yāhi prasave manojavāḥ | yuñjantu tvā maruto viśvavedasa ā te tvaṣṭā patsu javaṃ dadhātu

हिन्दी अर्थ

(समन्तम् )भपने सब ओर (परिदद्मः) हम षेरेके स्परे धारित करते है। अद्य = उपासक जिस दिन आसुरी सेना ते पूर्णतया व्यथित ह्। गया, वह दिन । मन्त्र मे समूहोपासना का वर्णन है । बाहू = व ५ मौर वल को (समन्तम्) अपने सब ओर (परिदद्मः) हम घरेकेरूपमेधारित करते (नः ) हमारी (त्रायताम्) वे पालना करं । अतः (देव) है देव ! (सवितः) है प्रेरक , (सोम) है सौम्य स्वभाव वले (राजन्) सव के राजा परमेश्वर ! (मा) मुक्ष को (सुमनसम्) न या शोभनमन वाला (कृणु) कर (स्वस्तये) कल्याण के

English

Indra and Agni have I called: Sarasvati, so may we thrive! 90

अध्याय ६

श्लोक 92.2

ज॒वस्ते॑ अर्व॒न् निहि॑तो॒ गुहा॒ यः श्ये॒ने वात॑ उ॒त योऽच॑र॒त् परी॑त्तः ।तेन॒ त्वं वा॑जि॒न् बल॑वा॒न् बले॑ना॒जिं ज॑य॒ सम॑ने पारयि॒ष्णुः

javaste arvan nihito guhā yaḥ śyene vāta uta yo'carat parīttaḥ | tena tvaṃ vājin balavān balenājiṃ jaya samane pārayiṣṇuḥ

हिन्दी अर्थ

१. काम क्रोष लोम आदि सब हारा आक्रमण । कां० ६। अनु° १० । सु १०० अथयववेद-भाष्य १७५ सामूहिक उपासना मेँ बैठ कर, प्रत्येक उपासक, परमेश्वर से पालना को याचना करता है जिस से कि आसुरी भार्वो द्वारा वह् व्यायतनहो। आसुरी भावों से कारा पा कर उपासक प्रखन्नचित्त हो जाता है, तथा शुभ मन वाना हो जाताहै, गौरः कल्याण भागे का पथिक हो जाता है । (देवाः अदुः) देवो ने दिया है, (सूरेः अदात्) सूयं ने दिया है, (चोः अदात्) चुलोक ने दिया है, (पृथिवी अदात्) पृथिवी ने दियाहै, तिखः सरस्वतीः) तीन सरस्वतियों ने (सचित्ताः) एकचित्त हो कर (अदुः) दिया है (विषदूषणम्) विषनिगरक ओषध ।

English

A charm to remove disease In the third heaven above us stands the Asvattha tree, the seat of Gods. There the Gods gained the Kushtha plant, embodiment of end- less life.

अध्याय ६

श्लोक 92.3

त॒नूष्टे॑ वाजिन् त॒न्वं॑१ नय॑न्ती वा॒मम॒स्मभ्यं॒ धाव॑तु॒ शर्म॒ तुभ्य॑म्।अह्रु॑तो म॒हो ध॒रुणा॑य दे॒वो दि॒वीऽव ज्योतिः॒ स्वमा मि॑मीयात्

tanūṣṭe vājin tanvaṃ1 nayantī vāmamasmabhyaṃ dhāvatu śarma tubhyam| ahruto maho dharuṇāya devo divī'va jyotiḥ svamā mimīyāt

हिन्दी अर्थ

देवाः = साध्याः, ऋषयश्च । यथा “तेन देवाऽ्जयजन्त साध्याऽचछष यषएच ये” (यजु ३१।९) । साध्याः है योगसाधनाओं से सम्पन्न योगी भी। इन की हन शक्तियों को विदूषण-ओषध कहा है । हस्त स्पशं द्वारा ये महानुभाव रोगी मे शक्ति का संचार कर उसके रोगका निवारण फर सकते है । हस्तस्थं चिकित्सा के लिये देखो (अयववे° ३।११।२० ८); इनी शक्तियों के प्रयोगोंको विषदूषण आदि मँ उपयुक्त करनेका तिस्रः सरस्वतीः = सायणाचायं के अनुसार ये तीन श््रयी" कूपार, रूप में विषदूषण के उपायों का ज्ञान देती दहै ।

English

There moved through heaven a golden ship, a ship with cordage wrought of gold. There Gods obtained the Kushtha plant, the flower of immor- tality.

