दृश्य, गति और थीम की सेटिंग
ब
- बन्धः
- बंधन
- बंधन है
- बन्धन
- बन्धः आसीत्
- बंधन था
- बन्धः क्व
- बंधन कहाँ है?
- बन्धः मोक्षः
- बन्धन और मोक्ष
- बन्धनिर्मुक्तः
- बंध से छूटा हुआ
- बन्धमुक्तः
- बन्धन से मुक्त
- बन्धमोक्षे च नैराश्ये
- तथा बंधन और मोक्ष दोनों की कल्पनाओं से पूर्णतः उदासीन (निराश) हो जाने पर
- बन्धमोक्षौ
- बंधन और मोक्ष
- बहिः यत्नात् निर्विकल्पः
- वह बाहर से तो यत्नपूर्वक ध्यानस्थ और निर्विकल्प बनता है
- बहिः स्वच्छन्द-चारिणः
- और बाहर से लोक-दिखावे के आडंबरों से मुक्त, स्वाभाविक विचरण करने वाले
- बालवत् किम् अभ्यस्यति
- बालकों के समान व्यर्थ का अभ्यास क्यों करेगा?
- बालवत् चरेत्
- एक बालक के समान सहज विचरण करता है
- बालिशः अपि न भवेत्
- किंतु जो वास्तव में अज्ञानी (मूर्ख) नहीं होता
- बाह्यम् अन्तरम् भावम्
- बाहरी और भीतरी भाव
- बुद्धि-पर्यन्त-संसारे
- बुद्धि तक फैला हुआ यह सारा संसार
- बुधः केवलः रमते
- वह ज्ञानी अपने अकेले (अद्वैत) आत्मस्वरूप में ही सदा रमण करता है
- बुधः शोभते
- किंतु यह जानने वाला ज्ञानी सुशोभित होता है
- बुधैः कृतः मूल-च्छेदः
- किंतु ज्ञानियों द्वारा जड़ से काट दिया गया है
- बुभुक्षुः दृश्यते
- सांसारिक सुखों को भोगने की इच्छा रखने वाले (बुभुक्षु) दिखाई देते हैं
- बुभुक्षुभिः
- सांसारिक भोगों और प्रतिष्ठा की इच्छा रखने वालों द्वारा
- बोधः
- बोध-रूप चेतना
- बोध-रूप, ज्ञान-स्वरूप
- बोधः अहम्
- मैं तो केवल शुद्ध चैतन्य (ज्ञान-स्वरूप) हूँ
- मैं बोध-रूप हूँ
- बोधमात्रः
- केवल बोध-रूप
- बोधम्
- बोध-रूप
- बोधात्मा निर्विकारः असि
- ज्ञानस्वरूप और विकार-रहित आत्मा हो
- ब्रुवन् अपि च न ब्रूते
- और बोलता हुआ भी (वक्ता के अहंकार से) नहीं बोलता
- ब्रूहि
- कहिए