दृश्य, गति और थीम की सेटिंग
श
- शक्राद्याः सर्वदेवताः
- इन्द्र आदि सब देवता
- शब्दादेः प्रीत्यभावेन
- शब्द, स्पर्श, रूप आदि बाह्य विषयों में आसक्ति न रहने से
- शम-हेतुकम् च वा क्व
- और मन को शांत करने के साधन (शमहेतु) कहाँ हैं?
- शमम् गतः
- भीतर से परम शांति को प्राप्त रहता है
- शयनेन वा
- अथवा सोने से
- शरीराणि सुखानि च
- शरीर और सुख
- शर्करा
- शक्कर
- शान्त-धीः
- शांत बुद्धि वाला ज्ञानी पुरुष
- शान्तः
- प्रशांत
- वह परम शांत पुरुष
- शान्त, विकार-रहित
- शान्ता निराश्रया
- शान्त हुआ, आधार-रहित
- शान्ताय तेजसे नमः
- परम शान्त और तेजोमय आत्मतत्त्व को नमस्कार है
- शीतल-अच्छतर-आत्मनः
- जिसका अंतःकरण परम शीतल और अत्यंत निर्मल (स्वच्छ) है
- शीतलम् अमृतेन एव पूरितम्
- आत्म-शांति रूपी अमृत से परिपूर्ण होकर सदा शीतल रहता है
- शीतलाशयः
- शांति और मुक्ति का स्थान, शीतल मन वाला
- शुक्तेः अज्ञानतः
- सीप के अज्ञान से
- शुचिः
- परम पवित्र
- शुद्ध-बुद्धिः निराकुलः
- जिसकी बुद्धि परम शुद्ध और व्याकुलता-रहित हो गई है
- शुद्ध-बोधस्य
- विशुद्ध ज्ञानस्वरूप आत्मा के लिए
- शुद्ध-रूपिणा मया न
- मुझ विशुद्ध चैतन्यस्वरूप आत्मा द्वारा नहीं
- शुद्ध-स्फुरण-रूपस्य विदुषः
- विशुद्ध चैतन्य प्रकाश रूप ज्ञानी के लिए
- शुद्धः
- तू शुद्ध है
- शुद्धचैतन्यम्
- शुद्ध चैतन्य
- शुद्धबुद्धस्वरूपः
- शुद्ध चैतन्य-स्वरूप
- शुद्धम् अद्वयम् आत्मानम्
- कि आत्मा शुद्ध और अद्वैत है
- शुद्धम् बुद्धम् प्रियम् पूर्णम्
- जो सर्वथा शुद्ध, ज्ञानस्वरूप, परमानंदप्रद और परिपूर्ण है
- शुभ-अशुभे विहाय
- शुभ और अशुभ (अनुकूल-प्रतिकूल) के आग्रह को विदा कर
- शुभम् वा अपि अशुभम् वा अपि
- चाहे वह सांसारिक दृष्टि से शुभ हो या अशुभ
- शून्य-आकाराः निराकाराः
- क्योंकि वे अहंकार-शून्य, देहाकार-रहित
- शून्य-चित्तः
- समस्त वासनाओं और विकल्पों से शून्य चित्त वाला ज्ञानी
- शोचति
- शोक करता है
- शोभते
- परम शोभा पाता है
- श्रद्धस्व श्रद्धस्व
- श्रद्धा करो, पूर्ण विश्वास करो
- श्रुत्वा अपि
- सुनकर भी
- श्रोत्रियम् देवताम् तीर्थम्
- वेदज्ञ ब्राह्मण, देवता, पवित्र तीर्थ