अध्याय ६

श्लोक 93.1

स्वस्त्ययनम्।१-३ शन्तातिः।रुद्रः, १ यमो, मृत्युः, शर्वः, २ भवः, शर्वः ३ विश्वे देवाः, मरुतः, अग्नीषोमौ, वरुणः, वातपर्जन्यौ।त्रिष्टुप्।य॒मो मृ॒त्युर॑घमा॒रो नि॑रृ॒थो ब॒भ्रुः श॒र्वोऽस्ता॒ नील॑शिखण्डः ।दे॒व॒ज॒नाः सेन॑योत्तस्थि॒वांस॒स्ते अ॒स्माकं॒ परि॑ वृञ्जन्तु वी॒रान्

svastyayanam| 1-3 śantātiḥ| rudraḥ, 1 yamo, mṛtyuḥ, śarvaḥ, 2 bhavaḥ, śarvaḥ 3 viśve devāḥ, marutaḥ, agnīṣomau, varuṇaḥ, vātaparjanyau| triṣṭup| yamo mṛtyuraghamāro nirṛtho babhruḥ śarvo'stā nīlaśikhaṇḍaḥ | devajanāḥ senayottasthivāṃsaste asmākaṃ pari vṛñjantu vīrān

हिन्दी अर्थ

- फां० ६। अनु० १० । सु° १०१ अथववेद-माष्य १७७ 1 १७६ अथरवेवेद-भाप्य कां० ६1 अनु० १० सू० १०० पाथिवतत्व के मेल से (सम्भूता) तु उत्प्नहुईद है, (सा) उस तूने मिष्टो के प्रलेप द्वारा भी विषदूषण किया जा सकता. है । ॥ कविता के शब्दों मे भाव छिपा हृ है । असुर है विनाशक 1 उप- न = ५ 1 पग 2 ॥ प हि समान है । अतः इन मे जनक-जन्य भाव है । देव ह दिव्यगुणौ, भौर उप-

English

Thou art the infant of the plants, the infant of the Snowy Hills: The germ of every thing that is: free this my friend from his disease. A prayer for deliverance from sin and sorrow

अध्याय ६

श्लोक 93.2

मन॑सा॒ होमै॒र्हर॑सा घृ॒तेन॑ श॒र्वायास्त्र॑ उ॒त राज्ञे॑ भ॒वाय॑ ।न॒म॒स्येऽभ्यो॒ नम॑ एभ्यः कृणोम्य॒न्यत्रा॒स्मद॒घवि॑षा नयन्तु

manasā homairharasā ghṛtena śarvāyāstra uta rājñe bhavāya | namasye'bhyo nama ebhyaḥ kṛṇomyanyatrāsmadaghaviṣā nayantu

हिन्दी अर्थ

पृथिवी -पृथिवी तो ओौषधों का भण्डार है, जिसःद्वारा समग्र रोगौ का उपचार हो रहा है । विच्छ, भिड, साप आदिने जहां काटा है वहां दूषित कर दो, विङृत कर दो, विष क विषत्व को नष्ट करदो । ॥ अ. । शक्तिशःली वृषभ के सदश एक्तिशाली बन, (वधंस्व) र शरीर से वदृ, (योषितम्) प्रोति करनेवालो पत्नौ को (इत्) ही (जहि) जाया कर । ) प्र(मशक्ति का सञ्चय शरीर में कर। (२) मौर

English

The many plants of hundred shapes and forms that Soma rules as King, p. a245 Commanded by Brihaspati, deliver us from grief and woe!

अध्याय ६

श्लोक 93.3

त्राय॑ध्वं नो अ॒घवि॑षाभ्यो व॒धाद् विश्वे॑ देवा मरुतो विश्ववेदसः ।अ॒ग्नीषोमा॒ वरु॑णः पू॒तद॑क्षा वातापर्ज॒न्ययोः॑ सुम॒तौ स्या॑म

trāyadhvaṃ no aghaviṣābhyo vadhād viśve devā maruto viśvavedasaḥ | agnīṣomā varuṇaḥ pūtadakṣā vātāparjanyayoḥ sumatau syāma

हिन्दी अर्थ

को नष्ट किया जा सकताहै। जसे दीमक का मूखरक्त उदक काष्ठ (वस प्राणने, अ 714: एाक्तिशाली बेल के सदुश शक्तिशाली बन । (३) अपनी शारीरिक, मानः ¦ को फला । (५) परन्तु परिवार फलाने से पूवं यह देख ले कि तेरी उसके विषत्व को नष्ट करदेताहै। -. व जो है या नहीं । (६) यदि राणां द । ; प्रजनन इन्द्रिय परिवार फलान योग्य भभो हृरद है या नहीं । (६) यदि. हे उपजीका ! (असुराणाम्) असुरो की (दुदिता) बेटी (असि) तु" च ।

