दृश्य, गति और थीम की सेटिंग
भ
- भगवान्
- समस्त ऐश्वर्य और दिव्यता से संपन्न
- भयम्
- भय
- भव-अम्भोधौ
- इस संसार रूपी सागर में
- भवतः विश्वम्
- तुझसे संसार
- भवान्
- आप, तुम
- भवान् कर्ता न वा भोक्ता
- तुम न तो कर्ता हो और न ही भोक्ता हो
- भवासंसक्तिमात्रेण
- संसार में असंग होने मात्र से
- भाति
- भासता है, प्रतीत होता है
- भाव-अभाव-विभाविनाम्
- भाव (होने) और अभाव (न होने) को जानने वाली आत्मा के
- भावना-अभावना-सक्ता
- किसी वस्तु के होने (भाव) अथवा न होने (अभाव) में आसक्त रहती है
- भावाभावविकारः च
- उत्पत्ति और विनाश आदि समस्त विकार
- भावेषु
- संसार के समस्त पदार्थों और घटनाओं में
- भावेषु शोभना-अशोभना
- सांसारिक पदार्थों में ‘यह अच्छा है और यह बुरा है’ के भेद से
- भाव्य-भावनया
- चिंतनीय वस्तु और चिंतन की प्रक्रिया के पार होकर
- भिक्षुः वा भूपतिः वा अपि
- चाहे वह भिखारी हो अथवा कोई राजा (सम्राट) हो
- भुवनकल्लोलैः
- जगत्-रूपी तरंगों के साथ
- भूतमात्रान् यथार्थतः
- वास्तव में केवल भूत-मात्र
- भूतविकारान्
- भूतों के विकार (देह, इन्द्रिय आदि)
- भूरिशः आलोक्य
- अनेक बार प्रत्यक्ष देखकर
- भृत्यैः पुत्रैः कलत्रैः च
- सेवकों, पुत्रों और स्त्रियों द्वारा
- भेषजम्
- औषधि
- भोक्ता
- भोगने वाला
- भोग-मोक्ष-निराकाङ्क्षी
- किंतु भोग और मोक्ष दोनों की आकांक्षा से रहित
- वह न भोग की इच्छा रखता है और न मोक्ष की
- भोगः
- भोग, अनुभव
- भोगम् कर्म समाधिम् वा कुरु
- तुम चाहे भोग भोगो, कर्म करो या समाधि लगाओ
- भोगेषु भुक्तेषु
- प्रारब्धवश सामने आए भोगों को भोग लेने पर भी
- भोज्यमानः
- भोगता हुआ
- भ्रमं मुक्त्वा
- भ्रम को छोड़कर
- भ्रमात्
- भ्रम के कारण
- भ्रान्तस्य इव
- संसारी लोगों को किसी मतवाले या उन्मत्त की भाँति प्रतीत होने वाले ज्ञानी की
- भ्रान्तिः
- भ्रम