दृश्य, गति और थीम की सेटिंग(इस डिवाइस पर सहेजी जाती हैं)
दृश्य मोड
गति
थीम

आपके डिवाइस की “कम गति” सेटिंग हमेशा मानी जाती है। “केवल पाठ” मोड में कोई सजावटी चित्र या गति नहीं रहती।

ब

27 पद-समूह।

बन्धः
बन्धः आसीत्
बन्धः क्व
बन्धः मोक्षः
बन्धनिर्मुक्तः
बन्धमुक्तः
बन्धमोक्षे च नैराश्ये
  • तथा बंधन और मोक्ष दोनों की कल्पनाओं से पूर्णतः उदासीन (निराश) हो जाने पर (श्लोक 14.3)
बन्धमोक्षौ
बहिः यत्नात् निर्विकल्पः
  • वह बाहर से तो यत्नपूर्वक ध्यानस्थ और निर्विकल्प बनता है (श्लोक 18.76)
बहिः स्वच्छन्द-चारिणः
  • और बाहर से लोक-दिखावे के आडंबरों से मुक्त, स्वाभाविक विचरण करने वाले (श्लोक 14.4)
बालवत् किम् अभ्यस्यति
  • बालकों के समान व्यर्थ का अभ्यास क्यों करेगा? (श्लोक 18.7)
बालवत् चरेत्
  • एक बालक के समान सहज विचरण करता है (श्लोक 18.64)
बालिशः अपि न भवेत्
  • किंतु जो वास्तव में अज्ञानी (मूर्ख) नहीं होता (श्लोक 18.26)
बाह्यम् अन्तरम् भावम्
बुद्धि-पर्यन्त-संसारे
  • बुद्धि तक फैला हुआ यह सारा संसार (श्लोक 18.73)
बुधः केवलः रमते
  • वह ज्ञानी अपने अकेले (अद्वैत) आत्मस्वरूप में ही सदा रमण करता है (श्लोक 18.87)
बुधः शोभते
  • किंतु यह जानने वाला ज्ञानी सुशोभित होता है (श्लोक 18.73)
बुधैः कृतः मूल-च्छेदः
  • किंतु ज्ञानियों द्वारा जड़ से काट दिया गया है (श्लोक 18.38)
बुभुक्षुः दृश्यते
  • सांसारिक सुखों को भोगने की इच्छा रखने वाले (बुभुक्षु) दिखाई देते हैं (श्लोक 17.5)
बुभुक्षुभिः
  • सांसारिक भोगों और प्रतिष्ठा की इच्छा रखने वालों द्वारा (श्लोक 15.3)
बोधः
बोधः अहम्
बोधमात्रः
बोधम्
बोधात्मा निर्विकारः असि
  • ज्ञानस्वरूप और विकार-रहित आत्मा हो (श्लोक 15.5)
ब्रुवन् अपि च न ब्रूते
  • और बोलता हुआ भी (वक्ता के अहंकार से) नहीं बोलता (श्लोक 18.90)
ब्रूहि