English

Let them release me from the curse and from the noose of Varupa, Free me from Yama’s fetter, and from every sin against the

अध्याय ६

श्लोक 94.1

सांमनस्यम्।१-३ अथर्वाङ्गिराः।सरस्वती।अनुष्टुप्, २ विराड्-जगती।सं वो॒ मनां॑सि॒ सं व्र॒ता समाकू॑तीर्नमामसि ।अ॒मी ये विव्र॑ता॒ स्थन॒ तान् वः॒ सं न॑मयामसि

sāṃmanasyam| 1-3 atharvāṅgirāḥ| sarasvatī| anuṣṭup, 2 virāḍ-jagatī| saṃ vo manāṃsi saṃ vratā samākūtīrnamāmasi | amī ye vivratā sthana tān vaḥ saṃ namayāmasi

हिन्दी अर्थ

है, (सा) वह तू (देनानाम्) देवों कीः(स्वसा) बहिन (भसि) है । (दिवः. - २२३ को सम्बोधित क्रिया । दोमरोँ को “उपजा: कहा । उपजोकाः= पृथिव्याः) द्युलोक के ताप गौर प्रकाश, तथा जलतत्व से, तथा पृथिवी के १७८ भथववेद-माष्यङः का० ६ । अनु० १० । सू० १०१ ३८।२; ३६।४) । योषित् =जुषी प्रीतिसेवनयोः (तुदादिः) ज प्रोति करे ओर सेव्रा करे वह पत्नी (उणा० १।९७) । जहि हन हिसागत्योः, गत्यथ मभिग्रत है । जहि =गच्छ (सायण) )

English

Gods! From every fault in look, in word, in spirit that we, awake or sleeping, have committed,

अध्याय ६

श्लोक 94.2

अ॒हं गृ॑भ्णामि॒ मन॑सा॒ मनां॑सि॒ मम॑ चि॒त्तमनु॑ चि॒त्तेभि॒रेत॑ ।मम॒ वशे॑षु॒ हृद॑यानि वः कृणोमि॒ मम॑ या॒तमनु॑वर्त्मान॒ एत॑

ahaṃ gṛbhṇāmi manasā manāṃsi mama cittamanu cittebhireta | mama vaśeṣu hṛdayāni vaḥ kṛṇomi mama yātamanuvartmāna eta

हिन्दी अर्थ

येन) जिस उदेश्य से (कृशम्) निर्बल को (वाजयन्ति) वाजीकरण दारा सवन करते ह, ओर (येन) जिस उदेश्य .से (आतुरम्) रोगातं को (हिन्वन्ति) प्रीणित करते है, पोषित करते ह, (तेन) उस उटेण्य से (पसः) जनन-इन्द्िय को (धनुः इव) धनुष् के सदृश (भा तानय) विस्ता- रिति करदे, या तान दे। परति यदि रोगवश इन्दियरोगी हो जाय, ओौर उसको इन्द्रिय आनु- त्पादन ओौर गृहस्थ धमे का पालन, नकि कामवासनासे प्रेरित भोग।

English

May Soma, with his godlike nature, cleanse us. A prayer for the success and prosperity of a King The sacrifice is victor, Agni victor, victorious is Soma, Indra conquers:

अध्याय ६

श्लोक 94.3

ओते॑ मे॒ द्यावा॑पृथि॒वी ओता॑ दे॒वी सर॑स्वती ।ओतौ॑ म॒ इन्द्र॑श्चा॒ग्निश्च॒र्ध्यास्मे॒दं स॑रस्वति

ote me dyāvāpṛthivī otā devī sarasvatī | otau ma indraścāgniścardhyāsmedaṃ sarasvati

