दृश्य, गति और थीम की सेटिंग
आ
- आकाशवत् अनन्तः अहम्
- मैं आकाश की तरह अनन्त हूँ
- आकाशस्य इव धीरस्य
- आकाश के समान व्यापक और निर्लेप धीर ज्ञानी के लिए
- आकाशस्य धूमेन
- आकाश का धुएँ से
- आचक्ष्व वा शृणु
- व्याख्यान करो अथवा दूसरों से सुनो
- आचारम् अनाचारम्
- धार्मिक आचार (विधि), अनाचार (निषेध)
- आजीवम् अपि जिज्ञासुः
- जीवन भर निरंतर जिज्ञासा और अध्ययन करते हुए भी
- आत्म-विश्रान्ति-तृप्तेन
- अपनी ही आत्मा में विश्राम पाकर तृप्त हुए
- आत्मज्ञस्य धीरस्य
- आत्मज्ञानी धीर पुरुष का
- आत्मज्ञानतृप्तस्य
- आत्मज्ञान से तृप्त का
- आत्मज्ञानात्
- आत्मा के ज्ञान से
- आत्मतन्मात्रम्
- केवल आत्म-सत्ता
- आत्मनः पदम्
- आत्मा का वास्तविक पद (स्वरूप)
- आत्मा एव इदम् सर्वम् जगत्
- यह सारा जगत् आत्मा ही है
- आत्मा न गन्ता न आगन्ता
- किंतु आत्मा न कहीं जाने वाली है और न कहीं आने वाली
- आत्मा ब्रह्म इति निश्चित्य
- 'मेरी आत्मा ही साक्षात परब्रह्म है’ ऐसा दृढ़ निश्चय करके
- आत्मा सनातनः मुक्तः
- और आत्मा नित्य सनातन-मुक्त है
- आत्माज्ञानात्
- आत्मा के अज्ञान से
- आत्मानम् अद्वयम्
- अद्वैत आत्मा को
- आत्मानम् न दिदृक्षति
- और न आत्मा को अलग से देखने की इच्छा करता है
- आत्मारामस्य धीरस्य
- अपने ही आत्मस्वरूप में रमण करने वाले धैर्यवान पुरुष को
- आदर्शमध्यस्थे रूपे
- दर्पण के भीतर दिखने वाले प्रतिबिम्ब में
- आनन्द-विग्रहे स्वात्मनि
- आनंदस्वरूप अपनी ही आत्मा में
- आनन्दपरमानन्दः
- आनन्द और परम आनन्द-रूप
- आपदः सम्पदः
- कष्ट (विपत्तियाँ) और सुख (सम्पत्तियाँ)
- आब्रह्मस्तम्बपर्यन्तम्
- ब्रह्मा से लेकर घास के तिनके तक सम्पूर्ण सृष्टि में
- आब्रह्मस्तम्बपर्यन्ते
- ब्रह्मा से लेकर तृण (चींटी) तक
- आभासः अहम्
- ‘मैं आभास हूँ’ (यह भाव)
- आभासः च क्व
- और संसार का आभास कहाँ है?
- आयासात् सकलः दुःखी
- सतत प्रयत्न और मानसिक तनाव के कारण ही सारा संसार दुखी है
- आर्जव
- सरलता, सीधापन
- आलम्बम् अन्तरेण न विद्यते
- किसी सहारे (आलंबन) के बिना ठहर नहीं सकती
- आशानैराश्ययोः समः
- आशा और निराशा में सम
- आश्रमानाश्रमम्
- आश्रम और अनाश्रम के नियम
- आश्रमी
- आश्रम (जीवन-चरण) वाला
- आश्रित्य
- आश्रय लेकर
- आस्थितः परमाद्वैतम्
- परम अद्वैत का आश्रय लिए हुए