दृश्य, गति और थीम की सेटिंग
ध
- धन्यः
- ऐसा ज्ञानी पुरुष वास्तव में धन्य है
- धन्यः निर्वृतिम् प्राप्नोति
- कोई भाग्यशाली साधक ही परम विश्रांति (शांति) को प्राप्त करता है
- धन्यः यथा-सुखम् आस्ते
- वह धन्य पुरुष परम आनंद और सुख से रहता है
- धन्यः विज्ञान-मात्रेण
- किंतु धन्य ज्ञानी केवल बोध (विज्ञान) मात्र से ही
- धर्म-अर्थ-काम-मोक्षेषु
- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—इन चारों पुरुषार्थों के प्रति
- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—चारों पुरुषार्थों में
- धर्माधर्मौ
- धर्म और अधर्म
- धीमान् बालवत्
- इसलिए बुद्धिमान पुरुष छोटे बालक के समान
- धीरः
- धैर्यवान् ज्ञानी
- धीरः अनिच्छन् अपि हि
- किंतु ज्ञानी बिना किसी इच्छा के भी
- धीरः तत्त्वम् विनिश्चित्य
- किंतु ज्ञानी आत्मतत्त्व का दृढ़ निश्चय करके
- धीरः पदे पदे तृप्तः
- वह धीर ज्ञानी हर कदम और हर अवस्था में अपनी आत्मा में पूर्ण तृप्त रहता है
- धीरः शोभते
- धीर ज्ञानी परम सुशोभित होता है
- धीरः संसारम् न द्वेष्टि
- धीर ज्ञानी न तो संसार से द्वेष (घृणा) करता है
- धीरः हि
- धैर्यवान तत्त्वज्ञानी पुरुष
- धीरधीः
- धीर बुद्धि वाला
- धीरस्य अकृतिका स्थितिः
- धीर ज्ञानी की स्वाभाविक और निष्कपट आंतरिक स्थिति
- धीरस्य चित्तम्
- क्योंकि उस धैर्यवान ज्ञानी का चित्त
- धीरस्य प्रवृत्तिः अपि
- किंतु ज्ञानी का बाह्य कर्म (प्रवृत्ति) भी
- धीरस्य सर्वत्र तुष्टिः
- धीर ज्ञानी की सब जगह पूर्ण संतुष्टि (तृप्ति) रहती है
- धीरस्य हृदि
- धीर ज्ञानी के हृदय में
- धीराः कृत्यम् न पश्यन्ति
- किंतु धैर्यवान ज्ञानी अपने लिए कोई कर्तव्य नहीं देखते
- धीराः तम् तम् न पश्यन्ति
- ज्ञानी लोग इन अलग-अलग दृश्य पदार्थों को नहीं देखते
- धृतम्
- धारण किया गया
- धैर्यम् क्व
- धैर्य कहाँ?
- ध्यानम्
- ध्यान की विशेष विधियाँ