हिन्दी अर्थ

को (आतनोमि) पू्णंतया विस्तारित करता हं, (धन्वनि अधि) धनुष् पर जसे (रोदितम्) हरिणी की ओर, वेते तु (क्रमस्व) पत्नी की भोर पय रोग का केवल वणेन गौर उसकी निवृत्ति का कथनमाच्र हमा है । डाक्टयी की पुस्तकोमे भी एसे विषयों का वणेन पाया जातादहै, भौर पढ़ायाभौ कृ?० ६ । अनु १० । सू० १०२ अथवेवेद-भाष्य १७६ (अष्िविना अश्विनौ) है दो अश्वियो ! (यथा) जैसे (अयम्) यह (वाहः) रथवाहक अश्व (समेति) रथ मे जृतने के लिये सम्यक् प्रकार से, अर्थात् विना प्रतिरोध केमा जातादहै, (च) मौर मागे पर (सम् वतेते) सम्यक् प्रकारसे वतेता है, चलता है, (एवा) इसी प्रकार हे पत्नौ (ते मनः) तेरा मन (माम् अभि) मञ्च पति के अभिमू (समेतु)

English

So will we bring oblation unto Agni, this sacrifice that I may win all battles. Praise to you, Mitra-Varupa, hymn-singers! Here swell with meath dominion blest with

अध्याय ६

श्लोक 95.1

कुष्ठौषधिः।१-३ भृग्वङ्गिराः।वनस्पतिः।अनुष्टुप्।अ॒श्व॒त्थो दे॑व॒सद॑नस्तृ॒तीय॑स्यामि॒तो दि॒वि।तत्रा॒मृत॑स्य॒ चक्ष॑णं दे॒वाः कुष्ठ॑मवन्वत

kuṣṭhauṣadhiḥ| 1-3 bhṛgvaṅgirāḥ| vanaspatiḥ| anuṣṭup| aśvattho devasadanastṛtīyasyāmito divi| tatrāmṛtasya cakṣaṇaṃ devāḥ kuṣṭhamavanvata

हिन्दी अर्थ

बाहः है अश्व । इसलिये अश्विनौ को सम्बोधित किया प्रतीत होता स्वाभिमुख करने का अभिलाषो है । हे रुष्ट पत्नौ ! (ते मनः) तेरे मन को (अहम्) मँ पति (आ विदामि) लिपट जाताहै वेद (द मनः) तेरा मन (मयि) मुज्न मै (वेष्टताम्)

English

children. Far into distant regions drive Destruction, and even from committed sin absolve us. In this strong hero be ye glad and joyful: cleave ye to him even as ye cleave to Indra.

अध्याय ६

श्लोक 95.2

हि॒र॒ण्ययी॒ नौर॑चर॒द्धिर॑ण्यबन्धना दि॒वि।तत्रा॒मृत॑स्य॒ पुष्पं॑ दे॒वाः कुष्ठ॑मवन्वत

hiraṇyayī nauracaraddhiraṇyabandhanā divi| tatrāmṛtasya puṣpaṃ devāḥ kuṣṭhamavanvata

हिन्दी अर्थ

इस का अथं है अश्वके पुष्ठके साथ संलग्न होकर रथम जुती अश्वा घोड़ी । साथ-खथ जुते होने कै कारण राजाएव शषएवा को भोग के लिये देन्ययुक्त कर देता है । 'आखिदामि' खिद हैन्ये (दिवादिः, रुधादिः), मौर अश्वा भोगाथं, राजा के अनुकूल हो जतो है। यही अवस्था पति, पत्नी १८० अयववंवेद-भाष्य का० ६ ! मनु° १०। सु० १०२ (आञ्जनस्य) शरीर से शोभा वाला तथा तेरी कामना वाला, (मदु (नलदस्य) तुज्ञे भाषण देने वाला अर्थात् तेरे साथ बोल रहा, (तुरः) तेरी " मै ह, उस मेरे (हस्ताभ्याम्) निज हाथों हारा (अनुरोधनम्) तेरी कामना

English

Victorious, kine-winner, thunder-wielder, who quells a host and with his might destroys it. Praise of Indra

अध्याय ६

श्लोक 95.3

गर्भो॑ अ॒स्योष॑धीनां॒ गर्भो॑ हि॒मव॑तामु॒त।गर्भो॒ विश्व॑स्य भू॒तस्ये॒मं मे॑ अग॒दं कृ॑धि

garbho asyoṣadhīnāṃ garbho himavatāmuta| garbho viśvasya bhūtasyemaṃ me agadaṃ kṛdhi

हिन्दी अर्थ

का (उद्भरे) मँ उद्धार करता ह, उसे पूणं करता हूं । संदानं वो बृहस्पतिः संदानं सविता कर् । (वः) है शत्रुम ! तुम्हारा (संदानम्) बन्धन न करौ बड.सेना का पति (करत्) करे, (संदानम्) बन्धन (स न (संदानम्) वन्धनं करं । युद्धम परास्त हृए फात्रओं का बन्धन, विजयी त का कोर ५ अधिकारी निज आज्ञा हारा कर सकता है। मा क ४ अश्वा रोदियो के तथा रथारोहिमों के अश्वो के । संदानम् = “सपू

English

Indra be victor, never to be vanquished, to reign among the Kings as sovran ruler! Here be thou meet for praise and supplication, to be revered and waited on and worshipped.

अध्याय ६

श्लोक 96.1

चिकित्सा।१-३ भृग्वङ्गिराः।वनस्पतिः, ३ सोमः।अनुष्टुप्, ३ त्रिपाद्विराण्नाम गायत्री।या ओष॑धयः॒ सोम॑राज्ञीर्ब॒ह्वीः श॒तवि॑चक्षणाः ।बृह॒स्पति॑प्रसूता॒स्ता नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

cikitsā| 1-3 bhṛgvaṅgirāḥ| vanaspatiḥ, 3 somaḥ| anuṣṭup, 3 tripādvirāṇnāma gāyatrī| yā oṣadhayaḥ somarājñīrbahvīḥ śatavicakṣaṇāḥ | bṛhaspatiprasūtāstā no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

शत्र सेना के उत्कृष्ट अधिकारियों को । १ संदयामि) मे सेनाध्यक्ष बान्धता हु, ( अवमान्) नीचे के ध, १८२ अथवेवेद-भाष्य कां० ६। अनु° ११। सू० १०४ से मुक्त कर सक्ता है । पयेहाः =परि (पूर्णतया) +भ (अट् लुडि) +-हा अमी ये युधंमायरिति केतन कृत्वान कत्रः । (ममी) वे (ये) जो (केतुन् कृत्वा) षण्डे लेकर, (अनोकशः) संघूप । 8170178 वारा (अमित्रान्) शत्रुओं को (आ दचुामसि) हम विजेता बन्ध रेते हैँ । (च) भौर (एषाम्) इन अमिश्रं के (ये) जो

English

Thou fain for glory, an imperial ruler, hast won dominion over men, O Indra, Of these celestial tribes be thou the sovran: long-lasting be thy sway and undecaying!

अध्याय ६

श्लोक 96.2

मु॒ञ्चन्तु॑ मा शप॒थ्या॒३दथो॑ वरु॒ण्याऽदु॒त।अथो॑ य॒मस्य॒ पड्वी॑शाद् विश्व॑स्माद् देवकिल्बि॒षात्

muñcantu mā śapathyā3datho varuṇyā'duta| atho yamasya paḍvīśād viśvasmād devakilbiṣāt

हिन्दी अर्थ

(समच्छिदन्) हमने काट दिया है गले काट कर उनके ए्वास-परश्वासों युदधस्थल में शतुभो को पकड़ कर उन के सामथिकं बन्धन कर दिये हे । अघुना =लक्षणा द्वारा असुना का अर्थ है अमुमता, प्राणवेता, बलवता १, बन्धीकृत कर धिया है, जेल मे बन्द कर दिया है ।

English

Thou governest the north and eastern regions, Indra! fiend- slayer! thou destroycst foemen. Thou hast won all, far as the rivers wander. Bull, called to help, on our right hand thou goest. A prayer for protection in battle

अध्याय ६

श्लोक 96.3

यच्चक्षु॑षा॒ मन॑सा॒ यच्च॑ वा॒चोपा॑रि॒म जाग्र॑तो॒ यत् स्व॒पन्तः॑ ।सोम॒स्तानि॑ स्व॒धया॑ नः पुनातु

yaccakṣuṣā manasā yacca vācopārima jāgrato yat svapantaḥ | somastāni svadhayā naḥ punātu

हिन्दी अर्थ

। कां० ६ । अनु० १९१। सू० १०५ अथवेवेद-भाष्य १८३ इ््यादानंपकरं तपसेन्द्रंण संचितम् । इदम्) इस (आदानम्) आदान-पाश अर्थात् शतु को पकड़े के यह आदान-पाश है जाल । यथा, अथव ० ८।८।५।८,१२; १०।१।३०)। होकर, इसी प्रकार (सोमः) सेनाध्यक्ष (च) भौर (राजा) राष्टूपति वरुण नामक राजा भी (मेदिनो) स्नेही होकर, (एनान्) इन शतुभों को

English

Indra, before affliction comes, I call thee from the wide expanse. The mighty guardian, born alone, wearer of many names, I call.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Atharva Veda — Chapter 6
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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